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न्यू अशोकनगर से सराय काले खां तक सीएमआरएस मंजूरी के लिए हुआ निरीक्षण , जुलाई में ट्रेन संचालन पर हो सकता है फैसला

नई दिल्ली दिल्ली-मेरठ के बीच नमो भारत के सफलतापूर्वक ट्रायल के बाद अब इसके संचालन की तैयारी शुरू हो गई हैं। ट्रेन संचालन के लिए जरूरी सीएमआरएस मंजूरी के लिए एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजनल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन) ने काम शुरू कर दिया है। न्यू अशोकनगर से सराय काले खां तक सीएमआरएस मंजूरी के लिए निरीक्षण हो गया है। जून के अंतिम सप्ताह में मेरठ के लिए भी निरीक्षण हो जाएगा। इसके बाद जुलाई में ट्रेन संचालन पर फैसला लिया जा सकता है। जून तक तैयार हो जाएगा रूट नमो भारत का पहला रूट जून के अंत तक पूरी तरह संचालन के लिए तैयार होगा। 82 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सराय काले खां से मोदीपुरम तक ट्रेनों का संचालन होगा। अभी न्यू अशोक नगर से मेरठ के बीच 55 किलोमीटर के ट्रैक पर ट्रेन का संचालन हो रहा है। बचे हुए करीब 27 किलोमीटर ट्रैक को संचालन के लिए तैयार कर लिया गया है। स्टेशनों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जुलाई में पूरे रूट पर ट्रेन चल सकती है। अभी नमो भारत से प्रतिदिन पचास हजार से ज्यादा यात्री सफर कर रहे हैं। सराय काले खां स्टेशन पर काम अंतिम चरण में नमो भारत के सराय काले खां स्टेशन पर काम अंतिम चरण में है। ट्रैक पर नमो भारत का परीक्षण सफलतापूर्वक चल रहा है। स्टेशन को रेल, बस अड्डे और मेट्रो के साथ-साथ रिंग रोड से जोड़ने का काम एक माह में पूरा कर लिया जाएगा। सराय काले खां नमो भारत का सबसे बड़ा स्टेशन होगा। यहां दिल्ली-मेरठ के साथ-साथ दिल्ली-करनाल और दिल्ली-गुरुग्राम एसएनबी वाली ट्रेनों का संचालन भी होगा। यात्री संख्या के हिसाब से ही यहां सबसे बड़ा स्टेशन डिजाइन किया गया है।  

