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पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकती है भाजपा, रेस में दक्षिण से दो महिला नेताओं के नाम

अमरावती कौन बनेगा बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष? इस सवाल का जवाब मार्च महीने में मिल जाने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान होने की उम्मीद जताई जा रही है। बीजेपी ने अभी कुल 36 प्रदेश अध्यक्षों में 12 के नाम तय किए हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय प्रमुख की नियुक्ति के लिए आधे प्रदेश अध्यक्ष बने जरूरी हैं। बीजेपी के ‘मिशन साउथ’ की चर्चा के बीच आश्चर्यजनक तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में दो और नाम शामिल हुए हैं। ऐसे में चर्चा शुरू हो गई है कि वाकई में बीजेपी सबको चौंकाने जा रही है। ये दोनों नाम महिला नेताओं के हैं। इनमें आंध्र प्रदेश से आने वाली डी पुरंदेश्वरी का नाम शामिल है। उन्हें बीजेपी में दक्षिण का ‘सुषमा स्वराज’ कहा जाता है। दूसरा नाम वनथी श्रीनिवासन है। ज्यादा संभावना डी पुरंदेश्वरी को लेकर है। दक्षिण से अब कुल पांच नाम डी पुरंदेश्वरी और वनथी श्रीनिवासन के नामों की चर्चा से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर राजस्थान की पूर्व सीएम वंसुधरा राजे का नाम भी चल चुका है। वनथी श्रीनिवासन अभी बीजेपी के राष्ट्रीय महिला मोर्चा की प्रमुख हैं। वह काेयंबटूर से विधायक हैं। पिछले दिनों दक्षिण से तीन बीजेपी नेताओं के नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए सुर्खियों में आए थे। इनमें कोयला मंत्री जी किशन रेड्‌डी, गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार और कर्नाटक से आने वाले केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी का नाम शामिल था। इन नेताओं के नाम के पीछे हवाला दिया गया था कि बीजेपी अब दक्षिण की तरफ आक्रामक तरीके से रुख करना चाहती है। ऐसे में दक्षिण को तवज्जो मिल सकती है। अभी तक कुल 11 राष्ट्रीय अध्यक्षों में तीन दक्षिण से आए हैं। इनमें बंगारू लक्ष्मण, जे कृष्णमूर्ति और वेंकैया नायडू का नाम शामिल है। क्या महिला को मिलेगी सर्वोच्च कुर्सी? बीजेपी की स्थापना से लेकर अभी तक कोई भी महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनी है। लेकिन इस बीच इस पद के लिए भाजपा की ओर से पहली बार किसी महिला का नाम भी अंतिम पैनल में रखने की बात सामने आ रही है। इसमें सबसे प्रमुख नाम केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और दक्षिण की सुषमा स्वराज कही जाने वाली डी पुरंदेश्वरी का है। डी पुरंदेश्वरी साल 2014 में बीजेपी में आई थी। वह समय आंध्र प्रदेश भाजपा की अध्यक्ष भी हैं। बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष 50 से 70 की आयु वर्ग से होगा। बीजेपी ने देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की है। प्रयागराज महाकुंभ खत्म होने के बाद अब अगले हफ्ते नाम के ऐलान की संभावना है। क्या विनोद तावड़े मारेंगे बाजी? पहले हरियाणा फिर महाराष्ट्र और इसके बाद दिल्ली जीतने के बाद बीजेपी अब राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश में जुटी है। दक्षिण के पांच नामों के साथ उत्तर से भी पहले कई नामों की चर्चा सामने आई थी, लेकिन इस सब के बीच पार्टी महासचिव विनोद तावड़े का भी है। उन्हें बीजेपी शीर्ष नेतृत्व का विश्वासपात्र माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि वह मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में अकेले ऐसे नेता हैं। जो प्रमोद महाजन शैली के नेता हैं। जिससे मतलब है कि वह किसी को भी अपने साथ लाने में सक्षम हैं। उनको विषम परिस्थिति में उचित कदम उठाने में सक्षम माना जाता है। बीजेपी ने दिल्ली में जिस तरह से प्रवेश वर्मा के दौड़ में आगे होने के बाद शालीमार से विधायक रेखा गुप्ता को राजधानी की कमान सौंपी और सीएम बनाया। उसके बाद से राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है।

राज्य सरकार ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए मुफ्त कैंसर वैक्सीनेशन प्रोग्राम लागू करने का फैसला लिया

मुंबई महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने सेहत के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाते हुए 0-14 साल की लड़कियों को मुफ्त कैंसर वैक्सीन देने का ऐलान किया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बदलती जीवनशैली के चलते कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और अब यह बीमारी हर उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। आबिटकर ने बताया कि राज्य सरकार ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए मुफ्त कैंसर वैक्सीनेशन प्रोग्राम लागू करने का फैसला लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आबिटकर कहा, “हमने उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार से अनुरोध किया था कि 0-14 साल की लड़कियों को मुफ्त में कैंसर वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने इसे मंजूरी दे दी है और जल्द ही सरकार इसे लागू करेगी।” बताया जा रहा है कि कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे सिर्फ धूम्रपान या अन्य नशे की लत ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि खान-पान और बदलती जीवनशैली भी एक बड़ा कारण बन रही है। खासकर बच्चों में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह योजना अहम मानी जा रही है। बर्ड फ्लू पर भी अलर्ट इसी बीच राज्य सरकार ने विदर्भ में बर्ड फ्लू के खतरे को लेकर भी सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। वहां कौवों में एवियन इंफ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) की पुष्टि हुई है, हालांकि इंसानों में इसके संक्रमण की कोई पुष्टि नहीं हुई है। आबिटकर ने बताया कि संदिग्ध मरीज के नमूने जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए हैं। उन्होंने कहा, “सावधानी के तौर पर हमने प्रभावित इलाकों में चिकन की दुकानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।” चिकन खाने को लेकर किया गया सतर्क इससे पहले पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के मामले सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने लोगों से अधपका चिकन खाने से बचने की अपील की थी। हालांकि, इस बीमारी और चिकन के बीच किसी स्पष्ट संबंध की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी सरकार ने ऐहतियात बरतने की सलाह दी है।

दो संभागों में गर्मी बढ़ रही है तो रात में तापमान में गिरावट, इस बीच कहीं पर हल्‍की बारिश का भी अनुमान

भोपाल मध्‍य प्रदेश में इन दिनों मिला जुला मौसम देखने को मिल रहा है। जहां दिन में गर्मी बढ़ रही है तो रात में तापमान में गिरावट आ जाती है। इस बीच कहीं पर हल्‍की बारिश का भी अनुमान है। अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है। इसी क्रम में फरवरी माह के अंतिम दिन गुरुवार को पूरे प्रदेश में दिन और रात के तापमान में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जबलपुर में 19 वर्ष बाद तो इंदौर में छह वर्ष बाद फरवरी में इतनी गर्मी पड़ी है। भोपाल एवं ग्वालियर भी दो वर्ष बाद फरवरी इतना गर्म रहा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार शनिवार को ग्वालियर-चंबल संभाग में कहीं-कहीं वर्षा हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी अभिलाष श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के आसपास द्रोणिका के रूप में बना हुआ है। इसके प्रभाव से उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उससे लगे पाकिस्तान पर बना प्रेरित चक्रवात अब और मजबूत होकर कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित हो गया है। कम दबाव के क्षेत्र से महाराष्ट्र तक एक द्रोणिका बनी हुई है, जो गुजरात से होकर जा रही है। मौसम विभाग का यह है अनुमान मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि हवाओं का रुख दक्षिणी एवं दक्षिण-पश्चिमी बना हुआ है। इस वजह से दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है इसी क्रम में शुक्रवार को जबलपुर में अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे अधिक तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस वर्ष 2006 में दर्ज किया गया था। वहीं, इंदौर में वर्ष 2019 के फरवरी माह के सर्वाधिक तापमान के बराबर 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में अधिकतम तापमान 34.3 डिग्री और ग्वालियर में अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे अधिक तापमान दोनों नगरों में वर्ष 2023 में 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।  

मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक उन्नत अर्थव्यवस्था बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण: IMF

संयुक्त राष्ट्र भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है. आईएमएफ द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया, “भारत का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने के लिए जरूरी अहम और चुनौतीपूर्ण संरचनात्मक सुधारों को लागू करने में मदद कर सकता है.” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आजादी के सौ साल पूरे होने की समय सीमा तय की है. रिपोर्ट में आईएमएफ के कार्यकारी निदेशकों ने भारतीय अधिकारियों की विवेकपूर्ण व्यापक आर्थिक नीतियों और सुधारों की सराहना की, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और एक बार फिर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान दिया है. रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के वित्तीय क्षेत्र का स्वास्थ्य, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंसशीट और अच्छा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर दर्शाता है कि देश की वृद्धि दर मध्यम अवधि में तेज रहेगी. साथ ही जनकल्याण की योजनाएं भी जारी रहेंगी. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि भू-आर्थिक विखंडन और धीमी घरेलू मांग से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए, व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उचित नीतियां जारी रखना आवश्यक है. इसके अलावा, रिपोर्ट में भारत द्वारा हाल ही में घटाए गए टैरिफ का भी स्वागत किया गया है. इससे देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी. पिछले महीने पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटोमोबाइल से लेकर शराब तक कई प्रकार के आयात पर टैरिफ कम कर दिया था. “महिला भागीदारी को लेबर फोर्स में बढ़ाना चाहिए” आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं. रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भारत को लेबर मार्केट सुधारों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और महिला भागीदारी को लेबर फोर्स में बढ़ाना चाहिए.

भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 5.8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जानें इंदौर-ग्वालियर का हाल

भोपाल  ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) में मध्य प्रदेश को ₹26.61 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। यह समिट दो दिन चला। भोपाल को सबसे ज़्यादा ₹5.8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। इंदौर और उज्जैन को लगभग ₹4.7 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। अडानी ग्रुप, टोरेंट पावर, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अवाडा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों ने निवेश का वादा किया। ये निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, हॉस्पिटैलिटी, माइनिंग, फ़ूड प्रोसेसिंग, IT, डेटा सेंटर और अर्बन डेवलपमेंट जैसे कई क्षेत्रों में होंगे। भोपाल संभाग में सबसे अधिक दिलचस्पी भोपाल और आसपास के इलाकों में ग्रीन एनर्जी, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स, हेल्थकेयर, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस और अर्बन डेवलपमेंट में निवेश की खास रुचि दिखाई गई। NHAI ने इंदौर-भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने की योजना का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट में ₹1.3 लाख करोड़ का निवेश होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ MoU साइन हुआ है। यह MoU जमीन अधिग्रहण और स्थानीय सहायता के लिए है। केन्स टेक्नोलॉजी ने भोपाल के IT पार्क में SMT मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹352 करोड़ निवेश करने का वादा किया है। इससे करीब 1,650 नौकरियां पैदा होंगी। InAvia Aviation Consultants GmbH और MP सिविल एविएशन के बीच ₹500 करोड़ के निवेश से भोपाल में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल यूनिट बनाने के लिए MoU साइन हुआ। प्रधान एयर के साथ एक और MoU हुआ। इसके तहत ₹150 करोड़ के निवेश से मध्य प्रदेश में उज्जैन एयर नाम की एक छोटी इंट्रा-स्टेट एयरलाइन शुरू होगी। नीतियां कर रहीं आकर्षित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च भोपाल में अपनी एक सुविधा स्थापित करेगा। इससे क्षेत्र के शैक्षणिक और अनुसंधान परिदृश्य को और समृद्ध करेगा। MPIDC के मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि हर सेक्टर पर केंद्रित नई नीतियों से प्रमुख निवेश प्रस्तावों को आकर्षित करने में मदद मिली है। आकर्षक नीतियों और राज्य में भूमि की उपलब्धता के कारण लगभग हर क्षेत्र ने शिखर सम्मेलन में निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए हैं। इंदौर क्षेत्र में बहुत सारी पूछताछ हुई थी। शिखर सम्मेलन के दौरान विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, खनन और शहरी विकास ने अधिकतम निवेश के इरादे हासिल किए हैं। यानी हर सेक्टर के लिए नई नीतियां बनाई गई हैं। इससे निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिली है। राज्य में अच्छी नीतियां और ज़मीन उपलब्ध होने के कारण लगभग हर क्षेत्र को निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इंदौर क्षेत्र में निवेशकों ने काफी पूछताछ की। सबसे ज़्यादा निवेश मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, माइनिंग और अर्बन डेवलपमेंट में आए हैं। इंदौर में भी दिलचस्पी इंदौर क्षेत्र ने ₹4.76 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए। इंदौर में टोरेंट पावर और अक्षत ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड ने बड़े निवेश का वादा किया है। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में, इंडो यूरोपियन रिसर्च एंड हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, रुसान फार्मा लिमिटेड, अल्फा लैबोरेटरीज लिमिटेड और मयंक वेलफेयर सोसाइटी इंडेक्स सिटी हॉस्पिटल ने निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह समिट मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रस्तावों से लाखों नौकरियां पैदा होंगी। यह समिट राज्य के विकास के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है संभाग- निवेश की प्रस्तावित राशि     भोपाल – 5 लाख 82 हजार 93 करोड़     उज्जैन- 4 लाख 77 हजार 506 करोड़     शहडोल – 1 लाख 58 हजार 402 करोड़     जबलपुर – 1 लाख 6 हजार 970 करोड़     रीवा – 68 हजार 475 करोड़     इंदौर– 4 लाख 76 हजार 245 करोड़     नर्मदापुरम– 2 लाख 93 हजार 522 करोड़     सागर – 53 हजार 657 करोड़     चंबल – 52 हजार 92 करोड़     ग्वालियर – 27 हजार 363 करोड़     कुल- 22 लाख 96 हजार 325 करोड़ रुपए गौरतलब है कि एमपी में निवेशकों को लुभाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले रीजनल समिट आयोजित किए गए थे। रीजनल समिट के जरिए सरकार की कोशिश की थी कि हर क्षेत्र में विकास हो। उसका भी प्रभाव देखने को मिला है।

प्रदेश की कोई भी नदी सूखी नहीं रहेगी, सोनार नदी को नर्मदा से जोड़ने के लिए जल्द ही सर्वे शुरू होगा: सीएम मोहन यादव

