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मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज सिलेंडर रीफिल के लिये 26 लाख बहनों को अंतरित करेंगे 55 करोड़ रूपये

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज शनिवार को इंदौर में देंगे सौगातें 1.29 करोड़ लाड़ली बहनों को आज मिलेगी 1250 रूपये की नवम्बर माह की किश्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज सिलेंडर रीफिल के लिये 26 लाख बहनों को अंतरित करेंगे 55 करोड़ रूपये 55 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में 333 करोड़ रूपये का होगा अंतरण दिव्यांगों को लेपटॉप, मोटोराइज्ड ट्राईसिकल सहित अन्य सहायक उपकरण भी करेंगे वितरित  इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 9 नवम्बर को इंदौर के नेहरू स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहना योजना, गैस रीफिल एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 2 करोड़ 10 लाख हितग्राहियों के खातें में 1961 करोड़ रूपये अंतरित करेंगे। इसमें 1 करोड़ 29 लाख लाड़ली बहनों के खातों में 1573 करोड़ रूपये, 26 लाख बहनों के खातों में सिलेंडर रीफिल की राशि 55 करोड़ रूपये और 55 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हितग्राहियों के खातों में 333 करोड़ रूपये की राशि अंतरित की जायेगी। नेहरु स्टेडियम में  5  हजार से अधिक बालिकाओं के द्वारा तलवार चलाने के वर्ल्ड रेकार्ड बनाने का कार्यक्रम भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर के ढ़क्कन वाला कुँआ स्थित ग्रामीण हाट बाजार में आयोजित कार्यक्रम में इंदौर के 450 से अधिक दिव्यांगजनों को लेपटॉप, मोट्रेट ट्राईसिकल सहित अन्य सहायक उपकरण वितरित करेंगे। मुख्यमंत्री आईटीसी के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। उनके द्वारा इंदौर जिले के  155  दिव्यांगजनों को मोटोराइज्ड ट्रॉयसाइकल, निःशक्त शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 81 छात्र/छात्राओं को लेपटॉप, 6 दम्पतियों को मुख्यमंत्री निःशक्त विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता, 130 दिव्यांग वृद्धजनों को डिजीटल श्रवण यंत्र, 99 दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर, सी.पी. चेयर, बैशाखी और  कैलीपर्स प्रदान की जायेगी। साथ ही कलेक्टर आशीष सिंह की पहल पर तैयार किये गये दिव्यांगजनों को सशक्त पोर्टल के माध्यम से निजी क्षेत्र की कम्पनियों में चयनित 5 दिव्यांगजनों को नियुक्ति-पत्र भी सौंपेंगे। इस कार्यक्रम से प्रदेश के सभी जिला एवं संभागीय अधिकारी वर्चुअल शामिल होंगे।  

रीवा कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के तौर पर विकसित कर ए-ग्रेड मंडी बनाया जायेगा – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

कृषि उपज मंडी रीवा को ए-ग्रेड मंडी बनाया जायेगा – उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 15 करोड़ 64 लाख रुपये के कार्यों का किया भूमिपूजन रीवा कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के तौर पर विकसित कर ए-ग्रेड मंडी बनाया जायेगा  – उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रीवा कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के तौर पर विकसित कर ए-ग्रेड मंडी बनाया जायेगा। किसानों की सुविधाओं के लिए सभी अधोसंरचना विकास के कार्य कराकर इसे सुव्यवस्थित व सर्वसुविधायुक्त बनाया जायेगा। उप मुख्यमंत्री ने आदर्श मंडी के रूप में विकसित करने के लिए प्रथम चरण के तहत 15 करोड़ 64 लाख रूपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रीवा जिले में खेती का उत्पादन बढ़ रहा है। जिले में आगामी वर्षों में 9 लाख एकड़ क्षेत्र में सिचाई की सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं जिससे उत्पादन और बढ़ेगा और मंडी में खाद्यान्न की आवक अधिक होने से यह ए-ग्रेड मंडी बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के प्रयासों से रीवा की मंडी को आदर्श मंडी बनाये जाने की घोषणा की गयी थी उसी अनुक्रम में प्रथम चरण में विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया है। यह सभी कार्य एक वर्ष में पूर्ण कर लिये जायेंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि नवीन सब्जी मंडी बन जाने से किसानों को सुविधाएं मिली साथ ही व्यापारियों का समय भी बचने लगा और उनका व्यापार तीन गुना बढ़ गया। उप मुख्यमंत्री ने मंडी में कराये जा रहे विकास कार्यों के अतिरिक्त अन्य आवश्यक कार्य भी प्राथमिकता से कराने के निर्देश अधिकारियों को दिये। उल्लेखनीय है कि रीवा कृषि उपज मंडी में प्रथम चरण में हाई राइज शेड, जल निकासी व्यवस्था, वाहन पार्किंग, कंक्रीट सड़क निर्माण, मुख्य गेट का सौन्दर्यीकरण एवं कैटल प्रोटेक्टर का निर्माण, मुख्य मार्ग पर डिवाइडर एवं गार्डन, 2 हजार मे. टन गोदाम निर्माण, हम्माल तुलावटी के लिए रेस्टहाउस, कार्यालय भवन की मरम्मत, ए व बी ब्लाक दुकानों के पीछे शेड निर्माण, मंडी प्रांगण में दो स्थानों पर वाच टावर का निर्माण कराये जाने के साथ ही जनरेटर शेड स्थापित किया जायेगा साथ ही सीसीटीव्ही कैमरे भी लगाये जायेंगे। अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी सहित विभागीय अधिकारी, किसान एवं व्यापारी उपस्थित रहे।  

