LATEST NEWS

फाजिल्का में भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के जरिए भेजा गया आईईडी बम बरामद हुआ

फाजिल्का फाजिल्का में भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के जरिए भेजा गया आईईडी बम बरामद हुआ है। आरडीएक्स से भरी इस खेप में बम के साथ बैटरियां और टाइमर भी हैं। बम जब बीएसएफ को मिला तो उसे बरामद करने के बाद स्टेट स्पेशल सेल को सौंप दिया गया है। इसके बाद वे मामले की जांच कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार फाजिल्का के अबोहर सेक्टर के भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र बहादुर के पास ड्रोन की मूवमेंट देखी गई। इसकी जानकारी बीएसएफ को मिली तो बीएसएफ ने इलाके की तलाशी ली। तलाशी के दौरान इलाके से एक आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बम बरामद हुआ है। टिन के डिब्बे में मिला एक किलो आरडीएक्स दरअसल एक टिन का डिब्बा मिला है जिसमें करीब एक किलो आरडीएक्स भरा हुआ है। जिसके साथ बैटरियां और टाइमर भी हैं। बीएसएफ द्वारा इसकी बरामदगी के बाद इसे फाजिल्का के स्टेट स्पेशल सेल थाने को सौंप दिया गया है। वे मामले की आगे की जांच कर रहे हैं कि आखिर यह बम पाकिस्तान से भारत क्यों भेजा गया था। पहले भी बरामद हो चुके हैं टिफिन बम उल्लेखनीय है कि इससे पहले फिरोजपुर के गांव चांदीवाला से टिफिन बम और जलालाबाद के सीमावर्ती गांव से टिफिन बम पकड़े जा चुके हैं।  जलालाबाद में टिफिन बम से सब्जी मंडी में विस्फोट भी किया गया था लेकिन वह विस्फोट सफल न हो सका और बम रखने वाला ही जान गंवा बैठा था। फिरोजपुर के गोबर मंडी में भी टिफिन बम से विस्फोट किया गया था लेकिन इसमें कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ था

‘वक्फ की जमीन पर बनी है संसद’, बदरुद्दीन अजमल बोले- बिना वक्फ की जमीन को खाली कराए इस्तेमाल करना गलत

नई दिल्ली पूर्व सांसद बदरुद्दीन अजमल ने वक्फ से संबंधित नए विधेयक का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि देश भर में वक्फ संपत्तियों को लेकर जो चर्चाएँ हो रही हैं, उनमें दिल्ली की प्रमुख जगहों पर स्थित इमारतों और क्षेत्रों को भी शामिल किया जा रहा है। अजमल का दावा है कि संसद भवन, उसके आसपास का क्षेत्र, और वसंत विहार से लेकर एयरपोर्ट तक का इलाका वक्फ की संपत्ति पर स्थित है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग यह मानते हैं कि दिल्ली का एयरपोर्ट भी वक्फ की जमीन पर बनाया गया है। इस तरह के बयान से वक्फ संपत्तियों को लेकर चल रही चर्चाओं में और अधिक विवाद जुड़ गया है। वक्फ की संपत्तियों का उपयोग आमतौर पर धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए होता है, और इन संपत्तियों के स्वामित्व के सवाल अक्सर जटिल कानूनी और राजनीतिक विवादों का विषय बनते हैं। अजमल के इस बयान से यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो सकता है, और सरकार की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, खासकर अगर इसे संसद में चर्चा का विषय बनाया जाता है।उन्होंने आगे कहा, “बिना अनुमति के वक्फ की जमीन का इस्तेमाल करना गलत है। वक्फ बोर्ड के इस मुद्दे पर वे (मोदी सरकार) बहुत जल्द अपनी सरकार खो देंगे।” इस बीच, विपक्षी सांसदों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक के दौरान संसदीय आचार संहिता के घोर उल्लंघन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। पूर्व सांसद अजमल ने वक्फ बिल का विरोध किया है और कहा, “इस बारे में आवाजें उठ रही हैं और दुनिया भर में वक्फ संपत्तियों की सूची सामने आ रही है। संसद भवन, उसके आसपास के इलाके और वसंत विहार से लेकर एयरपोर्ट तक का पूरा इलाका वक्फ की संपत्ति पर बना है। लोगों का यह भी कहना है कि एयरपोर्ट वक्फ की संपत्ति पर बना है।” उन्होंने आगे कहा, “बिना अनुमति के वक्फ की जमीन का इस्तेमाल करना गलत है। वक्फ बोर्ड के इस मुद्दे पर वे (मोदी सरकार) बहुत जल्द अपनी सरकार खो देंगे।” इस बीच, विपक्षी सांसदों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक के दौरान संसदीय आचार संहिता के घोर उल्लंघन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। इस पत्र में विपक्षी सांसदों ने 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित JPC की बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल द्वारा संसदीय आचार संहिता और प्रक्रिया के नियमों के कई उल्लंघनों का आरोप लगाया है। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में विपक्षी सांसदों ने कहा, “समिति की कार्यवाही अध्यक्ष जगदंबिका पाल द्वारा पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित की गई। अध्यक्ष द्वारा अनवर मणिप्पाडी को समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए दिया गया निमंत्रण समिति के दायरे और अधिकार क्षेत्र में नहीं है।” विपक्षी सांसदों ने यह भी दावा किया कि “कर्नाटक वक्फ घोटाला रिपोर्ट 2012 पर आधारित वक्फ विधेयक 2012 पर प्रस्तुति” शीर्षक वाले नोट में वक्फ विधेयक पर कोई टिप्पणी नहीं थी, बल्कि इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ केवल राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप थे। विपक्षी सांसदों ने 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक के दौरान अध्यक्ष जगदंबिका पाल पर संसदीय आचार संहिता और प्रक्रिया के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि जगदंबिका पाल ने समिति की कार्यवाही को पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित किया। विशेष रूप से, विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई है कि अध्यक्ष ने अनवर मणिप्पाडी को समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया, जो उनके अनुसार समिति के दायरे और अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि समिति की कार्यवाही निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, और विपक्षी सांसदों का आरोप है कि इस बैठक में ऐसा नहीं हुआ। संसदीय समितियों में इस प्रकार के आरोप गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि ये समितियाँ महत्वपूर्ण नीतिगत और विधायी मामलों पर विचार करती हैं। ऐसे मामलों में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उन्हें इन आरोपों का मूल्यांकन करना होता है और यह सुनिश्चित करना होता है कि संसदीय प्रक्रियाओं का पालन हो। विपक्षी सांसदों ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि जिस नोट का शीर्षक “कर्नाटक वक्फ घोटाला रिपोर्ट 2012 पर आधारित वक्फ विधेयक 2012 पर प्रस्तुति” था, उसमें वक्फ विधेयक पर कोई ठोस टिप्पणी या विश्लेषण नहीं था। इसके बजाय, उन्होंने दावा किया कि उस नोट में कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख नेताओं, विशेष रूप से मल्लिकार्जुन खड़गे, के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप लगाए गए थे। सांसदों का कहना है कि इस प्रस्तुति का असल उद्देश्य वक्फ विधेयक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था, लेकिन इसके बजाय इसे राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल किया गया। विपक्षी नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मुद्दों पर निष्पक्ष और तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ के लिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जाना चाहिए।  

