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बोट क्लब पर 3 मार्च से 7 मार्च तक 42वीं नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का आयोजन, CM डॉ. मोहन करेंगे शुभारंभ

भोपाल राजधानी भोपाल के बड़े तालाब स्थित मध्यप्रदेश राज्य वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी, बोट क्लब पर 3 मार्च से 7 मार्च तक 42वीं नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 3 मार्च को प्रतियोगिता का शुभारंभ करेंगे। प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ी रोइंग, क्याकिंग-केनोइंग, सेलिंग और स्लालम खेलों की विशेष प्रस्तुति देंगे। इस अवसर पर खेल प्रेमियों को जल क्रीड़ा का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलेगा। चैंपियनशिप में 25 राज्यों से लगभग 500 प्रतिभागी भाग लेंगे। जिसमें रोइंग के कुल 14 इवेंट होंगे। यह चैंपियनशिप देश के शीर्ष रोवर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करेगी। इन कैटेगरी में होगी प्रतियोगिताएं 42वीं नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में सीनियर पुरूष, सीनियर महिला और पैरा रोइंग स्पर्धाओं के अंतर्गत विभिन्न प्रतिस्पर्धाएँ आयोजित की जाएँगी। सभी स्पर्धाएं 2000 मीटर की दूरी पर आयोजित की जाएँगी। सीनियर मेन्स वर्ग में सिंगल स्कल्स (M1X), डबल स्कल्स (M2X), कॉक्सलेस पेयर्स (M2-), कॉक्सलेस फोर्स (M4-), लाइटवेट मेन डबल स्कल्स (LM2X), ओपन डबल स्कल्स (M2X – सिविलियन), कॉक्सलेस फोर्स (M4- – सिविलियन), क्वाड्रपल स्कल्स (M4X) और कॉक्स्ड ईट्स (M8+) शामिल हैं। सीनियर महिला वर्ग में सिंगल स्कल्स (W1X), डबल स्कल्स (W2X), कॉक्सलेस पेयर्स (W2-), कॉक्सलेस फोर्स (W4-), लाइटवेट वुमन डबल स्कल्स (LW2X), क्वाड्रपल स्कल्स (W4X) और कॉक्स्ड ईट्स (W8+) की स्पर्धाएं होंगी। पैरा रोइंग स्पर्धाओं में पैरा मेन सिंगल स्कल (PR3M1X) और पैरा वुमन सिंगल स्कल (PR3W1X) प्रतियोगिताएँ होंगी।

भारत के आर्थिक भविष्य की राह, 2047 तक ‘विकसित’ हो पाएगा भारत: World Bank

नई दिल्ली विश्व बैंक की  जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए औसतन 7.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि करनी होगी। विश्व बैंक ने पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को वित्तीय क्षेत्र के साथ-साथ भूमि और श्रम बाजार में भी सुधार की आवश्यकता होगी। विश्व बैंक की रिपोर्ट का शीर्षक है – ‘एक पीढ़ी में उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनना’। भारत की पिछली उपलब्धियां भविष्य की महत्वाकांक्षाओं का आधार वर्ष 2000 से 2024 के बीच भारत की औसत 6.3 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि दर को मान्यता देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की पिछली उपलब्धियां उसकी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के लिए आधार प्रदान करती हैं। “हालांकि, 2047 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचना सामान्य स्थिति में संभव नहीं होगा… भारत को 2047 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए, इसकी प्रति व्यक्ति जीएनआई (सकल राष्ट्रीय आय) को वर्तमान स्तरों से लगभग 8 गुना बढ़ाना होगा; विकास को और तेज करना होगा और अगले दो दशकों तक उच्च रहना होगा, एक ऐसी उपलब्धि जिसे कुछ ही देश हासिल कर पाए हैं। सुधारों को विस्तारित कर तेज करने की जरूरत विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, “इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, कम अनुकूल बाह्य वातावरण को देखते हुए, भारत को न केवल चल रही पहलों को जारी रखना होगा, बल्कि सुधारों को विस्तारित और तीव्र करना होगा।” हाल के वर्षों में, भारत ने देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलने, बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने, मानव पूंजी में सुधार करने और डिजिटलीकरण का लाभ उठाने के लिए कई संरचनात्मक सुधार शुरू किए हैं, जबकि इसके साथ ही व्यापक आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है, “वर्ष 2047 तक उच्च आय तक पहुंचने के लिए, भारत की विकास दर को आने वाले दशकों में वास्तविक रूप में औसतन 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने की आवश्यकता है… केवल ‘त्वरित सुधार’ पैकेज ही भारत को वर्ष 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के मार्ग पर ला सकता है।” चिली, कोरिया और पोलैंड से मिले सबक के साथ आगे बढ़ सकता है भारत विश्व बैंक के भारत निदेशक ऑगस्टे तानो कोउमे ने कहा कि चिली, कोरिया और पोलैंड जैसे देशों से प्राप्त सबक यह दर्शाते हैं कि किस प्रकार उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपने एकीकरण को गहन करते हुए मध्य आय वाले देशों से उच्च आय वाले देशों में सफलतापूर्वक परिवर्तन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशकों में भारत ने उस पैमाने और गति से विकास किया है जिसके बारे में बहुत कम लोगों ने सोचा होगा। वर्ष 2000 से लेकर आज तक, वास्तविक अर्थों में, अर्थव्यवस्था लगभग चार गुना बढ़ी है, और प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद लगभग तीन गुना हो गया है। चूँकि भारत बाकी दुनिया की तुलना में तेज़ी से बढ़ा है, इसलिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी वर्ष 2000 में 1.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023 में 3.4 प्रतिशत हो गई है। भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, “इस उल्लेखनीय विकास की कहानी में अत्यधिक गरीबी में भारी गिरावट, तथा सेवा वितरण और आवश्यक बुनियादी ढांचे का व्यापक विस्तार भी शामिल है। इन उपलब्धियों के आधार पर, भारत ने 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।” विश्व बैंक ने 22 वर्षों में भारत की विकास गति का किया मूल्यांकन कौमे ने कहा कि भारत सुधारों की गति बढ़ाकर तथा अपनी पिछली उपलब्धियों के आधार पर अपना रास्ता स्वयं बना सकता है। रिपोर्ट में अगले 22 वर्षों में भारत की विकास गति के लिए तीन परिदृश्यों का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के सह-लेखक एमिलिया स्क्रोक और रंगीत घोष ने कहा, “भारत मानव पूंजी में निवेश करके, अधिक और बेहतर नौकरियों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करके और 2047 तक महिला श्रम बल भागीदारी दर को 35.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठा सकता है।” इसमें कहा गया है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में भारत ने अपनी औसत वृद्धि दर को बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर लिया है।  

आज से मध्यप्रदेश सरकार खरीदेगी समर्थन मूल्य पर गेहूं, 3 लाख किसानों ने कराया है पंजीयन

भोपाल मध्य प्रदेश में किसान साथियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य में आज से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद शुरू होने जा रही है। पहले चरण में, इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में खरीद आज से 18 अप्रैल तक चलेगी। अब तक तीन लाख से ज्यादा किसान गेहूं बेचने के लिए पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। खरीद का दूसरा चरण 17 मार्च से 5 मई तक चलेगा। किसानों को सुविधा देने के लिए, प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरुण शमी ने बताया है कि किसान 31 मार्च तक एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी होगी और उन्हें उचित मूल्य मिलेगा। सरकार ने 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का टारगेट तय किया है। इसके लिए प्रदेश में 3600 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। केंद्र सरकार ने 2425 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया है। सोमवार से शुक्रवार तक सुबह आठ से रात आठ बजे तक खरीदी होगी।

आज बालाघाट जिले के प्रवास पर रहेगें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दिव्यांगों को 2.64 करोड़ के बांटेंगे उपकरण