प्रधानमंत्री मोदी ने तीन देशों की यात्रा की पूरी, दिल्ली लौटे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की पांच दिवसीय यात्रा से गुरुवार को दिल्ली वापस लौट आए. पीएम मोदी बुधवार को अपनी यात्रा पूरी कर क्रोएशिया से भारत के लिए रवाना हुए. इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी सबसे पहले साइप्रस पहुंचे. उसके बाद पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए कनाडा पहुंचे, आखिर में पीएम मोदी ने क्रोएशिया की यात्रा की. पीएम मोदी की तीनों देशों का यात्रा सफल रही. पीएम पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने क्रोएशिया की राजकीय यात्रा की. पीएम मोदी ने अपनी इस यात्रा को खास बनाने के लिए क्रोएशिया और साइप्रस के राष्ट्राध्यक्षों को गिफ्ट भी दिए. ये उपहार भारतीय सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प के थे. पीएम मोदी ने किसे क्या दिया गिफ्ट प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के आखिरी पड़ाव में क्रोएशिया पहुंचे थे. जहां पीएम मोदी ने क्रोएशिया के राष्ट्रपति को ओडिशा की पट्टचित्र पेंटिंग तोहफे में दी. जबकि पीएम मोदी ने क्रोएशिया के प्रधानमंत्री को राजस्थान की सिल्वर कैंडल स्टैंड भेंट की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन तोहफों को उपहार में देकर भारतीय कला और संस्कृति को एक नई पहचान देने का काम किया. इसके साथ ही पीएम मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा में मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम पार्डो को एक वारली पेंटिंग भेंट की. बता दें कि ये वारली पेंटिंग महाराष्ट्र के वारली समुदाय की एक पारंपरिक आदिवासी कला है. जो भारतीय लोक कला के सबसे पुराने एवं सरल रूपों में से एक है. इसमें मिट्टी की दीवारों या पृष्ठभूमि पर सफेद चावल के पेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है. इस पेंटिंग में रोज़मर्रा की ज़िंदगी का नजारा देखने  को मिलता है. जिसमें खेती किसानी, मछली पकड़ना, नृत्य करना और गांव के उत्सव आदि शामिल होते हैं. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के तोहफे में दी मधुबनी पेंटिंग पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग को मधुबनी पेंटिंग भेंट की. बता दें कि मधुबनी पेंटिंग को मिथिला कला भी कहा जाता है. जो बिहार की प्रसिद्ध पारंपरिक कला है. जिसे ज़्यादातर महिलाओं बनातीहैं. इस रंगीन पेंटिंग को मुख्यरूप से त्योहारों और शादियों के मौके पर मिट्टी की दीवारों पर उकेरा जाता है. क्रोएशिया के राष्ट्रपति को गिफ्ट में दी पट्टचित्र पेंटिंगइसके साथ ही पीएम मोदी ने क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच को ओडिशा की एक पारंपरिक पट्टचित्र पेंटिंग तोहफे में दी.  जो ओडिशा की एक  पारंपरिक कला है. इस पेंटिंग को कपड़े पर बनाया जाता है. इसी लिए इसका नाम पट्टा यानी कपड़े से मिलकर बना है. ये पेंटिंग मुख्यरूप से भगवान कृष्ण और जगन्नाथ परंपरा से जुड़ी कहानियां को दर्शाती हैं. PM मोदी के 4 बड़े बयान…. 1. भारत और क्रोएशिया दोनों लोकतंत्र जैसे मूल्यों से जुड़े हैं प्रधानमंत्री मोदी ने क्रोएशिया की पहली यात्रा पर गर्मजोशी से स्वागत के लिए वहां की सरकार और प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविच का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत और क्रोएशिया लोकतंत्र, कानून और विविधता जैसे साझा मूल्यों से जुड़े हैं। 2. दोनों देशों के बीच डिफेंस, डिजिटल में साझेदारी बढ़ेगी दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को तीसरे कार्यकाल में तीन गुना गति से बढ़ाने का निर्णय लिया। रक्षा सहयोग योजना, व्यापार, फार्मा, कृषि, आईटी, डिजिटल व स्वच्छ तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाई जाएगी। 3. संस्कृति, शिक्षा और सहयोग को मजबूत किया जाएगा भारत-क्रोएशिया के सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत किया जाएगा। हिंदी चेयर की टाइमलाइन 2030 तक बढ़ाई गई है, 5 साल का सांस्कृतिक कार्यक्रम तय हुआ है और लोगों की आवाजाही के लिए मोबिलिटी समझौता जल्द होगा। 4. भारत-क्रोएशिया साझेदारी को और मजबूत करेंगे PM मोदी ने कहा कि क्रोएशिया में भले ही यह यात्रा छोटी है, लेकिन मुझे आपके शहर की संस्कृति, जीवनशैली और यहां के लोगों की गर्मजोशी का अनुभव हुआ। यहां मुझे अपनेपन का एहसास हुआ। हमने बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जो भारत-क्रोएशिया साझेदारी को और मजबूत करेंगे और नए क्षेत्रों में मिलकर काम करने के रास्ते खोलेंगे। क्रोएशिया 1991 में बगावत कर अलग हुआ था क्रोएशिया ने 25 जून 1991 को आधिकारिक रूप से यूगोस्लाविया से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। इससे पहले, यह देश सोशलिस्ट फेडरल रिपब्लिक ऑफ यूगोस्लाविया का हिस्सा था, जिसमें कुल छह गणराज्य शामिल थे। 1990 में क्रोएशिया में बहुदलीय चुनाव हुए और राष्ट्रवादी नेता फ्रांजो तुजमान की पार्टी सत्ता में आई। जून 1991 में संसद ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। यूगोस्लाव सरकार और वहां की सेना ने इसका विरोध किया, जिससे क्रोएशिया युद्ध शुरू हुआ। युद्ध करीब चार साल (1991-1995) तक चला, जिसमें हजारों लोग मारे गए और लाखों बेघर हुए। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के दबाव और मध्यस्थता से शांति स्थापित हुई। क्रोएशिया को 15 जनवरी 1992 को यूरोपीय देशों द्वारा औपचारिक मान्यता मिली और बाद में संयुक्त राष्ट्र ने भी उसे सदस्यता दी। कनाडा-साइप्रस-क्रोएशिया में पीएम मोदी ने दिए खास तोहफे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की यात्रा पूरी हो गई है। पीएम मोदी ने साइप्रस में राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से मुलाकात की। इसके बाद कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इसके बाद पीएम मोदी क्रोएशिया पहुंचे और वहां राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच और प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच से मुलाकात की। अपने दौरे पर पीएम मोदी देश के पारंपरिक उपहार लेकर गए थे। यात्रा के दौरान उन्होंने साइप्रस, कनाडा के जी-7 शिखर सम्मेलन और क्रोएशिया में जिन-जिन नेताओं से मुलाकात की, सभी को उपहार भेंट किए। आइए जानते हैं पीएम मोदी ने किस देश के नेता को कौन सा उपहार दिया और उसकी खासियत क्या है? क्रोएशिया के राष्ट्रपति को भेंट किया पट्टचित्र क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच को ओडिशा की एक पट्टचित्र पेंटिंग उपहार में दी। पट्टचित्र ओडिशा की पारंपरिक कला रूप है। यह कपड़े पर अपनी विस्तृत और रंगीन पेंटिंग के लिए जाना जाता है। इसका नाम पट्टा यानि कपड़ा और चित्र से आया है। ये कलाकृतियां आमतौर पर भारतीय पौराणिक कथाओं, खासकर भगवान कृष्ण और जगन्नाथ परंपरा से जुड़ी हैं। कलाकार बोल्ड लाइन और विस्तृत दृश्य बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों और हस्तनिर्मित ब्रश का उपयोग करते हैं। क्रोएशिया के प्रधानमंत्री को उपहार में दिया सिल्वर कैंडल स्टैंड प्रधानमंत्री मोदी ने क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच को सिल्वर कैंडल स्टैंड उपहार में दिया। राजस्थान … Read more

सामाजिक न्याय पर सीजेआई बी आर गवई ने कहा- संविधान की वजह से ही तोड़ पाया जाति की बेड़ियां

नई दिल्ली भारत के प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई ने कहा है कि समाज के बड़े हिस्से को हाशिए पर रखने वाली असमानताओं पर ध्यान दिए बिना कोई भी देश असल में प्रगतिशील या लोकतांत्रिक होने का दावा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा है कि समाज में स्थिरता, सामंजस्य और सतत विकास करने के लिए सामाजिक-आर्थिक न्याय सबसे अहम है। CJI बुधवार को मिलान में एक कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे थे। इस दौरान CJI को सामाजिक-आर्थिक न्याय प्रदान करने में संविधान की भूमिका: भारतीय संविधान के 75 वर्षों के प्रतिबिंब’’ विषय पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। आमंत्रण के लिए चैंबर ऑफ इंटरनेशनल लॉयर्स को धन्यवाद देते हुए, न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में पिछले 75 वर्षों में भारतीय संविधान की यात्रा महान रही है। जस्टिस गवई ने कहा, ‘‘भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में, मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि भारतीय संविधान के निर्माता इसके प्रावधानों का मसौदा तैयार करते समय सामाजिक-आर्थिक न्याय की अनिवार्यता को लेकर सचेत थे। संविधान को औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता के लिए एक लंबे और कठिन संघर्ष के बाद तैयार किया गया था।’’ संवैधानिक आदर्शों का उत्पाद हूं- CJI गवई उन्होंने आगे कहा, ‘‘मैंने अक्सर कहा है, और मैं आज यहां फिर दोहराता हूं कि समावेश और परिवर्तन के इस संवैधानिक दृष्टिकोण के कारण ही मैं भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में आपके सामने खड़ा हूं। ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहने वाली पृष्ठभूमि से आने के बाद, मैं उन्हीं संवैधानिक आदर्शों का उत्पाद हूं, जो अवसरों को लोकतांत्रिक बनाने और जाति की बेड़ियों को तोड़ने की मांग करते हैं।’’ सामाजिक-आर्थिक न्याय एक व्यावहारिक आवश्यकता इस दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्याय महज आदर्श चीज नहीं है और इसे सामाजिक संरचनाओं में जड़ें जमानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘समाज के बड़े हिस्से को हाशिए पर रखने वाली संरचनात्मक असमानताओं पर ध्यान दिए बिना कोई भी राष्ट्र वास्तव में प्रगतिशील या लोकतांत्रिक होने का दावा नहीं कर सकता। दूसरे शब्दों में, स्थिरता, सामाजिक सामंजस्य और विकास प्राप्त करने के लिए सामाजिक-आर्थिक न्याय एक व्यावहारिक आवश्यकता है।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह सिर्फ पुनर्वितरण या कल्याण का मामला नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने, उसकी पूरी मानवीय क्षमता का एहसास कराने और देश के सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक जीवन में समान रूप से भाग लेने में सक्षम बनाने के बारे में भी है। उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकार, किसी भी देश के लिए, सामाजिक-आर्थिक न्याय राष्ट्रीय प्रगति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह सुनिश्चित करता है कि विकास समावेशी हो, अवसरों का समान वितरण हो और सभी व्यक्ति, चाहे उनकी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, सम्मान और स्वतंत्रता के साथ रह सकें।’’  

