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स्टारलिंक को India सरकार से मिल गया लाइसेंस, एलन मस्क की भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एंट्री

 नई दिल्ली  भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की एंट्री बहुत जल्द होने जा रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि स्टारलिंक को भारत के दूरसंचार मंत्रालय से एक महत्वपूर्ण लाइसेंस मिल गया है। इस लाइसेंस का मिलना स्टारलिंक के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बता दें कि स्टारलिंक भारत में तीसरी कंपनी होगी, जिसको दूरसंचार मंत्रालायल द्वारा सैटकॉम लाइसेंस मिला है। इससे पहले जियो और एयरटेल को भी ये लाइसेंस मिल चुका है। इससे पहले गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया था कि जल्द ही स्टारलिंक सैटकॉम लाइसेंस दिया जा सकता है, इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार से मंजूरी के बाद अब स्टारलिंक भारत में अपने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की शुरुआत करने के और करीब पहुंच गया है. अब स्टारलिंक भारत की तीसरी ऐसी कंपनी बन गई है जिसे सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने की अनुमति मिली है. संचार मंत्री ने मंजूरी के बारे में बताया देश के संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह जानकारी दी कि अब स्टारलिंक को भारत में सेवा शुरू करने की अनुमति दे दी गई है. उन्होंने बताया कि इससे पहले भारती एयरटेल की OneWeb और रिलायंस की Jio को भी सरकार की तरफ से लाइसेंस जारी किया गया था. अब स्टारलिंक को भी ये लाइसेंस मिलने से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं एक नया रूप लेंगी. उन्होंने कहा कि स्टारलिंक की सैटेलाइट कनेक्टिविटी देश की टेलीकॉम सेवाओं में एक महत्वपूर्ण जोड़ है. पहले सिर्फ फिक्स्ड लाइन कनेक्शन होते थे, फिर मोबाइल नेटवर्क आया, फिर ब्रॉडबैंड और अब ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क भी आ गया है. इन सबके साथ-साथ अब सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी बेहद जरूरी हो गई है. सिंधिया ने यह भी कहा कि देश के उन इलाकों में जहां परंपरागत टावर या केबल लगाना मुश्किल होता है, वहां तक इंटरनेट पहुंचाना अब सैटेलाइट तकनीक से संभव होगा. इससे दूर-दराज और पहाड़ी क्षेत्रों में भी अच्छी इंटरनेट सेवा मिल सकेगी और डिजिटल इंडिया की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ेगा.. क्या है Starlink? Starlink, एलॉन मस्क की कंपनी SpaceX की एक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस है. ये लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस है. इसकी मदद से दुनिया के दूर-दराज के इलाकों में हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. पिछले काफी समय से चर्चा है कि स्टारलिंक की सर्विस भारत में लॉन्च होगी. स्टारलिंक 500 से 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहुत से छोटे सैटेलाइट्स के जरिए काम करती है. ये कोई पहला मौका नहीं जब भारत में स्टारलिंक की चर्चा हो रही हो. कंपनी ने साल 2021 में भारत में प्री-बुकिंग शुरू कर दी थी. हालांकि, भारत सरकार से जरूरी लाइसेंस ना मिलने की वजह से उस वक्त कंपनी को प्री-बुकिंग रोकनी पड़ी थी. जियो और Airtel से करना होगा मुकाबला भारत में इस कंपनी का सीधा मुकाबला रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के OneWeb से होगा. हालांकि, हाल में ही स्टारलिंक ने इस दोनों कंपनियों के साथ साझेदारी का ऐलान किया था. ये ऐलान स्टारलिंक की किट और हार्डवेयर डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर है. स्टारलिंक कई देशों में उलपब्ध है और भारत में इसकी सर्विस शुरू होने में अभी वक्त है.   जरूरी लाइसेंस मिलने के बाद भी अभी तक सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की तस्वीर साफ नहीं हुई है. सैटेलाइट स्पेक्ट्रम बंट जाने के बाद ही कोई कंपनी भारत में अपनी सर्विस शुरू कर पाएगी. यहां एक चुनौती स्पेक्ट्रम आवंटन के तरीके पर है. जहां जियो और एयरटेल पारंपरिक तरीके से स्पेक्ट्रम की नीलामी चाहते हैं. वहीं Starlink एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से बंटवारा चाहती है. फायदे और कीमत अब सवाल है कि Starlink या फिर सैटेलाइट इंटरनेट से लोगों को क्या फायदा मिलेगा. रिमोट एरिया में इससे कनेक्टिविटी आसान हो जाएगा. खासकर ऐसी जगहों पर जहां टावर लगाना या फिर ब्रॉडबैंड की सर्विस पहुंचाना मुश्किल है. सैटेलाइट इंटरनेटज की वजह से ऐसे एरिया में भी बेहतर स्पीड मिलेगी. हालांकि, ये सर्विस किस कीमत पर लॉन्च होती है, ये भी एक बड़ा सवाल है. अभी तक के अनुमान के मुताबिक कंपनी की सर्विस महंगी होगी. स्टारलिंक की किट के लिए आपको अच्छी-खासी राशि देनी पड़ सकती है. वहीं मंथली या ऐनुअल प्लान भी रेगुलर ब्रॉडबैंड प्लान के मुकाबले काफी महंगे होंगे.  

विष्णु सरकार ने गोतस्करी जैसे संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया, गोतस्करी में लिप्त वाहनों की होगी निलामी

रायपुर  राज्य सरकार ने गोतस्करी जैसे संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब इस अपराध में लिप्त आदतन आरोपितों पर सफेमा के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे आरोपितों की संपत्ति को जब्त कर नीलाम किया जाएगा और प्राप्त राशि को गोसेवा में लगाया जाएगा। गृहमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें सभी जिलों के एडिशनल एसपी स्तर के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में जिलेवार समीक्षा की गई और 15 जुलाई 2024 को लागू की गई एसओपी के तहत अब तक हुई कार्रवाई पर चर्चा की गई। गोतस्करी में लिप्त वाहनों की होगी निलामी उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गोतस्करी में लिप्त पाए गए पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाएगा। इसके अलावा तस्करी में इस्तेमाल किए गए वाहनों को राजसात कर उनकी नीलामी की जाएगी। इस धन का उपयोग गोसेवा के लिए किया जाएगा। गोसेवा आयोग को गोसेवकों के लिए पहचान पत्र जारी करने का भी आग्रह किया जाएगा। जिन जिलों में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है, वहां के अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। गोतस्करी केवल अपराध नहीं, संगठित नेटवर्क है: डिप्टी सीएम उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि पुलिस को सफेमा और रासुका जैसे कानूनों को प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों से ठोस कार्रवाई के प्रमाण और आगामी बैठक में पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही उन्होंने कहा कि गोतस्करी केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। डिप्टी सीएम ने यह दिए सुझाव उन्होंने हाईवे पर कमजोर बैरिकेडिंग और तस्करों द्वारा पैदल रास्तों के इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने गोसेवकों व एनसीसी से जुड़े युवाओं को चिन्हित कर निगरानी तंत्र में शामिल करने का सुझाव दिया। साथ ही युवाओं और पुलिस के बीच संवाद स्थापित करने विशेष पास जारी करने पर जोर दिया। टेक्नोलाजी के माध्यम से सूचना तंत्र मजबूत करने की बात भी कही।

