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प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण को लेकर तैयारी पूरी

यमुना एक्सप्रेस-वे : जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के लिए 500-500 एकड़ भूमि प्रस्तावित यीडा ने शासन को भेजी सूचना, सेक्टर-5ए में जापानी सिटी, सेक्टर-7 में सिंगापुर सिटी का प्रस्ताव दोनों सेक्टर मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में होंगे विकसित प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण को लेकर तैयारी पूरी   लखनऊ,   यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के विकास को लेकर औपचारिक प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। 18 फरवरी 2026 को जारी पत्र में प्राधिकरण ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन को अवगत कराया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में इन दोनों प्रस्तावित सिटीज के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने बताया कि इन दोनों सिटी को लेकर भूमि अधिग्रहण से संबंधित योजना तैयार कर ली गई है। पत्र के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आधिकारिक प्रस्तावित जापान और सिंगापुर यात्रा के संदर्भ में प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत जापान सिटी और सिंगापुर सिटी हेतु क्षेत्र चिन्हित कर सूचना उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई थी। इसी क्रम में प्राधिकरण ने सेक्टर-5ए और सेक्टर-7 को इन परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित किया है। प्राधिकरण की महायोजना के अंतर्गत सेक्टर-7 और सेक्टर-5ए मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में नियोजित हैं। इन क्षेत्रों में औद्योगिक उपयोग न्यूनतम 70 प्रतिशत निर्धारित है। इसके साथ ही आवासीय उपयोग अधिकतम 12 प्रतिशत, वाणिज्यिक उपयोग अधिकतम 13 प्रतिशत तथा संस्थागत सुविधाएं न्यूनतम 5 प्रतिशत तक निर्धारित हैं। पत्र में कहा गया है कि इन सेक्टरों को एक इंटीग्रेटेड औद्योगिक सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है। जापानी सिटी के लिए सेक्टर-5ए  ग्रेटर नोएडा में 500 एकड़ क्षेत्र प्रस्तावित है। इसी प्रकार सिंगापुर सिटी के लिए सेक्टर-7, ग्रेटर नोएडा में 500 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है। दोनों ही परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। इन सेक्टरों का विकास ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मोड पर किए जाने का प्रस्ताव है।

जीवामृत और घनजीवामृत के उपयोग से रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी

नेचुरल फॉर्मिंग हब बन रहा यूपी प्रदेश के सभी 75 जिलों में अब तक 94,300 हेक्टेयर तक पहुंची नेचुरल फॉर्मिंग, योगी सरकार 298 करोड़ रुपये से करेगी विस्तार बुंदेलखंड पर विशेष फोकस, सातों जिलों में जलधारण क्षमता बढ़ने से खेती अधिक टिकाऊ बनेगी और लागत घटेगी जीवामृत और घनजीवामृत के उपयोग से रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी अन्नदाता को ‘आरोग्यदाता’ बनाएगी योगी सरकार लखनऊ  उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। सक्रिय रणनीति बनाकर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कुल 94,300 हेक्टेयर क्षेत्रफल तक प्राकृतिक खेती का विस्तार किया गया है। यह जल्द ही एक लाख हेक्टेयर तक पहुंचने वाला है। इस व्यापक अभियान में बुंदेलखंड पर फोकस रखा गया है, जहां विशेष कार्यक्रम के जरिए इसे सफल मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। योगी सरकार रासायनिक निर्भरता कम कर टिकाऊ कृषि व्यवस्था स्थापित करने के लिए नेचुरल फार्मिंग पर विशेष जोर दे रही है। बुंदेलखंड में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में गो-आधारित प्राकृतिक खेती योगी सरकार ने बुंदेलखंड के सभी जनपदों झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र पर गो-आधारित प्राकृतिक खेती का विशेष कार्यक्रम शुरू किया है। इस क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर योगी सरकार कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। योगी सरकार के फोकस में कम लागत, ज्यादा लाभ वाले कृषि मॉडल जीवामृत और घनजीवामृत के प्रयोग से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी। इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता मजबूत होगा। योगी सरकार का फोकस ‘कम लागत, ज्यादा लाभ’ वाले कृषि मॉडल पर है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए वरदान गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की संरचना सुधरती है और जलधारण क्षमता बढ़ती है। बुंदेलखंड के साथ ही कम वर्षा वाले क्षेत्रों में यह पहल खेती को अधिक टिकाऊ बनाएगी। यह कदम क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। प्रशिक्षण से किसानों का सशक्तिकरण योगी सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। इससे प्राकृतिक कृषि प्रणाली को मुख्यधारा में लाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है। स्वास्थ्य, पर्यावरण और आय पर सकारात्मक असर प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली के प्रसार से किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा। गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की दूरदर्शी नीति के चलते उत्तर प्रदेश प्राकृतिक खेती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें बुंदेलखंड परिवर्तन का अग्रदूत बनकर उभर रहा है।

ऑनलाइन आरती बुकिंग का पूरा तरीका, महाकाल मंदिर की संध्या और शयन आरती की टाइमिंग और शुल्क

उज्जैन  उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इसी वजह से यह हिंदुओं की आस्था का केंद्र हैं और श्रद्धालु इनके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं. यहां पर रोज होने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है, जो जीवन और मृत्यु को दर्शाती है. अब उज्जैन के महाकाल मंदिर में संध्या आरती और शयन आरती की ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो गई है. इसको लेकर खास जानकारी सामने आई है. उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया को निरंतर आगे बढ़ाते हुए मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संध्या आरती एवं शयन आरती की बुकिंग प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन करने का फैसला लिया गया है. यह व्यवस्था पारदर्शिता, सुव्यवस्थित प्रबंधन एवं श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लागू की जा रही है. ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं हो. कौन-सी वेबसाइट से होगी सकेगी बुकिंग अब श्रद्धालु दोनों आरतियों के लिए केवल मंदिर की अधिकृत वेबसाइट के माध्यम से ही बुकिंग कर सकेंगे. इसके लिए उन्हें https://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in वेबसाइट पर जाना होगा. ऐसी रहेगी व्यवस्था अब श्रद्धालु दोनों आरतियों के लिए केवल मंदिर की अधिकृत वेबसाइट के माध्यम से ही बुकिंग कर सकेंगे। संध्या आरती की ऑनलाइन बुकिंग प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे से प्रारंभ होगी, जबकि शयन आरती की ऑनलाइन बुकिंग प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से प्रारंभ होगी। दोनों ही आरतियों के लिए प्रति श्रद्धालु ₹250/- (शीघ्र दर्शन के समान) शुल्क निर्धारित किया गया है। बुकिंग फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (प्रथम आओ, प्रथम पाओ) के आधार पर की जाएगी। दोनों आरतियों हेतु प्रवेश द्वार क्रमांक 1 निर्धारित किया गया है। ऐसा रहेगा प्रवेश का समय संध्या आरती के लिए प्रवेश का अंतिम समय सायं 6:00 बजे रहेगा, जबकि शयन आरती के लिए प्रवेश का अंतिम समय रात्रि 10:00 बजे रहेगा। दोनों आरतियों के निर्धारित समय के दौरान चलित दर्शन की प्रक्रिया भी संचालित की जाएगी, जिससे श्रद्धालु सुव्यवस्थित रूप से दर्शन लाभ प्राप्त कर सकें। इसलिए बदली गई व्यवस्था मंदिर समिति का उद्देश्य डिजिटल माध्यम से पारदर्शी, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धालु-अनुकूल व्यवस्था सुनिश्चित करना है, जिससे अधिकाधिक श्रद्धालु सुगमता से आरती एवं दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकें। यह नई व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे वे आसानी से आरतियों की बुकिंग कर सकेंगे और भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। क्या है बुकिंग करने का समय 1)संध्या आरती की ऑनलाइन बुकिंग प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे से शुरू होगी. 2)शयन आरती की ऑनलाइन बुकिंग प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से शुरू होगी. महाकालेश्वर मंदिर में आरती की ऑनलाइन बुकिंग श्रद्धालुओं को आरती के लिए देना होगा इतना पैसा दोनों ही आरतियों के लिए प्रति श्रद्धालु ₹250/- (शीघ्र दर्शन के समान) शुल्क निर्धारित किया गया है. बुकिंग फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (प्रथम आओ, प्रथम पाओ) के आधार पर की जाएगी. दोनों आरतियों के लिए भक्तगणों को प्रवेश द्वार क्रमांक एक से मिलेगा. दोनों आरतियों के लिए क्या है प्रवेश का अंतिम समय 1)संध्या आरती के लिए प्रवेश का अंतिम समय सायं 6:00 बजे रहेगा. 2)शयन आरती के लिए प्रवेश का अंतिम समय रात्रि 10:00 बजे रहेगा. दोनों आरतियों के निर्धारित समय के दौरान चलित दर्शन की प्रक्रिया भी संचालित की जाएगी, जिससे श्रद्धालु सुव्यवस्थित रूप से दर्शन लाभ प्राप्त कर सकें. मंदिर समिति का उद्देश्य डिजिटल माध्यम से पारदर्शी, सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करना है. शीघ्र दर्शन के लिए प्रति व्यक्ति 250 रुपए महाकालेश्वर मंदिर समिति पहले से ही श्रद्धालुओं से भस्मारती के ऑनलाइन प्रवेश के लिए 200 रुपए और शीघ्र दर्शन के लिए प्रति व्यक्ति 250 रुपए शुल्क ले रही है। इसके अलावा विभिन्न पूजन विधियों के लिए अलग से राशि ली जाती है। मंदिर में रोज लगभग 1200 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन भस्मारती प्रवेश दिया जाता है। मंदिर में सामान्य कतार के अलावा वीआईपी लाइन से दर्शन की सुविधा उपलब्ध है, जिसके लिए काउंटर या ऑनलाइन माध्यम से 250 रुपए देकर रसीद लेकर दर्शन किए जा सकते हैं। गर्भगृह प्रवेश अब भी बंद पहले श्रद्धालु 1500 रुपए शुल्क देकर गर्भगृह में प्रवेश कर सकते थे, लेकिन 4 जुलाई 2023 को सावन की भीड़ के कारण इसे 11 सितंबर 2023 तक अस्थायी रूप से बंद किया गया था। उस समय आश्वासन दिया गया था कि सावन के बाद गर्भगृह फिर खोल दिया जाएगा, लेकिन ढाई साल बाद भी आम श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश शुरू नहीं हुआ है।

