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CM साय ने आपसी प्रेम और सद्भाव का दिया सन्देश, रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों के साथ खेली होली

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह “रंगोत्सव” और “महामूर्ख सम्मेलन 2026” में शामिल हुए. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को सुदृढ़ करने का पावन अवसर भी है. यह पर्व हमें छोटी-छोटी अनबन और गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से संबंधों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है. बिलासपुर सहित जिलेभर में सोमवार देर रात शुभ मुहूर्त पर पारंपरिक विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया. मोहल्लों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की. पंडितों के अनुसार भद्राकाल की वजह से देर रात का मुहूर्त अत्यंत शुभ माना गया, इसलिए बड़ी संख्या में लोगों ने इसी समय होलिका दहन किया. होलिका दहन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया. प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि त्योहार शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके. बुधवार को मनाई जाएगी होली चंद्र ग्रहण के कारण इस वर्ष रंगों की होली बुधवार को मनाई जाएगी. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ग्रहण काल में रंग खेलने की परंपरा नहीं है, इसलिए धर्मशास्त्रों के अनुसार ग्रहण समाप्ति और शुद्धि के बाद ही होली खेलना शुभ माना जाता है. ग्रहण के चलते मंगलवार को मंदिरों के कपाट भी निर्धारित समय तक बंद रहेंगे. ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान और पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. होली पर्व को लेकर लोगों में उत्साह बुधवार को रंगों का पर्व धूमधाम से मनाए जाने की तैयारी है. बाजारों में रंग-गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों की खरीदारी तेज रही. लोगों में होली को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है. प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि होली आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाएं तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें.

पूरी दुनिया में उपद्रव, पर पीएम मोदी के रूप में यशस्वी नेतृत्व करा रहा नए भारत का दर्शन: सीएम योगी

सबको सुरक्षा का अहसास ही रामराज्य की अवधारणा: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा, यूपी में न तनाव, न अराजकता और न ही गुंडागर्दी पांडेयहाता में होलिकादहन उत्सव समिति की तरफ से आयोजित भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी दुनिया में उपद्रव, पर पीएम मोदी के रूप में यशस्वी नेतृत्व करा रहा नए भारत का दर्शन: सीएम योगी भक्त प्रह्लाद की आरती उतारी और फूलों की होली खेली मुख्यमंत्री ने गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों को होली की मंगलमय शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में आज कोई तनाव नहीं है। कोई भय नहीं, कोई अराजकता नहीं और न ही कोई गुंडागर्दी। सबको सुरक्षा का एहसास है और सबको विश्वास है। सबके मन में एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव है। यही अहसास और विश्वास, रामराज्य की अवधारणा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यही कहते हैं कि जब ऐसी स्थिति रहेगी तो भारत को विकसित बनने में कोई देर नहीं लगेगी। सीएम योगी सोमवार शाम पांडेयहाता में होलिकादहन उत्सव समिति की ओर से आयोजित भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। होलिकादहन के दिन शोभायात्रा का शुभारंभ करने से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में उपद्रव, अराजकता और अव्यवस्था है। पर, हम भारतवासी गर्व कर सकते हैं कि पीएम मोदी के रूप में यशस्वी नेतृत्व देश को नई बुलंदी देते हुए नए भारत का दर्शन करा रहा है। नया भारत हर व्यक्ति, हर तबके को अवसर देकर उत्सव का वातावरण देता है।  पहले यूपी में समाज को बांटती थीं सरकारें सीएम योगी ने कहा कि हमारे यहां पर्व, त्योहारों की लंबी श्रृंखला है। पर, वर्ष 2014 के पहले लोग बेहतर तरीके से उत्सव नहीं मना पाते थे। यूपी में तो पर्व, त्योहार के पहले कर्फ्यू लग जाता था। समाज में भय और तनाव रहता था। तब की सरकारें समाज को बांटती थीं और इसका परिणाम व्यापारी और नागरिक चुकाते थे। तब गुंडागर्दी, अराजकता चरम पर थी। न बेटी सुरक्षित थी और न ही व्यापारी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का उत्तर प्रदेश सुरक्षा और सुविधा देकर उत्सव प्रदेश बन चुका है। अब यूपी में न कर्फ्यू है और न दंगा है,  यूपी में अब सब चंगा है। सब ओर उत्सव का माहौल है। पिछले पंद्रह दिनों से मथुरा-वृंदावन में होली का कार्यक्रम चल रहा है। सबकुछ स्वतः स्फूर्त देखकर विदेशियों की आंखे फटी रह जाती हैं। सीएम योगी ने कहा कि जो लोग हम पर आरोप लगाते थे कि हम बंटे हुए हैं, वे बताएं कहां बंटे दिख रहे हैं। इस उत्सव में इतनी बड़ी संख्या में लोग आए हैं। किसी की जाति का पता नहीं है, लेकिन सभी लोग होली का आनंद ले रहे हैं।  उपद्रव से उबरकर बनते हैं उत्सव की यात्रा का हिस्सा मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अव्यवस्था से व्यवस्था, अराजकता से अनुशासन, अधर्म से धर्म और असत्य से सत्य की यात्रा होती है, तभी हम उपद्रव से उबरकर उत्सव की यात्रा का हिस्सा बनते हैं। यही उत्सव आज गोरखपुर के विरासत गलियारे में देखने को मिल रहा है। पहले पांडेयहाता आने को संकरी गली थी। वाहन मुश्किल से आ पाता था। व्यापार अस्त व्यस्त था। ग्राहक नहीं आ पाते थे। अराजकता का साम्राज्य था। विरासत गलियारा के प्रभावित व्यापारियों के लिए बनेगा कॉम्प्लेक्स सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर का विरासत गलियारा प्रदेश का सबसे खूबसूरत गलियारा होगा। गलियारा बनने से प्रभावित व्यापारियों को घण्टाघर के बंधु सिंह पार्क में कुछ दुकानें दी जा रही हैं। इसके बाद अन्य जो दुकानदार शेष रह जाएंगे, उनके लिए डायट के पास कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। जगह चिन्हित करने के साथ पैसा भी आवंटित कर दिया गया है। सरकार का संकल्प है कि किसी को उजड़ने नहीं देना है, बल्कि अवसर देकर आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत गलियारा पहले पूर्वी यूपी, बिहार और नेपाल के व्यापारियों और नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र होता था। सुविधा न देने, कंजेशन और जाम के कारण यहां का कारोबार उजड़ने लगा था। अब विरासत गलियारा नव विकास से एक बार फिर व्यापार का प्रमुख केंद्र हो जाएगा। सबको सुरक्षा और सुविधा दे रही डबल इंजन की सरकार सीएम योगी ने कहा कि सबके जीवन में खुशहाली लाने के लिए डबल इंजन की सरकार सुरक्षा और सुविधा दे रही है। इसी भाव से जब गोरखपुर विकास करेगा तो प्रदेश और देश का भी विकास होगा। विकास नीचे से ऊपर आता है। विरासत गलियारा के व्यापारियों के मन में पीड़ा थी, लेकिन उन्होंने इसे व्यक्त करने की बजाय शासन-प्रशासन का सहयोग किया। इसी के परिणामस्वरूप आज शानदार विरासत गलियारा बनकर तैयार हो रहा है। यहां की सड़कें पहले से तीन गुना अधिक चौड़ी होंगी। फसाड लाइट लग जाने के बाद यह प्रदेश का सबसे शानदार गलियारा होगा। हिरण्यकश्यप जैसे हैं माफिया व गुंडे, लातों के भूत बातों से नहीं मानते होलिकादहन के महात्म्य, भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उस समय भगवान विष्णु ने भगवान नृसिंह का अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था और धर्म की स्थापना की थी। हमें याद रखना होगा कि अराजकता, गुंडागर्दी, माफियागिरी भी हिरण्यकश्यप जैसे ही हैं, ये प्यार से नही मानेंगे क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं। अराजकता, गुंडागर्दी, अव्यवस्था जैसे हिरण्यकश्यप, कंस या रावण को मारने के लिए किसी न किसी नृसिंह, कृष्ण या राम को अवतरित होना ही पड़ेगा। भक्त प्रहलाद की आरती उतार सीएम योगी ने खेली फूलों की होली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के उपरांत शोभायात्रा के लिए सजाए गए रथ पर भक्त प्रहलाद के चित्र की आरती उतारी। उनके चित्र पर फूल बरसाने के बाद सीएम योगी ने अत्यंत प्रसन्नता व उमंग से उपस्थित जनसमूह पर पुष्पवर्षा करते हुए फूलों से होली खेली। शोभायात्रा को लेकर लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यक्रम में पहुंचने पर लोक कलाकारों के दल ने विभिन्न प्रस्तुतियों से मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। मंच पर सीएम योगी का स्वागत व अभिनंदन पुष्प माला व साफा पहनाकर और स्मृति-चिह्न देकर किया गया। भ्रष्टाचार का दहन कर दिया है सीएम योगी ने: रविकिशन शोभायात्रा के अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा … Read more

