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ब्रेन ट्यूमर बीमारी का इलाज एमवाय अस्पताल और निजी अस्पतालों में आधुनिक तकनीकों से किया जा रहा, अब नहीं है लाइलाज

इंदौर मेडिकल हब बन चुके इंदौर में अब गंभीर बीमारियों का इलाज आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया जा रहा है। ब्रेन ट्यूमर बीमारी का इलाज शासकीय एमवाय अस्पताल और निजी अस्पतालों में आधुनिक तकनीकों से किया जा रहा है, लेकिन आवश्यक है कि मरीज समय पर इसके लक्षण पहचानकर इलाज करवाएं।   बीमारी के प्रति जागरूक हो रहे हैं लोग विशेषज्ञों ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर के मरीजों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि अब जांच की सुविधाएं छोटे शहरों और तहसीलों तक पहुंच चुकी हैं। पहले जहां मरीजों को जांच के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, वहीं अब सिटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक जांच तकनीकें छोटे जिलों में भी उपलब्ध हैं। इस कारण बीमारी का पता जल्दी लग जाता है और समय पर इलाज शुरू हो पाता है। पहले जहां लोग इसका इलाज कराने से बचते थे, लेकिन अब योजनाओं का लाभ लेते हुए बड़ी संख्या में मरीज इसका उपचार शासकीय और निजी अस्पतालों में करवा रहे हैं। एमवाय अस्पताल में मिल रहा आधुनिक उपचार न्यूरोसर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि एमवाय अस्पताल में मरीजों को आधुनिक तकनीकों से इलाज मिल रहा है। हर वर्ष करीब 300 ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन किए जाते हैं। जनवरी माह में अस्पताल में मरीज को बिना बेहोश किए ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन किया गया था। यह ऑपरेशन अवेक क्रेनियोटामी पद्धति से किया गया था। अब मरीज स्वस्थ है। इसके अलावा स्पेशियलिटी अस्पताल में इंट्रा-ऑपरेटिव मॉनीटरिंग सिस्टम से मरीजों को उपचार की सुविधा मिल रही है। इससे ऑपरेशन की सफलता दर बढ़ गई है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं। धार से आए मरीज ने बताया कि मुझे लगातार सिरदर्द और चक्कर आते थे। डॉक्टर ने एमआरआई करवाने के लिए कहा, जिसमें ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि हुई। पहले डर लग रहा था, लेकिन डॉक्टरों ने समझाया कि अब इसका इलाज संभव है। मेरी सर्जरी हुई और अब मैं सामान्य जीवन जी रहा हूं। 95 प्रतिशत ऑपरेशन सफल इंदौर में आधुनिक तकनीकों से ब्रेन ट्यूमर के 95 प्रतिशत ऑपरेशन सफल हो रहे हैं। यही कारण है कि लोग भी अब इसके प्रति जागरूक होने लगे हैं। बात करें शहर के निजी अस्पतालों की तो यहां पर भी नई तकनीकों से इसका इलाज किया जा रहा है। न्यूरोसर्जन डॉ. रजनीश कछारा ने बताया कि पहले लोगों को लगता था कि ब्रेन ट्यूमर होने पर मरीजों के बचने की संभावना कम है, लेकिन अब आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर इलाज मिलने लगा है। नेविगेशन से पता चल जाता है कि ट्यूमर कहां है। साथ ही आपरेशन के बाद भी मरीजों को आईसीयू जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। ब्रेन ट्यूमर के संकेत और लक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर के लक्षण उसके प्रकार, विकास की दर, स्थान और ट्यूमर की गंभीरता पर निर्भर कर सकते हैं। ब्रेन ट्यूमर के कुछ सामान्य लक्षण सिरदर्द (विशेष रूप से सुबह उठते ही), उल्टी और जी मचलाना, बोलने, सुनने या देखने की क्षमता में परिवर्तन, संतुलन बिगड़ना, याददाश्त कमजोर होना, थकान होना, दिनभर नींद आना, व्यवहार में परिवर्तन, मिर्गी के दौरे आना आदि हैं। यदि ऐसे कोई लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। ब्रेन ट्यूमर होने की कोई उम्र नहीं होती है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है।

देश में कोरोना संक्रमण के केस 6000 के पार, 24 घंटे में 378 नए केस और छह की मौत

नई दिल्ली देश में कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार डराने लगी है। कोरोना संक्रमण के सक्रिय केसों का आंकड़ा 6000 के पार पहुंच गया है। बीते 24 घंटे में छह कोरोना संक्रमितों की मौत भी हुई है। केरल अब भी देश का सबसे प्रभावित राज्य बना हुआ है। यहां कोरोना के कुल 1950 केस हैं। बीते 24 घंटे में इसमें 144 का इजाफा देखा गया है। इसके बाद गुजरात में 822, दिल्ली में 686, महाराष्ट्र में 595, कर्नाटक में 366, उत्तर प्रदेश में 219, तमिलनाडु में 194, राजस्थान में 132 और हरियाणा में 102 कोरोना के मामले मिल चुके हैं। पिछले 24 घंटे में हुई मौतों की बात करें तो केरल में तीन कोरोना संक्रमितों ने दम तोड़ दिया। एक की उम्र 51 साल, दूसरे की 64 और तीसरे की उम्र 92 साल बताई गई। तीनों ही पुरुष थे और तीनों को पहले से कई बीमारियां थीं। ऐसे ही कर्नाटक में भी दो कोरोना संक्रमितों की मौत हुई। जान गंवाने वाले दोनों पुरुषों की उम्र 51 और 78 साल थी। ये दोनों भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से ग्रसित थे। इसके अलावा एक 42 साल के पुरुष कोरोना संक्रमित की मौत तमिलनाडु में हुई। पिछले 48 घंटों में 769 नए केस केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 48 घंटों में 769 नए संक्रमणों के साथ भारत के सक्रिय कोविड मामले 6,000 के आंकड़े को पार कर गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते कोविड मामलों की वजह से केंद्र सरकार सुविधा-स्तर की तैयारियों की जांच करने के लिए मॉक ड्रिल करा रहा है। सभी राज्यों को ऑक्सीजन, आइसोलेशन बेड, वेंटिलेटर और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। जनवरी से अब तक देश में 65 मौतें मंत्रालय ने कहा कि भारत में 6,133 सक्रिय कोविड मामले हैं। पिछले 24 घंटों में छह और मौतें हुई हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश मामले हल्के हैं और घरेलू देखभाल में ही आइसोलेशन के साथ ठीक कर लिए जा रहे हैं। इस साल जनवरी से अब तक देश में 65 मौतें हुई हैं। 22 मई को देश में कुल 257 सक्रिय मरीज थे। अहम बैठकें भी की गईं इससे पहले 2 और 3 जून को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. सुनीता शर्मा की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, आपातकालीन प्रबंधन प्रतिक्रिया (EMR) प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP), दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पतालों के प्रतिनिधियों और सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ मौजूदा कोरोना स्थिति और तैयारियों का मूल्यांकन करने के लिए तकनीकी समीक्षा बैठकों की एक सीरीज आयोजित की गई थी। बारीकी से निगरानी की जा रही 4 जून को आधिकारिक सूत्रों ने कहा था कि IDSP के तहत राज्य और जिला निगरानी इकाइयां इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (ILI) और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (SARI) की बारीकी से निगरानी कर रही हैं। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा था कि दिशानिर्देशों के अनुसार सभी भर्ती SARI मामलों और 5 प्रतिशत ILI मामलों के लिए परीक्षण की सिफारिश की जाती है।  सकारात्मक SARI नमूनों को ICMR VRDL नेटवर्क के माध्यम से संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजा जाता है।

