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एप्पल ने भारत में अपनी पहली रिसर्च और डेवलपमेंट सहायक कंपनी की स्थापित

भारत का स्मार्टफोन बाजार इस साल 7-8 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान  प्रीमियम, 5जी और एआई स्मार्टफोन की मजबूत मांग के कारण भारत के स्मार्टफोन बाजार में इस साल तेजी का अनुमान एप्पल ने भारत में अपनी पहली रिसर्च और डेवलपमेंट सहायक कंपनी की स्थापित नई दिल्ली  प्रीमियम, 5जी और एआई स्मार्टफोन की मजबूत मांग के कारण भारत के स्मार्टफोन बाजार में इस साल तेजी का अनुमान जताया जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के स्मार्टफोन बाजार में 7-8 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। वहीं, भारत में मोबाइल हैंडसेट बाजार में स्थिर वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है। साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) के विश्लेषक-इंडस्ट्री इंटेलिजेंस ग्रुप (आईआईजी) पंकज जादली ने कहा, “जैसे-जैसे ब्रांड टेक्नोलॉजी के अंतर को कम करने और किफायती 5जी डिवाइस पेश करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, प्रतिस्पर्धा तेज होने की संभावना बढ़ती जाती है। आने वाली तिमाहियों में एआई-इनेबल्ड डिवाइस को लेकर ग्राहकों की पसंद बनी रहेगी।” तीसरी तिमाही में, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत के स्मार्टफोन बाजार में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। भारत में उपभोक्ता मांग मजबूत बनी हुई है, जो मिड-रेंज और प्रीमियम स्मार्टफोन को पसंद करने के कारण है। 5जी स्मार्टफोन शिपमेंट की हिस्सेदारी बढ़कर 82 प्रतिशत हो गई, जो कि सालाना आधार पर 49 प्रतिशत की एक बड़ी वृद्धि है। तिमाही के दौरान 18 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ वीवो 5जी स्मार्टफोन बाजार में सबसे आगे रहा, जबकि सैमसंग 17 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। सीएमआर की एनालिस्ट-इंडस्ट्री इंटेलिजेंस ग्रुप मेनका कुमारी के अनुसार, भारत का स्मार्टफोन बाजार अनुकूलनशीलता प्रदर्शित कर रहा है, जिसमें उपभोक्ता प्राथमिकताएं 5जी अपनाने और प्रीमियम सुविधाओं पर अधिक केंद्रित हैं। 5जी स्मार्टफोन की निरंतर वृद्धि 10 हजार-13 हजार प्राइस बैंड के साथ जुड़ी है। जो कि किफायती कीमत पर हाई-परफॉर्मेंस डिवाइस चाहने वाले ग्राहकों की बढ़ती संख्या का संकेत है। इसके अतिरिक्त, प्रीमियम फोन की लहर मजबूत बनी हुई है, प्रीमियम सेगमेंट (25,000 रुपये से ऊपर) में 26 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी गई। एप्पल ने सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की, जिसमें शिपमेंट में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में फीचर फोन बाजार में तीसरी तिमाही में 14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण 4जी फीचर फोन शिपमेंट में 46 प्रतिशत की एक बड़ी गिरावट है।   एप्पल ने भारत में अपनी पहली रिसर्च और डेवलपमेंट सहायक कंपनी की स्थापित आईफोन निर्माता एप्पल ने भारत में अपनी नई रिसर्च और डेवलपमेंट सहायक कंपनी की शुरुआत की है। भारत में सहायक कंपनी स्थापित करने को लेकर यह कदम चीन के बाहर एप्पल की सप्लाई चेन और रिसर्च को लेकर अहम माना जा रहा है। एप्पल की यह सहायक कंपनी रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग-प्रोवाइडिंग और थर्ड पार्टी के निर्माताओं को सहायता देने को लेकर काम करेगी। बाजार के जानकारों के अनुसार, एप्पल का भारत में रिसर्च और डेवलपमेंट सुविधा स्थापित करने का कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कंपनी को लोकल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को समझने, मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने और भारत-स्पेसिफिक उत्पाद और समाधान बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में एप्पल के पास अमेरिका, चीन, जर्मनी और इजरायल में रिसर्च और डेवलपमेंट सुविधाएं हैं। कंपनी ने रिसर्च और डेवलपमेंट को लेकर भारत की अपनी भविष्य की योजनाओं पर फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी है। साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) के वीपी-इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप, प्रभु राम के अनुसार, जिस तरह से चीन ने अतीत में एप्पल के विकास को बढ़ावा दिया, उसी तरह भारत अगले दशक में भी ऐसा ही करने के लिए तैयार है। राम ने बताया, “इस वृद्धि की वजह केवल रिटेल और मार्केटिंग ही नहीं है, बल्कि मजबूत आरएंडडी ऑपरेशन भी है। भारत-केंद्रित आरएंडडी पर ध्यान केंद्रित कर, एप्पल भारतीय ग्राहकों और उससे आगे की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए इनोवेशन के अगले स्तर को बढ़ावा दे रहा है।” एप्पल भारत और वियतनाम में अपनी मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। व्यापार करने में आसानी और अनुकूल लोकल मैन्युफैक्चरिंग नीतियों से उत्साहित, एप्पल के ‘मेक इन इंडिया’ आईफोन पिछले सभी निर्यात रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। कंपनी के सीईओ टिम कुक के अनुसार, भारत में चार और खुद के ब्रांडेड रिटेल स्टोर खोलने की तैयारी है। वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही के दौरान कुक ने कहा, “हम भारत में जो उत्साह देख रहे हैं, उससे हम उत्साहित हैं, जहां हमने अब तक का सबसे बड़ा राजस्व रिकॉर्ड बनाया है। एप्पल के लिए यह इनोवेशन का एक असाधारण वर्ष रहा है। हम भारत में ग्राहकों के लिए चार नए स्टोर खोलने का इंतजार नहीं कर सकते।” कुक ने कहा, “हम शिक्षा के प्रति जुनूनी हैं और मानते हैं कि शिक्षकों को अपने छात्रों को प्रेरित करने और छात्रों को अपने आसपास की दुनिया के बारे में जानने में मदद करने में टेक्नोलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका है।” लेटेस्ट इंडस्ट्री आंकड़ों के अनुसार, टेक दिग्गज भारत से निर्यात के वित्त वर्ष 2024 के आंकड़ों को पार करने की राह पर है, जो इस वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 25) के पहले छह महीनों में 50,000 करोड़ रुपये (6 बिलियन डॉलर से अधिक) तक पहुंच गया है। भारत से आईफोन निर्यात 2022-23 में 6.27 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 10 बिलियन डॉलर को पार कर गया। कुल मिलाकर, आईफोन निर्माता का भारत परिचालन पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 24) में 23.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। एप्पल ने पिछले वित्त वर्ष में भारत में 14 बिलियन डॉलर के आईफोन असेंबल किए और 10 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के डिवाइस निर्यात किए।    

