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विदिशा में गेहूं खरीदी की तारीख बदली, 15 की जगह 1 मार्च से शुरू होगी खरीदी, 200 केंद्र तैयार

भोपाल  समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय की तैयारी में जुटे किसानों के लिए यह जरूरी खबर है. प्रदेश में एक मार्च से गेहूं खरीदी शुरू होने जा रही है, लेकिन दो मार्च से प्रदेश के कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. प्रदेश के पश्चिम-उत्तरी हिस्सों के किन इलाकों में बारिश होगी, आज देर शाम तक मौसम केंद्र इसका आकलन जारी करेगा. मौसम केंद्र से जारी अलर्ट के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में मध्यप्रदेश के पश्चिम-उत्तरी हिस्से में हल्की बारिश होने के आसार हैं. वेस्टर्न डिस्टरबेंस के एक्टिव होने से ऐसी स्थिति निर्मित हुई है. दो मार्च से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है. फिलहाल प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर है. मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के किन-किन हिस्सों में बारिश के आसार हैं, इसका सटिक आकलन आज देर शाम और कल जारी किया जाएगा. बता दें कि प्रदेश में गर्मी की दस्तक ने आभास करा दिया है. इस बीच बारिश का अलर्ट होने से कुछ दिन और तापमान स्थिर रहने का अनुमान है. इधर, प्रदेश में गेहूं की फसल तैयार है. किसान एक मार्च से समर्थक मूल्य पर होने जा रही गेहूं खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज लाने की तैयारी कर रहे हैं. इस साल सरकार ने 80 लाख टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य तय किया है. केंद्र सरकार ने 2425 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया है. विदिशा में गेहूं खरीदी की तारीख बदली विदिशा जिले में इस साल गेहूं की सरकारी खरीदी में बदलाव किया गया है। हर साल 15 मार्च से शुरू होने वाली खरीदी इस बार 1 मार्च से ही शुरू होगी। किसानों के लिए पंजीयन की प्रक्रिया 31 मार्च तक चलेगी। जिले में अभी गेहूं की कटाई शुरू नहीं हुई है। मार्च के पहले सप्ताह में कटाई तेज होने की उम्मीद है। इसके बाद किसान अपनी उपज खरीदी केंद्रों पर ला सकेंगे। प्रशासन ने इस बार 200 खरीदी केंद्र स्थापित किए हैं। किसानों के पंजीयन के लिए 728 केंद्र बनाए गए हैं। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने खरीदी की तैयारियों की समीक्षा बैठक ली थी। उन्होंने सभी खरीदी केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रति क्विंटल इतने रुपए होगा दाम  1 मार्च से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस साल किसानों को प्रति क्विंटल 2600 रुपये का भुगतान किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 150 रुपए और राज्य सरकार की ओर से 175 रुपए का बोनस शामिल है। जिले में कुल 91 खरीदी केंद्र होंगे, जहां से गेहूं की खरीदी की जाएगी। इस वर्ष 20,955 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करवाया है, और अब यह प्रक्रिया पूरी तरह से तैयार है। किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके, इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ने सभी कदम उठाए हैं। किसानों को उनकी मेहनत का सही भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने खरीदी केंद्रों पर आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा है, ताकि किसी भी किसान को परेशानी का सामना न करना पड़े। खरीदी केंद्रों पर होंगी शानदार सुविधाएं इंदौर कलेक्टर कार्यालय में आयोजित एक बैठक में इन तैयारियों का मूल्यांकन किया गया, जिसमें अपर कलेक्टर गौरव बेनल, जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन, और इंदौर विकास प्राधिकरण के सीईओ आर.पी. अहिरवार सहित अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी किसान को समस्याओं का सामना न करना पड़े और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चले। मार्च से शुरू होगी समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी, प्रति क्विंटल इतने रुपए होगा दाम इस बार के खरीदी अभियान में प्रशासन ने किसानों की सुविधा को सर्वोपरि रखा है। पिछले वर्षों में किसानों को लंबी कतारों और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार सभी व्यवस्थाएं पहले से सुचारू की गई हैं। खरीदी केंद्रों पर तौल कांटे, बारदाना (बोरियां), पेयजल, बैठने की उचित व्यवस्था और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। निष्पक्ष और समय पर भुगतान मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि उपज की खरीदी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम उठाए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बिना किसी देरी के उनका उचित मूल्य देना है। अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि खरीदी केंद्रों पर कोई भी अनियमितता न हो और भुगतान निश्चित समय पर किसानों के खाते में किया जाए। इस साल गेहूं की खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और सुव्यवस्थित किया गया है, जिससे किसानों को दलालों और बिचौलियों से बचाया जा सके। अब सभी किसानों की उपज का पूरी तरह से रिकॉर्ड रखा जाएगा और उनके बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके। गेहूं की खरीदी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी     खरीदी की शुरुआत: 1 मार्च 2025     कुल खरीदी केंद्र: 91 (इंदौर जिले में)     समर्थन मूल्य (MSP): ₹2,600 प्रति क्विंटल     पंजीकृत किसान: 20,955     तौल और भुगतान: तुलाई और भुगतान की प्रक्रिया उसी दिन की जाएगी  

