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सेवाभाव के साथ जनसेवा ही सच्चे लोक सेवक की पहचान : राज्यपाल पटेल

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि लोक सेवक बनकर राष्ट्र के विकास और मानव कल्याण का अवसर बिरले लोगों को ही मिलता है। सेवाभाव के साथ जनसेवा ही सच्चे लोक सेवक की पहचान है। राज्यपाल श्री पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के नवनियुक्त जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और विकासखंड अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। राजभवन के स्वर्ण जयंती सभागार में सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव  के.सी. गुप्ता भी मौजूद थे। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रशिक्षण में मिलने वाली सीख और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्य अनुभवों का उपयोग प्रशासनिक जीवन की चुनौतियों के समाधान में करें। उन्होंने कहा कि आप जब भी मैदानी भ्रमण पर जाए, जनता से आत्मीय व्यवहार करें उनकी समस्याओं को विनम्रता से सुनें और प्राथमिकता के साथ निराकरण करें। आमजनों की बुनियादी जरूरतों जैसे- रोटी, कपड़ा, मकान के साथ पानी और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाए। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि विगत वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों से मध्यप्रदेश के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। अब दूरस्थ इलाकों तक विकास दिखाई देता है। गरीब, वंचित और जरूरतमंदों के जीवन को बेहतर बनाने के सरकार के लक्ष्य को सफल बनाने की मूल जिम्मेदारी आप अधिकारियों की है। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को दूरस्थ अंचलों के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आपके पद का परम दायित्व है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल का जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान भोपाल की संचालक श्रीमती सरिता बाला ने पौधा भेंटकर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। श्रीमती बाला ने स्वागत उद्बोधन दिया। प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री आस्था जैन और श्री रवि ने प्रशिक्षण अनुभवों को साझा किया। आभार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव दिनेश जैन ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त आयुक्त श्री अनिल कोचर ने किया। 

राजा रघुवंशी मर्डर में उजाला यादव की एंट्री… सोनम पर किए कई खुलासे

इंदौर  चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में अब भी एक के बाद एक नए खुलासे सामने आ रहे हैं. इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच में उस मोबाइल नंबर को भी शामिल किया जा सकता है जिसे बस में बैठकर हत्यारोपी सोनम रघुवंशी ने  डायल करने की कोशिश की, लेकिन डायल किए बिना ही मिटा दिया. बस में सोनम के साथ बैठी गाजीपुर की रहने वाली छात्रा उजाला यादव ने यह बातें मीडिया को बताई है.  उजाला ने दावा किया है कि उसने हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी के साथ 8 जून की रात वाराणसी से गाजीपुर तक रोडवेज बस में यात्रा की थी.लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह थी कि सोनम गाजीपुर नहीं बल्कि गोरखपुर जाना चाहती थी.  और जब ट्रेन नहीं मिली तो रोडवेज बस से जाने का विकल्प चुना। सुबह तीन बजे थी ट्रेन  उजाला यादव ने बताया कि वह खुद भी उस रात लखनऊ से ट्रेन पकड़ कर वाराणसी कैंट स्टेशन पहुंची थीं, जहां उन्होंने पहली बार सोनम रघुवंशी को दो  युवकों के साथ देखा था.स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़ी सोनम से उसकी बातचीत शुरू हुई, जब सोनम ने ट्रेन और बस की जानकारी मांगी.उजाला का कहना है कि मैंने उसे बताया कि गोरखपुर की ट्रेन सुबह 3 बजे आएगी, लेकिन अगर वह चाहे तो रोडवेज बस से जा सकती है, जो कैंट स्टेशन के बाहर से मिल जाएगी. इसके बाद सोनम को ट्रेन का इंतजार करना उचित नहीं लगा और उसने बस से गोरखपुर के लिए जाने का फैसला किया। बार-बार पूछ रही थी गोरखपुर कितनी दूर है उजाला के अनुसार, जब दोनों वाराणसी रोडवेज बस स्टैंड के प्लेटफॉर्म नंबर 7 से बस में चढ़ीं, तो सोनम ने चेहरे को कपड़े से ढक रखा था.बस में चढ़ते ही उसने पानी मांगा और चेहरा धोया, तभी उजाला ने पहली बार उसका चेहरा ठीक से देखा. बस में सोनम पहले एक अजनबी युवक के बगल में बैठी थी और उससे मोबाइल मांग रही थी, लेकिन उसने देने से मना कर दिया और सीट बदल ली. इसके बाद उजाला उसी सीट पर आ गई और सोनम के बगल में बैठ गई. यात्रा के दौरान, सोनम की बेचैन थी.वह बार-बार गोरखपुर की दूरी, समय और पहुंच के बारे में पूछ रही थी। डायल नहीं किया नंबर  बस यात्रा के दौरान जब उजाला यादव अपने मोबाइल पर राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ी खबरें और वीडियो देख रही थीं, तो सोनम घबरा गईं. उसने कहा ये सब मत देखो.  इसके बाद उजाला ने वीडियो देखना बंद कर दिया. इसी दौरान सोनम ने उजाला से मोबाइल फोन मांगा, और उसमें एक नंबर टाइप किया, लेकिन डायल नहीं किया और तुरंत मिटा दिया.फिर मोबाइल लौटा दिया. उजाला के मुताबिक यह उसे तब भी थोड़ी अजीब लगी थी.  सोशल मीडिया पर तस्वीर देख पहचान में आई सोनम उजाला के मुताबिक अगली सुबह जब वह अपने गांव नसीरपुर पहुंची और सोशल मीडिया पर सोनम की फोटो देखी तो चौंक गईं.उन्होंने तुरंत गाजीपुर के नंदगंज थाने में सूचना दी.फिर सोशल मीडिया के माध्यम से राजा रघुवंशी के भाई सचिन रघुवंशी से संपर्क किया और अपनी आपबीती साझा की.सचिन ने उन्हें चार आरोपियों की तस्वीरें भेजीं, लेकिन उजाला ने बताया कि जिन दो युवकों को उसने वाराणसी कैंट स्टेशन पर सोनम के साथ देखा था, वे तस्वीरों में शामिल नहीं हैं.  नेपाल भागने की तैयारी में थी सोनम? चर्चा है कि सोनम का गोरखपुर के रास्ते नेपाल भागने का प्लान हो सकता था.पहले वह ट्रेन से जाने वाली थी, लेकिन समय लंबा होने के कारण रोडवेज बस को चुना.बता दें कि गोरखपुर नेपाल के बेहद करीब है और सीमाओं पर आवाजाही भी आसान है. उजाला का कहना है, मेरे पास जो भी जानकारी है, मैं पुलिस के साथ साझा करने को तैयार हूं.मैं चाहती हूं कि राजा रघुवंशी को न्याय मिले और अपराधी सजा पाए.  सवाल अब भी कई बाकी – सोनम के साथ स्टेशन पर मौजूद दोनों युवक कौन थे? – क्या वे राजा की हत्या में शामिल थे या नेपाल भागने में मदद करने वाले ? – सोनम ने किसका नंबर मोबाइल में टाइप किया था? – क्या उसका नेटवर्क नेपाल में मौजूद किसी व्यक्ति से जुड़ा था?  