सागर मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट खत्म करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐलान किया कि प्रदेश की कोई भी नदी सूखी नहीं रहेगी। सोनार नदी को नर्मदा से जोड़ने के लिए जल्द ही सर्वे शुरू होगा, जिससे इस क्षेत्र के किसानों को जबरदस्त फायदा मिलेगा। इसके अलावा, सागर-दमोह मार्ग को अपग्रेड करने और अन्य विकास कार्यों की भी घोषणा की गई। 6-7 साल में बदल जाएगी बुंदेलखंड की तस्वीर- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल, सड़क, शिक्षा और कृषि से जुड़े कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने कहा कि नर्मदा-सोनार लिंक परियोजना इस क्षेत्र के जल संकट को खत्म कर देगी। सर्वे पूरा होते ही आगे का काम शुरू होगा, जिससे बुंदेलखंड की धरती पहले से भी ज्यादा उपजाऊ बन जाएगी। सीएम ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से आने वाले 6-7 साल में बुंदेलखंड की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। इस प्रोजेक्ट के जरिए हर खेत तक पानी पहुंचेगा, जिससे फसल उत्पादन दोगुना होगा। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी जमीन न बेचें, क्योंकि जल्द ही बुंदेलखंड की मिट्टी पंजाब-हरियाणा से भी बेहतर होगी। सड़कों का भी होगा कायाकल्प गढ़ाकोटा रहली-देवरी मार्ग और सागर-दमोह मार्ग को अपग्रेड करने की भी घोषणा हुई। सागर-गढ़ाकोटा रोड को फोर लेन बनाया जाएगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। किसानों और गौपालकों को राहत किसानों के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर सरकार 40% सब्सिडी देगी। वहीं, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजना लाई जा रही है, जिससे दूध उत्पादकों को बोनस मिलेगा। गेहूं के लिए सरकार 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी करेगी, जो अगले साल बढ़कर 2700 रुपए से ऊपर पहुंच जाएगी।  बुंदेलखंड को मिलेगा नर्मदा का आंचल, सुनार से होगा मिलन प्रदेश की जीवन-दायिनी मां नर्मदा अब अपने आंचल से सागर जिले को भी नया जीवन देगी। नर्मदा नदी को केसली-रहली से बहने वाली सुनार नदी से जोडऩे का काम शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है। नर्मदा व सुनार नदी के संगम से सागर जिले सहित दमोह, कटनी व रायसेन जिले को भी फायदा होगा। जिला योजना समिति ने दी सैद्धांतिक मंजूरी विशेषकर सूखे की आग में झुलस रहे बुंदेलखंड के इस क्षेत्र को नर्मदा की बूंदों से राहत मिलेगी। बुधवार को जिला योजना समिति ने इस काम को शुरू करने की भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सागर संभाग में पहले से ही केन-बेतवा लिंक परियोजना और बीना नदी परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल, नर्मदा व सोनार नदी को जोडऩे के लिए जल संसाधन विभाग को डीपीआर की जिम्मेदारी दी गई है। 2 हजार 994 करोड़ की बनी है डीपीआर वर्ष 2020 तक हर खेत को पानी पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई परियोजना के तहत बुंदेलखंड के सभी जिले में कार्ययोजना बनाई जा रही है। इनमें सागर संभाग के पांचों जिले छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, पन्ना, सागर सहित दतिया जिले की कार्ययोजना बनाई जा रही है। सागर जिले में इस परियोजना के तहत 2 हजार 994 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की गई है। जिसमें पहले से चल रही सिंचाई परियोजनाओं के साथ-साथ जिले के सभी 11 ब्लॉकों में नई सिंचाई परियोजनाओं, तालाब निर्माण, जलाशय निर्माण को भी शामिल किया गया है। 30 किमी दूर है नर्मदा केसली टड़ा के पास बरांझ नदी दक्षिण की तरफ नर्मदा नदी से मिलती है, जिसकी दूरी लगभग 30 किमी है। सुनार को बरांझ नदी से लिंक करके भी नर्मदा का पानी लाया जा सकता है। हालांकि जल संसाधन विभाग को सुनार व नर्मदा नदी जोडऩे के लिए सभी संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। सुकून देती सुनार जलसंकट के इस दौर में जहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। वहीं रहली की सुनार नदी लबालब भरी है। जलसंकट को देखते हुए प्रदेश के पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने समनापुर स्थित बांध के गेट खुलवा दिए थे। जो 6 मार्च से 6 अप्रैल तक खुले रहे। नदी में पानी आने के बाद भोपाल स्थित लैब में इसका परीक्षण करवाया गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद रहली में पानी की सप्लाई के लिए 13 अप्रैल को वॉटर प्लांट का भी शुभारंभ कर दिया गया है। फैक्ट फाइल नर्मदा नदी लंबाई     1,312 किमी मध्यप्रदेश में    1.077 किमी गुजरात में    161 किमी मप्र-महाराष्ट्र की सीमा पर    74 किमी मप्र के अमरकंटक, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, बरमान, होशंगाबाद, बड़वानी, ओंकालेश्वर, बड़वाह, महेश्वर और गुजरात के राजपिपला, धरमपुरी व भरूच शहर व आसपास से बहती है। सुनार नदी लंबाई 155 किमी सागर जिले के केसली, रहली-गढ़कोटा होते हुए दमोह जिले के हटा से कटनी के पास केन नदी में मिलती है।

चीन के वैज्ञानिकों ने खोजा थोरियम का विशाल भंडार, 60000 साल तक खत्म हो सकती है बिजली की टेंशन

बीजिंग चीन के हाथ ऐसा अकूत खजाना हाथ लगा है जिससे उसकी ऊर्जा जरूरतें हमेशा के लिए पूरी हो सकती हैं। चीन के एक राष्ट्रीय सर्वे में चीन के पास थोरियम के अथाह भंडार का पता चला है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एक विशेषज्ञ के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह रेडियोधर्मी धातु अकेले वैश्विक ऊर्जा उत्पादन में क्रांति ला सकती है, जिससे जीवाश्वम ईंधन पर दुनिया भर की निर्भरता खत्म हो सकती है। चीन के पास पहले ही बड़ा थोरियम भंडार मौजूद है। हालांकि, 2020 में किए गए सर्वे की क्लासीफाइड रिपोर्ट के अनुसार, यह वास्तव में पिछले अनुमानों से कई गुना अधिक हो सकते हैं। भारत के पास सबसे बड़ा भंडार जनवरी में चीनी पत्रिका जियोलॉजिकल रिव्यू में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इनर मंगोलिया में एक लौह अयस्क साइट से केवल पांच साल के खनन अपशिष्ट में इतना थोरियम है कि अमेरिका की घरेलू ऊर्जा मांगों को 1000 से अधिक वर्षों तक पूरा कर सकता है। खास बात ये है कि भारत के पास भी थोरियम का बहुत बड़ा भंडार है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में भारत का थोरियम भंडार दुनिया में सबसे बड़ा है। भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग ने देश में उपलब्ध थोरियम के विशाल भंडार को दीर्घकालिक विकल्प के रूप में इस्तेमाल की योजना बनाई है। कुछ विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, पूरी तरह से दोहन किए जाने पर बायन ओबो खनन परिसर दस लाख टन थोरियम पैदा कर सकता है, जो चीन को 60,000 वर्षों तक ईंधन देने के लिए पर्याप्त है। बीजिंग स्थित एक भूविज्ञानी ने नाम न बताने की शर्त पर साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया कि यह पता चला है कि अंतहीन ऊर्जा स्रोत हमारे पैरों के ठीक नीचे हैं। क्या है थोरियम? थोरियम एक चांदी के रंग की धातु है जिसका नाम पुराने स्कैंडिनेवियन देवता थोर के नाम पर रखा गया है। यह यूरेनियम की तुलना में 200 गुना अधिक ऊर्जा पैदा करता है। यूरेनियम रिएक्टरों के विपरीत थोरियम मोल्टेन-साल्ट रिएक्टर (TMSR) छोटे होते हैं। पिघल नहीं सकते और उन्हें पानी से ठंडा करने की आवश्यकता भी नहीं होती है। इसके अलावा वे रेडियोधर्मी अपशिष्ट भी कम मात्रा में छोड़ते हैं। पिछले साल चीन ने गोबी के रेगिस्तान में दुनिया के पहले TMSR पावर प्लांट के निर्माण को मंजूरी दी थी। 10 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता वाला यह पायलट प्रोजेक्ट 2029 तक शुरू होने की उम्मीद है। अभी राह आसान नहीं सर्वेक्षण के अनुसार, पूरे चीन में 233 थोरियम समृद्ध क्षेत्रों की पहचान की गई है, जो पांच प्रमुख बेल्टों में स्थित हैं। हालांकि, उम्मीद के बावजूद बाधाएं बनी हुई हैं। दुर्लभ मृदा अयस्कों से थोरियम को अलग करने के लिए भारी मात्रा में एसिड और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 1 ग्राम थोरियम को शुद्ध करने के लिए लगभग सैकड़ों टन अपशिष्ट जल की जरूरत होती है।  