डोनाल्ड ट्रंप के एक कदम से चीन की इकॉनमी जापान की तरह भंवर में फंस सकती है

नई दिल्ली चीन की इकॉनमी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। इसमें जान फूंकने के लिए सरकार ने हाल में कई घोषणाएं की थीं। आने वाले दिनों में भी कई और उपायों की घोषणा की जा सकती है। लेकिन इस बीच अमेरिका में राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हो गई है जो चीनी इकॉनमी की हवा निकालने की फिराक में हैं। ट्रंप ने अपने चुनावी भाषणों में चीनी सामान पर 60 फीसदी तक आयात शुल्क लगाने का वादा किया था। दुनिया के दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही काफी तनाव चल रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश को टेक्नोलॉजी का पावरहाउस बनाना चाहते हैं लेकिन ट्रंप की जीत से उनकी योजना को पलीता लग सकता है। चीन में रियल एस्टेट सेक्टर कई साल से संकट में है। सरकार का कर्ज बढ़ रहा है और बेरोजगारी चरम पर है। खपत में सुस्ती ने चीन की ग्रोथ पर ब्रेक लगा रखा है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीनी सामान पर 25% तक इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई थी। जानकारों का कहना है कि उनके दूसरे कार्यकाल में चीन के लिए परेशानी बढ़ सकती है। आईएमएफ ने पहले ही चीन की इकॉनमी के लिए अपने अनुमान को कम कर दिया है। इस साल देश की इकॉनमी के 4.8% की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है जबकि सरकार ने 5% का लक्ष्य तय कर रखा है। अगले साल इसके 4.5% रहने का अनुमान है। चीन की समस्या जानकारों का कहना है कि चीन में भी उसी तरह का ठहराव आ सकता है जिसमें जापान कई दशक से फंसा था। जापान में 1990 के दशक में स्टॉक और प्रॉपर्टी का बुलबुला फूटने के ठहराव आ गया था और वह अब तक इससे उबर नहीं पाया है। जानकारों का कहना है कि इस स्थिति से बचने के लिए चीन को कंज्यूमर डिमांड बढ़ाने पर काम करना चाहिए और एक्सपोर्ट और निवेश आधारित ग्रोथ से हटना चाहिए। इससे चीन में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा और देश बाहरी झटकों से बचने से बच सकेगा। चीन कई साल से दुनिया के फैक्ट्री बना हुआ है। वहां बने सस्ते सामान से दुनियाभर के बाजार भरे पड़े हैं। चीन उसी सफलता को हाई-टेक एक्सपोर्ट में भी दोहराना चाहता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वीकल्स और लीथियम आयन बैटरी के मामले में चीन वर्ल्ड लीडर है। लेकिन इसके साथ ही पश्चिमी देशों के साथ चीन का तनाव बढ़ता जा रहा है। पिछले महीने यूरोपीय यूनियन ने चीन में बने ईवी पर टैरिफ बढ़ाकर 45 फीसदी कर दिया था। अब वाइट हाउस में ट्रंप की वापसी से चीन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।

छग मौसम विभाग के अनुसार, अगले सप्ताह से तापमान में तेजी से गिरावट आएगी और ठंड की रफ्तार बढ़ेगी

रायपुर  हवाओं का रूख बदलते ही नवंबर के दूसरे हफ्ते में छत्तीसगढ़ में धुंध के साथ हल्की ठंड का अहसास होने लगा है, लेकिन अच्छी ठंड के लिए अभी एक हफ्ते और इंतजार करना पड़ेगा। 15 नवंबर के बाद पहाड़ों पर बर्फबारी होगी और तापमान तेजी से गिरेगा, जिससे ठिठुरन बढ़ेगी। छग मौसम विभाग के अनुसार, अगले सप्ताह से तापमान में तेजी से गिरावट आएगी और ठंड की रफ्तार बढ़ेगी। खास करके 10 से 20 नवंबर के बीच उत्तर-पूर्वी हवाओं से रात के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी। इसके तहत चार डिग्री सेल्सियस तक न्यूनतम तापमान में गिरावट आने का अनुमान है ।आने वाले पांच दिनों तक मौसम में कोई खास बदलाव नहीं होगा।हालांकि सरगुजा संभाग में ठंड और धुंध का असर दिखाई देने लगा है। 5 दिनों तक मौसम रहेगा शुष्क छग मौसम विभाग की मानें तो फिलहाल 5 दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा। आने वाले करीब दो दिनों तक उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिलों में रात के तापमान में करीब दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की संभावना है।आज शुक्रवार को राजधानी में मौसम साफ रहेगा। रायपुर में अधिकतम पारा 32 डिग्री सेल्सियस और रात का पारा 20 डिग्री रिकॉर्ड किया जा सकता है।

MP में हाथियों को भी लगाया जाएगा सैटेलाइट कॉलर, जानें क्या है पूरा प्लान

भोपाल मध्य प्रदेश में चीते और बाघ की तर्ज पर अब हाथियों को भी सैटेलाइट कॉलर लगाये जायेंगे. सैटेलाइट कॉलर लगाने से हाथियों की लोकेशन का पता चल सकेगा. वन विभाग के एपीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति ने बताया कि हाथी झुंड में रहते हैं. इसलिए सैटेलाइट कॉलर झुंड के किसी एक हाथी को लगाई जाएगी. इसकी मॉनिटरिंग कॉरिडोर वाले जिलों के डीएफओ और वाइल्ड लाइफ मुख्यालय स्थित कंट्रोल कमांड सेंटर से होगी. उन्होंने बताया कि हाथियों की लोकेशन पता करने के लिए नई व्यवस्था की जा रही है. यदि हाथी गांव की तरफ जाते हैं तो उन्हें मैनेज कर जंगल की तरफ हांका जाएगा. सैटेलाइट कॉलर लगाने के लिए कर्नाटक वाइल्ड लाइफ मुख्यालय ने स्वीकृति दे दी है. बताया जा रहा है कि कर्नाटक में इस तरह के प्रयोग हो रहे हैं. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लगभग 160 हाथी हैं. आंकड़ों के मुताबिक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 70 हाथी हैं. वहीं, संजय डुबरी नेशनल पार्क में 25 हाथियों का डेरा है. हाथियों को मैनेज करने का गुर सीखने अधिकारियों का दो दल मैसूर और कोयम्बटूर जाएगा. अब हाथियों को लगाये जायेंगे सैटेलाइट कॉलर दोनों दलों में कान्हा, संजय दुबरी, बांधवगढ़, उमरिया, मंडला, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, मंडला सहित अन्य हाथी कॉरिडोर और प्रभावित इलाकों के डीएफओ शामिल हैं. सैटेलाइट कॉलर लगाने से जंगल के पास रहने वाली आबादी को बड़ी राहत मिलेगी. जंगली हाथी के गांव की तरफ जाने पर मैनेज कर जंगल की तरफ हांक दिया जाएगा. वन विभाग की तरफ से लोगों को भी जागरूक करने का काम किया जाएगा. बता दें कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की रहस्मयी मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार भी गंभीर है. हाथियों की मौत ने मध्य प्रदेश के वन्य प्राणियों की  सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 10 हाथियों की मौत मामले फॉरेंसिक रिपोर्ट आ गयी है. 

