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वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में नंबर-1 का स्थान पर कान्हा नेशनल पार्क

मंडला टाइगर्स के लिए पूरे देश में मशहूर मध्य प्रदेश के नाम एक और बड़ी उपलब्धि है. मध्य प्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या के मामले में देश में नंबर वन बन गया है. वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में नंबर-1 का स्थान दिया गया है, वहीं जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क दूसरे स्थान पर आया है. बता दें कि मध्य प्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व अपने टाइगर्स की लिए देश-दुनिया में जाना जाता है और यहां दूर-दूर से लोग टाइगर्स का दीदार करने आते हैं. WII की रिपोर्ट में कान्हा नेशनल पार्क नंबर-1 वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने देशभर के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क की स्टडी की थी. यहां खासतौर पर शाकाहारी वन्यजीवों पर रिसर्च की गई. रिसर्च में पाया गया कि मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में चीतल, गौर, सांभर, बार्किंग डीयर सहित कई अन्य शाकाहारी जानवरों की संख्या सबसे ज्यादा है. कान्हा टाइगर रिजर्व ने इस मामले में देश के अन्य टाइगर रिजर्व के साथ-साथ जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क को भी पछाड़ दिया है. इसी वजह से कान्हा टाइगर्स के लिए अनुकूल वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व की जैवविविधता सबसे बेहतर है. यहां सबसे ज्यादा शाकाहारी वन्यजीवों की मौजूदी टाइगर्स के संरक्षण के लिए जबर्दस्त है. ये यहां की पूरी फूड चेन के लिए अच्छा संकेत है. पिछले वर्ष की रिसर्च के आधार पर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इस रिपोर्ट को पेश किया है. 2074 वर्ग किमी में फैला है कान्हा टाइगर रिजर्व कान्हा टाइगर रिजर्व का कोर और बफर एरिया 2074.31 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ है. इस पूरे क्षेत्र में टाइगर्स के साथ-साथ बाराहसिंघा, सांभर, चीतल, गौर, बार्किंग डीयर, लंगूर, जंगली सूअर समेत कई वन्य प्राणियों की भरमार है. शाकाहारी वन्य प्राणियों की अधिक संख्या की वजह से दूसरे मांसाहारी जीव खासतौर पर टाइगर्स के लिए ये जगह उपयुक्त है. जैव विविधता का अनूठा उदाहरण है कान्हा नेशनल पार्क कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल के मुताबिक, ” कान्हा टाइगर रिजर्व शाकाहारी वन्य जीव के मामले में पूरे भारत में नंबर वन है. जहां शाकाहारी वन्य जीवों की तादाद ज्यादा होती है, वहां मांसाहारी वन्य जीव भी अधिक होते हैं.यही वजह है कि कान्हा टाइगर रिजर्व जैव विविधता का सबसे अच्छा उदाहरण है.

भारत ने रूस के साथ 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोजेक्ट छोड़ा, भारतीय वायु सेना को 2035 से पहले नहीं मिल पाएंगे

नई दिल्ली लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने को मंजूरी दे चुका है. लेकिन, ये विमान भारतीय वायु सेना को 2035 से पहले नहीं मिल पाएंगे. प्रोडक्शन शुरू करने से पहले विमान को अभी डिजाइन, विकास और परीक्षण की एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जो एक बड़ी चुनौती वाला और समय खाने वाला काम है. ऐसे में भारत सरकार के सामने तुरंत इस जरूरत को पूरा करने की चुनौती है. भारतीय एयरफोर्स अब सार्वजनिक तौर पर फाइटर जेट की कमी की बात करने लगी है. दरअसल, चीन और पाकिस्तान से दो मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही इंडियन एयरफोर्स को अपनी लड़ाकू क्षमता बनाए रखने के लिए फाइटर जेट्स की 42 स्क्वायड्रन की जरूरत है. एक स्क्वायड्रन में 18 विमान होते हैं. लेकिन, मौजूदा वक्त में एयरफोर्स के पास 32 स्क्वायड्रन बचे हैं. दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान की एयर फोर्स अब पांचवीं पीढ़ी के विमानों से लैस हो रही है. ऐसे में चुनौती तो है. हालांकि, इस चुनौती को सरकार और वायुसेना दोनों समझती है और इसके लिए उचित कदम भी उठाए जा रहे हैं. चुनौती का दूसरा पहलू खैर, आज हम इस चुनौती की नहीं बल्कि इससे जुड़े एक अन्य पहलू की बात कर रहे हैं. इसे पहलू भी नहीं बल्कि एक चूक कही जा सकती है. दरअसल, भारत सरकार ने 2007 में रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के निर्माण के लिए एक अंतर सरकारी समझौता किया था. इस समझौते के तहत रूस में सुखोई फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी और भारत की सरकारी कंपनी एचएएल एक पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट का विकास करने वाली थी. इस प्रोजेक्ट को ब्रह्मोस मिसाइल की तरफ आगे बढ़ाना था. ज्ञात हो कि बीते दिनों ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की एयरफोर्स की कमर तोड़ने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को रूस के साथ ही मिलकर डेवलप किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक भारत और रूस ने जिस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की कल्पना की थी वह एक स्टील्थ जेट था. उसमें दो इंजन लगाए जाने थे. उसको हवाई, जमीनी और नौसैनिक टारगेट्स को नष्ट करने के लिए बनाया जाना था. इसके लिए भारत ने 2006 में ही अपनी एक टीम रूस भेज दी थी. समझौते के बाद दिसंबर 2008 में फाइटर जेट की डिजाइन और दिसंबर 2010 में खर्च को लेकर समझौते भी हो गए. भारत और रूस ने 6-6 अरब डॉलर के निवेश से 154 विमानों के उत्पादन की योजना बनाई. परियोजना में आने लगी अड़चनें भारत ने रूस से इस परियोजना की तकनीकी समानता और सोर्स कोर्ड साझा करने की मांगी की. सोर्स कोड किसी विमान में सॉफ्टवेयर नियंत्रण प्रणाली होती है. उसी के जरिए भविष्य में विमान में किसी बदलाव को अंजाम दिया जा सकता है. लेकिन, रूस ने इस सोर्स कोड को देने से इनकार कर दिया. फिर बातचीत हुई और इसके लिए रूस ने अतिरिक्त 7 अरब डॉलर की राशि की मांग की. विमानों की संख्या, सोर्स कोड, तकनीकी हस्तांतरण जैसे मुद्दों पर असहमति के कारण 2016 तक भारत की इस परियोजना में दिलचस्पी कम हो गई. फिर भारत ने 2018 में आधिकारिक तौर पर इस परियोजना से निकलने की घोषणा कर दी. भारत ने देसी एएमसीए प्रोग्राम पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया. इसके साथ ही एयरफोर्स की तत्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदे गए. जिस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट परियोजना से भारत बाहर हुआ उस पर रूस ने काम जारी रखा. फिर यह सुखोई-57 के रूप में सामने आया. इस विमान में कई ऐसी चीजें हैं जो भारत की जरूरतों के अनुकूल है. इस तरह रूस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने वाला तीसरा मुल्क बन गया. इससे पहले अमेरिका और चीन के पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं.   अब दोनों की मजबूरी 2018 से 2025 आते-आते काफी चीजें बदल चुकी हैं. एक तरफ भारत को इस वक्त पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की सख्त जरूरत है. वहीं यूक्रेन युद्ध के कारण रूस की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है. वह पैसे के अभाव में इस फाइटर जेट्स का उत्पादन नहीं कर पा रहा है. अभी तक वह इसका केवल 40 यूनिट ही बना पाया है. ऐसे में वह भारत को अब सोर्स कोड और तकनीक ट्रांसफर के साथ इसे देना चाहता है. भारत की जरूरत के हिसाब से बनने वाले फाइटर जेट को सुखोई-57ई नाम दिया गया है. उसने इसका उत्पादन भी भारत ने करने की बात कही है. इसे एचयूएल के मौजूदा प्लांट में आसानी से बनाया भी जा सकता है. क्या एफ-35 और जे-20 से कमतर है सुखाई-57 परियोजना से बाहर निकलने के वक्त से कुछ जानकार इस फाइटर जेट्स की कमी को उजागर करते रहे हैं. द हिंदू और द इंडियन एक्सप्रेस अखबार की कुछ रिपोर्ट को मानें तो वायु सेना ने इस फाइटर जेट्स की रडार क्रॉस-सेक्शन और स्टील्थ क्षमता पर सवाल उठाया था. भारत ने इस विमान में ऐसे 43 तकनीकी सुधार की मांग की थी, जिसे रूस ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. राजनीतिक कारण एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने रूस के साथ संबंधों को संतुलित करने के लिए पश्चिमी देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया. इसके पीछे का एक कारण चीन के साथ रूस का गठजोड़ रहा है. रूस और चीन के बीच लगातार मजबूत होते गठजोड़ के कारण भारत चिंतित रहता है. ऐसे में भारत को डर था कि रूस कहीं इस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की तकनीक को चीन के साझा न कर दे.