बालाघाट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज बालाघाट जिले के प्रवास पर रहेगें। मुख्यमंत्री इस प्रवास में अलग-अलग 2 स्थानों पर जिसमें बालाघाट मुख्यालय व लांजी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होगें। जिसे लेकर यहां पर तैयारी शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरा कार्यक्रम के अनुसार डॉ. मोहन यादव का पहला कार्यक्रम बालाघाट मुख्यालय में रेंजर कालेज परिसर में होगा। जिसमें वे यहां पर 27 सौ से अधिक दिव्यांगों को उपकरण वितरण और उन्हें बस व रेल्वे पास की सुविधा प्रदाय करेगें। इसके अलावा किसान सम्मेलन में शामिल होगें। साथ ही हॉकी एस्ट्रो टर्फ मैदान का लोकापर्ण, सीएम राइज स्कूल भवन का लोकापर्ण सहित कई कार्यो की आधारशिला रखेगें। कोटेश्वर धाम महोत्सव मेले में होंगे शामिल इस कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री लांजी पहुंचेंगें, जहां वे कोटेश्वर धाम महोत्सव में शामिल होगें। यहां पर प्राचीन शिवलिंग जिसे 108 उपलिंगों में एक गिना जाता हैं, कोटेश्वर धाम स्थल पहुंचकर पूजन करेगें। इसके बाद वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा व भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण करेगें। तत्पश्चात एक जनसभा को संबोधित करेगें। यहां पर पहली बार 8 दिवसीय कोटेश्वर महोत्सव का आयोजन किया गया हैं। मुख्यमंत्री के इस प्रवास को लेकर प्रशासन की ओर से आवश्यक तैयारी की जा रही है व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखे जा रहे हैं। हालांकि अभी मुख्यमंत्री का अधिकृत दौरा कार्यक्रम जारी नहीं हुआ हैं।

मोहन सरकार ला रही 4 लाख करोड़ से अधिक का बजट, गरीब, किसान, महिला और युवा पर जोर रहेगा

भोपाल  ग्लोबल इंवेस्टर समिट में आए बंपर निवेश प्रस्तावों के बाद राज्य सरकार अब बजट की तैयारियों में जुट गई है. मध्य प्रदेश सरकार का बजट 12 मार्च को पेश होगा. इस बार मध्य प्रदेश का बजट 4 लाख करोड़ से ज्यादा का रहने की उम्मीद है. इसमें राज्य सरकार प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रावधान करेगी, वहीं 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए जाएंगे. मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 10 मार्च से शुरू होने जा रहा है. सत्र की शुरुआत राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण से होगी. 11 मार्च को राज्य सरकार अपना आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी, इसके बाद बजट पेश किया जाएगा. सकल घरेलू उत्पाद और आर्थिक वृद्धि की उम्मीद आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 15 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष 2023-24 में 13 लाख 63 हजार करोड़ रुपए था। इससे यह भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य को आगामी बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 15 हजार 908 करोड़ रुपए अधिक मिल सकते हैं। नारी, किसान और गरीब कल्याण पर विशेष ध्यान बजट में महिला सशक्तीकरण (Women Empowerment), गरीब कल्याण (Welfare of Poor), युवा कल्याण (Youth Welfare) और किसान कल्याण (Welfare of Farmers) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवास निर्माण (Housing Construction) के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए जाएंगे। साथ ही, जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग (Scheduled Caste Welfare) के बजट में भी वृद्धि की उम्मीद है। जल जीवन मिशन के लिए विशेष योजनाएं मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास (Industrial Development) के लिए 18 नई नीतियां लागू करने की योजना है। इससे उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, भोपाल (Bhopal) में एक बड़ा कन्वेंशन सेंटर (Convention Center) बनाने का प्रस्ताव है। सरकार इस बार पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए से अधिक करने की योजना बना रही है। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत राज्य को अतिरिक्त 20 हजार करोड़ रुपए मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग जल आपूर्ति योजनाओं (Water Supply Plans) को तेजी से लागू करने में किया जाएगा, जिससे 36 लाख घरों में नल से जल पहुंचाने की उम्मीद है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव केंद्रीय बजट (Union Budget) में मेडिकल सीटों (Medical Seats) की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत अगले साल मध्य प्रदेश में 12 नए मेडिकल कॉलेज (Medical Colleges) खुलेंगे, जिससे 2 हजार अतिरिक्त मेडिकल सीटें उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, अगले तीन सालों में राज्य के हर जिले में एक कैंसर सेंटर (Cancer Center) खोलने की योजना है। इस योजना से मध्य प्रदेश में भी कैंसर सेंटर की स्थापना होने की संभावना है। विधायकों ने पूछे 2939 सवाल, कांग्रेस ने की तैयारी विधानसभा के लिए विधायकों ने भी तैयारियां शुरू कर दी है. अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में सरकार के सामने उठाने के लिए कांग्रेस और बीजेपी विधायकों ने 2939 सवाल विधानसभा में लगाए हैं. इन सवालों पर विभिन्न विभागों ने जवाब लिखकर भेजना शुरू कर दिया है. हालांकि, यह दूसरा मौका है जब विधायकों ने ऑफलाइन सवालों से ज्यादा ऑनलाइन सवाल पूछे हैं. विधायकों ने 1785 सवाल ऑनलाइन और 1154 सवाल ऑफलाइन पूछे हैं. इसमें 1448 तारांकित (वह प्रशन जिसका उत्तर सदस्य सदन में मौखिक रूप में देना चाहता है) और 1491 सवाल अतारांकित (ऐसे प्रशन जिनका उत्तर सदस्य लिखित रूप में सदन में रखे जाते हैं.) हैं. मध्य प्रदेश विधानसभा की पूरी प्रक्रिया को अगले विधानसभा सत्र से ऑनलाइन किया जा रहा है, इसके पहले विधायकों द्वारा भी ज्यादा सवाल ऑनलाइन पूछना शुरू कर दिए हैं. कांग्रेस बोली सड़क से सदन तक घेरेंगे कांग्रेस सदन में सरकार को घेरने के लिए रणनीति बनाने में जुटी है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार सदन में चर्चा से भाग रही है, इसलिए अब तक का सबसे छोटा सत्र बुलाया गया है, लेकिन कांग्रेस जनता से जुड़े एक-एक मुद्दे सदन में उठाएगी और सरकार को इन पर जवाब देने के लिए मजबूर करेगी. कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया के मुताबिक कांग्रेस द्वारा ” आदिवासी, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा.” अब तक का सबसे छोटा बजट सत्र मध्य प्रदेश विधानसभा का यह बजट सत्र पिछले 25 सालों में अब तक सबसे छोटा सत्र होगा. 10 मार्च से शुरू होने वाले इस सत्र में सिर्फ 9 बैठकें प्रस्तावित हैं. इन 9 दिनों में सरकार बजट पेश करेगी और विभागवार बजट पर चर्चा भी की जाएगी. हालांकि, बजट सत्र छोटा होने के खिलाफ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं. गौरतलब है कि 2024 में मोहन सरकार के बजट सत्र की अवधि 14 दिन की थी, लेकिन इसमें भी सिर्फ 5 बैठकें हुई थी.

