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नेकी की दीवार में सहयोग करें नगर वासी : गुप्ता

Citizens should cooperate in the wall of goodness अम्बाह । पुराने थाने के पास आनंदम के सहयोग से पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष बच्चू लाल गुप्ता द्वारा नेकी की दीवार का संचालन किया जा रहा है। इस दीवार पर आए कपड़े एवं अन्य सामान के माध्यम से तमाम जरूरतमंद लोग अपनी जरूरत की पूर्ति कर रहे हैं गुरुवार को यहां वस्त्र वितरण किया गया इस मौके पर नेकी की दीवार के संचालक बच्चू लाल गुप्ता ने कहा कि जीवन वहीं है जो दूसरो के काम आए। कई बार जो चीजें हमारे लिए ज्यादा महत्व की नहीं होती है, उन्हें उन्हें हम बेकार समझकर यूं ही छोड़ देते है या फेंक देते है। यही चीजे जरूरतमंदो के लिए कितने काम आ सकती है इसकी हम कल्पना भी नही कर सकते हैं। नेकी की दीवार के माध्यम से हमने सैकड़ो लोगों को अपना तन ढंकने के लिए अथवा ठण्डी, गर्मी, वर्षा से बचाव के लिए दान मे प्राप्त कपड़ें उपलब्ध कराए हैं, प्रदेश सरकार की पहल पर जरूरतमंद लोगों को कपड़े, किताब, पेन पेन्सिल या अन्य वस्तुएं जिन्हें बेकार समझ कर या कई बार उनकी उपयोगिता नहीं होने पर जरूरतमंद व्यक्ति को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नेकी की दीवार का संचालन किया जा रहा है। नेकी की दीवार के संचालन के पीछे मंशा हैं गरीबों को निशुल्क कपड़े प्रदान करना। इसमे नगरवासियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया हैं तथा घरों में उपलब्ध अनुपयोगी कपड़े चाहे वह बच्चों के हो, महिलाओ के हो या पुरूषों के हों नेकी की दीवार में उपलब्ध कराना प्रारंभ किया। आयोजन में बच्चू लाल गुप्ता ने जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराने की आम जन से अपील की है। उन्होने कहा है कि धीरे-धीरे मौसम में ठण्डक बढ़ती जा रही है, जिसके कारण गर्म एवं ऊनी वस्त्रों की आवश्यकता महसूस होने लगी है। हमारे आस पास या समाज में बहुत से ऐसे जरूरत मंद लोग है जो विभिन्न कारणों से स्वयं तथा अपने परिवार को ठंड से बचाव करने हेतु गर्म कपड़ो की व्यवस्था नही कर पाते है। प्रदेश सरकार द्वारा ऐसे जरूरतमंदों को उनकी आवश्यकता अनुसार कपड़े उपलब्ध कराने हेतु जन सहयोग से नेकी की दीवार के माध्यम से उनकी जरूरतों को पूरा करने की पहल प्रारंभ की गई है।

शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में दो दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ.

The inaugural ceremony of the two-day annual celebration at the Government Ayurveda College has commenced. ग्वालियर ! शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में पांच साल बाद दो दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ बुधवार को शुरू हो गया। इस दौरान उपस्थित लोगों और छात्रों को आयुर्वेद की उत्पत्ति उसके महत्व और पुरातन संस्कृति में इसके उल्लेख को बताया गया। वहीं महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कई सांस्कृतिक और क्रीडा के कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। 2018 के बाद अब आयुर्वैदिक कॉलेज में यह वार्षिकोत्सव हुआ है । कोविड महामारी के चलते पिछले कुछ सालों से यह वार्षिक उत्सव कार्यक्रम नहीं रखा जा रहा था ।इस दौरान पिछले सालों में संपन्न हुए विभिन्न खेल और उसके विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए जाएंगे ।

विकसित भारत संकल्प यात्रा पहुंची सीहोद.

Viksit Bharat Sankalp Journey has reached Sihod Sitaram Kushwaha, Sahara Samachaar, Vidisha ग्यारसपुर! जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सीहोद और बंडवा मैं आज विकसित भारत संकल्प यात्रा पहुंची! जहां पर केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रचार रथ के माध्यम से एवं कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं शासकीय कर्मचारियों के द्वारा दी गई । कार्यक्रम में विभाग के स्टाल लगाए एवं अन्य गतिविधियों की गई जिनके माध्यम से ग्राम पंचायत के ग्राम वासियों को शासन की योजनाओं से अवगत कराया गया एवं आवेदन लिए गए कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेश यादव के द्वारा सरस्वती माता की पूजा करने के बाद कार्यक्रम शुभारंभ किया गया । कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सीहोद सरपंच, कृष्णा भाई गजेंद्र सिंह यादव, बंडवा सरपंच उषा बाई भारत सिंह गुर्जर , वीरेंद्र सिंह यादव, राघवेंद्र शर्मा, श्रवण शर्मा,शिवोम शर्मा, ओमकार लोधी ,उमराव सिंह कुशवाहा, बलाराम साहू, जनपद के नोडल अधिकारी स्वप्निल श्रीवास्तव पंचायत इंस्पेक्टर एवं कार्यक्रम संचालन कर रहे महेश कुशवाहा स्थानीय सचिव राम सिंह रघुवंशी, भागीरथ लोधी रोजगार सहायक अजय कुमार शर्मा, वैजयंती कुशवाह जन सेवा मित्र राजेंद्र यादव एवं स्थानीय ग्राम वासी मौजूद रहे ।

रे.सु.ब जवानों ने बचाई नव निहाल की जान, सुरक्षा के साथ मानवता का दिया परिचय.