बकायेदारों के खिलाफ विद्युत वितरण कंपनी की भोपाल में कार्रवाई जारी, 100 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया

भोपाल चिराग तले अंधेरा वाली कहावत तो आपने सुनी होगी..अब देख भी लीजिए. तेजी से उभरते मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली विभाग को लंबा पलीता लगा रहा है. बिजली बिलों का बकाया अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अकेले शहर में घरेलू उपभोक्ताओं पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया है. हैरानी की बात तो ये कि इनमें से 86 उपभोक्ताओं पर 1 लाख रुपये से अधिक का बकाया है. बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के अनुसार, इनमें से अधिकांश मामलों में कोई न कोई विवाद है. कई केस अदालतों में विचाराधीन हैं. सबसे अधिक बकाया एक घरेलू उपभोक्ता पर 4.21 लाख रुपये का सामने आया है. यह उपभोक्ता कटारा हिल्स वितरण क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहता है. फिर भी कनेक्शन चालू TOI की रिपोर्ट के अनुसार, कटारा हिल्स वाले उपभोक्ता का मई महीने का चालू बिल 2,246 रुपये था, जिस पर 5,199 रुपये विलंब शुल्क और 4.15 लाख रुपये का पुराना विवादित बकाया जुड़कर कुल देय राशि 4,21,079 रुपये हो गई. मामला अदालत में लंबित होने के कारण बिजली कनेक्शन चालू है. इस मामले में डिस्कॉम के अधिकारियों का कहना है कि सामान्य स्थिति में यदि किसी घरेलू उपभोक्ता पर 5,000 रुपये से अधिक बकाया होता है तो उसका कनेक्शन काट दिया जाता है. लेकिन, जिन उपभोक्ताओं के बिल विवादित है या न्यायिक प्रक्रिया में है, उनके खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हो पाती. छोटे बकायदार भी करीब 37 हजार 1 लाख रुपये से अधिक बकाया रखने वालों के बाद सबसे बड़ी संख्या उन उपभोक्ताओं की है, जिन पर 10,000 से 1 लाख के बीच की राशि बकाया है. ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 16,681 है. इनमें से किसी पर 99,797 रुपये तो किसी पर 10,001 रुपये तक का बकाया है. इसके अलावा 19,704 उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जिन पर 5,000 से 10,000 रुपये तक की राशि लंबित है. बिजली कंपनी इस काम में लगी विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि का बकाया होना बिजली वितरण व्यवस्था और बिल वसूली प्रक्रिया में गहराते संकट की ओर संकेत करता है. यदि विवादों और अदालती मामलों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो यह बकाया राशि और बढ़ सकती है. डिस्कॉम की ओर से फिलहाल ऐसे उपभोक्ताओं से संपर्क कर विवाद सुलझाने और समझौते की कोशिश की जा रही है. वहीं, अधिकारियों ने संकेत दिए कि सरकार से नीति-निर्माण स्तर पर भी हस्तक्षेप की मांग की जाएगी.

चारधाम यात्रा में सेहत बन रही जानलेवा चुनौती, खराब स्वास्थ्य ने ली 80 ज़िंदगियां

देहरादून हर साल लाखों लोग पवित्र चारधाम यात्रा के लिए जाते हैं। इस बार भी यह यात्रा शुरू हो चुकी है। हालांकि इस बार की चारधाम यात्रा एक दुखद वजह से भी चर्चा में है। इस साल यात्रा के दौरान अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है। आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि पहाड़ों की ऊंचाइयों पर सांसें अटक रही हैं? अगर आप भी पहाड़ पर किसी यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो किन बातों का ख्याल रखें? आइए समझते हैं। लाखों लोग करते हैं चारधाम यात्रा हर साल मई से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा पड़ाव मानी जाती है। लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने के बाद से ही मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल अब तक 80 श्रद्धालु अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर मौतें ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, हार्ट अटैक और सांस लेने में तकलीफ की वजह से हुई हैं। पहाड़ों की ऊंचाई है सांसों का दुश्मन! चारधाम के मंदिर समुद्र तल से 3 हजार से साढ़े 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं।पहाड़ों पर जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, हवा में ऑक्सीजन का स्तर कम होता जाता है। समुद्र तल पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा 21% होती है, लेकिन 3,000 मीटर की ऊंचाई पर यह स्तर काफी कम हो जाता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘हाइपोक्सिया’ कहते हैं। खासकर उन लोगों के लिए, जो मैदानी इलाकों से सीधे पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं, यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना तैयारी के ऊंचाई पर चढ़ने से ‘एक्यूट माउंटेन सिकनेस’ (AMS) का खतरा बढ़ जाता है, जिसके लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी और सांस फूलना शामिल हैं। किन लोगों को होता है सबसे ज्यादा खतरा? मौत के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग हैं। हार्ट रोग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और सांस की बीमारियों से जूझ रहे श्रद्धालु इस ऊंचाई पर सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। इसके अलावा, कई लोग बिना मेडिकल जांच और तैयारी के यात्रा पर निकल पड़ते हैं, जो खतरे को और बढ़ा देता है। क्या है प्रशासन की तैयारी? इन मौतों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन इस स्थिति को संभालने के लिए तैयार है? उत्तराखंड सरकार ने यात्रा मार्गों पर मेडिकल कैंप, ऑक्सीजन सिलेंडर और आपातकालीन सेवाएं शुरू की हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के सामने ये सुविधाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। इसके अलावा, मौसम की मार भी यात्रियों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। अचानक बारिश, भूस्खलन और ठंड यात्रा को और जोखिम भरा बना देती है। ये टिप्स बचा सकते हैं जान अगर आप भी चारधाम यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो कुछ सावधानियां आपकी जान बचा सकती हैं… मेडिकल जांच जरूरी: यात्रा से पहले डॉक्टर से सलाह लें और अपनी सेहत की पूरी जांच कराएं। ऊंचाई की आदत डालें: सीधे ऊंचाई पर न चढ़ें। पहले कुछ दिन कम ऊंचाई वाले इलाकों में रुकें, ताकि शरीर को ऑक्सीजन की कमी की आदत पड़ सके। सही कपड़े और दवाएं: ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं साथ रखें। हाइड्रेशन जरूरी: खूब पानी पिएं, ताकि शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बना रहे।