2 लाख का इनाम जीतो, रील बनाने पर सरकार देगी पैसा, बस करना होगा ये काम

भोपाल मध्यप्रदेश मे अब राज्य सरकार रील बनाने पर युवाओं को पैसा देगा. रील प्रतियोगिता के तहत सरकार युवाओं को दो लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देगी. दरअसल, राज्य सरकार की तरफ से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता की घोषणा की गई है. इसके लिए प्रतिभागियों को 15 अप्रैल तक गांवों में कचरे से जुड़ी जागरूकता पर रील बनाकर सरकार द्वारा निर्धारित लिंक पर अपलोड करनी होगी. पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रतियोगिता की घोषणा करते हुए कहा कि, प्रदेशभर से प्राप्त रीलों में से सर्वश्रेष्ठ पांच प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा. नकद पुरस्कार दिया जाएगा आपको बता दें कि MP पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने स्वच्छता पर रील बनाने वाले को इनाम देने का ऐलान किया है। 15 अप्रैल तक गांवों में कचरे से जुड़ी जागरूकता पर रील बनाना होगा। इस प्रतियोगिता के तहत राज्य सरकार युवाओं को 2  लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देगी। प्रदेशभर से प्राप्त रीलों में से सर्वश्रेष्ठ 5  प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा। पहला पुरस्कार 2  लाख रुपए, दूसरा पुरस्कार 1 लाख रुपए, तीसरा पुरस्कार 50 हजार रुपए और 25-25 हजार रुपए के 2  सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। रील बनाकर भेज सकते हैं आपको बतादें कि इस संबंध में कैबिनेट मिनिस्टर प्रहलाद पटेल ने जानकारी देते हुए कहा कि गांवों में कचरा न फैले, इसके लिए कचरा प्रबंधन पर सभी को साथ मिलकर काम करना होगा। इस उद्देश्य से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता शुरू कर रही है। प्रतियोगिता के तहत नौजवान बेटे-बेटियां और अभिभावक स्वच्छता और अच्छी आदतों पर रील बनाकर भेज सकते हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि, गांवों में कचरा न फैले, इसके लिए कचरा प्रबंधन पर सभी को साथ मिलकर काम करना होगा. इस उद्देश्य से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता शुरू की जा रही है. इस प्रतियोगिता के तहत नौजवान बेटे-बेटियां और अभिभावक स्वच्छता और अच्छी आदतों पर रील बनाकर भेज सकते हैं.  रील बनाने पर मिलेगा इनाम प्रहलाद पटेल ने कहा इस पहल से न केवल प्रतिभागी आर्थिक पुरस्कार प्राप्त करेंगे, बल्कि समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसलिए सभी से अनुरोध है कि, एक बार कैमरा उठाएं और स्वच्छता के संदेश के साथ रील बनाने के लिए आगे आएं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की कल्पना की थी. इसी को साकार करने के लिए सरकार ने ‘कचरा नहीं, यह कंचन है’ का संदेश दिया है. यदि कचरे को सही तरीके से अलग किया जाए, तो यह आय का भी स्रोत बन सकता है.  इस लिंक पर करें अपलोड स्वच्छता के प्रति जागृति संबंधी रील बनाकर https://mp.mygov.in/task/swachh-madhya-pradesh-reel-making-contest… पर रजिस्ट्रेशन कर रील अपलोड करना होगा. इसमें प्रथम पुरस्कार की राशि 2 लाख रुपए है. मंत्री प्रहलाद पटेल से आग्रह किया है कि ‘स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ‘स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता’ में भाग लेकर http://mp.mygov.in पर 15 अप्रैल तक अपलोड करें. बता दें कि पहला पुरस्कार दो लाख रुपए, दूसरा पुरस्कार एक लाख रुपए और तीसरा पुरस्कार 50 हजार रुपए दिलाएगा. इसके अलावा 25-25 हजार रुपए के दो सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे.

करोड़ों EPFO के सब्सक्राइबर्स को लगेगा तगड़ा झटका! इंटरेस्ट रेट पर चल सकती है कैंची

नई दिल्ली  प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को झटका लग सकता है। ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की आज  मीटिंग होगी जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए पीएफ पर इंटरेस्ट रेट का फैसला होगा। बिजनस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएफ के लिए ब्याज दर में कटौती की जा सकती है। इसकी वजह यह है कि स्टॉक मार्केट और बॉन्ड यील्ड से ईपीएफओ की कमाई में गिरावट आई है। साथ ही ज्यादा दावों का सेटलमेंट किया गया है। पिछली बार इसे बढ़ाकर 8.25% किया गया था। उससे पहले 2022-23 में पीएफ सब्सक्राइबर्स को 8.15% ब्याज दिया गया था। ईपीएफओ के बोर्ड की इनवेस्टमेंट कमेटी की पिछले हफ्ते बैठक हुई थी। इसमें ईपीएफओ के इनकम और एक्सपेंडीचर प्रोफाइल पर चर्चा हुई ताकि बोर्ड को ईपीएफ इंटरेस्ट रेट की सिफारिश की जा सके। बोर्ड में शामिल कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इस साल इंटरेस्ट रेट पिछले साल के मुकाबले कम हो सकता है। इसकी वजह यह है कि हाल के महीनों में बॉन्ड यील्ट में गिरावट आई है। ऐसे में अगर ज्यादा ब्याज दिया जाता है तो फिर ईपीएफओ के पास कोई सरप्लस नहीं रह जाएगा। कब मिला सबसे ज्यादा ब्याज प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों की बेसिक सैलरी पर 12% की कटौती ईपीएफ खाते के लिए की जाती है। साथ ही कंपनी भी इतना ही पैसा कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करती है। ईपीएफओ के करीब सात करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक EPFO ने 2024-25 में 5.08 करोड़ से ज्यादा क्लेम निपटाए हैं। इन क्लेम की कुल राशि ₹2.05 लाख करोड़ है। 2023-24 में 4.45 मिलियन क्लेम निपटाए गए थे, जिनकी कुल वैल्यू ₹1.82 लाख करोड़ थी। मतलब इस साल लोगों ने अपने PF अकाउंट से पैसा ज्यादा पैसा निकाला है। साथ ही स्टॉक मार्केट और बॉन्ड से ईपीएफओ को कम कमाई हुई है। 1952-53 में ईपीएफओ की ब्याज दर 3% थी। धीरे-धीरे बढ़ते हुए 1989-90 में यह 12% तक पहुंच गई। यह अब तक की सबसे ज्यादा ब्याज दर थी। साल 2000-01 तक यही ब्याज दर रही। उसके बाद 2001-02 में यह घटकर 9.5% हो गई। साल 2005-06 में यह और गिरकर 8.5% पर आ गई। फिर 2010-11 में ब्याज दर को बढ़ाकर 9.50% किया गया। लेकिन 2011-12 में इसे फिर से घटाकर 8.25% कर दिया गया। 2021-22 में यह सबसे कम 8.10% तक पहुंच गई थी।

प्रदेश अध्यक्ष की लिस्ट में सबसे आगे नरोत्तम मिश्रा, वीडी शर्मा को रिपीट करने की कम है संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश बीजेपी में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय के बीच हुई गुप्त बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। यह बैठक भोपाल स्टेट हैंगर पर हुई। चर्चा है कि मार्च के पहले हफ्ते में मध्य प्रदेश बीजेपी के नए अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी 20 मार्च तक होने की संभावना है। इसके लिए आधे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना जरूरी है। वीडी शर्मा के वापस आने का चांस कम वीडी शर्मा को संसद की याचिका समिति में जगह मिलने से उनके दोबारा अध्यक्ष बनने की संभावना कम हो गई है। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि पार्टी ने शर्मा को यह पद देकर उन्हें अध्यक्ष पद से दूर रखने का संकेत दे दिया है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। वे इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने की लिस्ट में ये भी आगे अब लिस्ट में सबसे आगे नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय के अलावा फग्गन सिंह कुलस्ते, सुमेर सिंह सोलंकी, हिमाद्री सिंह, दुर्गादास उइके, हेमंत खंडेलवाल, अर्चना चिटनिस, रामेश्वर शर्मा और आलोक शर्मा जैसे कई नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। अंतिम चरण में है तलाश मध्यप्रदेश बीजेपी में नए कप्तान की तलाश अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। कई दिनों से टल रहे इस चुनाव को लेकर अब तेजी आ गई है। इसका सबसे बड़ा कारण केंद्रीय मंत्री अमित शाह और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बीच हुई एक गुप्त बैठक है। यह बैठक भोपाल के स्टेट हैंगर पर हुई, जहां शाह ने विजयवर्गीय को फ़ोन करके बुलाया था। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि इस बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मंथन हुआ है। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सबसे ज्यादा चर्चा में नरोत्तम मिश्रा इस गुप्त बैठक के बाद से ही पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है। सूत्रों की मानें तो विजयवर्गीय ने शाह के सामने नरोत्तम मिश्रा के नाम का प्रस्ताव रखा है। ऐसी भी खबरें हैं कि पार्टी कैलाश विजयवर्गीय को भी यह मौका दे सकती है। मार्च के पहले हफ्ते तक प्रदेश बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी होना है चुनाव बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी 20 मार्च तक होने की संभावना है। देश के लगभग 12 राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव हो चुके हैं। अभी भी 6 राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। इन्हीं चुनावों के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। देश में कुल 18 राज्य हैं, जहां बीजेपी की सरकार है या फिर प्रमुख विपक्षी दल है। इसलिए 9 राज्यों में चुनाव पूरा होना अनिवार्य है।