The victim’s family appreciated the better functioning, case of Rameshwaram Ayodhya Kent Ekapress पीड़ित परिवार ने बेहतर कार्यप्रणाली की सराहना, मामला रामेश्वरम अयोध्या केंट एकाप्रेस का आमला। ( हरिप्रसाद गोहे ) रेल्वे सुरक्षा बल काम वैसे तो रेल यात्रियों एवं रेल संपत्ति की सुरक्षा प्रदान करना होता है।अगर अपने मूल पदेन कर्त्तव्य निर्वाहन के साथ मानवता का एवं रक्षा कार्य कर किसी की जान बचाएं तो इससे बड़ा सेवाभावी कार्य और कोई नहीं हो सकता कुछ ऐसा ही सेवाभावी सराहनीय कार्य दिनांक 19/12/2023 को रेल्वे सुरक्षा बल पोस्ट आमला में पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों ने कर चलित ट्रेन में यात्रा कर रही महिला यात्री के दो वर्षीय बेटे की जान बचा कर किया जिस कार्य की सराहना जहां रेल यात्री के परिजनों ने की वहीं आमजन भी सेवाभावी कार्य की सराहना कर रहे है । क्या है पूरा मामला मिली जानकारी अनुसार दिनांक 19.12.2023 को मै सहायक उप निरीक्षक वीरेश उपाध्याय हमराह स्टाफ प्रधान आरक्षक अमित गोहे के साथ गस्त के दौरान आमला रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 03 पर ट्रेन नंबर 22613 रामेश्वरम-अयोध्या कैंट समय 09/23 बजे आकर खड़ी हुई ! गस्त के दौरान कोच न SE/1 के बर्थ नं 33, 36 पर यात्रा कर रही दो महिला के जोर-जोर से रोते दिखाई देने पर उनसे पूछताछ करने पर उसने अपना नाम खुशबु राजभर बताया और बताया की उसका पुत्र नाम कृष्णा उम्र 02 वर्ष का 15-20 मिनिट से कोई हलचल नहीं कर रहा है और बेहोश है । जिस पर मैं ASI वीरेश उपाध्याय तथा प्रधान आरक्षक अमित गोहे ने उक्त बच्चे के प्रथमोपचार के तौर पर उसके हाथ और पैर को जोर-जोर से रगड़ने पर बच्चे ने हलकी सी हलचल की तो उक्त बच्चे की मां खुशबु से बातचीत कर उसे आमला स्टेशन उतरने और हॉस्पिटल चलने को कहने पर बच्चे की मां हॉस्पिटल जाने को तैयार हुई जिसे उक्त कोच SE/1 से उतारकर प्रायवेट ऑटो द्वारा तुरंत सरकारी अस्पताल आमला लेकर गए ! जंहा पर ऑन ड्यूटी डाक्टर प्रदीप जैन ने उक्त बच्चे का उपचार किया और मौखिक बताया कि बच्चे को निमोनिया का असर एवं ठण्ड की वजह से दोनों फेफड़े सिकुड़ने के कारण वह साँस नहीं ले पा रहा था जिससे वह बेहोश हो गया था !बाद डाक्टर द्वारा बच्चे का उपचार किया गया और बच्चे का खतरे से बहार होना बताया ! बाद उक्त बच्चे की मां खुशबु राजभर पत्नि धर्मेन्द्र राजभर उम्र 36 वर्ष, पता- गाँव-नचनी, पोस्ट-असनार, थाना- दिडई, जिला-सिद्धार्थ नगर, उत्तरप्रदेश मोबाइल नम्बर 7081974668 तथा सीमा राजभर पत्नी रामफेर राजभर उम्र 33 वर्ष, निवासी- गाँव बांसी, जिला – सिद्धार्थ नगर, उत्तरप्रदेश मोबाइल नम्बर 7054426239 से यात्रा सम्बन्धी विवरण लिया ! जिसका PNR no. 4901570133 Ex- MV to MY, कोच नं SE/1 के बर्थ नं 33, 36 बताया और RPF द्वारा किये गए इस कार्य की सराहना किये !रिपोर्ट श्रीमान जी के सादर सूचनार्थ प्रेषित है !

