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जेपी नड्डा के बाद किसे मिलेगी BJP की बागडोर ? कप्तान बनने की रेस में ये 7 नाम

  नईदिल्ली   भारतीय जनता पार्टी अपना अगला अध्यक्ष चुनने जा रही है। हालांकि, पार्टी शीर्ष पद के लिए किसे चुनेगी, कैसे चुनेगी और कब चुनेगी, यह अब तक साफ नहीं हो सका है। फिलहाल, भाजपा की कमान केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के हाथों में है। अटकलें हैं कि पार्टी इन 7 नेताओं में से किसी के नाम पर मुहर लगा सकती है। 4 आधार: पहला- क्षेत्र पार्टी तमिलनाडु और केरल में विस्तार की कोशिश में लंबे समय से जुटी हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा दक्षिण भारत से ही किसी नेता को यह पद सौंप सकती है। कर्नाटक में पार्टी दोबारा सरकार बनाने में असफल रही थी, लेकिन लोकसभा में केरल से खाता खोलने में सफल रही है। दूसरा- जेंडर भाजपा के इतिहास में हमेशा कप्तान पुरुष रहा है। अब हाल ही में रेखा गुप्ता के रूप में दिल्ली को महिला मुख्यमंत्री देने वाली पार्टी रुख में बदलाव कर सकती है और महिला प्रमुख का चुनाव कर सकती है। वहीं, पार्टी हाल के कई चुनावों में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखती नजर आई है। तीसरा- वफादारी और अनुभव संगठन का तजुर्बा भी अध्यक्ष के चुनाव में बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है। ऐसे में पार्टी किसी युवा चेहरे के बजाए वरिष्ठ नेता का चुनाव कर सकती है। चौथा- संघ की मुहर महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव की बड़ी जीत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक की भूमिका अहम मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष पद पर नेता चुनने के लिए संघ की मुहर भी अहम साबित होगी। जी किशन रेड्डी 4 दशक से ज्यादा समय से भाजपा का हिस्सा केंद्रीय मंत्री रेड्डी को इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। दक्षिण भारत से भाजपा को आखिरी अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू के रूप में मिला था। वह तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष भी हैं। उनके साथ ही बंडी संजय कुमार का नाम भी चर्चा में है। वनथि श्रीनिवासन और डी पुरंदेश्वरी श्रीनिवासन तमिलनाडु से आती हैं और वह भाजपा की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने 2021 विधानसभा चुनाव में कोयंबटूर दक्षिण से कमल हासन को मात दी थी। खास बात है कि राज्य में 2026 में चुनाव होने हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश भाजपा की चीफ और सांसद पुरंदेश्वरी को ‘दक्षिण की सुषमा स्वराज’ कहा जाता है। वह राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की रिश्तेदार हैं। धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव भाजपा के अहम रणनीतिकारों में शुमार प्रधान और यादव को इस रेस में गिना जा रहा है। 2024 में ही भाजपा ने ओडिशा में जीत हासिल की है और इससे पहले पूर्व से कभी कोई नेता संगठन के शीर्ष पद तक नहीं पहुंचा। महाराष्ट्र चुनाव के प्रभारी के तौर पर यादव ने भाजपा को बड़ी जीत दिलाई थी। साथ ही वह 2017 में उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे। मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान दोनों ही नेता पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और माना जाता है कि उन्हें आरएसएस का समर्थन भी हासिल है। एक ओर जहां हरियाणा के पूर्व सीएम खट्टर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। वहीं, मुख्यमंत्री के तौर पर कई बार मध्य प्रदेश की कमान संभाल चुके शिवराज सिंह चौहान का लंबा अनुभव है।

अमृत स्टेशन योजना के तहत विदिशा एवं साँची रेलवे स्टेशनों का होगा कायाकल्प, बनेगें देश के आधुनिक स्टेशन

 विदिशा / साँची विदिशा एवं साँची रेलवे स्टेशनों का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। ये दोनों स्टेशन “अमृत स्टेशन योजना” के तहत पुनर्विकास के अंतर्गत हैं, और इस निरीक्षण का उद्देश्य निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेना था। विदिशा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण – यात्री सुविधाओं एवं पुनर्विकास कार्यों की समीक्षा निरीक्षण के दौरान डीआरएम एवं पीसीई ने विदिशा रेलवे स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने प्लेटफार्म विस्तार, यात्री प्रतीक्षालय, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट एवं एस्केलेटर की प्रगति का मूल्यांकन किया। इसके अलावा, स्टेशन पर यात्री सूचना प्रणाली, पेयजल सुविधाओं एवं स्वच्छता व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया गया। डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि अमृत स्टेशन योजना के तहत विदिशा स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। साँची रेलवे स्टेशन का निरीक्षण – ऐतिहासिक शहर में उन्नत रेलवे सुविधाओं की दिशा में कदम इसके बाद निरीक्षण दल साँची रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों का गहन निरीक्षण किया गया। साँची, जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, यहां स्टेशन को विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माणाधीन यात्री हॉल, स्वच्छता सुविधाएं, टिकट काउंटर, पार्किंग एरिया और स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रमुख मुख्य अभियंता अशुतोष ने कहा कि साँची रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के साथ-साथ इसकी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखते हुए सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कार्यों में पर्यावरणीय पहलुओं एवं यात्रियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। जल्द पूरा होगा काम विदिशा एवं साँची स्टेशन के पुनर्विकास कार्य प्रगति पर हैं और निर्धारित समयसीमा में इन्हें पूरा किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुसार संपन्न किया जाए ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक रेल यात्रा का अनुभव मिल सके।

72 घंटे तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल न करने से डेली लाइफ में दिखेंगे 7 बदलाव

