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नर्मदा के भेड़ाघाट पर बन रहा ऑईकॉनिक ब्रिज, पुल पर ही बनेगा होटल और रोप-वे का भी होगा निर्माण

 जबलपुर  जबलपुर में नर्मदा पर भेड़ाघाट में निर्माणाधीन 1.3 किलोमीटर लंबा आईकॉनिक ब्रिज आधुनिक इंजीनियरिंग का नायाब नमूना होगा। इस ब्रिज एक हिस्सा 487 मीटर का एक्सट्रा डोज केबल ब्रिज भी होगा। एक्सट्रा डोज केबल वाला यह जबलपुर का चौथा ब्रिज होगा। जिस तरह से मदनमहल रेलवे स्टेशन पर बने केबल स्टे ब्रिज में उच्च तनाव वाली एक्सट्रा डोज केबल का उपयोग किया गया है, उसी तर्ज पर इसका भी निर्माण किया जाएगा। फेज-2 में बनेगा रोपवे 270 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन इस ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा होने पर उसमें रोपवे भी स्थापित किया जाएगा, जो ऊंचाई से पर्यटकों को पुण्य सलिला मैया नर्मदा के दर्शन कराएगा। हालांकि ये काम फेज 2 में होगा। इसके साथ ही ब्रिज के दोनों छोर पर होटल भी बनाए जाएंगे। इस ब्रिज की लाइटिंग भी खास होने वाली है, जो पर्यटकों को लुभाएगी। भेड़ाघाट में बन रहे इस ब्रिज से होकर एनएच 45 होते हुए रिंग रोड के माध्यम से सीधे एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी होगी। वहीं रोपवे से होकर पर्यटक नर्मदा के दोनों ओर पर्यटन स्थल सुगमता से पहुंच सकेंगे। 25 प्रतिशत काम पूरा प्रदेश की सबसे बड़ी रिंग रोड में नर्मदा पार उतारने बनाए जा रहे आईकॉनिक ब्रिज(Iconic Bridge) का अभी 25 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। निर्माण एजेंसी एनएचएआई ने इसे वर्ष 2026 के अंत में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस ब्रिज में एक्सट्रा डोज के 4 स्पॉन व नॉन एक्सट्रा डोज के 35 स्पॉन हैं। दूसरे आईकॉनिक ब्रिज का 65 प्रतिशत काम पूरा रिंग रोड में दूसरा आईकॉनिक ब्रिज नर्मदा पर भटौली क्षेत्र में 200 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन है। 1.2 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज का 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बाकी काम इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि इस ब्रिज में रोपवे नहीं होगा। इस ब्रिज में 5 स्पॉन एक्सट्रा डोज के व 12 स्पॉन नॉन एक्सट्रा डोज के होंगे।  पर्यटकों के लिए बनना है होटल भेड़ाघाट में बनने वाले ऑईकॉनिक ब्रिज में होटल का भी निर्माण किया जाएगा। पर्यटन महत्व को देखते हुए नदी पर हैवी स्टील व कंक्रीट स्ट्रक्चर से बनने वाले पुल के साथ ही आकर्षक होटल का निर्माण किया जाएगा, जहां पर्यटक कुछ पल सुकून के भी बिता सकेंगे। आकर्षक होगी लाइटिंग रिंग रोड के दूसरे फेस में मानेगांव से राष्ट्रीय राजमार्ग 45 तक के हिस्से में नर्मदा पर भेड़ाघाट में बनने वाला आईकॉनिक ब्रिज अब तक बने पुलों से बिलकुल हटकर होगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार के अनुसार आईकॉनिक ब्रिज की लाइटिंग भी कुछ इस तरह होगी जो ब्रिज को आकर्षण का केन्द्र बनाएगी। वहीं रोपवे से होकर पर्यटक नर्मदा के दोनों ओर पर्यटन स्थल सुगमता से पहुंच सकेंगे। नए पुलों का तैयार हो रहा है नेटवर्क नर्मदा पार उतरने के लिए ढाई दशक पहले 1 ही पुल तिलवारा में हुआ करता था। दो दशक पहले नए ब्रिज का निर्माण हुआ तो अग्रेजों के जमाने का पुल बंद हो गया। एक दशक में नर्मदा पार उतरने तिलवारा में एक और पुल का निर्माण हुआ। इसके साथ ही भटौली में नए पुल का निर्माण हो गया। सडक़ मार्गों का विस्तार होने से नगर की परिधि पच्चीस किलोमीटर से बढकऱ पचपन किलोमीटर की हो गई है। लहेटा, सरस्वतीघाट, भेड़ाघाट और जमतरा में नए पुलों के निर्माण के साथ ही रिंग रोड भी आकार ले रही है इस प्रकार नए रोड नेटवर्क के तैयार होने से नर्मदा नदी के पार पहुंच आसान होगी। रिंग रोड के आसपास नगर के अन्य इलाकों में भी तेजी से विस्तार होने की संभावना बढ़ गई है।  रिंग रोड के फेज-1 में नर्मदा नदी पर एक किलोमीटर लंबे ऑईकॉनिक ब्रिज का निर्माण कार्य जारी है। ब्रिज के मुय स्पॉन के लिए फाउंडेशन तैयार किा जा रहा है। दोनों ओर एप्रोच रोड का निर्माण हो गया है।     अमृत लाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई नर्मदा नदी पर दो नए और बड़े ब्रिज के निर्माण व कनेक्टिंग सड़कों के बनने से नए तटों का विस्तार हो सकेगा। इससे नदी के वर्तमान तटों पर भीड़ का दबाव कम होगा, इसके साथ ही विकास की नई संभावनाएं भी खुलेंगी।     इंजी.संजय वर्मा, स्ट्रक्चर इंजीनियर व टाउन प्लानर ऊंचाई पर होगा व्यू प्वांइट, रोप-वे से पहुंचेंगे रिंग रोड में बन रहे इस ब्रिज में दूसर चरण में रोप-वे का निर्माण प्रस्तावित है। इस से ऊंचाई पर स्थित प्वांइट तक पर्यटक पहुंच सकेंगे। यहां से मां नर्मदा के विस्तार का खूबसूरत नजारा दिखेगा। पर्यटकों के साथ ही रील्स, यूट्यूबर्स के लिए यह पसंदीदा स्थाना बनेगा। ब्रिज के दोनों छोर पर होटल का निर्माण भी किया जाएगा। भेड़ाघाट में निर्माणाधीन ऑईकॉनिक ब्रिज का काम पूरा होने पर अगले चरण में उसमें रोपवे का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही दोनों ओर होटल भी बनाए जाएंगे। इस ब्रिज का 25 प्रतिशत काम हो गया है, दूसरा ऑईकॉनिक ब्रिज भटौली में निर्माणाधीन है। दोनों ही ब्रिज में एक्सट्रा डोज केबल का भी उपयोग किया जाएगा।– अमृत लाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

साइबर क्राइम से बचाव के लिए साइबर कमांडो तैयार किए, इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की

ग्वालियर  तेजी से बढ़ते साइबर अपराध से निपटने के लिए देशभर में साइबर कमांडो तैयार किए जा रहे हैं। अब ग्वालियर इस दिशा में एक अहम केंद्र बनने जा रहा है। मुरैना रोड स्थित प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज ट्रिपल आइटीएम (ITM University) में साइबर कमांडो को प्रशिक्षण देने की संभावनाएं तलाशी गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के डायरेक्टर अरविंद कुमार अपनी टीम के साथ सोमवार को यहां पहुंचे और संस्थान का गहन निरीक्षण किया। इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर देशभर में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाएं अब कानून व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। डिजिटल दुनिया में बैठकर हजारों किलोमीटर दूर से किए जा रहे अपराधों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने “आइ4सी” यानी इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की है। इसका मकसद है – राज्यों की पुलिस, जांच एजेंसियों और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से साइबर स्पेशलिस्ट तैयार करना। इसी कड़ी में सोमवार को I4C के ट्रेनिंग डायरेक्टर अरविंद कुमार और उनकी टीम ग्वालियर स्थित ट्रिपल आइटीएम यूनिवर्सिटी पहुंचे। उन्होंने संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी लैब, साइबर सिक्योरिटी कोर्सेस और फैकल्टी की उपलब्धता का गहन निरीक्षण किया। इसके साथ ही कोर्स डिजाइन, ट्रेनिंग मॉड्यूल और लॉजिस्टिक सुविधाओं पर कॉलेज प्रबंधन के साथ बैठक की गई। साइबर कमांडो की ट्रेनिंग होगी शुरू राज्य साइबर सेल की टीम भी निरीक्षण में शामिल रही। टीम ने विशेष रूप से देखा कि क्या संस्थान एक राष्ट्रीय स्तरीय साइबर ट्रेनिंग सेंटर के मानकों को पूरा करता है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान में सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं, जो साइबर कमांडो की ट्रेनिंग के लिए उपयुक्त हैं। ट्रेनिंग सेंटर का डेवलपमेंट होगा अरविंद कुमार ने बताया कि पहले चरण में देशभर में सीमित स्थानों पर साइबर कमांडो की ट्रेनिंग दी गई है। अब दूसरे चरण में हर राज्य में एक-एक ट्रेनिंग सेंटर विकसित किया जा रहा है, ताकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अधिक से अधिक कर्मचारी प्रशिक्षित हो सकें। इन कमांडो को ट्रेनिंग के बाद अपनी-अपनी यूनिट में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करने का दायित्व होगा। इस निरीक्षण के बाद पूरी रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। मंत्रालय की अनुमति मिलने पर ट्रिपल आइटीएम में जल्द ही साइबर कमांडो की ट्रेनिंग औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।

आंगनवाड़ियों के नाश्ते -भोजन में चीनी और नमक की मात्रा नियंत्रित करने के लिए आदेश जारी

भोपाल  बच्चों और महिलाओं में मोटापा और हाईपरटेशन की समस्या बढ़ने के बीच केन्द्र ने मध्यप्रदेश सरकार को भी बच्चों और गर्भवतियों के पौष्टिक आहार में चीनी और नमक को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है। केन्द्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय ने इस संबंध में राज्यों के मुख्य सचिव और महिला व बाल विकास सचिव को पत्र लिखा है। मंत्रालय ने टेक होम राशन और आंगनबाड़ी से बच्चों और गर्भवतियों को दिए जा रहे आहार में अधिक नमक, चीनी और रंग पाए जाने के बारे में चेताया है। राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को लिखे पत्र में केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय ने ये निर्देश दिए हैं । राशन पैकेट की जांच में चीनी, नमक और अन्य तत्व कहीं अधिक मात्रा में मिले हैं। पत्र के मुताबिक डब्ल्यूएचओ के नियमों के तहत बच्चों और वयस्कों के भोजन में कुल पोषक तत्वों में से शक्कर 10% से कम होनी चाहिए। कुल ऊर्जा का सिर्फ 5% चीनी से आना चाहिए। वहीं, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन के मुताबिक 2 साल तक के बच्चों के भोजन में अतिरिक्त चीनी नहीं होना चाहिए।पत्र के मुताबिक शक्कर की जगह मिठास के लिए गुड़ का प्रयोग करें। गुड़ भी कुल पोषक तत्वों का 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। केंद्रीय मंत्रालय के पत्र ने किया हैरान पत्र में मंत्रालय ने लिखा है कि कहीं-कहीं बच्चों, गर्भवती और बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाओं को दिए जा रहे नाश्ते और भोजन में निर्धारित मात्रा से अधिक नमक, चीनी और रंग पाए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के अनुसार इनके आहार में नमक, चीनी और रंगों की मात्रा नियंत्रित की जाए। इससे पहले सरकार ने स्कूली बच्चों के भोजन में चीनी की मात्रा नियंत्रित करने का निर्देश जारी किया था। कितनी मात्रा हो चीनी-नमक की डब्ल्यूएचओ के नियमों का हवाला देते हुए केन्द्र ने राज्य से कहा है कि बच्चों और वयस्कों के भोजन में कुल पोषक तत्वों का 10 प्रतिशत शक्कर और कुल ऊर्जा का पांच प्रतिशत नमक होना चाहिए। दूसरी ओर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के अनुसार दो वर्ष के बच्चों के भोजन में अतिरिक्त चीनी नहीं होनी चाहिए। उनके भोजन में मिठास के लिए शक्कर की जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और वह भी कुल पोशक तत्वों का सिर्फ पांच प्रतिशत। अधिक नमक-चीनी से हो रही है ये बीमारियां मध्य प्रदेश सरकार पोषण आहार योजना के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों से लगभग 80 लाख गर्भवती और बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं और छह माह से छह वर्ष के बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है। इनके भोजन में अधिक नमक और चीनी की मात्रा होने से इन्हें उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा, मधुमेह और दांतों की समस्याएं हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने सार्थक एवं रक्षक अभियान का किया शुभारंभ

बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल आयोग के 15 वें स्थापना दिवस पर पुलिस जवान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और छात्राएं हुईं सम्मानित   रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 15 वें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए सार्थक एवं रक्षक अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य के सुदूर अंचलों में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सार्थक एवं रक्षक जैसे नये अभियान जनमानस में बच्चों के अधिकारों के लिए जागरूक करने में कारगर सिद्ध होंगे।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही सशक्त समाज का निर्माण हो सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य के सुदूर अंचल खासकर बस्तर एवं सरगुजा संभाग में कम उम्र में ही बच्चे कामकाज की तलाश में अन्य शहरों के तरफ चले जा जाते हैं, पर जानकारी के अभाव में कई बार शोषण के शिकार हो जाते हैं। आयोग की जिम्मेदारी है कि ऐसे बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें रोजगार से जोड़ते हुए शासन की योजनाओं से लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बच्चों और युवाओं पर केन्द्रित अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। हमारी सरकार गांव-गांव तक स्कूल, कॉलेज, कोचिंग की सुविधा मुहैया करा रही है। इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास, नालन्दा परिसर एवं दिल्ली में ट्राईबल यूथ हॉस्टल जैसे कार्यों के माध्यम से छात्रों को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।   छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा ने आयोग की कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। गौरतलब है कि सार्थक अभियान बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने एवं रक्षक अभियान विश्वविद्यालयों में बाल अधिकार संरक्षण कानूनों की विशेष जानकारी प्रदान करने के लिए संचालित की जा रही है। आयोग के स्थापना दिवस समारेाह में बाल अधिकारों की जागरूकता के लिए बेहतर कार्य करने वाले पुलिस के जवानों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं छात्राओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नई मार्गदर्शिका बुकलेट, रक्षक बुकलेट एवं गुड टच, बेड टच सेफ टच, मानव तस्करी, एवं शिक्षा के अधिकार पर आधारित कार्टून पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।  इस अवसर पर विधायक सर्वश्री सुनील सोनी, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री गुरु खुशवंत साहेब, नागरिक आपूर्ति निगम अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सलीम राज सहित अनेक जनप्रतिनिधि और आयोग से जुड़े संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मंत्री सारंग ने कहा- मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सहकारिता विभाग में किये गये नवाचारों और उपलब्धियों को बताया जायेगा

भोपाल  सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने 20 जून को केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री की उपस्थित में होने वाली उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की तैयारियों संबंधी आवश्यक बैठक ली। प्रस्तावित बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अध्यक्षता करेंगे। बैठक में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सहकारिता विभाग में किये गये नवाचारों और उपलब्धियों को बताया जायेगा। बैठक में सहकारिता विभाग से जुड़े मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास, पशुपालन एवं डेयरी, लघु वनोपज संघ के अधिकारी भी शामिल होंगे। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि बैठक में मध्यप्रदेश में विकास की ओर सहकारिता के कदम में किये गये सीपीपीपी मॉडल और बीज संघ द्वारा जारी चीता ब्रांड आदि की जानकारी दी जाये। मध्यप्रदेश में बहुउद्देशीय व्यवसायिक केन्द्र के रूप में पैक्स का रूपांतरण, अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष में किये गये और प्रस्तावित कार्यक्रमों से अवगत करवाया जाये। साथ ही सहकारिता विभाग में किये जा रहे हर आयामों जैसे विशेष कार्यक्रम, प्रशिक्षण, एडवांस स्टोरेज, माइक्रो एटीएम सहित 1 से 6 जुलाई को होने वाले कार्यक्रमों का भी समावेश किया जाये। मंत्री श्री सारंग ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निर्धारित “सहकार से समृद्धि’’ के विज़न के अंतर्गत दी गई गाइड-लाइन्स के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के बारे में भी जानकारी दी जाये। मंत्री श्री सारंग ने प्रदेश के पैक्स की वर्तमान स्थिति, पैक्स अंतर्गत की जा रही गतिविधियाँ, प्रदेश के सहकारी बैंकों की वर्तमान स्थिति एवं सुदृढ़ीकरण पर चर्चा, पैक्स सोसाइटी द्वारा खाद एवं बीज वितरण व्यवस्था, पैक्स कम्प्यूटराइजेशन, प्रत्येक पंचायत में पैक्स, प्राथमिक डेयरी एवं मत्स्य पालन सहकारी समितियों का गठन एवं संचालन, पैक्स के माध्यम से सीएससी सेवाएं, जन-औषधि केन्द्र का संचालन, भारतीय बीज सहकारी समिति, नई राष्ट्रीय सहकारी जैविक समिति, एफपीओ का गठन एवं भविष्य की कार्य-योजना की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल, प्रबंध संचालक विपणन संघ श्री आलोक कुमार सिंह, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक श्री मनोज पुष्प, उप सचिव श्री मनोज सिन्हा, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक श्री मनोज गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

बिजली उपभोक्‍ताओं से निरंतर संवाद बनाए रखें : सिंघल

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने उपभोक्‍ताओं की सुविधा को देखते हुए फ्यूज ऑफ कॉल (विद्युत अवरोध को दूर करना) समय पर अटेण्ड करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंध संचालक ने कहा है कि कंपनी के समस्त मैदानी अधिकारी अथवा कार्मिक अपने मोबाईल फोन को 24 घंटे चालू रखें। उन्होंने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए बिजली कंपनी के सभी अधिकारी अपना मोबाईल 24 घंटे चालू रखें एवं उपभोक्‍ताओं के कॉल अटेण्‍ड करें। साथ ही क्षेत्रीय मुख्‍य महाप्रबंधक, महाप्रबंधक, संभागीय उपमहाप्रबंधक एवं सभी मैदानी अधिकारी कॉल सेन्‍टर 1912, व्‍हाट्सएप चैटबोट तथा स्‍थानीय वाट्सएप ग्रुप एवं अन्‍य माध्‍यम से सप्राप्‍त होने वाली विद्युत संबंधी शिकायतों का तत्‍काल समाधान करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। प्रबंध संचालक ने सभी मैदानी अधिकारियों से कहा है कि वे सीआरएम पोर्टल पर सतत् निगरानी रखें और जनप्रतिनिधि तथा उपभोक्‍ताओं से संवाद बनाये रखें। कंपनी ने कहा है कि ऑंधी, बारिश के दौरान एवं अन्य व्यवधान के कारण हुए बिजली फॉल्ट की शिकायतें दर्ज कराने के लिए कंपनी ने उपभोक्ताओं को अनेक विकल्प प्रदान किये हैं। अब उपभोक्ताओं के पास विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतों को दर्ज करने के लिए कॉल सेन्टर के टोल फ्री नंबर 1912, व्हाट्सएप नंबर 0755-2551222, मोबाइल ऐप ‘उपाय (UPAY) अथवा कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in का विकल्प मौजूद है। उपभोक्ता इन विकल्पों में से किसी भी एक विकल्प का उपयोग कर अपनी विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतें दर्ज कर आसानी से निराकरण करा सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए अपने मोबाइल में कंपनी के व्हाटसएप नंबर 07552551222 को सेव कर मैसेज “Hi” लिखकर भेजें एवं आगामी संदेशों का पालन करें। इसी प्रकार प्ले स्टोर के माध्यम से उपाय ऐप को डाउनलोड कर एवं उसके उपयोग से भी अपनी शिकायत आसानी से दर्ज करा सकते है। कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in पर जाकर एलटी सर्विसेज पर क्लिक करें उसके उपरांत कंपलेंट पर क्लिक करें तथा आगामी निर्देशों का पालन करें अथवा 1912  पर कॉल कर आईवीआरएस के माध्यम से त्वरित शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने कहा है कि बिजली कार्मिक विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें तथा कोई कार्मिक बिना परमीशन के अवकाश पर न जाए। यदि अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। आंधी, तूफान और बारिश के दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाईनमेनों के मोबाईल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखें। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन/पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाए रखें।

ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा- जो अधिकारी जिम्मेदारी का निर्वहन नही कर पा रहे उन्हे रिप्लेस करें

भोपाल  बिजली कंपनियों के जिन अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है, उन्हें रिप्लेस करें। ऐसे अधिकारियों के स्थान पर उनके जूनियर सक्षम अधिकारियों को पदस्थ करें। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बिजली ट्रिपिंग और मेंटीनेंस कार्यों की समीक्षा के दौरान दिये। बैठक में एमडी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि बिजली उपभोक्ताओं का फोन नहीं उठाने पर 15 अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकी गयी है। टूर प्रोग्राम की जानकारी भेजें ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि क्षेत्र का सतत भ्रमण करें। उन्होंने कहा कि टूर प्रोग्राम की जानकारी एडवांस में भेजें। निरीक्षण के दौरान सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों, ट्रिपिंग और मेंटीनेंस की स्थिति प्रमुखता से देखें। जिन शिकायतों का निराकरण 3 से 4 घंटे में हुआ है, उनकी कारण सहित जानकारी दें। इस पर भी विचार करें कि क्या मेंटीनेंस का समय 4 घंटे से कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लें। समय-सीमा में करें शिकायतों का निराकरण मंत्री श्री तोमर ने जिलेवार लंबित शिकायतें एवं उनके निराकरण में लगने वाले समय की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि शिकायतों का निराकरण समय-सीमा में करें। अगर कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, तो निराकरण में न्यूनतम समय लगना चाहिये। अगर बड़ी घटना हुई है, तो उसका फोटो, वीडियो और की जा रही कार्यवाही को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर अपलोड करें। श्री तोमर ने खासतौर से इंदौर की स्थिति की समीक्षा के दौरान कम्पनी के एमडी को स्पष्ट निर्देश दिये कि जरूरत के अनुसार मेन-पॉवर और इक्यूपमेंट्स की कमी दूर करें। साथ ही यह भी देखें कि मेंटीनेंस के बाद भी ट्रिपिंग क्यों हो रही है। रहवासी संघों और जन-प्रतिनिधियों के साथ लगातार सम्पर्क में रहें। उन्होंने कहा कि मानसून तो अभी शुरू हो रहा है, इसके पहले ही बिजली ट्रिपिंग की इतनी घटनाएँ होना बहुत ही दुखद है। जहाँ जरूरी हो एफओसी की संख्या बढ़ायें। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि विद्युत अवरोध के सही कारणों से लोगों को अवगत करायें। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मण्डलोई ने कहा कि मेंटीनेंस के लिये तीनों कम्पनियों को 15-15 करोड़ रुपये दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि राशि का सदुपयोग करें और बेहतर ढंग से मेंटीनेंस सुनिश्चित करें, जिससे ट्रिपिंग कम से कम हो। विद्युत वितरण कम्पनियों के एमडी ने विद्युत ट्रिपिंग रोकने और शिकायतों के निराकरण के लिये की जा रही कार्यवाही से अवगत कराया। इस दौरान प्रबंध संचालक पॉवर मैनेजमेंट कंपनी श्री अविनाश लवानिया भी उपस्थित थे। अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सामाजिक विकास के लिए मिलकर करें काम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग और चार प्रतिष्ठित गैर शासकीय संगठनों अंतरा फाउंडेशन, प्रदान, पीएचआईए फाउंडेशन और यूएनविमेन के मध्य समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान किया गया। इन एमओयू से प्रदेश के सुनियोजित, समावेशी, सकल और सतत् विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश का सामाजिक परिदृश्य बदल रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर सभी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सामाजिक विकास के सभी मानकों में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी और सबको विकास का लाभ देने के लिए सरकार गैर शासकीय संगठनों के अनुभवों का भी लाभ उठायेगी। उन्होंने कहा कि म.प्र. राज्य नीति आयोग प्रदेश में संचालित सभी जनहितैषी योजनाओं के लोकव्यापीकरण के जरिए मानवीय और सामाजिक विकास के सभी मानकों में सुधार और बढ़ोतरी के लिए ऐसे एनजीओ के साथ मिलकर काम करे, जिन्हें विषयगत विशेषज्ञता हासिल हो। उन्होंने कहा कि फील्ड में रह कर काम करने वाले एनजीओ से मिले सुझावों पर भी गंभीरता से अमल का प्रयास किया जाये। नीति आयोग, जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन आपसी समन्वय और सामंजस्य से जनता के हित में काम करें। उल्लेखनीय है कि म.प्र. राज्य नीति आयोग राज्य के सतत् विकास लक्ष्यों के अनुश्रवण और मध्यप्रदेश के दृष्टि पत्र-2047 की तैयारी में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इन साझेदारियों के माध्यम से राज्य में नीति नवाचार, डाटा आधारित सुशासन तथा बहु-क्षेत्रीय विकास को और अधिक सशक्तता एवं व्यापकता के साथ अमल में लाया जायेगा। नीति आयोग द्वारा जिन चार गैर शासकीय संगठनों के साथ एमओयू किया गया, उनमें अंतरा फाउंडेशन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और पोषण सुधार पर कार्य में सरकार की मदद करेगा। प्रदान संगठन ग्रामीण विकास एवं महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने में सहयोग करेगा। पीएचआईए फाउंडेशन जलवायु-लचीले विकास और समावेशी एवं सतत् विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में सरकार का नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागी बनेगा। इसी प्रकार यूएनविमेन प्रदेश में जेंडर उत्तरदायी शासन को आगे बढ़ाने में सरकार की मदद करेगा। मंगलवार को हुए समझौता ज्ञापन के तहत इन आपसी साझेदारियों से गरीबी उन्मूलन एवं आजीविका विकास, स्वास्थ्य और कल्याण, लैंगिक समानता, सभी को स्वच्छ जल, असमानता कम करने, जल सुरक्षा सहित वॉटरशेड संरचनाओं पर काम और जलवायु विकास आधारित कार्रवाई जैसे वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी आएगी। ये समझौते समृद्ध मध्यप्रदेश के संकल्प और विजन 2047 के क्रियान्वयन की दिशा में एक ठोस कदम हैं, जो शासन, नीति और नागरिक सेवाओं के सहज और सरल वितरण में नवाचार एवं सहभागिता को बढ़ावा देंगे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, अपर मुख्य सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री संजय कुमार शुक्ला, म.प्र. राज्य नीति आयोग के सीईओ श्री ऋषि गर्ग सहित गैर शासकीय संगठन अंतरा फाउंडेशन से सुश्री चंद्रिका, प्रदान से सुश्री अर्चना सिंह, पीएचआईए फाउंडेशन से श्री अनिरुद्ध और यूएनविमेन से सुश्री जॉयट्री सहित अधिकारी मौजूद रहे।  

खरगोन जिले में नाव की मदद से बिजली कार्य का मेंटीनेस, ऊर्जा मंत्री तोमर ने कर्मचारियों के कार्य की प्रशंसा की

भोपाल मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खरगोन जिले में 33 केवी लाइन के मेंटीनेस के लिए मंगलवार को नाव की मदद लेना पड़ी। खरगोन जिले में 132 केवी तोरणी अति उच्चदाब ग्रिड से 33 केवी फीडर के माध्यम से अजन गांव, दौड़वा में बिजली वितरण होता है। तोरणी धनगांव 33 केवी फीडर पर इंसुलेटर से कंडक्टर झुलने की अवस्था में आने से बिजली कंपनी कर्मचारियों ने विधिवत परमिट लेकर इसे सुधारने के लिए मंगलवार को योजना बनाई। अंजनगांव वितरण केंद्र प्रभारी इंजीनियर श्री अंकित पटेल की अगुवाई में छः कर्मचारियों ने मेंटीनेस गतिविधियां प्रारंभ की, नावली तालाब के किनारे जहां पोल थे, वहां बारिश का पानी जमा होने पर नाव की मदद से कंडक्टर तार ठीक किए गए, उन्हें पोल पर ठीक से कसा गया एवं 33 केवी लाइन के मेंटीनेस के अन्य जरूरी कार्य किए गए। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने खरगोन जिले के बिजली कर्मचारियों के इस कार्य की प्रशंसा की हैं। 

बिजली कंपनी ने कंरट से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने किया आगाह

भोपाल  मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आम जनता तथा हाथ ठेले पर सामान बेचने वालों को आगाह किया है कि वे अपने हाथ ठेले तथा फुटकर सामान की दुकानें हाईटेंशन लाइनों से दूर लगाएं। कंपनी ने कहा है कि जरा सी असावधानी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए आमजन भी करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम में सहयोग करें एवं बिजली लाइनों तथा ट्रांसफार्मर से उचित दूरी बना कर ही अपना सामान बेचने के लिए रखें। कईं जग‍ह चाय की गुमठियां भी विद्युत लाइनों के समीप तथा ट्रांसफार्मरों से सटाकर चलाई जा रही है, जिनके कारण करंट लगने से कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। कंपनी ने उपभोक्‍ताओं से अपील में कहा है कि विद्युत लाइनों/ट्रांसफार्मरों एवं उपकरणों के साथ छेड़छाड़ न करें तथा सुरक्षित दूरी बनायें रखें। यदि आँधी तूफान में खंबे/तार टूटे हों तो इसकी सूचना तत्काल शिकायत कॉल सेंटर के टोल फ्री नं. 1912 पर/उपाय ऐप एवं समीप के वितरण केन्द्र कार्यालय में दें। जमीन पर पड़े तारों को छूने या स्पर्श करने की गलती न करें साथ ही पार करने का प्रयास न करें। पान टपरों तथा ऐसी दुकानों जिनमें लोहे की चादर का इस्तेमाल होता है, में वायरिंग को सुरक्षित ढंग से पी.वी.सी. पाईप के द्वारा ही कराई जाए। किसी प्रकार की कटी-फटी लूज वायरिंग से जान-माल का खतरा हो सकता है। बारिश के दौरान विद्युत खम्बे/स्टे के पास पानी भराव वाले स्थान से निकलने की जल्दी न करें। सावधानी अवश्‍य बरतें क्योंकि बारिश के दौरान करंट लीकेज की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि बच्चों और मवेशियों का विशेष ध्यान रखें। अपने मवेशी को बिजली के खम्बे, स्टे वायर इत्यादि से न बांधें। कपड़े सुखाने के लिये जी.आई. तार अथवा रस्सी, सर्विस लाईन के पाईप या बिजली के खम्बों से कभी न बांधें। इसमें करंट आने की संभावना बनी रहती है। घर की दीवार, उपकरण, नल आदि में लीकेज करंट आने पर प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन से तत्काल ठीक कराएं।       मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू विद्युत उपकरणों, वायरिंग, स्विच इत्यादि को स्वयं सुधारने के बजाय किसी प्रशिक्षित एवं अनुभवी इलेक्ट्रीशियन की सेवाएं लें। मानव जीवन अमूल्य है। बिजली के स्विच /सॉकिट/बिजली उपकरण बच्चों की पहुंच से दूर रखें। विद्युत पोल से ही कनेक्शन लें, बीच तारों में कटिया डालकर विद्युत का उपयोग न करें, यह दण्डनीय अपराध है। शादी, धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रमों में अतिरिक्त भार के लिये अस्थायी कनेक्शन लें तथा उचित क्षमता की उच्च गुणवत्ता की केबिल का ही उपयोग करें। कटे फटे तारों का उपयोग कतई ना करें। स्वीकृत भार से अधिक लोड का उपयोग न करें। उचित क्षमता के एम.सी.सी.बी/कट-आउट लगाने के साथ ही अच्छी गुणवत्ता की वायरिंग का ही उपयोग करें। वर्ष में 1 बार अपने परिसर की वायरिंग, फिटिंग, अर्थिंग अनुभवी एवं दक्ष इलेक्ट्रीशियन से अवश्य चैक कराएं। विद्युत लाईन के नीचे एवं ट्रांसफार्मरों के नजदीक भवन निर्माण/दुकान/बैनर/ईट भट्टा न लगाएँ। विद्युत लाईन के नीचे कोई स्थाई-अस्थाई निर्माण न करें। फसल इत्यादि का संग्रहण न करें। विद्युत लाइनों से सुरक्षित दूरी पर ही निर्माण करें। किसान भाई खेतों में कटाई एवं गहाई की जा रही फसलों को बिजली के तारों के नीचे, बिजली के खम्बों एवं स्थापित ट्रांसफार्मरों/स्टे तारों के पास एकत्रित न करें। खेतों में विद्युत उपयोग के लिये कटी-फटी डोरी का उपयोग न करें।  

योग विषय पर होगा शक्ति योग समागम कार्यक्रम 18 जून को

भोपाल 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भोपाल के तुलसी नगर स्थित आरोग्य भारती के केंद्रीय कार्यालय में 18 जून 2025 को शक्ति योग समागम कार्यक्रम आयोजित होगा। यह कार्यक्रम, शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय भोपाल, केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद नई दिल्ली प्रभा आरोग्य भारती केंद्रीय कार्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में होगा। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. जूही गुप्ता एवं डॉ. अनुपम मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम की श्रृंखला के अंतर्गत महिलाओं के लिए स्वास्थ्य एवं आनंद के लिए योग विषय पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम सायं 5 बजे से 6:30 तक आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में महिलाओं के जीवन में स्वास्थ्य एवं आनंद को संचारित कर उनके जीवन सुखमय बनाने का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा। कार्यक्रम में शहर की प्रतिष्ठित चिकित्सा अधिष्ठाता, वकील, पुलिसकर्मी एवं विभिन्न क्षेत्रों में अपना सहयोग देने वाली महिलाएं उपस्थित रहेंगी। डॉ. जूही ने बताया कि कार्यक्रम में डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय सलाहकार केंद्रीय आयुष मंत्रालय शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम, आगामी वर्षों में होने वाले अनेक कार्यक्रमों की आधारशिला के रूप में स्थापित होगा। स्त्री जीवन के विभिन्न पड़ाव में सहजता के साथ प्रसन्न एवं स्वस्थ रहकर स्वयं की और समाज की चिंता करने के लिए मातृशक्ति को इस कार्यक्रम के एवं आगामी कार्यक्रमों के माध्यम से तैयार किया जाएगा। इससे मातृशक्ति का एक ऐसा समूह तैयार होगा, जो पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य से सुरक्षा एवं सामाजिक दायित्वों के निर्वहन का नवीन अध्याय लिखेगा। कार्यक्रम की अधिक जानकारी के लिए दूरभाष क्रमांक 9202663862 पर सम्पर्क किया जा सकता है।  

वैश्विक दक्षता की दिशा में अभिनव पहल: सुभाष इनीशिएटिव के अंतर्गत जर्मन भाषा कोर्स की हुई शुरुआत

भोपाल  संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क (एसएसआरजीएसपी) में सुभाष इनीशिएटिव के तहत जर्मन भाषा प्रशिक्षण प्रारंभ कर अभिनव पहल की गई है। यह पहल मेटएक्स स्ट्रक्चर्स, जर्मनी के सहयोग से प्रारंभ हुई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक कार्य संस्कृति से परिचित कराना और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय रोजगार के अवसरों के लिए सक्षम बनाना है। मेटएक्स स्ट्रक्चर्स के प्रबंध निदेशक श्री ओंकार काकवडे ने जर्मन भाषा की उपयोगिता, औद्योगिक मांग और प्रशिक्षण के संभावित वैश्विक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि नई संस्कृतियों और अवसरों का द्वार भी है। इस अवसर पर एसएसआरजीएसपी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गिरीश शर्मा ने छात्रों से संवाद करते हुए जर्मन भाषा की कुछ मूलभूत अवधारणाएं साझा की। उन्होंने बताया कि एसएसआरजीएसपी का प्रयास केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को वैश्विक नागरिक के रूप में तैयार करने की दिशा में भी समान रूप से प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नीशियन, मेक्ट्रॉनिक्स टेक्नीशियन, कंक्रीटर, मेटल वर्कर, सड़क निर्माण श्रमिक और राजमिस्त्री जैसे कोर्स से जुड़े विद्यार्थियों ने भाग लिया। भाषा प्रशिक्षण के इस समावेशन ने तकनीकी कौशल के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संवाद और समावेशन की समझ को भी बल दिया है। यह आयोजन एसएसआरजीएसपी की उस व्यापक सोच का उदाहरण है, जो युवाओं को बहुआयामी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सुभाष इनीशिएटिव के तहत जर्मन भाषा की यह शुरुआत भारत और जर्मनी के कौशल सहयोग की दिशा में एक सार्थक कदम है।  

उज्जैन में रामायणकालीन लक्ष्मण बावड़ी को मिला नवजीवन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की पुनरूद्धार कार्य की सराहना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पुरानी जल-संरचनाओं को फिर से उसी स्वरूप में लाने के लिए चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान ने उज्जैन की रामायणकालीन लक्ष्मण बावड़ी को नवजीवन के साथ पुरानी वैभव भी लौटाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस शानदार कार्य की सराहना की है। उल्लेखनीय है कि विगत दिनों मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपने उज्जैन प्रवास के दौरान चिंतामण स्थित लक्ष्मी बावड़ी पहुंचे थे और बावड़ी उत्सव में शामिल होकर जीर्णोद्धार कार्य की शुरूआत पूजन करके की थी। उज्जैन में चिंतामण मंदिर स्थित लक्ष्मण बावड़ी का भी साफ-सफाई, रंगरोगन और पुनरुद्धार कार्य किया गया। प्राचीन लक्ष्मण बावड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पौराणिक स्थल है। इस बावड़ी का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। जन आस्था के अनुसार इसके जल को पवित्र और चमत्कारी माना जाता रहा है। यह बावड़ी रामायण काल से आज तक उज्जैन की धरती पर स्थित है और स्थानीय जनआस्था का केन्द्र बनी रही है। लेकिन समय के साथ रखरखाव की कमी के चलते यह अपना मूल स्वरूप खो चुकी थी।   जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत लक्ष्मण बावड़ी में किए गए कार्य के बाद बावड़ी को पुनर्जीवन मिला। भागीरथी प्रयासों से आज यह प्राचीन बावड़ी फिर से अपने पौराणिक स्वरूप में लौट आई है और आस्था के केन्द्र के रूप में पुनः स्थापित हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं “बावड़ी उत्सव” के दौरान इसी स्थान पर पहुंचे, उन्होंने बावड़ी का निरीक्षण, पूजन किया और जल संरक्षण का संदेश भी दिया। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत लाखों जल संरचनाओं को जीर्णोद्धार कर पुनर्जीवन प्रदान किया गया है। यह अभियान 30 जून तक संचालित होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जल गंगा संवर्द्धन अभियान के अंतर्गत अनेक स्थानों पर प्राचीन बावड़ी मिली है। जिला प्रशासन ने इनके संरक्षण के लिये जनभागीदारी से साफ-सफाई कार्य को प्राथमिकता से किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेशभर में 30 मार्च गुड़ी पड़वा नववर्ष प्रतिपदा पर जल गंगा संवर्द्धन अभियान की शुरूआत की गई थी। 

साकार हो रहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प, जरवाही में अब जल है, संघर्ष नहीं: जल जीवन मिशन से हुआ स्थायी समाधान

भोपाल  मध्यप्रदेश के जनजातीय अंचलों में अब विकास की धारा स्थायी रूप ले रही है। एक समय जहां पीने के पानी के लिए लंबा इंतज़ार और कई किलोमीटर की दूरी तय करना ग्रामीण जीवन की सच्चाई थी, वहां अब शहडोल जिले के जनजातीय बहुल ग्राम जरवाही हर घर नल से जल की सुविधा से समृद्ध हो चुका है। यह परिवर्तन सिर्फ भौतिक सुविधा नहीं, बल्कि जनजातीय समुदाय के सम्मान, सशक्तिकरण और समग्र विकास से जुड़ा अहम पहलू है। ‘जल जीवन मिशन’ और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत ग्राम जरवाही के 162 घरों तक नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इस मिशन के अंतर्गत न केवल पेयजल की सुविधा बढ़ाई गई, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे पहलुओं को भी मजबूत किया गया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों को प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय समाज के जीवनस्तर को ऊंचा उठाने के लिए अनेक योजनाओं पर कार्य कर रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों के लिए पृथक दृष्टिकोण अपनाते हुए ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ जैसे कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का भाव विकसित करना है। ग्राम जरवाही इस दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, यहाँ की महिलाओं और बच्चों को अब पानी के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ता। नल से मिलने वाला स्वच्छ जल अब उनके जीवन में सुविधा ही नहीं, बल्कि संभावनाओं का द्वार खोल रहा है। जल पहुंचा तो बढ़ा आत्मविश्वास गांव की महिलाओं का कहना है कि पहले दिनभर का समय पानी लाने में बीत जाता था। अब घर पर ही नल से जल उपलब्ध होने के कारण बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों में संतुलन बनाना आसान हुआ है। स्वच्छ जल से स्वास्थ्य में भी सुधार आया है, और बीमारियों की रोकथाम हुई है। यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और गरिमामय जीवन की ओर बढ़ा कदम है। जनजातीय गरिमा को मिला आधार जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए सरकार योजनाएं बनाकर प्रभावी रूप से विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य कर रही है। जल जीवन मिशन और उत्कर्ष अभियान जैसे प्रयास, इन क्षेत्रों में न्यायपूर्ण विकास और सामाजिक समरसता के नए मानक स्थापित कर रहे हैं।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा- धरती आबा अभियान को सफल बनाना हम सभी का दायित्व है

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर शुरू किया गया जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उद्देश्य जनजातीय समुदाय के नागरिकों का कल्याण, सशक्तिकरण और विकास करना है। सरकार का यह प्रयास है कि जनजातीय समुदाय के जो नागरिक अभी तक सरकार की सेवाओं, सुविधाओं और योजनाओं से वंचित रह गए हैं, उन्हें लाभान्वित किया जाएं। उनकी देश के विकास में सहभागिता को सशक्त नागरिक के रूप में सुनिश्चित किया जाए। राज्यपाल श्री पटेल धरती आबा अभियान के तहत सीहोर जिले के ग्राम झोलियापुर में आयोजित राज्य स्तरीय शिविर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार के 18 मंत्रालय समन्वित रूप से अभियान का संचालन कर रहे हैं। सभी जरूरतमंद नागरिकों के लिए पीएम आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, पीएम उज्ज्वला योजना, एनआरएलएम सहित अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का यह अभियान तभी सार्थक होगा, जब हम सभी मिलकर इस अभियान को सफल बनाने का प्रयास करेंगे। हम सभी का यह दायित्व है कि हम उन सभी जनजातीय समुदाय के नागरिकों को अभियान के तहत लगने वाले शिविरों में जाकर योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें और उनकी सहायता करें। उन्होंने कहा कि धरती आबा अभियान के तहत जनजातीय समुदाय के नागरिकों को दिए गए लाभ की मॉनिटरिंग भी की जा रही है और जल्द ही वे इसका अवलोकन करने पुन: सीहोर आएंगे। राज्यपाल श्री पटेल ने राज्य स्तरीय शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। धरती आबा अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए प्रचार रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर विधायक श्री रमाकांत भार्गव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रारंभ में कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने धरती आबा अभियान के तहत जिले में संचालित गतिविधियों एवं क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी दी। जिला पंचायत सीईओ डॉ नेहा जैन ने आभार व्यक्त किया।            

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