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CBSE का बड़ा बदलाव​, 2026 से साल में दो बार होंगे ​क्लास 10th Board Exam

नई दिल्ली सीबीएसई 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की योजना बना रहा है। बोर्ड ने इस संबंध में एक मसौदा नीति को तैयार कर अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। बोर्ड ने शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों सहित तमाम हितधारकों से इस पर प्रतिक्रिया मांगी है। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 में विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने का अवसर देने की सिफारिश की है। https://x.com/DDNewslive/status/1894411333711663172 उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में शिक्षा मंत्रालय में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें 10वीं कक्षा में 2025-26 से दो बार बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने को लेकर चर्चा की गई। इसके लिए एक मसौदा नीति विकसित करने और सभी हितधारकों जैसे स्कूलों, शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और आम जनता से प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने के लिए सीबीएसई वेबसाइट पर होस्ट की जाए। भारद्वाज ने कहा कि व्यापक चर्चा के बाद मसौदा नीति विकसित की गई है और उसे सीबीएसई की बेवसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। हितधारक 9 मार्च तक मसौदा नीति पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। प्रतिक्रियाओं की जांच की जाएगी और नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं की दो बार होने वाली परीक्षाओं का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। 2026 में होने वाली 10वीं की परीक्षा का पहला राउंड 17 फरवरी 2026 से शुरू होकर 6 मार्च 2026 तक चलेगा। दूसरे राउंड की बोर्ड परीक्षा 5 मई 2026 से 20 मई 2026 तक चलेगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय मीटिंग में सीबीएसई को दो बार बोर्ड एग्जाम की स्कीम तैयार करने को कहा था। सीबीएसई ने मंगलवार को ड्राफ्ट पॉलिसी जारी कर दी है, जिस पर 9 मार्च तक सुझाव मांगे गए हैं। खत्म होगी सीबीएसई कंपार्टमेंट परीक्षा सुझावों के आधार पर पॉलिसी में जरूरी बदलाव भी हो सकते हैं और उसके बाद फाइनल पॉलिसी जारी हो जाएगी। कंपार्टमेंट की परीक्षा अब नहीं होगी। जो छात्र पहले राउंड (सभी पेपर या कुछ पेपर) को क्लियर नहीं कर पाएंगे, उनके लिए मई में दूसरे बोर्ड एग्जाम में अपीयर होने का मौका रहेगा। CBSE Exams: 34 दिन में पूरे होंगे दोनों राउंड 2026 में जब दसवीं की बोर्ड परीक्षा दो बार होगी, तो दोनों राउंड केवल 34 दिनों में पूरे हो जाएंगे। एनबीटी ने अपनी पहले की रिपोर्ट में बताया भी था कि फरवरी और मई 2026 में होने वाली परीक्षा कम दिनों में पूरी की जाएगी। 2025 के मौजूदा सत्र में 10वीं की परीक्षा 15 फरवरी से शुरू होकर 18 मार्च तक चलेगी। यानी एक ही परीक्षा में 32 दिनों की समय-सीमा रखी गई है। अब 2026 में पहले राउंड की परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होकर 18 दिनों में 6 मार्च तक खत्म हो जाएगी। जबकि दूसरे राउंड की परीक्षा 5 मई से शुरू होकर 16 दिनों में 20 मई को खत्म होगी। इस तरह से दोनों राउंड की परीक्षा केवल 34 दिनों में पूरी हो जाएगी और जल्दी रिजल्ट भी आ जाएगा। दसवीं में सीबीएसई कुल 84 विषयों की परीक्षा आयोजित करेगा और करीब 1,72,90,000 आंसर शीट्स जांची जाएंगी। 2026 की दसवीं की परीक्षा में 26.60 लाख छात्रों की भागीदारी होगी। प्रैक्टिकल और इंटरनल असेसमेंट एक ही बार होंगे सीबीएसई दसवीं में छात्र लिखित परीक्षा तो दो बार दे सकेंगे, लेकिन प्रैक्टिकल व इंटरनल असेसमेंट एक ही बार होगा। अलग-अलग विषयों में होने वाले प्रैक्टिकल व इंटरनल असेसमेंट के जो नंबर मिल जाएंगे, उसे लिखित परीक्षा के बेस्ट स्कोर में जोड़कर रिजल्ट जारी किया जाएगा। कब, कहां मिलेगी सीबीएसई मार्कशीट? पहले राउंड की परीक्षा के बाद कोई पासिंग डॉक्युमेंट जारी नहीं होगा। पहली परीक्षा की परफॉर्मेंस डिजिलॉकर में उपलब्ध होगी, जिसका उपयोग 11वीं में एडमिशन के लिए किया जा सकेगा। अगर स्टूडेंट दूसरे राउंड की परीक्षा नहीं देना चाहेगा, तो वह डिजिलॉकर के स्कोर के जरिए एडमिशन ले सकेगा। सेकंड राउंड के बाद जो फाइनल रिजल्ट तैयार होगा, उसके बाद ही पासिंग डॉक्युमेंट जारी किए जाएंगे। दोनों राउंड की परीक्षा के बाद ही मेरिट सर्टिफिकेट जारी होगा। पास नहीं होने पर भी 11वीं में प्रोविजनल एडमिशन पहले राउंड में सीबीएसई क्लास 10 में जो छात्र पांचों विषयों में क्वालीफाई होंगे, उन्हें भी पास घोषित किया जाएगा। इस स्थिति में भी छात्र को 11वीं में प्रोविजनल एडमिशन मिल सकेगा। जब छात्र दूसरे सत्र की परीक्षा देगा और क्वालीफाई हो जाता है, तो उस स्थिति में ही उसका एडमिशन कंफर्म माना जाएगा। जो छात्र पहले एग्जाम में क्वालीफाई नहीं होते हैं, उन्हें इंप्रूवमेंट कैटिगरी में रखा जाएगा और वे दूसरे राउंड की परीक्षा के लिए एलिजिबिल होंगे। सीबीएसई ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में कोई स्पेशल एग्जामिनेशन यानी कंपार्टमेंट परीक्षा नहीं होगी। अगर कोई छात्र पहली परीक्षा में सफल नहीं होता है या कुछ विषयों में सफल नहीं होता है, तो अभी तक उसे जुलाई में कंपार्टमेंट की परीक्षा देने का मौका मिलता था। लेकिन अब मई में होने वाली दूसरी परीक्षा में उसे बैठने का विकल्प दिया जा रहा है। CBSE 2 Exams: दोनों बार विषय नहीं बदलेंगे ड्राफ्ट पॉलिसी के मुताबिक छात्र ने जिन विषयों में पहली परीक्षा दी होगी, दूसरे राउंड में भी उन्हीं विषयों की परीक्षा देने का विकल्प मौजूद रहेगा। दूसरे राउंड की परीक्षा के दौरान सब्जेक्ट चेंज करने की इजाजत नहीं होगी। लेकिन यहां पर छात्रों के लिए एक उम्मीद की किरण यह है कि अगर किसी स्टूडेंट ने पहले राउंड की परीक्षा के लिए आईटी सब्जेक्ट चुना है और वह इसे बदलना चाहता है, तो अगर वह पहले राउंड में आईटी की परीक्षा नहीं देता तो सेकंड राउंड में वह आईटी के बदले दूसरा विषय चुन सकता है। लेकिन अगर पहले राउंड में आईटी का पेपर दे दिया तो फिर वह सेकंड राउंड में इस विषय को चेंज नहीं कर सकता। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में यह सिफारिश की गई है कि छात्रों को बोर्ड परीक्षा में अपना प्रदर्शन सुधारने का अवसर दिया जाएगा। जिसके बाद यह ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की गई है।  

