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प्रदेश में धर्म परिवर्तन के लिए 1 लाख का लालच…पुलिस ने पातालकोट एक्सप्रेस से 18 यात्रियों को पकड़ा, धर्मांतरण के लिए जा रहे थे जालंधर

ग्वालियर  ग्वालियर में देर रात पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन में पुलिस ने 18 यात्रियों को पकड़ा है। ये सभी लोग गरीब मजदूर वर्ग के हैं। इन्हें कुछ लोगों ने लालच दिया था कि यदि वे ईसाई धर्म अपना लेंगे, तो उन्हें एक-एक लाख रुपए मिलेंगे। साथ ही, उनके बच्चों को क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ाया जाएगा और उन्हें विदेश में नौकरी करने का मौका मिलेगा। इसी लालच में छिंदवाड़ा से बड़ी संख्या में लोग इस गिरोह के साथ पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन से पंजाब की ओर रवाना हुए थे। हालांकि, पुलिस को सूचना मिलते ही घेराबंदी कर दी गई। सबसे पहले विदिशा के गंजबासौदा में ट्रेन को रोककर 11 यात्रियों को उतार लिया गया। इसके बाद बीना स्टेशन पर 4 यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया। यहां यह पता चला कि कोच एस-1 में तीन यात्री और हैं। इसके बाद, ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पातालकोट एक्सप्रेस को 30 मिनट तक रोककर सघन जांच की गई, जिसके बाद तीन यात्रियों को पकड़ा गया। ग्वालियर जीआरपी ने इन तीनों को गंजबासौदा पुलिस के हवाले कर दिया। ग्वालियर जीआरपी पुलिस के मुताबिक बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सूचना दी थी कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा से बड़ी संख्या में गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को धर्मांतरण के लिए पंजाब के जालंधर चर्च ले जाया जा रहा है। वहां इन लोगों को पैसों का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाएगा।सूचना देने वालों ने बताया कि छिंदवाड़ा के सेजनाथ सूर्यवंशी और विजय कुमार इन लोगों को लेकर पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हैं। पकड़े गए यात्रियों ने पुलिस को बताया कि सेजनाथ और विजय कुमार कुछ महीने पहले उनसे मिले थे। उन्होंने बताया था कि ईसाई धर्म अपनाने पर उन्हें कई फायदे होंगे, एक लाख रुपए मिलेंगे, उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाया जाएगा और वे विदेश जाने का अवसर पा सकेंगे।यही लोग उन्हें जालंधर, पंजाब के चर्च में ले जा रहे थे। आरोपियों ने यह भी बताया कि इससे पहले उन्हें फिरोजपुर के चर्च भी ले जाया जा चुका है। इस मामले में ग्वालियर जीआरपी ने बताया कि पकड़े गए तीनों यात्रियों को गंजबासौदा जीआरपी को सौंप दिया गया है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है।. बजरंग दल ने दी थी जानकारी ग्वालियर जीआरपी से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को भोपाल पुलिस को बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सूचना दी थी कि छिंदवाड़ा से बड़ी संख्या में गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को धर्मांतरण के लिए पंजाब के जालंधर चर्च ले जाया जा रहा है। वहां इन लोगों को पैसों का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाएगा। सूचना देने वालों ने बताया कि छिंदवाड़ा के सेजनाथ सूर्यवंशी और विजय कुमार इन लोगों को लेकर पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन के एस-1, एस-2, एस-3, एस-4, एस-5 कोच में सवार हैं। इस पर भोपाल पुलिस सक्रिय हुई, लेकिन स्टेशन पहुंचने तक ट्रेन रवाना हो चुकी थी। इसके बाद आगे विदिशा के गंजबासौदा में पुलिस और जीआरपी को सूचना दी गई। गंजबासौदा स्टेशन पर ट्रेन को रोककर पुलिस ने 11 यात्रियों को पहचान कर हिरासत में लिया, जिनमें सेजनाथ और विजय भी शामिल थे। जब ट्रेन यहां से निकली तो पता चला कि कुछ और लोग अभी भी ट्रेन में सवार हैं। इसके बाद बीना स्टेशन पर पुलिस ने एस-4 कोच से चार और यात्रियों को पकड़ा। बीना स्टेशन पर भी पकड़े गए यात्री बीना में पकड़े गए यात्रियों से पूछताछ के बाद पता चला कि ट्रेन में उनके तीन और साथी मौजूद हैं, जो एस-1 और एस-2 कोच में बैठे हैं। इसके बाद ग्वालियर पुलिस और जीआरपी को सूचना दी गई। रात 11:30 बजे जब पातालकोट एक्सप्रेस ग्वालियर पहुंची तो पुलिस ने घेराबंदी कर दी। पुलिस को देखकर धर्मांतरण के लिए जा रहे यात्री अन्य कोचों में छिपने की कोशिश करने लगे। करीब 30 मिनट तक पुलिस और जीआरपी ने ट्रेन की तलाशी ली और आखिरकार एस-5 कोच से तीन यात्रियों को पकड़ लिया। इनमें शामिल हैं,     रितेश प्रकाश (37 वर्ष) – पिता का नाम जान प्रकाश, निवासी मिशन चर्च कंपाउंड     मना विश्वकर्मा (45 वर्ष) – पिता का नाम फगनलाल, निवासी नोनिया करवल परतला     राकेश (41 वर्ष) – पिता का नाम विजय नागवंशी, निवासी छिंदवाड़ा लालच देकर धर्म परिवर्तन की कोशिश पकड़े गए यात्रियों ने पुलिस को बताया कि सेजनाथ और विजय कुमार कुछ महीने पहले उनसे मिले थे। उन्होंने बताया था कि ईसाई धर्म अपनाने पर उन्हें कई फायदे होंगे, एक लाख रुपए मिलेंगे, उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाया जाएगा और वे विदेश जाने का अवसर पा सकेंगे। यही लोग उन्हें जालंधर, पंजाब के चर्च में ले जा रहे थे। आरोपियों ने यह भी बताया कि इससे पहले उन्हें फिरोजपुर के चर्च भी ले जाया जा चुका है। इस मामले में ग्वालियर जीआरपी ने बताया कि पकड़े गए तीनों यात्रियों को गंजबासौदा जीआरपी को सौंप दिया गया है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है।

MP में सड़कों पर नहीं दौड़ेंगे 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहन, ऐसे वाहनों के स्क्रैप होने से पर्यावरण का संरक्षण हो सकेगा

भोपाल बजट में 15 वर्ष आयु पूरी कर चुके सभी तरह के वाहनों को स्क्रैप कराना अनिवार्य किया गया है। पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसिलिटी(आरवीएसएफ)के तहत वाहनों का स्क्रैप कराया जा सकता है। यदि कोई शासकीय व निजी वाहन स्क्रैप कराता है तो उसे नया वाहन खरीदने पर टैक्स में छूट दी जाएगी। परिवहन विशेषज्ञ श्यामसुंदर शर्मा का कहना है कि इससे भोपाल सहित प्रदेश भर में बढ़ रहे वहनों की संख्या कमी आएगी। ट्रैफिक व्यवस्था ठीक होगी। साथ ही पेट्रोल, डीजल के ऐसे वाहन जिनकी उम्र 15 वर्ष हो चुकी है, वो स्क्रैप होने से पर्यावरण का संरक्षण हो सकेगा। कई ऐसे वाहन हैं, जो धुंआ छोड़कर वायु प्रदूषण फैलाते हैं। इससे आसपास का वातावरण अशुद्ध होता है, लेकिन इसमें वाहनों की स्थिति भी देखी जानी चाहिए। यदि वाहन टीक है तो उसे स्कैप के दायरे से बाहर किया जाए। कई ऐसे लोग होते हैं, जो आत्मीय रूप से वाहनों से जुड़ जाते हैं और उनके वाहनों की पीयूसी व फिटनेस ठीक रहती है। बजट में सबसे अच्छी बात यह है पुराने वाहनों को स्क्रैप कराकर नया वाहन खरीदने पर मोटरयान कर यानि टैक्स में छूट मिलेगी। परिवहन वाहनों में 15 प्रतिशत और गैर परिवहन वाहनों में 25 प्रतिशत तक की टैक्स में छूट देने का प्रविधान किया गया है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ – 2028 के सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में बैठक लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश

सिंहस्थ – 2028 के लिए अभी से करें माइक्रो प्लानिंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य जून 2027 तक करें पूर्ण क्राउड मैनेजमेंट पर दें विशेष ध्यान महाकाल लोक में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के हिसाब से करें सिंहस्थ की तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ – 2028 के सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में बैठक लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ – 2028 मध्यप्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। लाखों-करोड़ों श्रद्धालु सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आएंगे। किसी भी श्रद्धालु को स्नान व देव दर्शन में कोई कठिनाई हो, इसके लिए व्यापक प्रबंध किए जाएं। पुराने सिंहस्थ आयोजन से सीख लें और आगामी सिंहस्थ के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए अभी से माइक्रो प्लानिंग कर व्यवस्थाओं को अंजाम देना प्रारंभ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में पूर्व में सम्पन्न हुए सिंहस्थ में प्राप्त अनुभवों को केन्द्र में रखते हुए सिंहस्थ – 2028 के योजनाबद्ध आयोजन के संबंध में बैठक की अध्यक्षता कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबसे बेहतर यह होगा कि सिंहस्थ की व्यवस्थाओं और प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य जून 2027 के पहले ही पूरे कर लिए जाएं। इससे रह गई कमोबेशी को दुरुस्त करने या व्यवस्थाओं को और भी अधिक बेहतर करने का समय भी मिल सकेगा। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव नगरीय‍विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सिंहस्थ की व्यवस्थाओं से जुड़े अन्य विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सहित सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े व अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ – 2028 की व्यवस्थाओं एवं प्रबंधन के लिए मंजूर किए गए सभी कार्य जून 2027 तक पूरे कर लिए जाएं। चल रहे कार्यों की मासिक प्रोग्रेस रिपोर्ट की समीक्षा की जाए। प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। मंजूर किए गए सभी काम प्रारंभ हो जाएं और तय समय-सीमा में ही पूरे किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकाल लोक बनने के बाद प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की दिनों-दिन बढ़ती संख्या के हिसाब से ही सिंहस्थ की तैयारी की जाए, क्योंकि जो श्रद्धालु सिंहस्थ में आएंगे, वे बाबा महाकाल सहित अन्य देव स्थलों पर भी अवश्य ही जाएंगे। भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रयास यह हो कि श्रद्धालुओं को ई-बस या ई-ऑटो से महाकाल मंदिर के नजदीक ही छोड़ा जाए, ताकि उन्हें महाकाल दर्शन के लिए अधिक पैदल न चलना पड़े और प्रबन्धन में भी आसानी हो। सिंहस्थ से पहले अंदरूनी गलियों का भी चौड़ीकरण करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन शहर में आएंगे। बड़े मार्गों के अलावा उज्जैन शहर की अंदरूनी गलियों व रास्तों का भी और अधिक चौड़ीकरण करें ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन का वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध रहे और वे आसानी से आ-जा सकें। उन्होंने कहा कि उज्जैन शहर में क्षिप्रा नदी व शहर के अंदर सिंहस्थ के लिए जितने भी सेतु निर्माण कार्य जरूरी हैं, वे अभी से प्रारंभ कर लिए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन शहर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में भी श्रद्धालुओं के देवदर्शन के लिए समुचित व्यवस्थाएं की जाए। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो रूद्र सागर में भी घाट बनाने पर विचार कर प्रारंभिक सर्वे भी कर लें। आपदा/अग्नि प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटी-छोटी व्यवस्थागत कमियों की वजह से आयोजन के दौरान ही प्राकृतिक आपदा व अग्नि दुर्घटना से अप्रिय स्थिति निर्मित न हों। सिंहस्थ वर्ष 2028 में है, इसलिए किसी भी प्रकार की आपदा और अग्नि दुर्घटना प्रबंधन पर विशेष ध्यान देकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये वॉलिंटियर्स को प्रापर ट्रेनिंग भी दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के लिए बेहतर से बेहतर प्लानिंग अमल में लाई जाए। विशेष ध्यान रहे कि कार्यों में विलंब न हो। मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन शहर पहुंचने वाले 7 प्रमुख मार्गों को फोरलेन और एक प्रमुख मार्ग सिक्स लेन रोड के रूप में मंजूरी दे दी गई है। इस पर तेजी से काम प्रारंभ किया जाए, ताकि समय रहते सभी मार्ग तैयार हो जाएं। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी वर्ष 2016 के सिंहस्थ के व्यक्तिगत अनुभवों पर सिंहस्थ-2028 के लिए और अधिक बेहतर और व्यापक इंतजाम की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी काम अभी से प्रारंभ कर दिए जाएं, क्योंकि शाही स्नान के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओं की एक ही वक्त में एक साथ एक ही स्थान पर मौजूदगी बनी रहने की संभावना रहती है। इसीलिये भीड़ प्रबंधन के‍लिए अत्याधुनिक प्रबंधन किए जाएं। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास शुक्ल ने बताया कि मंत्रि-मंडलीय समिति द्वारा सिंहस्थ – 2028 के लिए 7 प्रमुख विभागों द्वारा 7379.75 करोड़ रूपए की लागत से किए जाने वाले कुल 74 अधोसंरचना विकास कार्य मंजूर किए गए हैं। इनमें से 54 विकास कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है, 15 निर्माण कार्य निविदा प्रक्रिया में है और 5 कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। सिंहस्थ – 2028 के पड़ाव क्षेत्र का टाउन प्लानिंग स्कीम (टी.पी.एस.) के माध्यम से विकास किया जाएगा। सिंहस्थ मेला क्षेत्र नगर विकास योजना 8,9,10,11 टी.पी.एस. (सम्मिलित रकबा 2378 हेक्टेयर) को राज्य शासन द्वारा 7 मार्च 2025 को मंजूरी दे दी गई है। सिंहस्थ की व्यवस्थाओं से जुड़े सभी विभागों द्वारा अपनी-अपनी कार्ययोजना की जानकारी दी गई। बैठक में सिंहस्थ – 2028 के दौरान यातायात प्रबंधन, पार्किंग व सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन एवं प्रशिक्षण, आवास, विद्युत, जल प्रदाय एवं सीवरेज, स्वास्थ्य एवं साफ-सफाई व्यवस्था, उपचार, स्नान, प्रचार-प्रसार, देव दर्शन की व्यवस्था, खाद्य आपूर्ति व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, आई.टी. इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, सी.एस.आर. सेल, टूरिज्म सर्किट के निर्माण आदि विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने हाल ही में सम्पन्न हुए प्रयागराज महाकुंभ के फील्ड विजिट … Read more

