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यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड के जरिए से किए गए लेनदेन पर मर्चेंट शुल्क वापस लाने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रही

नई दिल्ली यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के जरिए लेनदेन पर बहुत जल्द शुल्क लग सकता है। यानी यूपीआई करना फ्री नहीं रहेगा, इसके लिए भी अलग से पैसे देने पड़ सकते हैं। दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और RuPay डेबिट कार्ड के जरिए से किए गए लेनदेन पर मर्चेंट शुल्क वापस लाने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रही है। अगर ऐसा होता है तो फिर अगर डिजिटल पेमेंट महंगा हो जाएगा। क्या है डिटेल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इन ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। बता दे कि डिजिटल पेमेंट इंडस्ड्रीज में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) उसे कहते हैं, जो किसी मर्चेंट या दुकानदार को पेमेंट सर्विस को शुरू करने के लिए देना होता है। इस शुल्क को साल 2022 में सरकार के द्वारा माफ कर दिया गया था। अब खबर है कि फिर से सरकार इसे लागू करने पर विचार कर सकती है। वर्तमान में, UPI और RuPay डेबिट कार्ड भुगतानों पर कोई MDR लागू नहीं है, जिन्हें नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के माध्यम से सुगम बनाया जाता है। रिव्यू किया जा रहा है मीडिया रिपोर्ट में एक बैंकर के हवाले से कहा गया है कि बड़े व्यापारियों के लिए UPI लेनदेन पर MDR को फिर से लागू करने का औपचारिक अनुरोध बैंकिंग उद्योग द्वारा केंद्र सरकार को प्रस्तुत किया गया है और संबंधित विभाग इसकी समीक्षा कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, 40 लाख रुपये से अधिक के सालाना कारोबार वाले व्यापारियों के लिए उनके GST फाइलिंग के आधार पर MDR को फिर से लागू किया जा सकता है। सरकार UPI के लिए एक स्तरीय मूल्य निर्धारण मॉडल पर भी विचार कर सकती है, जहां बड़े व्यापारियों को अधिक शुल्क देना होगा, जबकि छोटे व्यवसायों को कम शुल्क देना होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 40 लाख रुपये से कम वार्षिक कारोबार वाले व्यापारियों के लिए UPI भुगतान निःशुल्क रहेगा। यूपीआई लेनदेन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 में यूपीआई ने 16.11 बिलियन लेनदेन दर्ज किए, जिनकी राशि लगभग 22 ट्रिलियन रुपये थी। जनवरी में कुल लेनदेन 16.99 बिलियन था।

अब EPF सदस्यों के लिए प्रोफाइल अपडेट करना आसान हो गया, अब बिना डॉक्‍यूमेंट अपडेट होगी प्रोफाइल

मुंबई अब EPF सदस्यों के लिए प्रोफाइल अपडेट (Profile Update) करना आसान हो गया है। दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सदस्यों की प्रोफाइल अपडेट करने के नियमों में अहम बदलाव (EPFO New Rule) किया है। अब EPF सदस्य बिना किसी डॉक्यूमेंट अपलोड किए अपनी व्यक्तिगत जानकारी अपडेट कर सकते हैं। पहले, EPF प्रोफाइल को अपडेट करने के लिए नियोक्ता (employer) की मंजूरी जरूरी होती थी, जिसके कारण औसतन 28 दिनों की देरी होती थी।  वहीं, अब इस बदलाव से लगभग 7 करोड़ EPF सदस्यों को राहत मिलने वाली है। अब EPF सदस्य अपना नाम, जन्मतिथि, जेंडर, राष्ट्रीयता, माता-पिता का नाम, मैरिटल स्टेटस, पति/पत्नी का नाम, ज्वाइनिंग और एग्जिट डेट जैसी जानकारी को बिना किसी दस्तावेज के अपडेट कर सकते है। हालांकि, शर्त यह रहेगी कि सदस्यों को किसी भी अपडेट के लिए अपने आधार और पैन को अपने ईपीएफ खाते से लिंक करना अनिवार्य होगा। EPFO के एक बयान के अनुसार, ‘वित्त वर्ष 2024-25 में नियोक्ताओं के माध्यम से सुधार के लिए ईपीएफओ को मिले कुल 8 लाख रिक्‍वेस्‍ट में से लगभग 45% बदलाव को नियोक्ता के सत्यापन या ईपीएफओ में अप्रूवल के बिना सदस्य की ओर से खुद ही अपडेट किया जा सकता है। लेकिन अगर यूएएन (UAN) 1 अक्‍टूबर 2017 से पहले जारी किया गया था तो प्रोफाइल में किसी भी अपडेट के लिए नियोक्‍ता की मंजूरी लेनी जरूरी होगी। EPF प्रोफाइल को अपडेट करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें-     सबसे पहले EPF की आधिकारिक वेबसाइट www.epfindia.gov.in पर जाएं।     इसके बाद UAN नंबर, पासवर्ड और कैप्चा जैसे विवरण दर्ज करके पोर्टल पर लॉग इन करें।     फिर मेनू में ऊपर दिए गए ‘Manage’ ऑप्शन को क्लिक करें।     ”Modify Basic Details’ का ऑप्शन चुनें।     आधार कार्ड के अनुसार अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करें और सबमिट करें।     अब ‘Track Request’ ऑप्शन का यूज करके अपने अपडेट अनुरोध की स्थिति जांच लें।    

SIP निवेश वित्त वर्ष 25 में अब तक 32 प्रतिशत बढ़कर 2.63 लाख करोड़ रुपये रहा

नई दिल्ली भारत में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) निवेश वित्त वर्ष 2024-25 के पहले 11 महीने (अप्रैल-फरवरी अवधि में) में 2,63,426 करोड़ रुपये रहा है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा  जारी डेटा से मिली।    एसआईपी निवेश वित्त वर्ष 25 में अब तक 32 प्रतिशत बढ़कर 2.63 लाख करोड़ रुपये रहा   यह आंकड़ा एसआईपी निवेश में सालाना आधार पर 32.23 प्रतिशत की बढ़त को दिखाता है। पूरे वित्त वर्ष 24 में एसआईपी के जरिए निवेश 1,99,219 करोड़ रुपये था। एसआईपी निवेश में बढ़ोतरी बाजार में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दिखाता है। फरवरी 2025 में एसआईपी निवेश 25,999 करोड़ रुपये रहा है, जो कि जनवरी 2025 में 26,400 करोड़ रुपये था। एम्फी के डेटा के मुताबिक, फरवरी में 44.56 लाख नई एसआईपी शुरू हुई हैं एम्फी के डेटा के मुताबिक, फरवरी में 44.56 लाख नई एसआईपी शुरू हुई हैं। हालांकि, इस दौरान 55 लाख के करीब एसआईपी बंद भी हुई हैं। लगातार बढ़ते निवेश के कारण एसआईपी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 12.38 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल एसेट्स के 19.2 प्रतिशत के बराबर है।  शुद्ध निवेश लगातार 48वें महीने सकारात्मक रहा एम्फी द्वारा प्रस्तुत नए आंकड़ों से पता चला है कि फरवरी के दौरान 8.26 करोड़ एसआईपी खातों ने निवेश में सक्रिय योगदान दिया। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के नेहल मेश्राम के अनुसार, घरेलू निवेशकों ने फरवरी 2025 में इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में अपनी मजबूत भागीदारी जारी रखी है। इससे इस सेगमेंट में शुद्ध निवेश लगातार 48वें महीने सकारात्मक रहा है।  प्रतिकूल परिस्थितियों ने निवेश प्रवाह को कम कर दिया है बाजार में हालिया अस्थिरता के बावजूद, दीर्घकालिक निवेशक अपनी निवेश रणनीतियों के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जो बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अनुशासित निवेश के महत्व को दर्शाता है। मेश्राम ने आगे कहा, “हालांकि, छोटी अवधि में प्रतिकूल परिस्थितियों ने निवेश प्रवाह को कम कर दिया है, लेकिन निरंतर निवेश से संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशकों का विश्वास मजबूत बना हुआ है।”