नई दिल्ली अगर हम आपसे कहें कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल 3 दिनों तक न करें, तो आपका क्या रिएक्शन होगा? 72 घंटों तक बिना फोन का इस्तेमाल किए रहना आजकल की दुनिया में काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि हमारे लगभग सभी काम इसी पर होते हैं। मनोरंजन हो या सोशल नेटवर्किंग सबकुछ स्मार्टफोन से ही होता है। लेकिन इसके इस्तेमाल को कम करने से आपके दिमाग में कुछ हैरान करने वाले बदलाव हो सकते हैं। इस बारे में एक स्टडी भी हुई है। आइए जानें इस बारे में। क्या है यह स्टडी? इस स्टडी में युवाओं को 72 घंटे तक फोन का कम से कम इस्तेमाल करने को कहा गया। वे फोन का इस्तेमाल सिर्फ काम के सिलसिले में या अपने परिवार और दोस्तों के साथ कॉन्टेक्ट में रहने के लिए ही कर सकते थे। इस रिसर्च से पहले सभी प्रतिभागियों का ब्रेन स्कैन किया गया, जिसमें क्रेविंग और रिवॉर्ड वाले हिस्से पर फोकस किया गया है। 72 घंटे तक स्मार्टफोन के इस्तेमाल को रेस्ट्रिक्ट करने के बाद ब्रेन स्कैन में प्रतिभागियों के ब्रेन केमिस्ट्री में बदलाव देखने को मिले। स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम होने की वजह से प्रतिभागियों के दिमाग में एडिक्टिव सब्स्टांस के विड्रॉवल जैसे रिएक्शन देखने को मिले। इससे यह समझा जा सकता है कि स्मार्टफोन एडिक्शन कितना गंभीर है और इसके इस्तेमाल को कम करने की कितनी ज्यादा जरूरत है। तनाव में कमी फोन का लगातार इस्तेमाल करने से हमारा दिमाग हमेशा एक्टिव रहता है। नोटिफिकेशन, मैसेज और सोशल मीडिया अपडेट्स की भरमार हमें मानसिक रूप से थका देती है। 3 दिन तक फोन से दूर रहने से हमारा दिमाग शांत होता है और तनाव कम हो जाता है। इससे हम ज्यादा शांत और बैलेंस्ड महसूस करते हैं। फोकस करने की क्षमता में सुधार फोन के बार-बार इस्तेमाल से हमारा ध्यान भटकता रहता है। फोन आसपास होने से भी हमारा ध्यान बार-बार उसी ओर जाता रहता है। 3 दिन तक फोन का इस्तेमाल न करने से हमारा दिमाग फोकस्ड होता है और हम अपने काम पर बेहतर ढंग से फोकस कर पाते हैं। इससे प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है। नींद की गुणवत्ता में सुधार फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है। फोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है। 3 दिन तक फोन से दूर रहने से हमारी नींद का पैटर्न सुधरता है और हम ज्यादा गहरी और आरामदायक नींद ले पाते हैं। क्रिएटिविटी में बढ़ोतरी फोन के इस्तेमाल से हमारा दिमाग लगातार इनफॉर्मेशन से भरा रहता है, जिससे क्रिएटिव थिंकिंग कम हो जाती है। फोन से दूर रहने पर हमारा दिमाग खुलकर और ज्यादा बेहतर ढंग से सोच पाता है। इससे नई चीजें सीखने और क्रिएटिव थॉट्स विकसित करने की क्षमता बढ़ती है। सोशल कनेक्शन में सुधार फोन के ज्यादा इस्तेमाल से हम वास्तविक दुनिया से कटने लगते हैं। फोन का कम इस्तेमाल करने से हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिता पाते हैं। इससे रिश्तों में मजबूती आती है और हम ज्यादा खुश महसूस करते हैं। सेल्फ रिफ्लेक्शन के लिए समय फोन से दूर रहने पर हमें अपने विचारों और भावनाओं को समझने का मौका मिलता है। यह सेल्फ रिफ्लेक्शन हमें अपने जीवन के गोल्स और प्रायोरिटीज के बारे में बेहतर तरीके से सोचने और इन्हें तय करने में मदद करता है। इससे हमारा मानसिक संतुलन बेहतर होता है। डिजिटल डिटॉक्स तीन दिन तक फोन का इस्तेमाल न करना एक तरह का डिजिटल डिटॉक्स है। यह हमें डिजिटल दुनिया के नेगेटिव प्रभावों से दूर रखता है और हमें असल जिंदगी के साथ जोड़ता है। इससे हमारी मेंटल और इमोशनल हेल्थ बेहतर होती है।

स्कूल शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दे रहा

भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रत्येक बिंदु को ठोस तरीके से लागू किये जाने के प्रयास किये जा रहे है। नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में तेजी से बढ़ती हुई विश्व की अर्थव्यवस्था में भारतीयों का किस प्रकार से योगदान हो उसकी चिंता की गई है। बढ़ती हुए आबादी के साथ जनता के लिये उनकी शिक्षा, कौशल और आकांक्षाओं के अनुरूप रोजगार का सृजन एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दे रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने नये शैक्षणिक सत्र में 700 नये उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में नये ट्रेड एवं जॉब रोल्स शुरू करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के शिक्षा विभाग को भेजा है। यह ट्रेड 21वीं सदी के नवीन कौशल उन्नयन पर आधारित है। वर्तमान में 2383 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के कोर्स चल रहे है। इन्हें मिलाकर प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा देने वाले स्कूलों की संख्या 3 हजार से अधिक हो जायेगी। इन कोर्स में उन्नत कृषि को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। डेयरी विकास से जुड़े कोर्स कन्स्ट्रशन ट्रेड अंतर्गत मेशन सहायक, कंस्ट्रशन पेन्टर, असिस्टेंट डिजाइनर, फैशन, हाउसकीपिंग, ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन एण्ड मैनेजमेंट के जॉब रोल्स भी प्रारंभ किये जायेंगे। वर्तमान में संचालित कोर्स में कक्षा 9 और 10 में डाटाएंट्री ऑपरेटर, जूनियर फील्ड टेकनिशियन, असिस्टेंट ब्यूटी थेरेपिस्ट, रिटेलस्टोर, ऑपरेशन असिस्टेंट, प्रायवेट सिक्योरिटी गॉर्ड, फूड एण्ड बेवरीज, सर्विस असिस्टेंट, माइक्रो फ़ाइनेंस एग्ज़ीक्यूटिव, असिस्टेंट प्लम्बर, सिलाई मशीन ऑपरेटर, फोर व्हीलर सर्विस असिस्टेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्विस असिस्टेंट और फिजिकल एजूकेशन असिस्टेंट विषय प्रमुख है, कक्षा 11 और 12 में जिन कोर्स को प्राथमिकता दी गई है। उनमें जूनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर, सौलर पैनल टेक्नीशियन, ड्रोन सर्विस टेक्नीशियन, सीसीटीबी, फुटेज ऑपरेटर, फ्लोरीकल्चर, सेल्फ एम्प्लॉयड टेलर प्रमुख है। 4 लाख से अधिक विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदेश में वर्तमान में 2383 विद्यालयों में 4 लाख से अधिक विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। व्यावसायिक शिक्षा देने के लिये 4 हजार 700 से अधिक शिक्षकों को विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश में संचालित व्यावसायिक शिक्षा के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये है।  