भारत में 24 घंटे में कोरोना-19 से 4 मौतें, सक्रिय मामले बढ़कर 5364 हुए

नईदिल्ली कोरोना वायरस धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रहा है। इस वायरस की चपेट में अबतक देश के 5364 से ज्यादा लोग आ चुके हैं। वहीं, मौतें भी 30 से अधिक हो चुकी हैं। इस बीच पानीपत में कोरोना का पहला पॉजिटिव केस सामने आया है और गाजियाबाद में भी कोविड के कुल एक्टिव केस 48 हो चुके हैं। दिल्ली से सटे फरीदाबाद में भी गुरुवार को कोरोना के नए केस मिले हैं। यहां 7 नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिसके बाद यहां भी संक्रमितों की संख्या 38 हो गई है। देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पिछले 20 दिन में केसों की संख्या में 58 गुना की बढ़ोतरी हुई है। 16 मई को देशभर में कोविड के 93 एक्टिव केस थे, जिनकी संख्या अब 5364 पहुंच गई है। कोरोना 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल गया है। बीते 24 घंटे में 500 नए मामले सामने आए हैं। केरल में सबसे ज्यादा 1679 मामले हैं। इसके बाद गुजरात में 615, पश्चिम बंगाल में 596, दिल्ली में 592 और महाराष्ट्र में 548 एक्टिव केस हैं। कोरोना के नए वैरिएंट्स से जनवरी से अब तक 55 मौतें हो चुकी हैं। इनमें से 53 की मौत 15 दिनों में हुई हैं। गुरुवार को दिल्ली में कोविड से दो और मौतें दर्ज की गईं। इनमें एक पांच महीने का बच्चा भी शामिल है। वहीं, केरल में 2, कर्नाटक और पंजाब में 1-1 मौत हुई है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 17 मरीजों ने जान गंवाई है। ओडिशा में गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल कोविड गाइडलाइन के तहत खोले गए हैं। शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने बताया कि जिन बच्चों को सर्दी, खांसी या बुखार जैसे हल्के लक्षण हैं, उन्हें स्कूल में मास्क पहनना अनिवार्य है। गंभीर लक्षण वाले बच्चों को घर पर ही रहकर आइसोलेट होने की सलाह दी गई है। कोरोना को लेकर राज्यों में मॉक ड्रिल हुई केंद्र सरकार गुरुवार को देश भर के राज्यों के चुनिंदा अस्पतालों में मॉक ड्रिल हुई। इस दौरान इन अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई, जरूरी दवाओं की स्थिति और वेंटिलेटर की व्यवस्थाओं को परखा गया। इससे बनी रिपोर्ट में कोरोना की चौथी लहर आने की स्थिति में अस्पतालों की तैयारियों पर रेटिंग दी जाएगी। इससे पहले 2 जून को एक शुरुआती मॉक ड्रिल हुई थी। इसमें हेल्थ सर्विस इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता के लिए अस्पतालों की रेटिंग दी गई थी। इसमें लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक, प्रेशर स्विंग एडजॉर्पशन प्लांट और मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम पर फोकस किया गया था। राज्यों से कोरोना अपडेट…     केरल: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा के लक्षणों वाले मरीजों का इलाज करते समय जून 2023 में जारी की गई कोविड गाइडलाइन पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में सभी को मास्क लगाना अनिवार्य है। साथ ही ​​​​​​जुकाम, खांसी और बुखार जैसे लक्षण वाले मरीजों का कोविड टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है।     महाराष्ट्र: राज्य सरकार के मुताबिक राज्य में जनवरी से अब तक मरने वालों की कुल संख्या 17 है। इनमें से 16 अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे। इस साल अब तक 13,707 सैंपल की टेस्टिंग हुई है। इनमें से 1064 कोविड पॉजिटिव आए।     गुजरात: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 508 कोरोना मरीजों में से 18 अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 490 होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि आमतौर पर 6 या 8 महीनों में कोविड-19 मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है।     कर्नाटक: गुलबर्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने में 25 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया है। इनमें से पांच-पांच बेड ICU (वेंटिलेटर समेत), हाई डिपेंडेंसी यूनिट और पांच प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए हैं। बाकी 10 नॉर्मल बेड हैं।     उत्तराखंड: राज्य सरकार ने बुधवार को गाइडलाइन जारी कर जिला प्रशासन से अस्पतालों में ऑक्सीजन तथा जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। इसके अलावा इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों, सांस की जुड़े गंभीर इंफेक्शन और कोविड मामलों की रिपोर्टिंग करने के भी निर्देश दिए हैं।     सिक्किम: राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जीटी धुंगेल ने बताया कि 29 मई से अब तक राज्य में 526 सैंपल की टेस्टिंग की गई। इनमें से 15 लोग पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद सभी अस्पतालों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना, मास्क पहनना और सैनिटाइजर का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।     हिमाचल प्रदेश: राज्य में कोविड का पहला मामला सामने आने बाद बुधवार को अस्पताल में सभी को मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया। सिरमौर जिले के नाहन में 3 जून को पहला केस मिला था। भारत में मिले कोविड-19 के 4 नए वैरिएंट भारत के कई राज्यों में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच देश में चार नए वैरिएंट मिले हैं। ICMR के डायरेक्टर डॉ. राजीव बहल ने बताया कि दक्षिण और पश्चिम भारत से जिन वैरिएंट की सीक्वेंसिंग की गई है, वे LF.7, XFG , JN.1 और NB.1.8.1 सीरीज के हैं। बाकी जगहों से नमूने लेकर सीक्वेंसिंग की जा रही है, ताकि नए वैरिएंट की जांच की जा सके। मामले बहुत गंभीर नहीं हैं और लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए, बस सतर्क रहना चाहिए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी इन्हें चिंताजनक नहीं माना है। हालांकि निगरानी में रखे गए वैरिएंट के रूप में कैटेगराइज किया है। चीन सहित एशिया के दूसरे देशों में कोविड के बढ़ते मामलों में यही वैरिएंट दिख रहा है। NB.1.8.1 के A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन अन्य वैरिएंट की तुलना में तेजी से फैलते हैं। इन पर कोविड के खिलाफ बनी इम्यूनिटी का भी असर नहीं होता। भारत में कोविड का JN.1 वैरिएंट सबसे आम है। टेस्टिंग में आधे से ज्यादा सैंपल में यह वैरिएंट मिलता है। इसके बाद BA.2 (26 प्रतिशत) और ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20 प्रतिशत) वैरिएंट के मामले भी मिलते हैं।    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोकमान्य तिलक शिक्षण समिति के अभिनंदन समारोह में हुए शामिल

गुरू ही जीवन की दिशा तय करते है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि लोकमान्य तिलक विद्यालय परिसर में भविष्य के विकास का संकल्प निर्मित हुआ मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोकमान्य तिलक शिक्षण समिति के अभिनंदन समारोह में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शुक्रवार को लोकमान्य तिलक शिक्षण समिति के अभिनंदन कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि लोकमान्य तिलक विद्यालय परिसर में भविष्य के विकास का संकल्प निर्मित हुआ है। ये परिसर राष्ट्रवादी विचारों का जीवंत केंद्र है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों में कुलपति के स्थान पर कुलगुरु संबोधित किए जाने पर कहा कि गुरु शब्द अंधेरे से प्रकाश को जोड़ता है। माता-पिता के बाद गुरु ही जीवन की दिशा तय करते हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में लोटी स्कूल से जुड़े अपने विद्यार्थी परिषद के समय के अनुभव भी साझा किए। विधायक अनिल जैन कालुहेड़ा एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे। कार्यक्रम में स्वागत भाषण किशोर खंडेलवाल ने दिया। मुख्यमंत्री ने मेधावी छात्रों को पुरस्कार प्रदान किये। खंडेलवाल ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष शिक्षकों के उन्नयन के लिए 3 दिवसीय अभ्यास वर्ग के चलते आयोजित किया जाता है। इसमें अलग-अलग विषय होते हैं। कार्यकम में विद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कार्यक्रम में 10वीं में टॉपर 3 छात्र, छात्राओं एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिता मल्लखम्भ खेल में मैडल हासिल करने वाले 4 खिलाड़ी छात्र, छात्राओं का सम्मान किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष किशोर खंडेलवाल, सचिव विश्वनाथ सोमन और गिरीश भालेराव ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन गिरीश भालेराव ने किया और आभार प्रदर्शन विश्वनाथ सोमन ने किया।  