आज 1 मार्च से गर्मी का सीजन शुरू, होली के बाद तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुंचेगा

भोपाल मध्यप्रदेश में सर्दी का सीजन 28 फरवरी को खत्म गया  और 1 मार्च से गर्मी का सीजन शुरू हुआ । इस बार सर्दी के ट्रेंड में काफी बदलाव देखने को मिला। न पूरे सीजन में शीतलहर चली। दिन में दो दिन ही कड़ाके की सर्दी रही। दिन व रात का तापमान सामान्य से ऊपर रहा और सर्दी भी देर से आई और जल्द विदा हो गई। अब मार्च(MP Weather Update) में गर्मी की शुरुआत होगी। होली के बाद तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर जा सकता है। दरअसल अक्टूबर व नवंबर में कड़ाके की सर्दी नहीं रही और 20 दिसंबर के बाद तापमान में गिरावट दर्ज हुई। दिसंबर में एक कोल्ड डे रहा, जबकि जनवरी में एक सीवियर कोल्ड डे रहा। इस बार ग्वालियर चंबल संभाग कम ठिठुरा है, जबकि प्रदेश के मध्य हिस्से(MP Weather Update) में सबसे ज्यादा सर्दी रही। इस हिस्से में शीतलहर चली, जबकि ग्वालियर में शीतलहर नहीं चल सकी। न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं आ सका। सर्दी के दिन काफी कम रहे। फरवरी में तापमान सामान्य से नीचे नहीं आया।  भारत इस साल मार्च महीने में बहुत ज्यादा गर्मी का सामना कर सकता है. पूरे महीने औसत से अधिक तापमान बने रहना का अनुमान है. इस अधिक गर्मी से पकते हुए गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है, जिससे उसकी उपज कम हो सकती है.  इस साल मार्च के महीने में रिकॉर्ड गर्मी पड़ने की संभावना है. पूरे महीने ज्यादातर दिन और रात के समय तापमान औसत से अधिक रह सकता है. अधिकारी ने बताया कि मार्च के दूसरे हफ्ते से दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने का अनुमान है और महीने के अंत तक कई राज्यों में अधिकतम पारा 40 डिग्री (104°F) के पार जाने की संभावना है रिकॉर्ड गर्मी से गेहूं की उपज होगी प्रभावित दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश होने के नाते भारत 2025 में अच्छी फसल की उम्मीद कर रहा है ताकि 2022 से 2024 तक लगातार तीन सालों की खराब फसल के बाद महंगे आयातों से बचा जा सके. हालांकि, अत्यधिक गर्मी से चौथे साल भी पैदावार कम हो सकती है, जिससे सरकार को आयात पर लगे 40% टैक्स को कम या हटा कर आयात की अनुमति देनी पड़ सकती है, ताकि सप्लाई की कमी को दूर किया जा सके. यह स्थिति 2022 की याद दिलाती है, जब फरवरी और मार्च में अचानक आई गर्मी ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद भारत को घरेलू सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए गेहूं के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी थी. मौसम विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उत्तर और मध्य भारत के गेहूं उत्पादक राज्यों में मार्च के मध्य से तापमान में तेज वृद्धि होने की संभावना है – जो संभवतः सामान्य से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकती है. अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा, “मार्च का मौसम गेहूं, चना और तिलहन के लिए अनुकूल नहीं होगा, जिससे इन पर गर्मी का असर पड़ सकता है.” ये शीतकालीन फसलें, जिन्हें आमतौर पर अक्टूबर और दिसंबर के बीच बोया जाता है, अधिक उपज हासिल करने के लिए अपने पूरे विकास साइकिल में ठंडे तापमान पर निर्भर रहती हैं. गर्मी की मौजूदा हालात के कारण इस महीने घरेलू गेहूं की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, और सप्लाई कम हो गई है. एक वैश्विक व्यापारिक फर्म के साथ जुड़े नई दिल्ली स्थित एक व्यापारी ने कहा कि फरवरी असामान्य रूप से गर्म थी, और यदि मार्च और भी अधिक गर्म हुआ, तो गेहूं उत्पादन पर भारी असर पड़ सकता है.” दिल्ली में टूटा 74 साल का रिकॉर्ड इस बीच, मौसम विभाग ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में  (गुरुवार, 27 फरवरी) के तापमान ने 74 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और फरवरी में अब तक की सबसे गर्म रात दर्ज की गई है। IMD के मुताबिक, सफदरजंग में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 1951 से 2025 के बीच की अवधि में इस महीने का सबसे अधिक तापमान है। आईएमडी ने कहा, ” 27 फरवरी, 2025 को सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1951 और 2025 के बीच सफदरजंग में फरवरी में दर्ज किया गया अब तक का सबसे अधिक न्यूनतम तापमान है।” मौसम विभाग ने यह भी कहा कि 1951 से पहले का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। इस बीच, पिछले रिकॉर्ड के अनुसार, फरवरी का पिछला उच्चतम न्यूनतम तापमान 25 फरवरी, 2015 को 19 डिग्री सेल्सियस था, जो रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे अधिक तापमान था। इसके बाद 1973 में 18.6 डिग्री सेल्सियस, 20 फरवरी, 2015 को 18.5 डिग्री सेल्सियस, 1992 में 18.2 डिग्री सेल्सियस और 1988 में 18.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पांचवां सबसे अधिक तापमान था। बादल छाए रहने के कारण, गुरुवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी ने बताया कि यह सामान्य औसत से 1.1 डिग्री कम है। इस कारण नहीं पड़ी सर्दी     इस बार का सर्दी का सीजन पश्चिमी विक्षोभ से प्रभावित रहा। हफ्ते में दो पश्चिमी विक्षोभ आए, जिसकी वजह से उत्तरी हवा नहीं चल सकी। दक्षिण पश्चिमी व पूर्वी हवा का प्रभाव रहा। इस वजह से दिन व रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं आई। नमी के कारण कोहरा छाया, लेकिन कोहरे के कारण ठंडक नहीं रही।     फरवरी में भी वैसी ही स्थिति रही। पश्चिमी व दक्षिण से हवा चली। इससे दिन व रात का तापमान सामान्य से ऊपर रहा और फरवरी में सर्दी नहीं पड़ी। 2024 में पड़ी थी कड़ाके की सर्दी दिसंबर 2023 में कोल्ड डे व सीवियर कोल्ड रहे। इस कारण दिसंबर में भी काफी सर्दी पड़ी थी। जनवरी 2024 में 9 सीवियर कोल्ड, 3 कोल्ड रहे, लेकिन शीतलहर नहीं चली। 31 में से 28 दिन दिन का तापमान सामान्य से नीचे रहा है। फरवरी भी सर्दी नहीं पड़ी। अधिकतम व न्यूनतम तापमान से ऊपर रहा। दिन में चटकी तेज धूप गुरुवार को हवा का रुख पश्चिमी दिशा से रहा। इस कारण दिन में तेज धूप निकली और हल्के बादल भी छाए, लेकिन तापमान 34.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 5.2 डिग्री सेल्सियस … Read more

रतलाम-महू-खंडवा-अकोला रूट पर डाली जा रही नई लाइन के साथ ही एक और लाइन डाली जाएगी, सर्वे की मंजूरी

