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1 मई को गढ़ाकोटा में 23वां पुण्य विवाह समारोह, एक ही विधानसभा में 25000 से अधिक कन्यादान लेने के पश्चात एक बार पुनः

 गढ़ाकोटा सागर जिले के गोपाल भार्गव ने अब तक 25,000 से अधिक कन्याओं का कन्यादान कर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराया है. अब वे 1 मई को बुंदेलखंड स्तरीय विवाह सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं. इस भव्य समारोह में गढ़ाकोटा में सैकड़ों जोड़े सात फेरे लेंगे. यह गोपाल भार्गव का 23वां कन्यादान विवाह समारोह है. सरकार की कन्यादान योजना के तहत मिलने वाली राशि के अलावा दूल्हा-दुल्हन को विशेष उपहार भी दिए जाएंगे. रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 25 अप्रैल रखी गई है. मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहली विधानसभा से नौ बार विधायक रहे पंडित गोपाल भार्गव को राजनीति से कहीं ज्यादा पहचान मिली है उनके “कन्यादान संस्कार” से. 71 साल की उम्र में भी उनका जोश और जज़्बा इतना जीवित है कि वे आज भी बेटियों की शादी में खुद पिता की भूमिका निभाते हैं. 25,000 से अधिक कन्याओं के विवाह का आयोजन कर वे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुके हैं, लेकिन उनके इस मिशन का कारवां अब और बड़ा होने जा रहा है. कन्यादान नहीं, जीवन का उद्देश्य वर्ष 2001 से शुरू हुई यह यात्रा आज 23वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. पंडित गोपाल भार्गव इस बार सिर्फ रहली विधानसभा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विवाह सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं. यह ऐतिहासिक आयोजन 1 मई को गढ़ाकोटा के नटराज स्टेडियम में होगा, जहां सैकड़ों जोड़े एक ही छत के नीचे सात फेरे लेंगे. प्रत्येक वैवाहिक जोड़े को 49 हजार रुपए की राशि एवं उपहार सामग्री भेंट स्वरूप प्रदान की जाएगी। निकाह एवं विवाह एक साथ संपन्न होंगे। समारोह में पधारे सभी अतिथियों के लिए भोजन व्यवस्था रहेगी। 18 मार्च तक 4 दिन में लगभग 205 पंजीयन हो चुके हैं। पंजीयन करवाने की अंतिम तारीख 25 अप्रैल है। पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेजों में मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र, वर एवं वधू की समग्र परिवार आईडी की छायाप्रति, वर एवं वधू की समग्र सदस्य आईडी की केवाईसी अनिवार्य है। वर एवं वधू के आधार कार्ड की छायाप्रति, आयु प्रमाण पत्र की छायाप्रति, पासपोर्ट साइज के चार-चार फोटोग्राफ, वधु की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होना अनिवार्य है। वर की आयु न्यूनतम 21 वर्ष होना अनिवार्य है। कल्याणी (विधवा) होने की स्थिति में पूर्व पति का मृत्यु प्रमाण-पत्र, परित्यागता/तलाकशुदा महिला/पुरुष होने की स्थिति में कानूनी रूप से तलाक होने का न्यायालयीन आदेश अनिवार्य रूप से संलग्न करें। वर/वधु यदि दिव्यांग है तो दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड अनिवार्य रूप से संलग्न करें। पंजीकृत श्रमिक परिवार होने की स्थिति में मध्यप्रदेश भवन एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल कार्ड की छायाप्रति, वधू के बैंक पासबुक की छायाप्रति, (जिसमें वधू का नाम पिता का नाम, खाता नम्बर एवं IFSC कोड स्पष्ट दिखाई दें), वधू के बैंक खाते की लिमिट 50 हजार से कम नहीं होना चाहिए। बैंक खाता बंद अथवा होल्ड लगा हुआ नहीं होना चाहिए, फार्म पूरा भरा होना अनिवार्य है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज एक ही विधानसभा में सर्वाधिक 25 हजार से अधिक कन्याओं के कन्यादान लेने का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में रहली विधानसभा का दर्ज है। रहली क्षेत्र का यह समारोह देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुका है। सम्मान और सुविधा, दोनों का होगा संगम यह विवाह समारोह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होता. इसमें सरकार की कन्यादान योजना के तहत मिलने वाली 49,000 रुपये की सहायता के साथ-साथ गोपाल भार्गव द्वारा दिया गया विशेष उपहार भी दूल्हा-दुल्हन को दिया जाता है. हल्दी, मेहंदी, संगीत जैसी हर रस्म को भव्य रूप में मनाया जाता है, और बारात भी पूरे शाही अंदाज़ में निकलती है. बेटियों के लिए बना एक पिता जो बेटियां किसी कारणवश अपने माता-पिता से ये सौभाग्य नहीं पा सकीं, उनके लिए गोपाल भार्गव एक धर्मपिता बनकर खड़े हुए. उनके द्वारा निभाई गई यह भूमिका अब एक समाजिक आंदोलन में तब्दील हो चुकी है. बुंदेलखंड स्तरीय सम्मेलन में पंजीयन शुरू इस बार छह जिलों के जोड़े पंजीयन कर इस सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. पंजीयन की अंतिम तारीख 25 अप्रैल है. आवेदकों को आधार कार्ड, समग्र आईडी, जन्म प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेज देने होंगे. वधू की न्यूनतम उम्र 18 और वर की 21 वर्ष होना अनिवार्य है.

प्रदेश को एक और वंदेभारत की सौगात! 600 किमी के सफर में कई बड़े शहरों को जोड़ेगी नई ट्रेन

भोपाल  एमपी से यूपी के बीच सफर करनेवाले रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। उन्हें अब न केवल ट्रेनों की जबर्दस्त भीड़ से निजात मिलेगी बल्कि उनके सफर में समय भी बेहद कम लगेगा। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से यूपी की राजधानी लखनऊ तक का सफर जल्द ही बहुत आसान होनेवाला है। इन दोनों महानगरों के बीच नई वंदेभारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव है। करीब 600 किमी के सफर में नई ट्रेन लखनऊ और भोपाल सहित बीच के कई बड़े शहरों को जोड़ेगी। हालांकि नियमित ट्रेनों की तुलना में इसका किराया ढाई गुना से ज्यादा होगा। लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस यूपी के लखनऊ मंडल की ही ट्रेन होगी। यूपी की ओर जानेवाली ज्यादातर ट्रेनों में इतनी भीड़ रहती है कि कई यात्री तो कोच के अंदर प्रवेश ही नहीं कर पाते। इन ट्रेनों में महीनों की लंबी वेटिंग भी बनी रहती है। प्रस्तावित लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस इन झंझटों से यात्रियों को छुटकारा दिला देगी। भोपाल लखनऊ वंदे भारत में कितने कोच होंगे? पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को नई वंदे भारत ट्रेन मिलने वाली थी. लेकिन यूपी के यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए इस ट्रेन को भोपाल डिविजन की जगह लखनऊ डिविजन से चलाया जाएगा. लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस एकदम नए कोच वाली प्रीमियम ट्रेन होगी, जिसमें 8 कोच का रैक होगा. माना जा रहा है कि लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस में तकरीबन 564 सीटें होंगी और ये स्लीपर हो सकती है. लखनऊ भोपाल वंदे भारत का कितना होगा किराया? सूत्रों की मानें तो लखनऊ और भोपाल के बीच चलने वाली इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया प्रीमियम ट्रेनों की तरह ही रहेगा. यानी इस ट्रेन में भी राजधानी, दुरंतो आदि ट्रेनों के बराबर या उससे ज्यादा चार्ज किया जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह सेमी हाई स्पीड होने के साथ-साथ यात्रियों को प्रीमियम सुविधाएं और कंफर्ट देगी. भोपाल से लखनऊ के बीच कितनी दूरी? मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उत्तर प्रदेश की राजधानी भोपाल का डिस्टेंस लगभग 720 किमी है. फिलहाल इस रूट पर 10 से ज्यादा ट्रेनें चलती हैं, जिन्हें दोनों शहरों के बीच 9 से 12 घंटे तक का ट्रेवल टाइम लगता है. हालांकि, इतनी ट्रेनें होने के बाद भी इस रूट पर यात्रियों की जबर्दस्त भीड़ होती है. कब शुरू होगी लखनऊ-भोपाल वंदे भारत सीनियर डीएमई आरपी खरे ने बताया, ” भोपाल रेल मंडल से पटना और लखनउ के लिए वंदे भारत चलेगी. वंदे भारत की एक रैक बनने में करीब एक से डेढ़ महीने का समय लगता है. ऐसे में अप्रैल या शुरुआती मई तक भोपाल रेल मंडल को स्लीपर वंदे भारत की एक रैक मिल सकती है.” गौरतलब है कि रेलवे ने हाल ही में देश को 2 और नई वंदे भारत जयपुर-उदयपुर-जयपुर और अजमेर दिल्ली अजमेर वंदे भारत दी हैं, जिसके बाद लखनऊ-भोपाल वंदे भारत के जल्द शुरू होने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा होना बाकी है.

इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू, सात दिन शहर में रहेगी टीम, हर बिंदू पर करेगी जांच

इंदौर इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग शुक्रवार से शुरू हो गई। इस बार इंदौर की सफाई व्यवस्था को बारिकी से परखा जाएगा, क्योंकि इंदौर स्वच्छता की प्रीमियर लीग में शामिल है। अन्य शहरों की तुलना में इस लीग में शामिल शहरों के आंकलन का पैमाना अलग होगा। इसमें इंदौर के अलावा सूरत और नवी मुबंई भी शामिल है। यह दोनों शहर पिछले साल दूसरे और तीसरे नंबर पर थे। इससे इस बार मुकाबला और कड़ा है। दोनों शहरों से इंदौर को टक्कर मिल रही है, लेकिन इंदौर की सबसे बड़ी ताकत डोर टू डोर कचरा कलेक्शन है। इंदौर में शत प्रतिशत कचरा घरों से निकल कर ट्रेंचिंग ग्राउंड तक जाता है। वैसे तो स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए रविवार को ही इंदौर में टीम आ गई थी। टीम ने खजराना मंदिर का दौरा भी किया, लेकिन विधिवत सर्वेक्षण शुक्रवार से शुरू किया गया है। टीम शहर की बस्तियों में पहुंचेगी और लोगों से फीडबैक भी लेगी। इंदौर आई टीम को कहां जाना है और किस क्षेत्र का मुआयना करना है, इसके निर्देश दिल्ली में बैठी टीम गूगल मेप के जरिए देगी। सुबह इंदौर की सफाई व्यवस्था आम दिनों की तुलना में बेहतर नजर आई। गलियों को विशेष तौर पर साफ किया गया और गीले और सूखे कचरे को व्यस्थित तरिके से घरों से लिया गया। मिक्स कचरे को लेने में सख्ती दिखाई गई। स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर के चार हजार से ज्यादा शहरों में शुरू हो चुका है। सर्वे की तैयारी इंदौर नगर निगम ने चार माह पहले से की थी, लेकिन सर्वे देरी से होने के कारण बार-बार वाॅल पेटिंग, बेकलेन सफाई करना पड़ी। इस बार इंदौर को प्रिमियर लीग में रखा है। इस लीग में सूरत और नवी मुंबई से इंदौर को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछली बार सूरत ने इंदौर के साथ पहला पुरस्कार संयुक्त रुप से साझा किया था। इस बार मुकाबला और कड़ा है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम सुबह खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है, हालांकि इंदौर का स्वच्छता सर्वेक्षण विधिवत रुप से शुक्रवार से शुरू होगा। टीम बस्ती व काॅलोनियों में जाकर सफाई व्यवस्था का आंकलन करेगी। स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है? स्वच्छ सर्वेक्षण दुनिया का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण है, जिसे आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। यह सर्वेक्षण स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के विभिन्न मानकों पर शहरी क्षेत्रों का मूल्यांकन करता है, जिनमें शामिल हैं:     कचरा प्रबंधन (संग्रह, पृथक्करण और निपटान)     जनता की प्रतिक्रिया (नागरिक भागीदारी और संतोष स्तर)     स्थल निरीक्षण (स्वच्छता स्तरों का वास्तविक समय में सत्यापन)     स्वच्छता बुनियादी ढांचा (शौचालयों, जल आपूर्ति और जल निकासी प्रणालियों की उपलब्धता और रखरखाव)     प्रमाणीकरण (तृतीय-पक्ष एजेंसियों द्वारा दी गई रेटिंग)… Read more at: https://hindicurrentaffairs.adda247.com/top-cleanest-cities-in-india-indore-featured-for-the-7th-time/ इस बार इंदौर यहां कमजोर     शहर की बेकलेन में कचरा फिर नजर आने लगा है। पहले अर्थदंड के कारण लोग कचरा फेंकने से बचते थे।     शहर के पुराने हिस्से में अभी भी खुली नालियां, जलजमाव और नदियों में सीवरेज जल मिलता है। इस बार सर्वेक्षण में इसे भी जांचा जाएगा।     सफाई को लेकर लोगों में भी जागरुकता की कमी आई है। कई बस्तियों में कचरे के खुले ढेर नजर आते है।     डोर टू डोर वाहन फूल-पत्तियों के कचरे को ले जाने से मना करते है, इसलिए लोग अब उन्हें खुले में फेंकने लगे है।  

नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक होगा कम

जबलपुर जबलपुर से इंदौर के बीच नई रेल लाइन गाडवारा-बुदनी होकर नहीं इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही। ये लाइन इंदौर-देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी। इस रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा। इस नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक कम हो जाएगा। जबलपुर-इंदौर (गाडरवारा एवं बुदनी होकर) नई रेल लाइन की प्रगति पर नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में ये जानकारी दी। रेल मंत्री ने बताया कि बुदनी से इंदौर के बीच नई रेल लाइन निर्माण कार्य प्रक्रिया में है। इस परियोजना के गाडरवारा-बुदनी रेलखंड के दोनों अंतिम स्टेशन पूर्व से इटारसी होकर रेलमार्ग से जुड़े हुए हैं। आठ साल पुरानी परियोजना दोनों के मध्य नवीन रेल लाइन से उनकी दूरी में ज्यादा अंतर नहीं आ रहा है। इसलिए गाडरवारा-बुदनी के मध्य नई रेल लाइन बिछाना तर्कसंगत नहीं है। आठ वर्ष पुरानी परियोजना- जबलपुर(गाडरवारा)-इंदौर (मांगलियागांव) नई रेल लाइन की घोषणा वर्ष 2016-17 के बजट में हुई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में था। वर्ष 2021-22 के बजट में एक हजार रुपये के आवंटन से परियोजना की बंद फाइल फिर खुल गई। उसके बाद के बजट में भी परियोजना को आवंटन जारी हुए। गत दो बजट में आवंटन बढ़ने के बाद परियोजना के इंदौर-बुदनी रेलखंड में रेल लाइन निर्माण प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इंदौर-बुदनी का कार्य जारी लोकसभा में रेल मंत्री ने बताया कि इंदौर (मांगलियागांव) और बुदनी के बीच (205 किलोमीटर) नई रेल लाइन का कार्य 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है। मार्च-2024 तक 948.37 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्ष 2024-25 के लिए इस परियोजना को 1107.25 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। रेल लाइन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा रही है। चार किमी का अंतर इटारसी होकर गाडरवारा से बुदनी रेल मार्ग से जुड़ा है, जिसकी दूरी 141 किमी है। इंदौर नई रेल लाइन परियोजना में प्रस्तावित गाडवारा-बुदनी रेलखंड की दूरी 137 किमी है। मात्र चार किलोमीटर की दूरी कम करने के लिए अलग से लाइन बिछाना रेलवे को अब खर्चीला लग रहा है।