इजरायल का करारा पलटवार, ईरान पर कर दिया बड़ा हमला, 400 से अधिक मरे

तेहरान  ईरान और इजराइल के बीच चौथे दिन भी लड़ाई जारी है। इजराइल ने रविवार रात ईरान के विदेश मंत्रालय पर हमला किया। इसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इससे एक दिन पहले इजराइली सेना ने ईरानी रक्षा मंत्रालय पर भी हमला किया था। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइली हमलों में अब तक 224 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 से ज्यादा घायल हुए हैं। वहीं, अमेरिका में स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ग्रुप ने ईरान में 406 लोगों के मारे जाने का दावा किया है। ईरान ने भी इजराइल पर पलटवार किया है। ईरान ने सोमवार सुबह सेंट्रल इजराइल में 4 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 67 घायल हुए। अब तक इजराइल में ईरानी हमलों में 20 लोग मारे गए हैं, जबकि 450 से ज्यादा घायल हुए हैं। ईरान पर इजरायली हमले के 72 घंटे हो चुके हैं. इस हमले में अब 406 ईरानियों की मौत हो चुकी है, जबकि 654 लोग घायल हैं. वहीं ईरानी हमले में अबतक 16 इजरायलियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं. पिछले 72 घंटों में इजरायल ने ईरान के हर मुमकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और टारगेट पर हमला किया है. हालांकि तेहरान का कहना है कि इजरायली हमले में अबतक 224 मौतें हुई हैं. इनमें ज्यादातार नागरिक हैं. इजरायल ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटे में उसने अपने देश से तेहरान के बीच ‘एयर कॉरिडोर’ बना लिया है. यानी कि इजरायली दावे के मुताबिक अब इजरायल की वायु सेना अपने देश से तेहरान तक बिना बाधा के उड़ान भर सकती है और हमले कर सकती है. इस बीच इजरायल ने ईरान पर सबसे ज्यादा दूरी से हमला किया है. इजरायल की वायु सेना ने पूर्वी ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर एक ईरानी ईंधन भरने वाले विमान पर हमला किया, जो इजराइल से लगभग 2,300 किलोमीटर दूर है. हमले के बाद ये विमान आग की लपटों में आ गया और तबाह हो गया. यह ऑपरेशन राइजिंग लॉयन की शुरुआत के बाद से किया गया सबसे लंबी दूरी का हमला है. इजरायल सैनिक अड्डों को निशाना बनाने के बाद अब मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है. इजरायल ने तेहरान में मौजूद जमीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल लॉन्चर को ही उड़ा दिया है. IDF  ने इस हमले का वीडियो जारी किया है.  आइए बताते हैं कि इजरायल ने पिछले 72 घंटों में ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया है.  परमाणु ठिकाने: जंग की शुरुआत के साथ ही इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया था. इजरायली हमले का पहला टारगेट थे नंताज परमाणु साइट. इजरायल का दावा है कि उसके हमले में नंताज में यूरेनियम संवर्धन की मशीनरी को भारी नुकसान पहुंचा है. इजरायल ने इस्फहान और फोर्डो में भी परमाणु साइट पर हमला किया है. यहां पर हुए नुकसान की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है. हालांकि  सैन्य ठिकाने: इजरायल ने न्यूक्लियर साइट के अलावा ईरान के मिलिट्री साइट पर भी हमला किया है और इसे जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है. तेहरान और अन्य शहरों में सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं. जिसमें मिसाइल उत्पादन सुविधाएं शामिल हैं. दक्षिणी ईरान में एक रिफाइनरी में भारी विस्फोट हुआ है. तबरेज और करमानशाह में दो मिसाइल बेस पूरी तरह तबाह हो गए हैं.  इजरायली हमले में राजधानी तेहरान में भारी नुकसान की खबर है. कई रिहायशी इलाकों और सरकारी इमारतों को भारी नुकसान हुआ है. मेहराबाद एयरपोर्ट प्रभावित हुआ है.  ईरान ने तेहरान एयरपोर्ट को बंद कर दिया है.  13-15 जून 2025 को इजरायली हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने की है.  टॉप मिलिट्री लीडरशिप साफ इनमें आर्मी चीफ मेजर जनरल मोहम्मद बघेरी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल हुसैन सलामी, IRGC के खातम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के प्रमुख मेजर जनरल गुलाम अली रशीद, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर जनरल अमीर अली हाजीज़ादेह, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी इंटेलिजेंस चीफ जनरल गुलामरेज़ा मेहराबी, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी कमांडर ऑफ ऑपरेशंस जनरल मेहदी रब्बानी मारे गए हैं.  वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में पुष्टि की है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खुफिया प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद काज़मी और उनके डिप्टी जनरल हसन मोहाकिक तेहरान पर इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं. इसके अलावा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली शमखानी भी मारे गए हैं. इजरायली हमले में ईरान का टॉप मिलिट्री लीडरशिप खत्म हो गया है. न्यूक्लियर साइंटिस्ट का एक जेनेरेशन ही खत्म इसके अलावा इजरायल ने ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिकों को भी मार डाला है. इनमें भौतिक विज्ञानी मोहम्मद मेहदी तेहरांची, ईरान की परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख फेरेयदौन अब्बासी-दवानी,  शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रमुख अब्दुलहामिद मिनोचेहर, शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अहमदरेज़ा जोलफगारी, अमीरहोसैन फकी, परमाणु वैज्ञानिक अली बकाई करीमी, परमाणु वैज्ञानिक मंसूर असगरी, परमाणु वैज्ञानिक सईद बोरजी शामिल है.  इतने बड़े पैमाने पर परमाणु वैज्ञानिकों को मारकर इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है.  इजरायल को नुकसान इजरायली हमले के जवाब में ईरान ने  100-200 बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे. जिनमें से कुछ ने आयरन डोम रक्षा प्रणाली को भेद दिया. इससे तेल अवीव में कई इमारतें और वाहन नष्ट हो गए. ईरानी हमले में तेल अवीव में तबाही की भयानक तस्वीरें सामने आई है. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में अबतक इजरायल में 16 लोगों की मौत हुई है. ईरान ने मुख्य रूप से तेल अवीव, रमात गान, बैट यम और रेहोवोट में हमला किया है.  तेहरान टाइम्स के अनुसार सोमवार की सुबह-सुबह ईरान ने इजरायल के कब्जे वाले इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलों की दूसरी खेप दागी, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद से दसवीं बमबारी थी.  तेहरान टाइम्स का दावा है इससे पहले आधी रात को ईरान ने नेगेव रेगिस्तान और किरयात गत के साथ-साथ हाइफ़ा के अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाया, जिससे सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा.  हाइफा में ईरानी मिसाइल गिरने … Read more