चेन्नई से कोलकाता 3 घंटे में 600 रुपये में? IIT-M स्टार्टअप की ‘ई-फ्लाइंग बोट’ का अनावरण

बेंगलुरु कल्पना कीजिए कि चेन्नई से कोलकाता तक मात्र तीन घंटे में मात्र 600 रुपये में यात्रा की जाए – जो कि एसी थ्री-टियर ट्रेन टिकट से भी सस्ता है।यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो आईआईटी-मद्रास द्वारा संचालित स्टार्टअप वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज, जो विंग-इन-ग्राउंड (डब्ल्यूआईजी) क्राफ्ट विकसित कर रही है, जिसे इलेक्ट्रिक सीग्लाइडर के रूप में जाना जाता है, जल्द ही तटीय क्षेत्रों में यात्रियों और माल का परिवहन करेगी। बेंगलुरु में एयरो इंडिया में वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज ने अपना डिज़ाइन प्रदर्शित किया, जिसका प्रोटोटाइप जल्द ही आने की उम्मीद है। ये शिल्प पारंपरिक हवाई यात्रा और नौकाओं के लिए एक टिकाऊ विकल्प प्रदान करते हैं। दरअसल, IIT मद्रास के इनक्यूबेशन सेल की तरफ से समर्थित स्टार्टअप वॉटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज ने यह चौंकाने वाला दावा किया है. कंपनी के इस दावे के मुरीद मशहूर कारोबारी और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी हो गए हैं. आनंद महिंद्रा ने तो यह तक कह दिया कि आईआईटी मद्रास स्टार्टअप को बढ़ावा देने के मामले में सिलिकॉन वैली को टक्कर देता दिख रहा है…! हाल ही में बेंगलुरु में एयरो इंडिया 2025 में वॉटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज ने भारत में एक नए ट्रांसपोर्ट मोड के डिज़ाइन को शोकेस किया है. इसे विग क्रॉफ्ट (WIG Craft) नाम दिया गया है. जिसको लेकर दावा किया जा रहा है कि ये विग क्राफ्ट समुद्र की सतह से 4 मीटर ऊपर चलेगा और इससे कोलकाता से चेन्नई तक की यात्रा महज 600 रुपये में की जा सकेगी. आनंद महिंद्रा ने इस इलेक्ट्रिक सीग्लाइडर के डिजाइन की प्रशंसा की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि, “आईआईटी मद्रास स्टार्टअप को बढ़ावा देने के मामले में सिलिकॉन वैली को टक्कर दे रहा है…! लगभग हर हफ़्ते एक नए ‘टेकवेंचर’ की खबर आती है. इसमें मुझे जो पसंद आया वह सिर्फ़ हमारे भव्य जलमार्गों के दोहन का वादा नहीं है, बल्कि यह फैक्ट भी है कि इस क्राफ्ट का डिज़ाइन बहुत ही शानदार है!” क्या है विग क्रॉफ्ट मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज इलेक्ट्रिक सी ग्लाइडर डेवलप कर रहा है. जिसे विंग-इन-ग्राउंड (WIG) क्राफ्ट के रूप में भी जाना जाता है. ये विग क्राफ्ट एयरोप्लेन और शिप के लिए एक बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. कथित तौर पर इस विग क्राफ्ट को पानी की सतह से लॉन्च किया जाएगा. जो सतह से तकरीबन 4 मीटर उपर चलेगा और इफिशिएंसी बढ़ाने के लिए ग्राउंड इफ़ेक्ट का उपयोग करेगा. इसकी स्पीड 500 किमी/घंटा तक हो सकती है. मनीकंट्रोल को दिए गए एक बयान में, वॉटरफ्लाई के सीईओ और को-फाउंडर हरीश राजेश ने कहा “कोलकाता से चेन्नई तक WIG Craft के जरिए 1,600 किमी की यात्रा के लिए प्रति सीट सिर्फ 600 रुपये का खर्च आएगा. जो एसी थ्री-टियर ट्रेन टिकट की तुलना में बहुत सस्ता है, जिसकी कीमत 1,500 रुपये से अधिक है.” उन्होंने यह भी कहा कि ये क्रॉफ्ट पानी से उड़ान भरने में सक्षम होगा और चार मीटर की स्थिर ऊंचाई बनाए रखेगा. जिससे किसी तरह के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होगी. इसके अलावा ये क्रॉफ्ट पानी, बर्फ, रेगिस्तान या किसी भी अन्य इलाके में भी उड़ान भरने में सक्षम होगा. वाटरफ्लाई कथित तौर पर इन सीग्लाइडर्स को एयरलाइनों को बेचने की योजना बना रही है. ख़बर यह भी है कि वाटरफ्लाई 2029 तक दुबई-से-लॉस एंजिल्स  और चेन्नई-सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय मार्गों की मैपिंग भी कर रही है.

