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डॉक्टर पर कार्रवाई को लेकर विधायक कमलेश्वर ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

MLA Kamleshwar warned of hunger strike for action against the doctor भोपाल ! मध्य प्रदेश विधानसभा में भारत आदिवासी पार्टी के एकमात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार ने रतलाम जिला अस्पताल के डॉक्टर चंद्र प्रताप सिंह राठौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके निलंबन की मांग की है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर ने उन्हें जातिसूचक गालियां देकर न केवल उनका बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान किया है। विधायक ने चार महीने से डॉक्टर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होने पर आक्रोश व्यक्त किया है। अन्याय के खिलाफ आमरण अनशन का एलान विधायक कमलेश्वर डोडियार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर बताया कि अगर 24 मार्च 2025 को सदन में उनकी सुनवाई नहीं होती है, तो वे विधानसभा परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक डॉक्टर को निलंबित नहीं किया जाता, तब तक वे न भोजन करेंगे और न ही पानी ग्रहण करेंगे। चार महीने से न्याय की लड़ाई विधायक डोडियार ने बताया कि यह घटना 5 दिसंबर 2024 की है, जब वे खुद की तबीयत खराब होने के कारण रतलाम जिला अस्पताल पहुंचे थे। वहां इमरजेंसी वार्ड में एक व्यक्ति से डॉक्टर की उपलब्धता के बारे में पूछने पर उसने उन्हें जातिसूचक गालियां दीं। बाद में पता चला कि वह व्यक्ति डॉक्टर चंद्र प्रताप सिंह राठौर थे। इस मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आदिवासी समाज में आक्रोश विधायक ने कहा कि इस मामले को उन्होंने विधानसभा के पिछले सत्र में भी उठाया था, लेकिन सरकार ने अब तक डॉक्टर को निलंबित करने या अभियोजन की स्वीकृति देने का निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अब तक मामले की जांच पूरी नहीं की और न ही न्यायालय में चालान पेश किया। इससे न सिर्फ उनका बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान हुआ है। सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग डोडियार ने कहा कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि संपूर्ण भीलप्रदेश (मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र) के आदिवासियों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से तत्काल डॉक्टर के निलंबन की मांग की और कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो वे अपना आमरण अनशन जारी रखेंगे।

केन्द्रीय जेल जबलपुर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक अवस्थी का निरीक्षण, बंदियों से संवाद

District and Sessions Judge Alok Awasthi’s inspection of Central Jail Jabalpur, interaction with prisoners जितेन्द्र श्रीवास्तव जबलपुर। आज दिनांक को केन्द्रीय जेल जबलपुर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक अवस्थी जी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शक्ति वर्मा जी एवं जिला विधिक सेवा अधिकारी, बी. ड़ी दीक्षित जी द्वारा भ्रमण किया गया, एवं दण्डित एवं विचाराधीन बंदियों से संवाद किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय के करकमलों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जेल आर्केस्ट्रा द्वारा सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा दण्ड़ित एवं विचाराधीन बंदियों के साथ संवाद किया गया। आगे न्यायाधीश द्वारा जेल का भ्रमण किया गया एवं पाठशाला का निरीक्षण किया गया। जेल प्रशासन की ओर मदन कमलेश, उप जेल अधीक्षक (प्रशासन), श्रीमती रूपाली शर्मा उप जेल अधीक्षक, हिमांशु तिवारी, सहायक जेल अधीक्षक, राहुल चौरसिया लेखापाल एवं सुभाष यादव द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों को जेल का भ्रमण एवं निरीक्षण कराया गया।

कौन होंगा आमला ब्लाक कांग्रेस का नया अध्यक्ष, चर्चाओ का बाजार गर्म

Who will be the new president of Amla Block Congress, discussions are abuzz. हरिप्रसाद गोहेआमला ! काग्रेस ब्लाक अध्यक्ष पद के लिए नामो को लेकर क्षेत्र में सरगर्मियां बढ़ने लगी है नए अध्यक्ष को लेकर तरह, तरह के कयास लगाए जा रहे हैं । वहीं ब्लाक कांग्रेस कमेटी आमला के नए अध्यक्ष पद को लेकर शहर सहित अंचल के ग्रामों में चर्चाओं का बाजार भी गर्म है । गौरतलब हो की लगातार हार का दंश झेल रही कांग्रेस नए ब्लॉक प्रमुख के लिए जहां एक ओर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े खानदानी कांग्रेसी कार्यकर्ता किसी परंपरागत कांग्रेसी को ब्लॉक अध्यक्ष बनते देखना चाहते हैं, वही अन्य युवा कांग्रेस नेता भी इस बार कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष बनने अपनी मंशा जाहिर करते देखे जा रहे है । सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर एवं ग्रामीण अंचल के निष्ठावान कांग्रेसी कार्यकर्ता पूर्व आमला ग्रामपंचायत के सरपंच, समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित जमीदार स्व ठाकुर गोपाल सिंह चंदेल जी के पौत्र एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी आमला के पूर्व अध्यक्ष एवं सरपंच संघ आमला के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर शिवपाल सिंह चंदेल के पुत्र चंद्रशेखर सिंह चंदेल को कांग्रेस संगठन के जमीनी मजबूती के लिए अध्यक्ष बनते देखना चाहते हैं। पीढी दर पीढी कांग्रेस विचारधारा से जुड़े कांग्रेस परिवारों को लगता है कि चंद्रशेखर सिंह के ब्लॉक अध्यक्ष बनने से कांग्रेस को ग्रामीण जनप्रतिनिधियों, किसानों के साथ ही शहरी शिक्षित युवाओं का भी समर्थन प्राप्त होगा ।अपने सरल सहज व्यक्तित्व के कारण जनप्रिय,उच्च शिक्षित युवा चंद्रशेखर सिंह चंदेल अपने छात्र जीवन से ही छात्र एवं युवा राजनीति के साथ ही सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। बरहाल ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पद के दावेदारों में नमो की चर्चा आम है, कौन होंगा आमला का नया ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जिसका अभी करना हॉगा इंतजार ?

