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सोमवार को सेंसेक्स-निफ्टी तेज रफ्तार के साथ कारोबार, आई तूफानी तेजी

मुंबई टीम इंडिया (Team India) ने रविवार को फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड की टीम को चार विकेट से हराकर चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 (Champions Trophy 2025) पर कब्जा जमाया, तो भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) ने भी इसे सलाम किया. दरअसल, सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार ने धीमी शुरुआत की, लेकिन कुछ ही मिनटों में इसकी चाल बदल गई और Sensex-Nifty जोरदार तेजी के साथ भागते नजर आए. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 339 अंक चढ़कर कारोबार करता नजर आया, तो एनएसई का निफ्टी भी 100 अंक से ज्यादा उछलकर ग्रीन जोन में ट्रेड करता दिखा. सेंसेक्स और निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार शेयर मार्केट में सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (BSE Sensex) 74,474.98 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ ही देर में इसकी रफ्तार तेज होती गई और ये 371 अंक की उछाल के साथ 74703.87 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया. सेंसेक्स की तरह ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी मामूली गिरावट के साथ रेड जोन में ओपन हुआ और फिर अचानक तेजी के साथ ग्रीन जोन में पहुंच गया. NSE Nifty ने अपने पिछले बंद 22,552 की तुलना में 22,521 पर कारोबार की शुरुआत की और फिर 105 अंक की उछाल के साथ 22,660 के लेवल तक पहुंच गया. सबसे ज्यादा उछले ये 10 शेयर सोमवार को मार्केट में तेजी के बीच सबसे ज्यादा भागने वाले शेयरों पर नजर डालें, तो लार्जकैप कंपनियों में शामिल PowerGrid Share (3.76%), Bajaj Finance Share (2.08%), Adani Ports Share (1.90%) चढ़कर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कंपनियों में Phoenix Ltd Share (4.08%), Zeel Share (3.47%), Star Health Share (3%), Mahindra Finance Share (2.46%) की तेजी लेकर ट्रेड करता दिखा. बात करें स्मॉलकैप कंपनियों की, तो TexInfra Share (7.25%), AAVAS Share (6.90%) और TTML Share (6.12%) की तेजी के साथ कारोबार कर रहा था. इन बड़ी कंपनियों के शेयर भी भागे बाजार में जिन दूसरी बड़ी कंपनियों के शेयरों में सोमवार को तेजी देखने को मिली, उनमें टाटा स्टील शेयर (Tata Steel Share), बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv Share), भारती एयरटेल (Bharti Airtel Share) के अलावा इंफोसिस, आईटीसी, एचसीएल टेक, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी, एक्सिस बैंक और मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर (Reliance Share) भी शामिल रहा. रोहित शर्मा ब्रिगेड ने जीती ट्रॉफी बता दें कि भारतीय टीम ने धांसू प्रदर्शन करते हुए ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 अपने नाम कर लिया. रविवार (10 मार्च) को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से शिकस्त दी. रोहित ब्रिगेड (Rohit Sharma) इस टूर्नामेंट में अजेय रही और उसने अपने पांचों मैच जीते. भारतीय टीम ने तीसरी बार चैम्पियंस ट्रॉफी अपने नाम की.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात के संकेत दिए हैं कि जीएसटी के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है

नई दिल्ली जीएसटी (GST) के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है, ये हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात के संकेत दिए हैं. मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि टैक्स स्लैब को तर्कसंगत बनाने का प्रोसेस पूरा होने के बाद जीएसटी रेट्स में और भी कमी आएगी. गौरतलब है कि जीएसटी पर 2021 में गठित मंत्रियों के समूह (GoM) निर्णय लेने के काफी करीब बताया जा रहा है. इस बीच वित्त मंत्री द्वारा दिए गए ये संकेत भी जीएसटी कटौती की उम्मीद बढ़ाने वाले हैं. ‘इसे और भी घटाया जाएगा…’ बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अवार्ड्स समारोह में बोलते हुए कहा कि रेवेन्यू न्यूट्रल रेट (RNR) 2017 में 15.8% से घटकर 2023 में 11.4% हो गया है. इसमें और भी कमी आने की उम्मीद है. इस बीच Nirmala Sitharaman ने भविष्य में बड़ी कर राहत के संकेत भी दिए और कहा कि GST लागू होने के बाद से दरों में बड़ा बदलाव आया है और आगे इसे आगे भी घटाया जाएगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीएसटी को तर्कसंगत बनाने पर जीओएम ने महत्वपूर्ण प्रगति की है और जीएसटी काउंसिल (GST Council) प्रमुख बदलावों पर अंतिम निर्णय लेने के करीब है. वित्त मंत्री बोलीं- ये काम मैंने अपने ऊपर लिया निर्मला सीतारमण ने कहा कि GoM ने उत्कृष्ट कार्य किया है, लेकिन फिर भी मैंने जीएसटी काउंसिल के सामने प्रस्तुत किए जाने से पहले उनके निष्कर्षों की पूरी तरह समीक्षा करने का कार्य अपने ऊपर ले लिया है. टैक्स स्लैब को तर्कसंगत (Rationalisation Of Tax Slab) बनाने के प्रोसेस में दरों को सुव्यवस्थित करना और उद्योग की महत्वपूर्ण चिंताओं का समाधान करना शामिल है. बैंकों में हिस्सेदारी घटा रही सरकार   वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी घटाने और ज्यादा से ज्यादा खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई. निर्मला सीतारमण ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) और माइक्रो-क्रेडिट के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि कुछ कंपनियां बेहद आक्रामक तरीके से लोन दे थीं, लेकिन RBI के हस्तक्षेप से इन्हें नियंत्रित किया गया है और स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है. इन मुद्दों पर भी खुलकर बोलीं वित्त मंत्री FM Nirmala Sitharaman ने कार्यक्रम में कई अन्य मुद्दों पर भी खुलकर बात की. उन्होंने भारत की मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ पर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2021 के बाद से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में इसकी स्थिति पर जोर दिया. Tariff War के बीच उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) पर कहा कि दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते का लक्ष्य रखते हैं.

फरवरी 2025 में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में 7.19% की सालाना गिरावट