देश में 24 घंटे में कोविड-19 से 11 मौतें, सक्रिय मामले घटकर 7,264 रह गई

नई दिल्ली/मुंबई/बेंगलुरु/तिरुवनंतपुरम भारत में कोविड-19 संक्रमण को लेकर फिलहाल राहत की खबर है। देश में लगातार दूसरे दिन कोरोना के सक्रिय मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 16 जून को सुबह 8 बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 7,264 रह गई है। बीते 24 घंटों में 119 एक्टिव केस कम हुए हैं, जो संक्रमण की स्थिति में सुधार का संकेत है। केरल में सबसे ज्यादा संक्रमण मामले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, केरल, जो संक्रमण के मामलों में सबसे आगे रहा है, वहां एक्टिव केस घटकर 1,920 रह गए हैं। अकेले केरल में 87 सक्रिय मामले कम हुए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में 38, दिल्ली में 33, तमिलनाडु में 23, गुजरात और हरियाणा में 8-8, पंजाब में 7, आंध्र प्रदेश में 6, असम में 4, उत्तराखंड में 3, जम्मू-कश्मीर में 2, और पुडुचेरी में 1 एक्टिव केस में गिरावट आई है। इन राज्यों में संकमण के नए केस हालांकि कुछ राज्यों में संक्रमण के नए मामले भी सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश में 37, राजस्थान में 30, कर्नाटक में 18, मणिपुर में 5, झारखंड और मध्य प्रदेश में 4-4, छत्तीसगढ़ और सिक्किम में एक-एक नए मरीज मिले हैं। उत्तर प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या अब 275 तक पहुंच गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, केरल में संक्रमण के 87 केस घटे हैं। उसके अलावा महाराष्ट्र में 38, दिल्ली में 33, तमिलनाडु में 23, गुजरात-हरियाणा में 8-8, पंजाब में 7, आंध्र प्रदेश में 6, असम में 4, उत्तराखंड में 3, जम्मू-कश्मीर में 2, पुडुचेरी में एक की गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि बीते 24 घंटों में उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान में कोविड संक्रमण के 30, कर्नाटक में 18, मणिपुर में 5, झारखंड और मध्य प्रदेश में 4-4, छत्तीसगढ़ और सिक्किम में एक-एक मरीज मिले हैं। नए आंकड़ों के बाद केरल में सबसे ज्यादा कुल एक्टिव केस 1920 हैं, जबकि गुजरात में 1433, दिल्ली में 649, महाराष्ट्र में 540 हैं। इसके अलावा देशभर में एक दिन में ही कोविड संक्रमण से 11 लोगों की जान गई है। लगातार दूसरा दिन है, जब नए वैरिएंट से मरने वालों की संख्या 10 से ज्यादा रही है। 15 जून को भी देशभर में कोविड से संक्रमित 10 लोगों की जान गई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि पिछले 24 घंटों में पूरे देश में सबसे ज्यादा 7 मौतें केरल में हुई हैं। बाकी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में एक-एक मरीज की जान गई है। 24 घंटे में 11 मरीजों की मौत गंभीर चिंता का विषय यह है कि बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण से 11 मरीजों की मौत हुई है। यह लगातार दूसरा दिन है, जब कोविड से 10 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। इससे पहले 15 जून को 10 मरीजों की मृत्यु हुई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इन 11 मौतों में से सबसे अधिक 7 मौतें केरल में हुई हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में एक-एक मरीज की मृत्यु हुई है। देश में संक्रमण की स्थिति अभी नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नई वैरिएंट्स और मौसम में बदलाव को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और टीकाकरण को अपडेट रखना जरूरी है, ताकि संक्रमण पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके। राज्यों से कोरोना अपडेट…     उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए सावधानी बरतने का निर्देश जारी किया है। प्रमुख स्वास्थ्य अधिकारियों ने सभी अस्पतालों को जरूरी दवाएं, पीपीई किट, जांच सुविधाएं, आइसोलेशन बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर, आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं को तैयार रखने को कहा है।     महाराष्ट्र: राज्य में शनिवार को कोरोना के 53 नए केस मिले। वहीं, 2 मरीजों की मौत हो गई। 1 जनवरी से अब तक 21067 कोविड-19 टेस्ट किए गए हैं। इस दौरान 1967 पॉजिटिव केस सामने आए।     केरल: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा के लक्षणों वाले मरीजों का इलाज करते समय जून 2023 में जारी की गई कोविड गाइडलाइन पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में सभी को मास्क लगाना अनिवार्य है। साथ ही ​​​​​​जुकाम, खांसी और बुखार जैसे लक्षण वाले मरीजों का कोविड टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है।     कर्नाटक: गुलबर्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने में 25 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया है। इनमें से पांच-पांच बेड ICU (वेंटिलेटर समेत), हाई डिपेंडेंसी यूनिट और पांच प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए हैं। बाकी 10 नॉर्मल बेड हैं। भारत में मिले कोविड-19 के 4 नए वैरिएंट भारत के कई राज्यों में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच देश में चार नए वैरिएंट मिले हैं। ICMR के डायरेक्टर डॉ. राजीव बहल ने बताया कि दक्षिण और पश्चिम भारत से जिन वैरिएंट की सीक्वेंसिंग की गई है, वे LF.7, XFG , JN.1 और NB.1.8.1 सीरीज के हैं। बाकी जगहों से नमूने लेकर सीक्वेंसिंग की जा रही है, ताकि नए वैरिएंट की जांच की जा सके। मामले बहुत गंभीर नहीं हैं, लोगों को चिंता नहीं, बस सतर्क रहना चाहिए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी इन्हें चिंताजनक नहीं माना है। हालांकि, निगरानी में रखे गए वैरिएंट के रूप में कैटेगराइज किया है। चीन सहित एशिया के दूसरे देशों में कोविड के बढ़ते मामलों में यही वैरिएंट दिख रहा है। NB.1.8.1 के A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन अन्य वैरिएंट की तुलना में तेजी से फैलते हैं। इन पर कोविड के खिलाफ बनी इम्यूनिटी का भी असर नहीं होता। भारत में कोविड का JN.1 वैरिएंट सबसे आम है। टेस्टिंग में आधे से ज्यादा सैंपल में यह वैरिएंट मिलता है। इसके बाद BA.2 (26 प्रतिशत) और ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20 प्रतिशत) वैरिएंट के मामले भी मिलते हैं। JN.1 वैरिएंट इम्यूनिटी कमजोर करता है​​​​​ JN.1, ओमिक्रॉन के BA2.86 का एक स्ट्रेन है। इसे अगस्त 2023 में पहली बार देखा गया था। दिसंबर 2023 में WHO ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया। इसमें करीब 30 म्यूटेशन्स हैं, जो इम्यूनिटी कमजोर करते हैं। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी … Read more

मुख्यमंत्री ने 38 हजार श्रमिकों के खातों में ऑनलाइन अंतरित किए 19.71 करोड़ की सहायता राशि

रायपुर : श्रमिक परिवारों के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए समर्पित है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री के हाथों 31 मेधावी श्रमिक बच्चों को मिली 2-2 लाख की प्रोत्साहन राशि मुख्यमंत्री ने 38 हजार श्रमिकों के खातों में ऑनलाइन अंतरित किए 19.71 करोड़ की सहायता राशि रायपुर  “हम श्रमिक परिवारों के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। आपका स्नेह और सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हम सब मिलकर एक विकसित, समृद्ध और सशक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करेंगे।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत कक्षा दसवीं और बारहवीं के टॉप 10 में स्थान पाने वाले पंजीकृत श्रमिकों के 31 मेधावी बच्चों को दो-दो लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत राज्य के 38 हजार 200 निर्माण श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत 19.71 करोड़ रूपए से ज्यादा की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की।            मुख्यमंत्री ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम हासिल करने वाले श्रमवीरों के मेधावी बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सरकार श्रमिक परिवारों की आवश्यकताओं को भली-भांति समझती है और उनके समग्र कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज श्रमिक परिवार का बच्चा विदेश जाकर पढ़ना चाहे तो उसके लिए भी 50 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान श्रम विभाग द्वारा किया गया है। साय ने कहा कि हम नवाचार के साथ कदमताल करते हुए ऐसी नीतियां बना रहे हैं, जिनसे प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार मिले। प्रदेश की आकर्षक उद्योग नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव राज्य सरकार को प्राप्त हो चुके हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साय ने श्रम मंत्रालय में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि श्रमिकों से मेरा विशेष लगाव है और श्रमिकों के हित में कार्य करना हमेशा संतुष्टि देता है।           मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में दो वर्षों तक श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी और उनके नेतृत्व में श्रम राज्यमंत्री के रूप में श्रमिकों के पेंशन सुधार की दिशा में हमने कई ऐतिहासिक कदम उठाए और न्यूनतम पेंशन की राशि सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्रमिकों को लेकर संवेदनशील है और उनके निर्देश पर ही श्रमिकों के प्रोविडेंट फंड (PF) में वर्षों से पड़ी लगभग 27 हजार करोड़ रुपए की अन्क्लेम्ड राशि का उपयोग उनके हित में करने का बड़ा निर्णय भी इस दौरान हमने लिया था। राज्यमंत्री के रूप में यूनिवर्सल पीएफ नंबर की शुरुआत हमारी सरकार ने की, जिससे श्रमिकों द्वारा बार-बार पीएफ राशि क्लेम करने की समस्या दूर हुई।            मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी से आग्रह करते हुए कहा कि श्रम विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी अन्य ज़रूरतमंदों तक अवश्य पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक श्रमिक इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने श्रमिकों के लिए गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही प्रदेश में संचालित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।           उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश चहुंमुखी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इन डेढ़ वर्षों में “मोदी की गारंटी” के तहत सभी वादों को पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 38 हजार 2 सौ श्रमिकों को 19.71 करोड़ रुपये एवं प्रवीण्य सूची में चयनित 31 विद्यार्थियों को 62 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। देवांगन ने बताया कि शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत 17 जिलों के 46 केन्द्रों में श्रमिकों को 5 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और भविष्य में इसे सभी उद्योग प्रधान जिलों में लागू किया जाएगा। इसके साथ ही श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग सुविधा प्रारंभ करने की जानकारी भी दी।  श्रम मंत्री ने कहा कि नई उद्योग नीति के तहत उद्योगों की स्थापना के लिए नियमों को सरल बनाया गया है , जिससे निवेश बढ़ा है एवं युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।         छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के साथ प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। मण्डल के माध्यम से प्रदेश में 31 जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें नोनी सशक्तिकरण, महतारी जतन, श्रमिक सियान सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मण्डल प्रदेश के 29.47 लाख पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है। श्रमिक अपना पंजीकरण श्रमेव जयते ऐप, लोक सेवा केन्द्र या श्रम कार्यालय में करवा सकते हैं। नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना ने बदली मजदूर परिवार के बच्चों की ज़िंदगी       कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सामने मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से लाभान्वित बच्चों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए आभार व्यक्त किया। सभी बच्चों ने कहा कि वे मजदूर और गरीब परिवारों से हैं, लेकिन इस योजना ने उन्हें पढ़ाई का अवसर दिया। यह योजना श्रमिक परिवारों के सपनों को नई उड़ान दे रही है। सूरजपुर जिले के भैयाथान के हीरा सिंह ने बताया कि आईआईआईटी से बी टेक की पढ़ाई पूरी कर अब जूनियर डेटा साइंस डेवलपर बन चुके हैं। इस योजना से उन्हें 4.10 लाख रुपए की सहायता मिली, जिससे उनकी पढ़ाई पूरी हो पाई थी। इसी तरह बी.टेक अंतिम वर्ष के छात्र अमलेंद्र पैंकरा ने बताया कि उनका परिवार मजदूरी कर जीवन यापन करता है और इस योजना की मदद से कॉलेज की फीस भर पा रहे हैं।  एक अन्य छात्र दीपक पैंकरा ने … Read more

