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उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- प्रदेश में शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का पंजीयन सुनिश्चित किया जाए

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का पंजीयन सुनिश्चित किया जाए और प्रसव पूर्व जांच के माध्यम से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान हो। उन्होंने निर्देश दिए कि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध रूप से सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता जरूरी है। जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में सुधार लाया जा सके। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिये सेवा प्रदाय एवं भर्ती प्रक्रिया की वृहद समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य मानकों को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आधुनिक चिकित्सा अधोसंरचना, अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में अभूतपूर्व प्रयास कर रही है। स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की वृद्धि के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती चल रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए, जिससे चिकित्सा सुविधाओं का लाभ तेजी से आमजन तक पहुंचे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों में भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। चिकित्सकीय श्रेणी में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 3,689 पदों पर भर्ती की जा रही है। नर्सिंग श्रेणी में 5,762 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रक्रियाधीन है। पैरामेडिकल एवं तकनीकी स्टाफ के तहत 454 लैब टेक्नीशियन, 114 रेडियोग्राफर, 21 फिजियोथेरेपिस्ट और 8 काउंसलर के पद कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से भरे जा रहे हैं। इसके अलावा, 1,744 सीधी भर्ती के अविज्ञप्त पदों की पूर्ति के लिए भी मांग पत्र भेजा गया है। संचालक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री दिनेश श्रीवास्तव, संचालक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा नर्सिंग एवं पैरामेडिकल श्री मनोज सरियाम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई जन अभियान परिषद कार्यकारिणी सभा की 15वीं बैठक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जन-अभियान परिषद से जुड़े स्वयंसेवी संगठन, प्रस्फुटन समितियां और नवांकुर संस्थाएं कृषकों को ऊर्जा में आत्म-निर्भर बनाने के लिए सोलर पंप लगवाने के लिए प्रेरित करें। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से गौपालन को भी प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में दोनों गतिविधियों को अभियान के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र कैंसर जैसे घातक रोगों से निरंतर प्रभावित हो रहे हैं। अत: रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बल पर ली जा रही उपज के खतरों से किसानों को अवगत करवाना आवश्यक है। परिषद, किसानों को प्राकृतिक और अक्षय कृषि के लिए प्रोत्साहित करें। जन अभियान परिषद इन क्षेत्रों में कार्य कर ऊर्जा, जल और पर्यावरण संरक्षण, बेहतर स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्र में योगदान दे सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में म.प्र. जन अभियान परिषद की कार्यकारिणी सभा की 15वीं बैठक मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में संपन्न हुई। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री मोहम्मद सुलेमान सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा अभियान को जन-जन का अभियान बनाना जरूरी है। इसमें जन अभियान परिषद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर परिषद ग्राम स्तर तक वातावरण निर्माण में सक्रियता से योगदान दें। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप श्रीअन्न की उपज लेने और तिलहन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित और प्रेरित करने की आवश्यकता बताई। बैठक में नवांकुर संस्थाओं के प्रशिक्षण, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम तथा विकास गतिविधियों एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए संचालित गतिविधियों का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। साथ ही परिषद के अन्य प्रशासनिक और प्रबंधकीय विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर जन अभियान परिषद द्वारा महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के सहयोग से मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के लिए समाज कार्य स्नातक पाठ्यक्रम के अंतर्गत व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण पुस्तिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा जन अभियान परिषद के संभागीय समीक्षा प्रतिवेदन 2024-25 तथा स्वैच्छिक संगठनों का संसार पुस्तिका का भी विमोचन किया। प्रदेश में सर्पदंश से हो रही मृत्यु की रोकथाम और बचाव की दृष्टि से सर्प पकड़ने और प्राथमिक उपचार के लिए होमगार्डस, युवाओं, इच्छुक व्यक्तियों के प्रशिक्षण के लिए सर्प अनुसंधान संगठन उज्जैन के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये। इससे प्रदेश के प्रत्येक थाने में एक प्रशिक्षित व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित हो सकेगी।  

मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत भेजेगा अमेरिका, मोदी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने किया एलान

नई दिल्ली अमेरीका मुंबई आतंकी हमले के गुनहगार तहव्वुर हुसैन राणा को भारत भेजने के लिए राजी हो गया है. व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बाद अमेरिका राष्ट्रपित डोनॉल्ड ट्रंप ने कहा कि मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका प्रशासन ने साल 2008 के मुंबई हमले के गुनहगार तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण (Extradition) को भारत में न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए मंजूरी दे दी है. पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा फिलहाल लॉस एंजिलिस के एक मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद है. माना जाता है कि वह मुंबई के 26/11 हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से जुड़ा है. अमेरिका की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘‘आज मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे प्रशासन ने दुनिया के सबसे बुरे इंसानों में से एक और मुंबई आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं में से एक को भारत में न्याय का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने को मंजूरी दे दी है. इसलिए, वह न्याय का सामना करने के लिए भारत वापस जा रहा है.’’ जनवरी 2025 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राणा की समीक्षा याचिका खारिज कर दी और उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी. भारत ने पिछले महीने कहा था कि वह राणा के शीघ्र प्रत्यर्पण के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ काम कर रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, ‘‘अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने 21 जनवरी को आरोपी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. हम अब मुंबई आतंकवादी हमले के आरोपी को शीघ्र भारत प्रत्यर्पित करने के लिए प्रक्रियागत मुद्दों पर अमेरिका के साथ काम कर रहे हैं.’’ PM मोदी ने ट्रम्प का दिया धन्यवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के इस फैसले की सराहना की और राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया है. मोदी ने कहा कि मुंबई हमले का एक आरोपी भारत आ रहा है, जहां उस पर मुकदमा चलेगा. मैं राष्ट्रपति ट्रंप का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने इस प्रक्रिया को जल्दी पूरा किया.” डेविड हेडली ने दी थी राणा के खिलाफ गवाही पाकिस्तानी मूल के कारोबारी तहव्वुर हुसैन राणा 26/11 मुंबई आतंकी हमलों में दोषी पाया गया था. अब यहां भारतीय एजेंसियां उससे पूछताछ करेंगी और उस पर मुकदमा चलेगा. राणा को पहले से ही मुंबई हमले की जानकारी थी और वह पाकिस्तान के आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के संपर्क में था. इस साजिश में उसके साथ शामिल लोगों में डेविड कोलमैन हेडली भी था. हेडली ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था और राणा के खिलाफ गवाही दी थी. आईएसआई से करीबी संबंध रखता था तहव्वुर राणा राणा पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (Inter-Services Intelligence) से करीबी संबंध रखने का भी आरोप है. मुंबई पुलिस की 400 से अधिक पन्नों की चार्जशीट के मुताबिक तहव्वुर हुसैन राणा 11 नवंबर 2008 को भारत आया था और 21 नवंबर तक यहां रुका था. इस दौरान उसने दो दिन मुंबई के पवई इलाके के रेनेसांस होटल में बिताए थे. मुंबई हमले में मारे गए थे इतने लोग पाकिस्तान के 10 आतंकवादियों के एक समूह ने 26 नवंबर 2008 को अरब सागर के रास्ते मुंबई में घुसने के बाद एक रेलवे स्टेशन, दो आलीशान होटलों और एक यहूदी केंद्र पर समन्वित हमला किया. लगभग 60 घंटे तक जारी रहे इस हमले में 166 लोग मारे गए थे, इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और यहां तक ​​कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति भी बन गई थी. नवंबर 2012 में पाकिस्तान आतंकवादी समूह के एकमात्र जीवित आतंकी अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था. भारत इस नृशंस हमले में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है, लेकिन हमले के आरोपियों के खिलाफ अब तक मुकदमे की कार्रवाई बहुत आगे नहीं बढ़ पाई है.  