AAP की हार से बढ़ गई ममता की टेंशन, बोली 2026 में बंगाल में खेला होगा और जोरदार होगा

 कोलकाता अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि 2026 में बंगाल में फिर से खेला होगा और ज़ोरदार होगा. ममता बनर्जी कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रही थीं. दरअसल 2021 में हुए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के दौरान ममता बनर्जी ने ही ‘खेला होबे’ का नारा दिया था. उसके बाद से ही ये नारा देशभर में चर्चित हो गया था. बीजेपी (BJP) के आक्रामक कैंपेन के बावजूद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी. बीजेपी पर निशाना टीएमसी के चुनावी प्रबंधन का काम देख रही आईपैक कंपनी का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ‘यह प्रशांत किशोर की आईपैक नहीं है, उनकी नई पार्टी है. आप सभी को आईपैक को समझना होगा और सहयोग करना होगा, वे नई टीम हैं. भाजपा के पास 50 एजेंसियां ​​हैं, हम एक रख सकते हैं.’ ममता बनर्जी ने कहा, ‘भाजपा ने एक कंपनी भेजी है जिसमें प्रतिभाशाली लोग हैं. वे डेटा ऑपरेटर के पास जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में हरियाणा, राजस्थान के लोगों के नाम डाल रहे हैं. यह ऑनलाइन किया जा रहा है. भाजपा नहीं चाहती कि बंगाल में उसकी संस्कृति बरकरार रहे.’ ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि हम महाराष्ट्र नहीं हैं, हम चुनाव आयोग के सामने धरना दे सकते हैं. चुनाव आयोग पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ‘इसी तरह उन्होंने महाराष्ट्र और दिल्ली को हराया, लेकिन हमने उनकी चाल पकड़ ली है. अगर मैं 26 दिनों तक धरने पर बैठ सकती हूं, तो मैं चुनाव आयोग के सामने भी धरने पर बैठ सकती हूं ताकि उसकी विश्वनीयता वापस पहले जैसी हो जाए.’. भाजपा पर हमला, संगठन में बदलाव के संकेत टीएमसी का यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के जरिए तृणमूल को घेरने की कोशिश कर रही है। हालांकि, टीएमसी का दावा है कि जनता का भरोसा अब भी पार्टी के साथ है। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी पार्टी संगठन को पुनर्गठित करने का संदेश दे सकती हैं। लंबे समय से पार्टी के अंदर कॉर्पोरेट मानसिकता के खिलाफ नाराजगी रही है, जिसे दूर करने के लिए ममता बनर्जी चुनावी रणनीति के लिए बाहरी एजेंसियों पर कम और पार्टी कार्यकर्ताओं पर अधिक भरोसा करना चाहती हैं। जनसंपर्क अभियान पर रहेगा जोर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि टीएमसी नेतृत्व का मुख्य फोकस जमीनी कार्यकर्ताओं को अधिक प्रभावी बनाना होगा। ममता बनर्जी पहले ही इस बात पर जोर दे चुकी हैं कि राज्य सरकार की योजनाओं और सेवाओं का लाभ सही तरीके से जनता तक पहुंचे। राज्यभर में डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था सम्मेलन में जिलों से आए नेताओं की मौजूदगी रहेगी, जबकि जो नेता सभा में शामिल नहीं हो पाएंगे, उनके लिए पूरी बैठक ऑनलाइन प्रसारित की जाएगी। पार्टी चाहती है कि ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी का संदेश जमीनी स्तर तक पहुंचे। टीएमसी का मिशन 2026 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल एक बार फिर अपनी रणनीति को धार देने में जुट गई है। यह सम्मेलन पार्टी के लिए आगामी चुनावों की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राम दर्शन के नवीन प्रकल्प का किया लोकार्पण

भोपाल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रखर राष्ट्रवादी विचारक भारत रत्न नानाजी देशमुख अजातशत्रु थे। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपातकाल की अवधि में कई कष्ट सहे और महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए तत्कालीन परिस्थतियों में राष्ट्रहित में जो कार्य किया उस वजह से उन्हें राष्ट्र ऋषि की उपाधि दी गई। वे वास्तविक अर्थों में राष्ट्रसेवी थे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नानाजी देशमुख को भारत रत्न देकर उनके जीवन और कार्यों का सच्चा सम्मान किया। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह गुरूवार को सतना जिले के चित्रकूट में भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह समारोह नानाजी देशमुख की 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवीनीकृत राम दर्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का रिमोट का बटन दबाकर लोकार्पण किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने मूर्तिकारों का सम्मान भी किया। नानाजी के श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। नानाजी की 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी कर्मस्थली रही चित्रकूट में तीन विशेष कार्यक्रम एक साथ आयोजित किए गए। इनमें नानाजी का श्रद्धांजलि समारोह, पंडित दीनदयाल जी की प्रतिमा और राम दर्शन का लोकार्पण शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने भगवान कामता नाथ को प्रणाम कर नानाजी के महान व्यक्तित्व को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि नानाजी का जन्म महाराष्ट्र में हुआ, वे संघ से जुड़े और उत्तर प्रदेश को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। नानाजी ने जनसंघ को खंड-प्रखंड स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि राजनीति में रहते हुए भी नानाजी अजातशत्रु थे। इस क्षेत्र में उनका कोई विरोधी नहीं था। एक राजनेता के जीवन में ऐसा अत्यंत दुर्लभ दिखाई देता है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि नानाजी ने राजनीति के इतर समाज सेवा सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए। नानाजी ने अपने जीवन में संकल्प लेते हुए एकात्म मानववाद को धरातल पर उतारने का निर्णय लिया। वे समाज से बुराई को दूर करते रहे, लेकिन कभी किसी बुराई को स्वयं तक नहीं आने दिया। उनके आदर्श एक सदी तक राजनीतिज्ञों के लिए आदर्श बनकर रहेंगे। केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय और नानाजी देशमुख लगभग एक ही काल खंड में जन्मे थे। भारत के विकास को पं. दीनदयाल उपाध्याय ने अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के कल्याण से जोड़कर देखा था। एकात्म मानववाद का विचार कैसे जमीन पर उतरेगा एक समय में लोग इसे असंभव समझते थे, लेकिन नानाजी ने चित्रकूट से ग्रामोदय के उत्थान के विचार के साथ अंत्योदय की नींव रखी। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आज तक देश के 60 करोड़ परिवारों को अपना पक्का मकान, स्वच्छ पेयजल, रसोई गैस और मुफ्त इलाज समेत जैसी अनेक सुविधाएं मिल रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विचार के संदर्भ में श्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश में गांव-गांव को गोकुल बनाने का कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीयता के साथ-साथ हमारी कृषि, शिक्षा और वसुधैव कुटुंबकम को कैसे विश्व में स्थापित किया जाए, नानाजी के विचारों के अनुकूल इन कार्यों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि देश का विकास कितना भी हो जाए लेकिन विरासत को साथ लेकर चलना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि नानाजी कुशल संगठनकर्ता थे। जब देश में आपातकाल लगा तो बड़े पैमाने पर लोग लोकतंत्र को बचाना चाहते थे। इसी कालखंड में कई आंदोलन हुए और जनसंघ का उदय हुआ। नानाजी देशमुख ने राष्ट्र प्रथम की भावना को प्राथमिकता देते हुए दलों का विलय भी करवाया। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने नानाजी देशमुख को राष्ट्र ऋषि की उपाधि दी थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नानाजी देशमुख को भारत रत्न देने का कार्य किया। नानाजी ने 60 वर्ष की आयु में सक्रिय राजनीति से स्वयं को दूर कर आदर्श प्रस्तुत किया। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि देशभर में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना के लिए नानाजी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। इसी तरह पं. दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्र, समाज और व्यक्ति के विकास का एक पूर्ण दर्शन दिया। नानाजी देशमुख के साथ ही पं. दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का लगाया राष्ट्र सेवा के भाव का पौधा आज विशाल वट वृक्ष बन चुका है। नानाजी ने ग्राम स्वावलंबन की कल्पना की, वे प्रेरणा पुंज थे – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चित्रकूट स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान में केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह समेत यहां उपस्थित सभी अतिथियों का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सुखद संयोग रहा है कि उनकी नानाजी से भेंट हुई थी। नानाजी का होना हम सबके लिए एक प्रेरणा पुंज के समान था। जब पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी भाई देसाई ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया तो नानाजी ने बड़ी विनम्रता से मना कर दिया था। नानाजी ने गांवों में स्वावलंबन की कल्पना की थी। 