पटवारी ही क्यों? हर घोटाले में छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, बड़े अधिकारी रहे सुरक्षित!

Why only Patwari? In every scam, the smaller employees were punished, the big officers remained safe! सिवनी ! जिले के एक खरीदी केंद्र में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब भी किसी विभाग में कोई गड़बड़ी होती है, तो सबसे पहले कार्रवाई केवल पटवारी पर ही क्यों होती है? क्या घोटाले केवल पटवारी ही करते हैं, या फिर बड़े अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाते हैं? इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिस घोटाले में खाद्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी, उसमें कार्रवाई एक निर्दोष पटवारी पर कर दी गई, जो उस समय अवकाश पर था और एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण अपनी ड्यूटी पर मौजूद भी नहीं था। बिना गहन जांच के, बिना किसी ठोस आधार के उसे निलंबित कर दिया गया। यह सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों? क्या केवल पटवारी ही जवाबदेह हैं? यह पहली बार नहीं हुआ है जब किसी घोटाले का ठीकरा पटवारी पर फोड़ा गया हो। ऐसा लगता है कि जैसे ही कोई मामला तूल पकड़ता है, तो विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए सबसे आसान शिकार पटवारी को ही बनाते हैं। बड़े अधिकारियों पर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, न ही उनकी भूमिका की जांच की जाती है। सरकार और प्रशासन को यह तय करना होगा कि क्या न्याय केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहेगा? क्या हमेशा घोटालों का ठीकरा पटवारियों पर ही फोड़ा जाएगा? जब तक इस अन्यायपूर्ण परंपरा को रोका नहीं जाएगा, तब तक न तो पारदर्शिता आएगी और न ही कोई ठोस सुधार हो पाएगा। अब समय आ गया है कि दोषियों की सही पहचान हो और बिना पक्षपात के दोषियों पर कार्रवाई की जाए – चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न हों!

श्रीमद् भागवत कथाः छठवें दिन भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन

Shrimad Bhagwat Katha: Description of the pastimes of Lord Shri Krishna on the sixth day हरिप्रसाद गोहे  आमला । ग्राम जंबाड़ी में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा अमृत महोत्सव के छठवें दिन भगवान श्री कृष्ण द्वारा कंस वध, जरासंध युद्ध और श्री कृष्ण रुकमणी विवाह का वर्णन किया गया। कथा वाचक पंडित श्याम मनावत ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पंडित श्याम मनावत ने बताया कि जब भगवान श्री कृष्ण बड़े हो जाते हैं तो वह कंस की जेल में बंद अपने माता-पिता देवकी वासुदेव को छुड़ाने के लिए कंस का वध कर छुड़ा लाए। कंस वध से नाराज़ कंस के ससुर मगध के राजा जरासंध श्री कृष्ण से बदला लेने के लिए मथुरा पर सत्रह बार हमला किया। हर बार श्रीकृष्ण भगवान और बलराम पराजित कर छोड़ देते थे लेकिन मारते नहीं थे। पंडित श्याम मनावत ने श्री कृष्ण विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विवाह के लिए जब कोई नंदगांव आता तो उनकी बाल लीलाओं को सुना वापस कर देते थे। जब विदर्भ देश के राजा की बेटी रुक्मिणी को लेकर भगवान श्रीकृष्ण द्वारकाधीश गए जहां आधे द्वारकावासी बाराती बने वहीं आधे जनाती बने और श्रीकृष्ण और रुक्मणी विवाह संपन्न हुआ। कथा में श्री कृष्ण रुक्मणी की आरती  सानतराव देशमुख ललिता देशमुख ने की। इस अवसर पर रामकिशोर देशमुख अध्यक्ष भाजपा नगर मंडल आमला, हितेश देशमुख, राहुल देशमुख, लोकेश देशमुख तथा बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष, श्रद्धालु मौजूद रहे। आगामी दिनों में भी कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जाता है कि वे इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का आनंद लें। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सफल बनाने में सभी का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण था। श्रीमद् भागवत कथा भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करती है। यह कथा श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती है ।

काम के बोझ से दबे हुए रेलवे के सभी विभागों के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों को ग्रेड-पे 4800/- & ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) कैसे मिले ?