शेख हसीना ने बांग्लादेश से हेलिकॉप्टर पर सवार होकर देश छोड़ा था, अब गिरफ्तारी वॉरंट हुआ जारी

ढाका बांग्लादेश में तख्तापलट और खूनी हिंसा के बाद देश छोड़कर निकलीं शेख हसीना के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार देश की एक अदालत ने उन पर मानवता के खिलाफ अपराध किए जाने के आरोपों में गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया है। शेख हसीना ने बांग्लादेश से हेलिकॉप्टर पर सवार होकर देश छोड़ा था और दिल्ली के पास स्थित हिंडन एयरबेस पर उतरी थीं। उसके बाद से वह भारत में ही रह रही हैं, लेकिन उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। शेख हसीना के खिलाफ अदालत में अर्जी डालने वाले वकील मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने कहा कि यह यादगार दिन है। वहीं बांग्लादेश में आंदोलन के दौरान मारे गए सैकड़ों लोगों में से एक के परिजनों ने कहा कि यह अच्छी खबर है। हम उम्मीद करते हैं कि अब शेख हसीना के खिलाफ ट्रायल आगे बढ़ेगा और हमें न्याय मिलेगा। शेख हसीना बीते 15 सालों से बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज थीं। उन पर आरोप है कि पीएम रहते हुए उनके शासनकाल में बड़े पैमाने पर लोगों की गिरफ्तारी हुई। इसके अलावा राजनीतिक विरोधियों को चुन-चुनकर मार डाला गया। बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल के मुख्य अधिवक्ता ताजुल इस्लाम ने कहा कि शेख हसीना को 18 नवंबर को अदालत ने पेश करने का आदेश दिया है। इस्लाम ने कहा, ‘शेख हसीना उन लोगों का नेतृत्व कर रही थीं, जिन्होंने देश में जुलाई से अगस्त तक हिंसा फैलाई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।’ अदालत ने शेख हसीना के अलावा उनकी पार्टी अवामी लीग के महासचिव कायदुल कादर को भी अरेस्ट करने को कहा है। इन दोनों नेताओं के अलावा 44 अन्य के लिए भी गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया गया है। इन 44 लोगों के नाम जारी नहीं किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 6A को वैध करार दिया, नागरिकता कानून पर सरकार की बड़ी जीत

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6A की वैधता पर अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने धारा 6A की वैधता को बरकरार रखा है. CJI डीवाई चंद्रचूड़ का कहना था कि 6A उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते हैं और ठोस प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते हैं. दरअसल, सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6A को 1985 में असम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए संशोधन के बाद जोड़ा गया था. असम समझौते के तहत भारत आने वाले लोगों की नागरिकता के लिए एक विशेष प्रावधान के रूप में नागरिकता अधिनियम में धारा 6ए जोड़ी गई थी. इस धारा में कहा गया है कि जो लोग 1985 में बांग्लादेश समेत क्षेत्रों से 1 जनवरी 1966 या उसके बाद लेकिन 25 मार्च 1971 से पहले असम आए हैं और तब से वहां रह रहे हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए धारा 18 के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस प्रावधान ने असम में बांग्लादेशी प्रवासियों को नागरिकता देने की अंतिम तारीख 25 मार्च 1971 तय कर दी. इससे पहले दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे दायर किया था और कहा था कि वो भारत में अवैध प्रवास की सीमा के बारे में सटीक डेटा नहीं दे पाएगा क्योंकि प्रवासी चोरी-छिपे आए हैं. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा, 6ए उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो जुलाई 1949 के बाद प्रवासित हुए, लेकिन नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, S6A उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो 1 जनवरी 1966 से पहले प्रवासित हुए थे. इस प्रकार यह उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो अनुच्छेद 6 और 7 के अंतर्गत नहीं आते हैं. SC ने गुरुवार को नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6ए की वैधता बरकरार रखी और 4:1 के बहुमत से फैसला दिया. जस्टिस जे पारदीवाला ने असहमति जताई. जस्टिस पारदीवाला का कहना था कि यह संभावित प्रभाव से असंवैधानिक है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुंदरेश और मनोज मिश्रा बहुमत में रुख रहा. नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6ए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इन याचिकाओं पर SC की पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई की और फैसला सुनाया. कोर्ट का कहना था कि असम में 40 लाख प्रवासियों का प्रभाव पश्चिम बंगाल में जनसंख्या के कारण 56 लाख प्रवासियों के प्रभाव से ज्यादा है. असम को अलग करना वैध है. 1971 की कटऑफ तिथि तर्कसंगत विचार पर आधारित है. ऑपरेशन सर्चलाइट के बाद पूर्वी पाकिस्तान से पलायन बढ़ा है. कोर्ट ने कहा, 6A (3) का उद्देश्य दीर्घकालिक समाधान प्रदान करना है. असम समझौता वहां के निवासियों के अधिकारों को कमजोर करना था. बांग्लादेश और असम समझौते के बाद प्रावधान का उद्देश्य भारतीय नीति के संदर्भ में समझा जाना चाहिए. इसे हटाने से वास्तविक कारणों की अनदेखी होगी. भारत में नागरिकता प्रदान करने के लिए पंजीकरण व्यवस्था जरूरी नहीं है. S 6A को सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह पंजीकरण व्यवस्था का अनुपालन नहीं करता है. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि संसद बाद की नागरिकता के लिए शर्तें निर्धारित करने के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित करने में सक्षम है. जस्टिस सूर्यकान्त ने कहा, संविधान और उदाहरणों को पढ़ने से पता चलता है कि बंधुत्व के लिए सभी पृष्ठभूमि के लोगों से अपेक्षा की जाती है कि जियो और जीने दो. भाईचारे का चयनात्मक आवेदन संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि 6A असंवैधानिक है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 6 और 7 की तुलना में नागरिकता के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित करता है. अलग-अलग तारीख निर्धारित करने की संसद की क्षमता संविधान में है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रत्येक नागरिक को अनिवार्य रूप से भारत के कानून और संविधान का पालन करना होगा. नागरिकता प्रदान करने से पहले निष्ठा की शपथ का स्पष्ट अभाव कानून का उल्लंघन नहीं है. कोर्ट ने कहा, हम हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं. S6A स्थायी रूप से संचालित नहीं होता है. 1971 के बाद प्रवेश करने वालों को नागरिकता प्रदान नहीं करता है. SC ने कहा, 1 जनवरी 1966 और 24 मार्च 1971 के बीच आए प्रवासियों के लिए नागरिकता नियम कानून के साथ सामंजस्यपूर्ण भूमिका के लिए बनाए गए थे. S6A उन लोगों के निर्वासन की अनुमति देता है जो कट ऑफ तिथि के बाद अवैध रूप से प्रवेश करते हैं. यह नहीं कह सकते कि आप्रवासन ने असम के नागरिकों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया है. याचिकाकर्ता किसी भी अधिकार का उल्लंघन साबित करने में विफल रहे हैं. कोर्ट ने कहा, S6A को यह कहने के लिए प्रतिबंधात्मक तरीके से समझने की जरूरत नहीं है कि किसी भी व्यक्ति का पता लगाया जा सकता है और सिर्फ विदेशी अधिनियम के तहत निर्वासित किया जा सकता है. हमें कोई कारण नहीं दिखता कि विदेशियों का पता लगाने के उद्देश्य से IEAA के तहत वैधानिक पहचान का उपयोग 6A के साथ संयोजन में क्यों नहीं किया जा सकता है. IEAA और 6A के बीच कोई विरोध नहीं है. IEAA और धारा 6A को सामंजस्य में पढ़ा जा सकता है.  

