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आईएफएस के एपीएआर संशोधन संबंधित शासन के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में दी चुनौती

The government's order regarding IFS's APAR revision was challenged in the Supreme Court

The government’s order regarding IFS’s APAR revision was challenged in the Supreme Court गणेश पाण्डेय  भोपाल। मध्य प्रदेश में अखिल भारतीय दो सेवाओं के बीच टकराहट की स्थिति निर्मित हो गई है। प्रदेश की नौकरशाही जंगल में भी अपनी हुकूमत चलाने की मंशा से 22 साल से चली आ रही एपीएआर लिखने की प्रक्रिया में संशोधन आदेश करते हुए डीएफओ और वन संरक्षक के मूल्यांकन का अधिकार कलेक्टर कमिश्नर को दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश दिनांक 29 जून 2024 और विशेष रूप से पैरा 2 और पैरा 3 को रद्द करें। मध्य प्रदेश सरकार को टी.एन. गोदाबर्मन के फैसले में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए एक नया आदेश जारी करने का निर्देश दें। याचिका में उल्लेखित है कि 29 जून 2024 के अपने आदेश आईएफएस के अधिकार को भी कमजोर करता है। विवादित आदेश में एपीएआर प्रक्रिया में अन्य सेवाओं [अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस)/प्रधान सचिव (पीएस)] के अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो इस आवश्यकता के विपरीत है कि रिपोर्टिंग अधिकारी वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हों। मसलन, डीएफओ, वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक जैसे पदों के लिए रिपोर्टिंग प्राधिकारी, मूल्यांकन और स्वीकार कर्ता आईएफएस ही होना चाहिए। याचिका कर्ता एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने अपने याचिका में कहा है कि  29 जून 24 के अपने आदेश के तहत मध्य प्रदेश राज्य ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए पीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। 29 जून 2024 के आक्षेपित आदेश का प्रासंगिक भाग, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सीधा उल्लंघन है। मूल्यांकन प्रक्रिया में गैर-वन विभाग के अधिकारियों को शामिल करने से न केवल भारतीय वन सेवाओं का प्राथमिक अधिदेश अर्थात वनों और वन्यजीवों का वैज्ञानिक प्रबंधन, सुरक्षा और संरक्षण कमजोर होगा, बल्कि संरक्षण पर भी प्रभाव पड़ेगा।  याचिका कर्ता बंसल ने यात्रा में कहा है कि राजस्व जैसे विभागों के अधिकारियों को वन अधिकारियों का मूल्यांकन करने की अनुमति देकर वन, वन्य प्राणी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को एक महत्वपूर्ण झटका देता है। हरियाणा राज्य बनाम पी.सी. वाधवा (1987 (3) एससीसी 404) ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए रिपोर्टिंग प्राधिकारी उसी सेवा के भीतर तत्काल वरिष्ठ होना चाहिए। विवादित आदेश, इस स्थापित मिसाल से हटकर, कानूनी असंगतता पैदा करता है और भविष्य के प्रशासनिक आदेशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। वन और पर्यावरण संरक्षण बनाम विकास के चलते टकराव भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए मुख्य चुनौती पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को संतुलित करना है। जबकि  आईएएस अधिकारियों का समग्र काम राजस्व और प्रशासनिक मामलों पर केंद्रित है। आईपीएस अधिकारियों का काम कानून और व्यवस्था पर केंद्रित है, वहीं आईएफएस अधिकारियों का काम प्रकृति में अधिक तकनीकी है। वह पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए समर्पित हैं। राज्य कानूनों को लागू करने वाले आईएएस और  आईपीएस अधिकारियों के विपरीत, आईएफएस अधिकारी मुख्य रूप से वनों और वन्यजीवों से संबंधित केंद्रीय कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।  कई बार आईएफएस अधिकारियों को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वन अधिनियम एवं वन संरक्षण कानून को लागू करवाने के प्रयास में आईएफएस अफसरों और  राजस्व अधिकारी टकराते हैं।