पीएम मोदी ने महाकुंभ पर लिखा ब्लॉग में कहा- ‘हे मां गंगा अगर सेवा में कुछ कमी रह गई हो तो माफ करना’

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विशाल महाकुंभ समागम की तुलना गुलामी की मानसिकता की बेड़ियों को तोड़कर स्वतंत्र रूप से सांस लेने वाले राष्ट्र की नई जागृत चेतना से की। महाकुंभ के समापन के एक दिन बाद उन्होंने एक ब्लॉग में लिखा, “महाकुंभ समाप्त हो गया है। एकता का ‘महायज्ञ’ संपन्न हो गया है।” उन्होंने कहा कि देश को अब ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आत्मविश्वास और एकता की इसी भावना के साथ आगे बढ़ना है। मोदी ने कहा कि संगम में जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि भारत अब नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है और यह युग परिवर्तन की ओर इशारा करता है जो भारत के लिए एक नया भविष्य लिखेगा। प्रधानमंत्री ने सेवाओं में कमी के लिए क्षमा मांगी प्रधानमंत्री ने “माँ गंगा, माँ यमुना, माँ सरस्वती” के साथ-साथ लोगों से, जिन्हें उन्होंने भगवान का रूप बताया, सेवाओं में किसी भी कमी के लिए क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी व्यवस्था करना आसान नहीं था। महाकुंभ में भगदड़ के दौरान कम से कम 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जिसमें देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि 13 जनवरी को महाकुंभ शुरू होने के बाद से प्रयागराज में 65 करोड़ से अधिक लोग पवित्र स्थल पर आए हैं। पीएम मोदी ने ब्लॉग में सीएम योगी की प्रशंसा की अपने ब्लॉग में मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सांसद के रूप में वह गर्व से कह सकते हैं कि आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार, प्रशासन और लोगों ने सामूहिक रूप से इस “एकता के महाकुंभ” को सफल बनाया। उन्होंने प्रयागराज के निवासियों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि सफाई कर्मचारी, पुलिस कर्मी, नाविक, ड्राइवर और रसोइया सभी ने भक्ति और सेवा की भावना के साथ अथक परिश्रम करके इसे सफल बनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले कुछ दशकों में जो कभी नहीं हुआ, वह इस बार हुआ। उन्होंने कहा, “इसने आने वाली कई शताब्दियों की नींव रखी है।” मोदी ने कहा कि महाकुंभ का आयोजन प्रबंधन पेशेवरों, योजना और नीति विशेषज्ञों के लिए एक अध्ययन का विषय बन गया है, क्योंकि दुनिया में इस तरह के विशाल आयोजन का कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। उन्होंने कहा, “जब किसी राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वह सैकड़ों वर्षों की गुलामी की सभी बेड़ियों को तोड़कर एक नई चेतना के साथ सांस लेती है, तो ऐसा नजारा सामने आता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा।” मोदी ने कहा कि महाकुंभ की परंपरा हजारों वर्षों से भारत की राष्ट्रीय चेतना को पुनर्जीवित करती रही है, देश और समाज को नए रास्ते सुझाती रही है। महाकुंभ ने भारत की विकास यात्रा में एक नए अध्याय का संदेश दिया उन्होंने कहा, “इस बार इस तरह का महाकुंभ 144 वर्षों के बाद आया है और इसने भारत की विकास यात्रा में एक नए अध्याय का संदेश दिया है। यह संदेश ‘विकसित भारत’ का है।” उन्होंने कहा कि महाकुंभ में विदेश सहित हर क्षेत्र, जाति और विचारधारा के लोग एक थे, उन्होंने लोगों से ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए इसी तरह एक साथ आने का आह्वान किया। मोदी ने कहा कि एक समय में 140 करोड़ देशवासियों की आस्था इस पर्व से जुड़ी थी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या ने निश्चित रूप से एक रिकॉर्ड बनाया है क्योंकि अमेरिका की आबादी से लगभग दोगुने लोगों ने इस पवित्र स्नान में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने पिछले कुंभों के अनुभव के आधार पर अपना अनुमान लगाया था। उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या अनुमान से कहीं अधिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालुओं को पवित्र समागम में शामिल होते देखना उनके लिए बहुत सुखद अनुभव था। उन्होंने कहा, “इससे यह विश्वास बढ़ता है कि भारत की युवा पीढ़ी हमारे मूल्यों और संस्कृति की वाहक है और इसे आगे बढ़ाने में अपनी जिम्मेदारी समझती है। वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयागराज की यह तीर्थयात्रा एकता और सद्भाव का संदेश देती है। उन्होंने महाकाव्य रामायण की एक घटना का जिक्र किया जिसमें नाविक राजा निषाद राज ने उत्तर प्रदेश के शहर के आसपास के एक स्थान पर भगवान राम से मुलाकात की थी। आनंदित लोगों के दृश्य को कभी नहीं भूल सकते प्रधानमंत्री ने कहा कि करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु बिना किसी आमंत्रण के पवित्र संगम पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह वहां स्नान करने के बाद आनंदित लोगों के दृश्य को कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि महिलाएं हों, बुजुर्ग हों या दिव्यांग, हर कोई अपने साधन से यहां आया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से श्रद्धालुओं का उनके घर लौटने पर श्रद्धा के साथ स्वागत किया गया, वह भी यादगार है। मोदी ने कहा कि इस बड़े आयोजन ने नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के उनके संकल्प को मजबूत किया है, चाहे वह बड़ी हो या छोटी। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना या किसी भी अन्य नदी की पवित्रता लोगों की जीवन यात्रा से जुड़ी है।  