थिएटर में विज्ञापन दिखाए जा सकते , लेकिन दर्शकों को उन्हें देखने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए: हाईकोर्ट

ग्वालियर  मध्य प्रदेश ग्वालियर खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि नियमों में संशोधन कर हर सिनेमा टिकट पर फिल्म का शो टाइम स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि थिएटर में विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं, लेकिन दर्शकों को उन्हें देखने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब दर्शकों को शो शुरू होने का सही समय पता चल सकेगा। इसके साथ ही सिनेमाघरों द्वारा जबरन दिखाए जा रहे विज्ञापनों से छुटकारा मिलेगा। फिल्म की जगह लंबे विज्ञापन दिखने पर उपभोक्ता आयोग ने PVR Cinemas को जिम्मेदार ठहराया पीवीआर सिनेमा के खिलाफ एक मामले में बैंगलोर जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि घोषित समय पर फिल्म की स्क्रीनिंग शुरू नहीं करना और फिल्म की वास्तविक शुरुआत से पहले लगभग 25 मिनट तक कामर्शियल विज्ञापन दिखाना एक अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने कहा “नए युग में समय को धन माना जाता है, प्रत्येक का समय बहुत कीमती होता है, किसी को भी दूसरों के समय और धन से लाभ प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। 25-30 थियेटर में खाली बैठकर थियेटर जो भी टेलीकास्ट होता है उसे देखने के लिए कम नहीं है। व्यस्त लोगों के लिए अनावश्यक विज्ञापन देखना बहुत कठिन है,” यह देखते हुए कि फिल्में देखना, जो अन्यथा लोगों को आराम करने में मदद करता है, शिकायतकर्ता के लिए तनावपूर्ण नहीं होना चाहिए था, आयोग ने पीवीआर सिनेमा को शिकायतकर्ता को उसके द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई करने के लिए उत्तरदायी ठहराया। पूरा मामला: शिकायतकर्ता ने बेंगलुरु के पीवीआर सिनेमा में फिल्म ‘सैम बहादुर’ के तीन टिकट बुक किए और इसके लिए खुद और अपने परिवार ने 825.66 रुपये दिए। उन्होंने bookmyshow.com पर टिकट बुक किए थे। फिल्म शाम 4:05 बजे शुरू होने वाली थी और फिल्म की अवधि 2 घंटे 25 मिनट थी। शिकायतकर्ता ने फिल्म के समय के अनुसार अपना शेड्यूल तय किया ताकि वह उसी के अनुसार अपने काम की योजना बना सके। उन्हें शाम 6:30 बजे काम पर लौटना था, हालांकि, थिएटर में शाम 4:28 बजे शो शुरू होने के कारण यह संभव नहीं था। शिकायतकर्ता के अनुसार, फिल्मों के विज्ञापन और ट्रेलर काफी समय से स्क्रीन पर दिखाए गए थे और फिल्म अंततः शाम 4:30 बजे खेली गई थी, जबकि शिकायतकर्ता और उसका परिवार शाम 4:05 बजे से थिएटर में बैठे थे। इससे व्यथित होकर शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, बंगलौर का दरवाजा खटखटाया और पीवीआर सिनेमा (विपरीत पार्टी नंबर 1) और बिग ट्री एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (विपरीत पार्टी नंबर 2) को टिकटों में उल्लिखित शो टाइम के बाद विज्ञापन चलाने से रोकने और रोकने का निर्देश देने की मांग की। शिकायतकर्ता के तर्क: शिकायतकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि शिकायतकर्ता को नुकसान का सामना करना पड़ा था जिसकी गणना पैसे के संदर्भ में नहीं की जा सकती है। यह दावा किया गया था कि ऐसे समय में फिल्म चलाना जो निर्धारित समय से परे था, विरोधी पक्षों द्वारा सेवा में कमी के बराबर था। यह कहते हुए कि इसने शिकायतकर्ता का कीमती समय बर्बाद किया, वकील ने तर्क दिया कि समय को दर्शकों को गलत तरीके से बताया गया था और टिकट के लिए भुगतान करने के बाद भी, शिकायतकर्ता का समय विज्ञापनों को चलाने में बर्बाद किया गया था, जिसके कारण वह निर्दिष्ट समय पर काम पर लौटने में सक्षम नहीं था। PVR Cinemas के तर्क: पीवीआर आइनॉक्स लिमिटेड (विपरीत पार्टी नंबर 3) के वकील ने कहा कि चूंकि यह मेनस्ट्रीम, गोल्ड क्लास सिनेमा और डायरेक्टर्स कट सहित विभिन्न प्रारूपों में फिल्म प्रदर्शन के व्यवसाय में लगी हुई है, इसलिए इसे विभिन्न मुद्दों के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए लघु फिल्मों और वृत्तचित्रों के रूप में कुछ लोक सेवा घोषणा (पीएसए) को प्रदर्शित करना होगा। यह प्रस्तुत किया गया था कि ये वीडियो तब दिखाए जाते हैं जब दर्शक शो शुरू होने से पहले थिएटर के अंदर बैठे होते हैं। इसके अलावा, पीवीआर सिनेमाज और पीवीआर आईनॉक्स लिमिटेड द्वारा यह इनकार किया गया था कि फिल्म का समय 2 घंटे और 25 मिनट था, जिसमें कहा गया था कि वास्तविक फिल्म का समय 2 घंटे और 30 मिनट था। वकील ने कहा कि इस अवधि के अनुसार, शिकायतकर्ता तार्किक रूप से इसे 6:30 बजे काम करने के लिए नहीं बना सकता था और इस प्रकार शिकायत खारिज करने योग्य थी। आयोग का निर्णय: आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता मुख्य रूप से थिएटर में 25 मिनट तक लगातार प्रसारित कामर्शियल विज्ञापनों से प्रभावित था। शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए सबूतों के अवलोकन पर, यह देखा गया कि दिखाए गए 17 विज्ञापनों में से केवल दो ही दिशानिर्देशों के अनुसार सार्वजनिक सेवा घोषणाएं थीं। आयोग को इस सवाल का जवाब देना था कि क्या विज्ञापन की अवधि 25-30 मिनट के लिए आवश्यक थी या नहीं और क्या थिएटर प्रबंधन ने फिल्म शुरू होने से पहले सार्वजनिक सेवा जागरूकता प्रदर्शित करने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन किया था। आयोग ने कहा कि विरोधी पक्षों ने सरकार के आदेश का उल्लंघन किया है, जिसके अनुसार थिएटर केंद्र सरकार और राज्य सरकार की सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और कल्याणकारी योजनाओं के 10 मिनट खेल सकते हैं। इसके अलावा, यह माना गया कि थिएटर मालिकों को टिकटों में उल्लिखित समय पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता थी और वर्तमान मामले में, फिल्म को शाम 4:05 बजे शुरू होना चाहिए था जैसा कि शिकायतकर्ता द्वारा खरीदे गए टिकटों में उल्लेख किया गया था। यह कहा गया था कि विज्ञापन थिएटर अधिकारियों द्वारा शाम 4:05 बजे से पहले प्रसारित किए जाने चाहिए थे, न कि उसके बाद। यह देखा गया कि कामर्शियल विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए निर्धारित समय से परे शो खेलना अन्यायपूर्ण और अनुचित है क्योंकि दर्शकों को शो शुरू होने से पहले लंबी अवधि के लिए विज्ञापन देखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। आयोग ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता ने इस मुद्दे को अच्छे कारण के साथ उठाया क्योंकि जिस दिन थिएटर में फिल्म दिखाई जानी थी, उस दिन कई लोगों को इसी मुद्दे का सामना करना पड़ा होगा। आयोग ने हालांकि कहा कि चूंकि … Read more