भारत के प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य, हुए 9 अहम् समझौते

नई दिल्ली/वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुंबई में 26 नवंबर 2008 के आतंकवादी हमले के साजिशकर्ता तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण किये जाने, भारतीय वायु सेना के लिए एफ 35 युद्धक विमान की खरीद का मार्ग प्रशस्त करने तथा भारत को तेल एवं गैस की आपूर्ति के एक समझौते की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ चार घंटे तक चली बैठकों के बाद ये घोषणाएं की तथा संकेत दिया कि वह भारत द्वारा खालिस्तानी आतंकवादियों के प्रत्यर्पण की दिशा में कदम उठाने वाले हैं। उन्होंने बंगलादेश के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी को समुचित कदम उठाने की भी सलाह दी। व्यापार समझौतों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि वह किसी को हराना नहीं बल्कि अमेरिका के हितों की रक्षा करने के हक में हैं। मोदी के व्हाइट हाउस पहुंचने पर ट्रंप ने बहुत गर्मजोशी स्वागत करते हुए गले मिले। ट्रंप ने कहा, “हमने आप याद आए, हमने आपको बहुत याद किया। प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करके मुझे बहुत खुशी हुई। वह लंबे समय से मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।” दोनों नेताओं के बीच ओवल आफिस में एकांत में मुलाकात हुई और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की बात हुई। राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रधानमंत्री को एक पुस्तक “हमारी यात्रा एक साथ” उपहार में दी। उन्हें हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रम से संबंधित कई तस्वीरें तथा कई अन्य तस्वीरें दिखाईं। ट्रम्प ने पुस्तक पर हस्ताक्षर के साथ लिखा, “श्रीमान प्रधानमंत्री आप महान हैं।” बाद में मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “मैं व्हाइट हाउस में पीएम मोदी का स्वागत करके रोमांचित हूं। हम यहां और भारत में भी काफी समय बिताते हैं। हमने 5 साल पहले आपके खूबसूरत देश की यात्रा की थी… यह एक अविश्वसनीय समय था। अमेरिका और भारत के बीच एक विशेष संबंध है – दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र का। ” उन्होंने कहा, “भारत के प्रधानमंत्री मोदी का यहां आना बहुत सम्मान की बात है। वह लंबे समय से मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारा एक अद्भुत संबंध रहा है और हमने अपने 4 साल की अवधि के दौरान रिश्ते को बनाए रखा… हमने अभी फिर से शुरुआत की है। मुझे लगता है कि हमारे पास बात करने के लिए कुछ बहुत बड़ी चीजें हैं। वे हमारे बहुत सारे तेल और गैस खरीदने जा रहे हैं। हमारे पास दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक तेल और गैस है। उन्हें इसकी आवश्यकता है, और हमारे पास है। हम व्यापार के बारे में बात करने जा रहे हैं। हम कई चीजों के बारे में बात करने जा रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि किसी और चीज से ज्यादा, हमारे और हमारे देशों के बीच में महान एकता है, हमारी बहुत अच्छी दोस्ती है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम देशों के रूप में एकजुट रहें। हम दोस्त हैं और हम इस तरह से रहेंगे। ट्रंप ने कहा,“… लोगों का कहना है कि पिछले तीन सप्ताह राष्ट्रपति पद की शुरुआत के लिए सबसे अच्छे तीन हफ्तों में से एक थे। ऐसा कभी नहीं हुआ। जब आप देखते हैं कि हम तीन सप्ताह में क्या करने में सक्षम हैं, तो लोग वास्तव में आश्चर्यचकित हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसका उल्लेख किया। मुझे लगता है कि अन्य देश इसे देख रहे हैं, लेकिन मैं यहां आने के लिए सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं। ये (मोदी) एक अद्भुत व्यक्ति है। हम भारत और अमेरिका के लिए कुछ अद्भुत व्यापार सौदे करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “ आज, प्रधानमंत्री और मैं संबंधों को और मजबूत करने के लिए ढांचे की घोषणा कर रहे हैं।” ट्रंप ने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे प्रशासन ने 2008 के भयानक मुंबई आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं में से एक (तहव्वुर राणा) और दुनिया के बहुत बुरे लोगों में से एक के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है, जिसका भारत में न्याय का सामना करना है। वह आतंकवादी हमले से संबंध में न्याय का सामना करने के लिए भारत वापस जा रहा है।” ट्रंप ने कहा, “इस साल से हम भारत को सैन्य बिक्री में अरबों डॉलर की वृद्धि करेंगे। हम अंततः भारत को एफ 35, युद्धक विमान प्रदान करने का मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं।” ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री और मैं ऊर्जा पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर भी पहुंचे जो अमेरिका को भारत को तेल और प्राकृतिक गैस का अग्रणी आपूर्तिकर्ता बनना सुनिश्चित करेगा। उम्मीद है कि अमेरिका नंबर 1 आपूर्तिकर्ता होगा। अमेरिकी परमाणु उद्योग के लिए अभूतपूर्व विकास की दिशा में, भारत अमेरिकी परमाणु प्रौद्योगिकी का स्वागत करने के लिए कानूनों में भी सुधार कर रहा है, जो भारतीय बाजार में हमारी परमाणु प्रौद्योगिकी की उच्चतम स्तर पर पहुंच सुनिश्चित करेगा। आईएमईसी (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे) का उल्लेख करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा,“हम इतिहास के सभी में सबसे महान व्यापार मार्गों में से एक बनाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। यह भारत से इजरायल से इटली और आगे अमेरिका तक चलेगा, हमारे भागीदारों को सड़कों, रेलवे और समुद्र के नीचे के के केबलों के माध्यम से जोड़ेगा। यह एक बड़ा विकास है।” मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा, सबसे पहले मैं अपने दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प को गर्मजोशी से स्वागत और महान आतिथ्य के लिए धन्यवाद देता हूं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने नेतृत्व के माध्यम से भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को संजोया है और इसे जीवंत बनाया है। उनके पहले कार्यकाल के दौरान, हमने एक साथ काम किया, वही उत्साह, ऊर्जा और समर्पण, मैंने आज भी अनुभव किया। आज की चर्चा में हमने उनके पहले कार्यकाल के दौरान अपनी उपलब्धियों और गहरे आपसी विश्वास के बारे में बात की और नए लक्ष्यों को प्राप्त करने का संकल्प भी था। भारत और अमेरिका मिलकर एक बेहतर दुनिया को आकार दे सकते हैं। मोदी ने कहा, “मैं आपको व्हाइट हाउस में वापस देखकर खुश हूं मैं आपको भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से बधाई देता हूं… भारत के लोगों ने मुझे तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया… इस कार्यकाल में, मुझे अगले 4 … Read more

थोक महंगाई जनवरी में घटी, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी से मिली राहत

नई दिल्ली जनवरी में थोक मुद्रास्फीति घटीजनवरी 2025 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति घटकर 2.31 प्रतिशत पर आ गई. यह दिसंबर 2024 में 2.37 प्रतिशत थी, जबकि जनवरी 2024 में मात्र 0.33 प्रतिशत दर्ज की गई थी. मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं, विशेष रूप से सब्जियों की कीमतों में गिरावट ने इस कमी में योगदान दिया. खाद्य मुद्रास्फीति में राहत जनवरी में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 5.88 प्रतिशत पर आ गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह 8.47 प्रतिशत थी. खासकर सब्जियों की मुद्रास्फीति में तेज गिरावट दर्ज की गई, जो दिसंबर 2024 में 28.65 प्रतिशत थी और जनवरी में घटकर 8.35 प्रतिशत रह गई. यह दर्शाता है कि सब्जियों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे आम जनता को राहत मिली है. आलू और प्याज की कीमतों में वृद्धि जारी हालांकि, आलू और प्याज की कीमतों में अब भी तेजी बनी हुई है. आलू की मुद्रास्फीति 74.28 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी रही, जो यह दर्शाता है कि इस आवश्यक वस्तु की कीमतें अभी भी महंगाई का दबाव झेल रही हैं. वहीं, प्याज की मुद्रास्फीति जनवरी में बढ़कर 28.33 प्रतिशत हो गई, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ा. ईंधन एवं बिजली क्षेत्र में गिरावट ईंधन और बिजली श्रेणी में भी राहत देखने को मिली. इस क्षेत्र में मुद्रास्फीति जनवरी में घटकर 2.78 प्रतिशत रह गई, जबकि दिसंबर में यह 3.79 प्रतिशत थी. इससे ऊर्जा लागत में थोड़ी नरमी आने की संभावना है, जो उद्योगों और आम जनता के लिए राहत भरी खबर हो सकती है. विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हालांकि खाद्य वस्तुओं और ईंधन की मुद्रास्फीति में कमी आई, लेकिन विनिर्मित वस्तुओं की मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि देखी गई. दिसंबर 2024 में यह 2.14 प्रतिशत थी, जो जनवरी 2025 में बढ़कर 2.51 प्रतिशत हो गई. इससे पता चलता है कि उत्पादन लागत में कुछ बढ़ोतरी हुई है, जो संभावित रूप से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती है. खुदरा मुद्रास्फीति भी हुई कम खुदरा मुद्रास्फीति के हालिया आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति जनवरी में घटकर 4.31 प्रतिशत हो गई. यह पिछले पांच महीनों का सबसे निचला स्तर है, जिससे यह संकेत मिलता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता आ रही है. आलू की मुद्रास्फीति 74.28 प्रतिशत पर उच्च स्तर पर बनी रही, तथा प्याज की मुद्रास्फीति जनवरी में बढ़कर 28.33 प्रतिशत हो गई। ईंधन और बिजली श्रेणी में जनवरी में 2.78 प्रतिशत की अपस्फीति देखी गई, जबकि दिसंबर में 3.79 प्रतिशत की अपस्फीति थी। विनिर्मित वस्तुओं में मुद्रास्फीति दिसंबर 2024 में 2.14 प्रतिशत की तुलना में 2.51 प्रतिशत रही। बुधवार को जारी खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पता चला कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी के कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति जनवरी में घटकर 4.31 प्रतिशत रह गई जो पांच महीने का निम्नतम स्तर है।