कर्नाटक के होटलों में इडली को लेकर बड़ा खुलासा, हो रहा प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल,52 पर हुई कार्रवाई

बेंगलुरु आमतौर पर लोग दक्षिण भारतीय व्यंजन इडली को बेहद चाव से खाते हैं लेकिन इसको लेकर कर्नाटक में एक बड़ा खुलासा हुआ है जिसके बाद  राज्य सरकार ने 52 होटलों पर कार्रवाई की है. कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग ने राज्यभर में 52 होटलों में इडली बनाने के लिए पॉलीथीन शीट के अवैध इस्तेमाल का खुलासा किया है जिससे लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है. इसको लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने गुरुवार को जानकारी दी. प्लास्टिक शीट से इडली बनाने पर सख्ती स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इडली बनाने में विशेष रूप से पतली पॉलीथीन शीट का उपयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, क्योंकि यह कैंसरकारी (कार्सिनोजेनिक) होती है. सरकार इस तरह की हानिकारक चीजों के इस्तेमाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है. दरअसल खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कर्नाटक के 250 स्थानों से इडली के नमूने एकत्र किए थे. स्वास्थ्य मंत्री राव ने कहा, ‘पहले पारंपरिक रूप से इडली पकाने के लिए कपड़े का उपयोग किया जाता था, लेकिन हमें कुछ होटलों में प्लास्टिक शीट का उपयोग किए जाने की शिकायत मिली थी. इसी आधार पर हमने जांच की और 52 होटलों में प्लास्टिक का अवैध उपयोग पाया.’ प्लास्टिक से सेहत को गंभीर खतरा जांच के दौरान मिले चौंकाने वाले नतीजों से स्वास्थ्य विभाग चिंतित है. मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ‘गर्म होने पर प्लास्टिक के हानिकारक तत्व इडली में मिल सकते हैं, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती है.’ सरकार की सख्त कार्रवाई मंत्री ने कहा कि दोषी होटलों पर पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है, और सरकार खाद्य व्यंजनों में प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाएगी. उन्होंने जनता से अपील की कि यदि वो किसी होटल या रेस्टोरेंट में प्लास्टिक का उपयोग होता देखें तो तुरंत अधिकारियों को इसकी सूचना दें. रंगीन फूड कलर पर भी प्रतिबंध स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि 2024 में कर्नाटक सरकार ने रॉडामिन-बी नामक खतरनाक खाद्य रंग पर प्रतिबंध लगाया था, जिसका व्यापक रूप से गोभी मंचूरियन और कॉटन कैंडी जैसे खाद्य पदार्थों में उपयोग किया जाता था. राव ने कहा, ‘हमने गोभी मंचूरियन की जांच के दौरान पाया कि इसमें खतरनाक रॉडामिन-बी रंग का उपयोग किया जा रहा था. यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, इसलिए हमने इसे प्रतिबंधित कर दिया है. यदि कोई इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है, और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा.’  

चैम्पियंस ट्रॉफी में हार का मुद्दा पाकिस्तानी संसद में उठेगा, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ देंगे बयान

इस्लामाबाद ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम की बड़ी फजीहत हुई है. यह टूर्नामेंट पाकिस्तान की ही मेजबानी में खेला जा रहा है. मगर यह मेजबान टीम ग्रुप स्टेज से भी आगे नहीं बड़ सकी है. बड़ी बात ये है कि पाकिस्तान टीम बगैर कोई मैच जीते टूर्नामेंट से बाहर हो गई है. ऐसे में अब बड़ी खबर सामने आ रही है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अब अपनी टीम की हार का मुद्दा संसद में उठाएंगे. वो इस मामले को व्यक्तिगत तौर पर संसद में रखेंगे. पीएम शरीफ के राजनीतिक और सार्वजनिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक निजी चैनल पर यह जानकारी दी है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (PML-N) के नेता राणा सनाउल्लाह ने कहा कि चैम्पियंस ट्रॉफी में पाकिस्तानी टीम की अपमानजनक हार हुई और वो टूर्नामेंट से जल्दी बाहर हो गई. इस पर शरीफ सरकार संज्ञान लेगी. चैंपियंस ट्रॉफी में भारत से हारते ही कटोरा थामने की नौबत चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर होती ही टीम के लिए स्पॉन्सर तलाशना भी असंभव नजर आ रहा है. कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत ने रविवार को दुबई में पाकिस्तान को छह विकेट से रौंदा था फिर न्यूजीलैंड ने बांग्लादेश को हराकर खुद तो सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया ही भारत भी टॉप-4 में पहुंच गया. इसी के साथ ग्रुप ए से पाकिस्तान और बांग्लादेश बाहर हो गए. टूर्नामेंट से बाहर हुआ पाकिस्तान भारत से हारने से एक दिन पहले ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड मैच के लिए गद्दाफी स्टेडियम में लोगों की शानदार भीड़ को देखकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारी आत्मविश्वास से भरे हुए थे. बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, ‘लोगों की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान से इतर मैच का आनंद लेते देखना एक उत्साहवर्धक अनुभव था.’ लोग स्टेडियम आएंगे या नहीं 1996 के विश्व कप के बाद पाकिस्तान पहली बार किसी आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा था. फैंस को उम्मीद थी कि आठ टीमों की इस प्रतियोगिता में घरेलू टीम टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी. अब पीसीबी के सामने एक समस्या ये भी है कि पाकिस्तान में बचे हुए मैच में दर्शकों की भीड़ स्टेडियम पहुंचती है या नहीं. ब्रांड वैल्यू पर पड़ेगा असर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के वाणिज्यिक इकाई के एक विश्वसनीय सूत्र ने कहा कि अगर पाकिस्तान सेमीफाइनल में नहीं भी खेलता है तो भी पीसीबी को वित्तीय रूप से कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा क्योंकि केवल गेट पर्ची और मैदान की आय के अन्य स्रोत ही प्रभावित होंगे, लेकिन संकटग्रस्त टीम की ‘ब्रांड वैल्यू’ पर असर पड़ने वाला है. भारत ने मारी पेट पर लात पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी ने कहा,’हमें मेजबानी शुल्क, टिकट बिक्री सहित आईसीसी राजस्व में हमारा हिस्सा मिलने की गारंटी है, लेकिन अन्य मुद्दे भी हैं जैसे कि लोगों का इस बड़े टूर्नामेंट में रुचि खत्म होना और प्रसारणकर्ता द्वारा आधे भरे हुए स्टेडियम दिखाना आदि. और सबसे बड़ी चिंता यह है कि यहां क्रिकेट के प्रति दीवानगी के बावजूद भविष्य में पाकिस्तान क्रिकेट को एक ब्रांड के रूप में बेचना आसान नहीं होगा.