YouTube के पीछे हाथ धोकर पड़ीं Meta, लगवानी चाहती हैं बैन

लंदन Meta और Snap समेत दूसरी कंपनियां हाथ धोकर YouTube के पीछे पड़ गई हैं. इन कंपनियों ने ऑस्ट्रेलिया सरकार से यूट्यूब पर भी बैन लगाने की मांग की है. दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 16 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर बैन लगा दिया था, लेकिन यूट्यूब को इससे बाहर रखा गया था. अब बाकी कंपनियों का कहना है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यूट्यूब पर भी बैन लगना चाहिए. YouTube को क्यों बैन करवाना चाहती हैं बाकी कंपनियां? टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा और स्नैप आदि का कहना है कि YouTube के कारण बच्चों को वही खतरे हैं, जो दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से थे. यूट्यूब भी बच्चों को एल्गोरिद्मिक कंटेट रिकमंडेशन, सोशल इंटरेक्शन फीचर और खतरनाक कंटेट तक एक्सेस देती है. मेटा का कहना है कि यूट्यूब की वजह से भी बच्चे हानिकारक कंटेट से एक्सपोज होते हैं. इसी तरह टिकटॉक का कहना है कि यूट्यूब को इस नियम से बाहर रखने से यह कानून विसंगत बन गया है. स्नैप ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा है कि कानून को निष्पक्ष होना चाहिए और बिना किसी भेदभाव के इसके पालन किया जाना चाहिए. YouTube पर क्यों नहीं लगाई थी पाबंदी? ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल नवंबर में एक नया कानून पारित किया था. इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस नहीं कर सकते. अगर कोई प्लेटफॉर्म उन्हें लॉग-इन करने देगा तो उस पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है. हालांकि, यूट्यूब पर यह कानून लागू नहीं होता. इसके एजुकेशनल कंटेट और पेरेंटल सुपरविजन के साथ फैमिली अकाउंट के चलते इसे पाबंदी से बाहर रखा गया है. दूसरी कंपनियों के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए यूट्यूब ने कहा कि अपनी कंटेट मॉडरेशन पॉलिसी को मजबूत कर रही है और ऑटोमेटेड टूल्स के जरिए हार्मफुल कंटेट की पहचान कर रही है.

कोरोना के बाद AC कोचो का बड़ा चलन, रेलवे ने जारी किया आकड़ा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे के जरिए रोजाना करोड़ों की संख्या में यात्री सफर करते हैं. यात्रियों के लिए रेलवे हजारों की संख्या में ट्रेन चलाता है. भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल व्यवस्था है. सामान्य तौर पर बात की जाए तो अगर कोई कहीं जाना चाहता है और दूर का सफर तय करना चाहता है. तो ऐसे में ज्यादातर लोगों की पहली पसंद ट्रेन होती है. बीते कुछ सालों में ट्रेन में सफर करने वालों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. लेकिन जब पूरी दुनिया की तरह भारत भी कोविड-19 की चपेट में था. तो महामारी के बाद जब चीजें सामान्य हुईं. तो ट्रेन से जाने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बदलाव देखने को मिला. थर्ड एसी में ट्रैवल करने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. हैरान कर देंगे रेलवे के जारी किए गए आंकड़े. कोरोना के बाद बढ़े थर्ड एसी के यात्री साल 2019 में जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था. तब से ही लोग साफ सफाई को लेकर सजग रहने लगे. इसके बाद लोगों की जिंदगी में कई आदते पूरी तरह से बदल गईं. वहीं कोरोना महामारी के बाद बात की जाए तो भारतीय रेलवे में सफर करने वालों यात्रियों की संख्या में भी काफी बदलाव हुआ. हाल ही में रेलवे की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में यह बात सामने निकल कर आई कि कोरोना महामारी के बाद ट्रेनों में पहले जो यात्री स्लीपर में सफर करते थे. वह यात्री थर्ड एसी में सफर करने लगे हैं. कोविड के बाद थर्ड एसी पैसेंजर्स की संख्या में तगड़ा उछाल देखने को मिला है. आंकडे कर देंगे हैरान कोरोना महामारी के बाद से लेकर अब तक के 5 सालों में एसी थर्ड से सफर करने वाले मुसाफिरों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. साल 2019-20 में 11 करोड़ यात्री थर्ड एसी से सफर करते थे. यानी कुल यात्रियों का 1.4% ही. वहीं साल 2024-25 की बात की जाए तो इसमें 19% का इजाफा हुआ है. और यात्रियों की संख्या 26 करोड़ हो गई है. साल 2019-20 में जहां थर्ड एसी से भारतीय रेलवे ने 12,370 करोड रुपये का राजस्व कमाया था. तो वहीं साल 2024 25 में यह बढ़कर 30,089 करोड़ हो गया है. यह आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं. बता दें कोरोना महामारी से पहले यानी 2019-20 तक रेलवे के राजस्व में सबसे ज्यादा योगदान स्लीपर क्लास के यात्रियों में हुआ करता था. लेकिन इस बार थर्ड एसी के यात्रियों का राजस्व सबसे ज्यादा है.