मुख्यमंत्री साय व मंत्रिमंडल के सदस्यों का दो दिवसीय चिंतन शिविर 2.0 शुरू

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों का दो दिवसीय चिंतन शिविर 2.0 आज आईआईएम रायपुर में प्रारंभ हो गया है। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर (आईआईएम) के सहयोग से दो दिवसीय चिंतन शिविर 2.0 का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के शुभारंभ के पश्चात आज  ‘परिवर्तनकारी नेतृत्व और दूरदर्शी शासन’, संस्कृति, सुशासन और राष्ट्र निर्माण तथा सक्षमता से सततता तक: विकास के लिए सार्वजनिक वित्त पर पुनर्विचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र का आयोजित किया जा रहा है। दो दिवसीय शिविर के दौरान भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, प्रो. हिमांशु राय (डायरेक्टर आईआईएम इंदौर), डॉ. रविंद्र ढोलकिया (आईआईएम अहमदाबाद), संजीव सान्याल (प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद सदस्य), पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक उदय माहुरकर, ग्लोबल डिजिटल स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रताप गुप्ता जैसे ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगे।

इमिग्रेशन पॉलिसी के खिलाफ सड़कों पर लोग, 2 हजार सैनिक तैनात, ट्रंप की बढ़ीं मुश्किलें

लॉस एंजिल्स अमेरिका में जब से डोनाल्ड ट्रंप से सत्ता संभाली है आए दिन कुछ न कुछ बवाल होता ही रहता है। अब अमेरिका के लॉस एंजिल्स में बीते दो दिन से इमिग्रेशन रेड का विरोध हो रहा है और बीते दो दिनों से अलग-अलग जगहों पर हिंसा भड़क चुकी है। जिसमें पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया है। इस स्थिति को संभालने के लिए अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2,000 नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती किए जाने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद प्रदर्शन हिंसक होने की आशंका है।   प्रदर्शन को लेकर अमेरिकी रक्षा विभाग ने क्या कहा? मीडिया की खबर के मुताबिक, लॉस एंजिल्स में इन प्रदर्शनों की शुरुआत शुक्रवार को तब हुई, जब कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे “बड़े पैमाने पर अराजकता” और “सैन्य कार्रवाइयों” का नाम दिया है। रक्षा विभाग ने नेशनल गार्ड को संघीय कानून प्रवर्तन की मदद के लिए सक्रिय करना शुरू कर दिया है। रक्षा सचिव पीट हेग्सेथ ने एक्स पर एक पोस्ट में प्रदर्शनों को “हिंसक भीड़ का हमला” बताया। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शन “अवैध अपराधियों” को हटाने में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।   कैलिफोर्निया के गवर्नर ने दी ट्रंप प्रशासन को चेतावनी व्हाइट हाउस ने शनिवार को एक बयान में कहा कि ट्रंप,कैलिफोर्निया में अराजकता को दूर करने के लिए नेशनल गार्ड्स की तैनाती कर रहे हैं। कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजकम ने इस पर आपत्ति जताई और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर कहा कि ‘रिपब्लिकन राष्ट्रपति का यह कदम जानबूझकर भड़काऊ है और इससे केवल तनाव बढ़ेगा।’ उन्होंने कहा, ‘यह गलत मिशन है और इससे जनता का भरोसा खत्म हो जाएगा। स्थानीय अधिकारी किसी भी समय कानून प्रवर्तन सहायता देने में सक्षम हैं।’ इमिग्रेशन पॉलिसी पर हो रहा हंगामा बता दें कि इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने कई अवैध अप्रवासियों को गिरफ्तार किया। जिससे दंगे भड़के और दंगे के दौरान कुछ वाहनों में आगजनी की गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिनसे पुलिस सख्ती से निपटी। दरअसल, इस सप्ताह लॉस एंजेलिस से करीब 118 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ट्रंप प्रशासन में अवैध अप्रवासियों के खिलाफ सख्ती की जा रही है और बड़ी संख्या में इलीगल इमीग्रेंट को पकड़कर उन्हें निर्वासित कर दिया गया है। विभाग के प्रमुख ने बताया कि उनकी एजेंसी हर दिन करीब 1600 अवैध अप्रवासियों को गिरफ्तार कर रही है।

बहनों को रक्षाबंधन पर बढ़कर मिलेगी लाड़ली बहना योजना की राशि

जबलपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस रक्षाबंधन पर लाड़ली बहनायोजना के तहत मिलने वाली राशि बढ़ाकर दी जाएगी। पांच साल में यह राशि तीन हजार रुपये तक पहुंच जाएगी। वह शनिवार को जबलपुर के कुंडम के समीप ग्राम छपरा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 18 करोड़ 41 लाख रुपये से बने सांदीपनि विद्यालय भवन और 12 करोड़ 63 लाख से निर्मित शासकीय आईटीआई भवन का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं यथावत रहेंगी। वर्तमान में लाड़ली बहना योजना के तहत हर माह 1250 रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में विकास के कार्य हो रहे हैं। प्रधानमंत्री की मंशा है कि गरीब से गरीब व्यक्ति की जिंदगी बेहतर बने। इसी संकल्प के साथ केंद्र और प्रदेश सरकार काम कर रही है। 1400 करोड़ रुपये से आकार लेगा गोमुख जलाशय गोमुख जलाशय लोकार्पण समारोह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जबलपुर और मंडला जिले के किसानों के लिए 1400 करोड़ रुपए की लागत से गोमुख जलाशय बनाया जाएगा। डॉ. यादव ने कहा कि गोमुख जलाशय से 25 हजार हेक्टेयर के क्षेत्र में सिंचाई होगी। इसमें जबलपुर जिले के 14 हजार 900 हेक्टेयर और मंडला जिले के 10 हजार 100 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल हैं।

सीएम साय ने प्रदेश में गौशाला का नाम ‘गौधाम’ करने की घोषणा की

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अभनपुर विकासखंड के सोनपैरी गांव में आयोजित कबीर जयंती महोत्सव एवं गौ ग्राम जन जागरण यात्रा के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को कबीर जयंती की शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरुकुल भवन के लिए 20 लाख रुपये, प्रदेश में गौशाला का नाम ‘गौधाम’ करने तथा सोनपैरी स्कूल में बाउंड्री वाल निर्माण की घोषणाएँ कीं। साथ ही सामुदायिक भवन निर्माण, भुताही पारा से आश्रम तक नाली निर्माण एवं सोनपैरी से खिलोरा मुख्य मार्ग से आश्रम तक सीसी रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी छत्तीसगढ़ की भूमि धन्य है, जहाँ कबीर साहेब जी की वाणी का गहरा प्रभाव रहा है। संत कबीर हमेशा जीव दया का उपदेश देते थे। प्रदेश के संस्कारों के निर्माण में न केवल कबीरपंथ के अनुयायियों का योगदान है, बल्कि उन लोगों का भी, जिनके जीवन में कबीर साहेब जी की निर्मल वाणी ने गहरा असर डाला है। उन्होंने कहा कि कबीर साहेब ने अपना पूरा जीवन जनजागरण को समर्पित किया। उन्होंने अपने उपदेशों से समाज को लगातार सही राह दिखाई। कबीर जी अपने दोहों में जनजागरण की बात करते थे और यह मानते थे कि जीवन अत्यंत अमूल्य है तथा इसका सार्थक उपयोग किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में संत कबीर के मानवतावादी विचारों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया और गौसेवा व सामाजिक एकता पर बल दिया। उन्होंने गौ ग्राम जनजागरण रैली में शामिल गौशालाओं के प्रतिनिधियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह एक अत्यंत सार्थक प्रयास है। श्री साय ने कहा कि गौ-अभयारण्य की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित की जा रही है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में चावल उत्पादन, स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम और बिजली तथा कोयला आपूर्ति के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में जाना जाता है। डॉ. सिंह ने कहा कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। कैबिनेट मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि कबीर, तुलसीदास जैसे संतों ने समाज को नई दिशा दिखाई। हम आर्थिक रूप से चाहे जितनी भी प्रगति कर लें, लेकिन समाज को दिशा और मूल्य संत परंपरा ही दे सकती है। श्री चौधरी ने कहा कि कबीर के विचारों ने समाज को नई दिशा दी और आज के भौतिकवादी युग में भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं। कबीरपंथी जगतगुरु श्री असंग देव जी ने कबीर साहेब की वाणियों के महत्व पर प्रकाश डाला। समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, गोसेवा आयोग अध्यक्ष श्री बिसेसर पटेल, अभनपुर विधायक श्री इंद्रकुमार साहू, विधायक श्री किरण देव सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रामभक्तों के लिए अयोध्या से अच्छी खबर, 10 दिन के अंदर श्रीराम दरबार के दर्शन हो सकते हैं शुरू, ट्रस्ट कर रहा विचार