How did the Senior Supervisors of all departments of Railways, who are burdened with work, get Grade Pay 4800/- & Grade Pay 5400/- (Pay Level -8, Pay Level -9)? आमला/बैतूल (हरिप्रसाद गोहे) !लगभग दो वर्ष पूर्व जारी हुआ रेलवे का एक आदेश कार्यबोझ से दबे कर्मचारियों के विषाद का विषय बना हुआ है। यह प्रावधान रेलवे सुपरवाइज़रों को उच्चतम वेतनमान ग्रेड-पे 4800/- एवं ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) में पदोन्नति देने से संबंधित है, जिसमें एक अजीब शर्त जोड़ी गई है – उनके अपने विभाग से कुछ पदों को “मैचिंग-सरेंडर” करना। सतह पर यह नीति विभागीय संसाधनों के संतुलन और कुशलता को बढ़ाने का प्रयास लगती है, लेकिन गहराई में जाएं तो यह अव्यवस्था, अन्याय और कर्मचारियों के साथ भेदभाव की एक दर्दनाक कहानी बयां करती है। प्रावधान की दोहरी मार ………इस नीति के तहत, जिन विभागों में “फालतू कर्मचारियों” की भरमार है, वहां सुपरवाइज़रों को आसानी से उच्चतम वेतनमान में पदोन्नति मिल गई। उनके विभाग से कुछ पदों को सरेंडर कर दिया गया, और यह प्रक्रिया उनके लिए एक औपचारिकता मात्र बनकर रह गई। लेकिन दूसरी ओर, वे विभाग जहां स्टाफ की कमी है या कर्मचारी पहले ही अत्यधिक कार्यबोझ तले दबे हुए हैं, वहां यह शर्त एक अभिशाप बन गई। इन विभागों मे सरेंडर करना संभव ही नहीं है, क्योंकि हर कर्मचारी पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। नतीजा? रेलवे के कुछ विभागों के सुपरवाइज़र अब तक उच्चतम वेतनमान ग्रेड-पे 4800/- & ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) से वंचित हैं।यहां सवाल उठता है – क्या मेहनती और समर्पित कर्मचारियों को दंडित करना और निकम्मेपन को पुरस्कृत करना नैसर्गिक न्याय है? क्या यह नीति कर्मचारियों के बीच समानता और प्रोत्साहन की भावना को बढ़ाती है, या इसे कुचलती है? नौकरशाही अव्यवस्था का नमूना …………यह प्रावधान नौकरशाही अव्यवस्था (Bureaucratic Chaos) का एक जीता-जागता उदाहरण है। नौकरशाही अव्यवस्था तब उत्पन्न होती है, जब नीतियां बनाते समय जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर दिया जाता है और एक समान नियम सभी पर थोप दिए जाते हैं, भले ही परिस्थितियां भिन्न हों। इस मामले में, नीति निर्माताओं ने यह नहीं सोचा कि हर विभाग की अपनी जरूरतें और चुनौतियां होती हैं। जहां एक विभाग में अतिरिक्त कर्मचारी हो सकते हैं, वहीं दूसरा विभाग न्यूनतम स्टाफ के साथ संचालित हो रहा हो। एक ही छड़ी से सबको हांकने की कोशिश ने व्यवस्था को और उलझा दिया है। प्रभावित कर्मचारियों का दर्दकल्पना करें उस सुपरवाइज़र की मन:स्थिति का, जो दिन-रात मेहनत करता है, अपने सीमित संसाधनों के साथ विभाग को चलाता है, और फिर उसे पता चलता है कि उसकी मेहनत का इनाम नहीं, बल्कि सजा मिलेगी। दूसरी ओर, वह अपने समकक्ष को देखता है, जिसके विभाग में काम का बोझ कम है और कर्मचारी अधिक हैं, और उसे आसानी से पदोन्नति मिल जाती है। यह केवल पदोन्नति का मामला ही नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक आघात भी है।“हम दिन-रात काम करते हैं, छुट्टियां तक नहीं लेते, फिर भी हमें पीछे छोड़ दिया जाता है। क्या हमारा मेहनत करना ही हमारी गलती है?” – यह कहना है हर एक प्रभावित सुपरवाइज़र का, जिसकी आवाज में निराशा और गुस्सा साफ झलकता है। ऐसे कर्मचारी न केवल अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और मनोबल पर भी गहरा असर पड़ रहा है। नैसर्गिक न्याय कहां है ? ……..नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत कहता है कि हर व्यक्ति को उसकी योग्यता और परिस्थिति के आधार पर समान अवसर मिलना चाहिए। लेकिन इस प्रावधान में तो उल्टा हो रहा है। जहां कार्य बोझ कम और स्टाफ़ अधिक है उन्हें इनाम मिला, और जहाँ स्टाफ़ कम और कार्य बोझ अधिक उन्हें दंड। यह नीति कर्मचारियों के बीच असमानता को बढ़ावा दे रही है और मेहनत करने की भावना को कुचल रही है। क्या यह उचित है कि पदोन्नति का आधार आपकी मेहनत न हो, बल्कि यह हो कि आपके विभाग में कितने “फालतू” कर्मचारी हैं ? निष्कर्ष और सुझाव …….यह प्रावधान न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि नैतिक रूप से भी गलत है। इसे तत्काल संशोधित करने की जरूरत है। विभागों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लचीले नियम बनाए जाने चाहिए। उदाहरण के लिए, जिन विभागों में स्टाफ की कमी है, वहाँ सरेंडर की शर्त को हटाया जा सकता है या वैकल्पिक मानदंड तय किए जा सकते हैं। साथ ही, कर्मचारियों की मेहनत और योगदान को मापने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कोई भी अपने अधिकारों से वंचित न हो।अंत में, यह सवाल पूछना जरूरी है – क्या हम ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जहां मेहनत की सजा और निकम्मेपन का इनाम मिले? अगर नहीं, तो इस जारी नौकरशाही अव्यवस्था को खत्म करने का समय आ गया है, ताकि प्रभावित कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके और उनका दर्द सुना जा सके।वीरेंद्र कुमार पालीवालसेवानिवृत्त स्टेशन प्रबंधक(लेखक स्वयं इस अव्यवस्था का शिकार हुआ है)

डाक्टरों की कमी से जूझ रहा सिविल, अस्पताल : जनसुनवाई में कलेक्टर के नाम संबोधित ज्ञापन एस डी एम को सौपा

