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CM यादव ने कांग्रेस की लीडरशिप पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सरकार के फैसले को हिंदू विरोधी करार दिया

भोपाल  कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा अल्पसंख्यक ठेकेदारों को 4 फीसदी आरक्षण देने को लेकर प्रदेश में सियासी बवाल खड़ा हो गया है. बीजेपी ने कांग्रेस की लीडरशिप पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सरकार के फैसले को हिंदू विरोधी करार दिया है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मसले पर कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने एक्स पोस्ट पर लिखा, “कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा शासकीय कार्यों में ठेकेदारों को धर्म आधारित आरक्षण की व्यवस्था का प्रावधान करना अनुचित एवं निंदनीय है. लोकतांत्रिक देश में इस तरह किसी धर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियम-प्रावधान कैबिनेट से पास कर लागू करना कांग्रेस के अनैतिक चरित्र का प्रतीक है.” उन्होंने आगे लिखा, “दलित, पिछड़े और समाज के वंचित लोगों के उत्थान के लिए भारतीय जनता पार्टी सरकार निरंतर काम कर रही है, जिससे सभी वर्गों को समाज में पूर्ण सम्मान और अधिकार मिल सके.” भारत तोड़ो की नीति पर काम कर रहे हैं कांग्रेसी नेता सीएम मोहन यादव ने आगे कहा है कि इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस ने हमेशा संविधान के मूल्यों का सम्मान करने की बजाय जातिगत पक्षपात और समाज के विभिन्न वर्गों में भेदभाव की भावना पैदा करने में मुख्य योगदान दिया है. कांग्रेसी भारत जोड़ो नहीं, भारत तोड़ो की विचारधारा पर काम कर रहे हैं. कर्नाटक सरकार का यह फैसला इसी अपशिष्ट राजनीति का उदाहरण है. मोहन यादव ने लिखा ये भी कहा है कि इस तरह के धर्म आधारित फैसलों के विरुद्ध पूर्व में भी कई बार  न्यायालयों द्वारा निर्णय दिए गए हैं. इस बार भी कांग्रेस सरकार का यह फैसला न्यायालय में नहीं टिक पाएगा. सीएम मोहन यादव के मुताबिक, “मैं धर्म आधारित इस आरक्षण की कड़ी आलोचना करता हूं. कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में बैठे मल्लिकार्जुन खड़गे से कहना चाहूंगा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के तुष्टिकरण के फैसले को वापस कराने के लिए उचित कार्रवाई करें.”

अबूझमाड़ वर्षों तक विकास की धारा से वंचित रहा, लेकिन हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र अबूझमाड़ के 120 बच्चों ने आज विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा वनमंत्री केदार कश्यप से मुलाकात की। ये बच्चे ‘स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना’ के तहत राजधानी रायपुर के शैक्षणिक भ्रमण पर आए थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से संवाद किया और उन्हें विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार अबूझमाड़ के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ वर्षों तक विकास की धारा से वंचित रहा, लेकिन हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि यहां के हर गांव तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचे।  उन्होंने भ्रमण पर आए बच्चों से कहा कि आपका उज्ज्वल भविष्य ही हमारी प्राथमिकता है। अबूझमाड़ में तेजी से हो रहे विकास कार्य मुख्यमंत्री साय ने बताया कि अबूझमाड़ के गांवों में सड़क निर्माण, मोबाइल टावर लगाने, स्कूलों के विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के तहत वहां तेजी से बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में अबूझमाड़ सहित पूरे बस्तर क्षेत्र के विकास को लेकर व्यापक चर्चा हुई। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए ठोस कार्ययोजनाओं पर काम कर रही हैं। आपकी शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य हमारी जिम्मेदारी- उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बच्चों से बातचीत करते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि अबूझमाड़ के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, ताकि वे अपने क्षेत्र और प्रदेश के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सरकार आपके साथ है और हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आश्वस्त किया कि अबूझमाड़ में बेहतर स्कूल, छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