बिना ब्याज पांच लाख तक लोक के लिए अब तक तीन लाख पंजीकरण हो चुके, 33 हजार ऋण स्वीकृत: योगी आदित्‍यनाथ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बिना ब्याज पांच लाख तक लोक के लिए अब तक तीन लाख से अधिक युवा उद्यमियों के पंजीकरण हो चुके हैं और 32 हजार से अधिक युवाओं को ऋण स्वीकृत हो चुका है। योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को यहां मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत अयोध्या मंडल के सभी जिलों से आए युवाओं के ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह ऋण व्यवसाय को आगे बढ़ाने में युवाओं का संबल बनने के लिए स्वीकृत किया गया है। उप्र में मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी योजना विकास अभियान (सीएम-युवा) के तहत लाभार्थी को पांच लाख रुपये तक की लागत का व्यवसाय शुरू करने के लिए ब्याज मुक्त कर्ज देने की सरकार की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्याज-मुक्त ऋण युवा उद्यमियों को आगे बढ़ने के लिए एक बेहतरीन योजना है। उन्होंने कहा कि योजना शुरू होने के दो महीने के भीतर एक लाख युवाओं को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। उन्होंने कहा कि पोर्टल लांच होने के कुछ ही समय बाद उप्र के युवाओं से इस योजना को समर्थन मिला। तीन लाख से अधिक पंजीकरण अब तक हो गये हैं जिसमें एक लाख 27 हजार से अधिक युवाओं के फार्म स्‍क्रीनिंग के बाद बैंकों को भेजे जा चुके हैं। इसमें 32 हजार से अधिक युवाओं के लिए बैंक का कर्ज स्वीकृत हो गया है। मंडलवार आयोजित होने वाले इस तरह के समारोह की चर्चा करते हुए मुख्‍यमंत्री ने कहा कि मैं इस सातवें कार्यक्रम में भाग ले रहा हूं। 25, 26, 27 मार्च तक हर जिले में निवेश मेला आयोजित होने जा रहा है, उस मेले में भी युवाओं के लिए ऐसी योजनाओं के शिविर लगेंगे। उन्होंने कहा कि एक हजार से अधिक युवा उद्यमी बैंक ऋण का लाभ लेकर एक नए जीवन की शुरुआत करना चाहते हैं। वे भी अपने जनपद, प्रदेश व देश के विकास में सहयोगी बनना चाहते हैं। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, एमएसएमई मंत्री राकेश सचान,अयोध्‍या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी समेत कई प्रमुख लोग मौजूद थे। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मंडल के 1,148 युवा उद्यमियों को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 47 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के लाभार्थियों को टूलकिट भी वितरित किए ताकि वे अपने हुनर को निखार सकें। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा पहले अपनी पहचान छुपाता था लेकिन आज वह अपना उद्यम स्थापित कर रहा है। यह वही उत्तर प्रदेश है जहां पहले उद्यम नहीं लगते थे, आज नए-नए उद्यम भी लग रहे हैं और हमारा युवा भी अपना उद्यम लगाने के लिए तैयार हो रहा है। मुख्‍यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति पर गर्व जताते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था 12.75 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 27.51 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो दोगुने से अधिक की वृद्धि है। योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के बदलते स्वरूप की चर्चा करते हुए कहा कि 2016-17 में पूरे साल में 2.34 से 2.50 लाख श्रद्धालु आते थे, लेकिन 2024 में 16 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। अब प्रतिदिन 2.5 लाख लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान विंध्यवासिनी धाम, काशी, गोरखपुर, चित्रकूट और नैमिषारण्य जैसे तीर्थ भी श्रद्धालुओं से भरे रहे। उन्होंने कहा कि इन धार्मिक आयोजनों ने आस्था को आजीविका से जोड़ा है। हजारों लोगों के लिए नए रोजगार का सृजन भी हुआ। उन्होंने कहा कि आस्था और संस्कृति रोजगार का पर्व भी बन सकती है।

मुख्यमंत्री ने मालनपुर में एक हजार करोड़ रूपए लागत की एलिक्सर इंडस्ट्रीज की आधुनिक मेगा इकाई का किया भूमि-पूजन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक विकास का जो सपना देखा है, चंबल क्षेत्र उसमें सुनहरा अध्याय लिख रहा है। चंबल की भूमि उपजाऊ है, कमाऊ है, साथ ही टिकाऊ भी है। चंबल जैसा टिकाऊ जज्बा और कहीं देखने को नहीं मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को भिण्ड जिले के मालनपुर में एक हजार करोड़ रूपए की लागत से एलिक्सर इण्डस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की आधुनिक मेगा इकाई का भूमि-पूजन करते हुए यह बात कही। इस मौके पर रेडीमेड गारमेंट ग्वालियर की 7 इकाईयों और मुरैना जिले के औद्योगिक क्षेत्र पिपरसेवा की 11 इकाईयों का भी भूमिपूजन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंबल अब विकास के नाम से पहचाना जाता है। इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोच और प्रदेश सरकार के संकल्प के कारण अनेक औद्योगिक इकाईयां प्रारंभ हुई हैं। इन औद्योगिक इकाईयों के प्रारंभ होने से बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कामना सिंह भदौरिया, राष्ट्रीय अनुसूचित जातिआयोग के अध्यक्ष श्री लाल सिंह आर्य, विधायक गोहद श्री केशव देसाई, लहार विधायक श्री अम्बरीश शर्मा, श्री देवेन्द्र सिंह नरवरिया एवं एलिक्सर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमेन श्री अरुण गोयल सहित क्षेत्रीय जन-प्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर कार्यक्रम में वर्चुअलउपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिये हर संभव कार्य किया जा रहा है। इन्वेस्टर्स समिट व रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव से न केवल देश बल्कि विदेशों से भी इन्वेस्टर्स को आमंत्रित करने का कार्य किया गया है, जिसके सार्थक परिणाम भी परिलक्षित हो रहे हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में भी अनेक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो रही हैं, जिनके माध्यम से ग्वालियर-चंबल संभाग के युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ ही किसानों के हित में भी अनेक निर्णय लिए गए हैं। चंबल-कालीसिंध-पार्वती (पीकेसी) लिंक परियोजना क्षेत्र में खुशहाली लेकर आयेगी। इस परियोजना से चंबल को सर्वाधिक लाभ प्राप्त होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री एवं भिण्ड जिले के प्रभारी मंत्री श्री पटेल ने कहा कि चंबल क्षेत्र औद्योगिक रूप से विकसित हो रहा है। यह हम सबके लिये प्रसन्नता की बात है। औद्योगिक विकास से न केवल क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा, बल्कि यहां के युवाओं को बेहतर रोजगार भी उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से मालनपुर में एक हजार करोड रूपए के निवेश से जो नई इकाई प्रारंभ हो रही है, वह इस क्षेत्र के विकास में नया अध्याय लिखेगी। ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ-साथ सम्पूर्ण प्रदेश में औद्योगिक विकास का बेहतर माहौल बना है, जिसके सार्थक परिणाम हमें सम्पूर्ण प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ग्वालियर-चंबल संभाग के औद्योगिक विकास के लिये धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ग्वालियर के रेडीमेड गारमेंट पार्क में भी नई औद्योगिक इकाईयां प्रारंभ हुई हैं, इससे ग्वालियर के युवाओं को बेहतर रोजगार मिल सकेगा। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की सोच एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्प के कारण प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिली है। ग्वालियर-चंबल संभाग में भी औद्योगिक विकास की दिशा में अनुकरणीय कार्य हो रहा है। मालनपुर में एक हजार करोड रूपए की नवीन इकाई स्थापित होने से क्षेत्र के युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री ने नवीन उद्योगपतियों से किया वर्चुअल संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मालनपुर में आयोजित समारोह से ग्वालियर रेडीमेड गारमेंट पार्क में स्थापित की जा रही नई इकाईयों के संचालकों और मुरैना जिले के पिपरसेवा में स्थापित की जा रही नई इकाईयों के संचालकों से भी वर्चुअली संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर रेडीमेड पार्क से श्री अमित जैन, श्री मोहित शिवहरे, हर्षित बंसल एवं श्री संजय खण्डेलवाल से नई इकाइयों के संचालन के संबंध में चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को नई इकाई प्रारंभ करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि नई इकाईयों के माध्यम से बेहतर कार्य कर प्रदेश के विकास में भागीदार बनें और जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें। मालनपुर में स्थापित नई इकाई से मिलेगा रोजगार मध्यप्रदेश में औ‌द्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए एलिक्सर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लगभग एक हजार करोड़ रूपए की लागत से मीडियम डेंसिटी फाइबर बोर्ड (एमडीएफ), प्लाईवुड और अन्य मूल्य-वर्धित उत्पादों के विनिर्माण हेतु एक मेगा-स्तरीय अत्याधुनिक इकाई स्थापित की जा रही है। यह राज्य के औद्योगिक परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम है और इससे प्रदेश में रोजगार, कृषि-आधारित उद्योगों और हरित पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश के औ‌द्योगिक विकास में एलिक्सर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड का योगदान एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

रामलला के सामने सिंहासन भी छोटा, राम मंदिर के लिए अगर सत्ता भी गंवानी पड़े तो कोई दिक्कत नहीं- सीएम योगी