कोर्ट ने हजारों अतिथि शिक्षकों को आवेदन के समय अनुभव प्रमाण पत्र अपलोड करने की अनिवार्यता से राहत दी

जबलपुर  मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने माध्यमिक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने अतिथि शिक्षकों को बिना अनुभव प्रमाण पत्र अपलोड किए आवेदन करने की अनुमति दी है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है. खास बात ये है कि सिवनी निवासी सुनीता कटरे, कृष्णकांत शर्मा और अन्य याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता धीरज तिवारी और ईशान सोनी ने न्यायालय में तर्क भी दिया था. जानें क्या था मामला? बता दें, वर्ष 2018 और 2023 की उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में दस्तावेज सत्यापन (काउंसलिंग) के समय 200 दिवस और तीन सत्रों का अतिथि शिक्षक अनुभव प्रमाण पत्र मांगा जाता था. लेकिन इस बार माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के लिए, ईएसबी (कर्मचारी चयन मंडल) के पोर्टल पर आवेदन के समय ही अनुभव प्रमाण पत्र अपलोड करने की अनिवार्यता कर दी गई थी. याचिका में क्या तर्क दिया गया? 1. रूल बुक की धारा 12(6) के अनुसार, उम्मीदवारों को शैक्षणिक योग्यता और पात्रता से जुड़े दस्तावेज दस्तावेज़ सत्यापन और काउंसलिंग के समय अपलोड करने की अनुमति है. 2. मध्य प्रदेश स्कूल एजुकेशन सर्विसेज (टीचिंग कैडर) सर्विस कंडीशन एंड रिक्रूटमेंट रूल्स, 2018 में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अतिथि शिक्षक अनुभव प्रमाण पत्र आवेदन के समय ही अपलोड किया जाना चाहिए. 3. 2023 की भर्ती प्रक्रिया में, आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 01 जून 2023 थी, लेकिन अतिथि शिक्षक अनुभव प्रमाण पत्र 31 मार्च 2024 तक अपलोड करने की छूट दी गई थी. उच्च माध्यमिक/माध्यमिक/प्रार्थमिक शिक्षक की काउंसलिंग निर्देशिका एक समान होनी चाहिए पूर्व की भर्ती में भी ऐसा ही था लेकिन इस बार अनुभव प्रमाण पत्र आवेदन के समय ही मांगा गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है. 4. ईएसबी पोर्टल पर लागू किया गया नया नियम मनमाना और भेदभावपूर्ण है, जिससे योग्य उम्मीदवार आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं. 5. भर्ती अधिसूचना में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है कि अतिथि शिक्षक अनुभव प्रमाण पत्र केवल आवेदन के समय ही अपलोड किया जाना चाहिए, बल्कि दस्तावेज़ सत्यापन के समय इसे जमा करने की अनुमति दी जानी चाहिए. न्यायालय का फैसला माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अधीन कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अतिथि शिक्षकों को बिना अनुभव प्रमाण पत्र अपलोड किए केवल “YES” विकल्प चुनकर आवेदन करने की अनुमति होगी। इस फैसले का लाभ किन्हें मिलेगा? वे सभी अतिथि शिक्षक जो 200 दिवस और तीन सत्रों की न्यूनतम अनुभव शर्त को पूरा कर रहे हैं, लेकिन उनका प्रमाण पत्र दस्तावेज़ सत्यापन के समय ही उपलब्ध होगा. वे अभ्यर्थी जो इस नई अनिवार्यता के कारण आवेदन नहीं कर पा रहे थे, अब वे बिना प्रमाण पत्र अपलोड किए आवेदन कर सकेंगे. भर्ती प्रक्रिया अधिक न्यायसंगत होगी और योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा. अब क्या होगा आगे? ईएसबी पोर्टल में बदलाव: अब पोर्टल पर अभ्यर्थी बिना अनुभव प्रमाण पत्र अपलोड किए “YES” विकल्प चुनकर आवेदन कर सकेंगे. भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी: न्यायालय ने भर्ती को याचिका के अधीन किया है, जिसका मतलब है कि भर्ती प्रक्रिया न्यायालय के फैसले के अनुसार आगे बढ़ेगी. अंतिम निर्णय दस्तावेज़ सत्यापन के समय अतिथि शिक्षकों को दस्तावेज़ सत्यापन के समय ही अपना अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जैसा कि पूर्व की भर्तियों में होता आया है. यह फैसला सिवनी निवासी सुनीता कटरे, कृष्णकांत शर्मा और अन्य याचिकाकर्ताओं सहित हजारों अतिथि शिक्षकों के लिए राहत भरी है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.

नीति के तहत भोपाल में पांच नई तहसीलों का गठन होगा, लोगों को अपने आवास क्षेत्र में ही तहसील कार्यालय में कार्य करवाना आसान हो जाएगा

भोपाल भोपाल वासियों को जमीन से लेकर राजस्व के मामले को निपटाने के लिए अब दूर नहीं जाना होगा। जिला पुनर्गठन के प्रशासनिक प्रस्ताव पर शासन जल्द ही अंतिम मुहर लगाएगा। जिला प्रशासन द्वारा भेजे प्रस्ताव में शासन की ओर से मांगी गई आपत्तियों पर एसडीएम और तहसीलदार को 15 दिन में जवाब देना है। नीति के तहत भोपाल में पांच नई तहसीलों का गठन होगा। मौजूदा तीन तहसीलों के साथ पांच नई तहसीलों(Five New Tehsil) के साथ फिर कुल संख्या आठ हो जाएगी। इससे लोगों को अपने आवास क्षेत्र में ही तहसील कार्यालय में कार्य करवाना आसान हो जाएगा। जिले में 3 से बढ़कर होंगी 8 तहसीलें राजधानी में वर्तमान में तीन तहसीलें और पांच नजूल-वृत्त क्षेत्र में काम किया जा रहा है। हुजूर, कोलार और बैरसिया को तहसील का दर्जा मिला है। करीब पांच साल पहले कोलार तहसील का गठन किया गया था। वहीं, तीन तहसीलों के अलावा पांच नजूल-वृत्त क्षेत्र यानी संत हिरदाराम नगर, शहर, गोविंदपुरा, टीटी नगर और एमपी नगर में भी काम किया जा रहा है। गठन के बाद जिले में कुल 8 तहसीलें हो जाएंगी। 10 बदलाव प्रस्तावित ● मौजूदा उपनगर ही नई तहसील बनेंगे। बैरागढ़, कोलार, भेल गोविंदपुरा, पुराना शहर व नया शहर, नर्मदापुरम रोड की नई तहसील होंगी। ● नई तहसीलें दूरी व क्षेत्रफल के अनुसार अलग से नजूल क्षेत्र तय करेंगे। ● शहरी और ग्रामीण क्षेत्र का नक्शा अलग किया जाएगा। ● जिला-तहसील क्षेत्रों को नगर निगम के वार्ड से भी जोड़ा जाएगा। ● तहसील व नजूल में तहसील अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी। ● शहरी क्षेत्र की तहसीलों में आबादी चार लाख के भीतर तय की जाएगी। गांव को जोड़-घटाकर नई तहसीलों का होगा गठन  गोविंदपुरा नजूल क्षेत्र में 19 राजस्व ग्राम है, इनमें सात नए जोड़कर 26 राजस्व गांवों की नयी तहसील बनेगी।  हुजूर तहसील में 198 राजस्व गांवों है। यहां से 160 राजस्व गांवों को हटाया गया था, 38 राजस्व गांवों की तहसील बनाई जाएगी। संत हिरदाराम नगर सर्कल में 17 राजस्व गांव है। इसमें हुजूर के 18 गांवों को जोड़कर 36 गांवों की तहसील बनाई जाएगी। टीटी नगर सर्कल में संत हिरदाराम नगर के 12 राजस्व गांव और हुजूर के 21 राजस्व गांवों को जोड़कर 38 गांवों की तहसील बनेगी। एमपी नगर सबसे छोटा सर्कल हैं। इसमें 8 गांवों के साथ हुजूर के 16 और कोलार के 2 राजस्व गांवों को जोड़कर 26 गांवों की तहसील बनेंगी। कोलार तहसील में 55 से अधिक राजस्व गांव हैं। इसके 22 गांवों को घटाकर 33 गांवों की तहसील बनाई जाएगी। इसलिए जरूरी पुनर्गठन अभी जिले में कोलार, हुजूर व बैरसिया तहसील हैं। आठ नजूल क्षेत्र हैं। इनके एसडीएम है। कोलार, बैरसिया को छोडकऱ बाकी में तहसील(Five New Tehsil) कार्यालय अन्य क्षेत्रों में हैं। एमपी नगर नजूल कोलार तहसील में है तो बैरागढ़, हुजूर, ओल्ड सिटी नजूल पुराने शहर में कलेक्ट्रेट में है। गोविंदपुरा भी पुराने शहर के कलेक्टे्रट में है। हुजूर तहसील में शहर व ग्रामीण का 70 फीसदी क्षेत्र है जिससे काम कठिन होता है। जिले के पुनर्गठन की प्रक्रिया की जा रही है। लोगों की सुविधा की दृष्टि से बेहतर योजना तय की जा रही है। इससे सबको लाभ होगा। – कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर

नए भारत का नया उत्तर प्रदेश बन रहा है- सीएम योगी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में 4 लेन के दो प्रमुख फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। इनमें 270 करोड़ रुपये की लागत से बना इंदिरा नगर सेक्टर 25 से खुर्रमनगर-कल्याणपुर फ्लाईओवर (3 किमी) और 170 करोड़ रुपये की लागत से बना पॉलिटेक्निक से मुंशी पुलिया चौराहा फ्लाईओवर (2 किमी) शामिल हैं। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कुल 588 करोड़ रुपये की 114 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डबल इंजन की सरकार द्वारा लखनऊ को न केवल एयरो सिटी बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त हो रहा है और राज्य के हर नागरिक को बेहतर बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ को 1000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात मिली है, जिसमें 440 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग की दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं और करीब 600 करोड़ रुपये की विभिन्न राज्य परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास शामिल है। उन्होंने कहा कि लखनऊ को मेट्रो शहरों की तरह विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। सीएम योगी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन और सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश के विकास के लिए हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिफेंस कॉरिडोर के तहत लखनऊ में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण परियोजना को आगे बढ़ाने से लेकर झांसी में बड़े प्रोजेक्ट्स को लाकर यूपी को डिफेंस निर्माण का केंद्र बनाने में रक्षा मंत्री का योगदान अमूल्य है। लखनऊ के समग्र विकास पर चर्चा करते हुए सीएम योगी ने बताया कि स्टेट कैपिटल रीजन की तर्ज पर लखनऊ को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। ग्रीन कॉरिडोर, किसान पथ, इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर और इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी परियोजनाएं लखनऊ को विश्व स्तरीय शहर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा, यमुना एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ते हुए लखनऊ को ट्रांसपोर्ट हब बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है महाकुम्भ- सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में चल रहे महाकुम्भ के ऐतिहासिक आयोजन को उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ 2025 में अब तक 50 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं, जो उत्तर प्रदेश की शक्ति और व्यवस्थागत कुशलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आज महाकुम्भ में लोगों की सैंकड़ों वर्षों से दबी हुई भावनाओं को सम्मान मिल रहा है। सीएम योगी ने कहा कि महाकुम्भ का आयोजन स्थल रक्षा मंत्रालय की भूमि पर होता है और पिछले आठ वर्षों से उत्तर प्रदेश सरकार को यह भूमि लीज पर सहजता से प्राप्त हो रही है। इस बार पहली बार श्रद्धालु अक्षयवट, पातालपुरी और सरस्वती कूप के दर्शन कर पा रहे हैं, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से सीमित पहुंच में रखा गया था। सीएम योगी ने कहा कि महाकुम्भ में असाधारण भीड़ को संभालने के लिए सड़क मार्ग, रेलवे और वायु मार्ग से बेहतरीन कनेक्टिविटी दी गई है। 40 रेगुलर फ्लाइट्स प्रयागराज को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ रही हैं, वहीं रेलवे द्वारा सैकड़ों मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया गया है। सड़क मार्ग से सबसे अधिक श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं और इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा स्वीकृत विभिन्न सड़क परियोजनाओं ने अहम भूमिका निभाई है। सीएम योगी ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया और सुचारू व्यवस्थाओं के कारण कोई अव्यवस्था नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह डबल इंजन सरकार की प्रशासनिक दक्षता का परिणाम है। सीएम योगी ने कहा कि महाकुम्भ न केवल आस्था का महापर्व है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अनुमान लगाया कि इस आयोजन से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कुंभ पर खर्च को लेकर सवाल उठाते हैं, लेकिन यह निवेश प्रयागराज के संपूर्ण पुनरुद्धार के लिए किया गया है। महाकुम्भ पर कुल 1500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन इसके बदले में उत्तर प्रदेश को 3 लाख करोड़ रुपये का लाभ होने जा रहा है। यह आयोजन पर्यटन और व्यापार को भी बड़ा प्रोत्साहन देगा। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 22 जनवरी को प्रयागराज में सामूहिक स्नान कर महाकुम्भ की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से अनुरोध किया कि प्रयागराज में शास्त्री ब्रिज के समानांतर एक नया ब्रिज और यमुना नदी पर सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि यह महाकुम्भ जैसे आयोजनों को सुगम बनाने के साथ-साथ प्रयागराज की कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाएगा। नए भारत का नया उत्तर प्रदेश बन रहा है- सीएम योगी सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘नए भारत का नया उत्तर प्रदेश’ बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं और राज्य को भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब विश्व स्तरीय सुविधाओं का अनुभव कर रही है और प्रदेश में निवेश, उद्योग, पर्यटन और बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। इन प्रमुख परियोजनाओं का हुआ लोकार्पण – बसंतकुंज योजना के निकट नागरियाकला में 400 केएल एवं जी-20 रोड जनेश्वर मिश्र पार्क के निकट 20 केएल स्ट्रॉम ड्रेनेज हेतु फ्लड पम्पिंग स्टेशन – बसंतकुंज योजना के सेक्टर-आई में 6 डीप नलकूप सीजी सिटी में हार्मनी पार्क (म्यूजिकल एवं स्पोर्ट्स पार्क) – अहिमामऊ में कल्याण मंडप शिलान्यास होने वाली प्रमुख परियोजनाएं – कबीरनगर-देवपुर पारा आवासीय योजना में 1,032 ईडब्ल्यूएस आवास एवं सड़क – गोमती पर कुकरैल नदी से बैकुंठ धाम तक 4 लेन ब्रिज – सीजी सिटी योजना के … Read more

ग्वालियर के मुरैना मार्ग नगर द्वार का नाम दाता बंदी छोड़ द्वार होगा: मुख्यमंत्री मोहन यादव