ईरान मिसाइलें तैयार कर रहा है ताकि मिडल ईस्ट में बने अमेरिका के ठिकानों को भी टारगेट किया जा सके: रिपोर्ट में किया दावा

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि यदि ईरान पीछे नहीं हटा तो फिर उसे अंजाम भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका के जंग में कूदने के सवाल पर खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन इनकार भी नहीं किया है। इस बीच खबर है कि ईरान मिसाइलें तैयार कर रहा है ताकि मिडल ईस्ट में बने अमेरिका के ठिकानों को भी टारगेट किया जा सके। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। यदि ऐसा कुछ ईरान की ओर से होता है तो फिर डोनाल्ड ट्रंप को एक बहाना मिल जाएगा और अमेरिका सक्रिय तौर पर जंग में उतर सकता है। अमेरिका ने तीन दर्जन रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट्स को यूरोप भेजा है, जिन्हें मिडल ईस्ट में अमेरिकी बेसों की रक्षा करने वाले फाइटर जेट्स की मदद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिकी सूत्रों को अंदेशा है कि ईरान की तरफ से उनके बेसों पर अटैक किया जा सकता है। यही नहीं इजरायल की ओऱ से भी लगातार अमेरिका पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह इस जंग में दखल दे। इसकी वजह यह भी है कि ईरानी मिसाइलों को रोकते-रोकते इजरायल का एयर डिफेंस थक गया है और उसे भी फिलहाल दोबारा नए सिरे से सक्रिय करने की जरूरत है। एक आशंका यह भी है कि यदि अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर साइट फोरदो पर अटैक किया तो फिर लाल सागर में हूथी विद्रोही अटैक कर सकते हैं। वहां कई देशों के जहाजों को वे निशाना बना सकते हैं। इसके अलावा इराक और सीरिया में स्थित ईरान समर्थित उग्रवादी संगठन भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। इसके अलावा ईरान की तरफ होर्मुज स्ट्रेट भी रोकने का प्रयास हो सकता है। फिलहाल अमेरिका ने सऊदी अरब, जॉर्डन और यूएई में स्थित अपने सैनिकों को सक्रिय कर दिया है। पश्चिम एशिया में अमेरिका के करीब 40 हजार सैनिक तैनात हैं। इराक में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर है ईरान की नजर दो ईरानी अधिकारियों के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि इजरायल के समर्थन में अमेरिका ने अपनी सेना लगाई तो फिर इराक में स्थित उसके ठिकानों को टारगेट किया जाएगा। ईरानी सूत्रों ने कहा कि हमारे दुश्मनों को याद रखना चाहिए कि वे सैन्य बल से कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे। यदि ईरान पर उन लोगों ने जंग थोपी तो कुछ हासिल नहीं होगा।  

अहमदाबाद विमान हादसे में बरामद हुआ ब्लैक बॉक्स अब डाटा रिकवर करने के लिए भेजा जाएगा अमेरिका

वाशिंगटन  अहमदाबाद में हुए प्लेन क्रैश का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया था। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्दी ही हादसे के ठीक-ठीक कारणों का पता चल जाएगा। लेकिन अब ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, विमान हादसे इतना भयानक था कि विमान का ब्लैक बॉक्स भी क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में इससे डाटा निकालना मुश्किल हो रहा है। अब इस ब्लैक बॉक्स को अमेरिका भेजने की तैयारी हो रही है। भारतीय दल भी जाएगा साथ अहमदाबाद विमान हादसे में बरामद हुआ ब्लैक बॉक्स अब डाटा रिकवर करने के लिए अमेरिका भेजा जाएगा। इस मामले पर भारत सरकार की तरफ से जल्द ही फैसला लिया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार, क्रैश हुए एयर इंडिया विमान का ब्लैक बॉक्स वाशिंगटन डीसी भेजा जाएगा, यहां के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड में इसकी जांच की जाएगी। इस ब्लैक बॉक्स के साथ एक भारतीय दल भी भेजा जाएगा, जो जांच के दौरान सभी प्रोटोकॉल की निगरानी करेगा। क्या होता है ब्लैक बॉक्स ब्लैक बॉक्स अपने आप में दो डिवाइस होता है। इसमें कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर मौजूद होता है। इसमें सीवीआर और एफडीआर होता है जो उड़ान के दौरान सारी जानकारियां इकट्ठा करता रहता है। ये एक ऐसा उपकरण होता है, जो किसी विमान, हेलीकॉप्टर आदि में लगाया जाता है। उड़ान के दौरान ये डिवाइस महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करता है। जब कोई विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, तो ब्लैक बॉक्स की मदद से ही पता लगाया जाता है कि विमान हादसे का शिकार क्यों हुआ। यह बहुत मजबूत और आग प्रतिरोधी होता है। क्यों जरूरी होता ब्लैक बॉक्स किसी विमान हादसे के बाद ब्लैक बॉक्स को बरामद किया जाता है। इसके बाद उसकी जांच की जाती है और गलतियों का पता लगाया जाता है। गलतियों से सीखते हुए भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जाता सकता है। अब अहमदाबाद विमान हादसे में मिले ब्लैक बॉक्स की भी जांच की जा रही है, जिससे उसमें हुई कमियों की जांच की जा सके। लेकिन इसमें अब देरी होगी। ब्लैक बॉक्स की जांच भारत में नहीं हो पाएगी। डाटा रिकवर करने के लिए इसे अमेरिका भेजा जाएगा। बता दें कि बीते गुरुवार को अहमदाबाद में प्लेन क्रैश हो गया था। यह विमान अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरा था, लेकिन थोड़ी ही देर में क्रैश हो गया और आग गोला बनकर कई जिंदगियां लील गया। इस हादसे में प्लेन में बैठ 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई थी। इसके अलावा जिस बिल्डिंग से विमान टकराया, उसके आसपास मौजूद कई लोगों की मौत हो गई थी।  