समना विकासखण्ड को तहसील बनाया जायेगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीरांगना रानी अवंती बाई के अद्भुत साहस और पराक्रम को देखकर अंग्रेज दहशत में रहते थे। उनके बलिदान दिवस पर नमन कर हम सभी उन्हें कृतज्ञता पूर्वक स्मरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिंडौरी में वीरांगना रानी अवंती बाई के बलिदान दिवस पर डिंडौरी में बालपुर स्थित समाधि स्थल पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रृद्धा सुमन अर्पित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महान व्यक्तित्व के धनी अल्पायु में ही ऐसे काम कर जाते हैं, जिससे कि वे सदैव इतिहास में स्मरण किये जाते है। उन्होंने बताया कि अवंती का अर्थ है, ‘जिसका कभी अंत न हो।’ वीरांगना रानी अवंतीबाई ने अंग्रेजों की हड़प नीति के विरोध में मात्र 26 वर्ष की आयु में आजादी का झण्डा बुलंद करते हुए प्राणोत्सर्ग कर दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिंडौरी जिले का समना विकासखंड को तहसील बनाया जायेगा। मुख्यमत्री डॉ. यादव ने वीरांगना रानी अवंतीबाई के शौर्य और पराक्रम का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि यह वीरांगनाओं और वीरों की धरती है।यहाँ रानी दुर्गावती, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, देवी अहिल्याबाई, राजा रघुनाथशाह एवं कुंवर शंकरशाह जैसे महान व्यक्तित्व जन्मे हैं। रानी लक्ष्मीबाई, रानी अवंती बाई और राजा रघुनाथ शाह एवं कुंवर शंकरशाह ने अपने सीमित संसाधनों से देश व स्वाभिमान के लिये अंग्रेजी शासन के खिलाफ जमकर लोहा लिया। उन्होंने तात्कालिक समय में कठिन परिस्थतियों में सिर्फ आत्म सम्मान, राष्ट्रभक्ति को लेकर समाज को एक नई दिशा दी। रानी अवंती बाई का चरित्र से हमें सीख मिलती है कि डलहौजी की हडप नीति के विरोध में उन्होंने अपनी शासन की रक्षा की।उनके इस योगदान के कारण लोधी समाज सहित सम्पूर्ण समाज रानी अवंती बाई को पूजता है। महापुरूषों की गौरव गाथा स्वर्णिम अक्षरों में लिखी जाएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश के स्वतंत्रता संग्राम में आहूति देने वाले महान लोगों की गौरव गाथा को स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जा रहा है। ऐसे महापुरूषों की गौरव गाथाओं को समाज की अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा ताकि भावी पीढ़ी भी महापुरूषों की शौर्य गाथाओं से परिचित हो सकें। भगवान बिरसा मुंडा सहित अन्य वीर इस बात के प्रतीक हैं। जनजातीय समाज के लिए बिरसा मुंडा भगवान हैं। उनके जन्मदिन पर जनजाति गौरव दिवस मनाया जाता है। वीरांगना रानी दुर्गावती की योगदान याद करने के लिए जबलपुर में मध्यप्रदेश शासन की पहली केबिनेट आयोजित की। जनजातीय गौरव को ध्यान में रखते हुए खरगोन विश्वविद्यालय का नाम क्रांतिसूर्य टंटया मामा के नाम पर किया गया। किसान गरीब, युवा और महिलाओं के हित में कई बडे फैसले लिए हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन ने किसान, गरीब, युवा और महिलाओं के हित में कई बडे फैसले लिए हैं। श्रीअन्न (मोटे अनाज) के लिए एक हजार रूपए प्रति क्विंटल, धान के लिए 4 हजार रूपए प्रति हेक्टेयर, गेंहू के लिए 2600 प्रति क्विंटल राशि हस्तांतरित करने वाले हैं। 10 से ज्यादा गौ-पालन करने के लिए अनुदान दिया जाएगा। इससे गौ-पालन और दुग्ध उत्पादन को बढावा मिलेगा। प्रदेश में औद्योगिकीकरण के लिए लगातार प्रयास जारी है। डिंडौरी में दुग्ध आधारित उद्योगों के साथ ही लघु उद्योग, मध्यम उद्योग, कुटीर उद्योग सहित सभी प्रकार के उद्योग लगाएंगे। रानी अहिल्या बाई की 300वीं जयंती वर्ष को मना रहे हैं, रानी अवंती बाई और रानी अहिल्या बाई के आदर्शों के सभी पक्षों को लेकर समाज में जा रहे हैं, जिसके आधार पर गरीब, युवा, किसान और नारी के कल्याण कार्यों को कर रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने रानी अवंती बाई की शहादत की इस पुण्य भूमि में सभी का अभिनन्दन करते हुए कहा कि रानी अवंतिबाई जैसा पराक्रम इतिहास में कम मिलता है। अंगेजों के शासनकाल में रानी अवंतीबाई ने जनमानस के लिए कर वसूली के विरुद्ध अपनी आवाज उठाई, रानी ने 26 वर्ष की उम्र में अपने पराक्रम का परिचय देते हुए, आज से 150 से अधिक वर्ष पहले बताया कि न्याय और परोपकार की भावना के साथ हम हर कार्य कर सकते है। संस्कृति और पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी ने अपने सम्बोधन में कहा कि रानी अवंती बाई का पराक्रम असाधारण एवं अद्भुत है। रानी अवंती बाई ने 1857 की क्रांति में भाग लेकर अपने राज्य की रक्षा कर अंग्रेज अधिकारी वाडिंग्टन को भगाया। शहपुरा विधायक ओमप्रकाश परस्ते ने अपने सम्बोधन में रानी अवंती बाई के बलिदान की शौर्यगाथा का वर्णन किया।क्षेत्र के विकास सौगात के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। डिंडौरी जिले को मिली सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेंहदवानी से आईटीआई तक डामरीकरण का कार्य, शहपुरा में 132 केव्ही. का सब स्टेशन निर्माण, दनदना, राघो, नागदमन, गोरखपुर जलाशयों के पक्की नहरीकरण कार्य, नर्मदा तट पर सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन कार्य, मूसरघाट से शहडोल मार्ग, समनापुर में तहसील कार्यालय का क्रियान्वयन, गौराकन्हारी में कन्या छात्रावास, नेवसा वाटरफॉल के समीप गाजर नदी पर बांध बनाये जाने की सौगात दी। हितग्राहियों को किया हितलाभ वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत राहुल केशरवानी को 2 करोड़ 27 लाख स्वीकृत राशि राइस मिल के लिए, सीसीएल के तहत मां नर्मदा आजीविका स्व सहायता समूह सहित 2482 स्व-सहायता समूहों को 53 करोड़ 80 लाख की राशि, पीएमएफएमई योजना के तहत अमृता, संतोषी स्व-सहायता समूह को फ्लोर मिल के लिए 7 लाख रूपए की राशि का हितलाभ वितरण मंच से किया गया। उक्त कार्यक्रम में शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम, पूर्व मंत्री जालम सिंह पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते, चमरू सिंह नेताम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती ज्योति प्रकाश धुर्वे, तोक सिंह नरवरिया, मनोहर ठाकुर, गिरीश द्विवेदी, होशियार सिंह नरेन्द्र सिंह राजपूत, अवधराज बिलैया, पंकज तेकाम, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस सेमिनार में हुए शामिल

