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10.53 लाख किसानों से हुई 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद, किया गया 14,886.35 करोड़ रुपये का भुगतान

लक्ष्य से अधिक धान खरीद योगी सरकार ने किसानों को किया 14,886 करोड़ रुपये का भुगतान  खरीफ क्रय सत्र 2025-26 में सरकार ने तय किया था 60 लाख मीट्रिक धान खरीद का लक्ष्य  10.53 लाख किसानों से हुई 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद, किया गया 14,886.35 करोड़ रुपये का भुगतान 12.82 लाख से अधिक किसानों ने कराया था पंजीकरण, बीती 28 फरवरी को प्रदेश में पूरी हुई धान खरीद की प्रक्रिया पिछला रिकॉर्ड भी टूटा, 2024-25 में 57.70 लाख मीट्रिक टन हुई थी खरीद, तब भुगतान हुआ था 13370.17 करोड़ रुपये का  लखनऊ  उत्तर प्रदेश में खरीफ क्रय सत्र 2025-26 के लिए धान खरीद प्रक्रिया पूरी हो गई। इसको लेकर किसान हितैषी योगी सरकार ने नया रिकॉर्ड बनाया है। धान खरीद के तय लक्ष्य को काफी पीछे छोड़ दिया। योगी सरकार ने खरीफ क्रय सत्र 2025-26 के लिए 60 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था। इसे पार कर 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई। इसके एवज में किसानों को लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया। उत्तर प्रदेश में धान खरीद प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूरी हो गई। यही नहीं, 2024-25 की अपेक्षा इस वर्ष अधिक खरीद व भुगतान किया गया।  62.30 लाख मीट्रिक टन धान खरीद, लगभग 14,886 करोड़ से अधिक रुपये का भुगतान  प्रदेश के 4869 क्रय केंद्रों के जरिए 10.53 लाख किसानों से 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खऱीद हुई। धान की खरीद (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) 2389 रुपये प्रति कुंतल की दर से हुई। इसके एवज में किसानों को लगभग 14,886.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सीएम योगी के निर्देश पर 48 घंटे के भीतर किसानों को डीबीटी के माध्यम से बैंक खातों में भुगतान किया गया। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने के साथ ही किसानों को समय से पैसा भी मिला।  12.82 लाख से अधिक किसानों ने कराया है पंजीकरण  धान बिक्री के लिए 12,82,892 किसानों ने पंजीकरण कराया है। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक धान की बिक्री के लिए ओटीपी आधारित सिंगल पंजीकरण की व्यवस्था की गई थी। पश्चिम उत्तर प्रदेश के संभागों तथा हरदोई, लखीमपुर खीरी व सीतापुर में 31 जनवरी तक धान खरीद चली। वहीं चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर, प्रयागराज संभाग तथा लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में 28 फरवरी तक धान खरीद हुई।  योगी सरकार ने पिछले साल के रिकॉर्ड को भी तोड़ा  (2025-26) इतने किसानों से हुई खरीद- 10,53,561  धान खरीद- 62,30,735.63 मीट्रिक टन भुगतान- 14,886.35 करोड़ रुपये  क्रय केंद्र- 4869 2024-25 इतने किसानों से हुई खरीद- 7,97,500 धान खरीद- 57,70,671.09 मीट्रिक टन   भुगतान- 13370.17 करोड़ रुपये क्रय केंद्र- 4372

एक अप्रैल से लागू होगा प्रतिबंध, जबलपुर के स्कूली वाहनों में एलपीजी किट का इस्तेमाल नहीं होगा

जबलपुर  शहर की सड़कों पर स्कूली बच्चों को एलपीजी (LPG) किट लगे असुरक्षित वाहनों में ढोना अब स्कूल प्रबंधकों और वाहन स्वामियों को भारी पड़ेगा। जिला प्रशासन ने छात्र सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। कलेक्टर कार्यालय सभागार में आयोजित इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गेहलोत, आरटीओ संतोष पॉल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) अंजना तिवारी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी व स्कूलों के प्राचार्य मौजूद रहे। एलपीजी वाहनों से छात्रों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया है कि एक अप्रैल से जिले के किसी भी शासकीय या अशासकीय विद्यालय में एलपीजी संचालित वाहनों से विद्यार्थियों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बैठक में स्कूली परिवहन की सुरक्षा समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। सड़कों पर होगा औचक निरीक्षण: आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस अधीक्षक और यातायात पुलिस को स्कूल समय के दौरान औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी को जिले के समस्त सीबीएसई, आइसीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों को इस आदेश से अवगत कराने और उनसे अनुपालन प्रतिवेदन लेने को कहा गया है। डेडलाइन तय एक अप्रैल के बाद यदि कोई स्कूल एलपीजी वाहन का उपयोग करता पाया गया, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित संस्था व वाहन स्वामी पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। वैकल्पिक व्यवस्था स्कूल प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है कि वे समय रहते इन वाहनों के स्थान पर वैधानिक रूप से अनुमन्य और फिटनेस प्रमाणित (पेट्रोल/डीजल/सीएनजी) वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। सत्यापन अभियान आरटीओ को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्कूली वाहनों का भौतिक सत्यापन कर गैस किट वाले वाहनों की पहचान करें।     विद्यार्थियों का सुरक्षित परिवहन हमारी प्राथमिकता है। एक अप्रैल के बाद अवैध गैस किट वाले वाहन सड़कों पर नहीं दिखने चाहिए। उल्लंघन करने वाले स्कूलों और वाहन मालिकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     – राघवेंद्र सिंह, कलेक्टर  

योगी सरकार की गोसंवर्धन नीति से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ पर्यावरण व स्वास्थ्य अनुकूल उत्पादों का निर्माण भी

