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बुरहानपुर अपने समृद्ध इतिहास के साथ केले के लिए देशभर में जाना जाता

बुरहानपुर मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक जिला बुरहानपुर अपने समृद्ध इतिहास के साथ केले के लिए देशभर में जाना जाता है। केला जिले की प्रधान फसल है। जिले में करीबन 25 हजार 239 हैक्टेयर क्षेत्र में केला फसल का रकबा है। वहीं 18 हजार 625 कृषकों द्वारा केला फसल लगाई जाती है। केले में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते है। “एक जिला-एक उत्पाद” अंतर्गत शामिल केला फसल के तने के रेशे से, जिला प्रशासन द्वारा नवाचारों की श्रृंखला बनाकर उसे धरातल पर परोसने का कार्य जारी है। इस कार्य में आजीविका मिशन अग्रणी भूमिका निभा रहा है। कहते हैं कि महिलाओं के हाथों में कमाल का हुनर होता है, जिसे निखारने के लिए अवसर चाहिए होता है। यही मौका राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जिले की महिलाओं को उपलब्ध करा रहा है। सरकार की मंशानुसार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए हर संभव प्रयास जारी है। जिले में केले के तने के रेशों से विभिन्न उत्पाद तैयार किये जा रहे है। स्व- सहायता समूह की महिलाओं को इस कार्य के लिए तकनीकी मार्गदर्शन के साथ प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वे पर्स, टोकरियां, झाडू़, फाईल फोल्डर, पेन स्टैण्ड, झूमर, तोरण, टोपियां, की-रिंग आदि उत्पाद तैयार करती है। इन उत्पादों के विक्रय से उन्हें आर्थिक संबल मिल रहा है। सामुदायिक भवन दर्यापुर में महिलाएं केले के तने के रेशे से चटाई बनाने का कार्य कर रही हैं। महिलाएं चटाई की बुनाई के लिए विविंग मशीन का उपयोग कर, इस काम को आसानी से कर पा रही हैं। इस कार्य में जुटी महिलाएं बताती है कि, एक मीटर चटाई बनाने में 2 घंटे का समय लगता है और उससे 200 रूपये की आमदनी होती है। मांग के अनुसार चटाई की संख्या घटाई-बढ़ाई जाती है। विविंग मशीन से चटाई बनाने में समय की काफी बचत होती है और उसकी फिनिशिंग भी अच्छी आती है। विविंग मशीन तमिलनाडु़ राज्य से बुलाई गई है। इसके अलावा जिले में समूह की महिलाओं को केले के तने से फाईबर निकालने के लिए फाइबर एक्सट्रेक्टर मशीनें भी उपलब्ध कराई गई है। मशीन की सहायता से तने से रेशा बड़ी सरलता के साथ निकलता है।  

लोक निर्माण मंत्री सिंह की अध्यक्षता में निर्माण क्षेत्र की नवीन तकनीकों पर कार्यशाला आज

लोक निर्माण से लोक कल्याण भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की पहल पर 4 दिसंबर को प्रशासन अकादमी भोपाल में निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में विभाग के अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और युवा इंजीनियर भाग लेंगे। कार्यशाला का उद्देश्य विभागीय कार्यों में नवीनतम तकनीकी प्रगति को शामिल करना और विकास परियोजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। कार्यशाला के दौरान 19-20 अक्टूबर को भोपाल में आयोजित इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के सेमिनार और रायपुर में हुए वार्षिक अधिवेशन में हुई चर्चाओं को साझा किया जाएगा। इन चर्चाओं से विभागीय कार्यों में तकनीकी प्रगति के महत्व और इसके उपयोग पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भवन विकास निगम और लोक निर्माण विभाग के भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) इंदौर से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 26 युवा इंजीनियर कार्यशाला में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इन रिपोर्ट्स में प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और उसे व्यावहारिक रूप से लागू करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा होगी। कार्यशाला को प्रभावी बनाने के लिए 4 समूहों का गठन किया गया है। प्रत्येक समूह, निर्माण क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों पर गहन चर्चा करेगा और निष्कर्ष आधारित ठोस कार्य योजना तैयार करेगा। कार्य योजना लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। कार्यशाला में भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर के डीन रोहित कपूर भी शामिल होंगे। वह अपने अनुभव और ज्ञान से प्रतिभागियों को मार्गदर्शन देंगे और नवीनतम तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग के महत्व को रेखांकित करेंगे। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य निर्माण और भवन विकास क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों को शामिल करना, युवा इंजीनियरों की क्षमताओं को बढ़ाना, और विभिन्न विकास परियोजनाओं की कार्य योजना को अधिक सटीक और प्रभावी बनाना है।  