Train Cancel: इस रूट की 50 से ज्यादा ट्रेनें कैंसिल

नई दिल्ली भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने अपनी जिंदगी में कभी ट्रेन से सफर न किया हो. रोजाना भारतीय रेलवे के जरिए देश में करोड़ों की संख्या में यात्री एक शहर से दूसरे शहर सफर करते हैं. इन यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे की तरफ से 13000 से भी ज्यादा पैसेंजर गाड़ियां चलाई जाती हैं. अक्सर जब किसी को कहीं दूर का सफर तय करना होता है. तो ज्यादातर लोगों की पहली पसंद ट्रेन ही होती है. ट्रेन के सफर में आपको बाकी अन्य साधनों से ज्यादा सहूलियत मिलती है. हाल ही में आयोजित हुए महाकुंभ में भी भारतीय रेलवे की ओर से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं को प्रयागराज पहुंचाया गया था. लेकिन हाल ही में भारतीय रेलवे के जरिए सफर करने वाले यात्रियों के लिए बुरी खबर आई है. रेलवे ने अगले महीने कई ट्रेनों को किया है कैंसिल. सफर पर जाने से पहले देख लें इन ट्रेनों की लिस्ट. अगले महीने इन ट्रेनों को किया है कैंसिल भारतीय रेलवे को रेलवे के संचालन को दूर दराज तक के इलाकों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग रूटों पर नई-नई रेल लाइन जोड़नी पड़ती है. इसके अलावा रेलवे को कई बार रेल ट्रेक्स का रखरखाव भी करना होता है. इन सभी कामों के लिए रेलवे को कई ट्रेनें कैंसिल करनी पड़ती है. ऐसा ही इस बार हुआ है. रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक डोमिनगढ़-गोरखपुर रेलखंड पर रेल लाइन जोड़ने का काम किया जाना है. इस वजह से कई ट्रेनें कैंसिल की गई हैं. ट्रेन नंबर 15047 कोलकाता-गोरखपुर एक्स. 14 अप्रैल से 05 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15211/12 दरभंगा-अमृतसर एक्स. 16 अप्रैल से 04 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15031/32 गोरखपुर-लखनऊ जं. एक्स. 16 अप्रैल से 05 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15065 पनवेल-गोरखपुर एक्स. 16 अप्रैल से 05 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 22531/32 छपरा-मथुरा जं. एक्स. 16 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15067 गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस 16 से 30 अप्रैल के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15005 गोरखपुर-देहरादून एक्स. 16 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 19409 साबरमती-गोरखपुर एक्स. 17 अप्रैल से 01 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15068 बांद्रा टर्मिनेस-गोरखपुर 18 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 19410 गोरखपुर-साबरमती 19 अप्रैल से 03 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 20103 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर 19 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 14010 आनंद विहार टर्मिनस-बापूधाम मोतीहारी 19 से 30 अप्रैल के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 14009 बापूधाम मोतीहारी-आनंद विहार टर्मिनस 20 अप्रैल से 01 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 20104 गोरखपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस 20 अप्रैल से 03 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 12571 गोरखपुर-आनंद विहार टर्मिनस 20 अप्रैल से 03 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 12572 आनंद विहार टर्मिनस-गोरखपुर 21 अप्रैल से 04 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 12595 गोरखपुर-आनंद विहार टर्मिनस 21 अप्रैल से 01 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर12596 आनंद विहार टर्मिनस-गोरखपुर 22 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 22549/50 वंदे भारत एक्सप्रेस 27 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल

होली विशेष : श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक कथा

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन माह पूर्णिमा को होलिका दहन होता है। होली की पौराणिक कथा चार घटनाओं से जुड़ी हुई है। पहली होलिका और भक्त प्रहलाद, दूसरी कामदेव और शिव, तीसरी राजा पृथु और राक्षसी ढुंढी और चौथी श्रीकृष्ण और पूतना। आओ इस बार जानते हैं श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक और प्रामाणिक कथा। वसुदेव का विवाह कंस की बहन देवकी से हुआ। कंस जब देवकी और वसुदेव को रथ पर बैठाकर उनके घर छोड़ने जा रहा था तो रास्ते में आकाशवाणी द्वारा उसे पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। बस फिर क्या था कंस ने दोनों को मथुरा के कारागार में डाल दिया। देवकी के छ: पुत्रों को कंस ने मार दिया था और सातवें पुत्र जो कि शेष नाग के अवतार बलराम थे। उनके अंश को योगमाया ने जन्म से पूर्व ही वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। फिर श्रीकृष्ण का अवतार आठवें पुत्र के रूप में हुआ। उसी समय वसुदेव ने रात में ही श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद और यशोदा के यहां पहुंचा दिया और उनकी नवजात कन्या (योगमाया) को अपने साथ ले आए। परन्तु कंस उस कन्या का वध नहीं कर सका और फिर से आकाशवाणी हुई कि तुझे मारने वाला तो गोकुल मैं पहुंच गया है। इसी कारण कंस ने उस दिन गोकुल में जन्में सभी बच्चों को मारने के आदेश दे दिया। परंतु कोई भी श्रीकृष्‍ण के पास तक नहीं पहुंच सका। तब बालकृष्ण की हत्या करने का काम राक्षसी पूतना को सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व जन्म में पूतना राजा बलि की पुत्री रत्नबाला थी। वह राजकन्या थी। राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगने के लिए भगवान वामन आए तो उनका रूप सौन्दर्य देखकर उस राजकन्या को हुआ कि ‘मेरी सगाई हो गई है। काश, मुझे ऐसा ही बेटा हो तो मैं गले लगाऊं और उसको अपना खूब दूध पिलाऊं।’ परंतु जब नन्हा मुन्ना वामन विराट हो गया और उसने बलि राजा का सर्वस्व छीन लिया तो वह क्रोधित हो गई “मैं इसको दूध पिलाऊं? नहीं इसको तो मैं जहर पिलाऊं, जहर!’… भगवान ने उसकी मंशा जान ली और कहा तथास्तु। बाद में वही राजकन्या पूतना बनी। पूतना सुंदर नारी का रूप बनाकर बालकृष्ण को विष का स्तनपान कराने गई लेकिन बालकृष्ण के द्वार उसका स्तनपान करने से उसको भयंकर पीड़ा उत्पन्न हुई और वह बालकृष्ण को अपने स्तन से छुड़ाने लगी परंतु यह संभव नहीं हो पाया। कराहते हुए उसने अपना असली रूप धारण किया और चीखती हुई श्रीकृष्ण को लेकर आकाश में पहुंच गई। यह दृश्य देखकर माता यशोदा और माता रोहिणी सहित नगर के सभी लोग घबरा गए और उसके पीछे दौड़े। पूतना कराहते हुए चीखती रहती है। अंतत: वह भूमि पर गिरकर मर जाती है। दूध पीने के बाद बालकृष्ण उसकी छाती पर बैठ जाते हैं। सभी लोग वहां पहुंचते हैं। यशोदा और रोहिणी कहती हैं कोई बचाओ मेरे लल्ला को। तब एक ग्रामीण पूतना की छाती पर चढ़कर जैसे-तैसे लल्ला को नीचे उतार लाता है। यशोदा लल्ला को गले लगा लेती है। बाद में नंद आते हैं तो उनको इस घटना का पता चलता है। फिर एक बूढ़ी महिला कहती है कि ऐसी राक्षसी के हाथों बच जाना तो कोई दैवीय चमत्कार है। ऋषि शांडिल्य से कहकर पूजा और दान करवाओ और उत्सव मनाओ। जिस दिन राक्षसी पूतना का वध हुआ था उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा थी। अत: बुराई का अंत हुआ और इस खुशी में समूचे नंदगांववासियो ने खूब जमकर रंग खेला, नृत्य किया और जमकर उत्सव मनाया। तभी से होली में रंग और भंग का समावेश होने लगा।

मिडिल ईस्ट के हथियार बाजार में चीन को बड़ा झटका, शी जिनपिंग की स्ट्रैटजी की क्राउन प्रिंस ने निकाली हवा

रियाद  चीन की मिडिल ईस्ट स्ट्रैटजी को तगड़ा झटका देते हुए सऊदी अरब ने J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने से इनकार कर दिया है। शी जिनपिंग के लिए ये बहुत बड़ा झटका है। क्योंकि शी जिनपिंग की स्ट्रैटजी के मुताबिक खाड़ी के ताकतवर देशों में चीनी हथियारों से अमेरिकी हथियारों को रिप्लेस करना था। शी जिनपिंग चाहते थे कि सऊदी अरब जैसे ताकतवर देश अगर J-35 स्टील्थ फाइटर खरीदते हैं, तो ना सिर्फ चीनी जेट्स की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि रणनीतिक तौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हथियारों के लिए भी वो दरवाजे बंद कर सकता है। लेकिन IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने चीन को उस वक्त झटका दिया है, जब पिछले साल नवंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था और चीनी अधिकारी झुहाई एयर शो के कामयाब होने का जश्न मना रहे थे। चीन ने बार बार दावा किया था कि सऊदी अरब चीनी स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने वाला है। लेकिन जी-20 शिखर सम्मेलन ने एक कहानी के एक नये अध्याय को ही खोलकर रख दिया है। नई रिपोर्ट में कहा गया है की सऊदी अरब अब छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए ब्रिटेन, इटली और जापान के साथ मिलकर काम करने वाला है और इन देशों के बीच प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत एडवांस स्तर तक पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक ये सौदा पक्का हो जाएगा। इस दौरान प्रोजेक्ट की रूपरेखा तय कर ली जाएगी। चीन को सऊदी ने दिया बहुत बड़ा झटका चीन के लिए ये पैरों तले जमीन खिसकाने वाला झटका है। मिडिल ईस्ट में उसकी रणनीति पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को कमजोर करने की थी। इसके अलावा वो J-35 स्टील्थ फाइटर के लिए बड़े बाजार की तलाश कर रहा है। अभी तक J-35 स्टील्थ फाइटर को खरीदने के लिए सिर्फ पाकिस्तान तैयार हुआ है। एक्सपर्ट्स लगातार J-35 स्टील्थ फाइटर की क्षमता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान भी चीनी प्रेशर की वजह से इस फाइटर को खरीदने के लिए तैयार हुआ है। लेकिन सऊदी अरब के सामने ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी। सऊदी अरब के इनकार के बाद कई और देश, जिनके साथ चीन J-35 स्टील्थ फाइटर की बिक्री को लेकर बातचीत कर रहा था, वो सौदे से पीछे हट सकते हैं। इसकी टेक्नोलॉजी पर अब शक के बादल और गहरे हो गये हैं। IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने ये फैसला अचानक नहीं लिया है। बल्कि चीन की तरफ से करीबी संबंध बनाने के बावजूद बीजिंग की मानसिकता को लेकर सतर्क रहा है। उसने चीनी सैन्य हार्डवेयर को लेकर संतुलित रवैया अपनाया है। उसने कुछ चीनी हथियार जरूर खरीदे हैं, लेकिन स्ट्रैटजिक हथियार अभी तक नहीं खरीदे हैं। लिहाजा एक्सपर्ट्स इसे सिर्फ सऊदी अरब की हथियार खरीद में विविधिता के नजरिए से ही देख रहे हैं। IDRW ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी अरब और पश्चिमी देशों के अधिकारी पहले से ही गोपनीय स्तर पर इस नये प्रोजेक्ट पर बातचीत कर रहे हैं। पश्चिमी देशों के बीच फाइटर जेट निर्माण के लिए हाई टेक्नोलॉजी है, जो सऊदी और पश्चिमी देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देता है। जे-35 लड़ाकू विमान को नहीं मिल रहा खरीददार? पाकिस्तान के अलावा किसी भी और देश ने अभी तक जे-35 लड़ाकू विमान को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई है। चीनी फाइटर जेट हालांकि एफ-35 जैसे अमेरिकी फाइटर जेट्स की तुलना में काफी सस्ता है और इसका मेटिनेंस भी कम खर्चीला है, लेकिन ये प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा है। फरवरी 2024 में सऊदी अरब में आयोजित ग्लोबल एयरशो के दौरान चीन ने FC-31 को प्रदर्शन के लिए भेजा था। FC-31 लड़ाकू विमान, J-35 का पूर्व वैरिएंट है। लेकिन FC-31 भी डिफेंस एक्सपर्ट्स को प्रभावित नहीं कर पाया। चीन की डिफेंस इंडस्ट्री ने बहुत शानदार तरक्की की है और देश की रक्षा जरूरतों को पूरा किया है। लेकिन बावजूद इसके चीन को विदेशी ग्राहकों की तलाश के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मध्य-पूर्व से चीन को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वहां भी उसे कामयाबी नहीं मिल पा रही है। इन बातों के अलावा भी साल 2019 से 2023 तक चीन के हथियार कंपोनेंट्स में 77% हिस्सा रूस से आयात किया गया था। वहीं चीन कई क्रिटिकल हथियारों के लिए फ्रांस और रूस पर भी निर्भर था, लिहाजा यह निर्भरता चीन के आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल के दावों पर सवाल उठाती है।