मौसम की करवट: 20 जिलों में बारिश, फसलें आड़ी, कृषि मंत्री बोले- जल्द होगा सर्वे

भोपाल  मध्य प्रदेश का मौसम फरवरी के महीने में एक बार फिर करवट ले चुका है। इस साल तीसरी बार राज्य के कई जिलों में अचानक बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिससे आम लोग और किसान दोनों ही चिंतित हैं। राजधानी भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बौछारें हुईं। अचानक बदलाव से तापमान में गिरावट आई और रात में ठंड बढ़ गई। खेतों में खड़ी फसलें आड़ी-तिरछी गिर गईं, जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता साफ नजर आई। अचानक क्यों बदला मौसम मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य प्रदेश में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव है। इसके साथ ही वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और ट्रफ भी सक्रिय हैं, जो मौसम में अचानक बदलाव के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।     18 फरवरी को राज्य के लगभग 20 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई।     भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, रतलाम और मंदसौर में दिनभर धूप खिलने के बाद अचानक मौसम बिगड़ा।     मौसम विभाग ने ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह साइक्लोनिक सर्कुलेशन पश्चिमी राजस्थान और मध्य प्रदेश पर सक्रिय है और इसके प्रभाव से आने वाले दो दिनों में मौसम में उतार-चढ़ाव बने रहेंगे। फरवरी महीने में यह तीसरी बार है, जब अचानक प्रदेश का मौसम बदला और बारिश की फुहारें पड़ने लगीं। अचानक हुई बारिश ने तापमान में कमी ला दी है। रुक-रुक कर हो रही बेमौसम बारिश से फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलें लेट गई हैं। बारिश के साथ ही सबसे ज्यादा नुकसान ओले गिरने से हुआ है। इन जिलों में हुई बारिश लगातार हो रही बारिश के कारण प्रदेश का तापमान गिरा है। एमपी के खजुराहो में सबसे कम 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। इसके अलावा राजगढ़ में 10 डिग्री सेल्सियस और पंचमढ़ी में 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को भोपाल, बड़वानी, आगर-मालवा, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन, धार, दतिया, गुना, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, मंदसौर, मुरैना, शाजापुर और छतरपुर में बारिश दर्ज की गई है। कैसा रहेगा अगले 2 दिन का मौसम मौसम विभाग ने 20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, तीनों संभाग के 8 जिलों में बारिश की संभावना है। बारिश के साथ ही यहां बिजली गिरने की भी आशंका है। इसके बाद 21 फरवरी को मध्य प्रदेश का मौसम साफ रहेगा। इस दौरान किसी भी जिले में बारिश की संभावना नहीं जताई गई है। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण किसानों की फसलों का काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसलें गिर गई हैं। गेहूं की फसलें गिर जाने के कारण दाने कमजोर हुए हैं। दाने कमजोर होने की वजह से पैदावार में कमी देखने को मिल सकती है। बारिश और ओले का असर     बेमौसम बारिश और ओले ने आम जनता और किसानों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।     राजधानी भोपाल में बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ लगभग डेढ़ घंटे तक तेज और हल्की बारिश हुई।     इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और रतलाम में दिनभर मौसम गर्म रहने के बाद रात को अचानक बारिश और ओले गिरे।     ठंडी हवाओं के कारण दिन के तापमान में गिरावट आई और रात में ठंड बढ़ गई। किसानों की चिंता:     गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें कटाई के लिए तैयार थीं।     तेज हवाओं और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें आड़ी-तिरछी गिर गईं।     कुछ क्षेत्रों में फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।     किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। प्रभावित जिले और अलर्ट मौसम विभाग ने गुरुवार को आठ जिलों में बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया। इन जिलों में अलर्ट जारी ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना इन जिलों में हुई बारिश भोपाल, दतिया, गुना, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, धार, विदिशा, बड़वानी, आगर-मालवा, शाजापुर, मुरैना, छतरपुर, शिवपुरी, सीहोर, मंदसौर कहां कितना रहा तापमान बारिश और ठंडी हवाओं के चलते तापमान में उतार-चढ़ाव देखा गया। प्रदेश में खजुराहो सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2°C रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 10.0°C और पचमढ़ी में 10.2°C दर्ज होने के कारण कड़ाके की ठंड का अनुभव हुआ। इन जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है। इससे पहले बुधवार को रतलाम, श्योपुर, मुरैना, मंदसौर, नीमच, गुना सहित 20 से अधिक जिलों में कहीं बारिश तो कहीं ओले गिरे। दो साइक्लोनिक सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक प्रदेश में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम और एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय है। इसके अलावा एक ट्रफ लाइन भी प्रदेश से गुजर रही है, जिससे मौसम में अस्थिरता बनी हुई है। तापमान में उतार-चढ़ाव जारी प्रदेश में फिलहाल रात और सुबह हल्की सर्दी बनी रहेगी। ज्यादातर शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से ऊपर है, जबकि दिन का तापमान 30 डिग्री के पार पहुंच रहा है। कटनी का करौंदी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान सामान्य से कम दर्ज हुआ। अगले दो दिन का पूर्वानुमान 20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में बारिश का अलर्ट है और बिजली गिरने की संभावना है। वहीं 21 फरवरी को मौसम साफ रहने की संभावना जताई गई है।