‘जिम में हो महिला ट्रेनर, पुरुष दर्जी नहीं ले सकेंगे महिलाओं का नाप’, बढ़ाई जाएगी महिलाओं की सुरक्षा

लखनऊ उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि कपड़ों की दुकानों पर महिला कर्मचारियों का होना अनिवार्य किया जाए ताकि महिलाएं सहज महसूस कर सकें। पुरुष दर्जी महिलाओं के कपड़े का नाप न लें। इसी तरह जिम और योगा केंद्रों में महिला प्रशिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य की जाए। ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके अलावा आयोग ने सुझाव दिया है कि स्कूल बसों में भी महिला सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की जाए। 28 अक्टूबर को हुई इस बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया। जिसमें वर्तमान आयोग अध्यक्ष बबिता चौहान के साथ उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और चारू चौधरी भी मौजूद थीं। आयोग का मानना है कि इस प्रकार के बदलाव से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर अधिक सुरक्षा मिलेगी। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग एक वैधानिक निकाय है जिसका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकना और उनके कल्याण को बढ़ावा देना है। आयोग समय-समय पर महिला सुरक्षा के विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने और महिला अधिकारों के बारे में जनता को सूचित करने के लिए सक्रिय कदम उठाता है। महिला आयोग द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव?     महिला जिम/योगा सेन्टर में, महिला ट्रेनर होनी चाहिए। ट्रेनर एवं महिला जिम का सत्यापन अवश्य करा लिया जाए।     महिला जिम/योगा सेन्टर में प्रवेश के समय अभ्यर्थी के आधार कार्ड/निर्वाचन कार्ड जैसे पहचान पत्र से सत्यापन कर उसकी छायाप्रति सुरक्षित रखी जाए।     महिला जिम/योगा सेन्टर में डी.वी.आर. सहित सी.सी.टी.वी. सक्रिय दशा में होना अनिवार्य है।     विद्यालय के बस में महिला सुरक्षाकर्मी अथवा महिला टीचर का होना अनिवार्य है।     नाट्य कला केन्द्रों में महिला डांस टीचर एवं डी.वी.आर सहित सक्रिय दशा में सी.सी.टी.वी. का होना अनिवार्य है।     बुटीक सेन्टरों पर कपड़ों की नाप लेने हेतु महिला टेलर एवं सक्रिय सी.सी.टी.वी. का होना अनिवार्य है।     जनपद की सभी शिक्षण संस्थाओं का सत्यापन होना चाहिए।     कोचिंग सेन्टरों पर सक्रिय सी.सी.टी.वी. एवं वाशरूम आदि की व्यवस्था अनिवार्य है।     महिलाओं से संबंधित वस्त्र आदि की ब्रिकी की दुकानों पर महिला कर्मचारी का होना अनिवार्य है। पिछले महीने बबिता को मिली थी अध्यक्ष पद की कमान इस समय बबिता चौहान यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष हैं. मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव और चारू चौधरी उपाध्यक्ष हैं. योगी सरकार ने पिछले महीने पिछले महीने राज्य महिला आयोग का गठन करते हुए एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और 25 सदस्यों के नामों की घोषणा की थी. बबीता को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे पहले बबिता बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही थीं. बबिता चौहान के अध्यक्ष बनने के बाद यह यूपी महिला आयोग का यह सुझाव महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है. इस सुझाव की खास चर्चा भी की जा रही है. उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग एक वैधानिक निकाय है. इसकी स्थापना राज्य में महिलाओं के विरुद्ध अपराध से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए की गई है. इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है. आयोग समय-समय पर राज्य में महिला-आधारित कानून के बारे में जनता को जागरूक करता है और इसके लिए खास कदम उठाता है.  

EV में आग लगने की घटनाओं को कम करेगा एनपीसीसी, IIT Indore का कमाल…

इंदौर  इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। इन घटनाओं के चलते जान का खतरा भी रहता है। अब आईआईटी इंदौर ने इस समस्या का समाधान खोज निकाला है। दरअसल, आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संतोष कुमार साहू के नेतृत्व में इलेक्ट्रिक वाहनों के थर्मल प्रबंधन में बदलाव लाने के लिए नोवेल फेज-चेंज कंपोजिट (एनपीसीसी) विकसित किया गया है। ओवरहीटिंग में कमी आएगी आईआईटी इंदौर में विकसित एनपीसीसी समान तापमान सुनिश्चित करके इस चुनौती का सामना करता है, जिससे ओवरहीटिंग के जोखिम में कमी आती है। एनपीसीसी बेहतर तापीय चालकता, आकार स्थिरता, लौ प्रतिरोध और विद्युत इन्सुलेशन प्रदान करता है, जो बैटरी माड्यूल के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक है। ईवी बैटरियों की कार्यक्षमता बढ़ती है सिंगल और मल्टी-सेल बैटरी माड्यूल दोनों पर संपूर्ण रूप से परीक्षण किए जाने पर, यह चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के दौरान बैटरी के तापमान को काफी कम करने में सक्षम साबित हुआ है, जिससे अधिक दक्षता सुनिश्चित होती है और ईवी बैटरियों की कार्यक्षमता बढ़ती है। यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है यह कंपोजिट बनाने में आसान, हल्का और किफायती है, जो पारंपरिक लिक्विड-कूल्ड सिस्टम के लिए एक बेहतर विकल्प प्रदान करता है। एनपीसीसी पाइप और पंप की आवश्यकता को समाप्त करता है, जबकि असाधारण ताप अपव्यय और अग्निरोधी गुण प्रदान करता है, जिससे यात्रियों को एक अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। लागत में कटौती आएंगी आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, इस तकनीक में ईवी के क्षेत्र को नया आकार देने की क्षमता है। गर्मी को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करके, एनपीसीसी लिथियम-आयन बैटरियों की कार्यक्षमता को बढ़ा सकता है, दूसरी बैटरी बदलने में कमी ला सकता है और निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिए प्रक्रिया संबंधी लागत में कटौती कर सकता है। लंबे समय तक चलने वाली बैटरियां पर्यावरण की दृष्टि से, लंबे समय तक चलने वाली बैटरियों का मतलब है कि उत्पादन के लिए कम कच्चे माल की आवश्यकता होती है और कम अपशिष्ट होता है, जो स्थिरता लक्ष्यों में योगदान देता है। वहीं, प्रोफेसर साहू ने कहा, इस नवाचार का प्रभाव ईवी से कहीं आगे तक जाता है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करने, बैटरी की विश्वसनीयता और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए तैयार है। इसके अपनाने से क्लीनर ट्रांसपोर्टेशन की ओर बदलाव में तेजी आ सकती है, जिससे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है। बेंगलुरु की कंपनी ने की शुरुआत जैसे-जैसे यह महत्वपूर्ण तकनीक पूर्ण पैमाने पर व्यावसायीकरण की ओर बढ़ रही है, यह न केवल ईवी को बदलने का वादा करती है, बल्कि किसी भी ऐसे अनुप्रयोग को बदलने का वादा करती है जिसके लिए प्रभावी थर्मल प्रबंधन की आवश्यकता होती है। इसे पहले से ही व्यावसायीकरण के लिए तैयार किया जा रहा है और सिंपल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु ने अपने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी प्राप्त कर ली है।