 रतलाम मध्यप्रदेश में रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट में एक और लाइन का प्रस्ताव रेलवे ने किया है। इस रूट पर डाली जा रही नई लाइन के साथ ही एक और लाइन डाली जाएगी। इसके सर्वे की मंजूरी रेलवे ने दे दी है।  इंदौर से खंडवा के बीच अब डबल लाइन होगी। इससे इंदौर का रेल नेटवर्क और मजबूत होगा। मुख्य लाइन का काम पहले से ही चल रहा है। डबल ट्रैक के सर्वे लिए रेलवे ने 2.24 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। 2 हजार करोड़ से ज्यादा लागत मालूम हो, रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट के जरिए इंदौर का डेड एंड खत्म हो सकेगा। महाराष्ट्र से सीधा जुड़ाव होगा। इससे 13 गांव कनेक्ट होंगे। बजट में पिछले साल इस प्रोजेक्ट को 910 करोड़ मिले थे। 2008 में प्रोजेक्ट को विशेष दर्जा मिला है। इसकी लागत 2 हजार करोड़ से ज्यादा है। रेलवे ने पातालपानी से बलवाड़ा तक डायवर्टेड रेल लाइन के 468.65 करोड़ के टेंडर जारी किए हैं। इसमें सबसे प्रमुख दो बड़ी सुरंगें भी हैं। इसके पहले 4 किमी की टनल का टेंडर भी किया जा चुका है। मिलेंगी ज्यादा ट्रेनें वन विभाग की जमीन को छोड़कर कई हिस्सों में काम चल रहा है। सांसद शंकर लालवानी ने इंदौर से खंडवा तक एक लाइन और डालने की मांग रेलवे से की थी। सर्वे के बाद ही आगे की प्रक्रिया हो सकेगी। डबल लाइन होने से इंदौर को ज्यादा ट्रेनें मिल सकेंगी। 2 हजार करोड़ से अधिक खर्च ज्ञात होता है कि रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज परियोजना से इंदौर का डेड एंड समाप्त हो सकेगा। सीधा महाराष्ट्र से जुड़ाव होगा। इससे 13 गांव जुड़ेंगे। पिछले साल बजट में इस परियोजना को 910 करोड़ रुपये मिले थे। 2008 में योजना को विशिष्ट दर्जा दिया गया है। इसका खर्च दो हजार करोड़ से अधिक है। पातालपानी से बलवाड़ा तक विस्तृत रेल लाइन के 468.65 करोड़ के टेंडर रेलवे ने बनाए हैं। इसमें दो सबसे महत्वपूर्ण सुरंगें भी हैं। इससे पहले चार किमी की एक टनल भी टेंडर की गई है। अतिरिक्त लाइन बनाने की मांग वन विभाग की जमीन के अलावा कई स्थानों पर काम चल रहा है। सांसद शंकर लालवानी ने रेलवे से इंदौर से खंडवा तक एक अतिरिक्त लाइन बनाने की मांग की थी। सर्वे के बाद ही अगले कदम उठाया जा सकेगा। डबल लाइन बनाने से इंदौर अधिक ट्रेनें पा सकेगा।

पत्थरबाजों को ट्रैक करने रतलाम पुलिस का हाईटेक प्लान, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर ड्रोन से निगरानी

रतलाम  एमपी के रतलाम-झाबुआ क्षेत्र से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर लगातार पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए अब रतलाम पुलिस नाइट विजन ड्रोन का सहारा ले रही है. 8 लेन पर पत्थरबाजी कर भाग जाने वाले बदमाशों को अब नाइट विजन ड्रोन की मदद से ट्रैक किया जा सकेगा और धरपकड़ भी की जाएगी. इससे पूर्व पुलिस ने इन क्षेत्रों में कैंप लगाकर और रेंडम पेट्रोलिंग कर स्थानीय ग्रामीणों से पत्थरबाजी रुकवाने में मदद करने की अपील भी की थी. जिसका कुछ असर भी देखने को मिला था. लेकिन बीते दिनों फिर से पत्थर बाजी की घटनाएं हुई हैं. एसपी ने ड्रोन उड़ाकर की टेस्टिंग वहीं, अब पुलिस पत्थरबाजी करने वाले बदमाशों को टेक्नोलॉजी की मदद से ट्रैक करने का प्रयास कर रही है. रतलाम एसपी ने पुलिस अधिकारियों के साथ पत्थरबाजी वाले क्षेत्र में ड्रोन उड़ाकर इसका परीक्षण भी किया है. वहीं, हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाने के साथ 90 किलोमीटर के इस हिस्से में पुलिस चौकियां भी बनाई जाएंगी. बीते कुछ महीनों में पत्थर बाजी की करीब दर्जन भर घटनाएं सामने आई हैं. इसके बाद पुलिस पेट्रोलिंग भी इस क्षेत्र में बढ़ाई गई है. एक्सप्रेस वे पर पुलिस चौकियां खोलने का प्रस्ताव भेजा दरअसल, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर जब से आवागमन शुरू हुआ है, तब से ही झाबुआ के थांदला, रतलाम के शिवगढ़, रावटी और औद्योगिक थाना क्षेत्र में पत्थरबाजी की घटनाओं की कई शिकायत दर्ज हुई हैं. कई मामलों में तो राहगीर शिकायत किए बिना ही आगे रवाना हो जाते हैं. जिसकी वजह से पत्थरबाजी की घटनाओं के लिए दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा बदनाम होने लगा है. रतलाम पुलिस प्रशासन ने करीब 90 किलोमीटर के इस हिस्से पर पुलिस चौकियां खोलने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा है. ड्रोन से ट्रैक होंगे पत्थरबाज वहीं, पुलिस पेट्रोलिंग के साथ ही नाइट विजन कैमरों से निगरानी भी करेगी. एनएचएआई के साथ मिलकर पुलिस ड्रोन उड़ाकर पत्थरबाजी करने वाले लोगों को ट्रैक करेगी. पूर्व में अंधेरे का फायदा उठाकर पत्थरबाजी करने वाले बदमाश भाग जाया करते थे, जिन्हें ढूंढना और पकड़ना मुश्किल होता था. लेकिन अब हाई क्वालिटी के नाइट विजन ड्रोन के फुटेज के आधार पर पत्थरबाजी करने वाले और 8 लेन पर चोरी, तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर पकड़ा जा सकेगा. सामाजिक तत्वों पर लगेगा अंकुश रतलाम एसपी अमित कुमार ने बताया कि, ”एक्सप्रेस वे पर पुलिस चौकियां खोलने के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है. वहीं, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के साथ संवाद कर ऐसा करने वाले और सामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जाएगा.” बहरहाल रतलाम पुलिस अब दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे पर पत्थरबाजी रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है. जिससे यहां से रात में गुजरने वाले यात्री सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे.

नड्डा के बाद कौन संभालेगा BJP की कमान?होली से पहले बीजेपी को मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष!

