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देशी फाइटर जेट की तैयारी: भारत का AMCA प्रोजेक्ट F-35 और Su-57 जैसा विमान देगा जन्म

मुंबई  भारत ने पांचवीं पीढ़ी के देसी स्टेल्थ फाइटर जेट (5th Gen Fighter Jet) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बड़ा कदम उठाया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इस 5th जेन फाइटर जेट का प्रोटोटाइप डिजाइन करने के लिए तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है. इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड सबसे बड़ी दावेदार के तौर पर उभरी है, जबकि लार्सन एंड टुब्रो–भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज (BEML लिमिटेड) डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह शामिल है. एएमसीए प्रोजेक्ट के तहत भारत का स्वदेशी सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट विकसित किया जाना है, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग और इंटरनल वेपन बे जैसी अत्याधुनिक खूबियां होंगी. इस परियोजना के अंतर्गत 125 से अधिक फाइटर जेट तैयार किए जाने की योजना है, जिनके 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. ये विमान अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के विमान F-35 और रूसी फिफ्थ जेन फाइटर जेट Su-57 की टक्कर के होंगे. इस 5th जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का पहला प्रोटोटाइप 2028 के आखिर तक रोल आउट होने वाला है, और पहली उड़ान 2029 में प्लान की गई है. इस प्रोजेक्ट का मकसद पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप डेवलप करना है, जिसका पूरा डेवलपमेंट 2034 तक पूरा होने और शुरुआती प्रोडक्शन 2035 तक होने का टारगेट है. HAL और अडाणी डिफेंस ने भी लगाई थी बोली रिपोर्ट के मुताबिक, डीआरडीओ ने अपनी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के जरिये जुलाई 2025 में इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किए थे. शुरुआत में सात कंसोर्टियम ने बोली लगाई थी, जिनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अडाणी डिफेंस जैसे नाम शामिल थे. शॉर्टलिस्ट किए गए दावेदारों को अब सरकार की ओर से फंडिंग सहायता मिलने की संभावना है, ताकि वे एएमसीए के प्रोटोटाइप विकसित कर सकें. इसके बाद ही उत्पादन अधिकार दिए जाएंगे. सूत्रों के हवाले से बताया कि, HAL शुरुआती स्क्रीनिंग में एक अनिवार्य दस्तावेजी मानदंड में त्रुटि के कारण बाहर हो गया. हालांकि कंपनी को बाद में लाइसेंस निर्माण के लिए बोली लगाने का अवसर मिल सकता है. HAL के सीएमडी डीके सुनील ने हाल ही में कहा था कि एएमसीए एक 10 साल की परियोजना है और भले ही उनकी कंपनी शुरुआती चरण में चयनित न हो, वह आगे लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूर बोली लगाएगी. भारत के 5th Gen फाइटर जेट प्रोजेक्ट की खास बातें… भारत का AMCA प्रोग्राम क्या है? AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है, जिसे डीआरडीओ विकसित कर रहा है. AMCA की सबसे बड़ी खासियत क्या होगी? यह एक सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग, इंटरनल वेपन बे और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम शामिल होंगे. AMCA के लिए किन कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है? डीआरडीओ ने तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है— टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (स्टैंडअलोन), लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज, बीईएमएल लिमिटेड और डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह AMCA प्रोजेक्ट के तहत कितने फाइटर जेट बनाए जाएंगे? इस प्रोजेक्ट के तहत 125 से अधिक फाइटर जेट बनाए जाने की योजना है. AMCA कब तक भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है? AMCA के 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. भारत में बनेंगे 90 राफेल जेट एएमसीए परियोजना भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है. इसी क्रम में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिनमें से 90 विमान भारत में बनाए जाएंगे. यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17 से 19 फरवरी के भारत दौरे से कुछ दिन पहले दी गई. इसके अलावा, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने नौसेना के लिए अमेरिका से छह अतिरिक्त पी-8आई समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी है. यह सभी फैसले भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं.  

वतन लौटते ही कप्तान का गुस्सा छलका, पाक हॉकी टीम के खिलाड़ी मैदान पर बर्तन मांजते पाए गए

 कराची/लाहौर पाकिस्तान हॉकी टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटते ही एक बड़ा विवाद सामने आ गया है. टीम के कप्तान शकील अम्माद बट (Shakeel Ammad Butt) ने पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि खिलाड़ियों को मैच खेलने से पहले बर्तन तक मांजने पड़े और कई घंटों तक सड़कों पर भटकना पड़ा. लाहौर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में बट ने साफ कहा, ‘अब बहुत हो चुका है… जब खिलाड़ी मैच खेलने से पहले किचन साफ करें और बर्तन धोएं, तो उनसे आप किस तरह के नतीजों की उम्मीद करेंगे?’ 13-14 घंटे एयरपोर्ट पर इंतजार ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद टीम को सबसे पहले सिडनी एयरपोर्ट पर 13-14 घंटे इंतजार करना पड़ा. इसके बाद जब टीम कैनबरा में FIH Pro League मुकाबलों के लिए होटल पहुंची तो पता चला कि बुकिंग ही नहीं की गई थी. खिलाड़ियों को बताया गया कि होटल प्रबंधन को अग्रिम भुगतान नहीं मिला है. नतीजा यह हुआ कि टीम को घंटों तक इंतजार करना पड़ा और अस्थायी व्यवस्था होने तक इधर-उधर भटकना पड़ा. अगले ही दिन पाकिस्तान को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला मैच खेलना था, जिसमें टीम 2-3 से हार गई. दौरे के दौरान पाकिस्तान को मेजबान ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी दोनों से हार का सामना करना पड़ा. 10 दिन का Airbnb, 13 दिन का दौरा कप्तान बट ने खुलासा किया कि टीम के लिए Airbnb आवास सिर्फ 10 दिनों के लिए बुक किया गया था, जबकि दौरा 13 दिनों का था. मजबूरी में खिलाड़ियों को बाद में सस्ते ठिकाने पर शिफ्ट होना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि फेडरेशन खिलाड़ियों से सच्चाई छिपाता रहा और मीडिया से बात करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी. बट ने कहा, ‘मैं इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि जो हमने ऑस्ट्रेलिया में झेला, वह अस्वीकार्य है.’ 10 मिलियन रुपये का सवाल इस पूरे विवाद के बीच Pakistan Sports Board ने पुष्टि की है कि उसने टीम के होटल इंतजाम के लिए PHF को 10 मिलियन पाकिस्तानी रुपये से अधिक की राशि जारी की थी. PSB के महानिदेशक नूर उस सबा (Noor us Sabah) ने कहा है कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जो PHF के पैट्रन-इन-चीफ भी हैं, ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं. विदेशी कोच की मांग कप्तान बट ने यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान हॉकी को आगे बढ़ना है तो विदेशी कोच और बेहतर प्रबंधन की जरूरत है. बट ने कहा, ‘हमारे पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का अच्छा संयोजन है, लेकिन सही दिशा और पेशेवर प्रबंधन के बिना आगे बढ़ना मुश्किल है.’ पाकिस्तान हॉकी की साख पर सवाल एक समय दुनिया पर राज करने वाली पाकिस्तान हॉकी अब प्रशासनिक अव्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता के संकट से जूझ रही है. खिलाड़ियों की यह खुली नाराजगी बताती है कि मामला सिर्फ हार-जीत का नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या पाकिस्तान हॉकी को उसका खोया हुआ सम्मान वापस मिल पाएगा.