CM यादव ने राज्य नीति आयोग के विकसित मध्यप्रदेश विज़न डॉक्यूमेंट के लिए नागरिक सर्वे का शुभारंभ किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में राज्य नीति आयोग द्वारा बनाए जा रहे विकसित मध्यप्रदेश विज़न डॉक्यूमेंट के लिए नागरिक सर्वे का शुभारंभ किया। विकसित मध्यप्रदेश@ 2047 के निर्माण में आम जन की भागीदारी और उनका अभिमत जानने के उद्देश्य से नागरिक सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है। इस सर्वे के लिए वेबसाइट के साथ ही एक क्यूआर कोड भी उपलब्ध करवाया गया है, जहां आमव्यक्ति भी नागरिक सर्वेक्षण में हिस्सा लेकर विभिन्न सुझाव दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित मध्यप्रदेश @2047 के निर्माण में प्रदेश के सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। हमारा यह प्रयास है कि यह विज़न डॉक्यूमेंट केवल सरकार का दस्तावेज न होकर जनता का दस्तावेज बने। इसी उद्देश्य से इसके निर्माण की प्रक्रिया में विषय-विशेषज्ञों, हितधारकों और विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ व्यापक रूप से प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं और सुझावों को सम्मिलित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश और प्रदेश का भविष्य हमारे बच्चे हैं और उनकी आकांक्षाओं को इस विज़न में स्थान देने के लिए प्रदेश के विद्यालयों में विकसित मध्यप्रदेश @2047 विषय पर निबंध प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इसके साथ ही जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जिला स्तर से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों से राय मांगी गई। इस प्रक्रिया में 2.5 लाख से अधिक नागरिकों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। इसी कड़ी में आज नागरिक सर्वेक्षण का शुभारंभ किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के अधिक से अधिक नागरिकों का अभिमत प्राप्त किया जा सके। यह सर्वेक्षण हमें बताएगा कि मध्यप्रदेश की जनता 2047 का मध्यप्रदेश कैसा देखना चाहती है और किन महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सर्वेक्षण में भी प्रदेश के नागरिक उत्साह से भाग लेंगे। नागरिकों की भागीदारी से एक समावेशी, विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार किया जा सकेगा। नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका विकसित मध्यप्रदेश @2047 विज़न डॉक्यूमेंट को तैयार करने में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस सर्वे में आयोग की वेबसाइट https://mprna.mp.gov.in/vision के माध्यम से भाग लिया जा सकता है। इसके लिए एक क्यूआर कोड भी उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर वर्ष@2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और एक लोकतांत्रिक वैश्विक महाशक्ति बनने की परिकल्पना की गई है। अपने समृद्ध इतिहास, विविध संस्कृतियों, विशाल प्राकृतिक संसाधनों और केंद्रीय भौगोलिक स्थिति के साथ मध्यप्रदेश भारत के भविष्य को आकार देने और@2047 में विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह ज़रूरी है कि मध्यप्रदेश के नागरिक, सामूहिक रूप से एक विकसित मध्यप्रदेश @2047 के लिए एक विज़न को आकार दें- एक बड़ी और विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था विकसित हो जो सभी निवासियों को उच्चतम गुणवत्ता वाला जीवन प्रदान करे। इस सर्वे के जरिए नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि विकसित मध्यप्रदेश @2047 के लिए विज़न को आकार देने के लिए अपनी राय और विचारों को व्यक्त करें। इस विज़न के लिए नागरिकों के योगदान से मध्यप्रदेश में आने वाली पीढ़ियां लाभान्वित होंगी। नागरिक सर्वेक्षण के शुभारंभ अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा (वित्त एवं वाणिज्यिक कर), मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास और योजना आर्थिक सांख्यिकी संजय शुक्ला एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

उज्जैन में क्षिप्रा तट से होगी प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत 30 मार्च से 30 जून तक चलेगा अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

  जल की बूंद-बूंद बचायें, जल से ही सुरक्षित होगा हमारा कल: मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 मार्च को गुड़ी पड़वा से होगा 90 दिवसीय जल गंगा जल संवर्धन अभियान का शुभारंभ उज्जैन में क्षिप्रा तट से होगी प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत 30 मार्च से 30 जून तक चलेगा अभियान पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभाग करेंगे सहभागिता अभियान में होगा 50 हजार नए खेत-तालाबों का निर्माण वर्षा जल भंडारण के लिए सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार पर दें विशेष ध्यान जल स्त्रोतों का रख-रखाव अब पंचायतें एवं स्थानीय जन करेंगे अभियान में प्रदेशभर में तैयार किए जाएंगे 1 लाख जलदूत अभियान के क्रियान्वयन संबंधी बैठक में मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण में तेजी लाने के दिये निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पानी से ही जिंदगानी है। हम सभी को जल की बूंद-बूंद बचाने की जरूरत है। जल से ही हम सबका आने वाला कल सुरक्षित है। जल गंगा जल संवर्धन अभियान में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक गतिविधियां चलाई जाएं। जन सामान्य में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार विभिन्न विभागों, सामाजिक संगठनों और आम जनता की भागीदारी से जल संरक्षण गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएगी। अभियान में वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई ‘जल गंगा जल संवर्धन अभियान’ की बैठक ये निर्देश दिए। जल गंगा संवर्धन अभियान गुड़ी पड़वा 30 मार्च से प्रारंभ होकर 30 जून 2025 तक तीन माह लगातार चलेगा। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव उद्यानिकी अनुपम राजन, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, अभियान से जुड़े अन्य विभागों के प्रमुख सचिव सहित सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अभियान की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि जल गंगा जल संवर्धन अभियान से प्रदेश में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। जल संरक्षण के लिए उठाए जाएं ठोस कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत जल संचय की विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएं। उन्होंने कहा कि पौधरोपण एवं जल स्रोतों का पुनर्जीवन, गांव-गांव में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यों के अलावा सामुदायिक सहभागिता के जरिए जल संरक्षण के प्रयास किए जाएं। अभियान को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए सकारात्मक अभियान की शुरुआत की जाए। ग्रीष्मकाल में शासकीय स्कूलों में जल संरक्षण की गतिविधियां आयोजित की जाएं। बच्चों के लिए पीने के पानी की टंकी की साफ-सफाई कराई जाए, जिससे विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए है। राज्य स्तरीय जल गंगा जल संवर्धन अभियान का शुभारंभ आगामी 30 मार्च को वर्ष प्रतिपदा के दिन से उज्जैन की क्षिप्रा नदी के तट से किया जाएगा। लगभग 90 दिन चलने वाले ‘जल गंगा जल संवर्धन अभियान’ का समापन 30 जून 2025 को होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेश व्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग एवं प्राधिकरण एक साथ मिलकर कार्य करेंगे। अभियान की थीम ‘जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण’ रखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण अभियान अब बना जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण आबादी को पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध कराने के लिए पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव में लोगों को पेयजल एवं किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। साथ ही गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को भी कोई परेशानी न हो और उन्हें पानी मिले, इसके लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं को पुनर्विकसित किया जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार भी ‘खेत का पानी खेत में – गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को प्रदेश की ऐसी सभी नदियों का रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए, जहां जल धाराओं में मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुआ समेत अन्य जलीय जीवों को पुनर्स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि नर्मदा में डॉल्फिन मछली को छोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए। इन सभी प्रयासों से नदियों और जलीय जीवों दोनों का संरक्षण होगा। 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जल गंगा जल संवर्धन अभियान में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे। मंदिरों के निकट जल स्त्रोतों की सफाई में संतों, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय एवं प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। विक्रम संवत् के पहले दिन वरुण पूजन और जलाभिषेक के साथ अभियान की विधिवत शुरुआत की जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अमृत सरोवर … Read more

रांग साइड से आ रहे टैंकर ने दो वाहनों को मारी टक्कर, हादसा इतना जोरदार था की कार चकनाचूर हो गई, 7 लोगों की मौत

धार, बदनावर निर्माणाधीन उज्जैन-बड़नगर फोरलेन पर ग्राम बामनसुता के पास एलपीजी टैंकर ने कार और पिकअप वाहन को टक्कर मार दी। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, तथा तीन लोग गंभीर घायल हो गए। हादसे में वाहनों से घायलों और मृतकों को बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद कार चकनाचूर हो गई तथा 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक घायल ने रतलाम ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।   घायलों को रतलाम रेफर किया गया दुर्घटना के शिकार हुए लोग मंदसौर और रतलाम जिले के बताए जा रहे हैं। तीन गंभीर घायलों को रतलाम रेफर किया गया। इसमें एक की रास्ते में मौत हो गई, जिसे वापस यहां सिविल हॉस्पिटल लाया गया। मृतकों की शुरुआत में शिनाख्त नहीं हो पाई थी, इसलिए उनके फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए। रांग साइड से जा रहा था टैंकर सूचना मिलने पर एसडीएम दीपक चौहान, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज सोमानी, नप अध्यक्ष प्रतिनिधि शेखर यादव समेत बड़ी संख्या लोग पहुंच गए थे। जानकारी के मुताबिक एलपीजी टैंकर (जीजे 12 एवाय 8769) रांग साइड से जा रहा था, जिससे एक पिकअप और कार (एमपी 14 सीडी 2552 ) की भिंडत हो गई। आज शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। इनकी चली गई जान कार में बैठे गिरधारी माखीजा निवासी मंदसौर, अनिल व्यास निवासी रतलाम, विरभ धनगर निवासी सीमामऊ मंदसौर, चेतन बाघरवाल निवासी मंदसौर की मौत हो गई। वहीं पिकअप वाहन में सवार बना उर्फ लालसिंह, अनूप पूनिया निवासी जोधपुर राजस्थान, जितेंद्र बडलिया निवासी जोधपुर की मौत हो गई। ये हो गए घायल जगदीश बैरागी निवासी जोधपुर लिखमाराम निवासी जोधपुर दीपक दुर्गाराम निवासी पुनिया जाट, जोधपुर  