इंतज़ार खत्म! AI समिट में पक्की हुईं अहम डील्स, भारत को मिला बड़ा लाभ

 नई दिल्ली AI Impact Summit का आज चौथा दिन है. इस दौरान भारत को विदेशी कंपनियों से ढेरों इनवेस्टमेंट मिले हैं, जिसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और क्वालकॉम जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं. AI इंम्पैक्ट समिट के दौरान कंपनियों ने बताया है कि वे भारत में डेटा सेंटर्स और न्यू AI मॉडल को डेवलप करेंगे.  बुधवार को Google के सीईओ सुंदर पिचाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और और बताया कि कंपनी अगले 5 साल में भारत में करीब 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इनवेस्टमेंट करेगी. AI इम्पैक्ट समिट के दौरान गूगल सीईओ और गूगल डीपमाइंड जीफ डेमिस हासाबिस दोनों भारत में हैं.  गूगल बनाएगा देश में बड़ा AI हब   गूगल का इनवेस्टमेंट देश के पहले बड़े AI हब को तैयार करेगा. प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनने वाला मेगा AI डेटा सेंटर है. इसमें AI मॉडल ट्रेनिंग, क्लाउड सर्विस  और कंप्यूटिंग का केंद्र बनेगा.  Microsoft ने किया बड़े इनवेस्टमेंट का प्लान  एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में माइक्रोसॉफ्ट ने बुधवार को ऐलान किया है कि वह ग्लोबल साउथ में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इनवेस्टमेंट करेगी. यह इनवेस्टमेंट आने वाले चार साल के दौरान की जाएगी. माइक्रोसॉफ्ट ने बीते साल भारत में 17.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की इनवेस्टमेंट का ऐलान किया था.  एनवीडिया का योट्टा और L&T के साथ पार्टनरशिप  योट्टा डेटा सर्विसेज ने भी ऐलान किया है कि वह एनवीडिया के लेटेस्ट चिप्स के डेवलपमेंट पर 2 अरब डॉलर से अधिक का इनवेस्टमेंट करेंगे. इसके लिए वह एक AI कंप्यूटिंग हब तैयार करेंगे, जिसमें देश की शुरुआती चरण में मौजूद AI पहल को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. इसके लिए योट्टा अपने एक्सपेंशन के इनवेस्टर्स से करीब 1.2 अरब डॉलर इकट्ठा करने की योजना बना रहा है.  L&T के साथ पार्टनरशिप की तैयारी  AI इम्पैक्ट समिट के दौरान देश में दुनियाभर की टेक और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम करने वाली कंपनियां मौजूद हैं. इस दिशा में Nvidia भारत में एक मेगा AI फैक्टरी लगाने का काम प्लान बना रही है, जिसके लिए वह भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ हाथ मिलाएगी.  पार्टनरशिप के तहत अरबो डॉलर का इनवेस्टमेंट होगा.  भारतीय स्टार्टअप Neysa ai ने 1.2 बिलियन डॉलर यानी करीब 10,000 करोड़ रुपये की बड़ी फंडिंग जुटाकर सभी का ध्यान खींचा. इसमें ग्लोबल दिग्गज Blackstone ने भी इनवेस्ट किया है. Neysa असल में एक AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है. यह कोई चैटबॉट या कंप्यूमर ऐप नहीं बनाती है, बल्कि सीधे तौर पर टेक्निकल स्ट्रक्चर तैयार करती है.

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में मध्यप्रदेश की पहल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गिनाईं उपलब्धियां

क्लाइमेट चेंज से निपटने में लीडर बन रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव म.प्र. और इन्वेस्टर्स मिलकर देश को बढ़ाएंगे आगे 24 घंटे बिजली देने में मध्यप्रदेश सबसे आगे मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा विकास के लिए सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के साथ हुआ एमओयू  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई क्लाइमेट वीक-2026 में की सहभागिता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्लाइमेट चेंज एक गंभीर वैश्विक चुनौती है। क्लाइमेट चेंज मानव अस्तित्व, आर्थिक स्थिरता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि सतत् विकास की राह में हम पर्यावरण की अनदेखी नहीं कर सकते। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना ही प्रगति का मूल आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि क्लाइमेट चेंज के मामले में ठोस और समयबद्ध समाधान पर काम करना आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की क्लाइमेट चेंज को लेकर प्रतिबद्धताओं में भी राज्यों का योगदान भी महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश क्लाइमेट चेंज से निपटने में सर्वाधिक नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादक बन लीडर की भूमिका में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सबसे तेज गति से विकास करने वाले राज्यों में अग्रणी है। यहां लगभग हर क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। मुख्यमंत्री ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मप्र में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने का विश्वास और सुरक्षा की गारंटी देते हुए कहा कि राज्य और निवेशक मिलकर देश को नवकरणीय ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली देने की दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के साथ हमारा रिश्ता नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम मुंबई में क्लाइमेट वीक-2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग (मप्र शासन) एवं ग्रीन एनर्जी के लिए विख्यात सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के बीच मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का समाधान केवल एक देश, एक राज्य या एक सरकार ही नहीं कर सकती, इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और जलवायु समाधान के लिए आगे बढ़ने की दिशा में मुम्बई क्लाइमेट वीक एक महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए त्वरित और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा देना, हरित तकनीकों को अपनाना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना ही भविष्य का विकास मार्ग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकारों के साथ ही उद्योगों, संस्थाओं और इस देश में रहने वाले हर नागरिक की भी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ‘लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ जैसे व्यवहारिक बदलावों को अपनाने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरित ऊर्जा उत्पादन के जरिए क्लाइमेट चेंज से निपटने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार के नवाचारों की जानकारी देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भारत के उन अग्रणी राज्यों में से एक है, जिसने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जिसने ईवी नीति बनाई, जो क्लाइमेट चेंज की ओर कारगर कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार मध्यप्रदेश में 300 मेगावाट 4 घंटे सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजना, 300 मेगावाट 6 घंटे सौर-सह एनर्जी परियोजना सहित 24×7 घंटे नवकरणीय ऊर्जा बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजना पर काम कर रही है। यह एक नया प्रयोग है। यह भारत की अपनी तरह की पहली परियोजना है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जो इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते 12 सालों में मप्र की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सौर ऊर्जा में 48 प्रतिशत और पवन ऊर्जा में 19 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। नवकरणीय ऊर्जा की बड़ी परियोजनाओं के जरिए हमने म.प्र. की जरूरतों को पूरा करने के बाद पड़ोसी राज्यों और भारतीय रेलवे को भी स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है। ये एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें हमने किसी भी नागरिक को विस्थापित नहीं होने दिया, इस प्रोजेक्ट में ऊर्जा उत्पादन भी प्रारंभ हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सांची देश की पहली सोलर सिटी बनी है। हम सभी शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाने की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों, निजी क्षेत्र और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर मप्र को भारत का नवकरणीय ऊर्जा हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। हम सौर, पवन, एनर्जी स्टोरेज, बायोफ्यूल तथा ग्रीन हाइड्रोजन सहित सभी नवकरणीय टेक्नोलॉजी में वित्तीय एवं नीतिगत प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से आव्हान किया कि मध्यप्रदेश की तेजी से परिवर्तनकारी यात्रा में हमारे साथ जुड़ें। इससे जलवायु को संतुलित रखने में तो मदद मिलेगी ही, यह सबके व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और मप्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने कहा कि हम ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ मप्र और भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करेंगे। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हम बैटरी स्टोरेज आधारित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मप्र में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट, शाजापुर, आगर-मालवा और रीवा में अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना पर काम हुआ है। उन्होंने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश अनंत संभावनाओं का प्रदेश है। यहां निवेश करें, सरकार आपके साथ है। अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा  मनु वास्तव ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा, विद्युत आपूर्ति का एक कारगर, सस्ता और विश्वसनीय विकल्प है। हम मध्यप्रदेश के नागरिकों को कम से कम दर पर विद्युत आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने निवेशकों और … Read more

