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निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सरकारी सब्सिडी या समर्थन से पूरी नहीं आएगी : मंत्री गोयल

नई दिल्ली  वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से कहा कि वह वैश्विक बाजारों का दोहन करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सरकारी सब्सिडी या समर्थन से पूरी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के विनिर्माण के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रही है, क्योंकि उद्योग जगत को यह स्वीकार कराना एक ‘‘कठिन’’ काम है कि उन्हें गुणवत्ता वाला सामान बनाना चाहिए। सरकार को शुरुआत में गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों पर उद्योग से भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सब्सिडी या सरकारी समर्थन से नहीं आने वाली है। यह दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए हमारे दरवाजे बंद करने से नहीं आने वाली है। अगर हम आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तो यह तभी हो सकता है जब भारत आत्मविश्वासी होगा और यह आत्मविश्वास तभी आएगा जब हम सभी यह तय करेंगे कि गुणवत्ता हमारा काम नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है।’’ उन्होंने कहा कि यदि भारतीय उद्योग किसी ऐसे उत्पाद में प्रतिस्पर्धी नहीं है, जिसे आयात किया जा सकता है, तो उद्योग को प्रतिस्पर्धा की दिशा में काम करना होगा जहां उसे अन्य देशों के साथ तुलनात्मक लाभ हो। सरकार देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) जैसे कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि 2014 तक 106 उत्पादों को ‘कवर’ करने वाले केवल 14 क्यूसीओ जारी किए गए थे, लेकिन पिछले 10 वर्षों में सरकार ने 732 उत्पादों को ‘कवर’ करते हुए 174 ऐसे आदेश जारी किए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिक से अधिक लोग बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ जुड़ सकें। ये आदेश घटिया उत्पादों के आयात पर अंकुश लगाने, अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने तथा उपभोक्ताओं के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। आदेश के अनुसार, किसी वस्तु का उत्पादन, बिक्री, व्यापार, आयात व भंडारण तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि उस पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का चिह्न न लगा हो। बीआईएस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पहली बार में दो साल तक की कैद या कम से कम दो लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार और उसके बाद के अपराधों के मामले में जुर्माना न्यूनतम पांच लाख रुपये तक बढ़ जाएगा और माल या वस्तुओं के मूल्य का 10 गुना तक हो सकता है। क्यूसीओ, व्यापार में तकनीकी बाधाओं पर विश्व व्यापार संगठन समझौते के अनुसार जारी किए जाते हैं। मंत्री ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले सामान के विनिर्माण से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। रोजगार सृजन होता है और निर्यात बढ़ता है। गोयल ने कहा, ‘‘भारत को उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुओं व सेवाओं का विनिर्माता बनने की आकांक्षा रखनी होगी और इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए।’’ औषधि उद्योग का उदाहरण देते हुए मंत्री ने बड़े उद्योगपतियों से इस क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों का सहयोग करने को कहा। मंत्री ने उद्योग से बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) समितियों में हिस्सा लेने का भी आग्रह किया।  

साउथ इंडियन बैंक का वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़कर 325 करोड़ रुपये हो गया

नई दिल्ली  साउथ इंडियन बैंक का चालू वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़कर 325 करोड़ रुपये हो गया। निजी क्षेत्र के बैंक का गत वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मुनाफा 275 करोड़ रुपये रहा था। साउथ इंडियन बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया, समीक्षाधीन तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 2,804 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2,485 करोड़ रुपये थी। दूसरी तिमाही में बैंक ने 2,355 करोड़ रुपये की ब्याज आय अर्जित की, जबकि एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में यह 2,129 करोड़ रुपये थी। बैंक सितंबर 2024 के अंत तक सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को सकल ऋण के 4.40 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम रहा, जो सितंबर 2023 के अंत में 4.96 प्रतिशत था। इसी तरह, शुद्ध एनपीए या डूबा कर्ज पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के अंत में 1.70 प्रतिशत से घटकर 1.31 प्रतिशत हो गया।  

कार्यालय स्थल की पट्टा मांग के इस कैलेंडर वर्ष में आठ करोड़ वर्ग फुट को पार करने की संभावना

नई दिल्ली  देश के शीर्ष आठ शहरों में कार्यालय स्थल की पट्टा मांग के इस कैलेंडर वर्ष में आठ करोड़ वर्ग फुट को पार करने की संभावना है, जो 2023 में रिकॉर्ड 7.45 करोड़ वर्ग फुट को पार कर गई थी। रियल एस्टेट परामर्शदाता कुशमैन एंड वेकफील्ड ने  इस कैलेंडर वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए कार्यालय बाजार पर अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में शीर्ष आठ शहरों में कार्यालय स्थान की पट्टा मांग 66 प्रतिशत बढ़कर 2.48 करोड़ वर्ग फुट हो गई, जो इस क्षेत्र की किसी भी तिमाही में अभी तक की दूसरी सबसे अधिक मांग है। जनवरी-सितंबर में सकल पट्टा मांग 6.67 करोड़ वर्ग फुट रही। कुशमैन एंड वेकफील्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत, दक्षिण पूर्व एशिया तथा एपीएसी किरायेदार प्रतिनिधित्व) अंशुल जैन ने कहा, ‘‘मजबूत बाजार बुनियादी ढांचे ने भारतीय कार्यालय बाजार में असाधारण पट्टे की गति को बनाए रखा है, जैसा कि शीर्ष आठ बाजारों की स्थिति से स्पष्ट है..’’ कुशमैन एंड वेकफील्ड के प्रबंध निदेशक (किरायेदार प्रतिनिधित्व) वीरा बाबू ने कहा, ‘‘सकल पट्टा मांग पहले ही 6.6 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो चुकी है, हम 2023 में दर्ज कुल मांग के करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।’’ रिपोर्ट के लिए जिन आठ शीर्ष शहरों के बाजारों पर गौर किया गया, वह दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद हैं।    