पेटीकोट -सलवार का नाड़ा टाइट बांधने से महिलाओं में हो रहा ‘साड़ी कैंसर’, डॉ. से जानें इसके लक्षण

नईदिल्ली आजकल कैंसर कई लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहा है। कई तरह के खतरनाक कैंसर सामने आ रहे हैं। महिलाओं में स्तन, गर्भाशय, योनि और अंडाशय के कैंसर आम हैं। लेकिन अब दो मामलों में पेटीकोट कैंसर पाया गया है! रोज़ाना साड़ी पहनने वालों के लिए यह चिंताजनक है। वर्धा के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और बिहार के मधुबनी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के हालिया शोध के अनुसार, रोज़ाना साड़ी पहनने वाली महिलाएं इससे पीड़ित हो रही हैं। इसका कारण साड़ी के साथ पहने जाने वाला पेटीकोट है। अध्ययन में बताया गया है कि इसके धागे से खतरा बढ़ता है। हालांकि अध्ययन में सिर्फ़ साड़ी का ज़िक्र है, लेकिन चूड़ीदार और कुर्ता पहनने वालों को भी कमर पर धागा बांधना पड़ता है। इसे टाइट बांधने से कैंसर हो सकता है। पेटीकोट या पैंट का धागा टाइट बांधने से यह त्वचा से चिपक जाता है। साड़ी न खिसके इसलिए इसे टाइट बांधा जाता है। रोज़ाना साड़ी पहनने वालों में ऐसा करने से त्वचा लाल हो जाती है, सूज जाती है और बाद में घाव बनकर कैंसर का रूप ले सकती है। शुरुआत में महिलाओं में पाए गए इस कैंसर के लिए साड़ी को ज़िम्मेदार माना गया था। लेकिन बाद में पता चला कि इसका कारण पेटीकोट है, इसलिए इसे पेटीकोट कैंसर कहा गया है। 70 साल की एक महिला में यह पाया गया। उनके पेट के आसपास घाव 18 महीने तक ठीक नहीं हुआ। बाद में पता चला कि यह मार्जोलिन अल्सर नाम का त्वचा कैंसर है। फिर एक और महिला में भी यह पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, पेटीकोट टाइट बांधने से पेट और कमर पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे घर्षण होता है और त्वचा कमज़ोर हो जाती है। इससे घाव या छाले हो जाते हैं। इलाज न कराने पर यह कैंसर में बदल सकता है। इस तरह के घाव या छाले होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। रोज़ाना साड़ी या धागे वाला पेटीकोट पहनने वालों को इलास्टिक वाला पेटीकोट पहनने की सलाह दी जाती है। या फिर ढीले स्कर्ट पहनने को कहा गया है। कमर के आसपास हफ़्तों या महीनों तक ठीक न होने वाले घाव होने पर तुरंत जांच कराएं। 70 साल की महिला में साड़ी से हुआ कैंसर पहले मामले में, एक 70 वर्षीय महिला को अपने दाहिने हिस्से में त्वचा पर एक अल्सर विकसित हो गया, जिसमें त्वचा का रंग भी फीका पड़ गया था। पेटीकोट की तंग डोरी ने त्वचा को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया, जिससे मार्जोलिन अल्सर हो गया। 70 वर्षीय महिला ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि, ‘मैंने दशकों तक खूब कसी साड़ी बांधी, मुझे नहीं पता था कि ये मेरी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। त्वचा में हल्का सा बदलाव हुआ जो धीरे-धीरे दर्दनाक और ठीक न होने वाले अल्सर में बदल गया, बाद में पता चला कि मुझे स्‍किन कैंसर हुआ है।’ डॉ. दर्शना राणे के अनुसार, ‘जब यह नाड़ा लगातार एक ही स्थान पर कमर पर बांधा जाता है, तो इससे त्वचा में जलन (डर्माटोसिस) होती है, जिससे आगे चलकर अल्सर (घाव) या ‘मार्जोलिन अल्सर’ बन सकते हैं, और बहुत ही दुर्लभ मामलों में, ये घाव कैंसर में बदल सकते हैं।’ ऐसे पहचाने ‘साड़ी कैंसर’ का लक्षण ‘साड़ी कैंसर’ के शुरुआती लक्षण पेटीकोट का तंग नाड़ा लंबे समय तक जलन पैदा कर सकता है। इंडिया की गर्मी में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, यह समस्या तेजी से बढ़ सकती है। कसी साड़ी से त्वचा का रंग बदलना या हल्की पपड़ी पड़ना गंभीर लक्षण हो सकते हैं। क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर डॉ. दर्शना राणे बताती हैं, पेटीकोट का नाड़ा जब गर्म और आर्द्र मौसम में कसकर बांधा जाता है, तो यह पसीना और धूल के जमा होने से जलन और खुजली पैदा कर सकता है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित होने के कारण, महिलाएं प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं और जब हेल्‍थ खराब हो जाती है तब डॉक्‍टर को दिखाती हैं। चूड़ीदार और धोती से भी हो सकता है कैंसर जी हां, अगर आप कस कर धोती बांधते हैं और महिलाएं अगर टाइट चूड़ीदार पहनती हैं, तो आपको भी बच कर रहना चाहिए। हालांकि यह एक दुर्लभ समस्या है, लेकिन यह जागरूकता और बचाव की आवश्यकता को दर्शाती है। जानें बचाव का तरीका     पेटीकोट को बहुत कसकर न बांधें, खासकर अगर त्वचा में रंग बदलने या पपड़ी बनने जैसे डर्माटोसिस के शुरुआती संकेत दिखें।     पेटीकोट में चौड़ा कमरबंद इस्तेमाल करने से कमर पर दबाव समान रूप से बंटता है।     पेटीकोट को बांधने की ऊंचाई समय-समय पर बदलते रहें। घर पर हों तो ढीले इलास्टिक वाले पतलून पहनें ताकि हवा का संचार बना रहे।     कभी भी टाइटप कपड़ा ना पहनें। हमेशा आरामदायक कपड़ा ही पहनें। कमर पर टाइट बेल्‍ट या नाड़ा ना बांधें। स्‍किन पर अगर इलास्‍टिक से जलन और खुजली हो तो तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं।

बाओबाब वृक्षों की कटाई के मामले में HC ने जैव विविधता बोर्ड को निर्देश दिए, तस्वीरों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करें

जबलपुर मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट बेंच ने जैव विविधता बोर्ड को निर्देश दिया है कि प्रदेश में स्थित बाओबाब पेड़ों की तस्वीरों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट मित्र अधिवक्ता की ओर से आवेदन पेश कर बताया गया कि केंद्रीय वन विभाग ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो का गठन किया है। सभी जांच एजेंसियां मोबाइल स्टैटिक डेटा का उपयोग कर सकती हैं, लेकिन वाइल्डलाइफ क्राइम ब्यूरो इसका उपयोग नहीं कर सकती। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विनय जैन की युगलपीठ ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। गौरतलब है कि धार जिले में बाओबाब पेड़ काटने, बेचने और परिवहन की अनुमति दिए जाने से संबंधित  प्रकाशित खबर पर हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया था। क्षेत्रीय नागरिक बाओबाब वृक्षों की कटाई का विरोध कर रहे हैं। दअरसल, बाओबाब पेड़ को अफ्रीका में ‘द वर्ल्ड ट्री’ की उपाधि दी गई है। अफ्रीका के आर्थिक विकास में इस पेड़ का बहुत बड़ा महत्व है। हैदराबाद के एक व्यापारी ने अपने फार्म में इन पेड़ों की खेती कर आर्थिक लाभ के लिए उनकी कटाई कर उन्हें बेचने का कार्य शुरू किया है। एक पेड़ की कीमत 10 लाख रुपये से अधिक है, जिसके कारण अन्य लोग भी अपने खेतों में लगे पेड़ को काटकर बेचने लगे हैं। हाईकोर्ट ने संज्ञान याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद धार जिले में बाओबाब पेड़ों की कटाई, बिक्री और परिवहन पर रोक लगाते हुए मुख्य सचिव, वन विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त और सीसीएफ इंदौर, कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया था कि बाओबाब वृक्षों की कटाई के मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार ने यह भी बताया कि रोपे गए 20 बाओबाब पौधों में से 9 काट दिए गए हैं और 11 जीवित हैं। धार जिले में कुल 393 बाओबाब पेड़ हैं। कोर्ट मित्र अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को स्टैटिक डेटा का उपयोग करने की अनुमति नहीं मिलने के संबंध में आवेदन पेश किया था। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किए।

पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के धुले में कहा-दुनिया की कोई भी ताकत कश्मीर में आर्टिकल 370 की वापसी नहीं करा सकती

धुले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अनुच्छेद 370 को लेकर मचे कोहराम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के धुले में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में केवल बाबा साहेब अंबेडकर का ही संविधान चलेगा। दुनिया की कोई भी ताकत कश्मीर में आर्टिकल 370 की वापसी नहीं करा सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस और इंडी ब्लॉक वालों को जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने का मौका मिला, वो कश्मीर को लेकर फिर से नई साजिशें करने लगे हैं। दो- तीन दिन पहले आपने टीवी में देखा होगा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में क्या कुछ हुआ। कांग्रेस-एनसी गठबंधन ने वहां फिर से आर्टिकल 370 लागू करने का प्रस्ताव पारित किया है। क्या ये देश स्वीकार करेगा। कश्मीर को तोड़ने का कांग्रेस का ये कारनामा आपको मंजूर है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि आर्टिकल 370 के समर्थन में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बैनर लहराए गए। जब भाजपा के विधायकों ने जी जान से उसका विरोध किया, उन्हें उठा-उठाकर के सदन के बाहर फेंक दिया गया। कांग्रेस और उनके सहयोगी की ये घिनौनी सच्चाई पूरे देश और महाराष्ट्र को समझनी होगी। कांग्रेस-एनसी गठबंधन एक तरफ जम्मू-कश्मीर से भारत के संविधान हटाने का प्रस्ताव पास करता है। कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में बाबा साहेब का संविधान नहीं चाहती है। कांग्रेस गठबंधन महाराष्ट्र में आकर संविधान की झूठी किताब लहराती है। पीएम मोदी ने कहा कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी वालों से कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान के एजेंडे को देश में बढ़ावा देने की कोशिश मत करो। कश्मीर को लेकर अलगावादियों की भाषा मत बोलो। याद रखो तुम्हारे मंसूबे कामयाब नहीं होंगे और जब तक मोदी पर जनता जर्नादन का आशीर्वाद है, कांग्रेस वाले कश्मीर में कुछ नहीं कर पाएंगे। कश्मीर पर केवल बाबा साहेब अंबेडकर का ही संविधान चलेगा। ये मोदी का फैसला है, दुनिया की कोई भी ताकत कश्मीर में आर्टिकल 370 की वापसी नहीं करा सकती है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय बाबा साहेब दलितों और वंचितों के लिए आरक्षण चाहते थे। लेकिन, नेहरू जी इस बात पर अड़े थे किसी भी कीमत पर दलितों, पिछड़ों और वंचितों को आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। बहुत मुश्किल से बाबा साहेब दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षण का प्रावधान कर पाए थे। नेहरू जी के बाद इंदिरा जी आईं और उन्होंने भी आरक्षण के खिलाफ ऐसा ही रवैया जारी रखा था। ये लोग चाहते थे कि एससी, एसटी,ओबीसी हमेशा कमजोर रहे। इंदिरा जी के बाद राजीव गांधी ने भी ओबीसी आरक्षण का खुलकर विरोध किया था। ये लोग जानते थे कि एससी,एसटी और ओबीसी मजबूत हो गए तो उनकी राजनीति की दुकान का शटर गिर जाएगा। राजीव गांधी के बाद अब इस परिवार की चौथी पीढ़ी, इनका युवराज इसी खतरनाक भावना के साथ काम कर रहे हैं। कांग्रेस का एकमात्र एजेंडा है, किसी भी तरह एससी, एसटी समाज की एकता को तोड़ें, ओबीसी समाज की एकता को चकनाचूर कर दें। कांग्रेस चाहती है कि एससी समाज अलग-अलग जातियों में बिखरा रहे, ताकि एससी समाज की सामूहिक शक्ति कमजोर पड़ जाए। कांग्रेस ओबीसी और एसटी समाज को भी अलग-अलग जातियों में बांटने की कोशिश कर रही है।