तेहरान के हर कोने को डिजिटल रूप में समझ रहा था इजरायल, नेतन्याहू का दावा – युद्ध लंबा नहीं चलेगा

तेहरान  ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद एक सवाल लोगों के ज़ेहन में है. सवाल ये है की अमेरिका और इजरायल ने आख़िर कैसे इतना सटीक निशाना लगाया और खामेनेई के साथ तमाम टॉप लीडरशिप पर बॉम्बिंग कर दी |  Financial Times की एक बड़ी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने कई सालों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरा सिस्टम में सेंध लगाई |  सिर्फ कैमरे ही नहीं, मोबाइल नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई. मकसद था ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्ला अली खामेनेई और उनके सुरक्षा घेरे की हर गतिविधि पर नजर रखना |  रिपोर्ट कहती है कि तेहरान के ज्यादातर ट्रैफिक कैमरे इजरायल की निगरानी में थे. फुटेज को एन्क्रिप्ट कर बाहर भेजा जाता था. इससे एक पूरा मूवमेंट पैटर्न तैयार हुआ. कौन कब निकला. कौन साथ था. कौन सा रूट लिया गया. सब रिकॉर्ड होता रहा |  ऑपरेशन कैसे चला? बताया गया है कि यह काम एक-दो महीने का नहीं था. यह लंबा ऑपरेशन था. इजरायल की खुफिया यूनिट 8200 और मोसाद ने टेक सिस्टम में गहरी घुसपैठ की |  कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की गई. मोबाइल नेटवर्क डेटा भी जोड़ा गया. इससे सिक्योरिटी स्टाफ की आवाजाही समझी गई. बॉडीगार्ड्स कहां पार्क करते हैं. किस समय गार्ड बदलते हैं. किस रास्ते से मूवमेंट होता है. धीरे-धीरे एक पैटर्न ऑफ़ लाइफ तैयार हुआ. यानी रोजमर्रा की आदतों का पूरा डिजिटल नक्शा |  कैमरे कैसे हथियार बने? आज शहरों में लगे CCTV सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नहीं हैं. अगर कोई सिस्टम में घुस जाए तो वही कैमरे निगरानी का टूल बन जाते हैं|  रिपोर्ट के मुताबिक फुटेज को सीधे बाहर के सर्वर पर भेजा गया. यानी डेटा शहर के अंदर नहीं रहा|  मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ से यह पता चलता है कि कौन सा फोन किस लोकेशन पर था. इससे सिक्योरिटी मूवमेंट और साफ दिखने लगता है|  इजरायल ने ऐसे बनाया एक्शन प्लान  रिपोर्ट में दावा है कि जब पर्याप्त जानकारी इकट्ठा हो गई, तब सटीक एक्शन प्लान बनाया गया|  लोकेशन, टाइमिंग और सिक्योरिटी गैप को समझकर आगे की रणनीति तय की गई|  हालांकि आधिकारिक स्तर पर सभी दावों की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन यह साफ है कि डिजिटल निगरानी इस पूरे मामले में अहम रही|  डिजिटल युद्ध: साइबर वॉर      विशेषज्ञ कहते हैं कि अब युद्ध सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं लड़ा जाता|      डिजिटल सिस्टम नया मोर्चा है. कैमरे. मोबाइल नेटवर्क. इंटरनेट. सब संभावित टारगेट हैं|      जो देश साइबर क्षमता में मजबूत हैं, वे बिना गोली चलाए भी बड़ी बढ़त बना सकते हैं|  क्या सेफ हैं कैमरा? मिडिल ईस्ट में तनाव पहले से बढ़ा हुआ है. इजरायल और ईरान के बीच टकराव खुला रहस्य है. ऐसे माहौल में अगर शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर ही निगरानी टूल बन जाए, तो यह नई तरह की जंग है|  यह मामला दिखाता है कि अब साइबर वॉरफेयर असली दुनिया के फैसलों को प्रभावित कर रही है|  इस रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या शहरों के कैमरे सुरक्षित हैं? क्या मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित हैं? और क्या आने वाले समय में ऐसे ऑपरेशन आम हो जाएंगे? ये युद्ध कई साल तक नहीं चलेगा… नेतन्याहू  इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ जल्द और निर्णायक सैन्य कार्रवाई का ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि यह सैन्य संघर्ष अंतहीन नहीं होगा और इसे वर्षों तक खींचने की योजना नहीं है |  इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार दोपहर 2 बजे वित्त और ऊर्जा सचिवों के साथ व्हाइट हाउस में बैठक कर रहे हैं. अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए परिस्थितियां बना रहे हैं |  इजरायल का मानना है कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य कदम सऊदी अरब के साथ संभावित शांति के द्वार खोल सकते हैं |  नेतन्याहू का युद्ध और ईरान पर रुख नेतन्याहू ने जोर देकर कहा है कि इजरायल ईरान के साथ लंबे युद्ध की स्थिति में नहीं जाना चाहता है. उनका मानना है कि ईरान के खिलाफ जो कार्रवाई की जा रही है, वह त्वरित और निर्णायक होगी. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की अंतिम जिम्मेदारी वहां की जनता की है. अमेरिका और इजरायल मिलकर ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं, जो ईरानी लोगों को अपने शासन को बदलने में सक्षम बनाएंगी. इजरायल के मुताबिक, यह सैन्य कार्रवाई कुछ वक्त तक जारी रह सकती है लेकिन यह लंबी अवधि की प्रक्रिया नहीं होगी | सऊदी-इजरायल शांति और ट्रंप की बैठक नेतन्याहू ने यह भी इशारा किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सऊदी अरब और इजरायल के बीच शांति स्थापना में मदद कर सकती है |  इस बड़े घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस से सूचना मिली है कि राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को दोपहर 2 बजे वित्त सचिव और ऊर्जा सचिव के साथ बैठक करेंगे. इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर ईरान के खिलाफ रणनीतिक आर्थिक और ऊर्जा संबंधी फैसलों के संदर्भ में. प्रशासन इस स्थिति को लेकर लगातार सक्रिय है और कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर समन्वय बना रहा है | 