GIS में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 60,000 करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए, राजगढ़ जिले को मिलेगा लाभ

भोपाल मध्य प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 60,000 करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए हैं। इस निवेश का लाभ राजगढ़ जिले को भी मिल सकता है, क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि बायोगैस प्लांट के लिए जमीन की मांग कर चुके हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो राजगढ़ में जल्द ही कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित हो सकता है, जिससे जिले के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी। रिलायंस के अधिकारियों की जिले में रुचि 10 अक्टूबर 2024 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों ने राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा से मुलाकात कर बायोगैस प्लांट के लिए भूमि आवंटन की मांग की थी। इस मुलाकात के बाद, कलेक्टर ने संबंधित विभागों को लैंड बैंक तैयार करने और इस परियोजना को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। रिलायंस इंडस्ट्रीज का विजन रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी अनुपम जैन ने बताया रिलायंस का उद्देश्य है कि भारत को क्लीन और ग्रीन एनर्जी में लीडर बनाना चाहिए। नई पीढ़ी के लिए सस्टेनेबल यूचर क्रिएट करना हमारा लक्ष्य है। मध्य प्रदेश सरकार की नीति इस दिशा में सहायक है, इसलिए राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। औद्योगिक विकास की नई उमीदें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में साइन हुए एमओयू से राजगढ़ जिले में औद्योगिक निवेश की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। यदि कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित होता है, तो इससे न केवल रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि यह जिला ग्रीन एनर्जी सेक्टर में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हो सकता है। राजगढ़ में बायोगैस प्लांट की संभावनाएं क्यों ? भूमि उपलब्धता: जिले में पहले से ही 2000 हेक्टेयर भूमि का लैंड बैंक तैयार है, जो औद्योगिक निवेश के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सुविधाजनक लोकेशन: राजगढ़ का भौगोलिक स्थान, बेहतर आवागमन सुविधा, जल संसाधन और मानव संसाधन की उपलब्धता इसे औद्योगिक परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बनाती है। सरकार की नीतियां: मप्र सरकार रिन्यूएबल एनर्जी और बायोगैस प्लांट के विस्तार के लिए अनुकूल नीतियां बना रही है, जिससे ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा मिल रहा है। विभाग को जमीन आवंटन करेंगे अभी आईडीसी से आधिकारिक पत्र नहीं आया है, लेकिन हमें जैसे ही पत्र मिलेगा, हम संबंधित विभाग को जमीन आवंटन करेंगे। राजगढ़ में उद्योगों की स्थापना की अपार संभावनाएं हैं और हम इसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। -डॉ. गिरीश मिश्रा, कलेक्टर, राजगढ़

महाशिवरात्रि पर बागेश्वर धाम में 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह हुआ संपन्न, नवदंपति ने गृहस्‍थ जीवन में किया प्रवेश

खजुराहो खजुराहो स्थित बागेश्वर धाम में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह महोत्सव संपन्न हुआ। खजुराहो एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राष्ट्रपति मुर्मु की अगवानी की। यहां राष्ट्रपति मुर्मु बालाजी मंदिर पहुंचीं जहां उन्होंने दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचीं। यहां शंखध्वनि और मंत्रोच्चार के साथ 11 जोड़ों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाकर विवाह की रस्म निभाई। इसके बाद अतिथियों ने अपना संबोधन दिया। राष्ट्रपति ने बेटियों को दिया सबल बनने का संदेश राष्ट्रपति ने नवदंपतियों को आशीर्वाद और बधाई देते हुए कहा कि आप सभी के स्वर्णिम भविष्य और मंगलजीवन की मैं कामना करती हूं। महामहिम ने कहा कि भारत की परंपरा ने संतों ने सदियों से अपने कर्म और धर्म से जनमानस को राह दिखाई है। समकालीन समाज में व्याप्त सामाजिक कुरुतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ लोगों को जागरुक किया। संतों ने छुआछूत और जात-पात के भेदभाव को दूर करने की सीख दी। संतों ने महिलाओं को समाज में उचित स्थान दिलाने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया चाहे गुरु नानकदेव, संत रविदास, कबीरदास, मीराबाई हों या संत तुकाराम उन्होंने अपने उपदेशों से समाज को सही राह दिखाई। ये समाज का भी दायित्व है कि बेटियों और बहनों को सबल और सक्षम बनाने में अपना योगदान दें। उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान दें। महिलाएं भी स्वयं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करें इसी से हमारा देश भी सबल बनेगा। सीएम यादव ने की बड़ी घोषणा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि ये नवदंपति जोड़े आज महाशिवरात्री के पर्व पर विवाह बंधन में बंधकर आप मां पार्वती और भगवान शंकर स्वरुप हो गए हैं। उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को इस महाआयोजन के लिए बधाई और धन्यवाद देते हुए कहा कि आपने समाज के सामने शासन सत्ता और संत की मौजूदगी में जात-पात की दीवार तोड़ने और छुआछूत को मिटाने का संदेश दिया। सीएम यादव ने कहा कि पं. धीरेन्द्र शास्त्री ने इस आयोजन ने जातिगत भावनाओं को कुचलते हुए सर्वधर्म समभाव और सामाजिक समरसता को बढ़ाया है। आज इसी बात की आवश्यकता है कि सामाजिक सौहार्द का ये सबसे अच्छा उदाहरण है। आपने वसुधैव कुंटुंबकम की भावना और सर्वे भवन्तु सुखिन को चरितार्थ कर दिखाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत विवाहित जोड़ों को दिये जाने वाले 51 हजार रु. की राशि इन दंपतियों को भी दी जाएगी। राज्यपाल ने सामूहिक विवाह आयोजन को सराहा इस अवसर पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि बागेश्वर जनसेवा समिति ने धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से ये सामाजिक सेवा का सराहनीय कार्य है। समाज के वंचित वर्ग, गरीब परिवार की बेटियों के सम्मानजनक जीवन की शुरुआत का ये आयोजन अनुकरणीय है। सामाजिक विवाह समारोह से भावी पीढ़ी को अच्छे संस्कारों की सीख मिलती है और बाल विवाह जैसी कुरुतियां समाप्त होती है।

ड्रग टेस्टिंग लैब में जांच के लिए भेजी गई 13 जीवनरक्षक दवाइयां निकली अमानक

भोपाल भोपाल की ड्रग टेस्टिंग लैब में 13 जीवनरक्षक दवाइयां अमानक निकली हैं। इस कारण इनके उपयोग पर प्रदेश में रोक लगा दी गई है। इनमें से कुछ दवाइयों के सैंपल ड्रग विभाग ने एमवाय अस्पताल से भी सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत लिए थे। मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवा निगम ने जीवनरक्षक दवाएं, सलाइन और सिरिंज अमानक पाए जाने पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए हैं। यह आदेश प्रदेश के सभी जिलों में स्वास्थ्य विभाग को भेजे हैं। इसमें गर्भवती महिलाओं में हार्मोन बढ़ाने वाली दवाइयों के साथ ही एनेस्थिसिया के इंजेक्शन भी शामिल हैं। आदेश के मुताबिक डेक्सट्रोस 5 प्रतिशत (बैच नंबर- एमपी230801055), नार्मल सलाइन 0.9 प्रतिशत (बैच नंबर-एमपी22063102), डिस्पोजेबल सिरिंज विथ निडल 2 एमएल (बैच नंबर- आर2203171), केटेमाइन हाइड्रोक्लोराइड 10 एमजी (बैच नंबर- वी22197), माइक्रोनाइज्ड प्रोगेस्ट्रोन 100 एमजी (बैच नंबर यूएचटी22004), सोडियम बिकार्बोनेट इंजेक्शन (बैच नंबर-1322038), नाइट्रोग्लिसरिन इंजेक्शन 25 एमजी (बैच नंबर-एआई22328), एस्प्रिन लो डोज 75 एमजी (बैच नंबर-एपीएसटी1012) आदि पर रोक लगाई है।    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाशिवरात्रि पर सपत्नीक भगवान महाकाल की पूजा कर अभिषेक किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सपत्नीक महाशिवरात्रि महापर्व पर महाकाल मंदिर में बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान बाबा श्री महाकाल का जल, दुग्ध अभिषेक भी किया। विक्रम महोत्सव 2025 के पूर्व कलश यात्रा का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमादित्य, उनके युग, भारत उत्कर्ष, नव जागरण और भारत विद्या पर एकाग्र विक्रमोत्सव-2025 समारोह के शुभारंभ के पहले बुधवार सुबह कलश यात्रा का शुभारंभ किया। इस मौके पर श्रीराम तिवारी निदेशक-महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, डॉ. प्रशांत पुराणिक, डॉ. रमण सोलंकी, संजय यादव, संजय अग्रवाल सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