संबल योजना में कुल 10 हजार 236 श्रमिक परिवार होंगे लाभान्वित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 4 दिसम्बर को संबल योजना अंतर्गत अनुग्रह सहायता के 10 हजार 236 प्रकरणों में श्रमिकों के परिवारों को सहायता राशि 225 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से वितरित करेंगे। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं हितग्राही उपस्थित रहेंगे। संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें अनुग्रह सहायता योजना में दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं। इसी प्रकार स्थायी अपंगता पर 2 लाख रूपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 01 लाख रूपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये दिये जाते हैं तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत निःशुल्क शिक्षा भी उपलब्ध करवायी जाती है। प्रदेश के लाखों श्रमिक एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना में सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना में लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। मध्यप्रदेश सरकार ने संबल योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। संबल योजना में सभी योजनाओं जैसे अंत्येष्टी सहायता, मृत्यु अथवा दिव्यांगता पर अनुग्रह सहायता, शिक्षा प्रोत्साहन योजना, प्रसूति सहायता, आयुष्मान भारत, राशन पर्ची आदि का लाभ दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनाएं संचालित की जाती हैं इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है। अब वे भी 5 लाख रूपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा प्राप्त कर रहे है। प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 73 लाख श्रमिकों का संबल 2.0 योजना के अंतर्गत पंजीयन किया जा चुका है।  

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान अन्तर्गत जेंडर आधारित हिंसा की रोकथाम हेत किया जागरूक

  डिंडोरी   25 नवम्बर 2024 से 10 दिसम्बर 2024 तक (महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस एवं मानवाधिकार दिवस) लिंग आधारित हिंसा को समाप्त करने उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। बाल विवाह, मानव अधिकारों के उल्लंघन के साथ ही निर्धारित विकसित भारत के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय मंत्री, महिला और बाल विकास द्वारा आज मंगलवार को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान“ का शुभारंभ किया गया, ताकि बाल विवाह को समाप्त करने के मुद्दे पर जागरूकता लाई जा सके।     इसी क्रम में कलेक्टर  हर्ष सिंह के निर्देशन में हम होंगे कामयाब पखवाड़ा“ कार्यक्रम के अंतर्गत जेंडर आधारित हिंसा की रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। जिसके परिपालन में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग  श्याम सिंगौर के मार्गदर्शन में आज वन स्टॉप सेंटर “सखी“ डिंडोरी द्वारा एकीकृत माध्यमिक शाला नेवसा एवं उच्चतर माध्यमिक शाला नेवसा में महिलाओं एवं बच्चियों को वन स्टॉप सेन्टर प्रशासक श्रीमती नीतू तिलगाम द्वारा जेंडर समानता, बाल विवाह, हम होंगे कामयाब पखवाड़ा, पॉक्सो एक्ट 2012, चाइल्ड लाइन (1098), वन स्टॉप सेंटर (सखी), महिला हेल्प लाइन (181) के विषय में विस्तृत  जानकारी प्रदान की गई।       कार्यक्रम में वन स्टॉप सेन्टर केस वर्कर श्रीमती रागिनी धुर्वे, विधिक सलाहकार श्रीमती स्मिता चौरसिया एवं क्षेत्र की कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे।

हाईकोर्ट ने ओंकारेश्वर बांध के डूब प्रभावित किसानों के बालिग बेटों को मुआवजा देने के मामले में सरकार को निर्देशित किया