मुख्यमंत्री निवास में हुआ होलिका का दहन, गौ-काष्ठ का किया गया उपयोग

मुख्यमंत्री निवास पर हुआ भव्य होलिका दहन, गौ-काष्ठ का हुआ उपयोग होलिका दहन में मुख्यमंत्री निवास पर गौ-काष्ठ का विशेष उपयोग मुख्यमंत्री निवास में हुआ होलिका का दहन, गौ-काष्ठ का किया गया उपयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक पूजा-अर्चना कर किया होलिका दहन प्रदेशवासियों को होली की दी मंगलकामनाएं भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका की विधि-विधान से सपत्नीक पूजा-अर्चना कर होलिका का दहन किया। होलिका में गौ-काष्ठ का उपयोग किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की धर्मपत्नी मती सीमा यादव, अन्य परिजन एवं म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पदस्थ सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को होली की बधाई देकर प्रसादी के रूप में गुझिया वितरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होलिका दहन कर प्रदेशवासियों को रंग पर्व की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली हम सबको रंगों से सराबोर कर देने वाला त्यौहार है। होली हमें एकजुट रहने की सीख देती है। हम सभी को अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर होली से रंगपंचमी तक प्रेमपूर्वक यह त्यौहार मनाना चाहिए।  

तेल में आग और बाजार में भागमभाग: क्या निवेशकों को घबराना चाहिए? इतिहास का नजरिया क्या कहता है?

नई दिल्ली  क्या पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार थाम सकता है? मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरों के बीच वैश्विक बाजारों में घबराहट साफ दिख रही है. 2 मार्च 2026 को निफ्टी 50 और सेंसेक्स करीब 1.8% तक फिसल गए, सरकारी बॉन्ड यील्ड में हल्की तेजी आई, ब्रेंट क्रूड लगभग 6% उछला और सोने की कीमतें 3% बढ़ीं. सवाल यह है कि क्या यह उथल-पुथल भारत की लंबी अवधि की विकास यात्रा को प्रभावित करेगी, या यह केवल एक अस्थायी झटका है? हालिया विश्लेषण में एक्सिस एसेट मैनेजमेंट (Axis Asset Management) ने साफ किया है कि भले ही अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान टकराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई हो, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे संघर्ष भारतीय शेयर बाजारों को लंबे समय तक पटरी से नहीं उतार पाए हैं. कच्चा तेल: भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम इस एनालिसिस के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है. यदि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को बाधित करता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा होगा. दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और 30% एलएनजी का व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, और भारत की करीब आधी ऊर्जा आपूर्ति भी इसी मार्ग पर निर्भर है. तेल की कीमतों में तेज उछाल से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, महंगाई दबाव में आ सकती है और विमानन, पेंट, सीमेंट तथा केमिकल जैसे सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है. हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि जब तक तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची नहीं टिकतीं, तब तक शेयर बाजार स्थायी गिरावट का शिकार नहीं होते. रूस–यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया था, लेकिन शुरुआती गिरावट के बाद बाजार संभल गए और साल अंत में सकारात्मक रिटर्न दिया. रुपये और विदेशी निवेश का असर भू-राजनीतिक तनाव के समय अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव आता है. भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहता. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से रुपये में अस्थायी कमजोरी देखी जा सकती है. फिर भी भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति, नियंत्रित चालू खाता घाटा और संतुलित राजकोषीय स्थिति सुरक्षा कवच का काम करती है. 2013 के टेपर टैंट्रम, 2020 की महामारी और 2022 के युद्ध जैसे दौर में भी रुपया दबाव में आया, लेकिन शेयर बाजारों में लंबी अवधि की गिरावट नहीं आई. आरबीआई की भूमिका और बाजार की मानसिकता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ऐसे समय में स्थिरता का अहम स्तंभ बनता है. केंद्रीय बैंक ने अतीत में अस्थायी महंगाई झटकों को नजरअंदाज करते हुए मूल महंगाई और विकास की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया है. तरलता प्रबंधन के जरिए बाजार में भरोसा बनाए रखा गया है, ताकि घबराहट स्थायी संकट में न बदले. पिछले 15 वर्षों का इतिहास देखें तो हर बड़े संघर्ष के दौरान शुरुआती गिरावट आई, लेकिन बाजारों ने जल्द ही संतुलन पा लिया.     2014 के क्रीमिया संकट     2016 की सर्जिकल स्ट्राइक     2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक     2022 के रूस–यूक्रेन युद्ध     2023 के इजराइल–हमास संघर्ष इन सबके दौरान यही पैटर्न दिखा कि बाजार जल्द ही पटरी पर लौट आया. यहां तक कि 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के समय भी शुरुआती घबराहट के बाद स्थिरता लौट आई. असल में बाजार भावनाओं से ज्यादा इस बात का आकलन करते हैं कि आर्थिक असर कितना लंबा और गहरा होगा. जब यह स्पष्ट हो जाता है कि सप्लाई चेन पर असर सीमित है और घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, तो जोखिम प्रीमियम घटने लगता है और निवेशक दोबारा सक्रिय हो जाते हैं. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संदेश इतिहास बताता है कि संघर्षों के समय घबराकर बाजार से बाहर निकलना अक्सर नुकसानदेह साबित हुआ है. जिन्होंने गिरावट के दौरान निवेश छोड़ा, वे बाद की तेजी से चूक गए. इसलिए अनुशासन, विविधीकरण और लंबी अवधि की सोच ही ऐसे दौर में सबसे कारगर रणनीति मानी गई है. ईरान वाला तनाव गंभीर जरूर है, लेकिन भारतीय बाजारों के लिए यह कोई अनजाना अनुभव नहीं. शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश की विकास की कहानी घरेलू खपत, पूंजीगत व्यय, डिजिटलीकरण और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार पर टिकी है. ऐसे में हर भू-राजनीतिक झटका स्थायी मोड़ नहीं, बल्कि अस्थायी विराम साबित हुआ है.  

MP में मत्स्यपालकों के लिए नई नीति, सरकार का बड़ा कदम, किसान कल्याण वर्ष में हर अंचल में कैबिनेट बैठक होगी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के हर अंचल में कैबिनेट की बैठक आयोजित की जाएगी। जनजातीय अंचल नागलवाड़ी (निमाड़) में आज सोमवार को कृषि कैबिनेट आयोजित की जा रही है। बीते वर्ष भी निमाड़ क्षेत्र के महेश्वर में अहिल्या माता की 300वीं जयंती पर कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी। मत्स्य नीति की सौगात देगी प्रदेश सरकार-मोहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में कृषि सहित बागवानी, सहकारिता, मत्स्य उत्पादन आदि से संबंधित 17 विभागों को जोड़कर हम कार्य कर रहे हैं। नर्मदा के किनारे मत्स्य पालन की बड़ी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मत्स्यपालकों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का समावेश करते हुए मत्स्य नीति की सौगात हम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि-पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों के साथ मत्स्य उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता से बढ़कर और बेहतर स्थिति पाने का हमारा प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे-मातरम के सामूहिक गान के बाद मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति अंचल बड़वानी-निमाड़ नर्मदा जलप्रदाय योजना से पहले सूखा और आमजन के पलायन वाला क्षेत्र हुआ करता था। अब यहां हालात बदल चुके हैं। यहां सिंचाई का रकबा बढ़ा है और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं। नर्मदा वैली से खेती संबंधी बेहतरीन प्रयोग एवं कार्य इस अंचल में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से सामान्य तापमान में भी 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा जी के किनारे हमारी आध्यात्मिक संस्कृति फली-फूली है। यहां भगवान भीलट देव का अद्भुत स्थान है, उनका चरित्र और इतिहास प्रेरणादायी है। इस अंचल में ऐसे महापुरुषों की एक पूरी शृंखला है। यहां संत सिंगा जी महाराज का स्थान है, खंडवा में दादाजी धूनीवाले का स्थान है, समाजसेवी संत एक रोटी वाले बाबा की कृपा भी यहां प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक छोटे से परिवार में जन्म लेने वाले भीलट देव जी ने साधना के बलबूते पर भक्तिभाव के साथ,  सही अर्थ में आध्यात्म के लिए सभी को प्रेरित किया। वे सनातन धर्म के सबसे बड़े देवता और जीवित भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय पर्व भगोरिया को राजकीय पर्व के रूप में प्रदेश में मनाया जा रहा है। यहां होली से 7 दिन पहले से ही यह पर्व मनाया जाता है, जनजातीय भाई-बंधु टोलियों में परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य-गायन से होली की अनूठी प्रस्तुति देते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए भगोरिया हाट का आयोजन भी किया जा रहा है।