अयोध्या रामभक्तों के लिए अयोध्या से अच्छी खबर है। 10 दिन के अंदर राम मंदिर के पहले तल पर हाल ही में प्रतिष्ठित राम दरबार के दर्शन शुरू हो जाएंगे। इसके लिए राम मंदिर ट्रस्ट विचार कर रहा है। भगवान राम की नगरी में राम मंदिर निर्माण के बाद अब राम दरबार की स्थापना हो चुकी है। राम मंदिर में राम दरबार की स्थापना के साथ राम मंदिर निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को मंदिर परिसर में चल रहे काम और उन पर होने वाली चर्चाओं के विषय में विस्तार से जानकारी दी। जहां टेंट में विराजमान थे रामलला, वहां सर्वे कर रहा पुरातत्व विभाग नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर के परिसर में राम जन्म स्थान यानी कि जहां पर रामलला टेंट में विराजमान थे, उस स्थल पर एएसआई पुरातत्व विभाग की टीम सर्वे कर रही है। इसके साथ ही मंदिर निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि राम दरबार में 10 दिन के अंदर दर्शन शुरू हो सकता है। राम मंदिर ट्रस्ट इस पर विचार कर रहा है। सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि इस पर चर्चा कर रहे हैं। भगवान के दरबार में जाने और आने को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट व्यापक इंतजाम में जुटा हुआ है। पुष्करणी कुंड का निर्माण अंतिम चरण में, पंचवटी निर्माण का तैयार हो रहा मास्टर प्लान वहीं, राम मंदिर परिसर में सप्तऋषि मंदिरों के बीच में पुष्करणी कुंड का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है।  निर्माण समिति के अध्यक्ष ने कहा कि पंचवटी निर्माण में प्रकृति से कोई भी छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा। यथास्थिति रखते हुए वहां पर पौधे लगाए जा रहे हैं ताकि पशु पक्षियों को पानी पीने और उसका लाभ लेने में कोई असुविधा न हो। इसका निर्माण कार्य कंपनी की ओर से किया जा रहा है। एक महीने में इसका मास्टर प्लान भी लगभग तैयार हो जाएगा। राम मंदिर के दूसरे तल पर संरक्षित किए जाएंगे दुर्लभ ग्रंथ नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि भूतल में रामलला विराजमान हो चुके हैं तो प्रथम तल पर उनका पूरा परिवार, इसके साथ मंदिर के दूसरे तल पर ऐसे ग्रंथ जो अपनी परिभाषा में दुर्लभ कहलाए और भगवान राम से संबंधित होंगे, उनको संरक्षित किए जाने का काम किया जाएगा। सभी तलों पर क्या-क्या होगा, इसको निश्चित कर लिया गया है। राम मंदिर के उत्तर दिशा में एक माह के अंदर मंदिर के द्वार का निर्माण पूरा हो जाएगा। इसे 15 अगस्त तक निश्चित तौर पर पूरा कर लिया जाएगा। रक्षा मंत्रालय समेत भारत सरकार की कई संस्थाओं ने किया निर्माण में सहयोग नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर में भारत सरकार की अनेक संस्थाओं ने सहयोग किया है। इसमें सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट के अलावा रेल मंत्रालय का सहयोग रहा है। जहां रामलला टेंट में विराजमान थे, वहां एएसआई की टीम सर्वे कर रही है। 500 वर्षों के लंबे संघर्ष पर वहां पुरातत्व विभाग की टीम रिसर्च करेगी। इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय की तरफ से राम मंदिर में टाइटेनियम की जाली लगाई जा रही है। सभी संस्थाओं को राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से भुगतान किया गया है।

बांदा का कालिंजर किला- जहां विष पीकर भी महादेव ने दी थी काल को मात, अब रिसॉर्ट-कैफेटेरिया संग नये रंग में नजर आएगा किला