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ओंकारेश्वर बांध के डूब प्रभावित किसानों के बालिग बेटों को मुआवजा देने के मामले में सरकार को निर्देशित किया है। जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने इस पर विचार करने के लिए सरकार को दो माह का समय दिया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से दायर याचिका पर 7 जून 2013 को हाईकोर्ट ने सरकार को डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज प्रदान करने का आदेश दिया था। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार ने विस्थापितों को पैकेज पर 15% का लाभ तो दिया, लेकिन इसे सभी पात्र व्यक्तियों तक नहीं पहुंचाया गया। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि प्रभावित किसानों के बालिग बेटों को विशेष पैकेज का लाभ नहीं दिया गया, जबकि वे इसके पात्र थे। यह कार्रवाई न केवल अवैधानिक है, बल्कि न्यायालय के आदेश का उल्लंघन भी है। न्यायालय का आदेश युगलपीठ ने सुनवाई के बाद पाया कि प्रभावित किसानों के बालिग बेटों को मुआवजा देने में सरकार ने लापरवाही बरती है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन बालिग बेटों को भी विशेष पैकेज का लाभ प्रदान करने पर विचार करे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज शर्मा ने पैरवी की। कोर्ट ने इस मामले में न्यायालयीन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए सरकार को दो माह की मोहलत दी है।

भोपाल मंडल वातानुकूलित ट्रेनों में यात्रियों को साफ, स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाले बेडरोल प्रदान किए जा रहे

भोपाल भारतीय रेलवे (Indian Railways) अपने यात्रियों को स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता के बेडरोल (Railway Bedroll) देने के मामले में इन दिनों चर्चा में है. वहीं भोपाल रेल मंडल (Bhopal Railway Division) की ओर से बताया गया है कि पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में संचालित होने वाली सभी वातानुकूलित ट्रेनों (AC Train) में यात्रियों को साफ, स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाले बेडरोल प्रदान किए जा रहे हैं. सभी चादरों और पिलो कवर को प्रत्येक उपयोग के बाद मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में धुलाई और इस्त्री (प्रेस) की जाती है ताकि यात्रियों को स्वच्छ बेडरोल देकर उनकी आरामदायक, हाइजीनिक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सके. अधिकारियों का क्या कहना है? भोपाल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) देवाशीष त्रिपाठी ने कहा, “हम अपने यात्रियों को सर्वोत्तम सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाले लिनन की आपूर्ति हमारी प्राथमिकताओं में से एक है.” भोपाल मंडल पर्यावरण के प्रति जागरूक है. जल संरक्षण के लिए आधुनिक वॉटर रीसाइकलिंग सिस्टम (ETP) का उपयोग किया जाता है और बायोडिग्रेडेबल डिटर्जेंट्स का प्रयोग किया जाता है जो पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं हैं. लिनन धुलाई की प्रक्रिया ऐसी है :     छंटाई और निरीक्षण: उपयोग किए गए लिनन को लॉन्ड्री में पहुंचने पर छांटा जाता है और किसी भी क्षतिग्रस्त या फटे हुए लिनन को अलग किया जाता है.     प्री-ट्रीटमेंट: दाग-धब्बों को हटाने के लिए लिनन पर प्री-ट्रीटमेंट किया जाता है. यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि धुलाई के बाद लिनन पूरी तरह से साफ हो.     स्वचालित धुलाई: लिनन को बड़े औद्योगिक वॉशिंग मशीनों में डाला जाता है, जहां उच्च गुणवत्ता वाले डिटर्जेंट और सैनेटाइज़र का उपयोग किया जाता है. पानी के तापमान और धुलाई के समय का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि बैक्टीरिया और विषाणुओं का नाश हो सके.     सुखाने की प्रक्रिया: धुले हुए लिनन को टंबल ड्रायर में सुखाया जाता है, जिससे अतिरिक्त सैनेटाइजेशन होता है.     प्रेसिंग और फोल्डिंग: सुखाने के बाद, लिनन को प्रेस किया जाता है और सही तरीके से पैकेजिंग साइज के अनुसार मोड़ा एवं पैक किया जाता है.     गुणवत्ता नियंत्रण: हर लिनन की स्वच्छता, सफेदी की जांच की जाती है एवं व्हाइट नेस मीटर द्वारा धुले हुए लिनेन की गुणवत्ता को जांच जाता ताकि उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके. स्वच्छ और पैक किए गए लिनेन को फिर से ट्रेनों में भेजा जाता है. यहां इन्हें यात्रियों के उपयोग के लिए सेट किया जाता है, जिससे उन्हें स्वच्छ और आरामदायक अनुभव मिलता है. इन ट्रेनों में की जाती है भोपाल मंडल से आपूर्ति वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि वर्तमान में भोपाल मंडल में यात्रियों को लगभग 20 ट्रेनों में लिनन की आपूर्ति की जाती है. इन ट्रेनों में प्रमुख रूप से शान ए भोपाल एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस, रीवांचल एक्सप्रेस, उर्जाधानी एक्सप्रेस, भोपाल-प्रतापगढ़ एक्सप्रेस, रानी कमलापति-अगरतला एक्सप्रेस, सहरसा एक्सप्रेस, भोपाल-रीवा एक्सप्रेस आदि शामिल हैं. वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर आर पी खरे ने बताया, “हम स्वच्छता और हाइजीन पर विशेष ध्यान देते हैं और यात्रियों की संतुष्टि के लिए हर संभव कदम उठाते हैं.” यात्री लिनन से संबंधित किसी भी शिकायत या सुझाव के लिए रेल मदद पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं. इन शिकायतों का त्वरित निवारण सुनिश्चित किया जाता है. इन सभी प्रयासों के माध्यम से भारतीय रेल यह सुनिश्चित कर रही है कि यात्रियों को यात्रा के दौरान साफ, स्वच्छ और आरामदायक लिनन मिले, जिससे उनकी यात्रा का अनुभव और भी सुखद हो सके.