होली में गोमाता ने रंग भरे गोपालकों व ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में देसी गाय के गोबर के कंडों की राख तथा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों से बन रहा गुलाल योगी सरकार की गोसंवर्धन नीति से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ पर्यावरण व स्वास्थ्य अनुकूल उत्पादों का निर्माण भी बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद समेत प्रदेश भर में किया जा रहा है निर्माण लखनऊ उत्तर प्रदेश में इस बार होली का उल्लास न केवल रंगों से, बल्कि गोमाता के आशीर्वाद और ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन से भी सराबोर होगा। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य के विभिन्न जिलों में पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों से पारंपरिक ‘ऑर्गेनिक गुलाल’ तैयार किया जा रहा है। यह गुलाल न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए नारी सशक्तिकरण का नया अध्याय लिख रहा है। प्रकृति के रंगों से सजेगा त्योहार गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस अनूठी पहल के तहत ग्रामीण महिलाएं गोशाला पालकों के सहयोग से प्राकृतिक तत्वों के जरिए गुलाल का निर्माण कर रही हैं। इसमें गोबर के कंडों की राख के अलावा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों और इंडिगो (नील) जैसे तत्वों का उपयोग किया जा रहा है। बाजार में मिलने वाले जहरीले केमिकल युक्त रंगों के मुकाबले यह गुलाल पूरी तरह इको-फ्रेंडली और त्वचा के लिए सुरक्षित है। गोबर की राख का ‘वैज्ञानिक’ आधार इस गुलाल की सबसे बड़ी विशेषता देशी गाय के गोबर के कंडों की राख का उपयोग है। पारंपरिक रूप से शुद्धिकारक मानी जाने वाली इस राख में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ‘क्षारीय तत्व’ पाए जाते हैं, जो नमी को कम कर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं। प्रसंस्करण के बाद यह राख गुलाल को एक मुलायम आधार प्रदान करती है, जिससे रंगों का फैलाव बेहतर होता है और किसी कृत्रिम फिलर की जरूरत नहीं पड़ती। प्रदेश भर में रोजगार आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस योजना के तहत बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद समेत प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन किया गया है। यह प्रयास न केवल होली को स्वास्थ्यकर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है। गोशालाओं से प्राप्त सामग्री के उपयोग से गोवंश का संरक्षण हो रहा है और महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

भारत-ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के नए ट्रायंगल का असर, जानें क्यों इसे गेमचेंजर माना जा रहा है

नई दिल्ली एक तरफ अमेरिका ट्रेड वॉर और भारी टैरिफ लगाकर अपनी अर्थव्यवस्था को समेट रहा है, तो दूसरी तरफ चीन ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के बाजार पर एकाधिकार जमाकर बैठा है. इस खींचतान के बीच, दुनिया को एक नए और सुरक्षित रास्ते की तलाश थी. इसी तलाश को पूरा करने और चीन-अमेरिका पर निर्भरता को जड़ से खत्म करने के लिए तीन बड़े देशों ने हाथ मिलाया है. भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने मिलकर एक नया और बेहद शक्तिशाली अलायंस बनाया गया है, जिसे ACITI यानी ऑस्‍ट्रेल‍िया, कनाडा, इंडिया टेक्‍नोलॉजी एंड इनोवेशन ट्रायंगल नाम द‍िया गया है. यह नया ट्रायंगल सिर्फ एक डील नहीं है, बल्कि इससे दुनिया की ग्रीन सप्लाई चेन का पूरा गेम बदलने वाला है |  आज की दुनिया में तरक्की का मतलब क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और विंड टर्बाइन है. इन सभी को बनाने के लिए लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिजों की जरूरत होती है.दिक्कत यह है कि इन खनिजों को निकालने और रिफाइन करने के बाजार पर चीन का लगभग पूरा कब्‍जा है. ग्रीन हाइड्रोजन बनाने वाले इलेक्ट्रोलाइजर की सप्लाई भी चीन ही कंट्रोल करता है. दूसरी ओर, अमेरिका ने अपनी नई नीतियों और टैरिफ से दुनिया भर के व्यापार को डरा दिया है. एक देश (चीन) पर पूरी तरह निर्भर रहना अब दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था. ACITI गठबंधन इसी सिंगल-कंट्री डिपेंडेंस को तोड़ने का अचूक हथियार है | कैसे काम करेगा यह नया ट्रायंगल?     यह गठबंधन तीन देशों की अलग-अलग ताकतों को मिलाकर एक सुपर-पावरफुल सप्लाई चेन बनाएगा. इस साझेदारी का फोकस मुख्य रूप से क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और लॉन्ग-टर्म आर्थिक सुरक्षा पर होगा |      ऑस्ट्रेलिया की ताकत: ऑस्ट्रेलिया दुनिया में लिथियम का सबसे बड़ा उत्पादक है. यानी एक तरह से लीडर है. लिथियम वह मुख्य धातु है जिससे हर तरह की बैटरी बनती है |      कनाडा की ताकत: कनाडा के पास क्रिटिकल मिनरल्स का भारी भंडार है और वह ग्रीन टेक्नोलॉजी को विकसित करने के लिए भारी फंड्स और नीतियां बना रहा है |      भारत की ताकत: भारत दुनिया का सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार है. भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट र‍िन्‍यूएबल एनर्जी पैदा करने का विशाल लक्ष्य रखा है. यानी भारत के पास इस नई तकनीक की सबसे ज्यादा डिमांड है |      जब ऑस्ट्रेलिया का कच्चा माल, कनाडा की तकनीक-पैसा और भारत का विशाल बाजार और मैन्युफैक्चरिंग स्केल एक साथ मिलेंगे, तो यह तिकड़ी चीन के एकाधिकार को सीधी और कड़ी टक्कर देगी |  सिर्फ मुनाफा नहीं, धरती को बचाना है लक्ष्‍य अक्सर ऐसे बड़े गठबंधन सिर्फ पैसा कमाने के लिए बनते हैं, लेकिन ACITI का नजरिया अलग है. इस गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अपना ध्यान सिर्फ स्मार्टफोन बनाने या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुलबुले में पैसा फूंकने पर न लगाएं. इस ट्रायंगल का असली लक्ष्य टेक-फॉर-गुड यानी भलाई के लिए तकनीक बनाना है. इसके तहत तीनों देश मिलकर काम करेंगे कि खनिजों का खनन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे हो. पुरानी बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से लिथियम, कोबाल्ट और तांबे को दोबारा कैसे निकाला जाए. यह गठबंधन सर्कुलर इकॉनमी यानी जहां चीजें बर्बाद न हों, बल्कि बार-बार इस्तेमाल हों, उस पॉल‍िसी को बढ़ावा देगा |   

सऊदी में हमले के बाद ट्रंप का ऐलान, कुवैत में US एंबेसी बंद, पाकिस्तान और इजरायल में नागरिक सेवाएं रद्द