सबके जीवन में खुशहाली लाना ही हमारा मूल लक्ष्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य आनंद संस्थान एवं म.प्र. जन अभियान परिषद के बीच हुआ एम.ओ.यू. मुख्यमंत्री कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस सेमिनार में हुए शामिल मुख्यमंत्री ने सभी के जीवन में आनंद की कामना की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सुख और दुःख मनुष्य के जीवन से उसी तरह जुड़े हैं, जैसे दिन के बाद रात। सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग हैं। लोक कल्याणकारी राज्य का प्रथम कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के जीवन में खुशहाली लेकर आये। हमारी सरकार इसी दिशा में कार्य कर रही है। सबका कल्याण ही हमारा मूल लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि त्याग, तप, साधना, बलिदान, असंचय, अपरिग्रह और निस्वार्थ सेवा भाव से मन की शांति ही सुख है। प्रकृति के सानिध्य में जब मन, परमात्मा के भावों में लीन हो जाता है, तब ही तादात्म्य ही सच्चा सुखानंद प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आनंद विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस कार्यशाला को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-समृद्धि लाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में उल्लास भरने के लिए हमारी सरकार जी-जान से जुटी है। कार्यक्रम में म.प्र. जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) डॉ. मोहन नागर, रामकृष्ण मिशन, बेलूर मठ, कोलकाता से आए स्वामी समर्पणानन्द जी, पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश अरोड़ा, आईआईएम इंदौर के पूर्व निदेशक डॉ. एन. रविचन्द्रन, प्रमुख सचिव, आनंद विभाग राघवेन्द्र कुमार सिंह, राज्य आनंद संस्थान के सीईओ आशीष कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में सुधिजन एवं आनंदक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में हर्ष, आनंद और खुशहाली लाना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनहितैषी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के हर वर्ग को लाभान्वित कर रही है। नागरिकों के जीवन में खुशहाली और संतोष ही हमारी सबसे बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि कष्ट सहकर भी जीवन देने का सुख पाये, वो है माता और साधक बनकर भी जीवन का असीम सुख पाये वो है सन्यासी। कष्ट में भी सुख है, इसलिए जीवन का मर्म समझिए कि परमात्मा ने हम सबको आनंद में जीवन जीने के लिए इस धरा पर भेजा है, इसलिए जीवन को आनंदमय होकर ही जियें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे सकारात्मक दृष्टिकोण से सरकार के साथ मिलकर एक खुशहाल समाज के निर्माण में योगदान दें। आनंद विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस सेमिनार का उद्देश्य आनंद के नए आयाम और नित नई परिस्थितियों में आनंद की खोज करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष राज्य आनंद संस्थान भोपाल एवं म.प्र. जन अभियान परिषद के बीच एम.ओ.यू (समझौता ज्ञापन) का आदान-प्रदान हुआ। यह समझौता ज्ञापन मात्र प्रपत्रों का आदान-प्रदान न होकर दो जमीन स्तर से प्रभावी संगठनों के समन्वय की महत्वाकांक्षी पहल है। यह समझौता दोनों विभागों के बीते एक वर्ष में कुल 24 हजार 310 और बीते तीन वर्षों में 72 हजार 390 लोगों के जीवन में स्वैच्छिकता और आनंद का कारक बना। स्वामी समर्पणानन्द जी ने कहा कि हम सभी को प्रकृति के प्रति और परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। हम अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं के संवाहक बनें और मनुष्य में निहित देव गुणों को उभारें। यह मानव जाति की सेवा के लिए हमें प्रेरित करेगा और जब आप सच्चे मन से किसी की सेवा करते हैं तो जो शांति मिलती है, वही आनंद है और वही जीवन का सार है। उन्होंने देश में आनंद विभाग स्थापित करने वाली मध्यप्रदेश सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को पंच महा-अमृत शीलों का पालन करना चाहिए, इससे जीवन में खुशहाली आएगी। प्रोफेसर रजनीश अरोड़ा ने कहा कि आनंद व्यक्ति के भीतर से आता है, पर इसका प्रभाव व्यक्ति के चरित्र से बाहर दिखाई देना चाहिए। व्यष्टि से समष्टि तक चारों ओर आनंद है, पर उस आनंद को हमें खोजना आना चाहिए। व्यक्ति अपने जीवन के सभी कार्य बखूबी निभाता है, तभी उसे जीवन का असली सुख प्राप्त होता है। डॉ. एन. रविचन्द्रन ने कहा कि समाज में परिवर्तन हो रहा है। सब अपने-अपने तरीकों से आनंद खोज रहे हैं। मन के संतोष से ही व्यक्ति को शांति और आनंद मिलता है। अपने काम, कर्तव्य और रिश्तों को ईमानदारी से निभाएं, यही सच्चा सुख है, यही आनंद है। कार्यक्रम के आरंभ में प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस सेमिनार के आयोजन की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसके जरिए समाज के सभी वर्गों को जोड़ा गया है। विभाग विविध गतिविधियों से प्रदेश के नागरिकों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए प्रयासरत हैं और प्रयास जारी रहेंगे। दो दिवसीय हैप्पीनेस सेमिनार में उपस्थित हुए समाजसेवी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ ने नागरिकों के जीवन में सुख और आनंद बढ़ाने के उपायों एवं नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की।  

इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही नई रेल लाइन, इंदौर -देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी, रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा

जबलपुर जबलपुर से इंदौर के बीच नई रेल लाइन गाडवारा-बुदनी होकर नहीं इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही। ये लाइन इंदौर-देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी। इस रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा। इस नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक कम हो जाएगा। जबलपुर-इंदौर (गाडरवारा एवं बुदनी होकर) नई रेल लाइन की प्रगति पर नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में ये जानकारी दी। रेल मंत्री ने बताया कि बुदनी से इंदौर के बीच नई रेल लाइन निर्माण कार्य प्रक्रिया में है। इस परियोजना के गाडरवारा-बुदनी रेलखंड के दोनों अंतिम स्टेशन पूर्व से इटारसी होकर रेलमार्ग से जुड़े हुए हैं। आठ साल पुरानी परियोजना दोनों के मध्य नवीन रेल लाइन से उनकी दूरी में ज्यादा अंतर नहीं आ रहा है। इसलिए गाडरवारा-बुदनी के मध्य नई रेल लाइन बिछाना तर्कसंगत नहीं है। आठ वर्ष पुरानी परियोजना- जबलपुर(गाडरवारा)-इंदौर (मांगलियागांव) नई रेल लाइन की घोषणा वर्ष 2016-17 के बजट में हुई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में था। वर्ष 2021-22 के बजट में एक हजार रुपये के आवंटन से परियोजना की बंद फाइल फिर खुल गई। उसके बाद के बजट में भी परियोजना को आवंटन जारी हुए। गत दो बजट में आवंटन बढ़ने के बाद परियोजना के इंदौर-बुदनी रेलखंड में रेल लाइन निर्माण प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इंदौर-बुदनी का कार्य जारी लोकसभा में रेल मंत्री ने बताया कि इंदौर (मांगलियागांव) और बुदनी के बीच (205 किलोमीटर) नई रेल लाइन का कार्य 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है। मार्च-2024 तक 948.37 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्ष 2024-25 के लिए इस परियोजना को 1107.25 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। रेल लाइन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा रही है। चार किमी का अंतर इटारसी होकर गाडरवारा से बुदनी रेल मार्ग से जुड़ा है, जिसकी दूरी 141 किमी है। इंदौर नई रेल लाइन परियोजना में प्रस्तावित गाडवारा-बुदनी रेलखंड की दूरी 137 किमी है। मात्र चार किलोमीटर की दूरी कम करने के लिए अलग से लाइन बिछाना रेलवे को अब खर्चीला लग रहा है।

कनाडा के पूर्व PM ट्रूडो के जाने के बाद अब दोनों पक्ष एक बार फिर से संबंधों को सुधारते दिख रहे