राज्य सरकार ने प्रस्तुत किया 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए का बजट

मध्यप्रदेश विकास और जनकल्याण की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करना हमारा मुख्य लक्ष्य राज्य सरकार ने प्रस्तुत किया 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए का बजट वर्ष 2003-04 की तुलना में 21 गुना बड़ा है वर्ष 2025-26 का बजट बजट में कोई टैक्स नहीं लगाया गया है और न ही की गई है कोई कटौती वर्ष-2029 तक बजट के आकार एवं प्रदेश की जीएसडीपी को दो गुना करने का है लक्ष्य जेण्डर बजट, बाल बजट और कृषि संबंद्ध क्षेत्र में, विगत 6 वर्षों में हुई दोगुना से अधिक की वृद्धि सिंहस्थ-2028 के लिए 2 हजार 5 करोड़, गीता भवन और वृंदावन ग्राम योजना के लिये 100-100 करोड़ रूपये और श्रीकृष्ण पाथेय के लिए 10 करोड़ रूपये का प्रावधान प्रदेश में बेहतर आवागमन के लिए मजरा-टोला सड़क योजना के अंतर्गत 100 करोड़ और सुगम परिवहन सेवा के लिए 80 करोड़ रुपए का प्रावधान मुख्यमंत्री ने सर्व-व्यापक, सर्व-स्पर्शी, सर्व-समावेशी बजट के लिए वित्त एवं उप मुख्य मंत्री देवड़ा का किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गांव, गरीब सहित सभी वर्गों के लिए व्यवस्थित योजना से मध्यप्रदेश विकास और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत@2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। राज्य का बजट 2025-26 इसी संकल्प की प्राप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। बुधवार (12 मार्च) को राज्य सरकार ने पहली बार 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया। यह बजट प्रावधान विगत वर्ष 2024-25 की अपेक्षाकृत 15 प्रतिशत अधिक है। इतने बड़े बजट के बाद भी कोई टैक्स नहीं लगाया गया है और न ही कोई कटौती की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विधानसभा में प्रस्तुत प्रदेश के वर्ष 2025-26 के बजट के संबंध में विधान सभा परिसर में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई सरकार बनते ही अगले 5 साल में बजट को दोगुना करने का लक्ष्य तय कर लिया गया था। वर्ष 2025-26 का बजट इसी दिशा में अनुकरणीय प्रयास है। इस बजट में राज्य के गरीब, युवा, अन्नदाता किसान और नारी (ज्ञान) सहित सभी वर्गों की बेहतरी के संकल्प को पूरा किया गया है। सभी क्षेत्रों में विकास के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष- 1956 में मध्यप्रदेश का गठन हुआ, लेकिन वर्ष 2003-04 तक मात्र 20 हजार करोड़ रूपये का बजट था, अब हम इसे 21 गुना बढ़ाते हुए 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए तक पहुंचे हैं। यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश को अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश, भारत के सभी राज्यों में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्त एवं उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का सर्व-व्यापक, सर्व-स्पर्शी, सर्व-समावेशी बजट प्रस्तुत कने के लिए अभिनंदन करते हुए कहा कि वर्ष 2025 का यह बजट मध्यप्रदेश की आशाओं, आकांक्षाओं का बजट है। राज्य सरकार अपने सभी संकल्पों को पूरा करने की ओर निरंतर आगे बढ़ रही है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वर्ष@2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 250 लाख करोड़) बनाना है। यह केवल संख्यात्मक दस्तावेज नहीं, अपितु प्रदेश की जनता की जिंदगी बदलने वाला बजट है। प्रधानमंत्री मोदी के संकल्पों के आधार पर राज्य सरकार का यह दूरदर्शी बजट सशक्त-समृद्ध-शक्तिशाली और खुशहाल मध्यप्रदेश बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह बजट जनकल्याण और सुशासन के साथ प्रदेश के विकास को गति प्रदान करेगा। गरीबों को सशक्त बनाएगा और प्रदेश के युवाओं के लिए बेहतर भविष्य का सृजन करेगा। बजट में महिलाओं, गरीब, किसान, अनुसूचित जाति और वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए विशेष कदम उठाए गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोककल्याणकारी बजट के लिए प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने बजट में प्रमुख बिंदुओं के संबंध में जानकारी दी:-     यह बजट अनुमानित राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 4 प्रतिशत अनुमानित रखते हुए वर्ष 2029-30 तक बजट के आकार एव प्रदेश की जीएसडीपी को दो गुना करने के लक्ष्य पर केन्द्रित है।     कुल विनियोग की राशि 4,21,032 करोड़ रुपए है, जो विगत वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है।     अनुमानित राजस्व प्राप्तियां 2,90,879 करोड़ रुपए है, जिसमें राज्य के स्वयं के कर की राशि 1,09,157 करोड़ रुपए, केन्द्रीय करों में प्रदेश का हिस्सा 1,11,662 करोड़ , करेत्तर राजस्व 21,399 करोड़ रुपए और केन्द्र से प्राप्त सहायता अनुदान 48,661 करोड़ रुपए शामिल हैं ।     वर्ष 2025-26 में वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान की तुलना में राज्य के कर राजस्व में 7 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है।     वर्ष 2025-26 में वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान की तुलना में पूंजीगत परिव्यय में लगभग 31 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। राज्य की उपलब्धियां     नीति आयोग द्वारा जारी राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक प्रतिवेदन में राज्य को व्यय की गुणवत्ता में प्रथम स्थान दिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में राज्य की इस उपलब्धि का उल्लेख किया है।     वर्ष 2025-26 के बजट में विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले व्यय के प्रतिशत में सर्वाधिक 17 प्रतिशत अधोसंरचना क्षेत्र के लिए प्रावधान है। अधोसंरचना क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में विगत वर्ष 2024-25 की तुलना में 31 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। राज्य की क्षेत्रवार उपलब्धियां     राज्य शासन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये प्रतिबद्ध है, 6 वर्षों में जेण्डर बजट का आकार दोगुना हुआ है।     कृषि और संबद्ध क्षेत्र में, विगत 6 वर्षों में दोगुना से अधिक की वृद्धि हुई है।     विगत 6 वर्षों में बाल-बजट का प्रावधान दोगुना से अधिक हुआ। नारी सशक्तिकरण     मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 18,669 करोड़ रुपए का प्रावधान है ।     लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत 1,183 करोड़ रुपए का प्रावधान है।     मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता के अंतर्गत 720 करोड़ रुपए का प्रावधान है।     जल जीवन मिशन नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वॉटर मिशन में 17,136 करोड़ रुपए का प्रावधान है। अन्नदाता (किसान) के लिए … Read more

ज्योतिर्लिंग की पूजन परंपरा में होली उत्सव का विशेष महत्व, कल भस्मारती में हर्बल गुलाल से खेलेंगे होली