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी जंग और खतरनाक होती जा रही है. शनिवार को ईरान पर अमेरिका ने हमला किया था. अब खबर आ रही है कि हमले की आशंका के बावजूद ईरान के शीर्ष नेतृत्व को दिन में हमले की उम्मीद नहीं थी. शनिवार सुबह अयातुल्ला अली खामेनेई अपने सलाहकारों के साथ बैठक कर रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सुरक्षित बंकर में जाने से इनकार किया और कहा कि छिपने से बेहतर है शहीद होना. बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद मिसाइलें गिरीं. इसके अलावा सोमवार को ईरानी मीडिया ने यह भी कहा कि खामेनेई की पत्नी मंसूरे खोजस्ते का निधन हो गया. बताया गया कि हमलों के बाद वह कोमा में थीं. उनकी उम्र 78 वर्ष थी और उनकी शादी 1964 में हुई थी  |  सऊदी और खाड़ी में भी तनाव न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के पास धमाके की आवाज सुनी गई और धुआं उठता देखा गया. एक सऊदी अधिकारी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपनी एयर डिफेंस क्षमता इजरायल की सुरक्षा के लिए मोड़ दी और खाड़ी देशों को ईरानी हमलों के सामने खुला छोड़ दिया |  कुवैत में अमेरिकी सैनिकों पर सीधा हमला संघर्ष में पहली बार अमेरिकी सैनिकों की बड़ी मौत की पुष्टि हुई है. कुवैत के शुआइबा पोर्ट पर रविवार को एक अस्थायी ऑपरेशन सेंटर पर ईरानी हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हमले के दौरान एक प्रोजेक्टाइल एयर डिफेंस को चकमा देकर अंदर पहुंच गया. इससे पहले इसे ड्रोन हमला बताया जा रहा था |  अमेरिकी F-15 भी क्रैश हुए तनाव के बीच कुवैत की एयर डिफेंस ने गलती से तीन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमानों को मार गिराया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे फ्रेंडली फायर की घटना बताया. छहों क्रू मेंबर सुरक्षित बाहर निकल गए और उनकी हालत स्थिर है. वीडियो में एक जलता हुआ विमान गिरता दिखा और एक पायलट पैराशूट से उतरता नजर आया |  अमेरिका में समर्थन घट रहा रॉयटर्स और इप्सोस के सर्वे के अनुसार, सिर्फ चार में से एक अमेरिकी ही ईरान पर हमले का समर्थन कर रहा है. लगातार बढ़ती अमेरिकी सैनिकों की मौत से घरेलू समर्थन और घट सकता है. खुद ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि आगे और नुकसान हो सकता है. मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस और अब दोस्ताना फायरिंग तक की घटनाएं दिखा रही हैं कि जंग का दायरा बढ़ चुका है |  कुवैत में अमेरिकी दूतावास बंद, कई देशों से स्टाफ हटाया गया अमेरिका ईरान का युद्ध: क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका ने कुवैत स्थित अपने दूतावास को अगली सूचना तक बंद करने का ऐलान किया है. इसके साथ ही अमेरिका ने बहरीन, जॉर्डन और इराक से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है. लगातार बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह कदम सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है |  पाकिस्तान में अपॉइंटमेंट्स रद्द… इजरायल में भी प्रभावित हुईं नागरिक सेवाएं ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. कराची में अमेरिकी दूतावास (कॉन्सुलेट) पर हुए हमले और उसके बाद हुई हिंसा और सुरक्षा को देखते हुए पाकिस्तान में मौजूद अमेरिकी कॉन्सुलेट ने अपने कामकाज रोक दिए हैं |  इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास के साथ-साथ लाहौर और कराची के कॉन्सुलेट ने शुक्रवार, 6 मार्च तक के लिए सभी वीजा अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए हैं. खामेनेई की मौत के विरोध में कराची की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए थे. प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्होंने अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हमला कर दिया और वहां जमकर तोड़फोड़ की. स्थिति को बिगड़ते देख सुरक्षा में तैनात अमेरिकी मरीन सैनिकों ने जवाबी गोलीबारी की. सूत्रों के मुताबिक, इस हिंसक झड़प में कई लोगों की मौत हो गई. वीजा सेवाएं और दूतावास पर सुरक्षा कड़ी सुरक्षा की नाजुक स्थिति को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने तत्काल प्रभाव से वीजा सेवाएं बंद करने का फैसला लिया है. जिन लोगों के अपॉइंटमेंट 6 मार्च तक तय थे, उन्हें अब नई तारीखों का इंतजार करना होगा. अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को भी सतर्क रहने और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है |  कुवैत में भी दूतावास बंद पाकिस्तान के अलावा मिडिल-ईस्ट के अन्य देशों में भी अमेरिका के खिलाफ गुस्सा देखा जा रहा है. कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास ने घोषणा की है कि सुरक्षा कारणों से वो अगले आदेश तक पूरी तरह बंद रहेगा |  वहीं, इजरायल में अमेरिकी दूतावास ने X पर पोस्ट करते हुए लोगों को इजराइल छोड़कर जॉर्डन के रास्ते न जाने न करने की सलाह दी है. दूतावास ने कहा, ‘इस समय अमेरिकी दूतावास इजरायल से बाहर जा रहे अमेरिकियों को निकालने या मदद करने की स्थिति में नहीं है |  शनिवार को ईरान पर इजरायल और अमेरिका ने हमला कर दिया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. ईरान ने इसे “मुस्लिमों के खिलाफ युद्ध” करार दिया है, जिसके बाद से ही पाकिस्तान, कुवैत और इराक जैसे देशों में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं. फिलहाल, पाकिस्तान और कुवैत में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं |  ईरान के साथ खड़ा हुआ चीन अमेरिका ईरान का युद्ध: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की और चीन ने ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय गरिमा के समर्थन में खड़ा होने का बयान दिया. बीजिंग ने अमेरिका और इजरायल से तत्काल सैन्य कार्रवाइयों को रोकने, तनाव को और न बढ़ने देने और संघर्ष को पूरे मिडिल ईस्ट में फैलने से रोकने की अपील की है. चीन ने कहा कि वह ईरान के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा का समर्थन करता है और उम्मीद जताई कि सभी पक्ष तनाव कम करने के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएंगे.  ट्रंप की कड़ी चेतावनी, बोले- दूतावास पर हमले का जवाब मिलेगा सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर हमला लाइव: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन इस … Read more

भोले नामक विशाल नंदी के शरीर की धूल-मिट्टी को अपने हाथों से साफ किया सीएम योगी ने

गोसेवा में रमे सीएम योगी, गोवंश को खिलाया गुड़-रोटी नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा मुख्यमंत्री ने भोले नामक विशाल नंदी के शरीर की धूल-मिट्टी को अपने हाथों से साफ किया सीएम योगी ने गोरखपुर  गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह जनता दर्शन लगाकर जनसेवा करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा में भी रमे रहे। उन्होंने नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा, उन्हें गुड़-रोटी खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश की समुचित देखभाल के निर्देश दिए। गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर मंगलवार प्रातःकाल सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। मंगलवार सुबह भी वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया।  गोशाला में सीएम योगी ने चारों तरफ भ्रमण करते हुए श्यामा, गौरी, गंगा, भोला आदि नामों से गोवंश को पुकारा। उनकी आवाज इन गोवंश के लिए जानी पहचानी है। प्यार भरी पुकार सुनते ही कई गोवंश दौड़ते-कूदते उनके पास आ गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़-रोटी खिलाया। इसी क्रम में उन्होंने भोले नामक एक विशाल नंदी को स्नेह की थपकी देते हुए गुड़-रोटी खिलाया। उसके शरीर पर लगी धूल-मिट्टी को पहले अपने हाथों से साफ किया और फिर गोशाला कार्यकर्ता को निर्देशित किया कि भोले के शरीर को सूखे कपड़े से साफ कर दिया जाए। मंदिर की गोशाला में सीएम योगी ने मोर पर भी स्नेह बरसाया और उसे अपने हाथों से रोटी खिलाई।

खामेनेई की मौत पर ईरान में खुशी, भारत में क्यों मना रहे हैं मातम?