बांग्लादेश में मुक्ति संग्राम के नायक मुजीबुर रहमान से जुड़े दिनों पर होने वाली छुट्टियों को रद्द कर दिया

ढाका बांग्लादेश में अगस्त महीने में तख्तापलट हो गया था। इस दौरान खूनखराब हुआ तो तत्कालीन पीएम शेख हसीना ने देश छोड़ दिया था और भारत आ गई थीं। तब से वह यहीं पर निर्वासित जिंदगी जी रही हैं। उनकी सत्ता से बेदखली के बाद नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने कमान संभाल रखी है। वह भले ही अर्थशास्त्री हैं और दुनिया भर में उनका नाम है, लेकिन वह बांग्लादेश को पाकिस्तान के एजेंडे पर आगे बढ़ाते दिख रहे हैं। यही वजह है कि अब बांग्लादेश में मुक्ति संग्राम और उसके नायक मुजीबुर रहमान से जुड़े दिनों पर होने वाली छुट्टियों को रद्द कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इस तरह बांग्लादेश की सरकार का वैचारिक झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ रहा है। वही पाकिस्तान जिससे अलग होकर बांग्लादेश का गठन हुआ था। बांग्ला भाषी लोगों पर अत्याचार, भेदभाव के आरोप तत्कालीन पाकिस्तान सरकार पर लगे थे। इसी के विरोध में आंदोलन भड़का था, जिसे बांग्ला मुक्त संग्राम का नाम मिला था। अंत में 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश अस्तित्व में आया था। इसमें भारत ने भी मदद की थी। मुजीबुर रहमान को उस आंदोलन का नायक माना जाता है। यही वजह थी कि उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर बांग्लादेश में छुट्टी होती रही है। अब बांग्लादेश सरकार ने इन छुट्टियों को रद्द कर दिया है। कुल 8 राष्ट्रीय अवकाशों को मोहम्मद यूनुस सरकार ने रद्द कर दिया है। इनमें 7 मार्च और 15 अगस्त शामिल हैं, जिन्हें मुक्त संग्राम से जोड़ा जाता है। इन छुट्टियों को रद्द करने का फैसला हाल ही में हुई कैबिनेट मीटिंग में लिया गया था। इस संबंध में जल्दी ही नोटिफिकेशन भी जारी किया जाएगा। मोहम्मद यूनुस सरकार के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। खासतौर पर अवामी लीग ने इसकी निंदा की है और कहा कि यह सरकार बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के इतिहास को ही मिटा देना चाहती है। यह अच्छी बात नहीं है।

