LATEST NEWS

चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने पुनरीक्षित वेतनमान तथा एनपीए गणना प्रावधानों के लिये उप मुख्यमंत्री शुक्ल का व्यक्त किया आभार

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने और स्वास्थ्य मानकों में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए कृत-संकल्पित है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश ने ऊर्जा, स्वच्छता, कृषि और सिंचाई जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि चिकित्सा शिक्षकों एवं चिकित्सकों के समर्पित प्रयासों से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी यह लक्ष्य हम अवश्य प्राप्त करेंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से भोपाल स्थित निवास कार्यालय पर चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने भेंट कर आभार व्यक्त किया। चिकित्सकीय समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सकीय समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनकी सुविधाओं एवं हितों की रक्षा हेतु आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा कार्मिकों की सेवा संबंधी विषयों और अन्य समस्याओं के समाधान के लिये उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति नियमित रूप से बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण और चिकित्सकीय कार्मिकों के हित संरक्षण से संबंधित विषयों पर चर्चा करेगी और आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करेगी, जिन पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने चिकित्सकीय स्टॉफ को करें प्रेरित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा कुशल चिकित्सकीय मैन पॉवर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे सभी चिकित्सा कार्मिकों को स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा प्रदाय के लिए प्रेरित करें। चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने चिकित्सा महाविद्यालयों एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के शासकीय एवं स्वशासी चिकित्सा शिक्षकों और दंत चिकित्सकों को पुनरीक्षित वेतनमान (सातवें वेतनमान) का वास्तविक लाभ 1 जनवरी 2016 से प्रदान करने तथा एनपीए (नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस) की गणना सातवें वेतनमान के अनुरूप करने के आदेश के लिए उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आभार जताया। इस अवसर पर चिकित्सा महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. गजेंद्र नाथ कौशल, डॉ. रितेश तंवर, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. महेश कुमार खाचरिया, डॉ. शमिख रज़ा, डॉ. आदित्य सक्सेना, डॉ. राहुल रोकड़ें, डॉ. नीरज खरे, डॉ. राजेश टिक्कस, डॉ. अनुराधा चौधरी, डॉ. पुनीत कुमार आचार्य, डॉ. जी. पी. भनारिया, डॉ. विवेक चौकसे सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विद्यार्थियों और युवाओं को किया संबोधित

भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में गढ़े हैं नए कीर्तिमान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विज्ञान आधारित कार्यप्रणाली, जिज्ञासु प्रवृत्ति और नवीनतम तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहन से देश को मिली उपलब्धि भारत में वैज्ञानिक व्यवस्थाओं के विकास की प्राचीन परंपरा विद्यमान है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विद्यार्थियों और युवाओं को किया संबोधित “विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व में भारतीय युवाओं को सशक्त बनाने” की थीम पर विज्ञान भवन में आयोजित हुआ कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्टेम एजुकेशन का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान मॉडल और नवाचारों पर लगाई प्रदर्शनी का किया अवलोकन मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद तथा वीआईटी भोपाल के मध्य, अकादमिक और वैज्ञानिक क्षेत्र में सहयोग के लिए हुआ एम.ओ.यू. मुख्यमंत्री ने प्रौद्योगिकी परिषद के छह पोस्टरों का किया विमोचन मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी की पत्रिका “रचना” का किया विमोचन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विज्ञान के आधार पर व्यवस्थित कार्यप्रणाली, जिज्ञासु प्रवृत्ति को प्रोत्साहन और नवीनतम तकनीकों के उपयोग ने देश को विश्व के शीर्ष राष्ट्रों में गिने जाने का मार्ग प्रशस्त किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है। राज्य सरकार शिक्षा सहित शासकीय कार्य प्रणाली और सामान्य व्यवस्थाओं के संचालन में विज्ञान का अधिक से अधिक उपयोग कर आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर “विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व में भारतीय युवाओं को सशक्त बनाने” की थीम पर भोपाल में विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और युवाओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पूर्व उन्होंने नोबल पुरूस्कार से सम्मानित महान वैज्ञानिक सीवी रमन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्टेम एजुकेशन” का विज्ञान भवन में शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेंटर में प्रस्तुत मॉडल तथा विद्यार्थियों को विज्ञान के विभिन्न सिद्धांत, सरलता से समझाने में सहायक उपकरणों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए मॉडल और नवाचारों के संबंध में उनसे चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक पेड़ माँ के नाम के अंतर्गत वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीकमगढ़ से आए प्रगतिशील कृषक पूरनलाल कुशवाहा से भेंट कर उनके द्वारा सिंचाई के लिए विकसित किए गए पवन और पानी से चलने वाले पंप का अवलोकन कर जानकारी भी प्राप्त की। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल, निदेशक विक्रमादित्य शोधपीठ तथा मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फसल बीमा के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम, 13वें मध्यप्रदेश कारीगर विज्ञान सम्मेलन, विज्ञान मंथन यात्रा, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, विक्रमोत्सव-2025 के अंतर्गत राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन और विज्ञान उत्सव तथा पेटेंट और प्रौद्योगिकी आधारित प्रशिक्षण व केंद्र स्थापना पर विकसित पोस्टरों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद तथा वीआईटी भोपाल के मध्य अकादमिक और वैज्ञानिक क्षेत्र में परस्पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी की पत्रिका “रचना” का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का स्वर्णिम काल चल रहा है। भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नए कीर्तिमान गढ़े हैं, जिसमें कोविड के दौर में टीकाकरण और डिजिटल पेमेंट्स जैसे अनेकों नवाचार और व्यवस्थाएं शामिल हैं। कोविड काल में अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में व्यवस्थाएं प्रभावित हुई, लेकिन भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में यही कार्य बड़ी ही निपुणता और प्रतिबद्धता से पूर्ण किया गया। भारत में जिज्ञासा और विज्ञान के आधार पर व्यवस्थाओं के विकास की प्राचीन परंपरा रही है। पश्चिम में दूरबीन के अविष्कार के पहले से भारत में नवग्रह की पूजा की जाती रही है। भारत ने विश्व में सबसे पहले खगोल विज्ञान के अनेकों सिद्धांतों को प्रतिपादित किया। भगवान श्रीकृष्ण ने ‘यत पिंडे-तत् ब्रह्माण्डे’ के माध्यम से सृष्टि और मानव शरीर की एकरूपता का संदेश दिया। इसी प्रकार चरैवेति-चरैवेति में समय की निरंतरता का बोध होता है। गुरुत्वाकर्षण का नियम भी प्राचीन भारतीय शास्त्रों में निहित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ब्रह्माण्ड में कई रहस्य बिखरे हुए है, इन्हें खोजना और समस्याओं का हल करना ही विज्ञान है। महान भारतीय वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट (सीवी) रमन ने 28 फरवरी 1928 को रमन प्रभाव की खोज की थी। इसीलिए इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय ज्ञान परंपरा और भारत में विकसित खगोल शास्त्र के विभिन्न सिद्धांतों पर विद्यार्थियों से संवाद किया। महानिदेशक मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद अनिल कोठारी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विज्ञान एवं नवाचार, अनुसंधान और स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा राज्य में विज्ञान के प्रति जागरूकता तथा विज्ञान नवाचार में शोध को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन ने विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में स्वर्णिम अध्याय लिखा है।  