जमीन की खरीदी-बिक्री की सोच रहे हैं, तो जल्दी करें, एक अप्रैल से महंगी हो जाएगी जमीन रजिस्ट्री

रायपुर जमीन की खरीदी-बिक्री की सोच रहे हैं, तो इंतजार मत किजिए. एक अप्रैल से रजिस्ट्री दर में 10 प्रतिशत इजाफे के आसार हैं. ऐसी स्थिति में आपके साथ-साथ दूसरे पक्ष को भी कार्रवाई के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा. दरअसल, पिछले 6 साल से गाइडलाइन दरें नहीं बढ़ाई गई है. इसके साथ ही सालभर पहले रजिस्ट्री में मिलने वाली 30 फीसदी की छूट भी खत्म कर दी गई है. अबकी बार या करें इस साल इसे करीब 10 फीसदी बढ़ाने की तैयारी है. गाइडलाइन दरें बढ़ने से जमीनों का रेट बढ़ेगा. रजिस्ट्री कार्यालय में भीड़ गाइडलाइन दर बढ़ने की आशंका में अभी से रजिस्ट्री कार्यालय में पक्षकारों की भीड़ नजर आने लगी है. मार्च महीने के अंत तक तो कार्यालय में पैर रखने की भी जगह नहीं मिलेगी. हालांकि, भीड़ बढ़ने के चलते ही रजिस्ट्री का समय वो घंटे बढ़ा दिया गया है. बुकिंग स्लॉट भी बढ़ा दिया गया है. लेकिन प्रकरणों की संख्या ज्यादा होने से समय ज्यादा तो लगेगा ही लगेगा, साथ में गड़बड़ी की भी आशंका बढ़ जाएगी. इसलिए बेहतर है कि समय रहते कागजों की ठीक जांच-पड़ताल कर रजिस्ट्री करा लें. इन इलाकों में ज्यादा कारोबार राजधानी रायपुर के जिन इलाकों में जमीन का कारोार ज्यादा हो रहा है उनमें विधानसभा, कचना, रिंग रोड नंबर-3, धमतरी रोड, वीआईपी रोड, सेजबहार, माना, अभनपुर, खरोरा रोड शामिल. रियल इस्टेट कारोबारी और लोग में इन इलाकों में जमीन खरीदने की होड़ मची हुई ​है.

आज पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में पहला ग्रहण रहेगा, करीब साढ़े तीन घंटे तक चलेगा

उज्जैन खगोलीय गणना के अनुसार आज साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। वर्ष 2025 में चार ग्रहण होंगे। इनमें दो चंद्र ग्रहण तथा दो सूर्य ग्रहण रहेंगे। इनमें से केवल 7 सितंबर को होने वाला चंद्र ग्रहण ही भारत में दिखाई देगा। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया कि जो ग्रहण दिखाई नहीं देते हैं, उनका सूतक मान्य नहीं होता है। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक प्रो.राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया वर्ष 2025 में चार ग्रहण होंगे। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में पहला ग्रहण रहेगा। यह ग्रहण सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगा। दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर ग्रहण का मध्य रहेगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह ग्रस्तोदित दिखाई देगा।   इन देशों में दिखाई देगा ग्रहण दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण अमेरिका, पश्चिम यूरोप, पश्चिम अफ्रीका, अटलांटिक महासागर में रहेगी। इसी प्रकार 29 मार्च को आशंकि सूर्यग्रहण रहेगा। इसकी शुरुआत दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर होगी। यह ग्रहण अमेरिका, ग्रीनलैंड, आइस लैंड, यूरोप व उत्तर पश्चिम रसिया में दिखाई देगा। तीसरी खगोली घटना 7 सितंबर को पूर्ण चंद्रग्रहण के रूप में होगी। यह ग्रहण पूरे भारत सहित उज्जैन में भी दिखाई देगा। रात 9 बजकर 56 मिनट पर चंद्र ग्रहण की शुरुआत होगी। रात 11 बजकर 41 मिनट पर ग्रहण का मध्य तथा रात 1 बजकर 26 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण काफी लंबा है, इसकी अवधि 3 घंटा 30 मिनट की रहेगी। साल 2025 का आखिरी ग्रहण 21 सितंबर को आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में रहेगा।  