रोगियों के अधिकार और हितों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आयुक्त ने दिए निर्देश

भोपाल आयुक्त, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी ने प्रदेश के सभी निजी चिकित्सालयों (नर्सिंग होम) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अस्पताल में प्रदायित सभी चिकित्सकीय सेवाओं की दर सूची (रेट लिस्ट) प्रमुखता से प्रदर्शित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नागरिकों के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिये यह महत्वपूर्ण है। निजी चिकित्सालयों में काउंटर पर दर सूची का प्रदर्शन अनिवार्य है। रोगी या उनके परिवारजन द्वारा मांग करने पर दर सूची दिखाना अस्पताल प्रबंधन का दायित्व भी होगा। इसके अलावा, यदि किसी अस्पताल को दर सूची में संशोधन करना हो, तो इसकी लिखित सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को देना आवश्यक है। संशोधित दर सूची को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। इसका उद्देश्य रोगियों के अधिकारों की रक्षा करने और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाना है। यह निर्देश म.प्र. उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम, 1973 और नियम, 1997 (यथासंशोधित 2021) के नियम 17 के अनुसार जारी किए गए हैं। सभी निजी चिकित्सालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे इन प्रावधानों का पालन करें। आयुक्त राठी ने समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इसके अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। दर सूची के बिना अतिरिक्त शुल्क लेना नियमों का उल्लंघन है, मनमानी शुल्क वसूलने की घटनाओं को रोकने के लिए सतत निरीक्षण करने के आयुक्त ने निर्देश दिये हैं।  

Parvati-Kali Sindh-Chambal Link Project में पूर्व में बनाई गई कार्ययोजना में बदलाव