1.27 करोड़ लाड़ली बहनों का इंतजार खत्म, आज CM अकाउंट में भेजेंगे 25वीं किस्त व सिलेंडर रिफिलिंग की राशि, संबल योजना की राशि भी होगी जारी

बरगी  लाडली बहना योजना की 25वीं किस्त का इंतजार खत्म हो गया है। आज 16 जून सोमवार को मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव जबलपुर के बरगी विधानसभा क्षेत्र के बेलखेड़ा गांव से मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की 1.27 करोड़ लाभार्थ‍ियों के खाते में 1555.44 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेंगे। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, संबल योजना और सिलेंडर रिफिलिंग योजना के लाभार्थियों को भी पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। दरअसल यह पैसा 13 जून को ही ट्रांसफर होना था, लेकिन अहमदाबाद में हुए प्लेन क्रैश के बाद इस कार्यक्रम को टाल दिया गया था। आज जबलपुर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सीएम कई अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि पूजन भी करेंगे। इस बार भी महिलाओं के खाते में 1250 रुपये ही आएंगे। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 56.68 लाख लाभार्थियों के खाते में 341 करोड़ रुपये भेजे जाएंगे। राज्य के श्रमिकों के लिए चल रही मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबंल) योजना के तहत 6,821 श्रमिक परिवारों को 150 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर की जाएगी। 27 लाख महिलाओं के खाते में आएगा ज्यादा पैसा राज्य की 27 लाख लाडली बहनों को इस महीने अलग से बोनस भी मिलेगा। दरअसल मध्य प्रदेश में गैस सिलेंडर रिफिलिंग योजना के तहत लाभार्थियों को 450 रुपये प्रति सिलेंडर के एलपीजी सिलेंडर मिलता है। बाकी पैसा सब्सिडी के रूप में सरकार की ओर से वापस मिल जाता है। जून महीने की किस्त के रूप में 27 लाख महिलाओं को यह पैसा मिलेगा। उनके खाते में कुल 39.14 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। पेंशन, रसोई गैस और संबल योजना की राशि भी होगी जारी लाड़ली बहनों को योजना की 25वीं किस्त जारी करने के साथ ही सीएम मोहन यादव सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना (CM Social Security Kalyani Scheme) के तहत 341 करोड़, गैस सिलेंडर रिफिल योजना (Gas Cylinder Refill Yojana) के लिए 39.14 करोड़ और मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना (Mukhyamantri Jan Kalyan Sambal Yojana) के अंतर्गत 150 करोड़ की अप्रूव्ड राशि भी ट्रांसफर करेंगे. यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार का बड़ा कदम है. ई-केवाईसी नहीं कराने वालों को लग सकता है झटका हाल ही में समग्र आईडी में फर्जीवाड़ा कर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने वालों पर शिंकजा कसने के लिए प्रशासन ने समग्र आईडी का ईकेवाईसी जरूरी कर दिया है। अगर किसी महिला लाभार्थी ने ई-केवाईसी नहीं कराया है तो उन्हें झटका लग सकता है। अगर सरकार ने अपना डाटा इसी हिसाब से अपडेट किया है तो 25वीं किस्त का पैसा भी अटक सकता है। लिस्ट में ऐसे चेक करें नाम अगर आपको लिस्ट में अपना नाम चेक करना है तो आप लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल पर जाएं। यहां आपको अंतिम सूची और अनंतिम सूची के विकल्प दिखेंगे। यहां आपको अपना मोबाइल नंबर भरना होगा। ओटीपी से वेरिफाई करने के बाद आपको जानकारी मिल जाएगी। खाते में पैसा आने का स्टेटस चेक करने के लिए आप ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ पर जाकर ताजा जानकारी हासिल कर सकती हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशनरों के खाते में भी भेजेंगे 341 करोड़ लाड़ली बहना योजना की 25वीं किस्त के साथ ही मुख्यमंत्री मोहन यादव जबलपुर के बरगी से सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 341 करोड़ की राशि भी जारी करेंगे. सामाजिक सुरक्षा कल्याणी पेंशन योजना के अंतर्गत राज्य की 18 साल से ऊपर की विधवा महिलाओं (कल्याणी) को हर महीने 600 रुपये की पेंशन सहायता दी जाती है. यह योजना साल 2018 से शुरू हुई है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा महिलाओं को सम्मानजनक जीवन जीने में सहयोग प्रदान करना है. गैस सिलेंडर रिफिल योजना के भी मिलेंगे पैसे सीएम आज गैस सिलेंडर रिफिल योजना के तहत 39.14 करोड़ का राशि लाभार्थियों को जारी करेंगें. मध्यप्रदेश सरकार ने 1 सितंबर 2023 से गैस सिलेंडर रिफिल योजना शुरू की है, जिसके तहत उज्ज्वला योजना और लाड़ली बहना योजना में पंजीकृत महिलाओं को सिर्फ 450 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है. यह सुविधा केवल उन्हीं महिलाओं को दी जाएगी जिनका नाम दोनों योजनाओं में दर्ज है और जिनके नाम पर गैस कनेक्शन है. यह पहल रसोई खर्च कम करने और महिलाओं को आर्थिक राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. संबल योजना के लाभार्थियों को भी मिलेंगे पैसे इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव जनकल्याण संबल योजना के लाभार्थियों के खातों में भी 150 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर करेंगे. इस योजना के तहत अगर किसी व्यक्ति की दुर्घटना में मौत हो जाती है तो 4 लाख रुपये, और सामान्य मौत पर 2 लाख रुपये दिए जाते हैं. अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह अपंग हो जाए तो 2 लाख रुपये, और आंशिक अपंगता होने पर 1 लाख रुपये की मदद दी जाती है. अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार) के लिए 5 हजार रुपये की सहायता भी दी जाती है.  