प्राकृतिक खेती के इच्छुक राज्य के किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल प्रारंभ किया गया : कृषि मंत्री श्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसान कल्याण मिशन अंतर्गत किसानों की आय में वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह मिशन कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने का प्रमुख माध्यम बनेगा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा प्राकृतिक कृषि के प्रसार एवं किसानों को प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड का गठन किया गया है। प्राकृतिक खेती कर रहे एवं प्राकृतिक खेती के इच्छुक राज्य के किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल प्रारंभ किया गया है।पोर्टल पर प्राकृतिक खेती करने के इच्छुक कुल 72 हजार 967 किसानों ने पंजीयन करवाया है। प्रत्येक पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केन्द्र की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में 81 लाख से अधिक किसानों को गत वर्ष चार हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि का अंतरण किया गया है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 3 हजार 900 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जा रही है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण के लिए इस वर्ष 600 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। विगत वर्ष में किसानों को समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ पर प्रति क्विंटल 125 रुपये का बोनस प्रदाय किया गया। देश में पहली बार राज्य सरकार ने सोयाबीन का 4 हजार 892 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर उपार्जन करने का निर्णय लिया। लगभग 2 लाख किसानों से प्रदेश में पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन का उपार्जन कर 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि का भुगतान किया गया। खरीफ-2024 में 1.23 लाख क्विंटल से अधिक प्रमाणित बीज का वितरण किया गया। किसानों को उर्वरक प्रदाय करने के लिए केन्द्रों की संख्या बढ़ाने के साथ ही अमानक उर्वरक बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने और उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोग शालाओं की भूमिका को सक्रिय बनाकर किसान हित सुनिश्चित किया गया। मध्यप्रदेश को कृषि उत्पादन में निरंतर अग्रणी स्थान मिला है। सात बार कृषि कर्मण अवॉर्ड भी प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना अब प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के नाम से लागू है। कृषकों को सौर ऊर्जा के लाभ से लाभांवित करने के लिए प्रदेश में अस्थाई विद्युत कनेक्शन लेने वाले लगभग सवा लाख किसानों को सौर ऊर्जा के पम्प प्रदाय किये जाएँगे। अगले चार वर्ष में सौर ऊर्जा पम्प प्रदाय कर किसानों को विद्युत आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। किसानों को अधिक दाम प्रदान करने वाली फसलों को लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश के सिंचित क्षेत्र का रकबा अगले पाँच वर्ष में 50 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर एक करोड़ लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का रकबा 26 लाख हेक्टेयर से अधिक है। संतरा, टमाटर, धनिया, लहसुन और मसाला उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम है। प्रदेश में 50 हाइटेक नर्सरी बनाई जा रही हैं। नर्सरियों के कुशल प्रबंधन के लिए ई-नर्सरी पोर्टल भी तैयार किया गया है।  

फिल्में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

भोपाल मीडिया और सिनेमा की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका है। फिल्में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। हमारी फिल्में केवल कथा और कहानी नहीं होतीं, इनमें राष्ट्र और समाज को सशक्त करने का संदेश भी होता है। आज के डिजिटल युग में मीडिया और सिनेमा की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर सेज विश्वविद्यालय के सभागार में सतपुड़ा चलचित्र समिति के ग्वालियर शार्ट फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर विमोचन समारोह को संबोधित कर रही थी। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि ग्वालियर शार्ट फिल्म फेस्टिवल में युवा भाग लेगें और अपनी रचानात्मक और सृजनात्मक क्षमता से नवाचार करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें युवा पीढ़ी पर गर्व है। युवा वर्ग देश में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि युवाओं की समाज और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि फिल्मों के माध्यम से सामाजिक मूल्यों, परम्पराओं और संस्कृति को संरक्षित करने के साथ ही समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण कार्य किया जा सकता है। सतपुड़ा चलचित्र समिति इस दिशा में बहुत अच्छा कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा ने हमारे राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता को सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि सिनेमा को समाज से जोड़ने का माध्यम बनाने की दिशा में समिति का प्रयास सराहनीय है। मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि आज के युग में कुछ डिजिटल प्लेटफार्म पर असामाजिक व्यक्ति परिवारिक मूल्यों को नष्ट करने का दुष्प्रयास कर रहे है। ऐसे समय में सतपुड़ा चलचित्र समिति जैसी संस्थाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर शार्ट फिल्म फेस्टिवल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक विचारधारा का विस्तार है। यह नवोदित फिल्मकारों के लिये एक मंच है। इस फेस्टिवल के माध्यम से हम ऐसे सिनेमा को प्रोत्साहित करेगें जो भारतीय मूल्यों को संरक्षित रखते हुए समाज के समक्ष सार्थक विषय प्रस्तुत कर रहे हैं। ग्वालियर शार्ट फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर विमोचन समारोह के प्रारंभ में सतपुडा़ चलचित्र समिति और विश्व संवाद केन्द्र मध्यप्रदेश के अध्यक्ष लाजपत आहूआ ने कार्यक्रम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में सेज विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव नीरज उपमन्यु ने अध्यक्षयीय उद्बोधन दिया। उन्होंने अतिथियों का आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रय में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।  

बदल जाएगी इंदौर की सड़कों की सूरत, 300 करोड़ की लागत से बना बीआरटीएस अब हटेगा

इंदौर 12 साल पहले तीन सौ करोड़ की लागत से बना इंदौर का बीआरटीएस हटेगा। इसे लेकर लगी याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे हटाने की मंजूरी दी है। अब एक दो दिन में नगर निगम बीआरटीएस की बस लेन हटाने का काम शुरू करेगा। तीन माह पहले इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीआरटीएस को हटाने की घोषणा कर कोर्ट में इस बारे में पक्ष रखने की बात कही थी। 11 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस पर आठ प्रमुख जंक्शनों पर नगर निगम ब्रिज बनाना चाहता है। इसके लिए बीआरटीएस हटाने का फैसला लिया। हाईकोर्ट में बीआरटीएस हटाने के लिए याचिका लगी थी, लेकिन बीते कई वर्षों से नगर निगम बीआरटीएस की उपयोगिता बताते हुए अपना पक्ष रखता आ रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के बाद नगर निगम ने खुद हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि सरकार बीआरटीएस हटाना चाहता है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने इस बारे में कहा कि याचिका में दोनो ही पक्ष बीआरटीएस हटाने पर सहमत थे, इसलिए कानूनी अड़चन नहीं आई। बीआरटीएस के हटने से शहर के ट्रैफिक में अलग सुगमता आएगी और ब्रिज भी बन सकेंगे। बीआरटीएस के हटने से सड़क की चौड़ी हो जाएगी। शुक्रवार से बस लेन हटाने का काम शुरू हो जाएगा।   70 हजार से ज्यादा यात्री करते है सफर इंदौर के निरंजपुर चौराहा से राजीव गांधी प्रतिमा चौराहा तक बने बीआररटीएस में आई बसों का संचालन एआईसीटीएसएल करता है। प्रतिदिन एक लाख से 70 हजार तक यात्री आई बस में सफर करते है। अब यह बसे मिक्स ट्रैफिक में चलेगी। ज्यादा छात्र और नौकरीपेशा इन बसों का उपयोग करते थे। देश का पहला प्रोजेक्ट था जवाहर लाल शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत इंदौर बीआरटीएस देश का पहला स्वीकृत प्रोजेक्ट था। इंदौर के बाद पुणे, दिल्ली, भोपाल, अहबादाबाद में भी बीआरटीएस प्रोजेक्ट मंजूर हुए थे, हालांकि इंदौर से पहले अहमदाबाद का बीआरटीएस बनकर तैयार हो गया था। बीआरटीएस के जंक्शनों पर ब्रिज बनाने के लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है।  