वैष्णो देवी मंदिर ने वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपये कमाए, प्रसाद और धार्मिक समारोह जीएसटी से मुक्त

श्रीनगर दुनिया में भारत मंदिरों का देश है, यहां मंदिरों की संख्या लाखों में है. लेकिन, क्या आप जानते हैं देश का सबसे अमीर मंदिर कौन-सा है? दरअसल, मंदिरों की कमाई और उस पर टैक्स को लेकर इन दिनों एक सियासी बहस छिड़ी हुई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार मंदिरों को जीएसटी बकाया का नोटिस भेज रही है. उधर, बीजेपी ने इस मामले में कांग्रेस पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है. आइये आपको बताते हैं देश के सबसे अमीर मंदिर की कमाई और टैक्स के बारे में… कहां है स्थित है सबसे दौलतमंद मंदिर मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में एक विश्लेषण के बाद पाया है कि भारत का सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTS) है, जो वित्त वर्ष 2025 में अपनी 4,774 करोड़ रुपये की वार्षिक आय पर 1.5 प्रतिशत से कम वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान करेगा. नवंबर 2024 में, देश के सबसे धनी मंदिरों में से एक तिरुवनंतपुरम के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को बकाया टैक्स भुगतान के लिए नोटिस भेजा गया था. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि 7 साल की अवधि के लिए मांग केवल 1.57 करोड़ रुपये की थी, जबकि मंदिर ने अकेले 2014 में 700 करोड़ रुपये कमाए हैं. करोड़ों का चढ़ावा, ब्याज से भी कमाई जम्मू के कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर ने वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपए कमाए, जिसमें से 255 करोड़ रुपए चढ़ावे से आए, जो टैक्स-फ्री हैं और 133.3 करोड़ रुपए ब्याज से आए. टीटीडी के मामले में, 4,800 करोड़ रुपए की कमाई में से एक तिहाई से अधिक हुंडी संग्रह से आए. इस मामले में जीएसटी के तहत टैक्स लायबिलिटी वित्त वर्ष 21 से पांच वर्षों में लगभग 130 करोड़ रुपये रही है. हालांकि, इस मामले में मंदिरों के डिटेल विवरण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन भारत के दो सबसे बड़े मंदिर ट्रस्टों की आय पिछले सात वर्षों में दोगुनी हो गई है. साल दर साल बढ़ी मंदिरों की आय -तिरुपति ट्रस्ट का वित्त वर्ष 2017 में बजट 2,678 करोड़ रुपये था, जो इसकी वेबसाइट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 5,145 करोड़ रुपये हो गया. -वैष्णो देवी ट्रस्ट की आय वित्त वर्ष 2017 में 380 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 683 करोड़ रुपये हो गई है. जीएसटी भुगतान की रकम संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, तिरुपति मंदिर ने वित्त वर्ष 2017 में 14.7 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2022 में 15.58 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2023 में 32.15 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024 में 32.95 करोड़ रुपये का जीएसटी भुगतान किया. धार्मिक समारोह और प्रसाद होते हैं ‘टैक्स फ्री’ -प्रसाद और धार्मिक समारोह जीएसटी संग्रह से मुक्त हैं. टीटीडी और वैष्णो देवी के मामले में यह आय एक तिहाई से अधिक थी. -वित्त वर्ष 24 में वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट ने अपनी आय का 37 प्रतिशत दान से अर्जित किया. वहीं, वित्त वर्ष 25 में टीटीडी को दान से लगभग 4,800 करोड़ रुपये अर्जित करने की उम्मीद है. -यदि कमरे का शुल्क 1,000 रुपये से अधिक है और यदि सामुदायिक हॉल या खुले क्षेत्र का शुल्क 10,000 रुपये से अधिक है, तो परिसर के किराये पर जीएसटी लगाया जाता है. -व्यवसाय के लिए किराए पर दी गई दुकानों और अन्य स्थानों पर भी जीएसटी नहीं लगता है, यदि मासिक किराया 10,000 रुपये से कम है. -ट्रस्ट द्वारा संचालित स्मारिका दुकानों और अन्य वाणिज्यिक उपक्रमों पर जीएसटी लागू है. वैष्णो देवी ट्रस्ट एक हेलीकॉप्टर सेवा और स्मारिका दुकानें चलाता है. -ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 24 में बिक्री से 19 प्रतिशत या 129.6 करोड़ रुपये और किराये की आय से 84 करोड़ रुपये या 12 प्रतिशत कमाए.

ऐतिहासिक ग्वालियर किले का आधा हिस्सा निजी हाथों में, 5 साल सौंदर्यीकरण और देखरेख के लिए दिया गया