प्रधानमंत्री मोदी 6 जून को करेंगे जम्मू-कश्मीर का दौरा, चिनाब ब्रिज का करेंगे उद्घाटन, चप्पे-चप्पे पर रहेगी सुरक्षाबलों की नजर

जम्मू  जम्मू-कश्मीर में आर्थिक-सामाजिक विकास के इंजन को गति देने के लिए प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार छह जून को प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेल संपर्क को ही सुनिश्चित नहीं बनाएगा बल्कि जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति देगा। कटड़ा से श्रीनगर वंदेभारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने सहित प्रधानमंत्री कुल 46 हजार करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने वाले हैं। साथ ही कटड़ा में 350 करोड़ की लागत वाले श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की आधारशिला भी रखेंगे। बता दें कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेल संपर्क की राह में कटड़ा-बनिहाल रेल लिंक ही अवरोधक थी। जम्मू-कश्मीर ही नहीं पूरा देश इस रेल लिंक पर ट्रेन परिचालन का इंतजार कर रहा था। ट्रैक का निर्माण दिसंबर 2024 में पूरा कर लिया गया था और उसके बाद तकनीकी ट्रायल जारी थे। चिनाब और अंजी रेल पुल नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वास्तुकला का चमत्कार चिनाब रेल पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है. यह 1,315 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज है जिसे भूकंप और हवा की स्थिति का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस पुल का एक प्रमुख काम जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क को बढ़ाना होगा. पुल पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के जरिए कटरा और श्रीनगर के बीच यात्रा करने में सिर्फ 3 घंटे लगेंगे, जिससे मौजूदा यात्रा समय में 2-3 घंटे कम हो जाएंगे. वहीं अंजी ब्रिज भारत का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज है जो चुनौतीपूर्ण इलाके में देश की सेवा करेगा. पीएम मोदी 6 जून को करेंगे जम्मू-कश्मीर का दौरा, चिनाब ब्रिज का करेंगे उद्घाटन नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वास्तुकला का चमत्कार चिनाब रेल पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है. यह 1,315 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज है जिसे भूकंप और हवा की स्थिति का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस पुल का एक प्रमुख काम जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क को बढ़ाना होगा.     चिनाब और अंजी रेल पुल नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वास्तुकला का चमत्कार चिनाब रेल पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है. यह 1,315 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज है जिसे भूकंप और हवा की स्थिति का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस पुल का एक प्रमुख काम जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क को बढ़ाना होगा. पुल पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के जरिए कटरा और श्रीनगर के बीच यात्रा करने में सिर्फ 3 घंटे लगेंगे, जिससे मौजूदा यात्रा समय में 2-3 घंटे कम हो जाएंगे. वहीं अंजी ब्रिज भारत का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज है जो चुनौतीपूर्ण इलाके में देश की सेवा करेगा. कनेक्टिविटी परियोजनाएं और अन्य विकास कार्य प्रधानमंत्री उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक (USBRL) परियोजना को भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे. 272 किलोमीटर लंबी USBRL परियोजना, जिसका निर्माण लगभग 43,780 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है, में 36 सुरंगें (119 किलोमीटर तक फैली हुई) और 943 पुल शामिल हैं. यह परियोजना कश्मीर घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच सभी मौसमों में निर्बाध रेल संपर्क स्थापित करती है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय गतिशीलता को बदलना और सामाजिक-आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है. प्रधानमंत्री मोदी माता वैष्णो देवी कटरा से श्रीनगर और वापस जाने वाली दो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे. ये ट्रेनें निवासियों, पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और अन्य लोगों के लिए एक तेज, आरामदायक और विश्वसनीय यात्रा का ऑप्शन देंगी. पीएम मोदी विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में अंतिम मील तक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. वह राष्ट्रीय राजमार्ग-701 पर राफियाबाद से कुपवाड़ा तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना और एनएच-444 पर शोपियां बाईपास सड़क के निर्माण की आधारशिला रखेंगे, जिसकी लागत 1,952 करोड़ रुपये से अधिक होगी. वह श्रीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर संग्राम जंक्शन और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बेमिना जंक्शन पर दो फ्लाईओवर परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे. इन परियोजनाओं से यातायात की भीड़ कम होगी और यात्रियों के लिए यातायात प्रवाह में सुधार होगा. इसके साथ ही वह कटरा में 350 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की आधारशिला भी रखेंगे. यह रियासी जिले का पहला मेडिकल कॉलेज होगा जो इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान देगा. अप्रैल में भी उद्घाटन तय था पर मौसम के कारण यह कार्यक्रम टल गया। उसके बाद पहलगाम हमले के बाद लोकार्पण नहीं हो सकता था। अब यह इंतजार समाप्त हो रहा है, प्रधानमंत्री छह जून को कटड़ा पहुंच ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यहां रेल-परिचालन शुरू होने से बाद जम्मू से श्रीनगर के बीच सदाबहार संपर्क बरकरार रहेगा और भूस्खलन और मौसम के कारण राजमार्ग प्रभावित होने के बाद ट्रेन के माध्यम से आवागमन संभव हो सकेगा। जम्मू रेलवे स्टेशन के पुनरोद्धार के चलते कश्मीर से दिल्ली या देश के अन्य हिस्सों में जाने वाले यात्रियों को कटड़ा से ट्रेन बदलनी होगी। फिलहाल विशेष तौर पर डिजाइन की गई वंदेभारत को इस ट्रैक पर चलाया जा रहा है। भविष्य में और भी ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई जा सकती है। सात जून से कटड़ा-श्रीनगर के बीच नियमित परिचालन होगा। एक दिन दो वंदे भारत कटड़ा से श्रीनगर और दो श्रीनगर से कटड़ा आएंगी। वीरवार सुबह दस बजे के करीब शुरू होने वाले ड्राई रन के दौरान काफिले में सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी हर उस जगह तय समय पर पहुंचेंगे यहां पर पी छह जून को पीमए को जाना है। इस दौरान दौरे को लेकर हर प्रकार की चुनौती का बारीकी से आंकलन कर उसका समाधान तलाशा जाएगा। दिल्ली से उधमपुर एयरफोर्स स्टेशन में पहुंचने के बाद पीएम सभी जगहों पर हेलीकॉप्टर से पहुंचेगे। लेकिन इसके बाद ही टीमें सड़क यात्रा को लेकर रिहर्सल करेंगी। च्च पदस्थ के अनुसार बुधवार को एसपीजी, जम्मू कश्मीर पुलिस, सुरक्षाबलों, खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने पीएम दौरे की सुरक्षा के हर पहलू पर बारीकी से गौर किया। दौरे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उनका सामना करने के लिए आकास्मिक योजना भी बनाई गई है। प्रधानमंत्री के दौरे … Read more

सब्जियों की कीमतों में गिरावट से वेज थाली सस्ती हुई, जानें मांसाहारी थाली का क्या रहा हाल