प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती शमी ने की समीक्षा

भोपाल प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने गुरूवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सागर एवं शहडोल संभाग के कमिश्नर एवं कलेक्टर्स से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों से अच्छी गुणवत्ता का गेहूं उपार्जित करें। साथ ही उपार्जित गेहूं का भुगतान समय पर करें। गौरतलब है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने गत दिनों गेहूं उपार्जन की समीक्षा के दौरान जिलेवार उपार्जन तैयारियों की समीक्षा के निर्देश दिये थे। श्रीमती शमी ने कहा कि उपार्जन केन्द्रों में किसानों के लिये सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। किसानों को गेहूं उपार्जन के लिये पंजीयन कराने के लिये जागरूक करें। उन्होंने संभागायुक्त और जिलों के कलेक्टर्स से अलग-अलग बात कर गेहूं उपार्जन के लिये की गई तैयारियों की जानकारी ली। अभी तक 3 लाख से अधिक किसान गेहूं उपार्जन के लिये पंजीयन करा चुके हैं। श्रीमती शमी ने बताया कि वेयर हाउस के लंबित भुगतान भी जल्द किये जायेंगे। उन्होंने उचित मूल्य दुकानों से राशन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों का ई-केवायसी कराने के निर्देश भी दिये। उन्होंने बताया कि गेहूं उपार्जन के लिये किसान 31 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूं का उपार्जन 1 मार्च से 18 अप्रैल तक होगा। शेष संभागों में 17 मार्च से 5 मई तक गेहूं का उपार्जन किया जायेगा। संचालक खाद्य कर्मवीर शर्मा ने कहा कि उपार्जित गेहूं का परिवहन जल्द किया जाये। गेहूं के भंडारण की समुचित व्यवस्था करें। उपार्जन केन्द्रों की माइक्रो प्लानिंग करें। इस बात ध्यान रखें कि उपार्जन केन्द्रों में किसानों को कोई कठिनाई नहीं हो। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों का सत्यापन कराएं। उचित मूल्य दुकान के स्टॉक का भौतिक सत्यापन 7 दिन में करा लें। उपार्जन कार्यों की मॉनिटरिंग के लिये संबंधित अधिकारियों की ड्यूटी लगाएं। उपार्जन केन्द्रों में पर्याप्त बारदानों की व्यवस्था करें। एमडी नागरिक आपूर्ति निगम अनुराग वर्मा ने किसानों के रजिस्ट्रेशन पर जोर दिया। उन्होंने धान मिलिंग की समीक्षा की तथा मिलिंग का कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिये। वर्मा ने परिवहन संबंधी लंबित बिलों को जल्द भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि भुगतान की कार्यवाही शीघ्र की जायेगी। जिला कलेक्टर्स ने गेहूं उपार्जन संबंधी तैयारियों की जानकारी दी।  

यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा पीथमपुर में ही जलेगा, प्रक्रिया शुरू, फैक्ट्री के पास 24 थानों का फोर्स तैनात

 धार सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद गुरुवार को धार के पीथमपुर स्थित रामकी एनवायरो में कचरे के निपटान की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आज 10 टन कचरे का निष्पादन होगा. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 17-18 घंटे लगेंगे. अधिकारियों ने बताया कि भोपाल से लाए गए यूनियन कार्बाइड के कचरे को कंटेनर से निकालने, उसकी जांच करने, उसे भस्मक तक ले जाने समेत भस्मक को गर्म करने और कचरे को जलाने के साथ ही लैंडफिल में उसे दबाने तक की प्रक्रिया की जाएगी. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की टीम रामकी एनवायरो कंपनी के अंदर मौजूद है. वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए रामकी एनवायरो के बाहर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं.  ⁠बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को फैक्ट्री के बाहर तैनात किया गया है. पुलिसकर्मियों को फैक्ट्री के बाहर तैनात किया गया है. ⁠फैक्ट्री के अंदर भी पुलिसकर्मियों से भरी बस को भेजा गया है. ⁠फैक्ट्री की ओर आने वाले रास्ते पर पुलिस ने बैटिकेड लगा दिए हैं. हालांकि, अभी किसी को रोका नहीं जा रहा है. पहले चरण में 10 टन कचरा जलाया जाएगा कोर्ट के इस रुख के बाद पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के रासायनिक कचरे के निष्पादन का ट्रायल आज से शुरू होगा। रामकी एनवायरो फैक्ट्री में कचरा जलाने का दूसरा ट्रायल 4 मार्च और तीसरा 12 मार्च से शुरू होगा। इधर, कचरा जलाने के ट्रायल को लेकर प्रशासन सतर्क है। इंदौर देहात और धार जिले के 24 थानों से 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी पीथमपुर में फैक्ट्री के पास तैनात किए गए हैं। इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद परीक्षण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेशानुसार, पहले चरण में 10 टन कचरा जलाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस केस की सुनवाई की। बेंच ने अपशिष्ट के निपटान के होने वाले परीक्षण पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में सुनवाई कर रहे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पास जाने का सुझाव दिया। नागरिक संगठनों और पीड़ित पक्षों की अपील को ठुकरा दिया। भोपाल गैस त्रासदी: एक भयावह इतिहास 1984 की भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदाओं में से एक थी। दो और तीन दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था, जिससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए और हजारों लोग अपंग हो गए थे। कचरे का पीथमपुर स्थानांतरण और विरोध प्रदर्शन भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे को 2 जनवरी 2025 को पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में लाया गया था। इसके बाद, स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने इसके खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह कचरा इंसानों और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर सकता है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज कर दिया है और कहा है कि कचरे के सुरक्षित निपटान के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।  

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