नायब सैनी फिर हरियाणा के बने मुख्यमंत्री, CM की शपथ ली, बीजेपी ने दिखाया पावर शो

चंडीगढ़ नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर हरियाणा के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है. नायब सिंह सैनी के साथ उनकी कैबिनेट के मंत्रियों ने भी शपथ ली है. नायब सिंह सैनी ने लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है. शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी समेत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे. इस मौके पर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे. नायब सिंह सैनी के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन पंचकूला में किया गया था. अनिल विज ने भी ली कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ नायब सिंह सैनी के शपथ ग्रहण के मौके पर हरियाणा बीजेपी के वरिष्ठ नेता और अंबाला कैंट से विधायक अनिल विज ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली. अनिल विज के बाद कृष्ण लाल पंवार जो इसराना से विधायक हैं शपथ लिया. कृष्णलाल के बाद राव नरवीर सिंह कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लिया. वो बादशाहपुर से एमएलए हैं. इनके बाद महिपाल ढांडा भी शपथ ली. ढांडा पानीपत ग्रामीण से विधायक हैं. विपुल गोयल को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. डॉ. अरविंद शर्मा गोहाना भी कैबिनेट मंत्री बने. वहीं, श्याम सिंह राणा को राज्य मंत्री बनाया गया है. वो रादौर से विधायक हैं. बरवाला से रणवीर सिंह गंगवा को भी राज्यमंत्री बना गया. रणवीर सिंह के बाद कृष्ण बेदी नरवाना राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लिया. श्रुत चौधरी को भी राज्य मंत्री बनाया गया है. आरती राव ने भी राज्यमंत्री का पदभार संभाला है. राजेश नागर और गौरव गौतम को भी राज्य मंत्री बनाया गया है.  पंचकूला में आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अन्य नेता भी शामिल थे। हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने सैनी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। सैनी लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने हैं। इस दौरान सैनी के मंत्रिमंडल के सदस्यों को भी शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बीजपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और केंद्रीय मंत्री मौजूद थे। अनिल विज सहित इन मंत्रियों ने ली शपथ सीएम सैनी के साथ सीनियर बीजेपी नेता अनिल विज ने मंत्री पद की शपथ ली। अनिल विज मनोहर लाल सरकार में गृह मंत्री थे। इसके अलावा कृष्ण लाल पंवार, राव नरबीर सिंह, महिपाल ढांडा, विपुल गोयल, अरविंद शर्मा, श्याम सिंह राणा, रणबीर गंगवा, कृष्ण कुमार बेदी, श्रुति चौधरी, आरती सिंह राव, राजेश नागर (स्वतंत्र प्रभार) और गौरव गौतम (स्वतंत्र प्रभार) ने मंत्री पद की शपथ ली। हरियाणा में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 14 मंत्री हो सकते हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पंचकूला में हुए शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। समारोह से कुछ घंटे पहले सैनी वाल्मीकि भवन गए और उन्होंने पंचकूला स्थित गुरुद्वारे एवं मनसा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा कि बीजेपी की नई सरकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हरियाणा को तीव्र गति से आगे ले जाने की दिशा में काम करेगी। सैनी ने विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर कहा कि हरियाणा की जनता ने मोदी सरकार की नीतियों में विश्वास दिखाया है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि बीजेपी के संकल्प पत्र को पूरी तरह लागू किया जाएगा। हरियाणा में पांच अक्टूबर को हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 90 सदस्यीय विधानसभा में 48 सीट जीतकर राज्य में ऐतिहासिक तीसरा कार्यकाल हासिल किया। वहीं, कांग्रेस ने 37 सीट पर जीत दर्ज की। मार्च में मनोहर लाल खट्टर की जगह हरियाणा के मुख्यमंत्री बने नायब सिंह सैनी राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे। 54 वर्षीय सैनी ने बुधवार (16 अक्टूबर) को दत्तात्रेय से मुलाकात की थी। उन्होंने पंचकूला में पार्टी कार्यालय में आयोजित एक बैठक में सर्वसम्मति से बीजेपी विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया। हरियाणा में लगातार तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ-साथ सैनी दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बीजेपी ने हरियाणा में रचा इतिहास भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा के चुनावी महाभारत में सत्ता विरोधी लहर को लेकर राजनीतिक पंडितों के अनुमानों को धत्ता बताते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और लगातार तीसरी बार जीत हासिल की। पिछले विधानसभा में राज्य में गठबंधन की सरकार चलाने वाली बीजेपी ने इस बार 90 सदस्यीय विधानसभा में अकेले 48 सीटों पर स्पष्ट बहुमत हासिल करके 10 साल बाद सत्ता में वापसी के मुख्य विपक्षी कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेर दिया। कांटे के सीधे मुकाबले में भगवा पार्टी कांग्रेस पर भारी पड़ी और कांग्रेस 37 सीटों तक ही पहुंच पाई है। वर्ष 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 40 और कांग्रेस को 31 सीटें मिली थीं। हरियाणा से महाराष्ट्र और झारखंड के लिए भी दिया मैसेज भारतीय जनता पार्टी ने पंजकूला के दशहरा मैदान में आयोजित नायब सैनी के शपथ ग्रहण समारोह से एक मैसेज देने की कोशिश कर रही थी. बीजेपी के लिए नायब सिंह सैनी का शपथ ग्रहण समारोह एक शक्तिप्रदर्शन की तरह था. इसकी एक सबसे बड़ी वजह आने वाले समय में महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी हैं. बीजेपी इस शपथ ग्रहण समारोह से इन दोनों राज्यों की जनता को संदेश देने की कोशिश करते दिखी कि अगर महाराष्ट्र और झारखंड में भी बीजेपी को मौका मिलता है तो वो जनता के हित में फैसले लेने में जरा भी देरी नहीं करेगी. नायब सिंह सैनी ने पूरा किया अपना वादा नायब सिंह सैनी ने शपथ लेने से पहले 24 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटने का वादा किया था. उन्होंने बुधवार को कहा था कि वह 17 अक्टूबर को शपथ लेने से पहले इन युवाओं को नियुक्ति पत्र देंगे. उसके बाद ही शपथ लेंगे. इस दौरान सैनी ने कहा कि था कि हमने चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश के युवाओं से ये वादा किया था. अब जब हम सत्ता में दोबारा आए हैं तो हम पहले जनता से किया अपना वादा पहले पूरा कर … Read more

संजीव खन्ना देश के 51वें चीफ जस्टिस होंगे, कार्यकाल सिर्फ 6 महीने का, 13 मई को रिटायर होंगे

नई दिल्ली CJI डीवाई चंद्रचूड़ नवंबर में कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। खबर है कि भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने जस्टिस संजीव खन्ना के नाम की सिफारिश की है। खास बात है कि जस्टिस खन्ना सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं। खास बात है कि जस्टिस खन्ना भी मई 2025 में रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने वकील के तौर पर साल 1983 में शुरुआत की थी। अगले CJI केंद्र सरकार को लिखे पत्र में सीजेआई चंद्रचूड़ ने जस्टिस खन्ना को उनका उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश की है। CJI चंद्रचूड़ 13 मई 2016 में पहली बार शीर्ष न्यायालय के जज बने थे। वहीं, जस्टिस खन्ना 18 जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के पहली बार जज बने थे। इससे पहले वह दिल्ली हाईकोर्ट समेत कई ट्रिब्युनल्स में सेवाएं दे चुके हैं। 6 महीने बाद है रिटायरमेंट NALSA यानी नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की लिस्ट में शामिल जस्टिस खन्ना 13 मई 2025 को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अगर वह नवंबर में पद संभालते हैं, तो वह करीब 6 महीने CJI के तौर पर अदालत में सेवाएं देंगे। अगले कौन जस्टिस खन्ना के बाद अगले CJI के तौर पर जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई का नाम चर्चा में है। वह मई 2025 में यह पद संभाल सकते हैं। खास बात है कि देश के दूसरे CJI हो सकते हैं, जो अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। सुप्रीम कोर्ट को पहला दलित CJI जस्टिस केजी बालकृष्ण के रूप में मिला था। वह 11 मई 2010 को रिटायर हो गए थे। जस्टिस गवई भी 6 महीने में होंगे रिटायर खास बात है कि मई में CJI बनने के बाद जस्टिस गवई भी अगले 6 महीने में रिटायर हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 16 मार्च 1985 को कानूनी पेशे की शुरुआत करने वाले जस्टिस गवई 23 नवंबर 2025 को रिटायर होने जा रहे हैं। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि उनके बाद जस्टिस सूर्यकांत यह पद संभाल सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में 14 साल तक जज रहे जस्टिस संजीव खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई की। ग्रेजुएशन के बाद, उन्होंने 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में एक वकील के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया। सुप्रीम कोर्ट जज बनाए जाने से पहले वे दिल्ली हाईकोर्ट में 14 साल तक जज रहे। उन्हें 2019 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया था। सुप्रीम कोर्ट जज बनने पर भी हुआ था विवाद 32 जजों की अनदेखी करके जस्टिस खन्ना को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने पर जमकर विवाद हुआ था। 10 जनवरी 2019 को कॉलेजियम ने उनकी जगह जस्टिस माहेश्वरी और वरिष्ठता में 33वें स्थान पर जस्टिस खन्ना को प्रमोट करने का फैसला किया। इसके बाद सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दस्तखत कर दिए थे। वरीयता को अनदेखा करते हुए CJI बनाने के दो मामले, दोनों इंदिरा सरकार के अप्रैल 1973 में सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर जजों को दरकिनार करते हुए एएन रे को CJI बनाया गया था।1977 में जब जस्टिस रे रिटायर हुए तो जस्टिस एचआर खन्ना सबसे सीनियर थे। लेकिन, उनकी जगह जस्टिस एमएच बेग को चुना गया। इमरजेंसी के दौरान जस्टिस खन्ना ने इंदिरा सरकार के खिलाफ फैसले सुनाए थे, जस्टिस संजीव खन्ना उन्हीं के भतीजे हैं। जस्टिस संजीव खन्ना के पिता जस्टिस देवराज खन्ना भी दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे। उनके चाचा जस्टिस हंसराज खन्ना भी सुप्रीम कोर्ट जज रहे। यह दुर्लभ संयोग था कि जस्टिस संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर अपना पहला दिन उसी कोर्ट रूम से शुरू किया, जहां से उनके चाचा, दिवंगत जस्टिस एचआर. खन्ना रिटायर हुए थे। सेम सेक्स मैरिज केस की सुनवाई से खुद को अलग किया अगस्त 2024 में समलैंगिक विवाह पर 52 रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई होनी थी। लेकिन सुनवाई से ठीक पहले जस्टिस संजीव खन्ना ने खुद को केस से अलग कर लिया था। सूत्रों के मुताबिक जस्टिस खन्ना ने इसके पीछे निजी कारणों का हवाला दिया था। जस्टिस खन्ना के अलग होने से रिव्यू पिटीशंस पर विचार करने के लिए पांच जजों की नई बेंच बनाना जरूरी हो जाएगा। इसके बाद ही इन पर सुनवाई हो सकेगी।