शिवम-हार्दिक के दम पर भारत मजबूत, नीदरलैंड के सामने 194 रन की चुनौती

अहमदाबाद  भारतीय टीम ने नीदरलैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप 2026 के 36वें मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 193 रन बनाए। भारत की ओर से शिवम दुबे ने सर्वाधिक 66 रन बनाए। नीदरलैंड की ओर से वीक ने दो विकेट लिए। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को अभिषेक शर्मा के रूप में पहला झटका लगा। अभिषेक बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। जारी विश्व कप में लगातार तीसरे मैच में अभिषेक शर्मा का खाता नहीं खुला। सलामी बल्लेबाज ईशान किशन 7 गेंद में 18 रन बनाकर आउट हुए। तिलक वर्मा 27 गेंद में 31 रन बनाकर पवेलियन लौटे। उन्होंने अपनी पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। कप्तान सूर्यकुमार यादव 28 गेंद में 34 रन बनाकर पवेलियन लौटे। शिवम दुबे 31 गेंद में 66 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने अपनी पारी में चार चौके और 6 छक्के लगाए। हार्दिक पांड्या ने 21 गेंद में 30 रन का योगदान दिया। रिंकू ने 6 रन बनाए। भारतीय टीम ने नीदरलैंड के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। भारत ने प्लेइंग इलेवन में बदलाव किए हैं। भारत ने दो बदलाव करते हुए अक्षर पटेल और कुलदीप यादव की जगह वॉशिंगटन सुंदर और अर्शदीप सिंह को एकादश में शामिल किया है। नीदरलैंड ने एक बदलाव करते हुए नोह क्रोस को एकादश में जगह दी है। भारतीय टीम लगातार तीन मुकाबला जीतकर सुपर-8 के लिए क्वालीफाई कर चुकी है। जहां उसका पहली भिड़ंत साउथ अफ्रीका से होगी, जोकि शानदार फॉर्म में हैं। वहीं दूसरी तरफ नीदरलैंड की टीम दो मैच हारकर बाहर हो गई है। दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन इस प्रकार हैं: भारत (प्लेइंग XI): इशान किशन (विकेट कीपर), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह नीदरलैंड्स (प्लेइंग XI): माइकल लेविट, मैक्स ओ’डॉड, बास डी लीडे, कॉलिन एकरमैन, स्कॉट एडवर्ड्स (विकेट कीपर), ज़ैक लायन-कैशेट, रोएलोफ़ वैन डेर मर्व, लोगान वैन बीक, आर्यन दत्त, काइल क्लेन, नोआ क्रोस

