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FPI ने बोरा भर-भरकर डाला भारतीय शेयर बाजार में पैसा, तोड़ दिया रिकार्ड

मुंबई फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने शुक्रवार को भी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा और रिकॉर्ड 8,831.1 करोड़ रुपए शेयर बाजार में निवेश किए. 27 मार्च के बाद एफपीआई इनफ्लो का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर शनिवार को आए डेटा में यह जानकारी मिली. इससे पहले एफपीआई ने 5,746.5 करोड़ रुपए शेयर बाजार में निवेश किए थे. मई में किया 18,620 करोड़ रुपए का निवेश नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के डेटा के मुताबिक, मई में अब तक एफपीआई की ओर से 18,620 करोड़ रुपए शेयर बाजार में निवेश किए गए हैं. बीते एक महीने से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में लगातार निवेश कर रहे हैं. अप्रैल में एफपीआई इनफ्लो 4,223 करोड़ रुपए था. इससे पहले के तीन महीनों – जनवरी, फरवरी और मार्च में एफपीआई शुद्ध विक्रेता थे और क्रमश: 78,027 करोड़ रुपए, 34,574 करोड़ रुपए और 3,973 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी. DII भी बने शुद्ध खरीदार, 5,187.1 करोड़ रुपए का किया निवेश विदेशी निवेशकों के अलावा घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) भी शुक्रवार को शुद्ध खरीदार थे और करीब 5,187.1 करोड़ रुपए का निवेश शेयर बाजार में किया. विदेशी और घरेलू निवेशकों की शुद्ध खरीदारी के बाद भी बीते सत्र में बाजार लाल निशान में बंद हुए थे. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 200.15 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,330.59 और निफ्टी 42.30 अंक या 0.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,019.80 पर था. मिडकैप, स्मॉलकैप में देखी गई खरीदारी लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 529.65 अंक या 0.94 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,060.50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 320 अंक या 1.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ 17,560.40 पर था. मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बावजूद भी व्यापक बाजार का रुझान सकारात्मक था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 2,607 शेयर हरे निशान में, 1,380 शेयर लाल निशान में और 139 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए. एचडीएफसी सिक्योरिटीज, वरिष्ठ डेरिवेटिव और तकनीकी अनुसंधान विश्लेषक, नंदीश शाह ने कहा, “निफ्टी का रुझान तेजी का है और लगातार अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज के ऊपर बना हुआ है. फिलहाल निफ्टी के लिए 25,207 एक रुकावट का स्तर है और सपोर्ट 24,800 पर है.”  एफपीआई के साथ-साथ घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 5,187.1 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया। हालांकि विदेशी और घरेलू दोनों निवेशकों की भारी खरीदारी के बावजूद शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 200.15 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,330.59 पर और निफ्टी 42.30 अंक या 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,019.80 पर बंद हुआ। हालांकि लार्जकैप स्टॉक्स में कमजोरी रही, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 529.65 अंक या 0.94 प्रतिशत चढ़कर 57,060.50 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 320 अंक या 1.86 प्रतिशत चढ़कर 17,560.40 पर बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर भी बाजार का व्यापक रुझान सकारात्मक रहा। कुल 2,607 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि 1,380 शेयरों में गिरावट और 139 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ डेरिवेटिव और तकनीकी अनुसंधान विश्लेषक नंदीश शाह ने कहा कि निफ्टी का रुझान अब भी तेजी का है और यह अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि निफ्टी के लिए 25,207 एक प्रमुख रुकावट स्तर है, जबकि 24,800 पर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। -(IANS)  

भारत की जीडीपी ग्रोथ वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में 6.8-7 प्रतिशत रह सकती है : रिपोर्ट

नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में 6.8-7 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इसकी वजह कृषि क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन करना है। शुक्रवार को जारी हुई बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। पूरे वित्त वर्ष के लिए विकास दर 6.2 प्रतिशत से लेकर 6.4 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था उसके वैश्विक समकक्षों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन जारी रखेगी। इसकी वजह मजबूत आधार होना है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में वृद्धि दर 6.4-6.6 प्रतिशत के समान स्तर पर रह सकती है। हालांकि, किसी भू-राजनीतिक संघर्ष और वैश्विक टैरिफ से अनुमानों पर नकारात्मक असर हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में कृषि क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि की उम्मीद है। यह वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही में दर्ज 0.9 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में काफी अधिक वृद्धि होगी। इसकी वजह खाद्यान्न के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि होना है। वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में विकास दर तीसरी तिमाही से अधिक रहने का अनुमान है। सेक्टर्स की ग्रोथ में असमानता रह सकती है। कुछ सेक्टर्स बहुत अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। वहीं, कुछ सेक्टर्स का प्रदर्शन नरम रह सकता है। खनन क्षेत्र की वृद्धि दर वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में 1.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 0.8 प्रतिशत थी। दूसरी ओर, विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि घटकर 1.8 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह वित्त वर्ष 24 की चौथी तिमाही में 11.3 प्रतिशत थी। यह आंशिक रूप से प्रतिकूल आधार और कमजोर कॉर्पोरेट आय के कारण है। बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 8.8 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 26 में अच्छे मानसून के कारण ग्रामीण मांग में उछाल देखने को मिल सकता है। इसके अतिरिक्त नई टैक्स रिजीम में इनकम टैक्स छूट बढ़ने के कारण उपभोक्ता खपत में इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 में कम होती महंगाई दर से वृद्धि दर को बढ़ावा मिलेगा और कमोडिटी की कम कीमतों से विकास दर को सपोर्ट मिलेगा।

भारत के निर्यात में इन 4 सेक्टर्स का 50% से ज्यादा योगदान, रंग ला रही मोदी सरकार की कोशिशें