जॉनसन एंड जॉनसन को देना होगा ₹126 करोड़, पाउडर से कैंसर होने की कही थी बात

नई दिल्ली जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) के नाम से लगभग हर कोई परिचित है और बेबी केयर से जुड़े इसके प्रोजेक्ट्स घर-घर में इस्तेमाल किए जाते हैं. इस बड़ी कंपनी को लेकर अब बड़ी खबर आई है, इसमें कहा गया है कि J&J को एक शख्स को 15 मिलियन डॉलर या करीब 126 करोड़ रुपये से ज्यादा देना पड़ेगा. दरअसल, इस शख्स ने साल 2021 में एक मुकदमा दायर कर कंपनी के बेबी पाउडर पर गंभीर सवाल उठाए थे और दावा किया था इसके लगातार इस्तेमाल से कैंसर का खतरा होता है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला… कंपनी के बेबी पाउडर पर ये गंभीर आरोप सबसे पहले बात कर लेते हैं उन आरोपों की, जो जॉनसन एंड जॉनसन पर लगाए गए थे. तो बता दें कि कनेक्टिकट के एक शख्स इवान प्लॉटकिन ने J&J के बेबी पाउडर पर आरोप लगाया था कि इस टैल्क पाउडर का दशकों तक इस्तेमाल करने के चलते उसे मेसोथेलियोमा जैसा दुर्लभ कैंसर (Mesothelioma Cancer) हो गया. इस व्यक्ति ने अपनी बीमारी के निदान के बाद साल 2021 में कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. कनेक्टिकट के शख्स ने दर्ज कराया था मुकदमा इवान प्लॉटकिन ने अपनी बीमारी के उपचार और इससे निजात पाने के बाद जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के खिलाफ मैदान में उतरने के लिए कमर कसी और फेयरफील्ड काउंटी, कनेक्टिकट सुपीरियर कोर्ट में एक मुकदमा दायर कराया, जिसमें कहा गया कि इस बेबी पाउडर के इस्तेमाल से उसे गंभीर बीमारी हो गई थी. जूरी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पाया कि Johnson & Johnson कंपनी को हर्जाना देना चाहिए, जिसे बाद में मामले को देखने वाले न्यायाधीश द्वारा निर्धारित किया जाएगा. अब कंपनी को 15 मिलियन डॉलर का पेमेंट करने के लिए कहा गया है. कंपनी ने कहा, गलत फैसले की खिलाफ अपील करेंगे रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर को लेकर इतने गंभीर आरोप लगाने वाले इवान प्लॉटकिन के वकील बेन ब्रेली ने एक ईमेल में कहा है कि उनकी ट्रायल टीम इस बात से उत्साहित है कि जूरी ने एक बार फिर जॉनसन एंड जॉनसन को बेबी पाउडर उत्पाद की मार्केटिंग और सेल के लिए जवाबदेह ठहराने का फैसला किया है, जिसमें एस्बेस्टस (एक प्रकार का हानिकारक फाइबर) है. वहीं दूसरी ओर जूरी के निर्णय पर j&J की ओर से एरिक हास (मुकदमेबाजी के मामलों के वाइस प्रेसिडेंट) ने एक बयान में कहा कि कंपनी ट्रायल जज के गलत फैसलों के खिलाफ अपील करेगी. उन्होंने कहा कि जूरी को इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सुनने से रोका गया है. उन्होंने ये भी कहा कि साइंटिफिक जांचों में इस बात की पुष्टि पहले ही हो चुकी है कि जॉनसन एंड जॉनसन का बेबी टैल्क सुरक्षित है और इसमें एस्बेस्टस नहीं है. ऐसे में ये किसी भी तरह के कैंसर का कारण नहीं बनता है. भारत में भी बड़ा है कारोबार अमेरिकी फॉर्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन का भारत में भी बड़ा कारोबार है और लंबे समय से देश में बेबी पाउडर बेच रही है. कंपनी का जॉनसन बेबी पाउडर भारतीय मार्केट में काफी पॉपुलर है. ज्यादातर घरों में छोटे बच्चों के लिए बड़े पैमाने पर इस पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है. भारत में कंपनी बेबी पाउडर के अलावा बेबी शैम्पू, बेबी सोप और बेबी ऑयल भी बेचती है और उनकी बड़ी डिमांड है.  

सरकार ने ले लिया बड़ा फैसला, अब ऐसे होगा स्पेक्ट्रम आवंटन, नीलामी नहीं होगी

नई दिल्ली भारत में सैटेलाइट इंटरनेट और कम्युनिकेशन को लेकर बीते दिनों मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो और अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के बीच स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया को लेकर भिड़त देखने को मिली। इसके बाद सरकार की ओर से इस प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। एलन मस्क ने मौजूदा नीलामी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी और अब टेलिकॉम मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने घोषणा की है कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए कोई ऑक्शन नहीं होगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए चेयरमैन मुकेश अंबानी और भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने स्पेक्ट्रम नीलामी को सही ठहराया था लेकिन अमेरिकी अरबपति एलन मस्क ने इस प्रक्रिया को गलत बताते हुए सिरे से नकार दिया था। मस्क ने भारत में नीलामी की इस प्रक्रिया की आलोचना की थी और कहा था कि भारत को ग्लोबल नियमों का पालन करना चाहिए। दरअसल, एलन मस्क भी भारतीय टेलिकॉम सेक्टर में अपनी कंपनी स्टारलिंक के साथ एंट्री की कोशिश में लगे हैं। नीलामी के बजाय अब ऐसे होगा आवंटन भारतीय टेलिकॉम मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एलन मस्क और भारत की टेलिकॉम कंपनियों के बीच खींचतान के बीच एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन किसी नीलामी के जरिए नहीं, बल्कि एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से किया जाएगा। यानी कंपनियों के अपने पसंदीदा स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए ज्यादा से ज्यादा बोली लगाने का विकल्प नहीं मिलेगा और सरकार निर्धारित करेगी कि स्पेक्ट्रम कैसे शेयर किए जाने हैं। इस आधार पर मस्क ने जताई थी नाराजगी एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक स्पेक्ट्रम के एडमिनिस्ट्रेटिव आवंटन का समर्थन शुरू से ही करती रही है और अमेजन कूपन जैसी कई कंपनियां भी इसी ग्लोबल तरीके का पक्ष लेती हैं। हालांकि, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल लगातार नीलामी से जुड़ी प्रक्रिया का समर्थन कर रहे थे। मस्क ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि यूनाइटेड नेशंस की एजेंसी इंटरनेशनल टेलिकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को शेयर करते हुए नॉमिनेट करने की बात कही है। भारत भी ITU का सदस्य है, ऐसे में स्पेक्ट्रम की नीलामी का कोई मतलब नहीं बनता। नीलामी के पक्ष में इसलिए है रिलायंस जियो मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो का कहना है कि वह सभी टेलिकॉम ऑपरेटर्स के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना चाहता है और इसीलिए नीलामी की प्रक्रिया का पक्षधर है। भारती एयरटेल चेयरमैन ने भी कहा था कि नीलामी की प्रक्रिया बेहतर है क्योंकि जो सैटेलाइट कंपनियां शहरी क्षेत्रों में आने की तैयारी कर रही हैं, उन्हें भी दूसरी की तरह टेलिकॉम स्पेक्ट्रम खरीदने की जरूरत है। मस्क लगातार माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर नीलामी के प्रक्रिया पर कटाक्ष कर रहे थे और इसकी आलोचना कर रहे थे। बता दें, सरकार ने साफ कर दिया है कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से आवंटित होंगे और नीलामी नहीं की जाएगी। साफ है कि सरकार भी इस मामले में ग्लोबल ट्रेंड फॉलो करने जा रही है।

शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 200 अंक लुढ़का, निफ्टी में भी गिरावट

मुंबई शेयर बाजार (Stock Market) में लगातार दूसरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 82,000 के नीचे कारोबार कर रहा है, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स (Nifty) ने भी गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार की शुरुआत की. बीते कारोबारी दिन मंगलवार को भी शेयर बाजार शुरुआती तेजी से फिसलकर लाल निशान पर बंद हुआ था. सप्ताह के तीसरे दिन IT और FMCG शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. ऐसी हुई सेंसेक्स निफ्टी की शुरुआत बुधवार को शेयर बाजार ने धीमी शुरुआत की. BSE Sensex सुबह 9.15 बजे पर 81,646.60 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों में ये 81,579.37 के लेवल तक लुढ़क गया. इसी तरह NSE Nifty ने भी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की और 25,008.55 के स्तर पर खुलने के बाद मिनटों में ही 24,994.65 तक टूट गया. हालांकि, इस स्तर तक टूटने के बाद दोनों इंडेक्स में कभी मामूली तेजी दिखी, तो कभी फिर ये रेड जोन में पहुंचते नजर आए. इससे पिछले कारोबारी दिन मंगलवार को भी मार्केट के दोनों इंडेक्स लाल निशान पर क्लोज हुए थे. बीते कारोबारी दिन मंगलवार को जहां बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स 152 अंक की गिरावट के साथ 81,820.12 के स्तर पर बंद हुआ था, तो वहीं एनएसई के निफ्टी ने 70 अंक फिसलकर 25,057.35 पर क्लोजिंग की थी. शुरुआती कारोबार में फिसले 980 शेयर शेयर बाजार (Share Market) में बुधवार को कारोबार शुरू होने के साथ ही करीब 1263 कंपनियों के शेयरों ने तेजी के साथ ओपनिंग की, तो वहीं 980 शेयरों की शुरुआत गिरावट के साथ हुई. इसके अलावा 152 शेयरों की स्थिति में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला.  टीसीएस, अपोलो हॉस्पिटल्स, सिप्ला, आईसीआईसीआई बैंक और टाइटन के शेयर लाल निशान पर ओपन हुए थे. इसके अलावा IT और FMCG शेयरों में भी गिरावट देखने को मिल रही थी. इन 10 शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट बात करें, सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन सबसे ज्यादा फिसलने वाले शेयरों की, तो बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में M&M Share 1.78%, Nestle India Share 1.52%, TCS 1% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कंपनियों में शामिल IPCA Lab Share 2%, Coforge Share 1.80% फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. स्मालकैप कंपनियों में KEI Share 6.21%, KamoPaints Share 4.69%, AngelOne Share 3.65%, SGFIN Share 3.65%, CochinShipyard Share 3% गिरकर कारोबार कर रहे थे.

Salary Hike Prediction: अगले साल 9.5% बढ़ सकती है आपकी सैलरी!

नईदिल्ली  एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश की कॉरपोरेट कंपनियों में काम कर रहे लोगों के वेतन में 2025 में 9.5 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। यह अनुमान 2024 की वास्तविक वेतन वृद्धि के समान ही हैं। डब्ल्यूटीडब्ल्यू की नवीनतम वेतन बजट योजना रिपोर्ट के अनुसार, भारत में औसत वेतन वृद्धि 2025 में 9.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, वर्ष 2024 की वास्तविक वेतन वृद्धि भी 9.5 प्रतिशत ही रही है। भारत में यह वेतन वृद्धि पूरे क्षेत्र में सबसे अधिक है। वियतनाम (7.6 प्रतिशत), इंडोनेशिया (6.5 प्रतिशत), फिलीपींस (5.6 प्रतिशत), चीन (5 प्रतिशत) और थाईलैंड (5 प्रतिशत) जैसे बाजारों में भी अगले साल मजबूत वेतन वृद्धि दिख सकती है। वेतन बजट योजना से जुड़ी रिपोर्ट डब्ल्यूटीडब्ल्यू के रिवार्ड्स डेटा इंटेलिजेंस प्रैक्टिस द्वारा संकलित की जाती है। यह सर्वेक्षण अप्रैल और जून 2024 में आयोजित किया गया था। इस दौरान दुनिया भर के 168 देशों की कंपनियों से लगभग 32,000 प्रतिक्रियाएं ली गईं थी। सर्वेक्षण में भारत से 709 प्रतिभागी शामिल किए गए थे। WTW इंडिया के कंसल्टिंग लीडर, वर्क एंड रिवॉर्ड्स, राजुल माथुर के अनुसार भारत में कंपनियाँ विकास के बारे में आशावादी हैं। वे आशावाद को सावधानी के साथ संतुलित भी कर रहे हैं। इस्तीफे का दौर पीछे छूट गया है। नियोक्ता और कर्मचारी दोनों अब स्थिरता चाहते हैं और बाजार की भावना भी स्थिर बनी हुई है। 2025 में, फार्मास्यूटिकल्स (10 प्रतिशत), मैन्युफैक्चरिंग (9.9 प्रतिशत), बीमा (9.7 प्रतिशत), कैप्टिव और एसएसओ सेक्टर (9.7 प्रतिशत) और रिटेल (9.6 प्रतिशत) जैसे उद्योगों में वेतन वृद्धि सामान्य उद्योगों के वेतन औसत से अधिक रहने की संभावना है। सॉफ्टवेयर और बिजनेस सर्विसेज के क्षेत्र में 9 प्रतिशत तक की वेतन वृद्धि हो सकती है। इस क्षेत्र में वेतन वृद्धि औसत 9.5 प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है। इस सर्वे के मुताबिक देश में अगले साल यानी 2025 में लोगों को पहले से ज्यादा सैलरी मिलेगी, रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में लोगों की औसतन सैलरी साढ़े 9 फीसदी तक बढ़ सकती है, जबकि 2024 में ये बढ़ोतरी 9.3 फीसदी रहने का अनुमान है. सबसे ज्यादा इन सेक्टर्स में बढ़ेगी सैलरी ऐसा अलग-अलग सेक्टर्स में पॉजिटिव कारोबारी माहौल की वजह से होने का अनुमान है. अगर अलग-अलग सेक्टर्स की बात करें तो इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर्स में 10 फीसदी की वेतन बढ़ोतरी का अनुमान है. जबकि फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स में सैलरी इंक्रीमेंट 9.9 फीसदी हो सकता है.   वहीं टेक्निकल प्रॉडक्शन के कर्मचारियों को 9.3 फीसदी वेतन बढ़ोतरी मिलने की उम्मीद है, और सर्विस सेक्टर में सैलरी इंक्रीमेंट 8.1 परसेंट हो सकता है. एऑन के मुताबिक वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत में कई सेक्टर्स में पॉजिटिव माहौल बना हुआ है. ये मैन्युफैक्चरिंग, बायोसाइंस और रिटेल सेक्टर्स में अनुमानित वेतन बढ़ोतरी से साफ नजर भी आ रहा है. ऐसे कर्मचारियों को मिल रही है तगड़ी सैलरी इसके अलावा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था कई क्षेत्रों में कारोबार को बढ़ा रही है. इसके लिए कंपनियों को अच्छे कर्मचारी चाहिए तो वो ज्यादा वेतन दे रही हैं, और महंगाई में हो रही बढ़ोतरी भी कर्मचारियों के ज्यादा वेतन की वजह बन रही है. सर्वे में ये भी बताया गया है कि नौकरी बाजार में प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनियों को बदलते बाजार के आंकड़ों का ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए. इस साल औसतन 16.9 फीसदी कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ी, जबकि 2023 में ये अनुपात 18.7 फीसदी और 2022 में 21.4 फीसदी था. एऑन के मुताबिक नौकरी छोड़ने की दर में कमी कंपनियों को अंदरुनी विकास और उत्पादकता को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देती है. एऑन का ये सर्वे 40 उद्योगों की 1176 से ज्यादा कंपनियों के आंकड़ों पर आधारित है.

देश के कई शहरों में रेसिडेंशियल रियल एस्टेट की कीमतों में 88 फीसदी का उछाल दिखा

नई दिल्ली रियल एस्टेट (Real Estate) मार्केट में इन दिनों भारी उछाल दिख रहा है। कोरोना काल से पहले की बात करें तो तब से अब तक स्थिति काफी बदल गई है। बीते पांच साल में ही देश के टॉप 10 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें (Property Price) काफी बढ़ गई है। इन शहरों में मकान की कीमतों में 88 फीसदी तक का उछाल आया है। इसकी जानकारी रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी (PropEquity) की एक रिपोर्ट से मिलती है। सबसे ज्यादा कीमत कहां बढ़ी इस रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान गुरुग्राम में सबसे अधिक, 160 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। साल 2019 में वहां मकान की औसत कीमतें 7,500 रुपये प्रति वर्ग फुट थी। यह साल 2024 में बढ़कर 19,500 रुपये प्रति वर्ग फुट पर पहुंच गई हैं। मतलब कि पांच साल पहले गुड़गांव में 75 लाख रुपये में 1,000 वर्ग फुट का मकान मिल जाता था। अब यह करी दो करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे कम बढ़ोतरी कहां बीते पांच साल की अवधि के दौरान मकान की कीमतें सबसे कम मुंबई में बढ़ी है। साल 2019 में मुंबई में रेसिडेंशियल रियल एस्टेट की प्रति वर्ग फुट कीमत 25,820 रुपये थी। यह साल 2024 में बढ़ कर 25,820 प्रति वर्ग फुट हो गई। मतलब कि महज 37 फीसदी की बढ़ोतरी। अन्य शहरों का क्या रहा हाल रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम के बाद कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी नोएडा में (146 फीसदी), बेंगलुरु (98 फीसदी), हैदराबाद (81 फीसदी), चेन्नई (80 फीसदी), पुणे (73 फीसदी), नवी मुंबई(69 फीसदी), कोलकाता (68 फीसदी) और ठाणे में (66 फीसदी)। सबसे महंगी और सबसे सस्ती प्रॉपर्टी कहां प्रति वर्ग फीट कीमतों की बात करें तो मुंबई इस दृष्टि से सबसे महंगा शहर है। वहां मकानों की औसत कीमत 35,500 रुपये प्रति वर्ग फुट है। इसके बाद गुरुग्राम में 19,500 रुपये प्रति वर्ग फुट। इन शहरों में सबसे कम प्रॉपर्टी रेट नोएडा में दिखा जहां आवासी परिसंपत्ति की औसत कीमत 16,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है। कितनी परियोजनाएं हुई लॉन्च? इस अवधि के दौरान देश के टॉप 10 शहरों- बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबद, कोलकाता, मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम में करीब 15,000 परियोजनाएं लॉन्च की गईं। इनमें अपार्टमेन्ट, फ्लोर और विला शामिल हैं। जमीन वाले मकानों की संख्या इनमें काफी कम रही। कीमत में बढ़ोतरी के क्या हैं कारण प्रॉपइक्विटी के संस्थापक एवं सीईओ समीर जसूजा का कहना है, ‘‘पिछले 5 सालों में सभी बड़े शहरों में रियल एस्टेट की कीमतों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। इस बढ़ोतरी में कई कारकों का योगदान है जैसे बुनियादी सुविधाओं का विकास, एनआरआई की बढ़ती रुचि, एचएनआई/यूएचएनआई और स्टॉक मार्केट में मुनाफ़ा हासिल करने वालों द्वारा रियल एस्टेट में निवेश तथा सम्पत्ति बनाने और आय कमाने की चाह, मकान खरीदने की चाह, लक्ज़री/सुपर लक्ज़री मकानों की ओर झुकाव।”

दुनिया के अमीरों की लिस्ट में भारी उलटफेर, अडानी, अंबानी की नेटवर्थ में भी गिरावट

नई दिल्ली  भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की नेटवर्थ में हफ्ते के पहले दिन  गिरावट देखने को मिली। अडानी पहले ही 100 अरब डॉलर क्लब से बाहर हो चुके हैं। अब उन पर अमीरों की लिस्ट में टॉप 20 से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक सोमवार को उनकी नेटवर्थ में 67.3 करोड़ डॉलर की गिरावट आई। वह 98.9 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 18वें नंबर पर हैं। इस साल उनकी नेटवर्थ में 14.6 अरब डॉलर की तेजी आई है। इस बीच देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी 98.4 लाख डॉलर की गिरावट आई। वह 104 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 14वें नंबर पर है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 7.91 अरब डॉलर की गिरावट आई है। रिलायंस ने बाजार बंद होने के बाद अपने तिमाही नतीजों की घोषणा की। दूसरी तिमाही में कंपनी के नेट प्रॉफिट में तीन फीसदी गिरावट आई है। सोमवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर 0.11 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.73 फीसदी तेजी के साथ बंद हुआ। जेंसन हुआंग टॉप 10 की दहलीज पर इस बीच अमेरिका की दिग्गज एआई चिप कंपनी एनवीडिया का शेयर  रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही यह दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनने के करीब पहुंच गई। इसका मार्केट कैप 3.39 ट्रिलियन डॉलर हो गया है जबकि ऐपल का मार्केट कैप 3.52 ट्रिलियन डॉलर है। इस तेजी से कंपनी के फाउंडर और सीईओ जेंसन हुआंग की नेटवर्थ 121 अरब डॉलर पहुंच गई है। इस बीच लैरी एलिसन 186 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं। एलिसन सॉफ्टवेयर कंपनी ओरेकल कॉर्प के सबसे बड़े स्टेकहोल्डर हैं। टेस्ला, स्पेसएक्स, एक्स समेत कई कंपनियों को चला रहे एलन मस्क 241 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं। ऐमजॉन के फाउंडर जेफ बेजोस 210 अरब डॉलर के साथ फिर दूसरे नंबर पर आ गए हैं। फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म के सीईओ मार्क जकरबर्ग 209 अरब डॉलर के साथ अब तीसरे नंबर पर खिसक गए हैं। फ्रांसीसी कारोबारी बर्नार्ड अरनॉल्ट 185 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ पांचवें नंबर पर खिसक गए हैं। इस साल उनकी नेटवर्थ में 22.2 अरब डॉलर की गिरावट आई है।

5जी केवल तेज इंटरनेट का मामला नहीं है, बल्कि यह स्मार्ट शहरों, उन्नत बुनियादी ढांचे और स्वायत्त नवाचारों के लिए आधार तैयार कर रहा है : मंत्री सिंधिया

नई दिल्ली  दूरसंचार क्षेत्र की 5जी तकनीक के कारण 2040 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 450 बिलियन डॉलर यानी करीब 37 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने  यह दावा किया। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार कार्यक्रमों में से एक वैश्विक मानक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “अकेले भारत में, 5जी से 2040 तक अर्थव्यवस्था में 450 बिलियन डॉलर का निवेश होने का अनुमान है।” मंत्री ने जोर देकर कहा कि 5जी केवल तेज इंटरनेट का मामला नहीं है, बल्कि यह स्मार्ट शहरों, उन्नत बुनियादी ढांचे और स्वायत्त नवाचारों के लिए आधार तैयार कर रहा है। सिंधिया ने आगे कहा कि 5जी पहले ही सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुका है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केवल 22 महीनों में 98 प्रतिशत जिलों और 80 प्रतिशत आबादी को इसने कवर कर लिया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की तकनीकी शक्ति क्षमता के साथ वैश्विक मानकों के अनुसार नवाचार में हमारे बदलाव के प्रयासों को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा, “हम स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कृषि व विनिर्माण के क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खोल रहे हैं।” मंत्री ने 5जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी तकनीकों की पूरी क्षमता को अनलॉक करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक मानक यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि ये तकनीकें सीमाओं के पार सामंजस्यपूर्ण ढंग से काम करें। उन्होंने कहा, “संवाद के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। 5जी का चमत्कार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की चमक और इंटरनेट ऑफ थिंग्स की उपयोगिता वैश्विक स्तर पर उद्योगों, समाजों और विनिर्माण प्रक्रियाओं और अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही हैं।” सिंधिया ने एआई और आईओटी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के बढ़ने की स्थिति में गोपनीयता, पूर्वाग्रह और पारदर्शिता से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए नैतिक विचारों और नियामक ढांचे के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचे का आह्वान किया कि भविष्य के नवाचार, जैसे कि आगामी 6G तकनीक, सभी को समान रूप से लाभान्वित करें और मौजूदा डिजिटल विभाजन को गहरा न करें। उन्होंने कहा, “आज हम एक नए तकनीकी युग के मुहाने पर खड़े हैं, मोबाइल नेटवर्क 6जी के दौर में प्रवेश करने वाला है, जहां संचार असीम हो जाएगा, जहां नवाचार की कोई सीमा नहीं होगी और मानवता द्वारा, परस्पर जुड़ाव हमारी साझा वैश्विक नियति की आधारशिला बन जाएगा।” सिंधिया ने वैश्विक समुदाय से भविष्य के तकनीकी परिदृश्य को परिभाषित करने वाले मानकों को स्थापित करने और साझेदारी को बढ़ावा देने में एक साथ काम करने का भी आग्रह किया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रौद्योगिकी का भलाई के लिए इस्तेमाल हो।

‘विदेश से पैसा भेजने में लगने वाले समय और लागत को कम करना जरूरी’, आरबीआई गवर्नर ने बताया कारण

सितंबर में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 1.84 फीसदी पर, खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल से बढ़ोतरी  खाद्य पदार्थों के महंगे होने से थोक मूल्य मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 1.84 फीसदी हो गई ‘विदेश से पैसा भेजने में लगने वाले समय और लागत को कम करना जरूरी’, आरबीआई गवर्नर ने बताया कारण नई दिल्ली  सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के महंगे होने से थोक मूल्य मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 1.84 फीसदी हो गई। अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 1.31 फीसदी थी। पिछले साल सितंबर में यह 0.07 फीसदी घटी थी। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 11.53 फीसदी हो गई, जबकि अगस्त में यह 3.11 फीसदी थी। इसकी वजह सब्जियों की मुद्रास्फीति रही, जो सितंबर में 48.73 फीसदी बढ़ी थी। अगस्त में यह 10.01 फीसदी घट गई थी। आलू की मुद्रास्फीति सितंबर में 78.13 और प्याज की 78.82 प्रतिशत पर उच्च स्तर पर बनी रही। ईंधन और बिजली श्रेणी में सितंबर में 4.05 फीसदी की अपस्फीति देखी गई, जबकि अगस्त में 0.67 प्रतिशत की अपस्फीति हुई थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सितंबर, 2024 में मुद्रास्फीति की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, खाद्य उत्पादों, अन्य विनिर्माण, मोटर वाहनों, ट्रेलरों और अर्ध-ट्रेलरों के निर्माण, मशीनरी और उपकरणों के निर्माण आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है। खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है आरबीआई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। आरबीआई ने इसी महीने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य ब्याज दर या रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े दिन में जारी किए जाएंगे। ‘विदेश से पैसा भेजने में लगने वाले समय और लागत को कम करना जरूरी’, आरबीआई गवर्नर ने बताया कारण  भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को विदेशों से धन भेजने में लगने वाले समय और लागत को कम करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह महत्वपूर्ण है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नई प्रौद्योगिकी और भुगतान प्रणाली का उपयोग सीमा पार भुगतान में तेजी लाने और विस्तार के लिए किया जा सकता है। दास ने ‘सेंट्रल बैंकिंग एट क्रॉसरोड्स’ विषय पर आयोजित सम्मेलन के दौरान कहा, “भारत सहित कई उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए सीमा पार पीयर-टू-पीयर (पी2पी) भुगतान की संभावनाओं को तलाशने के लिए धन प्रेषण पहला कदम है। हमारा मानना है कि इस तरह के धन प्रेषण की लागत और समय को काफी कम करने की अपार संभावनाएं हैं।” इसके अलावा, उन्होंने कहा कि डॉलर, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख व्यापारिक मुद्राओं में लेनदेन निपटाने के लिए वास्तविक समय सकल निपटान (आरटीजीएस) के विस्तार की व्यवहार्यता द्विपक्षीय या बहुपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से तलाशी जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत और कुछ अन्य अर्थव्यवस्थाओं ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों तरीकों से सीमा पार तीव्र भुगतान प्रणालियों के संपर्क का विस्तार करने के प्रयास पहले ही शुरू कर दिए हैं। आरबीआई की ओर से शुरू किए गए ई रूपी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें कुशल सीमा पार भुगतान की सुविधा प्रदान करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ते हुए, मानकों और अंतर-संचालन में सामंजस्य सीबीडीसी को सीमा पार भुगतान और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी गंभीर वित्तीय स्थिरता चिंताओं को दूर करने में सक्षम बनाएगा। आरबीआई गवर्नर ने बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इससे साइबर हमले और आंकड़ों के लीक होने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, “बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को इन सभी जोखिमों के खिलाफ पर्याप्त जोखिम उपाय करने चाहिए। बैंकों को एआई और बिगटेक फायदों का लाभ उठाना चाहिए।”  

इंडियन ओवरसीज बैंक ने ‎वि‎भिन्न शहरों में आठ खुदरा ऋण प्रसंस्करण केंद्र खोले

नई दिल्ली  सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक ने कर्ज मंजूरी प्रक्रिया को बेहतर बनाने और इसमें लगने वाले समय को कम करने के ‎लिए विभिन्न शहरों में खुदरा ऋण प्रसंस्करण केंद्र शुरू किया है। बैंक ने एक बयान में कहा कि कुल आठ खुदरा ऋण प्रसंस्करण केंद्र (आरएलपीसी) खोले गये हैं। इसमें से चेन्नई में एक केंद्र का भौतिक रूप से उद्घाटन किया गया, जबकि सात अन्य आरएलपीसी विभिन्न शहरों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुरू किए गए। इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) के एक व‎रिष्ठ अ‎धिकारी ने कहा ‎कि हमारे नए खुदरा कर्ज प्रसंस्करण केंद्र सिर्फ सुविधा के बारे में नहीं हैं। यह एक स्मार्ट, ज्यादा लचीला बैंकिंग ढांचा बनाने के बारे में है। डिजिटल उपकरण और उन्नत आंकड़ों का इस्तेमाल करके हम मजबूत जोखिम प्रबंधन सुनिश्चित कर रहे हैं और साथ ही कर्ज प्रसंस्करण समय को भी काफी कम कर रहे हैं। उन्होंने एक बयान में कहा कि खुदरा ऋण प्रसंस्करण केंद्र को ऋण स्वीकृति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने, समय को कम करने और खुदरा ग्राहकों को तीव्र और अधिक कुशल सेवाएं प्रदान करने के लिए डिजायन किया गया है। इंडियन ओवरसीज बैंक ने बेंगलुरु, कोयंबटूर, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई में खुदरा कर्ज प्रसंस्करण केंद्र शुरू किया है। प्रत्येक केंद्र डिजिटल प्रौद्योगिकियों और स्वचालन क्षमताओं से लैस है, जिससे त्वरित ऋण स्वीकृति सुनिश्चित होती है। ये सुविधाएं वित्तीय पहुंच को बढ़ाने और खुदरा क्षेत्र में बैंक की वृद्धि रणनीति का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बैंक ने शहर के लोकप्रिय स्थलों में से एक पुरात्ची थलाइवर डॉ. एमजीआर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर अपने एटीएम कियोस्क भी शुरू किया। उन्होंने कहा ‎कि यह एटीएम महज एक सेवा केंद्र नहीं है, यह परंपरा के साथ नवाचार के सम्मिश्रण के प्रति आईओबी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  

ग्रे मार्केट में हुंडई के आईपीओ की चमक गिरी, प्रीमियम में लगातार गिरावट आई

आईपीओ लॉन्च होने के पहले ग्रे मार्केट में हुंडई की घटी चमक, 570 से घट कर 60 रुपये के स्तर पर आया प्रीमियम  ग्रे मार्केट में Hyundai IPO का प्रीमियम घट कर 60 रुपये के स्तर पर आया  ग्रे मार्केट में हुंडई के आईपीओ की चमक गिरी, प्रीमियम में लगातार गिरावट आई नई दिल्ली हुंडई मोटर इंडिया कल भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ लॉन्च करने वाली है। इस आईपीओ का निवेशकों को लंबे समय से इंतजार है। 15 से 17 अक्टूबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन होने वाले इस आईपीओ के जरिए कंपनी ने 27,870 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस इश्यू के लिए 1,865 से 1,960 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है। माना जा रहा है कि इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल सकता है। हालांकि ग्रे मार्केट में इस आईपीओ की चमक गिरती जा रही है। इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम में लगातार गिरावट आई है। हुंडई मोटर इंडिया के आईपीओ ने फाइनल होने के बाद ग्रे मार्केट में जबरदस्त मजबूती के साथ ट्रेड करना शुरू किया था। ग्रे मार्केट में हुंडई मोटर के शेयर ने 470 रुपये के प्रीमियम पर ट्रेड करना शुरू किया और सिर्फ 24 घंटे में ही इसका प्रीमियम बढ़कर 570 रुपये हो गया। उम्मीद की जा रही थी कि हुंडई मोटर के शेयर का ग्रे मार्केट में प्रीमियम 750 रुपये तक जा सकता है, लेकिन 570 रुपये के स्तर से ही इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट आनी शुरू हो गई। अब हुंडई मोटर का आईपीओ लांच होने में सिर्फ एक दिन बाकी है, तब ग्रे मार्केट में इसका प्रीमियम घट कर 60 रुपये के स्तर पर आ गया है। ग्रे मार्केट के मौजूदा प्रीमियम को ही अगर अंतिम मान लिया जाए, तो शेयर मार्केट में हुंडई मोटर के शेयरों की लिस्टिंग इसके अपर प्राइस बैंड में 60 रुपये जोड़ कर 2,020 रुपये के स्तर पर हो सकती है। ऐसा होने पर आईपीओ निवेशकों को 3 प्रतिशत के करीब लिस्टिंग गेन हो सकता है। हालांकि ग्रे मार्केट के प्रीमियम को सिर्फ एक संकेत मानना चाहिए, क्योंकि ग्रे मार्केट की स्थिति लगातार बदलती है, जिससे प्रीमियम के स्तर में भी बदलाव होते रहता है। उल्लेखनीय कि हुंडई मोटर का आईपीओ कल लांच होने वाला है, लेकिन उसके पहले एंकर इन्वेस्टर्स के लिए ये आईपीओ आज ही ओपन हो जाएगा। एंकर इन्वेस्टर्स के लिए 8,315.28 करोड़ रुपये के शेयर रिजर्व किए गए हैं। एंकर इन्वेस्टर्स के अलावा दूसरे इन्वेस्टर्स हुंडई मोटर के आईपीओ में 15 अक्टूबर यानी कल से 7 शेयर के लॉट में बोली लगा सकते हैं। इस इश्यू का 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी), 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व किया गया है। आईपीओ के तहत शेयर का अलॉटमेंट 18 अक्टूबर को फाइनल होगा। इसके बाद 22 अक्टूबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर इसकी लिस्टिंग होगी। आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 14,21,94,700 शेयर ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) विंडो के तहत जारी किए जाएंगे। ये शेयर इसकी पैरंट कंपनी बेचेगी। आईपीओ लॉन्च होने के बाद हुंडई मोटर इंडिया में पैरंट कंपनी की हिस्सेदारी 17.5 प्रतिशत कम हो जाएगी।  