सम्मेलन में 3110 श्रमिकों को कुल 1.23 करोड़ की सहायता राशि की गई वितरित

रायपुर श्रमिकों के खून-पसीने की मेहनत से ही प्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा श्रमिकों के सम्मान और उनके सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से कोरबा शहर के टीपी नगर स्थित राजीव गांधी ऑडिटोरियम में श्रमिक सम्मेलन का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।  सम्मेलन में श्रमिक कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा करते हुए श्रमिकों को विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई तथा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता राशि भी वितरित की गई। इस अवसर महापौर मती संजू देवी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह, सभापति नगर निगम  नूतन ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रमवीर उपस्थित थे। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने श्रमिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमवीर प्रदेश की रीढ़ हैं। उनके अथक परिश्रम और समर्पण से ही बड़े निर्माण कार्य, अधोसंरचना विकास एवं औद्योगिक प्रगति संभव हो पा रही है। श्रमिकों के खून-पसीने की मेहनत से ही प्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर रहा है।    मंत्री  देवांगन ने कहा कि श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा एवं सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में विभाग अंतर्गत श्रमिकों एवं उनके परिजनों के हित में अनेक कल्याणकारी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से श्रमिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि श्रमवीरों और उनके परिवार को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देते हुए विगत दो वर्षों में 800 करोड़ की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की जा चुकी है। श्रमिकों के लिए आवास निर्माण सहायता, सुरक्षा उपकरण सहायता, महतारी जतन योजना, मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, नोनी सुरक्षा योजना, नौनिहाल छात्रवृत्ति, श्रमिक सियान सहायता योजना सहित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ संचालित हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिक परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। श्रम मंत्री ने कहा कि श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन, छात्रवृत्ति, गणवेश एवं साइकिल वितरण जैसी सुविधाओं के साथ बोर्ड परीक्षा में मेरिट में आने वाले श्रमिकों के बच्चों  को 1 लाख रुपये की मेधावी छात्रवृत्ति तथा विदेश में अध्ययन हेतु 50 लाख रुपये तक की छात्रवृत्ति का प्रावधान है। उन्होंने श्रमवीरों से अपील की कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शिता के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। अब योजनाओं की सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। आज भी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में प्रेषित की गई है। मंत्री  देवांगन ने कहा कि कोरबा श्रमिक बाहुल्य जिला है, यहां बाल्को, एनटीपीसी एवं एसईसीएल जैसे प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान स्थापित हैं। श्रमिकों के हित में वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित है, जिसके अंतर्गत मात्र 5 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से उद्योगों को प्रोत्साहन देकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु श्रमेव जयते पोर्टल एवं कॉल सेंटर संचालित है। श्रमिक इन माध्यमों से अपनी शिकायत दर्ज कर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। श्रम मंत्री ने उपस्थित सभी श्रमिकों से विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने तथा अन्य श्रमिक साथियों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों का सशक्तिकरण ही समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। महापौर मती राजपूत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि में श्रमिकों का योगदान अहम है। उनके बिना विकास की परिकल्पना भी संभव नही है। उन्होंने कहा कि श्रमवीरों एवं उनके परिवार के हित में सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की गई है। उन्होंने श्रमिकों को इन योजनाओं की जानकारी रखने एवं उनका लाभ उठाने का आग्रह किया।     जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन  तथा नगर निगम सभापति  ठाकुर ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शासन द्वारा संचालित योजनाएँ श्रमिकों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सक्रिय रूप से उनका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया, जिससे वे शासकीय सुविधाओं से अधिकतम रूप से लाभान्वित हो सकें। सम्मेलन में मुख्य अतिथि  देवांगन द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल, असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं श्रम कल्याण मंडल अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत  3110 श्रमिकों को कुल एक करोड़ 23 लाख रूपये की सहायता राशि वितरित की गई है। जिसमें मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के तहत 2840 श्रमिक परिवार के बच्चों को कुल 59 लाख 63 हजार रुपए,  मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना अंतर्गत 190 श्रमिकों को 38 लाख रुपए, मिनीमाता महतारी जतन योजना के 44 हितग्राहियो को 08 लाख 80 हजार रूपए, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के 20 हितग्राहियों को 04 लाख रूपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के 13 हितग्राहियों को 13 लाख रुपये, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के  3 हितग्राहियों को 26 हजार रूपये राशि से लाभान्वित किया गया। स्टॉल के माध्यम से श्रमिकों का किया गया पंजीयन/नवीनीकरण, पहुँचाया गया स्वास्थ्य लाभ सम्मेलन स्थल पर विभाग द्वारा स्टॉल लगाया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत पंजीकृत श्रमिकों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। इस दौरान श्रमिकों का पंजीकरण एवं नवीनीकरण किया गया, साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा श्रमिको का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाइयाँ भी वितरित की गईं, जिससे उन्हें प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित हुआ।

87.21 करोड़ लागत के 41 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए दृढ़संकल्पित होकर कार्य कर रहे है। मध्यप्रदेश विधानसभा में 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए से अधिक का ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत किया गया है। कृषि कल्याण वर्ष में प्रदेश के किसानों के लिए एक लाख करोड़ से अधिक राशि का प्रावधान किसान हितैषी योजनाओं के लिये किया गया है। प्रदेश सरकार का किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का यह प्रमाण है। उन्होंने कहा गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी कल्याण के साथ हम प्रदेश को प्रगति पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में लंबे समय से अग्रणी है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने का संकल्प लिया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना से प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष में ग्वालियर जिले में भगवान जगन्नाथ की पुण्य भूमि ग्राम कुलैथ में आयोजित हुए विशाल किसान सम्मेलन में किसान भाईयों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 करोड़ 21 लाख रुपए से अधिक लागत के 41 विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। साथ ही कुलैथ क्षेत्र के विकास के लिये बड़ी-बड़ी सौगातों की घोषणा भी की। उन्होंने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के लिये लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। किसानों की पट्टों वाली जमीन की अपने खर्चे पर सरकार कराएगी रजिस्ट्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की जमीन के पट्टों की रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकार उठाएगी, इसके लिए बजट में पर्याप्ट धनराशि का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को बैंकों से योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा हर संभव कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश के किसानों को सोलर पंप वितरित कर उन्हें बिजली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। बुंदेलखंड की केन-बेतवा लिंक परियोजना का लाभ चंबल क्षेत्र के किसानों को भी मिलने वाला है। सिंचाई की सुविधा मिलने से यहां खेतों में फसलें लहलहाएंगी। सुपोषण के लिये सरकार स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पहली से 8वीं कक्षा तक के बच्चों के सुपोषण के लिये सरकार नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराएगी। इस साल के बजट में यह योजना प्रस्तावित की गई है। साथ ही बजट में लाड़ली बहनों के लिए 23 हजार करोड़ से अधिक राशि आवंटित की गई है। कन्हैया लोकगीतों का लिया आनंद और पुष्पवर्षा कर किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण का स्मरण करने से जीवन की अनेक कठिनाइयां खत्म हो जाती हैं। बाबा महाकाल ने सभी के जीवन का समय निश्चित किया है, इसलिए समाज कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण पारंपरिक लोक गायकों द्वारा प्रस्तुत कन्हैया लोकगीतों का आनंद भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया। उन्होंने मनमोहक कन्हैया लोक गीत प्रस्तुत करने वाले लोक गायकों का पुष्प वर्षा कर अभिनंदन और उत्साहवर्धन किया। लोक गायन में भाग लेने वाली सभी 18 टीमों को 5 – 5 हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की। बैलगाड़ी दौड़ में शामिल लोगों का किया उत्साहवर्धन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन स्थल के समीप स्थानीय किसानों द्वारा आयोजित पारंपरिक बैलगाड़ी दौड़ भी देखी। उन्होंने बैलगाड़ी दौड़ में शामिल हुईं 28 बैलगाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप 5-5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही बैलगाड़ी दौड़ में प्रथम और द्वितीय पुरस्कार के लिए क्रमश: 21 व 11 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की। रोड-शो में स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर किया अभिनंदन ग्वालियर के कुलैथ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव जब हैलीपेड से रथ पर सवार होकर रोड-शो करते हुए आगे बढ़े तो मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में मौजूद जनसमुदाय द्वारा उनका पुष्प वर्षा कर भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी जनता का अभिवादन किया। कुलैथ क्षेत्र के लिये की बड़ी-बड़ी सौगातों की घोषणा भगवान जगन्नाथ की पुण्य भूमि कुलैथ में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में शामिल होने आए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुलैथ क्षेत्र को विकास कार्यों की बड़ी-बड़ी सौगातें देने की घोषणा की। इनमें डंडे वाले बाबा मंदिर तक एक किलोमीटर लम्बी सड़क व ट्रांसफार्मर, भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिये आने वाले श्रृद्धालुओं को ठहरने के लिये सामुदायिक भवन, युवाओं के लिये खेल मैदान व कुलैथ क्षेत्र में उद्योग की स्थापना शामिल है। साथ ही ग्राम पंचायत सुसैरा, ब्रह्मपुरा, साईंपुरा व ग्राम पंचायत सोजना के बंजारे का पुरा को आबादी क्षेत्र बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस क्षेत्र की महेश्वरा पत्थर खदान को फिर से चालू कराने के लिये आशवस्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर क्षेत्र के लिये हमेशा सौगातें लेकर आते हैं – सांसद  कुशवाह सांसद  भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर क्षेत्र के लिये हमेशा बड़ी-बड़ी सौगातें लेकर आते हैं। उन्होंने आज भी 87 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगातें दी हैं। साथ ही विधानसभा में प्रस्तुत हुए बजट में विकास के लिये लगभग 4 लाख करोड़ से अधिक धनराशि का प्रावधान किया है। सांसद  कुशवाह ने कहा कि खुशी की बात है कि ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में पुल-पुलियाओं व सड़कों के निर्माण के लिये भी लगभग 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति क्षेत्रीय जनता की ओर से धन्यवाद व्यक्त किया। हितलाभ वितरण एवं प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान सम्मेलन में सरकार की किसान हितैषी व अन्य योजनाओं के तहत मुख्य मंच से प्रतीक स्वरूप हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगी कृषि प्रदर्शनी में लगाए गए 16 स्टॉलों का भ्रमण कर विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा प्रदर्शित योजनाओं, नवाचारों एवं तकनीकी जानकारी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ फूलों की खेती एवं ड्रिप स्प्रिंकलर का लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया। … Read more