पति का शव मिला, पत्नी अभी भी लापता, सोनम के भाई ने कहा- हमें लगता है वह जिंदा है

इंदौर मेघालय में इंदौर के नवविवाहित जोड़े राजा रघुवंशी की हत्या के बाद उनकी पत्नी सोनम अब तक लापता हैं. इस मामले में रघुवंशी समुदाय और परिवार ने अब सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. मृतक राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने इस मांग को और मुखर करते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है. राजा और सोनम बीती 11 मई को शादी के बंधन में बंधे थे, 20 मई को हनीमून के लिए मेघालय गए थे. 22 मई को वे शिलांग के पास मावलखियाट गांव पहुंचे और नोंग्रीट गांव के शिपारा होम स्टे में रुके. 23 मई को सुबह होम स्टे से चेकआउट करने के बाद दोनों लापता हो गए. उनकी किराए की स्कूटी 24 मई को सोहरिम में लावारिस हालत में मिली. 2 जून को वेईसावडॉन्ग झरने के पास एक गहरी खाई में राजा का शव मिला, जिसकी पहचान उनके दाहिने हाथ पर ‘राजा’ टैटू से हुई. मेघालय पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, लेकिन सोनम का अब तक कोई सुराग नहीं मिला. विपिन रघुवंशी ने मीडिया से कहा, ”हम CBI जांच की मांग कर रहे हैं. राजा का शव स्कूटी मिलने की जगह से 25 किलोमीटर दूर पाया गया. हमें शक है कि उनका अपहरण कर हत्या की गई. सोनम का अपहरण हुआ हो सकता है. स्थानीय पुलिस शुरुआती 8 दिनों तक गंभीर नहीं थी.” परिवार ने आरोप लगाया कि राजा की सोने की चेन, हीरे की अंगूठी, कंगन और पर्स गायब हैं, जिससे लूट और हत्या की आशंका गहरा रही है. रघुवंशी समुदाय ने PM मोदी को लिखे पत्र में इस मामले को गंभीरता से लेने और सीबीआई से जांच करवाने की अपील की है. विपिन ने कहा, ”हमारी बहू सोनम को हर हाल में जिंदा ढूंढा जाए. हम चाहते हैं कि इस हत्याकांड की सच्चाई सामने आए.” परिवार ने यह भी आशंका जताई कि स्थानीय गैंग और स्कूटर किराए पर देने वाले व्यक्ति की इसमें भूमिका हो सकती है. मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने इस घटना को अभूतपूर्व बताते हुए न्याय का आश्वासन दिया है. ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सियेम ने कहा, ”यह स्पष्ट हत्या का मामला है. हमने हत्या में प्रयुक्त ‘दाओ’ (धारदार हथियार) और राजा का मोबाइल बरामद किया है. सोनम की तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद से 150 वर्ग किमी क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चल रहा है.” हालांकि, भारी बारिश और दुर्गम इलाका खोज को मुश्किल बना रहा है. इस बीच, इंदौर में राजा के अंतिम संस्कार के दौरान उनके घर के बाहर लगे पोस्टर, जिनमें लिखा था, ”राजा की आत्मा कह रही है- मैं मरा नहीं, मुझे मारा गया. सीबीआई जांच हो,”  अब सभी की निगाहें पीएम मोदी के जवाब और सीबीआई जांच की संभावना पर टिकी हैं. सोनम के भाई ने क्या कहा? सोनम के बड़े भाई गोविंद रघुवंशी ने कहा कि “मुझे लगता है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जरूरत है, जैसा कि राजा रघुवंशी के परिवार ने मांग की है. सोनम और राजा के फोन में लापता होने से पहले नोंग्रियाट का टावर लोकेशन दिखाया गया था, लेकिन राजा का आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट वेइसाडोंग से था, जो मेघालय के प्रसिद्ध टूरिस्ट प्लेस चेरापूंजी या सोहरा के पास है. सोनम ने आखिरी बार 23 मई की दोपहर को अपनी सास से बात की थी. उसी दिन दंपत्ति लापता हो गए थे.” गोविंद रघुवंशी ने कहा कि “इतने दिन हो गए हैं और सर्चिंग में जुटी टीम को कोई सुराग नहीं मिला है. रेस्क्यू टीम को अभी तक उसका फोन या बैग नहीं मिला है. इसलिए, यह अपहरण का मामला है, हम पुलिस और बचाव दल से अपील करते हैं कि वे उम्मीद न छोड़ें और उसे जीवित खोजने के लिए अपना तरीका बदलें. जिस जगह राजा का शव मिला था, उससे लगभग 200 मीटर नीचे टनों कचरा था. अगर यह जगह सुनसान है, तो कचरा कौन डाल रहा है? यह स्थानीय लोग ही होंगे. कौन जानेगा कि उस कचरे के ढेर में एक शव फेंका गया था.” सबसे पहले जानिए कैसे हुए हनीमून मिस्ट्री की शुरुआत? इंदौर में ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने वाले राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम के साथ धूमधाम से हुई। शादी के करीब आठ दिन बाद 20 मई को दोनों हनीमून के लिए रवाना हो गए। कपल इंदौर से गुवाहाटी पहुंचा और कामाख्या माता के दर्शन किए। एक दो दिन घूमने के बाद राजा और सोनम 23 मई को मेघालय के शिलांग के लिए रवाना हुए। इस बीच राजा और सोनम की परिजनों से बात होती रही। लेकिन, बाद में उनसे बात नहीं हो सकी। 24 मई को दोनों के मोबाइल नंबर बंद हो गए। काफी इंतजार और प्रयास के बाद भी दोनों से परिवार वालों का संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद इंदौर से सोनम के भाई गोविंद और राजा के भाई विपिन शिलांग पहुंचे और पुलिस के साथ मिलकर दोनों की तलाश शुरू की। लगातार प्रयास, पर नहीं मिली सफलता   24-25 मई के बाद से शिलांग पुलिस समेत प्रशासन की अन्य टीमें राजा और सोनम की जुटे रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। पहाड़ी, चट्टान और जंगली इलाका होने के कारण सर्चिंग टीम को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई बार खराब मौसम भी सर्च अभियान में बाध बना। स्थानीय पुलिस ने होम स्टे में मिले कपल के बैग खोलकर तलाशी ली, लेकिन उसमें मोबाइल फोन और आभूषण नहीं मिले। खोजी कुत्तों को दोनो के कपड़े सुंघाकर तलाश करने की कोशिश की गई, लेकिन कुत्ते जहां तक गए, वहां भी दोनों नहीं मिले। काफी प्रयास के बाद भी दोनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो परिजनों ने उनकी जानकारी देने वालों को पांच लाख का इनाम देने की घोषणा की। इधर, पुलिस लगातार दोनों के बारे में जानकारी जुटा रही थी। राजा और सोनम के गाइड से पूछताछ की जा रही थी। इस दौरान पता चला कि वे शिलांग से पचास किलोमीटर दूर डबलडेकर रूट पर घूमने के लिए गए थे। दोनों ने एक स्कूटी भी रेंट पर ली थी। स्कूटी संचालक और आसपास के … Read more

आज दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल पर PM मोदी ने फहराया तिरंगा, कटरा से संगलदान तक वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू

जम्मू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज चिनाब रेलवे ब्रिज का उद्घाटन किया। इससे पहले उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज का मुआयना किया। यह ब्रिज जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी के ऊपर बनाया गया है। इसके बाद पीएम मोदी ने अंजी ब्रिज का भी उद्घाटन किया। अंजी ब्रिज, भारत का पहला केबल रेल ब्रिज है। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई, जो घाटी को शेष भारत से जोड़ने वाली पहली ट्रेन है। प्रधानमंत्री ने कटरा रेलवे स्टेशन पर कटरा-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने से पहले ट्रेन के यात्रियों और चालक दल के सदस्यों से बातचीत की। व्यू प्वॉइंट पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी चिनाब नदी पर बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल के निकट स्थित ‘व्यू प्वाइंट’ पर पहुंचे और उन्हें इस परियोजना के बारे में जानकारी दी गई जो कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से रेल द्वारा जोड़ने के लिए अहम है। प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों अश्विनी वैष्णव, जितेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ प्रतिष्ठित पुल के पास स्थापित रेलवे संग्रहालय का दौरा किया। प्रधानमंत्री ‘व्यू प्वाइंट’ तक गए और उन्हें नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इंजीनियरिंग के उत्कृष्ट नमूने के तौर पर चिनाब पुल के बारे में जानकारी दी गई। यह पुल पेरिस स्थित एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है। इंजीनियरों-श्रमिकों से की बातचीत प्रधानमंत्री को संग्रहालय में इंजीनियरों और श्रमिकों के साथ बातचीत करते भी देखा गया। यह संग्रहालय रियासी जिले में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे मेहराब वाले रेलवे पुल का हिस्सा है। बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने चिनाब रेलवे पुल और अंजी नदी पर भारत के पहले ‘केबल-स्टेड’ रेलवे पुल का उद्घाटन किया। ऐतिहासिक है यह वंदे भारत प्रधानमंत्री के उद्घाटन के साथ शनिवार सात जून से इन दोनों वंदे भारत ट्रेनों की वाणिज्य की यात्राएं शुरू हो जाएंगी। श्रीनगर और श्री वैष्णो देवी कटरा के बीच का सभी शुल्कों सहित किराया चेयर कार श्रेणी में 715 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास में 1320 रुपए निर्धारित किया गया है। इन दोनों ट्रेनों के चलने से देश के विभिन्न हिस्सों से कटरा पहुंचने वाले पर्यटकों और रेलयात्रियों को कश्मीर पहुंचने में आसानी होगी। उनकी सात घंटे की सड़क मार्ग की यात्रा अब तीन घंटे में पूरी होगी। कटरा से संगलदान तक वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू इस अवसर पर PM Modi ने कटरा से संगलदान तक चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को रवाना किया। यह ट्रेन 7 जून 2025 से आम यात्रियों के लिए शुरू कर दी जाएगी। इस नई हाई-स्पीड ट्रेन सेवा से धार्मिक और पर्यटक स्थलों के बीच की यात्रा और भी सुविधाजनक और तेज़ हो जाएगी। यह ट्रेन श्रीनगर, कटरा, और उधमपुर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों को जोड़ते हुए जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी को नए स्तर पर ले जाएगी।  

