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दिल्ली जा रहे राज्यपाल मंगूभाई पटेल की फ्लाइट में आई दिक्कत, भोपाल में रोकी गई उड़ान

भोपाल एयर इंडिया की भोपाल से दिल्ली जा रही उड़ान में मंगलवार रात को अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इस कारण उड़ान को रोक देना पड़ा। इस उड़ान से राज्यपाल मंगूभाई पटेल भी दिल्ली जा रहे थे। खराबी के कारण उन्हें विमान से वापस उतरना पड़ा। जानकारी के अनुसार एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2760 रात्रि करीब आठ बजे दिल्ली के लिए टेकऑफ हो रही थी। टेकऑफ से ठीक पहले आई खराबी: सुरक्षा की दृष्टि से रोका विमान राज्यपाल सहित सभी यात्री विमान में सवार हो गए थे। विमान स्टार्ट करते समय तकनीकी खराबी आ गई। चालक दल ने सुरक्षा की दृष्टि से विमान को टेकऑफ नहीं होने दिया। इसी बीच राज्यपाल मंगूभाई पटेल को विमान में खराबी होने की सूचना दी गई। बाद में राज्यपाल विमान से उतरे। उन्हें एयरपोर्ट के वीआईपी लाउंज में इंतजार करने को कहा गया।  

प्रधानमंत्री के संसद भवन स्थित कार्यालय में की शिष्टाचार भेंट

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी से राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने प्रधानमंत्री के संसद भवन के कार्यालय में बुधवार को शिष्टाचार भेंट की। उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी का पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री  मोदी को उन्होंने स्मृति स्वरूप लंका से लाई हुई भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट की।   प्रधानमंत्री  मोदी को राज्यपाल  पटेल ने भारतीय प्रतिनिधि मण्डल के साथ लंका से पवित्र बौद्ध अवशेषों को भारत वापस लाने की अपनी यात्रा के संबंध में जानकारी दी। प्रधानमंत्री को यात्रा के विवरण पर आधारित पुस्तक “बुद्ध धरोहर की सांस्कृतिक यात्रा भारत से लंका” भेंट की। प्रधानमंत्री  मोदी को उन्होंने राज्य की प्रगति से अवगत कराया तथा विकास के विभिन्न आयामों पर चर्चा की।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पेशवाई टोपी पेश कर किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए मराठी भाषियों के समूहों ने भेंट की गुड़ी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक गुड़ी पड़वा हमें नए संकल्प लेने, अपने जीवन में लक्ष्यों को अपनाने और समृद्धि की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। गुड़ी पड़वा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। हमें एकता, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देता है। यह दिन नए संकल्प लेने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को आगे बढाने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र प्रतिपदा नव संवत्सर का यह पर्व प्रकृति की हरितिमा और नवजीवन का प्रतीक है। यह समय दो ऋतुओं का संधि काल है, जिसमें प्रकृति नया रूप धारण करती है। यह तिथि ऐतिहासिक भी है, इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समग्र मराठी समाज द्वारा मुख्यमंत्री निवास में नव वर्ष गुड़ी पड़वा पर्व के आरंभ के प्रतीक स्वरूप आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस अवसर पर ढोल ताशें के साथ परंपरागत रूप में स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन करते हुए उन्हें पेशवाई टोपी पेश की। इसके साथ ही उन्हें पटका और प्रतीक स्वरूप छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महाराष्ट्र मंडल, नई दिल्ली सहित इंदौर, जबलपुर, भोपाल ,सागर, दमोह, छतरपुर, बीना, देवास, उज्जैन से आए समूहों ने गुड़ी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर मराठी साहित्य अकादमी की पत्रिका का अथर्वनाद का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले सौ -डेढ़ सौ वर्षों से मराठी कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं के प्रतिनिधियों का सम्मान भी किया। गुड़ी पड़वा उत्साह और उमंग का पर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति की ध्वजा हर काल और हर युग में हमारी पहचान रही है। हमने कई आक्रांताओं का सामना किया, लेकिन कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। सम्पूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को स्वीकार करती है। भगवा ध्वज और तिरंगे के साथ युद्ध काल में अपने स्वाभिमान और देश के गौरव की रक्षा के अनेक उत्कृष्ट उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं। गुड़ी पड़वा और नववर्ष सभी के लिए उत्साह, उमंग और आनंद का पर्व है। इसीलिए राज्य सरकार ने इस पर्व पर अवकाश घोषणा की है। गुड़ी पड़वा अर्थात चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंत्रीगण अपने प्रभार के जिलों में सूर्य को नमन करने के साथ गुड़ी पड़वा उत्सव के आयोजनों में सहभागिता करेंगे। सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई ने स्थापित किया गुड़ी पड़वा का महत्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के कालखंड में सनातन संस्कृति के देवालय भव्यता के साथ विकसित हुए। सम्राट विक्रमादित्य ने गुड़ी पड़वा का महत्व स्थापित किया। वे न्यायप्रियता, दानवीरता और सुशासन की उत्कृष्ट मिसाल हैं। वर्तमान दौर में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी भी इसी धारा को आगे बढ़ा रहे हैं। व्यक्तित्व में वीरता का गुण निडरता से आता है और निडरता के लिए मन का भय समाप्त करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री  मोदी के कुशल और सक्षम नेतृत्व ने भारतीयों को वैश्विक स्तर पर इस गुण धर्म की पहचान दिलाई है। पहले यूक्रेन और अब खाड़ी देशों में यह स्थिति सबके सामने है। राज्य सरकार देगी सम्राट विक्रमादित्य के नाम से एक करोड़ एक लाख रूपये का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपए राशि का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान आरंभ किया है। यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार है। सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, परम्परा के प्रचार-प्रसार, रचनात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापित इस पुरस्कार के लिए गुड़ी पड़वा से नामांकन आमंत्रित किये जा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानवीरता, सुशासन, मानव कल्याण, सर्वधर्म समन्वय जैसे मूल्यों को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। कार्यक्रम को मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक तथा अथर्वनाद पत्रिका के प्रधान संपादक  संतोष गोड़बोले ने भी संबोधित किया।  

राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने और जागरूकता की दिशा में करेगी कार्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर में इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से हुई दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों को व्यवस्थित जांच के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल से अधिकारियों और विशेषज्ञों को भी इंदौर रवाना किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल लॉक और इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से हुई दुर्घटना से बदलती तकनीक और उसके उपयोग के परिणामस्वरूप नई प्रकार की चुनौती सामने आयी है। ऐसी घटनाओं को रोकने और जागरूकता की दिशा में राज्य सरकार कार्य करेगी। हमारी कोशिश होगी कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल लॉक जैसी सुविधाओं का उपयोग हमारी आवश्यकता है, लेकिन ऐसी सुविधाओं से मानव जीवन भी कष्ट में आता है। इन उपकरणों के उपयोग में विशेष सतर्कता और सावधानी जरूरी है। इस संबंध में प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर भी सजग रहना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार होमगार्ड लाइन में आयोजित कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा में व्यक्त किए।  

जल गंगा संवर्धन के इस वर्ष होंगे करीब 2500 करोड़ रूपये के कार्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 19 मार्च, गुड़ी पड़वा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के दिन इंदौर के इस्कॉन मंदिर से तीसरे “जल गंगा संवर्धन अभियान” का शुभारंभ करेंगे। इंदौर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। इस दिन प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में भी जल स्रोतों या नदियों के समीप कार्यक्रम आयोजित कर अभियान की शुरुआत की जाएगी। साढ़े तीन माह तक चलने वाले इस प्रदेशव्यापी महाअभियान का समापन 30 जून को होगा। इसमें 18 विभाग शामिल होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का नोडल विभाग होगा, जबकि नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग सह-नोडल विभाग रहेगा। अभियान के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हर जिले में प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में होगा क्रियान्वयन जल गंगा संवर्धन अभियान का क्रियान्वयन संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में किया जाएगा। कलेक्टर जिलों में अभियान के नोडल अधिकारी होंगे। उनकी अध्यक्षता में जिला जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्य योजना तैयार कर मॉनिटरिंग करेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत-समन्वयक और सभी सहभागी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों, कृषि-अभियांत्रिकी शिक्षण व शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों, जिले के प्रतिष्ठित संत व महात्माओं और जिले के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को इस समिति में नामांकित किया जा सकेगा। विकास खंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नोडल अधिकारी होंगे। उनके नेतृत्व में विकास खंड जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्यों की निगरानी करेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत-समन्वयक और सहभागी विभागों के विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। जल संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 4–5 सरपंच तथा विकास खण्ड के प्रतिष्ठित व्यक्ति इस समिति में आमंत्रित किए जा सकेंगे। ये विभाग अभियान में होंगे शामिल जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं आवास, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद और जनसंपर्क विभाग शामिल हैं। विभागवार होने वाले प्रमुख कार्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2025 में जल गंगा संवर्धन अभियान में मनरेगा अंतर्गत प्रारंभ किए गए 86,360 खेत तालाब, 553 अमृत सरोवर, 1.5 लाख डगवेल रिचार्ज में से प्रचलित कार्यों को पूरा कराया जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वॉटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत जल संरक्षण और संवर्धन के 2200 कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। मनरेगा अंतर्गत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वॉटरशेड विकास 1.0 की परियोजनाओं में निर्मित किए गए चेक डेम तथा स्टापडेम की मरम्मत व नवीनीकरण का कार्य किया जाएगा। माँ नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना और एक बगिया मां के नाम परियोजना के अंतर्गतविगत वर्ष किए गए पौधरोपण के गैप फिलिंग के लिए आवश्यक तैयारी की जाएगी। पूर्व निर्मित जल संग्रहण संरचनाओं जैसे तालाब, चेकडेम और स्टॉपडेम से जनसहयोग से गाद निकालने का कार्य किया जाएगा। निकाली गई मिट्टी/गाद स्थानीय किसानों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण में इस वर्ष और भी व्यापक लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके लिए विस्तृत तैयारियां की जा रही हैं। सरकार ने इस वर्ष करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से जल संवर्धन और संचयन से जुड़े निर्माण एवं वर्तमान जल संरचनाओं के विकास-विस्तार कार्य कराने का संकल्प किया है। इस वर्ष जिन प्रमुख कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत, नहरों का निर्माण और सुधार, सूखी नदियों का पुनर्जीवन तथा भू-जल पुनर्भरण के लिए संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं। इन सभी कार्यों का उद्देश्य प्रदेश में वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और जल स्रोतों को स्थायी बनाना है। 10 हजार से अधिक चेक डैम्स और स्टॉप डैम्स के संधारण पर रहेगा जोर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश के 10 हजार से अधिक चेक डैम और स्टॉप डैम के समुचित संधारण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही कई छोटे-बड़े बांधों के गेटों की मरम्मत और जल संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण कार्य भी किया जाएगा। इन संरचनाओं से वर्षा जल के संचयन को रोककर जमीन में पुनर्भरण का प्रयास रहेगा, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि होगी और सिंचाई के लिए अधिक पानी उपलब्ध हो सकेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग होगा नोडल जल गंगा संवर्धन अभियान के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। वहीं नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सह-नोडल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इनके मार्गदर्शन में राज्य शासन के 16 से अधिक विभाग मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे। सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से समय-सीमा में क्रियान्वित करेंगे। अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर विशिष्ट जिम्मेदारियां दी गई हैं। मनरेगा में करेंगे खेत तालाब और अमृत सरोवर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत शुरू किए गए खेत तालाब, अमृत सरोवर और डगवेल रिचार्ज जैसे कार्यों को पूरा कराया जाएगा। इस दौरान नए काम भी प्रारंभ किए जाएंगे। अमृत 2.0 के तहत शहरों में होंगे जल संरक्षण के काम नगरीय विकास एवं आवास विभाग शहरों में अमृत 2.0 योजना के तहत जल संरक्षण संरचनाओं के जीर्णोद्धार और नए कार्यों को शुरू करेगा। वन विभाग करेगा भू-जल संवर्धन के कार्य वन विभाग द्वारा इस अभियान के दौरान लगभग 1.30 लाख हैक्टेयर भू-रकबे में भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्य किए जाएंगे। इनमें बोल्डर चेक डैम, ब्रशवुड चेक डैम, परकोलेशन पिट्स और कंटूर ट्रेंच निर्माण जैसे कार्य किए जाएंगे। जल संसाधन विभाग की बड़ी भूमिका जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा लघु सिंचाई परियोजनाओं के तालाबों के पाल (बंड) की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य किया जाएगा। नहरों की साफ सफाई और टेल-एण्ड तक पानी पहुंचाने के लिए फील्ड स्टॉफ को और अधिक सक्रिय किया जाएगा। पेयजल गुणवत्ता परीक्षण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केन्द्रों के पेयजल स्रोतों … Read more

परंपरा, प्रकृति और प्रगति का संगम, नव संवत्सर 2083 पर CM मोहन यादव का बड़ा संदेश

भोपाल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला भारतीय नववर्ष सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन पद्धति का प्रतीक है। विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ मध्यप्रदेश के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उज्जयिनी की धरती से ही इस गौरवशाली कालगणना की शुरुआत हुई थी। यह अवसर हमारी समृद्ध परंपरा को याद करने का है। इसके अलावा विकास, कृषि सशक्तिकरण और जल संरक्षण जैसे अहम क्षेत्रों में नए संकल्प लेने का भी है। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता के नाम संदेश लिखा है…. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला नवसंवत्सर हमारी सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि और प्राकृतिक जीवन पद्धति का प्रतीक है। इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय कालगणना की गौरवशाली परंपरा उज्जयिनी से प्रारंभ हुई है। सम्राट विक्रमादित्य के राज्याभिषेक से आरंभ हुआ विक्रम संवत् भारतीय संस्कृति की चेतना और राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। सम्राट विक्रमादित्य न्यायप्रियता, पराक्रम, धैर्य, ज्ञानशीलता और सुशासन के आदर्श हैं। विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर उन्होंने राष्ट्र की रक्षा और भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रतिष्ठित किया। उनके शासनकाल में सुशासन की आदर्श परंपराएं स्थापित हुईं। उन्होंने न्याय और नीति के जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी शासन और प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत हैं। विक्रमादित्य के सुशासन की परंपरा का उल्लेख ‘सिंहासन बत्तीसी’ की कथाओं में मिलता है। यह उस आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रमाण है जिसमें योग्य मंत्रियों, विद्वानों और नीति-निपुण व्यक्तियों के सहयोग से राज्य संचालित किया जाता था। सम्राट विक्रमादित्य ने जिस तरह ज्ञान, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था को विकसित किया, वह भारतीय राज्य परंपरा की श्रेष्ठता का प्रतीक है। सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘विक्रमोत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 फरवरी 2026 से 30 जून 2026 तक चलने वाला यह 139 दिवसीय उत्सव दीर्घ आयोजन का कीर्तिमान स्थापित करेगा। इसमें विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनके आदर्श और उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उज्जयिनी प्राचीन काल से ही भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना का केन्द्र रही है। बाबा महाकाल की पावन नगरी का संबंध कालगणना, खगोल विज्ञान और आध्यात्मिक साधना से रहा है। हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले ग्रहों की गति और नक्षत्रों की स्थिति का गहन अध्ययन कर जो कालगणना पद्धति विकसित की, वह आज भी विश्व के लिए आश्चर्य का विषय है। उज्जैन की वेधशाला और वैदिक कालगणना हमारी ज्ञान परंपरा का प्रमाण है। हमारे लिए यह प्रसन्नता का विषय है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का पुनर्स्थापन किया गया। यह घड़ी भारतीय समय गणना की परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। भारतीय नववर्ष प्रकृति के नवोदय का पर्व है। इस समय प्रकृति नवजीवन से समृद्ध होती है,पृथ्वी पर नवचेतना और नवसृजन का संचार होता है। देश भर में मनाए जाने वाले नवसंवत्सर के विभिन्न नाम हैं। कहीं इसे गुड़ी पड़वा, कहीं उगादि, कहीं चैती चांद और कहीं नवरोज के रूप में मनाया जाता है।इसी दिन से चैत्र नवरात्र का भी शुभारंभ होता है। नवरात्र के नौ दिन साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का अवसर है। भारतीय जीवन पद्धति में पर्व और परंपराएं व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं। मध्यप्रदेश में नवसंवत्सर का आयोजन विकास और जनकल्याण के नए संकल्पों के साथ किया जा रहा है। नवसृजन के प्राकृतिक उत्सव अवसर पर मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, इसलिए किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। इस वर्ष हमने पहली कृषि कैबिनेट बैठक बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी में की है। इसमें कृषि विकास और कल्याण के लिए 27 हजार 500 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृत किया गया। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए प्रदेश में योजनाएं लागू की गई हैं। हमारा लक्ष्य है कि किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ कृषि-आधारित उद्योगों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करें और आत्मनिर्भर बनें। यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम विरासत के साथ विकास मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। इसी अनुरूप प्रदेश में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास पर कार्य किया जा रहा है। ओंकारेश्वर, उज्जैन, मैहर और अन्य प्रमुख तीर्थस्थल आध्यात्मिक पर्यटन स्वरूप में विकसित हो रहे हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ पर्व के लिए होने वाली समस्त तैयारियां प्रगति पर हैं। इसके साथ ही श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी योजनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है। भारतीय नववर्ष का आयोजन हमें प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देता है।हमारी परंपरा में गुड़ी पड़वा के दिन सूर्योदय से पहले स्वच्छ जल में स्नान करने और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। अर्घ्य देने की परंपरा में जल स्रोतों की पवित्रता और संरक्षण का संदेश है। जल संरक्षण के इसी भाव के साथ मध्यप्रदेश में आज से “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रारंभ किया जा रहा है। नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन से प्रारंभ होने वालेइस तीसरे राज्य स्तरीय अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों और नवीन तकनीकी, नवाचारों के साथ प्रदेश के जल स्रोतों को सुरक्षित किया जायेगा। मेरा प्रदेशवासियों से आग्रह है कि जल गंगा संवर्धन अभियान को जन आंदोलन बनाएं। प्रकृति के नवसृजन, अवसर पर आज हम विकसित मध्यप्रदेश निर्माण का संकल्प लें। नवचेतना, नवजागृति के साथ आइये हम सब मिलकर प्रदेश के नवकल्याण की ओर बढ़ें और विकसित भारत निर्माण में सहभागी बनें। मुझे विश्वास है कि नव संवत्सर मध्यप्रदेश की प्रगति, समृद्धि और नई उपलब्धियों का … Read more

अब घर बैठे जमीन खरीदें! धार के मेगा मित्र पार्क में रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू

धार धार जिले के बदनावर स्थित पीएम मेगा मित्र पार्क परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर है। निवेशकों के भूखंडों की रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जमीन का स्वामित्व मिलते ही उद्योग स्थापना की तैयारियां तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया ऑनलाइन है, जिससे निवेशकों को धार आए बिना ही जमीन पर अधिकार मिल रहा है। प्रमुख समूहों का बड़ा निवेश प्रस्ताव परियोजना के पहले चरण में 25 निवेशकों ने कुल 14,099 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इनमें वर्धमान टेक्सटाइल समूह करीब 2,000 करोड़ और जैन कार्ड इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लगभग 2,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके अलावा कई छोटे-बड़े उद्योग समूह भी इस परियोजना से जुड़ने की तैयारी में हैं। टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित होगी परियोजना पीएम मेगा मित्र पार्क का उद्देश्य कपास से लेकर फैब्रिक और तैयार वस्त्र तक की पूरी औद्योगिक श्रृंखला को एक ही स्थान पर विकसित करना है। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और मालवा-निमाड़ क्षेत्र में टेक्सटाइल उद्योग को नई पहचान मिलेगी। अंतिम चरण में बुनियादी ढांचा और रोजगार की उम्मीद परियोजना क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का काम भी तेज गति से चल रहा है। पानी की पाइपलाइन, सड़क और बाउंड्रीवाल सहित अन्य निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जमीन पर अधिकार मिलने के बाद निवेशक जल्द ही उद्योग निर्माण शुरू करेंगे, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और धार जिले की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भोपाल में बड़ी सफाई मुहिम, आदमपुर खंती के कचरे पर 55 करोड़ खर्च की तैयारी

 भोपाल सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सख्ती के बाद नगर निगम प्रशासन आदमपुर खंती में वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट (पुराना कचरा) के निपटान को लेकर तेजी दिखा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस परियोजना की राह अब भी आसान नहीं दिख रही। जिंसी स्थित स्लॉटर हाउस में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद महापौर परिषद (एमआइसी) भी इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद सतर्क हो गई है। यही कारण है कि कचरा निपटान के प्रस्ताव को एमआइसी बैठक में मंजूरी नहीं मिली और अब इसे परिषद की बैठक में अंतिम निर्णय के लिए रखा गया है। 23 मार्च को परिषद बैठक में होगा बड़ा फैसला     नगर निगम की बजट सत्र की अहम बैठक सोमवार, 23 मार्च को आइएसबीटी स्थित परिषद सभागार में सुबह 11:30 बजे आयोजित होगी। इस बैठक पुनरीक्षित बजट और आगामी वित्तीय वर्ष का प्राक्कलन बजट पेश किया जाएगा और आदमपुर खंती के लेगेसी वेस्ट का मुद्दा भी केंद्र में रहेगा।      यह मामला शहर के लिए लंबे समय से “गले की फांस” बना हुआ है, जिस पर अब निर्णायक फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश      आदमपुर खंती में फैले कचरे के निपटान को लेकर एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ही समय-सीमा तय कर चुके हैं। निर्देशों का पालन न करने पर एनजीटी ने नगर निगम पर 1.80 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।      करीब 33 एकड़ क्षेत्र में फैले 6,47,825 मीट्रिक टन कचरे को हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह मुद्दा बेहद गंभीर है। नई तकनीक से होगा निपटान    कचरे के निष्पादन के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में मेसर्स सौराष्ट्र इनवायरो प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 55.54 करोड़ रुपये की न्यूनतम बोली लगाई है। खास बात यह है कि इस बार काम एकमुश्त राशि पर कराया जाएगा, जिससे खर्च बढ़ने की संभावना कम रहेगी। इस परियोजना में बायो-रेमेडिएशन और बायो-माइनिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर कचरे को खत्म किया जाएगा और जमीन को फिर उपयोग के योग्य बनाया जाएगा। एमआइसी में नहीं बनी सहमति यह प्रस्ताव पहले भी दो बार एमआइसी की बैठकों में आ चुका है, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। जिंसी स्लॉटर हाउस के घटनाक्रम के बाद परिषद और अधिक सतर्क हो गई है। अब यह मामला परिषद बैठक में रखा जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पहले के प्रयास रहे नाकाम नगर निगम पहले भी आदमपुर खंती के कचरे के निपटान के लिए कई प्रयास कर चुका है, लेकिन हर बार असफलता हाथ लगी। नवंबर 2023 में ग्रीन रिसोर्स सालिड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी को कार्यादेश दिया गया था, लेकिन तय समय सीमा 30 मई 2024 तक काम पूरा नहीं होने पर अनुबंध निरस्त कर जुर्माना लगाया गया। इसके बाद जून 2025 में सुसज्जा जेवी आनंद ऑटो को काम सौंपा गया, लेकिन एजेंसी ने काम शुरू ही नहीं किया, जिससे अगस्त 2025 में यह अनुबंध भी रद्द कर दिया गया। शहर में नए पार्किंग स्थल भी होंगे शुरू बैठक में ट्रैफिक दबाव को कम करने और निगम की आय बढ़ाने के लिए 14 नए पार्किंग स्थल शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।  इनमें सुभाष नगर, केंद्रीय विद्यालय, बोर्ड ऑफिस चौराहा, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी जैसे मेट्रो स्टेशनों के आसपास की जगहें शामिल हैं। साथ ही न्यू मार्केट और मनीषा मार्केट जैसे व्यस्त क्षेत्रों में भी पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। पुराने वाहनों को हटाने की तैयारी नगर निगम अपने बेड़े से 145 कंडम वाहनों को हटाने की तैयारी कर रहा है। इनमें से 143 वाहन 15 साल पूरे कर चुके हैं, जबकि दो वाहन खराब स्थिति के कारण हटाए जाएंगे।  

समर ट्रैवल हुआ आसान! MP से बिहार और महाराष्ट्र के लिए 15 जुलाई तक स्पेशल ट्रेनें

भोपाल यात्रियों की बढ़ती संख्या और ग्रीष्मकालीन भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। भोपाल मंडल से होकर पुणे-दानापुर विशेष ट्रेन और लोकमान्य तिलक टर्मिनस-दानापुर विशेष ट्रेन का संचालन निर्धारित तिथियों में किया जाएगा। इससे मध्य प्रदेश सहित भोपाल के यात्रियों को सीधे कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। पुणे-दानापुर विशेष ट्रेन: समय-सारणी और रूट गाड़ी संख्या 01449 पुणे से प्रतिदिन 15:30 बजे रवाना होकर इटारसी, जबलपुर, कटनी, सतना होते हुए अगले दिन 02:45 बजे दानापुर पहुंचेगी। वापसी में 01450 दानापुर से 05:00 बजे चलकर शाम 18:15 बजे हडपसर पहुंचेगी। इन ट्रेनों में एसी, स्लीपर और सामान्य श्रेणी सहित पर्याप्त कोच लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा। लोकमान्य तिलक टर्मिनस-दानापुर स्पेशल वहीं, गाड़ी संख्या 01143 लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 10:30 बजे प्रस्थान कर प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव लेते हुए 18:45 बजे दानापुर पहुंचेगी। वापसी में 01144 दानापुर से 21:30 बजे चलकर अगले दिन 07:45 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी। ये विशेष ट्रेनें एक अप्रैल से शुरू होकर 14 अप्रैल तक चलेंगी, जबकि ग्रीष्मकालीन विशेष सेवाएं 15 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 तक संचालित होंगी। बिहार और महाराष्ट्र की यात्रा होगी आसान भोपाल के यात्रियों के लिए यह सुविधा खास है, क्योंकि इससे बिहार और महाराष्ट्र के बीच यात्रा आसान होगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले समय-सारणी और अन्य जानकारी एनटीईएस (NTES) या हेल्पलाइन 139 से जरूर जांच लें।  

गेस्ट फैकल्टी नियमितीकरण पर हाईकोर्ट का फैसला, लंबी सेवा से नहीं मिलता नियुक्ति का अधिकार

जबलपुर  मध्यप्रदेश के कॉलेजों में अध्यापन का भार सम्भाल रहे 5000 से ज्यादा गेस्ट फैकल्टी को हाईकोर्ट के फैसले से तगड़ा झटका लगा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नियमित नियुक्ति करने की स्थिति में सालों यही अतिथि विद्वान अध्यापन की व्यवस्था संभाल रहे हैं।कॉलेजों में नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान गेस्ट फैकल्टी ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर नियमितीकरण की मांग की थी। सेवा के बदले मांगा नियमितीकरण याचिकाकर्ता अतिथि विद्वानों की याचिका के अनुसार वे एक से दो दशक से स्वीकृत और खाली पदों पर काम कर रहे हैं। नई भर्ती की जगह उन्हें सहायक प्राध्यापक, खेल अधिकारी और ग्रंथपाल के पदों पर नियमित किया जाए।   गेस्ट फैकल्टी द्वारा याचिका के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर फॉलेन आउट किए अतिथि विद्वानों की वापसी की मांग भी कर रहे थे। वहीं सरकार द्वारा नए सिरे से नियमित भर्ती के लिए जारी विज्ञापनों को रद्द करने की भी मांग की गई थी। गेस्ट फैकल्टी को सामाजिक सुरक्षा देने बनी समिति तीन दिन में ही बदली, उठे सवाल 20 साल से कार्यरत होने का दिया था हवाला याचिका में पन्ना निवासी डॉ. कमल प्रताप सिंह सहित 290 अन्य ने बताया था कि वे पिछले 20 सालों से शासकीय कॉलेजों में कार्यरत हैं। वे यूजीसी के मानकों के अनुसार पढ़ाई और अन्य कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ 50 हजार रुपए मानदेय मिलता है। हर साल 89 दिन का अनुबंध याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्हें हर साल 89 दिन के अनुबंध पर रखा जाता है। इसके बाद सेवा समाप्त कर फिर नई प्रक्रिया से नियुक्ति दी जाती है। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि गेस्ट फैकल्टी को आयु सीमा में छूट, अनुभव के आधार पर वेटेज और 25 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है, ताकि वे नियमित भर्ती में शामिल हो सकें। नियमित भर्ती प्रक्रिया को बताया वैध सरकार ने कहा कि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एक वैधानिक आयोग के माध्यम से होती है। नियमों के विपरीत कोई भी नियुक्ति असंवैधानिक होगी। कोर्ट ने भी इस तर्क को सही माना। “फॉलन आउट” नियम को भी सही ठहराया हाईकोर्ट ने अपने फैसले में “फॉलन आउट” नियम को वैध बताया। कोर्ट ने कहा कि नियमित भर्ती होने पर गेस्ट फैकल्टी को हटाना कानूनन सही है, क्योंकि यह पद को स्थायी रूप से भरने की प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु 1. भर्ती प्रक्रिया में अंतर नियमित भर्ती (1990 के नियमों के तहत) एमपीपीएससी (MPPSC) के माध्यम से होती है। इसका आधार खुली प्रतियोगिता परीक्षा और अखिल भारतीय स्तर है। जबकि अतिथि विद्वानों का चयन केवल पोस्ट ग्रेजुएशन के अंकों के आधार पर मध्य प्रदेश के मूल निवासियों के लिए ही सीमित है। 2. आरक्षण नियमों का पालन नहीं: नियमित भर्ती में SC, ST, OBC और दिव्यांगों के लिए संवैधानिक आरक्षण लागू होता है। अतिथि विद्वानों की नियुक्ति में ऐसा कोई प्रावधान प्रभावी नहीं।है। अभ्यर्थी को इसमें केवल अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं।   नियमित भर्ती के लिए हटाना गलत नहीं फैसले के अनुसार यदि किसी पद पर नियमित नियुक्ति या तबादले के कारण अतिथि विद्वान को हटाया जाता है, तो यह गलत नहीं है। नियम स्पष्ट है कि एक अस्थायी कर्मचारी की जगह दूसरा अस्थायी कर्मचारी नहीं रखा जा सकता। जबकि अस्थायी कर्मचारी की जगह स्थायी  कर्मचारी की नियुक्ति सही है।   जानकारी का अभाव नहीं सुनवाई पूरी करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों को नियुक्ति के पहले दिन से इस नियुक्ति की प्रकृति की सारी जानकारी थी।  उनकी नियुक्ति केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए थी इसलिए वे नियमित लाभ के हकदार नहीं होंगे। उमादेवी केस का हवाला हाईकोर्ट ने कहा कि ‘उमादेवी’ केस के लाभ यहां सीधे लागू नहीं होते। प्रोफेसर और लाइब्रेरियन जैसे उच्च शैक्षणिक पदों की योग्यता और कार्य की प्रकृति एक दिहाड़ी मजदूर से पूरी तरह अलग होती है।   भर्ती विज्ञापन को चुनौती नहीं अदालत ने कहा कि सरकार को नियमित भर्ती करने का पूरा अधिकार है। अतिथि विद्वान केवल इस आधार पर भर्ती विज्ञापन को चुनौती नहीं दे सकते कि वे लंबे समय से काम कर रहे हैं। यह कहते हुए हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