मोदी ने बताया AI समिट का मकसद, साथ ही दुनिया को दी ह्यूमन सेंट्रिक AI अपनाने की चेतावनी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई समिट से दुनिया को खास संदेश दिया है. एआई इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भारत का MANAV विजन प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि एआई का विकास ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए, जहां इंसान केवल डेटा पॉइंट न बने. प्रधानमंत्री ने एआई के लोकतंत्रीकरण, समावेशन और ग्लोबल साउथ के सशक्तीकरण पर जोर दिया. MANAV विजन नैतिक व एथिकल सिस्टम, जवाबदेह गवर्नेंस और डेटा पर व्यक्ति के अधिकार की वकालत करता है. उन्होंने कहा कि एआई को ओपन, सुरक्षित और मानव केंद्रित बनाकर वैश्विक कल्याण का माध्यम बनाया जा सकता है. एआई ट्रांसफॉर्मेटिव पावर – पीएम मोदी  पीएम मोदी ने कहा, ‘आज मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर तेज भी है, गहरा भी है और व्यापक भी है. इसलिए हमें विजन भी बड़ा रखना है और जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी निभानी है. साथ ही हमें इस बात की भी चिंता करनी है कि आने वाली पीढ़ियों के हाथों में हम AI का क्या स्वरूप सौंप कर जाएंगे. इसलिए आज असली प्रश्न यह नहीं कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या कर सकती है, प्रश्न यह है कि वर्तमान में हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ क्या करते हैं. ऐसे प्रश्न मानवता के सामने पहले भी आए हैं. सबसे सशक्त उदाहरण है न्यूक्लियर पावर. हमने उसका डिस्ट्रक्शन भी देखा है और सकारात्मक कंट्रीब्यूशन भी देखा है. एआई भी एक ट्रांसफॉर्मेटिव पावर है.’ भारत दुनिया का बड़ा टेक टैलेंट पूल – पीएम मोदी पीएम मोदी ने एआई समिट में बोलते हुए कहा कि मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों के बाद एक टर्निंग पॉइंट आता है और वो टर्निंग पॉइंट सभ्यता की दिशा रिसेट करता है. वहीं से विकास की रफ्तार बदलती है. सोचने, समझने और काम करने के परिणाम बदलते हैं. पीएम मोदी ने कहा, ‘किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया रियल टाइम में कनेक्ट होगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव इतिहास का ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेटिव पावर है. आज जो हम देख रहे हैं जो प्रेडक्ट कर रहे हैं वो इसके इंपैक्ट का सिर्फ प्रारंभिक संकेत हैं. एआई मशीनों को इंटेलिजेंट बना रही हैं, लेकिन उससे भी अधिक मानव सामर्थ्य को कई गुना बढ़ा रही है.’ भारत दुनिया का बड़ा टेक टैलेंट पूल – पीएम मोदी  एआई समिट में पीएम मोदी ने कई बातों का उल्‍लेख किया. उन्‍होंने कहा, ‘भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है…सबसे बड़े टेक टैलेंट पूल का केंद्र है. भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है और उसे अभूतपूर्व तेजी से अपनाता भी है. इस समिट का भारत में होना भारत के साथ ही पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है. दुनिया के 100 से ज्यादा देशों का रिप्रेजेंटेशन दुनिया के कोने-कोने से यहां आए महानुभाव इसकी सफलता को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं. इसमें यंग जनरेशन की जो उपस्थिति हमने देखी है वो एक नया विश्वास पैदा करती है. नई टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ लोगों में शुरुआती में संदेह होता है, लेकिन जिस तेजी और भरोसे के साथ दुनिया की युवा पीढ़ी एआई को स्वीकार कर रही है, उसकी ओनरशिप ले रही है और एआई का इस्तेमाल कर रही है वह अभूतपूर्व है.’ सुंदर पिचाई ने बताया भारत में इन्‍वेस्‍टमेंट का प्‍लान गूगल के सीईओ Sundar Pichai ने भारत दौरे के दौरान देश में तेज बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया हाइपर-प्रोग्रेस के दौर में प्रवेश कर रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को साहसिक रूप से अपनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि AI अरबों लोगों के जीवन में सुधार ला सकता है और दवा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला रहा है. पिचाई ने बताया कि Google 15 अरब डॉलर के बुनियादी ढांचा निवेश के तहत भारत में फुल-स्टैक AI हब स्थापित करेगा. साथ ही कंपनी भारत की व्यस्त सड़कों के लिए Waymo तकनीक पर भी काम कर रही है. डिजिटल क्रांति केवल तकनीक नहीं, बल्कि सभ्यता का परिवर्तन – मैक्रों एआई समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की डिजिटल क्रांति की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि सभ्यता का परिवर्तन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि एक समय मुंबई का स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता नहीं खोल पाता था, लेकिन आज वही व्यक्ति मोबाइल से तुरंत डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहा है. मैक्रों ने भारत की 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल पहचान व्यवस्था, हर महीने 20 अरब लेनदेन करने वाली भुगतान प्रणाली और 50 करोड़ डिजिटल हेल्थ आईडी जारी करने वाली स्वास्थ्य संरचना को दुनिया के लिए मिसाल बताया.  पीएम मोदी पहुंचे भारत मंडपम, अश्विनी वैष्‍णव ने सेट किया टोन : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एआई समिट को संबोधित करने के लिए भारत मंडपम पहुंच चुके हैं. उससे पहले भारत में आयोजित पहले ग्लोबल साउथ एआई समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक आधारभूत तकनीक है, जो काम करने, सीखने और निर्णय लेने के तरीकों में व्यापक बदलाव ला रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. समिट में 118 देशों की भागीदारी को ऐतिहासिक बताते हुए वैष्णव ने कहा कि भारत एआई स्टैक की पांचों परतों पर काम कर रहा है. इसका उद्देश्य तकनीक का लोकतंत्रीकरण करना और इसे बड़े पैमाने पर सभी के लिए सुलभ बनाना है. पीएम मोदी की 4 देशों के प्रमुखों संग अहम बैठकें  एआई सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi आज चार देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में शामिल होंगे. ये बैठकें Bharat Mandapam में आयोजित होंगी. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 14:30 बजे पीएम मोदी अबू धाबी के क्राउन प्रिंस Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात करेंगे. इसके बाद 15:10 बजे नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री Dick Schoof, 15:45 बजे स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति Guy Parmelin और 16:25 बजे ग्रीस के प्रधानमंत्री Kyriakos Mitsotakis से वार्ता होगी. इससे पहले बुधवार 18 फरवरी को पीएम मोदी सात वैश्विक नेताओं से भी मुलाकात कर चुके हैं.  