मध्यप्रदेश सरकार अब समुदाय के सहयोग से बनाएगी योजनाएं,मांगे सुझाव

Madhya Pradesh government will now make plans with the help of the community

Madhya Pradesh government will now make plans with the help of the community, asked for suggestions प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि लोकतंत्र तभी सही मायने में जीवंत है जब नागरिक भी शासन का हिस्सा बने। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए मप्र के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने अपने खास आंतरिक अमले के माध्यम से जमीनी स्तर से विकास की योजना बनाने हेतु प्रबुद्धजनों से सुझाव मांगे हैं। सरकार की मंशा है कि नागरिकों के सुझाव एवं विचारों को शामिल कर विकास का रौडमैंप तैयार किया जाए। वर्तमान समय में सरकार में समुदाय की भागिदारी स्वतंत्र रूप से न के बराबर है। राजनीतिक रूप से तो जनता का प्रतिनिधित्व हो रहा है लेकिन सामुदायिक रूप से सुशासन की दिशा में प्रगति हेतु जन सहभागिता का शासन के बीच भागीदारी का अभाव दिखता है। विकास के इन बिन्दुओं पर नागरिक सहभागिता जरूरी अधोसंरचना विकास शासन द्वारा अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में काफी प्रयास हो रहे हैं किंतु विकास कार्यो के टिकाऊपन एवं सतत विकास को लेकर सवाल उठते रहे है। अधोसंरचना के निर्माण से लेकर रख रखाव तक जन भागीदारी का अभाव है जो कहीं ना कहीं से सरकार के कार्यों एवं छवी पर प्रभाव डालते है। नगर-एवं ग्राम पंचायतों में अधोसंरचना के अंतर्गत आर्थिक विकास को लेकर पुट कम है। सरकार का मानना है कि स्थानीय विकास कार्य में जनता भी अपने सुझाव दे ताकि निर्माण कार्य मजबूत एवं पारदर्शी हो सके। शिक्षा एवं कौशल क्षेत्र ग्रामीण अंचलों में बड़ी संख्या में स्कूल भवनों का निर्माण हो रहा है। इसके बाद भी सरकारी स्कूलों में प्रवेश की स्थित कम है। इसके क्या कारण हो सकते है इसे समझने एवं जानने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का उपयोग कैसे किया जा सकता है इस पर भी सुझाव लेकर स्थानीय स्तर पर स्थानीय शालाओं को स्थानीय व्यापार व्यवस्था से जोड़कर विद्यार्थियों को कैसे स्वावलंबी बनाया जा सकता है इस दिशा में सरकार आगे बढ़ना चाहती है। स्वच्छता एवं स्वास्थ्य ग्रामीण अंजलों में स्वेच्छा से ग्राम की सफाई व्यवस्था लोग भूलते जा रहे हैं। वर्षाजनित बीमारी ,स्वास्थ्य केन्द्रों की दशा सुधारने को लेकर सामुदायिक भागिदारी क्या हो सकती है। यह विषय गंभीर हैं। ग्राम के कमजोर व्यक्तियों का चिंहांकन,मानसिक रोगी की पहचान एवं कंसल्टेंसी ,खुले में शौच पर नियंत्रण,दैनिक जीवन में स्वच्छता का महत्व,पर्यावरण की सुरक्षा,आपात स्थिति में पीने के पानी व्यवस्था,स्वच्छ पेयजल की निगरानी ,संक्रमण काल में दवा वितरण से लेकर टीकाकरण में समुदाय की भागीदारी पर सरकार ठोस कदम बढ़ाना चाहती है। व्यवसाय एवं रोजगार मप्र की पंचायतों की आर्थिक दशा पर मप्र के पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री तंज कस चुके हैं। ऐसी स्थिति में सरकार चाहती है कि नागरिकों के माध्यम से ऐसे स्थानीय रोजगार के साधनों को चिन्हित किया जाना चाहिए जिसमें स्थानीस कृषि उत्पादों की पहचान,परंपरागत खेती से हटकर खेती का विकास, मृदा परीक्षण,जैविक उत्पादों का प्रमाणन,डेयरी उद्योगों का विकास ,पैकेजिंग, देसी आटा चक्की का विकास, मसाला ,प्रसंस्करण,हथकरघा, हस्तशिल्प,बेकरी,लकड़ी के उत्पादों एवं मशरूम, कोषा एवं अन्य खादय पदार्थो के विषय में भी नागरिक आगे आएं एवं सरकार को बतायें की ये विकसित मप्र के निर्माण में कैसे सहायक बन सकते हैं। शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन सरकार योजनाएं तो खूब बनाती हैं लेकिन सही लोगों को इसका लाभ मिल पाता है या नहीं यह शक के दायरे में रहता है। सरकार चाहती है कि नागरिक बतायें कि सरकार ऐसा कौन सा तंत्र विकसित करे जिससे की सभी योजनाएं शत प्रतिशत जमीन तक पहुंच जाएं। योजनाओं के क्रियान्वयन में स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग एवं तकनीक के इस्तेमाल से कैसे पंचायतों में पारदर्शिता लाई जा सकती है यह स्थानीय नागरिक के माध्यम से सरकार जानने की कोशिश कर रही है। पंचायती राज ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र में अभी तक कई प्रथाएं एवं सामाजिक कुरीतियां,तानाबाना व्याप्त है। इन सब कारणों के चलते पंचायतों में प्रभावी विकास कार्य नहीं हो पाते हैं। पंचायत राज व्यवस्था में भी विकास का कोरम कागजों पर हो जाना दर्शाता है कि विकास कार्य हेतु समुदाय की भागीदारी नगण्य रही होगी। सरकार चाहती है कि ऐसा क्या किया जाए जिससे की स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से योजनाएं बनाई जाए।

मोहन सरकार का आदेश: अब राशन दुकानों पर अब गेहूं के साथ ज्वार, बाजरा और रागी भी मिलेगी

Now along with wheat, jowar, millet and ragi will also be available at ration shops.

Mohan government’s order: Now along with wheat, jowar, millet and ragi will also be available at ration shops. भोपाल। मध्य प्रदेश में गरीबी रेखा के अंतर्गत आने वाले हितग्राहियों को राशन वितरण में अब श्रीअन्न के तहत राज्य में उत्पन्न होने वाले ज्वार, बाजरा और रागी भी दी जाएगी। इसके लिए स्थानीय किसानों से अनाज लेने और प्रक्रिया में स्व-सहायता समूहों को जोड़ने पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत जिन्हें पर्ची जारी की गई है, वह योजना के लिए पात्र हैं या नहीं इसका भी सर्वे कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, मुख्य सचिव वीरा राणा, अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा सहित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में खाद्य सुरक्षा अधिनियम, फोर्टिफाईड चावल, शक्कर एवं नमक वितरण अनुसूचित जाति जनजाति विद्यार्थियों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने, वन-नेशन-वन राशन कार्ड, प्रधानमंत्री राशन आपके ग्राम योजना, मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, महिलाओं को 450 रुपये में गैस रिफिल उपलब्ध कराना, प्रधानमंत्री जनमन मिशन, गेहूं उपार्जन की स्थिति और लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिए जारी गतिविधियों पर प्रस्तुतिकरण के साथ चर्चा भी हुई। राज्य स्तर पर गठित होगा गैस कारपोरेशनमुख्यमंत्री ने कहा कि नापतौल विभाग के अमले की यूनिफार्म तय की जाए। अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि में इस संबंध में जारी व्यवस्था के आधार पर प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने पाइप लाइन द्वारा रसोई गैस उपलब्ध कराने संबंधी गतिविधि के लिए राज्य स्तर पर गैस कारपोरेशन गठित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में भी गैस उपयोग की संभावना है, अत: इसकी आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। अन्य राज्यों में इस संबंध में लागू व्यवस्था का भी अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नीति बनाई जाए। साथ ही भू-जल भंडारण के संरक्षण और बिजली की बचत के दृष्टिगत बिना मौसम की धान व मूंग के उत्पादन को हतोत्साहित किया जाए। इसके लिए किसानों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से किसान सम्मेलन और कृषि विशेषज्ञों के साथ परिचर्चाएं भी की जाएं।