भोपाल   पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से मालवा रीजन में अगले विधानसभा चुनाव के पहले सिंचाई और पेयजल के लिए पानी दिलाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके चलते दूसरे फेज में शामिल मालवा रीजन के कामों को अब पहले फेज में पूरा कराने का फैसला लिया है। इसके लिए पूर्व में बनाई गई कार्ययोजना में बदलाव मंत्री स्तरीय बैठकों में किया है। इसके बाद अब संशोधित पार्वती-काली सिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के किसानों को फायदा मिलेगा। किसानों को न केवल सिंचाई और पेयजल के लिए पानी मिलेगा बल्कि संबंधित क्षेत्र में पर्यटन और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के संबंधित जानकारी     पार्वती काली सिंध चंबल लिंक परियोजना में एमपी की 17 परियोजनाएं एवं राजस्थान की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना शामिल हैं। इस परियोजना की कुल लागत 72 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है।     परियोजना के क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश के लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर नवीन क्षेत्र में सिंचाई एवं पेयजल मिलेगा।     उद्योगों के लिए लगभग 172 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध होगा। परियोजना से लगभग 40 लाख परिवारों को फायदा होगा। एमपी में 35 हजार करोड़ होंगे खर्च संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना में मध्यप्रदेश से पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, क्षिप्रा एवं सहायक नदियों के जल का अधिकतम उपयोग किया जायेगा। प्रदेश में इन परियोजनाओं की कुल लागत 35 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है। एमपी में यहां बनेंगे बांध     परियोजना के अंतर्गत श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्प्लेक्स में 4 बांध (कटीला, सोनपुर, पावा एवं धनवाड़ी) बनाए जाएंगे।     यहां 2 बैराज (श्यामपुर, नैनागढ) में बनेंगे।     कुम्भराज कॉम्प्लेक्स में 2 बांध (कुंभराज-1 एवं कुंभराज-2) बनेंगे। रणजीत सागर, लखुंदर बैराज एवं ऊपरी चम्बल कछार में 7 बांध (सोनचिरी, रामवासा, बचेरा, पदुनिया, सेवरखेड़ी, चितावद तथा सीकरी सुल्तानपुरा) बनाए जाएंगे।     गांधी सागर बांध की अप स्ट्रीम में चंबल, क्षिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे बांधों का निर्माण भी प्रस्तावित है। इन 13 जिलों को मिलेगा पानी इस परियोजना से राज्य के 13 जिलों मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड, श्योपुर, इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास एवं राजगढ़ को सिंचाई, पेयजल, मत्स्य पालन एवं औद्योगिक प्रयोजन के लिए पानी मिलेगा। केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाली इस परियोजना का कार्य आगामी 5 वर्ष में पूर्ण कर लिया जाएगा। 21 बांध बैराज, रिजर वायर बनाए जाएंगे परियोजना अंतर्गत कुल 21 बांध, बैराज एवं बैलेंसिंग रिजरवायर आदि का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना में मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के मध्य मौजूदा चंबल दायीं मुख्य नहर (CRMC) एवं मध्य प्रदेश क्षेत्र में CRMC सिस्टम को अंतिम छोर तक नवीकरण एवं आधुनिकीकरण का प्रावधान रखा गया है, इससे मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड जिलों को सिंचाई एवं पेयजल के लिए आवंटित जल मिलेगा। ऐसे चली परियोजना डीपीआर बनाने की प्रक्रिया     केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, मध्य प्रदेश, राजस्थान के मुख्यमंत्री और दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव एवं सचिव की मौजूदगी में 28 जनवरी 2024 को परियोजना की डीपीआर तैयार करने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।     संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश की श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्प्लेक्स की 6 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण, भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी है।     शेष परियोजनाओं की डीपीआर विभिन्न स्तरों पर प्रक्रियाधीन है।     संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना सह पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का भारत सरकार से प्राप्त ड्राफ्ट समझौता अनुबंध को मध्य प्रदेश शासन द्वारा संशोधन के बाद भारत सरकार को 25 अक्टूबर 2024 को भेजा है।  

प्रदेश में आईजीएसटी के रूप में प्री सेटलमेंट और पोस्ट सेटलमेंट के रूप में राजस्व में वृद्धि हुई