बांदा  उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में स्थित ऐतिहासिक कालिंजर किला अब केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि एक विकसित पर्यटन गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध यह किला अब पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है, जहां अब ठहरने, खाने और घूमने की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ऐसी मान्यता है कि सतयुग से लेकर कलियुग तक हर दौर में यह किला मौजूद रहा है। पहाड़ी पर बसा अद्वितीय किला विंध्य पर्वतमाला की ऊँचाई पर लगभग चार वर्ग किलोमीटर में फैला कालिंजर किला अपनी मजबूत बनावट और रहस्यमय स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। यहां स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर को भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है, जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने विष का पान करने के बाद यहीं पर आराम किया था। किले में मौजूद अन्य दर्शनीय स्थलों में पातालगंगा, अमान सिंह महल, कोटितीर्थ, मंडूक भैरव और स्वर्गारोहण कुंड शामिल हैं। साथ ही यह स्थल चंदेल और बुंदेल राजवंशों की गौरवगाथा को समेटे हुए है। यह किला वीरांगना रानी दुर्गावती की जन्मस्थली के रूप में भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। पर्यटन को मिलेगा नया आयाम अब तक पर्यटकों के लिए कालिंजर में ठहरने की उचित व्यवस्था नहीं थी, लेकिन पर्यटन विभाग द्वारा की जा रही नई पहल से यह कमी जल्द ही दूर हो जाएगी। चित्रकूट धाम मंडल के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि किले के पास ही एक टूरिज्म फैसिलिटी सेंटर, हाई क्लास कैफेटेरिया, रिसॉर्ट, और डॉरमेट्री सहित 20 कमरों वाला तीन मंजिला भवन बनाया जा रहा है। इसमें गार्ड व ड्राइवर रूम की सुविधा भी होगी। इससे न केवल पर्यटक अधिक समय यहां बिता सकेंगे, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। इसके साथ ही हाल ही में रानी दुर्गावती की विशाल प्रतिमा की स्थापना ने भी किले को नया आकर्षण प्रदान किया है। ईको टूरिज्म व्यू प्वाइंट से जुड़ेगा प्राकृतिक सौंदर्य कालिंजर भ्रमण के बाद पर्यटक अब पास के काकुन माता स्थल पर भी जा सकेंगे, जहां एक खूबसूरत ईको टूरिज्म व्यू प्वाइंट का निर्माण किया जा रहा है। उदई पुरवा (नहरी) में स्थित इस स्थल तक पहुंचने के लिए पहाड़ी मार्ग विकसित किया जा रहा है। नरैनी विधायक ओममणि वर्मा ने हाल ही में इन परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। जानकारी के अनुसार कालिंजर में पर्यटन सुविधा केंद्र पर 4.99 करोड़ और काकुन माता ईको टूरिज्म स्थल पर 1.80 रुपए करोड़ खर्च किए जाएंगे। बुंदेलखंड की संस्कृति से होगा साक्षात्कारकालिंजर के समीप खुले गुलमोहर नेचुरल रिसॉर्ट में पर्यटक बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय शिल्प और पारंपरिक खान-पान का अनुभव भी ले सकेंगे। इन सुविधाओं के चलते महोबा और खजुराहो जैसे लोकप्रिय स्थलों की यात्रा करने वाले सैलानियों के लिए कालिंजर भी एक अनिवार्य पड़ाव बनता जा रहा है। पहाड़ी पर बसा चमत्कारी किला, भगवान शिव से है नाता विंध्य पर्वतमाला की ऊंचाई पर लगभग चार वर्ग किलोमीटर में फैला यह किला अपनी भव्यता और मजबूती के लिए जाना जाता है. नीलकंठ महादेव मंदिर इस किले की सबसे बड़ी पहचान है, जहां भगवान शिव को निवास करते हुए माना जाता है. यहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. इसके अलावा किले में कई दर्शनीय स्थल हैं जैसे पातालगंगा, अमान सिंह महल, कोटितीर्थ, मंडूक भैरव, और स्वर्गारोहण कुण्ड, जो इसकी ऐतिहासिकता को और भी मजबूत करते हैं. यह किला चंदेल और बुंदेल वंश की विरासत समेटे हुए है और इसे रानी दुर्गावती की जन्मस्थली के रूप में भी जाना जाता है. अब पर्यटकों को मिलेगा ठहरने का इंतजाम अब तक पर्यटकों को कालिंजर में रुकने की सुविधा नहीं थी, लेकिन अब यह समस्या खत्म होने वाली है. चित्रकूट धाम मंडल के पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि पर्यटन विभाग यहां टूरिज्म फैसिलिटी सेंटर, कैफेटेरिया, रिसॉर्ट, और आवासीय सुविधाएं विकसित कर रहा है. इससे न सिर्फ पर्यटकों को यहां ज्यादा समय बिताने का मौका मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे. रानी दुर्गावती की प्रतिमा बनी नया आकर्षण हाल ही में कालिंजर किले के अंदर रानी दुर्गावती की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन चुकी है. इसके साथ ही किले के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है. पास ही में गुलमोहर नेचुरल रिसॉर्ट भी खोला गया है, जहां पर्यटक बुंदेलखंड की संस्कृति और विरासत से जुड़ी चीजें भी देख सकते हैं. कालिंजर कैसे पहुंचे? कालिंजर किला, बांदा से 55 किमी, चित्रकूट से 78 किमी, खजुराहो से 105 किमी और प्रयागराज से करीब 205 किमी दूर है. यहां तक आप बस, ट्रेन या निजी वाहन के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं. नजदीकी रेलवे स्टेशन बांदा है और सबसे नजदीकी हवाई अड्डा खजुराहो एयरपोर्ट है.

पश्चिमी रिंग रोड इंदौर और धार जिले के गांवों से गुजरेगा, NHAI ने मुआवजा राशि बढ़ाई, सड़क निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा

इंदौर  पश्चिमी रिंग रोड की मुआवजा राशि 600 करोड़ रुपये से बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआइ) ने इंदौर और धार जिले में पश्चिमी रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीनों का मुआवजा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इंदौर जिले की तीन तहसीलों में 795 करोड़ रुपये और धार जिले की पीथमपुर तहसील में लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा पारित किया गया है। इस मुआवजा राशि के अवार्ड पारित हो चुके हैं, जिससे किसानों के खातों में राशि जल्द ही जमा होगी। पहले किसान कर रहे थे विरोध पश्चिमी रिंग रोड को लेकर किसानों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा था। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने मुआवजा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिससे किसानों का विरोध समाप्त हो गया। इसके बाद जिला प्रशासन और एनएचआई ने निजी जमीनों का सर्वे और मैपिंग का कार्य किया। 64 किमी लंबे पश्चिमी रिंग रोड में इंदौर और धार जिले की 570.5678 हेक्टेयर भूमि शामिल है, जिसमें 98.5133 हेक्टेयर शासकीय जमीन है। एनएचआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल ने बताया कि पहले मुआवजे का आकलन कलेक्टर की गाइडलाइन के आधार पर किया गया था। किसानों की मांग के बाद तहसीलों में जमीनों की औसत बिक्री और खरीदी की जांच कर मुआवजे का पुनः आकलन किया गया। पहले 600 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित था, जो अब बढ़कर 1000 करोड़ रुपये हो गया है। सांवेर में सबसे अधिक 473 करोड़ मुआवजा सांवेर तहसील में सबसे अधिक 473 करोड़ रुपये का मुआवजा पारित किया गया है। जिले की तीन तहसीलों के 26 गांवों के 998 किसानों को 795 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा। सांवेर तहसील के नौ गांवों के 512 किसानों को 473 करोड़ रुपये, देपालपुर के पांच गांवों के 153 किसानों को 140 करोड़ रुपये और हातोद के 12 गांवों के 333 किसानों को 182 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा। धार जिले की पीथमपुर तहसील में भी लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा किसानों को मिलेगा। इस मुआवजे से किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी और सड़क निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।

अगर दोनों भाई साथ आ रहे हैं तो… हमें राज ठाकरे के आने से कोई दिक्कत नहीं है: सुप्रिया सुले