Weather Update: बारिश का अलर्ट, प्रदेश में कई नदियां उफान पर, सीएम की बाढ़ पर नजर

Meteorological Department: Rain alert

Meteorological Department: Rain alert, many rivers in the state in spate, CM keeping an eye on floods MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मौसम विभाग ने 4 जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है. इसी क्रम में 17 जिलों में मध्यम और एक दर्जन से ज्यादा अन्य जिलों में हल्की बारिश के आसार जताए जा रहे हैं. मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों मध्य प्रदेश में बारिश का क्रम जारी रहेगा. प्रदेश में लगातार हो रही बारिश की वजह से नर्मदा, काली सिंध, शिवाना, शिप्रा सहित मध्य प्रदेश की कई नदियां उफान पर है. कहां होगी कितनी बारिश?मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, मध्य प्रदेश के शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और डिंडोरी मैं भारी बारिश के की संभावना है. इसके अलावा मध्य प्रदेश के 17 ऐसे जिले हैं जहां पर मध्यम बारिश हो सकती है. इनमें भोपाल, छतरपुर, रायसेन, सीहोर, देवास, सागर, दमोह, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, जबलपुर, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, नर्मदापुरम जिले शामिल है, जहां मध्यम बारिश के आसार हैं. इन जिलों में होगी हल्की बारिशइसी तरह मालवांचल के अधिकांश जिलों में हल्की बारिश के संकेत हैं. इनमें उज्जैन, नीमच, रतलाम, मंदसौर, आगर मालवा, शाजापुर, इंदौर जिले शामिल है. इनके अतिरिक्त श्योपुर कला, मुरैना, शिवपुरी, विदिशा, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खंडवा, महेश्वर, बुरहानपुर, हरदा, रीवा, सतना, टीकमगढ़, मैहर, मऊगंज जिलों में भी हल्की बारिश के संकेत मौसम विभाग ने दिए हैं. नदियों के जलस्तर पर नजरमध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश की वजह से प्रमुख नदियों पर जिला प्रशासन के जरिये नजर रखी जा रही है. नर्मदा, शिप्रा, गंभीर, काली सिंध, शिवाना, कान्ह, चंबल सहित अन्य नदियां उफान पर हैं. जिला प्रशासन ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. इस तालमेल बैठक में डैम के गेट खोले को जाने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा नदियों के आसपास बसे गांवों और बस्तियों को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खुद कंट्रोल रूम के माध्यम से बाढ़ पर नजर रख रहे हैं.

प्रदेश में 10 अधिकारियों का ट्रांसफर : मोहम्मद सुलेमान बने कृषि उत्पादन आयुक्त,, सूची देखें

Transfer of 10 officers in the state

Transfer of 10 officers in the state: Mohammad Suleman becomes Agriculture Production Commissioner, see list उदित नारायण भोपाल। राज्य शासन ने 10 से अधिक आईएएस अफसर के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। इसी आदेश में अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से स्थानांतरित किया गया है। उनके स्थान पर प्रमुख सचिव संदीप यादव को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सौंपा गया है। प्रमुख सचिव यादव ब्यूरोक्रेट में सबसे ताकतवर आईएएस के रूप में उभरे हैं। राजनीतिक एवं प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि मोहम्मद सुलेमान को नर्सिंग घोटाले के चलते हटाया गया है। विधानसभा में नेता-प्रतिपक्ष ने नर्सिंग घोटाले का मुद्दा उठाते हुए एशिया सुलेमान को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से हटाने की मांग की थी।राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के तहत मोहम्मद सुलेमान को कृषि उत्पादन आयुक्त बनाया गया है। सुलेमान से भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग भी ले लिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के आग्रह पर सहकारिता विभाग से दीपाली रस्तोगी को भी स्थानांतरित कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि श्रीमती रस्तोगी सहकारिता मंत्री सारंग के निर्णय पर किंतु-परंतु लगाकर अवरोध उत्पन्न करती थी। नाम वर्तमान नवीन

इस सप्ताह तय होंगे मंत्रियों के जिला प्रभार, डिप्टी सीएम को मिल सकते हैं एक से ज्यादा जिले