भोपाल दीपावली की रौनक थमने के बाद नवम्बर महीने में जीएसटी से राज्य सरकार को होने वाली ग्रोथ घटी है। दीपावली के कारण अक्टूबर में जहां राज्य सरकार को बाजार में खरीददारी बढ़ने से 554 करोड़ रुपए का अधिक राजस्व सितम्बर के मुकाबले मिला था। वहीं नवम्बर में यह घट गया और अक्टूबर के मुकाबले सिर्फ 166 करोड़ रुपए ही अधिक रेवेन्य राज्य शासन के खाते में जमा हो सकी है। हालांकि यह ओवरआल पांच प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा प्रदेश में इंटर स्टेट जीएसटी (आईजीएसटी) के रूप में प्री सेटलमेंट और पोस्ट सेटलमेंट के रूप में राजस्व में वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार ने एक दिसम्बर को सभी राज्यों के हिस्से में आए और केंद्र को मिले जीएसटी का राज्यवार ब्यौरा जारी किया है। इसकी पड़ताल करने पर यह बात सामने आई है कि एमपी में अक्टूबर महीने में दीपावली और नवरात्र पर्व के कारण बढ़ी खरीददारी के चलते सरकार को जीएसटी से खासा मुनाफा हुआ था जो नवम्बर में कम हो गया है। एमपी सरकार को नवम्बर 2023 में जीएसटी से होने वाली आमदनी 3646 करोड़ रुपए थी जो नवम्बर 2024 में बढ़कर 3812 करोड़ हो गई है। इस तरह एक साल में ग्रोथ 5 प्रतिशत बढ़ी है। आईजीएसटी से ऐसे जुटता है राजस्व जीएसटी की आईजीएसटी कैटेगरी में सरकार को जो राजस्व मिला है, उसके अनुसार प्री-सेटलमेंट एसजीएसटी के रूप में साल 2023-24 में एमपी को 8496 करोड़ मिले थे। जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 9043 करोड़ रुपए हो गए हैं। इसमें ग्रोथ 6 प्रतिशत रही है। इसी तरह पोस्ट सेटलमेंट एसजीएसटी से मिलने वाला राजस्व वर्ष 2023-24 में 20673 करोड़ था। जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 23674 करोड़ हो गया है। इसमें ग्रोथ 15 प्रतिशत रही है। ऐसे लगती है आईजीएसटी इंटरस्टेट सप्लाई होने पर आईजीएसटी लगती है। आईजीएसटी बच जाती है उसे पोस्ट सेटलमेंट कहते हैं। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर पंजाब से एमपी के लिए कोई माल सप्लाई होता है तो वहां का व्यापारी 18 प्रतिशत जीएसटी वसूली करता है। इसे आईजीएसटी कैटेगरी में शामिल किया जाता है। ऐसी स्थिति में माल सप्लाई करने वाले पंजाब को जीएसटी की राशि अलग से नहीं दी जाती है। इसके बाद जब माल का कंजप्शन एमपी में हो जाता है तो एमपी की सरकार को एसजीएसटी मिलता है। इसमें केंद्र के हिस्से की राशि केंद्र सरकार को चली जाती है।

साध्वी राधा किशोरी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार रोकने की अपील करते हुए भारतीय मुसलमानों को ही धमकी दे डाली

गुना बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ मध्य प्रदेश के गुना में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। ‘हिंदू आक्रोश रैली’ में हजारों लोगों ने हाथ में बैनर-पोस्टर लेकर मार्च निकाला। इस दौरान साध्वी राधा किशोरी ने विवादित बयान भी दे डाला। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार रोकने की अपील करते हुए भारतीय मुसलमानों को ही धमकी दे डाली और कहा कि उन्हें याद रखना चाहिए कि उनके भाईजान भारत में हैं और वे भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। राधा किशोरी ने हिंदुओं से एक होने की अपील करते हुए कहा कि भारत को बांग्लादेश बनने से बचाने के लिए एकजुट रहना है। उन्होंने पड़ोसी देश में हिंदुओं पर अत्याचार का जिक्र करते हुए देश के मुसलमानों से ही बदला लेने की धमकी दे डाली। साध्वी ने कहा, ‘मैं बांग्लादेश के लोगों को बताना चाहती हूं कि जो अत्याचार तुम हमारे भाई-बहनों पर कर रहे हो, यहां भारत में भी आपके कुछ भाई हैं, जिन्हें आप भाईजान कहते हो। वो भारत में सुरक्षित नहीं रहेंगे, यदि बांग्लादेश में हिंदुओं को परेशान किया तो। वहां की सरकार भी कान खोलकर सुन ले कि हमारा हिंदू सड़कों पर आ चुका है। बहुत सह लिया, अब नहीं सहेंगे। हम हिंदू हैं, हम लेकर ही रहेंगे।’ साध्वी ने बागेश्वर बाबा की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वह हिंदुओं की एकता के लिए यात्रा कर रहे हैं। उनका सपना है कि हमारा भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। राधा किशोरी ने कहा, ‘मेरा मन यह देखकर बहुत दुखी होती है कि भारत में भगवान राम के उत्पन्न होने का प्रमाण मांगा जाता है। हिन्दुस्तान में एक तुच्छ व्यक्ति रामचरितमानस को जला देता है। अमरनाथ की यात्रा को रोक दिया जाता है। पालघर में संतों की हत्या की गई। इससे भी ज्यादा दुख की बात है कि यह सब नजारा हिंदू भाई चुपचाप देखते हैं, वीडियो बनाते रहते हैं। आवाज नहीं उठाते। हम सब मिलकर संकल्प लेते हैं कि जब किसी हिंदू भाई पर कोई संकट आए तो हमें डटकर सामना करना है। हाथ पकड़कर कहना है कि हम तुम्हारे साथ हैं।’

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मध्यप्रदेश के डॉ. शर्मा को राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार से किया सम्मानित

भोपाल राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को नई दिल्ली में छतरपुर जिले के डॉ. संजय कुमार शर्मा को दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित किया। अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें ‘दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति’ की श्रेणी में उत्कृष्टत कार्यों के लिए यह पुरस्कार प्राप्त हुआ है। समारोह में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार भी उपस्थित थे। डॉ. शर्मा विगत 34 वर्षों से बुंदेलखंड क्षेत्र में मानसिक रोगियों के पुनर्वास के लिए कार्यरत हैं। अपने निजी प्रयासों और धन से वे मानसिक रोगियों को बचाने और समाज की मुख्य धारा में जोड़ने का काम कर रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति पर जागरूकता बढ़ाने में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिये जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाई जाये

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिये जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाई जाये। उन्होंने नक्सल प्रभावी क्षेत्रों में गश्त बढ़ाते हुए मुखबिर व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 36वीं बटालियन, हॉक फोर्स सहित सभी स्पेशल फोर्स एक्टिव होकर जिम्मेदारी से कार्य करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को बालाघाट में नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर जन-प्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने आईजी श्री संजय सिंह एवं पुलिस अधीक्षक नागेंद्र कुमार द्वारा जिले में नक्सल गतिविधियों के उन्मूलन के उद्देश्य से तैयार की गई योजना के प्रेजेंटेशन का अवलोकन भी किया। बैठक में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा एवं बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री श्री लखन पटेल, सांसद श्रीमती भारती पारधी, विधायक श्री गौरव पारधी, विधायक राजकुमार कर्राहे, विधायक श्री मधु भगत, विधायक श्री विक्की पटेल, पूर्व मंत्री श्री रामकिशोर कावरे, पूर्व मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल, संभागायुक्त श्री अभय वर्मा, कलेक्टर श्री मृणाल मीना सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन हमारी संस्कृति रही है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन हमारी संस्कृति रही है। कई जन्मों के पुण्य के बाद देवता हमारे यज्ञ की आहुति स्वीकारते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बालाघाट के सरदार पटेल विश्वविद्यालय में आयोजित 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा नवीन शिक्षा नीति में भारत की गौरवशाली इतिहास एवं हमारी संस्कृति तथा आदर्शो को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि नवीन शिक्षा नीति में किये गये प्रावधान अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति अब गायत्री मंत्र के मर्म एवं महिमा में पीएचडी करना चाहे तो कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गायत्री परिवार के नशामुक्ति, नारी सशक्तिकरण जैसे जनजागृति अभियानों से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का आहवान किया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पाण्ड्या ने आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य मंत्री श्री लखन पटेल, सांसद श्रीमती भारती पारधी, विधायक श्री गौरव पारधी, विधायक राजकुमार कर्राहे, पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे, पूर्व मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल, पूर्व सांसद श्री ढालसिंह बिसेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गायत्री परिवार के पदाधिकारी की उपस्थिति रहीं।  