सर्राफा बाजार में मामूली गिरावट, सोना और चांदी की घटी कीमत

कच्चे तेल में गिरावट का रुख, पेट्रोल-डीजल की कीमत स्थिर कच्चे तेल और सोना और चांदी में में गिरावट का रुख सर्राफा बाजार में मामूली गिरावट, सोना और चांदी की घटी कीमत नई दिल्ली  इजराइल-ईरान जंग के बीच अंतरराष्रीि  य बाजार में कच्चे  तेल की कीमत में गिरावट का रुख है। ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस विपणन कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया है। अंतरराष्ट्री य बाजार में हफ्ते के पहले दिन शुरुआती कारोबार में ब्रेंड क्रूड 0.92 डॉलर यानी 1.16 फीसदी की गिरावट के साथ 78.12 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा है। वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 0.90 डॉलर यानी 1.19 फीसदी लुढ़ककर 75.73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये, डीजल 87.62 रुपये, मुंबई में पेट्रोल 104.21 रुपये, डीजल 92.15 रुपये, कोलकाता में पेट्रोल 103.94 रुपये, डीजल 90.76 रुपये, चेन्नई में पेट्रोल 100.75 रुपये और डीजल 92.34 रुपये प्रति लीटर की दर पर उपलब्ध है। सर्राफा बाजार में मामूली गिरावट, सोना और चांदी की घटी कीमत  घरेलू सर्राफा बाजार में आज मामूली गिरावट नजर आ रही है। इस गिरावट के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोना आज 77,810 रुपये से लेकर 77,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 71,340 रुपये से लेकर 71,190 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। सोने की तरह ही चांदी की कीमत में भी मामूली गिरावट आई है, जिसके कारण दिल्ली सर्राफा बाजार में ये चमकीली धातु आज 96,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर है। देश की राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना आज 77,810 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 71,340 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 77,660 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 71,190 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 77,710 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 71,240 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 77,660 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 71,190 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में भी 24 कैरेट सोना 77,660 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 71,190 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 77,810 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 71,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। वहीं पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 77,710 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है, जबकि 22 कैरेट सोना 71,240 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह जयपुर में 24 कैरेट सोना 77,810 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 71,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी मामूली गिरावट की वजह से आज सोना सस्ता हुआ है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना आज 77,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 71,190 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।    

सरपट भागासेंसेक्स में 500 अंक से ज्यादा की तेजी, निफ्टी भी 150 अंक उछला

मुंबई शेयर बाजार (Stock Market) में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को तेजी के साथ कारोबार शुरू हुआ. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) अपने पिछले बंद से करीब 200 अंक की उछाल के साथ ओपन हुआ और कुछ ही देर में 500 अंक से ज्यादा चढ़ गया. दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी (Nifty) ने भी जोरदार शुरुआत की और 180 अंक से ज्यादा भागा. मार्केट में तेजी के बीच  HDFC Bank Share समेत अन्य स्टॉक में तूफानी तेजी आई. 82000 के करीब पहुंचा सेंसेक्स सबसे पहले बात कर लेते हैं BSE Sensex की, तो ये इंडेक्स बीते कारोबारी दिन शुक्रवार को 81,381.26 के लेवल की तुलना में सोमवार को 81,576.93 के लेवल पर ओपन हुआ था. जोरदार शुरुआत के बाद इसमें तेजी और बढ़ती गई और खबर लिखे जाने तक सुबह 10 बजे पर ये 538.55 अंक या 0.66 फीसदी की तेजी के साथ 81,919.50 के लेवल पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी ने भी लगाई लंबी छलांग बीएसई के सेंसेक्स की तरह ही NSE Nifty भी 25,000 के पार खुला. निफ्टी ने अपने पिछले बंद 24,964 की तुलना में उछलकर 25,023.45 के लेवल पर कारोबार शुरू किया था और कुछ ही देर में ये 180 अंक से ज्यादा की उछाल के साथ 25,131.95 के लेवल पर पहुंच गया. हालांकि, कारोबार के दौरान ये 25,017 के स्तर तक टूटा था. लार्जकैप में इन शेयरों ने लगाई दौड़ अब बात कर लेते हैं सोमवार को शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी के साथ भागे शेयरों के बारे में, तो लार्जकैप कैटेगरी में शामिल L&T Share 1.76% चढ़कर 3544.30 रुपये के लेवल पर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा HDFC Bank Share 1.68% की तेजी के साथ 1678.80 रुपये पर पहुंचकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा JSW Steel Share 1.50%, Tech Mahindra Share 1.30% उछलकर कारोबारी कर रहा था. मिडकैप और स्मालकैप भी चढ़ा मिडकैप कैटेगरी में शामिल NIACL Share  3.27%, TorntPower Share 2.66%, GICRE Share 2.65% Qk Federal Bank Share 2.40% की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे. स्मालकैप कंपनियों में HLVTD Share 15% और GANECOS Share 10% की उछलकर कारोबार कर रहे थे. एशियाई बाजार में मिलाजुला कारोबार     एशियाई बाजार में मिलाजुला कारोबार देखने को मिल रही है। हांगकांग के हैंग सेंग में 0.66% की गिरावट है। वहीं चीन का शंघाई कम्पोजिट 1.01% की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है।     10 अक्टूबर को अमेरिका का डाओ जोंस 0.97% चढ़कर 42,863 पर और नैस्डैक 0.33% चढ़कर 18,342 पर बंद हुआ। S&P 500 भी 0.61% बढ़कर 5,815 पर बंद हुआ।     NSE के डेटा के अनुसार, विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 11 अक्टूबर को ₹4,162.66 करोड़ के शेयर बेचे। इस दौरान घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹3,730.87 करोड़ के शेयर खरीदे। शुक्रवार को बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले 11 अक्टूबर को शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। सेंसेक्स 230 अंक की गिरावट के साथ 81,381 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 34 अंक की गिरावट रही थी, ये 24,964 के स्तर पर बंद हुआ था।

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