ग्वालियर शहर के तानसेन द्वार में लगी संगीत सम्राट तानसेन की मूर्ति।

A statue of the music maestro Tansen has been installed at the Tansen Gate in the city of Gwalior. रात में रंगीन रोशनी में जगमगाएगी मूर्ति, रोशनी के लिए लगाई गई हैं विशेष तरह की लाइटें।केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से शहर में रु 12.14 करोड़ की लागत से बन रहे है 4 द्वार। संतोष सिंह तोमर ग्वालियर। समृद्ध इतिहास एवं संस्कृति से परिपूर्ण ग्वालियर को एक और उपलब्धि मिली है। हाल ही में UNESCO द्वारा सिटी ऑफ म्यूज़िक का खिताब मिलने से ग्वालियर की पहचान विश्व पटल तक पहुँची और अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में निर्मित हो रहे शहर के चार द्वार में से एक तानसेन द्वार में संगीत सम्राट तानसेन की मूर्ति को भी सफलतापूर्वक लगा दिया गया है। बता दें की रात के समय में मूर्ति को प्रकाशित करने और विशेष ख़ूबसूरती के लिए लाइट भी लगायी गयी है, जिससे सम्राट तानसेन का प्रतीक अद्भभुत दिखाई दे रहा है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया के नेतृत्व में ग्वालियर में चल रहे विकास कार्यों में से एक है शहर के लिए 4 प्रवेश द्वारों का निर्माण। ये चार द्वार ग्वालियर की समृद्ध इतिहास को प्रदर्शित करेंगे। चार द्वारों में से पहला द्वार, ग्वालियर किले को प्रदर्शित करेगा; दूसरा द्वार, जय विलास महल के अनुरूप बन रहा है; तीसरा द्वार, प्रसिद्ध 10 वीं सदी के सास-बहु मंदिर के डिज़ाइन पर बन रहा है; और चौथा द्वार, ग्वालियर की संगीत परम्परा के स्तम्भ संगीत सम्राट तानसेन पर आधारित है। रु 2.24 करोड़ की लागत का यह भव्य तानसेन द्वार ग्वालियर ग्रामीण क्षेत्र के हाईवे से ग्वालियर शहर की प्रवेश स्थान पर बनाया गया है। यह भव्य द्वार जितना विशाल उतने ही सुंदर कलाकृतियां भी है – सुंदर छतरी के नीचे संगीत में लीन मियाँ तानसेन की मूर्ति बनी हुई है।स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कुल रु 12 करोड़ की लागत से बने यह द्वार क्षेत्रीय ख़ूबसूरती और पर्यटन को बढ़ावा देंगे, साथ ही ग्वालियर की सांस्कृतिक पहचान को भी उभारेंगे। बता दें कि हर सप्ताह केन्द्रीय मंत्री सिंधिया कई विकास कार्य सहित इन चारों द्वार के निर्माण कार्य की समीक्षा कर रहे है।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल के अभिभाषण में लाड़ली बहना योजना का उल्लेख नहीं ,विपक्ष ने की टोकाटाकी.

Governor Mangubhai Patel’s address, there was no mention of the Ladli Behna Yojana, prompting criticism from the opposition. मप्र के राज्‍यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विगत साढ़े नौ वर्षों में भारत में सेवक सरकार के युग का प्रारंभ हुआ है। संकल्प पत्र 2023 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी भी है और विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण का विजन डाक्यूमेंट भी है। सरकार ने संकल्प पत्र के बिंदुओं को धरातल पर उतरने का काम प्रारंभ भी कर दिया है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर तीन हजार प्रति मानक बोरा से बढ़कर चार हजार कर दी गई है। मध्य प्रदेश के मन में बसे मोदी की हर गारंटी को पूरा करने के उद्देश्य से संकल्प पत्र के प्रत्येक बिंदु को समय सीमा में क्रियान्वित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। यह बात राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्‍य प्रदेश विधानसभा में अपने अभिभाषण के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए सुशासन केवल एक शब्द नहीं बल्कि उसके हर अक्षर को सच्चे अर्थों में चरितार्थ करने का मंत्र है। एक जनवरी 2024 से साइबर तहसील की व्यवस्था को प्रदेश के सभी 55 जिलों में लागू करने का क्रांतिकारी निर्णय लिया गया है। संपदा 2 साफ्टवेयर भी प्रदेश में शीघ्र लागू किया जा रहा है, जिसके माध्यम से डिजिटल रजिस्ट्री की प्रक्रिया सरल और सुगम बनेगी। इस दौरान विपक्ष ने लाड़ली बहन योजना का उल्लेख न किए जाने पर टोकाटाकी की।

नरेंद्र सिंह तोमर निर्विरोध चुने गए मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष.