MP को जल्द मिलेगा पहला फ्लोटिंग रोड, सफर बनेगा सुहाना ! रायसेन-सागर के बीच 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर अंतिम चरण में

रायसेन मध्यप्रदेश के रायसेन में पहले फ्लोटिंग रोड के निर्माण को जल्द पूरा होने वाला है। ये बेगमगंज (रायसेन) से राहतगढ़ (सागर) को जोड़ने वाला मार्ग जल्द ही प्रदेश के प्रमुख मार्गों में गिना जाएगा, जहां 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बन रहा है। यह कॉरिडोर केवल सफर को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक रोमांचक अनुभव लेकर आएगा। जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में अब सड़क यात्रा किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन से कम नहीं होगी।  डूब क्षेत्र में तकनीक का कमाल, 120 करोड़ की लागत से बन रहा फ्लोटिंग रोड मढ़िया बांध के कारण रायसेन-सागर रोड का एक हिस्सा डूब में आ रहा था। इसी समस्या को हल करने के लिए MPRDC (मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम) ने 120 करोड़ रुपए की लागत से फ्लोटिंग रोड और चार बड़े फ्लाईओवर का निर्माण शुरू किया। यह सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बांध के पानी के ऊपर से गुजरेगा, जिससे यात्रियों को एक अनोखा सफर मिलेगा और इलाके की कनेक्टिविटी भी बरकरार रहेगी। टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बूस्ट, बनेगा नया सेल्फी प्वाइंट! राहतगढ़ पहले से ही अपने खूबसूरत झरने और प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है। अब जब यह नई सड़क जंगल, पहाड़ियों और डैम के बीच से गुजरेगी, तो यह इलाका पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है।  सेल्फी प्वाइंट और व्यूइंग डेक बनाने की योजना  पर्यटकों के लिए फूड कोर्ट और रेस्ट एरिया विकसित किए जाएंगे  स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे परियोजना से प्रभावित गांवों की स्थिति इस प्रोजेक्ट के चलते रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए योजना बनाई है, जिससे किसी को नुकसान न हो। पर्यटन को मिलेगा नया जीवन राहतगढ़ का वॉटरफॉल पहले से ही इस क्षेत्र का बड़ा आकर्षण रहा है, जहां मानसून के दौरान हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। अब जब यह नया कॉरिडोर जंगल, पहाड़ियों और डैम के पानी के बीच से होकर गुजरेगा, तो यह जगह और भी शानदार दिखेगी। यहां पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट और अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी योजना बनाई जा रही है। परियोजना के कारण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कॉरिडोर के आसपास पर्यटन केंद्र और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा होगा। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों की स्थिति इस परियोजना के कारण रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। इनमें चंदामाऊ और ककरुआ बरामद गढ़ी पूरी तरह से जलमग्न होंगे। हालांकि, प्रशासन ने प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के लिए मुआवजा योजना तैयार की है, जिसका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। जल्द पूरा होगा निर्माण कार्य कॉरिडोर और लाई ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। एमपीआरडीसी के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और इसकी सतत समीक्षा हो रही है। प्रयास यही है कि बारिश से पहले कार्य पूरा हो जाए, जिससे आगामी मानसून में यह क्षेत्र पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हो सके। बारिश से पहले पूरा होगा निर्माण, जल्द खुलेगा ट्रैफिक के लिए MPRDC के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई 2025 तक निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश यह है कि मानसून से पहले यह शानदार सड़क चालू हो जाए, ताकि पर्यटक और स्थानीय लोग इसका पूरा लाभ उठा सकें। फ्लोटिंग रोड: सफर नहीं, एक अनोखा अनुभव! मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह की पहली सड़क होगी, जहां सफर करते हुए लोग महसूस करेंगे कि वे पानी के ऊपर चल रहे हैं। यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि प्रदेश के पर्यटन और विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। अब सफर सिर्फ मंजिल तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के लिए होगा!

मुख्यमंत्री ने बालाघाट में 326 करोड़ 60 लाख रूपये के 117 विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन और लोकार्पण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट के किसान सम्मेलन में किसानों को अभूतपूर्व सौगात देते हुए कहा कि अब प्रदेश में धान उत्पादक किसानों को 4 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर अतिरिक्त लाभ दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि गेहूँ उत्पादक किसानों को भी प्रति क्विंटल 175 रूपये अतिरिक्त बोनस राशि दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मूल्य संवर्धन योजना (प्राइस सपोर्ट स्कीम) अंतर्गत वर्ष 2024 में 6.69 लाख किसानों द्वारा 12.2 लाख हेक्टेयर रकबे में उत्पादित धान का विक्रय किया गया है। धान उत्पादक किसानों को मुख्यमंत्री कृषक प्रोन्नति योजना में प्रति हेक्टेयर 4000 रूपये का लाभ मिलेगा। इससे प्रदेश के किसानों को 488 करोड़ रूपये का अतिरिक्त लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूँ उत्पादक किसानों को भी समर्थन मूल्य 2425 रूपये के अतिरिक्त 175 रूपये प्रति क्विंटल की बोनस राशि दी जायेगी। इस प्रकार गेहूँ के उपार्जन पर प्रति क्विंटल 2600 रूपये की राशि मिलेगी। इस वर्ष प्रदेश में 80 लाख मीट्रिक टन गेहूँ उपार्जन अनुमानित है। प्रदेश के किसानों को 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस के रूप में मिलने से लगभग 1400 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि का लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए संकल्पबद्ध होकर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक लाख सरकारी पदों पर भर्ती की जा रही है। आने वाले 5 वर्षों में 2 लाख 70 हजार पदों पर विभिन्न सेक्टर में रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे। हमारी सरकार वर्ष 2028 तक सरकार 70 प्रतिशत युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्धता पूर्वक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रदेश में चल रही योजनाएं यथावत चलती रहेगी। कोई भी योजना बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रदेश सभी क्षेत्रों में लगातार नंबर वन पर बना रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन में सभी को विकास का संकल्प भी दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने 1412 दिव्यांगजनों और 1040 वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण वितरित करने के साथ अन्य विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था 11वें नंबर से 5वें नंबर पर आ गई है और अब हम चौथे नंबर पर आने के लिए अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबसे तेज गति से विकास करने वाला देश भारत है, और यह प्रसन्नता की बात है कि वर्तमान में सर्वाधिक जीएसडीपी ग्रोथ रेट 13 प्रतिशत मध्यप्रदेश की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय कलेक्टर को निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और ग्रामीण का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को दिलाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति पक्के मकान के बगैर नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट के खिलाड़ियों को महत्वपूर्ण सौगात देते हुए हॉकी के एस्ट्रो टर्फ का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर भी पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। पदक प्राप्त करने वाले मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का होना हमें गौरवान्वित करता है। उन्होंने उत्तराखंड में हुए राष्ट्रीय खेलों में मध्यप्रदेश के तीसरे स्थान पर रहने पर हार्दिक प्रसन्नता जताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश के युवा जिस भी क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं, सरकार उन्हें आगे बढ़ने के समुचित अवसर प्रदान करेगी। सरकार प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए हर क्षेत्र में विकास करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट को खनिजों का सम्राट जिला बताते हुए कहा कि यह प्राकृतिक और खनिज संपदा से समृद्ध जिला है। तांबा और मैंगनीज यहाँ भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। चिन्नोर के चावल की खुशबू सभी ओर व्याप्त है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में नक्सलवाद के उन्मूलन का कार्य चल रहा है। हम गृह मंत्री श्री शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के पैर किसी भी कीमत पर जमने प्रदेश में नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के समूल नाश के लिए कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। यह संभव नहीं हो सकेगा कि नक्सलवादी किसी और प्रदेश से आकर मध्यप्रदेश में रह पाएं। पुलिस प्रशासन को इसके लिए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आज हुए लोकार्पण और भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले में 326 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक की लागत के कुल 117 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 264 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 78 विकास कार्यों का लोकार्पण किया इनमें 145 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बालाघाट, बिरसा, वारासिवनी, मलाजखंड, लालबर्रा में सीएम राइज़ स्कूल, 53 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बालाघाट के बैहर, पसरवाडा खैरलांजी में विभिन्न स्कूलों का उन्नयन एवं छात्रावासों के निर्माण कार्य, 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न मार्गों और पुलों के निर्माण कार्य, 9 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से वारासिवनी-खंडवा मार्ग पर पुल एवं 7 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ का लोकार्पण किया। उन्होंने 5 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से बालाघाट के विभिन्न क्षेत्रों में निर्मित किए गए आंगनबाड़ी केन्द्रों का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 62 करोड़ रुपये की लागत से 39 विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी किया। इनमें 24 करोड़ की लागत से वारासिवनी में 50 बिस्तरीय स्वास्थ्य केन्द्र, 9 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से लामता में नवगठित तहसील कार्यालय, 8 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खरपड़िया से शिवनहेटी कटंगी मार्ग पर पुल निर्माण, 3 करोड़ रुपये की लागत से सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्कूलों में विकास कार्यों, लगभग 2 करोड़ की लागत से कटंगझरी, लमता, डोंरिया, बेलगांव, साडरा में प्राथमिक शाला निर्माण का भूमि-पूजन किया। स्थानीय सांसद श्रीमती पारधी ने अपने उदबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जिलेवासियों को अभूतपूर्व सौगातें प्रदान करने के लिये आभार माना। उन्होंने … Read more