उज्जैन भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद प्रदोषकाल में होलिका का पूजन उपरांत दहन किया जाएगा। 14 मार्च को धुलेंडी पर तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। उत्सव को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। ज्योतिर्लिंग की पूजन परंपरा में होली उत्सव का विशेष महत्व है। देशभर से सैकड़ों भक्त राजा की रंगरंगीली होली देखने मंदिर पहुंचते हैं। इस बार यह उत्सव 13 मार्च को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज मंदिर परिसर में श्री ओंकरेश्वर मंदिर के सामने पुजारी, पुरोहित परिवार द्वारा होलिका का निर्माण किया जाएगा। शाम 7.30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका का पूजन करेंगे। पश्चात होलिका का दहन होगा। मंदिर समिति उपलब्ध कराएगी हर्बल गुलाल परंपरा अनुसार 14 मार्च को होली उत्सव मनाया जाएगा। तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित करेंगे। मंदिर समिति पुजारियों को प्राकृतिक उत्पादों से तैयार हर्बल गुलाल उपलब्ध कराएगी। बताया जाता है, मंदिर समिति होली उत्सव के लिए एक थाल भरकर गुलाल उपलब्ध कराती है। वैसे भी ज्योतिर्लिंग क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान को समिति मात्रा में पूजन सामग्री अर्पित करने का सुझाव दिया है। ज्योतिष का मत : 13 मार्च को होली मनाना शास्त्र सम्मत ज्योतिष व धर्मशास्त्र के जानकार 13 मार्च को होली मनाना शास्त्र सम्मत बता रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि के चंद्रमा की साक्षी में पूर्णिमा तिथि लगेगी, जो प्रदोष काल में पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी। धर्मशास्त्र में होलिका का पूजन प्रदोषकाल में बताया गया है। इसलिए शुभयोग व नक्षत्र में 13 मार्च को प्रदोषकाल में होलिका का पूजन करना श्रेष्ठ है। इस दिन पाताल वासनी भद्रा भी रहेगी, इसलिए होलिका का दहन अवश्य रात 11.30 बजे के बाद करना चाहिए। सामान्यत: होलिका का दहन अगले दिन सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है। ऐसे में 13 व 14 मार्च की तारीख होली तथा धुलेंडी मनाने के लिए शास्त्र सम्मत है। सिंहपुरी में पांच हजार कंडों से बनेगी हर्बल होली पुराने शहर सिंहपुरी में गाय के गोबर से बनाए गए पांच हजार कंडों से होली बनाई जाएगी। आयोजन समिति का दावा है कि यह विश्व की सबसे बड़ी हर्बल होली है। इसमें सिर्फ गाय के गोबर से बने कंडों का उपयोग होता है। लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाता है। होली के मध्य में डांडा के रूप में ध्वज लगाया जाता है। इस बार यह आयोजन 13 मार्च को होगा। शाम को प्रदोष काल में चार वेद के ब्राह्मण चतुर्वेद पारायण से होलिका का पूजन करेंगे। रात्रि जागरण के उपरांत अगले दिन सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में होलिका का दहन किया जाएगा।

राफेल और साब ग्रिपेन भी भारत को फाइटर जेट बेचने की रेस में, भारत 114 लड़ाकू विमानों को खरीदने की योजना बना रहा

वॉशिंगटन अमेरिका लगातार प्रेशर बना रहा है कि भारत उसके F-21 या F-15EX में से किसी ने किसी फाइटर जेट को जरूर खरीदे। भारतीय वायुसेना मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम के तहत 114 लड़ाकू विमानों को खरीदने की योजना बना रही है। लेकिन अमेरिका की तरफ से ये प्रेशर उस वक्त बनाया गया है, जब दोनों देशों के बीच कारोबार को लेकर कुछ विवाद शुरू हो गये हैं। अमेरिका लगातार भारतीय सामानों पर टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा है। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप पहले ही एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान का ऑफर भारत को दे चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने संकेत दिया है कि अगर भारत, अमेरिकी फाइटर जेट खरीदने का फैसला करता है तो उसे व्यापार लाभ मिल सकता है। लेकिन भारतीय वायुसेना के मन में इन दोनों फाइटर जेट को लेकर चिंताएं हैं। क्षेत्रीय खतरों से निपटने में ये फाइटर जेट कितने सक्षम हो पाएंगे, भारतीय वायुसेना के मन में गहरा शक है। लिहाजा वायुसेना कोई भी फैसला लेने से पहले उनकी तकनीकी क्षमताओं को गहराई से जानने की कोशिश कर रही है। F-15EX लड़ाकू विमान पर पर शक क्यों है? इसमें कोई शक नहीं है कि अमेरिकी F-21 और F-15EX बेहतरीन लड़ाकू विमान हैं। लेकिन भारतीय हालात में उनके ऑपरेशन को लेकर गंभीर सवाल हैं। F-21 और F-15EX, अमेरिक के पुराने लड़ाकू विमानों के एडवांस वैरिएंट हैं। लेकिन इन दोनों फाइटर जेट्स में चीन के J-20 और J-35A जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों से मुकाबला करने की क्षमता नहीं है। इन दोनों में ऐसे फीचर्स नहीं हैं कि ये चीनी लड़ाकू विमानों का मुकाबला कर सके। भारत के लिए परेशानी की बात इसलिए भी है क्योंकि पाकिस्तान पहले ही चीन से J-35 खरीदने की घोषणा कर चुका है। लिहाजा भारत ऐसे फाइटर जेट्स में भला निवेश क्यों करना चाहेगा, जो उसकी जरूरतों से मेल ही नहीं खाता हो। हालांकि अमेरिका भारत को एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट ऑफर कर चुका है, लेकिन अमेरिकी विमान कई शर्तों के साथ आते हैं। अमेरिका भारत में एफ-35 बनाने के लिए हरगिज तैयार नहीं है। जबकि भारत हर हाल में देश में उत्पादन चाहता है। भारत का MRFA टेंडर मीडियम वजन वाले लड़ाकू विमानों के खरीदने को लेकर है, लेकिन F-15EX एक भारी भरकम लड़ाकू विमान है। लिहाजा इंडियन एयरफोर्स के लिए इस पैमाने पर भी ये फिट नहीं बैठता है। हालांकि एफ-21 की तुलना में फिर भी ये एक बेहतर विकल्प है, लेकिन भारत पहले से ही रूसी Su-30MKI लड़ाकू विमान ऑपरेट कर रहा है, जो F-15EX जितना ही भारी है। ऐसे में F-15EX भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों से मेल नहीं करता है। भारत मीडियम रेंज वजन वाला लड़ाकू विमान इसलिए चाहता है कि भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में प्रदर्शन, क्षमता और रखरखाव को बैलेंस कर सके। लेकिन भारतीय वायुसेना किसी राजनीतिक दवाब में नहीं आना चाह रही है। भारतीय वायुसेना रक्षा खरीद में रणनीतित स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। लिहाजा अमेरिकी दबाव के बावजूद, भारत MRFA टेंडर को लेकर अपनी जरूरतों पर अडिग है। फाइटर जेट खरीदने का फैसला भारत की लंबे समय की जरूरतों और ऑपरेशनल आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। F-15EX की क्षमता क्या है? आपको बता दें कि F-15EX, F-15 एडवांस्ड ईगल सीरीज लड़ाकू विमानों का नेक्स्ट वैरिएंट है। इसे F-15E स्ट्राइक ईगल का एडवांस वैरिएंट माना जाता है। अमेरिकी वायुसेना ने इसे असाधारण प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया है। F-15EX एडवांस्ड मिसाइल और बम इजेक्शन रैक (AMBER) सिस्टम से लैस है। ये एक साथ 22 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को लेकर उड़ान भरने में सक्षम है। यह पिछले F-15 मॉडल की तुलना में काफी घातक है। इसके अलावा इसकी एक प्रमुख ताकत AMBER मिसाइल रैक सिस्टम के जरिए एक साथ कई ठिकानों पर हमला करने में मदद करता है। इसके अलावा इसे किसी टारगेट पर सटीक हमला करने के लिए छोटे आकार के बमों को भी अपने अंदर रखने की क्षमता देता है। आपको बता दें कि एडवांस मिसाइल और बम इजेक्शन रैक (AMBER) एक हाई कैपिसिटी वाली मिसाइल रैक है, जिसे लड़ाकू जेट की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। हर एक AMBER रैक में चार मिसाइलें रखी जा सकती हैं, जिससे F-15EX कई हथियारों को लेकर एक साथ उड़ान भर सकता है और फायर कर सकता है। इस जेट में प्रत्येक पंख के नीचे चार AMBER रैक और धड़ के नीचे एक रैक होने की उम्मीद है। इसके अलावा इस फाइटर जेट में एक साथ 20 लंबी दूरी की AIM-120D मिसाइलों को ले जाने की क्षमता भी है। वहीं विंगटिप्स पर लगी दो छोटी दूरी की AIM-9X मिसाइलों को ले जाने की क्षमता भी इसमें है। लिहाजा कुल मिसाइलों की संख्या 22 हो जाती है। यानि फाइटर जेट काफी ताकतवर है, इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन भारत की जरूरतों के मुताबिक ये फिट बैठ पाएगा या नहीं, फिलहाल इसका आकलन किया जा रहा है।

चैंपियंस ट्रॉफी में बिना एक भी मैच जीते पाकिस्तान को ICC से मिल गए इतने करोड़ रुपए