‘योग्य मतदाताओं को जोड़ना प्राथमिक लक्ष्य’: असम में एसआर पर बोले मुख्य चुनाव आयुक्त

 गुवाहाटी असम में चल रही विशेष पुनरीक्षण (SR) प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि असम में कराए गए विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना था कि सभी पात्र मतदाता सूची में शामिल हों और अपात्र नामों को हटाया जाए। तीन दिवसीय दौरे के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण कानूनन अनिवार्य है। असम में यह प्रक्रिया इसलिए कराई गई क्योंकि यह देश का एकमात्र राज्य है जहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। बीहू को लेकर चुनाव तिथियों पर होगा विचार चुनाव तिथियों के निर्धारण पर पूछे गए सवाल के जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बीहू असम का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इसलिए समीक्षा बैठकों के दौरान विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव कार्यक्रम तय करते समय राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, आयोग की प्राथमिकता स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारु चुनाव कराना है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय परंपराओं और जनभावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों से प्राप्त सुझावों का मूल्यांकन कर संतुलित और व्यावहारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। 12 राज्यों में SIR, असम में SR मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि चुनावी नियमों के अनुसार मतदान से पहले मतदाता सूची का अद्यतन जरूरी है। इसी के तहत 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराया गया, जबकि असम में विशेष पुनरीक्षण (SR) आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया सफल रही है। राज्य के सभी जिलों से कुल लगभग 500 लोगों ने ही अपने नाम जोड़ने या किसी अन्य नाम को हटाने के लिए अपील दायर की है, जो इस बात का संकेत है कि सूची काफी हद तक सटीक है। चुनाव तैयारियों की व्यापक समीक्षा मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी तीन दिवसीय दौरे पर असम आए थे। इस दौरान आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर मतदान केंद्रों, सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सूची और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने भरोसा जताया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाएगी। 1200 मतदाताओं की सीमा तय चुनाव आयोग ने प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा तय की है। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। आयोग का मानना है कि इससे लंबी कतारों और भीड़भाड़ की समस्या कम होगी और मतदान प्रतिशत भी बढ़ सकता है। मोबाइल फोन रखने की नई सुविधा पहली बार असम में मतदाताओं को मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार पर अपने मोबाइल फोन रखने की अनुमति दी जाएगी। अब तक कई जगहों पर मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता था, जिससे मतदाताओं को असुविधा होती थी। नई व्यवस्था के तहत प्रवेश द्वार पर सुरक्षित जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि मतदाताओं को अधिकतम सुविधा देना भी है। रंगीन फोटो, बड़े अक्षरों में नाम, सीमित मतदाता संख्या और मोबाइल जमा सुविधा जैसे कदम उसी दिशा में उठाए गए हैं। असम में चुनावी माहौल के बीच आयोग की ये घोषणाएं प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मतदाता-हितैषी बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही हैं।

पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना और गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण कर प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर. गुरु घासीदास के अनुयायियों का दल पावन गिरौदपुरी धाम के लिए हुआ रवाना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन परिसर से “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का शुभारंभ किया। उन्होंने धार्मिक विधि-विधान के साथ पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर पावन गिरौदपुरी धाम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना कर गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण किया तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।             मुख्यमंत्री  साय ने पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और सामाजिक बंधुओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि गुरु घासीदास बाबा का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पदयात्रा समाज में सद्भावना, समरसता और भाईचारे को और सुदृढ़ करेगी।  साय ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामाजिक हितों को गति देने हेतु विशेष प्राधिकरण का गठन भी किया गया है। पदयात्रा के उपरांत विशाल मेले के आयोजन की जानकारी भी उन्होंने दी।              कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह पदयात्रा सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और एकता के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी से सामाजिक भेदभाव और द्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा गुरु घासीदास बाबा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएगी। कार्यक्रम में धर्मगुरु गुरु  बालदास साहेब, विधायक  ललित चंद्राकर, विधायक  मोतीलाल साहू, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष  प्रहलाद रजक, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, संत समाज के प्रतिनिधि एवं सर्व समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।                   गौरतलब है कि रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक प्रस्तावित “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का आयोजन 18 से 22 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा और सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। इस दौरान गिरौदपुरी धाम मेले में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए।

स्टोर रूम में लगी आग से अस्पताल में भगदड़, भोपाल के जेपी हॉस्पिटल में बड़ा हादसा टला

भोपाल।  राजधानी के प्रमुख शासकीय जय प्रकाश (जेपी) अस्पताल में बुधवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब ओपीडी ब्लॉक की पहली मंजिल पर स्थित स्टोर रूम से अचानक आग की लपटें उठने लगीं। दोपहर में हुई इस घटना ने अस्पताल के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी। प्लास्टिक और सर्जिकल सामान जलने से निकला काला धुआं चंद मिनटों में पूरे परिसर में फैल गया, जिससे ओपीडी में मौजूद डॉक्टर और मरीज जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। करीब 45 मिनट तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा गार्ड हरिदेव का अदम्य साहस… ताला तोड़कर बुझाई आग जब आग लगी, तब स्टोर रूम का गेट बंद था और चाबी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में सुरक्षा गार्ड हरिदेव यादव ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए गेट का ताला तोड़ा और फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग बुझाने में जुट गया। एक के बाद एक करीब आठ कंटेनर खाली करने के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान धुआं फेफड़ों में भरने से हरिदेव की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। दमकल की गाड़ियां सूचना के 30 मिनट बाद पहुंचीं, तब तक गार्ड आग बुझा चुका था। लाखों के स्प्रिंकलर हुए फेल, सिस्टम का नहीं हुआ था हैंडओवर हैरानी की बात यह है कि बीते साल अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए ऑटोमैटिक वाटर स्प्रिंकलर और फायर डिटेक्शन सिस्टम ने काम ही नहीं किया। जांच में सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन ने अब तक फायर सेफ्टी एजेंसी को सिस्टम का हैंडओवर ही नहीं दिया था, जिसके चलते आधुनिक उपकरण केवल दीवार की शोभा बढ़ा रहे थे। जेपी अस्पताल में हुई आगजनी की घटना की प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट की बात सामने आ रही है। अस्पताल में फायर सेफ्टी उपकरणों के हैंडओवर और उनके संचालन में हुई देरी को लेकर सिविल सर्जन से रिपोर्ट तलब की गई है। लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला अस्पतालों को पुनः फायर ऑडिट के निर्देश दिए गए हैं। – डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल  

प्रदेश में उपलब्ध बजट को पांच साल में दोगुना करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कर रही है कार्य

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समयानुकूल बनाना आवश्यक है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश को समृद्ध और सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में सार्थक प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करना भी नीति का उद्देश्य है। प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव “कर्मयोगी बनें” की सर्वोच्च परामर्शदात्री समिति की एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं है, राष्ट्र के भविष्य की कार्यशालाएं हैं। भगवद्गीता में कहा गया है कि कर्म को उत्कृष्टता और दक्षता के साथ करना ही योग है। आज जब हम “कर्म योगी शिक्षाविद्” की बात करते हैं, तो हम केवल एक आदर्श नहीं गढ़ रहे, बल्कि एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहते हैं, जहाँ शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाए, बल्कि प्रेरणा दें। संस्थान नियमों के साथ उद्देश्य पूर्ति के लिये संचालित हों। विद्यार्थी केवल नौकरी न खोजें, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनें। हमें शिक्षण को अधिक प्रासंगिक और जीवन सापेक्ष बनाना होगा। अनुसंधान की सामाजिक उपयोगिता पर भी और ध्यान अपेक्षित है। डिग्री और रोजगार के बीच जो दूरी है, उसे हमें खत्म करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, इसे दृष्टिगत रखते हुए सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि संकाय आरंभ किया गया है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों में अलग-अलग दक्षता वाले कर्मियों की आवश्यकता है। राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप वहां के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई आदि तकनीकी संस्थाओं में कोर्स आरंभ कर रही है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और युवा अपनी क्षमता और योग्यता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इन्हीं गतिविधियों से कर्मयोगी बनने का स्वप्न साकार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध बजट को 5 वर्ष में दोगुना करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए चरणबद्ध रूप से पांच लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। हर वर्ष एक क्षेत्र पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सम्बद्ध 16 विभागों के लक्ष्य समग्र रूप से तय किए गए हैं। इससे किसान की आय को दोगुना करने का राज्य सरकार का संकल्प भी पूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमें सहकर्मी संस्कृति को पुनर्जीवित करना होगा। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि अपने कर्तव्य का पालन ही श्रेष्ठ है। हमने “अभ्युदय मध्यप्रदेश” का जो संकल्प लिया है, उसमें शिक्षा केंद्रीय भूमिका निभाती है। हम यदि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें विकसित विश्वविद्यालयों का निर्माण करना होगा। मध्यप्रदेश को मूल्य आधारित, गुणवत्ता संपन्न और रोजगार सक्षम शिक्षा का मॉडल राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है। ‘कर्मयोगी बने’ कार्यशाला इसी दिशा में एक गंभीर और प्रतिबद्ध प्रयास है। कार्यशाला में मिशन कर्मयोगी के सदस्य प्रो. आर. बालासुब्रमणियम, जेएनयू नई दिल्ली की कुलपति प्रो. शांति धुलिपुडी पंडित, यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के कन्वीयर डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, कुलसचिव और शिक्षाविद उपस्थित थे।  