भारत की इकोनॉमी में दिखी मजबूती, उम्मीद से बेहतर रही जीडीपी ग्रोथ

नई दिल्ली  वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2024) में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.2% रही। यह कमी मुख्य रूप से निर्माण और खनन क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में 9.5% की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं, मौजूदा चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2024) में 5.6% की ग्रोथ हुई थी। जीडीपी ग्रोथ का डेटा बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने सालाना आधार पर कमजोर प्रदर्शन किया है। हालांकि, तिमाही आधार पर इसमें रिवाइल के संकेत नजर आ रहे हैं। NSO ने 2024-25 के लिए विकास दर 6.5% रहने का अनुमान लगाया है। जनवरी 2025 में जारी पहली अग्रिम अनुमान में इसे 6.4% आंका गया था। साथ ही, 2023-24 के लिए GDP वृद्धि दर को संशोधित कर 9.2% कर दिया गया है, जो पहले 8.2% आंकी गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही की जीडीपी ग्रोथ आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के अनुमान के अनुसार ही है। लेकिन जुलाई-सितंबर तिमाही के संशोधित 5.6 फीसदी की वृद्धि दर से अधिक है। इकोनॉमिक एक्सपर्ट का अनुमान था कि सरकार के बढ़ते खर्च और शहरी खपत में सुधार के कारण मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 6.2 से 6.3 फीसदी के बीच रह सकती है। पिछले तिमाही में आई थी जीडीपी में गिरावट हालांकि सरकार ने अनुमान लगाया कि तीसरी तिमाही में 6.3 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट रह सकती है, इसलिए अनुमान से कम थोड़ा रहा है. लेकिन तिमाही दर तिमाही आधार पर देश की विकास दर में बढ़ोतरी देखने को मिली है, क्योंकि सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 5.4 फीसदी पर थी. जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान इकोनॉमी में स्लोडाउन देखने को मिला था. जो सात तिमाहियों में सबसे धीमी थी. लेकिन अब सुधार के संकेत मिल रहे हैं. सालाना आधार पर कम हुई जीडीपी ग्रोथ दिसंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को सालाना आधार पर देखें तो Q3 GDP ग्रोथ 8.6 फीसदी से घटकर 6.2 फीसदी पर आ गई है. नेशनल स्टैटिक्स ऑफिस (NSO) के आकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में भारत की ग्रोथ रेट 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है.

वेतन वृद्धि, मातृत्व और पितृत्व अवकाश, सेवा सुरक्षा के प्रावधान नवीन नीति में शामिल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की नवीन संविदा कर्मचारी नीति-2025 का निर्धारण संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए किया गया है। नवीन नीति से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में स्थायित्व आएगा और कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा। इस नीति का लाभ 32 हज़ार संविदा कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रूप से मिलेगा और उनके परिवारों सहित लगभग 1.5 लाख लोग इससे लाभान्वित होंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह निर्णय प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुचारु बनाने में सहायक होगा। उन्होंने समस्त संविदा कर्मचारियों से अपील की है कि सभी समर्पित भाव से सेवा करें, जिससे प्रदेश के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें। एनएचएम की नवीन नीति में संविदा कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। अब कर्मचारियों को हर वर्ष अनुबंध के नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध वार्षिक सेवा आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली लागू की गई है। कर्मचारियों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निवारण के लिए एक अपीलीय अनुक्रम स्थापित किया गया है। संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्ति का अधिकार केवल मिशन संचालक एनएचएम के पास होगा और यह केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के बाद ही किया जा सकेगा। नवीन नीति में वेतन वृद्धि को भी एक सुव्यवस्थित ढांचे में लाया गया है। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर नियमित वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। गर्भवती महिलाओं को नियुक्ति के समय प्रसव के छह सप्ताह बाद (सातवें सप्ताह से) कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे वे मातृत्व के शुरुआती दिनों में समुचित देखभाल प्राप्त कर सकेंगी। इसी तरह, मातृत्व अवकाश और पितृत्व अवकाश के प्रावधान भी संविदा कर्मचारियों के लिए लागू किए गए हैं। आकस्मिक परिस्थितियों में सहायता के लिए अनुकंपा नियुक्ति और एक्स-ग्रेशिया के प्रावधान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारु व्यवस्था के लिए संविदा कर्मचारियों को अंतर-जिला स्थानांतरण की सुविधा प्रदान की गई है। जिला स्वास्थ्य समिति को जिले में स्थानांतरण का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्पष्ट शिकायत निवारण अनुक्रम निर्धारित किया गया है। आकस्मिक परिस्थितियों में परिवार को सहायता प्रदान करने के लिए अनुकंपा नियुक्ति और एक्स-ग्रेशिया सहायता राशि के प्रावधान किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार विशेष अवकाश की सुविधा भी संविदा कर्मचारियों को प्रदान की जाएगी। नवीन नीति में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ जांच चल रही हो, तो उसे 50% वेतन प्रदान किया जाएगा। स्थानांतरण प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। साथ ही, वेतन असमानता की समस्या को दूर करते हुए सभी संविदा कर्मचारियों के लिए वेतन समानता सुनिश्चित की गई है।  

नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में सातवां दीक्षा समारोह आयोजित, राज्यपाल ने 1029 छात्रों को उपाधि प्रदान की