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 15 मार्च तक अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है. राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है और यह राज्य इकाइयों में पार्टी के चुनाव के बाद होगा.राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है और यह जनवरी में पूरा हो जाना चाहिए था. हालांकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव और लंबित राज्य इकाई चुनावों ने जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के चुनाव में देरी हो रही है. भाजपा के संविधान के अनुसार, आधे राज्यों में चुनाव से पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया जा सकता है. अब तक भाजपा ने 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में से 12 में चुनाव पूरे कर लिए हैं. अभी तक 12 राज्यों में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया गया है. यूपी प्रदेश अध्यक्ष का जल्द होगा ऐलान बीजेपी 2 से 3 दिन में यूपी के जिलाध्यक्षों की घोषणा करेगी. उसके बाद यूपी के बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव होगा. एक हफ्ते से दस दिन में यूपी बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा. बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा जल्द ही की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक यह ऐलान अगले दो हफ्ते के भीतर हो सकता है। पार्टी के संगठनात्मक चुनाव 12 राज्यों में पूरे हो चुके हैं और माना जा रहा है कि अध्यक्ष का नाम 15 मार्च से पहले घोषित किया जा सकता है। उसके बाद हिन्दू कैलेंडर के अनुसार अशुभ अवधि शुरू हो जाती है। चुनाव वाले राज्यों पर बीजेपी की नजर बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम आधे राज्यों में संगठनात्मक चुनाव होना जरूरी है। इससे पहले, बूथ, मंडल और जिला स्तर पर चुनाव होते हैं। अभी 36 राज्यों में से सिर्फ 12 में ही चुनाव पूरे हुए हैं। इसलिए कम से कम 6 और राज्यों में चुनाव कराने की जरूरत है। बीजेपी उन राज्यों में इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जैसे तमिलनाडु, बंगाल, असम और गुजरात। बिहार में कोई बदलाव नहीं होगा, जहां इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं। किन बातों पर है पार्टी का फोकस? बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार का चयन कई बातों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सबसे जरूरी है कि उम्मीदवार को सभी का समर्थन हासिल हो, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी शामिल है। साथ ही उम्मीदवार को संगठनात्मक मूल्यों से ओतप्रोत होना चाहिए। पार्टी जातिगत समीकरण, उत्तर-दक्षिण भाषा विवाद, परिसीमन और सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में अपने जनाधार को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी को झटका लगा था, जिससे उसे सदन में पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया था। जेपी नड्डा ने 2019 से संभाली है जिम्मेदारी जेपी नड्डा ने 2019 में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पार्टी की जिम्मेदारी संभाली थी। जनवरी 2020 में, उन्हें सर्वसम्मति से बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया और उन्होंने वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पदभार ग्रहण किया। लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनका कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। सरकार में शामिल होने के साथ, पार्टी उनके उत्तराधिकारी के लिए संभावित उम्मीदवारों की तलाश कर रही है। लेकिन यह प्रक्रिया धीमी रही है, क्योंकि नेता इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने की उम्मीद कर रहे हैं। कई नामों पर चर्चा हो रही है, लेकिन पार्टी किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है। जेपी नड्डा को पहली बार 17 जून, 2019 को पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया था और वे 20 जनवरी, 2020 तक इस पद पर बने रहे. 20 जनवरी, 2020 को उन्हें पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुना गया और तब से वे इस पद पर हैं. जेपी नड्डा के नेतृत्व में पार्टी ने कई राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है. इसी तरह से लोकसभा चुनाव में भी जीत हासिल कर पार्टी फिर से सत्ता में वापसी की है. अटल बिहारी वाजपेयी 1980 से 1986 तक भाजपा के पहले अध्यक्ष थे. लाल कृष्ण आडवाणी कई कार्यकालों तक इस पद पर रहे.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्यप्रदेश तेजी से एक नए युग में प्रवेश कर रहा है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तेजी से एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। राज्य के प्रत्येक कोने को आपस में जोड़ने और आर्थिक विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए आधुनिक सड़क अवसंरचना तैयार है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट भोपाल के पहले ही दिन, हमारी सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ 1 लाख करोड़ रूपये के ऐतिहासिक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये एमओयू राज्य में 4010 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं के निर्माण और विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इससे मध्यप्रदेश भविष्य में न केवल देश का, बल्कि दक्षिण एशिया का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये समझौते केवल सड़कें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और बेहतर जीवनशैली के लिए आधार स्तंभ साबित होंगे। उन्होंने कहा कि जब कोई राज्य मजबूत सड़क नेटवर्क से जुड़ता है, तो वहां व्यापार, निवेश और उद्योगों की वृद्धि भी स्वाभाविक रूप से होती है। हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को भारत का सबसे विकसित और आधुनिक राज्य बनाना है, और यह समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक सड़क परियोजनाएं जो मध्यप्रदेश के भविष्य को आकार देंगी जीआईएस-भोपाल में हुए इन ऐतिहासिक एमओयू से कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का विकास होगा। जीआईएस-भोपाल में सड़क अवसंरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिये एमओयू पर हस्ताक्षर हुए है। इनमें इंदौर-भोपाल ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर, भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर, प्रयागराज-जबलपुर-नागपुर कॉरिडोर, लखनादौन-रायपुर एक्सप्रेसवे, आगरा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग, उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग, इंदौर रिंग रोड (पश्चिमी और पूर्वी बायपास), जबलपुर-दमोह राष्ट्रीय राजमार्ग, सतना-चित्रकूट राष्ट्रीय राजमार्ग, रीवा-सिद्धी राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्वालियर शहर के पश्चिमी छोर पर 4-लेन बायपास शामिल है। नवीन सड़क परियोजनाएं न केवल मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों से जोड़ेंगी, बल्कि राज्य के प्रमुख शहरों को भी आपस में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। इससे यात्रा का समय घटेगा, लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन की लागत कम होगी, तथा कृषि, उद्योग, पर्यटन और व्यापार क्षेत्रों को नए अवसर मिलेंगे। राज्य के आर्थिक विकास में योगदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कोई भी राज्य तभी प्रगति करता है जब वहाँ सशक्त बुनियादी ढांचा, कुशल परिवहन प्रणाली और मजबूत आर्थिक मॉडल उपलब्ध होते हैं। इन समझौतों से मध्यप्रदेश को एक नए औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब सड़कें बेहतर होंगी, तो उद्योगों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में आसानी होगी। इससे मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित होंगे और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। किसान अपने उत्पादों को तेजी से मंडियों और शहरों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। राज्य की पर्यटन स्थलों तक पहुँचने में सुगमता आएगी। इससे पर्यटन उद्योग को भी नया जीवन मिलेगा। इस परियोजना के तहत हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। सड़क निर्माण के दौरान इंजीनियर, श्रमिक, तकनीकी विशेषज्ञ और स्थानीय उद्यमी इससे लाभान्वित होंगे। नई सड़क परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स, होटल, रेस्तरां और अन्य व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। टाइम बाउंड प्रोजेक्ट: समय पर पूरा करने की प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार तेज़ी से परियोजनाओं को लागू करने और समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन सभी परियोजनाओं को विश्व स्तरीय तकनीक, टिकाऊ निर्माण प्रक्रियाओं और उच्च गुणवत्ता वाले मानकों के साथ विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित विभागों को हर आवश्यक सहायता प्रदान कर ये परियोजनाएँ तय समय सीमा के भीतर पूरी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत भी कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के “विकसित भारत” मिशन का म.प्र प्रमुख केन्द्र प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज़ी से वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश इस योजना का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का सपना भारत को एक $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का है। जीआईएस-भोपाल में हुए एमओयू उसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पहल है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद, मध्यप्रदेश देश की सबसे आधुनिक और कुशल परिवहन प्रणाली वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा। भविष्य की दृष्टि: आत्म-निर्भर और विकसित मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश में इन ऐतिहासिक समझौते (एमओयू) के साथ एक नए युग की शुरुआत हो रही है। ये परियोजनाएँ राज्य के प्रत्येक नागरिक को एक उज्जवल भविष्य देने का मार्ग प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कितेज़, सुरक्षित और विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क, बेहतर लॉजिस्टिक्स और व्यापार के अवसर, उद्योगों के लिए आसान परिवहन और निर्यात के नए मार्ग, सड़क निर्माण से लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर और हर नागरिक के लिए सुगम और सुविधाजनक यात्रा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।  

पीथमपुर में यूका का कचरा सात स्टेप्स में जलाया जाएगा, पहले चरण में 74 घंटे में नष्ट करेंगे 10 टन कचरा