नई दिल्ली  मेजबान कोई भी बड़ा इवेंट करने के बाद खर्च और कमाई यानी आय और व्यय का लेखा-जोखा यानी हिसाब-किताब जरूर करता है। रिव्यू करता है कि कितना खर्च हुआ और कितनी कमाई हुई। पाकिस्तान के साथ भी कुछ ऐसा ही होगा। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब भारत जीत चुका है और अब समय है हिसाब-किताब का। सही आंकड़ा तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ही बता पाएगा, लेकिन बाहर से जो भी चीजें दिखाई दे रही हैं वह ज्यादा बेहतर नहीं हैं। कुछ चीजों का बैकअप प्लान नहीं होने से पाकिस्तान को इतना बड़ा नुकसान हुआ कि उसका अंदाजा उसने सपने में भी नहीं लगाया रहा होगा। जी हां, उसने तीन स्टेडियम को खेलने लायक बनाने के लिए हजारों करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए। एक-एक स्टेडियम पर एक-एक हजार करोड़ से अधिक पैसे खर्च हुए, लेकिन क्या उसने इसकी भरपाई की? शायद नहीं। पाकिस्तान में 3 वेन्यू पर कुल 10 मैच हुए, जिसमें से 2 मैच बारिश की वजह से रद्द हो गए। ये दो मैच दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के घर यानी रावलपिंडी स्टेडियम के थे, 3 मैच खेले जाने थे। रावलपिंडी स्टेडियम में पहला मैच 24 फरवरी को बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था। इस मैच में न्यूजीलैंड ने 5 विकेट से जीत दर्ज की। पिंडी में अगला मैच 25 फरवरी को शेड्यूल था। ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच यह मुकाबला बारिश की वजह से रद्द रहा। स्टेडियम में पानी सुखाने के लिए ड्रेनेज सिस्टम बेहद घटिया था। सुपर सॉपर की जगह बाथरूम में इस्तेमाल होने वाले वाइपर और स्पंज से पानी सुखाते देखा गया। लेकिन कामयाबी नहीं मिली और 27 फरवरी को पाकिस्तान और बांग्लादेश का मैच भी इसी तरह से रद्द हो गया। इस तरह दोनों टीमों को बिना कोई मैच जीते टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। अब आते हैं खास मुद्दे पर। दरअसल, रिपोर्ट्स की मानें तो रावलपिंडी स्टेडियम को बनाने के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने 1500 करोड़ रुपये एलॉट किए थे। इसमें फ्लड लाइट्स की जगह 350 एलईडी लाइट्स लगाने के लिए 393 मिलियन रुपए और मुख्य भवन, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स और टॉयलेट के लिए 400 मिलियन रुपए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दो एलईडी डिजिटल स्क्रीन को बदलने के लिए 330 मिलियन रुपए आवंटित किए गए थे, जबकि नई सीटिंग इंस्टॉलेशन पर 272 मिलियन रुपए खर्च किए जाने थे। मान लिया जाए कि अलॉट किए गए रुपये ही खर्च किए गए तो भी एक स्टेडियम में सिर्फ एक मैच का कुल खर्च 1500 करोड़ रुपये से अधिक रहा। यही नहीं, पाकिस्तान ने हर स्टेडियम की ओपनिंग सेरिमनी के लिए ब्लॉकबस्टर शो किए थे और दुनिया को दिखाने के लिए सिंगर से लेकर डांसर तक पर मोटी रकम खर्च की थी। हालांकि, इन पैसों के बारे में कहीं भी जानकारी नहीं दी गई। एक ओर उसकी आर्थिक स्थिति कंगालों वाली है तो दूसरी ओर इस तरह से पैसे बहाना समझ से परे है। स्टेडियम किसी भी मैच के लिए भरे नहीं थे तो कम से कम पब्लिक से मिलने वाला पैसा उसके खर्च को कतई पूरा नहीं कर सकता है। हां, ब्रॉडकास्टर्स से जरूर उसे फायदा मिला होगा, लेकिन क्या उसे इतने पैसे मिले होंगे कि इतने बड़े खर्च की भरपाई की जा सकती है। बात यहीं खत्म नहीं होती। आने वाले समय में इस स्टेडियम पर पाकिस्तान सुपर लीग के मैच तो शेड्यूल हैं, लेकिन इंटरनेशनल टीमों का दौरा होगा या नहीं इसका पता नहीं। इस बीच बलूच लिबरेशन आर्मी का जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक करना उसकी पहले से गिरी हुई साख और भी रसातल में ले जाने का काम किया है। बलूच विद्रोही संगठन का दावा है कि उसने 30 पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया है। इंटरनेशनल लेवल पर इस खबर के आने के बाद कोई भी टीम शायद ही पाकिस्तान का दौरा करने के लिए राजी होगी। संभव है कि पीएसएल में भी विदेशी खिलाड़ी खेलने से कतराएं।  चैंपियंस ट्रॉफी में बिना एक भी मैच जीते पाकिस्तान को  ICC से मिल गए इतने करोड़ रुपए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी पाकिस्तान के पास थी, लेकिन BCCI ने भारतीय क्रिकेट टीम को पाकिस्तान भेजने से मना कर दिया था। इसके बाद इस अहम टूर्नामेंट को हाइब्रिड मॉडल पर खेला गया। जहां टीम इंडिया के सभी मैच दुबई में हुए थे। अब भारतीय टीम ने बिना एक भी मैच हारे चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब जीत लिया। इनाम के तौर पर भारतीय टीम को लगभग 20 करोड़ रुपए मिले। दूसरी तरफ पाकिस्तानी टीम के लिए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 किसी बुरे सपने से कम नहीं रही और पाकिस्तान एक भी मैच में जीत दर्ज नहीं कर पाया। पाकिस्तान ने किया खराब प्रदर्शन चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तानी टीम को अपने पहले मैच में 60 रनों से हार मिली थी। इसके बाद भारतीय टीम ने उसे 6 विकेट से धूल चटाई। जबकि बांग्लादेश के खिलाफ उसका मैच बारिश की भेंट चढ़ गया। इसी वजह से पाकिस्तानी टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाई। इससे उसकी हर जगह किरकिरी हुई। पाकिस्तानी टीम चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में ओवर ऑल 7वें नंबर पर रही थी। पाकिस्तान को मिले इतने रुपए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में 7वें या 8वें नंबर पर रहने वाली टीमों को $140k मिले, जो भारतीय रुपए में लगभग 1 करोड़ 22 लाख रुपए होते हैं। वहीं चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तानी टीम को $125K मिले, जो भारतीय रुपए में लगभग 1 करोड़ 9 लाख रुपए होते हैं। इस तरह से पाकिस्तान को मौजूदा चैंपियंस ट्रॉफी में बिना मैच जीते ही लगभग 2 करोड़ 31 लाख रुपए मिले। सरफराज अहमद की कप्तानी में जीता था खिताब चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल में पाकिस्तानी टीम ने जगह बनाई थी और तब सरफराज अहमद की कप्तानी में भारतीय टीम को 180 रनों से शिकस्त दी थी। लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान का प्रदर्शन बिल्कुल ही उम्मीदों के उलट रहा। टीम के गेंदबाज और बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे। पाकिस्तान के लिए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में एक भी बल्लेबाज शतक नहीं लगा पाया था।

सौ से अधिक जनसंख्या की बसाहटों में सड़क संपर्कता, सेटेलाइट मैप से चिह्नांकन के बाद मैदानी स्तर पर होगा भौतिक सत्यापन