Narendra Singh Tomar has been unanimously elected as the Speaker of the Madhya Pradesh Legislative Assembly. नरेंद्र सिंह तोमर के रूप में पहली बार मध्य प्रदेश में विधानसभा का अध्यक्ष ग्वालियर-चंबल अंचल से बना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और नव निर्वाचित विधायक नरेंद्र सिंह तोमर आज मप्र निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुने गए। विधानसभा के सामयिक अध्यक्ष गोपाल भार्गव ने नए अध्यक्ष को शपथ दिलाई। सामयिक अध्यक्ष गोपाल भार्गव में अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू की। अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए साथ सूचनाओं प्राप्त हुई है। पहला प्रस्ताव मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रखा की नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा का अध्यक्ष चुना जाए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव रखा प्रहलाद सिंह पटेल ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। कैलाश विजयवर्गी में नरेंद्र सिंह तोमर को अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव रखा जिसका समर्थन उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने किया। कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को चुने जाने का प्रस्ताव रखा जिसका समर्थन कांग्रेस विधायक दल के उप नेता हेमंत कटारे ने किया। इसी तरह भूपेंद्र सिंह ने नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव रखा जिसका समर्थन तुलसीराम सिलावट ने किया कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने नरेंद्र सिंह तोमर को अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव रखा जिसका समर्थन कांग्रेस विधायक दल के उप नेता हेमंत कटारे में किया।

झोलाछाप डॉक्टरों के विरूद्ध कार्यवाही के लिए बड़ा एक्शन, समिति गठित.

Significant action against Jholachaap doctors, committee formed for disciplinary action. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Chhatarpur.छतरपुर। राज्य शासन के निर्देशानुसार तथा कलेक्टर छतरपुर के अनुमोदन से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों के विरूद्ध कार्यवाही के लिए समिति का गठन किया गया है। समिति में संबंधित अनुभाग के एसडीएम, एसडीओपी तथा संबंधित खण्ड चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। समिति के सदस्य सामंजस्य स्थापित करते हुये शासन के निर्देशानुसार फर्जी चिकित्सक, पैथॉलोजी, झोलाछाप, डॉक्टर म.प्र. में चिकित्सा व्यवसाय कर रहे अन्य राज्य में पंजीकृत फर्जी चिकित्सकों के विरूद्ध कार्यवाही करेंगे।

7 लाख क्विंटल से अधिक खरीदा गया धान निगरानी और जांच के लिये पहुंच रहे अधिकारी।

More than 7 lakh quintals of rice have been purchased, and officials are arriving for inspection and monitoring. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Balaghat.बालाघाट। समर्थन मुल्य पर धान उपार्जन का कार्य अब‍ तेज गति से होने लगा है। जिले में बनाये गए कुल 185 उपार्जन केंद्रो में खरीदी लगातार बढ़ने लगी है। धान उपार्जन के लिये जिले 1 लाख 17 हजार 596 किसानों ने पंजीयन कराया है। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा खरीदी केंद्रो की निगरानी और निरीक्षण के लिये तहसीलदारों व नोडल अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे है। मंगलवार को कटंगी तहसीलदार छवि पंत ने बनेरा और घुनाड़ी उपार्जन केंद्रो का निरीक्षण कर आवश्यीक व्यवस्थाएं देखी । उन्होंने जानकारी देते हुये बताया कि मुख्य रूप से धान की नमी बारदानों की संख्या तथा धान परिवहन का उठाव आदि की जानकारी ली गई। साथ ही किसानों द्वारा लाये जा रहे धान की नमी की भी जांच की जा रही है। उपार्जन के संबंध में सहकारिता विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार को 5394 किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराया है जबकि मंगलवार को ही 4554 किसानों से 185 केंद्रो पर 2 लाख 17 हजार 582 क्विंटल धान खरीदा गया है। 1 दिसम्बर से आज दिनांक तक जिले के 15877 किसानों से 7 लाख 30 हजार 999 क्विंटल धान खरीदा गया है। जिले में अब तक कुल 45632 किसानों ने स्लॉट बुक करवाया है।

कमलनाथ पर भारी जीतू पटवारी, उमंग को स्वभाव, व्यवहार बदलने की चुनौती.

Jitu Patwari scores a significant win over Kamal Nath, challenging Umang to change his nature and behavior. वक्त बदला लेकिन कांग्रेस नहीं बदली. कभी युवा पीढ़ी को दरकिनार कर बुजुर्ग नेतृत्व को कमांड देने वाले कांग्रेस हाईकमान ने अब पीढ़ी परिवर्तन के नाम पर एकतरफा बिना सोचविचार के वरिष्ठ नेताओं को किनारे करते हुए युवा नेतृत्व के हाथ में पार्टी दे दी. कभी युवा नेताओं पर कमलनाथ भारी पड़ रहे थे और अब कमलनाथ पर जीतू पटवारी भारी साबित हो गए हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को अपना स्वभाव, संगत और व्यवहार बदलना होगा. नेता-प्रतिपक्ष के स्टॉफ में ऐसे तत्व शामिल हो जाते है, जो सरकार से अप्रत्यक्ष रूप से उपकृत होते है. यही विपक्ष की रणनीति को लीक करते आ रहे है. ऐसे घुसपैठियों को रोक पाना, उमंग के लिए बड़ी चुनौती है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस हारी तो कमलनाथ का कांग्रेस में भविष्य डूब गया. लेकिन जीतू पटवारी अपना विधानसभा चुनाव हार कर भी कांग्रेस अध्यक्ष पद जीत गए. कांग्रेस हाकमान पहले भी वही था, आज भी वही है. पहले का निर्णय भी इसका था और आज का निर्णय भी उसी का है. दोनों निर्णय का लक्ष्य तो बदलाव का था लेकिन अप्रोच अहंकारी थी. जब निर्णय का अप्रोच अहंकार से भरा होगा तो फिर इंप्लीमेंटेशन में तो यही एटीट्यूड ही दिखाई पड़ेगा. मध्यप्रदेश में कांग्रेस की पराजय अहंकार, तानाशाही और कार्यकर्ताओं को दरकिनार करने के कारण हुई है. कांग्रेस पार्टी नेतृत्व में कितना भी बदलाव कर ले लेकिन जब तक संगठन की कार्यपद्धति में सामूहिकता का ईमानदारी से पालन नहीं होगा तब तक पार्टी के भविष्य पर सवाल खड़े होते रहेंगे. जीतू पटवारी और उमंग सिंगार को संगठन और विधायक दल की कमान सौंपी गई है. इन दोनों नेताओं को संगठन और वरिष्ठ नेताओं की कार्य प्रणाली से समस्या थी. मध्यप्रदेश में कमलनाथ के जाने के बाद कांग्रेस उनकी कार्यप्रणाली की समस्या से तो निजात पा सकती है लेकिन कांग्रेस के संगठन का डीएनए बदलाव के इस निर्णय में भी दिखाई पड़ रहा है. कई वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की गई है जिन चेहरों पर भरोसा जताया गया है, उन पर कई तरह के सवाल उछलते रहे हैं. मसलन, जीतू पटवारी के बड़बोलापन से कई बार कांग्रेस की किरी- किरी हो चुकी है. अब उन्हें अपनी जुबा पर लगाम लगानी होगी. वहीं कांग्रेस में कुंडली मारकर बैठे पदाधिकारियों को हटाने की बड़ी चुनौती होगी. वैसे बदलाव हमेशा अच्छा होता है. नया नेतृत्व हमेशा स्वागतयोग्य होता है. जब भी कोई निर्णय होता है तब उसका विश्लेषण इस आधार पर होता है कि निर्णय के पीछे हाईकमान ने किस सोच और चिंतन के आधार पर निष्कर्ष निकाले हैं. यह दोनों नेता ऊर्जावान हैं, सक्रिय हैं. कांग्रेस के सामने युवा ऊर्जावान और सक्रिय नेताओं के असफल होने का सबसे बड़ा उदाहरण राहुल गांधी स्वयं हैं. उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. कांग्रेस लगातार राजनीतिक चुनौतियों में असफल होती ही दिखाई पड़ी. अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष संभवत सबसे बुजुर्ग नेता हैं. *बदलाव के पीछे गांधी परिवार* मध्यप्रदेश में नेतृत्व बदलाव का जो फैसला हुआ है उसमें गांधी परिवार का रोल साफ देखा जा रहा है. मध्यप्रदेश में राजनीतिक क्षेत्र में यह स्पष्ट धारणा लंबे समय से बनी हुई है कि यह दोनों युवा नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी रहे हैं. चुनाव में पराजय के कारण भले ही कमलनाथ को अपमानजनक परिस्थितियों में विदा किया गया हो लेकिन राज्य के राजनीतिक हालातों को कमलनाथविहीन करने में दोनों नेताओं को लंबा वक्त लगेगा. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर भी ऐसी ही राजनीतिक चर्चाएं हैं कि उन्हें भी मुख्य भूमिका से विश्राम दिया गया है. सियासत में हमेशा वही चेहरे सफल होते हैं जिन पर कोई विवाद नहीं होते हैं. हाईकमान द्वारा नामित नेतृत्व का पार्टी और विधायक दल में बहुमत का समर्थन शायद तौला नहीं गया है. हाईकमान द्वारा निर्णय को थोपा गया है. कमलनाथ के अध्यक्ष के कार्यकाल में पार्टी का परफॉर्मेंस जिस स्तर पर पहुंच गया है, उसके पीछे भी निर्णय को एकतरफा लेने और थोपने की प्रवृत्ति काम कर रही थी. ऐसी प्रवृत्ति संगठन के लिए लाभप्रद नहीं होती है. *जमीन पर साबित करने की बड़ी चुनौती*  नए नेतृत्व को राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान का भले ही संपूर्ण समर्थन हो लेकिन दोनों नेताओं को जमीन पर अपना नेतृत्व साबित करना होगा. जिस तरह तेज और डिजिटल पॉलिटिक्स बढ़ती जा रही है उसमें केडर मैनेजमेंट के साथ ही पार्टी के लिए फंड मैनेजमेंट भी महत्वपूर्ण पक्ष होता है. कमलनाथ के साथ यह भी माना जा रहा था कि उनका बीजेपी सरकार और नेतृत्व के साथ मिला-जुला राजनीतिक गणित चल रहा था. विपक्षी दल के सामने सबसे बड़ी समस्या यही रहती है कि जनहित के मुद्दों पर जमीन पर संघर्ष किया जाए. अक्सर ऐसा देखा गया है कि विपक्षी राजनीति सरकार के साथ एडजस्टमेंट करके आगे बढ़ने लगती है. ऐसी परिस्थितियां दूरगामी रूप से पार्टी के लिए हानिकारक साबित होती हैं. *क्या कमलनाथ-दिग्विजय के बिना कांग्रेस का उड़ान सम्भव* मध्यप्रदेश में कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को भले ही अलग-थलग करने के संदेश और संकेत स्पष्ट कर दिए हों लेकिन वास्तविक रूप से जमीन पर ऐसा करना फिलहाल संभव नहीं दिखाई पड़ रहा है. इन दोनों नेताओं की जड़ें मध्यप्रदेश की राजनीति में दूर-दूर तक फैली हुई हैं. उनको अलग-थलग करके पार्टी बहुत लंबी दूरी तय नहीं कर पाएगी. इन दोनों नेताओं की जड़ों का इस्तेमाल कर कांग्रेस अपनी नई शाखाओं को मज़बूत कर सकती है. कांग्रेस के नए नेतृत्व को बीजेपी के मजबूत संगठन और नेतृत्व का मुकाबला करना है. बिना वरिष्ठ नेताओं के समन्वय और सहयोग के हो-हल्ला और मीडिया अटेंशन भले पाया जा सके लेकिन पार्टी की जड़ों को मजबूत करना संभव नहीं होगा. राज्य के नए नेतृत्व को पांच साल तक संघर्ष की स्थिति में रहना होगा. इसके लिए जनता के मुद्दों को चिन्हित करना, उसके लिए सतत संघर्ष करना होगा. अब सियासत सुविधा से आगे निकलकर संघर्ष की चौखट पर पहुंच गई है. जो पार्टी और नेता केवल सुविधा को राजनीति का लक्ष्य बनाएंगे उनको तो भविष्य में निराश होना निश्चित है.