महाकाल के दरबार में चंद्र ग्रहण का असर नहीं, बाबा महाकाल करेंगे होली खेल, मंदिर के पट रहेंगे खुले

उज्जैन 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. चंद्र ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों और शिवालयों के पट बंद रहते हैं. यहां तक की घरों में भी भगवान के मंदिर के पर्दे लगा दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं होती है. फिर ग्रहण खत्म होने पर शुद्धिकरण के बाद ही पट खुलते हैं. ये बातें तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान भगवान महाकालेश्वर मंदिर के पट सामान्य दिनों की तरह खुले रहते हैं. भक्त बाबा के दर्शन कर सकते हैं. जानिए बाबा महाकाल मंदिर में क्यों ग्रहण पर भी पट खुले रहते हैं. महाकाल के आगे ग्रह, नक्षत्र का कोई दुष्प्रभाव नहीं अवंतिका नगरी उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर में हर दिन की तरह 3 मार्च यानि चंद्र ग्रहण पर भी बाबा के दर्शन का क्रम सुबह भस्म आरती से देर रात शयन आरती तक चलता रहेगा. इसके पीछे की वजह को लेकर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने  चर्चा में बताया कि “बाबा महाकालेश्वर का मंदिर दक्षिण मुखी है. भगवान का मुख दक्षिण की और होने से वे कालों के काल महाकाल कहलाते हैं. दक्षिण दिशा काल का है, काल पर जिसका नियंत्रण हो वह महाकाल है. बाबा महाकाल के कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या कोई बाधा किसी को प्रभावित नहीं कर पाता. इसलिए ग्रहण के दौरान भी कोई दुष्प्रभाव मंदिर क्षेत्र में नहीं पड़ेगा. लिहाजा चंद्रग्रहण के दौरान भी भगवान का पूजा-अर्चन और सभी आरती समय पर जारी रहेगी. इसके साथ ही भक्त बाबा के दर्शन हर दिन की तरह कर सकेंगे. मंदिर सुबह भस्म आरती से लेकर देर रात शयन आरती तक खुला रहेगा. मंदिर में 2 मार्च यानि सोमवार को होलिका दहन हुआ . इसके बाद 3 मार्च को ही होली पर्व मनाया जाएगा. वेद परंपरा का अपना महत्व है. उसका निर्वहन करने के लिए कुछ नियमों का पालन जरूर किया जाएगा.” 14 मिनट का ग्रहण जानिए क्या रहेगा पूजन का क्रम मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का दिन है. शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि “सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान पूजन के बाद भगवान को भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी. ग्रहण 3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 तक यानि 14 मिनट का रहने वाला है. ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण महेश पुजारी ने कहा कि ” ग्रहण के दिन मंदिर की सारी व्यवस्थाएं हर दिन की तरह तो रहेगी, लेकिन ग्रहण के चलते कोई भी यानि पुजारी हो या श्रद्धालु भगवान को स्पर्श नहीं करेगा. इस दौरान गर्भ गृह में पुजारी मंत्रोच्चार करते हैं. जब ग्रहण खत्म हो जाता है, तो पुजारी स्नान करने के बाद भगवान का जलाभिषेक करेंगे, मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का जलाभिषेक होगा. मंदिर शुद्धिकरण होगा. दूसरे मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर का पट बंद नहीं होंगे. दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सारे दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण है. जैसे सूर्य की ऊर्जा है, उससे कई गुना अधिक बाबा की ऊर्जा है.” महाकाल मंदिर समिति ने क्या कहा? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि “पुजारी-पुरोहितों से चर्चा के बाद तय हुआ है कि होली पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. ग्रहण में भी भगवान के दर्शन पूजन का क्रम हर रोज की तरह रहेगा. दर्शन करने आने वाले सभी दर्शनार्थियों को कोई परेशानी नहीं आए, इसका ध्यान रखा जाएगा. ग्रहण के कारण जो सामान्य जो बदलाव हुए हैं, जैसे मंदिर शुद्धिकरण हो या ग्रहण के दौरान गर्भ गृह के अंदर मंत्रोच्चार तमाम व्यवस्थाएं मंदिर समिति की ओर से की गई है.

Chandra Grahan 2026: आज लगेगा पहला चंद्र ग्रहण, सूतक काल के लिए जानें सही समय

इंदौर  Chandra Grahan 2026 Rashifal: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य होगा और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा. मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है और फिर नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है. भारत में कब लगेगा चंद्र ग्रहण? साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर को 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. बता दें, कि सूतक काल ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ऐसे में 3 मार्च को सूतक काल 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा. इस समय मूर्ति स्पर्श और भोजन बनाने या खाने की मनाही होती है. दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक, कितने बजे दिखेगा ब्लड मून? 1. दिल्ली- शाम 06:26 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 20 मिनट) 2. प्रयागराज– शाम 06:08 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 38 मिनट) 3. कानपुर- शाम 06:14 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 32 मिनट) 4. वाराणसी– शाम 06:04 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 43 मिनट) 5. पटना- शाम 05:55 से लेकर शाम 06:46 तक ( कुल 51 मिनट) 6. रांची– शाम 05:55 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 51 मिनट) 7. कोलकाता- शाम 05:43 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 1 घंटा 03 मिनट) 8. भुवनेश्वर- शाम 05:54 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 52 मिनट) 9. गुवाहाटी– शाम 05:27 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 1 घंटा 19 मिनट) 10. चेन्नई-  शाम 06:21 से लेकर शाम 06:46 तक ( कुल 26 मिनट) 11. हैदराबाद– शाम 06:26 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 20 मिनट) 12. बेंगलुरु– शाम 06:32 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 14 मिनट) ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. इसका प्रभाव खासतौर पर कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है.  चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing) इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा.  कहां कहां दिखाई देगा ये चंद्र ग्रहण?  यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा. किन राशियों के लिए शुभ संकेत? ज्योतिषीय गणना के आधार पर यह ग्रहण कुछ राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए करियर के क्षेत्र में अच्छी खबर मिल सकती है। लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति या जिम्मेदारी बढ़ने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में आपके प्रयासों को पहचान मिल सकती है। मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों को आर्थिक मोर्चे पर राहत मिल सकती है। अचानक धन लाभ या रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। बैंक बैलेंस मजबूत हो सकता है। तुला राशि- तुला राशि वालों के लिए यह समय पुराने प्रयासों का फल देने वाला हो सकता है। अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं और पारिवारिक वातावरण में खुशी का माहौल रहेगा। मकर राशि- मकर राशि के लिए यह अवधि अपेक्षाकृत स्थिर और संतुलित रहेगी। कामकाज में शांति बनी रहेगी और मानसिक दबाव कम हो सकता है। किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी? जहां कुछ राशियों को लाभ के संकेत मिल रहे हैं, वहीं कुछ राशि वालों को संयम और सतर्कता रखने की सलाह दी जा रही है। मेष राशि- मेष राशि वालों को मान-सम्मान से जुड़े मामलों में सावधानी रखनी होगी। किसी विवाद या बहस में पड़ने से बचें। कर्क और कन्या राशि- इन दोनों राशियों के लिए आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी है। बिना सोचे-समझे निवेश न करें। धन हानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सिंह राशि- ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। थकान, बदन दर्द या ऊर्जा में कमी महसूस हो सकती है। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों को मानसिक तनाव से बचने की सलाह दी जाती है। काम का दबाव या पारिवारिक जिम्मेदारियां मन पर असर डाल सकती हैं। धनु राशि– धनु राशि के जातकों को बच्चों की पढ़ाई या सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें। कुंभ और मीन राशि- इन राशियों के लिए वैवाहिक जीवन में थोड़ी अनबन के संकेत हैं। संवाद बनाए रखना और जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना बेहतर रहेगा। ग्रहण काल में क्या करें?- ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान और प्रार्थना करना शुभ माना जाता है। सूतक काल के नियमों का पालन करना परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण समझा जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान-पुण्य करने की भी सलाह दी जाती है। चंद्र ग्रहण का प्रभाव ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का असर सबसे पहले मन और भावनाओं पर पड़ेगा. इस दौरान व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, चिंता या निर्णय लेने में भ्रम महसूस हो सकता है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि चंद्रग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा. कर्क राशि  कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर ग्रहण का प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है. आर्थिक मामलों, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें. परिवार, खासकर माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और वाणी में संयम बनाए रखें. उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें और ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. सिंह राशि यह ग्रहण सिंह राशि में ही लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले 15 दिनों तक बड़े फैसले … Read more

धार भोजशाला परिसर में कब्रों पर विवाद गहराया, एएसआई सर्वे रिपोर्ट के बाद मुस्लिम पक्ष ने लिया कोर्ट जाने का निर्णय

धार  धार के भोजशाला परिसर में लंबे समय से शवों को दफनाने का विवाद चला आ रहा है। यहाँ कुछ परिवारों के सदस्यों की मौत होने पर उन्हें परिसर के भीतर ही दफनाया जाता था। हालांकि, हिंदू समाज द्वारा इसका लगातार विरोध किया गया। विवाद बढ़ता देख साल 1997 में तत्कालीन कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर भोजशाला में शव दफनाने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद वहां अंतिम संस्कार बंद हुआ, लेकिन मस्जिद के सामने वाले हिस्से में आज भी कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं।  जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन कब्रों को बनाने में उन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जो भोजशाला के हिस्सों को तोड़ने के बाद मलबे के रूप में वहां पड़े थे। एएसआई ने सर्वे के दौरान इन कब्रों के पास के इलाके की भी जांच की है। हालांकि इनके बारे में अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि शहर में अलग कब्रिस्तान होने के बावजूद कुछ लोग शवों को दफनाने के लिए भोजशाला परिसर का ही इस्तेमाल करते थे। भोजशाला के उस हिस्से में जहाँ मस्जिद बनी है, वहां के पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो आमतौर पर मस्जिद निर्माण में नहीं होतीं। कुछ शिलालेखों पर पशुओं की आकृतियां बनी हुई हैं। वहीं, परिसर के 50 से ज्यादा शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें भी लिखी मिली हैं। दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज ने एएसआई की इस सर्वे रिपोर्ट को गलत बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसके लिए धार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने वकीलों से मशविरा शुरू कर दिया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 16 मार्च तक का समय दिया है। परिसर के उस हिस्से में, जहां मस्जिद निर्मित है, पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो सामान्यतः मस्जिद निर्माण में नहीं देखी जातीं। कुछ शिलालेखों पर पशु आकृतियां उकेरी गई हैं, जबकि 50 से अधिक शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें लिखी पाई गई हैं। नींव में मिला परमारकालीन ‘शारदा सदन’ रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान ढांचे के नीचे बेसाल्ट पत्थरों की 10वीं–11वीं शताब्दी की नींव पाई गई। इन पत्थरों पर ‘शारदा सदन’ शब्द अंकित है, जो देवी सरस्वती या वाग्देवी के निवास का संकेत देता है। साथ ही सुप्रसिद्ध साहित्यिक कृति ‘पारिजात मंजरी’ के उल्लेख वाले शिलालेख भी मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह स्थान पूजा का केंद्र होने के साथ ही शिक्षा और नाट्य गतिविधियों का प्रमुख स्थल भी था। तीन चरणों में निर्माण, अंतिम चरण में मस्जिद स्वरूप वैज्ञानिक परीक्षणों से एएसआई ने निष्कर्ष निकाला है कि परिसर का निर्माण तीन चरणों में हुआ। सबसे प्राचीन परत मंदिर की है। इसके ऊपर क्षतिग्रस्त संरचना के अवशेष और फिर अंतिम चरण में मस्जिदनुमा ढांचा निर्मित किया गया। रिपोर्ट कहती है कि मस्जिद निर्माण के दौरान मंदिर के स्तंभों, शिलाखंडों और सजावटी पत्थरों का पुनः उपयोग किया गया। जिसमें कि निर्माण में समरूपता का अभाव स्पष्ट दिखता है। कई पत्थर उल्टे या आड़े-तिरछे लगाए गए, जिन पर संस्कृत शिलालेख खुदे थे। कुछ अक्षरों को घिसकर मिटाने के प्रयास भी मिले हैं। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि मूल पहचान को छिपाने की कोशिश की गई। 106 स्तंभ, 82 अर्धस्तंभ और कीर्तिमुख सर्वे में पाया गया कि पूरी संरचना 106 मुख्य स्तंभों और 82 अर्धस्तंभों पर आधारित है। अधिकांश स्तंभ चूना पत्थर के हैं, जिनका रंग हल्का लाल और धूसर है। इन पर कीर्तिमुख, नागबंध, चैत्य गवाक्ष और उल्टे पत्तों की नक्काशी उकेरी गई है। कीर्तिमुख भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशिष्ट आकृति है, जिसे सिंहमुख रूप में दर्शाया जाता है और जिसे दुष्ट शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। स्तंभों के शीर्ष पर गोलाकार अभाकस, अष्टकोणीय पट्ट और त्रिकोणीय आधार स्पष्ट रूप से मध्यकालीन मंदिर शैली को दर्शाते हैं। 150 से अधिक संस्कृत शिलालेख, 56 अरबी-फारसी अभिलेख रिपोर्ट में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख दर्ज किए गए हैं। इसके विपरीत 56 शिलालेख अरबी और फारसी में पाए गए। यह अनुपात भी मूल संरचना के मंदिर और शैक्षणिक केंद्र होने की ओर संकेत करता है। फर्श और दीवारों में लगे कई पत्थरों पर खुदे अक्षरों को जानबूझकर घिसा गया या उल्टा लगा दिया गया ताकि उन्हें पढ़ा न जा सके। एएसआई के अनुसार यह ‘आइकॉनोग्राफिक इरेजर’ का स्पष्ट उदाहरण है। मूर्तियों के साक्ष्य: गणेश से अर्धनारीश्वर तक सर्वे रिपोर्ट में 94 मूर्तियों और उनके अवशेषों का उल्लेख है। इनमें गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और चार भुजाओं वाले अन्य देवताओं की आकृतियां शामिल हैं। परिसर से पूर्व में प्राप्त अर्धनारीश्वर, कुबेर और नायिका की मूर्तियों को भी साक्ष्य के रूप में जोड़ा गया है। ये प्रतिमाएं वर्तमान में संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। खिड़की फ्रेम पर देवी-देवताओं की अपेक्षाकृत सुरक्षित मूर्तियां और एक स्तंभ पर कटी-फटी आकृतियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि मूल प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाई गई। 1455 ईस्वी का शिलालेख और ऐतिहासिक संदर्भ परिसर में स्थित मकबरे के प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख का उल्लेख रिपोर्ट के खंड चार, पृष्ठ 260 पर किया गया है। यह शिलालेख मालवा सल्तनत के शासक महमूद खिलजी के काल (हिजरी 859/1455 ईस्वी) का है। एएसआई द्वारा किए गए अनुवाद के अनुसार उसमें उल्लेख है कि एक पुराने आश्रम को ध्वस्त कर मूर्तियों को नष्ट किया गया और उसे नमाज की जगह में परिवर्तित किया गया। इस संदर्भ में उल्‍लेखित है कि रिपोर्ट इस अभिलेख को ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रत्यक्ष साक्ष्य मानती है। कारीगरों के 139 निशान और युद्ध दृश्य स्तंभों पर 139 से अधिक प्रकार के चिह्न जैसे त्रिशूल, स्वास्तिक और अन्य प्रतीक मिले हैं। इन्हें कारीगरों के सिग्नेचर या कोड के रूप में देखा गया है। दीवारों पर हाथी और सैनिकों के युद्ध दृश्य भी उकेरे गए हैं। एक स्थान पर बच्चे के हाथ का निशान भी मिला है, जो निर्माणकालीन गतिविधियों का मानवीय संकेत देता है। 98 दिन का सर्वे और 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर 22 मार्च से 27 जून 2024 तक 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया गया। 4 जुलाई 2024 को एएसआई ने 10 … Read more

मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी किया जा रहा ट्रीट नदियों की स्वच्छता में योगी सरकार ने रचा नया अध्याय, 2035 तक 100% अपशिष्ट जल उपयोग का लक्ष्य

यूपी बना 85 फीसदी सीवेज का शोधन करने में सक्षम राज्य गंगा-यमुना की पवित्रता दूषित नहीं होने देगी योगी सरकार, राज्य में प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी किया जा रहा ट्रीट नदियों की स्वच्छता में योगी सरकार ने रचा नया अध्याय, 2035 तक 100% अपशिष्ट जल उपयोग का लक्ष्य नमामि गंगे मिशन फेज-2 से यूपी के सीवरेज सिस्टम को मिल रही बड़ी मजबूती, अपशिष्ट जल से बनेगा विकास का नया मॉडल लखनऊ, उत्तर प्रदेश को स्वच्छ प्रदेश बनाने की मुहिम समय के साथ तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार अपशिष्ट जल को ‘आर्थिक संपत्ति’ में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज का शोधन किया जा रहा है। इस तरह प्रदेश अब लगभग 85 प्रतिशत गंदे पानी को उपचारित करने में सफल है। सरकार गंगा-यमुना समेत राज्य की तमाम नदियों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। नमामि गंगे मिशन से मिली सीवरेज सिस्टम को मजबूती उल्लेखनीय है कि नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण ने प्रदेश के सीवरेज सिस्टम को नई मजबूती दी है। उत्तर प्रदेश में अब तक 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 41 पूरी होकर संचालन में भी आ चुकी हैं। शेष परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है। राज्य भर में 155 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली ने नदियों के संरक्षण के प्रयासों को नई गति दी है। हर परियोजना की मॉनीटरिंग की जा रही है, जिससे न केवल गंगा-यमुना की पवित्रता सुनिश्चित हुई है, बल्कि नगरों में जल प्रबंधन की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है।  अपशिष्ट जल से विकास का नया मॉडल   योगी सरकार अब उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग की नीति तैयार कर रही है। योजना तीन चरणों में लागू होगी।  1. नगरपालिका- पार्कों की सिंचाई, सड़क सफाई, सार्वजनिक उद्यानों में इस्तेमाल।  2. उद्योग और कृषि- औद्योगिक प्रक्रियाओं व खेतों की सिंचाई के लिए। 3. घरेलू गैर-पेय उपयोग- निर्माण कार्य समेत अन्य कार्यों में पुनर्चक्रण।   सीएम योगी कर रहे स्वच्छ नदियों के सपने को साकार जहां एसटीपी चालू हैं और क्षमता मौजूद है, वहां वर्ष 2030 तक 50 फीसदी और 2035 तक 100 फीसदी अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वच्छ नदियों के सपने को साकार करने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहा है।

दिल्ली बस सेवा अपडेट: पिंक कार्ड से मुफ्त सफर, ब्लू और ऑरेंज कार्ड की पूरी जानकारी

नई दिल्ली दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने महिलाओं और ‘ट्रांसजेंडर’को मुफ्त बस सफर का लाभ देने के लिए ‘पिंक सहेली कार्ड’ योजना की शुरुआत कर दी है। अब बिना कार्ड महिलाएं मुफ्त बस सफर का लाभ नहीं ले सकती हैं। ‘पिंक सहेली’ कार्ड बनवाने के लिए राजधानी में लगभग 50 सेंटर स्थापित किए जाएंगे। पिंक कार्ड कागज आधारित गुलाबी टिकट का स्थान लेगा। अरविंद केजरीवाल की अगुआई में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में महिलाओं के लिए बस सफर को मुफ्त कर दिया था। भाजपा सरकार ने इसका लाभ जारी रखा, लेकिन पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तरीके में बदलाव किया गया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कई बार आरोप लगा चुकी हैं कि आम आदमी पार्टी के शासन में पिंक टिकट के जरिए भारी भ्रष्टाचार किया गया। दिल्ली सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, कार्ड जारी करने के लिए डीएम ऑफिस समेत करीब 50 केंद्र और दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के कुछ चयनित स्थानों को अधिकृत किया जाएगा। प्रत्येक पिंक कार्ड लाभार्थी के मोबाइल नंबर और आधार से जुड़ा होगा, जिससे आयु, लैंगिक पहचान और दिल्ली में निवास होने की पुष्टि की जा सकेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यहां आयोजित एक समारोह में ‘पिंक नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड’ और महिलाओं से जुड़ी दिल्ली सरकार की तीन अन्य कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की। डीटीसी बस के अलावा मेट्रो और नमो भारत में भी होगा सफर योजना के तहत दिल्ली की निवासी पात्र महिलाएं डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। इसके अलावा इस कार्ड का उपयोग दिल्ली मेट्रो और रिजनल रेपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) सहित अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में सशुल्क यात्रा के लिए किया जा सकेगा। तीन रंग के कार्ड इस योजना के तहत तीन प्रकार के कार्ड जारी किए जाएंगे। पात्र महिला के लिए पिंक, सामान्य यात्रियों के लिए ‘ब्लू’ और मासिक पास के लिए ‘ऑरेंज’ कार्ड होंगे। पहले चरण में ‘पिंक’ और ‘ब्लू’ कार्ड जारी किए जाएंगे, जबकि ‘ऑरेंज’ कार्ड बाद में लाया जाएगा। डीटीसी ने कार्ड जारी करने के लिए ‘हिंडन मर्केंटाइल लिमिटेड’ (मुफिनपे) और ‘एयरटेल पेमेंट्स बैंक लिमिटेड’ को अधिकृत किया है। ये कार्ड राष्ट्रीय राजधानी के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में मौजूदा स्वचालित किराया वसूली प्रणाली से एकीकृत होंगे।

शिक्षा में बड़ा बदलाव: 2026-27 से MP के हजारों स्कूलों में प्री-प्राइमरी क्लासेस शुरू, नियम तय

भोपाल राज्य सरकार सत्र 2026-27 में प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने जा रही है। नई शिक्षा नीति में पहली कक्षा में प्रवेश से पहले प्री-प्राइमरी में प्रवेश का प्रविधान किया गया है। अभी तक करीब दो हजार स्कूलों में यह व्यवस्था की गई थी। प्रवेश के लिए तीन से साढ़े चार वर्ष की आयु निर्धारित की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में तीन से छह वर्ष के बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा से पहले खेल-खेल में सीखने का माहौल देने का प्रविधान है। इसके तहत किंडरगार्टन की तर्ज पर प्री-प्राइमरी बालवाटिका कक्षाएं शुरू की जा रही हैं। सरकार ने इसे चरणबद्ध ढंग से लागू करने का निर्णय लिया था। अब राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रवेश संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नए प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु की गणना संबंधित सत्र की 31 जुलाई तथा पहली कक्षा के लिए 30 सितंबर से की जाएगी। कक्षाओं को बनाया जाएगा आकर्षक सरकारी स्कूलों में अब तक सीधे पहली कक्षा में प्रवेश दिया जाता था, जबकि निजी प्ले स्कूलों में अभिभावक बच्चों को प्री-प्राइमरी में पढ़ाते थे। इससे सरकारी स्कूल के बच्चे पिछड़ जाते थे। अब तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए आकर्षक फर्नीचर, खिलौने और रंगीन दीवारों वाली कक्षाएं तैयार की जाएंगी। जिन परिसरों में पहले से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं, वहीं इन कक्षाओं का चयन किया गया है, ताकि बच्चों को एक ही परिसर में निरंतरता मिल सके। खेल और गतिविधि आधारित पढ़ाई इन कक्षाओं में पढ़ाई का बोझ नहीं होगा। बच्चों को एनसीईआरटी द्वारा तैयार विशेष पाठ्यक्रम ‘विद्या प्रवेश’ के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। एलईडी स्मार्ट टेलीविजन लगाए जा रहे हैं, जिनके जरिए हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती तथा पूर्व-प्राथमिक गतिविधियां विजुअल टूल्स से सिखाई जाएंगी। पेंटिंग, मिट्टी के खिलौने बनाना, कविताएं और कहानी सुनाने जैसी गतिविधियों से सीखने का अवसर मिलेगा। अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्राथमिक शिक्षकों को छोटे बच्चों को खेल-खेल में आधुनिक तरीकों से पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए अतिथि शिक्षकों की भी भर्ती की जाएगी। प्रवेश की आयु सीमा नर्सरी: 3 से 4.5 वर्ष केजी-1: 4 से 5.5 वर्ष केजी-2: 5 से 6.5 वर्ष पहली कक्षा: 6 से 7.5 वर्ष अधिकारियों का क्या कहना डॉ. अरुण सिंह, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र का कहना है कि आगामी सत्र से प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इन कक्षाओं में बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा।

बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी से मजबूत होगी कृषि अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

50 एकड़ में स्थापित होगा आदर्श बीज उत्पादन केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी कृषि एवं विकास योजनाओं की सौगात राजकीय गरिमा के साथ मनाया गया भगोरिया पर्व : जुलवानिया भगोरिया हाट में उड़ा उल्लास और परंपरा का रंग भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगोरिया केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आनंद में झूमने का पर्व है। पर्व में महिला और पुरुष समान रूप से कदम से कदम मिलाकर नृत्य करते हैं और पारंपरिक वेशभूषा में लोक संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेरते हैं। ताड़ी जैसे पारंपरिक पेय का आनंद भी इस उत्सव का हिस्सा है। जनजातीय संस्कृति की अपनी विशिष्ट पहचान और महत्व है। इसी परंपरा को संरक्षित करने के लिये राज्य सरकार ने इस पर्व को राजकीय पर्व का दर्जा देकर इसकी गरिमा को और बढ़ाया गया है। यह बातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले के जुलवानिया में भगोरिया उत्सव में कही। बड़वानी के जुलवानिया में भगोरिया हाट में उस समय उल्लास और उमंग का अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय बंधुओं के भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आगमन से पूरा हाट परिसर उत्साह, रंग और पारंपरिक उल्लास से सराबोर हो गया। जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा से सजे इस पारंपरिक पर्व में मांदल की गूंजती थाप, पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित नर्तक-नर्तकियों की मनमोहक प्रस्तुतियां तथा गुलाल से रंगीन वातावरण ने भगोरिया को और भी आकर्षक बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय कलाकारों के साथ मांदल की थाप पर कदम मिलाकर उनकी कला और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निमाड़ क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक समृद्धि, उत्सवधर्मिता और जीवन के प्रति आनंदमयी दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध है। यहां प्रत्येक मौसम के अनुरूप त्यौहारों की परंपरा रही है, जिससे जीवन में उल्लास और सामूहिकता बनी रहे। पूर्वजों द्वारा स्थापित यह आनंदमयी परंपरा आज भी जीवंत है। सदियों से भगोरिया पर्व इस क्षेत्र में हर्ष, उमंग और लोक जीवन की ऊर्जा का प्रतीक बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निमाड़ का क्षेत्र, मां नर्मदा के आशीर्वाद से समृद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल प्रबंधन एवं सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से सूखे खेतों तक पानी पहुंचा है और फसलें लहलहा रही हैं। यहां विविध प्रकार की फसलें, फल और सब्जियों का उत्पादन हो रहा है। प्राकृतिक खेती को भी किसान उत्साहपूर्वक अपना रहे हैं, जिसके कारण बड़वानी जिले के फल एवं सब्जियों की मांग देश-विदेश में बनी हुई है। अब लक्ष्य है कि फसल को खेत से कारखाने तक पहुंचाया जाए और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से किसानों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगोरिया के आनंद और बड़वानी की उन्नत कृषि को सम्मान देने के उद्देश्य से कृषि कैबिनेट का आयोजन किया गया, जिसमें किसान कल्याण वर्ष की पहली कैबिनेट में 27,500 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के निर्णय लिए गए। किसानों के हित में भावांतर भुगतान योजना में सोयाबीन पर 1,500 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई। लाड़ली बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर समान अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कैबिनेट के साथ पहली बार भीलट देव के दर्शन कर मन आनंदित हुआ। निमाड़ महान संत सिंगाजी, दादा धूनिवाले जैसी विभूतियों की पावन भूमि है, जिन्होंने समरसता और सद्भाव का संदेश दिया। आपसी द्वेष और मतभेद भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ होली का त्यौहार मनाने का संदेश देते हुए अग्रिम शुभकामनाएं दी गईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वानी जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा अधिक है। इसके विस्तार के लिये कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के साथ आधुनिक सब्जी मंडी की स्थापना की जाएगी। जनजातीय बहुल क्षेत्रों के लिए पानसेमल एवं वरला माइक्रो सिंचाई उद्वहन परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से हजारों हैक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और जनजातीय किसानों को सीधा लाभ होगा। खेतिया कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिये 25 किसानों को अन्य राज्यों में प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 50 एकड़ क्षेत्र में आदर्श बीज उत्पादन केंद्र स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पलसूद बायपास एवं ओझर बायपास का निर्माण कराया जाएगा, जिससे यातायात सुगम होगा और क्षेत्रीय आवागमन को नई सुविधा मिलेगी। साथ ही एबी रोड से भंवरगढ़ स्थित खाज्या नायक स्मारक तक पहुँच मार्ग का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध हो सके। साथ ही दीवानी से जोगवाड़ा पहुँच मार्ग तक 5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी कराया जाएगा। इन सभी कार्यों से क्षेत्र के विकास, व्यापारिक गतिविधियों और आमजन की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।  

‘लाइफलाइन’ तालाब पर संकट गहराया, अतिक्रमण हटाने में सुस्ती पर सवाल

भोपाल बड़े तालाब की सीमा में बड़े और पक्के अतिक्रमण सामने आने के बाद भी नगर निगम और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। करीब 10 साल पहले हुए सर्वे में 300 से अधिक अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे, लेकिन तब केवल छोटे अतिक्रमण हटाए गए और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद कब्जों की संख्या बढ़ती चली गई। सख्त कार्रवाई नहीं हो रही अब दोबारा सीमांकन कर अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने जलस्रोतों के एफटीएल और 50 मीटर दायरे में आने वाले सभी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। 23 फरवरी को कलेक्ट्रेट में सांसद आलोक शर्मा ने 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हुए कब्जों को हटाने के लिए पुनः सीमांकन कराने को कहा था। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर 25 फरवरी से संत हिरदाराम नगर वृत्त में वीआईपी रोड राजाभोज प्रतिमा से सीमांकन शुरू हुआ। वीआईपी रोड, खानूगांव और हलालपुर में अतिक्रमण चिह्नित तो किए गए, लेकिन हटाने की कार्रवाई नहीं हुई। बैठक में राजस्व, पुलिस, नगर निगम और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई तय हुई थी, पर हलालपुर में केवल एक शेडनुमा गोदाम के हिस्से पर बुलडोजर चलाया गया। नियमों का हवाला, कार्रवाई नहीं एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वेटलैंड के एफटीएल और 50 मीटर दायरे में सभी निर्माण ध्वस्त किए जाने चाहिए। टीएंडसीपी के नक्शे से किए गए सीमांकन में पक्के निर्माण पाए गए हैं, फिर भी प्रशासन बुलडोजर चलाने से पीछे हट रहा है। अवैध निर्माण करने वाले नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा से अनुमति और रजिस्ट्री होने का दावा कर रहे हैं, हालांकि मौके पर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। खानूगांव से संत हिरदाराम नगर तक कब्जे खानूगांव में रिटेनिंग वॉल बनाकर करीब 40 प्लाटों को कैचमेंट से बाहर किया गया। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसे तोड़ने के निर्देश दिए थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप खानूगांव से संत हिरदाराम नगर तक कब्जों की संख्या 300 से अधिक हो गई।

बंगाल चुनावी वादा: महिलाओं को आर्थिक मदद, सरकार बनते ही घुसपैठियों पर कार्रवाई – अमित शाह

कोलकाता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए प्रदेश में महिला सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार, सरकारी कर्मचारियों के हितों और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का व्यापक खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि राज्य के समग्र विकास और सुशासन के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाए जाएंगे। गृह मंत्री ने घोषणा की कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 5,700 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया जाएगा। इस राशि का उपयोग महिलाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने वाली योजनाओं पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की माताओं और बहनों की गरिमा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। साथ ही, राज्य में 26,000 शिक्षकों से जुड़े विवादित मामले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय में पारदर्शी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही आवश्यक वित्तीय प्रावधान भी किए जाएंगे, ताकि योग्य शिक्षकों के साथ न्याय हो सके और शिक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो। सरकारी कर्मचारियों को राहत देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की कि उन्हें 7वें वेतन आयोग का लाभ प्रदान किया जाएगा। इससे लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी रिक्त सरकारी पदों को भरने की प्रक्रिया 26 दिसंबर तक शुरू कर दी जाएगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। इसके अलावा, बंगाल के युवाओं को सरकारी नौकरियों की भर्ती में 5 वर्ष की विशेष आयु-छूट देने की घोषणा की गई है। अमित शाह ने कहा कि भ्रष्ट तत्वों को दिया गया राजनीतिक संरक्षण पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों और परिवारों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे उन्हें किसी का भी संरक्षण प्राप्त हो। राज्य में बाहरी माफियाओं के प्रभाव को खत्म करने और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने का संकल्प दोहराते हुए गृह मंत्री ने कहा कि संगठित अपराध पर कठोर प्रहार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में घुसपैठियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें राज्य से बाहर करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। टीएमसी से सवाल करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि राज्य में साइंस और टेक्नोलॉजी के माध्यम से हमारे बंगाली युवाओं को रोजगार देना आपका एजेंडा है या मदरसों को बढ़ाना है? हाल ही में बंगाल का बजट विधानसभा में पास हुआ। साइंस और टेक्नोलॉजी के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिर्फ 80 करोड़ रुपए दिए, जबकि मदरसों को 5,700 करोड़ रुपए मिले। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि आपका एजेंडा क्या है? क्या आपकी प्राथमिकता राज्य के युवाओं को रोज़गार के मौके देना है या मदरसों की संख्या बढ़ाना है? उन्होंने कहा कि ये तुष्टिकरण बंगाल का विकास नहीं कर सकता। अगर पिछले 15 साल को देखें, तो आज बंगाल 8 लाख करोड़ रुपए के ऋण में डूबा हुआ है। नए बच्चे के जन्म लेते ही 77 हजार रुपये का ऋण उसके ऊपर आ जाता है। भ्रष्टाचार तो इन्होंने इतना बढ़ा दिया कि बंगाल का नाम आते ही देश में सबसे पहले टीएमसी की भ्रष्टाचारी सरकार का नाम आता है। शिक्षक भर्ती घोटाला, नगर निगम भर्ती घोटाला, गाय तस्करी घोटाला, PDS राशन घोटाला, मनरेगा घोटाला और पीएम आवास योजना घोटाला यहां हुआ और इन सभी घोटालों को संरक्षण देने वाले डीजीपी को ममता बनर्जी राज्यसभा में भेज रही हैं। अमित शाह ने आगे कहा कि बंगाल की सरकार के सभी कर्मचारियों ने 15 साल तक ममता बनर्जी की सरकार की बहुत मदद की। मगर जिन्होंने 15 साल मदद की, उन कर्मचारियों के साथ ममता बनर्जी ने क्या किया? देश भर की सरकारों के कर्मचारियों को 7वां वेतन आयोग मिल चुका है, लेकिन सिर्फ बंगाल के कर्मचारियों को ही छठे वेतन आयोग की तनख्वाह मिलती है। अब तो आठवां वेतन आयोग बनने वाला है। मैं आज कहकर जाता हूं कि एकबार भाजपा सरकार बना दो, 45 दिन में ही हम सातवें वेतन आयोग की तनख्वाह देने का काम करेंगे।

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