नई दिल्ली इस साल मानसून कुछ जल्दी ही आ गया। मानसून आने की वजह से लोगों को तपती गरमी से राहत मिली। साथ ही सब्जियों और फल की भी पैदावार में इजाफा हुआ। यही वजह है कि बीते मई महीने में खाने-पीने की वस्तुएं सस्ती हुईं। तभी तो इस महीने वेज और नॉन-वेज, दोनों तरह की थाली की कीमत में कमी हुई है। कहां से आई यह रिपोर्ट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट का नाम है ‘रोटी राइस रेट’। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 में घर पर बनने वाली वेज और नॉन-वेज थाली की कीमत लगभग 6% तक कम हुई है। यह कमी सब्जियों की कीमतों में भारी गिरावट के कारण हुई है। पिछले साल सब्जियों के दाम बहुत ज्यादा थे, इसलिए इस साल कीमतें कम लग रही हैं। टमाटर की कीमतें खूब घटीं रिपोर्ट में कहा गया है, “टमाटर की कीमतें लगभग 29% गिरकर 23 रुपये/किलो हो गईं, जो मई 2025 में 33 रुपये/किलो थीं। पिछले साल उपज को लेकर चिंता थी, जिसके कारण कीमतें बढ़ गई थीं।” इसका मतलब है कि पिछले साल टमाटर कम होने की आशंका थी, इसलिए दाम बढ़ गए थे। इस साल टमाटर ज्यादा हैं, इसलिए दाम कम हो गए हैं। प्याज और आलू की कीमतों में भी 15% और 16% की गिरावट आई है। पिछले साल आलू की फसल को नुकसान हुआ था। पश्चिम बंगाल में blight infestation और बेमौसम बारिश के कारण आलू की फसल खराब हो गई थी। वहीं, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में पानी की कमी के कारण प्याज की पैदावार कम हुई थी। इसलिए पिछले साल प्याज के दाम बढ़ गए थे। थाली की कीमतों में थोड़ा बदलाव क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुशान शर्मा ने बताया कि मई 2025 में थाली की कीमतों में थोड़ा बदलाव हुआ है। वेज थाली की कीमत स्थिर रही, लेकिन नॉन-वेज थाली लगभग 2% सस्ती हो गई। टमाटर और आलू के दाम बढ़ गए, लेकिन प्याज के दाम कम होने से वेज थाली की कीमत स्थिर रही। नॉन-वेज थाली की कीमत में कमी ब्रॉयलर (मुर्गी) की कीमतों में गिरावट के कारण आई है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं। ऐसा मौसम में बदलाव के कारण होगा। गेहूं और दालों की कीमतों में थोड़ी कमी आ सकती है, क्योंकि इस बार देश में इनका उत्पादन अच्छा हुआ है। चावल की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि वैश्विक बाजार में कीमतें अच्छी होने के कारण निर्यात 20-25% तक बढ़ सकता है। खाद्य तेल हुए महंगे क्रिसिल ने यह भी बताया कि वनस्पति तेल की कीमतों में 19% की वृद्धि हुई है। ऐसा आयात शुल्क बढ़ने के कारण हुआ है। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी 6% की वृद्धि हुई है। इन कारणों से थाली की कीमत में ज्यादा कमी नहीं आई। मुर्गी भी हुई सस्ती सब्जियों की कीमतों में कमी के साथ-साथ ब्रॉयलर की कीमत में भी लगभग 6% की गिरावट आई है। इस वजह से नॉन-वेज थाली सस्ती हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रॉयलर की कीमतों में गिरावट का कारण इनकी ज्यादा सप्लाई और कम मांग है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बर्ड फ्लू की खबरें आई थीं, जिसके कारण लोगों ने चिकन खाना कम कर दिया था। ब्रॉयलर की कीमत नॉन-वेज थाली की कीमत का लगभग 50% होती है। थाली में क्या एक वेज थाली में रोटी, सब्जियां (प्याज, टमाटर और आलू), चावल, दाल, दही और सलाद शामिल होते हैं। एक नॉन-वेज थाली में भी यही चीजें होती हैं, लेकिन दाल की जगह चिकन (ब्रॉयलर) होता है। मई 2025 के लिए ब्रॉयलर की कीमतें अनुमानित हैं। सामग्री का weightage कमोडिटी की कीमत में उतार-चढ़ाव के आधार पर नहीं बदलता है। इसका मतलब है कि अगर किसी चीज की कीमत बढ़ जाती है, तो भी थाली में उसकी मात्रा कम नहीं की जाती है।

डसॉल्ट एविएशन और टाटा ने भारत में राफेल के बॉडी पार्ट निर्माण के लिए 4 प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली फाइटर जेट राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने भारत की टाटा ग्रुप के साथ बड़ी डील की है. दसॉल्ट एविएशन अब टाटा ग्रुप के साथ मिलकर फाइटर प्लेन राफेल की बॉडी भारत में बनाएगी. इसके लिए दसॉल्ट एविएशन और टाटा ग्रुप ने एक डील पर साइल किया है. डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने भारत में राफेल लड़ाकू विमान के बॉडी पार्ट के निर्माण के लिए 4 प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं. ये समझौता देश की एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने और ग्लोबल सप्लाई चेन को मजूबत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. यह सुविधा भारत के एयरोस्पेस बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण निवेश को बढ़ावा देगी. इस कदम को भारत में सामरिक और सैन्य विमानों के निर्माण की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. जहां राफेल फाइटर जेट के अहम हिस्सों का निर्माण किया जाएगा. इनमें विमान का fuselage, पीछे का पूरा हिस्सा, सेंट्रल fuselage और सामने का हिस्सा शामिल है. माना जा रहा है कि इस प्रोडक्शन प्लांट से 2028 तक राफेल का पहला fuselage असेंबली लाइन से बाहर आ जाएगा. जब फैक्ट्री पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी तो यहां से हर महीने में 2 fuselage तैयार होंगे. क्या होता है राफेल जेट का फ्यूजलाज? राफेल फाइटर जेट में फ्यूजलाज (fuselage) विमान का मुख्य ढांचा है, जो इसका केंद्रीय संरचनात्मक हिस्सा होता है. यह पायलट कॉकपिट, इंजन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, और हथियारों को जोड़ता है, साथ ही विंग्स और टेल को सहारा देता है. दसॉल्ट एविएशन के अनुसार राफेल का फ्यूजलाज हल्के और मजबूत कम्पोजिट सामग्रियों (जैसे कार्बन और केवलर फाइबर) से बना होता है, जो इसका वजन कम करता है और अधिकतम टेक-ऑफ वजन को खाली वजन के अनुपात में 40% तक बढ़ाता है. यह डिजाइन उच्च गति को संभव बनाता है. Fuselage विमान की स्थिरता, एयरो डायनामिक्स, और रडार क्रॉस-सेक्शन को कम करने में महत्वपूर्ण है. राफेल का फ्यूजलाज सर्पेन्टाइन एयर इनटेक और कम्पोजिट सामग्री के कारण रडार डिटेक्शन को कम करता है, जो इसे युद्ध में कम विजिबल बनाता है. पहली बार फ्रांस के बाहर फ्यूजलाज प्रोडक्शन दसॉल्ट एविएशन के चेयरमैन और CEO ने कहा कि, “पहली बार, राफेल के fuselage  का उत्पादन फ्रांस के बाहर किया जाएगा. यह भारत में हमारी सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है. भारतीय एयरोस्पेस उद्योग में प्रमुख खिलाड़ियों में से एक TASL (Tata Advanced Systems limited) सहित हमारे स्थानीय भागीदारों को इस विस्तार के लिए धन्यवाद, यह सप्लाई चेन राफेल के सफल निर्माण में योगदान देगी और हमारे समर्थन से हमारी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता आवश्यकताओं को पूरा करेगी.” टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक सुकरन सिंह ने कहा, “यह साझेदारी भारत की एयरोस्पेस यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है. भारत में संपूर्ण राफेल fuselage का उत्पादन टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स की क्षमताओं में बढ़ते भरोसे और डसॉल्ट एविएशन के साथ हमारे सहयोग की ताकत को रेखांकित करता है.  यह भारत द्वारा एक आधुनिक, मजबूत एयरोस्पेस विनिर्माण इको सिस्टम स्थापित करने की दिशा में की गई उल्लेखनीय प्रगति को भी दर्शाता है. यह डील बताती है कि भारत की तकनीक वैश्विक प्लेटफार्मों को सपोर्ट कर सकती है.” इस समझौते पर पर हस्ताक्षर भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की पहल के प्रति दसॉल्ट एविएशन के मजबूत कमिटमेंट को दर्शाता है. इस साझेदारी का उद्देश्य ग्लोबल एयरोस्पेस सप्लाई चेन में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है, साथ ही अधिक आर्थिक आत्मनिर्भरता के अपने लक्ष्य को सपोर्ट करना है.  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में नवीन टेलीमेडिसिन सेंटर का किया लोकार्पण