जबलपुर नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय का सातवां दीक्षा समारोह शुक्रवार को आयोजित किया गया। विवि के सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि प्रदेश के राज्यपाल व विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मंगू भाई पटेल की गरिमामय उपस्थिति में 1029 छात्रों को उपाधि प्रदान की। साथ ही 12 छात्र स्वर्ण पदक से नवाजे गए। समारोह में पशुपालन मंत्री लखन पटेल विशिष्ट अतिथि रहे। दीक्षा भाषण कुलगुरु डॉ बीएन त्रिपाठी शेरे कश्मीर एग्रीकल्चर साइंस व टेक्नोलाजी विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर मनदीप शर्मा भी मंचासीन थे। तीन पीएचडी योग्यता प्रमाण पत्र शामिल सुबह 11:00 बजे आरंभ सातवें दीक्षा समारोह में शैक्षणिक सत्र 21-22, 22-23 तथा 23-24 के छात्रों को उपाधि प्रदान की गई। जिसमें बीवीएससी के 678, एमबीएससी के 229, पीएचडी 34, बीएफसी के 76, एमएफएससी के 12, 12 स्वर्ण पदक, तीन पीएचडी योग्यता प्रमाण पत्र शामिल हैं। साथ ही आरवीसी में चयनित पूर्व छात्राओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इस मौके पर कुलसचिव डॉ एसएस तोमर, उपकुलसचिव डॉ रामकिंकर मिश्रा सहित अन्य मंचासीन थे।

इंदौर निगम के राजस्व अधिकारी के तीन जगह स्थित आवासों पर ईओडब्ल्यू का छापा, पहले से निलंबित है अफसर

इंदौर  आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के अधिकारियों ने आज सुबह दो-दो पत्नियों (Wives) के पति (Husband) नगर निगम (Municipal council) के राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के तीन आवासों पर छापामार कार्रवाई करते हुए करोड़ों की अनुपातहीन सम्पत्ति का खुलासा किया है। छापे में तीन अलग-अलग क्षेत्रों में बहुुमंजिला मकानों, प्लाट, कृषि भूमि का खुलासा हुआ है।  ईओडब्ल्यू की टीम ने शुक्रवार को इंदौर नगर निगम से सस्पेंड एआरओ राजेश परमार के घर छापा मारा है. परमार के तीन ठिकानों पर एक्शन जारी है. आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापा मारा गया है. यहां स्पष्ट कर दें कि अनियमितता के चलते कुछ दिन पहले ही परमार नगर निगम से सस्पेंड हुए थे. इंदौर के आवास कॉलोनी में मुख्य कारवाई चल रही है. राजेश परमार जोन 16 के एआरओ थे. कार्रवाई के लिए टीम सुबह ही पहुंच गई थी, इंदौर स्थित निवास स्थान पर.   EOW की टीम को बंद मिला परमार का ऑफिस इंदौर के बिजलपुर इलाके में स्थित आवास कॉलोनी में नगर निगम के राजस्व अधिकारी राजेश परमार रहते हैं, जहां टीम ने सर्चिंग शुरू कर दी है. वहीं, आसपास के लोगों से भी लगातार पूछताछ जारी है. जानकारी के ईओडब्ल्यू की टीम जब परमार के ऑफिस पहुंची, तब वह बंद मिला. इसके बाद उनके घर पर ही सारे दस्तावेजों की छानबीन जारी है. बेलदार से राजस्व अधिकारी तक का सफर ईओडब्ल्यू से मिली जानकारी के मुताबिक राजेश परमार ने अपने करियर की शुरुआत बेलदार के पद से की थी और बाद में प्रमोशन होते हुए सहायक राजस्व अधिकारी के पद तक पहुंच गया। हाल ही में उसे वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित किया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि उनके पास करोड़ों रुपए की संपत्ति है, जो उसकी आय और करियर के अनुसार अनुकूल नहीं है। प्रारंभिक तौर पर चार मकानों के बारे में जानकारी मिली है, जिनमें से दो पर कार्रवाई चल रही है। राजेश ने एक मकान करीब 25 लाख रुपए में खरीदा था और बाद में उस पर एक आलीशान भवन बना लिया। एक मकान में माता-पिता, दूसरे में पूर्व पत्नी एसपी आरएस यादव के मुताबिक एक मकान में राजेश के माता-पिता रहते हैं, जबकि दूसरे मकान में पूर्व पत्नी रहती है। वर्तमान में उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहरी जांच की जा रही है और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में और भी संपत्तियों का पता चल सकेगा। दो बार निलंबित हुआ राजेश परमार राजेश परमार संपत्तिकर असेसमेंट में गड़बड़ी के कारण 10 फरवरी को सस्पेंड हो गया था। जोन 16 पर एआरओ रहते परमार ने संपत्ति कर असेसमेंट में गड़बड़ी कर कम टैक्स लिया था और उसका खुलासा तब हुआ जब निगमायुक्त शिवम वर्मा ने राजस्व वसूली को लेकर समीक्षा की थी। परमार की गड़बड़ी पकड़ में आते ही निगमायुक्त वर्मा ने उन्हें सस्पेंड कर ट्रेचिंग ग्राउंड भेज दिया। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी थी। जो फिलहाल चल रही है। बताया जा रहा है कि परमार इससे पहले भी एक बार सस्पेंड हुआ था, जब उसने तत्कालीन अपर आयुक्त एसके चैतन्य के खिलाफ नारेबाजी की थी। जोन-8 पर एआरओ रहते उन्होंने चैतन्य के खिलाफ नारेबाजी की थई। बगैर अनुमति विदेश यात्रा भी की इंदौर नगर निगम जोन क्रमांक 8 में एआरओ रहते हुए राजेश परमार ने नए खाते खोले और राशि जमा कर नगर निगम को करोड़ों की राशि की चपत लगाई थी। वे बगैर अनुमति पांच बार विदेश यात्रा भी कर चुके हैं। परमार के बारे में कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी महापौर, निगमायुक्त, राजस्व समिति प्रभारी सहित कई अधिकारियों को शिकायत की थी बताया जा रहा है कि राजेश परमार मूलतः दरोगा है, लेकिन जोड़-तोड़ करके प्रभारी एआरओ के पद तक पहुंच गया। जोन क्रमांक 19 में भी पदस्थ रहते हुए शुल्क की वसूली में गड़बड़ी के आरोप परमार पर लगे थे।

Chamoli में Glacier टूटने से भारी तबाही, 57 मजदूर इस हादसे का शिकार हुए , 10 को रेस्क्यू कर लिया गया