उज्जैन के विक्रमोत्सव मेले में वाहन खरीदी में टैक्स पर 50 फीसदी की छूट,1 करोड़ की कार पर 8 लाख तक रजिस्ट्रेशन फीस बचेगी

उज्जैन उज्जैन में आज से शुरू होने वाले उज्जैन विक्रमोत्सव व्यापार मेले को लेकर इंदौर के डीलरों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। बताया जा रहा है कि शुभारंभ के बाद वाहनों का वेरिफिकेशन और डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू होगी। विक्रमोत्सव का शुभारंभ शाम 8:30 बजे होगा। इंदौर के डीलरों के अनुसार, पहले दिन के लिए करीब 500 कारों की बुकिंग हो चुकी है, जिसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट से बिक्री बढ़ने की उम्मीद ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के सह सचिव विशाल पमनानी ने बताया कि, रजिस्ट्रेशन शुल्क पर 50% की सीधी छूट मिलने के कारण इस बार पिछले साल से अधिक वाहन बिकने की उम्मीद है। पिछले साल मेले में 23,000 से अधिक वाहन बिके थे, जिनमें करीब 17,000 कारें थीं। इस बार इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बुकिंग भी अच्छी हुई है। पिछले साल 40-50 इलेक्ट्रिक वाहन (कार और बाइक) बिके थे, जबकि इस साल 100 से अधिक बिकने की संभावना है। पहले दिन मारुति की गाड़ियों की बुकिंग सबसे अधिक है। डीलरों के मुताबिक, इस बार सबसे ज्यादा मांग SUV कारों की है। ऑडी कंपनी को 50 लाख रुपए की दो कारों की बुकिंग मिल चुकी है। रजिस्ट्रेशन शुल्क पर छूट को ऐसे समझें     महंगी कारों पर 16% तक का रजिस्ट्रेशन टैक्स लगता है।     1 करोड़ की कार पर यह टैक्स 16 लाख रुपये होता है, लेकिन मेले में यह केवल 8 लाख रुपए होगा।     इससे वाहन मालिक को सीधा फायदा होगा।     हालांकि, EV वाहनों पर पहले से ही सिर्फ 4% टैक्स लगता है, इसलिए इस छूट का उन पर ज्यादा असर नहीं होगा।     दोपहिया वाहनों पर छूट का प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम रहेगा। उज्जैन में मेला 2024 से शुरू हुआ पहले यह मेला केवल ग्वालियर में आयोजित किया जाता था, लेकिन पिछले साल से मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में भी इसकी शुरुआत की। पिछले साल मेले में 23,722 वाहन बिके थे, जिनमें 16,200 कारें शामिल थीं। इस बार मेले में 397 वाहन डीलरों ने स्टॉल लगाए हैं। डीलरों को उम्मीद है कि इस बार 30,000 से ज्यादा वाहन बिकेंगे। इंदौर के लोग भी टैक्स में छूट का लाभ उठाने के लिए उज्जैन मेले से वाहन खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। मेला 25 मार्च तक चलेगा, लेकिन डीलरों ने इसे 6 अप्रैल (रामनवमी) तक बढ़ाने की मांग की है, क्योंकि इस दिन बड़ी संख्या में लोग वाहन खरीदते हैं। उत्सव के दौरान गाड़ी खरीद में बड़ी छूट विक्रमोत्सव के दौरान एक महीने से ज्यादा समय तक चलने वाले व्यापार मेले में बाइक, कार और निजी इस्तेमाल के लिए ओमनी बस के रजिस्ट्रेशन पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह छूट लोगों को गाड़ियां खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगी। सीएम मोहन ने दिए दिशा-निर्देश मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने विक्रमोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि उज्जैन के साथ अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शनियां लगाई जाएं। भीली और गोंडी जैसी जनजातीय भाषाओं के कवियों को भी कवि सम्मेलन में शामिल किया जाए। सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित गीत, कविता और रचनाओं को सम्मानित किया जाएगा। विक्रमोत्सव में एक राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन भी होगा। इसमें ड्रोन और रोबोटिक शो जैसे आकर्षक आयोजन होंगे। यह आयोजन विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए खास होगा। नई तकनीकों और खोजों के बारे में जानकारी दी जाएगी। उज्जैन व्यापार मेला व्यावासिक दृष्टिकोण से भी बेहद खास है क्योंकि इसमें गाड़ी खरीदने पर ग्राहकों को 50 प्रतिशत टैक्स की छूट दी जाएगी। जिसका बड़ा फायदा गाड़ी खरीदने वाले खरीददारों को होता है। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि है और इसी दिन से मेले की शुरूआत होने से उम्मीद है कि पहले ही दिन से मेले को अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा।