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि टेलीमेडिसिन सेवा से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ेगी। इस नवाचार से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के मरीजों को विशेषज्ञों द्वारा बेहतर इलाज एवं परामर्श प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के टेलीफोन के माध्यम से विस्तार के लिए प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ई-संजीवनी पोर्टल प्रारंभ किया गया है। इस पोर्टल के द्वारा मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों से घर बैठे नि:शुल्क परामर्श ले सकते है। टेलीमेडिसिन सेवा से मरीजों की रेफरल संख्या भी कम होगी, जिससे मेडिकल कॉलेजों और जिला चिकित्सालयों में दबाव कम होगा। मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञों से उपचार सुविधा मिलेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गुरुवार को गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं हमीदिया चिकित्सालय, भोपाल में नवीन टेलीमेडिसिन सेंटर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी, डीन गांधी चिकित्सा महाविद्यालय श्रीमती कविता सिंह सहित विभिन्न विभागों के एचओडी, डॉक्टर्स, प्रोफेसर, अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हम स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों, मेडिकल स्टॉफ की भर्ती की जा रही है। जिससे मेडिकल स्टॉफ की कमी की पूर्ति होगी। इन विशेषज्ञों की तैनाती ग्रामीण क्षेत्रों में की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि किसी समस्या के जड़ से समाधान के लिए जिद और जुनून की आवश्यकता है। टेलिमेडिसिन सेवा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह सेवा स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि इस सेवा का प्रभावी तरीके के क्रियान्वयन किया जाए। टेलीमेडिसिन सेवा से जुड़े विशेषज्ञ प्रोफेसर्स और डॉक्टर्स प्रत्येक मरीज को बेहतर से बेहतर इलाज प्रदान करें। इस सेवा का व्यापक प्रचार करें जिससे कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस सुविधा का ज्यादा के ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमीदिया चिकित्सालय 70 वर्षों के अधिक समय से प्रदेश के मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहा है। यहां की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल कैंपस में जर्जर भवनों का रिनोवेशन किया जायेगा। उन्होंने कमला नेहरू हॉस्पिटल में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में परिवर्तित करने की बात भी कही। इस दौरान उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेलीमेडिसिन हब रूम से सीहोर के मरीज और चिकित्सकों से चर्चा की। उन्होंने प्रेरणा सेवा ट्रस्ट द्वारा हॉस्पिटल को भेंट किए गए ई-रिक्शा का लोकार्पण किया। उन्होंने हॉस्पिटल में स्थापित बेबी फीडिंग रूम का लोकार्पण भी किया। थैलेसीमिया डे केयर सेंटर के बच्चों ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया। गांधी मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक सुनील टंडन ने कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों और नवाचारों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में स्पोर्ट्स प्रमोटर्स ग्रुप सरगुजा ने 251 पौधों का रोपण किया है। चिकित्सालय के समस्त क्लिनिकल विभाग का सहयोग प्राप्त कर आने वाले मरीजों को त्वरित एवम उचित उपचार दिए जाने के उद्देश्य से इमरजेंसी मेडिसिन विभाग और अधीक्षक कार्यालय द्वारा एक एसओपी जारी की गई है।चिकित्सालय में शव वाहन, नवीन कैथ लैब, सीटी-स्केन और एमआरआई जांच सुविधा की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमीदिया चिकित्सालय आने वाले मरीजों के त्वरित एवम उचित इलाज किए जाने के लिए लगातार प्रयासरत है।  

मंत्री सारंग ने कहा सहकारिता विभाग पूरी प्लानिंग के साथ हर सोसायटी और विभागीय परिसरों में पौधरोपण करें

भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि सहकारिता विभाग पूरी प्लानिंग के साथ हर सोसायटी और विभागीय परिसरों में पौधरोपण करें। उन्होंने इसके लिये राज्य संघ और बीज संघ को इसकी जिम्मेदारी दी। उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन और छायादार सहित उपयोगी प्रजाति के पौधो का रोपण किया जाये। मंत्री सारंग ने कहा कि मास्टर प्लान इस तरह का हो कि संरक्षण और संवर्धन के साथ साल भर में लाखों पौधे लगे। मंत्री सारंग ने गुरूवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर “एक पेड़ माँ के नाम” कार्यक्रम के तहत अपेक्स बैंक परिसर में अशोक का पौधा रोपा। अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने भी पौधरोपण किया। सनातन धर्म पर्यावरण का देता है संदेश मंत्री सारंग ने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण-संवर्धन करना और आगे आने वाली पीढ़ी को जागरूक करना हमारी जिम्मेदारी है। हमारी संस्कृति, सनातन, दर्शन, धर्म, विचार सब पर्यावरण से जुडा हुआ है। पर्यावरण का अर्थ है पेड़, पौधे, पहाड, नदियाँ और ईको सिस्टम से मनुष्य पशु-पक्षी सब जुडें हैं। भारतीय संस्कृति नदी को वॉटर बॉडी नहीं मानती, हमारा अध्यात्म दर्शन नदी को माँ मानता है। नर्मदा मैया और गंगा मैया की हम अर्चना करते है, पर्वत को भगवान स्वरूप पूजते है। गोवर्धन पर्वत और कामतानाथ जी की हम परिक्रमा करते है। महिलाएँ साल भर में 5-6 ऐसे त्यौहार मनाती है जिसमें पेड़ों की परिक्रमा की जाती है। हरतालिका तीज जैसे त्यौहारों का विशेष महत्व है। यही नहीं भगवान का वाहन पशु-पक्षी हैं। शिवजी जहां एक ओर नाग को धारण किये है वहीं जटाओं के जरिये माँ गंगा को पृथ्वी पर लाये है। हमारा पूरा दर्शन, सनातन, धर्म, विचार पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। विकास हो विरासत के साथ मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकास की बात की तो विरासत को साथ लेकर चलने की बात की। विकास का मतलब पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचें और पेड़ भी नहीं कटे। कारखाने लगना विकास और भविष्य की लिये जरूरी है। इसलिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट के माध्यम से निर्णय लिया कि जितना औद्योगिक क्षेत्र बने उतना वन भी लगाया जाये। प्रधानमंत्री मोदी “एक पेड़ माँ के नाम” का संदेश यही है कि पृथ्वी माँ को चिरस्थायी बनाने के लिये पौधरोपण करें। यहीं नहीं अपने माता-पिता के नाम, अपने परिजन के जन्म दिवस और सालगिरह जैसे अवसरों पर समाज के उज्जवल भविष्य के लिये पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण कर आने वाली पीढ़ी को भविष्य के लिये उपयोगी, दीर्घकालीन उपहार सौपकर जायें, इससे हम रहे न रहे हमारी याद बनी रहे। इस अवसर पर प्रबंध संचालक विपणन संघ अलोक कुमार सिंह, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक मनोज पुष्प, उप सचिव मनोज सिन्हा, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक सहकारी संघ ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक बीज संघ महेन्द्र दीक्षित, संयुक्त आयुक्त अम्बरीष वैद्य, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अरूण माथुर सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

