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‘युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने का अभिनव प्रयास’, ‘बिगेस्ट भजन क्लबिंग’ में शामिल हुए सीएम साय

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित माधवास रॉक बैंड के ‘बिगेस्ट भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भजन क्लबिंग युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने का एक अभिनव और सकारात्मक प्रयास है। युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है और युवाओं के कंधों पर ही देश एवं प्रदेश का भविष्य टिका हुआ है। ऐसे आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक चेतना मंच ने किया था। प्रसिद्ध भजन बैंड माधवास रॉक बैंड की संगीतमयी प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्ति भाव से सराबोर हो गया। राधा-कृष्णमय माहौल में मुख्यमंत्री साय ने भी भक्तों के साथ फूलों की होली खेली। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमें अपनी जड़ों और प्राचीन परंपराओं को कभी नहीं भूलना चाहिए। भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है और यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि जब युवा अध्यात्म से जुड़ते हैं तो उनमें सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना और अधिक सशक्त होती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों के हित में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और राज्य की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज प्रदेश के 25 लाख 28 हजार से अधिक अन्नदाता किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई है। प्रदेश के 146 विकासखंडों में राशि अंतरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने बताया कि वे स्वयं बिल्हा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि होली से पहले किसानों के खातों में राशि पहुंचने से उनके परिवारजन हर्षोल्लास के साथ त्योहार मना सकेंगे। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, अजय जामवाल, आलोक डंगस, सामाजिक चेतना मंच के अध्यक्ष उज्ज्वल दीपक सहित अन्य पदाधिकारी, इस्कॉन रायपुर से स्वामी सुलोचन प्रभुजी, स्वामी तमाल कृष्ण प्रभुजी, स्वामी निखिलापति प्रभुजी, स्वामी रघुपति दास एवं बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।

साउथ अफ्रीका चुनौती बड़ी, लेकिन जिम्बाब्वे का इरादा अभियान को शानदार अंजाम देने का

नई दिल्ली सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो जाने के बावजूद जोश से भरी जिम्बाब्वे की टीम को अगर टी20 विश्व कप में अपने अभियान का शानदार अंत करना है तो उसे बेहतरीन फॉर्म में चल रहे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रविवार को यहां होने वाले सुपर आठ के मैच में अपनी गेंदबाजी की कमजोरियों को दूर करना होगा। जिम्बाब्वे ने लीग चरण में अपने ग्रुप में शीर्ष पर रहकर सुपर आठ में जगह बनाई थी लेकिन इस चरण में उसे वेस्टइंडीज और भारत के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद सिकंदर रजा की अगुवाई वाली यह टीम दक्षिण अफ्रीका को कड़ी टक्कर देने के लिए प्रतिबद्ध होगी। आईसीसी के इस टूर्नामेंट में दक्षिण अफ्रीका को हराना मुश्किल है और अगर जिम्बाब्वे को उसे चुनौती देनी है तो उसके गेंदबाजों को अच्छा प्रदर्शन करना होगा जिन्होंने वेस्टइंडीज और भारत के खिलाफ पिछले दो मैच में 250 से अधिक रन लुटाए। रजा को पता है कि वे बड़ी टीमों से तभी मुकाबला कर सकते हैं जब वे तीनों विभागों में अच्छा प्रदर्शन करें। रजा ने कहा, ‘‘विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ आपको अपने तीनों विभागों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। दुर्भाग्य से अगर एक भी विभाग कमजोर पड़ता है तो मैच आपके हाथ से खिसक जाता है। उम्मीद है की आखिरी मैच में हम तीनों विभाग में अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहेंगे।’’ जिम्बाब्वे कि गेंदबाजों ने पिछले दो मैच में काफी ढीली गेंदें फेंकी। उन्हें उसी अनुशासन के साथ गेंदबाजी करने की जरूरत है जैसा उन्होंने ग्रुप चरण में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ किया था। ग्रुप चरण में वह श्रीलंका की धीमी पिचों पर अजेय रहा, लेकिन बल्लेबाजी के लिए अनुकूल भारतीय परिस्थितियों में गलतियों की गुंजाइश काफी कम हो जाती है, जैसा कि उसने मुंबई और चेन्नई में की। बल्लेबाजी की बात करें तो ब्रायन बेनेट और तादिवानाशे मारुमानी की सलामी जोड़ी को पावरप्ले का भरपूर फायदा उठाना होगा। टूर्नामेंट में अब तक आउट नहीं होने वाले बेनेट ने भारत के खिलाफ यह साबित कर दिया कि वे छक्के भी लगा सकते हैं। उन्हें दक्षिण अफ्रीका के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने छक्के लगाने का कोई न कोई तरीका ढूंढना होगा। मार्को यानसन और लुंगी एनगिडी (प्रत्येक ने 11 विकेट लिए) अब तक दक्षिण अफ्रीका के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं। तेज गेंदबाज कैगिसो रबाडा, कॉर्बिन बॉश और मुख्य स्पिनर केशव महाराज ने उनका बखूबी साथ दिया है। दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष तीन बल्लेबाज कप्तान एडन मार्क्रम, क्विंटन डीकॉक और रयान रिकेल्टन बेहतरीन फॉर्म में हैं। रजा और उनकी टीम को उन्हें रोकने के लिए गेंदबाजी में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। डेविड मिलर, ट्रिस्टन स्टब्स और डेवाल्ड ब्रेविस सहित मध्य क्रम ने भी सुपर आठ में अपना प्रभाव दिखाया है। दक्षिण अफ्रीका ने टूर्नामेंट में अब तक केवल अहमदाबाद और दिल्ली में ही मैच खेले हैं। दिल्ली मंक पांच मैचों में से केवल एक बार ही 200 रन का आंकड़ा पार हुआ है, जब भारत ने नामीबिया के खिलाफ 209 रन बनाए थे। यह मैच एक तरह से औपचारिकता मात्र है क्योंकि दक्षिण अफ्रीका पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुका है और जिम्बाब्वे लगातार दो हार के बाद प्रतियोगिता से बाहर हो गया है। टीम इस प्रकार हैं: जिम्बाब्वे: सिकंदर रजा (कप्तान), ब्रायन बेनेट, रयान बर्ल, ग्रीम क्रेमर, ब्रैडली इवांस, क्लाइव मदांडे, टिनोटेंडा मापोसा, तदिवानाशे मारुमनी, वेलिंगटन मसाकाद्जा, टोनी मुनयोंगा, ताशिंगा मुसेकिवा, ब्लेसिंग मुजाराबानी, डायोन मायर्स, रिचर्ड नगारवा, बेन कुरेन। दक्षिण अफ्रीका: एडेन मार्क्रम (कप्तान), कॉर्बिन बॉश, डेवाल्ड ब्रेविस, क्विंटन डीकॉक, मार्को यानसन, जॉर्ज लिंडे, केशव महाराज, क्वेना मफाका, डेविड मिलर, लुंगी एनगिडी, एनरिक नॉर्किया, कैगिसो रबाडा, रयान रिकेल्टन, जेसन स्मिथ, ट्रिस्टन स्टब्स। मैच दोपहर तीन बजे भारतीय समयानुसार शुरू होगा।  

केंद्र सरकार ने PMGKAY योजना में फोर्टिफाइड चावल का वितरण रोका, न्यूट्रिशन में कमी की वजह से लिया फैसला