हरियाणा में आज नई सरकार का शपथ ग्रहण, नायब सिंह सैनी लेंगे CM पद की शपथ…

चण्डीगढ़ नायब सिंह सैनी दूसरी बार आज हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के कई दिग्गज नेता इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। सैनी के अलावा कई विधायकों को मंत्री पद की शपथ भी दिलाई जा सकती है। सैनी के सियासी सफर पर एक नजर डालें तो 2009 के विधानसभा चुनाव में नारायण गढ़ सीट पर उनका जमानत जब्त हो गया था। करीब 15 वर्षों के बाद वह हरियाणा की दूसरी बार कमान संभालने जा रहे हैं। नायब सिंह सैनी 54 साल के हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नारायणगढ़ सीट से ही 24,361 के अंतर से जीत हासिल की थी। वह अपने मिलनसार व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। किस्मत ने उन्हें मुख्यमंत्री पद पर बिठा दिया है। वह पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के शिष्य भी हैं। सैनी भाजपा के लिए हरियाणा में एक ओबीसी चेहरा हैं। वह भाजपा के जाट-गैर जाट समीकरण में पूरी तरह से फिट बैठते हैं। इस चुनाव में भाजपा का यह दांव आखिरकार कामयाब रहा। उनके नेतृत्व में 90 में से 48 सीटें जीतकर अभूतपूर्व तीसरी बार सत्ता में वापसी की। खट्टर के करीबी होने के कारण उन्हें 2014-19 के खट्टर के कार्यकाल में राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में सैनी ने कुरुक्षेत्र सीट पर भारी अंतर से जीत हासिल कर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। सैनी को 27 अक्टूबर 2023 को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने भाजपा के जाट चेहरा ओम प्रकाश धनखड़ की जगह ली थी। हरियाणा के अंबाला के पास एक गांव मिजापुर माजरा में 25 जनवरी, 1970 को सैनी का जन्म हुआ था। उन्होंने 1996 में आरएसएस के प्रचारक से राजनेता बने खट्टर के नीचे अपनी राजनीति शुरू की। उन्हें 2002 में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का अंबाला जिला सचिव नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें अंबाला जिला अध्यक् बनाया गया। आरएसएस से जुड़े नायब सिंह की संपत्ति करोड़ों में है। उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा चुनाव आयोग में जमा कराए गए हलफनामे में दिया था। मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी चल और अचल संपत्ति क्रमशः 72.68 लाख रुपये और 4.85 करोड़ रुपये घोषित की थी। नायब सिंह सैनी के नामांकन पत्र के अनुसार, सैनी के पास 1.75 लाख रुपये नकद हैं, जबकि उनकी पत्नी के पास 1.40 लाख रुपये हैं। सैनी के पास तीन टोयोटा कारें भी हैं, जिनमें दो इनोवा कार भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री के पास अपने पैतृक गांव में कृषि भूमि का एक टुकड़ा और एक आवासीय भवन है, जबकि उनकी देनदारियां 74.82 लाख रुपये हैं। शपथ ग्रहण में शामिल होंगी पीएम बता दें कि नायब सिंह सैनी शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व के अलावा अन्य लोग भी शामिल होंगे। सैनी (54) ने बुधवार को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मुलाकात की और पंचकूला में पार्टी कार्यालय में आयोजित एक बैठक में भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में सर्वसम्मति से चुने जाने के बाद अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया था। बीजेपी ने 48 सीटें जीत लगाई हैट्रिक हरियाणा में पांच अक्टूबर को हुए चुनावों में भाजपा ने 90 सदस्यीय विधानसभा में 48 सीट जीतकर राज्य में ऐतिहासिक तीसरा कार्यकाल हासिल किया। वहीं कांग्रेस ने 37 सीट पर जीत दर्ज की। हरियाणा में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने के साथ-साथ सैनी दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस बड़े कार्यक्रम में लगभग 50,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

सरकार देश के कई राज्यों के राज्यपाल बदलने की तैयारी में केन्‍द्र, राम माधव बन सकते हैं जम्मू और कश्मीर के नए एलजी