नई दिल्ली/ ओट्टावा  कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब नई भारत-कनाडा संबंध में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच फिर से संपर्क शुरू हो गया है और नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की संभावना पर नजर गड़ाए हुए हैं। इसके पहले खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में हत्या के बाद राजनयिक तनाव पैदा हो गया था, जिसने दोनों देशों के संबंधों को निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर हत्या में शामिल होने का बेबुनियाद आरोप लगाया था। दोनों देशों के बीच शुरू हुई चर्चा रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनयिक और सुरक्षा चैनलों के माध्यम से दिसम्बर के आसपास चर्चा फिर से शुरू हुई। इसके पहले अक्टूबर में दोनों पक्षों के बीच रिश्तों में तनाव आ गया। भारत ने अपने उच्चायुक्त और 5 अन्य राजनियकों को वापस बुला दिया था, जिन्हें निज्जर की हत्या में पर्सन ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया गया था। बदले में भारत ने 6 कनाडाई राजनियकों को निष्कासित कर दिया था। राजनयिक तैनाती पर हो रहा विचार अब एक बार फिर दोनों देश राजनयिकों की तैनाती पर विचार कर रहे हैं। ओट्टावा में राजदूत पद के लिए नई दिल्ली ने कुछ नामों पर विचार किया है। HT की रिपोर्ट के अनुसार, नियुक्ति के लिए स्पेन में भारत के राजदूत दिनेश के पटनायक का नाम इस पद के लिए सबसे आगे हैं। पटनायक 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी हैं और भारत के वरिष्ठ राजनयिकों में से एक हैं। वे 2016-18 के दौरान ब्रिटेन में उप-राजदूत के रूप में काम कर चुके हैं। ब्रिटेन में काम करने के चलते उनके पास खालिस्तान मामले को लेकर भी समझ का अनुभव है, जो कनाडा में नियुक्ति के लिए अहम है। मामले से परिचित लोगों ने बताया है कि नई दिल्ली में उच्चायुक्त पद के लिए कनाडा की तरफ से क्रिस्टोफर कूटर का नाम है, जो हाल तक दक्षिण अफ्रीका में राजदूत थे। कूटर का नाम कनाडा ने पहले ही प्रस्तावित किया था। इसे साल 2024 के मध्य में भारत की तरफ से भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। यह नियुक्तियां कब तक होंगी, इस बारे में अभी साफ नहीं है। कुछ हलकों का यह मानना है कि दूतों की नियुक्ति से पहले दोनों पक्षों के शीर्ष नेतृत्व की बैठक होनी चाहिए ताकि संबंधों को फिर से स्थापित करने का संकेत दिया जा सके।

इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी, तीन जिलों के 77 गांव से होकर यह नई रेल लाइन गुजरेगी

 इंदौर  इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना में अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ है। परियोजना के तहत मप्र के तीन जिलों के 77 गांव से होकर रेल लाइन गुजरेगी। नवंबर 2024 में रेल मंत्रालय ने इन गांवों की जमीन अधिग्रहण के लिए गजट नोटिफकेशन भी जारी कर दिया था। इसके बाद अब मंत्रालय ने महू तहसील के 18 गांव की सूची जारी की। बावजूद दो माह बाद भी जमीन अधिग्रहण का काम शुरू नहीं हो पाया है।अफसरों के अनुसार रेल मंत्रालय द्वारा 14 जनवरी को जारी नोटिफकेशन के अनुसार महू तहसील के खेड़ी, चैनपुरा, कमदपुर, खुदालपुरा, कुराड़ाखेड़ी, अहिल्यापुर, नांदेड़, जामली, केलोद, बेरछा, गवली पलासिया, आशापुरा, मलेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चौरड़िया, न्यू गुराडिया, और महू केंटोमेंट एरिया की चिह्नित जमीन का रेल प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण होना है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शीघ्र ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सांसद शंकर लालवानी ने जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत 13 जिलों की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। महू के गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए अधिकारी की नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिससे यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकेगी। यह परियोजना 309 किमी लंबी होगी, जो इंदौर से मुंबई को जोड़ने के लिए बनाई जा रही है। इसे लेकर 18036 करोड़ रुपए की मंजूरी सितंबर में मिल चुकी थी। इस नई रेल लाइन से न केवल यात्री सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि औद्योगिक कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इस परियोजना का 170.56 किमी हिस्सा मध्य प्रदेश में आएगा। इसमें 905 हेक्टेयर भूमि निजी है। मध्य प्रदेश में इस रेल लाइन के तहत बनने वाले 18 स्टेशन में महू, केलोद, कमदपुर, झाड़ी बरोदा, और अन्य स्टेशन शामिल हैं। इंदौर के 22 और धुलिया जिले के 37 गांव के अधिग्रहण के आदेश इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए इंदौर और धुलिया जिले के कुल 59 गांवों का भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत इंदौर जिले के 22 गांव और धुलिया जिले के 37 गांव शामिल हैं। इंदौर-मनमाड़ रेल्वे संघर्ष समिति के मनोज मराठे ने बताया कि रेल मंत्रालय मध्य रेलवे द्वारा इंदौर जिले के लगभग 22 गांवों की भूमि अधिग्रहण का आदेश जारी किया गया है। इसके अलावा, धुलिया तहसील के 10 गांवों और शिरपुर तहसील के 18 गांवों की जमीन का अधिग्रहण करने के आदेश भी जारी हुए हैं। मराठे ने कहा कि इस विशेष परियोजना के तहत काम तेजी से चल रहा है, जिससे इसका कार्य शीघ्रता से पूरा हो सके। प्रोजेक्ट के लिए 18 हजार 36 करोड़ रुपए की स्वीकृति इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट की योजनाओं पर वर्षों से काम चल रहा है। 2022 में इस प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी नहीं मिल सकी, लेकिन 2023 में 2 करोड़ रुपए की टोकन राशि जारी की गई। मध्य प्रदेश के हिस्से में डीपीआर-सर्वे का काम किया गया। इस काम को जारी रखने के लिए 2024 के बजट में 1 हजार रुपए की टोकन राशि भी दी गई थी। अब 18,036 करोड़ रुपए की राशि इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत की गई है, जो आगामी बजट में उपलब्ध होगी।i महू तहसील के इन गांवों की जमीन अधिग्रहण होना है खेड़ी (इस्तमुरार), चेनपुरा, कामदपुर, खुदालपुरा, कुराड़ाखेड़ी, अहिल्यापुर, नांदेड़, जामली, केलोद, बेरछा, खेड़ी, गवली पलास्या, आशापुर, मलेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चोरड़िया, न्यू गुराड़िया और महू कैंट (डॉ. आंबेडकर नगर)। 309 किलोमीटर लंबी लाइन से 30 लाख की आबादी को होगा फायदा इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट के तहत कुल 309 किलोमीटर लंबी रेल लाइन इंदौर से महाराष्ट्र के मनमाड तक बिछाई जाएगी। इस परियोजना से लगभग एक हजार गांवों और 30 लाख की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। रेलवे ने भू-स्वामियों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। प्रोजेक्ट के पूरा होने पर 16 जोड़ी यात्री ट्रेनों का संचालन होगा, और शुरुआती वर्षों में 50 लाख यात्रियों के सफर करने का अनुमान है। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश में 170 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जाएगी, जिसमें 18 स्टेशन शामिल होंगे। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किमी से घटकर 568 किमी रह जाएगी इंदौर-मनमाड रेल प्रोजेक्ट के तहत धार, खरगोन और बड़वानी जिले के आदिवासी अंचल से पहली बार रेल लाइन गुजरेगी, जिससे इन क्षेत्रों को रेल सेवाओं से सीधा संपर्क मिलेगा। इस परियोजना से लगभग एक हजार गांव और 30 लाख आबादी को फायदा होगा। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किलोमीटर से घटकर 568 किलोमीटर रह जाएगी। सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि यह रेलवे लाइन प्रोजेक्ट बहुत प्रतीक्षित है और इसके लिए अब जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से शुरू किया जाएगा। रेल मंत्रालय ने इसके लिए एक अधिकारी की नियुक्ति की है, और आगामी बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए बड़ी राशि का प्रावधान किया जाएगा। प्रोजेक्ट पूरा होने पर 16 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होगा, और शुरुआती वर्षों में 50 लाख यात्री सफर करेंगे। इस प्रोजेक्ट से रेलवे को हर साल 900 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इंदौर-मनमाड रेल लाइन योजना की शुरुआत 1918 में होलकर काल में हुई थी। इस परियोजना को गति शक्ति योजना में शामिल किया गया है, जिसके तहत इसकी निगरानी सीधे पीएमओ से की जाएगी। रेल मामलों के विशेषज्ञ नागेश नामजोशी के मुताबिक, होलकर राज्य के आर्किटेक्ट पैट्रिक गिडीस ने सबसे पहले इस रेल लाइन का खाका तैयार किया था, लेकिन तब तक काम शुरू नहीं हो सका। 2002 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतिश कुमार ने इस परियोजना के सर्वे के लिए राशि मंजूर की और 2004 में सर्वे पूरा किया गया। हालांकि, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार के बीच समन्वय न होने के कारण परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद, इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र में आंदोलन शुरू हुआ, जो इंदौर तक पहुंचा। 2016 में सेंट्रल रेलवे ने सर्वे किया, और 2019 में जहाजरानी मंत्रालय और रेलवे के बीच इस परियोजना के लिए समझौता हुआ, लेकिन यह बाद में निरस्त हो गया। अब रेलवे खुद इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार कर रही है। मप्र में पहाड़ चीरकर तैयार होगी 17.66 किमी लंबी सुरंगें इंदौर-मनमाड रेल लाइन परियोजना के तहत रेलवे को मध्यप्रदेश में पहाड़ों को चीरकर 17.66 किलोमीटर लंबी सात सुरंगें बनानी होंगी, जिनमें सबसे लंबी सुरंग 6.02 किमी लंबी होगी। महाराष्ट्र में दो सुरंगें बनेंगी, जिनकी … Read more