एक fit और Healthy Nation बनने के लिए हमें Obesity की समस्या से निपटना ही होगा : पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बढ़ते मोटापे पर चिंता जताई थी। मोटापा सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी है। ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी के अनुसार 2019 में भारत में मोटापे का आर्थिक बोझ लगभग 28.95 अरब डॉलर था जो देश की GDP का 1% है। अगर यही हाल रहा तो इस साल इसके 81.53 अरब डॉलर होने की आशंका है जो GDP का 1.57% होगा। माना जा रहा है कि साल 2060 तक मोटापे से देश की इकॉनमी को 838.6 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। यह देश की GDP का करीब 2.5% है। पिछले साल जुलाई में जारी हुए आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में चेतावनी दी गई थी कि अगर भारतीय फिट नहीं रहेंगे तो देश को डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी युवा आबादी का पूरा फायदा नहीं मिलेगा। यानी हमारी आबादी स्वस्थ नहीं होगी तो इसका असर देश के विकास पर पड़ेगा। सर्वे के मुताबिक अगर भारत को अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का फायदा उठाना है, तो इसके लिए यह जरूरी है कि उसके लोगों के स्वास्थ्य मानकों में संतुलित और विविध आहार की ओर बदलाव हो। सर्वे में मोटापे को एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती बताया गया था। सर्वे के मुताबिक भारत की वयस्क आबादी में मोटापा एक गंभीर चिंता का विषय बन रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 के अनुसार 18-69 आयु वर्ग के पुरुषों में मोटापे का प्रतिशत 22.9% हो गया है जो पिछले सर्वे में 18.9% था। महिलाओं में मोटापा 20.6% से बढ़कर 24.0% हो गया है। कम शारीरिक गतिविधि इसका एक बड़ा कारण हो सकता है। साथ ही लोगों की खानपान की आदत में भी बदलाव आया है। पैकेट बंद और प्रोसेस्ड खाना खाने से मोटापा बढ़ता है। आपकी थाली में क्या है? आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर चिंता जताई है। इसमें चीनी, नमक और अनहेल्दी फैट पर सख्त नियम बनाने की बात कही गई है। इसमें खाने के पैकेट पर चेतावनी लेबल लगाने और जंक फूड के विज्ञापन पर, खासकर बच्चों के लिए, रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक जगहों पर ऐसे खाने को हटाने और मिलेट्स, फल और सब्जियों जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाने को सस्ता करने की बात भी कही गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध परिषद (ICRIER) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य क्षेत्र में 2011 से 2021 तक खुदरा बिक्री मूल्य में सालाना 13.37% की तेजी रही है। घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2022-23 के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण परिवार अपने खाद्य बजट का लगभग 9.6% प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर खर्च करते हैं जबकि शहरी परिवार लगभग 10.64% खर्च करते हैं। नेशनल वेट-लॉस प्लान? इन सब चेतावनियों के बावजूद भारत में मोटापे से निपटने के लिए कोई ठोस राष्ट्रीय रणनीति नहीं है। हालांकि बच्चों और कमजोर वर्गों के पोषण के लिए नीतियां हैं लेकिन सभी आयु वर्ग के लोगों में मोटापे से निपटने के लिए कोई व्यापक योजना नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही कदम नहीं उठाए गए तो आर्थिक बोझ बहुत बढ़ जाएगा। राष्ट्रीय पोषण संस्थान में काम कर चुके वैज्ञानिक ए लक्ष्मैया ने बताया कि मोटापे का आर्थिक प्रभाव सिर्फ इलाज की लागत तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘रोजगार का नुकसान, अवसरों की कमी और सोशल सपोर्ट की कमी के कारण भावनात्मक तनाव भी इस आर्थिक बोझ में काफी योगदान करते हैं।’ आगे का रास्ता मोटापा सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मामला नहीं है, यह राष्ट्रीय समृद्धि से भी जुड़ा है। अगर भारत अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरा फायदा उठाना चाहता है, तो उसके पास एक स्वस्थ और उत्पादक वर्कफोर्स होना बहुत जरूरी है। आर्थिक सर्वेक्षण साफ कहता है कि अगर हमने अभी मोटापे पर नियंत्रण नहीं किया तो हम अपनी आर्थिक क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे। तो अगली बार जब आप चिप्स का एक और पैकेट खाने के लिए हाथ बढ़ाएं या व्यायाम छोड़ने का फैसला करें, तो याद रखें कि यह सिर्फ आपके स्वास्थ्य का ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का भी सवाल है।

प्रदेश की राजधानी भोपाल का निरंतर होगा सौंदर्यीकरण, जल संरचनाओं के संरक्षण के होंगे कार्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भोपाल में संपन्न दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट प्रदेश की प्रगति का एक स्वर्णिम अध्याय है। इस तरह के प्रयास जारी रहेंगे। राज्य सरकार द्वारा सेक्टर वाइज और एरिया वाइज इंडस्ट्री कॉन्क्लेव भविष्य में आयोजित की जाएगी। भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी है। समिट के अवसर पर शहर का सौन्दर्यीकरण हुआ। आगे भी यह कार्य जारी रहेंगे। भोपाल की जल संरचनाओं को भी सहेजा जाएगा। उन्हें साफ सुथरा और सुंदर बनाए रखा जाएगा। भोपाल में इन्वेस्टर्स समिट जैसे आयोजन किए जाने के लिए एक बड़े कन्वेंशन सेंटर की आवश्यकता है, जिसका निर्माण राज्य सरकार करवाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समापन पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार भोपाल की प्रगति के लिए 25 वर्ष की योजना बना रही है। उद्योगों और व्यवसायों के विकास के लिए निरंतर प्रयास होंगे। मध्यप्रदेश में जैसे रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के अच्छे परिणाम मिले उस क्रम में ग्लोबल इन्वेस्टर्स संख्या में रोजगार की संभावनाएं सामने आई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट में प्राप्त निवेश प्रस्ताव और समिट की सफलताओं के विभिन्न आयामों की विस्तार पूर्वक चर्चा की।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री द्वय श्री जगदीश देवड़ा श्री राजेंद्र शुक्ल, खजुराहो सांसद श्री वी. डी. शर्मा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट के सफल आयोजन के लिए राजधानी भोपाल के नागरिकों, सभी जनप्रतिनिधियों, प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और उद्योग जगत एवं मीडिया का आभार भी व्यक्त किया।

दिल्ली के सेलेक्ट सिटी मॉल के सिनेमा हॉल में लगी आग, फिल्म ‘छावा’ देख रहे दर्शकों में मची अफरा-तफरी

नई दिल्ली दिल्ली के साकेत स्थित मशहूर सेलेक्ट सिटी मॉल में एक सिनेमाघर में आग लग गई. बुधवार (26 फरवरी) को हुई इस घटना की जानकारी मिलने के बाद छह फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. आग पर काबू पा लिया गया. दिल्ली फायर सर्विस ने इसकी जानकारी दी. राजधानी दिल्ली के सेलेक्ट सिटी मॉल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बुधवार शाम 5:44 बजे इस मॉल के एक सिनेमाघर में आग लग गई. इस घटना को लेकर मॉल प्रशासन की ओर से इसकी सूचना दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग को दी गई. इसके बाद 6 फायर टेंडर्स को मौके पर भेजा गया. फायर ब्रिगेड की टीम ने तत्परता से काम करते हुए आग पर काबू पाया. आग की घटना में कोई हताहत नहीं जानकारी के अनुसार आग सेलेक्ट सिटी मॉल में स्थित पीवीआर ऑडी-3 सिनेमाघर के स्क्रीन में लगी थी. राहत की बात यह है कि इस घटना में कोई भी जनहानि नहीं हुई है और सभी लोग सुरक्षित हैं. आग की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन घटना के समय मॉल में ज्यादा भीड़ नहीं थी, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया. विकी कौशल की फिल्म ‘छावा’ की चल रही थी स्क्रीनिंग बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति यह हादसा हुआ उसे वक्त पीवीआर स्क्रीन नंबर 3 पर अभिनेता विकी कौशल की बहुचर्चित फिल्म ‘छावा’ की स्क्रीनिंग चल रही थी. इस दौरान अचानक से पर्दे पर आग लग गई. सिनेमा हॉल में मूवी देख रहे लोगों में भगदड़ मच गई. हालांकि सिनेमा हॉल में कई सारे एग्जिट गेट होने के चलते सभी लोग बड़ी आसानी से सिनेमाघर से बाहर निकल गए. सलेक्ट सिटी मॉल में सामान्य स्थिति बहाल आग बुझाने के बाद फायर ब्रिगेड द्वारा स्थिति का निरीक्षण किया गया और मॉल में सुरक्षा उपायों को लेकर अधिकारियों को सूचित किया गया. फिलहाल मॉल में सामान्य स्थिति बहाल है. दिल्ली फायर सर्विस के डायरेक्टर अतुल गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया, ”इस पूरे घटनाक्रम में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है. आग बहुत ही छोटी थी जिस पर दमकल कर्मियों ने कुछ ही देर में काबू पा लिया”. बता दें कि दिल्ली के उपहार सिनेमा हॉल में 1997 में लगी आग में करीब 60 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी.