नई दिल्ली ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मिसाइल हमले में हत्या की खबर सामने आने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है और पूरे इलाके में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए इस हमले के बाद जहां एक तरफ कई देशों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं और शिया मुस्लिम समुदाय के बीच गहरा शोक छा गया है. वहीं दूसरी तरफ ईरान और दुनिया के कुछ हिस्सों में लोगों ने इसे ‘फ्री ईरान’ की दिशा में पहला कदम बताते हुए जश्न भी मनाया है. इसी बीच भारतीय सिनेमा में काम कर रहीं ईरानी एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी का सोशल मीडिया रिएक्शन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है. ईरान से आई दो तस्वीरों ने पहले विरोध की आग दिखाई थी, अब वही तस्वीरें जश्न की कहानी बन गई हैं. कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में एक युवती देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाती नजर आई थी. यह दृश्य ईरान में महिलाओं के गुस्से और सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती का प्रतीक बना. अब खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद उसी तरह की महिलाएं ‘चीयर्स’ करती और जश्न मनाती दिखाई दे रही हैं. इन तस्वीरों ने दुनिया भर में बहस छेड़ दी है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है या फिर दशकों से सख्त सामाजिक और धार्मिक पाबंदियों में जी रही ईरानी महिलाओं की आजादी की शुरुआत? ईरान में महिलाओं का संघर्ष क्यों बना वैश्विक मुद्दा?     पिछले कुछ सालों में ईरान में महिलाओं के अधिकार सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनकर उभरे हैं. ड्रेस कोड, सार्वजनिक जीवन में पाबंदियां और मोरल पुलिसिंग के खिलाफ लगातार आंदोलन होते रहे हैं. कई बार इन आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया, लेकिन विरोध की आवाज पूरी तरह खत्म नहीं हुई. महसा अमिनी की मौत के बाद आंदोलन और तेज हो गया.     खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संरचना में संभावित बदलाव महिलाओं के आंदोलन को नई दिशा दे सकता है. हालांकि यह भी सच है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, इसलिए तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. खामेनेई की मौत पर भारत में मातम क्यों  तेहरान में अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह से ताबड़तोड़ हमले किए और इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने जान गंवाई, उसे लेकर हंगामा मचा हुआ है। खामेनेई की मौत को लेकर भारत के मुस्लिम समुदाय में कुछ वर्गों के बीच खास प्रतिक्रिया नजर आई। लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और अलीगढ़ में शोक सभाओं, अंतिम संस्कार की प्रार्थना और ऑनलाइन संदेशों से संकेत मिलता है कि यह एक रेयर मूमेंट है। ऐसा पहली बार है जब शिया और सुन्नी, धार्मिक मतभेदों के लंबे इतिहास के बाद भी एक नेता के निधन पर साथ में शोक जताते नजर आए। खामेनेई 1989 से कर रहे थे ईरान का नेतृत्व     खामेनेई, जिन्होंने अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद 1989 से ईरान का नेतृत्व किया।     वो एक शिया धर्मगुरु थे और सुन्नियों के लिए कोई धार्मिक प्राधिकारी नहीं थे।     उनकी मृत्यु पर प्रतिक्रियाएं सांप्रदायिक सीमाओं को पार कर गईं।     कई सुन्नियों के लिए, यह भावना ईरान से कम और फिलिस्तीन से अधिक जुड़ी है।     ये एक ऐसा मुद्दा है जो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक विभाजनों को भी पार कर जाता है। खामेनेई पर क्यों आए शिया सुन्नी साथ? जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि खामेनेई का जीवन धार्मिक अधिकार के साथ-साथ राजनीतिक दृढ़ विश्वास को भी दर्शाता था। एक बयान में कहा गया कि रमजान के पवित्र महीने में खामेनेई की शहादत ने मुस्लिम जगत के लाखों लोगों को गहरा शोक पहुंचाया है। कुछ सुन्नी मौलवियों में शोक के साथ-साथ उन मुस्लिम सरकारों की आलोचना भी शामिल थी जिन्हें चुप्पी साधे हुए देखा गया।  सुन्नियों की इस प्रतिक्रिया पर क्या कह रहे जानकार विद्वान बशारत अली ने कहा कि शिया राजनीतिक कल्पना में, शहादत एकता और राजनीतिक शक्ति का स्रोत बन जाती है। भारत में कई शियाओं के लिए, ईरान का धार्मिक महत्व है क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा शिया-बहुसंख्यक देश है। ये कोम और मशहद जैसे धार्मिक केंद्रों का घर है। सुन्नियों के लिए प्रतिक्रिया काफी हद तक राजनीतिक रही है, जो फिलिस्तीन और इजरायल के विरोध के इर्द-गिर्द केंद्रित है।  

सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए समस्याओं के त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण के निर्देश

बेफिक्र होकर उपचार कराएं, सरकार देगी भरपूर आर्थिक सहायता: सीएम योगी जनता दर्शन में गोरखनाथ मंदिर में 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए समस्याओं के त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण के निर्देश जमीन कब्जाने व दबंगई के मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए: सीएम योगी गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग करने आए लोगों को आश्वस्त किया कि वे बेफिक्र होकर अच्छे अस्पताल में उपचार कराएं। सरकार उनको भरपूर आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री ने इसे लेकर अधिकारियों को निर्देशित भी किया कि जिन लोगों को उपचार में आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, उनके इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से पूरा कराकर शासन को उपलब्ध कराया जाए। हर जरूरतमंद को इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।  होलिकोत्सव मनाने के लिए सोमवार को गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में करीब 150 लोगों से मुलाकात की। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों के पास जाकर, एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। समस्याओं के निस्तारण के लिए लोगों को आश्वस्त करते हुए उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को हस्तगत किए। मुख्यमंत्री ने सभी लोगों को भरोसा दिया कि किसी को भी परेशान होने या घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का प्रभावी समाधान कराया जाएगा।  जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जनता की समस्याओं पर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से ध्यान देकर उनका त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिपरक निस्तारण कराएं, ताकि किसी को भी परेशान न होना पड़े। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील रवैया अपनाया जाए और उसकी समस्या का समाधान कर उसे संतुष्ट किया जाए। इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कहीं कोई जमीन कब्जा या दबंगई कर रहा हो तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।  जनता दर्शन में एक व्यक्ति ने किडनी की बीमारी में धन की कमी आड़े आने की समस्या बताई। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले उससे आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा। कार्ड न होना बताए जाने पर उन्होंने कहा कि चिंता मत करिए। इलाज के लिए पर्याप्त आर्थिक मदद मिलेगी। अन्य कई लोग भी गंभीर बीमारियों में इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार किसी भी जरूरतमंद के इलाज में धन की कमी को बाधक नहीं बनने देगी। विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दी जाएगी। जनता दर्शन में कुछ परिजनों के साथ उनके बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने सभी को स्नेहिल आशीर्वाद के साथ चॉकलेट दीं और खूब पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