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले ‘फोर्टिफाइड चावल’ के वितरण को फिलहाल रोक दिया है. सरकार ने यह कदम चावल के लंबे समय तक भंडारण के दौरान पोषक तत्वों के खराब होने की चिंताओं के बीच उठाया है. क्यों लिया गया यह फैसला? खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आईआईटी खड़गपुर को एक विशेष अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इस स्टडी में यह जांचना था कि अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में फोर्टिफाइड चावल के दाने कितने समय तक अपनी गुणवत्ता बनाए रखते हैं. रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. अध्ययन के अनुसार, नमी, तापमान और गोदामों में रखने के तरीके का चावल की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि लंबे समय तक रखे रहने और सामान्य रखरखाव के दौरान इन चावलों में मौजूद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इससे जिस मकसद के लिए चावल में पोषण मिलाया गया था, वह पूरा नहीं हो पा रहा है. भंडारण की समस्या सबसे बड़ी चुनौती भारत के सरकारी गोदामों में चावल की उपलब्धता जरूरत से कहीं ज्यादा है. आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय पूल में लगभग 674 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध है, जबकि सालाना जरूरत सिर्फ 372 लाख मीट्रिक टन की है. इस कारण चावल को गोदामों में 2 से 3 साल तक रखा जाता है. इतने लंबे समय तक फोर्टिफाइड चावल में मिलाए गए विटामिन और आयरन अपनी शक्ति खो देते हैं. आम जनता पर क्या होगा असर? सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से राशन कार्ड धारकों को मिलने वाले अनाज की मात्रा में कोई कमी नहीं आएगी.     राशन मिलता रहेगा: लाभार्थियों को उनके हक का पूरा चावल मिलेगा, बस वह अब फोर्टिफाइड (मिश्रित) नहीं होगा.     इन योजनाओं पर असर: यह फैसला PDS (राशन दुकान), आंगनवाड़ी (ICDS) और स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील (PM POSHAN) पर लागू होगा.     राज्यों को छूट: खरीफ सीजन 2025-26 के लिए राज्यों को छूट दी गई है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल बांट सकते हैं. क्या है फोर्टिफाइड चावल? बता दें कि कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए सामान्य चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व मिलाए जाते हैं. इसे 2019 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था और मार्च 2024 तक इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया था. आगे क्या? खाद्य मंत्रालय के अनुसार, यह रोक स्थायी नहीं है. सरकार अब एक ऐसी नई तकनीक या सिस्टम पर काम कर रही है जिससे चावल के पोषक तत्व लंबे समय तक खराब न हों. जैसे ही कोई बेहतर तरीका मिल जाएगा, इस योजना को फिर से शुरू किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ऐलान: कृषि को पारंपरिक उत्पादन से ऊपर उठाकर लाभकारी व्यवसाय बनाएंगे

कृषक कल्याण वर्ष-2026 कृषि को पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़ाकर बनाया जायेगा लाभकारी व्यवसाय : मुख्यमंत्री डॉ.यादव म.प्र.को देश के कृषि पॉवर-हाउस के रूप में किया स्थापित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने पिछले दशक में कृषि क्षेत्र में 16 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक विकास दर हासिल कर स्वयं को देश के ‘कृषि पॉवर-हाउस’ के रूप में स्थापित किया है। फसल उत्पादन, उत्पादकता, दुग्ध और मत्स्य पालन में हुई। इस अभूतपूर्व प्रगति के बाद अब राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य कृषि को पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़ाकर एक ‘लाभकारी व्यवसाय’ के रूप में परिवर्तित करना है। इस संकल्प के केंद्र में कृषि के उत्पादन और उत्पादकता को तकनीक के माध्यम से बढ़ाते हुए, मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जोड़ना है। समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश के लिए वर्ष-2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि और किसानों पर केन्द्रित पूरे वर्ष संचालित होने वाली गतिविधियों से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि को ‘लाभकारी व्यवसाय’ बनाने के इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सरकार कृषि अनुसंधान और मौसम आधारित जोखिम प्रबंधन को एक नई दिशा देने जा रही है। इस संकल्प के अंतर्गत राज्य की विशिष्ट फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करते हुए उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्रों की स्थापना की जा रही है, इसी क्रम में डिंडौरी में स्थापित होने जा रहे ‘मध्यप्रदेश राज्य अन्न अनुसंधान केंद्र’ के माध्यम से मिलेट्स के उत्पादन एवं पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। इसी कड़ी में, ग्वालियर में सरसों अनुसंधान केंद्र और उज्जैन में चना अनुसंधान केंद्र की स्थापना कर इन प्रमुख फसलों की गुणवत्ता और पैदावार को बढ़ाने पर विशेष बल दिया जायेगा। ‘विदेश अध्ययन भ्रमण योजना’ कृषि क्षेत्र में वैश्विक नवाचारों को आत्मसात करने के लिए किसानों और अधिकारियों के लिए ‘विदेश अध्ययन भ्रमण योजना’ को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है, जिससे विश्व की उन्नत तकनीकों को स्थानीय स्तर पर लागू किया जा सके। इसके साथ ही, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खेती के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जो किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त और मजबूत स्रोत बनेगी। खेती की मौसम पर निर्भरता और उससे जुड़ी अनिश्चितताओं को कम करने के लिए सरकार तकनीक-आधारित जोखिम प्रबंधन पर विशेष निवेश कर रही है। इसके तहत पूरे प्रदेश में ‘विंडस’ (Weather Information Network Data System) विकसित किया जा रहा है, जो किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान और तात्कालिक कृषि सलाह (एग्री-एडवाइजरी) सीधे उनके मोबाइल पर उपलब्ध कराएगा। यह प्रणाली न केवल प्राकृतिक आपदाओं से फसल को बचाने में मदद करेगी, बल्कि बुवाई और कटाई के समय को वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगी। किसानों को दिया जायेगा पूर्ण सुरक्षा कवच किसानों को पूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से अब मौसम आधारित बीमा योजना का दायरा बढ़ाकर उसमें उद्यानिकी फसलों को भी शामिल किया जा रहा है। अनुसंधान, विविधीकरण और डिजिटल वेदर मैनेजमेंट का यह एकीकृत संगम न केवल कृषि को जोखिम मुक्त बनाएगा, बल्कि ‘समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश’ के संकल्प को वास्तविकता में बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता के नए सोपान पर खड़ा करेगा। 10-दिशात्मक रणनीति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने व्यापक ’10-दिशात्मक रणनीति’ तैयार की है। इसके प्रथम आयाम के तहत -अन्न (मिलेट्स), चना और सरसों जैसी फसलों पर गहन शोध और उर्वरकों के अग्रिम भंडारण पर जोर दिया गया है। साथ ही तिलहन भावान्तर व्यापीकरण, उड़द/मूंगफली, गन्ना क्षेत्र विस्तारण, ई-विकास व्यापीकरण, उर्वरक अग्रिम भंडारण, पराली से उर्जा प्रबंधन इत्यादि कार्य सम्मिलित हैं। द्वितीय आयाम फसल विविधीकरण और प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन (मूल्य स्थिरीकरण)’ पर केंद्रित है, जिससे आलू-प्याज-टमाटर जैसी फसलों के दाम गिरने पर भी किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें। तृतीय आयाम पूरी तरह से “प्राकृतिक मध्यप्रदेश” मिशन को समर्पित है, जहाँ रसायन मुक्त खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। चतुर्थ और पंचम आयाम में संसाधनों के इष्टतम उपयोग, जैसे ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0’ और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को शामिल किया गया है। कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के लिए 10 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट की स्थापना इस अभियान का एक मुख्य आकर्षण है। छठे से आठवें आयाम तक का ध्यान कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, “MP ग्लोबल एग्री ब्रांडिंग” और ‘एग्री-हैकाथॉन’ जैसे नवाचारों पर है। अंतिम दो आयाम डिजिटल गवर्नेस और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं, जिसमें एआई (AI)-आधारित कृषि परामर्श और क्यूआर कोड (QR Code) आधारित फार्म ट्रेसेबिलिटी शामिल है। संस्थागत सुधार और शैक्षिक पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष 2026 केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करने की पहल है। अनुसंधान केन्द्रों की स्थापना एवं कृषकों का क्षमता संवर्धन इस वर्ष का महत्वपूर्ण घटक होगा। इसी अनुक्रम में सरकार द्वारा कृषि विभाग और मंडी बोर्ड में रिक्त पदों की सीधी भर्ती भी की जाएगी।  