  नई दिल्ली भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में फरवरी महीने में वाहनों की खुदरा बिक्री को लेकर रिपोर्ट सामने आई है. फाडा की रिपोर्ट में सामने आया कि वाहनों की खुदरा बिक्री में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट आई है. फरवरी 2025 में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में 7.19% की सालाना गिरावट और 17.12% की मासिक गिरावट दर्ज की गई. बता दें कि FADA की ओर से खुदरा बिक्री की रिपोर्ट पेश की जाती है, जिससे देश में वाहनों की रिटेल सेल्स कैसी रही यह मालूम पड़ता है. पिछले महीने घरेलू बाजार में वाहनों की कुल खुदरा बिक्री 18,99,196 इकाई रही, जो 2024 की समान अवधि के 20,46,328 इकाई की तुलना में सात प्रतिशत कम है. जानकारी के मुताबिक मंंथली बेसिस पर बिक्री में 17.12 फीसदी की कमी आई है. फाडा रिपोर्ट्स के मुताबिक,  इस साल के फरवरी महीने में देशभर में 18,99,196 यूनिट्स की बिक्री हुई है. जिसमें दो पहिया, तीन पहिया, कमर्शियल, निजी और ट्रैक्‍टर सेगमेंट के वाहन शामिल हैं. जहां जनवरी में यह संख्‍या 22,91,621 यूनिट्स बिकी. वहीं फरवरी 2024 में देशभर में कुल 20,46,328 यूनिट्स बिकी. कुल बिक्री के आंकड़े फरवरी 2025: 18,99,196 यूनिट्स जनवरी 2025: 22,91,621 यूनिट्स फरवरी 2024: 20,46,328 यूनिट्स सभी श्रेणियों में आई गिरावट 2025 के फरवरी महीने में वाहनों के लगभग सभी श्रेणियों में गिरावट देखने को मिली है. जिससे भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में मंदी का संकट छाने के संकेत हैं. दो पहिया वाहन :     फरवरी 2025 : 13,53,280 यूनिट्स     फरवरी 2024 : 14,44,674 यूनिट्स     जनवरी 2025 : 15,25,862 यूनिट्स कार :     फरवरी 2025 : 3,03,398 यूनिट्स     फरवरी 2024 : 3,38,390 यूनिट्स     जनवरी 2025 : 4,65,920 यूनिट्स तीन पहिया वाहन :     फरवरी 2025 : 94,181 यूनिट्स     फरवरी 2024 : 96,020 यूनिट्स     जनवरी 2025 : 1,07,033 यूनिट्स ट्रैक्टर सेगमेंट :     फरवरी 2025 : 65,574 यूनिट्स     फरवरी 2024 : 76,693 यूनिट्स     जनवरी 2025 : 93,381 यूनिट्स कमर्शियल वाहन :     फरवरी 2025 : 82,763 यूनिट्स     फरवरी 2024 : 90,551 यूनिट्स     जनवरी 2025 : 99,425 यूनिट्स गिरावट की क्या है वजह फाडा के अध्यक्ष सीएस विघ्नेश्वर ने कहा कि पिछले 5 महीनों से शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है. इसकी वजह से लोगों के गैर-जरूरी खर्चे घट गए हैं और ग्राहक अपनी खरीदारी को टाल रहे हैं. लोग काफी सतर्क हो गए हैं और वाहनों, खास तौर पर दोपहिया और यात्री वाहनों की पूछताछ से लेकर उसे खरीदने में अब लंबा समय ले रहे हैं. इसके अलावा फाइनैंस की कम उपलब्धता भी एक समस्या है.

24 घंटे में अंबानी सबसे ज्यादा कमाई करने वाले दुनिया के दूसरे इंसान बने

मुंबई  रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की किस्मत 24 घंटे में बदल गई है। 24 घंटे में मुकेश अंबानी ने कमाई में दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क समेत कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। 24 घंटे में मुकेश अंबानी से ज्यादा कमाई सिर्फ एक ही कारोबारी कर पाया है। वहीं दुनिया के टॉप 10 अमीरों में से 7 नुकसान में रहे हैं। शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। इससे अंबानी की भी नेटवर्थ बढ़ गई। ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक 24 घंटे में मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में 2.92 बिलियन डॉलर (करीब 25 हजार करोड़ रुपये) का इजाफा हुआ है। वहीं दूसरी ओर एलन मस्क को इन 24 घंटे में 558 मिलियन डॉलर (करीब 5 हजार करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। कौन निकला अंबानी से आगे? 24 घंटे की कमाई में अंबानी से आगे अमेरिकी निवेशक लैरी एलिसन (Larry Ellison) हैं। एलिसन सॉफ्टवेयर कंपनी ओरेकल (Oracle) के चेयरमैन और सीटीओ भी हैं। एलिसन ने 24 घंटे में 3.29 बिलियन डॉलर की कमाई की है। कमाई में एलिसन के बाद मुकेश अंबानी का नंबर आता है। अंबानी के बाद तीसरे स्थान पर डेल टेक्नोलॉजीज के फाउंडर और चेयरमैन माइकल डेल है। डेल की नेटवर्थ में 24 घंटे में 2.53 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। कई दिग्गजों को बड़ा नुकसान 24 घंटे में कई दिग्गजों को बड़ा नुकसान हुआ है। इसमें न सिर्फ एलन मस्क बल्कि मार्क जकरबर्ग, जेफ बेजोस, बर्नार्ड अर्नाल्ट, बिल गेट्स, वारेन बफे आदि शामिल हैं। ये वे लोग हैं जिनका नाम दुनिया के टॉप 10 अमीरों में शामिल दुनिया के टॉप 10 अमीरों में से सिर्फ लैरी एलिसन, लैरी पेज और सर्गी ब्रिन की संपत्ति में ही 24 घंटे में इजाफा हुआ है। कितनी है अंबानी की नेटवर्थ? मुकेश अंबानी की नेटवर्थ 88.1 बिलियन डॉलर है। इस नेटवर्थ के साथ वह दुनिया के 17वें सबसे अमीर शख्स हैं। मुकेश अंबानी न सिर्फ भारत के बल्कि एशिया के भी सबसे अमीर शख्स हैं। भारत के दूसरे सबसे अमीर शख्स की लिस्ट में गौतम अडानी का नाम आता है। अडानी की नेटवर्थ 68.9 बिलियन डॉलर है। वह दुनिया के 21वें सबसे अमीर शख्स हैं। साथ ही एशिया के सबसे अमीरों की लिस्ट में मुकेश अंबानी के बाद दूसरा नंबर अडानी का ही आता है।

अमेरिका के ‘टैरिफ प्रेम’ से दुनियाभर में भारी तनाव, इस बीच चीन ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ प्रेम’ से दुनियाभर में भारी तनाव है. दो अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के ट्रंप के बयान ने हड़कंप मचा दिया है. इस बीच चीन ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन और भारत को ऐसे साझेदार होना चाहिए जो एक दूसरे की सफलता में योगदान दें. ड्रैगन और हाथी की कदमताल ही दोनों देशों के लिए सही विकल्प होगा. चीन ने कहा कि एक दूसरे के राह में रोड़े अटकाने के बजाए हमें एक दूसरे को आगे बढ़ने में सहयोग करना चाहिए. एक दूसरे के साथ मिलकर काम करना होगा. ऐसा करके ही दोनों देशों और उनके लोगों के हितों को साधा जा सकता है. चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि जब चीन और भारत हाथ मिलाते हैं तो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अधिक खुलापन आता है और ग्लोबल साउथ के और मजबूत होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसे बातचीत से सुलझाया नहीं जा सकता और बिना सहयोग के किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता. दोनों देश मिलकर दुनिया को और बेहतर कर सकते हैं. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोल्ड फैसलों के बीच दुनियाभर में ट्रेड वॉर का आगाज हो गया है. ट्रंप ने कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ लगा दिया है. हालांकि, मेक्सिको को इससे कुछ समय के लिए राहत दी गई है. कनाडा को भी कुछ आंशिक राहत दी गई है. लेकिन ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ के बयान के बाद दुनियाभर में सुगबुगाहट है. इसके बाद अमेरिका में चीन के दूतावास ने बयान जारी कर कहा था कि अगर अमेरिका युद्ध ही चाहता है, तो युद्ध सही. फिर चाहे वह ट्रेड वॉर हो या किसी दूसरी तरह का युद्ध. हम अंत तक लड़ने के लिए तैयार है. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि हम पर जो भी देश जितना भी टैरिफ लगाएगा, हम भी उन पर उतना ही टैरिफ लगाएंगे. अन्य देश हम पर दशकों से बेइंतहा टैरिफ लगा रहे हैं. यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत और अन्य देश हम पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाए रहे हैं, जो गलत है. भारत हम पर 100 फीसदी टैरिफ लगाता है. ट्रंप ने कहा कि आगामी 2 अप्रैल से जो भी देश अमेरिकी आयात पर टैरिफ लगाएगा उस पर हम भी उतना ही टैरिफ लगाएंगे. दूसरे देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है. लेकिन अब हमारी बारी है कि हम इसी टैरिफ का उन देशों के खिलाफ इस्तेमाल करे.  