इंदौर भोपाल गैस त्रासदी के बाद वर्षों से वहां रखे यूनियन कार्बाइड (यूका) के 337 टन कचरे को दो जनवरी तड़के चार बजे पीथमपुर में भस्मक संयंत्र परिसर में 12 कंटेनरों में पहुंचाया गया था। पीथमपुर में यूका का कचरा पहुंचने के 56 दिन 11 घंटे बाद 27 फरवरी (गुरुवार) दोपहर बाद 12 में पांच कंटेनर खोल कचरे को बाहर निकाला गया। हाई डेंसिटी पालीथिन (एचडीईपी) बैग में बंद इस कचरे को मैकेनिक कार्ट (बकेटनुमा ट्राली) में रखकर इंसीनरेबल स्टोरेज शेड में रखा गया। शुक्रवार सुबह इसे भस्मक में डाल भस्म करने की प्रक्रिया शुरू होगी। शुक्रवार को प्रतिघंटा 135 किलो कचरा भस्मक में डाला जाएगा। 74 घंटों में 10 टन कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पहला चरण : प्राथमिक दहन कक्ष (रोटरी किल) : तापमान 850-900 डिग्री हर दो मिनट में 4.5 किलो अपशिष्ट का बैग व 4.5 किलो लाइम का बैग डाला जाएगा। इस चैंबर में रखा कचरा घूमेगा। इससे सुनिश्चित किया जाएगा किया कि कचरा पूरी तरह जल जाए। कचरा जलने के बाद राख नीचे आ जाएगी। कचरा जलने के बाद गैस अगले चैंबर में जाएगी। दूसरा चरण : द्वितीय दहन कक्ष (वर्टिकिल सेकंडरी कंबंशन चैंबर) : तापमान 1100-1200 डिग्री डीजल बर्नर की मदद से बचे हुए फ्लू गैस अधजले कणों को 1100 डिग्री तापमान पर जलाया जाएगा। प्राथमिक व द्वितीय दहन कक्ष में यदि निर्धारित मात्रा से तापमान कम होगा तो इसकी सूचना तुरंत मानीटरिंग कक्ष में पहुंचती है और प्लांट व अपशिष्ट को भस्मक के डालने की प्रक्रिया रोक दी जाती है। तीसरा चरण : स्प्रे ड्रायर में गैस फ्लू गैस को स्प्रे डायर में भेजा जाएगा। यहां पानी के फव्वारे से इसे ठंडा कर 240 डिग्री सेल्सियस तक गैस का तापमान लाया जाएगा। तापमान में त्वरित गिरावट इस वजह से की जाती है ताकि गैस में दोबारा किसी तरह के हानिकारक तत्व न बने। चौथा चरण: मल्टीसाइक्लोन मशीन गैस को मल्टीसाइक्लोन मशीन से गुजारा जाएगा। यहां गैस को घुमाकर उसमें जमा भारी कणों को अलग किया जाएगा। पांचवां चरण : ड्राय स्क्रबर गैस ड्राय स्क्रबर से गुजरेगी। वहां चूना, एक्टिवेटेड कार्बन व सल्फर के मिश्रण का स्प्रे गैस पर किया जाएगा। इससे सल्फर डाईआक्साइड, डायक्सीन व मर्करी फ्लू गैस से अलग हो जाएगी। इसके बाद फ्लू गैस बैग फिल्टर से गुजरती है। जहां गैस में इसमें उपस्थित ठोस कण छन जाएंगे। छठा चरण : वेट स्क्रबर वेट स्क्रबर में गैस पर कास्टिक सोडा के घोल को स्प्रे किया जाएगा। इस प्रक्रिया में गैस से सभी एसिटिक तत्व जैसे एसओटू, एसओथ्री और एचसीएल को न्यूट्रलाइज किया जाता है। सातवां चरण : चिमनी से गैस को छोड़ा जाएगा फ्लू गैस को 35 मीटर ऊंची चिमनी से वातावरण में छोड़ा जाएगा। यह गैस पूरी तरह साफ होती है। कंपनी का दावा है कि इसमें हानिकारक तत्व नहीं होते। इस चिमनी में सेंसर लगे होते हैं जिससे गैस की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जाती है।

National Science Day :बच्चों व युवाओं को विज्ञान-तकनीकी शिक्षा से जोड़ना होगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सभी को बधाई दी। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि विज्ञान के प्रति उत्साहपूर्ण भाव रखने वाले लोगों, विशेषकर हमारे युवा अन्वेषकों को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की बधाई। आइए विज्ञान और नवाचार को लोकप्रिय बनाते की दिशा में कार्य करते रहे और एक विकसित भारत के निर्माण के लिए विज्ञान का लाभ उठाते रहें। इस महीने के मन की बात के दौरान, ‘एक वैज्ञानिक के रूप में एक दिन’ कार्य करने के बारे में बात की थी जहां युवा किसी न किसी वैज्ञानिक गतिविधि में भाग लेते हैं। इससे पहले 23 फरवरी को मन की बात के अपने 119वें एपिसोड में पीएम मोदी ने कहा था कि वह बच्चों और युवाओं में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा करेंगे। आने वाले दिनों में हम राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाएंगे। हमारे बच्चों और युवाओं की विज्ञान में रुचि और जुनून बहुत मायने रखता है। इसके लिए मेरे पास एक विचार है, जिसे आप ‘वन डे एज ए साइंटिस्ट’ कह सकते हैं।  यानी आपको एक दिन वैज्ञानिक के तौर पर बिताने की कोशिश करनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि आप अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से कोई भी दिन चुन सकते हैं। उस दिन आपको किसी रिसर्च लैब, प्लेनेटेरियम या स्पेस सेंटर में जाना चाहिए। इससे विज्ञान के प्रति आपकी जिज्ञासा बढ़ेगी। बता दें कि 1986 में भारत सरकार ने ‘रमन प्रभाव’ की खोज की घोषणा के उपलक्ष्य में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में नामित किया। यह पदार्थ द्वारा प्रकाश के अप्रत्यास्थ प्रकीर्णन को संदर्भित करता है, जिसके परिणामस्वरूप प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति में बदलाव होता है। सरल शब्दों में, यह प्रकाश की तरंगदैर्घ्य में परिवर्तन है जो तब होता है जब प्रकाश किरण अणुओं द्वारा विक्षेपित होती है। रमन प्रभाव रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का आधार बनता है, जिसका उपयोग रसायनज्ञों और भौतिकविदों द्वारा पदार्थों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है। स्पेक्ट्रोस्कोपी पदार्थ और विद्युत चुम्बकीय विकिरण के बीच परस्पर क्रिया का अध्ययन है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस रोजमर्रा की जिंदगी में विज्ञान के महत्व को बढ़ावा देने और मानवता की बेहतरी के लिए वैज्ञानिक क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों, प्रयासों और उपलब्धियों को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। इस उत्सव का उद्देश्य मुद्दों को संबोधित करना, नवीन तकनीकों को पेश करना और विज्ञान में विकास को बढ़ावा देना है। यह भारत में वैज्ञानिक सोच वाले व्यक्तियों के लिए एक मंच प्रदान करता है,जो जनता के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित और लोकप्रिय बनाता है। बच्चों व युवाओं को विज्ञान-तकनीकी शिक्षा से जोड़ना होगा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकटरामन की खोज रामन प्रभाव को समर्पित है. वर्ष 1928 में उन्होंने प्रकाश किरण के फैलने की एक घटना ‘रामन प्रभाव’ की खोज की थी. दो वर्ष बाद 1930 में इस खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर युवाओं को विज्ञान में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है. इस वर्ष का राष्ट्रीय विज्ञान दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के प्रोत्साहन और विजन से विकसित भारत, 2047 के अंतर्गत युवाओं को विज्ञान शिक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इस बार विज्ञान दिवस का विषय है- विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना. इसके तहत बच्चों और युवाओं को विज्ञान व तकनीकी शिक्षा की ओर उन्मुख करना जरूरी होगा. वर्ष 2023 में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की गयी, जिसका उद्देश्य वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी उत्कृष्टता हासिल करने के लिए युवाओं को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करना है. इसके तहत युवा शोधकर्ताओं को विज्ञान व प्रौद्योगिकी संस्थान में शोध करियर प्रारंभ करने में मदद के लिए प्रधानमंत्री प्रारंभिक करियर अनुसंधान अनुदान (पीएम इसीआरजी) कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. वैश्विक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सूचकांक में भारत की रैंकिंग लगातार सुधर रही है. ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स, 2024 में शीर्ष नवोन्मेषी अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने 39वां स्थान हासिल किया है. डब्ल्यूआइपीओ रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारत बौद्धिक संपदा फाइलिंग के मामले में छठे स्थान पर है. नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स, 2024 में भारत 49 वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि 2019 में वह 79वें स्थान पर था. यह इंडेक्स विश्व की 133 अर्थव्यवस्थाओं में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग और प्रभाव पर अग्रणी वैश्विक सूचकांकों में एक है. देश में ‘इंस्पायर कार्यक्रम’ नाम से योजना चलायी जा रही है, जिसका उद्देश्य बुनियादी व प्राकृतिक विज्ञान का अध्ययन करने के लिए मेधावी युवाओं को आकर्षित करना है. वर्ष 2024 में करीब 38,000 इंस्पायर स्कॉलर्स, फेलो और फैकल्टी फेलो को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में चुना गया. विदेश में रह रहे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (वैभव) फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किया गया है. विज्ञान और अभियांत्रिकी में महिलाओं की भागीदारी के लिए किरण योजना और अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में अनुसंधान प्रशिक्षण के लिए महिला अंतरराष्ट्रीय अनुदान सहायता जैसे कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत विश्व के शीर्ष देशों में है. चंद्रयान और आदित्य-एल1 मिशन के बाद इस साल व्योममित्र नामक महिला रोबोट गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री जैसे कार्य करेगी. वर्ष 2026 में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन शुरू होगा, जबकि 2035 में भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन भारत अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करने और 2047 में चंद्रमा पर पहला भारतीय अंतरिक्ष यात्री उतारने का लक्ष्य है. इसरो एक बार में 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड बना चुका है और पिछले 10 साल में 460 उपग्रह प्रक्षेपित किये गये हैं. भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा अर्जक के रूप में उभरा है. विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण से अर्जित 22 करोड़ यूरो में से 18.7 करोड़ यूरो पिछले आठ वर्षों में अर्जित किये गये हैं. आज अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप 300 से अधिक हैं, जो चार वर्ष पूर्व तीन-चार ही हुआ करते थे. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ एआइ एक्शन शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए कहा कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बहुत-सी चीजों को बेहतर बना कर लाखों लोगों का जीवन बदलने में मदद … Read more