गुजरात में नगरपालिका चुनावों में कुल 210 निर्विरोध चुने गए मुस्लिम उम्मीदवारों में 10% बीजेपी के

अहमदाबाद  ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है… पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने यह नारा दिया था। तब गुजरात में 29 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता बीजेपी के साथ आ गए थे। सर्वे एजेंसी सीएसडीएस-लोकनीति ने यह दावा किया था। अब गुजरात के निकाय चुनावों के परिणाम बता रहे हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर सर्वे एजेंसी के अनुमान में काफी दम है। गुजरात में बीजेपी ने नगर निकाय के 82 मुस्लिम उम्मीदवारों को जिताकर इतिहास रच दिया है। ये जीत 66 नगरपालिका चुनावों में हुई है। इससे उत्साहित बीजेपी के अंदर इस बात पर गंभीरता से मंथन शुरू हो गया कि क्या विधानसभा चुनावों में भी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए जाएं। ऐसा हुआ तो गुजरात में किसी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को चुनाव मैदान में नहीं उतारने की बीजेपी की परंपरा टूट सकती है। पसमांदा मुसलानों से जुड़ने की पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 की भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पसमांदा मुसलमानों से संपर्क की जरूरत बताई थी। उसी वर्ष भोपाल की एक रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि कैसे अगड़े मुसलमान अपने ही समुदाय के पिछड़े मुसलमानों यानी पसमांदाओं का शोषण करते हैं और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखते हैं। सरकारी संस्था नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) के अनुसार मुस्लिमों में ओबीसी जनसंख्या 40.7 प्रतिशत है। देश के कुल पिछड़े समुदाय की जनसंख्या में पसमांदा मुसलमानों की हिस्सेदारी 15.7 प्रतिशत है। कहां-कहां मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा? विभिन्न सर्वे और रिपोर्ट बताते हैं कि लोकसभा की 65 सीटों पर 30 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं और प्रत्याशियों की किस्मत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 92 सीटों पर 20 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। इनमें 41 सीटों पर 21 से 30 प्रतिशत, 11 सीटों पर 41 से 50 प्रतिशत, 24 सीटों पर 31 से 40 प्रतिशत और 16 सीटों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, कर्नाटक, असम जैसे राज्यों में मुस्लिम मतदाता काफी असरदार माने जाते हैं। ये नतीजे दिखाते हैं कि अल्पसंख्यक आबादी अब बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ी है। विपक्ष ने समान नागरिक संहिता, तीन तलाक और वक्फ जैसे मुद्दों पर हंगामा खड़ा करने की कोशिश की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। मुसलमानों से संपर्क की चौतरफा पहल प्रधानमंत्री की अपील पर भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में मुसलमान मतदाताओं से संपर्क साधने की बहुस्तरीय योजना बनाई। पार्टी ने हजारों ‘स्नेह संवाद’ कार्यक्रम किए जिनमें बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा ने देशभर में करीब 1.5 हजार विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। इन कार्यकर्मों के जरिए 50 लाख से ज्यादा मुसलमानों से बातचीत की गई। दूसरी तरफ, सभी 543 लोकसभा क्षेत्रों के मुसलमानों को ‘मोदी मित्र’ बनाने की पहल हुई। इस पहल के तहत हर सीट पर 2,000 से ज्यादा मुस्लिम मोदी मित्र बनाए गए। फिर बूथ मैनेजमेंट में मुसलमानों की भागीदारी बढ़ाई गई। ‘ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है’ के नारे से मुसलमानों को बीजेपी के करीब लाने का प्रयास किया गया। मुसलमानों से बीजेपी की बातचीत बीजेपी ने इन सभी कार्यक्रमों में मुसलमानों को बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सरकार ने मुस्लिम समुदाय का चौतरफा कल्याण किया है। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी दिलाने के लिए कानून बनाना हो या गरीब कल्याण की योजनाओं में बिना भेदभाव के मुस्लिम आबादी से ज्यादा हिस्सेदारी देना, मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के उत्थान की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मुसलमानों को यह भी बताया गया कि कांग्रेस शासन के लंबे वक्त में मुसलमानों की कैसी दुर्दशा हुई, इसका प्रमाण कांग्रेस सरकार में बनी सच्चर कमिटी की रिपोर्ट में ही मिला है। मुसलमान और बीजेपी: क्या कहते हैं आंकड़े? ऐसा नहीं है कि मुसलमान बीजेपी को वोट करते ही नहीं हैं। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी (सीएसडीएस) के मुताबिक 2014 के चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर करीब 8.5 प्रतिशत मुस्लिम वोट भाजपा के पक्ष में गया था। भाजपा को इससे पहले मुसलमानों का इतना ज्यादा समर्थन कभी नहीं मिला था। 2014 से पहले भाजपा को सबसे ज्यादा सात प्रतिशत मुस्लिमों का समर्थन 2004 में मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 में बीजेपी को तीन प्रतिशत मुस्लिमों ने वोट किया था। 1998 को लोकसभा चुनावों में 5 प्रतिशत जबकि 1999 में 6 प्रतिशत मुसलमानों ने बीजेपी का पक्ष लिया था। मुस्लिम वोट बैंक का आकर्षण भारतीय राजनीति में मुसलमान हमेशा के आकर्षक वोट बैंक बने रहे हैं। वर्ष 1980 तक यह वोट बैंक कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ा रहा था। फिर यह कांग्रेस से छिटका तो राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों का दामन थामता चला गया। मंडल-कमंडल की राजनीति के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का उभार हुआ तो मुस्लिम मतदाता उनके साथ जुड़ गए। इसी तरह, बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, कर्नाटक में कभी कांग्रेस तो कभी जनता दल (सेकुलर) का दामन थाम लिया। मुसलमानों में बीजेपी को हराने की जिद फिर चुनाव दर चुनाव यह धारणा पुष्ट होती चली गई कि मुसलमान किसी का सगा नहीं है, बस उसके जेहन में एक ही बात कौंधती रहती है कि बीजेपी को कौन परास्त कर सकता है। जिस पार्टी और उम्मीदवार में बीजेपी को हराने की ताकत दिखी, मुसलमानों ने उसका पक्ष लिया। लेकिन पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं के दबदबे वाली कुंदरकी सीट पर बीजेपी प्रत्याशी के विजय ने बड़ा संकेत दिया। यह इसलिए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को उत्तर प्रदेश के सिर्फ 2 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा का समर्थन किया था। अब गुजरात निकाय चुनावों में बीजेपी के मुस्लिम उम्मीदवारों की बड़ी सफलता ने कुंदरकी विधानसभा सीट से मिले संदेश को संभवतः और स्पष्ट कर दिया है। इस प्रदर्शन को देखते हुए, भविष्य में बीजेपी में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए चीजें बदल सकती हैं। हां, पार्टी उन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतार सकती है जहां मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा है। कुछ सीटें ऐसी हैं जहां भविष्य में मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार की दिल्ली वाली तस्वीर की चर्चाएं महाराष्ट्र की सियासत में खूब …..