इंदौर अग्निकांड पर पीएम मोदी का शोक, गर्भवती बहू सिमरन सहित पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता

इंदौर  इंदौर अग्निकांड की खबर ने देशभर को झकझोरकर रख दिया है। सुनते ही लोगों की रूह कांप रही है। पीएम नरेंद्र मोदी  इंदौर में आग लगने के कारण आठ लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक मदद की भी घोषणा की है। मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव, राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजय वर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने इस हादसे में गहरा दुख जताया है।   प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये दिए जाएंगे  इंदौर की घटना पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में आग लगने की घटना में हुई जान-माल की हानि से गहरा दुख हुआ है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।” उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि पीएमएनआरएफ (प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष) की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में अग्नि दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों को दी श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में हुई अग्नि दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गहन शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह दुर्घटना अत्यंत पीड़ादायक है, हमारी संवेदनाएं सभी शोकाकुल परिजन के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगतों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की है। गर्भवती थी पुगलिया परिवार की बहू सिमरन ब्रजेश्वरी कॉलोनी में पुगलिया परिवार के मकान में लगी आग ने दो परिवारों को तबाह कर दिया। पुगलिया परिवार के मुखिया मनोज पुगलिया और उनकी बहू सिमरन की इस हादसे में मौत हो गई। सिमरन, मनोज के बेटे सौरभ की पत्नी थी। वह तीन साल पहले ही इस घर की बहू बनकर आई थी और गर्भवती थी। उसने इस परिवार के साथ एक नई जिंदगी के सपने भी संजोए थे।   चार माह का गर्भ था चार महीने से अधिक की गर्भवती सिमरन अब इस दुनिया में नहीं रहीं और उनके साथ ही उस नन्ही जान ने भी दम तोड़ दिया, जो अभी इस दुनिया में आने वाली थी। गर्भवती होने के कारण डाॅक्टरों ने आराम की सलाह दी थी। इस कारण सिमरन नीचे की मंजिल पर थी।  जनवरी में हुई थी शादी, सामान लेने कमरे में गई थी हादसे में मृत कारोबारी मनोज पुगलिया के तीन बेटे हैं। दूसरे नंबर के बेटे की जनवरी माह में शादी हुई थी। उसकी पत्नी मायके में थी। तीसरे बेटे की शादी नहीं हुई है। बताया जाता है कि सौरभ ने अपनी पत्नी सिमरन को भी छत पर चलने के लिए कहा, लेकिन वह कुछ जरूरी सामान लेने कमरे के भीतर चली गई। इसके बाद पूरे घर में इतना धुआं भर गया कि नीचे के हिस्से में लोगों का दम घुटने लगा। मनोज के तीनों बेटे और पत्नी छत के रास्ते पड़ोसी की छत पर चले गए, जबकि मेहमानों को छत पर जाने का मौका भी नहीं मिल पाया।  साले विजय सेठिया का परिवार रात में ही आया था मनोज के साले विजय सेठिया और उनका परिवार रात को ही घर आया था। खाना खाने के बाद रात 12 बजे तक सभी नीचे बैठकर बातें करते रहे। इसके बाद सभी अलग-अलग कमरों में सोने चले गए थे। बेटा आया कीमती सामान लेने आग लगने पर तीनों बेटों को भागने के अलावा कुछ नहीं सूझा। सबसे पहले उन्होंने अपनी जान बचाई। घर में कीमती सामान और जेवर रखे थे। इन्हें निकालने के लिए बेटा सौरभ सुबह आठ बजे अपने जले हुए घर पर फिर पहुंचा। सौरभ ने बताया कि जब आग लगी, तब पूरे घर में काला धुआं भरा हुआ था और सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। 9 गैस सिलिंडर मिले, एक फूटा था फायर ब्रिगेड ने जले हुए घर से 9 गैस सिलिंडर भी निकाले, जिनमें कुछ खाली थे। आग उन सिलिंडर तक नहीं पहुंची, वरना हादसा और भी भयावह हो सकता था। हालांकि, रसोई  घर में रखे एक सिलिंडर में विस्फोट हुआ था।   गैस सिलिंडरों में धमाका हुआ  इंदौर में कार चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई, जिसने विकराल रूप ले लिया। इस हादसे में कम से कम 8 लोग आग के चलते जान खो दी। मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को बंगाली चौराहा क्षेत्र में स्थित बृजेश्वरी कॉलोनी में कार को चार्ज किया जा रहा था, तभी चार्जिंग के दौरान आग लग गई और देखते ही देखते इस आग ने विकराल रूप ले लिया। पूरी इमारत में आग की लपटें नजर आने लगीं। इस आग की चपेट में घर के अंदर रखे गैस सिलेंडर भी आ गए और एक-एक कर कई गैस सिलिंडर में धमाका हुआ। इसके चलते मकान का कुछ हिस्सा भी ढह गया। इस हादसे को लेकर जानें पुलिस कमिश्नर ने क्या बताया? इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, तिलक नगर थाना क्षेत्र में सुबह 4 बजे आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। तीन मंजिला मकान में पुगलिया परिवार रहता था।  इस परिवार के सदस्य ऊपरी मंजिल में सो रहे थे जबकि इनके यहां बिहार से मनोज सेठिया का परिवार आया हुआ था जो ग्राउंड फ्लोर में सो रहा था। इसी सेठिया परिवार के छह लोगों की मौत हादसे में हुई है जबकि दो लोग पुगलिया परिवार के हैं। वहीं घटना में तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 

उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा, रीवा-रायपुर हवाई सेवा से विकास में तेजी आएगी

रीवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ेगी विकास की रफ्तार : उप मुख्यमंत्री  शुक्ल रीवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां भोपाल /रायपुर उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल दो दिवसीय रायपुर प्रवास में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और शिष्टाचार भेंट कार्यक्रमों में शामिल हुए। मंगलवार को रायपुर आगमन पर उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर में दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद वे क्वींस क्लब में विंध्य समाज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शामिल हुए, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए शुरू हुई हवाई सेवा से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़कों और रेल सेवाओं का बेहतर होना जरूरी है। इससे पहले रीवा से दिल्ली और इंदौर के लिए हवाई सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं, जिससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने रीवा से दुर्ग तक ट्रेन सेवा जल्द शुरू करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में विंध्याचल कल्याण सर्व समाज द्वारा उप मुख्यमंत्री  शुक्ल का अभिनंदन किया गया। यह हवाई सेवा केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का करेगी कार्य :  जायसवाल इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच संबंध बहुत गहरे हैं। उन्होंने कहा कि यह हवाई सेवा केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का कार्य करेगी। विधायक  किरण सिंहदेव ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए हवाई सेवा शुरू होना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे आवागमन आसान हो गया है। कार्यक्रम में विधायक  मोतीलाल साहू, रीवा के पूर्व विधायक  के.पी. त्रिपाठी, समाज के संरक्षक  शंकर सिंह गहरवार, अध्यक्ष  कल्याण प्रसाद पांडेय, डॉ. व्यास मुनि द्विवेदी,  मधुकर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

एमपी में LPG संकट गहरा, 70% बढ़ी मांग; होटल-रेस्टोरेंट को 10% कमर्शियल सिलेंडर देने की गाइडलाइन, आदेश का इंतजार

भोपाल  मध्य प्रदेश में एलपीजी की किल्लत लगातार बनी हुई है और इसका असर खास तौर पर होटल व रेस्टोरेंट कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है. लगातार आठवें दिन भी कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं हो पाई है. हालांकि ऑयल कंपनियों ने नई गाइडलाइन में कुछ राहत देने के संकेत दिए हैं, जिसमें 10 प्रतिशत तक कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात कही गई है, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुए हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि यदि बुधवार को निर्देश मिलते हैं तो प्रदेश के करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट को राहत मिल सकती है. घरेलू सिलेंडर की मांग में तेज उछाल दूसरी ओर, इस संकट का असर घरेलू गैस उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है. कमर्शियल सिलेंडर की कमी के चलते घरेलू सिलेंडर की मांग अचानक करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है. इसके कारण अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए 3 से 4 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है. भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार शहर में करीब साढ़े 5 लाख गैस कनेक्शन हैं, जिनमें 80 हजार कमर्शियल और 4.70 लाख घरेलू कनेक्शन शामिल हैं. पहले जहां रोजाना करीब 8500 सिलेंडर बुक होते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 14 हजार तक पहुंच गई है, जिससे सप्लाई और मांग के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है. इधर, एलपीजी संकट के बाद प्रदेश में घरेलू सिलेंडर की डिमांड 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इस वजह से वेटिंग 3 से 4 दिन तक चल रही है। भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में साढ़े 5 लाख घरेलू-कमर्शियल सिलेंडर कनेक्शन हैं। इनमें 80 हजार कमर्शियल और 4.70 लाख घरेलू सिलेंडर कनेक्शन शामिल हैं। 7 दिन पहले तक भोपाल में हर रोज एवरेज 8500 सिलेंडर की बुकिंग होती थी, जो अब 14 हजार तक पहुंच गई है। डिमांड बढ़ने से 5 से 6 हजार सिलेंडर का अंतर आ गया। इस वजह से आंकड़ा 48 हजार तक पहुंच गया है। सिलेंडर सप्लाई बढ़ाई फूड कंट्रोलर जादौन ने बताया, पिछले 2-3 दिन में भेपाल में ही रोजाना 12 से 13 हजार सिलेंडर की सप्लाई कर रहे हैं। अगले 3 से 4 दिन में क्लियर कर देंगे। भरत और एचपी कंपनी की ऑनलाइन और इंडेन की ऑफलाइन बुकिंग की जा रही है। इंडेन के सबसे ज्यादा 65% तक कनेक्शन हैं। गाइडलाइन आई, आदेश का इंतजार कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई को लेकर मंगलवार को ऑयल कंपनियों की नई गाइडलाइन आई। जिसमें 12 कैटेगिरी को कमर्शियल सिलेंडर देने की बात कही गई है। इनमें रेस्टोरेंट, होटल और ढाबों को खपत की 10% आपूर्ति भी शामिल हैं। फूड कंट्रोलर जादौन ने बताया कि विस्तृत आदेश आएंगे, तब सप्लाई शुरू कर देंगे। महाराष्ट्र में 70% सप्लाई, एमपी में भी हो एमपी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने बताया, एसोसिएशन को महाराष्ट्र के उपहार गृहों में 70 प्रतिशत रिलीफ यानी, सिलेंडर दिए जाने के आदेश मिले हैं। एमपी में भी ये आदेश आ सकते हैं। फिलहाल मंगलवार को भी कमर्शियल सिलेंडर नहीं दिया गया। इस कारण प्रदेश के 50 हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट में समस्या बनी रही। यदि इन्हें भी सिलेंडर मिलेंगे तो यह होटल इंडस्ट्री के लिए ‘ऑक्सीजन’ मिलने जैसा रहेगा। पिछले 8 दिन से सप्लाई नहीं होने से भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म हो रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंडक्शन, डीजल भट्‌ठी के इंतजाम जरूर किए हैं, लेकिन यह बहुत ही खर्चिला है। इसलिए मेन्यू में बदलाव करने की गाइडलाइन जारी की। सिलेंडर की कमी और ग्राहकों की संख्या कम होने के बावजूद प्रदेश के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट से कर्मचारियों को नहीं निकाला गया।