मीडिया इवेंट में पीएम मोदी ने कहा- दुनिया 21वीं सदी के भारत को देख रही, पहले बैक ऑफिस के रूप में देखा जाता था

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत दुनिया की नई फैक्ट्री और अनंत इनोवेशन की भूमि के रूप में उभर रहा है। देश की राजधानी में एक मीडिया इवेंट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया 21वीं सदी के भारत को देख रही है और सीखना एवं समझना चाहती है कि कैसे देश सेमीकंडक्टर से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर मैन्युफैक्चर कर रहा है। भारत को पहले बैक ऑफिस के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब भारत दुनिया की नई फैक्ट्री के रूप में उभर रहा है। हमारा देश केवल वर्कफोर्स नहीं रहा है, बल्कि वर्ल्ड फोर्स बन गया है। उन्होंने आगे कहा कि देश जो एक समय काफी सारे उत्पादों का आयात करता था, अब बड़ा निर्यातक बन गया है। भारत द्वारा हल्दी से लेकर कॉफी और मिलेट्स से लेकर मखाना तक का निर्यात किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, देश के मोबाइल फोन, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों और दवाइयों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। उन्होंने कहा, “भारत न केवल दुनिया को उत्पाद उपलब्ध करा रहा है बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार भी बन रहा है।” प्रधानमंत्री मोदी ने आगे बताया, “वर्षों की कड़ी मेहनत और व्यवस्थित नीतिगत निर्णयों के कारण भारत अब कई वैश्विक पहलों का नेतृत्व कर रहा है।” इसमें फ्रांस में हालिया एआई एक्शन शिखर सम्मेलन शामिल है, जहां भारत सह-मेजबान था और अब इसकी मेजबानी भी करेगा। उन्होंने आगे कहा कि देश ने अपनी अध्यक्षता के दौरान सफल जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर को एक नए आर्थिक मार्ग के रूप में पेश किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत किफायती, सुलभ और आसानी से अपनाए जाने वाले सॉल्यूशंस भी बना रहा है। इसमें सुरक्षित और कम लागत वाला डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और घातक कोविड-19 महामारी के दौरान टीके शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने भारत के ऑटोमोबाइल, स्पेस और उभरते हुए सेक्टर जैसे एआई के बारे में भी बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत अगले 25 वर्षों में एक विकसित राष्ट्र बनने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा- मध्यप्रदेश टैक्सटाइल और परिधान उद्योग के कारण एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपने समृद्ध टैक्सटाइल और परिधान उद्योग के कारण एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश की कृषि समृद्धि, पारंपरिक बुनकर समुदायों की उत्कृष्ट कला, आधुनिक औद्योगिक आधार और निवेशक-अनुकूल नीतियाँ राज्य में टैक्सटाइल सेक्टर को सशक्त बना रही हैं। जीआईएस-जीआईएस-भोपाल का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश को देश की ‘कॉटन कैपिटल’ घोषित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा कपास उत्पादक राज्य है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राज्य की प्रसिद्ध चंदेरी और माहेश्वरी साड़ियों, बाघ प्रिंट, छीपा हैंड-ब्लॉक प्रिंट और बटिक प्रिंट की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी बताया कि देश के सात बड़े टैक्सटाइल पार्कों में से एक मध्यप्रदेश में स्थापित किया जा रहा है। भोपाल में राज्य सरकार के प्रयासों से देश-विदेश के निवेशकों ने रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की है कि मध्यप्रदेश भारत के टैक्सटाइल और एपैरल हब के रूप में स्थापित हो रहा है। जीआईएस भोपाल में टैक्सटाइल निवेश को बढ़ावा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में टैक्सटाइल उद्योग में निवेश को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला। प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 21 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव में अधिकांश टैक्सटाइल उद्योग को प्राप्त है। इससे युवाओं के लिये 1.3 लाख से अधिक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उद्योग और निवेश संवर्धन विभाग के अंतर्गत 8,616 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित हुआ है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 60 से अधिक बड़ी टैक्सटाइल मिलें संचालित हैं। साथ ही इंदौर के रेडीमेड गारमेंट और अपैरल क्लस्टर में 1,200 से अधिक इकाइयां उत्पादन कर रही हैं। पीएम मित्र पार्क: रोजगार और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मध्यप्रदेश के धार जिले में बन रहा पीएम मित्र पार्क देश का सबसे बड़ा टैक्सटाइल पार्क है। इसमें एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पीएम-मित्र पार्क प्रदेश को टैक्सटाइल उद्योग में नये सिरे से स्थापित करेगा। मध्यप्रदेश टैक्सटाइल क्षेत्र: महत्वपूर्ण तथ्य मध्यप्रदेश में भारत के 43% जैविक कपास का उत्पादन होता है। विश्व में प्रदेश के कपास उत्पादन का योगदान 24% है। प्रदेश में कपास का उत्पादन 31 हजार 700 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। इसलिए इसे कॉटन कैपिटल कहा गया है। मलबरी सिल्क को मिलाकर 200 मीट्रिक टन सिल्क का उत्पादन होता है। नवीन टैक्सटाइल नीति-2025 से उद्योगों को मिल रहा प्रोत्साहन मध्यप्रदेश सरकार ने टैक्सटाइल उद्योग के लिए नई नीति लागू की है, जिसमें निवेशकों को कई वित्तीय और गैर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। नीतिगत प्रावधानों में प्लांट और मशीनरी में किए गए निवेश पर 10 से 40% तक की राशि निवेश संवर्द्धन सहायता के रूप में उद्यमियों को दी जाएगी। इस पर 5 से 7% तक ब्याज अनुदान भी 5 वर्ष तक दिया जाएगा। इकाइयों में बिजली, पानी और सड़क अधोसंरचना निर्माण के के लिए 1 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। साथ ही इकाइयों के परिसर में कचरा प्रबंधन प्रणाली के लिए 1 करोड़ रुपये तक की ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन सब्सिडी भी दी जाएगी। एपैरल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोलने पर 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। पहली बार 5 लाख रुपये तक के पेटेंट शुल्क की 100% वापसी, पेटेंट मिल जाने पर दी जाएगी, साथ ही पेटेंट प्रक्रिया में भी सरकार आवश्यक सहायता करेगी। प्रधानमंत्री मोदी के 5एफ-विजन को मध्यप्रदेश ने दिया मूर्त रूप प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जीआईएस-भोपाल में टैक्सटाइल एवं गारमेंट सेक्टर के विकास के लिए “5-एफ विजन” फार्म, फाइबर, फैक्ट्री, फैशन और फॉरेन का मंत्र देते हुए कहा कि देश और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उत्पाद मूल्य श्रृंखला के सभी तत्व मौजूद हैं। इनमें फार्म के अंतर्गत आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए कपास और रेशम किसानों से कच्चे माल के उत्पादकों को जोड़ना। ‘फाइबर’ में फाइबर निर्माण और प्र-संस्करण इकाइयों का प्रदर्शन सुधारना, जो उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जबकि, ‘फैक्ट्री’ के तहत प्रदेश के वस्त्र निर्माण और औद्योगिक उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को उजागर करना शामिल है। ‘फैशन’ में परिधान डिजाइन, ब्रांडिंग और वस्त्र उद्योग के रचनात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना और ‘फॉरेन’ में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत कर निर्यात अवसरों को बढ़ावा देना आता है। मध्यप्रदेश ने विजन को साकार करते हुए कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। टैक्सटाइल सेक्टर में पूर्व में प्राप्त हो चुका है 3,513 करोड़ रुपए का निवेश प्रदेश सरकार की नई टैक्सटाइल नीति से प्रदेश को पीएलआई योजना के अंतर्गत 3,513 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हो चुका है, जो देश में सर्वाधिक है। इसके अतिरिक्त राज्य में स्थापित मेगा टैक्सटाइल पार्कों के माध्यम से ब्यावरा और नीमच में बड़े निवेश आ रहे हैं। मध्यप्रदेश टैक्सटाइल उद्योग के क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक समृद्धि को बनाए रखते हुए आधुनिक औद्योगिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के अनुकूल नीतियों, टैक्सटाइल पार्कों, और विशेष आर्थिक पैकेजों के माध्यम से राज्य न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है।  