8th Pay Commission में फैमिली यूनिट बढ़ाने से 66% तक बढ़ेगी सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन पर भी असर

नई दिल्ली  आठवें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग से केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 66% तक उछाल आ सकता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर परिवार की गणना 3 की जगह 5 यूनिट पर की जाए, तो न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन (8th Pay Commission salary and pension hike) तीनों में बड़ा बदलाव संभव है। दरअसल, नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए एक साझा मांग पत्र तैयार करने को राष्ट्रीय राजधानी में हफ्ते भर की बैठक बुलाई है। यह मांग देश के 50 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स से जुड़ी है। चर्चा का सबसे अहम मुद्दा है- फैमिली यूनिट (8th Pay Commission family unit) का विस्तार। सातवें वेतन आयोग में कैसे काउंट हुआ था वेतन? 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन की गणना 3 कंजम्प्शन यूनिट के आधार पर की गई थी। इसमें कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चों को शामिल किया गया। यह गणना डॉ. वालेस एक्रोयड के फॉर्मूले पर आधारित थी, जिसमें 2,700 कैलोरी प्रति वयस्क, सालाना 72 गज कपड़ा और मकान का खर्च जैसे मानक तय किए गए थे। मकसद था- एक परिवार को सम्मानजनक जीवन के लिए कितनी आय चाहिए, इसका अंदाजा लगाना। फैमिली यूनिट में माता-पिता भी हों शामिल! ऑल इंडिया एनपीएस एप्लॉईज फेजरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल (Dr Manjeet Singh Patel) का कहना है कि असल में कई कर्मचारी अपने आश्रित माता-पिता का खर्च भी उठाते हैं। इसलिए फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 की जाए। चूंकि न्यूनतम वेतन सीधा-सीधा यूनिट की संख्या से जुड़ा होता है, इसलिए 3 से 5 यूनिट होने पर बेस कैलकुलेशन वैल्यू में गणितीय रूप से 66.67% की बढ़ोतरी हो सकती है। यूनियनों का दावा है कि इससे न्यूनतम बेसिक सैलरी में करीब 66% तक उछाल आ सकता है। फैमिली यूनिट फॉर्मूला क्या है? 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन की गणना 3 यूनिट के आधार पर हुई थी. कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चे. यह गणना डॉ. वॉलेस अयक्रॉयड के फॉर्मूले पर आधारित थी, जिसमें परिवार की बुनियादी जरूरतें शामिल थीं.     रोजाना 2700 कैलोरी भोजन     सालाना कपड़ों की जरूरत     रहने का खर्च     इसका मकसद था सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी न्यूनतम आय तय करना.     अब क्या मांग की जा रही है?     कर्मचारी यूनियन चाहती हैं कि फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 की जाए, जिसमें आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए. सीधे शब्दों में     पहले गणना = 3 यूनिट     नया प्रस्ताव = 5 यूनिट गणित के हिसाब से     5 ÷ 3 = 1.66     यानी बेसिक गणना में लगभग 66.67% बढ़ोतरी.     न्यूनतम वेतन पर असर     अभी 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 है. कर्मचारी संगठन मांग कर रहे हैं.     फिटमेंट फैक्टर 3.25 तक (पहले 2.57)     हर साल 7% वेतन वृद्धि     पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली     अगर बेस सैलरी बढ़ती है, तो पूरी सैलरी स्ट्रक्चर ऊपर चला जाएगा. फिटमेंट फैक्टर क्यों बढ़ सकता है? फिटमेंट फैक्टर वही गुणांक है जिससे पुरानी सैलरी नई सैलरी में बदली जाती है. फैमिली यूनिट बढ़ने से न्यूनतम वेतन की गणना बड़ी हो जाएगी, जिससे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग मजबूत हो जाती है. पेंशनर्स पर क्या असर? पेंशन आखिरी बेसिक सैलरी का 50% होती है. इसलिए अगर नई बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो पेंशन भी उसी अनुपात में बढ़ेगी. यही वजह है कि पेंशनर्स संगठन भी इस पर नजर बनाए हुए हैं. कर्मचारी संगठन क्यों जरूरी बता रहे बदलाव?     यूनियनों का कहना है:     महंगाई तेजी से बढ़ी है     कई कर्मचारी माता-पिता की जिम्मेदारी उठाते हैं     3 यूनिट मॉडल आज के परिवार की हकीकत नहीं दिखाता     उनका मानना है कि सिर्फ छोटी बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सैलरी ढांचे में बड़ा बदलाव जरूरी है. अभी स्थिति क्या है? NC-JCM अलग-अलग विभागों की मांगों को जोड़कर सरकार को अंतिम प्रस्ताव देगा. इसमें फैमिली यूनिट विस्तार, न्यूनतम वेतन, पेंशन समानता और भत्तों से जुड़े सुझाव शामिल होंगे. सरकार 5-यूनिट प्रस्ताव मानती है या नहीं, यह अभी साफ नहीं है. लेकिन अगर मंजूरी मिलती है, तो सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बात 66% बढ़ोतरी का आंकड़ा कोई अनुमान नहीं, बल्कि वेतन गणना के फॉर्मूले में बदलाव से जुड़ा गणित है.अगर फैमिली यूनिट 3 से 5 हुई तो बेस सैलरी लगभग 66.67% बढ़ेगी. फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने का आधार मजबूत होगा. न्यूनतम वेतन ₹54,000 तक मांग की जा सकती है. पेंशन भी उसी अनुपात में बढ़ेगी अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या सरकार फैमिली यूनिट फॉर्मूला बदलने को मंजूरी देगी? तो ऊपर खिसक जाएगी सैलरी मैट्रिक्स? फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक वेतन 18,000 रुपए है। अगर बेसिक पे बढ़ता है, तो पूरी सैलरी मैट्रिक्स ऊपर खिसक जाएगी। यूनियनें 3.25 या उससे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की भी मांग कर रही हैं। साथ ही सालाना इंक्रीमेंट दर 3% से बढ़ाकर 7% करने की मांग है। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी बहाली, NPS और UPS को खत्म करने की मांग भी उठ रही है। यह मांग पेंशनर्स के लिए भी अहम है, क्योंकि बेसिक पेंशन आखिरी बेसिक सैलरी का 50% होती है। अगर 5 यूनिट फॉर्मूला लागू होता है, तो पेंशन में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होगी। अब नजर सरकार के फैसले पर है कि क्या आठवां वेतन आयोग सिर्फ इंक्रीमेंट देगा या ढांचा बदलकर बड़ी सैलरी हाइक? खैर, ये आने वाले दिनों में क्लियर हो सकता है।  

भोपाल के बड़ा तालाब पर ‘बड़ों’ का कब्जा, कांग्रेस विधायक और कई VIP संस्थानों पर लाल निशान