RBI ने रेपो रेट में की 0.50% की बड़ी कटौती, होम लोन होंगे सस्ते! इस साल तीसरी बार

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ी खुशखबरी दी है। RBI ने शुक्रवार 6 जून को रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती का ऐलान किया है। अब रेपो रेट घटकर 5.5% पर आ गई है, जो पहले 6% थी। ये इस साल की लगातार तीसरी कटौती है। इससे पहले फरवरी और अप्रैल में भी रेपो रेट में कटौती की जा चुकी है। RBI के इस फैसले से होम लोन, ऑटो लोन और दूसरे कर्ज सस्ते हो सकते हैं। आम लोगो  मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के 6 में से 5 सदस्यों ने 0.50% कटौती के समर्थन में किया वोट भारतीय रिजर्व बैंक कीमॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के 6 में से 5 सदस्यों ने रेपो रेट में 0.50% की कटौती का समर्थन किया। डॉ नागेश कुमार, प्रो. राम सिंह, डॉ राजीव रंजन, डॉ पूनम गुप्ता और गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 50 बेसिस पॉइंट की कटौती के पक्ष में वोट किया। हालांकि, सौगाता भट्टाचार्य ने थोड़ी नरमी दिखाते हुए सिर्फ 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की सिफारिश की। इस वोटिंग के बाद अब रेपो रेट घटकर 5.5% पर आ गई है, जो इस साल की तीसरी कटौती है। मंहगाई में भी मिलेगी राहत Repo Rate में बंपर कटौती 0.50% की कटौती के बारे में जानकारी शेयर करते हुए आरबीआई गनर्वर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैठक में SDF रेट 5.75% से घटाकर 5.25% किया गया है, जबकि MSF रेट को भी 6.25% से घटाकर 5.75% कर दिया गया है. उन्होंने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बरकरार रहने की बात कहते हुए FY26 महंगाई अनुमान भी जाहिर किया और ये 3.7% रखा गया है. इससे पहले ये 4 फीसदी जताया गया था. इसके साथ ही RBI Governor ने बताया कि बैठक में कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को भी 4 फीसदी से 100 बेसिस पॉइंट घटाकर 3 फीसदी करने का फैसला किया गया है. इकोनॉमिक ग्रोथ को मिलेगा सपोर्ट रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट कट का ऐलान करते हुए इस कदम को इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने वाला बताया. उन्होंने आगे कहा कि भारत लगातार निवेश के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन बन रहा है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार बढ़ रहा है और ये फिलहाल 691.5 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है. इसके अलावा उन्होंने एक और अहम जानकारी शेयर करते हुए बताया कि आर्थिक हालात को देखते हुए आरबीआई ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी स्ट्रेटजी का रुख Accommodative से बदलकर अब Neutral कर दिया है. यानी अब रिजर्व बैंक रेपो रेट घटाने या बढ़ाने को लेकर कोई अक्रामक फैसला नहीं लेगा. रेपो रेट कम होने पर घटती है Loan EMI Repo Rate का सीधा कनेक्शन बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों से होता है. इसके कम होने से लोन की ईएमआई घट जाती है और इसमें इजाफा होने से ये बढ़ जाती है. दरअसल, रेपो रेट वह दर है जिस पर किसी देश का केंद्रीय बैंक धन की किसी भी कमी की स्थिति में वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है. रेपो रेट का उपयोग मौद्रिक अधिकारियों द्वारा इंफ्लेशन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. Repo Rate कट की लगाई हैट्रिक आरबीआई एमपीसी की बैठक बीते 4 जून को शुरू हुई थी और आज 6 जून को इसके नतीजों का ऐलान किया गया. ताजा रेपो रेट कट से पहले भी इसमें इस साल की बीती दो बैठकों में राहत दी गई थी. इससे पहले फरवरी में हुई बैठक में रेपो रेट 0.25 फीसदी घटाया गया था, जिसके बाद ये कम होकर 6.50% से कम होकर 6.25% फीसदी पर आ गया था. तो इसके बाद अप्रैल में हुई FY26 की पहली MPC बैठक में एक बार फिर 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर इसे 6% कर दिया गया था औऱ अब रिजर्व बैंक ने Repo Rate Cut की हैट्रिक लगाकर लोन लेने वाले ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है. 50 लाख के लोन पर कितनी घटेगी EMI मान लीजिए आपने किसी बैंक से 50 लाख का होम लोन 30 सालों के लिए लिया है और इसके बदले आप 9% का ब्‍याज दे रहे हैं तो आपकी मंथली EMI 40,231 रुपये होगी. वहीं RBI के रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद यह ईएमआई घटकर 38,446 रुपये हो जाएगी. यानी मंथली ईएमआई में 2000 रुपये की कटौती होगी.

इंदौर मेंहोंगे महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 के मैच

ग्वालियर मध्य प्रदेश के इंदौर को एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट से जुड़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 की शुरुआत होनी है। जिसके मैच इंदौर के होलकर स्टेडियम में भी होंगे। इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दी है। उनका कहना है कि होने वाले सभी मैच बेहद रोमांचक होंगे। बता दें कि महिला वनडे विश्व कप 2025 के वेन्यू का ऐलान कर दिया गया है। 8 टीमों का यह टूर्नामेंट 30 सितंबर से 2 नवंबर तक भारत और श्रीलंका के पांच अलग-अलग शहरों – बेंगलुरु, गुवाहाटी, इंदौर, विशाखापत्तनम और कोलंबो में आयोजित किया जाएगा। भारतीय टीम बेंगलुरु में पहला मैच खेलेगी। वहीं पाकिस्तान अपने सभी मैच कोलंबो में खेलेगा। 2 नवंबर को होने वाला फाइनल बेंगलुरु या कोलंबो में होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान फाइनल मुकाबले के लिए क्वालीफाई होता है या नहीं। 2024 में खेला गया था आखिरी टी-20 मध्यप्रदेश को 2018 के बाद लगातार 7वें साल आईपीएल का एक भी मैच नहीं मिला है। इससे यहां के फैंस मायूस नजर आ रहे हैं। 14 जनवरी 2024 को इंदौर में आखिरी इंटरनेशनल टी-20 मैच खेला गया था। यह मैच होलकर स्टेडियम में भारत और अफगानिस्तान के बीच था। इसके बाद यह माना जा रहा था कि 2025 के शेड्यूल में इंदौर को एक मैच जरूर मिल सकता है। इंदौर के होलकर स्टेडियम में अब तक 9 इंटरनेशनल मैच और इतने ही आईपीएल मैच हो चुके हैं।

उज्जैन के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का धार्मिक गुरु चिदानंद सरस्वती ने व्यक्त किया आभार

मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव गंगा दशहरा और पर्यावरण दिवस पर “स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट” का आयोजन मध्यप्रदेश की वृहद प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का निरूपण निवेशकों से उपलब्ध अवसर का लाभ लेकर मध्यप्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया नाइपर उज्जैन मेडिसिटी में नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाएगा उज्जैन के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का धार्मिक गुरु चिदानंद सरस्वती ने व्यक्त किया आभार मध्यप्रदेश बहुत प्यारी धरती, यहाँ सब कुछ है: धार्मिक गुरु सरस्वती उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। मध्यप्रदेश को प्रकृति का पूर्ण स्नेह प्राप्त है। भारत के हृदय स्थल में स्थित मध्यप्रदेश में उत्कृष्ट एयर कनेक्टिविटी, रेल नेटवर्क और हाईवे हैं जो देश के हर कोने से मध्यप्रदेश की पहुँच को सुगम बनाते हैं। इन बुनियादी ढाँचों का सतत् विस्तार जारी है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सतना और दतिया एयरपोर्ट का शुभारंभ कर इन सुविधाओं को और समृद्ध किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक मन्त्रोचार की पवित्र ध्वनि के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर उज्जैन में स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट-2025 के मुख्य सत्र का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज गंगा दशहरा और पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट का आयोजन किया गया है। यह अवसर मध्यप्रदेश की वृहद प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का निरूपण भी है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और जीवनशैली आज पूरे विश्व का ध्यान आकृष्ट कर रही है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति प्रेम और पूजन अभिन्न अंग है। भारतीय जीवनदृष्टि केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी जीवनशैली को प्रोत्साहित करती है जिसमें व्यक्ति स्वस्थ रहे और रोगों की संभावना ही न हो। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को मेडिकल हब बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उज्जैन में मेडिसिटी की स्थापना की जा रही है और मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु मात्र ₹1 में 25 एकड़ भूमि प्रदान की जा रही है। निजी क्षेत्र को अस्पताल संचालन में भी हरसंभव सहयोग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव, ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और सेक्टर आधारित समिट के आयोजन से हर क्षेत्र, हर सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 18 नवीन इन्वेस्टर फ्रेंडली पॉलिसी के माध्यम से निवेश प्रक्रिया को सहज और आकर्षक बनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस में 30 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्ताव और 21 लाख 40 हज़ार से अधिक रोजगारों के सृजन के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि रोजगारपरक उद्यमों के लिए 5 हज़ार रुपए प्रति व्यक्ति के मान से विशेष प्रोत्साहन सरकार द्वारा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस है, शांति का टापू है, कुशल मैनपॉवर, उत्कृष्ट अधोसंरचना और प्राकृतिक, आध्यात्मिक स्थल इसे स्पिरिचुअल और वेलनेस क्षेत्र में निवेश के लिए आदर्श स्थल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत सहयोग के साथ-साथ 100 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों के लिए विशेष सहयोग कस्टमाइज्ड नीति के रास्ते भी उपलब्ध हैं। उन्होंने समस्त निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष नाइपर (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) और एमपीआईडीसी के मध्य एमओयू का हस्तांतरण हुआ। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग राघवेन्द्र कुमार सिंह और नाइपर के संचालक शैलेन्द्र सराफ़ ने एमओयू साझा किया। नाइपर उज्जैन मेडिसिटी में नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर तथा उज्जैन की समग्र धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत पर लघु फ़िल्मों का प्रदर्शन किया गया। चिदानंद सरस्वती महाराज ने स्पिरिचुअल और वेलनेस सेंटर स्थापना के लिए दिया आशय पत्र परमार्थ निकेतन के धार्मिक गुरु चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मध्यप्रदेश बहुत प्यारी धरती है। यहाँ सब कुछ है। उन्होंने कहा कि आज के उज्जैन में अधोसंरचना विकास को देखकर नहीं लगता कि यह पुराना उज्जैन है। उन्होंने उज्जैन के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। महाकाल लोक की भव्यता अनुपम है। चारों धाम की यात्रा पूर्ण करने के बाद लोग महाकाल लोक आना चाहते हैं। आज भारत के धार्मिक नगर पर्यटन में शीर्ष पर पहुँच रहे हैं। यह समय है जब निवेशक इस अवसर का लाभ उठायें और पर्यटन अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण में सहभागी बनें। आने वाले सिंहस्थ में यहाँ अपार संभावनाओं का सृजन होने जा रहा है। देश विदेश से करोड़ों पर्यटकों का आगमन होगा। उसके लिए हम सभी को अभी से तैयार रहना होगा। गुरु चिदानंद सरस्वती महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर के समीप स्पिरिचुअल और वेलनेस सेंटर स्थापना के लिए आशय पत्र दिया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्यटन के लिए अनुकूल वातावरण हैं। प्रदेश में जंगल, जंगली जानवर, पवित्र नदियां हैं, वहीं धार्मिक पर्यटन के लिए महाकाल तथा ओंकारेश्वर दो ज्योतिर्लिंग और अन्य आकर्षक धार्मिक स्थल हैं। प्रदेश में आकर्षक हेरिटेज हैं, कई पुराने अच्छे रजवाड़े हैं, जिन्हे हेरिटेज के रूप में विकसित किया गया हैं। पूरे देश मे यूनेस्को के 62 हेरिटेज धरोहरों में से 18 हेरिटेज मध्यप्रदेश में है। मध्यप्रदेश देश के मध्य होने से यहाँ पहुँचना आसान है। प्रधानमंत्री ने टूरिज़्म बढ़ाने पर जोर दिया हैं। टूरिज़्म बढ़ाने के लिए स्वच्छता सबसे आवश्यक हैं। सबसे स्वच्छ शहर “इंदौर” मध्यप्रदेश में है। इन्दौर ही नहीं अन्य शहरों में भी स्वच्छता की स्थिति बेहतर है। इन्दौर की स्वच्छता पश्चिमी देशों के समतुल्य हैं। प्रदेश में इन्वेस्टमेंट के लिए 18 नई पॉलिसीज बनाई हैं और कुछ पुरानी पॉलिसीज हैं। इनमें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रमुख रूप से आर्थिक मदद और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में बराबरी का हैं या बेहतर हैं। निवेशकों को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए आवश्यक अनुमतियां एनओसी को सुविधाजनक बनाया गया। प्रदेश में सबसे पहले राइट टू पब्लिक डिलीवरी सिस्टम लागू किया गया,जिसमें निर्धारित अवधि में अनुमतियां जारी होगी। इस अवसर पर भण्डारी ग्रुप के चेयरमैन विनोद भण्डारी ने उज्जैन में बन रहे मेडिकल टूरिज्म पर प्रकाश डाला। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति शिवशेखर … Read more

पीएम मोदी ने चिनाब रेलवे ब्रिज का किया उद्घाटन, वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर श्रीनगर किया रवाना