सुप्रीम कोर्ट से अडानी ग्रुप को धारावी प्रोजेक्ट के लिए अलग बैंक खाता रखने का निर्देश

मुंबई धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गौतम अडानी को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अडानी ग्रुप की ओर से चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। दुबई की कंपनी सेक्लिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्प (Seclink Technologies Corp) ने इस प्रोजेक्ट को अडानी ग्रुप को देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। इसी के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इसे एशिया का सबसे बड़ा शहरी पुनर्वास कार्यक्रम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। इनमें अडानी प्रॉपर्टीज, महाराष्ट्र सरकार और दुबई की सेक्लिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्प शामिल हैं। सेक्लिंक टेक्नोलॉजीज ने पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। उसका कहना था कि उसकी बोली अडानी ग्रुप से बेहतर थी। दिसंबर 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सेक्लिंक की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि सेक्लिंक के तर्क में दम नहीं है। सरकार को ऐसे प्रोजेक्ट के लिए सही बोली चुनने का अधिकार है। क्या कहा कोर्ट ने? CJI संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेक्लिंक से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उसकी 8,640 करोड़ रुपये की बोली अडानी की 5,069 करोड़ रुपये की बोली से काफी ज्यादा है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेक्लिंक को अडानी की ओर से पहले से तय की गई सभी शर्तों का पालन करना होगा। इनमें रेलवे को 1000 करोड़ रुपये का लीज भुगतान, 2800 करोड़ रुपये का क्षतिपूर्ति भुगतान और 812 रेलवे क्वार्टर का निर्माण शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलें कोर्ट में पेश की जाएं। अगली सुनवाई 25 मई को होगी। अलग बैंक अकाउंट रखना होगा सुप्रीम कोर्ट ने अडानी ग्रुप को एक अलग बैंक खाता रखने का निर्देश दिया है। इस खाते में प्रोजेक्ट से जुड़े सभी लेन-देन होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि निर्माण और तोड़फोड़ का काम शुरू हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट और रूल्स के अनुसार उचित खाते, जिसमें चालान आदि शामिल हैं, रखे जाएंगे। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कोई विशेष इक्विटी का दावा नहीं किया जाएगा। कॉन्ट्रैक्ट का अंतिम फैसला अपील के नतीजे पर निर्भर करेगा। क्या है धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट? अडानी ग्रुप की रियल एस्टेट डेवलपमेंट कंपनी अडानी प्रॉपर्टीज नवंबर 2022 में सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी। इसे धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड में 80% हिस्सेदारी मिली। महाराष्ट्र सरकार के पास बाकी 20% हिस्सेदारी है। यह प्रोजेक्ट 600 एकड़ जमीन पर फैला है। इसमें 296 एकड़ जमीन के पुनर्विकास की योजना है, जबकि माहिम नेचर पार्क जैसे खुले स्थानों को संरक्षित रखा जाएगा। धारावी में 8,50,000 से ज्यादा लोग रहते हैं। अस्थायी आबादी को मिलाकर यह संख्या 10 लाख से भी ज्यादा है। यह मुंबई का सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा राष्ट्रव्यापी मेगा एमएसएमई आउटरीच अभियान का शुभारंभ

मुंबई,  यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा राष्ट्रव्यापी मेगा एमएसएमई आउटरीच अभियान का शुभारंभ किया गया है. यह अभियान सप्ताहभर चलने वाली पहल है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सशक्त बनाना, उद्यमशीलता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है. इस अभियान का शुभारंभ बेंगलुरु में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की प्रबंध निदेशक एवं सीईओ ए. मणिमेखलै द्वारा किया गया, जिन्होंने वित्तीय सहायता, डिजिटल समाधान और जागरूकता पहलों के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बैंक की प्रतिबद्धता पर जोर दिया. उन्होंने बताया: “यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एमएसएमई के लिए वित्तीय समावेशन और समग्र समर्थन के लिए प्रतिबद्धता दृढ़ है. इस राष्ट्रव्यापी अभियान के माध्यम से, हमारा लक्ष्य एमएसएमई की वृद्धि और संवहनीयता सुनिश्चित करते हुए प्रौद्योगिकी और सरकारी पहलों द्वारा समर्थित वित्तीय उत्पादों तक निर्बाध एक्सेस प्रदान करना है. हमारा व्यापक उत्पाद सूट ऋण प्राप्त करने में ग्राहक अनुभव को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और हम एक सक्षम इकोसिस्टम को बढ़ावा देना जारी रखते हैं जो भारत के एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करता है, जो विकसित भारत के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान देता है.” इस पहल के भाग के रूप में, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अपने उद्यमी-अनुकूल एमएसएमई उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसमें त्वरित और परेशानी मुक्त ऋण के एक्सेस के लिए एमएसएमई सुपरफास्ट, युवा उद्यमियों के लिए युवाशक्ति और महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए यूनियन नारी शक्ति शामिल हैं. बैंक वित्तीय समावेशन को बढ़ाने और छोटे कारोबारों को बढ़ावा देने के लिए प्रधान मंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), पीएम विश्वकर्मा, प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), और प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) जैसी सरकारी वित्तीय योजनाओं को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है. इस अभियान में उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और स्थानीय कारोबार की ओर से उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई है. छोटे कारोबारों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम में, पात्र उधारकर्ताओं को कार्यक्रम के दौरान ही स्वीकृति पत्र वितरित किए गए, जिसके माध्यम से आर्थिक विकास और वित्तीय एक्सेसिबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बैंक की प्रतिबद्धता सुदृढ़ की गई. एमएसएमई आउटरीच अभियान देश भर में 157 स्थानों पर चलाया जा रहा है, जहाँ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा खुदरा कासा जमा खाते खोलने की सुविधा भी प्रदान की जा रही है, जिससे बैंक के ग्राहक बढ़ाने और वित्तीय समावेशन प्रयासों की मजबूती सुनिश्चित की जा रही है. इस पहल के माध्यम से, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया छोटे कारोबारों के उत्थान,क्रेडिट के एक्सेस को सुविधाजनक बनाने और एमएसएमई के लिए बनाए गए वित्तीय समाधानों के बारे में जागरूक बनाने के लिए अपने समर्पण की पुष्टि करता है. उद्यमियों और वित्तीय सेवाओं के बीच एक लिंक स्थापित करके, बैंक भारत के एमएसएमई  को बढ़ाने और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है.

IRGMA द्वारा बड़े पैमाने पर आयात घोटाले के पर्दाफाश के बाद, भारत ने प्रतिबंधित मेडिकल ग्लव्स के अवैध आयात पर कार्रवाई की तैयारी की

नई दिल्ली, देश के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन, फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने भारत के हेल्थ-केयर इकोसिस्टम और घरेलू विनिर्माण उद्योग के हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विश्व व्यापार संगठन (WTO) को मेडिकल एवं सर्जिकल ग्लव्स (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2024 (QCO) प्रस्तुत किया है। QCO के लागू होने के बाद सभी प्रकार के मेडिकल एवं सर्जिकल ग्लव्स के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य हो जाएगा। इस तरह मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम एवं चीन से गैर-कानूनी तरीके से आयात किए जाने वाले घटिया ग्लव्स से भरे बाजार में गुणवत्ता आश्वासन और विनियामक निरीक्षण आसान हो जाएगा, जिसकी बहुत जरूरत है। यह घोषणा ऐसे महत्वपूर्ण समय पर की गई है, जब इंडियन रबर ग्लव्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IRGMA) ने ग्लव्स के आयात में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। गौरतलब है कि अनैतिक तरीके से काम करने वाले आयातक QCO के लागू होने से पहले ही घटिया गुणवत्ता वाले नॉन-मेडिकल ग्लव्स की जमाखोरी कर रहे हैं, उन्हें मेडिकल ग्लव्स के रूप में दोबारा पैक कर रहे हैं, तथा अस्पतालों और क्लीनिकों तक पहुँचा रहे हैं। मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली ऐसी गतिविधियाँ बेहद खतरनाक हैं, जो भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को कमजोर करने के साथ-साथ घरेलू उद्योग को अस्थिर बना रही है। QCO से पहले जमाखोरी और ट्रेड डंपिंग के लिए चीन की चालबाज़ी •    आयात से भरपूर लाभ उठाने की होड़: आयातक QCO के लागू होने की संभावना को देखते हुए बड़ी मात्रा में नॉन-मेडिकल ग्लव्स की जमाखोरी कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि, उन्होंने BIS प्रमाणन के सख्त नियम के अनिवार्य होने के बाद ऐसे घटिया ग्लव्स पर गलत लेबल लगाकर उन्हें मेडिकल ग्लव्स के रूप में दोबारा पैक करने की योजना बनाई है। •    मलेशिया और थाईलैंड के रास्ते डंपिंग: अमेरिकी टैरिफ के कारण चीन से ग्लव्स के निर्यात पर प्रतिबंध लग गया है, इसलिए चीनी निर्माता अपने अतिरिक्त स्टॉक को मलेशिया एवं थाईलैंड के रास्ते भेज रहे हैं। इन ग्लव्स को यहाँ फिर से पैक किया जाता है और कृत्रिम रूप से कम कीमतों पर भारत भेजा जाता है। इस रास्ते से आने वाले शिपमेंट विनियामक जाँच से बच निकलते हैं, जिससे घटिया गुणवत्ता वाले ग्लव्स भारत के हेल्थ-केयर सप्लाई चेन में प्रवेश कर जाते हैं। •    मरीजों और स्वास्थ्य-कर्मियों के लिए गंभीर खतरा: इस तरह के घटिया ग्लव्स आवश्यक AQL (स्वीकार्य गुणवत्ता स्तर) सुरक्षा परीक्षणों में विफल हो जाते हैं, जिससे संक्रमण तथा संपर्क से दूषित होने का जोखिम बढ़ जाता है और अस्पतालों में स्वच्छता के साथ खिलवाड़ होता है। •    बाज़ार में अनुचित तरीके से हेर-फेर: भारतीय निर्माता BIS और QCO के सख्त मानकों का पालन करते हैं, जबकि दूसरी ओर अवैध तरीके से आयात किए गए ऐसे ग्लव्स को कृत्रिम रूप से कम कीमतों पर बेचा जा रहा है। इस वजह से घरेलू निर्माता बाज़ार में मुकाबले से बाहर हो रहे हैं और मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग में भारत की आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ गई है। QCO: भारत के हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला आदेश अनुमानों के अनुसार, ग्लव्स के लिए QCO से सालाना ₹600-700 करोड़ मूल्य के ग्लव्स के आयात को विनियमित किया जाएगा। साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि, भारत में चिकित्सा उपयोग के लिए केवल BIS-प्रमाणित ग्लव्स — चाहे वे आयातित हों या घरेलू रूप से निर्मित हों— ही बेचे जा सकें। यह आदेश डिस्पोजेबल सर्जिकल ग्लव्स, चिकित्सा जाँच में एक बार उपयोग में आने वाले ग्लव्स और पोस्ट-मॉर्टम रबर ग्लव्स पर लागू होगा, जिससे घटिया ग्लव्स के थोक आयात पर रोक लगेगी और अस्पताल में केवल ISI मार्क वाले ग्लव्स का उपयोग सुनिश्चित होगा। नियंत्रण के लिए इस प्रकार का कदम उठाना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि वर्तमान में आयात किए जाने वाले ग्लव्स में से 70% से ज़्यादा BIS के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। CDSCO की ओर से जारी की गई कई अधिसूचनाओं और विनियामक चेतावनियों के बावजूद, अमेरिका और दूसरे विकसित देशों द्वारा अस्वीकार किए गए ग्लव्स अभी भी गुणवत्ता जाँच को दरकिनार करके भारत में आ रहे हैं। QCO को लागू किए जाने के बारे में अपनी राय जाहिर करते हुए, कोंडा अनिंदिथ रेड्डी, मैनेजिंग डायरेक्टर, एनलिवा-वाडी सर्जिकल्स, ने कहा: “गुणवत्ता नियंत्रण का यह आदेश भारत के स्वास्थ्य-सेवा कर्मियों और मरीजों की सुरक्षा के लिए काफी मायने रखता है। घटिया ग्लव्स के उपयोग से परस्पर संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे जान को खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को आगे बढ़कर BIS-प्रमाणित ग्लव्स की मांग करनी चाहिए, साथ ही नियामक एजेंसियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि करना चाहिए कि अवैध आयात पर तुरंत रोक लगाई जाए।” IRGMA द्वारा सरकार की ओर से तुरंत कार्रवाई की मांग हालाँकि QCO इस दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है, इसके बावजूद IRGMA ने अलग-अलग मंत्रालयों से यह अनुरोध किया है कि इन नए नियमों के प्रभावी होने से पहले ग्लव्स की जमाखोरी और अवैध आयात से जुड़ी गतिविधियों की रोकथाम के लिए तुरंत कदम उठाए जाएँ। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) और CDSCO •    “मेडिकल ग्लव्स” की परिभाषा के दायरे को बढ़ाया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले हर तरह के ग्लव्स को सख्त प्रमाणन संबंधी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत लाया जा सके। •    घटिया ग्लव्स को दोबारा पैक करके स्वास्थ्य सेवा केंद्रों को आपूर्ति किए जाने की रोकथाम के लिए अस्पतालों में अनिवार्य ऑडिट का नियम लागू किया जाए। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (DGFT एवं सीमा शुल्क) •    BIS प्रमाणीकरण से बचने के लिए ग्लव्स को गलत तरीके से “नॉन-मेडिकल” के रूप में वर्गीकृत करने पर पाबंदी लगाई जाए। •    इनके आवागमन पर शुरू से अंत तक नज़र रखने की जाँच व्यवस्था को लागू किया जाए, ताकि नॉन-मेडिकल श्रेणियों के तहत आयात किए गए ग्लव्स को दोबारा पैक करके अस्पतालों को बेचना संभव न हो सके। •    चीनी ग्लव्स को मलेशिया और थाईलैंड के रास्ते दोबारा भेजे जाने से रोकने के लिए मूल देश का सत्यापन लागू किया जाए। उपभोक्ता मामले मंत्रालय एवं BIS •    सभी डिस्पोजेबल ग्लव्स पर BIS प्रमाणन की आवश्यकताओं को लागू किया जाए, ताकि चिकित्सा उपयोग के लिए बिना प्रमाणन वाले ग्लव्स का आयात, बिक्री या उनकी दोबारा … Read more

SBI ने किया बड़ा कारनामा, बैंककर्मियों ने कैंटीन व्वॉय के साथ मिलकर 13 ‘मुर्दों’ के नाम से लोन पास कराकर निकाला पैसा

गोरखपुर गोरखपुर में जंगल कौड़िया स्थित एसबीआई की शाखा से 70.20 लाख रुपये का फर्जी तरीके से लोन कर गबन किया गया है। बैंककर्मियों ने कैंटीन व्वॉय के साथ मिलकर 13 ‘मुर्दों’ के नाम से लोन पास कराकर पैसा निकाल लिया। यह मुर्दे रिटायर्ड कर्मचारी थे जिनका बैंक में पेंशन खाता था और उनकी मौत हो चुकी थी। गबन के मामले में गुरुवार को लखनऊ से आए एसबीआई के सहायक महाप्रबंधक ने जंगल कौड़िया चौकी पर पहुंच कर अपनी जांच रिपोर्ट विवेचक को सौंप दी। अब इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी। दरअसल, जंगल कौड़ियां स्थित भारतीय स्टेट बैंक से कूटरचित दस्तावेज का प्रयोग कर पेंशनर्स व मुर्दों के खातों के साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड के खातों से लोन स्वीकृत कर जालसाजी की गई है। पीपीगंज पुलिस ने इस मामले में बैंक प्रबंधक, कैशियर और कैंटीन व्वॉय के खिलाफ केस दर्ज किया था। जिसमें कैशियर अमरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजवाया तो वहीं कैंटीन व्वॉय पंकज ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। जंगल कौड़िया शाखा के खाताधारक राजू ने तारामंडल स्तिथ भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पर 4 जनवरी 2024 को शिकायत कर बताया था कि उनके खाते से फर्जी तरीके से 3 लाख रुपए बैंककर्मी ने कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी के खाते में ट्रांसफर कर रुपए को हड़प लिए हैं। जिसके बाद इस तरीके की शिकायतों की तादात अचानक बढ़ गई। क्षेत्रीय कार्यालय ने एक अधिकारी के नेतृत्व में टीम नियुक्त कर मामले की जांच कराई। जिसमे पाया गया कि बैंक के शाखा प्रबंधक कुमार भास्कर भूषण, अकाउंटेंट अमरेंद्र कुमार सिंह व कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर पेंशन खाताधारकों, किसान क्रेडिट कार्ड खाताधारकों तथा अन्य प्रकार के खाताधारकों के खातों से रुपए की जालसाजी की है। पीपीगंज पुलिस ने तीनों आरोपियों पर केस दर्ज कर जांच में जुटी रही। उधर, बैंक की जांच के बाद प्रबंधक कुमार भास्कर भूषण व अकाउंटेंट अमरेंद्र को निलम्बित कर कर विभागीय जांच बैठाई गई। जांच के दौरान कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी मुख्य आरोपी पाया गया। करोड़पति बन गया कैंटीन ब्वाय: जंगल कौड़िया क्षेत्र के बलुवा गांव निवासी 20 वर्षीय पंकज मणि त्रिपाठी बैंक में कैंटीन ब्वॉय बन गया। पंकज की बैंक के अंदर काफी अच्छी पकड़ बन गई थी। इलाके के सेवानिवृत्ति लोगों को निशाना बना कर पंकज ने मिली भगत करते हुए मरे हुए व्यक्तियों का लोन करवाना शुरू किया। जालसाजी से वह करोड़पति बन गया। केसीसी के भी तीन फर्जी लोन स्वीकृत जांच अधिकारी सहायक महा प्रबंधक सुरेश कुमार ने गुरुवार को जंगल कौड़िया चौकी पर पहुंच कर 78 पेज की अपनी जांच रिपोर्ट चौकी इंचार्ज को सौंप दी। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि 71 लाख 20 हजार गबन जांच में पाया गया। इसमें पेंशन लोन से संबंधित,/ पशु लोन के संबंधित लोगों का नाम सामने आया है। बैंक कर्मियों ने जिन लोगों को लोन स्वीकृत कर जालसाजी की है उनकी संख्या 18 है जबकि इसमें मृत पेंशन धारक की संख्य 13 है। जांच में सामने आया है कि केकेसी के तीन फर्जी लोन स्वीकृत किए गए हैं।

IndiGo ने रचा इतिहास, सीट क्षमता के मामले में इंडिगो दुनिया की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली एयरलाइन बन गई

नई दिल्ली भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सीट क्षमता के मामले में इंडिगो दुनिया की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली एयरलाइन बन गई है। 2024 में इसकी सीट क्षमता 10.1% बढ़कर 134.9 मिलियन से अधिक हो गई है। OAG की रिपोर्ट में इंडिगो को मिला दूसरा स्थान एविएशन डेटा कंपनी ऑफिशियल एयरलाइन गाइड (OAG) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार कतर एयरवेज इस लिस्ट में पहले स्थान पर है। कतर एयरवेज की सीट क्षमता 10.4% बढ़ी है जबकि इंडिगो की 10.1% बढ़ी है जिससे इंडिगो को दूसरा स्थान मिला है। फ्लाइट फ्रीक्वेंसी में भी इंडिगो सबसे आगे OAG के आंकड़ों के अनुसार फ्लाइट फ्रीक्वेंसी (उड़ानों की संख्या) के मामले में इंडिगो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली एयरलाइन बन गई है। इंडिगो ने 2024 में कुल 749,156 उड़ानों का संचालन किया। साल-दर-साल इसकी उड़ान आवृत्ति (Flight Frequency) में 9.7% की वृद्धि हुई है। 900 से अधिक नए विमान ऑर्डर पर इंडिगो के पास दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट ऑर्डर्स में से एक है। एयरलाइन ने 900 से ज्यादा नए विमान ऑर्डर किए हैं। 2024 में इंडिगो को 58 नए एयरबस विमान मिलने वाले हैं जिससे इसकी क्षमता और बढ़ेगी। हालांकि तकनीकी कारणों (MRO सप्लाई चेन समस्याओं) से लगभग 80 विमान फिलहाल संचालन में नहीं हैं। डोमेस्टिक और इंटरनेशनल विस्तार पर फोकस 88% उड़ानें घरेलू बाजार के लिए हैं यानी ज्यादातर फ्लाइट भारत के अंदर संचालित हो रही हैं। इंटरनेशनल विस्तार की योजना भी तैयार है। 2024 में इंडिगो खासतौर पर मध्य पूर्व और थाईलैंड में अपनी सेवाओं का विस्तार करेगी। इंडिगो की लंबी दूरी की उड़ानें भी होंगी लॉन्च इंडिगो की लॉन्ग-हॉल (लंबी दूरी की) उड़ानें शुरू करने की भी योजना है। एयरलाइन 2025 में वेट लीज़ (किराए पर लिए गए) विमानों के साथ लंबी दूरी की उड़ानों की शुरुआत कर सकती है। वहीं कहा जा सकता है कि इंडिगो की यह तेजी से बढ़ती ग्रोथ दिखाती है कि भारतीय एविएशन सेक्टर ग्लोबल लेवल पर अपनी मजबूत पकड़ बना रहा है। नए विमानों की डिलीवरी, अंतरराष्ट्रीय विस्तार और उड़ानों की संख्या बढ़ाकर इंडिगो आने वाले समय में और ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।  

आवासीय संपत्तियों का बाजार उछाल पर बना हुआ, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में 12 प्रतिशत की वृद्धि

नईदिल्ली केयरएज रेटिंग्स द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंडिविजुअल हाउसिंग फाइनेंस मार्केट, जिसका वर्तमान मूल्य 33 लाख करोड़ रुपये है, वित्त वर्ष 25-30 के बीच 15-16 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 77-81 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। आवासीय संपत्तियों का बाजार उछाल पर बना हुआ है केयरएज रेटिंग्स का मानना ​​है कि यह वृद्धि मजबूत संरचनात्मक तत्वों और अनुकूल सरकारी प्रोत्साहनों की वजह से देखी जाएगी, जिससे ‘हाउसिंग फाइनेंस’ ऋणदाताओं के लिए एक आकर्षक परिसंपत्ति वर्ग बन जाएगा। इसमें कहा गया है कि आवासीय संपत्तियों का बाजार उछाल पर बना हुआ है, जो हाउसिंग फाइनेंस इंडस्ट्री का एक प्रमुख चालक है, जो 2019 से 2024 तक 4.6 लाख यूनिट तक 74 प्रतिशत की वृद्धि देख रहा है। जबकि, 2024 में बिक्री प्रदर्शन सामान्य हो गया। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में 12 प्रतिशत की वृद्धि वित्त वर्ष 2021-24 के दौरान, बैंकों ने हाउसिंग लोन स्पेस में 17 प्रतिशत की सीएजीआर से वृद्धि की है, जबकि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, बैंकों ने हाउसिंग लोन मार्केट ने 31 मार्च, 2024 तक 74.5 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ अपना दबदबा बनाए रखा है। केयरएज रेटिंग्स का मानना ​​है कि हाउसिंग फाइनेंस मार्केट की विकास क्षमता को देखते हुए बैंकों और एचएफसी दोनों के पास बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह है। 31 मार्च, 2024 तक एचएफसी की बाजार हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत पर स्थिर थी और यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है। केयरएज रेटिंग्स के 12-14 प्रतिशत विकास अनुमान के अनुरूप वित्त वर्ष 24 में, एचएफसी का लोन पोर्टफोलियो 13.2 प्रतिशत बढ़कर 9.6 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो केयरएज रेटिंग्स के 12-14 प्रतिशत के विकास अनुमान के अनुरूप है। वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के लिए, केयरएज रेटिंग्स ने मजबूत इक्विटी प्रवाह और पूंजी भंडार द्वारा क्रमशः 12.7 प्रतिशत और 13.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि की उम्मीद की है। एचएफसी 30 लाख रुपये से कम के टिकट साइज में काम करती हैं रिटेल सेगमेंट एचएफसी के लिए प्राथमिक विकास चालक बना हुआ है, जबकि थोक क्षेत्र में सतर्क वृद्धि देखी गई है। केयरएज रेटिंग्स की एसोसिएट डायरेक्टर गीता चैनानी ने कहा, “एचएफसी मुख्य रूप से 30 लाख रुपये से कम के टिकट साइज में काम करती हैं, जो मार्च 2024 तक कुल एयूएम का 53 प्रतिशत था। हालांकि, 30-50 लाख रुपये के बीच के टिकट साइज वाले एयूएम के अनुपात में 23 प्रतिशत से 27 प्रतिशत की क्रमिक वृद्धि हुई है और 31 मार्च से 30 सितंबर, 2024 के बीच 30 लाख रुपये से कम एयूएम के अनुपात में गिरावट आई है।” डीप- टेक इनोवेशन से भारत को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में मिलेगी मदद भारत 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर बड़े मान से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही देश सॉफ्टवेयर-लेड टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम से डीप-टेक इनोवेशन द्वारा संचालित इकोसिस्टम- स्ट्रक्चरल बदलाव के दौर से भी गुजर रहा है। गुरुवार को आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। थ्रीवनफोर कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार समर्थित पहल जैसे 10,000 करोड़ रुपये के ‘फंड ऑफ फंड्स’, भारत के सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) और नेशनल डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी (एनडीटीएसपी) फ्रंटियर टेक इनोवेशन और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए कमिटमेंट को दर्शाती हैं। भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर डिजाइन स्पेस में एक प्रमुख प्लेयर है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों, लगभग 125,000 पेशेवरों को रोजगार देता है। राष्ट्रीय शोध कार्यक्रम, विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर और कॉर्पोरेट आरएंडडी निवेश टैलेंट रिटेंशन और विकास को मजबूत कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि रणनीतिक कौशल निर्माण के साथ भारत शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और उद्यमियों की एक मजबूत पाइपलाइन द्वारा समर्थित तकनीकी विकास सुनिश्चित कर रहा है। थ्रीवनफोर कैपिटल के संस्थापक भागीदार और मुख्य निवेश अधिकारी प्रणव पई ने कहा, “भारत का डीप-टेक सेक्टर निवेश के लिए तैयार, नीति-समर्थित और वैश्विक रूप से प्रासंगिक अवसर के रूप में परिपक्व हो रहा है। जबकि नींव मजबूत है, डीप-टेक इनोवेशन को व्यावसायिक रूप से सफल, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी व्यवसायों में बदलने के लिए निरंतर पूंजी, इकोसिस्टम सहयोग और धैर्यपूर्वक निष्पादन की जरूरत होगी।” पई ने कहा कि भारत एक निर्णायक चरण में है, एक ऐसा चरण जहां अनुशासित इनोवेशन और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता अगले दशक में एआई, सेमीकंडक्टर और क्लीन मोबिलिटी में इसकी लीडरशिप को परिभाषित करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2030 तक 70 प्रतिशत नए कमर्शियल व्हीकल ‘ईवी’ होने का अनुमान है, ऐसे में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी दक्षता को बढ़ाने की मुख्य चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “सरकारी प्रोत्साहनों और रणनीतिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी में 10 बिलियन डॉलर के साथ, देश अपने फैबलेस डिजाइन और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है।

अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर की कीमत 52-सप्ताह के निचले स्तर पर, 6 महीने पहले शेयर की कीमत थी 1863 रुपये थी

नई दिल्ली  क्या अंबानी, क्या अडानी… शेयर मार्केट की गिरावट ने बड़ी-बड़ी कंपनियों के शेयरों को धराशाई कर दिया है। इनमें कई शेयर ऐसे हैं जो पिछले 6 महीने में निवेशकों का आधे से ज्यादा नुकसान कर चुके हैं। यानी इनकी कीमत पिछले 6 महीने के मुकाबले आधे से ज्यादा गिर गई है। इसी में अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (Adani Green Energy Ltd) का शेयर भी शामिल है। गुरुवार को अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के शेयर में उतार-चढ़ाव रहा। यह तेजी के साथ खुला था, लेकिन बाद में गिरावट आ गई। इससे पहले बुधवार को यह शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ था। गुरुवार को दोपहर 2:30 बजे यह शेयर करीब 0.25% की गिरावट के साथ 846.30 रुपये पर था। पिछले 6 महीने की रेकॉर्ड देखें तो इस शेयर ने निवेशकों की रकम आधी से भी कम कर दी है। 6 महीने में 50% से ज्यादा नुकसान इस शेयर में पिछले दो दिनों से बेशक तेजी आई हो, लेकिन पिछले काफी समय से यह शेयर निवेशकों का जबरदस्त नुकसान कर रहा है। पिछले एक महीने में इसमें 15 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। वहीं बात अगर 6 महीने की करें तो इसने निवेशकों की रकम को आधे से भी कम कर दिया है। 6 महीने पहले इसके शेयर की कीमत 1863 रुपये थी। अब करीब 846 रुपये है। ऐसे में इसमें 6 महीने में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। यानी निवेशकों का आधे से ज्यादा नुकसान हो गया है। 5 साल पहले भरी थी झोली इस शेयर ने 5 साल पहले यानी मार्च 2020 में निवेशकों की झोली भर दी थी। 6 मार्च 2020 को इसके शेयर की कीमत करीब 145 रुपये थी। दो साल में भी इसमें गजब की तेजी आ गई थी। 29 अप्रैल 2022 को यह 2883 रुपये पर पहुंच गया था। यानी निवेशकों को इन दो वर्षों में करीब 1888 फीसदी का फायदा हुआ था। अगर किसी ने मार्च 2020 में इसमें एक लाख रुपये निवेश किए होते तो दो साल बाद उनकी कीमत करीब 20 लाख रुपये हो चुकी होती। यानी उन दो वर्षों में अडानी के इस शेयर ने पैसों की बारिश कर दी थी। लेकिन अब स्थिति उलट गई है। क्यों आई गिरावट? अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर में गिरावट का सबसे बड़े कारण हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट और गौतम अडानी पर लगे कथित रिश्वत के आरोप रहे। अडानी पर जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। इससे इसके शेयर में बड़ी गिरावट आई। वहीं पिछले साल अमेरिकी कोर्ट ने आरोप लगाया था कि अडानी ने अधिकारियों को रिश्वत दी थी। रिश्वत के रूप में दी जिस रकम का इस्तेमाल किया गया, वह रकम अमेरिकी निवेशकों ने अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी में निवेश के लिए दी थी। इसके बाद इसमें एक और बड़ी गिरावट देखने को मिली।

आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमत में भी बड़ी गिरावट आएगी : एक्सपर्ट

नई दिल्ली  कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। यह अक्टूबर के बाद पहली बार हुआ है जब तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। विदेशी बाजारों में कमजोर मांग को देखते हुए कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। अभी कई संकेत और ऐसे मिल रहे हैं जिनसे पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमत में और कमी आ सकती है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत भी गिर सकती है। बुधवार को तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.3 फीसदी गिरकर 70.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.9 फीसदी गिरकर 67.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को फायदा हो सकता है। और कम हो सकती है कच्चे तेल की कीमत दुनियाभर में ऐसे कई संकेत मिल रहे हैं जिनके चलते आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत और कम हो सकती है। तीन मुख्य संकेत इस प्रकार हैं: 1. रूस पर लगे बैन में ढील इस समय अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने पर लगा है। ऐसे में अमेरिका ने रूस पर जो बैन लगाए हैं, उनमें वह कुछ ढील दे सकता है। अमेरिका ने विदेश और वित्त मंत्रालयों से उन बैन की लिस्ट तैयार करने को कहा है जिनमें रूस को ढील दी जा सकती है। ऐसा होने पर रूस की ओर से तेल की सप्लाई बढ़ सकती है। ऐसे में तेल की कीमत में कमी आ सकती है। 2. OPEC+ ने बढ़ाया प्रोडक्शन OPEC+ ने अपने तेल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला लिया है। रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक OPEC+ ने अप्रैल में तेल प्रोडक्शन को 138,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। ऑयल प्रोडक्शन में यह वृद्धि साल 2022 के बाद पहली बार हो रही है। OPEC+ ग्रुप का कहना है कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ओपेक और सऊदी अरब पर कीमतें कम करने के लिए दबाव बढ़ाने के बाद उठाया गया है। 3. ट्रंप के टैरिफ का भी पड़ेगा असर डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। जानकारों के मुताबिक ये टैरिफ ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटी और फ्यूल डिमांड को प्रभावित कर सकते हैं। इसके चलते तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। यानी इसकी कीमत कम हो सकती है। क्या कम होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत? कच्चे तेल की कीमत कम होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय तेल कंपनियां भी इस बारे में कुछ निर्णय ले सकती हैं। चूंकि अभी कच्चे तेल की कीमत कम हो चुकी है और आने वाले समय में इसमें और गिरावट के संकेत हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी कमी आ सकती है। हो सकता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में बड़ी गिरावट आए। अगर ऐसा होता है तो इससे देश में महंगाई पर भी कुछ काबू पाया जा सकता है।

वैश्विक चुनौतियों के बाद भी भारत की विकास दर वित्त वर्ष 26 में 6.5 प्रतिशत रह सकती है !, रिपोर्ट में दी गई जानकारी