RBI वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेपो रेट कम कर सकता है, 1 अप्रैल के बाद लोन लेने वालों के लिए मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली अगर आप नया लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से कर्ज चुका रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आने वाले वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेपो रेट (Repo Rate) को 50 से 75 बेसिस प्वाइंट (bps) तक कम कर सकता है। क्रिसिल (CRISIL) की ताजा रिपोर्ट में इस बात का अनुमान लगाया गया है। इसका मकसद आम लोगों को राहत देना, खपत बढ़ाना और देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाना है। रेपो रेट और ब्याज दर में कटौती से क्या होगा फायदा? रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है तो बैंक भी लोगों को कम ब्याज दर पर लोन देते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्ज सस्ते हो जाते हैं। इससे लोगों का खर्च करने की क्षमता बढ़ती है जिससे बाजार में मांग बढ़ती है और अर्थव्यवस्था में तेजी आती है।   फरवरी में भी हुई थी कटौती फरवरी 2025 में RBI ने पांच साल बाद पहली बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी जिससे यह 6.5% से घटकर 6.25% पर आ गया। इससे पहले 2022-23 के दौरान महंगाई रोकने के लिए RBI ने रेपो रेट में 250 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की थी लेकिन अब महंगाई को काबू में रखने के बाद ब्याज दरों को कम करने की योजना बनाई जा रही है ताकि लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़े और निवेश में इजाफा हो। महंगाई को 4% के दायरे में लाने की कोशिश RBI लंबे समय से महंगाई दर को 4% के आसपास लाने की कोशिश कर रहा है। अप्रैल 2023 से रेपो रेट 6.5% पर स्थिर बना हुआ था लेकिन अब नई कटौती से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की योजना है। CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार और RBI मिलकर 2025-26 में ब्याज दरों में कटौती करके अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। ब्याज दर में कटौती से होने वाले बड़े फायदे: ➤ लोन होगा सस्ता – घर, गाड़ी या बिजनेस के लिए कर्ज लेना सस्ता होगा। ➤ खपत और निवेश में बढ़ोतरी – लोग ज्यादा खर्च कर पाएंगे जिससे बाजार में तेजी आएगी। ➤ GDP को मिलेगा सपोर्ट – बाजार में पैसा बढ़ने से देश की जीडीपी ग्रोथ को फायदा होगा। ➤ इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकारी योजनाओं को बढ़ावा – सरकार ने FY26 के लिए पूंजीगत व्यय को 10.1% तक बढ़ाने की योजना बनाई है जिससे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ेगा। ➤ वित्तीय घाटे में कमी – सरकार वित्तीय घाटे को 4.8% से घटाकर 4.4% तक लाने की कोशिश कर रही है जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी। ग्लोबल रिस्क और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर हालांकि CRISIL की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताएं भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता से निर्यात प्रभावित हो सकता है और विदेशी निवेशक जोखिम भरे बाजारों से दूर रह सकते हैं। हालांकि घरेलू मांग और सरकारी नीतियां अर्थव्यवस्था को मजबूती से बनाए रखेंगी।   महंगाई दर में कमी की उम्मीद रिपोर्ट के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में महंगाई दर में और गिरावट हो सकती है। रबी फसलों की बुवाई 1.5% बढ़ी है जिससे खाद्य आपूर्ति बेहतर होगी। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी कम हो सकती हैं। FY26 में तेल की कीमतें 70-75 डॉलर प्रति बैरल रह सकती हैं जो FY25 के 78-83 डॉलर प्रति बैरल से कम होगी। इससे महंगाई पर और नियंत्रण होगा। अगर CRISIL की रिपोर्ट सही साबित होती है और RBI 2025-26 में ब्याज दरों में कटौती करता है तो यह आम जनता के लिए बहुत फायदेमंद होगा। इससे लोन सस्ते होंगे बाजार में पैसा बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। हालांकि ग्लोबल परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और RBI को सतर्क रहना होगा ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे।  

सिंगापुर वालों ने खरीदी हल्दीराम में 9% हिस्सेदारी, पता चली कंपनी की सही कीमत

नागपुर भारत के मशहूर नमकीन और स्नैक्स ब्रांड हल्दीराम (Haldiram’s) के साथ सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक (Temasek) ने एक बड़ा करार की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि टेमासेक ने हल्दीराम के स्नैक्स बिजनेस में लगभग 9 फीसदी हिस्सेदारी 8,000 करोड़ रुपये में खरीदने का समझौता किया है. इस सौदे के बाद हल्दीराम की कुल वैल्यूएशन लगभग 90,000 करोड़ रुपये आंकी गई है. लंबी चर्चा और कई महीनों की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है. टेमासेक ने हल्दीराम को एक “मूल्यवान संपत्ति” माना है, जो भारत के उपभोक्ता क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी. इससे पहले, प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन ने हल्दीराम में निवेश करने से मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें कंपनी के मूल्यांकन को लेकर चिंता थी. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, हल्दीराम स्नैक्स 9 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी अन्य निवेशकों को बेचने पर भी विचार कर रहा है. पहले की खबरों के मुताबिक, हल्दीराम अपनी कंपनी में 20 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकता है. 1937 में राजस्थान के बीकानेर में स्थापित हल्दीराम आज भारत के स्नैक्स बाजार में एक बड़ा नाम है. यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल के अनुसार, हल्दीराम भारत के 6.2 अरब डॉलर के स्नैक्स बाजार में लगभग 13 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. इसकी सबसे प्रसिद्ध उत्पाद “भुजिया” है, जो आटे, जड़ी-बूटियों और मसालों से बनी एक कुरकुरी नमकीन है. यह छोटे दुकानों पर सिर्फ 10 रुपये में उपलब्ध है. टेमासेक ने पहले कहां-कहां किया है निवेश टेमासेक ने पहले भी भारत में मणिपाल हॉस्पिटल्स और देवयानी इंटरनेशनल (केएफसी और पिज़्ज़ा हट के ऑपरेटर) जैसी कंपनियों में निवेश किया है. हल्दीराम में हिस्सेदारी खरीदकर टेमासेक अब भारत के पैकेज्ड स्नैक्स इंडस्ट्री पर दांव लगा रहा है. हल्दीराम ग्रुप ने हाल ही में अपने एफएमसीजी बिजनेस का बंटवारा किया है. इसके तहत हल्दीराम स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड (एचएसपीएल या हल्दीराम दिल्ली ग्रुप) और हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (एचएफआईपीएल या हल्दीराम नागपुर ग्रुप) को एक नई कंपनी हल्दीराम स्नैक्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (एचएसएफपीएल) में शामिल किया गया है. इसमें एचएसपीएल और एचएफआईपीएल के मौजूदा शेयरधारकों को क्रमशः 56 फीसदी और 44 फीसदी हिस्सेदारी मिलेगी. क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, हल्दीराम ग्रुप का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी विविध है, जिसमें स्नैक्स, नमकीन, मिठाई, रेडी-टू-ईट/प्री-मिक्स फूड, फ्रोजन फूड, बिस्कुट, नॉन-कार्बोनेटेड ड्रिंक, पास्ता आदि शामिल हैं. ग्रुप का भारत में व्यापक प्रभाव है और यह अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों में निर्यात करता है.

मोदी सरकार किसानों से एमएसपी पर खरीद रही तुअर दाल, पहले के मुकाबले तेजी दर्ज

नईदिल्ली केंद्र सरकार द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर तुअर (अरहर) की खरीद में तेजी आई है। 11 मार्च तक आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना सहित प्रमुख उत्पादक राज्यों में कुल 1.31 लाख मीट्रिक टन तुअर की खरीद की गई है, जिससे इन राज्यों के 89,219 किसानों को लाभ मिला है। यह जानकारी गुरुवार को कृषि मंत्रालय की ओर से दी गई। इंटीग्रेटेड प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान(पीएम-आशा) की मूल्य समर्थन योजना के तहत निर्धारित उचित औसत गुणवत्ता के अनुरूप अधिसूचित दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा राज्य स्तरीय एजेंसियों के जरिए प्री-रजिस्टर्ड किसानों से सीधे एमएसपी पर की जाती है। इंटीग्रेटेड पीएम-आशा योजना को जारी रखने की मंजूरी दी भारत सरकार ने 15वें वित्त आयोग साइकल के दौरान 2025-26 तक इंटीग्रेटेड पीएम-आशा योजना को जारी रखने को मंजूरी दी। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इंटीग्रेटेड पीएम-आशा योजना खरीद के कार्यान्वयन में अधिक प्रभावशीलता लाने के लिए संचालित की जाती है, जो न केवल किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य प्रदान करने में मदद करती है, बल्कि उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करती है और आवश्यक वस्तुओं की कीमत में उतार-चढ़ाव को भी नियंत्रित करती है। तुअर, उड़द और मसूर की खरीद करने के लिए दी मंजूरी दलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में योगदान देने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए, सरकार ने खरीद वर्ष 2024-25 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत तुअर, उड़द और मसूर के पूरे उत्पादन की खरीद को मंजूरी दी है। सरकार ने बजट 2025-26 में यह भी घोषणा की है कि देश में दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से 2028-29 तक चार साल के लिए राज्य के उत्पादन के लिए तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी। 2024-25 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश को खरीद की मंजूरी दी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तुअर (अरहर) मसूर और उड़द की खरीद को क्रमश: 13.22 एलएमटी, 9.40 एलएमटी और 1.35 एलएमटी की सीमा तक मंजूरी दी। उन्होंने खरीफ 2024-25 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश राज्यों में कुल 13.22 एलएमटी मात्रा के लिए तुअर (अरहर) की खरीद को मंजूरी दी। तुअर की खरीद नेफेड के ई-समृद्धि पोर्टल और एनसीसीएफ के संयुक्ति पोर्टल पर पहले से रजिस्टर्ड किसानों से भी की जाती है। केंद्र केंद्रीय नोडल एजेंसियों नैफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से किसानों से 100 प्रतिशत तुअर खरीदने के लिए कमिटेड है।

मूडीज ने पाकिस्तान के बैंकिंग सेक्टर का नजरिया सकारात्मक किया

नई दिल्ली.  ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कल भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना पॉजिटिव नजरिया रखा. इसके साथ ही इस एजेंसी ने पाकिस्तान के बैंकिंग सेक्टर पर भी अपनी राय रखी. मूडीज रेटिंग्स ने कहा कि उसने बेहतर ऑपरेशन कंडीशन और मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के चलते पाकिस्तान के बैंकिंग सेक्टर पर अपना नजरिया स्थिर से बदलकर सकारात्मक कर दिया है. यह बदलाव पाकिस्तान सरकार के (Caa2 सकारात्मक) बेहतर दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसे बैंकों द्वारा सॉवरेन लोन में अहम जोखिम से सपोर्ट मिला है. चरमाराती अर्थव्यवस्था और नकदी संकट के बीच यह खबर पाकिस्तान के लिए राहत लेकर आई है. मूडीज ने रिपोर्ट में क्या कहा मूडीज ने रिपोर्ट में कहा, “हमने पाकिस्तान के बैंकिंग सिस्टम पर अपना नजरिया स्टैबल से पॉजिटिव में बदल दिया है.” इससे पहले मूडीज ने आखिरी बार 3 मार्च, 2023 को पाकिस्तान के बैंकिंग क्षेत्र की रेटिंग घटाई थी, जिसमें पांच प्रमुख बैंकों – एलाइड बैंक लिमिटेड (एबीएल), हबीब बैंक लिमिटेड (एचबीएल), एमसीबी बैंक लिमिटेड (एमसीबी), नेशनल बैंक ऑफ पाकिस्तान (एनबीपी) और यूनाइटेड बैंक लिमिटेड (यूबीएल) की लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रेटिंग को CAA1 से घटाकर CAA3 कर दिया था. मूडीज ने बताया, “बैंकिंग सेक्टर पर हमारा पॉजिटिव आउटलुक पाकिस्तान सरकार के (CAA2 पॉजिटिव) सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसमें पाकिस्तानी बैंकों की सरकारी सिक्योरिटीज की बड़ी होल्डिंग के जरिए संप्रभुता में महत्वपूर्ण जोखिम है, जो कुल बैंकिंग परिसंपत्तियों का लगभग आधा हिस्सा है. हालांकि, इस रिपोर्ट के अनुसार, “पाकिस्तान की लॉन्ग टर्म लोन स्टैबिलिटी में जोखिम बना हुआ है, देश की राजकोषीय स्थिति अभी भी बहुत कमजोर है.” भारत को लेकर पॉजिटिव आउटलुक मूडीज रेटिंग्‍स ने कहा है कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष (2025-26) में 6.5 फीसदी से अधिक रहेगी. बैंकिंग क्षेत्र के लिए स्थिर परिदृश्य का अनुमान लगाते हुए मूडीज ने कहा कि हालांकि अगले वित्त वर्ष में भारतीय बैंकों का परिचालन वातावरण अनुकूल बना रहेगा, लेकिन हाल के वर्षों में पर्याप्त सुधार के बाद उनकी परिसंपत्ति की गुणवत्ता में मामूली गिरावट आएगी और बिना गारंटी वाला खुदरा कर्ज, सूक्ष्म वित्त ऋण और छोटी कारोबारी कर्ज पर कुछ दबाव रहेगा. बता दें कि पाकिस्तान पिछले 4 सालों से नकदी संकट और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है. खराब आर्थिक हालात से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार चीन और सऊदी अरब समेत कुछ देशों से कर्ज ले चुका है, साथ ही इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से भी भारी कर्ज लिया है.

अडानी ग्रुप ने हासिल किया एक और प्रोजेक्ट, जीती ₹36000Cr की बोली, मुंबई में पूरा करेगी ये काम

मुंबई दुनिया के टॉप अरबपतियों (World’s Top Billionaires) की लिस्ट में शामिल अडानी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन गौतम अडानी (Gautam Adani) की कंपनी ने मुंबई में एक बड़ी परियोजना के लिए बोली जीती है और ये प्रोजेक्ट 36,000 करोड़ रुपये का है. ये Mumbai की सबसे बड़ी आवास-विकास परियोजनाओं में शामिल है और इसे अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड पूरा करेगी.  अडानी प्रॉपर्टीज ने लगाई सबसे ज्यादा बोली अडानी ग्रुप की कंपनी Adani Properties Pvt Ltd मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित मोतीलाल नगर I, II, III में 143 एकड़ में फैले आवास विकास प्रोजेक्ट में शामिल है. 36,000 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना के लिए अडानी प्रॉपर्टीज (APPL) सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी, जिसने 3.97 लाख वर्ग मीटर का बिल्टअप एरिया पेश किया. बोली जीतने के बाद अब आवंटन पत्र (LoA) जल्द जारी होने की उम्मीद है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी थी अनुमति बता दें कि बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने बीते सप्ताहा ही महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) को निर्माण एवं विकास एजेंसी (C&DA) के माध्यम से मोतीलाल नगर को डेवलप करने की अनुमति दे दी. इसके बाद राज्य सरकार की ओर से इसे एक स्पेशल प्रोजेक्ट घोषित किया है, जिस पर MHADA का नियंत्रण है, हालांकि ये एजेंसी के माध्यम से काम कर रही है. परियोजना के तहत म्हाडा के तहत 3,372 आवासीय इकाइयों, 328 पात्र वाणिज्यिक इकाइयों और 1,600 पात्र झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास किया जाएगा और अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा. अडानी ग्रुप की दूसरी बड़ी पुनर्विकास योजना मुंबई के मोतीलाल नगर में 36,000 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना के लिए अडानी समूह सबसे अधिक बोली लगाने वाला बनकर उभरा और ये धारावी पुनर्विकास परियोजना के बाद दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है. गौरतलब है कि भारतीय अरबपति Gautam Adani ने मुंबई के स्लम एरिया धारावी (Dharavi) का प्रोजेक्ट 610 मिलियन डॉलर की बोली लगाकर जीता था और उसी समय नई कंपनी अडानी प्रॉपर्टीज (Adani Properties) बनाई थी. अब इस कंपनी ने दूसरी बड़ी बोली जीती है. निवासी बोले- पारदर्शिता के साथ हो काम जब इंडिया टुडे ने मोतीलाल नगर साइट का दौरा किया, तो स्थानीय निवासियों ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि म्हाडा इस परियोजना के लिए निजी डेवलपर को शामिल कर रहा है और अगर इस परियोजना में पारदर्शिता नहीं होगी तो वे विरोध करेंगे. वहीं दूसरी ओर अडानी समूह को पुनर्विकास परियोजना मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना  (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के विधायक आदित्य ठाकरे ने भी कहा कि परियोजना में पारदर्शिता होनी चाहिए, अगर कोई कमी है तो हम मुद्दे उठाएंगे.  

भारत का बड़ा कदम, दवा बाजार में बड़ा बदलाव, विदेशी कंपनियों को भी घटाने होंगे दाम

नई दिल्‍ली डायबिटीज की दवा के बाजार में प्राइस वॉर छिड़ गई है। भारतीय दवा कंपनियां टाइप-2 डायबिटीज की दवा ‘एमपेग्लिफ्लोजिन’ के सस्ते विकल्प बाजार में उतार रही हैं। इससे मरीजों को यह जरूरी दवा कम दाम में मिल सकेगी। बोह्रिंगर इंगेलहाइम और एली लिली की इस दवा का पेटेंट खत्म होने के बाद भारतीय कंपनियों ने इसका फायदा उठाया है। इससे ‘जारडिएंस’ ब्रांड नाम से बिकने वाली इस दवा की कीमत में 80% तक की गिरावट आई है। मैनकाइंड फार्मा, ग्लेनमार्क और एल्केम जैसी कंपनियां इस दवा के अलग-अलग वर्जन और एफडीसी (फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन) बाजार में ला रही हैं। आईसीएमआर के अनुसार, भारत में 10.1 करोड़ से ज्‍यादा डायबिटीज के मरीज हैं। सस्ती दवा आने से ज्‍यादा लोग इसका इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे दवा बाजार में बड़ा बदलाव आएगा। विदेशी कंपनियों को अपनी कीमतें कम करनी पड़ेंगी। ब‍िजनेस टुडे की र‍िपोर्ट के अनुसार, पहले ‘जारडिएंस’ के 10 mg टैबलेट की कीमत 58-60 रुपये और 25 mg की कीमत 65-70 रुपये थी। अब मैनकाइंड फार्मा ‘एमपेग्लाइड’ और ‘एमपेग्रेट’ 10 mg टैबलेट 5.49 रुपये और 25 mg टैबलेट 9.90 रुपये में बेच रही है। ग्लेनमार्क की ‘ग्लेम्पा’ 8.50-10 रुपये प्रति टैबलेट में मिल रही है। एल्केम की ‘एम्पेनॉर्म’ और भी सस्ती हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां डायबिटीज के बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। IQVIA के अनुसार, दो साल में जेनेरिक दवाओं की बिक्री 60% से ज्‍यादा हो सकती है। कंपन‍ियों ने लॉन्‍च किए कई ब्रांड ग्लेनमार्क ने ‘ग्लेम्पा’ ब्रांड के तहत 10 mg और 25 mg टैबलेट के साथ ‘ग्लेम्पा-L’ (एमपेग्लिफ्लोजिन + लिनैग्लिप्टिन) और ‘ग्लेम्पा-M’ (एमपेग्लिफ्लोजिन + मेटफॉर्मिन) जैसे FDC भी लॉन्च किए हैं। ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के प्रेसिडेंट और हेड (इंडिया फॉर्मलेशन्स बिजनेस) आलोक मलिक ने कहा, ‘ग्लेनमार्क का कार्डियोमेटाबोलिक केयर में एक मजबूत इतिहास रहा है। ‘ग्लेम्पा’ रेंज का लॉन्च हाई क्‍वालिटी, कम कीमत वाली दवाएं उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारी एडवांस्‍ड R&D यह सुनिश्चित करती है कि यह दवा, असली ब्रांडेड दवा जितनी ही असरदार हो, लेकिन उसकी कीमत के एक छोटे से हिस्से पर।’ मैनकाइंड फार्मा ने ‘एमपेग्लाइड’, ‘एमपेग्रेट’ और ‘डायनाडुओ’ जैसे कई ब्रांड लॉन्च किए हैं। कंपनी के वाइस चेयरमैन और एमडी राजीव जुनेजा ने कहा, ‘हमारा मानना है कि जरूरी दवाओं के लिए कीमत कभी रुकावट नहीं बननी चाहिए। इसीलिए हमने एमपेग्लिफ्लोजिन को सस्ती कीमत पर पेश किया है ताकि लाखों भारतीय डायबिटीज मरीज इसे ले सकें।’ कंपनी शहरों, छोटे शहरों और गांवों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए दो ब्रांड की रणनीति अपना रही है। साथ ही, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और अस्पतालों के साथ मिलकर एमपेग्लिफ्लोजिन के फायदों के बारे में जागरूकता फैला रही है। टैबलेट का छोटा क‍िया है आकार एल्केम लैबोरेटरीज ने ‘एम्पेनॉर्म’ को असली ब्रांडेड दवा से 80% तक सस्ता रखा है। नकली दवाओं की चिंता को दूर करने के लिए कंपनी ने एंटी-काउंटरफीट सिक्योरिटी बैंड और कई भाषाओं में मरीजों के लिए जानकारी वाली सामग्री पेश की है। एल्केम लैबोरेटरीज के सीईओ डॉ. विकास गुप्ता के मुताबिक,’हमारे क्रॉनिक पोर्टफोलियो के विस्तार के रूप में एमपेग्लिफ्लोजिन का लॉन्च खासकर दिल और किडनी की बीमारी के प्रबंधन में डायबिटीज केयर को बेहतर बनाने के हमारे मिशन के अनुरूप है।’ कंपनी ने बुजुर्ग मरीजों के लिए टैबलेट का आकार और कोटिंग भी बेहतर बनाई है। एल्केम के एमपेग्लिफ्लोजिन रेंज में ‘एम्पेनॉर्म’ के अलावा ‘एम्पेनॉर्म L’ (एमपेग्लिफ्लोज़िन + लिनैग्लिप्टिन), ‘एम्पेनॉर्म डुओ’ (एमपेग्लिफ्लोजिन + सिटाग्लिप्टिन) और ‘एम्पेनॉर्म M’ (एमपेग्लिफ्लोजिन + मेटफॉर्मिन) जैसे FDC भी शामिल हैं। डॉ.गुप्ता ने कहा, ‘डायबिटीज मैनेजमेंट में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है दवा नियमित रूप से लेना। टैबलेट का आकार छोटा करके और FDC देकर हम दवा नियमित रूप से लेने और मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार लाना चाहते हैं।’ फोर्टिस C-DOC हॉस्पिटल फॉर डायबिटीज एंड अलाइड साइंसेज के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा, ‘एमपेग्लिफ्लोजिन बहुत दी जाती है, लेकिन कम कीमत होने से गरीब लोग भी इसे ले सकेंगे। इससे इस बेहतरीन दवा का नियमित सेवन बढ़ेगा।’ क‍ितना बड़ा है डायब‍िटीज मार्केट? डायबिटीज के बढ़ते मामलों के कारण दुनिया भर में डायबिटीज दवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट्स के अनुसार, 2024 में इस बाजार का मूल्य लगभग 7,400,000 करोड़ रुपये (88.32 अरब डॉलर) था। 2032 तक इसके 19,600,000 करोड़ रुपये (233.84 अरब) तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान CAGR 12.7% रहेगा। मार्केट रिसर्च फ्यूचर के अनुसार, भारत में डायबिटीज केयर दवाओं का बाजार 2023 में 56,000 करोड़ रुपये (6.75 अरब डॉलर) का था। 2032 तक इसके 95,000 करोड़ रुपये (11.46 अरब डॉलर) तक पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान CAGR 6.54% रहेगा।

सेंसेक्‍स 100000 के पार जाएगा … लेकिन जाने कब? Morgan Stanley ने बताया वो महीना

मुंबई दुनिया भर में जियोपॉलिटिकल टेंशन और डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ खतरे के बीच भारत समेत दुनियाभर के बाजारों में दबाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका में ट्रंप की नीतियों की वजह से आर्थिक मंदी का संकट छाने लगा है. भारतीय बाजार पिछले साल सितंबर से टूट रहा है और लगातार बिकवाली हो रही है. निवेशक मार्केट से डरे हुए हैं. इसी बीच, Morgan Stanley के एनालिस्ट का मानना है कि Sensex 100000 के पार कर सकता है. Morgan Stanley के एनालिस्ट का कहना है कि सेंसेक्‍स में मौजूदा स्‍तर से करीब 41 फीसदी तेजी की उम्‍मीद है और सेंसेक्स दिसंबर 2025 तक 105,000 के पार जा सकता है. एनालिस्‍ट के मुताबिक, भारतीय बाजारों में रिस्‍क के मुकाबले मुनाफे की संभावनाएं बढ़ रही हैं. उनका अनुमान है कि सामान्‍य स्थिति में दिसंबर 2025 तक सेंसेक्‍स 93,000 के स्तर पर होगा. यह मौजूदा स्‍तर से लगभग 25 फीसदी ज्‍यादा होगा. 70 हजार पर भी आ सकता है सेंसेक्‍स वहीं एनालिस्‍ट का यह भी मानना है कि मंदी जैसी स्थिति पैदा हुई और हालात और भी ज्‍यादा खराब हुए तो सेंसेक्‍स 6 फीसदी गिरकर 70,000 के स्तर पर भी आ सकता है.  Morgan Stanley में भारत रिसर्च प्रमुख रिद्धम देसाई ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारतीय शेयर बाजारों में बिकवाली का रुख दिख रहा है. ऐसे में अब निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में निवेश करने का अच्छा मौका है. किन सेक्टर्स में मौके? देसाई का मानना है कि निवेश के लिहाज से सिक्लिकल शेयर, डिफेंस शेयरों, स्मॉलकैप, मिडकैप और लार्जकैप शेयरों में तेजी का रुख बना रहेगा. अगर अलग-अलग सेक्टर की बात करें तो Morgan Stanley ने फाइनेंशियल, कंज्यूमर, इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजी सेक्टर को लेकर पॉजिटिव संकेत दिया है. ये हैं Morgan Stanley के पसंदीदा स्‍टॉक Jubilant Foodworks, M&M, Maruti Suzuki, Trent, Bajaj Finance, ICICI Bank, Titan, L&T, UltraTech Cement और Infosys जैसे शेयरों पर Morgan Stanley पॉजिटिव है. Morgan Stanley का मानना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट बनने जा रहा है.