 ग्वालियर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पवित्र सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह के नाम पर दाता बंदी छोड़ द्वार मुरैना के रास्ते पर रखने की हम घोषणा कर रहे हैं। ग्वालियर शहर ग्वालियर चंबल संभाग में सिख समुदाय का बड़ा प्राचीन गौरवशाली इतिहास रहा है। बड़ी संख्या में सिख परिवार इस क्षेत्र में निवास भी करते हैं। सिखों के छठवें गुरु परम पूज्य हरगोविंद सिंह महाराज साहब को ग्वालियर के किले में मुगल बादशाह जहांगीर ने कई वर्षों तक बंदी बनाए रखा था। गुरु गोविंद सिंह के साथ 52 अन्य हिंदू राजा भी उनकी कैद में थे। डॉ यादव ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि आज गर्व के साथ हम ग्वालियर के पुरानी छावनी क्षेत्र में बनने वाले नगर द्वार का नाम सिख धर्म के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद सिंह जी के सम्मान में ‘दाता बंदी छोड़ द्वार’ रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर शहर और चंबल संभाग सिख समुदाय के अद्वितीय इतिहास और समृद्ध संस्कृति के लिए प्रसिद्ध हैं। गुरु हरगोबिंद सिंह जी का साहस और बलिदान हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। जब मुग़ल बादशाह ने गुरु हरगोविंद सिंह को रिहा करने का निर्णय लिया तो उन्होंने अपनी अकेली रिहाई से मना कर दिया था और 52 हिंदू राजाओं के साथ निकल के आने की इच्छा व्यक्त की थी। मुगल बादशाह ने मजबूर होकर 52 हिंदू राजाओं को भी हमारे छठवें सिख गुरु हरगोविंद सिंह जी महाराज साहब के साथ में रिहा किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मैं आज इस अवसर पर ग्वालियर के पुरानी छावनी क्षेत्र में बनने वाले नगर द्वार का नाम दाता बंदी छोड़ द्वार रखने की घोषणा करता हूं। सिख लोग पहले दीवाली नहीं मनाते थे, लेकिन ग्वालियर में एक ऐसा घटनाक़म घटा कि उसके बाद से उन्होंने दो दिन दिवाली मनाना शुरू कर दिया. इन दिनों उनके धार्मिक स्थल भी रोशनी से जगमगाते है. इसकी कहानी भी बड़ी रोमांचक और अविस्मरणीय है. क्या है कहानी? ग्वालियर के विश्व प्रसिद्ध दुर्ग के ही एक बड़े हिस्से व ऊंचाई पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा मौजूद है, जिसका नाम ‘दाता बंदी छोड़’ है. यह गुरुद्वारा सिख संगत में बड़े तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है. दुनिया भर से सिख सपरिवार हर साल यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं. मान्यता है और इतिहास में उल्लेख भी कि मुगल काल के दौरान लोगों में सिख धर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए मुगल शासक जहांगीर ने सिखों के छठे गुरु हरगोविंद साहिब को बंदी बना लिया था. गुरु हरगोविंद साहिब ने मुस्लिम शासकों की धार्मिक शर्तें मानने से इनकार कर दिया था. जहांगीर ने गुरु महाराज को बंदी बनाकर ग्वालियर के किले में कैद कर दिया था. मुगल उस समय इस किले को अपने राजनीतिक बंदियों की कैद के लिए उपयोग करते थे. इस किले में साहिब के आने से पहले से ही 52 हिंदू राजा कैद थे. गुरु हरगोविंद जी जब जेल में पहुंचे तो सभी राजाओं ने उनका स्वागत किया. जहांगीर ने गुरु हरगोविंद को 2 साल 3 महीने तक जेल से बाहर नहीं आने दिया. इस घटना के बाद रिहा हुए सिख गुरू उसी दौरान अचानक एक घटना घटी. जहांगीर की तबीयत खराब होने लगी. हकीम से लेकर वैद्य तक सब उपचार में जुटे थे, लेकिन उनकी तबियत बिगड़ती ही जा रही थी. तभी एक शाही पीर ने जहांगीर को बताया कि ग्वालियर किले पर नजरबंद गुरु हरगोविंद साहिब को मुक्त कर दो, तभी आप ठीक हो सकते हैं. जान जाने से भयभीत जहांगीर ने उनकी बात मान ली. इसके बाद गुरू हरगोविंद साहिब को रिहा करने के लिए जहांगीर तैयार हुआ. आखिरकार इसके बाद गुरु हरगोविंद साहिब की शर्त को स्वीकार करते हुए जहांगीर ने भी एक शर्त रखी. जहांगीर ने कहा कि कैद में गुरु जी के साथ सिर्फ वही राजा बाहर जा सकेंगे, जो गुरुजी का कोई कपड़ा पकड़े होंगे. इसके बाद गुरु हरगोविंद साहिब ने जहांगीर की शर्त को स्वीकार कर लिया. चालाकी पर भारी पड़ा चमत्कार जहांगीर की चालाकी को देखते हुए गुरु हरगोविंद साहिब ने एक 52 कलियों का चोंगा (कुर्ता) सिलवाया. इस तरह एक एक कली को पकड़ते हुए सभी 52 हिंदू राजा जहांगीर की कैद से आजाद हो गए. 52 हिंदू राजाओं को ग्वालियर के इसी किले से एक साथ छोड़ा गया था. इसलिए यहां बने इस स्थान का नाम दाताबन्दी छोड़ रखा गया था लेकिन कालांतर में यहां बने गुरुद्वारे का नाम ‘दाता बंदी छोड़’ के नाम से ही प्रसिद्ध हो गया. चूंकि यह रिहाई दीपावली के मौके पर हुई थी, इसलिए सिखों ने उनकी अगवानी के लिए घर घर दिए जलाए और तभी से सिख समाज भी अमावस्या और उसके एक दिन बाद तक घरों में दीपक जलाकर दीवाली मनाने लगा. ग्वालियर स्थित दाताबन्दी छोड़ गुरुद्वारे में भी दीपोत्सव होता है. यहां लाखों की तादात में सिख धर्म के अनुयाई अरदास करने आते हैं. यह पूरे विश्व में सिख समाज का छठवां सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है.    

दिल्ली में केजरीवाल पर पहला बड़ा एक्शन! 51 लाख लोगों को जारी होंगे आयुष्मान भारत कार्ड, मोहल्ला क्लिनिक बनेंगे ‘आरोग्य मंदिर’

नई दिल्ली दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हो चुका है, जिसके बाद कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। भाजपा ने इसे लेकर प्लान भी बनाने शुरू कर दिए हैं। इसी बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सरकार बनने के बाद दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों के स्टेटस की समीक्षा करने वाला है, जिसमें उन्हें संभावित रूप से ‘आरोग्य मंदिर’ में बदलने की योजना है। यह कदम क्लीनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उठाया गया है, जिसके चलते मंत्रालय ने नए स्वास्थ्य मंत्री से रिपोर्ट मांगी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ‘केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय योजनाओं पर चर्चा करेगा और दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिकों को आरोग्य मंदिर के रूप में बेस्ट पॉसिबल मेकओवर के रूप से बदलने की कोशिश करेगा। साथ ही, मोहल्ला क्लीनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों पर नए स्वास्थ्य मंत्री से रिपोर्ट भी मांगेगा।’ एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, मंत्रालय दिल्ली में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) को लागू करने पर भी जोर देगा। 51 लाख लोगों को मिलेंगे आयुष्मान कार्ड मंत्रालय आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना (AB-PMJAY) के कार्यान्वयन की भी समीक्षा करेगा. सूत्रों के अनुसार, 51 लाख लोगों को आयुष्मान भारत कार्ड जारी किए जाने की संभावना है. यदि मोहल्ला क्लिनिकों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदला जाता है, तो उन्हें योजना के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. एक सूत्र ने बताया, “सरकार मोहल्ला क्लिनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बहुत चिंतित है. दिल्ली के नए स्वास्थ्य मंत्री से मोहल्ला क्लिनिकों की स्थिति पर और यह जानने के लिए रिपोर्ट मांगी जाएगी कि क्या इन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदला जा सकता है.” जनवरी में, उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने दिल्ली सरकार द्वारा संचालित मोहल्ला क्लिनिकों में निजी प्रयोगशालाओं को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी डायग्नोस्टिक टेस्ट के आरोपों पर सीबीआई जांच का आदेश दिया था. आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के तहत, सामान्य गैर-संक्रामक बीमारियों (NCDs) जैसे कि सर्वाइकल, ब्रेस्ट और ओरल कैंसर की स्क्रीनिंग सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा है. AAP के नेतृत्व वाली रही दिल्ली सरकार और टीएमसी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल ने अभी तक AB-PMJAY योजना को लागू नहीं किया. AAP सरकार ने लागू नहीं की थी योजना AAP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और पश्चिम बंगाल ने अभी तक AB-PMJAY योजना को लागू नहीं किया है. AB-PMJAY सरकार की एक प्रमुख योजना है, जो भारत की आबादी के आर्थिक रूप से कमज़ोर 40 प्रतिशत हिस्से में से 12.37 करोड़ परिवारों के लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों को माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है. हाल ही में, इस योजना का विस्तार करके 4.5 करोड़ परिवारों के 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किया गया है, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो. सूत्रों ने बताया, ‘एक और बड़ा कदम दिल्ली में एबी-पीएमजेएवाई योजना को लागू करना है, जिसके तहत 51 लाख लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी किए जाने की संभावना है।’ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के गरीब और कमजोर परिवारों को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान करती है। इस योजना में 70 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं। दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा ने अपने घोषणापत्र में आयुष्मान योजना को लागू करने का वादा किया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली शानदार जीत के बाद अब पार्टी से इस वादे को पूरा करने की उम्मीद है। इस योजना से दिल्ली के करीब 51 लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें आयुष्मान कार्ड जारी किए जाएंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले दिल्ली के सभी सात भाजपा सांसदों द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद आप सरकार द्वारा आयुष्मान योजना को लागू न करने पर सवाल उठाए थे। भाजपा को जनता ने ऐतिहासिक जनादेश दिया है। पार्टी ने 48 सीटें जीतीं, जिसमें 27 साल बाद दिल्ली में उसकी सत्ता में वापसी हुई। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आप के कई नेता अपनी सीटें हार गए, जबकि आतिशी अपनी सीट बचाने में सफल रहीं। 8 फरवरी को घोषित दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में पार्टी ने शानदार जीत हासिल की। ​​पार्टी ने दिल्ली विधानसभा का नेतृत्व करने के लिए अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की फिलहाल घोषणा नहीं की है। दिल्ली में पिछली भाजपा सरकार 1993 से 1998 तक थी।