MP में 15 नवंबर से तेजी से बढ़ेगी ठंड, गिरेगा रातों का पारा, कई शहर 10 के नीचे

भोपाल मध्यप्रदेश में इस साल नवंबर की शुरुआत से ही ठंड ने अपनी दस्तक दे दी है। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में ठंड का असर सबसे अधिक देखा जा रहा है, जहां तापमान 12 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। यह जगह फिलहाल प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान बन गया है। दिन और रात दोनों समय यहां का तापमान काफी ठंडा हो चुका है। पचमढ़ी में ठंड का स्तर इतना अधिक है कि पिछले सात रातों में से छह बार पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा क्षेत्र रहा, जबकि एक बार अमरकंटक ने भी सबसे ठंडे स्थान का दर्जा हासिल किया। बुधवार और गुरुवार की रात में पचमढ़ी का न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था। इंदौर में न्यूनतम तापमान कल 18.1 डिग्री रहा। एक्यूआई सुबह से ही खराब इंदौर में आज सुबह से ही एक्यूआई खराब स्तर पर चल रहा है। 287 का एक्यूआई सुबह 10 बजे ही दर्ज किया गया। शाम तक यह 300 पार चला जाता है। इस बार लगातार एक्यूआई 300 के आसपास ही चल रहा है। यह बेहद खराब स्तर माना जाता है। 15 से और बदलेगा मौसम मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 15 नवंबर के बाद से प्रदेश में ठंड का असर और अधिक बढ़ सकता है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक शिल्पा आप्टे ने बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में हवा का रुख बदलने की संभावना है। उत्तर से चलने वाली ठंडी हवाओं का असर प्रदेश में साफ दिखाई देगा। इससे विशेष रूप से ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग में ठंड में वृद्धि होने की उम्मीद है। 10 डिग्री के नीचे जाएगा तापमान प्रदेश के अन्य कई शहरों में भी रात का तापमान तेजी से गिरने का अनुमान है। मंडला, उमरिया, राजगढ़ और गुना जैसे शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे जा सकता है। राजधानी भोपाल के साथ शाजापुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, बैतूल, टीकमगढ़, मलाजखंड, रायसेन, उज्जैन, नौगांव, खरगोन और रतलाम जैसे शहरों में भी तापमान गिरकर 18 डिग्री सेल्सियस से कम दर्ज किया गया है। वहीं, गुरुवार को दिन के समय भी पचमढ़ी समेत कई शहरों में तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। बर्फबारी से बढ़ेगी ठिठुरन उत्तर भारत में बर्फबारी शुरू होते ही मध्यप्रदेश में ठिठुरन बढ़ने लगती है। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार भी नवंबर के दूसरे सप्ताह में उत्तर से ठंडी हवाएं आने की संभावना है, जिससे ठंड का प्रभाव और गहराएगा। पिछले दस वर्षों में इसी समय पर ठंड बढ़ने का यही ट्रेंड देखा गया है। मौसम में बदलाव जारी रहेगा दक्षिण-पश्चिम मानसून के समाप्त होने के बाद मौसम में बदलाव आ जाता है। आसमान में बादल छाए रहते हैं, लेकिन उमस का असर लगभग खत्म हो जाता है। अक्टूबर के बाद से ही रात के तापमान में गिरावट शुरू हो जाती है। पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के चलते ग्वालियर, चंबल, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर जैसे संभागों में हल्की बारिश भी होती है, जिससे ठंड और बढ़ जाती है। इस दौरान दिन का तापमान 30 डिग्री और रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के नीचे रहने की संभावना बनी रहती है। इस तरह, मध्यप्रदेश में इस बार नवंबर के मध्य से लेकर महीने के आखिर तक ठंड का प्रभाव ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। अगर यह मौसम का बदलाव इसी तरह जारी रहा, तो नवंबर के अंत में कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो सकता है।

कांग्रेस धर्म और जातियों के नाम पर लोगों को लड़ा रही है, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे

महाराष्ट्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। उन्होंने धुले एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस का एजेंडा देश के सभी आदिवासी समुदायों के बीच दरार पैदा करना है। कांग्रेस धर्म और जातियों के नाम पर लोगों को लड़ा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कांग्रेस का एजेंडा देश के सभी आदिवासी समुदायों के बीच दरार पैदा करना है… जब कांग्रेस ने धार्मिक समूहों के साथ इस साजिश की कोशिश की, तो इससे देश का विभाजन हुआ। अब कांग्रेस एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़का रही है। भारत के लिए इससे बड़ी कोई साजिश नहीं हो सकती… जब तक आप एकजुट रहेंगे, तब तक आप मजबूत रहेंगे… ‘एक है तो सुरक्षित है’।”   इनका युवराज इसी खतरनाक भावना के साथ काम कर रहा- मोदी पीएम मोदी ने धुले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “आजादी के समय बाबासाहेब दलितों और वंचितों के लिए आरक्षण चाहते थे लेकिन नेहरू जी इस बात पर अड़े थे कि दलितों, पिछड़ों और वंचितों को आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। बड़ी मुश्किल से बाबासाहेब दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षण का प्रावधान कर पाए थे। नेहरू जी के बाद इंदिरा जी आईं और उनका भी आरक्षण के खिलाफ यही रवैया था। ये लोग चाहते थे कि SC, ST, OBC हमेशा कमजोर रहें। राजीव गांधी ने भी OBC आरक्षण का खुलकर विरोध किया था। राजीव गांधी के बाद अब इस परिवार की चौथी पीढ़ी, इनका युवराज इसी खतरनाक भावना के साथ काम कर रहा है। कांग्रेस को आदिवासियों की एकता पसंद नहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का एकमात्र एजेंडा SC, ST, OBC समाज की एकता को किसी भी तरह से तोड़ना है। कांग्रेस चाहती है कि SC, ST, OBC समाज अलग-अलग जातियों में बंटा रहे। कांग्रेस आदिवासी समाज की पहचान, ST की एकता को तोड़ने में लगी हुई है। कांग्रेस को आदिवासियों की एकता पसंद नहीं है। जब कांग्रेस ने धर्म के नाम पर ऐसी साजिश रची थी, जब देश का बंटवारा हुआ था, अब कांग्रेस SC, ST, OBC की एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ खड़ा कर रही है। इससे बड़ी साजिश भारत के खिलाफ नहीं हो सकती।”

दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास के साथ भारत वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल होने का हकदार: पुतिन

मॉस्को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर भारत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने दोनों देशों के रिश्ते को ऐतिहासिक बताया। भारत की आजादी में सोवियत संघ की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया है कि भारत एक ‘प्राकृतिक सहयोगी’ और दशकों से भागीदार है। रूसी राज्य मीडिया ने बताया कि गुरुवार को सोची में वल्दाई चर्चा क्लब को संबोधित करते हुए पुतिन ने भारत को एक महान देश बताया और कहा कि मॉस्को और नई दिल्ली सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। पुतिन बोले, सभी दिशाओं में विकसित हो रहे संबंध पुतिन ने पूर्ण सत्र में कहा, हम भारत के साथ सभी दिशाओं में अपने संबंध विकसित कर रहे हैं। भारत एक महान देश है। यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक विकास के मामले में अग्रणी है, इसकी जीडीपी 7.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज कर रही है। समाचार एजेंसी ने पुतिन के हवाले से कहा, हमारे संबंध कहां और किस गति से विकसित होंगे, इसका हमारा दृष्टिकोण आज की वास्तविकताओं पर आधारित है। हमारे सहयोग की मात्रा साल दर साल बढ़ रही है। विश्वास के मामले में अद्वितीय संबंध बनाए पुतिन ने भारत की स्वतंत्रता की घोषणा में सोवियत संघ की भूमिका को याद किया, जिसने दोनों देशों के बीच गुणवत्ता और विश्वास के मामले में अद्वितीय संबंध बनाए। पुतिन ने कहा कि यह हमारे लिए सभी आयामों में द्विपक्षीय संबंधों को विकसित करने का आधार है। पुतिन ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार कारोबार लगभग 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि अपनी डेढ़ अरब की आबादी, दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास, प्राचीन संस्कृति और आगे विकास की बहुत अच्छी संभावनाओं के साथ भारत वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल होने का हकदार है। ब्रह्मोस का दिया उदाहरण पुतिन ने आगे कहा कि भारत और रूस के बीच सुरक्षा क्षेत्र और रक्षा क्षेत्र में संपर्क विकसित हो रहे हैं। देखें कि कितने प्रकार के रूसी सैन्य उपकरण भारतीय सशस्त्र बलों की सेवा में हैं। इस रिश्ते में काफी हद तक विश्वास है। हम सिर्फ भारत को अपने हथियार नहीं बेचते हैं; हम उन्हें संयुक्त रूप से डिजाइन करने के लिए संयुक्त अनुसंधान में लगे हुए हैं। उन्होंने ब्रह्मोस को भारत-रूस संयुक्त सहयोग का एक उदाहरण बताया। पुतिन ने कहा, ब्रह्मोस सिस्टम का उपयोग हवा और समुद्र में किया जाता है और यह साझेदारी कुछ ऐसी चीज है जिसके बारे में लोग जानते हैं और यह उच्च स्तर के विश्वास और हमारी साझेदारी के उच्च स्तर की गवाही देता है जो भविष्य में भी जारी रहेगी। ब्रह्मोस का नाम भारत और रूस की ब्रह्मपुत्र और मोस्कवा नदियों के नाम पर रखा गया है। इसका गठन भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया था। इस बीच, गुरुवार के कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने ब्रिक्स समूह की संभावनाओं पर भी बात की, जिसके सदस्य रूस और भारत दोनों हैं। रूसी नेता ने कहा कि यह देशों और लोगों के बीच संबंधों की आधुनिक, मुक्त और गैर-ब्लॉक प्रकृति का एक प्रोटोटाइप है। इस साल अक्टूबर में कजान में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस ने एक प्रतीकात्मक ब्रिक्स बैंकनोट का अनावरण भी किया था।

एक दिन में 3 करोड़ यात्रियों ने किया ट्रेन से सफर, देश के परिवहन इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि

नई दिल्ली भारत में रोजाना लाखों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं। लाखों की यह संख्या कई बार एक करोड़ का आंकड़ा भी पार कर गई है। इसी कड़ी में भारतीय रेलवे ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। रेल मंत्रालय द्वारा एक हालिया बयान के अनुसार, 4 नवंबर 2024 को ट्रेन से 3 करोड़ से अधिक यात्रियों ने सफर किया। यात्रियों की यह संख्या भारतीय रेल के लिए एक नए रिकॉर्ड बनाने को लेकर अहम है। मंत्रालय ने इसे देश के परिवहन इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। जानकारी के अनुसार, 4 नवंबर को, भारतीय रेल से 120.72 लाख नॉन-सबअर्बन यात्रियों ने यात्रा की, जिसमें 19.43 लाख आरक्षित यात्री और 101.29 लाख अनारक्षित यात्री शामिल थे। इसके अलावा, रेल मंत्रालय ने रिकॉर्ड 180 लाख सबअर्बन यात्रियों को सफर कराया। सभी यात्रियों की संख्या जोड़ने के बाद देश की रेल प्रणाली के लिए एक नया मानदंड स्थापित हो गया है। बयान में यह भी कहा गया कि भारतीय रेल ने यह उपलब्धि साल के सबसे व्यस्त महीने के दौरान हासिल की है, जो भारतीय रेल की परिचालन कुशलता को दर्शाता है। साल के इस व्यस्त समय में दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ पूजा के अवसर पर लाखों-करोड़ों लोग एक राज्य से दूसरे राज्य की यात्रा करते हैं। एक राज्य से दूसरे राज्य की इस यात्रा के लिए अधिकतर लोग ट्रेन का सफर ही चुनते हैं। यही वजह है कि त्योहारी सीजन में ट्रेन में लोगों की भीड़ देखी जाती है। यात्रियों की इस भीड़ को संभालने और व्यवस्थित करने के लिए भारतीय रेल की ओर से अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन की भी व्यवस्था की जाती है। इस बार रेलवे बोर्ड ने त्योहारी सीजन की भीड़ को देखते हुए 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक 7,663 स्पेशल ट्रेन सर्विस शुरू की है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 73 फीसदी अधिक है।