छिंदवाड़ा में बिल्लियों की मौत के बाद जांच, प्रशासन के सख्त आदेश, 40 हजार अंडे नष्ट किए, मटन-चिकन की बिक्री पर पाबंदी लगाई

छिंदवाड़ा  पिछले कुछ समय से अमेरिका से बर्ड फ्लू (Bird Flu) की खबरें लगातार सामने आ रही थी. अमेरिका में बर्ड फ्लू के मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा था. यहां तक कि इसांनों में भी बर्ड फ्लू के मामले सामने आ रहे थे. मगर, अब भारत के स्वास्थ्य विभाग की नींदें उड़ गई हैं. दरअसल, पहली बार देश में पालतू बिल्लियों में बर्ड फ्लू (H5N1) पाया गया है. इससे चिंता बढ़ गई है. यह वायरस इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है. इस राज्य का मामला मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में बर्ड फ्लू का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है. जिले में पालतू बिल्लियों में बर्ड फ्लू (H5N1) का पहला मामला सामने आया है. 18 बिल्लियों की मौत के बाद जांच के लिए पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी में सैंपल भेजे गए थे, जिनमें से दो बिल्लियों में बर्ड फ्लू पाया गया. बता दें कि, देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब बिल्लियों में बर्ड फ्लू पाया गया है. प्रशासन ने लगाई पाबंदियां बिल्लियों की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है. उन्होंने 30 दिन के लिए मटन-चिकन और अंडों की खरीदी-बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई है. साथ ही संक्रमित क्षेत्र की सभी मटन और चिकन की दुकानों को सील कर दिया गया है. इसके साथ ही बिल्लियों के संपर्क में आए लोगों की भी जांच की जा रही हैं. सभी 65 व्यक्तियों के सैंपल भेजे गए थे. हालांकि, सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आने से फिलहाल छिंदवाड़ा में H5N1 का खतरा टल गया है. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है. प्रशासन के सख्त आदेश कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत सख्त आदेश जारी किए हैं. इसके तहत संक्रमित पोल्ट्री फॉर्म के एक किलोमीटर के दायरे को संक्रमित क्षेत्र घोषित किया गया है, जहां सभी चिकन शॉप और पोल्ट्री फार्म पूरी तरह से बंद रहेंगे. इसके अलावा 10 किलोमीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र भी घोषित किया गया है. सभी पोल्ट्री फार्म, बैकयार्ड पोल्ट्री, चिकन शॉप और अंडे की दुकानों को हर रोज कीटाणुरहित और सैनिटाइज किया जाएगा. संक्रमित क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी मुर्गियों और उनके उत्पादों को पशु चिकित्सा विभाग और नगर निगम के सहयोग से नष्ट किया जा रहा है. संक्रमित क्षेत्र में चिकन और पोल्ट्री प्रोडक्ट्स की बिक्री और ट्रांस्पोर्टेशन पर एक महीने के लिए पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है. कुछ लोगों के भी सैंपल्स जांच के लिए भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है. सभी 65 व्यक्तियों की रिपोर्ट नेगेटिव शहरी क्षेत्र छिंदवाड़ा में पशु विभाग की ओर से लिए गए सैंपल में 2 बिल्लियों के सैंपल में H5N1 पॉजिटिव पाए जाने के बाद सीएमएचओ ने एक टीम बनाई थी। टीम ने संक्रमित क्षेत्र में बिल्लियों के संपर्क में आए 65 व्यक्तियों के सैंपल H5N1 की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी, पुणे भेजे गए थे। सभी 65 सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आने से फिलहाल छिंदवाड़ा में H5N1 का खतरा टल गया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। एक महीने के लिए सभी दुकानें बंद 31 जनवरी को बिल्लियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए संक्रमित क्षेत्रों में 30 दिनों के लिए सभी मटन और चिकन दुकानों को सील कर दिया था। जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मटन और चिकन दुकानों और आसपास के इलाकों को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया। नगर निगम के वार्ड नंबर 6, 7, 8, 28, 29, 30, 31, 41 और 45 को संक्रमित घोषित किया गया था। इसके साथ ही नगर निगम क्षेत्र और ग्राम पंचायत लिंगा को निगरानी क्षेत्र में रखा गया है। प्रशासन ने उठाए ये कदम:     सभी चिकन दुकानें और पोल्ट्री फॉर्म तत्काल बंद कर दिए गए।     चिकन और पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री व परिवहन पर रोक लगा दी।     संक्रमित क्षेत्र की सभी मुर्गियों और उनके उत्पादों को नष्ट करने का आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट-चिकन और अंडे न खाएं स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में चिकन दुकान मालिकों और पशुपालकों के परिवारों के सैंपल लेने के बाद नागरिकों से अपील की है कि वे चिकन और अंडों का सेवन न करें। साथ ही अपने पालतू जानवरों को कच्चा मांस न खिलाएं। बीमार या मृत पक्षियों की सूचना तत्काल प्रशासन को दें। बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और लगातार निगरानी रख रहा है। नागरिकों से भी सतर्क रहने और दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। कलेक्टर की अपील- गाइडलाइन का पालन करें छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने बताया कि  