भोपाल  प्रदेश की सौ से अधिक जनसंख्या वाली ग्रामीण बसाहटों को राज्य सरकार शहरी सड़कों से जोड़ेगी। इसके लिए केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित विभिन्न योजनाओं जैसे पीएम ग्राम सड़क योजना, पीएम जनमन योजना, सीएम ग्राम सड़क योजना, सुदूर ग्राम सड़क संपर्क योजना आदि के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में पात्रतानुसार 500, 250 एवं 100 से अधिक जनसंख्या की बसाहटों में सड़क संपर्कता प्रदान की जा रही है। ऐसी ग्रामों की बसाहटें जो बारहमासी सड़कों से कनेक्टेड नहीं हैं, उनका चिह्नांकन का कार्य एमपी इलेक्ट्रानिक विकास निगम ने सेटेलाइट मैप से किया है और अब इनका भौतिक सत्यापन मैदानी स्तर पर किया जाना है। पंचायत स्तर पर सत्यापन के बाद जिला स्तर पर होगा मंजूर     पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने सभी जिला पंचायतों के सीईओ को निर्देश जारी कर कहा है कि वे संपर्कता सर्वे मोबाइल एप के माध्यम से ऐसी ग्रामीण बसाहटों का भौतिक सत्यापन कराएं।     जिसमें पंचायत स्तर पर ग्राम रोजगार सहायक, सचिव को लगाया जाए जो संपर्कता सर्वे मोबाइल एप पर भौतिक सत्यापन रजिस्टर करें।     जिला स्तर पर मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक एप में रजिस्टर भौतिक सत्यापन को एप्रूव(मंजूर) करेंगे एवं दैनिक प्रगति से जिला पंचायत सीईओ को अवगत कराएंगे। किया जा रहा सर्वे का काम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सीहोर जिले में 500 से अधिक आबादी की संपर्क विहीन बसाहटों को बारहमासी सड़कों से संपर्कता प्रदान की जाएगी। ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के परियोजना क्रियान्वयन महाप्रबंधक यशवंत सिन्हा ने बताया कि सीहोर जिले के तहत चयनित 550 संपर्क विहीन बसाहटों के सर्वे का कार्य ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा ‘ग्राम संपर्कता एप’ के माध्यम से किया जा रहा है। सेटेलाइट सर्वे भी जारी सर्वे के बाद पात्र बसाहटों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बारहमासी सड़कों से जोड़ने की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही शासन द्वारा प्रदेश की संपर्क विहीन बसाहटों के सेटेलाइट सर्वे भी कराया जा रहा है, इनका भौतिक सत्यापन का कार्य कराया जा रहा है। सर्वे के बाद संपर्क विहीन बसाहटों का चयन किया जाएगा। इसमें उन बसाहटों को लिया गया है, जिनकी वर्तमान में जनसंख्या 100 से अधिक है। चयन एवं सर्वे के लिए डामरीकृत अथवा सीसी सडक़ से संपर्क विहीन बसाहट की दूरी 50 मीटर से अधिक होना चाहिए।  

इंदौर से रायपुर और जबलपुर के लिए नई फ्लाइट 30 मार्च से, विशाखापट्‌टनम की कनेक्टिंग फ्लाइट भी

इंदौर समर शेड्यूल लागू होने के पहले एयरलाइंस कंपनियां नई फ्लाइट का शेड्यूल जारी कर रही हैं। इंदौर के लिए तीन रूटों की नई फ्लाइट मिली हैं। ट्रेवल्स एजेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया एमपीसीजी के सचिव अमित नवलानी में बताया, रायपुर के लिए सुबह की फ्लाइट की जरूरत थी जो मिल चुकी है। इसी के साथ विशाखापट्टनम भी जुड़ गया है। इसी तरह जबलपुर के लिए भी एक और फ्लाइट मिली है। नवलानी ने बताया, विशाखापत्तनम, रायपुर के लिए 31 मार्च और जबलपुर के 30 मार्च से फ्लाइट का संचालन होगा। बुकिंग शुरू हो चुकी हैं। यहां देखें शेड्यूल     विशाखापट्टनम से इंदौर: 6ई-7296 सुबह 11 बजे विशाखपट्टनम से रवाना होगी और रायपुर होते हुए दोपहर 2.45 पर इंदौर पहुंचेगी।     इंदौर से विशाखापट्टनम(indore to visakhapatnam flight) : 6ई-7295 सुबह 6.35 से इंदौर से रवाना होगी और रायपुर होते हुए सुबह 10.20 पर विशाखापट्टनम पहुंचेगी।     इंदौर से जबलपुर(indore to jabalpur flight) : 6ई-7328 दोपहर 1.55 बजे इंदौर से रवाना होकर 3.20 जबलपुर पहुंचेगी।     जबलपुर से इंदौर : 6ई-7327 दोपहर 12.10 बजे जबलपुर से उड़कर दोपहर 1.30 इंदौर पहुंचेगी। भोपाल से जबलपुर और इंदौर से पुणे जाना होगा आसान, शुरू हुई नई फ्लाइट्स भोपाल से जबलपुर के लिए शनिवार से सीधी उड़ान सेवा शुरू हो गई है। पहले दिन भोपाल पहुंचे यात्रियों का एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। रन-वे पर विमान के पहुंचते ही वाटर सैल्यूट के साथ इसका स्वागत किया गया। इस रूट पर इंडिगो एयरलाइंस 78 सीटों वाले एटीआर विमान का संचालन कर रही है। पहले दिन 31 यात्री जबलपुर के लिए रवाना हुए, जबकि जबलपुर से 65 यात्री भोपाल पहुंचे। यह उड़ान सप्ताह में तीन दिन (मंगलवार, गुरुवार और शनिवार) संचालित होगी। जबलपुर रूट पर दो साल पहले एलाइंस एयर ने उड़ान शुरू की थी, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। कंपनी ने अपना बेस स्टेशन भी बंद कर दिया था। इंडिगो की इस उड़ान को अच्छे रिस्पांस की उम्मीद है, क्योंकि यह सप्ताह में तीन दिन संचालित होगी। भोपाल-दिल्ली के लिए अतिरिक्त उड़ान जल्द शुरू होगी भोपाल से दिल्ली के लिए अतिरिक्त उड़ान भी जल्द शुरू होने की संभावना है। इंडिगो ने इसके लिए स्लॉट ले लिया है। फिलहाल भोपाल से दिल्ली के लिए पांच उड़ानें संचालित हो रही हैं। एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी के अनुसार, समर शेड्यूल में कुछ नए शहरों को भी जोड़ा जा सकता है। जबलपुर उड़ान का शेड्यूल     भोपाल प्रस्थान: शाम 5:50 बजे     जबलपुर आगमन: शाम 6:55 बजे     जबलपुर प्रस्थान: शाम 7:15 बजे     भोपाल आगमन: रात 8:15 बजे भोपाल-हैदराबाद के लिए तीसरी फ्लाइट भोपाल से हैदराबाद के लिए अब तीन फ्लाइटें उपलब्ध हो गई हैं। इंडिगो ने अपनी तीसरी हैदराबाद फ्लाइट के लिए 30 मार्च से बुकिंग शुरू कर दी है। इसके अलावा, दोपहर के समय चलने वाली दिल्ली फ्लाइट की बुकिंग भी जल्द शुरू होने वाली है। नंबर      कहां से कहां      प्रस्थान-आगमन 7457     भोपाल-हैदराबाद     सुबह 8.30-सुबह 10.40 7458     हैदराबाद-भोपाल     सुबह 11.55-दोपहर 2.00 इंदौर-पुणे के लिए नई फ्लाइट 30 मार्च से एयर इंडिया एक्सप्रेस इंदौर से पुणे के लिए नई फ्लाइट शुरू करेगी। यह फ्लाइट नई दिल्ली से दोपहर 1:30 बजे रवाना होगी और 3:20 बजे इंदौर पहुंचेगी। इंदौर से यह शाम 6 बजे पुणे के लिए रवाना होगी और शाम 5:25 बजे पुणे पहुंचेगी। यह इंदौर से पुणे के लिए दूसरी फ्लाइट होगी। भोपाल से हवाई यात्रियों की संख्या में वृद्धि भोपाल से हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रतिदिन औसतन पांच हजार से अधिक यात्री देश के विभिन्न शहरों के लिए उड़ान भर रहे हैं। जनवरी की तुलना में फरवरी में मासिक यात्री संख्या में थोड़ी कमी आई है, क्योंकि फरवरी में 28 दिन थे। हालांकि, दैनिक यात्री संख्या अभी भी पांच हजार से अधिक है। जनवरी में एक लाख 51 हजार 139 यात्रियों ने भोपाल से हवाई यात्रा की, जबकि फरवरी में यह संख्या एक लाख 46 हजार 763 रही। इस दौरान 1,042 बार विमानों ने भोपाल एयरपोर्ट पर फेरे लिए। एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी का कहना है कि जल्द ही यात्री संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