देशभर में तपती गर्मी से अब मिलेगी राहत, भारी बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली देशभर में पिछले कुछ हफ्तों से जारी तपती गर्मी से जूझ रहे लोगों को अब राहत मिल सकती है, लेकिन साथ ही मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 15 जून से 19 जून 2025 के बीच दक्षिणी, पश्चिमी, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में मूसलधार बारिश हो सकती है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में बिजली गिरने, आंधी और तेज हवाओं के साथ भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण भारत में मानसून की सक्रियता तेजी से बढ़ रही है, जिससे कई राज्यों में बारिश की तीव्रता अधिक हो सकती है: तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल: 15 और 16 जून को इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका है।     तेलंगाना: 15 से 19 जून तक कई इलाकों में गरज के साथ बारिश और आंधी आने की संभावना है। केरल और माहे: 18 और 19 जून को इन इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने कुछ जिलों में रेड अलर्ट भी जारी किया है। कर्नाटक: तटीय और भीतरी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।  पश्चिम भारत में भी बरसेंगे बादल गुजरात: 15 से 17 जून के बीच अधिकतर हिस्सों में आंधी-तूफान और बिजली गिरने के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। सौराष्ट्र और कच्छ के क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश (20 सेमी/24 घंटे) की संभावना जताई गई है।     महाराष्ट्र: कोंकण और गोवा: 18 से 21 जून के बीच मूसलधार बारिश की चेतावनी है। मध्य महाराष्ट्र: 15 से 18 जून तक भारी से अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है।  पूर्वी और मध्य भारत में भी दिखेगा असर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, और विदर्भ: 15 से 20 जून के बीच तेज हवाएं (40-50 किमी/घंटा), गरज-चमक और मध्यम बारिश की संभावना है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा: 16 से 20 जून के बीच कई हिस्सों में भारी वर्षा हो सकती है, जिससे जलभराव और ट्रैफिक पर असर पड़ सकता है। उत्तर भारत में भी राहत की उम्मीद, पर खतरे की घंटी उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान: 15 से 21 जून के दौरान हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, साथ ही कुछ इलाकों में तेज हवाएं और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। दिल्ली-NCR: 16 जून को नए पूर्वानुमान के तहत और सटीक जानकारी दी जाएगी, लेकिन फिलहाल हल्की से मध्यम बारिश के आसार बने हुए हैं।  हालात अब तक: कहां-कहां हुई बारिश दिल्ली: कुछ इलाकों में रविवार को हल्की बारिश देखी गई जिससे मौसम सुहावना हो गया। मुंबई: कोंकण क्षेत्र में भारी बारिश की चेतावनी के बीच शहर के कुछ हिस्सों में बारिश हुई। गुजरात: बीते 24 घंटों में 42 तालुकों में एक इंच से अधिक बारिश हुई, गोंडल में लगभग 4 इंच तक बारिश दर्ज की गई। केरल: राज्य के 5 जिलों में मौसम विभाग ने अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। कर्नाटक: बेंगलुरु सहित तटीय इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश देखी गई।  ट्रैवल अलर्ट और संभावित असर बारिश के इस दौर में रेलवे और एयरलाइंस सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करें। कई राज्यों में बिजली गिरने और तेज हवाओं से जन-धन के नुकसान की आशंका भी बनी हुई है।  IMD की सलाह: सावधानी है सुरक्षा भारतीय मौसम विभाग अगले अपडेट में 16 जून को मानसून की प्रगति, दिल्ली-उत्तर भारत के नए पूर्वानुमान और संभावित चेतावनियों की विस्तृत जानकारी साझा करेगा। तब तक के लिए नागरिकों को सतर्क रहने, खुले में न जाने और मौसम संबंधित दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

छात्रों अकाउंट में आएंगे ड्रेस के पैसे: कैबिनेट बैठक में लगेगी अंतिम मुहर

भोपाल मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के छात्रों को पहले सरकार ड्रेस देती थी. लेकिन इस बार ड्रेस नहीं बांटी जाएगी. क्योंकि अब सीधे छात्रों के बैंक अकाउंट में यूनिफॉर्म के पैसे आएंगे. 17 जून को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगेगी. दरअसल, स्व सहायता समूह जो यूनिफॉर्म बांटती थी, उसकी क्वालिटी खराब थी. जिसे लेकर कई बार शिकायतें भी की गई थी. जिसके बाद यह फैसला लिया गया है. जानकारी के मुताबिक, कक्षा 1 से 8वीं तक के लगभग 60 लाख स्टूडेंट्स के खातों में 600-600 रुपये डाले जाएंगे. ताकि वो दो जोड़ी स्कूल यूनिफॉर्म खुद खरीद सकें. क्वालिटी खराब, इसलिए सरकार ने किया बदलाव सरकार को यह फैसला लेने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि यूनिफॉर्म वितरण के पुराने ढर्रे में कई गड़बड़ियां सामने आई थीं। स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए कपड़ों की क्वालिटी अक्सर बेहद खराब होती थी, जबकि रिकॉर्ड में अच्छी क्वालिटी बताई जाती थी। ड्रेस का साइज गलत होता था, जिससे विद्यार्थियों को पहनने में दिक्कत होती थी। इसके अलावा कई बड़े कॉन्ट्रैक्टर, समूहों के नाम पर टेंडर लेकर काम करते थे और अधिक लाभ कमाते थे, जबकि असली समूह के सदस्यों को उचित भुगतान तक नहीं मिलता था।  

गोरखपुर से पटना तक 20 जून से चलेगी वंदेभारत, इस ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरी झंडी दिखा सकते हैं

गोरखपुर गोरखपुर से बेतिया होते हुए पटना तक वंदेभारत चलाने का रास्ता साफ हो गया है। बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद अब इसे 20 जून से चलाने की तैयारी है। पटना में इस ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरी झंडी दिखा सकते हैं। शेड्यूल के अनुसार वंदेभारत गोरखपुर से सुबह 6.20 बजे रवाना होगी और दोपहर 1.30 बजे पटना पहुंचेगी। जबकि वापसी में 2.25 बजे चलकर रात 9.30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। दो महीने पहले गोरखपुर और बेतिया दौरे पर आए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी गोरखपुर से पटना के बीच वंदे भारत ट्रेन चलाने की घोषणा कर चुके हैं। उसी आदेश के क्रम में यह निर्णय लिया गया है। नई वंदे भारत के संचलन को लेकर अब रेलवे प्रशासन ने रखरखाव, मरम्मत व सफाई-धुलाई के लिए रेलवे सुरक्षा बल प्रशिक्षण केंद्र के पीछे वंदे भारत के डिपो निर्माण का भी प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही इसपर भी मुहर लग जाएगी। जानकारों के अनुसार, गोरखपुर से दिल्ली और आगरा के बीच स्लीपर वंदे भारत के अलावा वाराणसी के रास्ते प्रयागराज सहित कुल सात वंदे भारत ट्रेन चलाने की योजना है। आने वाले दिनों में मुख्यालय गोरखपुर सहित लगभग सभी प्रमुख रूटों पर अब वंदे भारत ट्रेनें ही चलाई जाएगी। स्लीपर वंदेभारत भी जल्द संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में गोरखपुर से दिल्ली के बीच भी गुलाबी रंग की स्लीपर वंदे भारत जल्द चलने लगेगी। रेलवे के अफसरों का कहना है कि 26 हजार करोड़ से हवाई जहाज जैसी सुविधा वाली 200 स्लीपर वंदे भारत तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा रेलवे बोर्ड ने दो वित्तीय वर्ष में वंदे भारत के और 3200 कोच तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इन कोचों से वर्ष 2027 तक कम से कम आठ कोचों वाली 400 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें तैयार हो जाएंगी। यह सभी कोच इंटीग्रल कोच फैक्टी (आइसीएफ) चेन्नई, रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) कपूरथला और माडर्न कोच फैक्ट्री राय बरेली में बनाए जा रहे हैं। 20 जून को लिंक एक्सप्रेस वे का लोकार्पण करेंगे सीएम गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे का लोकार्पण समारोह 20 जून को होगा। इसके पहले 17 जून को लोकार्पण कराने की तैयारी थी, लेकिन तिथि में परिवर्तन कर दिया गया है। अधिकारियों ने बदली हुई तिथि के अनुसार तैयारी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने बताया कि गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे का लोकार्पण अब 20 जून होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आजमगढ़ में जहां गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे आपस में जुड़ रहे हैं, वहां जनसभा व लोकार्पण करेंगे। उसके बाद एक्सप्रेस वे पर सड़क मार्ग से होते हुए गोरखपुर में भगवानपुर टोल प्लाजा पहुंचेंगे, जहां जनसभा होगी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पूरी 91 किमी एक्सप्रेस वे की यात्रा भी शामिल है। फोरलेन पर मंच बनाया जा जाएगा।  

भारत में 1950 में फर्टिलिटी रेट थी 5.91, अब है 2.11; बढ़ती औसत आयु से क्या पैदा होंगी दिक्कतें?