इंदौर मेट्रो कोच को 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा, 24 और 25 मार्च को 5 स्टेशनों का होगा इंस्पेक्शन

 इंदौर मार्च अंत तक मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होने पर शहरवासियों को सफर करने का मौका मिल सकता है। इसके पहले कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) जनक कुमार गर्ग मेट्रो के निरीक्षण के लिए 24 मार्च को इंदौर पहुंचेंगे। वे 24 व 25 मार्च को सुपर प्रायोरिटी कारिडोर के 5.9 किलोमीटर में बने पांचों मेट्रो स्टेशन का बारीकी से निरीक्षण करेंगे। वे इस हिस्से में मेट्रो के वायडक्ट पर ट्राली में बैठकर भी निरीक्षण करेंगे। 22 जनवरी को सीएमआरएस ने इंदौर में मेट्रो डिपो व कोच का निरीक्षण किया था। 80 किमी की रफ्तार से चलेगी मेट्रो गांधीनगर मेट्रो स्टेशन से सुपर कॉरिडोर स्टेशन नंबर-3 तक सफर उन्होंने डेढ़ घंटे में पूरा किया था। इस दौरान उन्होंने मेट्रो कोच के ब्रेकिंग सिस्टम का निरीक्षण किया था। इस बार सीएमआरएस मेट्रो कोच में बैठकर गति निरीक्षण भी करेंगे। इस दौरान मेट्रो कोच को तय स्पीड 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा। सीएमआरएस व उनकी टीम के सदस्य कोच में यात्री सुरक्षा और तय स्पीड पर होने वाले कंपन की जांच भी करेंगे। प्लेटफार्म पर कोच के रुकने के दौरान उसके ब्रेकिंग सिस्टम को जांचा जाएगा। सीएमआरएस के इस निरीक्षण के बाद इंदौर मेट्रो में यात्रियों के सफर का राह का आगामी चरण शुरू होगा। यात्री सुविधाएं भी देखेंगे सीएमआरएस सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर के पांचों स्टेशन का अलग-अलग निरीक्षण करेंगे। वे स्टेशन पर बने आपरेशन रूम, इलेक्ट्रिकल सेक्शन, प्लेटफार्म, लिफ्ट, एस्केलेटर सहित अन्य यात्री सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे। रेलवे बोर्ड से मेट्रो कोच व ट्रैक को लेकर अनुमोदन (अप्रूवल) मिल चुका है। सीएमआरआएस अपने आगामी इंदौर दौरे पर मेट्रो का दो दिन निरीक्षण करने के बाद ‘फाइनल क्लीयरेंस’ देंगे। इसके बाद मेट्रो कोच में यात्रियों को सफर करने का मौका मिलेगा। कमर्शियल रन शुरू करने का इंतजार     पहला लक्ष्य – जुलाई 2024 तय किया गया।     दूसरा लक्ष्य – दिसंबर 2024 तय किया गया।     तीसरा लक्ष्य – फरवरी 2025 तय किया गया।     चौथा लक्ष्य – मार्च 2025 में अंतिम सप्ताह तय किया गया।  

चीन में दुर्लभ खनिज तत्वों रेयर अर्थ एलिमेंट का एक बड़ा भंडार मिला, दुनिया के 60% दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन पर नियंत्रण