 भोपाल  राजधानी भोपाल वासियों की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब की सीमा तय करने के लिए किए जा रहे सीमांकन के दौरान कई चौंकाने वाले कब्जे देखने को मिले। नायब तहसीलदार के.के पंडोले के नेतृत्व में आरआई और पटवारियों ने शुक्रवार की दोपहर 02 बजे से सीमांकन कार्रवाई शुरू की, जो शाम 05 बजे तक चली। बता दें कि, बुधवार से शुरू हुए बड़े तालाब के सीमांकन के दौरान कैचमेंट दायरे 50 मीटर में राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल को आवंटित शासकीय बंगला, के.के हाउस, गुलबाग लॉन, आईएएस मुजीबउर्रहमान के बंगले का हिस्सा समेत 25 से अधिक निर्माण चिह्नित किए गए थे। चार घंटे चला सीमांकन बताया जा रहा है कि, राजस्व अमला सीमांकन करते हुए खानूगांव स्थित कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के इंदिरा प्रियदर्शनी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स पहुंचा, जहां तालाब के फुल टैंक लेवल से सीमांकन करते हुए 50 मीटर कैचमेंट दायरा तय करने पर सामने आया कि, शैक्षणिक संस्थान कैचमेंट क्षेत्र के पास ही बना है। यहां पटवारी अरविंद गिरी ने नायब तहसीलदार के.के पंडोले की निगरानी ने लाल निशान लगाकर तालाब की सीमा निर्धारित की। आर्मी वाटर स्पोर्ट केंद्र के बाद मिले अवैध निर्माण राजस्व अमले ने बड़ा तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में सेना के वाटर स्पोर्ट सेंटर के आगे जब सीमांकन किया तो कैचमेंट में पक्के मकान, बाउंड्री वाल, रेस्टोरेंट, फैक्ट्री आदि का निर्माण होना मिला। इतना ही नहीं, कुछ दूर चलने के बाद पता चला कि एक बड़े फार्म हाउस की तरह निर्माण कैचमेंट में किया जा रहा था। इसके पास ही भैंस भी बंधी हुई थीं। यहां मजदूर दीवार उठाने का काम कर रहे थे। पूछताछ में उन्होंने आदिल नाम के व्यक्ति द्वारा निर्माण कार्य किया जाना बताया। यह निर्माण करीब दो एकड़ से अधिक जमीन में किया जा रहा था, जिसे नायब तहसीलदार ने चिह्नित करवाया है। उन्होंने मौके पर बताया कि अब तक का यह सबसे बड़ा अतिक्रमण कैचमेंट क्षेत्र में मिला है, जिसे जल्द से जल्द जमींदोज करने की कार्रवाई की जाएगी। कैचमेंट में झुग्गी सहित धार्मिक स्थल खानूगांव में बड़ा तालाब के कैचमेंट में एक-दो नहीं, बल्कि दो दर्जन से अधिक अवैध मकान मिले हैं। सीमांकन के दौरान एक परिवार तालाब के अंदर ही झुग्गी बनाकर रहता हुआ मिला। पटवारी ने मौके पर ही बच्चों से जानकारी ली। इसके आगे कुछ लोगों ने तालाब किनारे स्थित जमीन पर निजी संपत्ति का बोर्ड लगा रखा था। यहां आगे ही राजस्व अमले ने कैचमेंट में बने एक धार्मिक स्थल के कुछ हिस्से को भी चिह्नित किया है। पहले भी जारी हुए हैं आदेश NGT की सेंट्रल बेंच ने 15 फरवरी को आर्या श्रीवास्तव की पिटीशन पर अपने ऑर्डर में भोपाल म्युनिसिपल कमीशन (BMC) के वकील से सख्ती से कहा था कि वह जमीन पर टाइटल या हक तय करने के लिए नहीं है, बल्कि अतिक्रमण हटाना चाहता है। उन्होंने कहा कि भदभदा की तरफ अपर लेक के किनारे 35 अतिक्रमण पहचाने गए थे, लेकिन लोकल लोगों के विरोध के कारण सिर्फ 9 ही हटाए जा सके। कुछ मामलों में, पार्टियों के अधिकार, टाइटल और हित को लेकर कोर्ट में केस पेंडिंग है। कांग्रेस नेता की जमीन भी कैचमेंट में इसी के पास स्थित स्कूल के मैदान से होते हुए अमला आगे बढ़ा तो कांग्रेस नेता अरुणेश्वर सिंहदेव की जमीन का कुछ हिस्सा कैचमेंट में पाया गया, जिसमें खेती चल रही है। बता दें कि, 04 महीने पहले खानूगांव में जब राजस्व अमले ने सीमांकन किया था, तब कांग्रेस विधायक के शैक्षणिक संस्थान के पीछे कीचड़-दलदल होने की वजह से निशान लगाया था, लेकिन तब तक कैचमेंट की सीमा तय नहीं हुई थी। कहां मिले कब्जे     टीटी नगर अनुभाग के ग्राम सेवनिया गौड़, धर्मपुरी, प्रेमपुरा, आमखेड़ा, पीपलखेड़ी, कोटरा सुल्तानाबाद, बरखेड़ी खुर्द में कुल 108 निर्माण मिले हैं। इनमें अधिकांश पक्के मकान शामिल हैं, जबकि कुछ झुग्गियां भी हैं। भदभदा इलाके में दो दिन पहले कार्रवाई भी हुई है, जबकि आगे बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी है।     खानूगांव के आसपास 3 मकान, हलालपुरा में 7, कोहेफिजा में 35 मकान दायरे में आ रहे हैं।     खानूगांव में 15 सरकारी जमीन पर कब्जे सामने आए हैं। शुक्रवार को विधायक आरिफ मसूद के कॉलेज की बाउंड्रीवॉल के पास भी राजस्व अमले ने लाल निशान लगाए हैं।     वीआईपी रोड पर एक मंत्री और आईएएस के बंगले के पास भी लाल निशान लगाए जा चुके हैं।     हुजूर के मुगालिया छाप, खजूरी में सीमांकन चल रहा है। यहां भी बड़े स्तर पर अतिक्रमण मिला है। होली से पहले पूरा होगा सीमांकन कलेक्टर सिंह ने बड़ा तालाब के आसपास के हिस्से के अधिकार क्षेत्र वाले सभी एसडीएम को होली से पहले हर हाल में सीमांकन पूरा करने को कहा है। साथ ही एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को वाटर बॉडी में मिलने वाले गंदे नालों का पता लगाने की बात कही गई है। पानी को दूषित करने वाले सभी सोर्स का पता लगाया जाएगा। ऐसे दो स्तर पर होगी कार्रवाई बता दें कि वेटलैंड एक्ट 16 मार्च 2022 को लागू हुआ था। ऐसे में इसके बाद एफटीएल के दायरे में होने वाले सभी निर्माण एक तरह से अवैध ही माने जाएंगे। चाहे इसे लेकर निगम या पंचायत स्तर से कोई भी अनुमति दी ही क्यों न गई हो। शहर में 50 मीटर और ग्रामीण में 250 मीटर का पैमाना निर्धारित है। यदि इससे पहले का कोई निर्माण है, लेकिन वह तालाब की जद में आ रहा है तो संबंधित से नगर निगम, पंचायत, टीएंडसीपी, पर्यावरण, वन आदि संबंधित विभागों की अनुमति के बारे में दस्तावेज मांगे जाएंगे। साथ ही परमिशन देने वालों की जानकारी भी ली जाएगी। अब तक 3 बार सर्वे, ठोस कार्रवाई नहीं बता दें कि बड़ा तालाब का बीते दस साल में 3 बार सर्वे हो चुका है। इनमें बड़ी संख्या में अतिक्रमण सामने आए, लेकिन सर्वे रिपोर्ट का आज तक पता नहीं है। इस वजह से बैरागढ़, खानूगांव, सूरज नगर, गौरागांव, बिसनखेड़ी समेत कई जगहों पर अतिक्रमण हुए। कई मैरिज गार्डन, फार्म हाउस, स्कूल-कॉलेज, घरों की सीमाएं बड़ा तालाब में हैं। 5 प्वॉइंट में पढ़िए पूरी खबर का सार 1. रामसर साइट और वेटलैंड नियमों के तहत तालाब के FTL (Full Tank Level) से 50 मीटर … Read more