एआई भविष्य को लेकर गूगल प्रमुख का बड़ा बयान— भारत है असाधारण प्रगति के लिए तैयार

नई दिल्ली गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने राजधानी दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की। पिचाई भारत में आयोजित ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने आए हैं और 20 फरवरी को समिट में मुख्य भाषण देंगे। भारत पहुंचने पर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत लौटकर खुशी हो रही है और यहां हमेशा की तरह गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भारत पहुंचने पर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत लौटकर खुशी हो रही है और यहां हमेशा की तरह गर्मजोशी से स्वागत किया गया।   पीएम मोदी ने क्या कहा? पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान श्री सुंदर पिचाई से मिलकर बेहद खुशी हुई। हमने एआई के क्षेत्र में भारत द्वारा किए जा रहे कार्यों और इस क्षेत्र में हमारे प्रतिभाशाली छात्रों और पेशेवरों के साथ गूगल कैसे काम कर सकता है, इस बारे में चर्चा की। गूगल देश के एआई परिवर्तन में साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध पिचाई ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में असाधारण प्रगति के लिए तैयार है और गूगल देश के एआई परिवर्तन में साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एआई हमारे जीवन का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बदलाव है, जो स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर डायग्नोस्टिक्स से लेकर किसानों को रियल-टाइम अलर्ट देने जैसे बड़े स्तर की चुनौतियों को हल करने में सक्षम है। पिचाई ने भारत की विविधता, बहुभाषी पारिस्थितिकी और मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नवाचार के लिए मजबूत आधार बताते हुए कहा कि यह वैश्विक स्तर पर एआई के लोकतांत्रिक उपयोग का एक मॉडल बन सकता है। उन्होंने जोर दिया कि एआई का विकास भरोसे, सुरक्षा और समावेशिता को प्राथमिकता देते हुए होना चाहिए, ताकि तकनीक स्थानीय भाषाओं और संदर्भों में लोगों तक वास्तविक लाभ पहुंचा सके। इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव की घोषणा इस दौरान पिचाई ने ‘इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव’ की भी घोषणा की, जिसके तहत अमेरिका, भारत और दक्षिणी गोलार्ध के कई क्षेत्रों के बीच एआई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नए सबसी केबल रूट विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गूगल भारत में फुल-स्टैक कनेक्टिविटी पर काम कर रहा है और भविष्य को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने भारत में 15 अरब डॉलर के एआई हब की योजना का भी जिक्र किया, जिसमें गीगावॉट-स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे शामिल होगा, जिससे रोजगार सृजन और उन्नत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। गूगल ने स्किलिंग कार्यक्रमों की घोषणा इसके साथ ही गूगल ने स्किलिंग कार्यक्रमों की भी घोषणा की, जिसमें अंग्रेजी और हिंदी में गूगल एआई प्रोफेशनल सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल है, जो छात्रों और शुरुआती करियर के पेशेवरों को लक्षित करेगा। अन्य पहलों में कर्मयोगी भारत के साथ 2 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को समर्थन, अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ 10,000 स्कूलों में जेन एआई टूल्स की शुरुआत और 30 मिलियन डॉलर का ‘एआई फॉर साइंस इम्पैक्ट चैलेंज’ भी शामिल है। पिचाई ने कहा कि एआई का सबसे बड़ा प्रभाव तब होता है जब इसे समुदायों को समझने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर विकसित और लागू किया जाए, और इसी दिशा में आईआईटी, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय संस्थानों के साथ साझेदारी के जरिए जिम्मेदारीपूर्ण और व्यापक स्तर पर एआई पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।  

‘किसी से डर नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी’— मोहन भागवत का हिंदू परिवारों को तीन बच्चों का संदेश

लखनऊ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि हिंदू समाज को किसी से खतरा नहीं है, लेकिन उसे सजग और संगठित रहना चाहिए। उन्होंने यह बात लखनऊ स्थित विद्या भारती के भारतीय शिक्षा शोध संस्थान, सरस्वती कुंज, निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक के दौरान कही। डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू परिवारों को कम से कम तीन बच्चों का संकल्प लेना चाहिए। उनका तर्क था कि जिन समाजों में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत कम हो जाती है, वे धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाते हैं। ‘घर वापसी’ अभियान को गति देने की आवश्यकता इसके बाद माधव सभागार में आयोजित ‘कार्यकर्ता कुटुंब मिलन’ कार्यक्रम में उन्होंने ‘घर वापसी’ अभियान को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग पुनः हिंदू धर्म में लौटते हैं, उनके साथ संवाद और सहयोग बनाए रखना चाहिए। कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों की भागीदारी इस कार्यक्रम में सिख, बौद्ध और जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम और ब्रह्म विद्या निकेतन सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