भारत-पाकिस्तान के 2 नेताओं ने संघर्ष रोकने का लिया फैसला, ट्रंप ने पहली बार नहीं लिया क्रेडिट: अमेरिकी राष्ट्रपति

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के दो ‘बहुत चतुर’ नेताओं ने एक ऐसा युद्ध जारी न रखने का ‘निर्णय’ लिया जो परमाणु युद्ध में बदल सकता था। पिछले कुछ हफ्तों में यह पहली बार है जब ट्रंप ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच संघर्ष रोकने के लिए खुद श्रेय नहीं लिया है। ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की दोपहर के भोजन पर मेजबानी करने के बाद ओवल कार्यालय में मीडिया से बातचीत में ये टिप्पणियां कीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह मुनीर से मुलाकात कर ‘सम्मानित’ महसूस कर रहे हैं। यह पूछने पर कि क्या मुनीर के साथ हुई बैठक में ईरान पर चर्चा की गई, ट्रंप ने कहा, ‘खैर, वे ईरान को बहुत अच्छी तरह, ज्यादातर लोगों से बेहतर जानते हैं और वे किसी भी चीज से खुश नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि इजराइल के साथ उनके खराब रिश्ते हैं। वे असल में दोनों को जानते हैं लेकिन शायद वे ईरान को बेहतर जानते हैं लेकिन वे देख रहे हैं कि क्या चल रहा है और उन्होंने मुझसे सहमति जतायी है।’ ट्रंप ने कहा, ‘मैं उन्हें यहां इसलिए बुलाना चाहता था कि मैं युद्ध न करने, संघर्ष खत्म करने के लिए उनका शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कुछ समय पहले यहां से गए हैं और हम भारत के साथ एक व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं इसलिए भी मैं धन्यवाद देना चाहता हूं। हम पाकिस्तान के साथ व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं।’ गौरतलब है कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कनाडा के कनैनिस्किस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के इतर मुलाकात करने का कार्यक्रम था लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति को इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण समय से पहले वाशिंगटन लौटना पड़ा, जिसके कारण उनकी मोदी से मुलाकात नहीं हो पायी। हालांकि, दोनों नेताओं ने फोन पर बातचीत की। ट्रंप ने कहा, ‘वे दोनों (मोदी और मुनीर) यहां थे लेकिन कुछ सप्ताह पहले मैं मोदी के साथ था। मैं बहुत खुश हूं कि दो बहुत चतुर लोगों ने युद्ध आगे न बढ़ाने का फैसला किया। यह परमाणु युद्ध हो सकता था। वे दो परमाणु संपन्न देश, बहुत बड़ी परमाणु शक्तियां हैं और उन्होंने यह फैसला लिया।’ पिछले कुछ हफ्तों में यह पहली बार है जब ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष रोकने का श्रेय नहीं लिया है। भारत और पाकिस्तान के 10 मई को सैन्य संघर्ष रोकने का फैसला लेने के बाद से ट्रंप कई मौकों पर यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने दोनों देशों के बीच तनाव ‘रोकने में मदद की’ और उन्होंने दोनों परमाणु संपन्न दक्षिण एशियाई देशों से कहा था कि अगर वे संघर्ष रोकते हैं तो अमेरिका उनके साथ ‘बहुत व्यापार’ करेगा। मोदी ने कनैनिस्किस से रवाना होने से पहले ट्रंप से 35 मिनट तक फोन पर बातचीत की थी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कनैनिस्किस से एक वीडियो संदेश में कहा था कि मोदी ने ट्रंप को बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान किसी भी स्तर पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते या भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका द्वारा मध्यस्थता के किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। पीएम मोदी ने क्या कहा था मोदी ने कहा कि सैन्य कार्रवाई को रोकने पर चर्चा भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे तौर पर दोनों देशों की सेनाओं के मौजूदा संवाद चैनलों के माध्यम से हुई थी और इसकी पहल पाकिस्तान की ओर से की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ तौर पर कहा कि भारत कभी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा और इस मामले पर भारत में पूरी तरह से राजनीतिक सर्वसम्मति है। मिसरी ने बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद ट्रंप ने मोदी को फोन कर संवेदनाएं व्यक्त की थीं और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उनका समर्थन किया था। कनैनिस्किस में मंगलवार को फोन पर हुई बातचीत अप्रैल के बाद से दोनों नेताओं के बीच ‘पहली बातचीत’ है। मिसरी ने बताया कि ट्रंप ने प्रधानमंत्री की बातों को ध्यान से सुना और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के प्रति अपना समर्थन जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत अब आतंकवाद को छद्म युद्ध के रूप में नहीं, बल्कि एक युद्ध के ही रूप में देखता है और भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है। यूएस जाने से किया मना ट्रंप ने मोदी से पूछा कि क्या वह कनाडा से लौटते वक्त अमेरिका आ सकते हैं लेकिन प्रधानमंत्री को साइप्रस में शुरू अपनी तीन देशों के यात्रा के आखिरी चरण के तहत क्रोएशिया जाना था। मिसरी ने कहा कि पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण प्रधानमंत्री मोदी ने वाशिंगटन आने में असमर्थता जतायी और दोनों नेताओं ने निकट भविष्य में मुलाकात करने का प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की। इससे पहले, ट्रंप ने मोदी को ‘शानदार व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि उन्होंने उनसे चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता होगा। साथ ही उन्होंने अपना यह दावा भी दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को कहा, ‘मैंने युद्ध रुकवाया है… मैं पाकिस्तान को पसंद करता हूं। मुझे लगता है कि मोदी एक शानदार इंसान हैं। मैंने कल रात उनसे बात की। हम भारत के साथ व्यापार समझौता करने जा रहे हैं, लेकिन मैंने पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध रुकवा दिया है।’