नई दिल्ली साल 2024-25 में भारत के निर्यात में कृषि, दवाएं, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सेक्टर ने बड़ी भूमिका निभाई। इन चारों क्षेत्रों ने मिलकर कुल निर्यात का 50% से ज्यादा योगदान दिया। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि माेदी सरकार की देश का उत्पादन और निर्यात बढ़ाने की कोशिशें रंग ला रही हैं। यहां हर सेक्टर का हाल जानिए इंजीनियरिंग सेक्टर: पीटीआई के मुताबिक इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात सालाना आधार पर 6.74 प्रतिशत बढ़कर 116.67 अरब डॉलर हो गया। यह सबसे आगे रहा, जो कुल निर्यात (437.42 अरब डॉलर) का 26.67% हिस्सा है। इंजीनियरिंग सामानों के लिए मुख्य निर्यात गंतव्य अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब, ब्रिटेन और जर्मनी रहे। पिछले 3 सालों से यह 100 अरब डॉलर के पार बना हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स : सबसे अधिक 32.46 प्रतिशत की निर्यात वृद्धि दर्ज की गई जो 2023-24 में 29.12 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 38.58 अरब डॉलर हो गया। यह वित्त वर्ष 2022-23 में 23.6 अरब डॉलर और 2021-22 में 15.7 अरब डॉलर था। इसमें कंप्यूटर हार्डवेयर तथा पेरिफेरल्स (जिसकी इस क्षेत्र में 3.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है) में 101 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो 0.7 अरब डॉलर से दोगुना होकर 1.4 अरब डॉलर हो गया। इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए मुख्य गंतव्य संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका, नीदरलैंड, ब्रिटेन और इटली थे। दवाएं और फार्मा: इस सेक्टर का निर्यात 9.4% बढ़कर 30.47 अरब डॉलर हुआ। अमेरिकी डॉलर से अधिक बना हुआ है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत की दवाएं एवं औषधि अब 200 से अधिक देशों तक पहुंच रही हैं। कृषि और समुद्री उत्पाद: 2023-24 में 4.25 अरब डॉलर से 2024-25 में मसालों का निर्यात मामूली रूप से बढ़कर 4.45 अरब डॉलर हो गया। प्रमुख निर्यात गंतव्यों में चीन, अमेरिका, यूएई, बांग्लादेश और थाईलैंड शामिल हैं, जहां मिर्च, जीरा, हल्दी और अदरक जैसे उत्पाद का निर्यात सबसे अधिक किया गया। इसमें 7.36% बढ़ोतरी के साथ 51.86 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। मसालों में थोड़ी बढ़त (4.45 अरब), कॉफी निर्यात छलांग (1.81 अरब), चावल ने रिकॉर्ड तोड़ा (12.5 अरब डॉलर)। भारत ने दो श्रेणियों के तहत अंगूर, अनार, आम, केले, संतरे, प्याज, आलू, टमाटर, मिश्रित सब्जियां और हरी मिर्च का निर्यात किया। बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, नेपाल और मलेशिया सबसे बड़े आयातक में शामिल थे। कुछ दिलचस्प आंकड़े भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक है, जिसके प्रमुख निर्यात गंतव्यों में यूएई, बेल्जियम, इंडोनेशिया, मिस्र, अमेरिका और तुर्किऐ शामिल हैं।2024-25 में 1.98 अरब डॉलर का निर्यात।  समुद्री उत्पाद अब 130 देशों में जाते हैं (2014-15 में 105)। चावल निर्यात में भारत का दबदबा: वैश्विक बाजार का 40% हिस्सा। भारत का चावल निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में 12.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 2023-24 में 10.4 अरब डॉलर था। इससे देश लगभग 40 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ शीर्ष वैश्विक निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखेगा। इसके प्रमुख गंतव्यों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई, अमेरिका और यमन शामिल थे। सरकार का कहना है कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि अलग-अलग सेक्टर में भारत की ताकत बढ़ रही है। निर्यात बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो रहा है।

भारत का व्यापार घाटा अप्रैल में बढ़कर 26.42 अरब डॉलर हुआ, निर्यात में 9 प्रतिशत की उछाल

नई दिल्ली अप्रैल 2025 में भारत का निर्यात 12.7% बढ़कर 73.80 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि आयात 15.7% की वृद्धि के साथ 82.45 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि ने व्यापार घाटे को 50% बढ़ाकर 8.65 अरब डॉलर कर दिया। भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ आयात निर्यात में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में भारत का कुल निर्यात 73.80 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले साल इसी महीने के 65.48 बिलियन अमरीकी डॉलर से 12.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि आयात और भी तेज़ गति से बढ़ा है, अप्रैल 2025 में कुल आयात बढ़कर 82.45 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया, जो अप्रैल 2024 में 71.25 बिलियन अमरीकी डॉलर से 15.7 प्रतिशत की वृद्धि है। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि हम 2024-25 में 825 बिलियन अमरीकी डॉलर के निर्यात के आंकड़े तक पहुँच गए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा निर्यात है। इससे पता चलता है कि भारतीय निर्यात और निर्यातकों ने अब अपने व्यवसाय में वह लचीलापन हासिल कर लिया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, निर्यात और आयात में अंतर के कारण, भारत का कुल व्यापार घाटा चालू वर्ष में बढ़कर 8.65 अरब डॉलर हो गया। यह एक साल पहले के 5.77 अरब डॉलर से 50 फीसदी की जबरदस्त तेजी है। बता दें कि मार्च में व्यापार घाटा बढ़कर 21.54 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया, जो फरवरी में तीन साल के निचले स्तर 14.05 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक था। भारत के सभी निर्यात (माल और सेवाएँ) ने भी मार्च 2025 में स्थिर वृद्धि दर्ज की है, जिसमें निर्यात और आयात दोनों में साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की गई है। आधिकारिक डेटा के अनुसार कुल निर्यात मार्च 2024 में बढ़कर 73.61 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया, जो मार्च 2024 में 71.71 बिलियन अमरीकी डॉलर था। आयात बढ़ने से बढ़ा व्यापार घाटा इलेक्ट्रॉोनिक का निर्यात 39.52 प्रतिशत से बढ़कर 3.69 हो गया. इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 11.28 प्रतिशत 9.51 अरब डॉलर का हो चुका है. इसी तरह क्रूड ऑयल में अप्रैल के महीने में आयात 25.6 प्रतिशत इजाफे के साथ 20.7 अरब डॉलर हो गया है. तो वहीं सोने का आयात 4.86 प्रतिशत और बढ़कर 3.09 अरब डॉलर का हो चुका है. आंकड़ों के मुताबिक, सेवा निर्यात का मूल्य अप्रैल के महीने में में 35.31 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने के दौरान 30.18 अरब डॉलर था. जबकि सेवाओं के आयात का अनुमानित मूल्य अप्रैल 2025 में 17.54 अरब डॉलर था, जबकि पिछले साल अप्रैल में ये 16.76 अरब डॉलर था. और बढ़ सकता है एक्सपोर्ट कॉमर्स सेक्रेटरी सुनील बर्थवाल का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि भारत अपने एक्सपोर्ट की रफ्तार इसी तरह से बनाकर रखेगा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ये एक अच्छा साल साबित होगा. उन्होंने कहा कि बीस देशों और 6 वस्तुओं पर ध्यान फोकस करने की रणनीति के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं. इसके साथ ही, वाणिज्य मंत्रालय इस पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगा. उन्होंने कहा कि कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जल्दी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने जा रहे हैं.

सोने की कीमत में बड़ी गिरावट, चांदी भी हो गई काफी सस्ती, जान लीजिए लेटेस्ट दाम

मुंबई सोने की कीमतों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। सोने के घरेलू और वैश्विक दोनों भाव गुरुवार सुबह गिरावट के साथ लाल निशान पर ट्रेड करते दिखाई दिए। एमसीएक्स एक्सचेंज पर भी सोना लाल निशान पर बना हुआ था। शुरुआती कारोबार में एमसीएक्स पर 5 जून 2025 की डिलीवरी वाना सोना  0.69 फीसदी या 636 रुपये की गिरावट के साथ 91,629 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखाई दिया। सोने के साथ ही चांदी की कीमतों में भी आज गिरावट आई है। गुरुवार सुबह वैश्विक और घरेलू दोनों बाजारों में चांदी लाल निशान पर ट्रेड करती दिखी। चांदी में भी बड़ी गिरावट सोने के साथ ही चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। एमसीएक्स एक्सचेंज पर गरुवार सुबह चांदी लाल निशान पर ट्रेड करती दिखी। शुरुआती कारोबार में 4 जुलाई 2025 की डिलीवरी वाली चांदी 1.06 फीसदी या 1009 रुपये की गिरावट के साथ 94,457 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती दिखाई दी। सोने का वैश्विक भाव सोने की वैश्विक कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। कॉमेक्स पर सोने का वैश्विक भाव 0.94 फीसदी या 30.10 डॉलर की गिरावट के साथ 3,158.20 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया। वहीं, सोने का वैश्विक हाजिर भाव 0.76 फीसदी या 23.70 डॉलर का गिरावट के साथ 3,153.55 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया। चांदी का वैश्विक भाव सोने के साथ ही चांदी की वैश्विक कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर चांदी का भाव गुरुवार सुबह 1.31 फीसदी या 0.42 डॉलर की गिरावट के साथ 32.02 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया। वहीं, सिल्वर स्पॉट 1.03 फीसदी या 0.33 डॉलर की गिरावट के साथ 31.89 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।

सेंसेक्स 1200 अंक चढ़ा, निफ्टी 25050 के पार, ऑटो,मेटल शेयरों में तेजी

मुंबई  हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन आज यानी गुरुवार (15 मई) को शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सुबह 500 से ज्यादा अंक की गिरावट के बाद अब सेंसेक्स 1000 अंक उछला है। निफ्टी ने भी 25,000 के स्तर क्रास कर लिया है। इस समय सेंसेक्स 1200 अंक की तेजी के साथ 82,530 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी 385 अंक की तेजी है, ये 25,052 के स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने अमेरिका को एक व्यापार समझौता प्रस्तावित किया है, जिसमें अमेरिकी वस्तुओं पर “लगभग शून्य शुल्क” लगाने की बात कही गई है। इस घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। शेयर बाजार में उछाल: इस खबर के प्रभाव से बीएसई सेंसेक्स में 1200 अंकों से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि एनएसई निफ्टी भी 385 अंकों से अधिक चढ़ गया। यह उछाल निवेशकों के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार की उम्मीदों के कारण देखा गया। 81000 के नीचे फिसल गया था सेंसेक्स शेयर मार्केट में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट के साथ Sensex 81,000 के नीचे लुढ़क गया था. जी हां, बीएसई सेंसेक्स सुबह 9.15 बजे पर 81,354.43 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ मिनटों में ही ये पहले 250 अंक टूटा और अगले 15 मिनट में 560 अंक टूटकर 80,773 पर कारोबार करता हुआ दिखाई दिया. सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी भी खुलने के साथ ही फिसलता चला गया. ये इंडेक्स 24,694.45 पर ओपन हुआ और फिर गिरकर 24,515 पर आ गया. अचानक भागने लगे दोनों इंडेक्स बाजार में ये शुरुआती गिरावट दोपहर 1 बजते-बजते तेजी में तब्दील हो गई. लार्जकैप कंपनियों के शेयर, जो ओपनिंग में रेड जोन में थे अचानक भागते हुए ग्रीन जोन में कारोबार करने लगे. खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 1273 अंक चढ़कर 82,607 के लेवल पर कारोबार कर रहा था. तो दूसरी ओर एनएसई का निफ्टी 390 अंकों की तेजी के साथ 25,057.65 पर पहुंच गया. इस दौरान स्टील, ऑटो और आईटी शेयरों ने बाजार को जोरदार सपोर्ट दिया. इन बड़े शेयरों ने बदली बाजार की चाल बात करें सबसे ज्यादा भागने वाले शेयरों के बारे में, तो Tata Motors Share (3.70%), HCL Tech Share (3.10%), Adani Ports Share (2.50%), Eternal Share (2.10%), Nestle India Share (1.75%) और Reliance Share (1.50%) तक उछलकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा Maruti, Titan, M&M, ICICI Bank, Tech Mahindra, Tata Steel, HDFC Bank और Bharti Airtel के शेयर भी 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. मिडकैप और स्मॉलकैप का ये हाल अब बात करें, Mdcap-Smallcap शेयरों की, तो मिडकैप कैटेगरी में Linde India Share (4.37%), KPI Tech Share (3.05%), Yes Bank Share (3%), Mazgaon Dock Share (2.65%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे. तो वहीं स्मॉलकैप में Nelcast Share (19.99%), BLSE Share (15.26%) और Yatra Share (1.34%) चढ़कर कारोबार कर रहे थे.

अमेजन, फ्ल‍िपकार्ट समेत इन ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस, पाकिस्तानी झंडे वाले प्रोडक्‍ट हटाने होंगे

नई दिल्‍ली  उपभोक्ता संरक्षण नियामक सीसीपीए ने अमेजन इंडिया और फ्लिकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को पाकिस्तानी झंडे वाले उत्पाद हटाने का आदेश दिया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को यह जानकारी दी। सीसीपीए ने यूबाय इंडिया, एट्सी, द फ्लैग कंपनी और द फ्लैग कॉरपोरेशन को भी नोटिस भेजा है। इन कंपनियों को पाकिस्तानी झंडे और संबंधित सामान बेचने से मना किया गया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। उन्होंने कहा, ‘ऐसी असंवेदनशीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ई-कॉमर्स मंचों को निर्देश दिया जाता है कि वे ऐसी सभी सामग्री को तुरंत हटा दें और राष्ट्रीय कानूनों का पालन करें।’ इसका मतलब है कि सरकार इस तरह के उत्पादों को बेचने की अनुमति नहीं देगी। सरकार चाहती है कि ई-कॉमर्स कंपनियां तुरंत इन उत्पादों को हटा दें और देश के कानूनों का पालन करें। यह आदेश ई-कॉमर्स कंपन‍ियों के ल‍िए चेतावनी हालांकि, मंत्री के पोस्ट में यह साफ नहीं किया गया कि कौन सा कानून तोड़ा जा रहा है। यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तानी झंडे वाले सामान को बेचने से किस कानून का उल्लंघन हो रहा है। यह घटनाक्रम कश्मीर के पहलगाम में हुई एक दुखद घटना के बाद हुआ है। पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 लोगों को मार डाला था। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। सीसीपीए का यह आदेश ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए चेतावनी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर कोई भी ऐसा उत्पाद न बेचा जाए जो देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाए या कानून का उल्लंघन करे। सरकार ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करेगी। ई-कॉमर्स कंपन‍ियों को रहना होगा सावधान यह मामला दिखाता है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले उत्पादों के बारे में कितना सावधान रहना चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी भी तरह से देश के कानूनों और भावनाओं का उल्लंघन न करें। यह आदेश देश की राष्ट्रीय भावना के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान को दर्शाता है। पाकिस्तानी झंडे जैसे प्रतीकों की बिक्री को भारत में कई लोग आपत्तिजनक और राष्ट्रविरोधी मान सकते हैं, खासकर मौजूदा भू-राजनीतिक संदर्भ में और पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद। ऐसे उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी चिंताजनक हो सकती है। हालांकि, यह प्रत्यक्ष रूप से सुरक्षा को खतरा नहीं पहुंचाता, लेकिन यह शत्रुतापूर्ण भावनाओं को बढ़ावा दे सकता है। यह आदेश ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी यह जिम्मेदारी डालता है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे उत्पादों की प्रकृति के प्रति अधिक सतर्क रहें और यह सुनिश्चित करें कि वे स्थानीय कानूनों और भावनाओं का उल्लंघन न करें।