मुंबई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NCP (SP) प्रमुख शरद पवार की दिल्ली वाली तस्वीर की चर्चाएं महाराष्ट्र की सियासत में खूब हो रही हैं. इस बीच, राज्य की पॉलिटिक्स में दो बड़े अपडेट देखने को मिले हैं. पहला, शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत के सुर बदले नजर आए हैं. उन्होंने सरकार के फैसलों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की खुलकर तारीफ की है. दूसरा, शरद पवार की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात की है. इस मीटिंग के बाद पाटिल के राजनीतिक रुख पर अटकलें तेज हो गई हैं. दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 21 फरवरी को 98वां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में बतौर अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे. शरद पवार कार्यक्रम के आयोजक मंडल में शामिल थे. पीएम मोदी जब दीप प्रज्ज्वलन करने पहुंचे तो उन्होंने शरद पवार से आगे आने का अनुरोध किया. उसके बाद जब पवार अपना संबोधन खत्म करके सीट की तरफ लौट रहे थे तो PM मोदी ने सीट पर बैठने में मदद की और उनको पानी का गिलास भरकर दिया. सोशल मीडिया पर इस वीडियो की खूब तारीफ की गई. ‘बैठक में राजनीति पर चर्चा नहीं हुई’ इस बीच, अब खबर है कि महाराष्ट्र NCP (SP) अध्यक्ष जयंत पाटिल और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले के बीच बैठक हुई है. हालांकि, पाटिल ने सफाई में कहा कि मुंबई में बैठक के दौरान राजनीति पर चर्चा नहीं हुई. पाटिल ने कहा, हमने सांगली जिले में अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित कार्यों को लेकर सोमवार शाम बावनकुले से मुलाकात की. पूर्व मंत्री पाटिल को NCP (SP) प्रमुख शरद पवार का बेहद करीबी माना जाता है. पाटिल ने कहा, हां, मैं बावनकुले से मिला. मैंने अपने क्षेत्र से संबंधित काम के लिए उनसे मुलाकात की. मेरे साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी था और 25 मिनट की बैठक के दौरान कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. हमने सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की. ‘एक दर्जन मांगें सामने रखीं’ पाटिल ने बैठक में सांगली जिले के मुद्दों से संबंधित कम से कम एक दर्जन मांगें रखीं और भूमि रिकॉर्ड की ऑनलाइन प्रोसेसिंग के संबंध में बात की. पाटिल ने कहा, यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे मैंने बावनकुले के ध्यान में लाया. उन्होंने कहा, भूमि अधिग्रहण से संबंधित कई मामलों को हल करने की जरूरत है. गडकरी के साथ भी मंच साझा कर चुके पाटिल बावनकुले ने कहा कि राज्य मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल भी बैठक में उपस्थित रहे. उन्होंने कहा, करीब 400 से 500 लोग भी मौजूद थे. बैठक में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. पाटिल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद नितिन गडकरी के साथ मंच साझा किया था. पाटिल इस्लामपुर से विधायक हैं. राउत ने फडणवीस की तारीफ में क्या कहा? इधर, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने ‘फिक्सर’ को मंत्रियों का ओएसडी या पीएस नहीं बनने देने के लिए सीएम फडणवीस की तारीफ की है. राउत ने कहा, जिन लोगों को पदों के लिए नजरअंदाज किया गया, उनमें से अधिकांश शिवसेना (शिंदे) के मंत्री थे. उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट मंत्रियों के 16 निजी सचिवों (पीएस) या विशेष कर्तव्य अधिकारियों (ओएसडी) की नियुक्ति को फडणवीस ने मंजूरी नहीं दी, उनमें से 13 शिवसेना के मंत्री थे. ‘सख्त फैसले ले रहे हैं फडणवीस’ पत्रकारों से बातचीत में राउत ने ‘फिक्सरों’ की नियुक्ति को रोकने के लिए गृह विभाग रखने वाले फडणवीस की सराहना की. राउत ने कहा, मेरे पास 16 पीएस के नाम हैं, जिनमें से 13 शिंदे के हैं और बाकी अजित पवार खेमे के हैं. वो (फडणवीस) सख्त फैसले ले रहे हैं. हमारे बीच राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हम राज्य के हित में लिए गए फैसलों का समर्थन करते हैं. ‘फडणवीस ने लूट रोक दी’ उन्होंने कहा कि फडणवीस ने महाराष्ट्र के खजाने की लूट रोक दी है. राउत का कहना था कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे (जून 2022-नवंबर 2024) और जिन परियोजनाओं की लागत बढ़ा दी गई थी, उन स्वीकृत प्रोजेक्ट पर काम सस्पेंड करके फडणवीस ने राज्य की लूट को रोक दिया है. ‘फिक्सर’ के नामों को मंजूरी नहीं फडणवीस ने सोमवार को कहा, हमने पीएस या ओएसडी के रूप में नियुक्ति के लिए कैबिनेट मंत्रियों द्वारा भेजे गए 125 नामों में से 109 को मंजूरी दे दी, लेकिन अन्य को मंजूरी नहीं दी क्योंकि वे या तो पूछताछ का सामना कर रहे हैं या फिक्सर के रूप में जाने जाते हैं. फडणवीस ने कहा, शेष (16) के नामों को मंजूरी नहीं देने के पीछे या तो उन अधिकारियों के खिलाफ कोई जांच चल रही है या उन्हें प्रशासनिक हलकों में फिक्सर के रूप में जाना जाता है.  

संत, सत्ता और शासन की त्रिवेणी के संगम से बागेश्वर धाम बना रहा है नये कीर्तिमान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए संत समाज हरसंभव प्रयास करे : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म करना, समाज को जागरूक करना और महिलाओं को समाज में उचित स्थान दिलाना आवश्यक देश को आगे ले जाने के लिए सामाजिक चेतना आवश्यक है : राज्यपाल पटेल संत, सत्ता और शासन की त्रिवेणी के संगम से बागेश्वर धाम बना रहा है नये कीर्तिमान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की उपस्थिति में बागेश्वर धाम में हुआ 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह, राष्ट्रपति ने उपहार देकर की नव दम्पतियों के सुखमय जीवन की कामना राज्यपाल पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी दिया आशीर्वाद नव दम्पतियों को भेंट स्वरूप दिए जाएंगे 51-51 हजार रूपए – मुख्यमंत्री डॉ. यादव पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मंदिरों की दान पेटियों की राशि, गरीब परिवारों की बेटियों के उत्थान में लगाने का किया आह्वान बागेश्वर धाम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगुभाई पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामय उपस्थिति में बागेश्वर धाम में 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह महोत्सव हुआ। भव्य समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने महाशिवरात्रि पर्व पर आयोजित सामूहिक विवाह में दाम्पत्य सूत्र में बंध रहे जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके सुखमय जीवन की कामना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि समकालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने और समाज को जागरूक करने के लिए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पहल सराहनीय है। गुरूनानक देवजी, संत रविदास, कबीरदास, मीरा बाई जैसे कई संतों ने अपने उपदेशों से छुआछूत जैसी कुरीतियों को दूर करने और महिलाओं को समाज में उचित स्थान दिलाने का संदेश दिया है। समाज को सन्मार्ग दिखाने की संत परम्परा के इस उद्देश्य को बागेश्वर धाम प्रभावी रूप से आगे बढ़ा रहे है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के सम्मुख जोड़ों की वरमाला रस्म संपन्न हुई, उन्होंने प्रतीक स्वरूप 3 जोड़ों को उपहार भेंट किए। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुईं 251 बेटियों में से 108 बेटियां जनजातीय समुदाय की हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के बागेश्वर धाम पहुंचने पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अंगवस्त्रम और तुलसी की माला भेंट कर उनका अभिनंदन किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमान यंत्र, बालाजी सरकार का विग्रह, धाम से जुड़ा साहित्य और स्मृति चिन्ह भी भेंट किये। इस अवसर पर धाम द्वारा आयोजित छठे सामूहिक विवाह महोत्सव पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन हुआ। समारोह में खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि देश वुमेन लेड डेवलपमेंट को लेकर अग्रसर है। ऐसे समय में बेटियों को सबल और सशक्त बनाने में सहयोग करना समाज और सरकार का कर्तव्य है। बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान देना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करने के लिए जन-जन को प्रतिबद्ध होना होगा। बेटियों के सशक्त होने से परिवार, समाज और देश सशक्त होगा। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी तक देश को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ हम अग्रसर हैं। हम ऐसे भारत का निर्माण करें, जो न केवल आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर हो अपितु सामाजिक समरसता से भी परिपूर्ण हो। देश पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध हो और आध्यात्म से विश्व को राह दिखाने में सक्षम हो। ऐसे राष्ट्र निर्माण में संतों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने संत समाज से मानव कल्याण की भावना के साथ देश में सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आह्वान किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और बागेश्वर धाम सेवा समिति द्वारा कराए जा रहे सामूहिक कन्या विवाह समारोह की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने नव दम्पतियों को उपहार दिए। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि समारोह में नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी के लिए विभिन्न वस्तुओं के साथ-साथ उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई मशीन जैसी उपयोगी वस्तुएं भी उपहार में दी जा रही हैं। राष्ट्रपति ने सामूहिक कन्या विवाह समारोह को जन सहयोग से जनकल्याण का श्रेष्ठ उदाहरण बताया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा स्वयं उपस्थित होकर प्रदेश के वर-वधुओं को आशीर्वाद प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत को वर्ष-2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि के लिए सभी प्रतिबद्ध हैं। देश के विकास के लिए सामाजिक चेतना आवश्यक है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज के लिए अनुकरणीय हैं। समाज के हर वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का मध्यप्रदेश पधारने पर अभिनंदन करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि बागेश्वर धाम में हनुमान जी के आशीर्वाद से सामाजिक बुराईयों को दूर करने का निरंतर कार्य किया जा रहा है। समाज में विद्यमान जातिगत दीवारों को तोड़ना आज के समय की आवश्यकता है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री के प्रयासों से जातिगत बाधाएं टूटी हैं और अलग-अलग जातियों के दूल्हे एक साथ घोड़ी पर बैठे हैं। जातिगत विषमताओं के खिलाफ लड़ते हुए समाज के सामने, शासन-सत्ता और संत की त्रिवेणी की मौजूदगी में सामूहिक विवाह आयोजित कर बागेश्वर धाम नए कीर्तिमान बना रहा है। समाज में प्रेम, सद्भाव और सामाजिक सौहार्द्र बढ़ाने के ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करने की बहुत आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसे संकल्पों के लिए पंडित धीरेंद्र शास्त्री को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने वसुधैव कुटुबम्कम की भावना और ‘सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय:’ के विचार को चरितार्थ करके दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की की इस प्रकार के संकल्प और समाज हित के कार्य निरंतर जारी रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हम सबको गर्व है, उनके दूरदर्शी निर्णय सामाजिक हित और राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामूहिक विवाह में आज परिणय सूत्र में बंध रही बेटियों को राज्य सरकार की ओर से 51-51 हजार रूपए की राशि उपहार स्वरूप दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नव दंपतियों को दीर्घायु और सुखमय जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने समाज से मंदिरों की दान पेटियों की राशि को … Read more

विजयवर्गीय जी आप कहां जा रहे हैं? अमित शाह के फोन मिलाते ही दौड़े आए मंत्री; MP में सियासी पारा बढ़ा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिनों तक चले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कार्यक्रम खत्म होने के बाद इंदौर के लिए रवाना हुए। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बारे में पूछा, तब उन्हें बताया गया कैलाश विजयवर्गीय इंदौर निकल चुके हैं। इसके बाद अमित शाह का कॉल कैलाश विजयवर्गीय के पास पहुंचा तब तक कैलाश भोपाल से काफी दूर निकल चुके थे। लेकिन अमित शाह का कॉल आने के तत्काल बाद वह वापस स्टेट हैंगर लौटे। इस दौरान उनकी अमित शाह से शॉर्ट मीटिंग भी हुई। बताया जा रहा है अमित शाह ने केंद्रीय राजनीति में उनसे मुलाकात कर नाराजगी की तमाम अटकलें को भी खारिज किया है और संदेश देने की कोशिश भी की है। कैलाश विजयवर्गीय को बुलाया अमित शाह मंगलवार शाम करीब 6 बजे स्टेट हैंगर पहुंचे। BJP के कार्यकर्ता उन्हें विदा करने के लिए इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह जाने की बजाय VIP लाउंज में चले गए। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को ढूंढा। विजयवर्गीय, जो पहले BJP के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं, शाह के संगठनात्मक टीम का हिस्सा थे। जब शाह BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। अगस्त 2015 में शाह ने ही विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल का प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया था। उज्जैन के रास्ते में थे कैलाश विजयवर्गीय वहीं, जब अमित शाह का संदेश कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंचा तो वह उज्जैन के रास्ते में थे। उन्हें एक पार्टी कार्यकर्ता की शादी में शामिल होना था। और फिर महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना था। वह भोपाल के बाहरी इलाके में पहुंच चुके थे। लेकिन शाह के फोन के बाद, उन्होंने अपने ड्राइवर को स्टेट हैंगर जाने का निर्देश दिया। इस बीच, शाह VIP लाउंज में विजयवर्गीय का इंतजार कर रहे थे। विजयवर्गीय के पहुंचते ही दोनों नेताओं ने लगभग 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की। कैलाश विजयवर्गीय की होगी संगठन में वापसी इस मुलाकात के बाद, राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विजयवर्गीय को प्रदेश BJP अध्यक्ष पद के लिए दावेदार माना जा रहा है। एक वरिष्ठ BJP पदाधिकारी ने बताया कि एमपी के दो नेता अमित शाह के करीबी माने जाते हैं कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा। मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद से सक्रिय नहीं हैं। और विजयवर्गीय, जिन्होंने बंगाल में BJP को एक विकल्प के रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई, राज्य में वापस आकर केवल कैबिनेट मंत्री बनने से असंतुष्ट हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगले महीने BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है। क्या विजयवर्गीय प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं या राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की? या फिर वह सिर्फ राजनीतिक फीडबैक ले रहे थे? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। और विजयवर्गीय भी इस बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। जल्द होने वाले हैं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव GIS के बाद, राज्य का अगला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम प्रदेश BJP अध्यक्ष का चुनाव है। वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल इस महीने की शुरुआत में पूरा हो गया है। एक पार्टी पदाधिकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष चुनाव का प्रभार दिया गया है, 1 मार्च को भोपाल आ सकते हैं। वे 413 पार्टी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। ये प्रतिनिधि ही अगले प्रदेश BJP अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति मार्च के पहले हफ्ते के अंत तक होने की उम्मीद है। कई सवाल खड़े हो रहे अचानक हुई मुलाकात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई विजयवर्गीय को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है? क्या यह मुलाकात मध्यप्रदेश की राजनीति की दिशा बदल देगी? आने वाला समय ही इन सवालों का जवाब देगा। सरकार में शामिल होने से खुश नहीं? कथित तौर पर यह चर्चा होती है कि कैलाश विजयवर्गीय सरकार में खुद को असहज महसूस करते हैं। साथ ही कुछ चीजों को लेकर उनकी असहमति भी रहती है। यह जानकारी आलाकमान तक पहुंची थी। शायद यही वजह रही कि अमित शाह ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया है। ऐसे में अनुमान यह भी है कि उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि कैलाश विजयवर्गीय ने इस मुलाकात पर चुप्पी साध रखी है। मुलाकात के बाद बुधवार की सुबह उन्होंने महाकाल मंदिर जाकर अपने परिवार के साथ पूजा की है। 20 मिनट तक बंद कमरे में हुई बैठक बताया जा रहा है कि जब अमित शाह ने फोन किया तो उस समय विजयवर्गीय पार्टी कार्यकर्ताओं की शादी में शामिल होने और महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव में भाग लेने के लिए उज्जैन की तरफ जा रहे थे। वह भोपाल के आउटर इलाके में पहुंच चुके थे लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री का फोन आने पर उन्‍होंने अपने ड्राइवर को वापस स्टेट हैंगर की ओर जाने का आदेश दिया। सूत्रों के मुताबिक, यहां पहुंचने के बाद दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में बैठक हुई। अमित शाह के फोन से राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा बता दें कि अमित शाह की एक कॉल और अचानक से हुई इस मुलाकात ने राज्‍य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। सूत्र बता रहे हैं कि शाह ने खुद विजयवर्गीय को स्‍पेशली फोन कॉल किया, जिसके बाद उन्‍होंने अपनी कार वापसी दिशा में दौड़ा दी और यह मीटिंग हुई। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि जीआईएस खत्म होने के बाद मध्य प्रदेश में क्‍या कोई अगला बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होने वाला है।