चमोली उत्तराखंड के चमोली में एक बड़ी दुर्घटना हो गई है. यहां माणा गांव में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही मच गई है, जिसकी चपेट में आने से 47 मजदूर बर्फ में दब गए हैं. बता दें कि 57 मजदूर इस हादसे का शिकार हुए थे, लेकिन 10 को रेस्क्यू कर लिया गया है. बाकी 47 की तलाश जारी है. हादसे के बाद मौके पर प्रशासन और BRO की टीम रवाना हो गई है. फिलहाल ITBP और गढ़वाल स्काउट की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई है. बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त घटनास्थल पर बड़ी तादाद में प्राइवेट ठेकेदार के मजदूर काम कर रहे थे. सभी BRO के कांट्रेक्ट में काम कर रहे ठेकेदार के मजदूर थे. एवलांच आने पर सभी इधर-उधर भागने लगे. इनमें से कुछ बचने में कामयाब हो गए तो वहीं 57 मजदूर बर्फ की चपेट में आ गए. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर इस हादसे पर दुख जारी किया है. उन्होंने कहा,’जनपद चमोली में माणा गांव के निकट BRO द्वारा संचालित निर्माण कार्य के दौरान हिमस्खलन की वजह से कई मजदूरों के दबने का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ. ITBP, BRO और अन्य बचाव दलों द्वारा राहत एवं बचाव कार्य संचालित किया जा रहा है. भगवान बदरी विशाल से सभी श्रमिक भाइयों के सुरक्षित होने की प्रार्थना करता हूं.’ बता दें कि पिछले दो दिनों से पहाड़ों में मौसम काफी खराब है. उत्तराखंड के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के भी कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है. कहीं, नदियां उफान पर हैं तो कहीं नालों में गाड़ियां बह रही हैं. भीषण बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में तबाही मच गई है. प्रदेश के कुल्लू जिले से तो तबाही की हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं. यहां बारिश ने ऐसा कहर ढाया है कि नदी-नाले उफान पर आ गए हैं. आज (28 फरवरी) ही हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और मंडी जिले से भी तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं. मंडी जिले के ओट इलाके में लैंडस्लाइड के बाद चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाइवे बंद हो गया है तो वहीं कुल्लू में नालों में बारिश के पानी के कारण आए ओवरफ्लो में गाड़ियां बह जाने का मामला सामने आया है. हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है. भारी बर्फबारी के बाद कश्मीर में स्कूलों की छुट्टियां 7 मार्च तक बढ़ाई गईं भारी बर्फबारी के बाद कश्मीर में स्कूलों की छुट्टियां 7 मार्च तक बढ़ाई गईं हैं। आप को बता दें कि कश्मीर में कुछ दिन से हो रही भारी बर्फबारी के कारण स्कूलों की छुट्टियां 7 मार्च तक बढ़ा दी गई हैं। यह निर्णय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने आम जनता को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।    

CAG की रिपोर्ट ने खोली दिल्ली की वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल, मोहल्ला क्लीनिक में टॉयलेट नहीं, अस्पताल में डॉक्टर नहीं

नई दिल्ली दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मिले 787.91 करोड़ रुपये में से सिर्फ 582.84 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जबकि बाकी राशि बिना उपयोग के रह गई। इसके चलते कोरोना संकट के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही। फंड की अनदेखी और भ्रष्टाचार के आरोप रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती और वेतन के लिए मिले 52 करोड़ रुपये में से 30.52 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए। इससे साफ है कि सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त भर्ती नहीं की, जिससे महामारी के दौरान लोगों को इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसी तरह दवाओं, पीपीई किट और अन्य मेडिकल सप्लाई के लिए मिले 119.85 करोड़ में से 83.14 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हुए। सरकारी अस्पतालों में बेड की भारी कमी दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 32,000 नए बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 1,357 बेड ही जोड़े गए, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 4.24% है। राजधानी के कई अस्पतालों में बेड की भारी कमी देखी गई, जहां बेड ऑक्यूपेंसी 101% से 189% तक रही, यानी एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखा गया या मरीजों को फर्श पर इलाज कराना पड़ा। अस्पतालों की परियोजनाओं में देरी और लागत में भारी इजाफा रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिल्ली में तीन नए अस्पताल बनाए गए, लेकिन सभी प्रोजेक्ट पहले की सरकार के कार्यकाल में शुरू हुए थे। इनके निर्माण में 5 से 6 साल तक की देरी हुई और लागत भी बढ़ गई।     इंदिरा गांधी अस्पताल: 5 साल की देरी, लागत 314.9 करोड़ रुपये बढ़ी।     बुराड़ी अस्पताल: 6 साल की देरी, लागत 41.26 करोड़ रुपये बढ़ी।     एमए डेंटल अस्पताल (फेज-2): 3 साल की देरी, लागत 26.36 करोड़ रुपये बढ़ी। डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी-     दिल्ली के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों में 8,194 पद खाली पड़े हैं।     नर्सिंग स्टाफ की 21% और पैरामेडिकल स्टाफ की 38% कमी है।     राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की 50-74% कमी पाई गई।     नर्सिंग स्टाफ की 73-96% तक भारी कमी दर्ज की गई। सर्जरी के लिए लंबा इंतजार, कई उपकरण खराब     लोक नायक अस्पताल में बड़ी सर्जरी के लिए 2-3 महीने और बर्न व प्लास्टिक सर्जरी के लिए 6-8 महीने का इंतजार करना पड़ा।     चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय (CNBC) में पीडियाट्रिक सर्जरी के लिए 12 महीने का इंतजार करना पड़ा।     CNBC, RGSSH और JSSH जैसे अस्पतालों में कई एक्स-रे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीनें बेकार पड़ी रहीं। जरूरी सेवाओं की कमी और बदहाल मोहल्ला क्लीनिक-     27 अस्पतालों में से 14 में ICU सेवा उपलब्ध नहीं थी।     16 अस्पतालों में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं थी।     8 अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं थी।     12 अस्पतालों में एंबुलेंस की सुविधा नहीं थी।     CATS एंबुलेंस भी जरूरी उपकरणों के बिना चलाई जा रही थीं। मोहल्ला क्लीनिकों की स्थिति भी खराब पाई गई     21 मोहल्ला क्लीनिकों में शौचालय नहीं थे।     15 क्लीनिकों में बिजली बैकअप की सुविधा नहीं थी।     6 क्लीनिकों में डॉक्टरों के लिए टेबल तक नहीं थी।     12 क्लीनिकों में दिव्यांगों के लिए कोई सुविधा नहीं थी। CAG रिपोर्ट ने दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर कर दी है। कोविड काल में सरकार द्वारा मिले फंड का सही इस्तेमाल नहीं करना, अस्पतालों में जरूरी सुविधाओं की भारी कमी, स्टाफ की भारी किल्लत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी इस लापरवाही को लेकर अब सरकार को जवाब देना होगा।

महोबा : कानपुर-सागर हाईवे पर भीषण हादसा, ट्रक की टक्कर से कार सवार महिला सहित चार की मौत, सभी मृतक भोपाल निवासी