श्रीनगर केंद्र सरकार जल्द ही उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश समेत कई प्रदेशों के राज्यपाल बदल सकती है। हालांकि, अब तक इस संभावित फेरबदल को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि ये फेरबद इस अक्टूबर में ही या नवंबर के अंत में हो सकते हैं। इस दौरान उन नामों पर विचार किया जा सकता है, जो पहले ही 3 से 5 साल की सेवाएं दे चुके हैं। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फेरबदल की चर्चा इसलिए भी अहम हैं, क्योंकि कई राज्यपाल और उपराज्यपाल 3-5 सालों से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें खासतौर से उत्तर प्रदेश, केरल, जम्मू और कश्मीर, अंडमान एंड निकोबार आइलैंड, दादर और नगर हवेली और दमन एंड दियू शामिल हैं। जम्मू और कश्मीर में हाल ही में राज्य सरकार ने कमान संभाली है। ये हो सकते हैं नए नाम रिपोर्ट के अनुसार, अटकलें हैं कि जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की जगह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महासचिव राम माधव ले सकते हैं। वहीं, केरल राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को भी नई भूमिका दिए जाने की चर्चाएं हैं। अंडमान और निकोबार आइलैंड के उपराज्यपाल देवेंद्र कुमार को केरल या जम्मू और कश्मीर में नई जिम्मेदारी दी जा सती है। कुमार अक्टूबर 2017 से राज्यपाल हैं। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि जम्मू और कश्मीर, हरियाणा में नई सरकार के बनने के बाद या झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद फेरबदल किए जा सकते हैं। इसके अलावा लोकसभा चुनाव के मैदान से दूर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी राज्यपाल या एलजी बनाया जा सकता है। इनमें अश्विनी चौबे, वीके सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नाम शामिल हो सकते हैं। 3-5 साल से सेवाएं दे रहे हैं ये राज्यपाल कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, गुजरातके आचार्य देवव्रत 3 साल से ज्यादा समय से पद पर हैं। गोवा राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई और हरियाणा के गवर्नर बंडारू दत्तात्रेय 15 जुलाई 2021 से पद पर हैं। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल, उत्तराखंड के गुरमीत सिंह 3 साल से ज्यादा समय से राज्यपाल हैं। राज्य में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में बनी है नई सरकार जम्मू-कश्मीर में हाल ही में विधानसभा चुनाव हुए हैं। बुधवार को वहां नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता भी संभाल ली। भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए राम माधव को महत्वपूर्ण भूमिका में रखा था। वह पार्टी के लिए कश्मीर में हमेशा से एक महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के मामलों में राम माधव की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। धारा 370 को हटाने की योजना भी उनके मार्गदर्शन में तैयार की गई थी, जो कश्मीर के इतिहास में एक बड़ा बदलाव साबित हुआ। उनका अनुभव और समझ कश्मीर के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में 22 अगस्त 1964 को जन्म राम माधव ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वह पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। संघ से ही वह भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किए और धीरे-धीरे बड़े राजनीतिक पदों पर काबिज हुए। उनका सियासी अनुभव कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक फैला हुआ है। वह एक नेता, लेखक और विचारक के रूप में चर्चित रहे हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं, जो राजनीति और सामाजिक विषयों पर आधारित हैं। वह थिंक टैंक ‘इंडिया फाउंडेशन’ के अध्यक्ष भी हैं और कई वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने धर्म-20 फोरम में भी भाग लिया था, जो जी-20 का हिस्सा था। राम माधव का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी काफी विस्तृत है। उन्होंने रूस, सिंगापुर, इंडोनेशिया, कनाडा और चीन जैसे देशों में कई महत्वपूर्ण मंचों पर भारत का पक्ष रखा है। चाहे वह सुरक्षा के मुद्दे हों या फिर वैश्विक राजनीति के, राम माधव ने हर बार अपनी बेबाक राय रखी है।

अमेरिका में साल 2024 में अब तक 512 बड़ी कंपनियां बंद हुई, भीषण वित्तीय संकट से जूझ रहा US

न्यूयॉर्क  दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका में छोटी कंपनियों का बुरा हाल है। रसेल 2000 इंडेक्स में शामिल कंपनियों में से 43% घाटे में चल रही हैं। यह साल 2020 की महामारी के बाद सबसे अधिक है। यह 2008 के वित्तीय संकट से भी अधिक है। तब 41 फीसदी छोटी कंपनियां घाटे में चल रही थीं। इतना ही नहीं इन कंपनियों का ब्याज के भुगतान पर भारी रकम खर्च करनी पड़ रही है। यह 2003 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। उच्च ब्याज दरों के कारण इन कंपनियों के लिए ब्याज चुकाना भी मुश्किल हो रहा है। अमेरिका में छोटी कंपनियां ही नहीं बल्कि बड़ी कंपनियां भी मुश्किल में हैं। इस साल अब तक 512 बड़ी कंपनियां खुद को दिवालिया घोषित कर चुकी हैं। यह 2020 की महामारी के दौरान से बस 6 कम है। महामारी के दौर को हटा दिया जाए तो यह 14 साल में सबसे बड़ी संख्या है। सितंबर में जहां 59 कंपनियां दिवालिया हुईं, वहीं अगस्त में 63 कंपनियों ने खुद को बैंकरप्ट घोषित किया। सबसे ज्यादा 81 कंपनियां कंज्यूमर सेक्टर में बैंकरप्ट हुई हैं। इंडस्ट्रियल में 60 और हेल्थकेयर में 48 कंपनियां इस साल बैंकरप्ट हुई हैं। अमेरिका पर कर्ज इस बीच अमेरिका का कर्ज तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह 35.7 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है जो उसकी इकॉनम का करीब 125 फीसदी है। साल 2000 में अमेरिका पर 5.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था जो साल 2010 में 12.3 ट्रिलियन डॉलर और 2020 में 23.2 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा था। यूएस कांग्रेस के बजट दस्तावेजों के मुताबिक अगले दशक तक देश का कर्ज 54 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है। पिछले तीन साल में ही देश का कर्ज 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक बढ़ चुका है। स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका को रोज 1.8 अरब डॉलर ब्याज के भुगतान में खर्च करने पड़ रहे हैं।

17 अक्तूबर को चंद्रमा पृथ्वी से मात्र 3 लाख 57 हजार 3 सौ 64 किमी की दूरी पर रहेगा जोकि इस साल के लिये सबसे कम दूरी है

नई दिल्ली नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने इसकी जानकारी देते हुये बताया कि चमकता चंद्रमा पृथ्वी से मात्र 3 लाख 57 हजार 3 सौ 64 किमी की दूरी पर रहेगा जोकि इस साल के लिये सबसे कम दूरी है। नजदीकियों के कारण यह अपेक्षाकृत बड़ा और चमकदार दिखेगा। पश्चिमी देशों में इसे हंटर्स मून के नाम दिया गया है। भारत के समयानुसार दोपहर बाद 4 बजकर 56 मिनट पर यह सबसे निकट बिंदु पर आयेगा और इसके लगभग 1 घंटे बाद ही यह पूर्व दिशा में शरदसुपरमून के रूप में उदित होकर रात भर आकाश में अपनी चांदनी बिखेरेगा। भले ही धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आप बुधवार रात्रि ही खीर खाकर उत्सव मना रहे हों, लेकिन चमक के मामले में तो वैज्ञानिक रूप से गुरुवार को ही चंद्रमा की चमक अधिकतम होगी अगर बादल या धुंध बाधा न बने तो। क्या होता है सुपरमून सारिका ने बताया कि पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता चंद्रमा गोलाकार पथ में नहीं घूमता, बल्कि अंडाकार पथ में चक्कर लगाता है। इस कारण इसकी पृथ्वी से दूरी बढ़कर कभी 406,700 किमी हो जाती है तो कभी यह 356,500 किमी तक पास भी आ जाता है। जब चंद्रमा पृथ्वी के पास आया हो और उस समय पूर्णिमा आती है तो चंद्रमा लगभग 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत अधिक चमकदार दिखाई देता है। इसे ही सुपरमून कहा जाता है। गुरूवार को साल का सबसे नजदीकी सुपरमून है। 