दिल्ली में कोरोना का कहर, दिल्ली में अब तक कोरोना से 15 लोगों की मौत

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामलों में हर दिन बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। आए दिन कोरोना की वजह से मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। गुरुवार को दिल्ली में कोरोना से दो महिलाओं की मौत हो गई। जिसके बाद दिल्ली में अब तक कोरोना से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। एक 67 वर्षीय महिला को एचटीएन, किडनी रोग, कोविड निमोनिया, सेप्सिस, रिफ्रैक्टरी सेप्टिक शॉक जैसी बीमारियां थी। वहीं दूसरी 74 वर्षीय महिला को सीएडी, रुमेटीइड आर्थराइटिस, एलआरटीआई, सेप्टिक शॉक के साथ एमओडीएसएस बीमारी ने घेर रखा था। दोनों महिलाओं की मौत हो गई है। कोरोना से 65 वर्षीय बुजुर्ग ने तोड़ा दम बीते बुधवार को कोरोना से एक और मौत का मामला सामने आया था, 65 वर्षीय बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। कोरोना से बुधवार तक 13 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 60 से अधिक नए मरीज मिले थे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के कोविड डैशबोर्ड के अनुसार सक्रिय मरीजों की संख्या 620 हो गई है। कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी 65 रही। कोरोना से संक्रमित बुजुर्ग कई दूसरी बीमारियों से जूझ रहा था, इसमें कार्सिनोमा ओरल कैविटी (मुंह का कैंसर), एक्यूट किडनी इंजरी सहित एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (फेफड़ों का खराब होना) था। दिल्ली में एक जनवरी 2025 से लेकर अब तक कोरोना के 2480 मामले सामने आ चुके हैं। देशभर में कोरोना के कुल मामलों में दिल्ली दूसरे नंबर पर है। डॉक्टरों की मानें तो कोरोना के मरीजों में हल्के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। इसमें खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षण शामिल हैं। 

मौसम विभाग पर बड़ा अपडेट…आज कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें मौसम का हाल

नई दिल्ली भीषण गर्मी से बेहाल उत्तर भारत के कई राज्यों को राहत मिलने के आसार हैं। दक्षिण पश्चिम पश्चिम तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसकी वजह से कई इलाकों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, 23 जून तक देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, गरज के साथ वर्षा और तेज हवाएं चलने की भविष्यवाणी की गई है। आईडीएम के मुताबिक, मॉनसून की गतिविधियां तेज होने वाली हैं।देश के आधे से ज्यादा हिस्से में मॉनसून पहुंच चुका है और अच्छी बारिश का सिलसिला जारी है. कई राज्य बारिश से बेहाल हो गए हैं तो कई इलाकों में लोगों को गर्मी से राहत मिली है. हालांकि राजधानी दिल्ली में अभी मॉनसून ने दस्तक नहीं दी है लेकिन यहां प्री मॉनसून बारिश से कुछ राहत देखी जा रही है. आज, 19 जून भी मौसम विभाग ने लगभग आधे भारत में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, आज झारखंड में अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है. वहीं मध्य भारत और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है. इसके अलावा मौसम का पूर्वानुमान लगाने  वाली एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, गुजरात, कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, बिहार के कुछ हिस्से, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट है. वहीं, इन्हीं राज्यों के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है. दिल्ली के मौसम का हाल राजधानी दिल्ली के मौसम की बात करें तो मौसम विभाग ने यहां आज मध्यम श्रेणी की बारिश का अलर्ट जारी किया है. इसके अलावा दिनभर बादल छाए रहेंगे. आईएमडी के मुबातिक शाम के वक्त दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश, आंधी और धूल भरी तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं रात के वक्त तूफान के साथ भारी बारिश हो सकती है. वहीं, चक्रवाती हवाओं की वजह से दिल्ली, गुजरात और दक्षिण भारत में तूफान की भी आशंका है. मौसम विभाग ने 23 जून तक पूरे भारत में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. मुंबई में देर शाम से रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है. मौसम विभाग के मुताबिक आज मूसलाधार बारिश के आसार हैं. मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के रायगढ़ और रत्नागिरी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जबकि मुंबई, ठाणे और पालघर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. पूर्वी राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों के लिए खराब मौसम की आशंका है। इसी तरह, असम और मेघालय में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली-एनसीआर में भी मौसम सुहाना बना हुआ है। हालांकि, यहां मॉनसून की एंट्री 22-23 जून तक पहुंच सकता है। कहीं 21 तो कहीं 23 जून तक बारिश का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट पर गौर करें तो 19 जून से 23 जून तक देश के कई इलाकों में भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वी और मध्य भारत में मॉनसून की रफ्तार बढ़ने वाली है। मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में गंगा के मैदानी इलाकों में 21 जून तक मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज के साथ बिजली भी चमक सकती है और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। पूर्व भारत में भारी बारिश का रेड अलर्ट दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में भी इस दौरान तेज बारिश की आशंका है। पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में भी भारी बारिश की तैयारी है। तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चलेंगी। IMD ने दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है। पूर्वी भारत के राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी भारत में गुजरात, कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र में 20 जून तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। 22 और 23 जून को यहां और भी तेज बारिश हो सकती है। इस क्षेत्र में हवा की गति 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा में भी बरसेंगे बदरा उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में 19 जून से 21 जून तक बहुत भारी बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में 20 जून से 22 जून के बीच तेज बारिश होने की संभावना है। IMD ने तटीय इलाकों और समुद्र में 45 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति खराब हो सकती है। मछुआरों को इस दौरान समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसम IMD ने दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसमें मध्यम से भारी बारिश, गरज के साथ बारिश और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। सुबह 82 फीसदी आर्द्रता और 28°C का न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। दिन का अधिकतम तापमान 36°C रहने का अनुमान है। बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका भी जताई गई है।  