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दुर्घटनाओं को रोकने के सम्बन्ध में आदेश जारी किए.

The Chief Minister, Dr. Mohan Yadav, issued orders regarding the prevention of accidents. मनीष त्रिवेदी, सहारा समाचार,भोपाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अनुपयोगी एवं खुले नलकूप, बोरवेल, ट्यूबवेल में दुघर्टनाओं को रोकेने के सम्बंध में आदेश जारी किया है। पहले भी इस तरह के कई आदेश जारी हुए है, इन आदेशों का पालन नहीं हो पाया इनको पालन करने वाले सुस्त है. लेकिन मुख्यमंत्री एक्टिव मोड में है और उनके के आदेशों पर काम भी हो रहा है.

राजमाता विजयाराजे सिंधिया सिविल एयरपोर्ट पर निर्माणा कार्य के दौरान मजदूर घायल.

During the construction work at Rajmata Vijayaraje Scindia Civil Airport, laborers were injured. ग्वालियर। ग्वालियर में निर्माणाधीन राजमाता विजयाराजे सिंधिया सिविल एयरपोर्ट पर निर्माणधीन एयर टर्मिनल में काम के दौरान आज फिर एक हादसा होने से एक मजदूर गभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद वहां हड़कम्प मच गया । तीन महीने में यह दूसरी बड़ी घटना है । घटना के बाद घायल मजदूर के नाराज साथियों ने जमकर बवाल किया जिसके चलते मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी फिलहाल घायल को अस्पताल में भर्ती कर दिया गया है और पुलिस विवेचना में लगी है। आपको बता दें कि लगभग पांच सौ करोड़ की लागत से यहां कार्गो टर्मिनल बन रहा है. इसमें अभी फिनिशिंग का काम चल रहा है और आज दोपहर अचानक इसमें गिरने से एक श्रमिक गम्भीर रूप से घायल हो गया । उसे तत्काल उठाकर बिरला अस्पताल ले जाया गया और वहां उसे भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद साथी मजदूर ने बताया कि सुबह जब काम करने ले लिए वह ऊपर चढ़ा तो संतुलन गड़बड़ाने से काफी ऊंचाई से वह एकदम नीचे आ गया और गम्भीर रूप से घायल हो गया। किसी सेफ्टी उपकरण के बिना उसे पचास फुट ऊंची सीलिंग पर चढ़ा दिया गया जिससे वह गिर गया । मोहकम के गिरने के बाद वहां मौजूद कम्पनी के अधिकारी मौके से भाग निकले। घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घायल को अस्पताल पहुंचा दिया गया है. और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है बाईट,,, राजवीर घायल मजदूर का साथी बाईट,,,, थाना प्रभारी महाराजपुरा ग्वालियर

गोवा एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान सेना के नायब सूबेदार कृष्णकांत शर्मा की मौत, पूर्व सैनिक संगठन ने स्टेशन मैनेजर को ज्ञापन सौंपा.

Death of Army Subedar Major Krishnakant Sharma while boarding the Goa Express. ग्वालियर ! रेलवे स्टेशन पर अप गोवा एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान सेना के नायब सूबेदार कृष्णकांत शर्मा की मौत को लेकर पूर्व सैनिक संगठन ने स्टेशन मैनेजर से इस मामले में जांच की मांग की है। वहीं पीड़ित परिवार के लिए रेलवे की ओर से मुआवजा राशि देने की भी उनके द्वारा मांग की गई है। उन्होंने इस बात पर दुख जताया है कि रेलवे सुरक्षा बल जीआरपी या प्रबंधन का कोई भी सदस्य पीड़ित परिवार को सांत्वना देने उनके घर नहीं पहुंचा है। दरअसल सोमवार रात को ग्वालियर के दीनदयाल नगर में रहने वाले सेना के नायब सूबेदार कृष्णकांत शर्मा छुट्टियां खत्म होने पर वापस अपनी ड्यूटी जा रहे थे। लेकिन ट्रेन में चढ़ने के दौरान वह ट्रैक पर चले गए और उनका शरीर दो टुकड़ों में बंट गया। जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई । इस घटना को लेकर पूर्व सैनिक संगठन ने गहरा क्षोभ जताया है और रेलवे प्रशासन पर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगा भी लगाया है। उनका कहना है कि ट्रेन में चढ़ने और उतरने के दौरान भीड़ पर काबू करने के लिए जीआरपी और रेलवे सुरक्षा बल तैनात रहता है लेकिन वह यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बेपरवाह रहते हैं जिसके कारण इस तरह की दुर्घटनाएं होती हैं। एक होनहार देश के जवान की इस दुर्घटना में मौत हुई है इसलिए रेलवे को इस मामले में सेना के जवान के एक सदस्य को नौकरी और उचित मुआवजा देना चाहिए। साथ ही रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की अनदेखी पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई होना चाहिए।

सशक्त, समृद्ध राष्ट्र की पहचान है “एकजुटता“

The recognition of a strong, prosperous nation is “Unity.” तरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस आज डॉ. केशव पाण्डेयआधुनिक युग में पूरी दुनिया एक गठबंधन की भावना के साथ आगे बढ़ रही है। जिसमें मानव एकजुटता की महत्वपूर्ण भूमिका है। विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी युग में यह वह अद्वितीय मौका है, जब हम सभी मिलकर समस्त मानव जाति के लिए एकमत और समृद्धि की दिशा में बेहतर काम कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस के अवसर पर आज हम इसके महत्व को समझेंगे और इसकी महत्वपूर्णता को भी जानेंगे। 20 दिसंबर को प्रति वर्ष अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को एकजुटता के महत्त्व को बताना, गरीबी पर अंकुश लगाना एवं विकासशील देशों में मानव और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र ने 22 दिसंबर 2005 को इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी। इस दिवस को विश्व एकजुटता कोष और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा बढ़ावा दिया जाता है, जो दुनिया भर में गरीबी उन्मूलन के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने पर केंद्रित हैं। विश्व एकजुटता कोष की स्थापना फरवरी 2003 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के ट्रस्ट फंड के रूप में की गई थी।विश्व में एकजुटता का दौर : मौजूदा परिवेश में बेशक कुछ देशों के बीच युद्ध चल रहे हैं या फिर कुछ में टकराव की स्थिति है, बावजूद इसके दुनिया के अनेक देशों और समुदायों के बीच मित्रता, समरसता और एकजुटता के हालात जन्म ले रहे हैं। आपसी समझ, भावना, सहयोग, साझा जिम्मेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने हमें एक समृद्धि भरे भविष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए मजबूती दी है। इस संदर्भ में यह दिवस हमें सकारात्मक रूप से सोचने और उस दिशा में आगे बढ़कर कार्रवाई करने का अवसर प्रदान करता है। इसके माध्यम से सरकारों को सतत् विकास लक्ष्य के गरीबी और अन्य सामाजिक बाधाओं का जवाब देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कोई भी व्यक्ति शिक्षा को बढ़ावा देकर या गरीबों, शारीरिक व मानसिक रूप से अक्षम लोगों की मदद करके इस दिवस में अपना योगदान दे सकता है। क्योंकि इस दिवस की थीम ही- “सहयोग, समानता और सामाजिक न्याय की संस्कृति को बढ़ावा देना“ है। अन्य अंतरराष्ट्रीय दिनों के विपरीत इस दिवस की थीम प्रति वर्ष एक समान ही रहती है।दरअसल, एकजुटता का अर्थ है- साझा लक्ष्यों और हितों के बारे में जागरूकता। जो एक ऐसे समाज में एकता की मनोवैज्ञानिक भावना को जन्म देकर संबंधों को मजबूत करता व बांधता है। इसका उद्देश्य पूरी दुनिया में, विशेषकर विकासशील देशों में सहयोग, समानता और सामाजिक न्याय की संस्कृति को बढ़ावा देना है।ताकि सामाजिक, आर्थिक विकास, मानवाधिकार और शांति को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के देशों और लोगों को एक साथ लाने का प्रयास किया जा सके। वैश्विक साझेदारी भी संयुक्त राष्ट्र की तरह वैश्विक सहयोग और एकजुटता की नींव पर ही बनाई जा सकती है। सतत विकास एजेंडा इसी पर केंद्रित है, जो लोगों को गरीबी, भूख और बीमारी से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध वैश्विक साझेदारी द्वारा समर्थित है। मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है।यह दिवस हमें सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है ताकि हम सभी मिलकर समस्त विश्व के लिए सुधार कर सकें। विभिन्न सांघीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से हम एक बेहतर और संबलित समाज की दिशा में काम कर सकें।अंत में, अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस हमें एक सशक्त, समृद्ध और एकजुट विश्व की दिशा में आगे बढ़ने के लिए संकल्पित करता है। हमें यहां एक मौका मिलता है कि हम सभी मिलकर सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए काम करें और एक समृद्धि भरे भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं। यह दिन सभी को समर्पित होना चाहिए ताकि हम समृद्धि और एकता की दिशा में आगे बढ़ सकें। क्योंकि किसी भी राष्ट्र की समृद्धि और सशक्तता की प्रतीक है एकजुटता।