सीएम अब्दुल्ला ने भी माना अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी मान लिया है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। उन्होंने मीडिया चैनल से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद अलगाववादी राजनीति कमजोर हुई है, इसे कोई नकार नहीं सकता। हुर्रियत चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक को सीआरपीएफ सुरक्षा कवर मिलना पहले असंभव था, यह इस बदलाव का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अगर अलगाववादी राजनीति कमजोर हुई है, तो इसका मतलब है कि स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि उनके इस बयान के बाद जम्मू-कश्मीर में अलग ही विवाद शुरू हो गया है। सज्जाद लोन बोले, अब्दुल्ला के पास सबसे बड़ी सिक्युरिटी पिछले साल 16 अंक्टूबर को उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। सत्ता में बैठने के चार महीने बाद उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुए बदलावों पर चर्चा की। अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि क्या आपने कभी सोचा था कि मीरवाइज को केंद्र से सीआरपीएफ सुरक्षा मिलेगी? मैं तो नहीं सोच सकता था, लेकिन हालात बदल गए हैं। अब अब्दुल्ला के इस बयान पर खूब बवाल मचा है। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी उमर को निशाने पर लेते हुए कहा कि मीरवाइज की सुरक्षा का जिक्र करने वाले भूल जाते हैं कि उनके पास सबसे बड़ा सुरक्षा घेरा रहा है। लोन ने अब्दुल्ला के बयान को जानलेवा तक कह दिया। मीरवाइज को ही उमर अब्दुल्ला ने क्यों बनाया निशाना हुर्रियत नेता मीरवाइज के ऑफिस ने उमर अब्दुल्ला के बयान को बेतुका और घटिया बताया है। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान उनके अंदर की असुरक्षा को दिखाता है। पीडीपी एमएलए वहीद पारा ने भी एक्स पर लिखा कि मीरवाइज को अलग से निशाना बनाना उन्हें और खतरे में डालता है। यह जानते हुए भी कि उनके परिवार ने पहले ही भारी कीमत चुकाई है। सच्चाई यह है कि सैकड़ों अन्य लोगों की तरह, कब्रों, मंदिरों और मस्जिदों की भी जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की सुरक्षा की जाती है। तो अगर मीरवाइज की सुरक्षा हो रही है तो इसे मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? वहीद पारा ने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों और एनआईए की कड़ी कार्रवाई के कारण है, न कि अलगाव वादियों के कमजोर होने के कारण। पहले भी केंद्र सरकार की तारीफ कर चुके हैं सीएम 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार ने एक राष्ट्रपति अध्यादेश जारी किया, जिसने जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा छीन लिया और अनुच्छेद 35A को निरस्त कर दिया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक भी राज्यसभा में पारित किया गया था। इसके बाद उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत जम्मू-कश्मीर के सभी क्षेत्रीय दलों ने 370 हटाने का विरोध किया था। अक्टूबर 2024 में पहली बार केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ी जीत मिली थी। उमर अब्दुल्ला पिछले चार महीने से सीएम हैं। कुर्सी संभालने के बाद वह कई मुद्दों को लेकर अमित शाह से मिले थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नए कानूनों का क्रियान्वयन की तारीफ की थी।

जौरी जिले के सुंदरबनी में सेना की गाड़ी पर आतंकी हमला, आतंकियों ने ताबड़तोड़ बरसाईं गोलियां

जम्मू जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के सुंदरबनी में सेना की गाड़ी पर आतंकी हमला हुआ है। इस इलाके से सेना का वाहन गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे आतंकवादियों ने वाहन पर हमला बोला दिया। अब तक मिली जानकारी के अनुसार जंगल से ही आतंकियों ने कई राउंड फायरिंग गाड़ी को निशाना बनाकर की। जवाब में सेना के जवानों ने भी ऐक्शन लिया है। पूरे इलाके की घेराबंदी करके आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। यह हमला बुधवार को दोपहर 1 बजे के करीब हुआ। पानी टंकी के पास गांव फहल में यह हमला हुआ है। यह गांव सुंदरबनी मल्ला रोड पर स्थित है। आतंकियों ने वाहन पर 4 से 5 राउंड की फायरिंग की, जो एलओसी के नजदीक जंगल में छिपे हुए थे। सेना के प्रवक्ता ने भी घटना की जानकारी दी है, लेकिन अब तक किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। फिलहाल आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन जारी है। सेना चला रही है सर्च अभियान जानकारी के अनुसार, मुश्तबह दहशतगर्दों पेली फाल सुंदरबनी के इलाके में सेना की गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। ये हमला अखनूर के मलला और राजौरी के सुंदरबनी के पास के इलाके में हुआ है। फ़ायरिंग के बाद संदिग्ध आतंकी फरार हो गए। संभावना है कि आतंकी पास के जंगलों में छिप गए हैं। फायरिंग के बाद इलाके में आने जाने वाली गाड़ियों को रोककर तलाशी की ली जा रही है। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं अधिकारियों ने बताया कि सुंदरबनी सेक्टर के फाल गांव के पास हुई संक्षिप्त गोलीबारी में किसी के हताहत होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। उन्होंने बताया कि जंगल में छिपे हुए आतंकवादियों ने इलाके से गुजर रहे सेना के वाहन पर कुछ राउंड फायरिंग की। यह इलाका आतंकवादियों के लिए पारंपरिक घुसपैठ का रास्ता माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि सैनिकों ने जवाबी फायरिंग की, जबकि आतंकवादियों को बेअसर करने के लिए अतिरिक्त बल भेजा गया। सेना ने इलाके में की घेराबंदी जानकारी के अनुसार, आज दोपहर 12:45 बजे, आतंकवादियों ने राजौरी सेक्टर के निकट सेना के वाहन पर गोलीबारी की। सेना ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और तलाशी जारी है। जहां पर फायरिंग हुई है वह इलाका पाकिस्तान से सटा हुआ है। आतंकवादियों के दो आकाओं की संपत्तियां कुर्क इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान स्थित दो आतंकवादी आकाओं की लाखों रुपये की संपत्ति मंगलवार को कुपवाड़ा जिले में कुर्क की। पुलिस द्वारा अदालत से आदेश प्राप्त करने के बाद कुर्क की गई संपत्तियों में तीन कनाल और 12 मरला भूमि शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि ये संपत्तियां ताहिर अहमद पीर और मोहम्मद रमजान गनी की हैं, जो कुपवाड़ा के निवासी हैं और फिलहाल पाकिस्तान से बाहर रहते हैं। पुलिस ने बताया कि 2011 में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान इनकी पहचान दो भगोड़ों की संपत्तियों के रूप में की गई थी।

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