भारत की खुदरा महंगाई फरवरी 2025 में घटकर 3.61 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 4.31 प्रतिशत थी, आम जनता को बड़ी राहत

नई दिल्ली होली से पहले महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को बड़ी राहत मिली है. बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) पर आधारित भारत की खुदरा महंगाई फरवरी 2025 में घटकर 3.61 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 4.31 प्रतिशत थी. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी धीमी हो गई थी. इसी के साथ खुदरा महंगाई फरवरी में घटकर 7 महीने के निचले स्तर पर आ गई जो रिजर्व बैंक के लक्ष्य 4 फीसदी से भी कम है. आरबीआई 2-6 फीसदी का टॉलरेंस बैंड बनाए रखता है. इसी पहले 45 अर्थशास्त्रियों के रॉयटर्स पोल ने पहले फरवरी में मुद्रास्फीति 3.98 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था. इस बीच, भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि जनवरी 2025 में साल-दर-साल 5 प्रतिशत हो गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह 3.2 प्रतिशत थी. अपनी सबसे हालिया मौद्रिक नीति बैठक में, रिज़र्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) के लिए अपने सीपीआई मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 4.8 प्रतिशत पर बनाए रखा, अंतिम तिमाही (Q4FY25) में 4.4 प्रतिशत की मामूली गिरावट की आशंका जताई. FY26 के लिए, मुद्रास्फीति तिमाही अनुमान के साथ 4.2 प्रतिशत होने का अनुमान है.

आरबीआई ने कहा- जल्द ही बाजार में 100 और 200 रुपए के नए नोट जारी किए जाएंगे

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 100 और 200 रुपए के नोटों को लेकर अहम जानकारी साझा की है। जल्द ही बाजार में इन मूल्यों के नए नोट जारी किए जाएंगे, हालांकि इनके डिज़ाइन में कोई बदलाव नहीं होगा। आरबीआई ने बताया कि इन नए नोटों पर गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे। यह प्रक्रिया हर नए गवर्नर की नियुक्ति के बाद की जाती है, जिसमें उनके हस्ताक्षर वाले नोट जारी किए जाते हैं। वैध रहेंगे पुराने नोट पुराने 100 और 200 रुपए के नोट पहले की तरह वैध रहेंगे और उन्हें बदलने की जरूरत नहीं होगी। RBI ने स्पष्ट किया है कि ये नए नोट जल्द ही बैंकों और एटीएम में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, यह भी देखा जा रहा है कि देश में किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नकदी का उपयोग किया जा रहा है।   भारत में कैश का उपयोग कितना बढ़ा? रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2,000 रुपए के नोट बंद होने के बावजूद देश में नकदी का प्रचलन पहले से ज्यादा बढ़ा है। RBI के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2017 में कैश सर्कुलेशन 13.35 लाख करोड़ रुपए था, जो मार्च 2024 तक बढ़कर 35.15 लाख करोड़ रुपए हो गया। हालांकि, डिजिटल भुगतान भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं। मार्च 2020 में UPI के जरिए डिजिटल लेन-देन 2.06 लाख करोड़ रुपए था, जबकि फरवरी 2024 तक यह बढ़कर 18.07 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। पूरे 2024 की बात करें तो अब तक डिजिटल ट्रांजैक्शन लगभग 172 बिलियन रुपये तक हो चुका है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलने के साथ ही 250 अंक से ज्यादा उछला