Civil hospital is facing shortage of doctors हरिप्रसाद गोहेआमला । विधानसभा क्षेत्र आमला के रहवासियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा को दृष्टिगत रख सरकार द्वारा सर्व सुविधा युक्त सिविल अस्पताल की सौगात आमला को दी जहा ब्लाक की 68 ग्राम पंचायतों एवं शहर के अठारह वार्डों से मरीज अपना स्वास्थ्य उपचार कराने पहुंचते है। खास बात यह है की सिविल अस्पताल का लोकार्पण भी बड़े धूमधाम से स्थानीय जन प्रतिनिधि की गरिमय उपस्थिति में हुआ था जिसे देख लोगों में आमला सिविल अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं एवं व्यवस्था मिलने आशा की किरण जागी थी। लेकिन यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधा व व्यव्स्था नहीं मिलने से लोगो में अब गहरा आक्रोश है। वहीं अस्पताल में नियुक्त डाक्टरों की कमी भी देखी जा रही है। बावजूद इस और किसी का ध्यान नहीं है। ऐसे में नगर के विभिन्न संगठनों ने मंगलवार सामूहिक आवाज बुलंद कर आमला सिविल अस्पताल में त्वरित व्यवस्था बनाए जाने मांग की मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होने की बात कहीं है । विभिन्न संगठनों ने सोपा ज्ञापन सिविल हॉस्पिटल में स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग एवं व्यवस्थाओ को लेकर मंगलवार को जनसुनवाई में शहर की विभिन्न संस्थाओं व समितियों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। लंबे समय से शहर के सिविल हॉस्पिटल में चिकित्सकों की कमी एवं व्यवस्थाओ की कमी शहरवसियो के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, इन्ही मुद्दों को लेकर शहर के अग्रणी सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठन एवं सेवाभावी समितियों द्वारा एक साथ जनपद पंचायत कार्यालय में एसडीएम आमला को ज्ञापन सौंपा। जिसमें जनसेवा कल्याण समिति, प्रगतिशील व्यापारी संघ, श्री महावीर हनुमान गौशाला समिति, सूर्यवंशी ढोलेवार कुंबी समाज युवा संगठन, मप्र अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ एवं संघर्ष समिति, सहयोग फाउंडेशन अधिवक्ता संघ,रेलवे रिटायर्ड पेंशनर एसोसिएशन ,बोहरा समाज करणी सेना परिवार के साथ विभिन्न संस्थाओ के सदस्यों द्वारा सिविल हॉस्पिटल में व्यवस्था सुधारने एवं स्वास्थ्य सुविधाओ में वृद्धि करने की मांग को लेकर अपनी बात रखी ।ज्ञात हो कि कुछ वर्ष पूर्व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन कर भव्य सिविल हॉस्पिटल आमला में बनाया गया था, जिससे लोगो मे उम्मीद जगी थी कि नए व भव्य हॉस्पिटल के बनने से सुविधाओ में वृद्धि होगी,परन्तु लोगो को हताशा ही हाथ लगी, हमेशा की तरह हॉस्पिटल आज भी डॉक्टर्स की कमी से जूझ रहा है,एवं मात्र आधा दर्जन डॉक्टर्स ही यहां सेवा दे रहे है,जबकि डॉक्टर के 14 पद आज भी रिक्त पड़े है, ऑपरेटरों व अन्य स्टाफ की भी यही हालत है, वहीं व्यवस्थाओ की बात करें तो छोटी-छोटी बीमारियों व घायल होने पर रोगियों को बैतूल रेफर कर दिया जाता है,यही स्थिति सामान्य जांचों की भी है। कुल मिलाकर कहा जाए तो यहां बोर्ड तो सिविल हॉस्पिटल का लगा है परन्तु सिविल हॉस्पिटल के निर्धारित मापदंडों के आधार पर 20 प्रतिशत सुविधाएं भी उपलब्ध नही है। ज्ञापन में समितियों व प्रबुद्धजनों द्वारा मांग की गई कि हॉस्पिटल में कई मशीनें जैसी आई थी वैसी ही बंद रखी है,उन्हें चलाने ऑपरेटर व डॉक्टर्स की व्यवस्था शीघ्र की जाए। महिला रोग विशेषज्ञ की मांग वर्षों से क्षेत्रवासी कर रहे है,इस मांग को जल्द पूरा किया जाए। एकमात्र एमडी मेडिसिन डॉक्टर मुकेश वागद्रे को बार-बार अटैचमेंट के नाम पर अन्यत्र भेज दिया जाता है,इसकी वजह जानकर शीघ्र कार्यवाही की जाए। आमला हॉस्पिटल में सायकल/वाहन स्टैंड का ठेका शीघ्र निरस्त किया जाए, चूंकि यहां अधिकांश गरीब वर्ग व अपनो की बीमारी से परेशान परिजन आते है,पैसों के अभाव में उन्हें लज्जित किया जाता है, मुलताई हॉस्पिटल में मानवता दिखाते हुए हॉस्पिटल में सायकल स्टैंड का ठेका निरस्त किया जा चुका है, आमला में भी ठेका तुरंत निरस्त किया जाए। सामान्य जांच जैसे सिटी स्कैन, एक्स-रे, एमआरआई आदि की समुचित व्यवस्था की जाए, साथ ही दवाइयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। सिविल हॉस्पिटल आमला की शहरी जनता के साथ 68 पंचायतों के लोगो के लिए भी एक मात्र हॉस्पिटल है।उपस्थित सभी समितियों व संस्थाओ के सदस्यों द्वारा एक सुर में इन मांगो को पूर्ण करने हेतू निवेदन किया, साथ ही सभी ने ये भी कहा कि अगर एक माह के भीतर व्यवस्थाओ व सुविधाओ को पूर्ण नही किया गया तो उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा।

लोकायुक्त से मिलने पहुंचे कांग्रेसी, सौरभ शर्मा और गोविंद सिंह राजपूत से जुड़े सौंपे दस्तावेज

Congressmen reached to meet Lokayukta, submitted documents related to Saurabh Sharma and Govind Singh Rajput भोपाल ! राजधानी भोपाल में सोमवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार प्रतिनिधिमंडल के साथ मध्य प्रदेश के लोकायुक्त से मिलने पहुंचे. उमंग सिंघार अपने साथ सौरभ शर्मा और उसके साथियों से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ मंत्री गोविंद सिंह राजपूत जो की पूर्व में परिवहन विभाग के मंत्री थे, उनकी कई संपत्तियों की जानकारी व उनकी रजिस्ट्री लेकर लोकायुक्त के पास पहुंचे. जहां उन्होंने लोकायुक्त से निवेदन किया है कि इस पूरे मामले की जांच करवाकर इस पर कार्रवाई की जाए. लोकायुक्त को सौंपे दस्तावेजभोपाल में लोकायुक्त से मिलने के बाद उमंग सिंघार ने बताया कि “हमने परिवहन विभाग के पूरे घोटाले के संपूर्ण दस्तावेज और उन घोटाले के पैसों से खरीदी गई संपत्तियों की जानकारी लोकायुक्त को दे दी है. सौरभ शर्मा जो अभी जेल में बंद है. तीनों जांच एजेंसियां उससे उसकी कार में मिले 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश के बारे में कुछ भी नहीं उगलवा सकी. सौरभ शर्मा के मामले में अभी मध्य प्रदेश विधानसभा में भी चर्चा होना बाकी है. उमंग सिंघार को गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ आरोपलोकायुक्त से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने बताया कि “किस तरह जनता के पैसों से यह लोग सोना-चांदी खरीद रहे थे. इस पूरे प्रकरण में तीन-तीन जांच एजेंसियों ने जांच करी, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं. इसको लेकर भी हमने लोकायुक्त से बात की है कि इस पूरे मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए. इसके साथ ही पूर्व में परिवहन मंत्री रहे गोविंद सिंह राजपूत और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी हमने लोकायुक्त को विस्तृत दस्तावेज दिए हैं. जिसमें हमने सभी प्रकार के दस्तावेज जैसे कि किस समय कौन सी जमीन गोविंद सिंह राजपूत या उनके परिजनों के नाम पर कहां-कहां खरीदी गई है. इसका विस्तृत उल्लेख किया है लोकायुक्त ने मामले में जांच करवाने के साथ-साथ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया है.