बीजिंग  चीन में दुर्लभ खनिज तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट) का एक बड़ा भंडार मिला है। इसे चीन में मिला मध्यम और भारी खनिज का सबसे बड़ा भंडार माना जा रहा है। इससे चीन को इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी खनिजों के उत्पादन में मदद मिलेगी। जनवरी में इस खोज के बारे में पहली बार जानकारी सामने आई थी। इसके बाद चीन के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (CGS) ने इसकी जांच करते हुए अब इस भंडार की पुष्टि कर दी है। चीन के युन्नान प्रांत में ये खोज हुई है। यह प्रांत खनिजों से भरपूर है। यहां एल्यूमीनियम, जस्ता और टिन के बड़े भंडार हैं। CGS के अनुसार इस भंडार में 1.15 मिलियन टन तक संसाधन हो सकते हैं। इनसे 470,000 टन खनिज निकाले जा सकते हैं। इसमें प्रमुख दुर्लभ तत्व प्रेजोडियम, नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टेरबियम भी शामिल हैं। ये खनिज काफी महंगे हैं और इनकी वैश्विक स्तर पर बहुत मांग है। जाहिर कि इससे चीन का कई क्षेत्रों में दबदबा बढ़ जाएगा। चीन को होगा बड़ा फायदा चीनी मीडिया का कहना है कि यह खोज खनिज अन्वेषण (मिनरल एक्सपलोरेशन) में एक बड़ी सफलता है। ऐसे भंडार में दुर्लभ पृथ्वी खनिज प्राकृतिक रूप से जमा होते हैं और मिट्टी की सतह पर अवशोषित होते हैं। इससे ‘आयन एक्सचेंज’ जैसे पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से उन्हें जमीन से निकालना आसान होता है। इससे पहले इस तरह की आखिरी खोज 1969 में पूर्वी चीन के जियांग्शी प्रांत में हुई थी। CGS के विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए भंडार में मुख्य रूप से मध्य और भारी दुर्लभ पृथ्वी खनिज हैं। ये सब इलेक्ट्रिक वाहनों, रिन्यूबल एनर्जी और रक्षा सुरक्षा उपकरणों के लिए जरूरी कच्चा माल हैं। चीन को यह विशाल दुर्लभ भंडार हाल ही में स्थापित राष्ट्रीय भूरासायनिक बेसलाइन नेटवर्क के बाद मिला है। यह नेटवर्क व्यापक डेटा तैयार करने और खनिज अन्वेषण तकनीकों को बेहतर करने के लिए है। एक्सपर्ट का कहना है कि चीन की खोज से दुर्लभ पृथ्वी खनन के क्षेत्र में दुनिया में स्थिति और मजबूत होगी, जहां वह पहले ही अपना दबदबा रखता है। एशिया की बड़ी ताकत चीन के पास करीब 60 फीसदी दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन और 85 प्रतिशत प्रसंस्करण क्षमता पर नियंत्रण है। साल 2023 तक चीन का कुल खनन उत्पादन 240,000 टन था, जो दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका से छह गुना ज्यादा है।

इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर में किसानों को कुल विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करने के निर्णय से किसान गदगद

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर में किसानों को कुल विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करने के निर्णय से किसान गदगद हैं। इसको लेकर किसानों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार जताया है। इससे फायदा यह होगा कि किसानों की जमीन बच जाएगी। किसानों को होगा फायदा राज्य सरकार इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित करने जा रही है, इसके लिए कुल विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा किसानों को आवंटित करने के निर्णय से आस-पास के गांवों के ग्रामीण लाभान्वित होंगे। इन गांव के किसानों को होगा लाभ प्रस्तावित योजना में कोडियाबर्डी, नैनोद, रिंजलाय, बिसनावदा, नावदा पंथ, श्रीराम तलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा, नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, टीही और धन्नड़ जैसे गांवों के किसानों को लाभ मिलेगा। इसमें कुल 1290.74 हेक्टेयर भूमि का विकास किया जाएगा, जिसमें से किसानों को मुआवजे के बदले विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। किसान हैं खुश सरकार के इस फैसले से किसान गदगद हैं। उन्होंने बुधवार को इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र के किसानों ने विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करने के राज्य सरकार के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार व्‍यक्‍त क‍िया। किसानों ने मुख्यमंत्री यादव से  इंदौर एयरपोर्ट पर मिलकर उनका आभार जताया। सम्मान को अस्वीकार कर दिया किसानों ने सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय के लिए मुख्यमंत्री यादव का सम्मान करना चाहा, जिसे मुख्यमंत्री ने इंदौर गेर में हुए हादसे के कारण विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया। राज्य सरकार का यह निर्णय क्षेत्रीय विकास, अधोसंरचना निर्माण और किसानों के हितों को दृष्टिगत रखते हुए लिया गया है। इससे क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी और स्थानीय नागरिकों के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत-ताइवान मिलकर करने जा रहे ये काम, भारत को चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, ट्रंप की भी नजर