मस्जिद में राम नाम के नारे लगाने वाले आरोपियों के खिलाफ केस खारिज, Karnataka HC ने की टिप्पणी

बेंगलुरु कर्नाटक हाईकोर्ट ने मस्जिद के अंदर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंची है। आपको बता दें कि कोर्ट का यह यह आदेश पिछले महीने पारित किया गया था।  वेबसाइट पर अपलोड किया गया। शिकायत के अनुसार, दक्षिण कन्नड़ जिले के दो लोग पिछले साल सितंबर में एक रात एक स्थानीय मस्जिद में घुस गए और “जय श्री राम” के नारे लगाए। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उन पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। दोनों के खिलाफ धारा 295 ए (धार्मिक विश्वासों को ठेस पहुंचाना), 447 (आपराधिक अतिक्रमण) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने तर्क दिया कि मस्जिद एक सार्वजनिक स्थान है और इसलिए इसमें अपराध का कोई मामला नहीं बनता है। वकील ने यह भी तर्क दिया कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगाना आईपीसी की धारा 295 ए के तहत परिभाषित अपराध की आवश्यकता को पूरा नहीं करता है। ‘बार एंड बेंच’ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा, “कोर्ट ने कहा कि यह समझ में आता है कि अगर कोई ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाता है तो इससे किसी वर्ग की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचेगी। जब शिकायतकर्ता खुद कहता है कि इलाके में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द के साथ रह रहे हैं तो इस घटना का किसी भी तरह से कोई नतीजा नहीं निकल सकता।” क र्नाटक सरकार ने याचिकाकर्ताओं की याचिका का विरोध किया और उनकी हिरासत की मांग करते हुए कहा कि मामले में आगे की जांच की जरूरत है। हालांकि अदालत ने माना कि अपराध का सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। कोर्ट ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय का मानना ​​है कि कोई भी कार्य आईपीसी की धारा 295 ए के तहत तब तक अपराध नहीं माना जाएगा, जब तक कि उससे शांति स्थापित करने या सार्वजनिक व्यवस्था को नष्ट करने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ऐसा नहीं होता है तो उन्हें आईपीसी की धारा 295 ए के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।”

Diwali से पहले ठंड की दस्तक, Uttar Pradesh में सर्दियों की तैयारी शुरू

लखनऊ/ नईदिल्ली  उत्तर प्रदेश में धीरे-धीरे मौसम करवट बदल रहा है। दिवाली से पहले प्रदेश में करीब-करीब मौसम पूरी तरह से बदलने के आसार जताए गए हैं। हालांकि दिन की तुलना में रात के समय मौसम पूरी तरह से बदल चुका है। रात के समय तापमान में धीरे-धीरे कमी आने के चलते हल्की-हल्की ठंड पड़ने लगी है। आलम ये है कि अभी तक जो लोग एसी चलाकर काम चला रहे थे। वो अब पंखा चलाकर ही काम चला ले रहे हैं। दिन में धूप में निकलने से गर्मी हो रही है। प्रदेश में अभी कुछ दिन तक मौसम जस का तस बना रह सकता है। प्रदेश में अगले 24 घंटे के दौरान कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। क्योंकि मौसम विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 16 अक्टूबर को पश्चिमी व पूर्वी यूपी में मौसम शुष्क रह सकता है। जिसके कारण प्रदेश में कहीं भी बारिश होने की चेतावनी नहीं है। इसी तरह करीब एक हफ्ते तक प्रदेश में कहीं भी किसी तरह की चेतावनी नहीं जारी हुई है। प्रदेश के दोनों हिस्सों में मौसम साफ रहने वाला है। हालांकि तापमान में जरूर उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का भी मानना है कि जैसे जैसे दिन गुजरेंगे, वैसे वैसे तापमान में कमी देखने को मिल सकती है। आने वाले दिनों में रात के समय धीरे धीरे ठंड बढ़ सकती है। कई जिलों में तापमान 20 से नीचे प्रदेश में तापमान की बात करें तो कई जिलों में न्यूनतम तापमान में गिरावट देखने को मिली है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, नजीबाबाद, शाहजहांपुर और बरेली समेत कई जिलों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से नीचे आ गया है। नजीबाबाद में सबसे कम 18 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकार्ड किया गया है, जबकि मुजफ्फरनगर में 18.6 डिग्री, बरेली में 18.9 डिग्री, मेरठ में 19 डिग्री, शाहजहांपुर में 19.6 डिग्री और अलीगढ़ में 19.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया है। उधर हमीरपुर और बस्ती में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के नीचे लुढ़क गया है। बस्ती में 29 डिग्री और हमीरपुर में 29.2 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया है। कुछ जिलों को छोड़कर बाकी सभी जिलों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से नीचे है। लखनऊ में बुधवार को दिन में धूप निकलने के बाद गर्मी और उमस का असर दिखने की उम्मीद है।

2521 करोड़ रुपए की लैब में चीन शुरू करेगा प्रयोग, ब्रह्मांड को चलाने वाले रहस्यमयी कण की होगी टेस्टिंग