लोग स्वास्थ्य पर गंभीर नहीं सरकार :पंकज उपाध्याय 

Government is not serious about people’s health: Pankaj Upadhyay  भोपाल/जौरा। विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार पर गंभीर  आरोप लगाते हो कहा की सरकार जनता के स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है विधायक उपाध्याय ने विधानसभा में प्रश्न के माध्यम से सरकार से पूछा कि कैग की रिपोर्ट पर सरकार के द्वारा क्या अमल किया गय जवाब में लोग स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने  जवाब देते हुए उत्तर को घुमा दिया उन्होंने पूरे उत्तर में कैग की रिपोर्ट पर अमल करने का कोई भी उचित उत्तर नहीं दिया विधायक पंकज उपाध्याय ने पूछा कि कैग की 86% अनुशंसाओं पर कोई जवाब क्यों नहीं दिया गया क्या सरकार उनसे असहमत है या सहमत है सहमत है तो क्या कार्रवाई की गई परंतु स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने केवल पद भरने की बातों का आश्वासन दिया विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले सभी सत्रों में हमारे द्वारा अस्पतालों में डॉक्टरों की और स्टाफ की कमी को लेकर लगातार बात उठाई गई लेकिन 1 साल बीतने के बाद भी सरकार के द्वारा कोई भी  रिक्त पद नहीं भर गया कैग ने अपनी अनुशंसा में 317  निष्कर्ष के साथ लिखा कि मातृ मृत्यु दर नवजात शिशु मृत्यु दर आदि के लिए निष्ठा पूर्वक कार्य नही किया गया। प्रतिवेदन में नाम मात्र के जो उत्तर शासन ने दिए उसे एक भी उत्तर को केग ने स्वीकार नहीं किया । राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के मानक अनुसार स्वास्थ्य पर राज्य के बजट का 8% होना चाहिए जो इस वर्ष 2025 -26 में मात्र 5.5% प्रतिशत है । विधायक उपाध्याय ने आगे कहा कि शासन को 2017-18 से 2021-22 की स्वास्थ्य अधोसंरचना पर केग की रिपोर्ट , शासन को टिप के लिए , किस दिनांक को प्राप्त हुई तथा उसका उत्तर शासन ने किस दिनांक को दिया । केग की उस रिपोर्ट में कितनी कंडिका और उपकंडिका  में निष्कर्ष पर टीप चाही गई थी । उसमें से कितने निष्कर्ष पर शासन ने सहमति व्यक्त की , कितने निष्कर्ष पर प्रमाण सहित लिखकर असहमति  व्यक्त की और कितने निष्कर्ष का कोई उत्तर ही नहीं दिया । विधायक  ने आगे कहा कि भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक 2012 और 2017 के कितने मापदंडों का हम अक्षरसह पालन करते हैं , और किस किस मापदंडों में हमने राज्य की आवश्यकता अनुसार क्या क्या संशोधन किया हैं । और वह क्यों किया हैं । तथा  बतावे कि प्रदेश के विभिन्न कैटेगरी के चिकित्सा संस्थानों में भरती निरंतर प्रक्रिया है , यह सही है , लेकिन अभी तक राज्य शासन के मानक अनुसार 40 से 60% से अधिक पद खाली क्यों है । क्या प्रदेश में उनके लिए योग्य चिकित्सक और पेरामेडिकल स्टाफ नहीं है , या योग्य चिकित्सक और योग्य पैरामेडिकल स्टाफ , शासकीय संस्थानों में भ्रष्टाचार और लालफिताशाही के कारण नौकरी करना नहीं चाहते हैं । या सरकार भ्रष्टाचारियों को सरंक्षण के लिए नियुक्ति नहीं करना चाहती है । विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुरैना जिले के किसी भी अस्पताल में डॉक्टरों की पूर्ति नहीं की गई है जौरा कैलारस में छोटी मोटी बीमारियों पर भी डॉक्टर ना होने के कारण मरीज को मुरैना ग्वालियर रेफर किया जाता है सरकार के उत्तर से ऐसा मत होते हुए विधायक पंकज उपाध्याय ने सदन से बहिर्गमन किया।

जबलपुर केंद्रीय जेल में होली समारोह का भव्य आयोजन

Holi celebration organized in a grand manner at Jabalpur Central Jail जितेन्द्र श्रीवास्तव  जबलपुर। जबलपुर स्थित केंद्रीय जेल नेता सुभाष चंद्र बोस में होली का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर जेल उप जेल अधीक्षक मदन कमलेश एवं जेल स्टाफ एवं समस्त बंदी पुरुषों एवं महिलाओं के द्वारा होली का रंगा रंग कार्यक्रम का सफल आयोजन सम्पन्न हुआ , अन्य जेल अधिकारी, कर्मचारी और बंदियों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर त्योहार की खुशियाँ साझा कीं।   समारोह की मुख्य झलकियाँ सुधारात्मक प्रयासों का हिस्सा जेल प्रशासन द्वारा इस प्रकार के आयोजनों को सुधारात्मक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित होती है और उनके पुनर्वास में मदद मिलती है।   इस तरह के आयोजनों से जेल के भीतर एक सकारात्मक माहौल बनता है और आपसी सौहार्द को बढ़ावा मिलता है।

एमपी सदन में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ पर मऊगंज विधायक ने उठाया मुद्दा