सीएम मोहन यादव का दिल्ली में हुआ एक और घर, नए बंगले में जल्द करेंगे गृह प्रवेश

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का राजधानी दिल्ली के लुटियंस में एक घर होगा। सीएम को 14 अशोक रोड पर एक कोठी अलॉट हो गई है। इस बंगले में वर्षों से पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी रह रही थीं। हाल ही उन्होंने यह घर खाली किया था। अब यह कोठी मध्यप्रदेश के सीएम के नाम अलॉट हो गई है। बीते दिनों मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने इसका निरीक्षण भी किया है। इस दौरान उनके साथ मध्यप्रदेश के अधिकारियों की टीम भी मौजूद थी। सूत्रों का कहना है कि, सीएम ने दिल्ली में यह आवास इसलिए लिया है कि उनके प्रवास से जुड़ी गोपनीयता बनी रहे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने घर को अपनी जरूरत के हिसाब से तैयार करने के निर्देश भी दिए। हालांकि, इस बंगले को पूरा तैयार होने में करीब तीन से चार माह लगेंगे। इसके बाद सीएम शुभ मुहूर्त देखकर दिल्ली के नए घर में प्रवेश करेंगे। अभी सीएम अपने दिल्ली प्रवास के दौरान चाणक्यपुरी स्थित न्यू मध्यप्रदेश भवन में ठहरते हैं। हालांकि, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी दिल्ली में बंगला अलॉट नहीं करवाया था। वे मध्यप्रदेश भवन में ही आकर ठहरते थे और यहीं अधिकारियों की बैठक लेते थे। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान को सफदरजंग रोड पर बंगला अलॉट हुआ है। जबकि, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए कभी भी मध्यप्रदेश भवन का उपयोग ठहरने के लिए नहीं किया था। वे दिल्ली प्रवास के दौरान राजदूत मार्ग स्थित अपने घर पर ठहरते थे। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए दिल्ली में लोधी स्टेट में सरकारी आवास अलॉट करवाया था। सूत्रों का कहना है कि, कुछ महीनों पहले मध्यप्रदेश के सीएम दिल्ली प्रवास के दौरान असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा से मिलने तीन मूर्ति मार्ग स्थित आवास पर पहुंचे थे। इस दौरान सीएम यादव ने असम के सीएम से बंगला अलॉट होने की प्रक्रिया की जानकारी ली थी। इसके बाद सीएम के कार्यालय ने दिल्ली में मध्यप्रदेश के सीएम को बंगला अलॉट करने के संदर्भ में फाइल चलाई थी। सूत्रों का कहना है कि, अलॉट हुए 14 अशोक रोड के बंगले में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के 27 कुत्ते उनकी देखभाल करने वाले के साथ हैं। वहीं, बंगले में मरम्मत ओर रंगरोगन सहित कई काम होने हैं। इसलिए इसे तैयार होने में थोड़ा समय लग सकता है। दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने ऑफिस कार्य के साथ रात्रि विश्राम भी कर सकें, ऐसी कुछ व्यवस्था भी बंगले में की जा रही हैं। इसके अलावा उनका परिवार भी रह सके इसके लिए भी तमाम सुविधाएं बंगले में जुटाई जा रही हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जेड प्लस की सुरक्षा प्राप्त है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टिकोण से यह बंगला उपयुक्त है। इस कोठी के आसपास ही सभी मंत्रालय और संसद भवन मौजूद हैं। एयरपोर्ट भी इस घर से 13 किमी की दूरी पर है। जबकि न्यू मध्यप्रदेश भवन भी 6 किमी दूर है।   दिल्ली के अलावा भोपाल-उज्जैन में भी है सीएम आवास मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का राजधानी भोपाल के अलावा उज्जैन में भी सीएम हाउस तैयार किया गया है। उज्जैन में कोठी रोड स्थित विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति के बंगले को भी सीएम हाउस बनाया गया है। सीएम यहां से प्रशासनिक कार्यों को निपटा सके इसलिए इसे तैयार किया गया है। इसके अलावा उज्जैन के अब्दालपुर और फ्री गंज क्षेत्र में भी सीएम का घर है।  

मुख्यमंत्री ने 27% OBC आरक्षण पर जल्द सुनवाई के लिए राज्य के एडवोकेट जनरल को दिए ये निर्देश, SC-ST वर्ग को मिलना चाहिए निर्धारित कोटा

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य के एडवोकेट जनरल को इस संबंध में जल्द से जल्द आवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। सरकार का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही इसे तुरंत लागू करना है, ताकि OBC वर्ग को इसका लाभ मिल सके। इस फैसले से प्रदेश में आरक्षण नीति को मजबूती मिलेगी और समाज के पिछड़े वर्गों को अधिक अवसर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने इस मामले को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार अपने वादे के अनुरूप सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह फैसला बीते गुरुवार, 13 फरवरी 2025 को विधि विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में हुई बैठक के बाद लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि, हमारी सरकार बनने के पहले से ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने को लेकर कोर्ट में लगी अलग-अलग याचिका में केस चल रहा है। इसी को लेकर संबंधित विभागों के अफसरों के साथ बैठक की है। आज एडवोकेट जनरल से कहा है सुप्रीम कोर्ट में जल्दी से जल्दी सुनवाई के लिए आवेदन लगाएं। सरकार का मत साफ- 27% आरक्षण लागू हो सीएम यादव ने बताया कि उन्होंने एडवोकेट जनरल से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में जल्द से जल्द सुनवाई के लिए आवेदन लगाएं। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का मंतव्य स्पष्ट है कि 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करना है। इसलिए हमने तय किया है कि सुप्रीम कोर्ट को सरकार का मंतव्य जल्द से जल्द बताया जाए और इसके बाद न्यायालय जो भी फैसला करेगा, उसे लागू किया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि एससी और एसटी को भी जो आरक्षण निर्धारित है, वह संबंधित वर्ग के लोगों को प्रदेश में मिलना चाहिए। हाईकोर्ट के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है। इसलिए सरकार ने इस मामले में स्पष्ट राय तय करने का फैसला किया है। आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 28 जनवरी को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के राज्य शासन के निर्णय को चुनौती दी गई थी। बता दें, 4 अगस्त 2023 को हाई कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश के तहत राज्य सरकार को 87:13 का फॉर्मूला लागू करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद प्रदेश की सभी भर्तियां ठप हो गई थीं। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने की। यह याचिका सागर की यूथ फॉर इक्वालिटी संस्था की ओर से दायर की गई थी। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के मुताबिक इस फैसले के बाद प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर अब नए सिरे से काम करना होगा। साथ ही प्रदेश में भर्ती से जुड़े 13% होल्ड पदों को अब अनहोल्ड भी किया जाएगा। 2021 में ओबीसी को 27% आरक्षण मिला था दरअसल, 26 अगस्त 2021 को प्रदेश के तत्कालीन महाधिवक्ता के अभिमत के चलते सामान्य प्रशासन विभाग ने 2 सितंबर 2021 को एक परिपत्र जारी कर ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण की अनुमति प्रदान की थी। इस परिपत्र में तीन विषयों को छोड़कर शेष में 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था। इनमें नीट पीजी प्रवेश परीक्षा 2019-20, पीएससी द्वारा मेडिकल ऑफिसर भर्ती 2020 और हाईस्कूल शिक्षक भर्ती में 5 विषय शामिल थे। जानकार बोले- याचिका रद्द यानी 27% आरक्षण के आदेश से स्टे हटा इससे पहले, ओबीसी के विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर का कहना था कि उक्त याचिका के निरस्त होने से प्रदेश में कुछ मामलों को छोड़कर शेष में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि अब यह सरकार पर है कि उक्त फैसले के बाद आगे क्या रुख अपनाती है। हाईकोर्ट ने सुनवाई में साफ कर दिया है कि प्रदेश में होल्ड पदों की सभी भर्तियों को फिर से अनहोल्ड यानी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। जो कोर्ट के पूर्व में जारी फैसले के चलते होल्ड पर कर दी गई थीं। 4 अगस्त 2023 को हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश के तहत राज्य सरकार को 87 /13 का फॉर्मूला लागू करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद प्रदेश की सभी भर्तियां रोक दी गई थीं। सरकार ने यह फॉर्मूला महाधिवक्ता के अभिमत के आधार पर तैयार किया था, जिसके तहत 87 प्रतिशत सीटें अनारक्षित और 13 प्रतिशत सीटें ओबीसी के लिए रखी गई थीं। इससे 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ लाखों ओबीसी अभ्यर्थियों को नहीं मिल रहा था। अब सरकार को नए सिरे से अपना जवाब हाईकोर्ट में पेश करने कहा गया है। वहीं, इस मामले में शासकीय अधिवक्ता अभी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं मामले आशिति दुबे ने मेडिकल से जुड़े मामले में ओबीसी आरक्षण को पहली बार चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2019 को ओबीसी के लिए बढ़े हुए 13 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगाई थी। इसी अंतरिम आदेश के तहत बाद में कई अन्य नियुक्तियों में भी रोक लगाई गई थी। यह याचिका 2 िसतंबर 2024 को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर हो गई। इसी तरह राज्य शासन ने ओबीसी आरक्षण से जुड़ी करीब 70 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करा ली हैं, जिन पर फैसला आना बाकी है।