अब किसान बेसब्री से 20वीं किस्त का इंतज़ार कर रहे हैं तो आया बड़ा अपडेट, जल्द आएंगे 2,000 रुपये खाते में

नई दिल्ली  देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बार फिर राहत भरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। अब किसान बेसब्री से 20वीं किस्त का इंतज़ार कर रहे हैं। इस बार की किस्त को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है – जल्द ही यह राशि किसानों के खातों में पहुंच सकती है। किस्त की तारीख, जरूरी शर्तें और eKYC से जुड़ी अहम जानकारियां जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर। क्या है पीएम-किसान योजना? प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उद्देश्य देश के छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। इसके तहत पात्र किसानों को हर चार महीने में ₹2,000 की राशि भेजी जाती है, जिससे उन्हें कृषि कार्यों में सहायता मिल सके। 19वीं किस्त में मिले थे ₹22,000 करोड़ बीते 24 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के भागलपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान योजना की 19वीं किस्त जारी की थी। इसमें 9.8 करोड़ से अधिक किसानों को कुल ₹22,000 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई थी। अब किस्त नंबर 20 का इंतजार चूंकि किस्तें हर चार महीने के अंतराल पर दी जाती हैं, इसलिए 20वीं किस्त जून 2025 में जारी होने की पूरी संभावना है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह किस्त जून के पहले या दूसरे सप्ताह में किसानों के खातों में आ सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। e-KYC है अनिवार्य – अभी कर लें पूरा अगर आप चाहते हैं कि अगली किस्त आपके खाते में समय पर आए, तो eKYC पूरा करना बेहद ज़रूरी है। किसान दो तरीकों से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं: OTP आधारित eKYC: pmkisan.gov.in पर जाकर मोबाइल OTP के ज़रिए। बायोमेट्रिक eKYC: नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) पर जाकर। अपना नाम लाभार्थी सूची में ऐसे देखें pmkisan.gov.in वेबसाइट पर जाएं। “लाभार्थी सूची” (Beneficiary List) टैब पर क्लिक करें। अपने राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गांव का चयन करें। “Get Report” पर क्लिक कर देखें कि आपका नाम सूची में है या नहीं।    

राज्यपाल मंगुभाई पटेल सिकल सेल सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों में शोध और अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों के द्वारा रोग उन्मूलन के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे वनों में प्रचुर मात्रा में जड़ी-बूटियां उपलब्ध है। आवश्यकता शोध और अनुसंधान के द्वारा उनकी उनकी उपयोगिता के प्रमाणीकरण की है। राज्यपाल पटेल गांधी मेडिकल कॉलेज में आयोजित सिकलसेल सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन गांधी मेडिकल कॉलेज की एलुमिनाई द्वारा किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल भी मौजूद रहे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल के उन्मूलन प्रयासों के लिए सबके साथ और सबके प्रयासों की एकजुट आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर सिकल सेल की जागरुकता में सक्रिय सहभागिता करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जागरुकता ही सबसे बड़ा टूल है। हम में से प्रत्येक व्यक्ति सिकल सेल के लक्षणों, उपचार और संभावनाओं के प्रति स्वयं जागरूक हो। फिर जागरूकता दूत के रूप में अपने आस-पास, और समुदाय को जागरूक करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि नई पीढ़ी को सिकल सेल एनीमिया से बचाने के लिए वर-वधू शादी के पूर्व सिकल सेल जेनेटिक कार्ड का  मिलान ज़रूर करें। गर्भावस्था में जरूरी जाँचे कराए। संतान के जन्म के 72 घंटे के भीतर उनकी सिकल सेल एनीमिया की जाँच अवश्य करें। राज्यपाल पटेल ने सिकल सेल से पीड़ित बच्चों एवं उनके परिजनों से आत्मीय मुलाक़ात की। उनकी कुशल क्षेम जानी। सभी को अच्छे ख़ान-पान, व्यायाम और पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शहडोल से प्रारम्भ हुए सिकल सेल उन्मूलन मिशन- 2047 के तहत प्रदेश सरकार के प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिकल सेल जाँच की गहनता को बढ़ाने, प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रीनेटल टेस्टिंग के सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। सांसद आलोक शर्मा ने सिकल सेल उन्मूलन की प्रतिबद्धता के लिए केंद्रों एवं राज्य सरकार के सघन प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी और सराहना की। राज्यपाल पटेल का कार्यक्रम में पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। राज्यपाल पटेल को सिकल सेल जागरूकता पर आधारित किताब और एच.पी.सी.एल. की डायग्नोस्टिक किट भेंट की गई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल पटेल को एलुमिनाई एसोसिएशन के प्रतिनिधियों द्वारा पौधे भेंट किए गए। उन्होंने इन पौधों को गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर में रोपण के लिए दे दिया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह ने दिया। आयोजन समिति के सचिव डॉ. ललित श्रीवास्तव ने सिकल सेल एनीमिया सेंसेटाजेशन कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। सिकल सेल उन्मूलन, शोध और रोकथाम प्रयासों में काम करने वाले विभिन्न क्षेत्रों के विषय, विशेषज्ञों डॉ. राहुल भार्गव, डॉ. आर. के. निगम, डॉ. दानिश जावेद, एन.एच.एम. उप संचालक डॉ. रूबी खान ने जानकारी दी। कार्यक्रम में एलुमिनाई एसोसिएशन के पदाधिकारी, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सक, शोधार्थी, विशेषज्ञ और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने दिया एक पेड़ मां के नामअभियान से जन-जन को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का मौका- CM