Mauganj MLA raised the issue of illegal infiltration of Bangladeshi and Rohingya Muslims in MP House भोपाल। मध्यप्रदेश के मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से विधानसभा में बांग्लादेशी रोहिंग्या मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ का मामला उठाया है। विधायक ने कहा कि मध्यप्रदेश के मऊगंज जिला समेत सीमावर्ती जिले जो यूपी की सीमाओं से जुड़े हैं अवैध मुस्लिम आब्रजकारियों विशेषकर बांग्लादेशी रोहिंग्या मुस्लिमों को अवैध तरीकों से मूल निवास प्रमाणपत्र और आधारकार्ड जनप्रतिनिधियों जैसे पार्षद और सरपंचों के वेरिफिकेशन पर जारी किये जा रहे हैं। भाजपा विधायक ने चिंता जताते हुए कहा कि एमपी के 10 बड़े जिलों के सीमावर्ती इलाकों में इनकी तादाद बहुत तेजी से बढ़ी है जो भविष्य में प्रदेश के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं ,घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोकने के लिए सिटीजन शिप अमेंडमेंट एक्ट सीएए और एनआरसी के तहत कार्यवाही शुरु न होने से अवैध मुस्लिमों का बढ़ना सुरक्षा में चूक है। प्रदीप पटेल ने इस गंभीर मामले में सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि सरकार हस्तक्षेप कर अवैध घुसपैठ पर रोक लगाए। मऊगंज के विधायक प्रदीप पटेल द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के कई महत्वपूर्ण आयाम हैं, जिनका विश्लेषण राजनीतिक, सुरक्षा, कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से किया जा सकता है।   1. राजनीतिक पहलू यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक द्वारा उठाया गया है, जो पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने के पक्ष में रही है। अवैध घुसपैठ का मुद्दा भाजपा की मुख्य चुनावी रणनीति का हिस्सा भी रहा है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर और बंगाल में।   2. सुरक्षा संबंधी चिंताएँ 3. कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियाँ 4. सामाजिक प्रभाव विधायक द्वारा उठाया गया मुद्दा गंभीर है, लेकिन इसे निष्पक्ष जांच और ठोस प्रमाणों के आधार पर ही आगे बढ़ाना चाहिए। घुसपैठ को रोकना आवश्यक है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी भी कानूनी रूप से रह रहे व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न हो।  

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अंतर्गत आमला रेलवे द्वारा शानदार कार्यक्रम का आयोजन

Amla Railway organized a grand program on the occasion of International Women’s Day हरिप्रसाद गोहे  आमला। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मध्य रेल नागपुर मंडल के माननीय मंडल रेल प्रबंधक श्री विनायक गर्ग साहब के मार्गदर्शन तथा वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी श्रीमती सांझी जैन के कुशल नेतृत्व में मध्य रेल आमला द्वारा रेलवे इंस्टीट्यूट प्रांगण रेलवे कालोनी आमला में गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन हुआ।स्टाफ बेनिफिट फंड मध्य रेल के संयोजन में महिला सशक्तिकरण समिति द्वारा महिला दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ,कार्यक्रम मे महिलाओ की रेलवे मे भूमिका पर प्रकाश डाला गया,विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर श्रीमती मेघना अनिल कुमार पाटिल  आमला उपस्थित थी।विशेष अतिथि के तौर पर डॉ लवी आर्य रेलवे चिकित्सक आमला एवं अनिशा  शर्मा नर्सिंग अधीक्षक,श्रीमती ओमवती विश्वकर्मा पार्षद रेलवे कालोनी आमला श्रीमती गीता निरंजन एवं श्रीमती भावना पंत  उपस्थित थी।कार्यक्रम विशेष रूप से ए आर धोटे कल्याण निरीक्षक,हरिमोहन निरंजन टी आई आर पी एफ आमला, बी के सूर्यवंशी एस एस ई सी एंड डब्ल्यू,सतीश मीणा सचिव रेलवे इंस्टीट्यूट आमला, एस डी पंत कमर्शियल सुप्रिटेंडेंट,ए के जैन सी सी ओ आर, पवन मिश्रा सी टी आई उपस्थित थे कार्यक्रम में समाजसेवी मनोज विश्वकर्मा सहित स्थानीय लोग भी उपस्थित थे।कार्यक्रम के संयोजक ए आर धोटे ने बताया की मध्य रेल द्वारा आज महिला दिवस पर महिला रेल कर्मचारियों के हितार्थ इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।कार्यक्रम में महिला रेल कर्मचारियों ने शानदार कार्यक्रम प्रस्तुत किए विभिन्न प्रकार के मनोरंजक ओर ज्ञानवर्धक कार्यक्रम सम्पन्न हुए विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमें सभी महिला रेल कर्मचारियों ने भाग लिया,विभिन्न खेल कूद के कार्यक्रमो के साथ साथ तमाम सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।कार्यक्रम के अंत में सभी को पुरस्कृत भी किया गया। दोपहर से शाम तक चले इस कार्यक्रम में सभी महिला रेल कर्मचारियों ने तन्मयता के साथ भाग लिया।महिला दिवस पर महिला रेल कर्मचारियों के इस आयोजन की सभी ने सराहना की।अपने उद्बोधन में अतिथियों ने कहा की महिलाएं बड़े ही कुशलता पूर्वक अपने कर्तव्य निभाती है वह अपने कर्तव्य के साथ साथ परिवार का भी ध्यान रखती है।कार्यक्रम में वरिष्ठ महिला रेल कर्मचारियों का सम्मान भी किया गया।कार्यक्रम का मंच संचालन भावना पंत ने किया और आभार प्रदर्शन ए आर धोटे कल्याण निरीक्षक ने किया।          कार्यक्रम में प्रतियोगिता का संचालन मीना करोले एवं अनिता झा ने किया।कार्यक्रम में संगीता पहाड़े, मेघा नागले,कविता,कल्पना उघड़े,ज्योति प्रजापति,अंजना लोखंडे,ज्योति झरबडे,विनीता पाटिल सहित एक सैकड़ा महिला रेल कर्मचारी उपस्थित थी,साथ ही बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों ने प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कार जीता।

भोपाल एम्‍स कैंसर मरीजों की देखभाल करेगा AI, पूछेगा- क्‍या आपको दर्द हो रहा है, खाने में समस्‍या तो नहीं!