दिल्ली-एसीआर में Vodafone Idea ने आज से शुरू की 5G सर्विस

नई दिल्ली वोडाफोन आइडिया (Vi) आज 15 मई से दिल्ली-NCR में अपनी हाई-स्पीड 5G सर्विस की शुरुआत करने जा रही है। कंपनी ने इस घोषणा के साथ दिल्ली को उन शहरों की लिस्ट में शामिल कर लिया है, जहां पहले फेज में Vi ने 5G लॉन्च किया है। इससे पहले यह सेवा मुंबई, चंडीगढ़ और पटना जैसे शहरों में शुरू की जा चुकी है। Vi का लक्ष्य है कि अगस्त 2025 तक वह देश के उन सभी 17 सर्किलों में 5G नेटवर्क उपलब्ध करा दे जहां उसके पास 5G स्पेक्ट्रम मौजूद है। Vi अपने यूजर्स को एक आकर्षक इंट्रोडक्टरी ऑफर दे रहा है जिसके तहत जिनके पास 5G-सपोर्टेड डिवाइस हैं, वे 299 रुपये या उससे ऊपर के प्लान पर अनलिमिटेड 5G डेटा का लाभ उठा सकते हैं। Vi 5G यूजर्स अब हाई-स्पीड नेटवर्क का इस्तेमाल स्ट्रीमिंग, गेमिंग, वीडियो कॉलिंग, फास्ट डाउनलोड्स और रीयल-टाइम क्लाउड एक्सेस जैसे कामों के लिए कर सकेंगे। Airtel और Jio पहले से आगे Vi अब दिल्ली में 5G सर्विस शुरू कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ Jio और Airtel पहले ही दिल्ली समेत देश के कई शहरों में 5G सेवा दे रहे हैं। Vi को प्रतिस्पर्धी प्लेयर्स की तरह तेजी से विस्तार करना होगा। Vi के 5G प्लान्स Vi फिलहाल मुंबई में अपने 5G यूजर्स के लिए कुछ किफायती प्लान्स ऑफर कर रही है। इनमें शामिल हैं: 299 रुपये का प्रीपेड प्लान: Vi के इस प्लान में 1GB प्रतिदिन डेटा, अनलिमिटेड 5G डेटा, 28 दिन की वैधता और किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलती है। 579 रुपये का प्रीपेड प्लान: इस प्लान में 1.5GB प्रतिदिन डेटा, अनलिमिटेड 5G डेटा, 56 दिन की वैधता और अनलिमिटेड कॉलिंग। 451 रुपये का पोस्टपेड प्लान: जहां 5G उपलब्ध है वहां अनलिमिटेड 5G डेटा, 50GB डेटा, हर महीने 3000 SMS और अन्य बेनिफिट्स पोस्टपेड यूजर्स के लिए उपलब्ध हैं।  

बिना गिरवी वाले कर्ज में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ रहा, RBI नियमों को और सख्त करने की तैयारी में

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बिना गिरवी रखे दिए जाने वाले व्यक्तिगत कर्ज, जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड के नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है। बिना गिरवी वाले कर्ज में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ रहा है। इससे आरबीआई चिंतित है। नवंबर 2023 में RBI ने इन कर्जों पर रिस्क वेट 100% से बढ़ाकर 125% कर दिया था, लेकिन अब और कड़े कदम जरूरी हैं। क्रेडिट स्कोर के आधार पर लोन: आरबीआई ने बैंकों को अपनी कर्ज देने की नीतियों को सख्त करने के निर्देश दिए हैं। कर्ज लेने वालों की क्रेडिट स्कोर के आधार पर ऋण की अधिकतम सीमा तय करना होगा। अगर कोई व्यक्ति पहले से होम लोन या ऑटो लोन ले चुका है, तो बैंकों को पर्सनल लोन देते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। रिटेल लोन के तेजी से बढ़ने से आरबीआई चिंतित: बैंकों से बातचीत के आधार पर एनडीटीवी प्रॉफिट को पता चला है कि RBI को रिटेल लोन के तेजी से बढ़ने और इसमें छिपे जोखिमों को लेकर चिंता है। मार्च 2024 में पर्सनल लोन में वार्षिक वृद्धि 14% रही (पिछले साल इसी समय 17.6% थी)। प्राइवेट बैंक अभी भी तेजी से ये कर्ज दे रहे हैं, जबकि सरकारी बैंकों का फोकस कम है। RBI की रिपोर्ट का अहम बिंदु: दिसंबर 2023 की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट बैंकों में कर्ज माफ करने (राइट-ऑफ) की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो जोखिम का संकेत है। आरबीआई का अगला कदम: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही (अगले 15 दिनों में) इन नए दिशा-निर्देशों का ड्राफ्ट जारी कर सकता है। बैंकों से अपेक्षा है कि वे इन कर्जों को लेकर अधिक सतर्कता बरतेंगे और केवल योग्य उधारकर्ताओं को ही ऋण देंगे। आरबीआई का यह कदम आम लोगों को जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने से रोकने और बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए है। एक से ज्यादा पर्सनल लोन लेना अब आसान नहीं! अब पर्सनल लोन (Personal Loan) लेने वालों के लिए मल्टीपल लोन लेना मुश्किल होने वाला है. RBI ने एक नया नियम लागू कया है, जिससे कर्ज लेने और देने दोनों में बड़ा बदलाव आने वाला है. इस नियम के मुताबिक अब लेंडर्स को क्रेडिट ब्यूरो में लोन की जानकारी 1 महीने की जगह 15 दिन के अंदर अपडेट करनी होगी. इससे कर्ज देने वालों को डिफॉल्ट और पेमेंट रिकॉर्ड की सटीक जानकारी जल्दी मिल सकेगी. इससे कर्ज लेने वालों के जोखिम का बेहतर आकलन हो सकेगा और मल्टीपल लोन लेने वालों पर लगाम लगाई जा सकेगी. मल्टीपल लोन (Multiple Loan) पर लगेगी रोक! अगस्त 2024 में जारी किए गए इन निर्देशों को 1 जनवरी 2025 से लागू किया गया है. रिजर्व बैंक का मानना है कि इससे कर्ज देने वालों को रिस्क मैनेजमेंट में मदद मिलेगी. अभी तक EMI चुकाने की तारीखें अलग-अलग होने की वजह से महीने में एक बार रिपोर्टिंग करने से पेमेंट रिकॉर्ड में 40 दिनों की देरी हो सकती थी. लेकिन अब हर 15 दिन में अपडेट होने से ये देरी खत्म हो जाएगी और कर्ज देने वालों को असल समय में जानकारी मिलेगी. कुल मिलाकर अब EMI रिपोर्टिंग में देरी कम होगी और पेमेंट-डिफॉल्ट की सही जानकारी जल्दी मिलेगी. मल्टीपल कर्ज लेने की आदत लगाम! मल्टीपल कर्ज लेने की आदत पर भी ये नियम लगाम लगाएगा. नए लोन लेने वालों को कई जगहों से ज्यादा लोन मिल जाते हैं जो उनकी चुकाने की क्षमता से ज्यादा होता है. बैंकों ने ही रिकॉर्ड को ज्यादा बार अपडेट करने का सुझाव दिया था, जिससे कर्ज लेने वालों की सही जानकारी उपलब्ध हो सके. अब अगर कोई शख्स मल्टीपल लोन लेता है और उसकी EMI अलग-अलग तारीखों पर होती है, तो उसकी आर्थिक गतिविधियां 15 दिनों के अंदर क्रेडिट ब्यूरो के सिस्टम में दिखाई देंगी. इससे कर्ज देने वालों को कर्ज लेने वालों की आर्थिक स्थिति का सटीक और ताजा डेटा मिलेगा. ‘एवरग्रीनिंग’ पर रोक लगेगी! लेंडर्स का मानना है कि इस बदलाव से ‘एवरग्रीनिंग’ जैसी हरकतों पर भी रोक लगेगी. इसमें कर्ज लेने वाले पुराने कर्ज नहीं चुका पाने पर नया कर्ज ले लेते हैं, जिससे उनकी असल स्थिति छिपी रहती है. रिपोर्टिंग समय घटाने से क्रेडिट ब्यूरो और लेंडर्स को ज्यादा भरोसेमंद डेटा मिलेगा और कर्ज देने का सिस्टम मजबूत होगा. RBI के इस नए नियम से कर्ज देने का सिस्टम और ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनेगा और ये देखना दिलचस्प होगा कि इससे लोन लेने वालों पर क्या असर पड़ता है. पर्सनल लोन के फायदे व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan) का लाभ उठाना आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक नायाब सुविधा बन गया है. इसका प्रमुख फायदा यह है कि इसे बिना किसी गारंटी के लिया जा सकता है. पर्सनल लोन  की विशेषता यह है कि इसका इस्तेमाल अनेकों आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है, जैसे कि आपातकालीन चिकित्सा खर्च, शिक्षा, शादी, घर की मरम्मत या अन्य व्यक्तिगत जरूरतें. पर्सनल लोन आसानी से मिल जाता है. अधिकतर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा होती है, जिससे समय की बचत होती है और दस्तावेजी प्रक्रिया भी सरल हो जाती है. इसके अलावा, ऋण राशि भी कुछ ही दिनों में आपके खाते में ट्रांसफर हो जाती है, जिससे आपकी आवश्यकताओं को त्वरित रूप से पूरा किया जा सकता है. Personal Loan के नकारात्मक पहलू जब पैसों की तात्कालिक जरूरत होती है, तो अधिकतर लोग पर्सनल लोन की तरफ भागते हैं, क्योंकि आसानी से मिल जाता है. पर्सनल लोन को सबसे बड़ा निगेटिव प्वाइंट्स ये है कि इसका ब्याज काफी ज्यादा होता है. पर्सनल लोन का टेन्योर बहुत कम होता है, और किसी कारण से समय पर भुगतान नहीं करने से बैंक मजबूरी का फायदा उठाता है. बिना सूझ-बूझ के पर्सनल लोन से आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है. यही नहीं, अगर आपने समय पर EMI नहीं चुकाई, तो यह आपके क्रेडिट स्कोर को भी बिगाड़ सकता है.  