जीरो पर तीसरी बार पवेलियन लौटे अभिषेक, वर्ल्ड कप में बना अनचाहा रिकॉर्ड

अहमदाबाद टी20 के नंबर 1 बैटर अभ‍िषेक शर्मा अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. बुधवार (18 फरवरी) को नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच में भी वो शून्य पर आउट हुए. अपने तेज म‍िजाज के लिए जाने जाने वाले अभ‍िषेक शर्मा इस वर्ल्ड कप में लगातार तीसरी बार 0 पर आउट हुए. अभ‍िषेक शर्मा पाकिसतान के ख‍िलाफ 15 फरवरी को हुए मुकाबले में भी महज 4 गेंद खेलकर जीरो पर आउट हो गए थे. उस मैच में पाकिस्तानी कप्तान सलमान आगा ने उनको शाहीन शाह आफरीदी के हाथों कैच आउट करवाया था.  अभिषेक पेट के संक्रमण के कारण नामीबिया के खिलाफ मैच नहीं खेल सके थे. उनकी गैरमौजूदगी में तब संजू सैमसन ने ईशान किशन के साथ पारी की शुरुआत की थी. अभ‍िषेक अमेर‍िका के ख‍िलाफ मुकाबले में खेले थे, जहां वो गोल्डन डक पर आउट हुए थे, बाद में उनकी जगह मैच में फील्ड‍िंग संजू सैमसन ने की थी.  T20I में एक कैलेंडर साल में सबसे ज्यादा बार डक पर आउट होने वाले ओपनर 6 – सैम अयूब (पाकिस्तान, 2025) 5 – चालोमवोंग चटफैसन (थाईलैंड, 2024) 5 – कुशल भुर्टेल (नेपाल, 2024) 5 – धर्मा केसुमा (इंडोनेशिया, 2025) 5 – परवेज हुसैन इमोन (बांग्लादेश, 2025) 5 – अभिषेक शर्मा (भारत, 2026) कैसा है अभ‍िषेक का टी20 इंटरनेशनल कर‍ियर  अभिषेक शर्मा अब तक इस वर्ल्ड कप में खाता नहीं खोल पाए हों, लेकिन उन्होंने अब तक 40 टी20 मैचों में 39 पारियां खेलते हुए 1297 रन बनाए हैं. इस दौरान उनका हाइएस्टर  स्कोर 135 रन रहा है, जो उनकी मैच जिताने वाली क्षमता को दर्शाता है.उनका औसत 35.05 और स्ट्राइक रेट 193.29 का है, जो बताता है कि वह सिर्फ टिककर नहीं, बल्कि तेज रफ्तार से रन बनाने में विश्वास रखते हैं. उन्होंने 671 गेंदों का सामना करते हुए 123 चौके और 88 छक्के लगाए हैं. इसके अलावा उनके नाम 2 शतक और 8 अर्धशतक भी दर्ज हैं. टीम इंड‍िया की प्लेइंग 11 में दो बदलाव  इस मुकाबले में भारतीय टीम की प्लेइंग 11 में दो बदलाव हुए है. कुलदीप यादव की जगह अर्शदीप सिंह टीम में आए हैं. वहीं अक्षर पटेल आराम द‍िया गया, और उनकी जगह टीम में वॉश‍िंंगटन सुंदर को  शाम‍िल किया गया. सुंदर का यह टी20 वर्ल्ड कप में डेब्यू मैच भी रहा. सुंदर को ख‍िलाकर भारतीय टीम अपनी बेंच स्ट्रेंथ भी जांचना चाहती थी.  नीदरलैंड्स की भारत के ख‍िलाफ प्लेइंग 11: माइकल लेविट, मैक्स ओ’डॉड, बास डी लीडे, कॉलिन एकरमैन, स्कॉट एडवर्ड्स (कप्तान और विकेटकीपर), जैक लायन-कैशेट, लोगन वैन बीक, नोआ क्रोस, आर्यन दत्त, रोएलोफ वैन डेर मर्व, काइल क्लेन भारत की नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ प्लेइंग 11: अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पंड्या, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती

उंराव समाज के सामुदायिक भवन का लोकार्पण

रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने जशपुर जिले के डांडटोली में कोल विद्रोह के महानायक, अमर शहीद वीर बुधु भगत की 234 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने उरांव समाज के लिए निर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया तथा उपस्थित जनसमूह को शुभकामनाएं प्रदान कीं। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि अमर शहीद वीर बुधु भगत ने जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उनका जीवन संघर्ष, साहस और संगठन शक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास के संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक उसके प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि “अमर शहीद वीर बुधु भगत का बलिदान हमें अन्याय और शोषण के विरुद्ध     दृढ़तापूर्वक खड़े रहने की प्रेरणा देता है। उनका संघर्ष केवल इतिहास की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है।” ज्ञातव्य है कि वीर बुधु भगत की जयंती प्रतिवर्ष 17 फरवरी को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उनकी 234वीं जयंती मनाई गई। वे उरांव समुदाय से थे और 19वीं शताब्दी के प्रारंभिक काल में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले प्रमुख जनजातीय क्रांतिकारी थे। उन्होंने 1831-32 के कोल विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों, अत्यधिक कर वसूली और स्थानीय शोषण के विरुद्ध जनजागरण किया। उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज संगठित हुआ और विदेशी शासन को चुनौती दी। अंग्रेजी शासन ने उनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन्हें पकड़ने के लिए सैन्य अभियान चलाया। संघर्ष के दौरान 13 फरवरी 1832 को वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनका बलिदान जनजातीय अस्मिता और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट है। समारोह में जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठजनों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही। सभी ने अमर शहीद वीर बुधु भगत को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव! खामेनेई बोले- जंगी बेड़े को समंदर में ही खत्म कर देंगे