 जम्मू-कश्मीर आज जम्मू-कश्मीर एक महत्वपूर्ण क्षण का साक्षी बनेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिनाब नदी पर बने अद्वितीय चिनाब पुल को राष्ट्र को समर्पित किया. इसके साथ ही, कटरा से वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर श्रीनगर के लिए रवाना किया. इस परियोजना के माध्यम से कश्मीर का रेल मार्ग कन्याकुमारी तक जुड़ जाएगा, जिससे दिल्ली और कश्मीर के बीच की दूरी कम होगी. चिनाब ब्रिज विश्व का सबसे ऊँचा रेल आर्च ब्रिज है, जो भूकंपीय क्षेत्र पांच में स्थित है. यह पुल दो पहाड़ों के बीच निर्मित है, जहाँ तेज हवाओं के कारण विंड टनल फिनोमेना का अनुभव होता है. इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए, पुल को 260 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा की गति का सामना करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है. चिनाब ब्रिज 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और पेरिस के एफिल टॉवर से भी ऊंचा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज कटरा से श्रीनगर तक उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) पर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे. इस अवसर पर वे दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल, चेनाब ब्रिज और अंजी ब्रिज का उद्घाटन भी करेंगे. इसके साथ ही, कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी. आजादी के 77 साल बाद भी कश्मीर बर्फबारी के मौसम में देश के अन्य हिस्सों से कट जाता है, खासकर नेशनल हाईवे-44 के बंद होने के कारण. इस स्थिति में जम्मू से कश्मीर पहुंचने में 8 से 10 घंटे का समय लग जाता था. लेकिन अब ट्रेन सेवा शुरू होने से यह यात्रा मात्र तीन घंटे में पूरी हो सकेगी. रेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार के कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि रेलवे ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक पर दो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है. ये ट्रेनें श्री माता वैष्णो देवी, कटरा से श्रीनगर के बीच प्रतिदिन संचालित होंगी. पहली ट्रेन सुबह 8:10 बजे और दूसरी 14:55 बजे (दोपहर 2:55 बजे) रवाना होगी. सुबह 8:10 बजे चलने वाली ट्रेन बनिहाल से होते हुए लगभग तीन घंटे में सुबह 11:10 बजे श्रीनगर पहुंचेगी, जबकि दूसरी ट्रेन शाम 6 बजे श्रीनगर पहुंचेगी. इसके विपरीत, 26404 ट्रेन प्रतिदिन सुबह 8 बजे श्रीनगर से चलकर श्री माता वैष्णो देवी, कटरा स्टेशन पहुंचेगी. दूसरी ट्रेन दोपहर 2 बजे श्रीनगर से रवाना होकर प्रतिदिन शाम 5:05 बजे कटरा पहुंचेगी. इन ट्रेनों में आठ कोच होंगे, जिसमें एक्जीक्यूटिव क्लास और चेयर कार की सुविधा उपलब्ध होगी. चिनाब ब्रिज प्रोजेक्ट को पूरा होने में लगे 22 साल कश्मीर घाटी को देश के अन्य हिस्सों से साल भर रेलवे के माध्यम से जोड़ने के लिए 1997 में USBRL प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी, जिसे पूरा करने में 28 साल से अधिक का समय लगा. चिनाब ब्रिज इसी उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी लागत 43 हजार 780 करोड़ रुपये है. इस 272 किमी लंबी रेललाइन में 36 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई 119 किमी है. इसमें 12.77 किमी लंबी T-49 टनल देश की सबसे लंबी ट्रांसपोर्ट टनल मानी जाती है. इसके अलावा, इस ट्रैक पर 943 पुल हैं, जिनकी कुल लंबाई 13 किमी है. कश्मीर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना का कार्य 1997 में आरंभ हुआ था. हालांकि, भूवैज्ञानिक और मौसम से संबंधित कठिनाइयों के कारण इस परियोजना की समयसीमा कई बार बढ़ाई गई, जिससे इसकी लागत में भी वृद्धि हुई. अंततः यह परियोजना 41,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में पूरी हुई. कुल 272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल परियोजना के 209 किलोमीटर हिस्से का कार्य विभिन्न चरणों में सफलतापूर्वक पूरा किया गया है. अक्टूबर 2009 में 118 किलोमीटर लंबे काजीगुंड-बारामूला खंड का पहला चरण समाप्त हुआ. इसके बाद, जून 2013 में 18 किलोमीटर लंबा बनिहाल-काजीगुंड खंड, जुलाई 2014 में 25 किलोमीटर लंबा उधमपुर-कटरा खंड, और पिछले वर्ष फरवरी में 48.1 किलोमीटर लंबा बनिहाल-संगलदान खंड पूरा किया गया. इसके अतिरिक्त, 46 किलोमीटर लंबे संगलदान-रियासी खंड का कार्य भी पिछले साल जून में समाप्त हुआ, जबकि रियासी और कटरा के बीच 17 किलोमीटर का शेष हिस्सा अंततः पिछले साल दिसंबर में पूरा हुआ.

मध्यप्रदेश देश का वेलनेस मिशन का ग्लोबल इंजन बनने को तत्पर, मध्यप्रदेश भारत के वेलनेस मिशन के नेतृत्व को तैयार

स्पिरिचुअल एंड वेलनेस समिट-2025 उज्जैन मध्यप्रदेश बनेगा ग्लेाबल वेलनेस सेंटर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव समिट में आये 1,929 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश भारत के वेलनेस मिशन के नेतृत्व को तैयार मध्यप्रदेश देश का वेलनेस मिशन का ग्लोबल इंजन बनने को तत्पर समिट में हुआ नीति-निवेश अध्यात्म और समाज कल्याण का संगम मुख्यमंत्री का निवेशकों को आमंत्रण : मध्यप्रदेश आएं ओर भारत को विश्व गुरू बनाने की यात्रा में सहभागी बनें उज्जैन स्पिरिचुअल एंड वेलनेस समिट-2025 उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में “स्पिरिचुअल एंड वेलनेस समिट” में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “हील इंडिया” और ‘लाइफ स्टाइल’ (LiFE) जैसे दूरदर्शी विचारों से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश को समग्र जीवनशैली और वेलनेस नवाचार का ग्लोबल सेंटर बनाया जा रहा है। समिट के माध्यम से प्रदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत के वेलनेस मिशन का नेतृत्व करने को पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट को एक परिवर्तनकारी पहलबताया और कहा कि यहां नीति, निवेश, अध्यात्म और समाज कल्याण का संगम हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब  भारत के वेलनेस मिशन का ग्लोबल इंजन बनने को तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट में वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के निवेशकों से14 वन-टू-वन बैठकेंकीं, जिनमें बुनियादी ज़रूरतों, निवेश समर्थक नीतियों और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। समिट में 1929 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा एक ही दिन होने का सुखद संयोग हुआ है। इस अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का प्रदेश में पुनः शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 5 करोड़ पौधे रोपे गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सरकार रोजगार सृजन के लिए तेजी से काम कर रही है। धार्मिक स्थानों पर सभी चिकित्सा पद्धतियों के बड़े केन्द्र बनाने के पीछे आशय यही है कि दुनिया भर के लोगों को स्वास्थ्य के साथ अध्यात्म भी प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले साल सभी संभागीय मुख्यालयों पर हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और फरवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में हुए ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट 30 लाख करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, यहां 21 लाख 75 हजार रोजगार सृजन होने की संभावना भी है। उन्होंने कहा कि हमने 2025 को उद्योग वर्ष घोषित किया है और लगातार सेक्टर वार समिट का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदसौर और नरसिंहपुर में एग्री समिट के अलावा इंदौर में आईटी समिट के अच्छे परिणाम आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नीति आयोग ने प्रदेश को तेज गति से आगे बढ़ने वाले राज्यों में अग्रणी माना है। मध्यप्रदेश में सरप्लस बिजली के साथ उत्कृष्ट अधोसंरचना और नई नीतियों के चलते निवेशकों ने यहां का रूख किया है। उन्होंने एमएसएमई सहित अन्य उद्योग को घोषित नीति अनुसार 5000 करोड़ रूपये का अनुदान दिये जाने का उल्लेख भी किया।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्पष्ट नीति, सक्षम प्रशासन और मजबूत नेतृत्व के साथ निवेशकों को स्थायित्व और सफलता की गारंटी देता है। उन्होंने सभी वेलनेस उद्यमियों और संस्थाओं से प्रदेश में निवेश करने और उज्जैन से शुरुआत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश आएं, और भारत को विश्वगुरु बनाने की यात्रा में भागीदार बनें।” समिट में एनआईपीआर अहमदाबाद और एमपीआईडीसी के बीच समझौता हुआ, जिसके अंतर्गत उज्जैन मेडिकल डिवाइस पार्क को तकनीकी और शैक्षणिक सहायता प्राप्त होगी। यह पार्क टेस्टिंग और प्रमाणीकरण हब के रूप में विकसित किया जाएगा। समिट में शिवंदरसिंह संस्‍थापक एराहॉस्पिटैलिटी, मुकुंदप्रसाद डायरेक्‍टर लीजरहोटल्सग्रुप, अशोक पटेल चेयरमेन ट्रैवलपैक, शरदथडानी एमडी मेफ़ेयरट्रैवल्स एवं सुधीर एमवी सीएओ जिंदल नेचुरोकेयर इंस्टिट्यूट द्वारा निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।   परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने आध्यात्मिक संबोधन दिया और उज्जैन में केंद्र स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को आशय पत्र (एलओआई) सौंपा। लीज़र होटल्स, शतायु आयुर्वेद और भंडारी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश को वेलनेस निवेश के लिए उपयुक्त गंतव्य बताया। प्रमुख निवेश प्रस्तावों में भंडारी ग्रुप –984 करोड़ रूपये, अमलतास ग्रुप –400 करोड़ रूपये, सीएचएल हॉस्पिटल ग्रुप –200 करोड़ रूपये, लेटेंट डेवकॉन, लाभम ग्रुप, शथायू आयुर्वेद, रॉयल ऑर्किड, शांतिगिरी आश्रम, जिंदल ग्रुप सहित अन्य निवेशकों के प्रस्ताव शामिल हैं। पैनल चर्चा में तैयार हुआ विज़न रोडमैप समिट में दो पैनल सत्र आयोजित किए गए, जिनमें वेलनेस इन्फ्रास्ट्रक्चर, सिंहस्थ आधारित मेडिकल टूरिज्म, रोज़गार सृजन, और कौशल विकास जैसे विषयों पर विचार हुआ। मुख्य सत्र में वेलनेस विज़निंग  में प्रदेश का समग्र रोडमैप प्रस्तुत किया गया।   स.क्र. नाम पद कंपनी प्रस्‍तावित निवेश (करोड) 1 डॉ विनोद भंडारी फाउंडर एवं चेयरमैन भंडारी ग्रुप 984 2 सुरेश सिंह भदौरिया फाउंडर एवं चेयरमैन अमलतास ग्रुप 400 3 राजुलभार्गव डायरेक्‍टर सीएचएलहॉस्पिटलग्रुप 200 4 देवांगकपाडिया डायरेक्‍टर लेटेन्‍टडेवकॉन 100 5 युगांशसोनी डायरेक्‍टर लाभमग्रुप 100 6 डॉ. मृत्युंजयस्वामी सीईओएवंएमडी शथायुआयुर्वेद 75 7 सुदीपरॉय डायरेक्‍टर रॉयलऑर्किडहोटल 50 8 स्वामीचितासुधनज्ञानतपस्वी जोनलहेड शांतिगिरीआश्रम 10 9 हितेश्वरसिंहसिसौदिया सीईओएवंएमडी सनसेटडेज़र्टकैंप 10      