बीजिंग ये शब्द दिमाग में आते ही सबसे पहले याद आती है साल 2009 में आई हॉलीवुड फिल्म 2012. एक साइंस फिक्शन जिसे रोलैंड एमरिच ने निर्देशित किया था. दुनिया न्यूट्रीनो की मात्रा बढ़ने की वजह से कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रही थी. लीड कैरेक्टर यानी हीरो जॉन क्यूसेक अपने परिवार को बचाने के लिए चीन पहुंचता है. अब असली कहानी … चीन अपने गुआंगडॉन्ग प्रांत के जियांगमेन शहर में जमीन से 700 मीटर नीचे यानी 2300 फीट नीचे नया प्रयोग करने जा रहा है. यह जियांगमेन अंडरग्राउंड न्यूट्रीनो ऑब्जरवेटरी (JUNO) बनाई गई है. जिसमें ब्रह्मांड में पाए जाने वाले सबसे रहस्यमयी कण न्यूट्रीनो की खोज की जाएगी. उनके व्यवहार और सक्रियता के असर की स्टडी की जाएगी. JUNO में जमीन के 2300 फीट नीचे एक बड़ा गोला बना है. जिसमें हजारों लाइट-डिटेक्टिंग ट्यूब्स हैं. इस गोले और ट्यूब्स को 12 मंजिला ऊंचे सिलेंडर जैसी जगह के अंदर रखा गया है. जिसमें पानी भरा है. इस ऑब्जरवेटरी को बनाने में 300 मिलियन डॉलर्स यानी 2521 करोड़ रुपए से ज्यादा लगे हैं. जल्द ही लैब में प्रयोग शुरू होंगे. पहले जानते हैं क्या होते हैं न्यूट्रीनो? हम आपको यहां पर पार्टिकल फिजिक्स नहीं बताएंगे. सामान्य भाषा में समझाते हैं. पिछले साल लार्ज हैड्रन कोलाइडर में वैज्ञानिकों को दुनिया का सबसे ताकतवर और भूतिया कण Neutrinos मिला था. जब किसी परमाणु का केंद्र टूटता या किसी अन्य से जुड़ता है, तब न्यूट्रिनो निकलते हैं. न्यूट्रीनों ही ब्रह्मांड को चलाते हैं. माना जाता है कि इनसे ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है. यह एक सबएटॉमिक कण है, जो दिखता नहीं. फोटोन के बाद ब्रह्मांड में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है. लेकिन इन कणों में कोई इलेक्ट्रिक चार्ज नहीं होता. जिस समय आप यह स्टोरी पढ़ रहे होंगे, आपके शरीर से अरबों-खरबों न्यूट्रिनो आरपार आ-जा रहे होंगे. न्यूट्रिनो का वजन लगभग कुछ नहीं होता. यानी एकदम जीरो. ये आमतौर पर न्यूक्लियर फ्यूजन के समय निकलते हैं. इनके पैदा होने के लिए तारे, ग्रह और सुपरनोवा विस्फोट भी जिम्मेदार हैं. इनसे ग्रहों की ग्रैविटी पर असर पड़ता है. जब न्यूट्रिनो आपस में टकराते हैं तो तेज रोशनी पैदा करते हैं. चीन इनके साथ क्या करने वाला है? चीन अपने JUNO लैब में सबसे हल्के और भारी न्यूट्रीनो की खोज करेगा. ब्रह्मांड कैसे बना ये पता करेगा. इस लैब में सिर्फ चीन के ही वैज्ञानिक नहीं बल्कि पूरी दुनिया के वैज्ञानिक काम करने आने वाले हैं. ये लैब दो गुआंगडॉन्ग न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के पास है. यहां यह लैब छह साल तक पावर प्लांट की वजह से निकलने वाले न्यूट्रीनो की स्टडी करेगा. इसके लिए वह यूरेनियम और थोरियम के रेडियोएक्टिव डिके की स्टडी भी कर सकता है. उम्मीद है कि अगले साल के दूसरे हिस्से में JUNO अपना काम करना शुरू कर देगा. यह अमेरिका में डीप अंडरग्राउंड न्यूट्रीनो एक्सपेरीमेंट (DUNE) से कई गुना बड़ा है. ड्यून को ऑनलाइन आने में अभी छह साल का समय लगेगा. ड्यून को फर्मीलैब और एलबीएनएफ मिलकर संचालित कर रहे हैं.

भारत खालिस्तान समर्थक भारतीय मूल केकानाडाई नागरिकों के OCI रद्द कर, संपत्ति के अधिकार को खत्म कर सकता है

नई दिल्ली भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अब कनाडा ने भारत के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों के संकेत दिए हैं। इधर, भारत ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। हाल ही में कनाडा ने एक मामले की जांच में कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त रहे संजय कुमार वर्मा को ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ बनाया था। इसका मतलब ऐसे व्यक्ति से होता है, जो संदिग्ध है, लेकिन अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। दोनों ही देशों ने 6-6 राजनयिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दोनों देशों में तनाव बढ़ने के बीच कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने भारत के खिलाफ पाबंदी लगाने की संभावना को खारिज नहीं किया और कहा कि ‘सभी विकल्प विचाराधीन हैं’। भारत ऐसे दे सकता है जवाब  रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल, कनाडा में लाखों भारतीय छात्र हैं। अगर भारत ने छात्रों पर कनाडा में शिक्षा लेने पर रोक लगा दी, तो इसका गहरा असर हो सकता है। यह फैसला कनाडा के शिक्षा से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था पर गहरी चोट दे सकता है। इसके अलावा भारत खालिस्तान समर्थक भारतीय मूल के सभी कानाडाई नागरिकों के OCI यानी ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्ड रद्द कर सकता है। इनके साथ भारत खालिस्तान समर्थकों के संपत्ति के अधिकार को खत्म कर सकता है। साथ ही वह नए वीजा में देरी और गहनता से जांच करना बढ़ा सकता है। ऐसे में खालिस्तान समर्थकों पर दबाव पड़ सकता है। भारत भारतीय मूल के ऐसे कनाडाई नागरिकों के मल्टिपल एंट्री वीजा पर भी रोक लगा सकता है। अगर यह फैसला लिया जाता है, तो असर भारतीय कनाडाई समुदाय पर पड़ सकता है। इससे कनाडा की स्थानीय राजनीति पर भी असर हो सकता है। कनाडा को जवाब में भारत भी व्यापार स्तर पर प्रतिबंध लगा सकता है। टॉप 10 ट्रेडिंग पार्टनर होने के नाते भारत कनाडा की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। साथ ही भारत में निवेश वाले कनाडा के आर्थिक संस्थानों और पेंशन फंड को फ्रीज कर सकता है। कनाडा की पुलिस ने लगाए थे ये आरोप कनाडा की सार्वजनिक प्रसारणकर्ता कनाडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (सीबीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, देश के राष्ट्रीय पुलिस बल रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के प्रमुख ने भारत के संदर्भ में चौंकाने वाले आरोप लगाए कि भारत सरकार के एजेंट कनाडा में हत्याओं सहित ‘व्यापक हिंसा’ में भूमिका निभा रहे हैं और चेतावनी दी थी कि इससे ‘देश की सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा’ है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘इनमें गोपनीय सूचना जुटाने की तकनीक, दक्षिण एशियाई कनाडाई लोगों को निशाना बनाकर उनके साथ दंडात्मक व्यवहार करना और हत्या सहित एक दर्जन से अधिक धमकी भरे और हिंसक कृत्यों में संलिप्तता शामिल है।’ कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के साथ काम करने के उनकी सरकार के प्रयास के कोई परिणाम नहीं निकले। उन्होंने कहा, ‘इसलिए, इस सप्ताहांत, कनाडाई अधिकारियों ने एक असाधारण कदम उठाया। उन्होंने आरसीएमपी के उन साक्ष्यों को साझा करने के लिए भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की, जिनके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि भारत सरकार के छह एजेंट आपराधिक गतिविधियों में शामिल व्यक्ति हैं।’ RCMP ने आरोप लगाया है कि बिश्नोई गिरोह के तार भारत सरकार के उन ‘एजेंटों’ से जुड़े हैं, जो देश में दक्षिण एशियाई समुदाय, विशेष रूप से ‘खालिस्तान समर्थक तत्वों’ को निशाना बना रहे हैं। भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि कनाडाई अधिकारियों का यह दावा सच नहीं है कि कनाडा ने निज्जर मामले में भारत को प्रामाणिक सबूत दिए हैं।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet