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मुख्यमंत्री ने वाल्मिकी धाम में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधरोपण किया

उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार को गंगा दशहरा के पर्व पर वाल्मिकी धाम से क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यात्रा के पूर्व वाल्मिकी धाम परिसर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सिंदूर और त्रिवेणी-नीम, पीपल और बरगद के पौधों का रोपण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी से अपील की कि अधिक से अधिक पौधारोपण कर पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाल्मिकी धाम में अनंत विभूषित 1008 स्वामी सोहन दास जी महाराज की समाधि पर पुष्प अर्पित किये और मंदिर मे दर्शन किये। उन्होंने संत-जनों से सौजन्य भेंट की और यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं से भी मिले। मुख्यमंत्री ने   इस दौरान कहा कि आज का दिन अत्यंत शुभ दिन है। माँ क्षिप्रा से प्रार्थना है कि वे हमारे द्वारा किए गए पूजन अर्चन और परिक्रमा यात्रा को सफल बनाए और सबका कल्याण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी ओर से सभी को गंगा दशहरा और विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य सभी श्रद्धालुओं का यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर बनाए गए मंचों से पुष्प-वर्षा कर स्वागत कियागया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर पेयजल और शीतल पेय तथा फलों का नि:शुल्क वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने वाल्मिकी धाम से रामघाट तक क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा में ध्वज लेकर पैदल यात्रा की। इस दौरान सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा के कार्यकारिणी अध्यक्ष महंत रामेश्वर दास जी, महामंडलेश्वर भगवत शरण जी (भगवान बापू, महंत भगवान दास जी, महंत श्याम गिरी जी महाराज, महंत कृष्ण गिरी जी महाराज, महंत प्रणवानंद जी महाराज, महंत एकनाथ जी, महंत महावीर नाथ जी, संजय अग्रवाल, नारायण यादव, वैभव यादव, एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।  

मंत्री राजपूत ने सफलतापूर्वक संपन्न ऑपरेशन सिंदूर

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने गुरुवार को  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से नई दिल्ली स्थित उनके कार्यालय में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच राज्य हित के विषयों, युवाओं में राष्ट्रभक्ति के प्रसार, तथा केंद्र-राज्य समन्वय को लेकर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई। मंत्री राजपूत ने सफलतापूर्वक संपन्न “ऑपरेशन सिंदूर” के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन भारत की रक्षा-संवेदनशीलता, रणनीतिक क्षमता और नागरिकों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस अभूतपूर्व सफलता ने देशवासियों में गर्व और सुरक्षा का भाव और सुदृढ़ किया है। मंत्री राजपूत ने हाल ही में निकाली गई “तिरंगा यात्रा” का उल्लेख करते हुए बताया कि इस अभियान के माध्यम से राज्य के युवाओं में देशभक्ति, राष्ट्र गौरव और सैन्य सेवा के प्रति आकर्षण बढ़ा। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल झंडा नहीं, भारत की आत्मा और अखंडता का प्रतीक है, और इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने पूर्व सैनिकों के कल्याण, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और ग्रामीण क्षेत्रों में सैनिक स्कूलों की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंत्री राजपूत के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार हर संभव सहयोग के लिए तत्पर है। खाद्य मंत्री राजपूत ने भेंट को अत्यंत सकारात्मक, प्रेरक और राष्ट्रहित में उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह जैसे अनुभवी और राष्ट्रनिष्ठ नेतृत्व से संवाद करना नई दृष्टि और ऊर्जा प्रदान करता है। यह भेंट राष्ट्रीय एकता और विकास के साझा संकल्प की एक प्रभावशाली कड़ी रही।  

गुमशुदा युवती को रामनगर पुलिस ने सकुशल किया बरामद

अनूपपुर थाना रामनगर क्षेत्र के आमाडांड निवासी श्री रामखेलावन (काल्पनिक नाम) की 22 वर्षीय पुत्री कु. रानी (काल्पनिक नाम) के गुम हो जाने की रिपोर्ट विगत माह दर्ज कराई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना रामनगर में गुम इंसान क्रमांक 22/25 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई थी। पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी कोतमा के मार्गदर्शन में चलाए गए विशेष अभियान के अंतर्गत दिनांक 05 जून 2025 को युवती को सकुशल दस्तयाब कर लिया गया। युवती को आवश्यक कार्यवाही उपरांत परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है।   इस सफलता में थाना प्रभारी रामनगर एवं प्रधान आरक्षक विनोद मिंज की विशेष भूमिका रही है ।

संयुक्त सचिव ने की समूह जल प्रदाय योजनाओं की समीक्षा

 सीधी  श्रीमती सुजाता शर्मा संयुक्त सचिव दिल्ली की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन अंतर्गत समूह जल प्रदाय योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीधी अंशुमन राज, तकनीकी अधिकारी गोकुल सेतुराज, मुख्य महाप्रबंधक जल निगम भोपाल पी. के. गुरु, महाप्रबंधक म.प्र. जल निगम नीरव अग्रवाल एवं जल निगम की समस्त टीम उपस्थिति रही।    बैठक में जल जीवन मिशन सीधी अंतर्गत सीधी बाणसागर एवं गुलाबसागर की समीक्षा बैठक में महाप्रबंधक जल निगम सीधी द्वारा योजनाओं की प्रगति के विषय में अवगत कराया गया। साथ ही योजना के समस्त अवयवों के विषय में भी विस्तृत चर्चा की गई। चर्चा उपरांत संयुक्त सचिव द्वारा कार्य की प्रगति को बढ़ाने, घरेलू नल कनेक्शन की प्रगति में वृद्धि करने एवं अन्य विभागों की अनुमतियों में तीव्रता लाने हेतु निर्देशित किया गया।

बलकर ट्रक की टक्कर से अधेड़ महिला की मौत, ग्रामीणों ने ओवरलोड वाहनों का किया विरोध

बड़ामलहरा बड़ामलहरा पुलिस अनुभाग के थाना बमनौरा के अर्तगत गुरुवार को दोपहर करीब ढाई के दरम्यान एक बलकर ट्रक ने एक अधेड़ महिला को बमनोरा हीरापुर रोड पर टक्कर मार दी जिसमे महिला की मौके पर ही मौत हो गई है। आपको बता दे ट्रक दमोह हीरापुर की ओर से आ रहा था उसी समय महिला रोड़ पर किसी काम से घर से बाहर निकली और और ट्रक तेज रफ्तार में होने से टक्कर हो गई जिससे महिला शीला बाई लोधी पर चढ़ गया और शीला बाई लोधी की मौके पर मौत हो गई। जैसे ग्रामीणों ने यह हादसा देखा तो तत्काल बमनोरा पुलिस को सूचना और बलकर ट्रक को पुलिस ने पकड़ लिया और थाना परिसर में रखवा दिया। मौके पर पुलिस ने जाकर शव को अपने कब्जे लिया और शव पंचनामा तैयार कर शव का पोस्टमार्टम कराकर शव को परिजनों को सुपुर्द कर दिया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने पुलिस प्रधासन पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा है ग्राम बमनोरा से भारी वाहन जो ओवरलोड चलते है वह भारी संख्या में ऐसे वाहनों की आवाजाही लगी रहती है जबकि इन वाहनों को यहां से निकलने के लिए किसी भी प्रकार से कोई अनुमति नही है फिर भी यह ओवरलोड वाहन यहां से गुजरते है यहां पर इन्ही वाहनों की बजह से यहां की सड़क पूर्ण रूप से खस्ताहाल हो गई है साथ यह सड़क आबादी से होकर गुजरती है यहां से भारी वाहनों की आवाजाही से आय दिन पशुओं की मौते हो रही लगातार जनहानि भी हो रही पिछली साल भी इन्ही भारी बलकर ट्रक से एक कि मौत हुई थी लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नही उठा रहा है।

मुख्यमंत्री ने ‍माँ क्षिप्रा को 351 फीट की चुनरी चढ़ाई

माँ क्षिप्रा के कल कल बहते शुद्ध जल के साथ होगा सिंहस्थ का भव्य आयोजन : मुख्यमंत्री डॉ यादव  ऐतिहासिक अवंतिका नगरी में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन किया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ यादव मुख्यमंत्री ने ‍माँ क्षिप्रा को 351 फीट की चुनरी चढ़ाई उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऐतिहासिक अवंतिका नगरी में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दौरान माँ ‍क्षिप्रा में कल कल बहता शुद्ध जल प्रवहमान रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रामघाट पर सपत्नीक पूजा-अर्चना के साथ माँ ‍क्षिप्रा को 351 फीट लंबी चुनरी चढ़ाई। उन्होंने प्रदेश की उन्नति की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के ऐतिहासिक महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि काल के प्रत्येक प्रवाह में उज्जैन नगरी का अस्तित्व रहा है, यह नगरी सदैव जीवंत रही है। सम्राट विक्रमादित्य ,सम्राट अशोक से लेकर कई प्रतापी सम्राटों की कर्मभूमि यह अवंतिका नगरी रही है। यह नगरी कई ऐतिहासिक घटनाओं को अपने में समेटे हुए हैं। माँ ‍क्षिप्रा कई ऐतिहासिक गतिविधियों की साक्षी है, मोक्षदायिनी अवंतिका नगरी देवताओं की राजधानी है। इस नगरी का संबंध महाकवि कालिदास तथा राजा भृतहरी जैसे इतिहास पुरुषों से है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश शासन गरीब कल्याण का संकल्प लेकर कार्य कर रहा है। औद्योगिक विकास के लिए निवेश की संपूर्ण संभावनाओं के साथ विकास जारी है। सकारात्मक औद्योगिक नीति के कारण प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है । शिक्षा तथा चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में उल्लेखनीय रूप से मेडिकल कॉलेज की संख्या में वृद्धि हुई है। देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को भी पूर्ण सम्मान के साथ अपनाया जा रहा है। जल भंडारण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। हम अपने तीज त्योहारों को संपूर्ण आस्था के साथ मना रहे हैं तीज त्यौहार हमें प्रकृति तथा परमात्मा से जोड़ते हैं। स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश एक नई पहचान बना रहा है। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन दिव्य स्वरुप में होगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश का भाग्य बदल रहा है उन्होंने कहा कि मां क्षिप्रा के घाटों पर आरती की भव्यता सदैव स्मरणीय है। बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि माँ शिप्रा का जल सदैव प्रवाह मान रहे कल कल रूप से निरंतर बहता रहे। आगामी सिहस्थ के दौरान माँ शिप्रा के पक्के घाटों पर सुविधाजनक ढंग से करोड़ों लोग दिव्य स्नान कर सकेंगे। कार्यक्रम में डॉ. श्रीराम तिवारी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर लेजर शो हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। इस दौरान कार्यक्रम में ऋषिकेश से पधारे स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, सांसद अनिल फिरोजिया, जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर्व पर पंच दशनाम जूना अखाड़ा स्थित नीलगंगा सरोवर पर किया पूजन

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंगा दशहरा पर्व पर पंच दशनाम जूना अखाड़ा स्थित नीलगंगा सरोवर पर पूजन कर गंगा दशहरा की मंगलकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीलगंगा सरोवर का जीर्णोद्धार लगभग 4 करोड़ की लागत से किया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के दुश्मनों को परास्त किया। कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पूरी महाराज, प्रेम गिरी जी महाराज और श्रद्धालु उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव हुए किरण कवच शिविर के समापन में हुए शामिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पुलिस सामुदायिक भवन पुलिस लाइन में आयोजित निःशुल्क 15 दिवसीय आत्म रक्षा प्रशिक्षण ‘किरण कवच शिविर’ के समापन में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिविर में प्रशिक्षित बेटियों से भेंट कर मातृशक्ति को देश निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर नमन किया। नृत्याराधना नृत्य मंदिर संस्थान  द्वारा निःशुल्क 15 दिवसीय आत्म रक्षा प्रशिक्षण किरण कवच शिविर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल , विधायक उज्जैन उत्तर श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, जनप्रतिनिधि श्री संजय अग्रवाल, श्री रवि सोलंकी उपस्थित रहे।

इंदौर नगर निगम शहर में निम्न दरों पर जनता को कराएँगे राइड, जल्द शुरू होगी कैब सर्विस

इंदौर एमपी के इंदौर शहर में कई कंपनियां ऑनलाइन कैब और दोपहिया उपलब्ध करवाती हैं। इसी तर्ज पर अब नगर निगम एप बेस्ड कैब सर्विस शुरू करने जा रहा है। दावा है कि इससे किफायती दाम पर बेहतर सर्विस मिलेगी।  पहले चरण में शहर से मेट्रो तक पहुंचने और यहां से जाने के लिए इसे शुरू किया जाएगा। बाद में इस सुविधा का विस्तार किया जाएगा, लेकिन इसका संचालन शहरी सीमा में ही होगा। इसमें टैक्सी के साथ ई रिक्शा को भी शामिल करना प्रस्तावित है। तैयार हो रहा एप इस सुविधा के लिए स्मार्ट सिटी एप तैयार कर रही है। पहले चरण में मेट्रो नेटवर्क से इसे जोड़ने का कारण यह है कि अभी मेट्रो ट्रेन तक आने के लिए कई लोग निजी वाहनों का उपयोग करते हैं। इन वाहनों की पार्किंग को लेकर दिक्कत होती है। यह सुविधा शुरू होने से कोई भी व्यक्ति राइड बुक कर सकता है। कई बार वाहन चालकों के दुर्व्यवहार और मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें आती हैं। निगम की व्यवस्था में लोगों को इससे राहत मिलेगी। किराये पर होगा नियंत्रण निगम के एप पर रजिस्टर्ड वाहनों को ही बुकिंग की जानकारी मिलेगी। वे लोकेशन पर पहुंचेगे और सवारी को नियत स्थान तक छोड़ेंगे। वाहन बुक करने से लेकर यात्री को छोड़ने तक की निगरानी निगम या स्मार्ट सिटी के पास रहेगी। इससे यात्रियों से लिए जाने वाले मनमाने किराये पर नियंत्रण रहेगा। एप पर रजिस्टर्ड वाहन चालकों की पूरी जानकारी रहेगी और उनका पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाएगा। निगम के वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि यह सेवा जल्द शुरू होगी। इससे यात्रियों को सुरक्षा और किफायती सफर की सौगात मिलेगी तो अन्य लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही बेतरतीब चल रहे ई रिक्शा पर कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सकेगा।  

डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि के दीक्षांत समारोह में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को मानद डी लिट् उपाधि प्रदान की जाएगी

सागर  लंबे इंतजार के बाद डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में आयोजित 33 वां दीक्षांत समारोह की तारीख निर्धारित हो गई है। दीक्षांत समारोह 12 जून को मनाया जाएगा। समारोह में शामिल होने वाले अतिथियों के नाम की सूची अभी तय नहीं हुई है। समारोह में शिक्षाविद पद्मविभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को मानद डी लिट् उपाधि प्रदान की जाएगी। समारोह की आवश्यक तैयारियों को लेकर कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में कुलपति ने आयोजन की तैयारियों के संबंध में विभिन्न समितियों के समन्वयक एवं उपसमन्वयक से चर्चा कर तैयारियों की जानकारी ली और सफल आयोजन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। आयोजन के मुख्य समन्वयक प्रो. नवीन कानगो ने बताया कि लगभग 1225 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। पीजी के 426, यूजी के 482 तथा पीएचडी के 49 छात्रों सहित कुल 957 छात्र समारोह में उपस्थित रहकर उपाधि प्राप्त करेंगे।  9 से 11 जून को डिग्री फाइल का होगा वितरण दीक्षांत समारोह में भाग लेने वाले पंजीकृत अभ्यर्थियों को 9, 10 व 11 जून को सुबह 11.00 बजे से शाम 4.00 बजे के बीच गौर प्रांगण से डिग्री फाइल और ड्रेस सामग्री ( पगड़ी और स्टोल) वितरित की जाएगी। निर्धारित ड्रेस कोड (छात्र- सफेद कुर्ता और पायजामा, छात्राएं-सफेद सलवार और कुर्ता) की व्यवस्था अभ्यर्थियों को स्वयं करनी होगी। विश्वविद्यालय स्टोल एवं बुंदेली सतरंगी पगडी़ उपलब्ध कराएगा। सभी विद्यार्थी बुंदेली वेशभूषा में नजर आएंगी। दो दिन चलेगी रिहर्सल डिग्री पाने वाले अभ्यर्थी 10 एवं 11 जून को दोपहर 3 बजे गौर प्रांगण में रिहर्सल में भाग ले सकेंगे। बुंदेली सतरंगी पगड़ी, स्टोल, दीक्षांत समारोह हॉल में प्रवेश के लिए अपना प्रवेश पत्र अपनी फोटो आईडी (आधार, पैन आदि) साथ लाना होगा। विद्यार्थियों को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित बैठक व्यवस्था का पालन करें। पंजीकृत पदक प्राप्तकर्ता, पीएचडी, पीजी, यूजी एवं पंजीकृत छात्रों के साथ आने वाले व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था भी गौर प्रांगण में की गई है। अद्यतन जानकारी के लिए अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट का अवलोकन करते रहें।

दमोह वनमंडल का एक बड़ा हिस्सा अब आधिकारिक रूप से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में शामिल कर लिया गया

दमोह  प्रदेश की नई पहचान बन चुका वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व अब और अधिक संगठित और सशक्त होता जा रहा है। दमोह वनमंडल का एक बड़ा हिस्सा अब आधिकारिक रूप से इस टाइगर रिजर्व में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही वन विभाग के करीब 35 कर्मचारियों को भी टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अधीन कर दिया गया है।  इन कर्मचारियों की तैनाती अब रिजर्व क्षेत्र की गश्त, निगरानी, सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में की जाएगी। यह कदम न केवल टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि इससे इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में यहां बाघों की संख्या बढ़ने की भी पूरी संभावना है। गौरतलब है कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की घोषणा वर्ष 2023 में की गई थी। इसके बाद दमोह वनमंडल के कुछ क्षेत्रों को टाइगर रिजर्व में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो अब पूरी हो चुकी है। वन प्रबंधन को मिलेगी मजबूती इस संबंध में डीएफओ दमोह ईश्वर जरांडे ने बताया कि दमोह वनमंडल के 30 से 35 कर्मचारियों को टाइगर रिजर्व में अधिकृत रूप से शामिल कर लिया गया है। इससे वन्यजीव संरक्षण के कार्यों को गति मिलेगी और टाइगर रिजर्व प्रबंधन की क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने आगे बताया कि यह प्रशासनिक और मानव संसाधन स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिससे टाइगर रिजर्व की समग्र व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सकेगी। यह बदलाव आने वाले समय में न सिर्फ बाघों बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

प्रदेश की 413 नगरीय निकायों में भूमि विकास नियम में दिये गये प्रावधानों के अनुसार ऑनलाइन कम्पांउडिंग लागू किया गया

भोपाल प्रदेश में 413 नगरीय निकायों में यूनिफॉर्म एवं पारदर्शी तरीके भवन अनुज्ञा जारी करने के लिये ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रुवल सिस्टम (एबीपीएएस) लागू किया गया है। एबीपीएएस के अंतर्गत निकाय कार्यालय में उपस्थित हुए बिना ही भवन अनुज्ञा प्राप्त किये जाने के लिये आवेदन ऑनलाइन स्वीकृत किये जाने की व्यवस्था की गई है। यह संपूर्ण प्रक्रिया बिना किसी मानव हस्तक्षेप के ऑटोमेटेड प्रोसेस से ही की जाती है। यहाँ तक की बिल्डिंग इस्पेंक्टर द्वारा स्थल निरीक्षण के समय में भी मोबाइल ऐप द्वारा ही जानकारी प्राप्त कर सिस्टम में अपलोड कर दी जाती है। अब तक करीब 3 लाख 50 हजार भवन अनुज्ञाएँ ऑनलाइन माध्यम से स्वीकृत की गई हैं। ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान सिस्टम नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग द्वारा तैयार किया गया है। प्रदेश की 413 नगरीय निकायों में भूमि विकास नियम में दिये गये प्रावधानों के अनुसार ऑनलाइन कम्पांउडिंग (प्रशमन) लागू किया गया है। ऑनलाइन कम्पांउडिंग प्राणाली में शुल्क भी सिस्टम के द्वारा ऑटोमेटिक जनरेट किया जाता है एवं शुल्क के लिये सभी ऑनलाइन भुगतान विकल्प का उपयोग किया जाता है। ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रुवल सिस्टम में नागरिक स्वयं प्लिंथ प्रमाण पत्र, सेवा प्रमाण पत्र, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और अधिभोग प्रमाण पत्र ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा प्राप्त कर सकते है। भवन अनुज्ञा के लिये अनिवार्य दस्तावेजों की संख्या 16 से घटा कर 5 और साइट निरीक्षण चेक लिस्ट बिंदुओं को भी 43 से घटा कर 26 कर दिया गया है। फीस मेमों सिस्टम द्वारा स्वता: ही शुल्क जनरेट किया जाता है। शुल्क भुगतान के लिये सभी प्रकार के ऑनलाइन माध्यम स्वीकार किये जाते है। राज्य शासन द्वारा भवन अनुज्ञा प्रक्रिया के सरलीकरण के लिये अधिकारिता रखने वाले प्राधिकारी द्वारा समयक रूप से पंजीकृत वास्तुविद और संरचना इंजीनियर को 300 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल के भू-खंडों पर भवन अनुज्ञा जारी किये जाने की शक्तियाँ प्रदान की गई है। नये नियमों के अनुसार 186 वर्ग मीटर तक के आवासीय भू-खंडों पर त्वरित डीम्ड स्वीकृति प्रक्रिया को भी सिस्टम अंतर्गत लागू किया गया है।  

बक्सवाहा की जमीन के नीचे दबा है 6000 किलो हीरे का भंडार, जिसकी कीमत 70 हजार करोड़

छतरपुर  जिले से 100 किमी दूर बक्सवाहा के जंगलों में एक ऐसी खोज हो चुकी है, जो मध्य प्रदेश की तकदीर और तस्वीर बदलने का दम रखती है. 25 साल पहले बंदर डायमंड प्रोजेक्ट के तहत बक्सवाहा के जंगलों में एक सर्वे शुरू हुआ था, जिसमें जमीन के नीचे 3 करोड़ कैरेट से ज्यादा (लगभग 6000 किलो) हीरे का भंडार होने का दावा किया गया था. उस वक्त इस डायमंड डिपॉजिट की अनुमानित कीमत 55 हजार करोड़ रू आंकी गई थी, जो अब लगभग 60 से 70 हजार करोड़ रू के करीब है. अगर ये खजाना जमीन से बाहर आता तो मध्य प्रदेश की किस्मत बदल जाती. जाने देश के इस सबसे बड़े खजाने के बारे में. क्या है सबसे बड़े हीरे के भंडार की कहानी? दरअसल, मध्य प्रदेश के बक्सवाहा के जंगलों में यह सर्वे आस्ट्रेलियाई कंपनी रियोटिंटो ने कराया था. देश की सबसे बड़ा माइनिंग कंपनी रियोटिंटो ने सन् 2000 से 2005 के बीच पूरे बक्सवाहा जंगल में सर्वे कराया. एक दिन सर्वे टीम की खुशी का ठिकाना न रहा जब उन्हें किंबरलाइट पत्थरों की बड़ी-बड़ी चट्‌टानें नजर आईं. दरअसल, हीरा इसी किंबरलाइट की चट्‌टान में पाया जाता है. तब 55 हजार करोड़ थी हीरों की अनुमानित कीमत 25 साल पहले रियोटिंटो कंपनी को यहां हीरों के भंडार का पता चला था. कंपनी को यहां बड़े पैमाने पर किंबरलाइट की चट्‌टानें मिली थीं. दावा था कि जमीन के नीचे 55 हजार करोड़ तक के हीरे हो सकते हैं. दावा था कि जंगल में जमीन के नीचे साढ़े तीन करोड़ कैरेट (लगभग 6000kg) से ज्यादा के हीरे हैं. हालांकि, इसकी खोज करने वाली कंपनी 2017 में इस प्रोजेक्ट से बाहर हो गई, जिसके बाद बक्सवाहा के जगंल को सरकार ने हीरा निकालने के लिए नीलम किया था. ये प्रोजेक्ट लीज पर आदित्य बिड़ला ग्रुप की एसेल माइनिंग कंपनी को 2019 में मिला पर हाईकोर्ट ने इसपर स्टे लगा दिया था. खुदाई से पहले लगा हाईकोर्ट का स्टे छतरपुर जिले की बक्सवाहा हीरा खदान 2019 में नीलाम की गई थी. आदित्य बिड़ला ग्रुप की एसेल माइनिंग कंपनी ने 50 साल की लीज पर इसे लिया था. कंपनी को लगभग 364 हेक्टेयर जमीन मिली थी. खुदाई शुरू हो पाती उसके पहले ही पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था. बताया गया था कि इस जंगल में 62.64 हेक्टेयर क्षेत्र हीरे निकालने के लिए चिह्नित किया गया था, पर कंपनी ने 382.131 हेक्टेयर का जंगल मांगा, जिससे बाकी जमीन का उपयोग खनन करने और प्रोसेस के दौरान खदानों से निकला मलबा डंप करने में किया जा सके. इसी दौरान हाईकोर्ट ने इसपर स्टे लगा दिया. बन जाती एशिया की सबसे बड़ी डायमंड माइन खनिज अधिकारी अमित मिश्रा के मुताबिक, ” बक्सवाहा के जंगलों में बंदर डायमंड के नाम से एक ब्लॉक बनाया गया था, जिसे रियोटिंटो कंपनी ने एक्सप्लोर किया था लेकिन रियो टिंटो उसे छोड़ कर चली गई थी. उस समय फॉरेस्ट से उन्होंने रकबा बहुत बड़ा मांगा था, जो किसी वजह से नहीं दिया गया. उसके बाद एक छोटा रकबा 364 हेक्टेयर का बनाया गया था. अगर बक्सवाहा की माइंस चलती तो एशिया की सबसे बड़ी माइंस होती, उस समय 55 हजार करोड़ के हीरे निकलने की वेल्युएशन की गई थी.” लाखों पेड़ कटने की अफवाहें थीं वहीं खनिज अधिकारी ने आगे कहा, ” 364 हेक्टेयर क्षेत्र की लीज दी गई तो अफवाहें उड़ीं कि पूरे में खुदाई होगी और लाखों पेड़ कटेंगे. ये महज अफवाह थी. अब खुदाई की आधुनिक तकनीकें आ गई हैं, ज्यादा से ज्यादा एक फुटबॉल ग्राउंड के बराबर जमीन पर ही खुदाई होती है, इससे न तो ज्यादा पेड़ कटते हैं और न वन्य जीवों को नुकसान होता है. जितने पेड़ कटते हैं उसके 10 गुने पेड़ लगवाए भी जाते है,और उनकी पूरी देखरेख की जाती है.”

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में नंबर-1 का स्थान पर कान्हा नेशनल पार्क

मंडला टाइगर्स के लिए पूरे देश में मशहूर मध्य प्रदेश के नाम एक और बड़ी उपलब्धि है. मध्य प्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या के मामले में देश में नंबर वन बन गया है. वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में नंबर-1 का स्थान दिया गया है, वहीं जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क दूसरे स्थान पर आया है. बता दें कि मध्य प्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व अपने टाइगर्स की लिए देश-दुनिया में जाना जाता है और यहां दूर-दूर से लोग टाइगर्स का दीदार करने आते हैं. WII की रिपोर्ट में कान्हा नेशनल पार्क नंबर-1 वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने देशभर के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क की स्टडी की थी. यहां खासतौर पर शाकाहारी वन्यजीवों पर रिसर्च की गई. रिसर्च में पाया गया कि मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में चीतल, गौर, सांभर, बार्किंग डीयर सहित कई अन्य शाकाहारी जानवरों की संख्या सबसे ज्यादा है. कान्हा टाइगर रिजर्व ने इस मामले में देश के अन्य टाइगर रिजर्व के साथ-साथ जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क को भी पछाड़ दिया है. इसी वजह से कान्हा टाइगर्स के लिए अनुकूल वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व की जैवविविधता सबसे बेहतर है. यहां सबसे ज्यादा शाकाहारी वन्यजीवों की मौजूदी टाइगर्स के संरक्षण के लिए जबर्दस्त है. ये यहां की पूरी फूड चेन के लिए अच्छा संकेत है. पिछले वर्ष की रिसर्च के आधार पर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इस रिपोर्ट को पेश किया है. 2074 वर्ग किमी में फैला है कान्हा टाइगर रिजर्व कान्हा टाइगर रिजर्व का कोर और बफर एरिया 2074.31 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ है. इस पूरे क्षेत्र में टाइगर्स के साथ-साथ बाराहसिंघा, सांभर, चीतल, गौर, बार्किंग डीयर, लंगूर, जंगली सूअर समेत कई वन्य प्राणियों की भरमार है. शाकाहारी वन्य प्राणियों की अधिक संख्या की वजह से दूसरे मांसाहारी जीव खासतौर पर टाइगर्स के लिए ये जगह उपयुक्त है. जैव विविधता का अनूठा उदाहरण है कान्हा नेशनल पार्क कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल के मुताबिक, ” कान्हा टाइगर रिजर्व शाकाहारी वन्य जीव के मामले में पूरे भारत में नंबर वन है. जहां शाकाहारी वन्य जीवों की तादाद ज्यादा होती है, वहां मांसाहारी वन्य जीव भी अधिक होते हैं.यही वजह है कि कान्हा टाइगर रिजर्व जैव विविधता का सबसे अच्छा उदाहरण है.