अयोध्‍या रामनगरी अयोध्‍या पहुंचे मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने कहा कि उनकी तीन पीढ़ियां श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए पूरी तरह से समर्पित थीं। सीएम ने कहा कि अगर राम मंदिर के लिए उन्हें सत्ता भी खोनी पड़ी तो कोई समस्या नहीं होगी। सरकारी तंत्र नौकरशाही की गिरफ्त में है और उस नौकरशाही में एक बड़ा वर्ग था जो कहता था कि सीएम के तौर पर अयोध्या जाने से विवाद पैदा होगा। मैंने कहा कि अगर विवाद होना है तो होने दो। लेकिन हमें अयोध्या के बारे में सोचने की जरूरत है। फिर, एक और वर्ग था जिसने कहा कि अगर मैं वहां गया, तो राम मंदिर के बारे में बात होगी। मैंने पूछा कि क्या मैं यहां सत्ता के लिए आया हूं। उत्तर प्रदेश के सीएम ने आगे दीपोत्सव का जिक्र करते हुए कहा कि आज अयोध्या में यह एक महोत्सव बन गया है। सीएम ने कहा, ‘मैंने अवनीश अवस्थी से कहा कि चुपचाप वहां जाएं और देखें कि वहां दीपोत्सव कैसे आयोजित किया जा सकता है। वह अयोध्या आए, एक सर्वे किया और कहा कि दीपोत्सव वास्तव में आयोजित किया जाना चाहिए। अब, दिवाली से पहले दीपोत्सव एक महोत्सव की तरह हो गया है। अयोध्या का दीपोत्सव अयोध्या का एक महोत्सव , एक समाज, एक उत्सव बन गया है। बड़ी संख्या में लोग दीपोत्सव में भाग लेने के लिए यहां आते हैं। इतना ही नहीं राज सदन में कल्चरल प्रोग्राम के उद्घाटन के बाद मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर को लेकर एक बड़ा बयान भी दे दिया. उन्होंने कहा कि हमारी तीन पीढ़ियों ने श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष किया. हम सत्ता के लिए नहीं आए हैं. अगर राम मंदिर के लिए सत्ता गंवानी भी पड़ी तो कोई समस्या नहीं है. सीएम योगी ने कहा कि दीपोत्सव शुरू किया तो अनेक थी चुनौती. ऐसी धारणा थी कि मुख्यमंत्री के रूप में अयोध्या जाने से विवाद खड़ा होता है. एक वर्ग ऐसा था जिसने कहा कि आप जाएंगे तो राम मंदिर की बात होगी. हमने कहा सत्ता के लिए कौन आया था. अगर राम मंदिर के लिए सत्ता भी गंवानी पड़ी तो नहीं होनी चाहिए . योगी ने पीएम मोदी को दिया धन्यवाद सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि विरासत और विकास के प्रधानमंत्री के पीएम के दृष्टिकोण ने श्रद्धालुओं के लिए श्री राम मंदिर के दर्शन करना संभव बनाया है। यूपी सीएम ने कहा, ‘आज लाखों श्रद्धालु अयोध्या आते हैं , पहले लोग यहां आना चाहते थे लेकिन नेतृत्व की कमी के कारण लोग नहीं आते थे। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं जिन्होंने विरासत और विकास को एक साथ जोड़ दिया।’ यूपी सनातन भूमि का आधार- सीएम योगी उत्तर प्रदेश के सीएम ने कहा कि अयोध्या भारत की सनातन भूमि का आधार है। सीएम ने कहा, ‘लंबे समय से यह सनातन धर्म की प्रेरणा रही है। अयोध्या संस्कृति की सबसे पहली भूमि है। इसी अयोध्या में भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम का जन्म हुआ था। भगवान राम की भूमि पर आयोजित होने वाला कार्यक्रम अद्भुत है। सीएम योगी ने कहा कि यह ‘नए भारत’ का ‘नया उत्तर प्रदेश’ है, यहां नीति बनाकर बिना भेदभाव के समाज के हर एक तबके के लिए आर्थिक स्वावलंबन के काम किए जा रहे हैं। एक नारे ने बदल दिया देश का सियासी मिजाज।

पुल के शिलान्यास पर भड़के विधायक, कार्यक्रम में एक आदमी को पीटा

गुवाहाटी असम के ऑल इंडिया यूनाइटेड फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक शम्सुल हुदा सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक आदमी को पहले थप्पड़ मारते, फिर केले के पेड़ से पीटते नजर आ रहे हैं। रिपोर्टस के मुताबिक विधायक शम्सुल हुदा इस बात पर भड़क गए थे कि उनके कार्यक्रम के लिए लाल रिबन और केले के बड़े पेड़ नहीं लगाए गए। हालांकि जब विवाद बढ़ा तो विधायक ने माफी मांग ली। छोटे पेड़ देखकर और चढ़ा पारा जानकारी के अनुसार बिलासपारा के विधायक शम्सुल हुदा के मारपीट का वीडियो धुबरी के दैखोवा बाजार में हुई। वह एक आरसीसी पुल के शिलान्यास समारोह में पहुंचे थे। असम के रीति रिवाज के मुताबिक समारोह स्थल पर केले के पौधे लगाए गए थे। जब उद्घाटन करने की बारी आई तो उन्हें लाल रिबन भी नजर नहीं आया। फिर क्या था, विधायक गुस्से से लाल-पीले हो गए और ठेकेदार के कर्मचारी साहिदुर रहमान को ताबड़तोड़ थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद उनकी नजर केले के छोटे पौधों पर पड़ी तो उनका पारा हाई हो गया। वह उन पौधों से ही साहिदुर रहमान को पीटने लगे। विधायक की मारपीट से कर्मचारी दुखी साहिदुर रहमान ठेकेदार अविनाश अग्रवाल के लिए मोहरी का काम करता है। नेताजी की इस हरकत पर सभी भौंचक्के रह गए। साहिदुर रहमान ने बताया कि एआईयूडीएफ विधायक शम्सुल हुदा ने बिना किसी कारण के उन पर हमला कर दिया। उसे एक जनप्रतिनिधि से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। यह अपमानजनक और दर्दनाक था। इस घटना से धुबरी के लोग नाराज हैं और विधायक की हरकत की निंदा कर रहे हैं। लोगों का सवाल है कि क्या एक चुने हुए नेता को ऐसा व्यवहार करना चाहिए? वायरल वीडियो और जनता का गुस्सा यह घटना किसी सस्ते फिल्मी ड्रामे से कम नहीं थी। और जैसे ही इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कोई इसे कुर्सी का अहंकार बता रहा है, तो कोई विधायक की मानसिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “जनता के सेवक ऐसे व्यवहार करेंगे, तो भरोसा किस पर करें?” पीड़ित सहिदुर रहमान की आवाज में दर्द साफ झलक रहा था। उसने कहा, “मैं तो अपना काम कर रहा था। विधायक साहब को इतना गुस्सा क्यों आया, समझ नहीं आता।” यह सवाल सिर्फ सहिदुर का नहीं, बल्कि पूरे बिलासिपारा के लोगों का है। माफी का ढोंग या सच? घटना के बाद पीड़ित रहमान ने उसी रात गौरीपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई, जिसे बाद में बिलासिपारा पुलिस स्टेशन ट्रांसफर किया गया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 115(2), 8296, 352 और 351(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। जब मामला तूल पकड़ने लगा और FIR दर्ज हो गई, तो विधायक साहब का रुख बदल गया। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा, “मैं मानता हूं कि मुझसे गलती हुई। परिस्थितियों ने मुझे ऐसा करने को मजबूर किया। मैं असम की जनता से माफी मांगता हूं।” लेकिन यह माफी कितनी सच्ची है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह जनता का गुस्सा शांत करने की कोशिश थी, या सचमुच पछतावा? लोगों का कहना है कि अगर माफी मांगनी ही थी, तो पहले अपनी गलती क्यों नहीं मानी? और फिर, एक जनप्रतिनिधि को ऐसी “परिस्थितियां” क्यों बेकाबू कर रही हैं? कुर्सी और जिम्मेदारी यह पहली बार नहीं है जब कोई जनप्रतिनिधि अपने व्यवहार की वजह से चर्चा में आया हो। लेकिन समसुल हुदा की यह हरकत कई सवाल खड़े करती है। क्या पावर की कुर्सी इतनी भारी हो जाती है कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा फूट पड़ता है? या फिर यहि व्यक्तिगत अहंकार है, जो जनता की सेवा के वादों पर भारी पड़ रहा है? पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। AIUDF पहले से ही विवादों में घिरी है, और यह घटना पार्टी के लिए एक और झटका साबित हो सकती है। जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या विधायक साहब को अपनी हरकत की कीमत चुकानी पड़ेगी, या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।

दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया

 नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी नेतृत्व बड़ा परिवर्तन हुआ है. दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया है. वहीं, सत्येंद्र जैन को पंजाब का सह-प्रभारी बनाया गया है. इसके अलावा, सौरभ भारद्वाज को दिल्ली AAP संयोजक नियुक्त किया गया है. भारद्वाज ने गोपाल राय की जगह ली है. आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा और संजय सिंह पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक के लिए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के आवास पर पहुंचे हैं. दिल्ली में AAP की हार के बाद आतिशी राजधानी में मुख्य जिम्मेदारी सौंपी जा रही है. बतौर नेता विपक्ष आतिशी बीजेपी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार का मुकाबला करने के लिए राजनीतिक रणनीति तय करेंगी. विधानसभा चुनाव और दिल्ली सरकार पर होने वाले बड़े राजनीतिक हमलों की रणनीति आतिशी ही बनाएंगी. बड़े फैसलों में वो शीर्ष नेतृत्व की सहमति लेंगी. हालांकि, दिल्ली यूनिट का संगठनात्मक कार्य, पार्टी का विस्तार और फेरबदल का काम प्रदेश संयोजक गोपाल राय के अधीन रहेगा. वहीं, दिल्ली इकाई संगठन के काम प्रदेश संयोजक गोपाल राय के अधीन रहेंगे। पार्टी की मजबूती से लेकर विस्तार और फेरबदल तक सभी काम गोपाल राय ही संभालेंगे। पीएसी की मंजूरी के बाद आने वाले महीने में दिल्ली प्रदेश इकाई में बड़े स्तर पर फेरबदल देखने को मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, ‘आप’ अपने शीर्ष नेतृत्व को तीन प्रमुख राज्यों – पंजाब, गुजरात और गोवा में तैनात करेगी, जहां पार्टी मजबूत स्थिति में है। दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और दिल्ली के पूर्व हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन पंजाब में ‘आप’ का काम देखेंगे। वे न सिर्फ संगठनात्मक कामों को संभालेंगे बल्कि केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय लक्ष्यों को लागू करने में प्रदेश संयोजक और पदाधिकारियों की मदद करेंगे। इसके साथ ही सिसोदिया ‘आप’ के वादों और पंजाब सरकार द्वारा मुख्य एजेंडों के लागू करने पर भी नजर रखेंगे। प्रभारी के तौर पर वे ‘आप’ हाईकमान और पंजाब इकाई के बीच पुल का काम करेंगे। सूत्रों ने कहा कि सिसोदिया और जैन दोनों आने वाले महीनों में पंजाब में अधिक सक्रिय नजर आएंगे। इसका मकसद संगठनात्मक कार्यों से लेकर भगवंत मान सरकार की स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के साथ ‘पंजाब मॉडल’ बनाने में मदद करना है। ‘आप’ के लिए गुजरात भी एक और महत्वपूर्ण चुनावी रण का मैदान बना हुआ है। 2022 में पंजाब जीतने के बाद ‘आप’ ने भाजपा के इस ‘अभेद्य’ किले को भेदने की कोशिश की थी। दिल्ली में ‘आप’ के लिए कानूनी मुश्किलें पैदा होने के बावजूद गुजरात में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने भगवा गढ़ में पहली बार लड़े गए विधानसभा चुनाव में 5 सीटें जीती थीं। ‘आप’ को यहां लगभग 14 प्रतिशत वोट मिले थे। सूत्रों ने बताया कि गुजरात में बड़े पैमाने पर संगठनात्मक विस्तार के सूत्रधार संदीप पाठक फिलहाल राज्य से दूर ही रहेंगे। इसलिए, गोपाल राय और दुर्गेश पाठक को गुजरात मामलों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। गोवा में ‘आप’ के दो विधायक हैं। वह लगातार 6-7 प्रतिशत वोट शेयर पर बरकार रखे हुए है। सूत्रों से पता चलता है कि सौरभ भारद्वाज को गोवा पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत दिया गया था। हालांकि, दुर्गेश पाठक अभी गोवा के मामलों को अपने नियंत्रण में रख सकते हैं। ‘आप’ मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस की जगह लेने की कोशिश करेगी।  

एसीएस श्रीमती शमी ने उपभोक्ताओं को प्रदत्त अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी

स्वयं के साथ समाज के अन्य लोगों को भी करें जागरूक : एसीएस श्रीमती शमी श्रीमती शमी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश खरीदी ई-प्लेटफार्म के माध्यम से की जा रही एसीएस श्रीमती शमी  ने उपभोक्ताओं को प्रदत्त अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी  विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस कार्यक्रम आयोजित भोपाल हम सभी किसी न किसी रूप में उपभोक्ता हैं, लेकिन हमें अधिकारों की जानकारी नहीं है। स्वयं के साथ समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करना हमारी जिम्मेदारी है। अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने यह बात विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कही। श्रीमती शमी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश खरीदी ई-प्लेटफार्म के माध्यम से की जा रही हैं। इसमें गुणवत्तायुक्त सामग्री नहीं मिलने पर क्या कार्यवाही की जा सकती है, इसकी जानकारी होना चाहिए। जिला उपभोक्ता संरक्षण अदालतों में 50 लाख रूपये तक, राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग में 50 लाख रूपये से 2 करोड़ रूपये तक और राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण आयोग में इससे अधिक राशि के प्रकरणों की सुनवाई की जाती है। उपभोक्ता निर्णय से असंतुष्ट होने पर 45 दिन में अगले स्तर पर अपील कर सकते हैं। उन्होंने सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि उपभोक्ताओं को सतत् जागरूक करते रहें। मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष व्ही.के. मल्होत्रा ने कहा कि उपभोक्ताओं की जागरूकता और योजनाओं का क्रियान्वयन करने वालों की संवेदनशीलता बहुत जरूरी है। रजिस्ट्रार मध्यप्रदेश उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग शोभित जैन ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं संभाग और जिला स्तर पर भी आयोजित कर उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाये। उन्होंने सस्टेनेबल फ्यूचर और ग्रीन फुट-प्रिंट के बारे में भी उपभोक्ताओं को जागरूक करने पर जोर दिया। आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा ने उपभोक्ता अदालतों में ऑनलाइन सुनवाई की भी व्यवस्था की गई है। इससे उपभोक्ता घर से ही सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं को प्रदत्त अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी। अतिथियों ने उपभोक्ता जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली संस्था जागरूक उपभोक्ता समिति इंदौर को एक लाख 11 हजार रूपये का प्रथम पुरस्कार और अखिल भारतीय उत्थान संगठन सतना को 51 हजार रूपये का द्वितीय पुरस्कार दिया। उपभोक्ता अधिकार विषय पर राज्य स्तरीय निंबध प्रतियोगिता के विजेता छात्र शा.उ.म. विद्यालय विरसा जिला बालाघाट के धारेन्द्र मरावी को 6 हजार रूपये का प्रथम, शा.मा. विद्यालय क्रमांक-19 नया बसेरा के पवन ताकतोड़े को 4 हजार रूपये का द्वितीय और क्रिस्टिना कॉन्वेंट हायर सेकेण्डरी स्कूल महूगांव जिला इंदौर की सुहीरल दसोंधी को 2 हजार रूपये का तृतीय पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र दिया गया। इसी तरह पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता छात्र इंदौर के शा.प्रा.वि. 19 नया बसेरा जिला इंदौर की कुमारी पूनम बोदड़े को 6 हजार रूपये का प्रथम, शा.उ.मा.वि. बिरसा जिला बालाघाट की कुमारी झरना रहांगडाले को 4 हजार रूपये का द्वितीय और पीएमशा.क.उ.मा.वि. बैहर जिला बालाघाट की कुमारी सेजल टेकाम को 2 हजार रूपये का तृतीय पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा उपभोक्ता जागरूकता संबंधी लगाई गई प्रदर्शनी का अतिथियों ने अवलोकन किया। उन्होंने नाप-तौल विभाग की प्रदर्शनी को प्रथम, वेयर हाउसिंग की प्रदर्शनी को द्वितीय और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की प्रदर्शनी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया।  

Delhi High Court के जज का आग ने खोला ‘राज’, बंगले में मिला कैश का भंडार; कॉलेजियम ने कहा न्यायपालिका पर…