मुंबई महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में एक बार फिर उद्धव और राज ठाकरे की पार्टियों के बीच अलायंस की खबरें हैं. इस बीच, शरद पवार की बेटी और NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया आई है. सुले ने कहा, लोकतंत्र में सभी को अधिकार है कि किसे-किसके साथ जाना है… जितने पार्टनर आएंगे तो अच्छा है महाविकास अघाड़ी के लिए. एक साथ मिलकर महाराष्ट्र के लिए काम करेंगे. ताकत बढ़ेगी. अच्छी बात है कि अगर दोनों भाई साथ आ रहे हैं तो… हमें राज ठाकरे के आने से कोई दिक्कत नहीं है. इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था, महाराष्ट्र के लोगों के दिल में जो है, वही होगा. हमारे और हमारे शिवसैनिकों के दिल में कोई भ्रम नहीं है. उनके (मनसे) कार्यकर्ताओं में भी कोई भ्रम नहीं है. दरअसल, उद्धव से चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी के बीच अलायंस की संभावना के बारे में सवाल किया गया था. ठाकरे भाइयों द्वारा हाल में दिए गए बयानों के बाद नगर निगम चुनाव से पहले दोनों के बीच संभावित गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं. उद्धव ने क्या कहा… उद्धव ने कहा, वे एक-दूसरे के संपर्क में हैं. हम संदेश नहीं भेजेंगे. हम सीधे समाचार पहुंचाएंगे. उद्धव ने यह बात तब कही, जब शिंदे सेना के स्थानीय नेता ने यूबीटी सेना जॉइन की. हालांकि, उद्धव ने इस सवाल को टाल दिया कि क्या उनकी पार्टी और मनसे के बीच किसी तरह की गठबंधन वार्ता चल रही है. राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ने के बाद साल 2006 में नई पार्टी मनसे का गठन किया था. अमित ठाकरे बोले- एक-दूसरे से बात करें… वहीं, राज ठाकरे के बेटे और MNS नेता अमित ठाकरे ने गठबंधन पर कहा था, ठाकरे भाइयों को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए. मीडिया में बात करने से गठबंधन नहीं होता. हमारे इस मुद्दे पर बात करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. मुझे दोनों भाइयों के एक साथ आने से कोई दिक्कत नहीं है. अगर वो (उद्धव) चाहें तो फोन कर सकते हैं. मीडिया में बात करने से गठबंधन नहीं होता. उनके पास एक-दूसरे के मोबाइल नंबर हैं. वे एक-दूसरे से बात कर सकते हैं. MNS नेता क्या कह रहे? महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता प्रकाश महाजन ने कहा था कि अगर शिवसेना (यूबीटी) दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर वाकई गंभीर है तो आदित्य ठाकरे को आगे आकर राज ठाकरे से मिलना चाहिए. महाजन का कहना था कि शिवसेना (यूबीटी) में उचित कद के नेता को संभावित गठबंधन पर चर्चा के लिए मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के पास जाना चाहिए. अगर किसी जूनियर नेता को बातचीत के लिए भेजा जाता है तो राज ठाकरे भी किसी जूनियर पदाधिकारी को भेजेंगे. उन्होंने कहा, अगर वाकई गठबंधन होना है तो आदित्य ठाकरे को आगे आकर राज साहब के विचारों को समझना चाहिए. अगर आदित्य ठाकरे बातचीत के लिए जाते हैं तो दोनों पक्ष गंभीरता को समझेंगे. मराठी लोगों में एक साथ आने की भावना है. अलायंस की चर्चाएं कब शुरू हुईं? ठाकरे भाइयों के बीच सुलह की खबरें उस समय तेज हुईं, जब राज ठाकरे ने कहा कि मराठी मानुष (मराठी भाषी लोगों) के हित में एकजुट होना कठिन नहीं है. राज के बयान पर उद्धव ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया है कि वो भी छोटी-मोटी लड़ाइयां किनारे रखने के लिए तैयार हैं. बशर्ते, महाराष्ट्र के हितों के खिलाफ काम करने वालों को जगह ना दी जाए. क्या बोले सीएम फडणवीस? अलायंस की खबरों पर बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, यह राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे को तय करना है कि उनकी पार्टियों को गठबंधन करना चाहिए या नहीं. हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. उद्धव ठाकरे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देना राज ठाकरे का काम है. वे तय करेंगे कि गठबंधन करना है या नहीं. अजित पवार ने भी दिया बयान… एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी कहा कि गठबंधन पर निर्णय संबंधित पार्टी प्रमुखों का विशेषाधिकार है. राज ठाकरे मनसे के प्रमुख हैं और उद्धव ठाकरे शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख हैं. वे तय करेंगे कि रेल इंजन (मनसे का चुनाव चिह्न) और जलती मशाल (सेना यूबीटी का चुनाव चिह्न) के बीच गठबंधन होगा या नहीं. यह दोनों दलों के नेताओं पर निर्भर है कि वे इस पर फैसला लें. इस मुद्दे पर आप और मेरे बीच चर्चा का क्या मतलब है.  

MP में 2 हजार से अधिक डॉक्टरों की भर्ती, MPPSC ने शुरू की प्रक्रिया, मेरिट के अनुसार होगी पोस्टिंग

भोपाल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जुलाई से दो हजार डॉक्टरों की सेवाएं मिलेंगी। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस और पीजी करने वाले बंध-पत्र डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। विभाग ने बंधपत्र डॉक्टरों से नियुक्ति स्थल के लिए पोर्टल के जरिए 30-30 विकल्प मांगे हैं। डॉक्टर 12 जून तक विकल्प पोर्टल पर बता सकेंगे। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। जुलाई माह में इनकी नियुक्ति कर दी जाएगी। अभी ऐसे हालात     प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अभी डॉक्टरों की कमी     4167 पद चिकित्सा विशेषज्ञों के स्वीकृत, 2563 पद इनमें खाली     5439 पद मेडिकल ऑफिसर के स्वीकृत, 1424 पद हैं खाली     639 डेंटल सर्जन के पद स्वीकृत, 392 पद इनमें खाली इसलिए पासआउट विद्यार्थियों की तैनाती कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश लेते समय छात्रों को 10 लाख रुपए का ग्रामीण सेवा बॉण्ड भरना होता है। इसके तहत एमबीबीएस और इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में १ साल चिकित्सा सेवा देना अनिवार्य है। पीजी छात्रों के लिए अवधि 5 साल तक है। ऐसा न करने पर 10 लाख जमा करने होते हैं। मेरिट के अनुसार होगी पोस्टिंग विभाग ने शुक्रवार से पोर्टल खोला है। इस पर विकल्प और अन्य जानकारी मिलेगी। डॉक्टरों को लॉगिन आइडी और पासवर्ड मोबाइल पर भेजे हैं। पोर्टल पर जिला व संस्थावार रिक्तियों की जानकारी मिलेगी। हर स्वास्थ्य संस्था के सामने रिक्तियों की संख्या दिखेगी। वरीयता के आधार पर संस्था चुननी होगी। एक डॉक्टर अधिकतम 30 विकल्प चुन सकेंगे। फिर के अनुसार पोस्टिंग होगी। ऐसे डॉक्टरों को शासन मानदेय देगी। पिछले साल ऐसे डॉक्टरों का मानदेय 55 हजार रुपए प्रतिमाह था। विशेषज्ञों की नियुक्ति विशेषज्ञों की नियुक्ति विशेषज्ञता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से साक्षात्कार के बाद की जाएगी। प्रत्येक विशेषज्ञता के लिए चयन सूची अलग-अलग जारी होगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विशेषज्ञों के कुल तीन हजार 725 पदों से 1800 से अधिक रिक्त हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विज्ञापित पदों में से लगभग 60 प्रतिशत ही मिल पा रहे हैं। चिकित्सा अधिकारियों के 1200 से अधिक पद रिक्त वर्ष 2023 में सीधी भर्ती से विशेषज्ञों के 888 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, पर इनमें 506 ही मिले। कारण, एक तो आरक्षित पदों पर निर्धारित योग्यता के अनुसार डॉक्टर नहीं मिल पाते। दूसरा, जिनका चयन होता है, उनमें कुछ ज्वाइन भी नहीं करते। इसी तरह से चिकित्सा अधिकारियों के कुल पांच हजार 329 पदों में से 1200 से अधिक पद रिक्त हैं। 50 प्रतशित पद संविदा से भरने का प्रविधान स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पद विज्ञापित करने के बाद आयोग ने पिछले माह शुद्धि पत्र भी जारी किया था। इसमें 50 प्रतशित पद संविदा से भरने का प्रविधान किया गया है। संविदा के अभ्यर्थी नहीं मिलने से यह पद ओपन श्रेणी से भरे जाएंगे। इसके अतिरिक्त जिला अस्पतालों में सहायक प्रबंधक के 68 और प्रदेश भर के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 120 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस तरह से नए अस्पताल बन रहे हैं उसी के अनुरूप नए पद सृजित करने की भी प्रक्रिया भी चल रही है।  

स्टारलिंक भारत में हाई स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट देगी, ₹840 में महीनेभर अनलिमिटेड डेटा