मुख्यमंत्री ने ‍माँ क्षिप्रा को 351 फीट की चुनरी चढ़ाई

माँ क्षिप्रा के कल कल बहते शुद्ध जल के साथ होगा सिंहस्थ का भव्य आयोजन : मुख्यमंत्री डॉ यादव  ऐतिहासिक अवंतिका नगरी में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन किया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ यादव मुख्यमंत्री ने ‍माँ क्षिप्रा को 351 फीट की चुनरी चढ़ाई उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऐतिहासिक अवंतिका नगरी में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दौरान माँ ‍क्षिप्रा में कल कल बहता शुद्ध जल प्रवहमान रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रामघाट पर सपत्नीक पूजा-अर्चना के साथ माँ ‍क्षिप्रा को 351 फीट लंबी चुनरी चढ़ाई। उन्होंने प्रदेश की उन्नति की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के ऐतिहासिक महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि काल के प्रत्येक प्रवाह में उज्जैन नगरी का अस्तित्व रहा है, यह नगरी सदैव जीवंत रही है। सम्राट विक्रमादित्य ,सम्राट अशोक से लेकर कई प्रतापी सम्राटों की कर्मभूमि यह अवंतिका नगरी रही है। यह नगरी कई ऐतिहासिक घटनाओं को अपने में समेटे हुए हैं। माँ ‍क्षिप्रा कई ऐतिहासिक गतिविधियों की साक्षी है, मोक्षदायिनी अवंतिका नगरी देवताओं की राजधानी है। इस नगरी का संबंध महाकवि कालिदास तथा राजा भृतहरी जैसे इतिहास पुरुषों से है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश शासन गरीब कल्याण का संकल्प लेकर कार्य कर रहा है। औद्योगिक विकास के लिए निवेश की संपूर्ण संभावनाओं के साथ विकास जारी है। सकारात्मक औद्योगिक नीति के कारण प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है । शिक्षा तथा चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में उल्लेखनीय रूप से मेडिकल कॉलेज की संख्या में वृद्धि हुई है। देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को भी पूर्ण सम्मान के साथ अपनाया जा रहा है। जल भंडारण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। हम अपने तीज त्योहारों को संपूर्ण आस्था के साथ मना रहे हैं तीज त्यौहार हमें प्रकृति तथा परमात्मा से जोड़ते हैं। स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश एक नई पहचान बना रहा है। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ का भव्य आयोजन दिव्य स्वरुप में होगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश का भाग्य बदल रहा है उन्होंने कहा कि मां क्षिप्रा के घाटों पर आरती की भव्यता सदैव स्मरणीय है। बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प है कि माँ शिप्रा का जल सदैव प्रवाह मान रहे कल कल रूप से निरंतर बहता रहे। आगामी सिहस्थ के दौरान माँ शिप्रा के पक्के घाटों पर सुविधाजनक ढंग से करोड़ों लोग दिव्य स्नान कर सकेंगे। कार्यक्रम में डॉ. श्रीराम तिवारी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर लेजर शो हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। इस दौरान कार्यक्रम में ऋषिकेश से पधारे स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, सांसद अनिल फिरोजिया, जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन उपस्थित थे।  

इंदौर नगर निगम शहर में निम्न दरों पर जनता को कराएँगे राइड, जल्द शुरू होगी कैब सर्विस

इंदौर एमपी के इंदौर शहर में कई कंपनियां ऑनलाइन कैब और दोपहिया उपलब्ध करवाती हैं। इसी तर्ज पर अब नगर निगम एप बेस्ड कैब सर्विस शुरू करने जा रहा है। दावा है कि इससे किफायती दाम पर बेहतर सर्विस मिलेगी।  पहले चरण में शहर से मेट्रो तक पहुंचने और यहां से जाने के लिए इसे शुरू किया जाएगा। बाद में इस सुविधा का विस्तार किया जाएगा, लेकिन इसका संचालन शहरी सीमा में ही होगा। इसमें टैक्सी के साथ ई रिक्शा को भी शामिल करना प्रस्तावित है। तैयार हो रहा एप इस सुविधा के लिए स्मार्ट सिटी एप तैयार कर रही है। पहले चरण में मेट्रो नेटवर्क से इसे जोड़ने का कारण यह है कि अभी मेट्रो ट्रेन तक आने के लिए कई लोग निजी वाहनों का उपयोग करते हैं। इन वाहनों की पार्किंग को लेकर दिक्कत होती है। यह सुविधा शुरू होने से कोई भी व्यक्ति राइड बुक कर सकता है। कई बार वाहन चालकों के दुर्व्यवहार और मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें आती हैं। निगम की व्यवस्था में लोगों को इससे राहत मिलेगी। किराये पर होगा नियंत्रण निगम के एप पर रजिस्टर्ड वाहनों को ही बुकिंग की जानकारी मिलेगी। वे लोकेशन पर पहुंचेगे और सवारी को नियत स्थान तक छोड़ेंगे। वाहन बुक करने से लेकर यात्री को छोड़ने तक की निगरानी निगम या स्मार्ट सिटी के पास रहेगी। इससे यात्रियों से लिए जाने वाले मनमाने किराये पर नियंत्रण रहेगा। एप पर रजिस्टर्ड वाहन चालकों की पूरी जानकारी रहेगी और उनका पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाएगा। निगम के वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि यह सेवा जल्द शुरू होगी। इससे यात्रियों को सुरक्षा और किफायती सफर की सौगात मिलेगी तो अन्य लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही बेतरतीब चल रहे ई रिक्शा पर कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सकेगा।  

नई जनगणना के सारे आंकड़े 2029 से पहले आना मुश्किल, परिसीमन में सीटें घटने को लेकर आशंकित हैं दक्षिणी राज्य