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के आवासीय बंगले में आग लगने की घटना ने न्यायिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है. इस आगजनी के दौरान जज के घर से बड़ी मात्रा में नकद राशि बरामद की गई. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा के तबादले की सिफारिश की है. चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता में तीन वरिष्ठ जजों के कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को उनके मूल इलाहाबाद हाईकोर्ट, वापस भेजने की सिफारिश की है. सूत्रों के अनुसार, जब आग बुझाने वाली टीम वहां पहुंची, तो उन्हें जज के सरकारी बंगले में भारी मात्रा में नकद राशि मिली. मामले से संबंधित जानकारी के अनुसार, हाल ही में जस्टिस यशवंत वर्मा के निवास पर आग लग गई थी, जबकि उस समय जज घर पर उपस्थित नहीं थे. उनके परिवार ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचित किया. आग बुझाने के बाद, जब नुकसान का आकलन किया गया, तो कर्मचारियों को एक कमरे में बड़ी मात्रा में नकद मिला. यह सूचना पुलिस के उच्च अधिकारियों तक पहुंची, जिन्होंने इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी बताया. इस मामले की जानकारी मिलने के बाद, CJI संजीव खन्ना की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को पुनः इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस जाएंगे सूत्रों के अनुसार, जब आग लगी, तब जस्टिस वर्मा शहर में उपस्थित नहीं थे. उनके परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचित किया. आग बुझाने के बाद, दमकल कर्मियों ने बंगले के कमरों में बड़ी मात्रा में नकदी पाई. इसके बाद, रिकॉर्ड बुक में बेहिसाब नकदी के मिलने का आधिकारिक विवरण दर्ज किया गया. CJI को इस घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद कॉलेजियम की बैठक में सबसे पहले उन्हें इलाहाबाद भेजने की सिफारिश की गई. इमरजेंसी में हुई मीटिंग सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के स्थानांतरण की सिफारिश के लिए एक आपात बैठक आयोजित की, जिसमें इस संबंध में सिफारिश की गई. जानकारी के अनुसार, न्यायाधीश के खिलाफ रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद गुरुवार को यह आपात बैठक बुलाई गई. इसके साथ ही, इन-हाउस जांच पर भी चर्चा की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण से संबंधित प्रस्ताव को जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया गया है. ट्रांसफर के अलावा होगी जांच जस्टिस यशवंत वर्मा को अक्टूबर 2021 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था. अब उनके खिलाफ जांच और महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की बात उठ रही है, साथ ही उन्हें वापस भेजने की सिफारिश भी की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि जस्टिस वर्मा का केवल स्थानांतरण किया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. क्या जस्टिस वर्मा का होगा इस्तीफा? देश में न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है. कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया है कि जस्टिस वर्मा से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए. यदि वे ऐसा करने से इनकार करते हैं, तो संसद में उन्हें हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. इसके अलावा, यदि आवश्यक समझा जाए, तो उनके खिलाफ आंतरिक जांच भी की जा सकती है, जो एक सुप्रीम कोर्ट के जज और दो अलग-अलग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की समिति द्वारा की जाती है. यदि जांच में जज दोषी पाए जाते हैं, तो रिपोर्ट संसद को आगे की कार्रवाई के लिए भेजी जाती है, जहां जज को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होता है. जस्टिस यशवंत वर्मा 2014 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज बने और 2021 में उनका ट्रांसफर दिल्ली हाई कोर्ट में हुआ. वर्तमान में, वह दिल्ली हाई कोर्ट के जजों में वरिष्ठता के क्रम में तीसरे स्थान पर हैं. संविधान के अनुसार, किसी भी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार, अनियमितता या कदाचार के आरोपों की जांच के लिए 1999 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक आंतरिक प्रक्रिया विकसित की गई थी. इस प्रक्रिया में, मुख्य न्यायाधीश पहले संबंधित न्यायाधीश से स्पष्टीकरण मांगते हैं. यदि उत्तर संतोषजनक नहीं होता या मामले की गहन जांच की आवश्यकता होती है, तो मुख्य न्यायाधीश एक सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और दो उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों की एक आंतरिक समिति का गठन करते हैं. इसके बाद, जांच के परिणामों के आधार पर या तो न्यायाधीश का इस्तीफा लिया जाता है या महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जाती है.

‘370 हटाने के बाद आतंकी घटनाओं में कमी आई’,10 साल में कश्मीर में 12 हजार करोड़ का निवेश: अमित शाह का दावा

नई दिल्ली गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं. गृह मंत्री शाह ने उरी और पुलवामा हमले का जिक्र करते हुए कहा कि 10 दिन में बदला लिया और हमने भारत को इजरायल-अमेरिका वाली लिस्ट में ला दिया. ताजा अपडेट के लिए पेज को रिफ्रेश करते रहें। जहां मरते हैं, वहीं दफना दिए जाते हैं आतंकी- अमित शाह गृह मंत्री अमित शाह ने तीन समस्याएं दशकों से नासूर की तरह बन गई थीं. एक वामपंथी उग्रवाद, दूसरा पूर्वोत्तर का उग्रवाद और तीसरा आतंकवाद. पहले जम्मू कश्मीर में आतंकी आते थे और कोई त्योहार नहीं होता था जब हमले नहीं होते थे. मोदीजी के आने के बाद भी हमले हुए. उरी और पुलवामा में हमला हुआ. 10 दिन में पाकिस्तान में घर में घुसकर एयर स्ट्राइक कर जवाब दिया गया. दुनिया में इजरायल और अमेरिका की सूची में महान भारत का नाम जुड़ गया. अमित शाह ने कश्मीर में जी-20 बैठक के सफल आयोजन का जिक्र करते हुए कहा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में यात्रा निकली थी. हमें लाल चौक जाने की परमिशन नहीं मिल रही थी. हमने जिद की तो सेना की सुरक्षा में जाना पड़ा और आनन-फानन में तिरंगा फहराकर आना पड़ा. उसी लाल चौक पर कोई घर ऐसा नहीं था जिस पर हर घर तिरंगा अभियान में तिरंगा न हो. हमने कई ऐसे कदम उठाए जिसकी वजह से आतंकियों से भारतीय बच्चों के जुड़ने की संख्या करीब-करीब शून्य हो गई है. आतंकी जब मारे जाते थे, बड़ा जुलूस निकलता था. आज भी आतंकी मारे जाते हैं और जहां मारे जाते हैं, वहीं दफना दिए जाते हैं. घर का कोई आतंकी बन जाता था और परिवार के लोग आराम से सरकारी नौकरी करते थे. हमने उनको निकालने का काम किया. आतंकियों के परिवार के लोग बार काउंसिल में बैठे थे और प्रदर्शन होने लगता था. आज वो श्रीनगर या दिल्ली की जेल में हैं. उन्होंने पथराव से लेकर ऑर्गेनाइज हड़ताल की घटनाओं के आंकड़े भी गिनाए. 10 साल में परिवर्तन कर राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने का काम किया- अमित शाह गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा का जवाब दे रहे हैं. गृह मंत्री ने कहा कि चर्चा के दौरान कुछ उपयोगी सुझाव भी आए हैं, कुछ हमारी कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी की गईं, कुछ राजनीतिक आक्षेप भी लगाए गए. सभी का संसदीय भाषा में जवाब देने का प्रयास करूंगा. उन्होंने कहा कि देश की सरहदों को सुरक्षित करने के लिए अपना बलिदान दिया है, केंद्रीय बलों और स्टेट पुलिस के उन हजारों जवानों को भी नमन करता हूं. गृह मंत्रालय एक प्रकार से बहुत विषम परिस्थिति में काम करता है. कानून-व्यवस्था का जिम्मा राज्यों के पास है और सरहदी सुरक्षा गृह मंत्रालय के जिम्मे है. इसमें बदलाव की जरूरत भी नहीं है. 76 साल बाद ऐसी परिस्थिति खड़ी हो गई है कि कई अपराध राज्यों की सीमा तक सीमित नहीं होते. कई अपराध ऐसे होते हैं जो देश की सीमा के बाहर से भी हमारे यहां होते हैं. 10 साल में नरेंद्र मोदी जी ने एक साथ परिवर्तन कर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का काम किया है. ‘नई लाशें बिछाने के लिए गड़े मुर्दे उखाड़ दिए’, संजय राउत ने नागपुर दंगे पर सरकार को घेरा शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने राज्यसभा में कहा कि आज क्या दिन आ गया है कि उच्च सदन में औरंगजेब पर चर्चा हो रही है. इसके लिए गृह मंत्रालय जिम्मेदार है. देश को एक-अखंड रखना गृह मंत्रालय का काम है. देश को कुछ समय से पुलिस स्टेट बना दिया गया है. एक मणिपुर कल तक जल रहा था, अब महाराष्ट्र को भी जला दिया. नई लाशें बिछाने के लिए आपने गड़े मुर्दे उखाड़ दिए और वह भी औरंगजेब के नाम पर. नागपुर में तीन सौ साल में कभी दंगा नहीं हुआ था. दंगा हो गया वह भी मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में. आपको औरंगजेब की कब्र तोड़नी है तो जाओ तोड़ो ना हाथ में फावड़ा-वावड़ा लेकर. मुख्यमंत्री आपका है, गृह मंत्री आपका है. जाओ ना. लेकिन अपने बच्चों को भेजो, हमारे बच्चों को मत भेजो. आपके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं. मुसलमान में बाबर का डीएनए तो तुम राणा सांगा की औलाद- रामजी सुमन बहुजन समाज पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी सुमन ने कहा कि बीजेपी के लोगों का एक तकिया कलाम हो गया है कि मुसलमान में बाबर का डीएनए है. भारत का मुसलमान बाबर को तो अपना आदर्श मानता है नहीं, वह तो मोहम्मद साहब को अपना आदर्श मानता है. बाबर को लाया कौन था. इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा ने बाबर को लाया. मुसलमान में बाबर का डीएनए है तो तुम राणा सांगा की औलाद हो. राणा सांगा की गद्दारी की चर्चा तो होती नहीं. इस पर आसन से हरिवंश ने राम जी सुमन को रोकते हुए कहा कि आपका समय खत्म हो गया. अब आप बैठिए. डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने ये भी कहा कि जो भी संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा, वह रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा. पंजाब के किसानों को हरियाणा सरकार रोक देती है, ये मामूली बात नहीं- धर्मेंद्र यादव लोकसभा में जलशक्ति मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के बाद अब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा चल रही है. चर्चा की शुरुआत आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने की है. धर्मेंद्र यादव ने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुरूप एमएसपी की गारंटी देने की मांग की और कहा कि हम किसी पर टिप्पणी नहीं करते लेकिन बीजेपी के ही लोग कहते हैं कि मोदी की गारंटी. उन्होंने गन्ना किसानों के मूल्य भुगतान के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि छुट्टा जानवर भी बड़ी समस्या है. पूरा उत्पादन जब तक बिक नहीं जाता, किसान का पूरा परिवार जाड़ा-गर्मी-बरसात खेत में पड़ा रहता है. प्रधानमंत्री जी की भी सरकार में बैठे लोग नहीं सुनते. इस समस्या का स्थायी समाधान निकालिए. कृषि क्षेत्र से 60 फीसदी लोगों को रोजगार मिलता है. 30 फीसदी बजट ही ले आते. देश के किसान, परिवार में … Read more