ASI ने पत्नी और साली को उतरा मौत के घाट, डबल मर्डर से भोपाल में सनसनी, हैरान कर देगी वजह

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल मंगलवार को डबल मर्डर से दहल गया। राजधानी भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) ने अपनी अलग रह रही पत्नी और साली की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ASI ने पत्नी और साली को उतरा मौत के घाट एएसआई की पहचान योगेश मरावी के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह मंडला में पदस्थ हैं। उनकी पत्नी विनीत भोपाल में नौकरी करती थीं और अपनी बहन के साथ ऐशबाग इलाके में फ्लैट लेकर रहती थीं। बताया जा रहा है कि योगेश का पिछले कुछ समय से अपनी पत्नी के साथ विवाद चल रहा था। जांच में जुटी पुलिस हत्या की जानकारी पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) प्रियंका शुक्ला ने बताया, “एएसआई की पहचान योगेश मरावी के रूप में हुई है। उसकी पत्नी विनीता अपनी बहन के साथ ऐशबाग इलाके में एक फ्लैट में रहती थी, जहां सुबह मरावी आया और दोनों की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। मृतकों की उम्र 30 से 35 वर्ष के बीच थी।” पुलिस उपायुक्त प्रियंका शुक्ला ने कहा कि मृतक के घरेलू सहायक ने उनके रिश्तेदारों को इसकी सूचना दी, जिन्होंने बाद में पुलिस को सूचित किया। आरोपी अपनी पत्नी के फ्लैट पर सुबह करीब 11 बजे पहुंचा था। डीसीपी ने आगे कहा कि आते ही आरोपी ने घरेलू सहायक को बाहर धकेल दिया और अपराध करने से पहले अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। 10 साल पहले हुई थी शादी उल्लेखनीय है कि मरावी वर्तमान में मंडला में ड्यूटी पर तैनात थे और उन्होंने करीब 10 साल पहले विनीता से शादी की थी। डीसीपी ने बताया कि वे विवाद के चलते लंबे समय से अलग रह रहे थे। उन्होंने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। आरोपी घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गया था।

निजी चिकित्सालयों में दर सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य

भोपाल आयुक्त, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी ने प्रदेश के सभी निजी चिकित्सालयों (नर्सिंग होम) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अस्पताल में प्रदायित सभी चिकित्सकीय सेवाओं की दर सूची (रेट लिस्ट) प्रमुखता से प्रदर्शित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नागरिकों के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिये यह महत्वपूर्ण है। निजी चिकित्सालयों में काउंटर पर दर सूची का प्रदर्शन अनिवार्य है। रोगी या उनके परिवारजन द्वारा मांग करने पर दर सूची दिखाना अस्पताल प्रबंधन का दायित्व भी होगा। इसके अलावा, यदि किसी अस्पताल को दर सूची में संशोधन करना हो, तो इसकी लिखित सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को देना आवश्यक है। संशोधित दर सूची को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। इसका उद्देश्य रोगियों के अधिकारों की रक्षा करने और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाना है। यह निर्देश म.प्र. उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम, 1973 और नियम, 1997 (यथासंशोधित 2021) के नियम 17 के अनुसार जारी किए गए हैं। सभी निजी चिकित्सालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे इन प्रावधानों का पालन करें। आयुक्त श्री राठी ने समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इसके अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। दर सूची के बिना अतिरिक्त शुल्क लेना नियमों का उल्लंघन है, मनमानी शुल्क वसूलने की घटनाओं को रोकने के लिए सतत निरीक्षण करने के आयुक्त ने निर्देश दिये हैं।  

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