District charges of ministers will be decided this week

District charges of ministers will be decided this week, Deputy CM may get more than one district स्वतंत्रता दिवस परेड की सलामी और प्रदेश में होने वाले कर्मचारियों के तबादलों की जिम्मेदारी जिलों का प्रभार देखने वाले मंत्री ही संभालेंगे। इसके लिए तैयारी कर ली गई है। मंत्रियों के प्रभार जिलों की सूची तैयार कर ली गई है। जल्दी ही इसका एलान किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभारी मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है। इसका एलान संभवतः इसी सप्ताह में कर दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि तय किए गए फार्मूले के मुताबिक डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा को एक से अधिक जिले की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसी तरह प्रदेश के कद्दावर मंत्रियों को भी बड़े जिलों की कमान देने की तैयारी की जा रही है। गौतलब है कि अधिकांश मंत्री इंदौर, उज्जैन, रीवा, जबलपुर, ग्वालियर, सागर जैसे जिलों का प्रभार चाहते हैं। इसी कशमकश में सूची को अंतिम रूप देने में अधिक समय लग गया है। बताया जा रहा है कि इसको फाइनल करने के लिए दिल्ली नेतृत्व से भी सहमति ली गई है। तबादलों में रहेगी भूमिकाइसी माह खुलने वाले ट्रांसफर बैन के मद्देनजर भी मंत्रियों को जिला प्रभार दिए जाने की कवायद तेज है। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारी अधिकारियों के तबादले जिला प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से ही किए जाएंगे। जिलों में होने वाले स्थानांतरण में इन जिला प्रभारी मंत्रियों की अहम भूमिका रहने वाली है। झंडा वंदन भी करेंगेइस स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर होने वाले झंडा वंदन कार्यक्रम में जिला प्रभारी मंत्री मौजूद रहेंगे। यहां इन्हीं के हाथों झंडा फहराया जाएगा। इस मौके पर होने वाली परेड की सलामी भी प्रभारी मंत्री ही लेंगे।

महंगाई ने बिगाड़ा खाने का स्वाद, हाय रे महंगाई , अभी और बढ़ेगी महंगाई

Inflation has spoiled the taste of food, oh dear inflation, inflation will increase further.

Inflation has spoiled the taste of food, oh dear inflation, inflation will increase further. भोपाल ! महंगाई की मार से पहले ही परेशान आम लोगों के ऊपर अब मौसम की मार पड़ने वाली है. देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही भारी बारिश आने वाले दिनों में टमाटर की कीमतों में तेज इजाफा करा सकती है. यह खतरा ऐसे समय उपस्थित हुआ है, जब पहले से टमाटर की कीमतें काफी बढ़ी हुई हैं. पिछले महीने यहां तक गया था भावभोपाल में टमाटर की कीमतें इस सीजन में एक बार शतक लगा चुकी हैं. भोपाल के खुदरा बाजार में टमाटर की कीमतें 100 रुपये किलो पर पहुंच गई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, करोंद मंडी पर टमाटर कल 100 रुपये किलो के भाव से बिक रहा था. वहीं न्यू मार्केट खुदरा बाजार में टमाटर की कीमतें 100 से 120 रुपये किलो तक पहुंच गई थीं. पिछले साल इतना महंगा हुआ था टमाटरटमाटर की कीमतों में हर बार साल के इन महीनों के दौरान तेजी देखी जाती है. पिछले साल तो स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब हो गई थी टमाटर के भाव खुदरा बाजार में 350 रुपये किलो तक पहुंच गए थे. उसके बाद सरकार ने सहकारी एजेंसियों की मदद से कई शहरों में रियायती दर पर टमाटर बेचना शुरू किया था.

नागद्वारी यात्रा शुरू, श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने तय किया बसों का किराया

Nagdwari Yatra begins, administration fixes bus fare for devotees

Nagdwari Yatra begins, administration fixes bus fare for devoteesMela In Pachmarhi: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी में आज से नागद्वारी यात्रा की शुरुआत हो गई है. पचमढ़ी में नागद्वारी मंदिर साल में महज 10 दिनों के लिए खुलता है. 10 दिन चलने वाले इस मेले में मध्य प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों से श्रद्धालु नागराज के दर्शन के लिए आते हैं. सात दुर्गम पहाड़ी व 15 किलोमीटर की यात्रा कर श्रद्धालु नागराज के दर्शन करते हैं. इस बार भी इन 10 दिनों में 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है. बता दें यात्रा नागफनी से नाथद्वारा तक होती है. यहां श्रद्धालु एकत्रित होकर यात्रा शुरू करते हैं. करीब 15 किलोमीटर पैदल चलकर श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचते हैं. इस दौरान पगडंडियों और सीढिय़ों की मदद से श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचते हैं. 10 दिवसीय यात्रा को लेकर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं. मेला प्रभारी व एसडीएम संतोष तिवारी के अनुसार मेला अवधि तक एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, आरआई, पटवारी सहित प्रशासनिक अमला यहां मौजूद रहेगा. साथ ही 700 पुलिस जवान व 130 होमगार्ड, 50 आपदा मित्र, 12 एनडीआरएफ के जवान तैनात रहेंगे. प्रशासन ने फिक्स किया बसों का किराया मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी नर्मदापुरम ने तक विभिन्न शहरों से आने जाने के लिए किराया सूची जारी की है. नागपुर से पचमढ़ी तक का किराया 338 रुपये निर्धारित किया है. छिंदवाड़ा से पचमढ़ी का 236 रुपये, भोपाल से पचमढ़ी का किराया 250 रुपये, सिवनी मालवा से पचमढ़ी का किराया 212 रुपये, इटारसी से पचमढ़ी का किराया 178 रुपये, नर्मदापुरम से पचमढ़ी का किराया 157 रुपये, बाबई से पचमढ़ी का किराया 128 रुपये, सेमरी से पचमढ़ी का किराया 106 रुपये, बनखेड़ी से पचमढ़ी का किराया 97 रुपये, सोहागपुर से पचमढ़ी का किराया 93 रुपये, पिपरिया से पचमढ़ी का किराया 68 रुपये, मटकुली से पचमढ़ी का किराया 36 रुपये, औबेदुल्लागंज से पचमढ़ी का किराया 206 एवं गाडरवारा से पचमढ़ी का किराया 136 रुपये निर्धारित किया गया है.

MP Weather: प्रदेश में एक बार फिर सक्रिय हुआ मानसून, जिलों में बारिश का अलर्ट

MP Weather: Monsoon becomes active once again in the state, rain alert in districts

MP Weather: Monsoon becomes active once again in the state, rain alert in districts MP Weather Update: मध्य प्रदेश में एक बार फिर मानसून तेज गति से सक्रिय होने वाला है. मौसम विभाग ने कई जिलों को लेकर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. जबकि मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में मध्य और हल्की बारिश भी हो सकती है. मौसम विशेषज्ञ डॉ राजेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में मानसून सक्रिय हो रहा है. अभी कुछ दिनों से यहां हल्की बारिश हो रही थी, लेकिन एक बार फिर तेज बारिश की आशंका बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, छिंदवाड़ा, बैतूल, नर्मदा पुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, सांची में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है. इन जिलों में पहले भी लगातार बारिश हो रही है. मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक एमपी के कई जिलों में मध्यम बारिश हो सकती है. इनमें भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, निवाड़ी, दमोह, सागर, उज्जैन, देवास, खंडवा, शहडोल, कटनी, अनूपपुर, उमरिया, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी, पांढुरना, खंडवा, गुना जिले शामिल है. 11 जिलों में हल्की बारिश के आसारमौसम विभाग में मध्य प्रदेश के 11 जिलों में हल्की बारिश के संकेत दिए हैं. इन जिलों में अशोकनगर, जबलपुर, मंडला, डिंडोरी, आगर मालवा, झाबुआ, मंदसौर, खरगोन, बुरहानपुर, इंदौर और शिवपुरी शामिल है. नर्मदा नदी खतरे के निशान के करीबमंडला जिले में झमाझम बारिश का दौर जारी है. भारी बारिश की वजह से मंडला में नर्मदा नदी का जल स्तर 437.30 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 437.80 मीटर है. भारी बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. वहीं भोपाल में गुरुवार को बारिश की वजह से स्कूली बच्चों की बस नाले में फंस गई, जिसे जेसीबी की मदद से बाहर निकाला गया. सीहोर जिले के अहमदपुर के गांव मगर्दी में एक व्यक्ति नाले में बह गया है. तेज बारिश की वजह से नाला उफान पर था.

स्पेशल डीजी संजय झा सेवानिवृत, आलोक रंजन को मिली बड़ी जिम्मेदारी

Special DG Sanjay Jha retired, Alok Ranjan got big responsibility

Special DG Sanjay Jha retired, Alok Ranjan got big responsibility भोपाल। स्पेशल डीजी ट्रेनिंग संजय झा बुधवार 31 जुलाई को सेवानिवृत हो गए। उनकी जगह 1991 बैच के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) प्रबंध आलोक रंजन को स्पेशल डीजी बनाया जाएगा। इसके बाद सितंबर में स्पेशल डीजी एवं डायरेक्टर अभियोजन सुषमा सिंह सेवानिवृत होंगी। उनके स्थान पर एडीजी महिला सुरक्षा प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव स्पेशल डीजी बनेंगी। बता दें कि संजय झा परिवहन आयुक्त थे, जिन्हें गुना बस हादसे के बाद पुलिस मुख्यालय में पदस्थ किया गया था। इसी वर्ष 30 नवंबर को डीजीपी सुधीर सक्सेना के सेवानिवृत होने पर एक स्पेशल डीजी को डीजीपी बनने का अवसर मिलेगा। ऐसे में स्पेशल डीजी एक पद रिक्त होने पर एडीजी तकनीकी सेवाएं योगेश मुद्गल डीजीपी बनेंगे। बता दें कि प्रदेश में डीजी के काडर पद पांच हैं, पर प्रदेश में काडर और नान काडर मिलाकर इसके 12 पद बनाए गए हैं। काडर पद में डीजीपी के अतिरिक्त, चेयरमैन पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन, डीजी होमगार्ड, डीजी जेल और स्पेशल डीजी प्रशिक्षण के पद शामिल हैं। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में भी डीजी का पद हैं पर यह काडर पद नहीं है। अधिकारी का नाम — पदनाम– सेवानिवृत्तिसुषमा सिंह- स्पेशल डीजी- 30 सितंबर राजेश कुमार गुप्ता – एडीजी- 30 सितंबर अनिल कुमार गुप्ता – एडीजी- 31 अक्टूबर आरके हिंगणकर – डीआइजी -31 अक्टूबर सुधीर कुमार सक्सेना – डीजीपी – 30 नवंबर महेंद्र सिंह सिकरवार – आइजी – 31 दिसंबर

कलियासोत नदी को बारहमासी बनाकर साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित करने, केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से विधायक रामेश्वर शर्मा ने मुलाकात की।