भारत में खामेनेई की मौत के बाद हाईअलर्ट, कानून-व्यवस्था पर सख्त नजर, उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी

नई दिल्ली  मध्य पूर्व के हालात को देखते हुए भारत में हाईअलर्ट जारी किया गया है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्यों को संदिग्ध लोगों पर नजर रखने और प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स तैनात करने का निर्देश दिया है, जिससे देश में शांति व्यवस्था बनी रहे। अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राज्यों में पुलिस-प्रशासन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है।  नागरिकों से कहा गया है कि वे किसी भी तरह का आपत्तिजनक, भड़काऊ या अनचाहा कंटेंट पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करने से बचें। अफवाहें और भ्रामक संदेश माहौल को बिगाड़ सकते हैं और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। पुलिस-प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान किया जाता है लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सुरक्षा बलों के साथ टकराव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं से जान-माल का नुकसान होता है और पूरे समाज को परेशानी होती है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल तत्वों, भड़काने वालों और असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में कर्नाटक के बांदीपुरा जिले में मौजूदा हालात को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने आम नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। पुलिस-प्रशासन ने कहा है कि क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए लोग किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहें जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो। पुलिस की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि लोग तोड़फोड़, दंगा-फसाद, पत्थरबाजी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों। ऐसा करना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हिंसा और अशांति की वजह से शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने, आवाजाही में रुकावट और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

होली से पहले एमपी का पारा 35 डिग्री तक, मार्च में 40 डिग्री तक बढ़ने की संभावना

भोपाल मध्यप्रदेश में गर्मी ने मार्च की शुरुआत के साथ ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। मौसम फिलहाल पूरी तरह शुष्क बना हुआ है और कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई है। पूर्वी मध्यप्रदेश के नौगांव में 35.2 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया। पश्चिमी क्षेत्र के खरगोन में 35.0 डिग्री, धार में 34.9 डिग्री और खंडवा में 34.5 डिग्री तापमान रहा। राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री और न्यूनतम 15.0 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर में पारा 33.6 डिग्री, ग्वालियर में 33.8 डिग्री और जबलपुर में 33.3 डिग्री सेल्सियस रहा।  रात में अभी हल्की ठंडक  रात के समय अभी हल्की ठंडक बनी हुई है। पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इंदौर में न्यूनतम 13.4 डिग्री और उमरिया में 13.9 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। सुबह के समय कई शहरों में आर्द्रता 70 से 90 प्रतिशत तक रही, जो शाम तक घटकर 20 से 40 प्रतिशत के बीच पहुंच गई। होली पर रहेगा साफ मौसम सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्र ने बताया कि आने वाले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। होली के दौरान बारिश या बादल की कोई संभावना नहीं है। हालांकि तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि मार्च के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। अप्रैल-मई में लू के आसार डॉ. सुरेंद्र के मुताबिक अप्रैल और मई में लू चलने की पूरी संभावना है। विशेष रूप से पूर्वी मध्यप्रदेश में इस बार ज्यादा तेज और लंबे समय तक लू चलने के संकेत हैं। उन्होंने लोगों को दोपहर के समय धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।कुल मिलाकर प्रदेश में अब सर्दी की विदाई और गर्मी की दस्तक साफ तौर पर महसूस की जा रही है, और आने वाले दिनों में तापमान में और तेजी आने के संकेत हैं। 

‘इलाज की चिंता छोड़िए, पैसा हमारी सरकार देगी’: जनता दर्शन में सीएम योगी का संदेश

गोरखपुर होली के उल्लास के बीच मंगलवार सुबह गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनीं और खासकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे परिवारों को भरोसा दिलाया कि इलाज में पैसों की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने करीब 150 लोगों से मुलाकात की. किसी के हाथ में मेडिकल रिपोर्ट थी, तो किसी के पास जमीन विवाद से जुड़ी कागजात. मुख्यमंत्री ने एक-एक व्यक्ति की शिकायत को ध्यान से सुना और संबंधित अधिकारियों को वहीं निर्देशित किया |  पैसा सरकार देगी जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग लेकर पहुंचे थे. एक व्यक्ति ने किडनी की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए कहा कि पैसे के कारण उपचार रुक गया है. मुख्यमंत्री ने सबसे पहले पूछा कि आयुष्मान कार्ड है?  जब जवाब मिला कि नहीं है, तो उन्होंने अधिकारियों की ओर देखते हुए कहा, इनकी मदद सुनिश्चित की जाए. इलाज रुकना नहीं चाहिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जरूरतमंदों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता दी जाएगी. साथ ही निर्देश दिया कि मेडिकल इस्टीमेट की प्रक्रिया तेजी से पूरी कर शासन को भेजी जाए, ताकि फाइलें लंबित न रहें. मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों से कहा, बेफिक्र होकर अच्छे से अस्पताल में इलाज कराइए. सरकार आपके साथ खड़ी है |  संवेदनशीलता और त्वरित निस्तारण पर जोर जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री का जोर सिर्फ आश्वासन तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि हर शिकायत का त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निस्तारण हो. उन्होंने कहा कोई भी पीड़ित दोबारा भटकने को मजबूर न हो. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन कब्जा या दबंगई की शिकायतों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. अगर कहीं किसी ने अवैध कब्जा किया है तो कानून अपना काम करेगा. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रार्थना पत्रों पर सिर्फ औपचारिक कार्रवाई न हो, बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जाए |  बच्चों को चॉकलेट, पढ़ाई की सीख जनता दर्शन में कुछ परिवार अपने बच्चों के साथ भी पहुंचे थे. मुख्यमंत्री ने बच्चों से बातचीत की, उनका हालचाल पूछा और चॉकलेट देकर पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी. एक महिला ने बताया कि वह अपने बेटे के इलाज के लिए आई थीं. मुख्यमंत्री ने ध्यान से सुना और तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए. अब उम्मीद है कि इलाज शुरू हो सकेगा |  विवेकाधीन कोष से मदद अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष का उद्देश्य जरूरतमंदों को त्वरित आर्थिक सहायता देना है. खासकर गंभीर बीमारियों के मामलों में यह कोष कई परिवारों के लिए सहारा बनता है. जनता दर्शन में आए लोगों को बताया गया कि मेडिकल इस्टीमेट तैयार होते ही सहायता की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. अधिकारियों को यह भी कहा गया कि पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि भविष्य में उपचार के दौरान दिक्कत न हो | 