नई दिल्ली एक वक्त था जब भारत को युवा देश कहा जाता था और दुनिया भर में उसकी जनसंख्या वृद्धि चिंता का विषय थी, लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. भारत की जनसंख्या आज भले ही 1.46 अरब (2025 अनुमान) के आंकड़े को छू रही हो, लेकिन देश की प्रजनन दर यानी फर्टिलिटी रेट साल दर साल गिरती जा रही है. यह बदलाव भारत के भविष्य की सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है. 1950 में भारत की औसत रूप से एक महिला 5.91 बच्चों को जन्म देती थी. यह संख्या 2000 तक घटकर 3.35 हो गई और अब 2024-25 में यह 2.11 पर पहुंच चुकी है. यह एक ऐसा लेवल है जिसे विशेषज्ञ “जनसंख्या स्थिरीकरण बिंदु” मानते हैं. यानी अब भारत की आबादी तेजी से नहीं बढ़ेगी और कुछ दशकों बाद गिरावट की ओर मुड़ जाएगी. 40 साल बाद घटेगी आबादी! संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की हालिया रिपोर्ट कहती है कि भारत की जनसंख्या अभी और बढ़ते हुए लगभग 1.7 अरब तक पहुंचेगी, लेकिन 40 साल बाद यह गिरावट की ओर जाएगी. भारत ने भले ही जनसंख्या विस्फोट की चिंता को कम किया हो, पर अब एक नई चुनौती सामने खड़ी हो रही है. वो है बूढ़ी होती आबादी. बढ़ती मीडियन एज: अब युवा नहीं रहेगा भारत? वर्तमान में भारत की मीडियन उम्र 28.8 साल है, यानी आधी आबादी इससे छोटी है और आधी बड़ी. ये आंकड़ा फिलहाल अमेरिका (38.9), यूरोप (42.2), और चीन (39) से कहीं कम है. लेकिन यह भी तेजी से बढ़ रहा है. 2050 तक भारत की मीडियन उम्र 38 साल हो जाएगी. इसका मतलब है कि तब भारत में बुजुर्गों की संख्या अधिक और काम करने वाले युवाओं की संख्या कम हो सकती है. उम्र बढ़ने के क्या होंगे असर? * आर्थिक बोझ बढ़ेगा: वृद्ध लोगों की संख्या बढ़ने से पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और देखभाल पर खर्च कई गुना बढ़ जाएगा. * वर्कफोर्स घटेगी: काम करने वाले लोगों की संख्या कम होने से आर्थिक उत्पादकता पर असर पड़ेगा. * स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ेगी: बुजुर्गों को विशेष देखभाल, इलाज और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी. * सामाजिक बदलाव: संयुक्त परिवारों की जगह एकल या वृद्धाश्रम जैसी व्यवस्थाएं बढ़ेंगी. क्या है समाधान? विशेषज्ञों के अनुसार भारत को अभी से बुजुर्ग होते समाज के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. इसमें कुछ प्रमुख कदम हो सकते हैं: * बुजुर्गों के लिए समर्पित हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और बीमा योजनाएं * पेंशन सुधार और सामाजिक सुरक्षा * युवाओं को स्किल डेवलपमेंट से जोड़ना ताकि वर्कफोर्स लंबे समय तक एक्टिव रहे * महिलाओं की काम भागीदारी बढ़ाना भारत ने जनसंख्या विस्फोट को रोकने की दिशा में सफलता हासिल की है, लेकिन अब चुनौती यह है कि वह “युवा देश से उम्रदराज देश” बनने की प्रक्रिया को कैसे संतुलित करे. फर्टिलिटी रेट की गिरावट भले ही एक उपलब्धि लगे, लेकिन इसके लंबे समय तक के प्रभावों के लिए रणनीति और दूरदर्शिता की सख्त जरूरत है. वरना भविष्य में भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड एक बोझ बन सकता है. 

आज लाडली बहना योजना की 25वीं किस्त के रूप में 1,551.44 करोड़ रुपए हस्तांतरित करेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार (16 जून) को जबलपुर में एक कार्यक्रम के दौरान 1.27 करोड़ लाभार्थियों के खातों में लाडली बहना योजना की 25वीं किस्त के रूप में 1,551.44 करोड़ रुपए हस्तांतरित करेंगे। इस योजना के तहत, प्रत्येक पात्र महिला को सीधे उनके बैंक खातों में प्रति माह 1,250 रुपये मिलते हैं। इस लोकप्रिय योजना को 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान पेश किया गया था। हाल ही में, शिवराज चौहान की उपस्थिति में सीहोर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मोहन यादव ने घोषणा की थी कि मध्य प्रदेश सरकार ‘लाडली बहना योजना’ की मासिक किस्त को 3,000 रुपए तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। ऊपर बताई गई योजनाओं के लिए फंड ट्रांसफर करने के अलावा, मुख्यमंत्री जबलपुर कार्यक्रम के दौरान 6,821 वंचित परिवारों को अनुग्रह सहायता के रूप में 150 करोड़ रुपए भी ट्रांसफर करेंगे। इसके अलावा, वह एलपीजी सिलेंडर रिफिलिंग के लिए 27 लाख से अधिक लाभार्थियों को 39.14 करोड़ रुपये भी ट्रांसफर करेंगे। मध्य प्रदेश में मजदूरों को सहायता देने के लिए संबल योजना एक और लोकप्रिय योजना है, जिसके तहत सरकार हर साल एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना के तहत स्थायी विकलांगता पर 2 लाख रुपए और आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा अंतिम संस्कार के लिए 5,000 रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता के रूप में 16,000 रुपए दिए जाते हैं। एकमुश्त वित्तीय सहायता के अलावा सरकार श्रमिकों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए पूरी ट्यूशन फीस भी वहन करती है। इस दौरान मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 56.68 लाख लाभार्थियों के खातों में 341 करोड़ रुपए ट्रांसफर करेंगे। इस अवसर पर वे जबलपुर में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी करेंगे। जबलपुर जिले के बरगी में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल समेत कई अन्य मंत्री शामिल होंगे।

ग्वालियर में सालों से एक ही दफ्तर में बने बैठे थे बाबू, अब 150 से ज्यादा पुलिकर्मियों का होगा तबादला