AI will take care of cancer patients in Bhopal AIIMS, will ask- are you in pain, are you having problem in eating! भोपाल। एम्स भोपाल को कैंसर मरीजों की जीवन गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बड़ी उपलब्धि मिली है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने डिजिटल आन्कोलाजी (कैंसर देखभाल) के लिए एम्स भोपाल को 20 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान प्रदान किया है। यह शोध आईआईटी इंदौर के नवाचार केंद्र के सहयोग से किया जाएगा। ऐसे होगा मरीजों की जिंदगी पर असर इस परियोजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से कैंसर मरीजों के इलाज के बाद उनकी जीवन गुणवत्ता (क्वालिटी आफ लाइफ) पर शोध किया जाएगा। एआई पूछेगा यह सवाल इसके लिए एक डिजिटल प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा, जो मरीजों से उनके स्वास्थ्य और समस्याओं के बारे में सवाल पूछेगा, जैसे – क्या आपको दर्द हो रहा है? खाने-पीने में दिक्कत तो नहीं? आपको सबसे ज्यादा तकलीफ किस चीज से हो रही है? मरीजों से मिले इन जवाबों का विश्लेषण करके डॉक्टर उनके लिए बेहतर उपचार योजना बना सकेंगे। डिजिटल हेल्थ में बड़ी पहल इस परियोजना से कैंसर मरीजों की शारीरिक और मानसिक सेहत, सामाजिक जुड़ाव और इलाज के प्रभावों का मूल्यांकन किया जाएगा। भारत में अभी तक ऐसा कोई डिजिटल टूल नहीं था जो कैंसर मरीजों की जीवन गुणवत्ता को माप सके। यह शोध इस कमी को पूरा करेगा और कैंसर मरीजों को बेहतर देखभाल और व्यक्तिगत उपचार समाधान देगा।

क्रूरता प्रमाणित नहीं एक पक्षीय तलाक का निर्णय निरस्त ।

Cruelty not proved unilateral divorce decision cancelled. हरिप्रसाद गोहे  आमला । अपर जिला न्यायाधीश आमला कोर्ट ने एक अनूठा फैसला सुनाते हुए पति-पत्नी के बीच हुए तलाक को निरस्त कर दिया है । मामला 2013 का है, जब एक युवक और युवती ने प्रेम विवाह किया था । दंपति 6 महीने तक बड़े शहर में रहे और बाद में अपने गांव में बस गए । पत्नी ने तलाक की याचिका पेश करते समय याचिका में आरोप लगाया कि विवाह के कुछ समय बाद से पति शराब पीने का आदी हो गया और पत्नी पर परिवार में कर्तव्य और दायित्व का  निर्वहन नहीं करने और कुछ व्यक्तिगत आरोप लगाने लगा । दूसरी तरफ,पति  ने भी पत्नी को साथ रखने की याचिका दायर कर पत्नी पर झूठे व्यक्तिगत आरोप लगाने और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सार्वजनिक करने का झूठा आरोप लगाया । साथ ही दहेज प्रताड़ना की शिकायत भी की विचारण  सुनवाई के दौरान पति बीमार होने के कारण निर्धारित पेशी पर अदालत नहीं पहुंच पाया कोर्ट ने एकपक्षीय तलाक दे दिया था । पति के वकील राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि पति ने इस फैसले के खिलाफ एक पक्षीय तलाक को चुनौती दी और कहा कि वह पत्नी के साथ दांपत्य जीवन बिताना चाहता है । दंपति का एक बच्चा है जो पिता के साथ रहता है। कोर्ट ने पुनः दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया । मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब बच्चे ने अदालत में कहा कि वह अपनी मां और पिता दोनों के साथ रहना चाहता है । बच्चे ने यह भी कहा कि मां ने काफी लंबे समय से मुलाकात नहीं की कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि प्रेम विवाह के तीन साल तक पत्नी ने दहेज का कोई आरोप नहीं लगाया था । सोशल मीडिया के तथ्यों को भी कोर्ट में साबित नहीं किया यहां तक कि पुत्र किस कक्षा में पढ़ता है, उसका जीवन कैसा चल रहा है , इस पर कोई संतोष जनक जवाब नहीं दिया जबकि बच्चे ने कहा कि वह जब भी अपनी मां से मिलने जाता है तो उसे मिलने नहीं दिया जाता  । पति किसान है और पत्नी गृहिणी है। कोर्ट ने पाया कि मामला क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता। बच्चे की भावनाओं को देखते हुए और पत्नी के  द्वारा आरोप साबित नहीं करने और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद कोर्ट ने  एक पक्षीय तलाक को निरस्त कर दिया ।

1 साल में नहीं हुआ कोई भी विकास का कार्य ,पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं करा पाई सरकार : पंकज उपाध्याय 