CM मोहन ने सरकारी कर्मचारियों के एरियर्स भुगतान की घोषणा की, मिलेंगे इतने सालों के बकाए

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान करते हुए सरकारी कर्मचारियों के एरियर्स के भुगतान पर भी बड़ा फैसला लिया है।  सीएम मोहन यादव ने बताया है कि, जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक के एरियर्स के भुगतान की शुरुआत मई महीने से शुरू हो जाएगी और कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। मोहन यादव ने कहा है कि  कर्मचारियों के एरियर्स का भुगतान छह किस्तों में किया जाएगा। वहीं इससे पहले आज ही सीएम मोहन यादव ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को बढ़ाने का भी ऐलान किया है। सीएम मोहन ने कहा है कि आज होली के शुभ अवसर पर राज्य के शासकीय सेवकों के महंगाई भत्ते में 3% की वृद्धि कर 58% करने का निर्णय किया है। सभी शासकीय सेवकों को भारत सरकार के समान अप्रैल (पेड इन मई) 2026 के वेतन में 58% महंगाई भत्ता मिलेगा। जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक के एरियर की राशि मई 2026 से प्रारंभ होकर 6 समान किस्तों में दी जाएगी। पेंशनर्स को भी जनवरी से फरवरी 2026 की पेंशन में 58% का महंगाई भत्ता दिया जाएगा। हमारी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम कर रही है।  मध्य प्रदेश के 12 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों की होली मोहन यादव सरकार ने दोगुनी रंगीन कर दी है। कर्मचारियों को वो  बड़ी सौगात मिली है जिससे उनके चेहरे खिलने तय है। दरअसल  सीएम मोहन यादव ने राज्य के कर्मचारियों का 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा कर दी है। ये प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए किसी राहत से कम नहीं है। होली के शुभ अवसर पर राज्य के शासकीय सेवकों के महंगाई भत्ते में 3% की वृद्धि कर 58% करने का निर्णय किया है। सभी शासकीय सेवकों को भारत सरकार के समान अप्रैल (पेड इन मई) 2026 के वेतन में 58% महंगाई भत्ता मिलेगा। जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक के एरियर की राशि मई 2026 से प्रारंभ होकर 6 समान किस्तों में दी जाएगी। पेंशनर्स को भी जनवरी से फरवरी 2026 की पेंशन में 58% का महंगाई भत्ता दिया जाएगा। हमारी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम कर रही है। आज दिन में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत बड़वानी में कैबिनेट की, कई महत्वपूर्ण निर्णय किए। शाम को सभी कर्मचारी बंधुओं और पेंशनर्स के कल्याण के लिए निर्णय लिया है। पेंशनर्स को जनवरी से फरवरी की पेंशन का डीए मिलेगा सीएम ने बताया कि पेंशनर्स को भी जनवरी से फरवरी 2026 की पेंशन में 58% का महंगाई भत्ता दिया जाएगा। अभी मिल रहा 55 प्रतिशत डीए मध्य  प्रदेश के 12 लाख से अधिक कर्मचारियों को अभी 55 प्रतिशत डीए मिल रहा था। वहीं, केंद्र सरकार के द्वारा 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। कर्मचारी लगातार केंद्र समान महंगाई भत्ता देने की मांग कर रहे थे लेकिन  आज मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद कर्मचारियों में खुशी की लहर है। जाहिर है कर्मचारियों की होली डबल रंगीन हो गई है। आज दिन में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत बड़वानी में कैबिनेट की, कई महत्वपूर्ण निर्णय किए। शाम को सभी कर्मचारी बंधुओं और पेंशनर्स के कल्याण के लिए निर्णय लिया है। सभी को होली की बधाई। 3% फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ने के साथ  ही मध्य प्रदेश के 12 लाख से अधिक कर्मचारियों का भत्ता अब केंद्र के बराबर 58 फीसदी हो गया है।  लिहाजा एरियर्स को लेकर सीएम मोहन यादव ने साफ कर दिया है कि कर्मचारियों के एरियर्स का भुगतान छह किस्तों में किया जाएगा। जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक के एरियर की राशि मई 2026 से प्रारंभ होकर 6 समान किस्तों में दी जाएगी।”

पं. प्रदीप मिश्रा ने कुबेरेश्वर धाम में किया होलिका दहन, शहर में जलीं 100 से ज्यादा होलिकाएं

सीहोर  उत्साह, उमंग और आस्था के रंगों से सराबोर सीहोर में होलिका दहन का पर्व भक्ति और परंपरा के संग मनाया गया। कुबेरेश्वर धाम में पंडित प्रदीप मिश्रा ने मंत्रोच्चार के बीच होलिका दहन कर समस्त श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।  सीहोर में होली की पूर्व संध्या पर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। नगर के चौक-चौराहों से लेकर मोहल्लों तक सौ से अधिक स्थानों पर रंगबिरंगी रोशनी और सजावट के बीच होलिकाएं सजाई गईं। देर शाम से लेकर रात्रि तक विधि-विधान से होलिका दहन का क्रम चलता रहा। हर तरफ “हर-हर महादेव” और “होली है” के जयघोष गूंजते रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह साफ झलक रहा था। असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व मानो पूरे शहर को एक सूत्र में बांधता नजर आया। कुबेरेश्वर धाम में भक्ति की अलौकिक छटा सीहोर में होली की पूर्व संध्या पर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। नगर के चौक-चौराहों से लेकर मोहल्लों तक सौ से अधिक स्थानों पर रंगीन रोशनी और सजावट के बीच होलिकाएं सजाई गईं। देर शाम से रात्रि तक विधि-विधान से होलिका दहन का क्रम चलता रहा। हर-हर महादेव और होली है के जयघोष से पूरा शहर गूंज उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह झलक रहा था। असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व पूरे शहर को एक सूत्र में बांधता नजर आया। शहर के प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में होलिका दहन का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक रहा। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ होलिका दहन संपन्न कराया। लकड़ियों और कंडों से सजे मंच पर भक्त प्रहलाद की प्रतिमा स्थापित कर अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। अग्नि की लपटें उठते ही श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। पंडित मिश्रा ने महादेव से प्रार्थना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद लेकर आए। होलिका दहन के अवसर पर कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, बच्चे रंग-बिरंगी पिचकारियों के साथ और बुजुर्ग श्रद्धा से भरे चेहरों के साथ उपस्थित रहे। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। देर रात तक धाम परिसर में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा। शहर के साथ-साथ पूरे जिले में एक हजार से अधिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ। गांव-गांव में परंपरागत रूप से लकड़ियां एकत्र कर शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। लोगों ने बुराई के अंत और अच्छाई की विजय का संदेश दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह पर्व सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के प्रतीक के रूप में मनाया गया। होलिका दहन से पहले शहर के प्रमुख बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। रंग-गुलाल, पिचकारियां, मावा-मिठाइयों और अन्य सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ी। शाम तक मुख्य बाजार क्षेत्र में जाम जैसे हालात बन गए। मिठाई दुकानों पर गुजिया, मावा और नमकीन की बिक्री में तेजी रही। 