नई दिल्ली भारत और ताइवान के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने की जरूरत है। इससे न केवल भारत को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में ताइवानी कंपनियों के निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कहना है ताइवान के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सू चिन शू का, जो इस समय भारत दौरे पर हैं। सू चिन शू ने भारत में अपने दौरे के बीच प्रतिष्ठित रायसीना डायलॉग में भाग लिया और वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से भी वार्ता की। उन्होंने कहा कि ताइवान की तकनीक और भारत की विशाल युवा जनसंख्या के संयुक्त प्रयास से भारत में उच्च श्रेणी के तकनीकी उपकरणों का उत्पादन मुमकिन हो सकता है, जिससे चीन से आयात पर निर्भरता घटेगी। चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा काफी बड़ा है। वर्ष 2023-24 में भारत ने चीन से लगभग 101.75 अरब अमेरिकी डॉलर के उत्पाद आयात किए, जबकि निर्यात मात्र 16.65 अरब डॉलर का ही रहा। भारत चीन से मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर हार्डवेयर, दूरसंचार उपकरण, रसायन और दवा उद्योग के कच्चे माल का आयात करता है। ताइवान इस क्षेत्र में भारत की मदद कर सकता है, क्योंकि यह विश्व के कुल सेमीकंडक्टर उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत और उच्चतम तकनीक वाले चिप्स का 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादन करता है। ये चिप्स स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, डेटा सेंटर, रक्षा उपकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी कई अहम तकनीकों में इस्तेमाल किए जाते हैं। मुक्त व्यापार समझौते की क्यों होगी जरूरत? ताइवान भारत के साथ एक व्यापार समझौता करने को उत्सुक है, जिसकी पहल लगभग 12 वर्ष पहले हुई थी। शू ने बताया कि ताइवान की कंपनियां भारत में निवेश करने की इच्छुक हैं, लेकिन उच्च आयात शुल्क एक बड़ी बाधा है। अगर एक व्यापार समझौता किया जाता है, तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होगा। ताइवान की कई प्रमुख कंपनियां अपने उत्पादन संयंत्रों को चीन से हटाकर यूरोप, अमेरिका और भारत में ट्रांसफर करने पर विचार कर रही हैं। इसका एक कारण अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और दूसरा ताइवान के प्रति चीन के आक्रामक रुख को लेकर चिंताएं हैं। सू चिन शू का मानना है कि ताइवान की उन्नत तकनीक और भारत की विशाल श्रमशक्ति मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को और मजबूत कर सकती है। भारत-ताइवान संबंधों में बढ़ती मजबूती हाल के वर्षों में भारत और ताइवान के बीच संबंधों में सकारात्मक बदलाव आया है। दोनों देशों ने पिछले साल एक प्रवासन और गतिशीलता समझौते (Migration and Mobility Agreement) पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे भारतीय श्रमिकों के लिए ताइवान में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। हालांकि भारत और ताइवान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन व्यापार और सांस्कृतिक स्तर पर दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 1995 में भारत ने ताइपे में ‘इंडिया-ताइपे एसोसिएशन’ (ITA) की स्थापना की थी।     यह दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी वर्ष ताइवान ने भी दिल्ली में ‘ताइपे इकोनॉमिक एंड कल्चरल सेंटर’ की स्थापना की थी। भारत में ताइवान का कुल निवेश 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है, जो मुख्य रूप से जूते, मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, पेट्रोकेमिकल्स और आईसीटी उत्पादों के क्षेत्रों में केंद्रित है। ताइवानी कंपनियां ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत भारत में निवेश के नए अवसर तलाश रही हैं। चीन-ताइवान विवाद और भारत की स्थिति गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना एक भाग मानता है और आवश्यक होने पर बल प्रयोग कर उसे मुख्य भूमि में मिलाने की धमकी देता है। हालांकि, ताइवान खुद को स्वतंत्र राष्ट्र मानता है। भारत ने अब तक इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाया है और ताइवान के साथ अपने व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत और ताइवान के बीच एक व्यापार समझौता न केवल दोनों देशों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा, बल्कि एशिया की व्यापारिक रणनीतियों में भी एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विश्व में सनातन ही एकमात्र धर्म है, जो प्रकृति को समाहित करता है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विश्व में सनातन ही एकमात्र धर्म है, जो प्रकृति को समाहित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तराना स्थित तिलभांडेश्वर महादेव मन्दिर में श्री दशनाम जूना अखाड़ा के श्री मोहन भारती महाराज के महंत बनने पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सनातन को समझने के लिये साधु-संतों के जीवन और उनके अनुभवों को समझना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि तिल भांडेश्वर मंदिर को धार्मिक लोक के रूप में विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उज्जैन को धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार गौ-शालाओं के लिए विशेष प्रावधान कर रही है। सभी गौ-शालाओं में एक गौ-वंश के लिए प्रतिदिन 40 रूपये की अनुदान राशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साधु-संत सनातन की धुरी हैं। सनातन धर्म साधु-संतों के मार्गदर्शन में काम करता रहा है। उन्होंने उज्जैन में आयोजित होने जा रहे सिंहस्थ-2028 के लिये साधु-संतों को आमंत्रित करते हुए कहा कि सिंहस्थ के लिये उज्जैन में साधु-संतों को स्थाई प्रकृति के निर्माण की भी स्वीकृति मिलेगी। इससे साधु-संतों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आयेगी। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना सुश्री पलक पटवर्धन के निर्देशन में बालिकाओं ने नर्मदा क्षिप्रा स्तुति पर आधारित नृत्य नाटिका की आकर्षक प्रस्तुति दी। आयोजन में अखाड़े के मुख्य संरक्षक श्री महंत हरि गिरि महाराज एवं अन्य संतों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को चांदी की गौ-माता स्मृति-चिन्ह के रूप में भेंट की। समारोह में सांसद श्री अनिल फिरोजिया, उज्जैन के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, स्थानीय पार्षद महेश जोशी, साधु संत उपस्थित रहे।  

Chhattisgarh में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन, सुरक्षाबल ने 30 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया

बीजापुर / कांकेर छत्तीसगढ़ में आज सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर और कांकेर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुए एनकाउंटर में अब तक कुल 30 नक्सली मारे गए हैं। इसमें बीजापुर में 26 और कांकेर में 4 नक्सली मार गिराए गए हैं। आज सुबह 7 बजे से ही लाल आतंक के खिलाफ जवानों का अभियान जारी था। एक बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा के वन क्षेत्र में मुठभेड़ हुई तो दूसरी कांकेर में हुई है। इसमें एक जवान की भी शहादत हुई है। कुल 30 नक्सली एनकाउंटर में ढेर बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा क्षेत्र के अलावा कांकेड़ में भी सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को ठिकाने लगाने में सफलता मिली है। कांकेर जिले में हुई मुठभेड़ में कुल 4 नक्सलियों को मार गिराया गया है। इस ऑपरेशन में अब कुल 30 नक्सलियों को मार गिराया गया है, जिसमें बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा के वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में 26 और कांकेर जिले में हुए एनकाउंटर में 4 नक्सली मारे गए हैं। जानकारी के मुताबिक नक्सलियों के खिलाफ आने वाले दिनों में और भी बड़े ऑपरेशन होंगे. नक्सली कमांडर हिडमा की तलाश में सुरक्षा बल जुटे हुए हैं. हिडमा की तलाश के लिए 125 से ज्यादा गांवों की टेक्निकल मैपिंग की जा रही है. सिक्योरिटी फोर्स छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित करीब 125 गांव का थर्मल इमेजिंग करवा रही है. सुरक्षाबलों ने इस साल अब तक 77 नक्सली ढेर किए हैं. कांकेर में जारी नक्सली ऑपरेशन के बार में जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि मुठभेड़ अभी जारी है और अब तक हमने चार शव और एक स्वचालित राइफल बरामद की है। यह मुठभेड़ कांकेर-नारायणपुर सीमा क्षेत्र में हुई, जब माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद एक संयुक्त पुलिस दल को तलाशी अभियान के लिए भेजा गया था। एसपी ने बताया कि तलाशी अभियान अभी भी जारी है और शाम तक विस्तृत जानकारी दी जाएगी। गुरुवार को यह दूसरी मुठभेड़ है क्योंकि सुकमा में भी एक और मुठभेड़ चल रही है,जिसमें अब तक 18 शव बरामद किए जा चुके हैं। सीएम ने थपथपाई पीठ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दो अलग-अलग ऑपरेशनों के बाद,कांकेर और बीजापुर में 26 नक्सलियों के शव मिले हैं। हम अपने सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री का भी यह संकल्प है कि 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाए। हमें विश्वास है कि उनका संकल्प पूरा होगा। यह डबल इंजन सरकार का लाभ है। सुबह से चल रहा था ऑपरेशन छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सलियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आज बीजापुर और दंतेवाड़ा के सरहदी में थाना गंगालूर क्षेत्रान्तर्गत माओवादी विरोधी अभियान पर संयुक्त टीम निकली थी। सुबह 7 बजे से माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार फायरिंग जारी थी। एनकाउंटर वाले क्षेत्र में भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद के साथ दो नक्सलियों के शव बरामद हुआ था। टीम की तरफ से सर्चिंग जारी थी।