भारत की एक कंपनी से भी छोटा है पाकिस्तान का पूरा शेयर बाजार, जानिए कैसे किया यह कमाल!

मुंबई बीते कुछ दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की वजह से दोनों देश के स्टॉक एक्सचेंज उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरे हैं। इस दौरान भारत के मुकाबले पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज की हालत बदतर हो गई थी। हालात ये हो गए कि पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग कुछ देर के लिए बंद करनी पड़ी। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज की ऐतिहासिक गिरावट की वजह से मार्केट कैपिटल भी गिर गया। स्थिति ये है कि भारत की कई बड़ी कंपनियों का मार्केट कैपिटल पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज से ज्यादा है। किस कंपनी का कितना मार्केट कैपिटल अकेले मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैपिटल पाकिस्तान के कुल कैपिटल से कई गुना अधिक है। सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर की कीमत 1415 रुपये के स्तर पर थी। वहीं, मार्केट कैपिटल करीब 19.17 लाख करोड़ रुपये पर है। एचडीएफसी बैंक के शेयर की कीमत 1923.10 रुपये पर है। वहीं, मार्केट कैपिटल 14.75 लाख करोड़ रुपये है। टाटा की कंपनी टीसीएस के शेयर मंगलवार को 3515 रुपये पर थे। वहीं, मार्केट कैपिटल 12.73 लाख करोड़ रुपये था। इसी तरह, एयरटेल और आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैपिटल क्रमश: 10.38 लाख करोड़ रुपये और 10.20 लाख करोड़ रुपये है। ये सभी आंकड़े भारतीय रुपये में हैं। बता दें कि इंफोसिस समेत कई अन्य लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटल भी पाकिस्तन स्टॉक एक्सचेंज से ज्यादा है। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का हाल भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम होने के बाद अब पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज रिकवरी मोड में है। बीते सोमवार को इस स्टॉक एक्सचेंज में करीब 9.5 प्रतिशत की रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई। मंगलवार को भी निवेशकों का भरोसा बरकरार रहा और एक्सचेंज ने 1.5 प्रतिशत की छलांग लगाई। मंगलवार को कराची स्टॉक एक्सचेंज 1,18,700 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा था। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैपिटल बढ़कर ₹15 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये के पार पहुंच गया है। आपको बता दें कि 1 पाकिस्तानी रुपये भारत के 0.30 पैसे के बराबर हैं। इस आधार पर देखें तो पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैपिट 4.55 लाख करोड़ भारतीय रुपये के करीब है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार भारत में 5,000 से अधिक लिस्टेड कंपनियां हैं। वहीं, पाकिस्तान में केवल 600 से भी कम कंपनियां सूचीबद्ध हैं। भारतीय शेयर बाजार 5 ट्रिलियन डॉलर के वैल्युएशन के साथ मार्केट कैपिटल के मामले में दुनिया भर में शीर्ष मार्केट में से एक है। पिछले सप्ताह किस कंपनी का क्या हाल बीते सप्ताह मार्केट कैपिटल के लिहाज से शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। इसके बाद क्रमश: एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस और आईटीसी का स्थान रहा। भारत से 250 गुना छोटा है पाकिस्तान का शेयर बाजार सबसे पहले आंकड़ों की बात करें तो, भारत के शेयर बाजार की गिनती आज दुनिया के टॉप 5 शेयर बाजारों में होती है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप आज करीब 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की तरफ देखें, तो ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, कराची स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप इस समय सिर्फ 20.36 अरब डॉलर है। यानी भारत का शेयर बाजार पाकिस्तान के मुकाबले करीब 250 गुना ज्यादा बड़ा है। भारतीय शेयर बाजार में जहां 5000 से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं, वहीं पाकिस्तान में ये संख्या महज 500 के आसपास है। इससे साफ है कि भारतीय बाज़ार में कंपनियों की विविधता और निवेश के मौके पाकिस्तान के मुकाबले काफी अधिक हैं। भारत का शेयर बाजार केवल विदेशी निवेशकों पर ही निर्भर नहीं है। भारतीय बाजार को मजबूत बनाते हैं यहां के घरेलू निवेशक, रिटेल निवेशक और SIP जैसे निवेश के साधन, जिससे बाजार को किसी भी उतार-चढ़ाव के समय स्थिरता यानी सपोर्ट देते हैं। इससे बाजार में पैनिक सेलिंग बहुत कम देखने को मिलती है। वहीं पर पाकिस्तान का शेयर बाजार ज्यादा भावनात्मक और कम लिक्विडिटी वाला माना जाता है। ऐसे में किसी भी जियोपॉलिटिकल घटना का असर वहां तुरंत और तेजी से दिखता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से ही पाकिस्तान का शेयर बाजार बुरी तरह हिल हुआ है। कराची स्टॉक मार्केट में आज 8 मई को कुछ देर के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। उसका KSE-30 इंडेक्स एक झटके में 7.2 फीसदी टूट गया। वहीं उसके सबसे प्रमुख इंडेक्स, KSE-100 में 9 फीसदी की भारी गिरावट आई। साल 2008 के बाद यह पहली बार है, जब कराची स्टॉक मार्केट में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली। इससे पहले 7 मई को भी पाकिस्तानी शेयर बाजार में हाहाकार की स्थिति रही। KSE-100 इंडेक्स 7 मई को कारोबार के दौरान 6500 अंक या करीब 6 फीसदी टूटकर बंद हुए। यह भी कराची स्टॉक मार्केट में साल 2021 की सबसे बड़ी गिरावट थी। यह गिरावट आई भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, जिसके तहत सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद 9 आंतकी ठिकानों को नेस्तानाबूत करके पहलगाम हमले का बदला लिया। भारत की इस कार्रवाई में 100 आंतकियों के मारे जाने की खबरें हैं। अब बात करते हैं भारत के शेयर बाजार की। भारत के शेयर बाजार ने पिछले 2 दिनों में काफी स्थिरता दिखाई है। बीएसई सेंसेक्स आज 8 मई को जरूरत 400 अंक टूटकर बंद हुआ। लेकिन इस पहले 7 मई को इसमें 105 अंकों की तेजी देखने को मिली थी। निफ्टी भी 34 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ था। आज के कारोबार के पहले हाफ दोनों इंडेक्स लगभग सपाट कारोबार कर रहे थे। यानी सीमा पर तनाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार अभी तक स्थिर और भरोसेमंद बना हुआ है। 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान का KSE 100 इंडेक्स अब तक करीब 13 फीसदी गिर चुका है। वहीं पर KSE-30 इंडेक्स में 14 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि दूसरी ओर सेंसेक्स और निफ्टी इस दौरान लगभग एक फीसदी ऊपर हैं। भारत और पाकिस्तान के शेयर बाजार के रिटर्न की बात करें तो, पिछले 2 साल पाकिस्तान के लिए अच्छे रहे हैं। लेकिन बाकी सालों में अधिकतर बार भारतीय शेयर बाजार ने ही अच्छा … Read more