अगली पीढ़ी को बेहतर धरती और वातावरण सौंपने के लिए पर्यावरण संरक्षण के प्रति सभी को सचेत होना होगा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा का एक ही दिन पर होना, बताता है कि भारतीय संस्कृति में पर्यावरण की कितनी महत्ता है प्रधानमंत्री मोदी ने दिया “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से जन-जन को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का मौका हम पौधे को पुत्र समान मानते हैं भारतीय जीवनशैली में रची-बसी है रिसाइकिल-री-यूज की प्रक्रिया जल संरक्षण के लिए 75 हजार से अधिक खेत-तालाबों का निर्माण किया गया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “एक पेड़ मां के नाम”-2025 अभियान का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण प्रबंधन पोर्टल का लोकार्पण और वेटलैंड एटलस का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने म.प्र. वार्षिक पर्यावरण पुरस्कार प्रदान किए पर्यावरण संरक्षण के लिए केन्द्रीय विद्यालय क्रं-2 भोपाल, सेंट्रल एकेडमी शहडोल, सिंधिया कन्या विद्यालय ग्वालियर और शिशु कुंज इंदौर को मिला पुरस्कार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर किया संबोधित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विश्व पर्यावरण दिवस है और गंगा दशहरा भी आज है। दोनों भारतीय संस्कृति के लिए विशेष महत्व रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के साथ जोड़ा है। राज्य सरकार आज से इस अभियान की शुरुआत कर रही है। हमारी संस्कृति में एक वृक्ष को सौ पुत्रों के बराबर माना है। परंपरागत रूप से कहा जाता है कि एक बावड़ी 10 कुओं के बराबर है, 10 बाबड़ी एक तालाब के बराबर है, 10 तालाब एक पुत्र के बराबर है और 100 पुत्र एक वृक्ष के समान है। पुत्रों की तुलना वृक्ष के साथ करना, प्रकृति की महत्ता को दर्शाता है। अगर प्रकृति संरक्षित रहेगी तो हमें अपने आप फलने-फूलने का अवसर मिलता रहेगा। वर्तमान दौर में भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान को पुनर्स्थापित करने का समय है। आज रिसाइकिलिंग और री-यूज की चर्चा की जाती है, न्यूनतम संसाधनों से बेहतर जीवनशैली की ओर भी ध्यान दिया जा रहा है। अगली पीढ़ी को बेहतर धरती और वातावरण सौंपने के लिए पर्यावरण संरक्षण के प्रति सभी को सचेत होना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्व पर्यावरण दिवस पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष पर्यावरण दिवस का विषय “प्लास्टिक प्रदूषण उन्मूलन” है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सबको स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में योगदान देना होगा। वायु की गुणवत्ता मे सुधार, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और जल संरक्षण के लिए व्यक्तिगत जवाबदेही और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना जरूरी है। राज्य सरकार पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय पौराणिक कथाओं में वृक्षों, नदियों, पहाड़ों के साथ-साथ वन्यजीवों की पूजा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा दी गई है, हमें इनसे प्रेरणा लेनी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 19वीं शताब्दी में महान वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु ने लंदन में रायल सोसाइटी को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करके बताया कि पौधों में प्राण होते हैं। जबकि भारत के लोक मानस में यह ज्ञान सदियों से रचा-बसा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार संस्कृति को संरक्षित करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति प्रदान कर रही है। पर्यावरण दिवस पर सभी पुरस्कार विजेता बधाई के पात्र हैं। बदलते दौर में प्लास्टिक के उपयोग को लेकर री-यूज, रि-साइकिल की बात कही जा रही है, यह प्रक्रियाएं भारतीय जीवनशैली में पहले से ही विद्यमान हैं। हमने नेट जीरो एमीशन का लक्ष्य रखा है। इसी आधार पर 2030 तक प्रदेश की ऊर्जा क्षमता को 500 गीगा वॉट तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है। जल गंगा संरक्षण अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में जल स्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। अब तक 60 हजार के लक्ष्य के विरूद्ध 75 हजार से अधिक खेत तालाबों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। तीन महीने के इस अभियान में 95 हजार 500 कुओं को रीचार्ज किया गया है और 1225 अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब नदियों पर बांध बनाए जाते हैं तो किसानों को भी लाभ मिलता है और सिंचाई का रकबा बढ़ता है। 2002-03 तक प्रदेश की सिर्फ 7 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित थी, जो अब 55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। विश्व का पहला नदी जोड़ो अभियान प्रदेश में चल रहा है, जिसके अंतर्गत दो नदियों को जोड़कर जल भंडारण क्षमता और उपयोगिता बढ़ाई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केन-बेतवा लिंक परियोजना का भी भूमि-पूजन किया है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्थान के साथ वर्षों से लंबित जल बंटवारे का समाधान निकाला। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। प्रदेश में सर्वाधिक 247 नदियां प्रवाहित होती हैं। प्रदेश की जलराशियां पड़ोसी राज्यों को भी समृद्धि प्रदान करती हैं। किसी राज्य को ज्यादा पानी भी मिल जाए तो कोई बुराई नहीं। भारतीय संस्कृति में उदारता का भाव समाया हुआ है। महाराष्ट्र सरकार के साथ तापी मेगा रिचार्ज परियोजना पर सहमति बन चुकी है। इस पर बांध बनाकर प्राकृतिक रूप से ग्राउंड वाटर को रिचार्ज किया जाएगा। जल भंडारण क्षेत्र में यह दुनिया का सबसे अनोखा प्रयोग होगा। दोनों राज्यों के 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षिप्रा नदी में श्रद्धालुओं के स्नान के लिए की जा रही व्यवस्था की भी जानकारी दी। सांसद खजुराहो वी.डी शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश जल जंगल जमीन और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए सभी क्षेत्रों में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है संसाधनों के शोषण के आधार पर विकास नहीं हो, मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसके प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है। शर्मा ने प्रदेशवासियों से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान में योगदान देने का आहवान किया। मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण देश दुनिया के सामने बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया

उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट में वेलनेस क्षेत्र के निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए खुले दिल से आमंत्रित किया और राज्य की अनुकूल निवेश नीतियों पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। सभी निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल और प्रगतिशील नीतियों की सराहना की और प्रदेश में निवेश के लिए संकल्प लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अरबिंदो हॉस्पिटल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी, लीजर होटल्स ग्रुप के डायरेक्टर मुकुंद प्रसाद, शतायु आयुर्वेद के सीईओ और एमडी डॉ. मृत्युंजय स्वामी, मेफ़ेयर ट्रैवल्स के एमडी शरद थडानी, लाभम ग्रुप के डायरेक्टर युगांश सोनी, शांतिगिरी आश्रम के जोनल हेड स्वामी चितासुधन ज्ञान तपस्वी, रॉयल ऑर्किड होटल के डायरेक्टर सुदीप रॉय, एरा हॉस्पिटैलिटी के संस्थापक शिवंदर सिंह, सीएचएल हॉस्पिटल ग्रुप के डायरेक्टर राजुल भार्गव, लेटेन्ट डेवकॉन के डायरेक्टर देवांग कपाडिया, जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सुधीर एम.वी., ट्रैवलपैक के चेयरमैन अशोक पटेल, हार्टफुलनेस इंटरफेथ प्रोग्राम्स एंड इवेंट के डायरेक्टर त्रिलोचन चावला और सनसेट डेजर्ट कैंप के सीईओ और एमडी हितेश्वर सिंह सिसौदिया ने वन-टू-वन चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में, मध्यप्रदेश वेलनेस और आध्यात्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। निवेशकों के इस उत्साहजनक प्रतिसाद से प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे मध्यप्रदेश को वैश्विक वेलनेस मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान मिल सकेगा।  

मुख्यमंत्री साय ने रहाटकर का आत्मीय स्वागत, शॉल एवं प्रतीक चिन्ह नन्दी भेंटकर सम्मानित किया

रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने रहाटकर का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें शॉल एवं प्रतीक चिन्ह नन्दी भेंटकर सम्मानित किया। सौजन्य मुलाकात के दौरान महिला सशक्तिकरण, बालिकाओं की सुरक्षा एवं कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और विधायक  विक्रम उसेंडी भी उपस्थित रहे। प्रदेश में लागू होगी ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता योजना’, 16 जून से शुरू होगा निरीक्षण अभियान  छत्तीसगढ़ सरकार राज्यभर में मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता योजना लागू करने जा रही है। इस योजना को गंभीरता से लागू किया जाएगा और इसकी निगरानी के लिए मंत्री, विधायक और कलेक्टर स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। प्रदेश के स्कूल 16 जून से खुल रहे हैं, उसी दिन से यह अभियान भी शुरू होगा। सीएम विष्णुदेव साय ने जातिगत जनगणना पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा, कांग्रेस केवल बात करती रही, जबकि निर्णय लेने का साहस प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाया। जातिगत जनगणना का लाभ ज़रूर मिलेगा। उन्होंने युक्तियुक्तकरण के विरोध पर भी प्रतिक्रिया दी, कहा यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों के हित में उठाया गया है। गृहमंत्री विजय शर्मा एक्शन मोड में, घुसपैठियों और गौ-तस्करी पर सख्ती के निर्देश छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा आज सैनिक कल्याण संचालनालय पहुंचे, जहां उन्होंने म्यूरल आर्ट्स का अनावरण किया, परिसर में वृक्षारोपण किया और वीर नारियों का सम्मान भी किया। इसके अलावा वे मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। गृहमंत्री की पहली बैठक एसटीएफ अधिकारियों के साथ होगी, जिसमें बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कार्रवाई तेज करने पर चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक, राजनांदगांव को हाई सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया गया है बैठक में रायपुर में सामने आए 2000 से अधिक संदिग्ध घुसपैठियों पर भी समीक्षा की जाएगी। पूरे प्रदेश के 33 जिलों में एसटीएफ टीमें गठित की गई हैं। साथ ही गौ तस्करी की रोकथाम पर भी गृहमंत्री समीक्षा बैठक करेंगे।

स्पिरिचुअल एण्ड वेलनेस समिट 2025 उज्जैन में विषय विशेषज्ञों ने की पर्यटन,आध्यात्म एवं वेलनेस के क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर सार्थक चर्चा

मध्यप्रदेश की टूरिज्म पॉलिसी निवेशकों के अनुकुल है:- प्रमुख सचिवशुक्ला — दुनिया में हेल्थ एण्ड वेलनेस बहुत बड़ा सेक्टर है:- राघवेन्द्र कुमार सिंह — स्पिरिचुअल एण्ड वेलनेस समिट 2025 उज्जैन में विषय विशेषज्ञों ने की पर्यटन,आध्यात्म एवं वेलनेस के क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर सार्थक चर्चा उज्जैन  मध्यप्रदेश की टूरिज्म पॉलिसी एवं वातावरण निवेशकों के अनुकूल है। उज्जैन नगरी हार्ट ऑफ स्पिरिचुअल इंडिया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव व प्रदेश सरकार द्वारा टूरिज्म पॉलिसी 2025 लागू की गई है। इसके तहत 10 से 30  प्रकार की अनुमतियां ऑनलाईन समय सीमा में उपलब्ध कराई जा रही है। पर्यटन के क्षेत्र में हॉटल, रिर्जाट, और अन्य प्रकार की पर्यटन सुविधाऐं उपलब्ध कराने के लिए पूंजी निवेश पर 15 से 30 प्रतिशत का अनुदान शासन द्वारा प्रदान किया जा रहा है। निवेशक स्पिरिचुअल एवं वेलनेस के क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आए, उन्हें शासन द्वारा हर संभव सुविधाऐं उपलब्ध कराई जाऐगी। यह बात प्रमुख सचिव पर्यटन शिव शेखर शुक्ला ने गुरूवार को उज्जैन में आयोजित स्पिरिचुअल एण्ड वेलनेस समिट 2025 में पैनल डिस्कशन सत्र को संबोधित करते हुए कही।     मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम एवं आनंद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस स्पिरिचुअल एण्ड वेलनेस समिट 2025 के दौरान दो सत्रों में पैनल डिस्कशन आयोजित किए गए, जिसमें विषय विशेषज्ञों ने सार्थक चर्चा की। प्रथम सत्र के पैनल डिस्कशन में योगा निसर्ग एण्ड वैदिक योगा स्कुल के संस्थापक स्वामी चैतन्य हरी जी, एवीएन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ रमेश वारियर, अपोलो आयुर्वेद पोजेक्ट लीडर डॉ मेघा केएल, लाईसॉर होटल्स के डायरेक्टर मुकुन्द प्रसाद, इकोनोमिक्स टाईम्स की एडिटर सुदीपशिखा, प्रमुख सचिव पर्यटन शिव शेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन तथा आनंद विभाग राघवेन्द्र कुमार सिंह ने भाग लिया।     प्रथम सत्र के पैनल डिस्कशन में प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि दुनिया में हेल्थ एवं वेलनेस सेक्टर बहुत बड़ा सेक्टर है। देश में मध्यप्रदेश ही एकमात्र राज्य है जहां आनंद विभाग है। उज्जैन आध्‍यात्मिक कला, संस्कृति एवं विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन काल से ही पहचाना जाता रहा है। प्रशासनिक क्षेत्र में भी सम्राट विक्रमादित्य ने इस नगरी को विशेष पहचान दिलाई है। यह आध्यात्मिकता एवं वेलनेस का केन्द्र है। प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यप्रदेश हमेशा नवाचारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि आपके सुझावों पर अमल किया जाएगा।     कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए आध्यात्मिक नगरी उज्जैन में किए जा रहे व्यापक विकास एवं निर्माण कार्यों और तैयारियों के बारें में प्रजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से अवगत कराया। और उज्जैन के समग्र विकास के लिए कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। उन्होनें कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सुगम आवागमन की सुविधाऐं उपलब्ध कराई जा रही है। सदावल में 4 हेलिपेड का निर्माण कार्य जारी है, क्षिप्रा नदी को अविरल प्रवाहमान बनाने के लिए कान्ह डायवर्सन क्लॉज डक्ट परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है, सेवरखेडी सिलारखेडी बैराज परियोजना का कार्य भी तेज गति से जारी है। क्षिप्रा नदी पर दोनो ओर 29 कि.मी नए घाट बनाए जा रहे है। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 2,376 हेक्टेयर में नगर विकास योजना पर कार्य किया जा रहा है। सड़क ,सीवरेज, पेयजल, बिजली आदि स्थाई स्वरूप की बुनियादी सुविधाओं के विकास एवं विस्तार पर विशेष तौर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने निवेशको से आवाह्न किया कि वे उज्जैन को स्पिरिचुअल सेंटर एवं वेलनेस सेंटर का हब बनाने के लिए निवेश के लिए आगे आए।           बिल्डींग वेलनेस इकोसिस्टम एण्ड वर्क फोर्स विषय पर दूसरे सत्र के पैनल डिस्कशन में प्रमुख सचिव संदीप यादव, वीपी कैरली आयुर्वेदिक ग्रुप की सुमोना वालिया, तिरुपत‍ि एस्टेट्स के डायरेक्टर महेश पारयानी ,आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर हिमांशु राय , ताईवान इंडिया आर्युवेद ऐसोसिएशन के सहसंस्थापक शुभम अग्निहोत्री , स्पोर्टस फिटनेस कोच विजय ठक्कर, आयुष मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव सुकविता गर्ग , इकोनॉमिक्स टाईम्स के आशुतोष सिन्हा ने भाग लिया और विस्तार से चर्चा की। प्रमुख सचिव संदीप यादव ने कहा कि देश में मध्यप्रदेश में सबसे अच्छी वेलनेस पॉलिसी है। उज्जैन में रोजाना एक लाख से अधिक दर्शनार्थी आते है ।     कार्यक्रम का संचालन सुशिखा सिंह ने किया तथा सत्र के अंत में सुत्रधार सुदिपशिखा एवं आशुतोष सिन्हा ने मंचासीन विषय विशेषज्ञों एवं पेनलिस्टों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। इस अवसर पर जनप्रतिनिधीगण ,वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्पिरिचुअल वेलनेस समिट में भाग लेने देश व प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए , निवेशक एवं प्रतिभागी उपस्थित थे।

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