वर्ल्ड कप में भारत का दमदार प्रदर्शन, नीदरलैंड्स चारों खाने चित

 अहमदाबाद टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बुधवार को नीदरलैंड्स और टीम इंडिया के बीच मैच खेला गया. इस मैच में टीम इंडिया ने 17रनों से जीत हासिल की और इस वर्ल्ड कप में लगातार चौथा मैच जीता. ये मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेड‍ियम में खेला गया. जहां टॉस भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. सूर्या ब्रिगेड ने पहले खेलते हुए श‍िवम दुबे के 31 गेंदों पर 66 रनों की बदौलत 193/5 का स्कोर बनाया. इसके जवाब में उतरी नीदरलैंड्स की टीम 176 रन ही बना सकी. भारतीय टीम ने ये मैच 17 रन से जीत लिया. भारत इस वर्ल्ड कप में अपने चारों मैच जीत चुकी है. वहीं नीदरलैंड्स की टीम का टी20 वर्ल्ड कप से सफर खत्म हो गया है, उसको इस वर्ल्ड कप में एकमात्र जीत नामीब‍िया के ख‍िलाफ मिली थी. ऐसी रही नीदरलैंड्स की पारी 194 रनों के जवाब में उतरी नीदरलैंड्स की शुरुआत ठीक ठाक रही. पहला झटका उसे छठे ओवर में लगा जब मैक्स 35 के स्कोर पर आउट हुए. इसके बाद 51 के स्कोर पर उसे दूसरा झटका लगा जब माइकल लेविट आउट हुए. बास डी लीडे और कॉलिन के बीच अच्छी साझेदारी पनपी. लेकिन फिर भारतीय गेंदबाजों ने शिकंजा कस लिया. नीदरलैंड्स की टीम 176 रन ही बना सकी. भारत की ओर से सबसे सफल गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती रहे जिन्होंने 3 ओवर में 14 रन देकर 3 विकेट झटके. वहीं, शिवम दुबे को 2 और बुमराह को एक विकेट मिला.  भारतीय टीम की पारी की हाइलाइट्स  इस मुकाबले में भारतीय टीम की ओर से ओपन‍िंंग करने के लिए अभ‍िषेक शर्मा और ईशान किशन आए. अभ‍िषेक शर्मा एक बार फ‍िर अनलकी साबित हुए और पहले ही ओवर में नीदरलैंड्स के आर्यन दत्त की गेंद पर 0 पर आउट हो गए. अभ‍िषेक शर्मा महज 3 गेंद ही फेज कर पाए. यह उनका इस वर्ल्ड कप में 0 की हैट्र‍िक रही. इसके बाद ईशान किशन भी 7 गेंदों पर 18 गेंदों पर जड़कर बोल्ड हो गए. ईशान के आउट होते ही टीम इंड‍िया का स्कोर 39/2 हो गया. एक समय तिलक वर्मा (31) और कप्तान सूर्या टीम को संभाले हुए लग रहे, लेकिन फ‍िर रोएलोफ वैन डेर मर्व ने शानदार डाइव‍िंंग कैच लोगान वैन बीक की गेंद पर पकड़कर उनको पवेल‍ियन की द‍िशा द‍िखा दी. इसके बाद आउट होने वाले अगले बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव रहे जो 28 गेंदों पर 34 रन बनाकर काइल क्लेन की गेंद पर आउट हुए. सूर्या के आउट होते ही भारतीय टीम का स्कोर 110/4 हो गया. इसके बाद श‍िवम दुबे और हार्द‍िक पंड्या ने अंत‍िम ओवर्स में अच्छी बल्लेबाजी की, एक समय लग रहा था कि भारत आसानी से 200 रन क्रॉस कर लेगा. लेकिन अंत‍िम ओवर श‍िवम दुबे (31 बॉल, 4 चौके, 6 छक्के, 66 रन) और हार्द‍िक (30 रन, 21 गेंद) के आउट होने से ऐसा नहीं हो पाया. दुबे और पंड्या दोनों  ही लोगन वैन बीक की गेंदों पर आउट हुए. लोगन नीदरलैंड्स की टीम के सबसे सफल गेंदबाज रहे, ज‍िन्होंने 3 विकेट झटके.  टीम इंड‍िया की प्लेइंग 11 में दो बदलाव  इस मुकाबले में भारतीय टीम की प्लेइंग 11 में दो बदलाव हुए थे. कुलदीप यादव की जगह अर्शदीप सिंह टीम में आए थे. वहीं अक्षर पटेल आराम द‍िया गया, और उनकी जगह टीम में वॉश‍िंंगटन सुंदर को  शाम‍िल किया गया था. सुंदर का यह टी20 वर्ल्ड कप में डेब्यू मैच भी था.   नीदरलैंड्स की भारत के ख‍िलाफ प्लेइंग इलेवन: माइकल लेविट, मैक्स ओ’डॉड, बास डी लीडे, कॉलिन एकरमैन, स्कॉट एडवर्ड्स (कप्तान और विकेटकीपर), जैक लायन-कैशेट, लोगन वैन बीक, नोआ क्रोस, आर्यन दत्त, रोएलोफ वैन डेर मर्व, काइल क्लेन भारत की नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ प्लेइंग इलेवन: अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पंड्या, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती

किराना हिल्स में युद्धाभ्यास का धमाका, SU-30, राफेल और ब्रह्मोस के तांडव का ऑपरेशन सिंदूर हुआ लीक

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को किस तरह रणनीतिक रूप से झटका दिया, इस पर लंबे समय से बहस होती रही है. अब जाने-माने एरियल वॉरफेयर विश्लेषक और इतिहासकार टॉम कूपर ने दावा किया है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स पर सटीक हमला कर उसकी कमर तोड़ दी थी. टॉम कूपर के मुताबिक यही वह निर्णायक वार था, जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था और सीजफायर की भीख मांगने लगा. हालांकि भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर किराना हिल्स को निशाना बनाने से इनकार किया है, लेकिन टॉम कूपर का कहना है कि सबूत साफ हैं. टॉम कूपर ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें मिसाइलों के धुएं के निशान पहाड़ियों की ओर जाते और टकराते दिखाई देते हैं. इसके अलावा एक अन्य वीडियो में पाकिस्तानी वायुसेना के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से धुआं उठता दिखा. कूपर के मुताबिक भारत ने पहले इन रडार स्टेशनों को निशाना बनाकर पाकिस्तान की जवाबी क्षमता को निष्क्रिय किया और फिर अंडरग्राउंड स्टोरेज सुविधाओं के कम से कम दो प्रवेश द्वारों पर हमला किया. पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भी मारे गए?     टॉम कूपर ने दावा किया कि उस समय पाकिस्तान का ऑपरेशन ‘बुनियान-उन-मार्सूस’ फेल हो चुका था. भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को बड़े पैमाने पर नाकाम कर दिया.     कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए गए. इसके बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में 12-13 एयरबेस पर हमला किया. अंत में किराना हिल्स पर स्ट्राइक ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से घेर लिया.     हमले के समय कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज थी. पाकिस्तान, अमेरिका और भारत से संपर्क कर युद्धविराम के रास्ते तलाश रहा था. कूपर के शब्दों में यह साफ संकेत था कि पाकिस्तान अब आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था. क्यों पाकिस्तान की कमजोर नस है किराना हिल्स? किराना हिल्स को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है. यहां 20 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में हार्डन शेल्टर व भूमिगत सुरंगें मौजूद हैं. टॉम कूपर का तर्क है कि ऐसी जगह पर हमला तभी किया जाता है जब स्पष्ट संदेश देना हो- ‘हम जब चाहें, जहां चाहें, जितनी ताकत से चाहें, वार कर सकते हैं.’ कूपर ने यह भी सवाल उठाया कि जब सबूत इतने स्पष्ट हैं तो भारत आधिकारिक तौर पर हमले से इनकार क्यों करता है. वो इसे लेकर इतने आश्वस्त हैं कि बोलते हैं कि इससे इनकार करना वैसा ही जैसे कोई कहे कि सूरज पूरब से नहीं उगता. रूसी फाइटर जेट और ब्रह्मोस ने किया तांडव हथियारों की बात करें तो कूपर के अनुसार भारत को किसी विशेष गुप्त तकनीक की जरूरत नहीं पड़ी. सुखोई-30 विमानों से ब्रह्मोस और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं, जगुआर ने रैम्पेज लॉन्च किए और राफेल ने स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया. इतना पाकिस्तान के लिए काफी था. उन्होंने भारत की इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम की खास तारीफ की, जिसने रक्षात्मक और आक्रामक दोनों मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई. कुल मिलाकर टॉम कूपर का आकलन है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्पष्ट रणनीतिक जीत थी. किराना हिल्स पर कथित हमले ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि भारत की सैन्य क्षमता और एडवांस तकनीक के सामने उसकी जवाबी ताकत सीमित है.