पुणे में दर्दनाक सड़क हादसा, Car- Pickup की टक्कर में 8 लोगों की मौत

पुणे  महाराष्ट्र के पुणे जिले में बुधवार को बेहद ही दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है. जेजुरी मोरगांव रोड पर हुए इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई है. जेजुरी पुलिस स्टेशन की सीमा में बुधवार को शाम 6:45 बजे के करीब किर्लोस्कर कंपनी के पास श्रीराम ढाबे के सामने जेजुरी-मोरगांव रोड पर ये भीषण हादसा हुआ. दरअसल, श्रीराम ढाबे के मालिक वायसे अपने ढाबे के लिए फ्रिज को पिकअप वाहन से नीचे उतार रहे थे, तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रही स्विफ्ट डिजायर कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी. इस दुर्घटना में सात पुरुष और एक महिला की मौत हो गई, जबकि एक पुरुष, एक महिला और दो छोटे बच्चे घायल हो गए हैं. मृतकों के शव जेजुरी ग्रामीण अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए लाए गए हैं. घायलों में एक पुरुष, एक महिला और दो छोटे बच्चों का उपचार शांताई हॉस्पिटल, जेजुरी में चल रहा है. मृतकों के नाम निम्नलिखित हैं: 1. सोमनाथ रामचंद्र वायसे – निवासी, तालुका पुरंदर, जिला पुणे 2. रामू संजीवनी यादव – निवासी, तालुका पुरंदर, जिला पुणे 3. अजय कुमार चव्हाण – निवासी, उत्तर प्रदेश 4. अजित अशोक जाधव – निवासी, कांजळे, तालुका भोर, जिला पुणे 5. किरण भारत राऊत – निवासी, पवारवाड़ी, तालुका इंदापुर, जिला पुणे 6. अश्विनी संतोष एस.आर. – निवासी, सोलापुर 7. अक्षय संजय राऊत – निवासी, झारगडवाड़ी, तालुका बारामती, जिला पुणेृ 8. एक अज्ञात पुरुष – पहचान शिनाख्त नहीं हो सकी है पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने पुष्टि की कि स्थानीय पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और क्रेन की मदद से मलबे को हटाने की प्रक्रिया शुरू की. घटनास्थल से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने के प्रयास जारी हैं. उन्होंने बताया कि अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.  मृतकों में से एक की पहचान अभी नहीं हो पाई है.     

110 छात्र को वॉर जोन से निकाला, ऑपरेशन ‘सिंधु’ के तहत पहला जत्था स्वदेश पहुंचा

नई दिल्ली ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए “ऑपरेशन सिंधु” की शुरुआत की है। इस विशेष अभियान के तहत भारत सरकार ने ईरान में फंसे हजारों भारतीयों को सुरक्षित निकालने का कार्य तेज़ कर दिया है। राहत की पहली खबर गुरुवार सुबह तब आई, जब 100 से अधिक भारतीय छात्रों का पहला जत्था सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचा।  मिसाइलों के साए से वतन वापसी वतन लौटे छात्रों ने वहां के हालात को दिल दहला देने वाला बताया। एक छात्र यासिर गफ्फार ने बताया, “रात में हमारे ऊपर से मिसाइलें गुजरती थीं, आसमान में धमाके होते थे। हर वक्त डर का माहौल था। लेकिन जैसे ही भारत की ज़मीन पर कदम रखा, एक सुकून महसूस हुआ।” छात्रों का कहना है कि हालात बिगड़ने के साथ ही उनकी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजना शुरू किया। कई छात्रों को पहले उत्तरी ईरान से निकालकर आर्मेनिया पहुंचाया गया, फिर वहां से कतर के रास्ते भारत लाया गया।  जानकारी के मुताबिक भारतीय छात्र 18 जून को एक विशेष फ्लाइट में येरेवन के ज़्वार्टनोट्स अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना हुए थे। विमान 19 जून की सुबह नई दिल्ली में लैंड हुआ। इससे पहले भारत ने ईरान में फंसे लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए ऑपरेशन सिंधु की शुरुआत की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इसकी घोषणा की थी। उन्होंने लिखा, “भारत ने ईरान से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सिंधु शुरू किया है। भारत विदेश में अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।” भारतीय अधिकारियों ने भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए ईरान और अर्मेनिया की मदद की सराहना भी की है। बता दें कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है, जिससे फंसे नागरिकों की मुसीबतें और बढ़ गईं। वहीं आस पास के देशों में भी दर्जनों एयरपोर्ट बंद कर दिए गए हैं। इसके बाद भारत ने नागरिकों की वापसी के लिए ईरान से बॉर्डर तक सुरक्षित रास्ता मुहैया कराने का अनुरोध किया था। ईरान के इस अनुरोध को स्वीकारने के बाद छात्रों को अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के जरिए बाहर निकलने की सलाह दी गई है। भारतीय दूतावास ने ईरान में 24*7 कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है। बता दें कि ईरान में 4,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें से ज्यादातर छात्र हैं।

जंग में कूदने जा रहा है अमेरिका ईरान-इजरायल के बीच, ट्रंप ने दी हमले की योजना को मंजूरी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की योजना को मंजूरी दे दी है. उन्होंने फाइनल आदेश के लिए रुकने को कहा है. ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ एक अहम बैठक की. इस दौरान उन्होंने हमले को मंजूरी दी. उन्होंने कहा कि फाइनल आदेश के बाद हमला किया जाएगा, और इस दौरान उन्होंने यह देखने के लिए कहा कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने के लिए राजी है या नहीं. रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर का हवाला दिया है. रिपोर्ट में मीटिंग में शामिल तीन लोगों ने इस बारे में बताया है. रॉयटर्स ने जिस रिपोर्ट का हवाला दिया है उसमें कहा गया है, “राष्ट्रपति को उम्मीद है कि इजरायल के हमलों में शामिल होने की धमकी से तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ देगा.” ईरान के सुप्रीम लीडर की अमेरिका को चेतावनी ट्रंप की मीटिंग से पहले ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई उनकी धमकियों को नकार चुके हैं, और ट्रंप को ही धमकी दी है कि अगर अमेरिका हमले में शामिल होता है तो उसके “बुरे परिणाम होंगे.” उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी झुकेगा नहीं. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का करारा जवाब दिया जाएगा, जिससे अमेरिका को “अपूरणीय क्षति” होगी. डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे “बिना शर्त सरेंडर” करने की मांग की थी. हालांकि खामेनेई ने कहा, “ईरान, ईरानी राष्ट्र और उसके इतिहास को जानने वाले बुद्धिमान लोग इस राष्ट्र से कभी भी धमकी भरी भाषा में बात नहीं करेंगे, क्योंकि ईरानी राष्ट्र सरेंडर नहीं करेगा.” अमेरिका को एक नई जंग में धकेलने का ट्रंप के समर्थक कर रहे विरोध राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले की मंजूरी तो दे दी है, लेकिन जिन ग्रुप्स ने उन्हें राष्ट्रपति बनने में मदद की, वे नहीं चाहते कि देश को मिडिल ईस्ट की एक नई जंग में धकेला जाए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को सत्ता में लाने वाले समर्थकों के बीच विभाजन पैदा हो गया है. उनके कुछ समर्थकों ने उनसे देश को मिडिल ईस्ट के नए युद्ध में शामिल न करने की अपील की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रंप के कुछ सबसे प्रमुख रिपब्लिकन सपोर्टर्स में शामिल शीर्ष लेफ्टिनेंट स्टीव बैनन ईरान पर हमले के विरोध में हैं. वे नहीं चाहते कि देश को मिडिल ईस्ट की नई जंग में शामिल किया जाए. रिपोर्ट के मुताबिक, वे ट्रंप के देश को आइसोलेट करने वाली नीतियों के समर्थक हैं. ट्रंप और MAGA के समर्थक बैनन ने कहा कि इजरायल को ‘जो शुरू किया था, उसे पूरा करने दें.’ हालांकि, ट्रंप का कहना है कि उनके समर्थक उनसे प्यार करते हैं. रिपब्लिकन पार्टी में कुछ अन्य ऐसे नेता भी हैं जो ईरान के खिलाफ इजरायल के मिलिट्री कैंपेन में अमेरिका को शामिल करने का विरोध कर रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनके कुछ समर्थक “अब थोड़े नाखुश हैं” लेकिन अन्य लोग उनसे सहमत हैं कि ईरान परमाणु शक्ति नहीं बन सकता. ट्रंप ने कहा, “मैं युद्ध नहीं करना चाहता, लेकिन अगर उनके पास लड़ने या परमाणु हथियार रखने के बीच कोई विकल्प है, तो आपको वही करना होगा जो आपको करना है.” नेतन्याहू चाहते हैं ईरान के खिलाफ मिलिट्री कैंपेन में अमेरिका का समर्थन इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू चाहते हैं कि ट्रंप अमेरिका को ईरान के खिलाफ मिलिट्री कैंपेन में शामिल करें और उसके संभावित अंडरग्राउंड हथियार बनाने वाले न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म कर दें. इजरायल की वायु सेना ने पहले दावा किया है कि उसने फॉर्डो न्यूक्लियर साइट समेत, नतांज, इशफहान, कराज जैसे न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए हैं और नुकसान पहुंचाए हैं. इजरायल का दावा है कि इनमें फॉर्डो साइट सबसे अहम है, जहां ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे इजरायली सेना नुकसान नहीं पहुंचा पा रही है. ट्रंप अगर हमले का अंतिम आदेश देते हैं तो संभव है कि अमेरिकी वायु सेना ईरान के अंडरग्राउंड Fordow न्यूक्लियर प्लांट पर B2 बॉम्बर से “बंकर बस्टर” बम गिरा सकती है, जिससे नेतन्याहू को उम्मीद है कि प्लांट को तबाह किया जा सकता है. इस बम का पेलोड 30 हजार पाउंड है, जिससे अंडरग्राउंड फैसिलिटीज को तबाह किया जा सकता है.  

खामेनेई के भतीजे ने किया इस्लामिक शासन खत्म करने का ऐलान, युद्ध के बीच ईरान में पलटी सत्ता

तेहरान  ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और इस बीच खुद ईरान के शासक वर्ग से एक चौंकाने वाली आवाज़ उठी है, वह भी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के परिवार से. फ्रांस में रह रहे खामेनेई के निर्वासित भतीजे महमूद मोरदखानी ने एक साक्षात्कार में कहा कि वह युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि इस्लामिक गणराज्य का अंत ही असली शांति का रास्ता है. मोरदखानी ने कहा, “जो भी इस शासन को मिटा सके, वो ज़रूरी है. अब जब हम यहां तक आ पहुंचे हैं, तो ये करना ही होगा.”  1986 में ईरान छोड़ चुके मोरदखानी अपने चाचा के निरंकुश शासन के कटु आलोचक रहे हैं. उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि इज़राइल से सैन्य टकराव दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन ऐसी व्यवस्था में यह अपरिहार्य है जो न तो झुकती है और न ही सुधार स्वीकार करती है. खत्म हो इस्लामी शासन- मोरदखानी मोरदखानी ने कहा, “मुझे गहरा दुख है कि बात यहां तक पहुंच गई है… लेकिन क्या खामेनेई की हत्या से शासन तुरंत खत्म हो जाएगा? ये अलग सवाल है.”  ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण मोरदखानी अपने लोगों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि “कई ईरानी लोग शासन की कमजोरी के संकेत देखकर खुश हैं.” उन्होंने कहा, “जितनी जल्दी यह खत्म हो, उतना अच्छा है. इसका अंत इस्लामिक गणराज्य के खात्मे से होना चाहिए. वरना यह एक बेकार हार होगी और मेरा अब भी मानना है कि यह शासन बदला जरूर लेगा.”  इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग करते हुए खामेनेई की हत्या को लेकर भी संकेत दिए. उनके सहयोगियों के अनुसार, ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के सैन्य विकल्पों को निजी रूप से मंजूरी दे दी है, हालांकि अंतिम आदेश अब तक नहीं दिया गया है. पूर्व शाह के बेटे रेज़ा पहलवी का तीखा हमला ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रेजा पहलवी ने भी सोशल मीडिया पर शासन बदलाव का आह्वान किया. उन्होंने दावा किया कि खामेनेई “किसी डरे हुए चूहे की तरह अंडरग्राउंड हो गए हैं और इस्लामिक गणराज्य अपने अंत की तरफ है.’ उन्होंने आगे कहा, “इस्लामिक गणराज्य का अंत आ चुका है. जो शुरू हुआ है, वह अब पलटाया नहीं जा सकता. भविष्य उज्जवल है, और हम इतिहास के इस तीखे मोड़ से साथ मिलकर गुजरेंगे. खामेनेई ने हालात पर से नियंत्रण खो दिया है. 46 वर्षों से ईरानी जनता के खिलाफ छेड़े गए युद्ध का अंत इस शासन के अंत से ही होगा.”    

देश के कई इलाकों में भीषण गर्मी के बाद अब भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी

नई दिल्ली देश के कई इलाकों में भीषण गर्मी के बीच अब राहत की बौछारें शुरू हो चुकी हैं। जैसे-जैसे मॉनसून आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बारिश का दायरा भी फैलता जा रहा है। दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में जहां भारी बारिश हो रही है, वहीं दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में प्री-मॉनसून की फुहारों ने मौसम को सुहाना बना दिया है। राजधानी दिल्ली में तेज हवाओं और हल्की बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, और आज के लिए येलो अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। कहां पहुंचा मॉनसून? दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब तक बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो दिनों में यह मॉनसून गुजरात, राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी अरब सागर तक और विस्तार ले सकता है।  राजधानी दिल्ली में प्री-मॉनसून बारिश ने तपती गर्मी से बड़ी राहत दी है। आज शाम या रात के समय गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। अगले तीन दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान और गिर सकता है। इन राज्यों के लिए रेड अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दो लो प्रेशर एरिया सक्रिय हैं — एक बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में दूसरा गुजरात क्षेत्र में इन दबावों के असर से पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। कहां-कहां बरसेंगे बादल?     उत्तर प्रदेश: मध्यम से भारी बारिश की संभावना, कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बौछारें     पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, हरियाणा, राजस्थान: हल्की से मध्यम बारिश     विदर्भ, मराठवाड़ा, तेलंगाना: छिटपुट हल्की बारिश     तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक: गरज के साथ बौछारें    कोंकण, गोवा, केरल, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप: लगातार बारिश की स्थिति     दक्षिण गुजरात: अगले 24 घंटे में बहुत भारी बारिश की चेतावनी  

जैकबबाद के पास रेलवे ट्रैक पर एक धमाका होने के बाद ट्रेन के कम से कम छह डिब्बे पटरी से उतर गए

बलूचिस्तान  पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जैकबबाद के पास बुधवार को जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, रेलवे ट्रैक पर एक धमाका होने के बाद ट्रेन के कम से कम छह डिब्बे पटरी से उतर गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब विस्फोट हुआ तब ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट से लगभग छह फीट रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया। अधिकारियों को संदेह है कि यह विस्फोट रेल लाइन के किनारे लगाए गए एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बम के कारण हुआ। अधिकारियों ने बताया कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और इलाके को सुरक्षित कर लिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल औपचारिक जांच चल रही है। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सशस्त्र बलूच अलगाववादी संगठन बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने जाफर एक्सप्रेस पर हमले के साथ-साथ बलूचिस्तान के चगाई में रेको दिक परियोजना से जुड़े कंटेनरों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली है। समूह के प्रवक्ता दोस्तिन बलूच ने एक बयान जारी कर दावा किया कि यह विस्फोट उनके कार्यकर्ताओं द्वारा जैकोबाबाद मवेशी बाजार के निकट रिमोट-कंट्रोल डिवाइस का इस्तेमाल करके किया गया था। प्रवक्ता ने कहा, “आज के हमले में ट्रेन के छह डिब्बे पटरी से उतर गए। जाफर एक्सप्रेस का इस्तेमाल कब्जे वाली पाकिस्तानी सेना अपने कर्मियों की आवाजाही के लिए करती है और भविष्य में हमारे हमले और भी गंभीर होंगे।” बयान में कहा गया, “हमारा संगठन इन हमलों की जिम्मेदारी लेता है। बलूचिस्तान की आजादी तक हमारे ऐसे हमले जारी रहेंगे।” सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में यात्रियों को, जिनमें बच्चों के साथ परिवार भी शामिल हैं, पटरी से उतरी ट्रेन से सुरक्षित उतरते और अपना सामान निकालते हुए दिखाया गया। पटरी से उतरने के बावजूद, किसी के घायल होने या मौत की खबर नहीं है। उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब जाफर एक्सप्रेस को निशाना बनाया गया है। मार्च में, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के विद्रोहियों ने क्वेटा के पास ट्रेन को हाईजैक कर लिया था, जिसमें सैकड़ों यात्रियों को बंधक बना लिया गया था और दो दर्जन से अधिक सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। सेना ने दावा किया कि हमलावरों को बेअसर करने और बंधकों को बचाने का अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। सुरक्षा सूत्रों ने पुष्टि की कि कम से कम 346 बंधकों को बचा लिया गया तथा लगभग 50 हमलावरों को मार गिराया गया।

इजराइल में जारी संघर्ष और बमबारी से डरा भारतीय युवक, हार्ट अटैक से हुई मौत

इजराइल  इजराइल में जारी संघर्ष और बमबारी के बीच तेलंगाना के एक नागरिक की दुखद मृत्यु हो गई है। मृतक की पहचान जगतियाल जिले के निवासी रवींद्र के रूप में हुई है। रवींद्र विजिट वीजा पर इजराइल गए थे और वहां पार्ट-टाइम काम कर रहे थे। रवींद्र की पत्नी विजयलक्ष्मी ने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद रवींद्र ने उनसे फोन पर बात की थी और बमबारी से भयभीत होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि उनकी जान को खतरा है। विजयलक्ष्मी ने बताया, “हमने उन्हें हिम्मत बंधाई, लेकिन वह बहुत बेचैन थे और ज्यादातर समय अस्पताल में ही बिताते थे।” रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल के पास एक बम धमाके के बाद रवींद्र को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। परिवार को अस्पताल प्रशासन ने इस दुखद घटना की जानकारी दी। सरकार से शव वापस लाने की मांग विजयलक्ष्मी ने तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार से अपील की है कि उनके पति का पार्थिव शरीर भारत वापस लाया जाए। साथ ही उन्होंने अपने बच्चों के लिए रोजगार की भी मांग की है। सरकार ने दिल्ली स्थित तेलंगाना भवन में एक हेल्पलाइन की शुरुआत की है, ताकि इजराइल में फंसे राज्य के अन्य नागरिकों की सहायता की जा सके।  इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव को अब एक हफ्ता हो चुका है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका इस संघर्ष में दखल देता है, तो इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध छिड़ सकता है। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका ने हस्तक्षेप किया तो यह पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है।” पहले अमेरिका संघर्ष से दूरी बनाए हुए था, लेकिन अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में गहरी भागीदारी के संकेत दिए हैं और कहा है कि वे सिर्फ संघर्ष विराम से संतुष्ट नहीं हैं।  

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