मुंबई Elon Musk की Starlink को भारत में सर्विस शुरू करने की दिशा में एक और कामयाबी मिल गई है. SpaceX की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस Starlink को भारत में जरूरी लाइसेंस मिल गया है. इस लाइसेंस के बाद कंपनी अपनी सर्विस को भारत में शुरू कर पाएगी. Starlink कब लॉन्च होगी, इसके बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है. मगर इसकी लॉन्चिंग में अब ज्यादा वक्त नहीं है. इसके बाद सवाल आता है कि भारत में Starlink के आने से क्या बदल जाएगा, जो अब तक नहीं हुआ है. इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में ऑपरेट करने के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट का लाइसेंस मिल गया है।अब उसे सिर्फ इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर यानी, IN-SPACe के अप्रूवल का इंतजार है। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है।स्टारलिंक तीसरी कंपनी है जिसे भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस ऑपरेट करने का लाइसेंस मिला है। इससे पहले वनवेब और रिलायंस जियो को मंजूरी मिली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टारलिंक भारत में 840 रुपए में महीनेभर अनलिमिटेड डेटा देगा। आधिकारिक तौर पर मस्क की कंपनी ने इसकी जानकारी नहीं दी है। क्या बदल देगा Starlink? बात सिर्फ स्टारलिंक की नहीं है, बल्कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की है. भारत में अभी सैटेलाइट इंटरनेट शुरू नहीं हुआ है. जियो और एयरटेल भी इस रेस में शामिल होंगे और स्टारलिंक की एंट्री से इस कंपटीशन में एक इंटरनेशनल प्लेयर आएगा. इससे कंज्यूमर्स को बेहतर सर्विस मिलेगी. हालांकि, स्टारलिंग या फिर दूसरे सैटेलाइट इंटरनेट के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. सवाल है कि Starlink का क्या फायदा होगा. ये एक सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस है, जिसकी मदद से दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. ऐसी जगहे जहां टावर लगाना या ऑप्टिकल फाइबर बिछाना संभव नहीं है, वहां सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. हाल में Starlink पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था, ‘Starlink सैटेलाइट सर्विस टेलीकम्युनिकेशन के बुके में नए फूल की तरह है. पहले सिर्फ फिक्स्ड लाइन्स हुआ करती थी और उन्हें मैन्युअली लोगों तक पहुंचाना पड़ता था. आज हमारे पास ब्रॉडबैंड के साथ मोबाइल कनेक्टिविटी भी है.’ उन्होंने बताया, ‘ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी भी एस्टेब्लिश हो गई है. सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी बहुत जरूरी है. रिमोट एरिया में तार नहीं बिछाए जा सकते हैं या टावर नहीं लग सकते हैं. ऐसी जगहों पर कनेक्टिविटी को सैटेलाइट की मदद से बेहतर किया जा सकता है.’ कितने रुपये करने होंगे खर्च? रिपोर्ट्स की मानें, तो Starlink की शुरुआत अर्बन एरिया से होगी. यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर को आसानी से एस्टेब्लिश किया जा सकता है और टेस्टिंग भी आसानी से हो सकती है. कंपनी भारत में अपनी सर्विस को फेज मैनर में लॉन्च कर सकती है. शुरुआत में Starlink की सर्विस चुनिंदा यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी. वैसे Starlink की सर्विस कॉस्ट को लेकर कोई जानकारी नहीं है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स जरूर आई हैं, जिसमें दावा किया रहा है कि कंपनी प्रमोशनल ऑफर के साथ अपनी सर्विस को इंट्रोड्यूस कर सकती है. Starlink 10 डॉलर (लगभग 850 रुपये) का मंथली प्लान भारत में लॉन्च कर सकती है. संभव है कि Starlink का ये प्लान एक प्रमोशनल ऑफर हो. स्टारलिंक की सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए आपको हार्डवेयर किट भी खरीदनी होगी. इस सर्विस का रेजिडेंशियल लाइट प्लान अमेरिका में 80 डॉलर (लगभग 6862 रुपये) से शुरू होता है. भारत में स्टारलिंक का स्टैंडर्ड हार्डवेयर किट लगभग 30 हजार रुपये में लॉन्च हो सकता है. सैटेलाइट्स से आप तक कैसे पहुंचेगा इंटरनेट?     सैटेलाइट धरती के किसी भी हिस्से से बीम इंटरनेट कवरेज को संभव बनाती है। सैटेलाइट के नेटवर्क से यूजर्स को हाई-स्पीड, लो-लेटेंसी इंटरनेट कवरेज मिलता है। लेटेंसी का मतलब उस समय से होता है जो डेटा को एक पॉइंट से दूसरे तक पहुंचाने में लगता है।     स्टारलिंक किट में स्टारलिंक डिश, एक वाई-फाई राउटर, पॉवर सप्लाई केबल्स और माउंटिंग ट्राइपॉड होता है। हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए डिश को खुले आसमान के नीचे रखना होगा। iOS और एंड्रॉइड पर स्टारलिंक का ऐप मौजूद है, जो सेटअप से लेकर मॉनिटरिंग करता है। जून 2020 में सरकार ने IN-SPACe स्थापित किया था डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने जून 2020 में IN-SPACe को स्थापित किया था। यह स्पेस एक्टिविटीज में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को रेगुलेट करने और उसे सुविधाजनक बनाने के लिए सिंगल-विंडो एजेंसी के रूप में काम करती है। IN-SPACe नॉन-गवर्नमेंटल एंटिटीज के लिए लाइसेंसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और स्पेस बेस्ड स‌र्विसेज को बढ़ावा देने का काम भी करती है। कितने देशों में है स्‍टारलिंक कुछ वीडियोज और कुछ रिपोर्ट्स को देखने के बाद हमें कुछ आंकड़ें मिले हैं जिनसे अलग-अलग देशों में अलग-अलग डाटा प्‍लान की दरों का पता लगता है. स्‍टारलिंक की वेबसाइट के अनुसार कंपनी अमेरिका, यूके, जर्मनी, फ्रांस, स्‍पेन, स्विट्जरलैंड समेत यूरोप के तमाम देशों में मौजूद है. मार्च 2025 तक स्टारलिंक ने 18 अफ्रीकी देशों में आधिकारिक तौर पर लोकल सर्विसेज शुरू कर दी है.    कहां पर कितने का प्‍लान   यूएसए टुडे की रिपोर्ट के अनुसार यूके में स्‍टारलिंक रेजीडेंशियल प्‍लान पर अनलिमिटेड डेटा देता है.  वहीं वेबसाइट https://taun-tech.co.uk/ की रिपोर्ट के अनुसार स्टारलिंक यूके में तीन मुख्य टैरिफ प्लान देता है जो इंटरनेट, बिजनेस (प्रीमियम) और आरवी (एंटरटेनमेंट कैरियर्स) हैं. इंटरनेट प्लान की लागत 75 पौंड प्रति माह है जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 460 पौंड है. जबकि बिजनेस (प्रीमियम) प्लान की लागत 150 पौंड प्रति माह है, जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 2410 पौंड है. आरवी प्लान  95 पौंड प्रति माह पर मिलता है जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 460 पौंड है. हार्डवेयर, शिपिंग और हैंडलिंग शुल्क और टैक्‍स के लिए एक्‍स्‍ट्रा 40 पौंड का भुगतान करना होता है. जबकि जो भी डिवाइस इंस्‍टॉल होती है, वह कनेक्‍शन कट करवाते समय यूजर वापस कर सकता है. अब अमेरिका की बात करते हैं तो यहां पर भी स्टारलिंक मुश्किल जोन में लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट के जरिये अनलिमिटेड सैटेलाइट इंटरनेट प्रोवाइड करने का दावा करता है. अपने घर, आरवी, कैंपर यहां तक कि वहां पर लोग नाव के लिए भी वाई-फाई की सुविधा ले सकते हैं. हाइकर्स और यात्रियों के लिए स्टारलिंक मिनी मौजूद है. यूएसए टुडे की रिपोर्ट के अनुसार स्टारलिंक प्राइसिंग … Read more

इंदौर के राजा रघुवंशी और सोनम की हनीमून यात्रा दुखद अंत में बदली, राजा रघुवंशी की वो बातें, जो सोनम की बहन ने अब बताईं