नई दिल्ली  केंद्र सरकार 16 जून को अगली जनगणना को लेकर अधिसूचना जारी कर सकती है। वैसे जमीन पर ‘जनगणना-2027’ की प्रक्रिया 2026 में शुरू होगी और इस तरह से इसमें छह साल की देरी होगी, जिसके लिए मुख्य तौर पर कोविड महामारी को जिम्मेदार माना जा सकता है। क्योंकि, जनगणना का काम तब जो लटका, वह लटकता ही चला गया। इस बार की जनगणना के भरोसे राजनीतिक तौर पर कम से कम दो अहम चीजें लटकी हुई हैं। एक तो कानून के मुताबिक 2026 के बाद होने वाली जनगणना को ही आधार मानकर निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होना है। क्योंकि, देश में आबादी के हिसाब से जनप्रतिनिधियों की संख्या काफी कम है और निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों में भी बड़ी असमानताएं उभर रही हैं। दूसरी तरफ संसद ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण की व्यवस्था की है, यह भी तभी संभव है जब निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन हो। लेकिन, मौजूदा परिस्थितियों में कहना मुश्किल है कि यह सब 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए संभव हो सकेगा। केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार 1 अप्रैल, 2026 से जनगणना शुरू हो सकती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, इस हिसाब से यह काम 2021 में ही हो जाना था। सरकार ने नई जनगणना के लिए 1 मार्च, 2027 को रेफ्रेंस डेट के रूप में तय किया है। मतलब, जनगणना के आंकड़ों के लिए यही तारीख आधार होगी। हालांकि, अभी यह नहीं बताया गया है कि जनगणना के आंकड़े कब जारी होंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जनगणना से जुड़े सभी आवश्यक आंकड़े 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले आ जाएंगे? अगर सरकारी सूत्रों की मानें तो इसका जवाब है नहीं। मसलन, एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा है कि जातिगत आंकड़े तीन साल में जारी किए जा सकते हैं। हालांकि, यह संभावना नहीं है कि जातिगत गणना ही आरक्षण का आधार बनेगी। पिछली जनगणना में आंकड़े जारी होने में करीब दो साल लगे अगर पिछली जनगणना को देखें तो अंतिम जनसंख्या गणना के आंकड़े जारी होने में लगभग 2 साल लग गए थे। हालांकि, यह देखने वाली बात है कि क्या सरकार इसकी कोई तारीख बताती है, जब जनगणना के आंकड़े आने की संभावना है। क्योंकि, बेहतर तकनीक और डिजिटल डेटा के इस्तेमाल से अब जनगणना में उतना वक्त लगने की संभावना नहीं है, जितना की पहले लगा करता था। पिछले परिसीमन में लगा था करीब साढ़े तीन साल का वक्त मान लिया जाए कि जनगणना के आंकड़े पहले के मुकाबले जल्द भी आ जाएं और परिसीमन आयोग 2029 के चुनाव से पहले अपना काम शुरू भी कर देता है, तो भी इसे परिसीमन के काम में लंबा वक्त लग सकता है। जैसे 2001 की जनगणना के बाद 2002 में परिसीमन आयोग बना था। उसने उसी जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया और इसके गठन से लेकर काम पूरा करने में मोटे तौर पर साढ़े तीन साल लग गए और 2007 में जाकर काम पूरा हुआ, जो कि 2008 से प्रभावी हुआ। मतलब, 2009 के लोकसभा चुनावों इसकी ओर से किया गया बदलाव अमल में आ पाया। परिसीमन में सीटें घटने को लेकर आशंकित हैं दक्षिणी राज्य अगर राजनीतिक तौर पर देखें तो इस बार के परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्य पहले से ही चिंतित बैठे हुए हैं। उनको डर है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण पर बहुत काम किया है और उसे काफी नियंत्रण में रखा है। लेकिन, अगर आबादी परिसीमन की आधार बनी तो उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं और बिहार और यूपी जैसे राज्यों को इसका फायदा ज्यादा सीटों के तौर पर मिल सकता है। इसलिए, परिसीमन के काम को लेकर भारी विरोध भी दिख रहा है। सरकार को यह भी देखना है कि कहीं यह मुद्दा उत्तर और दक्षिण भारतीय राज्यों में बड़ी विवाद की वजह न बन जाए। केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार है, जो आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी दल टीडीपी के समर्थन पर टिकी है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए इसपर तेजी से बढ़ना राजनीतिक रूप से भी आसान नहीं होगा। इन सारे हालातों को देखने के बाद यही लगता है कि नई जनगणना के आंकड़े 2034 के लोकसभा चुनावों से पहले काम में आना मुश्किल है।  

बक्सवाहा की जमीन के नीचे दबा है 6000 किलो हीरे का भंडार, जिसकी कीमत 70 हजार करोड़

छतरपुर  जिले से 100 किमी दूर बक्सवाहा के जंगलों में एक ऐसी खोज हो चुकी है, जो मध्य प्रदेश की तकदीर और तस्वीर बदलने का दम रखती है. 25 साल पहले बंदर डायमंड प्रोजेक्ट के तहत बक्सवाहा के जंगलों में एक सर्वे शुरू हुआ था, जिसमें जमीन के नीचे 3 करोड़ कैरेट से ज्यादा (लगभग 6000 किलो) हीरे का भंडार होने का दावा किया गया था. उस वक्त इस डायमंड डिपॉजिट की अनुमानित कीमत 55 हजार करोड़ रू आंकी गई थी, जो अब लगभग 60 से 70 हजार करोड़ रू के करीब है. अगर ये खजाना जमीन से बाहर आता तो मध्य प्रदेश की किस्मत बदल जाती. जाने देश के इस सबसे बड़े खजाने के बारे में. क्या है सबसे बड़े हीरे के भंडार की कहानी? दरअसल, मध्य प्रदेश के बक्सवाहा के जंगलों में यह सर्वे आस्ट्रेलियाई कंपनी रियोटिंटो ने कराया था. देश की सबसे बड़ा माइनिंग कंपनी रियोटिंटो ने सन् 2000 से 2005 के बीच पूरे बक्सवाहा जंगल में सर्वे कराया. एक दिन सर्वे टीम की खुशी का ठिकाना न रहा जब उन्हें किंबरलाइट पत्थरों की बड़ी-बड़ी चट्‌टानें नजर आईं. दरअसल, हीरा इसी किंबरलाइट की चट्‌टान में पाया जाता है. तब 55 हजार करोड़ थी हीरों की अनुमानित कीमत 25 साल पहले रियोटिंटो कंपनी को यहां हीरों के भंडार का पता चला था. कंपनी को यहां बड़े पैमाने पर किंबरलाइट की चट्‌टानें मिली थीं. दावा था कि जमीन के नीचे 55 हजार करोड़ तक के हीरे हो सकते हैं. दावा था कि जंगल में जमीन के नीचे साढ़े तीन करोड़ कैरेट (लगभग 6000kg) से ज्यादा के हीरे हैं. हालांकि, इसकी खोज करने वाली कंपनी 2017 में इस प्रोजेक्ट से बाहर हो गई, जिसके बाद बक्सवाहा के जगंल को सरकार ने हीरा निकालने के लिए नीलम किया था. ये प्रोजेक्ट लीज पर आदित्य बिड़ला ग्रुप की एसेल माइनिंग कंपनी को 2019 में मिला पर हाईकोर्ट ने इसपर स्टे लगा दिया था. खुदाई से पहले लगा हाईकोर्ट का स्टे छतरपुर जिले की बक्सवाहा हीरा खदान 2019 में नीलाम की गई थी. आदित्य बिड़ला ग्रुप की एसेल माइनिंग कंपनी ने 50 साल की लीज पर इसे लिया था. कंपनी को लगभग 364 हेक्टेयर जमीन मिली थी. खुदाई शुरू हो पाती उसके पहले ही पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था. बताया गया था कि इस जंगल में 62.64 हेक्टेयर क्षेत्र हीरे निकालने के लिए चिह्नित किया गया था, पर कंपनी ने 382.131 हेक्टेयर का जंगल मांगा, जिससे बाकी जमीन का उपयोग खनन करने और प्रोसेस के दौरान खदानों से निकला मलबा डंप करने में किया जा सके. इसी दौरान हाईकोर्ट ने इसपर स्टे लगा दिया. बन जाती एशिया की सबसे बड़ी डायमंड माइन खनिज अधिकारी अमित मिश्रा के मुताबिक, ” बक्सवाहा के जंगलों में बंदर डायमंड के नाम से एक ब्लॉक बनाया गया था, जिसे रियोटिंटो कंपनी ने एक्सप्लोर किया था लेकिन रियो टिंटो उसे छोड़ कर चली गई थी. उस समय फॉरेस्ट से उन्होंने रकबा बहुत बड़ा मांगा था, जो किसी वजह से नहीं दिया गया. उसके बाद एक छोटा रकबा 364 हेक्टेयर का बनाया गया था. अगर बक्सवाहा की माइंस चलती तो एशिया की सबसे बड़ी माइंस होती, उस समय 55 हजार करोड़ के हीरे निकलने की वेल्युएशन की गई थी.” लाखों पेड़ कटने की अफवाहें थीं वहीं खनिज अधिकारी ने आगे कहा, ” 364 हेक्टेयर क्षेत्र की लीज दी गई तो अफवाहें उड़ीं कि पूरे में खुदाई होगी और लाखों पेड़ कटेंगे. ये महज अफवाह थी. अब खुदाई की आधुनिक तकनीकें आ गई हैं, ज्यादा से ज्यादा एक फुटबॉल ग्राउंड के बराबर जमीन पर ही खुदाई होती है, इससे न तो ज्यादा पेड़ कटते हैं और न वन्य जीवों को नुकसान होता है. जितने पेड़ कटते हैं उसके 10 गुने पेड़ लगवाए भी जाते है,और उनकी पूरी देखरेख की जाती है.”

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