‘जाणता राजा’ कार्यक्रम में होंगे शामिल, CM साय आज लेंगे विभागीय बैठक

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गुरुवार का दौरा कार्यक्रम तय किया गया है। मुख्यमंत्री आज सिविल लाइन स्थित अपने निवास में विभागीय बैठक लेंगे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री शाम 6.30 बजे आयोजित महानाट्य ‘जाणता राजा’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। किसानों की अहम बैठक आज रायपुर में आज किसानों की एक बैठक आयोजित होने वाली है। यह बैठक दोपहर 1 बजे कलेक्टर गार्डन रायपुर में होगी, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के घटक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ की भी सक्रिय भागीदारी रहेगी। इस दौरान भारत–अमेरिका ट्रेड डील का किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा होगी। साथ ही छत्तीसगढ़ में धान का ₹3286 प्रति क्विंटल अंतर राशि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। बैठक में किसानों के हितों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय किए जाने की संभावना है। सहयोग केंद्र में आज मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सुनेंगी समस्याएं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित सहयोग केंद्र में आज मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित रहेंगी। इस दौरान वे आम जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनकर उनके निराकरण करेंगी। सहयोग केंद्र के माध्यम से लोग अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर आवेदन कर सकेंगे। असम के चुनावी दौरे से लौटेंगे डिप्टी सीएम अरुण साव उप मुख्यमंत्री अरुण साव असम के तीन दिवसीय चुनावी दौरे के बाद आज रायपुर लौटेंगे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने असम में भाजपा संगठन के साथ मिलकर चुनावी रणनीति तैयार की। अरुण साव को लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र की 9 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दौरे के दौरान उन्होंने ढकुआखाना, लखीमपुर, तिनसुकिया और धेमाजी में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों पर चर्चा की।

मंत्री-सांसद और विधायकों का हूटर मोह नहीं रुक रहा, मध्य प्रदेश पुलिस सख्ती करने से बच रही

भोपाल  राजधानी में आपको हूटर प्रेमी बहुत दिख जाएंगे, जो खुलआम अपने वाहनों में हूटर लगाकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश से वीवीआईपी कल्चर खत्म करने को लेकर कई बार अलग-अलग मंचों से कह चुके हैं. इसके साथ ही इस कल्चर को खत्म करने के लिए कई नियमों में बदलाव भी किया गया. इसके बावजूद नेताओं और अधिकारियों का लाल बत्ती के साथ हूटर के लिए जो प्यार है, खत्म होने का नाम नहीं लेता है. मंत्री-विधायक और सांसदों के वाहन सांय-सांय की आवाज करते सड़कों पर दौड़ते नजर आ जाते हैं. हूटर नियम के बाद नहीं उतर रहे हैं. पीएम मोदी के आदेश एमपी में बेअसर करीब 8 साल पहले केंद्र सरकार की ओर से मंत्री अफसर समेत सभी जनप्रतिनिधियों के वाहनों पर हूटर लगाने के नियम को बंद कर दिया गया था. इसके बाद से गाड़ियों पर लगे हूटरों को उतारना शुरू भी कर दिया गया था. ज्यादातर गाड़ियों से हूटर और लाल बत्ती को प्रशासन द्वारा उतरावा भी दिया गया था, लेकिन मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधि हों या बड़े अधिकारी अब भी हूटर का उपयोग कर रहे हैं. केंद्र सरकार की मंशा ये थी की हूटर से काफी तेज आवाज निकलती है और ऐसे में सामान्य तौर पर उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने की अनुमति नहीं केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत इस तरह का कोई भी प्रेशर हॉर्न किसी वाहन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लेकिन पहले वीआईपी लोगों को इसकी इजाजत थी. केन्द्र सरकार के आदेश के बाद वीआईपी लोगों के वाहनों पर भी हूटर लगाना बंद कर दिया गया था. हूटर लगाने की इजाजत सिर्फ आपातकालीन सेवा में इस्तेमाल होने वाले वाहन जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के वाहन शामिल हैं. इन वाहनों के अलावा अगर और कोई हूटर इस्तेमाल करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है. हूटर लगाकर फर्राटा भर रहे नेतागण वर्तमान में विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के साथ ही अन्य राजनीतिक दलों के पदाधिकारी बेखौफ होकर हूटर लगाकर अपना जलवा बिखेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. यातायात पुलिस की चालानी कार्रवाई 2 पहिया वाहनों, सीट बेल्ट व वाहनों के दस्तावेज चेक करने तक ही सिमट कर रह गई है. अनाधिकृत रूप से हूटर लगाकर शहर और मुख्य मार्गों में दौड़ने वाले वाहनों के विरुद्ध अब तक यातायात पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. इन वाहनों में हूटर लगाने की छूट अगर कोई इन नियमों के खिलाफ जाकर अपने वाहन पर हूटर लगाता है, तो उस पर 5000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है. केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के नियम 119(3) के तहत इन वाहनों को हूटर और साइरन के लिए छूट दी गई है, जिसमें एंबुलेंस, फायर बिग्रेड, आपातकालीन सेवा में चलने वाली गाड़ी और परिवहन विभाग के अफसरों की गाड़ियां शामिल हैं. नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई इस मामले में पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने कहा, “यातायात पुलिस की ड्यूटी है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करें. जरूरत पड़ी तो हूटर के खिलाफ अभियान भी चलाया जाएगा.” हूटर के अलावा प्रेशर हॉर्न, ब्लैक फिल्म, फ्लैशर लाइट और मॉडिफाइड साइलेंसर लगाना केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के खिलाफ है. ऐसा करने पर भी जुर्माना भरना पड़ सकता है. इसीलिए वाहन चलाते वक्त इन नियमों का ध्यान रखना काफी जरूरी है.