MP में अगले 4 दिन बदलेगा मौसम, ग्वालियर समेत 13 जिलों में बारिश का अलर्ट, फिर बढ़ेगी गर्मी

भोपाल  मध्य प्रदेश में गर्मी के बीच मौसम अचानक करवट लेने जा रहा है। बुधवार से प्रदेश में सक्रिय हो रहा नया सिस्टम अगले चार दिनों तक बारिश, आंधी और बादलों का दौर लेकर आएगा।  ग्वालियर सहित करीब 13 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी 21 मार्च तक असर देखने को मिलेगा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। इसके कारण 19 से 21 मार्च के बीच कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बन रही है।  सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, उत्तर-पश्चिम भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हो गया है। जिसका असर प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। इसलिए 19 से 21 मार्च तक प्रदेश में बारिश होगी। 5 साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को एमपी के ऊपर पश्चिम-उत्तरी हिस्से में पांच साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव रहे। वहीं, दक्षिण-पूर्वी हिस्से में एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस का भी असर रहा। इस वजह से ग्वालियर-चंबल के कुछ जिलों में बादल छाए रहे और दिन के तापमान में गिरावट देखी गई। तापमान की बात करें तो खरगोन में ही पारा सबसे ज्यादा 38.6 डिग्री दर्ज किया गया। खजुराहो में 38.4 डिग्री, नरसिंहपुर में 38 डिग्री, रायसेन में 37.6 डिग्री, मंडला में 37.5 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.2 डिग्री और खंडवा में तापमान 37.1 डिग्री रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में जबलपुर में सबसे ज्यादा 36.1 डिग्री रहा। वहीं, भोपाल में 35.2 डिग्री, इंदौर में 34.9 डिग्री, उज्जैन-ग्वालियर में 35.5 डिग्री दर्ज किया गया। क्यों बदल रहा मौसम? मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के ऊपर एक साथ कई सिस्टम सक्रिय हैं। पांच साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक पश्चिमी विक्षोभ मिलकर मौसम को प्रभावित कर रहे हैं। इसी वजह से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में  बादल छाने और तापमान में गिरावट के संकेत मिल हैं। तापमान का हाल मंगलवार को कई शहरों में गर्मी का असर बना रहा। खरगोन में अधिकतम तापमान 38.6 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि खजुराहो, नरसिंहपुर और रायसेन जैसे जिलों में भी पारा 37 डिग्री से ऊपर रहा। बड़े शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा, वहीं भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी तापमान 35 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। फरवरी में ओले, अब मार्च में नया सिस्टम इस साल फरवरी में चार बार मौसम बिगड़ा और कई जगह ओले-बारिश से फसलों को नुकसान हुआ। मार्च के पहले हिस्से में जहां तेज गर्मी रही, वहीं अब पहली बार इस महीने मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय हुई है, जो पूरे प्रदेश में असर दिखाएगी। आगे क्या रहेगा असर? यह सिस्टम 4 से 5 दिन तक सक्रिय रह सकता है, जिससे कहीं हल्की बारिश तो कहीं तेज हवाएं और गरज-चमक देखने को मिलेंगी। हालांकि, इसके बाद 22 मार्च से एक बार फिर गर्मी तेज होने के संकेत हैं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अप्रैल और मई में लू का असर तेज रहेगा। मार्च के अंत से ही गर्म हवाओं की शुरुआत हो सकती है, जो आने वाले महीनों में 15 से 20 दिन तक प्रभावी रह सकती है। 

राज्यपाल ने गुड़ी पड़वा और भारतीय नव वर्ष पर राज्यवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं

राज्यपाल ने नागरिकों को ‘गुड़ी पड़वा’ और ‘भारतीय नव वर्ष’ पर दी हार्दिक बधाई नागरिकों से एकता और खुशहाली के लिए स्वयं को समर्पित करने का किया आहृवान भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रदेश के समस्त नागरिकों को ‘गुड़ी पड़वा’ और ‘भारतीय नव वर्ष’ के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई एवं आत्मीय शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने प्रार्थना की है कि शक्ति की उपासना का यह पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करे। राज्यपाल  पटेल ने अपने संदेश में भारतीय कालगणना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि चैत्र नवरात्रि के साथ प्रारंभ होने वाला हमारा नव वर्ष प्रकृति के नव-श्रृंगार, उमंग और भारत की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर है। राज्यपाल पटेल ने समस्त प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि वे नव वर्ष के इस शुभ अवसर पर प्रदेश की एकता, अखंडता और खुशहाली के लिए स्वयं को समर्पित करने का संकल्प लें।  

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