ग्वालियर बाबू बनकर सालों से पुलिस की अलग-अलग इकाई और अधिकारियों के दफ्तरों में तैनात पुलिसकर्मियों को भी हटाया जाएगा। यहां से हटाकर थानों और अन्य दफ्तरों में स्थानांतरित किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। पहली बार ऐसा है, जब आदेश में ही लिखा है- इस तरह की स्थिति में पुलिस कार्यप्रणाली की पारदर्शिता प्रभावित होती है। निहित स्वार्थ की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।   150 से ज्यादा पुलिसकर्मी परेशान ऐसे में अब वह पुलिसकर्मी परेशान हैं, जो पांच से लेकर 10 साल से एक ही दफ्तर में तैनात हैं। ग्वालियर में ऐसे 150 से ज्यादा पुलिसकर्मी हैं। जिन्होंने पूरी नौकरी ही दफ्तरों में बिना वर्दी के काट दी। आइजी कार्यालय, डीआइजी कार्यालय, एसएसपी कार्यालय, सभी एएसपी, डीएसपी कार्यालयों के साथ अवकाश, स्थापना, आर्म्स, आवास, वारंट सेल, चुनाव सेल सहित अन्य शाखाओं में तैनात पुलिसकर्मियों की सूची तैयार की जाएगी। जो यहां लंबे समय से तैनात हैं, उन्हें हटाया जाएगा। ग्वालियर में बन रही सूची दफ्तरों में तैनात बाबूओं को हटाने से कुछ दिन पहले थानों में चार साल से अधिक समय से तैनात पुलिसकर्मियों को हटाने के आदेश पुलिस मुख्यालय से आए थे। ग्वालियर में अब इसकी सूची बन रही है। एसएसपी कार्यालय से सभी थानों को इस संबंध में पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई है। इससे पूर्व भी सूची बनी थी। इसमें जो पुलिसकर्मी सालों से थे, उनसे स्थानांतरण के लिए तीन थानों के विकल्प भी पूछे गए थे, लेकिन इस बार सिर्फ ऐसे नाम मांगे गए हैं। ऐसे 500 से अधिक पुलिसकर्मी प्रभावित होंगे। इनका तबादला किया जाएगा। हर आवेदन से लेकर डायरी पर बाबूओं की नजर पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों में सालों से जिन बाबूओं ने कुर्सी पर कब्जा कर रखा है, ऐसे बाबू आवेदन से लेकर कुछ प्रमुख केस डायरी पर नजर रखते हैं। सीएसपी इंदरगंज, लश्कर, यूनिवर्सिटी सर्किल में तैनात ऐसे कई पुलिसकर्मी हैं, जो सीधे थानों तक में हस्तक्षेप रखते हैं। यह सालों से यहां तैनात हैं। अक्सर इनकी शिकायतें भी अधिकारियों तक पहुंचती हैं। अब सिफारिशों का दौर जिन पुलिसकर्मियों के निजी स्वार्थ थानों और दफ्तरों में तैनाती से जुड़े हैं। वह यहां से जाना नहीं चाहते, इसके चलते अब सिफारिशों का दौर शुरू हो गया है। कोई पुलिस अधिकारी तो कोई माननीयों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इस बदलाव के आदेश पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना द्वारा दिए गए हैं, इसलिए इसका पालन बेहतर तरीके से होगा। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने इस मामले में कहा कि पुलिस मुख्यालय से जो आदेश आए हैं, उसका पालन किया जा रहा है। थानों से ऐसे पुलिसकर्मियों की जानकारी मांगी गई है। दफ्तरों में लंबी अवधि से तैनात पुलिसकर्मियों को भी बदला जाएगा। 

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा शिवपुरी में 10 से 15 दिन बाद ही संपन्न कराने की तैयारी

ग्वालियर भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा शिवपुरी में ही होगी। शिवपुरी जिला प्रशासन से एक-दो दिन में लिखित अनुमति सेना के अधिकारियों को मिल जाएगी। ग्वालियर में तीन परीक्षा केंद्रों पर 30 जून से 10 जुलाई के बीच ऑनलाइन लिखित परीक्षा होगी। सागर में भी दो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। ऑनलाइन परीक्षा में सुरक्षा की जिम्मेदारी सेना के साथ-साथ स्थानीय पुलिस के पास भी होगी। लिखित परीक्षा प्रारंभ होने से पहले सेना के अधिकारी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे।   10 से 15 दिन बाद ही शारीरिक परीक्षा ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, दतिया, भिंड, मुरैना, सागर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़ के 32 हजार 700 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। 20 जुलाई तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। इसके 10 से 15 दिन बाद ही शारीरिक परीक्षा संपन्न कराने की तैयारी है। ग्वालियर में फिर नहीं हो सकी शारीरिक परीक्षा, पिछली बार अचानक रद्द की थी अनुमति 2014 में उपद्रव का जो दाग ग्वालियर पर लगा था, इसके बाद से ही ग्वालियर में पुलिस-प्रशासन यहां भर्ती कराने को लेकर अनुमति जारी करने से बचते हैं। पिछली बार दिव्यांग खेल स्टेडियम में शारीरिक परीक्षा कराने की अनुमति केंद्रीय सामाजिक न्याय विभाग द्वारा दी गई थी, लेकिन परीक्षा के एक सप्ताह पहले इसे रद्द कर दिया गया था। 2024 में जो अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में चयनित हुए थे। उनकी शारीरिक परीक्षा इस साल सागर में हुई थी। पूरे एक साल बाद वह ट्रेनिंग पर जा सके थे। एक साल तक अभ्यर्थी उलझन में रहे, इसलिए अब सेना ने निर्णय लिया है कि ग्वालियर जिला प्रशासन से इस संबंध में अब कोई चर्चा या पत्राचार न कर शिवपुरी में ही परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा। ग्वालियर के परीक्षा केंद्र 1- भारतीय विद्या मंदिर शिक्षा समिति, चितौरा रोड 2- मालवा इंस्टीट्यूट आफ फार्मेसी, सिकरोदा, बड़ोरी, झांसी रोड 3- भारतीय विद्या मंदिर- यमुना नगर, दर्पण कालोनी, थाटीपुर सागर के परीक्षा केंद्र 1- एसएसएचसी जैन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च- नरसिंहपुर रोड, एमपीइबी कालोनी के पीछे, सागर 2- एडीना इंस्टीट्यूट आफ साइंड एंड टेक्नोलाजी- एनएच- 86, भोपाल रोड, बम्होरी सीड फार्म, सागर शिवपुरी में शारीरिक परीक्षा के लिए मौखिक अनुमति दे दी गई है। जल्द ही लिखित अनुमति भी मिल जाएगी। अगस्त के पहले सप्ताह में शारीरिक परीक्षा कराने के लिए मैदान को तैयार करना शुरू कर देंगे। अब ग्वालियर में हम स्थानीय प्रशासन से इस संबंध में कोई कम्युनिकेशन नहीं करेंगे, क्योंकि वहां से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है कर्नल पंकज कुमार, डायरेक्टर, सेना भर्ती कार्यालय