भोपाल /महोबा  यूपी के महोबा में भीषण सड़क हादसे में महाकुंभ से लौटते 4 की मौत। यूपी के महोबा जिले में कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे भीषण सड़क हादसा हो गया। इसमें महाकुंभ से श्रद्धालुओं को लेकर भोपाल को लौटती एक तेज रफ्तार ऑल्टो कार ट्रक के नीचे घुस गई।हादसे में 3 युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, कार सवार घायल महिला की जिला अस्पताल में उपचार दौरान मौत हो गई। पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में लिया, जबकि चालक फरार हो गया। ट्रक में फंसी ऑल्टो जेसीबी की मदद से निकली महोबा में हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले चारों लोग मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के निवासी थे। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हादसे के दौरान हुई टक्कर के बाद ट्रक कार को करीब 50 मीटर तक घसीटते हुए ले गया। मिली जानकारी के मुताबिक, भोपाल निवासी चारों लोग एक साथ कार से प्रयागराज महाकुंभ गए थे। शुक्रवार की सुबह ये लोग अल्टो कार से वापस लौटकर भोपाल जा रहे थे। रास्ते में कानपुर सागर हाईवे पर थाना कस्बा श्रीनगर के पास बने बरा नाला के पास तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार में टक्कर मार दी और इसे 50 मीटर तक घसीटता हुआ ले गया। नरेश नागर पुत्र सिद्धनाथ, अवधेश नागर पुत्र बाबूलाल निवासीगण हिनौती सड़क बैसरिया राेड भोपाल अन्य लोगों के साथ प्रयागराज महाकुंभ गए थे। शुक्रवार की सुबह ये लोग अल्टो कार से वापस लौटकर भोपाल जा रहे थे। रास्ते में कानपुर सागर हाईवे पर थाना कस्बा श्रीनगर के पास बने बरा नाला के पास तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार में टक्कर मार दी और इसे 50 मीटर तक घसीटता हुआ ले गया। ट्रक पुलिस के कब्जे में, चालक फरार     पुलिस ने ट्रक को कब्जे में ले लिया, जबकि उसका चालक फरार हो गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि चालक को झपकी आने से कार गलत साइड में पहुंच गई जिससे टक्कर हो गई।     भोपाल के हिनौती सड़क बैसरिया राेड निवासी नरेश नागर पुत्र सिद्धनाथ, अवधेश नागर पुत्र बाबूलाल अन्य लोगों के साथ प्रयागराज महाकुंभ गए थे। शुक्रवार की सुबह सभी आल्टो कार से लौट रहे थे।     हादसे में नरेश नागर, अवधेश व चालक भूरा गुर्जर निवासी बरखेड़ी थाना नजीराबाद जिला भोपाल की मौके पर ही मौत हो गई। 23 वर्षीय पूजा नागर निवासी अरनिया माता थाना नीमच जिला राजगढ़ को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया जहां उपचार दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। तीन लोगों की मौके पर मौत हादसे में नरेश नागर, अवधेश व चालक भूरा गुर्जर निवासी बरखेड़ी थाना नजीराबाद जिला भोपाल की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि 23 वर्षीय पूजा नागर निवासी अरनिया माता थाना नीमच जिला राजगढ़ को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। यहां उपचार दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। क्षतिग्रस्त कार को क्रेन मशीन से सड़क से अलग कराया गया। चालक को नींद आने की वजह से हुआ हादसा एसपी पलाश बंसल ने बताया क‍ि मौके पर तत्काल एंबुलेंस, पुलिस को भेजा गया था। अल्टो कार व ट्रक में भिड़ंत हुई है। इसमें चार यात्री सवार थे और चारों मप्र राज्य के निवासी थे। प्रथम दृष्टया पता चला है कि चालक को नींद आने के कारण यह दूसरे साइड में चले गए। जिससे यह दुर्घटना हुई। तीन लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। दिवंगत के स्वजन को सूचित कर दिया गया है। ट्रक को कब्जे में लेकर मुकदमा दर्ज कराकर अग्रिम कार्रवाई कराई जा रही है। चालक को झपकी आने से हुआ यह भीषण सड़क हादसा हादसे और हाईवे पर जाम लगने की सूचना मिलते ही एसपी पलाश बंसल ने मौके पर पहुंचे। एसपी ने मौके पर घटना की जानकारी ली। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर उनके स्वजन को सूचना दी है। एसपी पलाश बंसल ने बताया क‍ि मौके पर तत्काल एंबुलेंस, पुलिस को भेजा गया था। अल्टो कार व ट्रक में भिड़ंत हुई है। इसमें चार यात्री सवार थे और चारों मप्र राज्य के निवासी थे। प्रथम दृष्टया पता चला है कि चालक को नींद आने के कारण यह दूसरे साइड में चले गए। जिससे यह दुर्घटना हुई। तीन लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। दिवंगत के स्वजन को सूचित कर दिया गया है। ट्रक को कब्जे में लेकर मुकदमा दर्ज कराकर अग्रिम कार्रवाई कराई जा रही है। सड़क हादसे में पिता की मौत, बेटा गंभीर एक अन्य सड़क हादसे में महाशिवरात्रि के अवसर पर देवपूजा करने चिचोली थाना क्षेत्र के असाड़ी गांव आए हरदा जिले के निवासी पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई जबकि बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार हरदा जिले के डहरिया गांव निवासी 68 वर्षीय भूरा पिता छन्नू अपने बेटे फूलचंद विश्वकर्मा के साथ अषाढ़ी में देवपूजा करने आए थे। पूजा के बाद बुधवार रात अपने गांव लौट रहे थे, तभी उनकी बाइक की दूसरी बाइक से भिड़ंत हो गई। हादसे में दोनों को गंभीर रूप से घायल अवस्था में चिचोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जिला अस्पताल बैतूल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान भूरा विश्वकर्मा की मौत हो गई। फूलचंद की हालत गंभीर होने पर उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। दुर्घटना में दूसरी बाइक का चालक को भी गंभीर रूप से घायल होने पर भोपाल रेफर किया गया है। बताया जा रहा है कि वह कोमा में चला गया है।

मुख्यमंत्री साय ने मनरेगा कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से पूरा करने के दिए निर्देश