सेना का हथियार बना डीआरडीई में तैयार हुआ ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर अलार्म, DRDE को 223 यूनिट का ऑर्डर

ग्वालियर ग्वालियर में स्थित देश के रक्षा संस्थान DRDO की DRDE लैब ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। आगामी समय में न्यूक्लियर, जैविक और रासायनिक युद्ध का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस तरह के युद्ध का खतरा होने पर अलर्ट करने और अधिक से अधिक बचाव के लिए ग्वालियर के साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम की टीम ने ‘ACADA’ (ऑटोमेटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म) विकसित किया है। ये उपरकण आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री के सिद्धांत पर काम करता है। यह डिवाइस ‘ACADA’ हवा में घुले केमिकल के बारीक कणों को भी कैच कर ऑडियो और वीडियो रूप में अलर्ट जारी करेगा। भारत इस डिवाइस को स्वदेशी तकनीक से विकसित करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। आपको बता दें हाल ही में भारतीय सेना और वायु सेना ने ‘ACADA’ की 223 यूनिट की खरीद के लिए ऑर्डर दिया है। यह डील लगभग 80 करोड़ रुपये में हुई है। आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित नीति की दिशा में डीआरडीई, ग्वालियर का बड़ा योगदान सामने आया है। DRDE के साइंटिस्ट सुशील बाथम द्वारा विकसित स्वचालित रासायनिक युद्ध डिटेक्टर (ACADA) ऑटोमेटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म सेना में शामिल होने जा रहा है। रासायनिक हमले की स्थिति में जानमाल की हानि कम करने के लिए इसकी तत्काल पहचान आवश्यक है। डिटेक्टर-अलार्म में 80% से ज्यादा स्वदेशी कम्पोनेंट्स इस्तेमाल DRDE के साइंटिस्ट सुशील बाथम द्वारा विकसित स्वचलित रासायनिक युद्ध डिटेक्टर (ACADA) ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म सेना में शामिल होने जा रहा है। रासायनिक हमले की स्थिति में जानमाल की हानि कम करने के लिए इसकी तत्काल पहचान जरूरी है। रासायनिक हमले की पहचान करने में ACADA अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इन डिटेक्टर को दुनिया भर में उपलब्ध तीन निर्माताओं (अमेरिका-जर्मनी) से आयात करना पड़ता था। स्वदेश में बने डिटेक्टर और अलार्म में 80% से ज्यादा स्वदेशी कम्पोनेंट्स इस्तेमाल हुए हैं। अलार्म में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटक का इस्तेमाल रासायनिक हमले की पहचान करने में ACADA एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इन डिटेक्टर को दुनिया भर में उपलब्ध तीन निर्माताओं (अमेरिका-जर्मनी) से आयात करना पड़ता था। स्वदेश में बने डिटेक्टर और अलार्म में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटक इस्तेमाल हुए हैं। ग्वालियर DRDE के अधिकारियों ने बताया कि भारत दुनिया में ऐसा चौथा देश है, जिसके पास इस तरह की प्रौद्योगिकी है। स्वदेशी रूप से विकसित किए गए अकाड़ा से जहां देश की सेनाओं और सुरक्षा बलों के अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। वहीं इसका लंबे समय तक इस्तेमाल, बेहतर रख-रखाव, स्पेयर पार्ट्स/एक्सेसरीज की आपूर्ति आदि सुनिश्चित हो सकेगी। स्वदेशी रूप से विकसित किया गया यह उत्पाद आई-डीडीएम, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्म निर्भर भारत’ मिशन की दिशा में एक लंबी छलांग है। 2015 में कामयाबी मिली बता दें ‘अकाडा’ को विकसित करने वाले साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाले हैं। उन्होंने 2010 में ‘अकाडा’ को विकसित करने पर फोकस किया था। साल 2015 में उनको कामयाबी मिली। डिवाइस बनाने में 25 से 30 लाख रुपये का खर्च आया है। काम के प्रति साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम की लगन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2022 में वह अपने प्रोजेक्ट के चलते बेंगलुरु में थे। उसी समय परिवार में गमी हो गई थी। ऐसे में वह अंत्येष्टि कार्यक्रम में नहीं आ सके थे। बाद में सिर्फ कुछ घंटों के लिए आए और वापस प्रोजेक्ट पर काम करने चले गए। डिटेक्टर-अलार्म में 80% से ज्यादा स्वदेशी कम्पोनेंट्स इस्तेमाल DRDE के साइंटिस्ट सुशील बाथम द्वारा विकसित स्वचलित रासायनिक युद्ध डिटेक्टर (ACADA) ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म सेना में शामिल होने जा रहा है। रासायनिक हमले की स्थिति में जानमाल की हानि कम करने के लिए इसकी तत्काल पहचान जरूरी है। रासायनिक हमले की पहचान करने में ACADA अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इन डिटेक्टर को दुनिया भर में उपलब्ध तीन निर्माताओं (अमेरिका-जर्मनी) से आयात करना पड़ता था। स्वदेश में बने डिटेक्टर और अलार्म में 80% से ज्यादा स्वदेशी कम्पोनेंट्स इस्तेमाल हुए हैं। भारत, दुनिया का चौथा देश जिसके पास इस तरह की तकनीक ग्वालियर DRDE के निदेशक डॉ. मनमोहन परीडा ने बताया कि भारत दुनिया में ऐसा चौथा देश है, जिसके पास इस तरह की तकनीक है। स्वदेशी रूप से विकसित किए गए ACADA से जहां देश की सेनाओं और सुरक्षा बलों की अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक जरूरतें पूरी होंगी, वहीं इसका लंबे समय तक इस्तेमाल, बेहतर रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स/एक्सेसरीज की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी। स्वदेशी रूप से विकसित किया गया यह उत्पाद आई-डीडीएम, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्म निर्भर भारत’ मिशन की दिशा में एक लंबी छलांग है। डॉ. बाथम का 2010 से ACADA को विकसित करने पर फोकस ACADA को विकसित करने वाले साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाले हैं। उन्होंने 2010 में इसे विकसित करने पर फोकस किया था। साल 2015 में उन्हें ये कामयाबी मिली। डिवाइस बनाने में 25 से 30 लाख रुपए का खर्च आया है। काम के प्रति साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम की लगन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2022 में वह अपने प्रोजेक्ट के चलते बेंगलुरु में थे। उसी समय परिवार में गमी हो गई थी। ऐसे में वह अंत्येष्टि कार्यक्रम में नहीं आ सके। बाद में सिर्फ कुछ घंटों के लिए आए और वापस अपने प्रोजेक्ट पर लग गए।  