EPFO का ऐलान पास! PF पर बढ़ेगा ब्याज? 11 दिन में मिलेगी पुष्टि

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO वित्त वर्ष 2026 के लिए पीएफ अकाउंट होल्डर्स के लिए ब्याज में संशोधन करके इसे बढ़ाएगा या फिर PF Interest Rate यथावत रहेंगे, इस पर ऐलान महज 11 दिन बाद होने वाला है. इसे लेकर अगले महीने की शुरुआत में 2 मार्च को समिति की अगली बैठक होगी, जिसमें पीएफ ब्याज दर को लेकर अंतिम फैसला लिए जाने की उम्मीद है.  स्थिर रह सकता है ब्याज! बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 मार्च को होने वाली बैठक में PF Interest Rates पर फैसला होने की उम्मीद है.फिलहाल, पीएफ खाते पर सरकार की ओर से 8.25% का ब्याज दिया जा रहा है और ऐसे उम्मीद जताई जा रही है कि EPFO इसे इसी स्तर पर बनाए रख सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ये लगातार तीसरी बार होगा, जब मेंबर्स को उनके भविष्य निधि जमा पर 8.25% का ही ब्याज मिलेगा. रिपोर्ट की मानें, तो EPFO ब्याज को स्थिर रखने का उद्देश्य बाजार में उतार-चढ़ाव होने पर भी ग्राहकों को स्थिर और निरंतर ब्याज दर देते रहना है. ईपीएफओ के पास इस फाइनेंशियल ईयर में 8.25% ब्याज दर बनाए रखने के लिए अपने निवेश से पर्याप्त अधिशेष होगा.  मनसुख मंडाविया करेंगे बैठक का नेतृत्व  PF Interest Rate के प्रस्ताव पर ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा चर्चा करते हुए निर्णय लिया जाएगा. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे. इससे पहले सीबीटी की आखिरी बैठक बीते साल 15 अक्तूबर को हुई थी. उसमें कई बड़े ऐलान किए गए थे, जिनमें पीएफ के पैसों की निकासी को आसान आसान बनाने के उद्देश्य से कई सुधारों की घोषणा की थी. सूत्रों के अनुसार, इस बार भी बोर्ड सदस्यों के लिए लेन-देन को सरल बनाने के लिए और अधिक सुधारों पर विचार किया जा सकता है. इनमें EPFO वेबसाइट को अपग्रेड करना, विद्ड्रॉल में तेजी और क्लेम सेटलमेंट में तेजी जैसे उपाय शामिल हो सकता हैं. हालांकि, अभी तक ईपीएफओ की ओर से अगली बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए ये अनुमान एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले सालों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को निवेश के नए रास्तों की तलाश करनी पड़ सकती है. मतलब साफ है कि अगर इनकम पर दबाव पड़ता है तो इससे अगले वित्तीय वर्ष से कम रिटर्न पर विचार-विमर्श देखने को मिल सकता है.  ईपीएफओ कहां-कहां करता है निवेश?  गौरतलब है कि EPFO करीब 28 लाख करोड़ रुपये के कोष मैनेज करता है. संगठन नए निवेश का 45 से 65% हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों (Govt Securities) में निवेश करता है. इसके अलावा करीब 20 से 45% अन्य ऋण साधनों (Debt Instruments) में निवेश किया जाता है. वहीं 5 से 15% तक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों के जरिए इक्विटी में लगाया जाता है, जबकि 5% तक शॉर्ट टर्म कर्ज साधनों में निवेश किया जाता है. निवेश का यह मैनेजमेंट ईपीएफओ बैलेंस को सुरक्षा और रिटर्न के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है, क्योंकि अधिकांश रकम अपेक्षाकृत स्थिर ऋण साधनों में ही निवेश की जाती है. इस तरह से आरक्षित कोष उन वर्षों में रिटर्न को सुचारू रखने में मददगार साबित होता है, जबकि निवेश से होने वाली इनकम कम होती है. 

मजदूरों के लिए बड़ा सवाल: 6 साल में 1% को ही 100 दिन का काम, कोविड में 10 लाख नाम हटने की बात विधानसभा में उजागर

भोपाल  प्रदेश में मनरेगा के तहत पिछले छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया। यह खुलासा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में हुआ। जवाब में सामने आया कि बड़ी संख्या में मजदूर पंजीकृत होने के बावजूद सीमित परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरों में से केवल 1 लाख 23 हजार परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 63 हजार 898 परिवार, वर्ष 2023 में 40 हजार 588, वर्ष 2024 में 30 हजार 420 और वर्ष 2025 में 32 हजार 560 परिवार रह गई। आंकड़ों के आधार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरा रोजगार नहीं मिल सका। 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। चार जिलों में मात्र एक-एक परिवार को ही 150 दिन काम दिया गया। जानकारी में बताया गया कि सबसे अधिक अलीराजपुर जिले में 112 परिवारों को 150 दिन रोजगार मिला, जबकि छिंदवाड़ा में 28, धार में 21, मंडला में 17 और दमोह में 16 परिवारों को यह लाभ मिला। आदिवासी जिला झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा। मजदूरी की मांग बढ़ी, रोजगार नहीं विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कोविड काल के बाद से मजदूरी की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन रोजगार उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी। बड़ी संख्या में परिवारों और श्रमिकों ने काम की मांग की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं। जॉब कार्डधारी परिवार बढ़े, काम कम मिला प्रदेश में जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रति परिवार मिलने वाले कार्य दिवस घटे हैं। विपक्ष ने इसे सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाने के कारण पलायन की स्थिति बन रही है। ऐसे घटता गया 100 दिन रोजगार पाने वालों का आंकड़ा साल पंजीकृत मजदूर 100 दिन रोजगार पाने वाले परिवार 2021 1,70,19,681 1,23,624 2022 1,81,42,207 63,898 2023 1,69,07,207 40,588 2024 1,70,42,207 30,420 2025 1,86,57,080 32,560 150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन 2025-26 में स्थिति कमजोर रही। जिलावार स्थिति (150 दिन रोजगार): 24 जिलों में — एक भी परिवार को नहीं मिला रोजगार 4 जिलों में — सिर्फ 1 परिवार को मिला रोजगार अलीराजपुर — 112 परिवार छिंदवाड़ा — 28 परिवार धार — 21 परिवार मंडला — 17 परिवार दमोह — 16 परिवार झाबुआ — शून्य विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में लाखों परिवारों और श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा नाम कोविड काल के दौरान काटे गए। कोरोना काल में सबसे ज्यादा नाम हटे विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार 786 परिवारों के 43 लाख 43 हजार 378 श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए। उस समय रोजगार की मांग सबसे अधिक थी, लेकिन बड़ी संख्या में मजदूर योजना से बाहर हो गए। वर्षवार जॉब कार्ड से हटाए गए नाम 2021: 10,46,786 परिवार — 43,43,378 श्रमिक 2022: 1,71,389 परिवार — 7,71,730 श्रमिक 2023: 5,28,579 परिवार — 20,24,552 श्रमिक 2024: 45,516 परिवार — 1,91,183 श्रमिक 2025: 25,684 परिवार — 1,23,524 श्रमिक रोजगार की मांग के बीच बाहर हुए मजदूर आंकड़ों के मुताबिक कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन उसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाने से मजदूरों को काम पाने में कठिनाई हुई। विपक्ष का आरोप कांग्रसे ने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण मजदूरों को सबसे ज्यादा रोजगार की जरूरत थी, उसी समय नाम काटे जाने से उन्हें काम से वंचित होना पड़ा और पलायन की स्थिति बनी। विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद मनरेगा के क्रियान्वयन और जॉब कार्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरी की मांग भी रही ऊंची वर्ष परिवार श्रमिक 2021-22 61,66,780 1,21,95,233 2022-23 53,13,454 92,99,519 2023-24 46,99,747 76,31,549 2024-25 44,79,776 69,86,086 2025-26 42,64,414 65,47,787  

पॉक्सो मामलों में MP तेज़, दिल्ली में बच्चों के अपराधों की जांच में 4.5 साल का वक्त