MLA Rameshwar Sharma met Union Minister Manohar Lal Khattar

MLA Rameshwar Sharma met Union Minister Manohar Lal Khattar to make Kaliyasot river perennial and develop it on the lines of Sabarmati River Front. भोपाल की कलियासोत नदी को गुजरात की साबरमती की तर्ज पर विकसित किया जाए – विधायक रामेश्वर शर्मा भोपाल। भोपाल की हुजूर विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों को भी शहरों की तर्ज पर विकसित कराते हुए विकास पुरुष की पहचान बनाने वाले विधायक रामेश्वर शर्मा ने क्षेत्रीय विकास को लेकर एक नई मुहिम छेड़ दी है। अपने दिल्ली प्रवास के दौरान विधायक रामेश्वर शर्मा ने केन्द्रीय नगरीय विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर कोलार की कलियासोत नदी को बारहमासी बनाने के साथ-साथ साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित करने एवं उसके घाटों को विकसित कर पर्यटन केन्द्र बनाने की मांग को लेकर निवेदन पत्र सौंपा है। इस निवेदन पत्र में उन्होंने भोपाल की जीवन रेखा कहीं जाने वाली कलियासोत नदी के सालभर सूखे रहने की चिंता तथा उससे होने वाली नागरिक असुविधा को व्यक्त किया, साथ ही उसे बारहमासी बनाने के उपाय एवं उससे होने वाले लाभ को भी विधायक शर्मा ने मांग पत्र में उल्लेखित किया। ज्ञात हो कि कलियासोत नदी कोलार से होते हुए बेतवा नदी में मिलती है। जो कि वर्तमान में कलियासोत डेम पर पूर्णरूपेण निर्भर करती है। डेम के गेट खुलने के बाद ही इस नदी में पानी आता है बाकि वर्ष भर यह सूखी रहती है। निम्न मांगों को लेकर सौंपा पत्र केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात को लेकर विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि – कलियासोत नदी भोपाल की जीवन रेखा है। उसे बचाने का दायित्व हम सबका है। और केवल बचाना नहीं है, उसका संवर्धन भी करना है। इसको लेकर कल माननीय केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी से भेंट कर उनको कलियासोत नदी की यथास्थिति से अवगत कराया। साथ ही उनकी विकास योजना को लेकर भी सुझाव प्रस्तुत किए। उन्हें गुजरात की साबरमति रिवर फ्रंट की कार्य योजना की भी जानकारी दी। जिसके मूल स्वरूप एवं पर्यावरण के अनुरूप CEPT अहमदाबाद (Center for Environmental Planning and Technology) द्वारा विकसित किया गया था।कलियासोत के सौंदर्गीकरण हेतु भी इसी तरह के अनुभवी संस्थान के द्वारा कार्य योजना बनवाई जा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि – माननीय केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री कलियासोत नदी के संरक्षण की दिशा में साबरमती नदी की तर्ज पर विकसित करने हेतु सार्थक निर्देश सम्बन्धितों को दिए । जिसके लिए उन्होंने केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया ।

पीडब्ल्यूडी मंत्री का फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगी का प्रयास

PWD Minister's attempt to cheat by creating fake Facebook ID

PWD Minister’s attempt to cheat by creating fake Facebook ID मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर पैसों की मांग का मामला सामने आया है। मंत्री स्टाफ ने साइबर पुलिस की जबलपुर यूनिट में शिकायत कर दी है। हालांकि कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन साइबर पुलिस ने इस संबंध में फेसबुक से जल्द जानकारी उपलब्ध कराने का पत्र भेज दिया है। जानकारी के अनुसार बुधवार को मंत्री राकेश सिंह को जबलपुर प्रवास के दौरान एक व्यक्ति ने जानकारी दी कि आपके नाम से फेसबुक मैसेंजर से मैसेज आया है कि कुछ पैसों की जरूरत है। इसके बाद मंत्री ने स्टाफ को जानकारी जुटाने को कहा। मंत्री स्टाफ ने फेसबुक खंगाला तो मंत्री राकेश सिंह के नाम से एक फर्जी अकाउंट एक्टिव था, जिसकी डीपी में मंत्री राकेश सिंह की फोटो लगी हुई थी। इसके बाद मंत्री ने साइबर सेल में शिकात करा दी। मंत्री की अपील जालसाजों से सावधान रहेंमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में जालसाज द्वारा लोगों को मैसेज भेजकर पैसे मांगने संबंधी चैट की स्क्री शॉट पोस्ट करने के साथ अपील की है कि जालसाजों से लोग सावधान रहें। मंत्री सिंह ने कहा कि कोई भी इस ठग की बात पर ना आए। क्या है चैट मेंअज्ञात जालसाज ने मंत्री राकेश सिंह की फर्जी फेसबुक आईडी से उनके एक परिचित को भेजे मैसेज में लिखा – हेलो, कैसे हो, इसके बाद सामने वाले ने जवाब दिया कि अच्छा है भैया, आपका आशीर्वाद है। इसके बाद जालसाज ने कहा – कहां पर हो, इस पर सामने वाला जवाब देता है कि एंजेसी में भैया, महेन्द्रा ट्रेक्टर वाली। इसके बाद जालसाज ने कुछ पैसे ट्रांसफर कर करने संबंधी मैसेज किया। चूंकि ट्रैक्टर एजेंसी संचालक भी जबलपुर क्षेत्र का है और मंत्री राकेश सिंह के पुराने परिचित हैं। उन्हें पता है कि मंत्री राकेश सिंह कभी किसी से उधार पैसे नहीं मांगते। इससे उसे शक हुआ तो उसने मंत्री के करीबियों से संपर्क कर उन तक बात पहुंचाई।

प्रदेश में आज मूसलाधार बारिश का अनुमान, IMD ने जारी किया येलो-ऑरेंज अलर्ट

Meteorological Department: Rain alert

Torrential rain forecast in the state today, IMD issues yellow-orange alert भोपाल ! मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश में जुलाई की तरह अगस्त महीने में भी मौसम खासा मेहरबान रहेगा. प्रदेश में बारिश का सिस्टम फिर एक्टिव हो गया है. मौसम विभाग का अनुमान है कि आज गुरुवार (1 अगस्त) से प्रदेश में तीन-चार दिन बारिश होगी. मौसम विभाग ने आज प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, जबकि 15 जिलों में तेज बारिश की संभावना जताई है. मौसम विभाग के अनुसार मानसून टर्फ गंगानगर, हिसार, दिल्ली होते हुए गुजर रही है. पश्चिम बंगाल की ओर और अरब सागर में ऊपरी हवा का चक्रवात सक्रिय होने से दोनों तरफ से नमी आ रही है. इसके चलते प्रदेश में अगले तीन-चार दिन भारी बारिश होगी. मौसम विभाग ने जिलों को येलो और ऑरेंज अलर्ट में बांट रखा है. मौसम विभाग के अनुसार सिंगरौली, सीधी, डिंडोरी, बालाघाट जिलों में बारी बारिश का ऑरेंज जारी किया गया है. जबकि सीहोर, बैतूल, हरदा, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां सहित कुछ जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है. इनके अलावा भी अन्य शहरों में तेज बारिश होगी. कल इन जिलों में होगी भारी बारिशमौसम विभाग ने दो अगस्त के लिए भी कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में विदिशा, मंडला, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, सिवनी, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, दतिया, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, देवास, सीहोर, हरदा, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, कटनी, छतरपुर, टीकमगढ़ और बालाघाट शामिल हैं. तीन दिनों से थी राहतबता दें बीते एक सप्ताह से प्रदेश के कई शहरों में झमाझम बारिश का दौर जारी था, लेकिन सिस्टम के नरम पड़ जाने की वजह से बीते तीन दिनों से प्रदेश में राहत थी. जबकि इससे पहले कटनी सहित तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात निर्मित हो गए थे. भारी बारिश की वजह से लोगों को असुविधाओं का सामना भी करना पड़ गया था.

चैनलिंक, बारवेड वायर और पोल्स की 60 करोड़ की खरीदारी में कमीशनबाजी बंट जाते हैं 12 करोड़

12 crore commission is divided in the purchase of 60 crores of chainlink, barbed wire and poles.

12 crore commission is divided in the purchase of 60 crores of chainlink, barbed wire and poles. उदित नारायणभोपाल ! चालू वित्त वर्ष में जंगल महकमे में करीब 50 से 60 करोड़ रूपए की चैनलिंक, बारवेड वायर और टिम्बर पोल्स की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का खेल खेला जा रहा है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं। दिलचस्प पहलू यह है कमीशन में अधिक हिस्सेदारी न बढ़े, इसके लिए प्रोटेक्शन शाखा से बंटने वाली राशि भी अब कैंपा शाखा से बंटने लगी है। जबकि पूर्व में विभाग में परम्परा रही है कि फायर लाइन से लेकर मोबाइल, वायरलेस, वाहन आदि से समन्धित बजट प्रोटेक्शन शाखा से बंटता रहा है।मुख्यालय से सबसे अधिक फंड कैंपा शाखा से रिलीज किया जाता है। इसके बाद सामाजिक वानिकी और विकास शाखा से भी करोड़ों की धनराशि वन मंडलों को दिया जाता है। तीनों शाखाओं को मिलाकर हर वन मंडल को 5 से 7 करोड़ रूपए की राशि हर साल खरीदी के लिए रिलीज किया जा रहा है। चैनलिंक जाली, बारवेड वायर, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी और गोबर एवं रासायनिक खाद वगैरह की खरीदी की जाती है। इस खरीदी में 15 से 18 फीसदी तक राशि कमीशन बाजी में बंटती है। इस खेल को रोकने के लिए पूर्व वन मंत्री विजय शाह ने ग्लोबल टेंडर बुलाने की पहल की थी किंतु मैदानी अफसरों के विरोध के चलते वे अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पाए थे। इसकी मुख्य वजह यह है कि मुख्यालय से लेकर मैदानी अमले का नेक्सस से सीधा रिश्ता है। गौरतलब यह भी है कि मुख्यालय से विभिन्न शाखों द्वारा फंड रिलीज करने का कोई निर्धारित मापदंड नहीं है। चेहरा देखकर फंड वितरित किया जा रहा है। इस फार्मूले का उपयोग सबसे अधिक कैम्पा फंड में किया जा रहा है। अनूपपुर वन मंडल में तीन रेंज है जहां कैंपा फंड से फायर प्रोटक्शन के 24 लाख रुपए रिलीज किए गए। वहीं उत्तर शहडोल वन मंडल में बड़े जंगल हैं, उसके लिए कैम्पा शाखा से मात्र 14 लाख रूपये दिए गए। इसी प्रकार सिंगरौली में तीन रेंज है वहां 36 लाख और नरसिंहपुर वन मंडल के लिए मात्र ₹1200000 दिए। यह असमानता इसलिए है कि कैंपा पीसीसीएफ अपनी मनमर्जी के अनुसार डीएफओ को फंड डिलीट कर रहे हैं। जबकि संरक्षण शाखा फायर प्रोटक्शन के लिए वार्षिक एप्सन प्लान तैयार करता है। पीसीसीएफ डॉ दिलीप कुमार का कहना है कि कैंपा से फंड संरक्षण शाखा को ट्रांसफर होनी चाहिए और उसके बाद संरक्षण शाखा ही डीएफओ को अपने एक्शन प्लान के अनुसार बजट रिलीज करें।इसके कारण गड़बड़ी की आशंका बढ़ती जा रही है। सरकार के निर्देशों की अवहेलना राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि वायरवेट, चैनलिंक और पोल की खरीदी में लघु उद्योग निगम को प्राथमिकता दें किंतु 95% खरीदी जेम्स और ई टेंडर से हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लघु उद्योग निगम की दर और जेम (GEM) की दरों में डेढ़ गुना अंतर है। यानी लघु उद्योग निगम में वायरवेट कि दर 83 रुपए से लेकर 85 रुपए तक निर्धारित की गई है। जबकि जेम (GEM) में ₹150 तक है। सरकार की मंशा यह भी है कि लघु और मध्यम उद्यमियों को इस कारोबार से जोड़ा जाए। मुख्यालय से लेकर फील्ड के अफसर टेंडर की शर्तों में ऐसी शर्ते जुडवा देते हैं जिसके चलते लघु और मध्यम उद्यमी प्रतिस्पर्धा की दौड़ से बाहर हो जाते हैं। सरकार के अन्य विभाग में टेंडर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाती है किंतु वन विभाग में या परंपरा नहीं है। प्रतिस्पर्धियों का कहना है कि सभी डीएफओ को अपने वन मंडल के प्रत्येक टेंडर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करें। चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ देते हैं नई शर्तें फंड बंटवारे को लेकर दो अफसर भिड़ चुके विभाग में फंड बंटवारे को लेकर दो सीनियर अधिकारी भिड़ चुके हैं। पीसीसीएफ कैंपा महेंद्र सिंह धाकड़ की पदस्थापना के पहले तक फॉरेस्ट प्रोटक्शन को लेकर कैंपा से फंड संरक्षण शाखा को रिलीज किया जाता था और फिर संरक्षण शाखा डीएफओ की मांग के आधार पर वितरित करता था। धाकड़ ने इस परंपरा को बदल दिया। अब वह प्रोटेक्शन की राशि भी स्वयं जारी करते हैं। पूर्व में पीसीसीएफ प्रोटेक्शन रहे अजीत श्रीवास्तव ने इसका पुरजोर विरोध किया था और तीखा पत्र भी लिखा था, लेकिन बात नहीं बनी। मुद्दे को लेकर एक बैठक में तो दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई पर तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने पीसीसीएफ कैंपा धाकड़ का साथ दिया। हालांकि अजीत श्रीवास्तव जल्द ही रिटायर हो गए। मौजूदा पीसीसीएफ प्रोटेक्शन डॉ दिलीप कुमार किंकर्तव्यविमुढ़ की स्थिति में है और वह सेवानिवृत्ति के दिन गिन रहे हैं। विभाग में चर्चा है कि पीसीसीएफ कैंपा महेन्द्र धाकड़ फाइनेंस कंपनी की तरह फंड रिलीज़ करते हैं। वे तो एक उच्च स्तरीय बैठक में यहां तक कह चुके हैं कि कैम्पा शाखा स्वायत्त संस्था है। ब्लैक लिस्ट फर्म कर रही हैं अभी भी धंधा वन विभाग में अलग-अलग वन मंडलों में कई फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। इसके बाद भी ब्लैक लिस्ट फर्म अपने राजनीतिक रसूख के दम पर सामग्री की सप्लाई कर रही हैं। इसकी वजह भी साफ है कि वन विभाग में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है, जहां ब्लैक लिस्ट की गई फर्म को अन्य वन मंडलों में मैसेज कर धंधा करने से रोका जाए। वैसे पीडब्ल्यूडी जल संसाधन और अन्य विभागों में ऐसी व्यवस्था है कि ब्लैक लिस्ट फर्म की सूची बनाकर मैदानी अफसरों को भेजा जाता है और उन्हें निर्देशित किया जाता है कि इनसे कोई भी वर्क आर्डर न दिया जाए। कमीशन बाजी के खेल में प्रमुख संस्थाएं प्रखर इंटरप्राइजेज इंदौर, तिरुपति इंजीनियरिंग वर्क बालाघाट, जबलपुर वायरस जबलपुर, श्री विनायक स्टील इंदौर, राजपूत फेसिंग पोल भोपाल, अरिहंत मेटल (नाहटा), लकी इंडस्ट्रीज इंदौर, आकांक्षा इंडस्ट्रीज विदिशा, नवकार … Read more