संतों की उपस्थिति में राजिम कुंभ कल्प का भव्य शुभारंभ

रायपुर छत्तीसगढ़ के पवित्र त्रिवेणी संगम, राजिम के तट पर आयोजित राजिम कुंभ कल्प का गत दिवस भव्य शुभारंभ हुआ। राजिम में आयोजित इस 15 दिवसीय आयोजन के उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि थे। मेले के शुभारंभ पर राज्यपाल सहित साधु-संतों और अतिथियों ने भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि महानदी, पैरी और सोंढूर के संगम पर स्थित यह पावन भूमि सदीयों से संतों और भक्तों का केंद्र रही है। राजिम कुंभ कल्प हमारी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जो न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि समाज में एकता, समरसता और परंपराओं के संरक्षण का संदेश भी देता है। राजिम का ऐतिहासिक महत्व बताते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि यह क्षेत्र भगवान राजीव लोचन मंदिर, कुलेश्वर महादेव, रामचंद्र पंचेश्वर महादेव, भूतेश्वर महादेव और सोमेश्वर महादेव जैसे प्राचीन मंदिरों का धाम है। पंचकोशी यात्रा में पटेश्वर, चंपेश्वर, ब्रह्मनेश्वर, फणीश्वर और कोपेश्वर महादेव शामिल हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का राजिम कुंभ कल्प इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह उसी समय आयोजित हो रहा है जब प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य आयोजन हो रहा है। प्रयागराज में जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है, वहीं राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर का संगम होता है। इसीलिए इसे छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहा जाता है। श्री डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि सदियों से धार्मिक पर्यटन और मेलों की समृद्ध परंपरा को संजोए हुए है। महामाया मंदिर, बम्लेश्वरी माता, दंतेश्वरी माई और मदकू द्वीप जैसे तीर्थस्थल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि मेले केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि समाज और समुदाय को जोड़ने का माध्यम भी होते हैं। ये परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। राज्यपाल श्री डेका ने साधु-संतों को नमन करते हुए कहा कि जहां संतों के चरण पड़ते हैं, वह भूमि स्वयं पवित्र हो जाती है। संतों का जीवन परोपकार और मानवता की सेवा के लिए समर्पित होता है। इतिहास में कई ऐसे उदाहरण हैं जहां संतों की कृपा से जीवन का परिवर्तन संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प न केवल अध्यात्म का केंद्र है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता को भी गति प्रदान करता है। लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां आकर न केवल आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं, बल्कि इस आयोजन के माध्यम से समाज में भाईचारे और एकता का संदेश भी प्रसारित होता है। राज्यपाल ने कहा कि यह मेला प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों से आग्रह किया कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजें और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाएं, क्योंकि हमारी सांस्कृतिक विरासत ही हमारी असली पहचान है। इस अवसर पर दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद जी महाराज, महंत साध्वी प्रज्ञा भारती जी महाराज, बालयोगेश्वर बालयोगी रामबालक दास जी महाराज, धर्मस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, रायपुर आयुक्त श्री महादेव कावरे, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के एमडी श्री विवेक आचार्य, गरियाबंद कलेक्टर श्री दीपक कुमार अग्रवाल, साधु-संत, गणमान्य अतिथि एवं नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने 15 कला मनीषियों को प्रदान किए राज्य शिखर सम्मान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलाएं स्वयं बोलती हैं। यह हमारे व्यवहार और भावनाओं से भी व्यक्त होती है। मध्यप्रदेश कला की धरती है। यहाँ से कई विश्व मान्य कला मनीषी हुए हैं। कलाओं और कलासाधकों से ही हमारी संस्कृति पोषित है, पल्लवित है। मध्यप्रदेश को विश्व में कला गौरव स्थल की पहचान दिलाने में भारत भवन की प्रमुख भूमिका है। हम सब भारत भवन के एक गौरवशाली अतीत के गवाह हैं। आज भारत भवन की 43वीं वर्षगांठ मनाते हुए हम बेहद गौरवान्वित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार को भारत भवन के मुक्ताकाश मंच से राज्य शिखर सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को एक नई पहचान देते हुए वर्ष 2022 एवं 2023 के राज्य शिखर सम्मान प्रदान किए। इस अवसर पर 15 कला मनीषियों को उनके अतिविशिष्ट योगदान के लिए शॉल, श्रीफल, सम्मान पट्टिका एवं दो लाख रूपए की सम्मान राशि देकर अलंकृत किया गया। समारोह में संगीत, नृत्य, नाटक, जनजातीय एवं लोक कला, साहित्य तथा रंगकर्म के क्षेत्र में योगदान देने वाले कलाकारों, साहित्यकारों एवं रंगकर्मियों को शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य शिखर सम्मान से सम्मानित सभी कला विभूतियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। कलाकार हमारे समाज की आत्मा हैं और उनका सम्मान हमारी प्राथमिकता है। कला के सम्मान से हम स्वयं सम्मानित होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत भवन के 43वें स्थापना दिवस को खास बनाते हुए यहां रंगमण्डल को पुनः प्रारंभ करने की महत्वपूर्ण घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि रंगमण्डल की वापसी सिर्फ रंगमंच ही नहीं, बल्कि पूरे कला जगत के लिए एक नया आनंद लेकर आयेगी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा का सभी रंगमंच प्रेमियों और कलाकारों ने पुलकित होकर स्वागत किया क्योंकि रंगमण्डल की वापसी इनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। भारत भवन का रंगमण्डल वर्षों से प्रदेश के रंगकर्मियों और नाटक प्रेमियों के लिए एक प्रमुख मंच था, अब फिर से जीवंत होने जा रहा है। इसकी वापसी से युवा रंगकर्मियों को नए अवसर मिलेंगे और थिएटर को भी एक नई ऊर्जा मिलेगी। रंगमण्डल की पुनर्स्थापना से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और भी समृद्ध होगी। संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि भारत भवन हमारी कला आस्था का केन्द्र रहा है। इस भवन के जरिए कला और संस्कृति के पुनर्जागरण के साथ मध्यप्रदेश न केवल अपनी जड़ों को संजो रहा है, बल्कि भावी नई कला पीढ़ी को भी सशक्त बना रहा है। उन्होंने सभी सम्मानित विभूतियों का अभिनंदन किया। भारत भवन के न्यासी अध्यक्ष वामन केंद्रे ने कहा कि भारत भवन सभी कला विधाओं का संगम है। सदियों से विभिन्न कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन यहां से होता रहा है। भोपाल को देश के प्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र का दर्जा दिलाने में भारत भवन की भूमिका निरापद रूप से सराहनीय रही है। प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन और भारत भवन के न्यासी सचिव शिवशेखर शुक्ला ने भारत भवन की 43 साल से चल रही कला साधना यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि दिलों में कला और इसके प्रति प्रेम का संचार करने वाले कला विभूतियों का सम्मान कर हम स्वयं गौरवान्वित हैं। भारत भवन समेकित रूप से कलाओं का उत्कृष्ट केन्द्र है। कलाओं के संवर्धन और कलाकारों के प्रोत्साहन के क्षेत्र में यह देश का एक अनूठा और अनुपम कला केन्द्र है। संचालक संस्कृति एन.पी. नामदेव ने राज्य शिखर सम्मान से सम्मानित होने वाले सभी कला मनीषियों के प्रशस्ति वाचन किये। इस मौके पर भारत भवन के सभी न्यासी सहित बड़ी संख्या में कलाप्रेमी, रंगकर्मी और प्रबुद्धजन उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने भारत भवन परिसर में आयोजित कला प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। 9 विधाओं में 15 कला मनीषियों को मिला राज्‍य शिखर सम्‍मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न कला क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 15 कला मनीषियों को वर्ष 2022 एवं 2023 के राज्य शिखर सम्मान प्रदान किये। समारोह में डॉ. उर्मिला शिरीष (भोपाल) को हिन्‍दी साहित्‍य के लिए वर्ष 2022 का शिखर सम्मान दिया गया। महमूद अहमद सहर (उज्‍जैन) को उर्दू साहित्‍य के लिए वर्ष 2023 का शिखर सम्मान दिया गया। डॉ. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी (इंदौर) को संस्‍कृत साहित्‍य के लिए वर्ष 2022 का और डॉ. गोविंद दत्‍तात्रेय गंधे (उज्‍जैन) को संस्कृत साहित्य के लिए ही वर्ष 2023 का शिखर सम्मान दिया गया। इसी क्रम में विदुषी कल्‍पना झोकरकर (इंदौर) को शास्‍त्रीय संगीत के लिए वर्ष 2022 का और विदुषी शाश्‍वती मण्‍डल (दिल्‍ली) को शास्त्रीय संगीत के लिए ही वर्ष 2023 का शिखर सम्मान दिया गया। सुमोहिनी मोघे पूछवाले (जबलपुर) को शास्‍त्रीय नृत्य के लिए वर्ष 2022 का और विदुषी भारती होम्‍बल (भोपाल) को शास्‍त्रीय नृत्य के लिए ही वर्ष 2023 के शिखर सम्मान से अलंकृत किया गया। रूपंकर कलाएं श्रेणी में ईश्‍वरी रावल (इंदौर) को वर्ष 2022 का और इसी श्रेणी में हरि भटनागर (जबलपुर) को वर्ष 2023 का शिखर सम्मान दिया गया। श्रीराम जोग (इंदौर) को नाट्य कला के लिए वर्ष 2022 का और इसी कला संवर्ग में सतीश दवे (उज्‍जैन) को वर्ष 2023 का शिखर सम्मान दिया गया। जनजातीय एवं लोक कलाएं श्रेणी में रामसिंह उर्वेती (पाटनगढ़) को वर्ष 2022 का एवं इसी श्रेणी में कैलाश सिसोदिया (धार) को वर्ष 2023 के राज्‍य शिखर सम्‍मान से अलंकृत किया गया। दुर्लभ वाद्य वादन श्रेणी में पंडित सुनील पावगी (ग्‍वालियर) को वर्ष 2023 के शिखर सम्मान से अलंकृत किया गया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- ड्रोन निर्माण और प्रौद्योगिकी का प्रमुख हब बनाने के लिए कार्य योजना तैयार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को ड्रोन निर्माण और प्रौद्योगिकी का प्रमुख हब बनाने के लिए समग्र कार्य योजना तैयार की गई है। राज्य सरकार ने ड्रोन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिये मध्यप्रदेश ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025 को स्वीकृति दे दी है। इसमें ड्रोन के सुरक्षित और कुशलतम उपयोग के माध्यम से नवाचार, आर्थिक समृद्धि और रोजगार को बढ़ावा देने वाले विषयों एवं तथ्यों को शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश में ड्रोन टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही ड्रोन डेटा रिपॉजिटरी भी बनाई जायेगी। प्रधानमंत्री गति शक्ति पहल से प्रेरित होकर ड्रोन नीति सरकार के ड्रोन डेटा और इमेजरी के लिए एक केन्द्रीकृत प्लेटफ़ॉर्म होगा। ड्रोन डेटा रिपॉजिटरी विभिन्न विभागों के मध्य परस्पर डेटा साझा करने और सहयोग को बढ़ावा देगी। यह नीति जीआईएस आधारित योजना और विश्लेषणात्मक उपकरणों का उपयोग करके बेहतर निगरानी तंत्र विकसित करेगी। यह रिपॉजिटरी तत्काल अद्यतन निगरानी सुविधा प्रदान करेगी, जिससे संसाधनों का त्रुटिरहित आवंटन होगा और अधोसंरचनात्मक विकास में सहयोग मिलेगा। इससे बेहतर समन्वय, निर्णय-प्रक्रिया में मदद मिलने के साथ लागत-समय का सदुपयोग होगा और परियोजनाओं की समीक्षा में सुधार भी होगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि डेटा प्रबंधन सुरक्षित रूप से किया जाए और सहयोगी भागीदारों के साथ रिपॉजिटरी की प्रबंधन व्यवस्था पुख्ता रखी जाए। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य की एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए सभी ड्रोन डेटा को राष्ट्रीय भौगोलिक नीति-2022 या उसके बाद के किसी संशोधन या नीति के अनुसार डेटा सुरक्षा कानूनों और विनियमों के अंतर्गत संग्रहित किया जाए। संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिए सुरक्षित डेटा भंडारण और प्रसारण प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जायेगा। भविष्य में ड्रोन का उपयोग तेज़ी से बढ़ेगा। यह बिना पायलट वाला यंत्र है जो विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। यह कई प्रकार से अभिनव समाधान प्रस्तुत करता है और मानव श्रम की बचत करता है। इस तकनीकी से समय पर डेटा संधारित हो जाता है। सटीक और दक्षता के साथ कठिन स्थानों से डेटा संग्रह हो जाता है। आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग से कई क्षेत्रों के लिए यह अमूल्य उपकरण साबित हो रहा है। कृषि क्षेत्र में उपयोग ड्रोन से फसल की सेहत की निगरानी, रोगों का पता लगाने और फसल की पैदावार का मूल्यांकन करने में सहायता मिल रही है। ड्रोन उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव सटीकता से कर सकते हैं, जिससे अपशिष्ट और नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा। वे उन क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं जिन्हें अधिक या कम पानी की आवश्यकता है। सिंचाई के तरीकों का बेहतर उपयोग करने में ड्रोन मदद करता है। आपदा प्रबंधन में उपयोग ड्रोन, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में थर्मल इमेजिंग और हाई-रिजोल्यूशन कैमरों का उपयोग कर प्रभावित लोगों का पता लगा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों की विस्तृत तस्वीरें देख बचाव के प्रयासों में मदद कर रहे हैं। पुनर्निर्माण के प्रयासों और बीमा दावों की प्रामाणिकता में मदद मिल रही है। आपातकालीन स्थितियों में ड्रोन चिकित्सा आपूर्ति और खाद्य सामग्री को दुर्गम इलाको में पहुंचा रहे हैं। निरीक्षण में उपयोग ड्रोन पुलों, भवनों और अन्य बुनियादी ढांचे का निरीक्षण कर रहे हैं, जिसमें रखरखाव और सुरक्षा मूल्यांकन शामिल हैं। ड्रोन से निर्माण की प्रगति के बारे में वास्तविक समय में अपडेट प्राप्त किया जा रहा है। ड्रोन वन्य जीवों की सुरक्षा की निगरानी कर रहे हैं और उन्हें परेशान किए बिना उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। जंगलों की सेहत की निगरानी, अवैध लकड़ी कटाई का पता लगाने और जंगल की आग के प्रभाव का मूल्यांकन भी ड्रोन से किया जा रहा है। ड्रोन स्कूलों की स्थापना मध्यप्रदेश ड्रोन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और संचालन के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए नई ड्रोन नीति के अंतर्गत ड्रोन स्कूल स्थापित करेगा। इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से निवेश किया जाएगा। इसका उद्देश्य ड्रोन प्रौद्योगिकी में व्यापक प्रशिक्षण और शिक्षा प्रदान करना है, जिससे विद्यार्थी और पेशेवर दोनों उद्योग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अच्छी तरह से तैयार हों। पॉलिटेक्निक, आईटीआई और इंजीनियरिंग कॉलेजों को ड्रोन/पार्ट्स डिजाइन, ड्रोन इमेज एनालिटिक्स, एआई टूल्स आदि के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उद्योग के साझेदारों के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इससे युवाओं को ड्रोन उद्योग में रोजगार पाने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान किया जा सकेगा। विशेष रूप से ड्रोन निर्माण, मरम्मत, असेंबलिंग और डेटा प्रोसेसिंग में रोजगार प्रदान करने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं। पॉलिसी से लाभ आगामी 5 वर्षों में लगभग 370 करोड़ रूपये का निवेश अपेक्षित है। लगभग 8,000 (2,200 प्रत्यक्ष एवं 6,600 अप्रत्यक्ष) रोजगार सृजित होंगे। इस क्षेत्र में प्रति करोड़ वित्तीय प्रोत्साहन के आधार पर लगभग 25-30 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। नीति के प्रमुख स्तंभ ड्रोन इको सिस्टम, कौशल विकास, सेक्टर प्रमोशन और वित्तीय प्रोत्साहन ड्रोन नीति के प्रमुख स्तंभ हैं। इनसे तकनीकी संस्थानों में ड्रोन संबंधी पाठयक्रमों को बढ़ावा मिलेगा। ड्रोन इको सिस्टम एआई और नवीनतम प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन मिलेगा। वित्तीय प्रोत्साहन ड्रोन नीति की घोषणा के बाद डीएसडीएम/डीईएस इकाइयों द्वारा किए गए नए निवेश के लिये 40 प्रतिशत पूंजी निवेश (अधिकतम 30 करोड़ रूपये तक) की सब्सिडी और लीज रेंटल पर 3 वर्ष तक 25 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति या प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये तक, जो भी कम हो मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा पहचाने गये क्षेत्रों में आर एंड डी परियोजना शुरू करने के लिये 2 करोड़ रूपये तक का अनुदान मिलेगा। प्रतिभाओं के कौशल उन्नयन के लिये प्रमुख क्षेत्रों में इंटर्न को मुख्यमंत्री “सीखो कमाओ योजना” में 6 महिने तक के लिये 8 हजार रूपये प्रतिमाह दिये जायेंगे। प्रदर्शनियों/कार्यक्रमों में भाग लेने के लिये किए गए खर्च पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जायेगी। यह सब्सिडी घरेलू कार्यक्रमों के लिये एक लाख रूपये और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिये 2 लाख रूपये तक होगी। भूमि पर निष्पादित पट्टे पर 100 प्रतिशत स्टॉम्प शुल्क और पंजीकरण शुलक की प्रतिपूर्ति की जायेगी। परीक्षण, अंशांकन और प्रमाणन के लिये पॉलिसी अवधि के दौरान 20 लाख रूपये की कैपिंग के साथ प्रति वर्ष 5 लाख रूपये तक की सहायता मिलेगी। घरेलू पेटेंट के लिए प्रति पेटेंट 5 लाख रूपए और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रूपए … Read more

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