इंदौर इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी के बाद शुरू हुआ हनीमून अचानक एक खौफनाक मर्डर मिस्ट्री में बदल गया. 22 मई को शिलांग पहुंचे राजा और उनकी पत्नी सोनम की रहस्यमयी गुमशुदगी ने सनसनी फैला दी. राजा की लाश मिलने के बाद सोनम का कोई पता नहीं चल पाया है. होटल में पहुंचे से लेकर लावारिस स्कूटी मिलने तक के सबूत इस मामले की गहराई और भी बढ़ा रहे हैं. शिलांग की वादियों में हुई इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सोनम कहां है और राजा की मौत के पीछे क्या राज छुपा है? राजा और सोनम की शादी 11 मई को हुई थी. शादी के महज 9 दिन बाद 20 मई को दोनों हनीमून मनाने के लिए इंदौर से बेंगलुरु होते हुए गुवाहाटी पहुंचे. वहां कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन के बाद 22 मई को वे शिलांग रवाना हुए. घरवालों के अनुसार, दोनों का प्लान सिर्फ असम तक जाने का था, लेकिन वे अचानक शिलांग कैसे और क्यों पहुंचे, यह सवाल अब गहरा रहस्य बन गया है. शिलांग में हनीमून मनाने गए इंदौर के राजा और सोनम रघुवंशी का एक CCTV फुटेज सामने आया है, जो 22 मई का बताया जा रहा है. इस फुटेज में दोनों को एक होटल के बाहर स्कूटी से आते और बैग रखते हुए देखा जा सकता है. इसके बाद वे स्कूटी से घूमने निकल जाते हैं. यह वही स्कूटी है, जो बाद में 25 किलोमीटर दूर एक पार्किंग में लावारिस हालत में मिली थी. वीडियो में सोनम ने सफेद शर्ट पहने दिखी, जो बाद में राजा के शव के पास बरामद कपड़ों से मेल खाती है. राजा की मां ने आखिरी बार 23 मई को दोपहर डेढ़ बजे सोनम से मोबाइल पर बात की थी. इस कॉल में सोनम ने बताया था कि वे लोग किसी जंगल में घूमने आए हैं, जहां एक झरना भी है. इसके आधे घंटे बाद, यानी 2 बजे सोनम का फोन बंद हो गया और फिर कभी ऑन नहीं हुआ. इसके बाद 26 मई को राजा और सोनम के भाई शिलांग पहुंचे और ईस्ट सोहना पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. इसी दौरान उन्हें एक तस्वीर में स्कूटी का नंबर दिखा, जिससे पता चला कि वह स्कूटी एक टूरिस्ट रेंटल एजेंसी से ली गई थी. पूछताछ में पता चला कि स्कूटी 22 मई को राजा ने किराए पर ली थी. 23 मई की सुबह 6 बजे दोनों होटल से चेकआउट कर गए थे. इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला. 24 मई की रात मवालखियत से 25 किलोमीटर दूर ओसरा हिल्स की पार्किंग में वही स्कूटी लावारिस हालत में मिली. इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाके में तलाशी शुरू की. 28 मई को जंगल में दो बैग मिले, जिनकी पहचान राजा और सोनम के भाई ने की. फिर 2 जून को विजाडोंग पार्किंग लॉट के नीचे एक खाई में राजा की लाश मिली. शव की पहचान दाहिने हाथ पर बने टैटू से हुई. शव के पास एक सफेद लेडी शर्ट, एक पेंट्रा टैबलेट और एक मोबाइल स्क्रीन बरामद हुई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद शिलांग पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. अब बड़ा सवाल है कि सोनम कहां है? उसके साथ क्या हुआ? क्या यह हत्या है या कुछ और? क्या दोनों को किसी षड्यंत्र के तहत मारा गया या वे किसी खतरनाक हालात में फंस गए? शिलांग पुलिस की तफ्तीश जारी है, लेकिन इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है. राजा रघुवंशी की वो बातें, जो सोनम की बहन ने अब बताईं सूख चुके आंसुओं से भरी आंखें, पथराए हुए चेहरे और बदहवास हालत… बुधवार की शाम एक शव जब इंदौर के पलासिया इलाके में पहुंचा तो कुछ ऐसा ही मंजर था। परिवार तो जैसे टूट ही चुका था। कुछ देर शव को घर पर रखने के बाद अंतिम यात्रा शुरू हुई और रीजनल पार्क मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार कर दिया गया। ये शव था राजा रघुवंशी का, जो चंद रोज पहले ही अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए थे। परिवार दोनों के लौटने का इंतजार कर रहा था, लेकिन वापस केवल राजा की लाश लौटी। सोनम अभी भी लापता है। वो कहां है, उसके साथ क्या हुआ, किसी को कुछ नहीं पता। शादी के बंधन में बंधे इस कपल से किसी की क्या दुश्मनी थी, जो इनसे सारी खुशियां छीन ली गईं। आखिर, सिलसिलेवार ये पूरी कहानी समझते हैं। वो 11 मई 2025 का खूबसूरत दिन था, जब मध्य प्रदेश के इंदौर में दो प्यार भरे दिल, अग्नि को साक्षी मानकर एक दूसरे के साथ जीने मरने का वचन लेते हैं। नाम था राजा रघुवंशी और सोनम। नई जिंदगी में कदम रखने की खुशी और आंखों में बहुत सारे सपने लिए, दोनों 20 मई को हनीमून के लिए निकलते हैं। पहले सोचा था कि कश्मीर की वादियों में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर घूमेंगे, लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों ने हनीमून के लिए मेघालय को चुना। राजा और सोनम बेंगलुरू होते हुए असम के गुवाहाटी पहुंचते हैं और मां कामाख्या के दर्शन करने के बाद मेघालय के शिलॉन्ग के लिए रवाना हो जाते हैं। दोनों एक होमस्टे में रुकते हैं और अगले दिन किराए की स्कूटी लेकर घूमने निकल जाते हैं। कुछ देर बाद ही दोनों का संपर्क परिवार से टूट जाता है। जब काफी देर तक बात नहीं होती, तो परिवार परेशान हो जाता है और मेघालय पुलिस को मामले की खबर दी जाती है। हर तरफ राजा और सोनम की तलाश शुरू हो जाती है। मोबाइल बंद हो चुका था, दोनों की आखिरी लोकेशन की भी कोई जानकारी नहीं। परिवारों वालों का दिल डर से भरा हुआ था कि ठीक 11 दिन बाद, 2 जून को को राजा रघुवंशी की लाश एक झरने के पास खाई में मिलती है। लाश बुरी तरह सड़ चुकी थी और पास में एक दाओ (बड़े साइज का चाकू) भी मिलता है। मौके पर जो हालात थे, उन्हें देखकर अंदाजा हो जाता है कि किसी ने बेरहमी के साथ राजा की हत्या की है। सोनम अभी भी लापता है। पुलिस उसकी तलाश में चप्पा-चप्पा खंगाल रही है। … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सीहोर नगरपालिका के विकास के लिये 50 करोड़ रुपये देने के साथ ही अनेक घोषणाएं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर में आयोजित कार्यक्रम में 113 करोड़ 45 लाख 59 हजार रूपये के विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण तथा भूमि-पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने पीएम आवास, कल्याणी पेंशन, परिवार सहायता, संबल, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना सहित विभिन्न योजनाओं के लाभान्वित हितग्राहियों को योजनाओं के स्वीकृति-पत्र भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीहोर नगर पालिका को विकास कार्यों के लिये 50 करोड़ रूपये देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीहोर की यह पावन धरती वर्ष 1857 में हुए स्वतंत्रता संग्राम के क्रांति बिगुल की साक्षी है। जिस प्रकार जलियांवाला बाग में स्वतंत्रता के लिए क्रांतिकारियों ने अपने प्राण न्यौछावर किए, उसी प्रकार इस पावन धरती पर 356 क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने मुख्यमंत्री रहते हुए जो योजनाएं और विकास के कार्य प्रारंभ किए, उन्हें आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा। प्रदेश की लाड़ली बहनों के सशक्तिकरण के लिए बनी योजना की राशि को तीन हजार रूपये तक बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल जाए तो उनकी फसल सोना हो जाती है। सीहोर जिले के हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन सिटी बनने के बाद भोपाल एवं अन्य क्षेत्रों के साथ ही सीहोर जिला भी विकास के नये दौर में प्रवेश करेगा। उन्होंने कहा कि देश एवं प्रदेश को विकसित करने और बेहतर से बेहतर कार्य करने के लिए हमारी सरकार संकल्पित है। विकास का यह सिलसिला आगे भी निरंतर जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सीहोर जिले के विकास के लिए अनेक घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विकास की दौड़ में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश एवं प्रदेश के निरंतर विकास की भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों से 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेंहू की खरीदी की जा रही है। प्रदेश सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। मध्यप्रदेश में आज 30 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं और आने वाले 02 साल के भीतर प्रदेश में इनकी संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का मान और सम्मान बढ़ाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने देश के दुश्मनों को घर में घुसकर मारने का काम किया है, इस महान कार्य में देश की जनता ने भी सरकार का एकजुट होकर साथ दिया है। भारत जियो और जीने दो की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित खेती और समृद्ध किसान ही हमारा संकल्प : केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश का निरंतर विकास हो रहा है। हमारा सदैव यह प्रयास है कि जनता के विकास, मान, सम्मान और स्वाभिमान में कभी कोई कमी न आए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द एक विकसित भारत का निर्माण हो। विकसित भारत के निर्माण के लिए सरकार के साथ जनता की सहभागिता आवश्यक है। जनता के सहयोग के बिना विकसित भारत का निर्माण नहीं किया जा सकता। देश को विकसित बनाने के लिए देश के प्रत्येक गांव को विकसित बनाना होगा, इसके लिए जनता को सरकार के साथ मिलकर कार्य करना होगा। प्रत्येक नागरिक को अपने गांव को विकसित बनाने का संकल्प लेना होगा। विकसित भारत के निर्माण के लिए हम सभी का यह दायित्व है कि हम जल एवं बिजली का संरक्षण करें। अपने गांव, शहर को स्वच्छ और नशामुक्त बनाएं। केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा, सरकार का निरंतर प्रयास है कि कृषि के क्षेत्र में अधिक से अधिक विकास किया जाए, जिससे किसानों की आय बढ़ाई जा सके और अधिक से अधिक बहनों को लखपति दीदी बनाया जाए, जिससे महिलाएं सशक्त बनें। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के पत्र का वाचन करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की 2018 की आवास प्लस सूची के तहत बचे हुए 7 लाख 85 हजार 356 मकानों के निर्माण की स्वीकृति दे दी है, जिनकी लागत राशि 9 हजार 424 करोड़ 3 लाख रूपये है। सभी पात्र हितग्राहियों को आवास मिल सके, इसके लिए प्रदेश में सर्वे किया जा रहा है और पात्रतानुसार हितग्राहियों को आवास योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सौंपा। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में मनरेगा के लिए 06 हजार 263 करोड़ रूपये का लेवर बजट स्वीकृत किया गया है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि को विकसित बनाने के लिए वैज्ञानिक किसानों को घर-घर जाकर तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं। इससे कृषि को मुनाफे का व्यवसाय बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विकसित खेती और समृद्ध किसान ही हमारा संकल्प है। इस अवसर पर सीहोर विधायक श्री सुदेश राय एवं नगर पालिका अध्यक्ष श्री प्रिंस राठौर ने भी संबोधित किया और जिले एवं सीहोर नगर की विभिन्न विकास की आवश्यकताओं से मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री को अवगत कराया। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री करणसिंह वर्मा, पिछड़ा वर्ग एवं जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, बुधनी विधायक श्री रमाकांत भार्गव, आष्टा विधायक श्री गोपाल सिंह इंजीनियर, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य श्री सीताराम यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रचना सुरेंद्र मेवाड़ा, जनपद अध्यक्ष श्रीमती नावड़ी बाई, जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित थे।