जबलपुर में धान खरीदी में 30 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा, घोटाले में 74 लोगों के खिलाफ 12 थानों में एफआईआर दर्ज

जबलपुर  जबलपुर जिले में धान की खरीदी, परिवहन और मिलिंग में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर इस फर्जीवाड़े में शामिल 74 लोगों के खिलाफ जिले के 12 थानों में एफआईआर दर्ज की गई है। इस पूरे खेल में 13 कर्मचारी, 17 राइस मिलर, 25 सोसाइटी के 44 कर्मचारियों समेत 74 लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। मामला दर्ज होते ही पुलिस ने आरोपितों की खोजबीन शुरू कर दी है। कई जगह छापेमारी भी की गई। जिला प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ 12 थानों में केस दर्ज कराया है। आरोपियों ने फर्जी आरो के जरिए फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। इन 74 लोगों में नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक दिलीप किरार, निगम के 13 कर्मचारी, 17 राइस मिल संचालक और 44 सोसाइटी व उपार्जन केंद्र के कर्मचारी शामिल हैं। बता दें कि जिले में पहले से ही 3 लाख 81 हजार मैट्रिक टन धान खरीदी में अनियमितताएं पाई गई थीं। इस मामले में 22 लोगों पर पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इनमें समिति प्रबंधक, खरीदी केंद्र प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और वेयर हाउस संचालक शामिल थे। जिला प्रशासन को जांच में हेरा फेरी मिली पाटन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अजय बिश्नोई की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच की थी। जांच में पता चला कि मिलरों ने धान का उठाव नहीं किया और दलालों के माध्यम से धान की हेराफेरी की। दरअसल, समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान के लिए जिले के बाहर के 17 राइस मिलर्स से एग्रीमेंट किया गया था। इन्हें धान का उठाव करना था। फर्जी नंबर वाले वाहनों से किया परिवहन जांच टीम ने जब टोल नाकों से धान परिवहन में इस्तेमाल किए गए ट्रकों की लिस्ट मंगवाई तो पता चला कि जिन ट्रक नंबरों से धान का परिवहन होना था वो टोल नाकों से गुजरे ही नहीं। बल्कि फर्जी रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों के जरिए धान का परिवहन हो गया। टोल नाकों से 614 ट्रिप में 15 ट्रक ही गुजरे टीम ने जब पूरे प्रकरण की छान बीन की तो पता चला कि 1 लाख 31 हजार क्विंटल से अधिक धान का परिवहन फर्जी नंबर वाले वाहनों से किया गया। वहीं जांच में टोल नाकों के सीसीटीवी फुटेज और टोल पर्ची से पता चला कि रजिस्टर्ड नंबर वाले ट्रकों के 614 ट्रिप टोल नाकों से गुजरने थे, लेकिन महज 15 ट्रक ही इन टोल नाकों से गुजरे थे। मोबाइल बंद कर फरार हो गए इधर, सुबह से ही जिला प्रशासन की कार्रवाई को लेकर हड़कंप मचा रहा। इसकी भनक लगते ही मिलर्स, सोसाइटी प्रबंधक, कम्प्यूटर ऑपरेटर और कर्मचारी अपने मोबाइल बंद कर फरार हो गए। इस फर्जीवाड़े की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन से जुड़े कर्मचारियों ने मिलर, सोसाइटियों के साथ मिलकर कागजों पर धान चढ़ाई, परिवहन किया और फर्जी रिलीज ऑर्डर काटे। करीब 30 करोड़ 14 लाख की धान कागजों पर खरीद ली गई। इसमें से करीब 14 करोड़ की धान जबलपुर के बाजार में ही बेंची गई और शेष 16 करोड़ की धान को आनलाइन पोर्टल पर चढ़ाया। स्थानीय दलालों को बेची धान ग्वालियर, उज्जैन, मुरैना, मंडला, मनेरी आदि स्थानों के मिलर्स द्वारा सोसाइटी से धान उठाने के बजाए स्थानीय दलालों को बेची गई। इन्होंने कागजों पर ट्रक से धान का फर्जी परिवहन दिखाया, जबकि न तो इन ट्रक का टोल कटा और न ही टोल कैमरे में दिखे। जांच समिति ने यह गड़बड़ी पकड़ने के लिए धान का परिवहन करने वाले ट्रक का एनएचएआइ के टोल नाके से मूवमेंट की जांच की। परिवहन विभाग की सहायता से ट्रक की श्रेणी प्रकार और लोडिंग क्षमता की जांच में गड़बड़ी सामने आई और ट्रक यहां से गुजरे नहीं। अधिकारियों-कर्मचारियों और मिलर्स की सांठगांठ आई सामने जांच समिति ने जब पूरे फर्जीवाड़े के तार जोड़े तो कई अधिकारी, कर्मचारियों और मिलर्स की सांठगांठ सामने आई। इस दौरान 17 मिलर्स ने धान का परिवहन करने के बजाए उसे जबलपुर में ही बेच दिया। इसमें मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन के अधिकारी से लेकर ऑपरेटर और केंद्र प्रभारी व कंप्यूटर ऑपरेटर सीधे तौर पर शामिल रहे। 18 में से 17 राइस मिलर संचालक ने पूरा परिवहन का फर्जी रिकार्ड तैयार किया। इसके साथ ही 25 सोसायटियों यानी उपार्जन केंद्र द्वारा राइस मिलर संचालक और मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कारपोरेशन जबलपुर के कर्मचारियों के साथ मिलकर अन्य जिलों में धान बेचने का रिकार्ड तैयार कर उसे कागजों पर दिखाया गया। इन पर अधिनियम 1955 की सुसंगत धाराओं के तहत 12 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। 571 ट्रक फर्जी धान दिखाई     17 मिलर ने यह फर्जीवाड़ा किया, इन्होंने टोल पर 571 ट्रक की फर्जी जानकारी दिखाई।     धान ले जाने वाले जिन वाहनों का उपयोग किया गया, उन ट्रकों में कार के नंबर दिखाए गए।     ऑनलाइन पोर्टल में 324 डीओ जारी हुए, जिसमें 14 हजार मीट्रिक टन धान थी।     जांच टीम ने मोहतरा टोल, बहोरीपार टोल, सालीवाड़ा टोल और शहपुरा टोल की जांच की। 17 मिलर्स के साथ दलालों ने खेला फर्जीवाडे़ का खेल जबलपुर की 25 सोसायटियों ने कम्प्यूटर ऑपरेटर के साथ मिलकर बड़ा खेल खेला। उन्होंने उपार्जन केंद्र के प्रभारी और उससे जुड़े वेयरहाउस संचालक के साथ मिलकर उपार्जन केंद्र ने जिस धान को आनलाइन पोर्टल पर चढ़ाया, लेकिन भौतिक तौर पर वह है ही नहीं। इनका फर्जी वाहन में परिवहन दिखाया। नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम को जिन वाहनों के परिवहन की जानकारी भेजी गई, वह ट्रक की नहीं बल्कि कई कारों की थी। इतना ही नहीं फर्जीवाड़े में जबलपुर के दलाल भी शामिल रहे, जिन्होंने अन्य जिलों के मिलर्स को यहां लाया और फिर विभाग के बाबू और कर्मचारियों से लेकर सोसायटी प्रबंधक के साथ बैठक करवाई। इन्हें प्रति धान बोरे के करीब एक हजार रुपये का कमीशन भी मिला, ताकि काम आसानी से हो सके। इस कमीशन की कई लोगों में बंदरबाट हुई। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें कई उपार्जन समिति से जुड़े लोग भी शामिल हैं, जिन्हें अभी तक जांच के दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन इनकी भी गोपनीय जांच चल रही … Read more