OpenAI की मुश्किलें बढ़ी, पेंटागन डील के बाद ChatGPT अकाउंट्स की हो रही बर्खास्तगी, Claude AI को मिल रही सफलता

नई दिल्ली दुनिया के सबसे लोकप्रिय एआई चैटबॉट ChatGPT के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. हाल ही में OpenAI द्वारा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के साथ हाथ मिलाने की खबर ने आम यूजर्स को नाराज कर दिया है. लोग इस कदर गुस्से में हैं कि सोशल मीडिया पर डिलीट चैटजीपीटी (#DeleteChatGPT) ट्रेंड करने लगा है. आलम यह है कि लोग न सिर्फ अपने अकाउंट डिलीट कर रहे हैं, बल्कि ऐप स्टोर पर इसे वन-स्टार की रेटिंग भी दे रहे हैं |  क्या है पूरा विवाद? यह विवाद तब शुरू हुआ, जब OpenAI कंपनी ने अपने नियमों में बदलाव करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के साथ हाथ मिला लिया. इससे पहले ChatGPT सैन्य और युद्ध संबंधी कार्यों के लिए इस्तेमाल न होने की बात कह रहा था. अब पेंटागन के साथ समझौते का मतलब है कि OpenAI की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अमेरिकी सेना अपनी रणनीतियों और साइबर सिक्योरिटी के लिए करेगी. यूजर्स का मानना है कि जो एआई ‘मानवता की भलाई’ के लिए बनाया गया था, अब उसका इस्तेमाल युद्ध और सैन्य उद्देश्यों के लिए होना इस सिद्धांत के खिलाफ है. इसी डर और नाराजगी के कारण पिछले कुछ दिनों में ChatGPT को डिलीट करने वालों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है |  क्या है पूरा मामला? Sam Altman ने अपनी पोस्ट में बताया कि OpenAI ने Department of Defense के साथ अपने एग्रीमेंट में कुछ अहम बदलाव किए हैं|   उन्होंने बताया की ऐसा इसलिए क्योंकि यह साफ हो सके कि कंपनी के AI सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा|  उन्होंने साफ लिखा कि कानून के दायरे में रहते हुए AI का इस्तेमाल किया जाएगा और इसे जानबूझकर डोमेस्टिक सर्विलांस के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा|  Altman ने यह भी कहा कि सरकार की तरफ़ से अगर कोई असंवैधानिक आदेश आता है तो वे उसका पालन नहीं करेंगे|  उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सबसे ऊपर है और सरकार को फैसले लेने चाहिए, न कि कोई निजी कंपनी दुनिया का भविष्य तय करे. लेकिन विवाद यहीं से शुरू हुआ|  गुस्सा क्यों बढ़ा? TechCrunch की रिपोर्ट बताती है कि जैसे ही यह खबर फैली कि OpenAI अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ काम कर रही है, बड़ी संख्या में लोगों ने ChatGPT ऐप हटाना शुरू कर दिया|   सिर्फ एक दिन में अनइंस्टॉल में 295 प्रतिशत की उछाल दर्ज किया गया . सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि क्या AI अब युद्ध मशीन का हिस्सा बनने जा रहा है|  कुछ यूजर्स का कहना है कि AI कंपनियों को सेना से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर AI इतना शक्तिशाली है तो उसे सरकार के साथ जिम्मेदारी से काम करना चाहिए, ताकि गलत हाथों में न जाए|  Anthropic का नाम क्यों आया बीच में? इस पूरे विवाद में एक और AI कंपनी Anthropic का जिक्र हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Anthropic ने रक्षा विभाग के साथ कुछ शर्तों पर असहमति जताई थी और साफ रुख अपनाया था कि उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मास सर्विलांस या ऑटोनोमस हथियारों में नहीं होना चाहिए|  इसके बाद OpenAI ने अपनी डील आगे बढ़ाई. इससे यह बहस और तेज हो गई कि आखिर AI कंपनियां किस दिशा में जा रही हैं. क्या वे सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत कर रही हैं या एक खतरनाक रास्ते की ओर बढ़ रही हैं? Altman ने क्या माना? Sam Altman ने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया कि डील को लेकर कम्युनिकेशन बेहतर हो सकता था. उन्होंने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है और इसे जल्दी में सार्वजनिक करना शायद सही तरीका नहीं था|  उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी अभी कई मामलों में पूरी तरह तैयार नहीं है और सुरक्षा को लेकर बहुत सावधानी जरूरी है|  उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में OpenAI सरकार के साथ मिलकर तकनीकी सुरक्षा उपायों और सेफगार्ड पर काम करेगा ताकि AI का गलत इस्तेमाल न हो|  यह सब अभी क्यों अहम है? दुनिया इस वक्त युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रही है. साइबर हमले, ड्रोन टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिसिस और इंटेलिजेंस में AI का रोल तेजी से बढ़ रहा है|  ऐसे समय में अगर कोई बड़ी AI कंपनी सीधे रक्षा विभाग के साथ काम करती है तो यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की खबर नहीं रहती, यह राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता का मुद्दा बन जाती है|  एक तरफ सरकारें कहती हैं कि AI से देश की सुरक्षा मजबूत होगी. दूसरी तरफ नागरिक अधिकार समूह चेतावनी दे रहे हैं कि निगरानी और डेटा कंट्रोल का दायरा खतरनाक रूप ले सकता है|  असली सवाल क्या है? इस पूरे विवाद का केंद्र एक ही है. AI पर कंट्रोल किसका होगा? सरकार का, निजी कंपनी का या जनता की लोकतांत्रिक निगरानी का? Sam Altman का कहना है कि लोकतंत्र को नियंत्रण में रहना चाहिए और AI को लोगों को ताकत देनी चाहिए, उनसे छीननी नहीं चाहिए. लेकिन जनता का एक हिस्सा आश्वस्त नहीं है. अनइनस्टॉल के आंकड़े यही दिखा रहे हैं|  आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है, क्योंकि AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं रहा. यह सुरक्षा, युद्ध, साइबर ऑपरेशन और रणनीतिक फैसलों का हिस्सा बन रहा है. ऐसे में हर डील, हर बयान और हर फैसला वैश्विक बहस का विषय बनेगा. और यही वजह है कि Pentagon और OpenAI की यह डील सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि AI के भविष्य की दिशा तय करने वाली कहानी बन चुकी है|  Sam Altman ने अपने ट्वीट में क्या-क्या साफ किया? Sam Altman ने अपने लंबे पोस्ट में सबसे पहले यह कहा कि OpenAI और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच जो एग्रीमेंट हुआ है, उसमें खास भाषा जोड़ी गई है ताकि कंपनी के सिद्धांत बिल्कुल साफ रहें|  उन्होंने लिखा कि AI सिस्टम का इस्तेमाल जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा. उन्होंने अमेरिकी संविधान, फोर्थ अमेंडमेंट और FISA जैसे कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि सब कुछ कानूनी दायरे में ही होगा|  प्राइवेसी एडवोकेट्स इसे दिखावा मान रहे हैं  Altman ने यह भी साफ किया कि Department of Defense ने यह समझा है कि यह लिमिटेशन … Read more