सावधान रहें, डेंगू बन सकता है जानलेवा… बर्तनों में मिले सबसे ज्यादा लार्वा

Be careful, dengue can become fatal…Most larvae found in utensils

Be careful, dengue can become fatal…Most larvae found in utensils भोपाल। सतर्कता जरूरी है, नहीं तो डेंगू जानलेवा साबित हो सकता है। विभाग द्वारा किए एक सप्ताह के सर्वे में आठ हजार से अधिक घरों में डेंगू का लार्वा पाया गया है। मलेरिया विभाग की टीम लगातार घरों में जाकर सर्वे कर रही है। टीमों ने अभी तक दो लाख 75 हजार, 176 घरों का सर्वे किया है, जिसमें लगभग आठ हजार घरों में डेंगू का लार्वा पाया गया है। इन घरों में फूलों और पौधों के गमलों से लेकर पानी के बर्तनों, कूलरों एवं कंटेनरों में लार्वा जमा मिला है। खासबात यह कि घर के बर्तनों में सबसे ज्यादा लार्वा पाया गया है। आठ हजार 976 बर्तनों में खतरा इस दौरान अधिकारियों ने 1997940 बर्तनों का सर्वे किया गया, जिनमें आठ हजार 976 बर्तनों में खतरा पाया गया है। जांच के दौरान तीन हजार 187 कंटेनरों में खतरे की आशंका दिखाई दी है, जिनमें भारी लार्वा होने की उम्मीद है। इन कंटेनरों को खाली कराकर टोमोफास डाला गया। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में लार्वा सर्वे का काम और भी अधिक प्रभावी तरीके से चलेगा। इसके लिए टीमें भी बढ़ाई जाएंगी। बतादें कि अभी तक भोपाल में डेंगू के मरीजों की संख्या 82 हो गई है। पनप रहा एडीज मच्छर

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