नई दिल्ली अमेरिकी ट्रेड टैरिफ और वैश्विक अस्थिरता जैसी चुनौतियों के बाद भी भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर वित्त वर्ष 26 में 6.5 प्रतिशत रह सकती है। यह जानकारी गुरुवार को क्रिसिल द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में दी गई। यह पूर्वानुमान दो मान्यताओं पर आधारित है। इनमें पहला सामान्य मानसून और दूसरा कमोडिटी की कीमतों में नरमी जारी रहना है। रिपोर्ट में कहा गया कि घटती महंगाई, आम बजट 2025-26 में टैक्स छूट की घोषणा और ब्याज दरों के कम होने से खपत बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट में बताया गया कि हाई फ्रीक्वेंसी डेटा जैसे परचेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) डेटा के मुताबिक, भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपना शीर्ष स्थान बनाए हुए है। क्रिसिल के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ, अमीश मेहता ने कहा कि भारत की मजबूती की फिर से परीक्षा हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में तेज आर्थिक विकास, कम चालू खाता घाटा और बाहरी सार्वजनिक ऋण और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार ने बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने में मदद की है। साथ ही इससे पर्याप्त नीतिगत स्वतंत्रता भी मिली है। आगे कहा कि ग्रामीण क्षेत्र खपत का नेतृत्व कर रहा है, लेकिन छोटी अवधि की वृद्धि के लिए शहरी मांग जरूरी है। मेहता ने आगे कहा कि दूसरी ओर, निरंतर निवेश और दक्षता लाभ मध्यम अवधि में सहायक होंगे। हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2031 तक मैन्युफैक्चरिंग और सेवा दोनों क्षेत्र विकास को समर्थन देंगे। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-31 के दौरान मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर औसतन 9.0 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो महामारी के पूर्व दशक में औसतन 6 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया कि सर्विसेज सेक्टर ग्रोथ को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता रहेगा, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी जारी रहेगी। वित्त वर्ष 26 में 20 प्रतिशत हो सकती है, जो कि वित्त वर्ष 25 में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया कि अगले वित्त वर्ष में रेपो रेट में 50 से 75 आधार अंकों की कटौती की जा सकती है।

मार्क्वार्ट ने भारत में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया

•    लगातार विकसित हो रहे इस महत्वपूर्ण बाज़ार में निवेश •    मेकाट्रॉनिक सिस्टम्स की क्षमताओं को बढ़ावा •    साल 2030 तक लगभग 300 नई नौकरियों के अवसर रीथेइम-वेइलहेम/ तलेगांव, मेकाट्रॉनिक्स क्षेत्र की विशेषज्ञ कंपनी, मार्क्वार्ड ने भारत में अपनी मौजूदगी के दायरे को बढ़ाते हुए, आज पुणे के निकट तलेगांव में आधिकारिक तौर पर एक नए प्लांट का शुभारंभ किया है। परिवार के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने मुंबई में स्थित अपने प्रोडक्शन साइट की जगह इस नई प्रोडक्शन फैसिलिटी की शुरुआत की है, जिससे इसकी क्षमताओं का काफी विस्तार होगा और तेजी से आगे बढ़ रहे बाज़ार में मुकाबला करने के इसके सामर्थ्य को भी मजबूती मिलेगी। इसकी इमारत, मशीनरी और उपकरणों में 180 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। आने वाले समय में, मार्क्वार्ड अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अपने इस प्लांट में मुख्य रूप से भारतीय मोटर-वाहन उद्योग के ग्राहकों के लिए मेकाट्रॉनिक सिस्टम सॉल्यूशंस का निर्माण करेगा। मार्क्वार्ट ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, ब्योर्न ट्विहौस (Björn Twiehaus) इस बारे में बात करते हुए कहते हैं: “मार्क्वार्ट के लिए भारत विकास की असीमित संभावनाओं वाला एक महत्वपूर्ण बाज़ार है। यहाँ हम मोटर वाहन बनाने वाली प्रमुख कंपनियों के साथ मिलकर काम करते हैं और अपनी भारतीय टीम की इनोवेशन करने की काबिलियत और विशेषज्ञता का उपयोग करते हैं। भारत में अपनी सफलता की कहानी को आगे बढ़ाते हुए हमने तलेगांव में इस प्लांट का उद्घाटन किया है। इस तरह, हम भविष्य की आवागमन सुविधाओं के लिए मेकाट्रॉनिक सिस्टम्स उपलब्ध कराने वाली अग्रणी कंपनी के तौर पर अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।” “मेक इन इंडिया” पहल में योगदान मार्क्वार्ट इंडिया के जनरल मैनेजर, विशाल नार्वेकर ने आगे कहा: “तलेगांव में हमारी नई फैसिलिटी का शुभारंभ भारत में मार्क्वार्ट के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारत के मोटर-वाहन उद्योग में ग्राहकों के साथ हमारे मजबूत और लंबे समय से कायम रिश्तों ने हमारी प्रगति में अहम भूमिका निभाई है। इस विस्तार से यह जाहिर होता है कि, हम अपने स्थानीय भागीदारों की ज़रूरतों के अनुरूप विश्व स्तरीय मेकट्रॉनिक सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर कायम हैं। इसके अलावा, यह फैसिलिटी स्थानीय उत्पादन को बढ़ाकर, इनोवेशन को बढ़ावा देकर और नए रोजगार के अवसर पैदा करके ‘मेक इन इंडिया’ पहल में हमारे योगदान को भी उजागर करती है।” लगभग 300 नई नौकरियों के अवसर मार्क्वार्ड अपनी अत्याधुनिक सुविधाओं वाली असेंबली लाइनों के अलावा, इन-हाउस इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन एवं लॉजिस्टिक्स के साथ तलेगांव के अपने ग्राहकों को संपूर्ण मेक्ट्रोनिक सॉल्यूशंस उपलब्ध कराता है, जिसमें ड्राइव ऑथराइजेशन सिस्टम, गियर सिलेक्टर स्विच और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। साथ ही, इस निवेश से सप्लाई चेन का आकार छोटा होगा, प्रतिक्रिया का समय तेज़ होगा और लचीलापन बढ़ेगा। आने वाले पाँच सालों में, मार्क्वार्ड की इस नई साइट पर लगभग 300 अतिरिक्त नौकरियों के अवसर सामने आएंगे। भारत के लिए दीर्घकालिक समर्पण                                                                                              मार्क्वार्ड पिछले कुछ दशकों से भारत में सक्रिय है और पुणे में 450 से ज़्यादा कर्मचारियों के साथ एक डेवलपमेंट सेंटर का संचालन कर रहा है। हमारे विशेषज्ञ पूरी दुनिया में मौजूद मार्क्वार्ड इनोवेशन नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो देश और विदेश की परियोजनाओं पर काम करते हैं। मार्क्वार्ट के शेयरधारक एवं बोर्ड के सदस्य, डॉ. हेराल्ड मार्क्वार्ट ने जोर देकर कहा, “भारत में हमारी टीम पूरी दुनिया में हमारी कामयाबी की बुनियाद है। हमारे भारतीय विशेषज्ञों के इनोवेशन, उनकी काबिलियत और सच्ची लगन की कोई मिसाल नहीं है। इस नए प्लांट के शुभारंभ से देश और दुनिया भर में अपने ग्राहकों के लिए हमारा दीर्घकालिक समर्पण उजागर होता है।” ऊँचे पदों पर मौजूद अतिथियों की उपस्थिति में उद्घाटन समारोह उद्घाटन समारोह में कार बनाने वाली अग्रणी कंपनियों, साझेदार कंपनियों के प्रतिनिधियों और कारोबार एवं राजनीतिक जगत के ऊँचे पदों पर मौजूद प्रतिनिधियों ने भाग लिया। डॉ. हेराल्ड मार्क्वार्ट ने साइट पर मौजूद टीम की उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा: “आज हम इस प्लांट के उद्घाटन में सक्षम हुए हैं, जो अनेक समर्पित लोगों की सच्ची लगन और उनके अटल इरादे का परिणाम है। मैं इस सफलता में योगदान देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ।”

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