पेप्सिको, यूनिलीवर और डैनोन पैकेज्ड फूड कंपनियां भारत में ऐसे प्रोडक्ट बेच रही हैं जो कम हेल्दी हैं: एटीएमआई रिपोर्ट

नई दिल्ली आपने पेप्सिको, यूनिलीवर, डैनोन आदि कंपनियों के नाम सुने होंगे। ये कंपनियां कई तरह के प्रोडक्ट भारत समेत दुनियाभर में बेचती हैं। अब इन कंपनियों पर आरोप लगा है कि ये भारत समेत कई देशों में खराब क्वालिटी के प्रोडक्ट बेच रही हैं। ये आरोप एक एनजीओ एक्सेस टू न्यूट्रिशन इनिशिएटिव (ATNI) की नई इंडेक्स रिपोर्ट में लगाए गए हैं। पेप्सिको (PepsiCo) भारत में पेप्सी, सेवनअप, स्लाइस, स्टिंग, Lays चिप्स, कुरकुरे आदि बेचती है। वहीं यूनिलीवर (Unilever) हॉर्लिक्स, रेड लेवल चाय, ताज महल चाय, क्लोजअप टूथपेस्ट, क्लिनिक प्लस शैंपू और ऑइल, डव साबुन आदि बेचती है। इसके अलावा डैनोन (Danone) बेबी फूड आइटम्स बेचती है जिसमें प्रोटिनेक्स भी शामिल है। क्या है रिपोर्ट में? इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार एटीएमआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि पेप्सिको, यूनिलीवर और डैनोन जैसी विदेशी पैकेज्ड फूड कंपनियां भारत और अन्य कम आय वाले देशों में ऐसे प्रोडक्ट बेच रही हैं जो कम हेल्दी हैं। वहीं हाई इनकम वाले देशों में ये कंपनियां जो प्रोडक्ट बेच रही हैं, उनकी हेल्थ स्टार रेटिंग कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट में निम्न और निम्न मध्यम आय वाले देशों की लिस्ट में भारत के साथ इथियोपिया, घाना, केन्या, नाइजीरिया, पाकिस्तान, फिलीपींस, तंजानिया और वियतनाम को शामिल किया गया है। क्वालिटी के साथ ऐसे कर रहीं खिलवाड़ रिपोर्ट में प्रोडक्ट की क्वालिटी को उदाहरण से समझाया गया है। इसके अनुसार Lays चिप्स और ट्रॉपिकाना जूस बनाने वाली पेप्सिको ने न्यूट्री-स्कोर A/B को पूरा करने वाले प्रोडक्ट की बिक्री बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन यह केवल यूरोपीय संघ में इसके स्नैक्स पोर्टफोलियो पर लागू होता है। वहीं यूनिलीवर के फूड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में क्वालिटी वॉल्स और मैग्नम आइसक्रीम तथा नॉर सूप और रेडी-टू-कुक मिक्स शामिल हैं। डैनोन भारत में प्रोटीनेक्स सप्लीमेंट और एप्टामिल शिशु फॉर्मूला बेचता है। किसे कितने अंक मिले? अमेरिका की एटीएनआई इंडेक्स के अनुसार, हेल्थ स्टार रेटिंग सिस्टम के अनुसार, प्रोडक्ट्स को 5 अंकों में से उनके हेल्थ स्कोर के आधार पर रैंक किया जाता है। इसमें 5 को सर्वश्रेष्ठ स्कोर माना जाता है। 3.5 से ऊपर के स्कोर को स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। निम्न आय वाले देशों में फूड कंपनियों के पोर्टफोलियो का टेस्ट किया गया और उन्हें 1.8 अंक दिए गए। जबकि हाई इनकम वाले देशों में ऐसे प्रोडक्ट्स को औसतन 2.3 अंक दिए गए।

20 नवंबर को BSE और NSE में नहीं होगा कारोबार, शेयर मार्केट का कामकाज रहेगा रहेगा बंद

मुंबई भारतीय शेयर बाजारों में आने वाली 20 नवंबर 2024 को बुधवार के दिन छुट्टी रहेगी और स्टॉक मार्केट में बीएसई और एनएसई पर कोई कामकाज नहीं होगा. शेयर बाजार में अवकाश का ऐलान महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के उपलक्ष्य में किया गया है. शेयर बाजार ने इस बात की आधिकारिक जानकारी दे दी है. करेंसी मार्केट और कमोडिटी एक्सचेंज पर भी कारोबारी अवकाश स्टॉक मार्केट के दोनों एक्सचेंज यानी बीएसई और एनएसई पर शेयर बाजार में अवकाश रहेगा और इस दिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के चलते एक्सचेंज पर कामकाज नहीं होगा. करेंसी मार्केट और कमोडिटी एक्सचेंज पर भी कारोबार का अवकाश रहेगा. 20 नवंबर को मुंबई में राजनीतिक हलचल के चलते व्यस्त रहेंगे मुंबईकर इसी दिन झारखंड विधानसभा चुनाव भी होंगे और उत्तर प्रदेश के 9 विधानसभा उपचुनाव का ऐलान हो चुका है. वैसे शेयर बाजार में छुट्टी इसलिए दी गई है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जहां से स्टॉक एक्सचेंज संचालित होते हैं, वहां चुनावी दिन है. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 20 नवंबर को राजनीतिक हलचल रहेगी और इसी कारण से वित्तीय कामकाज को थोड़ा विराम देने की कोशिश की गई है जिससे सभी मुंबईकर और महाराष्ट्र के वासी अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग कर सकें.

अनिल अंबानी को बड़ा झटका, 3 साल के बैन से बढ़ी मुश्किलें, शेयर 5% टूटकर 41.47 रुपये पर पहुंचे

मुंबई अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर के शेयर शुक्रवार को बाजार खुलते ही धड़ाम हो गए हैं। रिलायंस पावर के शेयर BSE में 5 पर्सेंट लुढ़ककर 41.47 रुपये पर पहुंच गए हैं। दरअसल, एक खबर से अनिल अंबानी की कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। सरकारी कंपनी सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने रिलायंस पावर लिमिटेड, उसकी सहायक कंपनियों और रिलायंस NU BESS लिमिटेड पर कंपनी की तरफ से जारी टेंडर्स में हिस्सा लेने के लिए 3 साल की रोक लगा दी है। सरकारी कंपनी ने इस वजह से लगाया है बैन सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने जून में एक टेंडर रिलीज किया था, इस टेंडर में अनिल अंबानी की कंपनियों की तरफ से कथित फर्जी दस्तावेज जमा करने की बात सामने आई है। सरकारी कंपनी ने इसी के बाद यह पाबंदी लगाई है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ने इस टेंडर में 1000 MW/2000 MWh स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए निविदा मांगी थीं। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद टेंडर प्रोसेस को कैंसल कर दिया गया है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ने कहा है कि महाराष्ट्र एनर्जी जेनरेशन लिमिटेड (अब नाम रिलायंस NU BESS लिमिटेड) की तरफ से जमा किए गए दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) के बदले बैंक गारंटी का इंडोर्समेंट फर्जी था। रिलायंस पावर, इसकी सब्सिडियरीज और रिलायंस NU BESS लिमिटेड पर बैन 6 नवंबर 2024 से प्रभावी हुआ है। हाल में कर्ज मुक्त हुई है रिलायंस पावर की एक कंपनी अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर ने पिछले दिनों बताया कि उसकी इकाई रोजा पावर सप्लाई कंपनी ने सिंगापुर बेस्ड लेंडर वर्डे पार्टनर्स का 485 करोड़ रुपये का कर्ज और चुका दिया है। साथ ही, रोजा पावर अब जीरो-डेट कंपनी बन गई है। रोजा पावर को जीरो-डेट स्टेटस मिल गया है। कंपनी ने वर्डे पार्टनर्स का पूरा 1318 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया है। सितंबर में रोजा पावर ने वर्डे पार्टनर्स को 833 करोड़ रुपये का पेमेंट किया था।

शेयर बाजार में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन अचानक से बड़ी गिरावट आ गई

मुंबई शेयर बाजार (Stock Market) में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन अचानक से बड़ी गिरावट आ गई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स (Sensex) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने निफ्टी (Nifty) ने जोरदार ओपनिंग की, लेकिन ये तेजी कुछ ही मिनटों में गिरावट में तब्दील हो गई और सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा टूट गया. निफ्टी में भी 190 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई. मार्केट की शुरुआत में ही बीएसई के 30 में से 24 शेयर धड़ाम हो गए. अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की जीत का जश्न एक दिन भी नहीं टिक सका और कल की तेजी आज बड़ी गिरावट में तब्दील हो गई. Sensex अचानक हो गया धराशायी बीते कारोबारी दिन की जोरदार तेजी के बाद गुरुवार को शेयर मार्केट ने बढ़त के साथ हरे निशान पर कारोबार शुरू किया. BSE Sensex अपने पिछले बंद 80,378.13 की तुलना में करीब 200 अंकों की छलांग लगाते हुए 80,563.42 के लेवल पर ओपन हुआ. लेकिन महज 15 मिनट के कारोबार के दौरान ही ये लाल निशान पर आ गया और 823.73 अंक की गिरावट के साथ 79,554.10 के लेवल पर ट्रेड करता नजर आया. बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की जोरदार जीत के बीच सेंसेक्स 901 अंक चढ़कर बंद हुआ था. Nifty भी शुरुआती तेजी से फिसला सेंसेक्स की तरह ही NSE Nifty ने भी गुरुवार को कारोबार की शुरुआत को हरे निशान पर की, लेकिन एक झटके में ये लाल निशान पर कारोबार करने लगा. अपने बुधवार के बंद 24,484.05 की तुलना में मामूली बढ़त लेकर निफ्टी इंडेक्स 24,489.60 के लेवल पर ओपन हुआ और खबर लिखे जाने तक ये 194 अंक की बड़ी गिरावट के साथ या 0.74 फीसदी टूटकर 24,289 के लेवल पर कारोबार कर रहा था. ये शुरुआती कारोबार में ही 24,326 के स्तर तक फिसला था.   इन 10 शेयरों का बुरा हाल अब बात करते हैं कि बाजार में अचानक आई इस गिरावट के बीच सबसे ज्यादा कौन से शेयर फिसले, तो लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Ultratech Cement Share 1.66% की गिरावट के साथ 11,083.60 रुपये पर, जबकि Bajaj Finserve Share 1.57% टूटकर 1720.10 रुपये पर कारोबार कर रहा था. Tech Mahindra Share में भी 1.20 फीसदी की गिरावट आई और ये 1674 रुपये के लेवल पर ट्रेड करता नजर आया. मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों को देखें, तो Midcap में ग्लेमार्क शेयर (GlenMark Share) 3.80% फिसलकर 1701.80 रुपये पर, Muthoot Finance Share 2.47% की गिरावट के साथ 1848.30 रुपये पर और Escorts Share 2.29% टूटकर 3667.15 रुपये पर कारोबार कर रहा था. वहीं दूसरी ओर स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल RPSGVENT Share 6.05%, Blue Star Share 5.89%, SBCL Share 4.50% और FDC Share 4.17% की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था.

यूपी के तीनों ग्रामीण बैंकों के विलय से यूपी राज्य ग्रामीण बैंक आकार लेगा, बैंकों की संख्या 43 से घटकर होगी 28

नई दिल्ली देश में बैंकों को लेकर मोदी सरकार बड़ा फैसला लेने जा रही है। दरअसल, बैंकों की संख्या कम किया जाएगा और शेष बचे बैंकों को व्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित किया जाएगा। बैंकों की संख्या वर्तमान में 43 से घटकर 28 हो जाने की संभावना है। इन राज्यों के बैंकों का होगा विलय बता दें कि वित्त मंत्रालय के तरफ से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का दूसरे बैंकों में विलय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।  आरआरबी का विलय आंध्र प्रदेश (चार आरआरबी), उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल (प्रत्येक में तीन) और बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा तथा राजस्थान (प्रत्येक में दो) में किया जाएगा। वित्तीय सेवा विभाग ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रायोजक बैंकों के प्रमुखों से 20 नवंबर तक टिप्पणियां मांगी हैं। वहीं यूपी के तीनों ग्रामीण बैंकों के विलय से यूपी राज्य ग्रामीण बैंक आकार लेगा, जिसका प्रस्तावित मुख्यालय राजधानी लखनऊ में होगा। UP में तीन ग्रामीण बैंकों का विलय उत्तर प्रदेश में ग्रामीण बैंक को बड़ा बनाने की तैयारी है, इसके बाद प्रदेश का  सबसे बड़े नेटवर्क वाला बैंक हो जाएगा, जो प्रदेश के 75 जिलों में अपनी 4317 शाखाओं के साथ कार्यरत होगा। बता दें कि अभी प्रदेश में भारतीय स्टेट बैंक की शाखाएं सर्वाधिक हैं, जिनकी संख्या 2780 है। भारत सरकार के निर्देशानुसार ग्रामीण बैंकों के विलय का यह चौथा चरण है। यूपी में स्टेट बैंक से भी ज्यादा शाखाएं ग्रामीण बैंक की होंगी यूपी में अब सबसे ज्यादा शाखाएं ग्रामीण बैंक की होंगी। स्टेट बैंक से भी ज्यादा। यह नया बैंक प्रदेश की तीनों ग्रामीण बैंकों के मर्जर के बाद आकार लेगा। इसका नाम यूपी राज्य ग्रामीण बैंक होगा। इसकी कवायद केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है। बड़ौदा यूपी बैंक, आयावर्त बैंक और प्रथमा यूपी बैंक सहित अन्य राज्यों में जहां एक से अधिक ग्रामीण बैंक कार्यरत हैं, के विलय की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। इसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय के निदेशक सुशील कुमार सिंह ने राज्य सरकार और प्रायोजक बैंक को पत्र भेजकर 20 नवंबर तक अपनी सहमति भेजने को कहा है। इसका प्रधान कार्यालय लखनऊ में रहेगा वहीं इस विलय की प्रक्रिया को लेकर ALL India ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव डीएन त्रिवेदी का कहना है कि वित्त मंत्रालय ने आपसी विलय के लिए राज्य के अधिकतम व्यापार वाले ग्रामीण Bank में दूसरे ग्रामीण बैंक के विलय और राज्य मुख्यालय में प्रधान कार्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा प्रायोजिक बड़ौदा यूपी बैंक के साथ बैंक ऑफ इंडिया द्वारा प्रायोजित आर्यावर्त बैंक व पंजाब नेशनल बैंक द्वारा प्रायोजित प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक का विलय होगा। इसका प्रधान कार्यालय लखनऊ में रहेगा। विलय से ये होंगे लाभ ग्रमीण बैंकों के विलय होने के बाद इन बैंकों के संसाधन बढ़ जाएंगे व ऋण देने की क्षमता भी बढ़ जाएगी जिससे राज्य, खासकर ग्रामीण अर्थ व्यवस्था मजबूत होगी। विलय होने के बाद से ग्रामीण बैंक बाजार से पूंजी एकत्र करने में सक्षम होंगे। विलय होने के बाद  ग्रामीण बैंक की पूंजी के लिए सरकार पर निर्भरता कम होगी और अपने स्थापना खर्च वहन करने में आत्मनिर्भर होंगे  

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांक एक प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि के साथ हरे निशान में बंद हुए

मुंबई भारतीय शेयर बाजार ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की संभावित जीत का स्वागत किया है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांक एक प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि के साथ हरे निशान में बंद हुए हैं। कारोबार के अंत में आईटी सेक्टर में जबरदस्त खरीदारी देखी गई। सेंसेक्स 901.50 अंक या 1.13 प्रतिशत चढ़कर 80,378.13 पर बंद हुआ। वहीं, दूसरी ओर निफ्टी 270.75 अंक या 1.12 प्रतिशत चढ़ने के बाद 24,484 पर बंद हुआ। निफ्टी बैंक 110.15 अंक या 0.21 प्रतिशत चढ़ने के बाद 52,317.40 पर आ गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स कारोबार के अंत में 1,240.35 अंक या 2.21 प्रतिशत चढ़ने के बाद 57,355.80 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 402.65 अंक या 2.18 प्रतिशत चढ़ने के बाद 18,906.10 पर बंद हुआ। निफ्टी के ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विस, फार्मा, एफएमसीजी, मेटल, रियलिटी, मीडिया और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली। सारे सेक्टर हरे निशान पर कारोबार करने के साथ बंद हुए हैं। सेंसेक्स पैक में टीसीएस, एचसीएल टेक, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, एलएंडटी और मारुति टॉप गेनर्स रहे। टाइटन, इंडसइंड बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक टॉप लूजर्स रहे। बाजार का रुझान सकारात्मक रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 3,013 शेयर हरे, 961 शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे। वहीं, 89 शेयर में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं रहा। बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में राहत की लहर देखी गई, जिससे ट्रंप के मजबूत जनादेश के साथ राजनीतिक अनिश्चितता कम हुई। इससे कर कटौती और सरकारी खर्च में वृद्धि की उम्मीदों से प्रेरित मजबूत जोखिम-भावनाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने आगे कहा कि घरेलू खरीद व्यापक आधार पर हुई, जिसमें आईटी ने अमेरिका में आईटी खर्च में उछाल की उम्मीद में बढ़त हासिल की। आईटी दूसरी तिमाही के नतीजों के अनुसार अमेरिका में बीएफएसआई खर्च में सुधार हुआ है, जो भारत के लिए सकारात्मक है।

शेयर मार्केट पर US राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का असर, सेंसेक्स अब 702 अंक ऊपर 80178 के लेवल पर ट्रेड कर रहा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना के बीच सेंसेक्स भी उड़ान रहा है। सेंसेक्स अब 702 अंक ऊपर 80178 के लेवल पर ट्रेड कर रहा है। जबकि, निफ्टी 207 अंकों की उछाल के साथ 24420 पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना के बीच सेंसेक्स भी भाग रहा है। आज दिन के हाई 80115 पर पहुंचने के बाद सेंसेक्स अभी भी 570 अंक ऊपर 80047 के लेवल पर ट्रेड कर रहा है। जबकि, निफ्टी 24415 का लेवल छूने के बाद अब 172 अंकों की बढ़त के साथ 24385 पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कमला हैरिस की वापसी से शेयर मार्केट में बढ़त अब घट गई है। आज दिन के हाई 80115 पर पहुंचने के बाद सेंसेक्स अब केवल 298 अंक ऊपर 79775 के लेवल पर आ गया है। जबकि, निफ्टी 24415 का लेवल छूने के बाद अब 93 अंकों की बढ़त के साथ 24307 पर है। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 84.1725 पर पहुंच गया है। इससे पहले यह 84.1075 पर बंद हुआ था। इसे आखिरी बार 84.17 पर कारोबार करते हुए देखा गया था। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉलर इंडेक्स करीब 1.5% बढ़कर चार महीने के उच्चतम स्तर 104.9 पर पहुंच गया, जबकि एशियाई मुद्राओं में 1.2% तक की गिरावट आई। घरेलू शेयर मार्केट में बंपर उछाल है। सेंसेक्स 540.41 अंकों की उछाल के साथ 80,017.04 पर पहुंच गया है। निफ्टी भी 176 अंकों की उड़ान भरकर 24389 के लेवल पर है। निफ्टी टॉप गेनर्स की लिस्ट में एचसीएल टेक, ट्रेंट, इन्फोसिस, बीईएल और टीसीएस हैं। प्रत्येक में 2 फीसद से अधिक की बढ़त है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझान में डोनाल्ड ट्रंप को 200 से अधिक सीटें मिलती दिख रही हैं। ऐसे में सेंसेक्स अभी 91 अंक ऊपर 79568 पर है। एचसीएल टेक, इन्फोसिस, मारुति, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी, इंडसइंड बैंक, नेस्ले, रिलायंस, एक्सिस बैंक, आईटीसी, अडानी पोर्ट्स जैसे स्टॉक शुरुआती कारोबार में बढ़त बनाए हुए हैं।

Swiggy IPO का इंतजार खत्म, आज से खुलेगा स्विगी आईपीओ, ₹371-390 प्राइस बैंड फिक्स, चेक करें GMP

मुंबई ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी का आईपीओ आज 6 नवंबर से खुल जाएगा. रिटेल निवेशक बुधवार से बोली लगा सकते हैं, जोकि 8 नवंबर को बंद हो जाएगा. कंपनी आईपीओ के जरिए करीब 11,327 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है. पब्लिक इश्यू के लिए प्राइस बैंड 371-390 रुपए फिक्स किया गया है. इस लिहाज से निवेशकों को हर लॉट में 38 शेयर मिलेंगे. हालांकि ग्रे मार्केट में भाव लगातार गिरता जा रहा है. 6 नवंबर को खुलेगा आईपीओ स्विगी आईपीओ (Swiggy IPO) आज 6 नवंबर से खुलेगा. रिटेल निवेशक पब्लिक इश्यू में 8 नवंबर तक बोली लगा सकते हैं. बताते चलें कि कंपनी ने मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास 26 सितंबर को आईपीओ के लिए अप्लाई किए थे. आईपीओ में 500 करोड़ रुपए के नए शेयर जारी किए जाएंगे. वहीं, ऑफर फॉर सेल यानी OFS में प्रोमोटर्स और मौजूदा निवेशक हिस्सा बिक्री करेंगी. इसके तहत 18.52 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री होगी. ओएफएस के जरिए करीब 6,666 करोड़ रुपए जुटाने की योजना है. स्विगी पब्लिक इश्यू के लिए बुकरनिंग लीड मैनेजर्स के तौर पर कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया, जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एवेंडस कैपिटल, जेपी मॉर्गन इंडिया, बोफा सिक्योरिटीज इंडिया और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज नियुक्त किया गया है. वहीं, रजिस्ट्रार के तौर पर लिंक इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है. ग्रे मार्केट में स्विगी आईपीओ स्विगी के आईपीओ का जलवा ग्रे मार्केट में कम होता जा रहा है. आईपीओ खुलने से पहले प्रीमियम में गिरावट दर्ज की जा रही है. यह मंगलवार को 20 रुपए गिर गया. इस लिहाज ग्रे मार्केट प्रीमियम अब 410 रुपए पर आ गया है, जोकि इश्यू प्राइस 390 रुपए से 5.13 फीसदी ज्यादा है जोमैटो vs स्विगी का कारोबार ज़ोमैटो ने हाल ही में प्रॉफिटेबिलिटी का ऐलान किया, जिसका वैल्युएशन 30 बिलियन डॉलर के करीब है. इसे ब्लिंकिट और इसके B2B सेगमेंट, हाइपरप्योर के माध्यम से इंस्टेंट कॉमर्स में सफल प्रयासों से बल मिला है. दूसरी ओर, स्विगी के वित्तीय प्रदर्शन ने ग्रोथ और चुनौतियों का मिश्रण दिखाया है. वित्त वर्ष 24 में स्विगी ने 36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 11,247 करोड़ रुपए का राजस्व दर्ज किया, जबकि घाटे में 44 प्रतिशत की कटौती की. हालांकि, वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में बढ़ते खर्चों की वजह से स्विगी के घाटे में 8 फीसदी का अजाफा होगा, जो 611 करोड़ रुपए थी. इसके उलट उसी दौरान जोमैटो की आय 253 करोड़ रुपए के फायदे के साथ 4,206 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. भारत में तेजी बढ़ रहा फूड डिलीवरी मार्केट भारतीय फूड डिवीवरी मार्केट को लेकर आगे अच्छा आउटलुक है. एक अनुमान के मुताबिक साल 2030 तक यह 2 लाख करोड़ रुपए के पार निकल जाएगा. देश के फूड डिलीवरी मार्केट में 90% से ज्यादा की हिस्सेदारी स्विगी और जोमैटो के पास है. जोमैटो को मार्केट में साल 2021 में ही लिस्ट हो चुका है. अब स्विगी की बारी है. मीडिया सोर्सेज के मुताबिक स्विगी पर कुछ बैंकरों ने भरोसा जताया है, जोकि 10 से 13 अरब डॉलर की वैल्युएशंस के साथ लिस्ट हो सकती है.

रीजनल रूरल बैंकों के मर्जर की तैयारी में सरकार, अभी पूरे देश में कुल 43 Regional Rural Bank हैं

नई दिल्ली  सरकार की नजर अब क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर है। देश में अभी 43 ग्रामीण बैंक हैं। सरकार उनकी संख्या 28 करना चाहती है। इसके लिए कुछ बैंकों का दूसरे बैंकों में मर्जर करने का प्लान है। इससे इन बैंकों को लागत कम करने और कैपिटल बेस बढ़ाने में मदद मिलेगी। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस बारे में एक दस्तावेज तैयार किया है। इसमें ग्रामीण बैंकों के मर्जर का प्रस्ताव है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक छोटे किसानों, कृषि मजदूरों और छोटे कारोबारियों को क्रेडिट देते हैं लेकिन उनकी पूंजी और टेक्नोलॉजी तक पर्याप्त पहुंच नहीं है। 31 मार्च, 2024 तक के आंकड़ों के मुताबिक इन बैंकों के पास कुल 6.6 लाख करोड़ रुपये जमा थे जबकि उनका एडवांस 4.7 लाख करोड़ रुपये का था। एक बैंकर ने कहा कि प्रस्तावित मर्जर के बाद एक राज्य में एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रह जाएगा। इस बारे में वित्त मंत्रालय ने ईमेल का जवाब नहीं दिया। एसेट्स के हिसाब से देश में अब भी आधे से अधिक बैंकिंग सेक्टर पर सरकारी बैंकों को कब्जा है। सरकार ने बैंकों के कामकाज में सुधार करने और कैपिटल के लिए सरकार पर उनकी निर्भरता कम करने के लिए उन्हें कंसोलिडेट करने की कोशिश की है। कितनी घट चुकी है संख्या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में केंद्र सरकार की 50 फीसदी, स्पॉन्सर या शेड्यूल्ड बैंकों की 35 फीसदी और राज्य सरकार की 15 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार ने 2004-05 में बैंकों को कंसोलिडेट करने की प्रोसेस शुरू की थी। 2020-21 तक इनकी संख्या 196 से घटाकर 43 की गई थी। प्रस्ताव में महाराष्ट्र में दो रीजनल बैंकों का मर्जर करने की योजना है। साथ ही आंध्र प्रदेश में भी चार बैंकों को मिलाने की बात कही गई है।

शेयर बाजार हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 694 अंक चढ़ा

मुंबई भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को अमेरिकी चुनाव के नतीजों को लेकर अनिश्चितता के बीच बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में एफएमसीजी और मीडिया को छोड़कर सभी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली। सुबह के कारोबार में बाजार सीमित दायरे में खुला था। दोपहर डेढ़ बजे के बाद बाजार में तेजी शुरू हुई। बीएसई का सेंसेक्स 694.39 अंक या 0.88 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। वहीं, दूसरी ओर एनएसई का निफ्टी 217.95 अंक या 0.91 प्रतिशत चढ़ने के बाद 24,213.30 पर बंद हुआ। निफ्टी बैंक 992 अंक या 1.94 प्रतिशत चढ़ने के बाद 52,207.25 पर आ गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स कारोबार के अंत में 330.90 अंक या 0.59 प्रतिशत चढ़ने के बाद 56,115.45 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 78.80 अंक या 0.43 प्रतिशत चढ़ने के बाद 18,503.45 पर बंद हुआ। निफ्टी के ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विस, फार्मा, मेटल और रियलिटी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स पैक में जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस और टाटा मोटर्स टॉप गेनर्स रहे। वहीं, आईटीसी, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, एलएंडटी और सन फार्मा टॉप लूजर्स रहे। बाजार का रुझान सकारात्मक रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 2,476 शेयर्स हरे, 1,473 शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे। वहीं, 109 शेयर में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं रहा। बाजार के जानकारों ने कहा, “निफ्टी को लगातार दूसरे दिन ऐतिहासिक स्विंग लो के आसपास समर्थन मिला है। टेक्निकल फ्रंट पर, दैनिक चार्ट पर पियर्सिंग लाइन कैंडलस्टिक पैटर्न दिखाई दिया है, जो संभावित तेजी के उलटफेर का संकेत देता है। इसके अतिरिक्त, दैनिक आरएसआई पर सकारात्मक विचलन ऊपर की ओर बढ़ने के मामले को और मजबूत करता है।” भारतीय रुपया मंगलवार को 84.10 प्रति डॉलर पर स्थिर बंद हुआ, जबकि सोमवार को यह 84.11 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये को लेकर जानकारों ने कहा कि बाजार प्रतिभागी एफआईआई गतिविधि पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि कोई भी महत्वपूर्ण खरीद या बिक्री रुपये की चाल को अमेरिकी चुनाव के नतीजों के साथ प्रभावित कर सकती है। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार 1,300 अंक तक नीचे गिर गया। हालांकि, कारोबार के अंत में कुछ रिकवरी हुई और सेंसेक्स 941.88 अंक या 1.18 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। वहीं, दूसरी ओर निफ्टी 309 अंक या 1.27 प्रतिशत गिरने के बाद 23,995.35 पर बंद हुआ।

नवंबर और दिसंबरमें 48 लाख शादियां, 6 लाख करोड़ रुपये का व्यापार होने की उम्मीद : CAIT

नई दिल्ली दिवाली का त्योहार बीत चुका है। अब महापर्व छठ (Chhath Mahaparv) की तैयारी शुरू हो गई है। इसके बीतते ही 12 नवंबर को देवोत्थान एकादशी है। फिर शुरू हो जाएगा शादी-ब्याह का मौसम। इस साल शादी का लगन 16 दिसंबर तक चलेगा। अनुमान है कि इस दौरान देश भर में करीब 48 लाख शादियां होंगी। इन शादियों से बाजार में करीब छह लाख करोड़ रुपये आएंगे। मतलब कि अर्थव्यवस्था को एक नया बल मिलेगा। कहां से आया है यह अनुमान देश के रिटेल कारोबारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने एक अध्ययन रिपोर्ट जारी किया है। इसी में दावा किया गया है कि इस साल नवंबर और दिसंबर महीने में करीब 48 लाख शादियां होने का अनुमान है। संगठन का कहना है कि इन शादियों से करीब 6 लाख करोड़ रुपये का व्यापार होने की उम्मीद है। पिछले साल इस सीजन में करीब 35 लाख शादियों से कुल 4.25 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। कैट का कहना है कि देश भर के 75 प्रमुख शहरों में शादी से संबंधित वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार करने वाले प्रमुख व्यापारी संगठनों से चर्चा के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है। इस बार शुभ मुहूर्त की ज्यादा है तिथियां बताया जाता है कि इस साल शुभ विवाह मुहूर्त की तिथियों में वृद्धि के कारण व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान है। वर्ष 2023 में 11 शुभ मुहूर्त थे, जबकि इस वर्ष 18 मुहूर्त है। इससे व्यापार को और अधिक बढ़ावा मिलने की संभावना है। इस दौरान दिल्ली में ही अनुमानित 4.5 लाख शादियां होंगी। इससे इस सीजन में 1.5 लाख करोड़ रुपये के व्यापार की उम्मीद है। किस-किस दिन लगन कैट के अनुसार, इस साल के शादी सीजन में नवंबर में शुभ तिथियां 12, 13, 17, 18, 22, 23, 25, 26, 28 और 29 हैं, जबकि दिसंबर में ये तिथियां 4, 5, 9, 10, 11, 14, 15 और 16 हैं। इसके बाद लगभग एक महीने तक शादियों के सीजन में विराम होगा। इसके बाद साल 2025 में मध्य जनवरी से मार्च तक फिर से शादियां शुरू होंगी। एक शादी में कितना खर्च कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक दो महीने के दौरान देश भर में 10 लाख शादियों में औसतन 3 लाख रुपये खर्च होंगे। करीब 10 लाख शादियों में 6 लाख रुपये खर्च होंगे। करीब 10 लाख शादियां ऐसी होंगी जिनमें 10 लाख रुपये, इतनी ही शादियों में 15 लाख रुपये खर्च होंगे। लगभग 7 लाख शादियां ऐसी होंगी जिनमें औसतन 25 लाख रुपये खर्च होंगे जबकि 50,000 शादियों में 50 लाख रुपये खर्च होंगे। देश में करीब 50,000 ऐसी शादियां होंगी जिनमें एक करोड़ या उससे अधिक राशि के खर्च होने का अनुमान है। शादी में किन वस्तुओं पर कितना खर्च खंडेलवाल के अनुसार, शादी के खर्च को सामान और सेवाओं के बीच विभाजित किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से कपड़े, साड़ियां, लहंगे, और अन्य परिधान पर 10%, आभूषण पर 15%, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली उपकरण, और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 5%, सूखे मेवे, मिठाइयां, और स्नैक्स 5%, किराना और सब्जियां 5%, उपहार आइटम्स 4% तथा अन्य वस्तुओं पर 6% का अमूमन खर्च होता है। दूसरी आर सर्विस सेक्टर में बैंक्वेट हॉल, होटल, और शादी के स्थल पर 5%, इवेंट मैनेजमेंट 3%, टेंट सजावट 10%, केटरिंग एवं सेवाएं 10%, फूल सजावट 4%, परिवहन और कैब सेवाएं 3%, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी 2%, ऑर्केस्ट्रा, संगीत आदि 3%, लाइट और साउंड 3% तथा अन्य सेवाएं 7%, के खर्च के अंदाज़ से संपन्न होती हैं।

अरबपतियों की सूची में उथल-पुथल, अंबानी और जुकरबर्ग को झटका, जानिए क्यों लगा है झटका

मुंबई दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में इस समय बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। जहां एक ओर बीते 24घंटे में दुनिया के टॉप-10अरबपतियों में से 9को भारी नुकसान हुआ है।वहीं दूसरी ओर भारतीय उद्योगपतियों मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की नेटवर्थ भी घटकर टॉप-15से बाहर चली गई है। एलन मस्क, जेफ बेजोस और मार्क जुकरबर्ग को हुआ तगड़ा नुकसान ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स के अनुसार, दुनिया के सबसे अमीरों में शामिल टॉप-10अरबपतियों को पिछले एक दिन में काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इसमें सबसे बड़ा झटका टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क को लगा है। उनकी संपत्ति 4.39अरब डॉलर घटकर 258अरब डॉलर रह गई है। वहीं, अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस की संपत्ति में भी 1.94अरब डॉलर की कमी आई, जिससे उनकी नेटवर्थ 218अरब डॉलर रह गई। इसके अलावा, फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग की संपत्ति में भी 2.23अरब डॉलर की गिरावट आई और अब उनकी कुल संपत्ति 199अरब डॉलर है। बिल गेट्स के लिए खुशखबरी, बाकी सभी को नुकसान टॉप-10अरबपतियों की सूची में एकमात्र नाम जो फायदा में रहा, वह माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स का है। उनके नेटवर्थ में 373मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जिससे उनकी कुल संपत्ति 157अरब डॉलर हो गई है। वहीं, अन्य अरबपतियों में लैरी एलिसन को 538मिलियन डॉलर, बर्नार्ड अर्नाल्ट को 353मिलियन डॉलर, लैरी पेज को 1.49अरब डॉलर, सर्गेई ब्रिन को 1.39अरब डॉलर, स्टीव बाल्मर को 610मिलियन डॉलर और वॉरेन बफे को 2.76अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की संपत्ति में भारी गिरावट भारत के दो प्रमुख उद्योगपति, मुकेश अंबानी और गौतम अडानी, जो कभी टॉप-15अरबपतियों की सूची में शामिल थे, अब इस सूची से बाहर हो गए हैं। भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जारी गिरावट का असर इन दोनों के साम्राज्य पर पड़ा है, जिसके चलते उनकी संपत्ति में भी कमी आई है। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में पिछले एक महीने में लगभग 5प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे उनकी नेटवर्थ में 2.72अरब डॉलर (लगभग 22,882करोड़ रुपये) की कमी आई है, और अब उनकी कुल संपत्ति 98.8अरब डॉलर रह गई है। इस गिरावट के साथ मुकेश अंबानी अब दुनिया के 17वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। वहीं, गौतम अडानी की नेटवर्थ भी घटकर 92.3अरब डॉलर रह गई है, जिसमें 2.06अरब डॉलर (लगभग 17,330करोड़ रुपये) की गिरावट आई है। इसके साथ ही वह अब दुनिया के 18वें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध हैं। दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट हाल के दिनों में वैश्विक शेयर बाजारों में आई गिरावट का प्रभाव दुनिया के कई शीर्ष अरबपतियों की संपत्ति पर पड़ा है, जिससे उनकी रैंकिंग में बदलाव आया है। विशेष रूप से भारतीय उद्योगपतियों मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की संपत्ति में आई गिरावट ने उन्हें टॉप-15 सूची से बाहर कर दिया है, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

अक्टूबर में भारत को एशिया, यूरोप,अमेरिका से ऑर्डर मिले, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी देखी गई

नई दिल्ली  मैन्युफैक्चरिंग पर इतराने वाला चीन अब इसमें काफी पीछे हो गया है। एक तरफ जहां चीन की इकनॉमिक ग्रोथ काफी धीमी है वहीं भारत को अच्छी खबर मिली है। एचएसबीसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी आई है। भारत ने इस मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया है। इस तेजी का कारण विदेशी मांग है। दुनिया के कई देशों से भारत को न केवल नए ऑर्डर मिले बल्कि बिक्री में भी तेजी आई। इस कारण अक्टूबर में नौकरियों की संख्या भी बढ़ गई। अक्टूबर में भारत को एशिया, यूरोप, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से ज्यादा ऑर्डर मिले, जिस कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी देखी गई।   चीन से कितना आगे निकला भारत? एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अक्टूबर में बढ़कर 57.5 पॉइंट हो गया। यह सितंबर में 56.5 पॉइंट था जो आठ महीने का निचला स्तर था। पीएमआई बढ़ने से पता चलता है कि परिचालन स्थितियों में काफी सुधार आ रहा है। वहीं दूसरी ओर चीन की पीएमआई 50.30 पॉइंट है। हालांकि अक्टूबर में चीन के पीएमआई में भी कुछ तेजी आई है। लेकिन कुल पॉइंट में यह भारत से पीछे रह गया है। भारत में बनी चीजों की बढ़ी मांग पिछले कुछ समय में भारत में बनी चीजों की दुनियाभर में मांग बढ़ी है। कई विदेशी कंपनियों ने काफी संख्या में ऑर्डर बुक किए हैं। जितने औसतन ऑर्डर पिछले 20 साल में मिले हैं, मौजूदा दौर में ऑर्डर की संख्या उससे ज्यादा हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नए प्रोडक्ट की शुरुआत और सफल मार्केटिंग ने चीजों की बिक्री बढ़ाने में मदद की है। कर्मचारियों की संख्या बढ़ी मांग बढ़ने से कर्मचारियों की संख्या में भी तेजी आई है। यानी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। डेटा के मुताबिक मैन्युफैक्चरर्स ने अक्टूबर में अतिरिक्त कर्मचारियों को जॉब दी। यह संख्या सितंबर के रखे गए नए कर्मचारियों के मुकाबले ज्यादा थी। अक्टूबर का डेटा कलेक्शन करीब 20 वर्षों में सबसे अधिक रहा। एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स भविष्य के प्रोडक्शन की मात्रा के बारे में अधिक आशावादी हो गए हैं।

देश में अक्टूबर में हर दिन बिकी 16,550 कारें, बना नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली  त्योहारी माह में देश में कारों की बिक्री का नया रिकॉर्ड बना है। अक्टूबर 2024 में कारों की खुदरा बिक्री पहली बार 5 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। वाहन डेटा के अनुसार, 31 अक्टूबर तक कुल 5.13 लाख कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, यानी हर दिन औसतन 16,550 कारें बिकीं। इससे पहले जनवरी 2024 में 3.99 लाख कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, जो एक रिकॉर्ड था। मौजूदा वित्तीय वर्ष में हर महीने औसतन 3.33 लाख गाड़ियां बिकीं हैं, जो पिछले साल की तुलना में 5 फीसदी ज्यादा है। पिछले वर्ष कुल 38 लाख कारें बिकी थीं। पहली बार इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री भी 10 हजार के आंकड़े को पार कर गई, जो सालाना आधार पर 38 फीसदी की वृद्धि है। वाहनों के होलसेल डेटा से यह भी पता चलता है कि खरीदारों का रुझान अब एसयूवी और प्रीमियम कारों की ओर अधिक है। कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने पहली बार किसी महीने में दो लाख से ज्यादा कारों की बिक्री की। कंपनी की कुल बिक्री 4 फीसदी बढ़कर 2,06,434 यूनिट्स पर पहुंच गई, जिसमें से 33,168 कारें एक्सपोर्ट की गईं। मारुति की एसयूवी सेगमेंट की बिक्री में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि छोटी कारों की बिक्री में 20 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। कंपनी ने देश में सबसे ज्यादा 1,59,591 कारों की बिक्री की, हालांकि डोमेस्टिक होलसेल में कुल मिलाकर 5 फीसदी की गिरावट रही। इस तरह के आंकड़े भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में स्थिरता और वृद्धि का संकेत देते हैं। कारों की बढ़ती मांग, विशेष रूप से एसयूवी और इलेक्ट्रिक वाहनों में, यह दर्शाती है कि उपभोक्ता अब ज्यादा सुविधा और प्रीमियम अनुभव की ओर रुख कर रहे हैं।    

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