भोपाल  मध्य प्रदेश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की रफ्तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है। राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) में इन मामलों के ट्रायल (विचारण) में लगने वाला औसत समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले काफी कम है। एमपी में 380 दिन में फैसला, दिल्ली में साढ़े 4 साल विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक पॉक्सो मामले के निपटारे में औसतन 380 दिन का समय लगता है। इसकी तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।     दिल्ली: यहां पॉक्सो केस के ट्रायल में औसतन 1639.5 दिन (लगभग 4.5 साल) लग रहे हैं।     गुजरात: यहां न्याय मिलने में औसतन 1292.5 दिन का समय लगता है।     उत्तर प्रदेश: यहां भी ट्रायल में औसतन 861 दिन लगते हैं, जो एमपी से दोगुने से भी अधिक है। देशभर में 2.24 लाख से ज्यादा मामले लंबित मंत्रालय ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 2,24,572 मामले लंबित थे। इन मामलों के त्वरित निपटान के लिए वर्तमान में देश भर में 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्य कर रहे हैं, जिनमें 398 विशेष तौर पर केवल पॉक्सो (ई-पॉक्सो) कोर्ट हैं। चाइल्ड फ्रेंडली न्याय प्रणाली पर सरकार का फोकस सरकार पीड़ितों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए न्यायालय परिसरों के भीतर सुभेद्य साक्षी निक्षेपण केन्द्रों (VWDC) के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के लिए डरावने न्यायिक वातावरण के बजाय एक ‘चाइल्ड फ्रेंडली’ माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अब तक 10,000 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदार मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। इसलिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और अपराधों की जांच व अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई कदम उठा रही है। 2.45 मामले अभी भी पेंडिंग न्याय में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और विशेष POCSO अदालतों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश भर में 774 FTSCs और 398 e-POCSO अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों ने 3.66 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है, जबकि लगभग 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं। 22 राज्यों में 880 फास्ट ट्रैक अदालत इसके अलावा, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 880 फास्ट-ट्रैक अदालतें भी चल रही हैं। ये अदालतें गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और लंबी बीमारियों से पीड़ित लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करती हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य प्रदेश में इन 880 अदालतों में से एक भी फास्ट-ट्रैक अदालत कार्यरत नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 373 और महाराष्ट्र में 102 ऐसी अदालतें हैं। मध्य प्रदेश में 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें, जिनमें POCSO अदालतें भी शामिल हैं, कार्यरत हैं। अब ट्रायल को भी समझ लीजिए     ट्रायल का औसत समय: विशेष रूप से उस अवधि को दर्शाता है जो अदालत में ‘ट्रायल’ (विचारण) की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक लगती है।     ट्रायल की शुरुआत: कानूनी प्रक्रिया में ट्रायल तब शुरू माना जाता है, जब पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर देती है और अदालत उस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करती है।     अवधि की गणना: दस्तावेजों में ‘औसत विचारण समय’ की गणना उन दिनों के आधार पर की गई है जो फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) और अनन्य पॉक्सो (e-POCSO) न्यायालयों में मामले की सुनवाई चलने और फैसला आने के बीच व्यतीत हुए हैं।     केस दर्ज होने से अंतर: आमतौर पर केस दर्ज होने (FIR) और विचारण (Trial) शुरू होने के बीच ‘जांच’ का समय होता है। जो 380 दिन (मध्य प्रदेश के लिए) का आंकड़ा दिया गया है, वह मुख्य रूप से अदालती कार्यवाही (Trial) में लगने वाला समय है।     त्वरित निपटान का लक्ष्य: इन विशेष न्यायालयों का उद्देश्य ही यह है कि विचारण की इस अवधि को कम किया जाए ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। मंत्री बोले- जितना जल्दी न्याय मिलेगा, तभी हम कहेंगे न्याय हुआ पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे पर मप्र के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा- न्याय जितने जल्दी मिले, तभी हम कह सकते हैं कि न्याय हुआ। अन्यथा जितना देरी होगी उतना अन्याय की दिशा में हम बढे़ेंगे। मप्र के लिए हमें यह संतोष है कि जो शिकायतें हुई उनका जितना जल्दी हो सके न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

समुद्री अभियान में भारत का जबरदस्त प्रदर्शन, पाकिस्तान के गुरूर पर ‘निस्तार’ का पल

विशाखापत्तनम  इंडियन नेवी के इतिहास में कुछ तारीखें और कुछ जगहें ऐसी हैं, जो दुश्मन के कलेजे में हमेशा खौफ पैदा करती हैं. इस साल का इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और ‘मिलन’ एक्सरसाइज एक बार फिर उसी इतिहास को जिंदा करने जा रहा है. इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश विशाखापत्तनम के उस समंदर से निकल रहा है, जहां आज से ठीक 55 साल पहले पाकिस्तान की अकड़ और उसका गुरूर पीएनएस गाजी (PNS Ghazi) हमेशा के लिए दफन हो गया था. गर्व की बात यह है कि जहां गाजी की कब्र है, आज ठीक उसी जगह भारत का अपना स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा है. यह सिर्फ एक जहाज की मौजूदगी नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक ऐसा ट्रॉमा है जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा. 1971 की वो घटना, जब गाजी शिकार बन गया     बात 1971 की है, जब पाकिस्तान ने भारत के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को डुबोने के लिए अपनी सबसे घातक अमेरिकी सबमरीन पीएनएस गाजी को भेजा था. पाकिस्तान को लगा था कि गाजी चुपचाप आएगी और विशाखापत्तनम के पास विक्रांत का काम तमाम कर देगी. लेकिन इंड‍ियन नेवी की रणनीति के आगे गाजी की एक न चली.     आईएनएस राजपूत ने विशाखापत्तनम के तट के पास ही गाजी को ट्रैक किया और समंदर की गहराइयों में उसे हमेशा के लिए सुला दिया. उस वक्त जब गाजी के मलबे को खोजने और समंदर के नीचे डाइविंग ऑपरेशन चलाने की बारी आई, तो यह काम नेवी के तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने बखूबी अंजाम दिया था. आज उसी ‘निस्तार’ का आधुनिक और स्वदेशी अवतार उसी जगह मौजूद है, जो पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. आईएनएस निस्तार यानी समंदर का बादशाह भारतीय नौसेना को 18 जुलाई 2025 को अपना पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला. इससे पहले नौसेना के पास ऐसे जहाजों की भारी कमी थी, लेकिन अब निस्तार और निपुण के आने से भारत इस क्षेत्र में सेल्फ-रिलायंट बन गया है. न‍िस्‍तार की खूब‍ियां ऐसी हैं, ज‍िससे इसे समंदर के बादशाह के नाम से भी जाना जाता है. ‘निस्तार’ क्यों है इतना खास?     संस्कृत में ‘निस्तार’ का अर्थ होता है ‘मुक्ति’ या ‘उद्धार’. इससे आप न‍िस्‍तार की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं. वैसे तो इसका मुख्य काम किसी भी सबमरीन इमरजेंसी के दौरान नौसैनिकों का रेस्क्यू करना है. लेकिन यह बहुत काम की चीज है.     यह जहाज अपने साथ डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल ले जाता है, जो गहरे समंदर में जाकर फंसी हुई सबमरीन से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल सकता है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया यह जहाज लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी है.     निस्तार 120 मीटर लंबा और 10,000 टन वजनी है. यह 18 नॉटिकल मील प्रति घंटा की रफ्तार से सफर करता है. यह अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों और सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट सिस्टम से लैस है. विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के लिए ‘डेथ जोन’ इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में चीन और पाकिस्तान को कभी नहीं बुलाया जाता, लेकिन भारत की यह सामरिक तैयारी उनके लिए सबसे बड़ी चेतावनी है. जिस जगह गाजी डूबा था, आज वहां सिर्फ निस्तार ही नहीं, बल्कि भारत का स्वदेशी आईएनएस विक्रांत भी मौजूद है. यह वही विक्रांत है जिसे डुबोने का सपना लेकर गाजी आया था. आज विक्रांत का नया अवतार उसी जगह खड़ा होकर दुनिया को बता रहा है कि भारत की समुद्री सीमाएं अब अभेद्य हैं. निस्तार और निपुण की जोड़ी अभेद्य नेवी के इस प्रोजेक्ट के तहत दो डाइविंग सपोर्ट वेसल तैयार किए जा रहे हैं. निस्तार के बाद अब ‘निपुण’ पर काम तेजी से चल रहा है. ये दोनों जहाज भारतीय नौसेना को दुनिया की उन चुनिंदा नौसेनाओं की कतार में खड़ा कर देंगे जिनके पास अपनी सबमरीन रेस्क्यू क्षमता है. कुल मिलाकर, विशाखापत्तनम में आईएफआर (IFR) का यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं है. यह पाकिस्तान की उस हार का जश्न है जिसने 1971 में दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया था. जहां पाकिस्तान का गुरूर दफन हुआ था, आज वहां भारत का ‘निस्तार’ खड़ा होकर नए भारत की बुलंद तस्वीर पेश कर रहा है.

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