  तेहारन अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है. अब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास ऐसे हथियार हैं जो अमेरिकी जंगी बेड़ा तो तबाह कर सकते हैं. वहीं, ईरान के इस बयान से सप्ष्ट हो गया है कि वो भी युद्ध की तैयारी कर रहा है और अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा. दरअसल, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी अचानक बढ़ते हुए पिछले 24 घंटे में 50 से अधिक लड़ाकू विमानों की तैनाती की. डिपेंडेंट फ़्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और मिलिट्री एविएशन मॉनिटर्स के अनुसार, एफ-22, एफ-35 और एफ-16 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान मध्य पूर्व की ओर बढ़ते देखे गए हैं. इनके साथ कई हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर भी भेजे गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी सेना लंबे वक्त तक सैन्य अभियान चलाने की तैयारी कर रही है. इससे पहले ट्रंप ने ऐलान किया था कि उन्होंने अमेरिकी सेना के कई उन्नत युद्धपोतों को मिडिल ईस्ट भेज दिया है. खामेनेई की अमेरिका को चेतावनी ट्रंप के इसी बयान पर पलटवार करते हुए खामेनेई ने सोशल मीडिया हैंडल पर एक तस्वीर पोस्ट की है, जिसमें अमेरिका के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford को पानी के नीचे डूबा हुआ दिखाया गया है. साथ में एक कब्र का प्रतीक चिह्न लगा हुआ है. ‘युद्धपोत से ज्यादा खतरनाक होता है हथियार’ खामेनेई ने अपनी पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों पर तंज कसते हुए लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार कहते हैं कि उन्होंने ईरान की ओर एक युद्धपोत भेजा है. बेशक, युद्धपोत एक खतरनाक सैन्य हार्डवेयर है, लेकिन उस युद्धपोत से भी अधिक खतरनाक वह हथियार है जो उस जहाज को समुद्र में डुबो सकता है. खामनेई का ये बयान ईरान की रक्षा क्षमताओं और उसकी जवाबी कार्रवाई की तैयारी को दिखा रहा है. वहीं, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस तरह की बयानबाजी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इशारों में अपनी एंटी-शिप मिसाइल प्रणालियों की ताकत का जिक्र किया है. अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों की तैनाती को ईरान एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहा है, जिसके जवाब में उसने अब सार्वजनिक रूप से युद्धपोतों को नष्ट करने का डर दिखाया है. फिलहाल दोनों ओर से तनाव चरम पर है. ईरान नहीं मान रहा, बन सकती हैं जंग की वजह तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका-ईरान के बीच जिनेवा में हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं कुछ समझौतों पर सहमति बनी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं. इस वार्ता पर टिप्पणी करते हुए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है, पर राष्ट्रपति द्वारा तय की गई कुछ रेड लाइन्स को ईरान स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. दरअसल, जिनेवा में वार्ता के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने राज्य टेलीविजन को दिए बयान में कहा, ‘अंततः हम कुछ मार्गदर्शक सिद्धांतों पर व्यापक सहमति बनाने में सफल रहे, जिनके आधार पर हम आगे बढ़ेंगे और संभावित समझौते पर काम शुरू करेंगे.’ उन्होंने वार्ता को पिछले दौर से अधिक रचनात्मक बताया और कहा कि दोनों पक्ष अब ड्राफ्ट तैयार करेंगे, जिन्हें आदान-प्रदान करने के बाद तीसरे दौर की तारीख तय की जाएगी. विदेश मंत्री अराघची ने स्वीकार किया कि ट्रंप के करीबियों और दूतों के साथ बातचीत में मतभेदों को दूर करने में अभी समय लगेगा. ‘रेड लाइन्स’ अराघची के इस बयान के बाद अमेरिका उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि कुछ मामलों में वार्ता अच्छी रही, उन्होंने बाद में मिलने पर सहमति जताई है. लेकिन अन्य मामलों में स्पष्ट था कि राष्ट्रपति ने कुछ रेड लाइन्स तय की हैं, जिन्हें ईरानी अभी स्वीकार करने और उन पर काम करने को तैयार नहीं हैं. वेंस ने बताया, ‘अमेरिका चाहता है कि ईरान न केवल परमाणु कार्यक्रम बल्कि अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन देना भी बंद करे.’ जिनेवा में दूसरे दौर की वार्ता आपको बता दें कि ओमान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच मंगलवार को तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में दूसरे दौर की वार्ता हुई, इस वार्ता को ईरानी विदेश मंत्री ने सकारात्म बताया और कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है और आगे की बैठक को लेकर भी बातचीत हुई है. हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है, पर राष्ट्रपति द्वारा तय की गई कुछ रेड लाइन्स को ईरान स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. ‘राष्ट्रपति के पास खुले हैं विल्कप’ उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका कूटनीति से समाधान चाहता है, लेकिन ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले हैं. वेंस ने कहा, ‘राष्ट्रपति ने कहा है कि हम बातचीत और कूटनीतिक वार्ता से इसे सुलझाना चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रपति के पास सभी विकल्प टेबल पर हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि कूटनीति कब समाप्त होगी, ये फैसला ट्रंप का होगा. ‘हम इसे जारी रखेंगे, लेकिन राष्ट्रपति ये कहने का अधिकार रखते हैं कि कूटनीति अपनी प्राकृतिक सीमा पर पहुंच गई है. हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा नहीं होगा, लेकिन अगर हुआ तो ये राष्ट्रपति का फैसला होगा.’ खामेनेई की चुनौती उधर, वार्ता के दौरान ही ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को सीधी चुनौती दी. उन्होंने कहा कि ईरान के पास क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों को डुबाने की क्षमता है. इसके तुरंत बाद ईरानी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लाइव-फायर ड्रिल के लिए कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया गया था. ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया, जब अमेरिका ने क्षेत्र में दो विमानवाहक पोत तैनात किए हैं, जिनमें ‘USS अब्राहम लिंकन’ ईरानी तट से महज 700 किलोमीटर की दूरी पर है. प्रतिबंधों से राहत चाता है ईरान वहीं, ईरान लंबे वक्त से अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों से राहत चाहता है, जिसमें अन्य देशों द्वारा ईरानी तेल खरीद पर प्रतिबंध शामिल है. तेहरान ने जोर दिया है कि वार्ता केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित रहे, जबकि अमेरिका बैलिस्टिक … Read more

राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है जनगणना 2027: मुख्यमंत्री साय

रायपुर  भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है. उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है. यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा. एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है. उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी. मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी. छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा. यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी और जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता का आधार है. यह कार्य विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव रखने वाला सिद्ध होगा. प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक संकलन किया जाता है. उन्होंने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए. मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो. उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए. साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने वर्ष 2001 के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए. मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना की सफलता सूक्ष्म योजना, समन्वय और सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करे. इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय कार्यों में से एक है. यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण व विकास योजनाओं की दिशा तय करती है. उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी. उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है. इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्यों के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए. राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

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