खुदाई में मिला अंग्रेजों से लूटा टंट्या मामा का गड़ा हुआ खजाना

खंडवा! एमपी के खंडवा जिले में अंग्रेजों के जमाने का खजाना मिला है। यहां के खिडगांव में पुराने मकान के मलबे में सोने चांदी के सिक्के मिले। स्कूल के बच्चे यहां खेलने आए तो उनकी नजर सिक्कों पर पड़ी। बच्चों को सिक्के मिलने की खबर गांव में फैली तो यहां लोगों की भीड़ लग गई। गांव वालों ने यहां कई गड्ढे खोद डाले और इनमें से कई लोगों को सोने-चांदी के सिक्के मिले। दस दिन पुरानी इस घटना के बारे में अब एक नई बात सामने आई है। अंग्रेजों के इन सिक्कों को यहां के जननायक क्रांतिकारी नेता टंट्या भील का खजाना बताया जा रहा है। क्षेत्र में उन्हें प्यार से टंट्या मामा भी कहा जाता है। गांव में एक पुराने मकान की जगह नया मकान बनाया जा रहा है। इसके लिए खुदाई की गई और मलबे को पास की नदी के किनारे डाल दिया गया।10 दिसंबर को यहां स्कूल के बच्चे खेलने आए तो उन्हें यहां ब्रिटिश कालीन सिक्के मिले। बच्चों को सोने-चांदी के सिक्के मिलते ही यहां लोगों की भीड़ लग गई और पूरा गांव सिक्कों की खोज में लग गया। बाद में पुलिस ने कुछ लोगों से ये पुराने सिक्के बरामद किए।अंग्रेजों के इन सिक्कों को अब जानकार लोग टंट्या भील का खजाना बता रहे हैं। इतिहासकारों, विशेषज्ञों के मुताबिक टंट्या भील अंग्रेजों से लूट करते और सारा सामान इलाके में बांट देते थे। उस जमाने में टंट्या द्वारा दिए गए सिक्कों को सुरक्षित रखने के लिए लोग उन्हें जमीन में गड़ा देते थे। गड़ा हुआ यही खजाना खिडगांव में लोगों को मिला है। इससे पहले भी इलाके में कई बार लोगों को जमीन में गड़े सोने चांदी के सिक्कों का खजाना मिल चुका है। खंडवा और पास के जिलों में कई जगहों पर ऐसी घटनाएं हुईं। तीन साल पहले खंडवा के ही पुनासा में खुदाई में करीब तीन सौ सिक्के मिले थे। सात साल पहले खरगोन के भगवानपुरा में भी सिक्के प्राप्त हुए थे। यहां के टांडा बरुड गांव में भी सोने चांदी के सिक्के खुदाई में मिले थे। इन सभी जगहों पर मिले सिक्कों को जननायक टंट्या भील का अंग्रेजों से लूटा गया खजाना ही कहा गया था। कौन थे टंट्या भीलटंट्या भील अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते हुए आदिवासियों के हितों के लिए काम करते थे। वे अंग्रेजों का धन लूटते और उसे गरीबों में बांट देते। लूटे गए सोने चांदी के सिक्कों और जेवरात देकर उन्होंने कई कन्याओं की शादी कराई। उन्होंने सन 1878 में बुरहानपुर का सरकारी खजाना लूटा था। उस जमाने में लोग धन संपत्ति को जमीन में गड़ा देते थे। मालवा निमाड़ इलाके में यही गड़ा हुआ खजाना जब तब खुदाई में मिल जाता है।1889 में जब टंट्या भील को गिरफ़्तार किया गया तब कई विदेशी अखबारों में भी इसका जिक्र किया गया। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयार्क टाइम्स में टंट्या भील को भारत के राबिन हुड की उपाधि दी गई थी।

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