सेंसेक्‍स 100000 के पार जाएगा … लेकिन जाने कब? Morgan Stanley ने बताया वो महीना

मुंबई दुनिया भर में जियोपॉलिटिकल टेंशन और डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ खतरे के बीच भारत समेत दुनियाभर के बाजारों में दबाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका में ट्रंप की नीतियों की वजह से आर्थिक मंदी का संकट छाने लगा है. भारतीय बाजार पिछले साल सितंबर से टूट रहा है और लगातार बिकवाली हो रही है. निवेशक मार्केट से डरे हुए हैं. इसी बीच, Morgan Stanley के एनालिस्ट का मानना है कि Sensex 100000 के पार कर सकता है. Morgan Stanley के एनालिस्ट का कहना है कि सेंसेक्‍स में मौजूदा स्‍तर से करीब 41 फीसदी तेजी की उम्‍मीद है और सेंसेक्स दिसंबर 2025 तक 105,000 के पार जा सकता है. एनालिस्‍ट के मुताबिक, भारतीय बाजारों में रिस्‍क के मुकाबले मुनाफे की संभावनाएं बढ़ रही हैं. उनका अनुमान है कि सामान्‍य स्थिति में दिसंबर 2025 तक सेंसेक्‍स 93,000 के स्तर पर होगा. यह मौजूदा स्‍तर से लगभग 25 फीसदी ज्‍यादा होगा. 70 हजार पर भी आ सकता है सेंसेक्‍स वहीं एनालिस्‍ट का यह भी मानना है कि मंदी जैसी स्थिति पैदा हुई और हालात और भी ज्‍यादा खराब हुए तो सेंसेक्‍स 6 फीसदी गिरकर 70,000 के स्तर पर भी आ सकता है.  Morgan Stanley में भारत रिसर्च प्रमुख रिद्धम देसाई ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारतीय शेयर बाजारों में बिकवाली का रुख दिख रहा है. ऐसे में अब निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में निवेश करने का अच्छा मौका है. किन सेक्टर्स में मौके? देसाई का मानना है कि निवेश के लिहाज से सिक्लिकल शेयर, डिफेंस शेयरों, स्मॉलकैप, मिडकैप और लार्जकैप शेयरों में तेजी का रुख बना रहेगा. अगर अलग-अलग सेक्टर की बात करें तो Morgan Stanley ने फाइनेंशियल, कंज्यूमर, इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजी सेक्टर को लेकर पॉजिटिव संकेत दिया है. ये हैं Morgan Stanley के पसंदीदा स्‍टॉक Jubilant Foodworks, M&M, Maruti Suzuki, Trent, Bajaj Finance, ICICI Bank, Titan, L&T, UltraTech Cement और Infosys जैसे शेयरों पर Morgan Stanley पॉजिटिव है. Morgan Stanley का मानना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट बनने जा रहा है.

पीएम मोदी ने गंगा तालाब में प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान त्रिवेणी संगम से लाए गए पवित्र जल का विसर्जन भी किया

पोर्ट लुईस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस की यात्रा के दौरान बुधवार को पवित्र गंगा तालाब के दर्शन किए। उन्होंने इसे एक भावानात्मक अनुभव बताया। प्रधानमंत्री ने हिंद महासागर द्वीपसमूह में सबसे पवित्र हिंदू तीर्थ स्थल माने जाने वाले गंगा तालाब में पूजा-अर्चना की और प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान त्रिवेणी संगम से लाए गए पवित्र जल का विसर्जन भी किया। पीएम मोदी ने बुधवार को एक्स पर पोस्ट किया, “मॉरीशस में पवित्र गंगा तालाब के दर्शन कर भावविभोर हो गया। इसकी पावन जलधारा के किनारे दोनों देशों के बीच के आध्यात्मिक संबंधों को आसानी से महसूस किया जा सकता है। यह सीमाओं से परे है और हमारी कई पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़ता है।” गंगा तालाब, जिसे मॉरीशस में ग्रैंड बेसिन के नाम से भी जाना जाता है, एक क्रेटर झील है, जो समुद्र तल से लगभग 550 मीटर ऊपर है। यह सावेन के पहाड़ी दक्षिण-पश्चिमी जिले में स्थित है। इसके तट पर मंदिर भी स्थित है। स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि इस स्थान की खोज 1897 के आसपास एक हिंदू पुजारी ने की थी। 1970 के दशक में, भारत से एक अन्य पुजारी गंगा से पवित्र जल लेकर आए और पवित्र जल को झील में डाला, इस प्रकार इसका नाम ‘गंगा तालाब’ रखा गया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में दूसरी बार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह के दौरान उन्हें मॉरीशस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में भाग लेने के बाद एक्स पर लिखा, “मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मॉरीशस के लोगों को निरंतर समृद्धि और सफलता की शुभकामनाएं देता हूं, साथ ही हम अपने देशों के बीच गहरे संबंधों को भी मजबूत करते हैं।” यह दूसरी बार है जब पीएम मोदी मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल हुए। वह इससे पहले 2015 में इस समारोह में शामिल हो चुके थे। समारोह के दौरान मॉरीशस के राष्ट्रपति धरमबीर गोखूल ने प्रधानमंत्री मोदी को मॉरीशस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन’ (जीसीएसके) से सम्मानित किया। यह पहली बार है जब किसी भारतीय नेता को यह सम्मान मिला। यह किसी देश द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिया जाने वाला 21वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी है।

रायपुर में ताबड़तोड़ छापे मार कार्यवाही, पुलिस ने वाहनों की जांच के दौरान पुलिस ने कैश वाली गाड़ी पकड़ी

रायपुर छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद पुलिस ने कैश वाली एक कार बरामद की है। कार में 500, 200 और 100 के नोटों की गड्डियों को रखा गया था। भारी मात्रा में कैश देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। गिनती के बाद पता चला कि कार में पूरे 1.5 करोड़ रुपए की नकदी थी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह पैसा किसका था और कहां ले जाया जा रहा था। मंगलवार रात रायपुर में सफेद रंग की इनोवा गाड़ी (23 BH886J) में भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया है। वाहनों की जांच के दौरान पुलिस ने कैश वाली गाड़ी पकड़ी। नोटों को एक सूटकेश और बैग में छिपाकर गाड़ी में रखा गया था। पुलिस ने अमानका चेक पॉइंट पर इस गाड़ी को पकड़ा। कैश की बात पता चलने पर गाड़ी को थाने लाकर जांच की गई। नोटों की गड्डियां देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। मीडिया के सामने कैश दिखाने के बाद मशीनों से गिनती की गई। बताया गया कि कुल 1.5 करोड़ रुपए बरामद किए गए हैं। रायपुर से मुंबई ले जा रहे थे पैसे पकड़े गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। पैसा कहां से आया और कहां जा रहा था, इसकी जांच चल रही है। पुलिस को शक है कि यह हवाला का पैसा हो सकता है। कार में एक अलग से डेक बनाया गया था, जिसमें पैसे छिपाए गए थे। दोनों लोगों से पूछताछ की जा रही है। नागपुर से गाड़ी बदलने को कहा पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक कार में बड़ी मात्रा में नकद ले जाया जा रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने आमानाका में चेकिंग पॉइंट लगाया था। कार के पकड़े जाने के बाद कार चालक और उसके साथी से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि उन्हें नागपुर के पास गाड़ी बदलने के लिए कहा गया था। पुलिस प्रशासन का कहना आजाद चौक सब डिवीजन के सीएसपी आईपीएस अमन झा ने बताया कि बड़ी मात्रा में नकद रकम बरामद की गई है। कार चालक और उसके सहयोगी ने रकम की कोई जानकारी नहीं दी है। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल जब्ती की कार्रवाई कर आगे जांच की जा रही है। एसपी अमन झा ने पीटीआई को बताया कि आज एक सफर रंद की इनोवा जांच के लिए रोकी गई। उसको जब चेक कर रहे थे तो पता चला कि उसमें कैश है। गाड़ी को जब थाने लगाया गया तो उसमें भारी मात्रा में कैश मिला। 500, 200 और 100 की गड्डियां थीं। अभी देखा जाएगा कि नकदी को वैध रूप से ले जाया जा रहा था या अवैद रूप से। पुलिस ने पूरे मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी ऐसे समय पर हुई है जब हाल ही में ईडी ने छत्तीसगढ़ में कई हाई प्रोफाइल लोगों के खिलाफ छापेमारी की है। सफेद रंग की इनोवा में कैश मिलने की खूब चर्चा हो रही है।

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