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ 30 नक्सली ढेर

 बीजापुर/कांकेर छत्तीसगढ़ के बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा पर थाना गंगालूर क्षेत्र में गुरुवार सुबह मुठभेड़ में 18 नक्सलियों को ढेर कर दिया गया है। उधर कांकेर क्षेत्र में भी मुठभेड़ में 4 नक्सलियों को मार गिराया गया है। बीजापुर मुठभेड़ में एक जवान बलिदान भी हुए हैं। इलाके में सर्चिंग जारी है और मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़ सकती है। मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद हुए हैं। संयुक्त टीम ने इलाके में ऑपरेशन शुरू किया था। इस दौरान गुरुवार सुबह करीब सात बजे से दोनों ओर से लगातार फायरिंग हो रही है। मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने 18 नक्सलियों के शव बरामद किए हैं। इस अभियान में बीजापुर डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) का एक जवान बलिदान हो गया। फिलहाल क्षेत्र में मुठभेड़ और सर्च ऑपरेशन जारी है। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और सुरक्षाबल पूरे इलाके में निगरानी रखे हुए हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने लिखा- 31 मार्च 2026 से पहले देश नक्सलमुक्त होने वाला है केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- ‘नक्सलमुक्त भारत अभियान’ की दिशा में आज हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग ऑपरेशन्स में 22 नक्सली मारे गए। मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है और समर्पण से लेकर समावेशन की तमाम सुविधाओं के बावजूद जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर रहे, उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सलमुक्त होने वाला है। जानकारी के मुताबिक मुठभेड़ स्थल पर सर्चिंग अभियान जारी है। बीजापुर से संयुक्त पुलिस जवानों का दल नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर अंडरी के पहाड़ में घुसा था। जहां जवानों को देख नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके जवाब में जवानों द्वारा फायरिंग की गई। गंगालूर थाना क्षेत्र का यह इलाका दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पहाड़ी से लगा हुआ है। यह नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। कैंप खुलने से सिमटा नक्सलियों का क्षेत्र पीडिया में कैंप खुलने के बाद से नक्सलियों का यह इलाका भी अब सिमट गया है। पीडिया कैंप के आसपास मिरगान घोटुल, डोडी तुमनार, इडेनार, गमपुर, तामोडी, अंडरी, कुएम जैसे गांव हैं, जो वर्षों से नक्सलियों के लिए सबसे सुरक्षित जगह माने जाते रहे हैं। कांकेर जिले में मुठभेड़ में चार नक्सली ढेर कांकेर-नारायणपुर सरहदी क्षेत्र में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना मिलने परर सर्चिंग अभियान पर संयुक्त पुलिस पार्टी रवाना हुई थी। डीआरजी और बीएसएफ की टीम पर नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में 4 नक्सली ढेर हो गए। इनके पास से आटोमैटिक हथियार सहित अन्य सामान बरामद किया गया है। यहां रुक-रुककर फायरिंग जारी है।

नया भारत आक्रांताओं को स्वीकार नहीं करेगा, आक्रांता के महिमामंडन का मतलब देशद्रोह : CM योगी

बहराइच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच की तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) के मुख्य भवन के उद्घाटन कार्यक्रम शिरकत की. इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में बहराइच की पहचान को महाराजा सुहेलदेव के शौर्य के साथ जोड़ा. योगी आदित्यनाथ ने सैयद सालार मसूद गाजी का बिना नाम लिए कहा कि विदेशी आक्रांता को महाराजा सुहेलदेव ने इस बहराइच में धूल धूसरित करने का काम किया था. बहराइच ऋषि बालार्क के नाम पर था. सीएम योगी ने महाराजा सुहेलदेव और ऋषि बालार्क को बहराइच की पहचान बताते हुए कहा कि अधिकारी कर्मचारियों को अब अपने पोस्टिंग स्थल पर रात्रि निवास करना होगा. योगी आदित्यनाथ ने कहा, “भारत की सनातन संस्कृति का गुणगान दुनिया कर रही है. हर नागरिक का दायित्व है कि वो भी ऐसा करे. किसी आक्रांता का महिमामंडन नहीं करना चाहिए. नया भारत आक्रांताओं को स्वीकार नहीं करेगा. आक्रांता के महिमामंडन का मतलब देशद्रोह है. बहराइच में किसके नाम पर विवाद? संभल के बाद सैयद सालार मसूद गाजी को लेकर बहराइच में भी हलचल बढ़ गई है. दरअसल, 1034 ईस्वी में बहराइच जिला मुख्यालय के समीप बहने वाली चित्तौरा झील के किनारे महराजा सुहेलदेव ने अपने 21 अन्य छोटे-छोटे राजाओं के साथ मिलकर सालार मसूद गाजी से युद्ध किया था और उसे युद्ध में पराजित कर मार डाला था. उसके शव को बहराइच में ही दफना दिया गया था, जहां सालाना जलसा होता है. जानिए गजनवी के सेना के मुखिया के बारे में जानकारों के मुताबिक, सैयद सालार मसूद गाजी का जन्म 1014 ईस्वी में अजमेर में हुआ था. वह विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी का भांजा होने के साथ उसका सेनापति भी था. तलवार की धार पर अपनी विस्तारवादी सोच के साथ सालार मसूद गाजी 1030-31 के करीब अवध के इलाकों में सतरिख (बाराबंकी ) होते हुए बहराइच, श्रावस्ती पहुंचा था.  

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