रायपुर : ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मनरेगा की है महत्वपूर्ण भूमिका— मुख्यमंत्री साय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मनरेगा की है महत्वपूर्ण भूमिका— मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने मनरेगा कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से पूरा करने के दिए निर्देश मनरेगा को अन्य योजनाओं से जोड़कर ग्रामीण विकास की गति तेज करने पर दिया गया जोर रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद की बैठक विधानसभा परिसर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में मनरेगा कार्यों को सर्वोच्च गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि अधिकतम ग्रामीण परिवारों को इस योजना का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से गांवों में धरसा पहुंच मार्ग निर्माण और अमृत सरोवर परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूती मिले और जल संरक्षण को बढ़ावा मिले। मुख्यमंत्री साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों को आत्मनिर्भर बनाना है। मनरेगा के तहत चल रही योजनाओं को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से लागू किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि यह योजना गरीबों के सशक्तिकरण में एक मजबूत आधार बने। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मनरेगा को अन्य योजनाओं से जोड़कर ग्रामीण विकास की गति तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य में मनरेगा के प्रभावशाली क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 की प्रगति, लेबर बजट 2025-26, योजना के प्रमुख इंडिकेटर्स और अभिसरण (कॉन्वर्जेंस) मॉडल पर गहन समीक्षा की गई। वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। मनरेगा आयुक्त रजत बंसल ने जानकारी दी कि प्रदेश में कुल 38.52 लाख पंजीकृत परिवारों में से 24.89 लाख परिवारों को रोजगार प्रदान किया गया है।अमृत सरोवर योजना के तहत 2,902 जलाशयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 1,095 स्वीकृत हो चुके हैं, 299 पूर्ण हो चुके हैं, और 472 पर कार्य प्रगति पर है। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजू एस, पी. दयानंद, राहुल भगत, मनरेगा आयुक्त रजत बंसल एवं छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के सदस्यगण उपस्थित थे।

यूनियन कार्बाइड का कचरा आज 900 डिग्री के टेंपरेचर पर जलेगा, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए

पीथमपुर भोपाल के यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से पीथमपुर आया जहरीला कचरा आज सुबह 10 बजे से जलाया जाएगा। हाईकोर्ट के 18 फरवरी के निर्देश के बाद 27 तारीख से पीथमपुर की रामकी फैक्ट्री में रखे रासायनिक कचरे के निष्पादन के ट्रायल रन की तैयारी कल से ही शुरू कर दी गई थी। यहां पर 12 कंटेनर 1 जनवरी को भोपाल से पीथमपुर भेजे गए थे। इनमें विभिन्न प्रकार के अवशिष्ट मौजूद हैं। इसमें नेप्थॉल, सेवीन, रिएक्टर रेसिड्यू, पेस्टिसाइड रेसिड्यू, सेमी प्रोसैस्ड रेसिड्यू एक्सकैवेटेड सॉइल (मिट्टी) वहां की जो थी। तीन बार में जलाया जाएगा कचरा यहां मौजूद कंटेनरों में से पांच कंटेनर में रखे अवशिष्ट को आज स्टोरेज शेड में ले जाया जाएगा, जहां पांचों कंटेनर में से 10 टन प्रॉपर प्रोपोर्शन में मिलाया जाएगा। इसके बाद इसे इंसीनेटर में फीड करेंगे। फीड करने के पहले इसे टेंपरेचर में लाने के लिए 12 घंटे तक ब्लैक में चलाएंगे यानी इसमें अवशिष्ट नहीं डालेंगे। वहीं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उनको मास्क, गॉगल्स और हैंड ग्लव्स दिए गए हैं। 10 टन अवशेष जलाने में करीब 72 घंटे का समय लगेगा। कोर्ट ने तीन ट्रायल के लिए कहां है। पहला ट्रायल 10 टन का होगा, जिसके तहत काम किया जा रहा है। 10 टन का दूसरा ट्रायल 4 तारीख को होगा और 10 टन का तीसरा ट्रायल 10 तारीख को होगा। इसके लिए तीन फीड रेट डिसाइड की गई है। 135 किलोग्राम पर ऑवर, दूसरा 180 किलोग्राम पर ऑवर और तीसरा 270 किलोग्राम पर ऑवर, तीनों की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को भेजी जाएगी। 800-900 के टेंपरेचर पर जलेगा 10 टन कचरा एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड इंदौर के रीजनल ऑफिसर श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि माननीय हाईकोर्ट ने जो निर्देश दिए थे कि 18 तारीख से यूनियन कार्बाइड का जो अवशिष्ट रखा हुआ है उसका डिस्पोजल शुरू किया जाए। इसके ट्रायल की कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जिसके तहत जो कंटेनर आए थे उसमें जो अवशिष्ट थे। 5 कंटेनर खोले गए हैं, उसको स्टोरेज शेड में भंडारित किया जाएगा। पांचों कंटेनर में से 10 टन प्रॉपर प्रोपोर्शन से मिलाकर इंसीनेटर में फीड किया जाएगा। जब टेंपरेचर 850 हो जाएगा तब उसको फीड करेंगे। इंसीनेटर में प्रोसेस के समय प्राइमरी चेंबर में 850 प्लस माइनस 50 मतलब 800 से 900 के बीच में टेंपरेचर होना चाहिए। शुरू में वेस्ट डालने पर टेंपरेचर कम हो जाता है, जिसे 850 तक ले जाना होगा। सुबह 10 बजे से काम शुरू होगा। तीन दिन तक चलेगा कचरा जलाने का प्रोसेस फर्स्ट ट्रायल में तीन दिन कचरा जलाया जाएगा। इस दौरान उसमें मिट्टी निकलेगी। इसके बाद गैस आगे क्लीनिंग सेक्शन में जाएगी जो सेकेंडरी सेक्शन है। वहां टेंपरेचर 1100 से 1200 डिग्री सेंटीग्रेड होता है। वहां भी डीजल डालते हैं। वहां जलने के बाद आगे ब्लू गैस है, वह आगे बढ़ेगी जिसकी क्लीनिंग की प्रक्रिया है, जिसके तहत मल्टी साइक्लोन में जाएगी जहां बड़े पार्टिकल जो हैं वह नीचे चले जाएंगे। गैस आगे बढ़ेगी मल्टी साइक्लोन के पहले स्प्रे ड्रायर है, इससे गैस क्लीनिंग होगी। ड्राई स्क्रबर में वेट फिल्टर फिर वेट स्क्रबर इसके बाद चिमनी में जाएगा। ये पूरी प्रक्रिया करनी होगी। 4 और 10 मार्च को दूसरा और तीसरा ट्रायल इसमें प्राइमरी से ठोस अवशिष्ट की राख निकलेगी, दूसरा मल्टी साइक्लोन से ठोस अपशिष्ट निकलेगा, तीसरा ड्राई स्क्रबर से निकलेगा, चौथा वेट फिल्टर से सॉलिड पार्टिकल निकलेंगे, लास्ट में वेट स्क्रबर में पानी निकलेगा। जो सॉलिड पार्टिकल निकलेंगे। उनको स्टेबलाइज करके लैंडफिल में एक अलग सेल बनाकर उसमें डाला जाएगा और उसका डिस्पोजल होगा। कोर्ट ने तीन ट्रायल के लिए कहा है। पहला ट्रायल 10 टन का होगा जो 27 तारीख से चल रहा है, 10 टन का दूसरा ट्रायल 4 तारीख को होगा और 10 टन का तीसरा ट्रायल 10 तारीख को होगा। पिछला ट्रायल 90 टन पर किया गया था। गुरुवार रात से ड्राय रन शुरू हुआ गुरुवार दोपहर तीन से चार बजे के बीच पांच कंटेनर खोले गए। गुरुवार रात को इंसीनेटर का ड्राय रन शुरू कर उसका तापमान बढ़ाने का कार्य शुरू हो गया। यह प्रक्रिया शुक्रवार सुबह तक चलेगी। इस दौरान संयंत्र के प्रथम दहन कक्ष का तापमान कचरा जलाने के लिए निर्धारित 850 से 900 डिग्री सेल्सियस व दूसरे दहन कक्ष का तापमान 1100 से 1200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद कचरे को भस्मक संयंत्र में डाला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की रोक नहीं यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा धार जिले के पीथमपुर में ही जलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कचरा जलाने पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। गुरुवार सुबह हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो इस संबंध में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस जवाब को भी रिकार्ड पर ले लिया है, जिसमें कहा है कि कचरा जलाने के दौरान सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। जवाब में कचरा जलाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, सावधानियां व हादसे की आशंका के चलते व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम इस बीच, पीथमपुर में कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र ने दायर की थी। इसमें कहा था कि पर्यावरण और स्वास्थ्य नियमों का पालन किए बगैर जहरीला कचरा जलाने की तैयारी की गई है। सरकार ने पेश कर दिया जवाब 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कहा था कि वह बताए कि कचरा जलाने के दौरान कोई हादसा होता है, तो इससे निपटने के उसके पास क्या इंतजाम हैं। गुरुवार को सरकार ने जवाब पेश कर दिया। इसे रिकार्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका निराकृत कर दी। चिन्मय मिश्र ने कहा कि फैसले का अध्ययन करने के बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की संभावना तलाशेंगे।