1 मार्च से आपकी जेब पर असर डालने वाले 5 बड़े नियमों में बदलाव

नई दिल्ली 1 मार्च 2026 से भारत में कई नियम बदलने जा रहे हैं, जो आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर सीधा असर डालेंगे. ये बदलाव ट्रेन टिकट बुकिंग से लेकर एलपीजी सिलेंडर की कीमत, सिम कार्ड, बैंक अकाउंट, यूपीआई और मैसेजिंग ऐप्स तक फैले हुए हैं. ज़ी बिजनेस और दूसरे सोर्सेज से मिली जानकारी के मुताबिक, ये नियम सुरक्षा बढ़ाने, फ्रॉड रोकने और सर्विस बेहतर बनाने के लिए लाए जा रहे हैं. भारतीय पढ़ने वालों के लिए आसान भाषा में बताता हूं कि क्या-क्या बदलाव आ रहे हैं.  रेलवे टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव भारतीय रेलवे 1 मार्च से अपनी डिजिटल सर्विस को और भी हाईटेक बना रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार पुराने यूटीएस ऐप की जगह अब नया RailOne ऐप जगह ले लेगा. इसके साथ ही जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने के लिए आधार बेस्ड ऑथेंटिकेशन को जरूरी किया जा सकता है, जिससे टिकट बुकिंग में क्लियरिटी आएगी. इसके अलावा सीनियर सीटीजन के लिए लोअर बर्थ प्रायोरिटी को लेकर भी नई गाइडलाइंस आ सकती हैं. सबसे बड़ा बदलाव ट्रेन टिकट बुकिंग में है. भारतीय रेलवे अब पुराना यूटीएस ऐप बंद कर रहा है. 1 मार्च से अनारक्षित टिकट, जनरल टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने के लिए नया रेलवन ऐप इस्तेमाल करना होगा. ये ऐप पूरी तरह एक्टिव हो जाएगा और आईआरसीटीसी के अलावा ये नया विकल्प होगा. अब स्टेशन पर काउंटर से या पुराने तरीके से टिकट लेना मुश्किल हो सकता है, इसलिए यात्रा करने वाले लोग पहले से ऐप डाउनलोड कर लें. एलपीजी सिलेंडर की कीमत एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हर महीने की तरह बदलाव हो सकता है. 1 मार्च को घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए रेट घोषित हो सकते हैं. क्रूड ऑयल की कीमतों के आधार पर ये बढ़ या घट सकते हैं, जिससे रसोई गैस का खर्च सीधा प्रभावित होगा. आम परिवारों के लिए ये बहुत जरूरी है क्योंकि गैस की कीमतें रोज के बजट पर असर डालती हैं. सिम बाइंडिंग जरूरी सिम कार्ड और मैसेजिंग ऐप्स में बड़ा नियम आ रहा है. 1 मार्च से सिम बाइंडिंग अनिवार्य हो जाएगी. मतलब व्हाट्सऐप, टेलीग्राम जैसे ऐप्स को एक्टिव सिम से लिंक करना जरूरी होगा. अगर सिम नहीं जुड़ा तो ऐप इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. ये नियम डिजिटल फ्रॉड और फेक अकाउंट रोकने के लिए है. व्हाट्सऐप यूजर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि मल्टी-डिवाइस यूज और वेब वर्जन पर नई पाबंदियां आ सकती हैं. दूरसंचार विभाग ने कहा है कि ये सुरक्षा के लिए है और कोई ढील नहीं मिलेगी. मिनिमम बैलेंस नियम में बदलाव बैंक और फाइनेंस में भी बदलाव हैं. कुछ बैंक मिनिमम बैलेंस नियम में बदलाव कर सकते हैं या सेविंग अकाउंट के रूल अपडेट हो सकते हैं. साथ ही क्रेडिट स्कोर की साप्ताहिक चेकिंग या यूपीआई ट्रांजैक्शन में ज्यादा सुरक्षा फीचर्स जैसे ओटीपी या लिमिट चेंज आ सकते हैं. ये सब फ्रॉड रोकने और यूजर को सुरक्षित रखने के लिए हैं. इसके अलावा कुछ बैंक अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़े बदलाव भी कर सकते हैं, जिनमें रिवॉर्ड प्वाइंट्स या फिर चार्जेसेस शामिल हो सकते हैं. सीएनजी और पीएनजी के रेट्स रसोई गैस के साथ-साथ सीएनजी और पीएनजी के रेट्स भी हर महीने की शुरुआत में रिव्यू किए जाते हैं. 1 मार्च की सुबह ही नेचुरल गैस की कीमतों में बदलाव हो सकता है, जिसका सीधा असर आपकी कार के फ्यूल के खर्च पर पड़ेगा और घरेलू बजट पर भी बोझ बढ़ सकता है. अगर कीमतें बढ़ती हैं तो सीएनजी से चलने वाली कार या ऑटो रिक्शा चलाने वालों को ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे, वहीं पीएनजी से कनेक्शन वाले घरों में खाना पकाने का खर्च भी ऊपर जा सकता है. ये बदलाव आम आदमी की डिजिटल लाइफ, यात्रा और घरेलू खर्च को प्रभावित करेंगे.