मध्यप्रदेश खनन और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में उभरा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश खनन और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में उभरा है। प्रदेश खनिजों की प्रचुरता और सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों के कारण देश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। खनन क्षेत्र न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश के औद्योगिक विकास और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा खनन के क्षेत्र में सतत विकास हो रहा है। इससे न केवल आर्थिक विकास हो रहा है, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस-भोपाल में खनन एवं खनिज संसाधन के अंतर्गत 3.22 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें 55 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा, जो प्रदेश के लिये बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की सक्रिय नीतियों से खनन क्षेत्र निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में नई ऊँचाइयों को छू रहा है। राज्य खनन उद्योग में देश का अग्रणी केन्द्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जीआईएस में निवेश करने वाली कम्पनियाँ और उनके क्षेत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खनन क्षेत्र में देश की लीडिंग कम्पनियों ने रुचि दिखाई है। आने वाले समय में अडानी ग्रुप, रीवा, जबलपुर में, गोल्ड क्रेस्ट सीमेंट प्रायवेट लिमिटेड उज्जैन में, ऑरो कोल प्रायवेट लिमिटेड शहडोल में, आदित्य बिड़ला, ईएमआईएल माइंस एण्ड मिन रेस लिमिटेड रीवा में, अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, आदित्य बिड़ला ग्रुप रीवा में, स्टॉक्स वर्क्स प्रायवेट लिमिटेड जबलपुर में, सारदा एनर्जी एण्ड मिनरल्स लिमिटेड शहडोल में, जे.के. सीमेंट लिमिटेड शहडोल में, प्राइम-4 इंस्पेक्शन एलएलसी भोपाल में, रेकन केमिकल्स इंदौर में, बिड़ला कॉर्पोरेशन लिमिटेड रीवा में और रामदास वर्मा एण्ड कम्पनी शहडोल में खनिज के क्षेत्र में कार्य करेगी। खनिज संसाधनों में अग्रणी राज्य मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कॉपर अयस्क, मैग्नीशियम अयस्क और हीरे के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान पर है। यह देश का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है, जो खनन उद्योग में एक विशिष्ट पहचान दिलाता है। प्रदेश रॉक फॉस्फेट में दूसरा, चूना पत्थर (लाइम स्टोन) में तीसरा और कोयला उत्पादन में चौथे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खनिज संसाधन थर्मल पॉवर प्लांट, सीमेंट निर्माण, फेरोएलॉय, संगमरमर कटिंग और पॉलिशिंग इकाइयों तथा रिफैक्ट्री उद्योगों के विकास में सहायक है। इससे खनिज उद्योगों को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है और मध्यप्रदेश खनन और औद्योगिक विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। खनन ब्लॉक नीलामी में ऐतिहासिक उपलब्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने खनन ब्लॉक नीलामी में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। निवेश अनुकूल नीतियों के कारण वर्ष 2023 में 85 खनन ब्लॉकों की रिकॉर्ड नीलामी कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। मध्यप्रदेश को जुलाई-2022 में भारत सरकार द्वारा खनिज नीलामी में सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिये प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। साथ ही लौह-अयस्क, चूना पत्थर और बॉक्साइट के खनिज नीलामी में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को वर्ष-2024 में दूसरे राज्य खनन मंत्रियों के सम्मेलन में खनन ब्लॉक नीलामी और सक्रिय खनन पहल के सम्मानित किया गया है। यह राज्य की खनन क्षेत्र में उत्कृष्टता और दूरदर्शी नीतियों को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश अनुकूल नीतियाँ बनाते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने खनन के क्षेत्र में सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएँ सुनिश्चित की हैं, जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिये आकर्षक अवसर उपलब्ध हों। मजबूत अधोसंरचना विकास के अंतर्गत राज्य में खनन हब सड़क, रेल और बंदरगाह उत्कृष्ट रूप से जुड़े हुए हैं। इससे परिवहन और निर्यात में आसानी होगी। राज्य में प्रशिक्षित श्रमिकों की प्रचुर उपलब्धता है, जो खनन और खनिज आधारित उद्योगों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में सरकार पर्यावरण संवेदनशील और सतत खनन प्रथाओं को बढ़ावा दे रही है। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग होगा। कॉपर और रणनीतिक खनिज अन्वेषण के लिये एमओयू से सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा जीआईएस-भोपाल में मध्यप्रदेश सरकार, एमपी स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड ने मिलकर नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (एनएमईटी) फण्ड का उपयोग करने के लिये एक समझौता ज्ञापन एमओयू हुआ। इस पहल से हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड तांबे और अन्य रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण का नेतृत्व करेगा। खनिज निष्कर्षण व्यवहारिक पाया जाता है, तो 51:49 की भागीदारी के साथ एक संयुक्त उद्यम स्थापित किया जायेगा। इससे पहले 5 वर्षों में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। जीआईएस भोपाल मध्यप्रदेश को खनन क्षेत्र में सिरमौर राज्य बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।  

जीआईएस भोपाल से एमएसएमई क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं को और अधिक ऊचाईयाँ मिलेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीआईएस भोपाल से एमएसएमई क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं को और अधिक ऊचाईयाँ मिलेगी। इससे राज्य के युवाओं के उद्यमी बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एमएसएमई क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए पीएम-मुद्रा, पीएम-विश्वकर्मा और एमएसएमई क्रेडिट गारंटी योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाएँ पहले ही लांच की है। जीआईएस भोपाल में कई एमएसएमई कंपनियों से 21 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव आए। इनसे राज्य में 1.3 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, साथ ऐसे युवाओं को उद्यमी बनने के अवसर मिलेंगे जो अब तक नौकरी की तलाश में थे। व्यापक बैठकें और तकनीकी नवाचार जीआईएस भोपाल में 600 से अधिक बी-2-जी बैठकें और 5 हजार से अधिक बी-2-बी बैठकें आयोजित की गईं। इनमें उद्योगपतियों, निवेशकों और एमएसएमई कंपनियों ने भाग लिया। पहली बार एआई-आधारित बिजनेस मैच-मेकिंग टूल का उपयोग किया गया, जिससे सही साझेदारों को जोड़ने में सहायता मिली। इन बैठकों ने मध्यप्रदेश को एक वैश्विक औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एमएसएमई क्षेत्र में राज्य सरकार की विशेष पहल मध्यप्रदेश सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। हाल ही में कैबिनेट में नई एमएसएमई पॉलिसी मंजूर की गई। नई एमएसएमई नीति में अविकसित भूमि का लघु, मध्यम और सूक्ष्म इकाइयों को आवंटन, फ्लैट आधारित उद्योग लगाने की अनुमति, औद्योगिक क्षेत्रों का विकास और रख-रखाव उद्योग संघों के माध्यम से, 53 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य, जिससे 86 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। नई नीति में औद्योगिक भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-बिडिंग प्रणाली लागू की गई। प्रदेश में एमएसएमई इकाइयों को आसान वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए नई योजनाएं शुरू की गई हैं। टैक्स इंसेंटिव, लैंड अलॉटमेंट और ‘ईज-ऑफ-डूइंग बिजनेस’ में सुधार को ध्यान में रखकर एमएसएमई उद्यमियों की मदद के लिए नीति बनाई गई है। सेक्टर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ावा देने के लिए एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और ऑटोमेशन को अपनाने की दिशा में पहल की जा रही है। नई पॉलिसी में राज्य सरकार एमएसएमई के उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने के लिए विशेष योजनाओं पर कार्य कर रही है। प्रमुख निवेशक कंपनियां जीआईएस-भोपाल में कई एमएसएमई कंपनियों ने राज्य में निवेश के लिए रुचि दिखाई, जिनमें प्रमुख रूप से वकी प्राइवेट लिमिटेड (इंदौर), भगवती तीरथ पॉलि कंटेनर्स इंडस्ट्री, इवेट लिमिटेड (भोपाल), आहाराम मिल्स प्राइवेट लिमिटेड (नीमच), डीटवी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (इंदौर) और ईजीटेक एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड (भोपाल) शामिल हैं। भविष्य की संभावनाएं राज्य सरकार ने 2025 तक एमएसएमई क्षेत्र में और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लागू करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, एमएसएमई सेक्टर के लिए समर्पित इनक्यूबेशन सेंटर्स और इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ‘मेड इन एमपी’ अभियान को भी बढ़ावा दिया जाएगा। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल से मध्यप्रदेश को एमएसएमई के लिए एक प्रमुख इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाने में मदद मिलेगी और राज्य की आर्थिक प्रगति को नई गति मिलेगी।  

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