मैं अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस सरकार का समर्थन के लिए धन्यवाद करता हूं: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर देते हुए वैश्विक स्तर पर इस दिशा में प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। वह यूरोप में पहली बार आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर” को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और फ्रांसीसी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा, “मैं अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस सरकार का समर्थन के लिए धन्यवाद करता हूं। साथ ही आगामी संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं देता हूं।” उन्होंने कहा कि तटीय और द्वीपीय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अत्यधिक खतरे में हैं। उन्होंने कहा, “इस सम्मेलन की थीम है: तटीय क्षेत्रों के लिए एक लचीले भविष्य का निर्माण। भारत और बांग्लादेश में चक्रवात ‘रेमाल’, कैरेबियन में ‘हैरिकेन बेरिल’, अमेरिका में ‘हेलीन’, दक्षिण-पूर्व एशिया में ‘यागी’ और फिलीपींस में ‘उसागी’ जैसी आपदाओं से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।” प्रधानमंत्री ने भारत की पुरानी आपदाओं की याद दिलाते हुए कहा, “भारत ने 1999 के सुपर साइक्लोन और 2004 की सुनामी की पीड़ा को झेला है। हमने इससे सीखते हुए लचीलापन अपनाया और तटीय इलाकों में चक्रवात शेल्टर बनाए। साथ ही, 29 देशों के लिए एक सुनामी चेतावनी प्रणाली विकसित करने में भी भारत ने मदद की।” भारत की वैश्विक भूमिका पर उन्होंने कहा कि “कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई)” 25 छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ कार्य कर रही है, जिसमें मजबूत घर, अस्पताल, स्कूल, ऊर्जा प्रणालियां, जल सुरक्षा तंत्र और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने कहा, “मैं प्रशांत, हिंद महासागर और कैरेबियन क्षेत्रों से आए मित्रों का स्वागत करता हूं। मुझे यह जानकर खुशी है कि अफ्रीकी संघ भी अब सीडीआरआई का हिस्सा बन गया है।” प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक प्राथमिकताओं में सबसे पहले शिक्षा और कौशल विकास को रखा। उन्होंने कहा, “आपदा प्रबंधन से जुड़े कोर्स, मॉड्यूल और कौशल विकास कार्यक्रम उच्च शिक्षा का हिस्सा बनने चाहिए। इससे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार होंगे।” उन्होंने साझा सीख पर बल देते हुए कहा, “दुनिया भर के कई देश आपदाओं का सामना कर लचीलापन अपनाते हैं। इनके अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए एक वैश्विक डिजिटल भंडार बनाना उपयोगी होगा।” वित्तपोषण पर उन्होंने कहा कि आपदा लचीलापन के लिए नवाचारी वित्त की आवश्यकता है। हमें ऐसे कार्यक्रमों की रूपरेखा बनानी चाहिए जो विकासशील देशों को आसानी से वित्त उपलब्ध करा सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से कमजोर देशों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, “हम छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को बड़े महासागरीय देश मानते हैं। इनकी संवेदनशीलता को देखते हुए इन्हें विशेष ध्यान मिलना चाहिए।” अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से ऐसा बुनियादी ढांचा बनाने की अपील की जो समय और आपदाओं की कसौटी पर खरा उतरे। उन्होंने एक मजबूत और प्रेरणादायक भविष्य का निर्माण करने का आह्वान किया।

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