सोने-चांदी से नहीं, इस मेटल में है दोगुना होने का दम, एक्‍सपर्ट ने किया विश्लेषण

नई दिल्‍ली पिछले कुछ सालों में सोना और चांदी ने निवेशकों को कमाल का रिटर्न दिया है, लेकिन अब एक नए मेटल का उदय हो रहा है. एक जानकार का कहना है कि इसकी कीमत आने वाले समय में डबल होने वाली हैं. एक्‍सपर्ट का कहना है कि AI और विद्युतीकरण की असीमित डिमांड के कारण दुनिया एक विशाल कमोडिटी सुपरसाइकिल के कगार पर खड़ी है, जिस कारण कॉपर मेटल की कीमतों में तगड़ी उछाल आ सकती है.   इवानहो माइंस के संस्थापक और सह-अध्यक्ष रॉबर्ट फ्रीडलैंड के अनुसार, उत्पादन लागत में वृद्धि और अभूतपूर्व मांग के चलते तांबे की कीमतें और भी बढ़ने वाली हैं. जनवरी 2026 में सऊदी अरब में आयोजित फ्यूचर मिनरल्स फोरम 2026 में बोलते हुए, खनन क्षेत्र के दिग्गज ने लाल धातु (तांबे) के लिए बेहद आशावादी तस्वीर पेश की है. जहां पिछले पांच वर्षों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 53 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रही हैं, वहीं फ्रीडलैंड ने बताया कि इसी अवधि के दौरान तांबे की कीमत अभी कम तेजी के बाद भी सर्वकालिक उच्च स्तर 13,400 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, लेकिन आगे और भी तेजी की संभावना है.  क्‍यों आएगी कॉपर में तेजी?  कमोडिटी की कीमतों में इस उछाल का एक बड़ा कारण AI डेटा सेंटर्स का तेजी से विस्तार है. उन्होंने बताया कि 2026 के अंत तक, ग्‍लोबल डेटा सेंटर्स उतनी ही बिजली की खपत करेंगे जितनी जापान, जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. फ्रीडलैंड ने शिकागो में माइक्रोसॉफ्ट के एक हालिया ‘बेबी डेटा सेंटर’ का उदाहरण दिया, जिसके लिए अकेले 20 लाख किलोग्राम तांबे की आवश्यकता थी. उन्होंने कहा कि टेस्ला के हर सर्वर को सोना, लोहा, गैलियम, एंटीमनी, टंगस्टन, चांदी, कई रेयर अर्थ मिनरल्‍स, इंडियम, टैंटलम, पैलेडियम, बेरियम, नाइओबियम और टाइटेनियम की आवश्यकता होती है. उन्‍होंने कहा कि अगर ग्रीन एनर्जी चेंजेज या एआई सेंटर्स के सपनों को इग्‍नोर करें तो भी कॉपर जैसे मेटल की भारी कमी है.  बहुत बड़े लेवल पर तांबे की आवश्‍यकता फ्रीडलैंड ने कहा कि अपनी वर्तमान जीवनशैली को बनाए रखने के लिए, दुनिया को ठीक उसी तरह चलाने के लिए, जैसा वह चलती आ रही है, हमें अगले 18 वर्षों में 70 करोड़ मीट्रिक टन तांबा और निकालना होगा. इस विशाल आंकड़े को समझने के लिए, यह ठीक उतनी ही मात्रा है, जितना तांबा मानव जाति ने गुफाओं से बाहर आने के बाद से 10,000 वर्षों में निकाला है. 40 फीसदी हिसा तो यहां खत्‍म हो जाएगा फ्रीडलैंड ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की इस विशाल मांग को पूरा करने के लिए 2050 तक हर साल छह नए टॉप कैटेगरी की तांबा खदानों को चालू करना होगा. उस नए उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से ग्रिड अपग्रेड, इलेक्ट्रिकसिटी और डेटा केंद्रों द्वारा उपयोग किया जाएगा. क्‍यों डबल हो सकती है कॉपर की कीमत?  उन्होंने कहा कि 1900 से लेकर अब तक, तांबे की एक यूनिट के उत्पादन के लिए आवश्यक ऊर्जा 16 गुना बढ़ गई है और तांबे की एक यूनिट बनाने के लिए आवश्यक पानी की मात्रा दोगुनी हो गई है. उन्होंने आगे कहा कि इसलिए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भविष्य की खनन जरूरतों को पूरा करने के लिए तांबे की कीमत दोगुनी होनी चाहिए.

डिजिटल भविष्य की ओर कदम, मोदी और अबू धाबी क्राउन प्रिंस ने AI साझेदारी पर की अहम चर्चा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच गुरुवार को द्विपक्षीय बैठक हुई। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुई मुलाकात में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, “भारत-यूएई के ऐतिहासिक रिश्तों को याद करते हुए, दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग पर चर्चा की और अलग-अलग क्षेत्रों में हुई तरक्की पर खुशी जताई। उन्होंने एआई में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।” अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, यूएई के राष्ट्रपति की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हो रहे हैं। ग्लोबल साउथ में पहली बार हो रहे इस अहम इवेंट में कई राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, वरिष्ठ अधिकारी, टेक एक्सपर्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर के खास फैसले लेने वाले लोग शामिल हो रहे हैं। शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए बुधवार देर रात नई दिल्ली पहुंचे थे। केंद्रीय ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। एमईए ने एक्स पोस्ट में लिखा, “एआई इम्पैक्ट समिट में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का भारत में स्वागत है। केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने एयरपोर्ट पर पहुंच माननीय का स्वागत किया। भारत और यूएई एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में भरोसेमंद पार्टनर हैं जो एक स्मार्ट और साझा भविष्य के लिए एआई को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।” पीएम मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया। लोगों को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि यह ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का पल है कि एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी भारत में की गई है, साथ ही उन्होंने तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल की तुरंत जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी का दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ऐतिहासिक एआई समिट में स्वागत करता हूं। भारत, जहां यह समिट हो रहा है, एक ऐसा देश है जो दुनिया के 1/6 हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है; यह एक युवा देश है, दुनिया के सबसे बड़े टेक पूल का केंद्र है, और टेक इकोसिस्टम का उदाहरण है। भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है और अभूतपूर्व तरीके से उसे अपनाता भी है।” उन्होंने कहा, “140 करोड़ भारतीयों की तरफ से शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले राष्ट्राध्यक्षों, वैश्विक एआई इकोसिस्‍टम के नेताओं और इनोवेटर्स का हार्दिक स्वागत करता हूं। भारत में इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना न केवल देश के लिए बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए भी गर्व की बात है। उनके भाषण के दौरान, बैकग्राउंड में एआई-इनेबल्ड साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन (एआई-चालित सांकेतिक भाषा व्याख्या) दिखाया गया, जो समिट में डिस्कस की जा रही टेक्नोलॉजी के प्रैक्टिकल एप्लीकेशन को दिखाता है।

कौशल और तकनीक से विकसित भारत@2047 की संकल्पना होगी साकार

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारत हमेशा से “कौशल” का देश रहा है। भारत में, कौशल परम्परागत रूप से विद्यमान रहा है और यही कौशल अतीत में भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी रहा है। आज भी ग्रामीण भारत में, कौशल पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित हो रहा है। ग्रामीण भारत के इस परंपरागत कौशल को वर्तमान परिदृश्य की आवश्यकता अनुरूप, आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। मंत्री  परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में, राज्य सरकार युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।  परमार ने कहा कि उद्योगजगत एवं शैक्षणिक संस्थानों के मध्य खाई को पाटने के लिए सतत् कार्य कर रहे हैं। इसके लिए तकनीकी शिक्षा में, उद्योगजगत की आवश्यकता अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण किए जा रहे हैं। उद्योगों को इंडस्ट्री रेडी दक्ष मानव बल तैयार करने के लिए इंजीनियरिंग एवं पॉलीटेक्निक संस्थानों में एक्सीलेंस सेंटर स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री  परमार गुरुवार को भोपाल स्थित क्रिस्प संस्थान (सेंटर फॉर रिसर्च एंडइंडस्ट्रियल स्टॉफ परफॉर्मेंस) में, बीपीसीएल (भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के सीएसआर अंतर्गत प्रशिक्षण शिविर परियोजना “स्वावलंबन” के समापन समारोह में, प्रशिक्षित युवाओं को सम्बोधित कर रहे थे। मंत्री  परमार ने कहा कि भारत को पुनः विश्वमंच पर अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए, युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण अपनाना होगा।  परमार ने कहा कि रोजगार प्राप्त करने वाले भी तैयार हों और रोजगार देने वाले भी तैयार हों, इसके लिए स्टार्टअप संस्कृति और स्किल आधारित रोजगार ही भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।  परमार ने ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रिस्प संस्थान के प्रयासों की सराहना की।  परमार ने कहा कि ग्रामीण भारत में आज भी स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की संस्कृति प्रचलन में हैं। स्वदेशी के भाव को आत्मसात करने से, आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना साकार होगी।  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वमंच पर सिरमौर बनाने के लिए सभी के संकल्पित प्रयासों एवं पुरुषार्थ की आवश्यकता है। समारोह में मंत्री  परमार ने प्रशिक्षित युवाओं को प्रमाण पत्र एवं चयनित युवाओं को जॉब ऑफर पत्र वितरित किए। साथ ही महाराष्ट्र के पुणे में जॉइनिंग के लिए चयनित युवाओं की बस को शुभकामनाओं सहित हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए, प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया। संस्थान ने इसे युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। ज्ञातव्य है कि “स्वावलंबन” परियोजना के प्रथम चरण में भोपाल में 95 प्रशिक्षणार्थियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, इनमें सभी 95 प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार प्राप्त हुआ है, जो 100 प्रतिशत प्लेसमेंट का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इनमें से 80 प्रशिक्षित युवाओं ने समारोह उपरांत जॉब जॉइन करने के लिए पुणे के लिए प्रस्थान किया है। इस अवसर पर संचालक क्रिस्प  अमोल वैद्य, बीपीसीएल बीना रिफाइनरी के मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन)  शिरीष चंदेकर एवं मुख्य महाप्रबंधक (वित्त) बीपीसीएल (बीना रिफाइनरी)  अय्तोदा किरण. एस सहित बीपीसीएल (बीना रिफाइनरी) एवं क्रिस्प संस्थान के विभिन्न पदाधिकारीगण, प्रशिक्षित एवं चयनित युवा उपस्थित थे।  