दुनिया की सबसे बड़ी स्वच्छता प्रतियोगिता स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 , 269 शहरों में परीक्षण का कार्य पूरा

भोपाल स्वच्छता एक संकल्प है, जिसे मध्यप्रदेश में एक जन आंदोलन बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता संकल्प को प्रदेश ने आत्मसात किया है। स्वच्छता आंदोलन के परिणाम दिखाई देने लगे हैं। हर वर्ष की तरह दुनिया की सबसे बड़ी स्वच्छता प्रतियोगिता स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 जारी है। स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रदेश के शहर बहुत गंभीरता के साथ अपनी भागीदारी कर रहे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान भारत सरकार की सर्वेक्षण टीमें आकर शहरों में स्वच्छता व्यवस्थाओं का जायजा लेती हैं। इसमें स्वच्छता की आधारभूत तैयारियों का परीक्षण, खुले में शौच से मुक्ति और मल-जल का निस्तारण (ओडीएफ++ और वॉटर+) कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग (1,3 5 व 7 स्टार रेटिंग) सहित कुल तीन परीक्षण किए जाते हैं। अभी प्रदेश में आधारभूत तैयारियों का परीक्षण जारी है, जिसमें 269 शहरों में परीक्षण पूर्ण हो चुका है, शेष शहरों के परीक्षण के लिये टीमें पहुँच रही हैं। इसके बाद ओडीएफ++ और स्टार रेटिंग के परीक्षण शुरू होंगे। उल्लेखनीय है की मध्यप्रदेश के नगरीय निकाय वर्ष भर शहरी स्वच्छता को सँवारने में जुटे रहते हैं। प्रदेश में नियमित कचरा संग्रहण, परिवहन और निपटान के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया गया है। जिसके माध्यम से शहरों की स्वच्छता सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ खुले में शौच पर प्रतिबंध को सफल बनाने के बाद शहरों को ओडीएफ़++ और वॉटर+ प्रमाण-पत्र दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग प्रदेश के नागरिकों, युवाओं और जन-प्रतिनिधियों से शहरों को स्वच्छ बनाने में सहयोग की निरंतर अपील कर रहा है। शहरों का बदला हुआ स्वरूप शासन के प्रयासों की सफलता को प्रदर्शित कर रहा है।  

एमपी में बदला मौसम, अगले दो दिनों तक बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि के आसार, इन जिलों में अलर्ट जारी

भोपाल मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया है। प्रदेश में गर्मी वाले दिनों में बारिश आंधी और ओले गिरने वाला मौसम है। आज शुक्रवार को 30 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ग्वालियर, जबलपुर, शहडोल और सागर संभाग में वर्षा होने के आसार है। मौसम विभाग के मुताबिक, मध्यप्रदेश में 3 सिस्टम एक्टिव है, जिसकी वजह से मौसम का मिजाज बदल गया है। गुरुवार को भोपाल, सागर, सीहोर, रीवा समेत 20 से अधिक जिलों में कहीं ओले गिरे तो कहीं तेज आंधी चली। कुछ जगहों पर हल्की बारिश भी हुई। 21, 22 और 23 मार्च को भी ऐसा मौसम बना रहेगा। मौसम बदलने से कई शहरों में दिन के तापमान में गिरावट आई है। सीधी में 27.8 डिग्री, रीवा में 28.8 डिग्री, सतना में 31.4 डिग्री और नौगांव में पारा 32.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सिंगरौली और मंडला में आज शुक्रवार को गरज-चमक के साथ बारिश हुई। 24 घंटों के दौरान मंडला में 1 मिमी बारिश दर्ज की गई है। डिंडौरी में बूंदाबांदी हो रही है। मौसम विभाग ने 30 जिलों में अलर्ट जारी किया है। जबलपुर, ग्वालियर, सागर और शहडोल संभाग में ज्यादा असर रहेगा। भोपाल की सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया- 21, 22 और 23 मार्च को भी ऐसा मौसम बना रहेगा। मौसम बदलने से कई शहरों में दिन के तापमान में खासी गिरावट हुई है। सीधी में 27.8 डिग्री, रीवा में 28.8 डिग्री, सतना में 31.4 डिग्री और नौगांव में पारा 32.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दमोह-कटनी में गिरेंगे ओले मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे के दौरान दमोह, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर में ओले गिर सकते हैं। मुरैना, ग्वालियर, भिंड और दतिया में तेज आंधी चलने का ऑरेंज अलर्ट है। शिवपुरी, अशोकनगर, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में गरज-चमक, तेज आंधी चलने की संभावना है। मार्च के आखिरी दिनों में गर्मी का असर, अप्रैल-मई में हीट वेव प्रदेश में मार्च के आखिरी दिनों में फिर से गर्मी का असर देखने को मिलेगा। कुछ इलाकों में लू भी चल सकती है। कई शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच सकता है। वहीं मौसम विभाग ने मार्च से मई तक 15 से 20 दिन हीट वेव चलने का अनुमान जताया है। अप्रैल-मई में हीट वेव का असर ज्यादा हो सकता है। अगले 2 दिन ऐसा रहेगा मौसम 22 मार्च: कटनी, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट में आंधी और ओले का ऑरेंज अलर्ट है। रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में गरज-चमक और आंधी चल सकती है। 23 मार्च: शहडोल, अनूपपुर और बालाघाट में गरज-चमक और हल्की बारिश होने का अनुमान है। 24 मार्च से फिर नया सिस्टम डॉ. सुरेंद्रन ने बताया, मौजूदा सिस्टम का असर 23 मार्च तक रहेगा। 24 मार्च से एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो सकता है। इसका असर भी प्रदेश में देखने को मिलेगा। भोपाल में बूंदाबांदी, रीवा में ओले गिरे इससे पहले गुरुवार को भोपाल, सीहोर और सागर समेत कई जिलों में हल्की बारिश हुई। भोपाल में हल्की बूंदाबांदी हुई। इस दौरान बादल छाए रहे और हवाएं भी चली। सागर के बंडा में अचानक बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली‌। हालांकि किसानों की चिंता बढ़ गई। किसानों को खेतों में रखी फसलें खराब होने का डर सता रहा है। रीवा जिले के सिरमौर, गुढ़, जवा, त्योंथर और रायपुर कर्चुलियान में तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। बेमौसम बारिश और ओले गिरने से रबी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। दमोह, सिवनी, कटनी, सीधी, सिंगरौली, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, रायसेन, नर्मदापुरम, राजगढ़, अशोकनगर, विदिशा, सिवनी, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, मंड, नरसिंहपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और जबलपुर में भी मौसम बदला रहा।

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