उड़ा अबीर-गुलाल महाकाल की नगरी में, पंडे-पुजारियों ने शिव-पार्वती के संग मनाया उत्सव

उज्जैन  धार्मिक नगरी उज्जैन में विराजमान बाबा महाकाल के दरबार में हर त्योहार विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. होलिका दहन से पहले ही शहर रंगों और भक्ति के रंग में सराबोर हो गया. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सान्निध्य में शयन आरती परिवार पिछले 26 वर्ष से अनोखी होली की परंपरा निभा रहा है, जिसे देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज़ से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भगवान महाकाल की नगरी में इस बार होली का पर्व बेहद खास अंदाज में मनाया गया. शिप्रा नदी के किनारे नृसिंह घाट स्थित कुमार धर्मशाला में भक्त भक्ति में लीन होकर झूमते-गाते नजर आए. पूर्णिमा तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर, माता हरसिद्धि मंदिर और महाकाल वन में विशेष होली उत्सव का आयोजन किया गया। शिव-पार्वती की प्रतीकात्मक उपस्थिति इस भव्य आयोजन का दृश्य उस समय और भी खास हो गया, जब शिव और माता पार्वती प्रतीकात्मक रूप में मंच पर प्रकट हुईं. ऐसा लग रहा था मानो स्वयं भोलेनाथ अपनी अर्धांगिनी के साथ भक्तों के बीच पधार गए हों. जैसे ही शिव-पार्वती ने नृत्य आरंभ किया, वातावरण भक्ति और उल्लास से भर गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और भजनों की मधुर धुन पर भक्त अपने भावों को रोक नहीं सके. हर चेहरा खिल उठा। गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर सोमवार को संध्या आरती के दौरान मंदिर का गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर नजर आया। पंडे-पुजारियों ने बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर उनके साथ होली खेली। जैसे ही पुजारी ने बाबा पर केसरिया और हर्बल गुलाल छिड़का, पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंज उठा। यहां मौजूद हर कोई शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के सामने होलिका दहन किया गया। महाकाल करते हैं सभी त्योहारों की शुरुआत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा महाकाल ही समस्त त्योहारों की शुरुआत करते हैं, इसलिए यहां सबसे पहले होलिका प्रज्वलित की जाती है। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने विशेष इंतजाम किए थे। गर्भगृह में केवल प्राकृतिक और हर्बल गुलाल के उपयोग की ही अनुमति दी गई, ताकि मंदिर की मर्यादा और गर्भगृह की सुरक्षा बनी रहे। शिवगणों के साथ भक्तों की टोलियां भगवान महाकाल के साथ होली खेलने के लिए शिवगण, भूत-पिशाच और नंदी विशेष वेशभूषा में नजर आए. पूरा दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे साक्षात शिव की सेना धरती पर उतर आई हो, ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के बीच भक्तों की टोलियां नाचते-गाते जुलूस के रूप में आयोजन स्थल तक पहुंचीं. हर ओर रंग, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम दिखाई दिया, जिसने पूरे माहौल को शिवमय कर दिया। ग्रहण के चलते केवल शकर का भोग अर्पित धुलेंडी पर्व पर चंद्र ग्रहण होने के कारण महाकाल मंदिर में भस्मारती से लेकर शाम को ग्रहण समाप्त होने तक पट बंद नहीं किए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, सुबह भगवान को नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद ही भगवान को भोग अर्पित किया जाएगा। शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि शाम 6:32 से 6:46 बजे तक रहने वाले 14 मिनट के इस ग्रहण का वेध काल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेध काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा। ऐसे होगा महाकाल का पूजन     3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। उसका वेध काल सुबह सूर्योदय से शुरू हो जाएगा।     वेध काल के चलते सुबह की दद्योदक एवं भोग आरती में केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा।     ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान एवं पूजन किया जाएगा। इसके बाद भोग अर्पित कर संध्या आरती होगी। कल से ठंडे जल से होगा स्नान महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में परिवर्तन होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार समय तय किया जाता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो रही है, जिससे भगवान महाकाल की दिनचर्या में भी परिवर्तन होगा। इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह क्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली 5 आरतियों में से 3 के समय में परिवर्तन किया जाएगा। इसलिए ग्रहण का असर नहीं महाकाल मंदिर पर ग्रहण का प्रभाव क्यों नहीं होता, इस पर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि भगवान महाकाल कालों के काल कहलाते हैं। दक्षिण दिशा काल की मानी जाती है और महाकाल का मुख दक्षिण की ओर है, इसलिए वे काल पर नियंत्रण रखते हैं। इस कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या ग्रहण महाकाल को प्रभावित नहीं कर सकता। ग्रहण के दिन मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य दिनों की तरह रहेंगी, लेकिन ग्रहण के चलते न पुजारी और न ही श्रद्धालु भगवान को स्पर्श करेंगे। इस दौरान गर्भगृह में पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद पुजारी स्नान कर मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे, फिर भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा। शाम को भोग अर्पित किया जाएगा। भजन-कीर्तन और अबीर-गुलाल इस दौरान महिला भक्तों ने शिव-पार्वती के साथ बैठकर भजन गाए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया. यह आयोजन महाकाल मंदिर शयन आरती भक्ति मंडल द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसमें मंदिर के पुजारी, भक्त और आम श्रद्धालु शामिल होते हैं. आयोजन के दौरान कुछ भक्त चौसर खेलते नजर आए, तो वहीं दूसरी ओर भांग भी तैयार की जा रही थी. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है  

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