धान उपार्जन केन्द्रों में आधारभूत संरचना सुदृढ़ होगी, किसानों को मिलेगा सुव्यवस्थित और सुविधाजनक उपार्जन तंत्र

रायपुर धान उपार्जन केन्द्रों में आधारभूत संरचना सुदृढ़ होगी, किसानों को मिलेगा सुव्यवस्थित और सुविधाजनक उपार्जन तंत्र पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम केवरा, जमगला, पुहपुटरा, निम्हा, लहपटरा, खैरबार, केशवपुर, रामपुर एवं सुखरी के धान उपार्जन केन्द्रों में विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों की सुविधा और समृद्धि के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। इन धान उपार्जन केन्द्रों में बाउण्ड्री वाल निर्माण, कवर्ड प्लेटफार्म निर्माण तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन सभी कार्यों पर कुल 259.68 लाख रू. की लागत से निर्माण कराया जाएगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिले और उपार्जन प्रक्रिया पूरी तरह सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी हो। धान उपार्जन केन्द्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ होने से किसानों को सुरक्षित भंडारण, सुगम परिवहन और व्यवस्थित व्यवस्था का लाभ मिलेगा। इससे उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता आएगी, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिक्री का पूरा लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसान हित सर्वाेपरि है। धान उपार्जन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ ग्रामीण अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि गांवों में ही बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। धान उपार्जन केन्द्रों में आधारभूत संरचना सुदृढ़ होगी, किसानों को मिलेगा सुव्यवस्थित और सुविधाजनक उपार्जन तंत्र मंत्री  अग्रवाल ने आगे कहा कि इन कार्यों के पूर्ण होने से धान खरीदी व्यवस्था और अधिक सुचारू होगी, जिससे किसानों को अनावश्यक असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही क्षेत्र में आधारभूत संरचनाएँ मजबूत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने, किसानों की आय में वृद्धि करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने की दिशा में निरंतर  राज्य सरकार ने धान खरीदी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाकर रजिस्ट्रेशन और भुगतान प्रक्रिया को तेज किया है। सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सड़क, भंडारण और बिजली सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मंत्री अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि ये विकास कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे और छत्तीसगढ़ को किसान कल्याण का मॉडल राज्य बनाएंगे। पिछले वर्षों में राज्य सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड, बीमा योजनाओं और जैविक खेती प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया है। इन पहलों से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य साकार हो रहा है। लखनपुर विकासखंड के इन ग्रामों में होने वाले कार्य पूर्ण होने पर न केवल उपार्जन केंद्र आधुनिक बनेंगे, बल्कि स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।  कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, कृषकों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। उपस्थित किसानों ने राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए इसे किसान हित में महत्वपूर्ण पहल बताया।

रोजगार की ओर बड़ा कदम: सीखो-कमाओ योजना के तहत 979 युवाओं को स्किल ट्रेनिंग

भोपाल मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना “मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना” के तहत पंजीयन कराकर मध्‍यप्रदेश के 979 युवाओं को ऑन द जॉब ट्रैनिंग के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान कराएगी। इसके लिए कंपनी द्वारा अलग-अलग 10 ट्रेडों में युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने के उदृदेश्‍य से विभिन्‍न विषयों के इच्‍छुक युवाओं से MMSKY पोर्टल के माध्‍यम से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। कंपनी ने बताया है कि ‘’मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना’’ के तहत आवेदन करने के लिए इच्‍छुक अभ्‍यर्थी प्रशिक्षण से संबंधित अर्हताओें, रिक्‍त स्‍थानों के विवरण तथा अन्‍य आवश्‍यक जानकारी MMSKY पोर्टल पर देख सकते हैं। गौरतलब है कि “मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना” के तहत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आईटीआई, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन पास बेरोजगार युवाओं को इलेक्ट्रिशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, लाइनमैन, स्टेनोग्राफर (हिंदी/अंग्रेजी),इंजीनियरिंग (सिविल/ इलेक्ट्रिकल),एग्जीक्यूटिव (एच आर/ आकाउंट) आदि पदों पर 979 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने कहा है कि “मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना” के तहत व्यापक स्तर पर औपचारिक शिक्षा प्राप्त युवाओं को कंपनी में छात्र प्रशिक्षणार्थी के रूप में ऑन द जॉब ट्रैनिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे एक ओर जहां युवाओं को औद्योगिक एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण मिलेगा वहीं दूसरी ओर उन्हें काम के बदले स्टाइपेंड भी मिलेगा।

उप मुख्यमंत्री ने बैहरसरी में 25 लाख रुपए की सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा

रायपुर उप मुख्यमंत्री ने बैहरसरी में 25 लाख रुपए की सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा कवर्धा क्षेत्र में गांवों को शहर से जोड़ने के लिए 12 करोड़ 63 लाख 55 हजार रुपये की लागत से कुल 13.6 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इससे ग्रामीणों का आवागमन आसान होगा और उन्हें शहर तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने आज तीन सड़कों के निर्माण, मजबूती और उन्नयन कार्य का भूमिपूजन किया। भूमिपूजन किए गए कार्यों में मेन रोड से बैहरसरी तक 6.05 करोड़ रुपए लागत की 8.80 किलोमीटर लंबी सड़क, मदनपुर से बटुराकछार तक 2.69 करोड़ रुपए लागत की 1.40 किलोमीटर लंबी सड़क एवं खड़ौदा से मदनपुर तक 3.87 करोड़ रुपए लागत की 3.40 किमी लंबी सड़क शामिल है। इन सड़कों के बनने से क्षेत्र के कई गांवों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी और लोगों की आवाजाही पहले से अधिक सुगम हो जाएगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने ग्राम बैहरसरी में 25 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा भी की। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हर गांव का विकास किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें अच्छी सड़कों के माध्यम से शहरों से जोड़ा जा रहा है। सड़क बनने से लोगों का आना-जाना आसान होगा और किसानों, विद्यार्थियों, मरीजों तथा आम लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। अच्छी सड़क होने से किसान अपनी फसल आसानी से बाजार तक पहुंचा सकेंगे, खर्च कम होगा और समय की बचत होगी। साथ ही बच्चों को स्कूल-कॉलेज जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भी सुविधा मिलेगी। इससे पूरे क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा।  उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने विकसित भारत जी राम जी योजना के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पहले के 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। यदि निर्धारित समय में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो संबंधित परिवार को बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी रखा गया है। उन्होंने कहा कि गांव के विकास की प्राथमिकताएं अब ग्राम पंचायत स्वयं तय करेगी, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य किए जा सकेंगे। इस योजना के माध्यम से जल संरक्षण, तालाब निर्माण, नाली-सड़क जैसी मूलभूत ग्रामीण अधोसंरचना, भूमि सुधार, पौधारोपण तथा अन्य विकास कार्य मनरेगा के तहत व्यापक रूप से कराए जा सकेंगे। इससे गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि नई सरकार बनने के बाद गांव में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं, जिससे पात्र परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवास प्लस 2024 सर्वे के माध्यम से ऐसे परिवारों की पहचान की गई है जो वास्तव में आवास के पात्र हैं। सर्वे सूची को ग्राम सभा में प्रस्तुत किया जाएगा और ग्राम सभा के प्रस्ताव के बाद सभी पात्र हितग्राहियों को क्रमवार आवास प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी गरीब परिवार कच्चे मकान में न रहे और सभी को सम्मानजनक एवं सुरक्षित आवास उपलब्ध हो। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत  विदेशी राम धुर्वे,  विजय पटेल,  मनीराम साहू सहित जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी उपस्थित रहे।