स्टॉक मार्केट में गिरावट पर ब्रेक… सेंसेक्स खुलते ही 400 अंक उछला, ये 10 स्टॉक बने रॉकेट

मुंबई भारत और पाकिस्तान में सीजफायर (India-PAK Ceasefire) होने के बाद भारतीय शेयर बाजार (Stock Market India) में तगड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इस सप्ताह के पहले कारोबारी दिन जहां ताबड़तोड़ तेजी आई, तो अगले ही दिन सेंसेक्स-निफ्टी भरभराकर टूटे. वहीं सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार की बात करें, तो मार्केट की ओपनिंग ग्रीन जोन में हुई और बीते दिन की गिरावट पर ब्रेक लगा नजर आया. एक ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (BSE Sensex) खुलने के साथ ही 400 अंक से ज्यादा उछल गया, तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी (NSE Nifty) ने 120 अंक चढ़कर कारोबार की शुरुआत की. इस दौरान टाटा स्टील का शेयर (Tata Steel Share) छलांग लगाता हुआ नजर आया. Sensex-Nifty की तेज शुरुआत बुधवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स (Sensex) अपने पिछले बंद 81,148.22 की तुलना में उछलकर 81,278.49 के लेवल पर खुला और कुछ ही मिनट में ये 415 अंक की तेजी लेकर 81,564.41 पर कारोबार करता हुआ नजर आया. बात अगर निफ्टी (Nifty) की करें, तो इसने भी अपने पिछले बंद 24,578.35 के लेवल से छलांग लगाते हुए 24,613.80 पर कारोबार शुरू किया और सेंसेक्स की तरह ही मिनटों में तेज रफ्तार पकड़ते हुए 143 अंक चढ़कर 24,721.70 पर कारोबार करने लगा. 438 शेयर जोरदार तेजी के साथ ओपन मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच Share Market की शानदार ओपनिंग हुई र शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 438 कंपनियों के शेयरों ने ग्रीन जोन में जोरदार शुरुआत की. इसके अलावा लगभग 100 शेयर ऐसे रहे, जो अपने पिछले बंद के मुकाबले गिरावट लेकर खुले, जबकि 32 कंपिनयों के शेयरों में कोई चेंज देखने को नहीं मिली. निफ्टी पर Tata Steel, Bharti Airtel, Shriram Finance, Tech Mahindra, JSW Steel शुरुआती कारोबार में सबसे तेज भागने वाले स्टॉक्स में शामिल रहे, तो वहीं Tata Motors, Cipla, Hero MotoCorp, Asian Paints और Eicher Motors ने खराब शुरुआत की. ये 10 शेयर टॉप गेनर अगर शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेज भागने वाले शेयरों की बात करें, तो लार्जकैप कंपनियों में Tata Steel Share 4.38% की उछाल के साथ पहले नंबर पर रहा और इसका भाव 156.05 रुपये पर पहुंच गया. इसके अलावा Bharti Airtel Share (2.47%), Tech Mahindra Share (1.11%) की तेजी के साथ ट्रेड करता नजर आया. HDFC Bank, Reliance और Adani Ports के शेयर भी ग्रीन जोन में ओपन हुए, हालांकि इनकी रफ्तार धीमी रही. मिडकैप कंपनियों में सबसे ज्यादा तेजी  Glaxo Share (7.65%) में रही, इसके अलावा ABCApital Share (4.82%), Mazgaon Dock Share (3.83%), MFSL Share (3.47%), SAIL Share (3.32%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहा था. इसके अलावा स्मॉलकैप कंपनियों में Indorama Share (19.98%), जबकि GSRE Share (11.49%) की बढ़त लेकर कारोबार कर रहा था. कल फिसला था शेयर बाजार बीते कारोबारी दिन मंगलवार को शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी और सेंसेक्स-निफ्टी बुरी तरह टूटे थे. सेंसेक्स ने 82,249.60 के लेवल पर ओपन होकर कारोबार की शुरुआत की थी और अंत में 1281.68 अंक या 1.55 फीसदी की गिरावट लेकर 81,148.22 पर क्लोज हुआ था. इसी तरह निफ्टी भी दिनभर रेड जोन में नजर आया था. NSE Nifty 24,864.05 पर खुलने के बाद मार्केट बंद होने पर 346.35 अकों की तगड़ी गिरावट लेते हुए 24,578.35 पर बंद हुआ था.  

भारत ने अमेरिका पर जवाबी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा, बादाम, सेब, अखरोट, नाशपाती और…रसायन?

नई दिल्ली भारत में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह शुल्क एल्यूमिनियम और स्टील पर लगाए गए टैरिफ के जवाब में होगा। भारत का यह फैसला व्यापार हित की रक्षा और वैश्विक व्यापार नियमों के अंतर्गत अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाएगा भारत विश्व व्यापार संगठन को भेजे गए प्रस्ताव में भारत का कहना है कि अमेरिका के टैरिफ के कारण भारत के 7.6 अरब डॉलर के सामान का आयात प्रभावित हुआ , इसीलिए भारत भी अमेरिका से आने वाले कुछ चीज जरूरी सामानों पर इतना ही टैरिफ लगाने की मांग कर रहा है। अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाने के ये हैं कारण साल 2018 में अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए भारतीय स्टील पर 25% और एल्यूमीनियम पर 10% का टैरिफ लगाया था। इसके बाद इस टैरिफ की दर को साल 2020 में बढ़ाया गया। 12 मार्च 2025 को यह टैरिफ 25% संशोधित कर दिया गया। विश्व व्यापार संगठन को दिए गए प्रस्ताव में भारत ने यह दावा किया है कि अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ के सामान्य व्यापार और टैरिफ समझौते (GATT) 1994 और सुरक्षा उपाय पर समझौते का उल्लंघन किया है। अमेरिकी टैरिफ़ के कारण भारत को 7.6 अरब डॉलर के स्टील और एल्यूमीनियम निर्यात प्रभावित हुए हैं। लेकिन अमेरिका को इस ड्यूटी से 1.91 अरब डॉलर प्राप्त हुए हैं। भारत में यह भी कहा कि उन्होंने अप्रैल 2025 में अमेरिका से विश्व व्यापार संगठन के अंतर्गत परामर्श मांगा था, लेकिन अमेरिका ने इन टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा का उपाय बताकर परामर्श से इनकार कर दिया था। भारत कर रहा जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी भारत सरकार के द्वारा 9 मई 2025 को वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाईजेशन के काउंसिल फॉर ट्रेड इन गुड्स को यह सूचना दी गई है कि वह अमेरिकी उत्पादों पर 1.91 अरब डॉलर के बराबर का टैरिफ लगाएगा। इसके लिए भारत ने 29 अमेरिकी उत्पादों का चयन किया है। जिनमें सेब, बादाम, अखरोट, नाशपाती, रसायन आदि शामिल हैं। हालांकि भारत ऐसा प्रस्ताव 2019 में भी ला चुका है। ये उत्पाद भारत के लिए आयात में महत्वपूर्ण हैं, जैसे अमेरिकी बादाम (543 मिलियन डॉलर) और सेब (156 मिलियन डॉलर)। कितना जवाबी शुल्क लगाएगी भारत सरकार भारत सरकार के द्वारा रखे गए प्रस्ताव के अनुसार टैरिफ की दरें उत्पादों के आधार पर 5% से 100% के बीच हो सकती है। इसके साथ भारत का यह भी कहना है कि उसके द्वारा उठाए जा रहे हैं यह कदम विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप है। भारत जवाबी टैरिफ इसलिए लगाना चाहता है ताकि अमेरिकी टैरिफ के व्यापारिक प्रभाव को संतुलित किया जा सके। भारतीय स्टील एसोसिएशन ने किया स्वागत भारत सरकार के इस फैसले का भारतीय स्टील एसोसिएशन ने स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचाया है। यदि भारत सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया आदि को राहत मिल सकती है। अमेरिकी उत्पादों पर असर भारत द्वारा यह जवाबी टैरिफ लगाया जाता है तो अमेरिकी कृषि उत्पाद जैसे सेब, बादाम और रसायन उद्योग ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि भारत इनका बड़ा आयातक देश है। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका द्वारा भी जवाबी उपाय किए जा सकते हैं जिससे द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता और जटिल हो सकती है।

मार्केट कैप में कहीं नहीं टिकता पड़ोसी देश, पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज की हालत बदतर

नई दिल्ली बीते कुछ दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की वजह से दोनों देश के स्टॉक एक्सचेंज उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरे हैं। इस दौरान भारत के मुकाबले पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज की हालत बदतर हो गई थी। हालात ये हो गए कि पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग कुछ देर के लिए बंद करनी पड़ी। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज की ऐतिहासिक गिरावट की वजह से मार्केट कैपिटल भी गिर गया। स्थिति ये है कि भारत की कई बड़ी कंपनियों का मार्केट कैपिटल पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज से ज्यादा है। किस कंपनी का कितना मार्केट कैपिटल अकेले मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैपिटल पाकिस्तान के कुल कैपिटल से कई गुना अधिक है। सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर की कीमत 1415 रुपये के स्तर पर थी। वहीं, मार्केट कैपिटल करीब 19.17 लाख करोड़ रुपये पर है। एचडीएफसी बैंक के शेयर की कीमत 1923.10 रुपये पर है। वहीं, मार्केट कैपिटल 14.75 लाख करोड़ रुपये है। टाटा की कंपनी टीसीएस के शेयर मंगलवार को 3515 रुपये पर थे। वहीं, मार्केट कैपिटल 12.73 लाख करोड़ रुपये था। इसी तरह, एयरटेल और आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैपिटल क्रमश: 10.38 लाख करोड़ रुपये और 10.20 लाख करोड़ रुपये है। ये सभी आंकड़े भारतीय रुपये में हैं। बता दें कि इंफोसिस समेत कई अन्य लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटल भी पाकिस्तन स्टॉक एक्सचेंज से ज्यादा है। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का हाल भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम होने के बाद अब पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज रिकवरी मोड में है। बीते सोमवार को इस स्टॉक एक्सचेंज में करीब 9.5 प्रतिशत की रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई। मंगलवार को भी निवेशकों का भरोसा बरकरार रहा और एक्सचेंज ने 1.5 प्रतिशत की छलांग लगाई। मंगलवार को कराची स्टॉक एक्सचेंज 1,18,700 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा था। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैपिटल बढ़कर ₹15 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये के पार पहुंच गया है। बता दें कि 1 पाकिस्तानी रुपये भारत के 0.30 पैसे के बराबर हैं। इस आधार पर देखें तो पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैपिट 4.55 लाख करोड़ भारतीय रुपये के करीब है। पिछले सप्ताह किस कंपनी का क्या हाल बीते सप्ताह मार्केट कैपिटल के लिहाज से शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। इसके बाद क्रमश: एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस और आईटीसी का स्थान रहा।

गेल ने चौथी तिमाही के लिए 2,049 करोड़ रुपए का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया

नई दिल्ली गैस डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर की दिग्गज कंपनी गेल ने मंगलवार को 31 मार्च, 2025 को समाप्त वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के लिए 2,049 करोड़ रुपए का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 2,176.97 करोड़ रुपए के प्रॉफिट से 6 प्रतिशत कम है। कंपनी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025 के लिए प्रति इक्विटी शेयर 1 रुपए का अंतिम लाभांश घोषित किया है। इस बीच, जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व बढ़कर 35,707 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 32,334.50 करोड़ रुपए था, जबकि ईबीआईटीडीए भी 13.3 प्रतिशत बढ़कर 3,216 करोड़ रुपए हो गया। तिमाही के लिए कुल आय बढ़कर 36,273.87 करोड़ रुपए हो गई, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 32,972.10 करोड़ रुपए थी। वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में व्यय बढ़कर 33,572.80 करोड़ रुपए हो गया, जिसका मुख्य कारण 28,943.92 करोड़ रुपए की अधिक स्टॉक-इन-ट्रेड खरीद थी। कर से पहले लाभ (पीबीटी) 2,701.07 करोड़ रुपए रहा। वित्त वर्ष 2025 के लिए गेल ने वित्त वर्ष 2024 में 8,836.48 करोड़ रुपए की तुलना में 11,312.32 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि वार्षिक राजस्व 1,30,638.11 करोड़ रुपए से बढ़कर 1,37,287.56 करोड़ रुपए हो गया। मंगलवार को गेल के शेयरों की कीमत 184 रुपए के आसपास रही। पिछले महीने कंपनी के शेयर में करीब 2.7 फीसदी की तेजी आई है। गेल ने वित्त वर्ष 2025 के अक्टूबर-दिसंबर के लिए 4,084 करोड़ रुपए का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट घोषित किया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान सरकारी स्वामित्व वाली गैस वितरण कंपनी का शुद्ध लाभ 3,193 करोड़ रुपए था। तिमाही में परिचालन से राजस्व में 6.23 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो पिछले वर्ष के 34,768 करोड़ रुपए से बढ़कर 36,937 करोड़ रुपए हो गई। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संदीप कुमार गुप्ता के अनुसार, ”गेल ने चौथी तिमाही के परिणामों में 285 मिलियन डॉलर (लगभग 2,440 करोड़ रुपए) की असाधारण आय की घोषणा की है। यह आय एसईएफई मार्केटिंग एंड ट्रेडिंग सिंगापुर प्राइवेट लिमिटेड से मध्यस्थता कार्यवाही को वापस लेने के समझौते के तहत प्राप्त हुई।” गेल के बयान में कहा गया है, “एलएनजी सप्लायर्स में से एक के साथ 15 जनवरी, 2025 को किए गए निपटान समझौते के परिणामस्वरूप, कंपनी ने 31 दिसंबर, 2024 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के दौरान 2,440.03 करोड़ रुपए (285 मिलियन अमेरिकी डॉलर) को असाधारण आय के रूप में मान्यता दी है।”

Tata Motors का मुनाफा 8,470 करोड़ रहा, रेवेन्‍यू में मामूली बढ़ोतरी, 6 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का एलान

मुंबई ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स (Tata Motos Q4 Result) ने वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी कर दिए हैं. कंपनी के शुद्ध मुनाफे में 51.7% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान तिमाही में 17,552 करोड़ रुपये था और इस तिमाही में घटकर 8,470 करोड़ रुपये पर आ गया है. जबकि कंपनी की आय मामूली बढ़ोतरी के साथ 1,18,927 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जबकि EBITDA 0.6% की हल्की बढ़त के साथ ₹16,644 करोड़ पर पहुंच गई. हालांकि, टाटा मोटर्स (Tata Motors) के राजस्व में बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन लागत में कटौती और कच्चे माल के दाम में गिरावट के बावजूद मुनाफा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. 6 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान इस रिजल्ट के साथ ही कंपनी शेयरधारकों को 6 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देने की सिफारिश की है. यह लाभांश ₹2 फेस वैल्यू वाले शेयरों पर दिया जाएगा और AGM में स्वीकृति के बाद 24 जून 2025 तक भुगतान किया जाएगा. कंपनी ने लग्जरी वाहन ब्रांड Jaguar Land Rover (JLR) ने SUV सेगमेंट में अच्छा प्रदर्शन किया है. चौथी तिमाही (Q4 FY25) के वित्तीय परिणाम टाटा मोटर्स का Q4 FY25 में शुद्ध मुनाफा ₹8,470 करोड़ रहा. यह पिछले वर्ष की समान तिमाही के ₹17,552 करोड़ के मुकाबले 51.7% की गिरावट दर्शाता है. टाटा मोटर्स ने ₹1,000 करोड़ के नेट ऑटो कैश बैलेंस के साथ अपनी वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया है. Jaguar Land Rover (JLR): JLR के बिक्री वॉल्यूम में Q4 FY25 में 1.1% की वृद्धि हुई. SUV वाहनों की उत्तरी अमेरिका और यूरोप में अच्छी मांग रही. JLR का राजस्व 2.4% बढ़ा और कुल राजस्व ₹1.2 लाख करोड़ रहा. तिमाही में EBIT मार्जिन 10.7% रहा. पूरे वित्त वर्ष के लिए EBIT मार्जिन 8.5% रहा. नतीजों की घोषणा के बाद टाटा मोटर्स के शेयर में गिरावट देखी गई. बीएसई (BSE) पर इसका शेयर 1.76% की गिरावट के साथ ₹707.90 पर बंद हुआ. पिछले 6 महीने में टाटा मोटर्स का शेयर करीब 10 फीसदी गिरा है, जबकि एक साल के अंदर शेयर में 26 फीसदी की बड़ी गिरावट देखी गई है. अभी भी शेयर अपने ऑल टाइम हाई से करीब 40 फीसदी नीचे है.  कंपनी अपने इलेक्ट्रिक वाहनों के पोर्टफोलियो को और मजबूत करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही लागत कटौती और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. JLR सेगमेंट में अधिक मुनाफा कमाने पर जोर रहेगा. क्‍या हैं सेक्‍टर की चुनौतियां चीन और दक्षिण कोरिया जैसे ग्‍लोबल लीडर्स के मुकाबले भारतीय शिपयार्ड उत्पादन क्षमता, डिजाइन, स्वचालन, कुशल श्रमशक्ति और वेंडर नेटवर्क के मामले में पीछे हैं. शिप रिपेयर का बढ़ता अवसर वैश्विक शिप रिपेयर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, और भारत की रणनीतिक स्थिति इसे इस सेक्‍टर में प्रमुख खिलाड़ी बना सकती है. भारतीय शिपयार्ड भारतीय नौसेना के साथ-साथ अमेरिकी नौसेना की 5वीं और 7वीं फ्लीट को सेवाएं देने के लिए समझौते कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, मझगांव डॉक और कोचीन शिपयार्ड ने US नेवी के साथ मास्टर शिप रिपेयर एग्रीमेंट (MSRA) पर हस्ताक्षर किए हैं. प्रमुख शिपयार्ड की संभावनाएं मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) : पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण में अग्रणी और P75I व कलवरी के ऑर्डर से इसका ऑर्डर बुक बढ़ने की संभावना है. गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) : छोटे जहाजों और फ्रिगेट्स के निर्माण में माहिर. NGC और P17B प्रोजेक्ट्स से इसे बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है. कोचीन शिपयार्ड (CSL) : सबसे बड़ी क्षमता वाला शिपयार्ड, लेकिन निकट भविष्य में IAC-II के ऑर्डर की कमी के कारण इसके ऑर्डर बुक पर प्रभाव पड़ सकता है. हालांकि, शिप रिपेयर में इसे बढ़ने का मौका है. इन शेयरों (Defence Stocks) पर रखें नजर CMP : 2,905 रुपये रेटिंग : BUY टारगेट प्राइस : 3,433 रुपये Cochin Shipyards CMP : INR 1,521 रेटिंग : HOLD टारगेट प्राइस : 1,481 रुपये Garden Reach Ship. & Engineers CMP : 1,820 रुपये रेटिंग : BUY टारगेट प्राइस : 2,024 रुपये  

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