No development work was done in 1 year, government could not even provide drinking water: Pankaj Upadhyay जौरा | विधानसभा में जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने राज्यपाल की अभिभाषण में कहा कि , कल राज्यपाल जी का भाषण सुना आज बड़े ही दुखी मन से यहां अपनी बात रख रहा हूं . मैं पहली बार का विधायक हूं और बड़ी उम्मीद लेकर आया था . आपको देखा , प्रहलाद जी को देखा , कैलाश जी को देखा और बरिष्ठ लोगों को देखा तो लगा कि बिजली , पानी , सड़क सभी काम बड़ी आसानी से हो जाएंगे , मैं जो यहाँ पर बोलूंगा वह होगा , लेकिन मैं जहां एक साल पहले खड़ा था आज भी वहीं पर खड़ा हूं . पानी की समस्या की बात करें तो हमने लगातार नलजल योजना की यहां बात की है कैलाश विजयवर्गीय जी ने पिछली बार आश्वासन दिया कि जिले की एक समिति बनाएंगे जिन विधायकों को रखेंगे और वह गांव – गांव जाकर देखेंगे कि क्या स्थिति है . एक साल में कोई भी ऐसी कार्यवाही नहीं हुई ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम करे जा रहे हैं . पूरे विभाग का हर कर्मचारी अपनी मर्जी से काम किये जा रहा है . एक भी नल की टोंटी में से पानी नहीं निकल रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है . एक साल से हम प्रत्येक विधान सभा में इस प्रश्न को लगाते हैं और उत्तर मिल जाता है कार्यवाही जारी है , हो रहा है , होगा लेकिन काम कब होगा यह आज तक पता नहीं चल पाया है . ऐसे ही विकलांग हैं जिनके दोनों पैर खराब होते हैं उनको साठ प्रतिशत का प्रमाणपत्र पकड़ा दिया है और जो विकलांग नही थे , बहरे , अंधे नहीं थे उन लोगो को आपने फर्जी प्रमाण पत्र देकर नौकरियां दे दी हैं . आपने 100-100 प्रतिशत के प्रमाण पत्र दे दिये हैं लेकिन जिनके दोनों पैर नहीं हैं आज तक हम उन लोगों को सायकिल नहीं दे पाए . बहुत ही शर्म आती है जब वह लोग हमारे पास में आते हैं कि आप विधायक हो हमको सायिकल तो दिला दो . इस पर मेरा सदन से अनुरोध है कि यह बड़ी ही संवेदनशील बात है कि जिन लोगों के दोनों पैर नहीं हैं और हमें आंखों से दिख रहा है लेकिन हम उन्हें सायकिल नहीं दिला पा रहे हैं . इस पर आप कुछ कार्यवाही करें . खाद मांगने जाते हैं तो डंडे पड़ रहे हैं . किसान अपनी फसल बेचने जाता है तो वह लाईन में लगा रहता है . मेरा आपसे अनुरोध है कि जो खरीदी केन्द्र हैं उनकी संख्या बढ़ाई जाए .अध्यक्ष महोदय , राज्यपाल जी ने जो भाषण दिया पेज नम्बर 9 पर हमने अस्पतालों की बातें सुनीं हमारे जौरा में अस्पताल बने हैं लेकिन उनमें डॉक्टर नहीं हैं . स्टॉफ नहीं है , दवाईयां नहीं है . अभी आपने नये अस्पताल का उद्घाटन किया लेकिन 50 प्रतिशत डॉक्टर भी वहां पर उपलब्ध नहीं हैं . वहां पर तीन माह से महिलाओं की डॉक्टर नहीं हैं . जब डिलेवरी होने आती है तो वह पहले वहां पर आती हैं और फिर मुरैना पहुंचाई जाती हैं . आप समझ सकते हैं कि यह कितनी गंभीर बात है . अगर तीन माह से वहां पर डॉक्टर नहीं हैं तो कैसे क्या व्यवस्था हो रही होगी यह बहुत ही गंभीर विषय है , लेकिन सरकार लगातार अपनी पीठ थपथपा रही थी और मैं सोच रहा था कि मेरे क्षेत्र का तो कुछ काम ही नहीं हुआ भवन बन गए हैं लेकिन डॉक्टर नहीं हैं . यहां पर अटल एक्सप्रेस वे की घोषणा हुई माननीय अध्यक्ष जी पहले आपने घोषणा की थी कि आप बीहड़ में से इस सड़क को निकालेंगे हमने बहुत स्वागत किया कई उत्साह मने कि बहुत ही बढ़िया काम हो रहा है लेकिन आप उपजाऊ भूमि में से अगर सड़क को निकालेंगे तो यह किसान कहां जाएंगे , जो सीमान्त किसान हैं वह कहां जाएंगे . मेरा आपने अनुरोध है कि हमें इस पर गंभीरता से विचार करना होगा यदि हमने इन लोगों को आज बेरोजगार कर दिया तो आने वाले समय में हमें कोई माफ नहीं करेगा . वह जो हजारों एकड़ का बिहड़ पड़ा है आप उस बिहड़ पर सड़क निकालिए आपका स्वागत है . ऐसे ही आपने सोलर प्लांट की योजना ला दी सबने तारीफ की कि बहुत बड़ा सोलर प्लांट बन रहा है . प्रदेश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट बन रहा है . जो पशुवन यहां वहां घूम रहा है वह कहां जाएगा , आपने यदि हमारी पच्चीस हजार बीघा जमीन ले ली और जहां जमीन पर सोलर प्लांट लग जाएगा तो जमीन में से पानी कम जो जाएगा . वहां के किसान कहां जाएंगे इस बारे में किसी ने कोई चर्चा नहीं की है . मैं फिर कहना चाहता हूं कि जो हमारा बिहड़ का इलाका है । चंबल के पास का वहां लाखों एकड़ भूमि खाली पड़ी हुई है वह आप इन उद्योगपतियों को दीजिए , अडानी , अम्बानी को हमारी उपजाऊ जमीन देने की पंकज उपाध्याय ने कहा कि लोगों को बिजली नहीं मिल रही हैं , लोग घंटों – दिनों तक खड़े रहते हैं . डीपी जल जाती है तो दो – दो माह तक बिजली नहीं आती है , जब तक रिश्वत नहीं दी जाती है , तब तक डीपी नहीं बदली जाती है , मेरा अनुरोध है कि ये बहुत ही गंभीर विषय है इस पर आपको चिंतन करना होगा .  यहां से सबसे ज्यादा लोग सेना में जाते हैं . इतने लोग शहीद हो जाते हैं . उसके बाद भी हम मुरैना जिले एक ट्रेनिंग सेंटर आज तक नहीं बना पाये कि जहां हमारे नए युवा ट्रेनिंग कर सकें , मैं , विगत एक वर्ष में 5 बार इस सदन में , इसकी मांग कर चुका हूं लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती है . शहीदों की केवल एक बार तारीफ कर दो , फिर उन्हें भूल जाओ . वहां स्कूल नहीं हैं । हमारे युवाओं के साथ भेदभाव हो रहा है , वे सेना में भर्ती होने के … Read more

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