मप्र का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का रहेगा, 12 मार्च को होगा पेश

भोपाल मध्य प्रदेश का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट 12 मार्च को विधानसभा में प्रस्तुत होगा। यह चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का रहेगा। इसमें फोकस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता वाली चार जातियों गरीब, किसान, महिला एवं युवा पर रहेगा।सिंहस्थ के लिए विशेष बजट प्रविधान किए जाएंगे तो सरकार पूंजीगत व्यय और बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर सकती है। विधानसभा का बजट सत्र 10 मार्च को राज्यपाल मंगुभाई पटेल के अभिभाषण से प्रारंभ होगा। 11 मार्च को आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाएगा।   डबल इंजन की सरकार डबल इंजन की सरकार का लाभ मध्य प्रदेश को लगातार मिल रहा है। आम बजट में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रविधान राज्य के लिए किए गए हैं। एक लाख 11 हजार 661 करोड़ रुपये केंद्रीय करों में हिस्सा मिलेगा तो सहायता अनुदान 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलने का अनुमान है। इस हिसाब से देखा जाए तो वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में 15, 908 करोड़ रुपये अधिक मिलने की संभावना है। इसके आधार पर राज्य सरकार ने अपने बजट का खाका खींचा है। इन लोगों को ध्यान में रखा जाएगा सूत्रों के अनुसार गरीब कल्याण, महिला सशक्तीकरण, युवा कल्याण और किसानों के हित में प्रविधान किए जाएंगे। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवास निर्माण के लिए बड़ा वित्तीय प्रविधान ग्रामीण विकास, नगरीय विकास, जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के बजट में रखा जाएगा। भोपाल में कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना औद्योगिक विकास के लिए 18 नीतियों के अंतर्गत उद्यमियों को जो विशेष प्रोत्साहन देने का वादा किया गया है, उसकी पूर्ति के लिए प्रविधान होंगे तो भोपाल में एक बड़ा कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना प्रस्तावित की जाएगी। अधोसंरचना निर्माण की विभिन्न परियोजनाओं को गति देने के लिए सरकार इस बार भी पूंजीगत व्यय बढ़ाएगी। यह 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। 15 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है राज्य सकल घरेलू उत्पाद 11 मार्च को सरकार आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करेगी। इसमें वर्ष 2024-25 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद की स्थिति, राज्य की विकास दर, प्रति व्यक्ति आय से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में राज्य की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद 15 लाख करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। यह वित्तीय वर्ष 2023-24 में 13 लाख 63 हजार करोड़ रुपये रहा है। कृतज्ञता ज्ञापन पर एक दिन होगी चर्चा नौ दिवसीय सत्र को देखते हुए राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर सरकार की ओर से प्रस्तुत होने पर कृतज्ञता ज्ञापन पर एक दिन चर्चा कराई जा सकती है।

बड़ा खुलासा: ULFA उग्रवादियों को ट्रेनिंग देकर असम को दहलाने की साजिश

ढाका पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल कर भारत में अशांति फैलाना चाहती है। आईएसआई ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश के तहत असम के उग्रवादी संगठन उल्फा के ट्रेनिंग कैंप दोबारा खोलने की तैयारी की है। आईएसआई के अधिकारियों ने कथित तौर पर उल्फा नेता परेश बरुआ से भी मुलाकात की है, जो हाल ही में बांग्लादेश पहुंचा है। द ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में ये दावा किया है। रिपोर्ट कहती है कि बांग्लादेश बॉर्डर पर आईएसआई के लोग उल्फा के ट्रेनिंग कैंप खोल रहे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के पास बांग्लादेश में कुछ ट्रेनिंग कैंप खोले जा चुके हैं। ये कैंप पहले भी सक्रिय थे लेकिन शेख हसीना के समय बंद कर दिए गए थे। बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हसीना बीते साल 5 अगस्त को देश छोड़कर चली गईं। उनके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कार्यभार संभाला है। यूनुस सरकार में आईएसआई को बांग्लादेश में फिर से एंट्री मिल गई है और उसने इन कैंपों को एक्टिव कर दिया है। यह भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को अस्थिर करने की बड़ी साजिश का हिस्सा है। बरुआ की सजा भी घटाई गई यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में सक्रिय उग्रवादी संगठन हैं। यह सशस्त्र संघर्ष के जरिए असम को एक स्वतन्त्र देश बनाने की बात कहता है। सूत्रों का कहना है कि इस गुट का सबसे अहम चेहरा परेश बरुआ अब बांग्लादेश में हैं। बांग्लादेश के कोर्ट ने पिछले महीने बरुआ की उम्रकैद की सजा को भी घटाकर 14 साल कर दिया। बरुआ का नाम भारत की NIA की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल है। खुफिया एजेंसियों को लगता है कि बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए बरुआ जल्द ही दोषमुक्त हो सकता है। इसके बाद पूर्वोत्तर के बारे में उसकी गहरी जानकारी का इस्तेमाल आईएसआई क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए कर सकती है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में इस ओर इशारा करते हुए उम्मीद जताई थी कि निर्वासन में रह रहे बरुआ अपने गृह राज्य को अस्थिर नहीं करेंगे। भारतीय सुरक्षाबलों ने हाल ही में बांग्लादेश सीमा पार से अरबी, उर्दू और बंगाली में वायरलेस संचार को इंटरसेप्ट किए जाने का दावा किया था। इससे पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे क्षेत्रों में ISI की मौजूदगी को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं। यह स्थिति भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। सुरक्षाबलों ने हलिया समय में सीमा पर सुरक्षा भी बढ़ा दी है।