कान्हा टाइगर रिजर्व शाकाहारी वन्य-जीवों की संख्या में देश में अव्वल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वन अभ्यारण्य के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास घोषित किए जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि अन्य रिजर्व भी इस दिशा में सकारात्मक पहल करेंगे। भारतीय वन्य-जीव संस्थान, देहरादून द्वारा जारी की गयी रिपोर्ट के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्य-प्राणियों की संख्या देश में सबसे अधिक है। कान्हा टाइगर रिजर्व को देश में बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास क्षेत्र घोषित किया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व प्रदेश के मण्डला जिले में स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 2074 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 917.43 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 1134 वर्ग किलोमीटर में बफर जोन शामिल है। कान्हा टाइगर रिजर्व वन्य-जीव सम्पदा संरक्षण में देश में सर्वश्रेष्ठ है। भारतीय वन्य-जीव संस्थान, देहरादून द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्य-जीवों की संख्या 1 लाख 2 हजार 485 है। इनका प्रति वर्ग किलोमीटर घनत्व 69.86 आंका गया है। अभयारण्य का कुल बायोमास 12.6 लाख किलोग्राम 8602.15 किलोग्राम/वर्ग किलोमीटर है। कान्हा टाइगर रिजर्व में चीतल, सांभर, गौर, जंगली सुअर, बार्किंग डियर, नीलगाय और हॉग डियर की बहुतायत है। इस आधार पर इस रिपोर्ट में कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों की बढ़ती आबादी के लिये एक आदर्श निवास घोषित किया है। यहाँ विविध शाकाहारी प्रजातियों की संख्या में लगातार आनुपातिक वृद्धि से यह जैविक रूप से सबसे समृद्ध और संतुलित वन्य-जीव पारिस्थितिकी तंत्र बन गया है। प्रबंधन रणनीतियाँ बनी सफलता की आधारशिला कान्हा टाइगर रिजर्व अपनी प्रबंधन नीतियों के कारण आदर्श बाघ निवास बन सका है। यहाँ वर्षभर घास भूमियों की देखरेख, जल स्रोतों का निर्माण, झाड़ियों की सफाई, लांटाना जैसी घासों का उन्मूलन और बाघ-आहार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने के लिये आवास सुधार के कार्य जारी रहते हैं। गर्मियों में जल संकट से निपटने के लिये कृत्रिम जलकुंड, सोलर बोरवेल्स और तालाबों का गहरीकरण एवं साफ-सफाई नियमित रूप से की जाती है। अभयारण्य क्षेत्र में M-STriPES मोबाइल ऐप पर सतत निगरानी रखी जाती है। अभयारण्य में अप्रैल-2025 में 88,600 किलोमीटर क्षेत्र में गश्ती निगरानी की गयी, जो देश में सबसे अधिक है। अभयारण्य के कोर क्षेत्र से गाँवों के स्थानांतरण के बाद पुनर्जीवित घास-भूमियों ने वन्य-जीवों को बिना मानवीय हस्तक्षेत्र के फलने-फूलने का अवसर दिया। अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों से कम घनत्व वाले क्षेत्रों में चीतल जैसी प्रजातियों का स्थानांतरण किया गया और विभिन्न घास-भूमियों को जोड़ने वाले गलियारे बनाये गये इससे बारहसिंगा, चीतल और गौर जैसी प्रजातियों को मुक्त रूप से विचरण की स्वतंत्रता मिलती है। वनकर्मियों को नियमित प्रशिक्षण एवं डब्ल्यूआईआई, देहरादून से तकनीकी मार्गदर्शन से आंकड़ों की विश्वसनीयता और वैज्ञानिकता सुनिश्चित की गयी। बंजर घाटी में पहले से अधिक घनत्व होने के कारण हालन घाटी में घास-भूमि के विकास और प्रजातियों के सतत स्थानांतरण के जरिये शाकाहारी प्रजातियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। कान्हा टाइगर रिजर्व विविध आवास प्रकारों और सशक्त प्रबंधन से देश के अभयारण्यों में शीर्ष पर है। यहाँ के उच्च बायोमास, संतुलित प्रजाति वितरण और न्यूनतम मानव-वन्य-जीव संघर्ष इसे अन्य अभयारण्यों के लिये मॉडल बनाता है।  

10,372 स्कूलों का एकीकरण, शिक्षकों का व्यापक युक्तियुक्तकरण

 छात्रों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा रायपुर राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और सार्थक पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में यह दूरगामी सुधार, वास्तव में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और लंबे समय से चली आ रही शैक्षिक विसंगतियों के समाधान का कारगर प्रयास है। युक्तियुक्तकरण से पहले, छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण अंचल की शालाओं में शिक्षकों की कमी, नगरीय इलाकों और उसके समीप की शालाओं में जरूरत से ज्यादा शिक्षकों की पदस्थपना के कारण शिक्षा प्रभावित हो रही थी और इसका असर बच्चों के परीक्षा परिणाम पर भी पड़ रहा था। राज्य के लगभग 212 प्राथमिक शालाएं और 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं पूरी तरह से शिक्षक विहीन थीं, जबकि 6,872 प्राथमिक शालाएं और 255 पूर्व माध्यमिक शालाएं केवल एक शिक्षक के साथ संचालित हो रही थीं। इसके अतिरिक्त 211 शालाएं ऐसी थीं जहाँ छात्र संख्या शून्य थी, लेकिन शिक्षक पदस्थ थे। इसके अलावा, 166 शालाओं को समायोजित किया गया, इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की 133 शालाएं शामिल थीं, जिनकी दर्ज संख्या 10 से कम थी और दूरी 1 किमी से कम थी, तथा शहरी क्षेत्रों की 33 शालाएं थीं, जिनकी दर्ज संख्या 30 से कम थी और दूरी 500 मीटर से कम थी। इन चुनौतियों के बावजूद, छत्तीसगढ़ का छात्र-अध्यापक अनुपात (पीटीआर) राष्ट्रीय औसत से उल्लेखनीय रूप से बेहतर था, प्राथमिक शालाओं के लिए पीटीआर-20 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 29 है और पूर्व माध्यमिक शालाओं के लिए पीटीआर-18 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 38 है। हालांकि, वितरण असमान था। राज्य में लगभग 17,000 प्राथमिक शालाएं और लगभग 4,479 पूर्व माध्यमिक शालाएं थीं, जिनका पीटीआर-20 से कम था। अकेले शहरी क्षेत्रों में 527 ऐसे विद्यालय थे, जिनका पीटीआर-10 से कम था, जिनमें 15 या उससे अधिक शिक्षकों वाली 08 प्राथमिक शालाएं, 10-15 शिक्षकों वाली 61 शालाएं और 6-9 शिक्षकों वाली 749 प्राथमिक शालाएं थीं, ये आंकड़े बेहतर संसाधन आवंटन की जरूरत को दर्शाते हैं। इस पहल का मुख्य बिंदु एक ही परिसर में संचालित लगभग 10 हजार 372 शालाओं का एकीकरण था, जिनमें प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल थे। इस विलय से कई लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें शाला त्यागी छात्रों की संख्या में कमी और छात्रों को बार-बार स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता का समाप्त होना शामिल है। यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, छोटी कक्षाओं के छात्रों को बड़ी कक्षाओं के छात्रों का सहयोग प्राप्त होने, और कंप्यूटर, विज्ञान प्रयोगशाला, खेल-कूद तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से शैक्षणिक समझ और अभिरुचि में वृद्धि के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होगा। इस दृष्टिकोण से प्रशासनिक व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। विद्यालयों के समायोजन के साथ-साथ, जिला, संभाग और राज्य स्तर पर काउंसलिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण शिक्षक युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया भी की गई। इस प्रक्रिया के तहत जिला स्तर पर लगभग 13 हजार 793 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। संभाग स्तर पर 863 का और राज्य स्तर पर 105 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। युक्तियुक्तकरण अभियान के प्रारंभिक परिणाम अत्यधिक आशाजनक हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षा विभाग का कहना है कि कोई भी विद्यालय बंद नहीं किया जा रहा है और कोई भी शिक्षक पद समाप्त नहीं हो रहा है। इसके बजाय ध्यान बेहतर अधोसंरचना वाले विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित करने पर है। युक्तियुक्तकरण के पश्चात राज्य में शिक्षक विहीन विद्यालयों की संख्या शून्य हो गई है। एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में प्रभावशाली 80 प्रतिशत की कमी आई है अब लगभग 1,200 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। एक ही परिसर में स्थित 10,372 विद्यलायों का एकीकरण और 166 ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों का समायोजन पूरा हो चुका है। इससे लगभग 89 प्रतिशत विद्यार्थियों को बार-बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। छात्रों को अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध होंगे और विद्यालय की समय सारिणी एवं अन्य गतिविधियों में अधिक एकरूपता रहेगी। इस पहल का उद्देश्य उपचारात्मक शिक्षण द्वारा छात्रों की समझ को बेहतर बनाना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करके, छत्तीसगढ़ न केवल वर्तमान कमियों को दूर कर रहा है, बल्कि एक ऐसे भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रख रहा है। जहाँ प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे समग्र विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। युक्तियुक्तकरण का यह कदम एक अधिक कुशल, न्यायसंगत और प्रभावी शैक्षिक वातावरण बनाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

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