 ग्वालियर  मध्यप्रदेश में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट Memorandum of understanding (MOU) पर वर्क शुरू हो गया है। इसी कड़ी में ऐतिहासिक ग्वालियर किले का आधा हिस्सा निजी हाथों में चला गया। राज्य पुरातत्व अधीन हिस्सा निजी हाथों में सौंपा गया है। 5 साल के लिए सौंदर्यीकरण और देखरेख के लिए दिया गया है। दरअसल कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत अब राज्य पुरातत्व की देखरेख में काम होगा। जनभागीदारी का MP में यह पहला कदम है। पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ MOU किया है। आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) को शामिल किया है। समझौते के तहत फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी और एकेसीएसएफ संरक्षण करेगी। समझौते की शर्तें समझौते के अनुसार, किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए पांच साल का करार किया गया है। यदि कार्य संतोषजनक रहा, तो इसे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है। फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी और संरक्षण कार्य AKCSF संभालेगी। पहले से जारी संरक्षण कार्य ग्वालियर किले का संरक्षण पहले से चल रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में इस पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए थे। वर्तमान में भी 75 लाख रुपए से अधिक की लागत से नवीनीकरण कार्य जारी है। विरोध और विवाद कुछ इतिहासकार और स्थानीय लोग किले के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। वे इसे ऐतिहासिक धरोहर का व्यावसायीकरण मानते हैं। 2022-23 में भीमसिंह राणा की छत्री पर होटल बनाने की योजना को जनता के विरोध के कारण रद्द करना पड़ा था। ग्वालियर किले की आय ग्वालियर किला पर्यटन का बड़ा केंद्र है। हर महीने यहां से 50 लाख रुपए की आय होती है। विशेष अवसरों पर यह राशि और बढ़ जाती है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियों को ऐतिहासिक धरोहरों की पूरी समझ नहीं होती। ऐसे में क्या वे सही तरीके से संरक्षण कार्य कर पाएंगी, यह सवाल बना हुआ है।

दिल्ली में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी, जल्द मिलेंगे आयुष्मान कार्ड

नई दिल्ली राजधानी में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। 18 मार्च को केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होगा।इसके साथ ही दिल्ली में यह योजना लागू हो जाएगी और लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड जारी करने का काम शुरू हो जाएगा। इसके दायरे में आएंगे साढ़े छह लाख परिवार बताया जा रहा है कि वर्ष 2011 में हुई सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार ही अभी गरीब लोगों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। ऐसे में दिल्ली में अभी करीब साढ़े छह लाख परिवार इसके दायरे में आएंगे। इन सभी को मिलेगा लाभ इसके अलावा 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी वर्करों को इस योजना का लाभ मिलेगा। पीएमजेएवाई के तहत पांच लाख रुपये तक निशुल्क इलाज का प्राविधान है। सरकारी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा इसके अलावा पांच साल रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी। इस तरह लाभार्थियों को दस लाख रुपये तक का नि:शुल्क इलाज मिल सकेगा। इससे गरीब व 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को बड़ी राहत मिल सकेगी। उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। निजी अस्पतालों में वे आसानी से इलाज करा सकेंगे। किन्नरों को भी मिलना चाहिए महिला सम्मान योजना का लाभ : ओपी शर्मा पूर्वी दिल्ली में विश्वास नगर से भाजपा विधायक ओपी शर्मा ने कहा कि महिला सम्मान योजना का लाभ दिल्ली के किन्नरों को भी मिलना चाहिए। यह समाज का उपक्षित वर्ग है। यह योजना महिलाओं से ज्यादा किन्नरों के लिए जरूरी होनी चाहिए। विधायक ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता व भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को पत्र लिखा है। विधायक ने कहा कि किन्नर लोगों के सामने हाथ फैलाकर मांगते हैं, जिससे वह अपना गुजर बसर करते हैं। उनके उत्थान के लिए कोई सरकारी योजनाएं नहीं है। दिल्ली में 27 वर्ष बाद भाजपा की सरकार आई है। सरकार महिलाओं को सम्मान राशि दे रही है, उस योजना पर किन्नरों का भी हक बनता है।

देश में होली, दीपावली, जन्माष्टमी और नवरात्रि तब तक ही मनाई जा सकती हैं, जब तक सनातनियों की संख्या ज्यादा है: देवकीनंदन ठाकुर

मथुरा कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर गुरुवार को मथुरा में होली महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने होली गीत गाए और भक्तों के साथ होली खेली। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि देश में होली, दीपावली, जन्माष्टमी और नवरात्रि तब तक ही मनाई जा सकती हैं, जब तक इस देश में सनातनियों की संख्या सबसे ज्यादा है। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने पाकिस्तान में बच्ची के साथ हुई घटना का जिक्र किया। कहा, “ऐसा संदेश सुनने को मिला है। 14 वर्ष की बच्ची के साथ दो महीने तक पाकिस्तान में अत्याचार किया गया। अगर ऐसे ही अत्याचार बढ़ते रहे और हम लोगों ने आवाज उठाई तो मुझे नहीं लगता कि आने वाले समय में हम लोग होली मना पाएंगे।” उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी से अपील करूंगा कि होली को बचाने के लिए एकजुट हो जाएं और इसलिए मैं सनातन बोर्ड बनाने की भी मांग करता हूं। हमारी यही कोशिश होगी कि अगली होली श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में धूमधाम के साथ मनाई जाए।” उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वह ‘होली मुबारक’ नहीं बल्कि होली की शुभकामनाएं दें, क्योंकि मुबारक तो कुछ और होता होगा। हमारे यहां तो शुभकामनाएं दी जाती हैं। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने होली के पर्व पर लोगों से अपील भी की। उन्होंने कहा कि होली का त्योहार नशे और गुंडागर्दी मनाने का नहीं है, इसलिए सभी लोगों को कसम खानी चाहिए कि किसी भी पर्व पर नशा नहीं करना चाहिए और जुआ भी नहीं खेलना चाहिए। बता दें कि वृंदावन स्थित श्री प्रियाकान्त जू मंदिर में गुरुवार को देवकीनंदन महाराज ने हाइड्रोलिक पिचकारी का उपयोग करके भक्तों पर रंगों की वर्षा की। हाइड्रोलिक होली इस मंदिर में होली उत्सव की एक विशेषता है। विगत आठ दिनों से श्री प्रियाकांत जू मंदिर में होली खेली जा रही है। मंदिर में होली उत्सव की शुरुआत विश्व शांति प्रार्थना और श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ के साथ हुई। कार्यक्रम के पहले दिन प्रमुख आध्यात्मिक नेताओं ने भाग लिया, जिसमें हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास महाराज और सत्यमित्रानंद महाराज शामिल थे, जिन्होंने व्यासपीठ पूजन किया और भक्तों को संबोधित किया था।

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