नई शिक्षा नीति:2020 के अंतर्गत प्रदेश में अनेक नवाचार हुए, विश्वविद्यालय अपने स्तर पर भी उच्च शिक्षा के जुड़े नवाचार करें- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नई शिक्षा नीति:2020 के अंतर्गत प्रदेश में अनेक नवाचार हुए हैं। विश्वविद्यालय अपने स्तर पर भी उच्च शिक्षा के जुड़े नवाचार करें। अच्छे प्रयोगों का सदैव स्वागत है। शिक्षा की गुणवत्ता को निरंतर श्रेष्ठ बनाने के प्रयास हों। पैरामेडिकल और नर्सिंग पाठ्यक्रम भी विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सक्षम युवाओं का निर्माण सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए सबसे बड़ी गारंटी मानते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की पहल से इस संदर्भ में नई शिक्षा नीति में अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान भी हुए हैं। इस नीति में युवाओं को ज्ञानवान और अनेक विषयों में पारंगत बनाने की रणनीति बनाई गई है। इस नाते मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनेक अभिनव प्रयास इस दिशा में किए गए हैं। मध्यप्रदेश में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जहां भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यशालाएं आयोजित की गईं, वहीं राज्य सरकार द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा शीर्ष समिति और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में टास्क फोर्स का गठन किया गया। विद्यार्थियों को उनकी रूचि, दक्षता और क्षमता के अनुसार शिक्षा व्यवस्था करने के प्रसार सफल हो रहे हैं। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में प्रदेश अग्रणी है। मध्यप्रदेश का सकल पंजीयन अनुपात राष्ट्रीय अनुपात 28.4 प्रतिशत के मुकाबले 28.9 प्रतिशत है जो एक उपलब्धि है। बहुविषयक शिक्षा में आगे मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालयों द्वारा बहुविषयक शिक्षा प्रदान करने और रोजगार के लिए उपयोगी पाठ्यक्रमों के संचालन की सराहना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर कुलगुरूओं और उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की है। बताया गया कि विद्यार्थियों को बहुविषयक दृष्टिकोण (मल्टी डिस्पलीनरी एप्रोच) के माध्यम से अन्य विषयों के अध्ययन के लिए प्रेरित करने के निरंतर प्रयास किए जाएं। वर्तमान में प्रदेश के लगभग एक लाख विद्यार्थी वाणिज्य के साथ कला और विज्ञान की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। कला संकाय के 18 हजार विद्यार्थी वाणिज्य और विज्ञान की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। मध्यप्रदेश में विज्ञान संकाय के ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 11 हजार है, जिन्होंने कला और वाणिज्य विषय का चयन किया है। इस तरह एक लाख 29 हजार विद्यार्थियों ने बहुविषयक शिक्षा का लाभ लिया है। विद्यार्थी ले रहे खेती किसानी की शिक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनेक बिन्दुओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। उच्च शिक्षा व्यवस्था में स्नातक स्तर पर कृषि जैसे विषय के अध्ययन के प्रावधान के भी अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। सात विश्वविद्यालयों और 18 शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों में बी.एससी. कृषि पाठ्यक्रम का संचालन हो रहा है। इन पाठ्यक्रामों का लाभ 1189 विद्यार्थी ले रहे हैं। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में सर्वाधिक 240 विद्यार्थी खेती किसानी की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश में पायलेट ट्रेनिंग के कोर्स के संचालन और एविएशन के सर्टिफिकेट कोर्स के लिए पांच विश्वविद्यालयों ने पहल की है। निश्चित ही युवाओं को इन पाठ्यक्रमों का रोजगार की दृष्टि से पूर्ण लाभ प्राप्त होगा। इन्क्यूबेशन केन्द्रों की सक्रिय भूमिका, र्स्टाट अप्स को पूर्ण प्रोत्साहन प्रदेश में उच्च शिक्षा क्षेत्र में कौशल विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 47 इन्क्यूबेशन सेन्टर प्रारंभ किए गए हैं। इनमें शासकीय विश्वविद्यालय में 16, निजी विश्वविद्यालय में 12 एवं शासकीय स्वशासी महाविद्यालय में 19 इन्क्यूबेशन केंद्र संचालित हैं। देवी अहिल्या विश्व विद्यालय इंदौर को केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पांच करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर इन्क्यूबेशन सेंटर को अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग ने अटल कम्युनिटी इन्नोवेशन सेंटर के लिए 2.5 करोड़ रूपए स्वीकृत किए हैं। इसी तरह जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के लिए 13.4 लाख रूपए स्वीकृत हुए हैं। प्रदेश के 2 निजी विश्वविद्यालयों में भी अटल इन्क्यूबेशन सेंटर्स स्थापित किए गए हैं। इनमें रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल और लक्ष्मीनारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (एलएनसीटी) भोपाल शामिल हैं। इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय स्तर पर 65 स्टार्ट अप्स तथा 2 निजी विश्वविद्यालयों में कुल 295 स्टार्ट अप्स प्रारंभ हुए हैं। स्टार्ट अप्स को विश्वविद्यालयों ने प्रोत्साहन राशि भी दी है। वर्तमान में कुल लाभान्वित विद्यार्थी संख्या 620 है। पेटेंट के अंतर्गत पेटेंट कार्यालय, भारत सरकार से विश्वविद्यालयों के इन्क्यूबेशन सेंटर्स को कुल 14 पेटेंट प्राप्त हुए हैं। इनमें देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में छह, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में चार, विक्रम विश्वविद्यालय में तीन और बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में एक पेटेंट शामिल हैं। समस्त विश्वविद्यालयों के कुल 27 पेटेंट के आवेदन स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं।  

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