सरकार का बड़ा ऐलान: लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने मेडिकल रीइम्बर्समेंट यानी इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा बढ़ा दी है। अब मंत्रालयों/विभागों के हेड ऑफ डिपार्टमेंट 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम बिना इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिविजन (IFD) से सलाह लिए मंजूर कर सकेंगे। पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी। यह फैसला 16 फरवरी 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के जरिए बताया गया है। क्या है डिटेल मंत्रालय ने एक और अहम बदलाव किया है। जिन मामलों में किसी तरह के नियमों में छूट (relaxation) नहीं दी जाती और पूरा भुगतान तय CGHS रेट्स के हिसाब से होता है, ऐसे मामलों में निपटान की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। यानी अगर क्लेम पूरी तरह नियमों के तहत है और दरें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (CGHS) के मुताबिक हैं, तो अब ज्यादा राशि का भुगतान आसान होगा। इससे कर्मचारियों को लंबे इंतजार और फाइलों की देरी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि 10 लाख रुपये की नई सीमा के साथ दो साफ शर्तें भी जोड़ी गई हैं। पहली, क्लेम में CGHS या CS(MA) नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। दूसरी, रीइम्बर्समेंट की रकम पूरी तरह CGHS/CS(MA) की तय दरों के अनुसार ही होगी। मतलब साफ है—अगर अस्पताल का बिल तय रेट से ज्यादा है और नियमों में छूट चाहिए, तो मामला पहले की तरह उच्च स्तर पर ही जाएगा। मंत्रालय ने अपने पुराने 23 नवंबर 2016 के आदेश का भी जिक्र किया है, जिसमें बिना नियमों में छूट वाले मामलों की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की गई थी। कहां होता है आवेदन CGHS मेडिकल क्लेम की प्रक्रिया भी साफ कर दी गई है। पेंशनर्स को इलाज या डिस्चार्ज के छह महीने के भीतर अपने वेलनेस सेंटर के CMO के पास आवेदन देना होता है। इसके साथ मेडिकल रीइम्बर्समेंट क्लेम फॉर्म, चेकलिस्ट, डिस्चार्ज समरी की कॉपी, रेफरल/परमिशन स्लिप, इमरजेंसी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो), अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीदें, वैध CGHS कार्ड की कॉपी और बैंक डिटेल्स के लिए कैंसल चेक या मंडेट फॉर्म जमा करना जरूरी है। दस्तावेज पूरे और सही होने पर प्रक्रिया तेज हो जाती है। जहां तक एंबुलेंस खर्च का सवाल है, वह भी रिइम्बर्सेबल है, लेकिन एक शर्त के साथ। शहर के भीतर एंबुलेंस का खर्च तभी मिलेगा, जब इलाज करने वाले डॉक्टर का प्रमाण पत्र हो कि किसी और माध्यम से ले जाने पर मरीज की जान को खतरा था या हालत और बिगड़ सकती थी। कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले से मेडिकल क्लेम की मंजूरी में तेजी आएगी और कर्मचारियों-पेंशनर्स को बड़ी रकम के मामलों में भी राहत मिलेगी।

सामुदायिक भवन से समाज को मिलेगा स्थायी मंच, सामाजिक एकजुटता होगी मजबूत– उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर. बम्हनी में शुरू होगा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, बुजुर्गों-महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के ग्राम बम्हनी में लोधी समाज के लिए 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाले सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया। लंबे समय से समाज के लोगों को अपने सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए उचित स्थान की आवश्यकता थी, जिसे उप मुख्यमंत्री की पहल से अब यह भवन पूरा होगा। बम्हनी में शुरू होगा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, बुजुर्गों-महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत        इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने उपस्थित लोधी समाज के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि इस भवन का सभी लोगों के काम के लिए मिल-जुलकर उपयोग करें। यह भवन समाज के कार्यक्रम, बैठक, शादी-विवाह और अन्य आयोजनों के लिए बहुत काम आएगा। इससे पूरे गांव के लोगों को भी सुविधा मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गांवों में जरूरी सुविधाएं बढ़ाने और विकास के लिए लगातार काम कर रही है। इस दौरान उन्होंने ग्राम बम्हनी में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद प्रदेश में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। केवल ग्राम बम्हनी में ही पिछले दो वर्षों में 113 आवास स्वीकृत हुए, जिनमें से 84 आवास का निर्माण पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बैठकों और गतिविधियों के लिए गांव में महतारी सदन का निर्माण कराया गया है। प्रदेश भर में ऐसे महतारी सदनों का निर्माण ग्राम पंचायतों में किया जा रहा है, ताकि महिलाओं को एक सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान मिल सके।      उप मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र भी शुरू किए जा रहे हैं, जहां महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को गांव में ही पैसा निकालने सहित अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने बम्हनी में भी एक सप्ताह के भीतर यह केंद्र शुरू करने के निर्देश सीईओ जनपद पंचायत को दिए। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य डॉ वीरेन्द्र साहू, युवा प्रदेशाध्यक्ष लोधी समाज  सुरेश सिंगौर, जिला लोधी समाज अध्यक्ष  संतोष कौशिक, सहित अन्य जनप्रतिनिधि और समाज के पदाधिकारी उपस्थित रहे। सहकारिता से युवाओं को रोजगार और गांव को मिलेगा विकास का नया रास्ता– उप मुख्यमंत्री      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से आज कई तरह के काम किए जा सकते हैं और इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कवर्धा क्षेत्र की महिलाएं और पशुपालक गुजरात के बनासकांठा जिले का भ्रमण कर वहां की डेयरी व्यवस्था और सहकारी गतिविधियों को देखकर आए हैं।      उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं भी वहां की डेयरी संस्थाओं का कार्य देखने गए थे और वहां से कई उपयोगी अनुभव प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, पशुपालन, कृषि और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर काम किया जा सकता है, जिससे लोगों की आय बढ़ेगी और गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने भ्रमण के दौरान मिले अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यदि गांव के लोग मिलकर सहकारी रूप से काम करें तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।

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