मुंबई भारतीय शेयर बाजार (Stock Market Of India) की चाल सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन हैरान करती नजर आी. बुधवार को तेज शुरुआत करने के बाद कुछ ही मिनटों मे अचानक सेंसेक्स-निफ्टी रेज जोन में पहुंच गए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) खुलने के साथ ही 250 अंक से ज्यादा उछल गया था, लेकिन फिर 10 मिनट के बाद ही ये करीब 100 अंक टूटकर कारोबार करता नजर आया, कुछ ऐसा ही हाल नेशनल स्टटॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) का भी दिखा और ग्रीन जोन में खुलने के बाद ये भी गिरावट के साथ कारोबार करने लगा. शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच बीएसई की लार्जकैप कंपनियों में सबसे ज्यादा तेजी के साथ टेलीकॉम कंपनी एयरटेल का शेयर (Airtel Stock) भागा और खुलने के साथ ही 3 फीसदी से ज्यादा उछल गया, इसके अलावा मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में भी तेजी देखने को मिली. इस दौरान लगातार तीसरे दिन प्राइवेट सेक्टर के इंडसइंड बैंक का शेयर शुरुआती कारोबार में धड़ाम नजर आया और ये 7 फीसदी से ज्यादा टूटकर ओपन हुआ, लेकिन फिर अचानक इसने तूफानी रफ्तार पकड़ ली. खुलते ही शेयर बाजार ने किया हैरान शेयर मार्केट ने खुलने के साथ ही निवेशकों को हैरान करना शुरू कर दिया. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,102.32 की तुलना में उछलकर 74,270.81 के लेवल पर ओपन हुआ और खुलने के सात ही 250 अंक के आस-पास चढ़कर 74,392 के स्तर पर पहुंच गया. लेकिन इसके बाद अचानक ये टूटने लगा और गिरकर 73,998.35 पर आ गया. NSE Nifty की अगर बात करें, तो एनएसई के इस इंडेक्स ने भी अपने पिछले बंद 22,497.90 की तुलना में तेजी के साथ 22,536.35 पर कारोबार शुरू किया और 22,577 तक उछला, लेकिन सेंसेक्स में गिरावट आते ही ये भी टूटने लगा और गिरकर 22,450.10 के लेवल पर कारोबार करता दिखाई दिया. इन शेयरों ने खुलते ही मचाया धमाल शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत के साथ ही लार्जकैप में शामिल Bharti Airtel (3.65%), Tata Motors (2.85%), HDFC Bank (1.50%), Kotak Bank (1.30%), Reliance (1%) के शेयर तेजी के साथ कारोबार करते दिखे. तो मिडकैप में Hindustan Petrolium Share (3.35%), Escorts Share (2.34%) चढ़कर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कंपनियों की अगर बात करें, तो NACL India Share (7.29%), RedTape Share (7.13%), और PNB Housing Share (4.72%) उछलकर ट्रेड करता नजर आया. रिलायंस-एयरटेल में तेजी की ये वजह बात करें, Mukesh Ambani की कंपनी रिलायंस और सुनील भारती मित्तल की टेलीकॉम कंपनी Bharti Airtel के शेयरों में तेजी के पीछे की वजह के बारे में, तो बता दें कि दोनों ही कंपनियों ने दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के साथ भारत में स्टारलिंक की सर्विस में योगदान के संबंध में डील साइन की है, जिसके बाद शुरुआती कारोबार में दोनों ही कंपनियों के शेयर तेजी के साथ भागे. IndusInd Bank के शेयर की बदली चाल सेंसेक्स और निफ्टी की तरह की प्राइवेट सेक्टर के IndusInd Bank के शेयर ने भी पलटी मारकर निवेशकों को हैरान कर दिया. दरअसल, लगातार तीसरे दिन इंडसइंड बैंक का शेयर तेज गिरावट के साथ ओपन हुआ और शुरुआती कारोबार में ये 7 फीसदी से ज्यादा टूटकर कारोबार कर रहा था, लेकिन एक ओर जहां शेयर बाजार ग्रीन से रेड जोन में आया, तो ये बैंकिंग स्टॉक अचानक गिरावट से उबरकर तेज रफ्तार से भागता दिखाई देने लगा. खबर लिखे जाने तक ये 4.50% की उछाल के साथ 685.45 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. Airtel के बाद अब Reliance Jio ने की Starlink के साथ डील, सेटेलाइट से मिलेगा इंटरनेट Reliance Jio ने Elon Musk के SpaceX के पार्टनरशिप कर ली है, जिसके बाद Starlink सर्विस को भारत में लाया जाएगा. Starlink सेटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर है, जो लंबे समय भारत में अपनी सर्विस शुरू करने की कोशिश कर रहा है. एक दिन पहले ही Airtel ने भी SpaceX के साथ पार्टनरशिप का ऐलान किया था. हालांकि अभी कई भारतीय अथॉरिटीज से अप्रूवल मिलने बाकी हैं, उसके बाद ही भारत में Starlink की सर्विस शुरू होगी. रिलायंस ने कहा, कंपनी Starlink के डिवाइस, हार्डवेयर और इंस्टॉलेशन में मदद करेगा. इसके लिए Jio प्लेटफॉर्म की मदद ले सकेंगे, जो रिटेल और ऑनलाइन स्टोर्स के रूप में उपलब्ध होगा. एक दिन पहले यानी मंगलवार को Airtel ने बताया था कि उसने SpaceX के साथ पार्टनरशिप की है, जिसके बाद भारतीय कस्टमर को जल्द ही Starlink का हाई स्पीड इंटरनेट मिलेगा. हालांकि अभी SpaceX को भारतीय अथॉरिटीज से लाइसेंस लेना बाकी है, सभी अप्रूवल मिलने के बाद ही भारत में SpaceX की सर्विस भारत में शुरू हो सकेंगी. क्या है Starlink? Starlink, एक सेटेलाइट बेस्ड हाई स्पीड इंटरनेट सर्विस है, जिसे खुद Elon Musk की कंपनी SpaceX ने डेवलप किया है. इसके लिए मोबाइल टावर लगाने की जरूरत नहीं होती है. Starlink दुनिया भर में हाई-स्पीड इंटरनेट प्रोवाइड कराना चाहती है, इसका फायदा खासकर उन इलाकों में जहां वायर ब्रॉडबैंड उपलब्ध नहीं है. Jio की तरफ से आया बयान रिलायंस जियो के ग्रुप CEO मैथ्यू ओमन ने कहा, हर भारतीय की किफायती और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड तक पहुंच हो, यह जियो की प्राथमिकता है. स्टारलिंक को भारत में लाने के लिए स्पेसएक्स के साथ हमारा सहयोग हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और सभी के लिए बिना रूकावट ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की दिशा में एक बड़ा कदम है. Jio के ब्रॉडबैंड इकोसिस्टम में स्टारलिंक के साथ हम अपनी पहुंच का विस्तार कर रहे हैं और इस AI-संचालित युग में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड की विश्वसनीयता और पहुंच को बढ़ा रहे हैं, जिससे देश भर के समुदायों और व्यवसायों को सशक्त बनाया जा सकेगा. SpaceX का भी Jio को लेकर बयान SpaceX के प्रेसीडेंट और चीफ ऑपरेशनल ऑफिसर ग्वेने शॉटवेल ने कहा, हम भारत की कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने के लिए जियो की सराहना करते हैं. हम जियो के साथ काम करने, भारत सरकार से अनुमति प्राप्त करने और भारतीय कस्टमर्स और बिजनेसेस को स्टारलिंक की हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने को तैयार हैं. ऐसे काम करता है Starlink आसमान में हजारों लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सेटेलाइट होते हैं, जो धरती से लगभग 550 किमी ऊपर होते हैं. ये … Read more

देश में मकानों की बिक्री में दिल्ली-एनसीआर में 63% उछाल, मुंबई और हैदराबाद को पीछे छोड़ा.

नई दिल्‍ली  देश में सबसे ज्‍यादा मकान बेचने वाला शहर अब दिल्‍ली-एनसीआर बन गया है. इस शहर ने मुंबई और हैदराबाद को भी पीछे छोड़ दिया है. इस तरह, दिल्‍ली-एनसीआर ने साल 2024 में सबसे ज्यादा घर बेचा है. इस बार सिर्फ गुरुग्राम में ही बिक्री मूल्य में 66% की वृद्धि हुई है. इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर ने 1 लाख करोड़ रुपये की बिक्री मूल्य की सीमा को भी पार कर लिया है. डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी के अनुसार, 2024 में दिल्ली-एनसीआर में कुल मकानों का बिक्री मूल्य 63% बढ़कर 1.53 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसी दौरान मुंबई का बिक्री मूल्य 13% बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये और हैदराबाद का बिक्री मूल्य 18% घटकर 1.05 लाख करोड़ रुपये रह गया है. साल 2023 में दिल्ली-एनसीआर में बेचे गए घरों की कुल बिक्री मूल्य 94,143 करोड़ रुपये रहा था, जबकि इसी दौरान मुंबई में 1.22 लाख करोड़ रुपये और हैदराबाद में 1.28 लाख करोड़ रुपये के मकान बिके थे. हैदराबाद से आगे निकला गुरुग्राम गुरुग्राम में साल 2023 में कुल बिक्री मूल्य 64,314 करोड़ रुपये था, जो हैदराबाद का लगभग आधा था. लेकिन, 2024 में गुरुग्राम ने हैदराबाद को भी पीछे छोड़ दिया. प्रॉपइक्विटी के संस्थापक और सीईओ समीर जसूजा ने कहा कि गुरुग्राम ने अकेले ही 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री के साथ दिल्ली-एनसीआर की कुल बिक्री मूल्य का 66% से अधिक हिस्सा बेचा है. यह शहर शीर्ष पर उभर कर आया है. गुरुग्राम का बिक्री मूल्य मुंबई के बाद दूसरे स्थान पर है. गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और नई दिल्ली जैसे शहरों में भी 2024 में बिक्री मूल्य में काफी वृद्धि देखी गई है. बस नोएडा में थोड़ी गिरावट आई है. लग्‍जरी मकानों की डिमांड बढ़ी दिल्ली-एनसीआर में औसत बिक्री मूल्य 12,469 रुपये प्रति वर्ग फुट तक बढ़ गया है और 2024 में यूनिट्स का औसत आकार 2,229 वर्ग फुट हो गया है. आधे से अधिक बिक्री 2 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले घरों की हुई है और एक चौथाई बिक्री 1-2 करोड़ रुपये के बीच कीमत वाले घरों की हुई है. इसका मतलब है कि कुल बिक्री में 75 फीसदी हिस्‍सेदारी तो सिर्फ 1 करोड़ से ज्‍यादा की कीमत वाले घरों की है. हैदराबाद में बड़ी गिरावट क्‍यों हैदराबाद के आवासीय बाजार ने साल 2024 में महत्वपूर्ण गिरावट देखी, जिसमें नए लॉन्च 2020 के बाद से सबसे कम और बिक्री 2021 के बाद से सबसे कम रही. इस तरह देखा जाए तो डिमांड और सप्‍लाई में 25% व 49% की वार्षिक गिरावट आई है. लिहाजा तैयार खड़े मकानों की संख्‍या 2023 में 17 महीनों से बढ़कर 2024 में 20 महीनों तक पहुंच गया है. देश में हुई कुल बिक्री मूल्‍य में दिल्‍ली-एनसीआर का हिस्‍सा 2023 के 16% से बढ़कर 2024 में 23% हो गया. मुंबई का हिस्सा 2023 में 20% से बढ़कर 2024 में 21% हो गया, जबकि हैदराबाद का हिस्सा 2023 के 21% से घटकर 2024 में 16% रह गया. 2024 में शीर्ष 9 शहरों का कुल बिक्री मूल्य 12% बढ़कर 6.73 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 6 लाख करोड़ था. इन शहरों में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, ठाणे, कोलकाता, बैंगलोर, चेन्नई और हैदराबाद शामिल है.

Share Market: धड़ाम हुआ शेयर बाजार, Sensex 400 अंक गिरा, Nifty 22300 के नीचे

मुंबई अमेरिका के शेयर बाजार (US Stock Market) में गिरावट का असर मंगलवार को भारतीय स्टॉक मार्केट (Stock Market India) पर भी देखने को मिला है. कारोबार की शुरुआत के साथ ही सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) खुलने के साथ ही 400 अंक का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) 130 अंक से ज्यादा फिसल गया. बाजार में गिरावट के बीच प्राइवेट सेक्टर के इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) के शेयर में सबसे बड़ी गिरावट आई और ये खुलने के साथ ही 20 फीसदी टूट गया. सेंसेक्स ने लगाया 400 अंकों का गोता मंगलवार को शेयर मार्केट की शुरुआत बेहद खराब रही. बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद 74,115.17 की तुलना में गिरकर 73,743.88 पर ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों में 400 अंकों से ज्यादा फिसलकर 73,672 के लेवल तक टूट गया. दूसरी ओर एनएसई का निफ्टी इंडेक्स (NSE NIfty) भी सेंसेक्स की चाल से चाल मिलाकर चलता नजर आया. ये सोमवार के अपने बंद 22,460.30 की तुलना में टूटकर 22,345.95 पर ओपन हुआ और मिनटों में 130 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर 22,314 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया. 1715 शेयरों की रेड जोन में शुरुआत शेयर मार्केट ओपन होने के साथ जहां 617 कंपनियों के शेयर उछाल के साथ ग्रीन जोन में खुले, तो वहीं 1715 कंपनियों के शेयरों ने गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार की शुरुआत की. इस बीच 105 कंपनियों के शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों की बात करें, तो IndusInd Bank, Infosys, Tech Mahindra, TCS, Tata Motors में बाजार की ओपनिंग के साथ ही तगड़ी गिरावट देखने को मिली. वहीं दूसरी ओर ICICI Bank, Maruti Suzuki और ONGC के शेयर हरे निशान पर कारोबार करते नजर आए. भारतीय शेयर बाजार में आज (11 मार्च 2025)को शुरुआत कमजोर रही। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए। सेंसेक्स 0.50% की गिरावट के साथ 73,743.88 पर खुला, जबकि निफ्टी 0.48% की गिरावट के साथ 22,352.55 पर शुरू हुआ। इंडसइंड बैंक को जोरदार झटका लगा, 15% की गिरावट के साथ यह सत्र का सबसे बड़ा नुकसान वाला बैंक बन गया। इसके अलावा अन्य नुकसान वाले शेयरो में इन्फोसिस शामिल है, जिसमें 2.98% की गिरावट आई, एमएंडएम में 2.25% की गिरावट आई, और ज़ोमैटो में 1.96% की गिरावट आई। बजाज फिनसर्व ने भी 1.32% की गिरावट के साथ कारोबार किया, जिससे बाजार की कमजोर धारणा और बढ़ गई। सबसे ज्यादा फिसले ये 10 शेयर बाजार में गिरावट के बीच शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा फिसलने वाले शेयरों पर नजर डालें, तो लार्जकैप कंपनियों में शामिल IndusInd Bank Share (20%), Infosys Share (3.24%), M&M Share (2.99%), Zomato Share (2.49%), Tech Mahindra Share (1.28%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप में Bandhan Bank Share (4.43%), Godrej India Share (4.25%), RVNL Share (3.53%) और AU Bank Share (3.46%) टूटा. इसके अलावा स्मॉलकैप कंपनियों में Gensol Share में खुलते ही 5% का लोअर सर्किट लग गया. अमेरिकी बाजार में कल आई थी बड़ी गिरावट गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन अमेरिका के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. Dow Jones का तो हाल-बेहाल नजर आया और ये कारोबार के दौरान 1100 अंक तक फिसल गया, हालांकि अंत में ये इंडेक्स 2.08% या 890 अंक की गिरावट लेकर 41,911.71 पर क्लोज हुआ था. डाउ जोन्स जैसा ही हाल S&P-500 का दिखा और ये 155.64 अंक या 2.70% की गिरावट लेकर क्लोज हुआ था. वहीं Nasdaq ने तो इससे भी बड़ी गिरावट देखी और 4% टूटकर17,468.32 पर बंद हुआ था.

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