बकायेदारों के खिलाफ विद्युत वितरण कंपनी की भोपाल में कार्रवाई जारी, 100 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया

भोपाल चिराग तले अंधेरा वाली कहावत तो आपने सुनी होगी..अब देख भी लीजिए. तेजी से उभरते मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली विभाग को लंबा पलीता लगा रहा है. बिजली बिलों का बकाया अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अकेले शहर में घरेलू उपभोक्ताओं पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया है. हैरानी की बात तो ये कि इनमें से 86 उपभोक्ताओं पर 1 लाख रुपये से अधिक का बकाया है. बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के अनुसार, इनमें से अधिकांश मामलों में कोई न कोई विवाद है. कई केस अदालतों में विचाराधीन हैं. सबसे अधिक बकाया एक घरेलू उपभोक्ता पर 4.21 लाख रुपये का सामने आया है. यह उपभोक्ता कटारा हिल्स वितरण क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहता है. फिर भी कनेक्शन चालू TOI की रिपोर्ट के अनुसार, कटारा हिल्स वाले उपभोक्ता का मई महीने का चालू बिल 2,246 रुपये था, जिस पर 5,199 रुपये विलंब शुल्क और 4.15 लाख रुपये का पुराना विवादित बकाया जुड़कर कुल देय राशि 4,21,079 रुपये हो गई. मामला अदालत में लंबित होने के कारण बिजली कनेक्शन चालू है. इस मामले में डिस्कॉम के अधिकारियों का कहना है कि सामान्य स्थिति में यदि किसी घरेलू उपभोक्ता पर 5,000 रुपये से अधिक बकाया होता है तो उसका कनेक्शन काट दिया जाता है. लेकिन, जिन उपभोक्ताओं के बिल विवादित है या न्यायिक प्रक्रिया में है, उनके खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हो पाती. छोटे बकायदार भी करीब 37 हजार 1 लाख रुपये से अधिक बकाया रखने वालों के बाद सबसे बड़ी संख्या उन उपभोक्ताओं की है, जिन पर 10,000 से 1 लाख के बीच की राशि बकाया है. ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 16,681 है. इनमें से किसी पर 99,797 रुपये तो किसी पर 10,001 रुपये तक का बकाया है. इसके अलावा 19,704 उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जिन पर 5,000 से 10,000 रुपये तक की राशि लंबित है. बिजली कंपनी इस काम में लगी विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि का बकाया होना बिजली वितरण व्यवस्था और बिल वसूली प्रक्रिया में गहराते संकट की ओर संकेत करता है. यदि विवादों और अदालती मामलों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो यह बकाया राशि और बढ़ सकती है. डिस्कॉम की ओर से फिलहाल ऐसे उपभोक्ताओं से संपर्क कर विवाद सुलझाने और समझौते की कोशिश की जा रही है. वहीं, अधिकारियों ने संकेत दिए कि सरकार से नीति-निर्माण स्तर पर भी हस्तक्षेप की मांग की जाएगी.

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