इंदौर में आज से दुकानों पर दूध की बिक्री 62 रुपये प्रति लीटरऔर बंदी का दूध 60 रुपये प्रति लीटर से मिलेगा

 इंदौर एक मार्च शनिवार से इंदौर शहर में दूध के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो गई है। शहर में दूध व्यापारी संगठनों ने दाम बढ़ाने की घोषणा की है। इंदौर दूध विक्रेता संघ और मप्र दुग्ध व्यवसायी संघ ने घोषणा की है कि एक मार्च से दुकानों पर दूध की बिक्री 62 रुपये प्रति लीटर के दाम पर और बंदी का दूध 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिलेगा। बंदी के दूध में सेवा शुल्क अलग से लिया जाएगा। मार्च से लागू ये दूध के दाम अगस्त तक प्रभावी होंगे। इंदौर दूध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भारत मथुरावाला के अनुसार दूध के दाम बढ़ाने से विक्रेताओं को कोई लाभ नहीं होगा। गर्मी में चारे, पशु आहार की कमी होती है और दाम बढ़ते हैं। दूध की लागत बढ़ने के साथ किसानों के हित में दाम बढ़ाना आवश्यक है। बढ़े दामों का पैसा भी किसान के पास जाएगा। मूल्य वृद्धि के पीछे कारण इंदौर दूध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भारत मथुरावाला ने नवभारत टाइम्स को बताया कि इस मूल्य वृद्धि से विक्रेताओं को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होगा। गर्मी के मौसम में चारे और पशु आहार की कीमतें बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत में वृद्धि होती है। इसके चलते किसानों को उनकी लागत निकालने और मुनाफा के लिए दूध की कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो जाता है। संघ के अनुसार, दूध के दामों में की गई यह बढ़ोतरी पूरी तरह से किसानों के हित में है और इसका सीधा लाभ उन्हें ही मिलेगा। साल में दो बार होती है कीमतों में वृद्धि इंदौर में दूध के दाम साल में दो बार बढाए – घटाए जाते हैं। गर्मी के मौसम में जब पशु आहार महंगा होता है और दूध का उत्पादन कम हो जाता है, तब कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। वहीं, बारिश और सर्दियों के मौसम में चारे की उपलब्धता बढ़ने और दूध उत्पादन में इजाफा होने के कारण कीमतों में गिरावट आती है। पिछले वर्षों में भी यही ट्रेंड देखा गया है, जब गर्मियों में दाम बढ़ाए गए और सर्दियों में उन्हें कम किया गया। पिछले वर्षों में दूध के दामों का बदलाव बीते पांच वर्षों में इंदौर में दूध की कीमतों में कई बार बदलाव हुआ है। मार्च 2024 में दूध के दामों में 4 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी, जबकि सितंबर में इन्हें 2 रुपये प्रति लीटर कम कर दिया गया था। इसी तरह, हर साल बाजार की स्थिति और उत्पादन लागत के आधार पर दूध की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जाता है।

सरकार ने मिसिंग क्रेडिट की राशि अभिदाताओं के खातों में जमा करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया: उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मिसिंग क्रेडिट की राशि अभिदाताओं के खातों में जमा करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब अशंदायी पेंशन योजना (NPS) में मिसिंग क्रेडिट की राशि अभिदाता के खातों में जमा किये जायेगें। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया है कि अभिदाताओं के खातों में मिसिंग क्रेडिट की राशि जमा करने के लिये 15 मार्च 2025 तक विशेष अभियान चलेगा। इस संबंध में विभागीय स्तर पर निर्देश भी जारी कर दिये गये हैं। राज्य शासन के अधीन सिविल सेवा के पदों पर एक जनवरी 2005 को या उसके बाद नियुक्त होने वाले शासकीय सेवकों पर अंशदायी पेंशन योजना (एनपीएस) लागू है। इसमें शासकीय सेवकों के वेतन से कर्मचारी अंशदान एवं शासकीय अंशदान संबंधित के परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नम्बर (प्रान) में जमा किया जाता है। ऐसे शासकीय कर्मचारी, जो प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं और उनके अंशदान उनके प्रान में जमा नहीं हुए है, ऐसे प्रकरणों में मिसिंग क्रेडिट (गुमसुदा कटौत्री) की समस्या होती है। गुमशुदा कटौत्री की समस्या के समाधान के लिए संचालनालय कोष एवं लेखा ‌द्वारा आईएफएमआईएस में सुविधा विकसित की गयी है। ऐसे शासकीय सेवक, जो प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ है, उनके अंशदान के चालानों का विवरण कोषालय अधिकारी द्वारा आईएफएमआईएस में भरा जायेगा एवं रिफण्ड देयक तैयार कर अंशदान जमा करने की कार्यवाही की जाएगी। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी वल्लभ भवन राजीव सिंह पवैया ने बताया कि वल्लभ कोषालय द्वारा जो भी प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ शासकीय सेवक जिनके ‌द्वारा चालान भारतीय स्टेट बैंक की टी.टी.नगर, जहांगीराबाद,एम.पी.नगर, पंचानन, एवं बरखेड़ी की शाखाओं में जमा किये जायेगे उनका चालान का सत्यापन बल्लभ भवन कोषालय सतपुड़ा भवन द्वारा किया जायेगा। इसके साथ ही प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ शासकीय सेवक जिनके ‌द्वारा चालान स्टेट बैंक शाखा विन्ध्याचल, शिवाजी नगर, एच.ई.टी. एस.एम.ई. गोविन्दपुरा, महावीर नगर, हबीबगंज शाखा में जमा किए गये है, वह शासकीय सेवक विन्ध्याचल कोषालय, विन्ध्याचल भवन में उपस्थित होकर चालान का सत्यापन करा सकते हैं।  

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