यूनिवर्सल पेंशन स्कीम के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन मिलेगी, मोदी सरकार लाने जा रही है स्कीम

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार अब देश में यूनिवर्सल पेंशन स्कीम लाने की तैयारी कर रही है। यह योजना लोगों को अपनी इच्छा से योगदान करने और रिटायरमेंट के बाद पेंशन  का फायदा लेने की सुविधा देगी। बताया जा रहा है कि इस स्कीम का फायदा असंगठित सेक्टर  में काम करने वाले लोग भी उठा सकेंगे। सभी लोगों को मिलेगा लाभ! यूनिवर्सल पेंशन स्कीम के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन मिलेगी। यह पेंशन योजना सभी नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाई जा रही है, जिसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, व्यापारी, स्व-रोजगार करने वाले व्यक्ति और 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग शामिल होंगे। हालांकि यह नई पेंशन स्कीम में कंट्रिब्यूशन स्वैच्छिक आधार पर होगा, इसमें सरकार अपनी तरफ से कोई कंट्रिब्यूशन नहीं करेगी। मौजूदा योजनाओं को किया जाएगा मर्ज!   मिडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस प्रस्तावित समग्र योजना  पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है, जो मौजूदा पेंशन योजनाओं  को एकीकृत करने की दिशा में बढ़ेगी। वहीं सरकार प्रधान मंत्री श्रम योगी मानधन योजना, राष्ट्रीय पेंशन योजना  और अटल पेंशन योजना जैसी मौजूदा योजनाओं को इस नई योजना में मर्ज करने पर विचार कर रही है। दरअसल, इन योजनाओं में वर्तमान में 55 से 200 रुपए तक के योगदान पर 3,000 रुपए की मासिक पेंशन मिलती है, जिसमें सरकार भी योगदान करती है। सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी यह योजना विशेषज्ञों का कहना है कि आबादी का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करता है। वह अपना कमाई का ज्यादा हिस्सी खर्च देता है और भविष्य के लिए ज्यादा बचत नहीं कर पाता। ऐसे में उम्र बढ़ने पर उसे आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह योजना लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी।

6 किमी लंबे ‘सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर’ पर इंदौर में यात्री सेवा मार्च में शुरू

इंदौर  6 किमी लंबे ‘सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर’ पर इंदौर में यात्री सेवा शुरू हो सकती है। भोपाल में भी मेट्रो का काम चल रहा है, लेकिन कुछ देरी हो रही है। इस देरी का कारण भोपाल में प्रायोरिटी कॉरिडोर का विस्तार और कुछ ज़रूरी निर्माण कार्य हैं। दोनों शहरों में एक साथ मेट्रो का काम शुरू हुआ था, लेकिन इंदौर अब आगे निकल गया है। इंदौर में सुरक्षा जांच पूरी हो चुकी है, जबकि भोपाल में अभी कुछ महीने और लगेंगे। एक साथ शुरु हुआ था प्रोजेक्ट इंदौर और भोपाल, दोनों शहरों में मेट्रो परियोजना एक साथ शुरू हुई थी। लेकिन, अब इंदौर भोपाल से आगे निकल गया है। इंदौर में 6 किलोमीटर लंबे ‘सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर’ पर अगले महीने, यानी मार्च के आखिरी हफ़्ते में यात्री सेवा शुरू होने की उम्मीद है। इस कॉरिडोर पर पांच मेट्रो स्टेशन बनाए गए हैं। इंदौर मेट्रो ने सभी ज़रूरी परीक्षण और जांच पूरी कर ली हैं। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम ने भी निरीक्षण कर लिया है। बस अब उनकी तरफ से NOC मिलना बाकी है। लखनऊ से बोगी लेकर आती है टीम अब उम्मीद है कि अगले महीने मेट्रो कंपनी पूरे ट्रैक का परीक्षण करवाने के लिए रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) को बुला सकती है। RDSO लखनऊ से अपनी तकनीकी उपकरणों के साथ एक पूरी बोगी में आता है। RDSO के परीक्षण के बाद ही मेट्रो सेवा शुरू करने की अनुमति मिलती है। भोपाल में भी तेजी पकड़ रहा काम भोपाल में भी मेट्रो का काम तेज़ी से चल रहा है, लेकिन अभी कुछ समय और लगेगा। भोपाल का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किमी लंबा है, जो इंदौर से थोड़ा बड़ा है। शुरुआत में भोपाल में सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक ही मेट्रो चलाने की योजना थी। लेकिन बाद में इस कॉरिडोर को एम्स तक बढ़ा दिया गया। इसके अलावा, रेलवे लाइन के ऊपर पुल बनाने का काम भी जुड़ गया। इन वजहों से भोपाल मेट्रो में देरी हो रही है। अफसरों ने बताया कि मेट्रो शुरू होने में अभी 5 महीने और लग सकते हैं। एनओसी मिलते ही शुरु हो जाएगी सेवा भोपाल मेट्रो के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य ने एक बयान में बताया कि इंदौर में बस CMRS की NOC का इंतज़ार है। NOC मिलते ही यात्री सेवा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि भोपाल में प्रायोरिटी कॉरिडोर का सिविल वर्क लगभग पूरा होने वाला है। सुभाष नगर डिपो में भी अभी 20% काम बाकी है। सुभाष नगर से आरकेएमपी स्टेशन तक ट्रायल रन हो चुका है। आरकेएमपी से एम्स तक ट्रैक बनाने में लगभग 17 महीने लग गए। भोपाल में आरओबी की अनुमति में लगा समय इन 17 महीनों में सबसे ज़्यादा समय गणेश मंदिर के सामने रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) की अनुमति लेने में लगा। इसमें लगभग 9 महीने लग गए। इस दौरान रेलवे से अनुमति लेनी पड़ी और स्टील का पुल बनाना पड़ा।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet