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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शनिवार को राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह की शुरुआत करेंगे

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शनिवार को ‘कर्मयोगी सप्ताह’ यानी राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह की शुरुआत करेंगे। इसके तहत लोक सेवकों के लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक क्षमता विकसित करने की दिशा में नए सिरे से प्रोत्साहन देने की कवायद की जाएगी। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में यह जानकारी दी। पीएमओ ने बताया कि ‘मिशन कर्मयोगी’ की शुरुआत सितंबर 2020 में की गई थी और तब से इसने पर्याप्त प्रगति की है। इसमें वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ भारतीय लोकाचार में निहित भविष्य के लिए तैयार सिविल सेवा की कल्पना की गई है। बयान में कहा गया राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह लोक सेवकों के लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक क्षमता विकास की दिशा में नई गति प्रदान करने वाला, अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन होगा। पीएमओ ने कहा कि यह पहल सीखने और विकास के लिए एक नई प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करेगी। राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह का उद्देश्य ‘एक सरकार’ का संदेश देना, सभी को राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ जोड़ना और आजीवन सीखने को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम व्यक्तिगत प्रतिभागियों और मंत्रालयों, विभागों और संगठनों द्वारा जुड़ाव के विभिन्न रूपों के माध्यम से सीखने के लिए समर्पित होगा। इस दौरान, प्रत्येक ‘कर्मयोगी’ कम से कम चार घंटे की योग्यता से जुड़े गुर सीखने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होगा। प्रतिभागी प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा आईजीओटी, वेबिनार (सार्वजनिक व्याख्यान या नीति विशेषज्ञों की कक्षाएं) पर व्यक्तिगत भूमिका-आधारित मॉड्यूल के संयोजन के माध्यम से लक्षित घंटों को पूरा कर सकते हैं। बयान में कहा गया है कि सप्ताह के दौरान, प्रख्यात वक्ता अपनी विशेषज्ञता के विषय पर व्याख्यान देंगे और कर्मयोगियों को अधिक प्रभावी तरीके से नागरिक-केंद्रित वितरण की दिशा में काम करने में मदद करेंगे। सप्ताह के दौरान, मंत्रालय, विभाग और संगठन क्षेत्र विशिष्ट दक्षताओं को बढ़ाने के लिए सम्मेलन और कार्यशालाएं भी आयोजित करेंगे।    

कांग्रेस जनता को गुमराह करती है, उनकी सोच बांटो और राज करो की रही है : पीएम मोदी

चंडीगढ़ कांग्रेस जनता को गुमराह करती है। उनकी सोच बांटो और राज करो की रही है। जब कांग्रेस खतरे में आती है तो वो संविधान खतरे में होने का शोर मचाती है। यह बात चंडीगढ़ में एनडीए के मुख्यमंत्रियों की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने कही। परिवारवाद के मुद्दे पर भी पीएम ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि वहां एक घराना पार्टी तंत्र चलाना है। पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि हमने संविधान निर्माताओं की सोच को आगे रखा। संविधान की रक्षा का संकल्प जनता तक पहुंचाएंगे। भारत का संविधान सुरक्षित है। संविधान के खतरे में होने की बात कहने वाले खुद खतरे में रहते हैं। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इनकी आदत फूट डालो और राज करो की है। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल लगाकर और राजीव गांधी शाहबानो मामले में संविधान को कुचलने का काम किया। पीएम मोदी ने धारा 370 समेत कई मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पब्लिक सब देख रही है। कांग्रेस के बहकावे में, उनके फूट डालो-राज करो वाली नीति पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। हरियाणा चुनाव को लेकर मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने इस चुनाव में गुमराह करने की कोशिश की लेकिन बीजेपी का लोगों ने समर्थन किया। हरियाणा में बीजेपी की लगातार तीसरी बार शानदार जीत से पार्टी पूरे जोश में है। अब उनकी निगाहें महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव पर है। यही वजह है कि बीजेपी ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस को घेरने के लिए खास रणनीति तैयार की है। बीजेपी नेतृत्व ने तय किया है कि वो आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ मनाएगी, कैसे कांग्रेस ने संविधान की धज्जियां उड़ाई उसे लोगों के बीच लेकर जाएंगे। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बताया कि चंडीगढ़ में एनडीए के मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई। इस बैठक में पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि शासन के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। इस पर ध्यान केंद्रित कर हम इसको आगे बढ़ाएं।  

शिवराज के घर जल्द बजेगी शहनाई, पीएम मोदी केंद्रीय मंत्री के बेटों की शादी में शामिल होंगे

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दोनों बेटों की शादी जल्द ही होने वाली है। पीएम नरेंद्र मोदी को उन्होंने शादी का न्योता दिया है। शादी में आमंत्रित करने शिवराज अपनी पत्नी साधना सिंह और दोनों बेटे कार्तिकेय-कुणाल के साथ पहुंचे थे। बता दें कि शिवराज सिंह चौहान के दोनों बेटे कार्तिकेय और कुणाल की जल्द ही शादी होने वाली है। शिवराज सिंह चौहान के बड़े समधी अनुपम आर बंसल देश की जानी-मानी कंपनी लिबर्टी शूज कंपनी के निदेशक हैं। इसके अलावा भी वे कई कारोबार से जुड़े हुए हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के छोटे समधी भोपाल के बड़े डॉक्टर हैं। शादी का न्योता देने की जानकारी खुद शिवराज सिंह चौहान ने अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा की है। तस्वीरों में शिवराज पीएम मोदी को फूलों का गुलदस्ता और गणेश प्रतिमा भेंट करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान पूरा परिवार साथ है। शिवराज ने जानकारी साझा करते हुए लिखा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से अपनी धर्मपत्नी साधना और दोनों बेटों कार्तिकेय-कुणाल के साथ भेंट की। हमने प्रधानमंत्री जी को दोनों बेटों की शादी में आने का निमंत्रण दिया और उनसे आशीर्वाद लिया। स्नेह, प्रेम, आत्मीयता और अपनेपन से भरे आदरणीय प्रधानमंत्री जी अभिभावक और बड़े भाई हैं। वह मानवीय संवेदनाओं से भरे अत्यंत सहज और सरल हैं। प्रधानमंत्री जी से मिलकर मन भावुक हो गया। उनके साथ देश और किसानों के लिए काम करना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। कौन हैं कार्तिकेय और अमानत? कार्तिकेय चौहान पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे हैं। कार्तिकेय को पिता का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है। 2013 से कार्तिकेय राजनीति में सक्रिय हैं। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में पिता शिवराज के लिए उन्होंने जमकर प्रचार किया था। इसकी पूरी संभावना है कि आने वाले समय में कार्तिकेय खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे। वहीं, शिवराज सिंह की होने वाली बड़ी बहू अमानत बंसल लिबर्टी शूज कंपनी के निदेशक और कारोबारी अनुपम आर बंसल की बेटी हैं। अमानत ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है, उन्होंने मनोवैज्ञानिक शोध में एमएससी किया है। बताया जाता है कि अमानत को शास्त्रीय नृत्य का भी बहुत शौक है। अमानत की मां रुचिता बंसल ‘इजहार’ नाम की एक संस्था चलाती है। कौन हैं कुणाल और रिद्धी? कुणाल चौहान शिवराज सिंह चौहान के छोटे बेटे हैं। कुणाल का राजनीति से कोई नाता नहीं है, उनका पूरा फोकस अपने कारोबार पर ही रहता है। वे मेसर्स सुंदर फूड्स एंड डेयरी के मैनेजिंग पार्टनर हैं। उनकी डेयरी से दूध, घी, पनीर, लस्सी, दही और पानी भी भोपाल व आसपास के जिलों में सप्लाई किया जााता है। इससे पहले कुणाल ने भोपाल में फूलों की दुकान भी खोली थी। शिवराज की छोटी बहू रिद्धी जैन परिवार से आती हैं। उनके पिता संदीप जैन हैं, जो भोपाल में बड़े डॉक्टर हैं। रिद्धी के दादा इंदरमल जैन भी डॉक्टर हैं। डॉ. इंदरमल जैन का निवास भोपाल के 74 बंगले के पास निषाद कॉलोनी में है। अमेरिका में पढ़ाई के दौरान कुणाल और रिद्धी एक दूसरे से मिले थे। दोनों करीब दो साल से दोस्त रहे, इसके बाद दोनों परिवारों की मौजूदगी में दोनों का रोका कार्यक्रम हुआ था। शिवराज सिंह चौहान की ओर से इस कार्यक्रम गोपनीय रखा गया था, लेकिन जैन परिवार की ओर से रोका कार्यक्रम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर दी गईं, जिससे यह जानकारी सामने आ गई।  

दिवाली से पहले मोदी सरकार ने किसानों को दिया बड़ा तोहफा! 6 रबी फसलों की बढ़ाई MSP

नईदिल्ली किसानों को मोदी सरकार ने दिवाली पर बड़ा गिफ्ट दिया है. सरकार ने रबी फसलों की MSP बढ़ा दी है. केंद्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए रबी की 6 फसलों का न्यूनतम  समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की घोषणा की है. इस फैसले के तहत अलग-अलग फसलों के MSP में वृद्धि की गई है, जिससे किसानों को उनकी फसलों के बेहतर दाम मिल सकेंगे. कैबिनेट में चने का MSP 210 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाने का फैसला किया गया है। चने का नया MSP अब 5,650 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है जो पहले 5440 रुपए प्रति क्विंटल था। वहीं सरसों की MSP 300 रुपए प्रति क्विटंल बढ़ाया गया है। सरसों का मौजूद MSP अभी 5650 रुपए प्रति क्विंटल था। जबकि नया भाव अब 5950 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। गेहूं की MSP में भी 150 रुपए प्रति क्विटंल का इजाफा किया गया है। इसकी MSP 2275 रुपए प्रति क्विटंल से बढ़कर 2425 रुपए प्रति क्विटंल हो चुकी है। रबी फसल का सीजन अक्टूबर-नवंबर से लेकर मार्च-अप्रैल तक रहता है। इन फसलों में गेहूं, जौ, सरसों, चना आदि की खेती शामिल हैं। MSP के मायने उस रेट से होता है जिस पर सरकार किसानों से खरीदारी करती है। आज रबी फसल की MSP तय हो सकती है। नए अधिसूचना के अनुसार:     गेहूं का MSP ₹2,425 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले ₹2,275 था।     जौ का MSP ₹1,980 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले ₹1,850 था।     चना का MSP ₹5,650 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले ₹5,440 था।     मसूर (लेंस) का MSP ₹6,700 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले ₹6,425 था।     सरसों का MSP ₹5,950 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले ₹5,650 था।     कुसुम (सफ्लॉवर) का MSP ₹5,940 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पहले ₹5,800 था। सरकार का यह कदम किसानों को उनकी फसलों के उचित मूल्य दिलाने के मकसद से उठाया गया है.  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व दूरसंचार मानकीकरण सभा (डब्ल्यूटीएसए) का उद्घाटन किया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की ओर से आयोजित किए जाने वाली विश्व दूरसंचार मानकीकरण सभा (डब्ल्यूटीएसए) का उद्घाटन किया। इसके अलावा पीएम ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) के आठवें संस्करण का भी उद्घाटन किया। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2024 में कई लेटेस्ट इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और 6जी डेवलपमेंट के अपडेट आदि की जानकारी मिलेगी। इस दौरान टेलीकॉम स्टेकहोल्डर्स भी मौजूद थे। डब्ल्यूटीएसए दुनिया भर के दूरसंचार मानकों को तय करने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक है। यह अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ के मुख्य सम्मेलनों में से एक है, जिसे हर चार साल में आयोजित किया जाता है। भारत और एशिया-प्रशांत में पहली बार आईटीयू-डब्ल्यूटीएसए का आयोजन किया जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक कार्यक्रम है जो 190 से अधिक देशों के 3,000 से अधिक उद्योग जगत के नेताओं, नीति-निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित करने जा रहा है। डब्ल्यूटीएसए 2024 देशों को 6जी, एआई, आईओटी, बिग डेटा, साइबर सुरक्षा आदि जैसी अगली पीढ़ी की महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के मानकों के भविष्य पर चर्चा करने और निर्णय लेने के लिए एक मंच प्रदान कर रहा है। भारत में इस कार्यक्रम की मेजबानी से देश के वैश्विक दूरसंचार एजेंडे को आकार देने और भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। इसके जरिए भारतीय स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थान बौद्धिक संपदा अधिकार और मानक अनिवार्य पेटेंट विकसित करने में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए तैयार हैं। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2024 में भारत के इनोवेशन संबंधी इकोसिस्टम का प्रदर्शन होगा, इसमें अग्रणी दूरसंचार कंपनियां और इनोवेटर क्वांटम तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी में प्रगति को उजागर करेंगे। साथ ही, 6जी, 5जी यूज-केस शोकेस, क्लाउड और एज कंप्यूटिंग, आईओटी, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, ग्रीन टेक, सैटकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर भी प्रकाश डालेंगे। एशिया का सबसे बड़ा डिजिटल प्रौद्योगिकी मंच इंडिया मोबाइल कांग्रेस उद्योग जगत, सरकार, शिक्षाविदों, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी समेत दूरसंचार क्षेत्र के इकोसिस्टम में अन्य प्रमुख हितधारकों के लिए अभिनव समाधान, सेवाओं और अत्याधुनिक उपयोग के मामलों को प्रदर्शित करने के लिए दुनिया भर में एक प्रसिद्ध मंच बन गया है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2024 में 400 से अधिक प्रदर्शकों, लगभग 900 स्टार्टअप और 120 से ज्यादा देशों की भागीदारी होगी। इस आयोजन का उद्देश्य 900 से अधिक तकनीकी उपयोग परिदृश्यों का प्रदर्शन करना, 100 से अधिक सत्र और चर्चाएं आयोजित करना है, जिसमें 600 से अधिक वैश्विक और भारतीय वक्ता शामिल होंगे।    

पीएम मोदी से मिलीं मुख्यमंत्री आतिशी, CM बनने के बाद पहली बार मुलाकात

 नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि दोंनों नेताओं के बीच यह शिष्टाचार भेंट थी। दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने के बाद आतिशी पहली बार पीएम मोदी से मिली हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से तस्वीर साझा करते हुए दोनों नेताओं की मुलाकात की जानकारी दी गई। दिल्ली सरकार की ओर से अभी यह नहीं बताया गया है कि आतिशी की प्रधानमंत्री से क्या बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच यह एक औपचारिक, शिष्टाचार मुलाकात थी। कथित शराब घोटाले में कई महीने जेल में रहने के बाद बाहर आकर अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी जगह आतिशी को मुख्यमंत्री बनाया गया है। इससे पहले आतिशी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से भी मुलाकात की थी। दरअसल, आतिशी ने 21 सितंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री की कमान संभाली थी. शपथ लेने के साथ ही वह दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री बन गई थीं. एक खास बात यह भी है कि वह राष्ट्रीय राजधानी में सीएम पद संभालने वाली तीनों महिला मुख्यमंत्रियों में से सबसे कम उम्र की महिला सीएम हैं. आतिशी को उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के आठवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई थी. आतिशी की नई मंत्रिपरिषद में सबसे पहले सौरभ भारद्वाज ने शपथ ली थी, उसके बाद गोपाल राय, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन और दिल्ली कैबिनेट में नए सदस्य मुकेश अहलावत ने शपथ ली थी. हालांकि, आतिशी का कार्यकाल संक्षिप्त होगा, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं. जमानत मिलने के बाद केजरीवाल ने दिया था इस्तीफा बता दें कि कथित शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के 2 दिन बाद यानी 15 सितंबर को केजरीवाल आम आदमी पार्टी (AAP) के मुख्यालय पहुंचे थे. तब केजरीवाल ने दो दिन बाद इस्तीफे का ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि मैं तब तक सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा, जब तक जनता अपना फैसला नहीं सुना देती कि केजरीवाल ईमानदार हैं. केजरीवाल ने शपथ लेकर किया था आतिशी के नाम का ऐलान AAP के चीफ अरविंद केजरीवाल ने कहा था,’मैं हर घर और गली में जाऊंगा और जब तक जनता का फैसला नहीं मिल जाता, तब तक सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा. इसके बाद सीएम पद के लिए आतिशी के नाम का ऐलान हुआ था. पार्टी की विधायक दल की मीटिंग में आतिशी को सीएम बनाने का फैसला लिया गया था.’  

PM मोदी के पास वैश्विक राजनेता बनने का मौका, Russia Ukraine War को शांत कराने में सक्षम – फरीद जकारिया

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन युद्ध पर विदेश नीति के जानकार फरीद जकारिया ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यूक्रेन जंग भारत के लिए बड़ा मौका है। भारत को शांतिदूत बनकर अपनी कूटनीतिक ताकत दिखानी चाहिए। जकारिया ने पीएम मोदी की वैश्विक छवि की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम मोदी रूस-यूक्रेन युद्ध में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। ‘मोदी निभा सकते हैं बड़ी भूमिका’ एक न्यूज चैनल से बात करते हुए जकारिया ने कहा कि दुनिया में बहुत कम नेता ऐसे हैं जो रूस और यूक्रेन दोनों से प्रभावी ढंग से बात कर सकते हैं। उन्होंने सिर्फ दो नाम लिए, पहला तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन और दूसरा प्रधानमंत्री मोदी। जकारिया ने कहा कि यूक्रेन में जंग थमी हुई है। बहुत कम लोग ऐसे हैं जिनके पास दोनों पक्षों से बात करने की विश्वसनीयता है… अगर प्रधानमंत्री मोदी खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करते हैं, तो मुझे लगता है कि वह बहुत रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं… मेरा मानना है कि एर्दोगन से भी ज्यादा मोदी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। ‘वैश्विक राजनेता बनने का मौका’ जकारिया ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थता करना पीएम मोदी के लिए एक वैश्विक राजनेता बनने का शानदार मौका है। उन्होंने माना कि भारत पारंपरिक रूप से विदेश नीति के मामलों में तटस्थ रहता है। लेकिन, अगर भारत चाहे तो वह एक बहुत ही व्यावहारिक और रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। ‘भारत की छवि होगी मजबूत’ जकारिया के अनुसार, ऐसा कदम न केवल वैश्विक कूटनीति के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को भी ऊंचा उठाएगा। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए पीएम मोदी को दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की चुनौतीपूर्ण भूमिका निभानी होगी, जो अक्सर मुश्किलों और आलोचनाओं से भरी होती है। जकारिया ने कहा, ‘अगर मोदी चाहें तो यह उनके लिए एक वैश्विक राजनेता बनने का शानदार मौका है।’ उन्होंने शांति की तलाश में भारतीय नेता के कूटनीतिक कौशल और उनके मंच को महत्वपूर्ण बताया। रूस और यूक्रेन दोनों में अच्छी साख जकारिया के बयान से साफ है कि भारत के पास रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में अहम भूमिका निभाने की क्षमता है। पीएम मोदी की रूस और यूक्रेन दोनों से अच्छी साख है। ऐसे में, वह शांति वार्ता शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, यह देखना होगा कि भारत इस चुनौती को स्वीकार करता है या नहीं। अगर भारत मध्यस्थता करने का फैसला करता है, तो यह एक ऐतिहासिक कदम होगा। इससे ना सिर्फ युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की छवि भी मजबूत होगी।

दुनिया में संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं बल्कि संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान से होगा -पीएम मोदी

वियेनतिएन/नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया में संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं बल्कि संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करके किया जा सकता है। पीएम मोदी ने यह बात 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) के अपने संबोधन में कही। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “ग्लोबल साउथ के देश, दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव झेल रहे हैं। हर कोई जल्द से जल्द शांति और स्थिरता की बहाली चाहता है, चाहे वह यूरेशिया हो या पश्चिम एशिया।” प्रधानमंत्री ने कहा: “हमारा दृष्टिकोण विकासवादी होना चाहिए न कि विस्तारवादी।” सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्हें मेजबान और इनकमिग चेयर के बाद पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित करने के लिए कहा गया। आसियान में भारत की भूमिका और महत्व को मान्यता देते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया। वे वहां मौजूद एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने सबसे अधिक संख्या में ईएएस (19 में से नौ) में भाग लिया था। टाइफून यागी के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमने ऑपरेशन सद्भाव के माध्यम से मानवीय मदद प्रदान की। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दक्षिण चीन सागर की शांति, सुरक्षा और स्थिरता पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हित में है। समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के तहत समुद्री गतिविधियों की वकालत करते हुए उन्होंने एक मजबूत और प्रभावी आचार संहिता का सुझाव दिया जो क्षेत्रीय देशों की विदेश नीति पर प्रतिबंध नहीं लगाए। म्यांमार की स्थिति पर उन्होंने कहा कि भारत म्यांमार की स्थिति के प्रति आसियान के दृष्टिकोण का समर्थन करता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक पड़ोसी देश के रूप में, “हम अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करना जारी रखेंगे।” उन्होंने लोकतंत्र को बहाल करने के लिए मानवीय सहायता और उचित कदम उठाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा, “हमारा मानना है कि इसके लिए म्यांमार को शामिल किया जाना चाहिए, अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए।” प्रधानमंत्री मोदी ने साइबर, समुद्र और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने की भी मांग की। पीएम मोदी ने सम्मेलन में शामिल देशों को नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की प्रतिबद्धता को पूरा करने की जानकारी दी। साथ ही इन देशों को जून में नालंदा में आयोजित होने वाले उच्च शिक्षा प्रमुखों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। अगला पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन मलेशिया में आयोजित किया जाएगा। मोदी ने सैन्य संघर्षों के कारण ग्लोबल साउथ पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूरोप और पश्चिमी एशिया में चल रहे सैन्य संघर्षों के कारण ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने शुक्रवार को दोहराया कि समस्याओं का समाधान रणभूमि से नहीं निकल सकता है इसलिए मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए, संवाद एवं कूटनीति के रास्ते पर आना होगा। मोदी ने यहां 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में विस्तारवाद की नीति पर भी कड़ा प्रहार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि समस्याओं के समाधान के प्रयासों में संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों का आदर करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में, “टाइफून यागी” से प्रभावित लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं और कहा कि इस कठिन घड़ी में, ऑपरेशन सद्भाव के माध्यम से भारत ने मानवीय सहायता उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सदैव आसियान एकता और केंद्रीयता का समर्थन किया है। भारत के हिन्द प्रशांत विज़न और क्वाड सहयोग के केंद्र में भी आसियान है। भारत के “हिन्द प्रशांत महासागरीय पहल” और “हिन्द प्रशांत पर आसियान के दृष्टिकोण” के बीच गहरी समानताएं हैं। एक स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी, समृद्ध और नियम आधारित हिन्द प्रशांत, पूरे क्षेत्र की शांति और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। दक्षिण चीन सागर की शांति, सुरक्षा और स्थिरता पूरे हिन्द प्रशांत क्षेत्र के हित में है। मोदी ने कहा, हमारा मानना है कि समुद्री गतिविधियाँ यूएनक्लोस के अंतर्गत संचालित होनी चाहिए। नौवहन और हवाई परिवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है।एक ठोस और प्रभावी आचार संहिता बनायी जानी चाहिए। और इसमें क्षेत्रीय देशों की विदेश नीति पर अंकुश नहीं लगाए जाने चाहिए। हमारा रुख विकासवाद का होना चाहिए, न कि विस्तारवाद का। उन्होंने कहा कि म्यांमार की स्थिति पर हम आसियान दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं। हम पांच सूत्रीय सहमति का भी समर्थन करते हैं। साथ ही, हमारा मानना है कि मानवीय सहायता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।और लोकतंत्र की बहाली के लिए उपयुक्त कदम भी उठाए जाने चाहिए। हमारा मत है कि, इसके लिए, म्यांमार को अलग थलग नहीं, बल्कि साथ में रखना होगा। एक पड़ोसी देश के नाते, भारत अपना दायित्व निभाता रहेगा। मोदी ने कहा, विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों का सबसे नकारात्मक प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर हो रहा है।सभी चाहते हैं कि चाहे यूरेशिया हो या पश्चिम एशिया, जल्द से जल्द शांति और स्थिरता की बहाली हो।” उन्होंने कहा,” मैं बुद्ध की धरती से आता हूँ, और मैंने बार-बार कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है। समस्याओं का समाधान रणभूमि से नहीं निकल सकता। संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों का आदर करना आवश्यक है। मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए, संवाद एवं कूटनीति को प्रमुखता देनी होगी। विश्वबंधु के दायित्व को निभाते हुए, भारत इस दिशा में हर संभव योगदान करता रहेगा।” प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इसका सामना करने के लिए, मानवता में विश्वास रखने वाली ताकतों को एकजुट होकर काम करना ही होगा। और, साइबर, समुद्र और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बल भी देना होगा। उन्होंने कहा कि नालंदा का पुनरुद्धार, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दी गयी हमारी प्रतिबद्धता थी।इस वर्ष जून में, नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन करके हमने इसे पूरा किया है। वह, यहाँ उपस्थित सभी देशों को नालंदा में होने वाले उच्च शिक्षा के प्रमुखों के सम्मेलन के लिए आमंत्रित करते हैं।    

एशिया शिखर सम्मेलन एक मुक्त, खुला, समावेशी, पारदर्शी, नियम आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने का मंच है- PM मोदी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाओस की यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन(EAS) को संबोधित करते हुए हिंद प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंच से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर काफी जोर दिया। इससे पहले 4 नवंबर, 2019 की बात है, जब इसी अंतरराष्ट्रीय मंच से पीएम मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभर रहे मतभेदों पर बात की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक मुक्त, खुला, समावेशी, पारदर्शी, नियम आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने का तार्किक मंच है, जहां संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता और समुद्री कानूनों के पालन पर जोर दिया जाता है। उस वक्त पीएम ने’इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI)’ का प्रस्ताव दिया था, जिससे हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र को सुरक्षित, भयमुक्त और स्थिर बनाया जा सके और इसके लिए इच्छुक राष्ट्रों के बीच सहयोगी ढांचा बनाया जा सके। जानते हैं मोदी के उसी भयमुक्त समुद्री क्षेत्र के विजन के बारे में, यह इतना जरूरी क्यों है। यह भी जानेंगे कि आखिर ये मंच किस तरह का है। समुद्री सुरक्षा को लेकर क्या हैं मोदी के 7 सूत्र राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव रंजन गिरि कहते हैं कि 4 नवंबर, 2019 को भारत ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में अपने प्रस्ताव में समुद्री सहयोग और सहभागिता के 7 मूल पहलुओं की पहचान की थी, जो रणनीतिक रूप से मोदी के 7 तीर भी हैं। ये हैं-समुद्री सुरक्षा, समुद् इकोसिस्टम, समुद्री रिसोर्स, क्षमता निर्माण और संसाधनों का बंटवारा, आपदा जोखिम में कमी और मेनेजमेंट, विज्ञान, प्रौद्योगिकी सहयोग और कारोबारी कनेक्टिविटी व समुद्री परिवहन। पीएम मोदी के यही सूत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को दबदबे को कम कर सकते हैं। क्या है पूर्वी एशिया-शिखर सम्मेलन पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन का गठन 2005 में किया गया था। यह हिंद प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर रणनीतिक बातचीत और सहयोग के लिए 18 देशों का एक मंच है। इस मंच का विचार सबसे पहले 1991 में तत्कालीन मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर बिन मुहम्मद ने दिया था। उन्होंने उस वक्त पूर्वी एशिया समूह बनाने की बात की थी। पहला पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन 14 दिसंबर, 2005 को कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित किया गया था। भारत इस मंच के फाउंडर मेंबर में शामिल भारत पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के संस्थापक सदस्यों में शामिल है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन (ASEAN) के 10 सदस्य देश शामिल हैं-ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के साथ ही 8 सदस्य देश ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, भारत, न्यूज़ीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका है। दुनिया की जीडीपी में 58 फीसदी हिस्सेदारी डॉ. राजीव रंजन गिरि के अनुसार, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के सदस्य विश्व की लगभग 54% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इनकी 58% भागीदारी है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक आसियान केंद्रित मंच है। इसकी अध्यक्षता केवल एक आसियान सदस्य द्वारा की जा सकती है। पूर्वी एशिया-शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कौन करता है ASEAN का अध्यक्ष EAS का भी अध्यक्ष होता है तथा प्रतिवर्ष 10 ASEAN सदस्य देशों के मध्य बारी-बारी से इसकी अध्यक्ष की जाती है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं-पर्यावरण और ऊर्जा, शिक्षा, वित्त, वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, आसियान देशों के मध्य संपर्क, आर्थिक व्यापार और सहयोग, खाद्य सुरक्षा और समुद्री सहयोग। क्या यह अमेरिका-यूरोप के बाद तीसरा ध्रुव भारतीय वैश्विक परिषद में रिसर्चर रहे डॉ. टेम्जेनमरेन एओ के एक लेख ‘हिंद-प्रशांत और भू-राजनीतिक क्षेत्र में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की भूमिका’ में कहा गया है कि 2021 में EAS सदस्यों ने दुनिया की करीब 54% आबादी का प्रतिनिधित्व किया। इसके सदस्य देशों ने अनुमानित रूप से 57.2 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का कारोबार किया, जो वैश्विक जीडीपी का 59.5% है। यह मज़बूत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं वाला क्षेत्र है। इसे अमेरिका और यूरोप के बाद विश्व अर्थव्यवस्था का तीसरा ध्रुव माना जाता है। भारत, जापान, चीन और कोरिया वर्ल्ड इकोनॉमी में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में 4 प्रमुख आर्थिक भागीदार देश जापान, चीन, भारत और कोरिया 12 उच्च रैंकिंग वाली वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। EAS देशों के बीच वित्तीय और मौद्रिक सहयोग इतना ज्यादा है कि उनका संयुक्त विदेशी मुद्रा भंडार 3 ट्रिलियन डॉलर के पार जा चुका है। समंदर पर है चीन की टेढ़ी नजर, भारत से दुश्मनी भारत-जापान समेत चीन का हिंद प्रशांत क्षेत्र में तकरीबन हर देश के साथ कुछ न कुछ विवाद बना हुआ है। दरअसल, चीन के मंसूबे नापाक हैं। उसकी दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की टेढ़ी नजर है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में चीन कारोबार और निवेश के क्षेत्र में भी भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है। समुद्री सुरक्षा समेत मुक्त कारोबार पर भी जोर डॉ. टेम्जेनमरेन एओ कहते हैं कि EAS का मकसद समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ समंदर में मुक्त कारोबारी क्षेत्र विकसित करना भी है। यही वजह है कि पीएम मोदी समंदर को भयमुक्त बनाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि समुद्री सुरक्षा होने से हिंद-प्रशांत देशों के बीच समुद्री कारोबार ज्यादा बढ़ेगा। दरअसल, इस इलाके में क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सैन्य बजट में बढ़ोतरी शांति, सुरक्षा और समृद्धि के व्यापक मकसद को कमजोर करता है। भारत के लिये EAS की क्या अहमियत है? भारत के लिए EAS इसके तेजी से बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक ताकत को मान्यता देने वाला मंच है। ASEAN और अन्य बहुपक्षीय देशों के साथ बहुआयामी संबंध बनाने और द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिये भारत ने अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policies) पर बल दिया है जिसके लिये EAS महत्त्वपूर्ण साबित होगा। मुद्री क्षेत्र में भारत बन सकता है बड़ा पॉवर दक्षिण चीन सागर में चीन की दबंगई और उसके बढ़ते निवेश की प्रकृति ने आसियन देशों में भारत को एक ऐसी संभावित शक्ति के रूप में देखने के लिये प्रेरित किया है जो चीन को संतुलित कर सकता है। भारत समुद्री क्षेत्र में बड़ा पॉवर बन सकता है। भारत की शक्ति सेवा क्षेत्र और सूचना-प्रौद्योगिकी में है, वहीं जापान के पास एक मजबूत पूंजी आधार भी है।

बांग्लादेश में यशोरेश्वरी काली मंदिर से देवी का मुकुट हुआ चोरी, पीएम मोदी ने किया था भेंट, घटना पर भारत सख्त

ढाका बांग्लादेश के जेशोरेश्वरी मंदिर से मां काली का मुकुट चोरी हो गया है। चांदी का बना सोने की परत वाला यह मुकुट भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर को गिफ्ट किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2021 में जब बांग्लादेश गए थे तो उन्होंने जेशोरेश्वरी मंदिर का दौरा भी किया था। इस दौरान उन्होंने ये मुकुट भेंट किया था। उपहार में दिया गया देवी काली का ये मुकुट कथित तौर पर चोरी हो गया है। इस घटना पर भारत ने सख्त रुख दिखाया है। ढाका में भारतीय उच्चायोग ने बयान जारी करते हुए इस पर चिंता जताई है। उच्चायोग ने मुकुट को बरामद करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के मुताबिक, मंदिर के पुजारी और सफाई कर्मचारियों ने पाया कि देवी काली के सिर से मुकुट गायब है। बांग्लादेशी पुलिस ने चोरी की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि अपराधी की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है और जल्दी ही चोर को पकड़ लिया जाएगा। जेशोरेश्वरी मंदिर की हिन्दुओं में मान्यता पीढ़ियों से मंदिर की देखभाल कर रहे परिवार की सदस्य ज्योति चट्टोपाध्याय ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि मुकुट चांदी से बना था और उस पर सोने की परत चढ़ी थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने मार्च 2021 में जेशोरेश्वरी मंदिर को मुकुट भेंट करते हुए मंदिर में एक बहुउद्देश्यीय सामुदायिक हॉल का निर्माण करने का भी ऐलान किया था। जेशोरेश्वरी मंदिर की बांग्लादेश के अलावा भारत और दूसरे पड़ोसी देशों में भी काफी मान्यता है। ये भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों में फैले 51 शक्तिपीठों में से एक के रूप में प्रतिष्ठित है। यह मंदिर, भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल, ईश्वरीपुर, सतखिरा में स्थित है। माना जाता है कि इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था। अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा पर सवाल बांग्लादेश में देवी का मुकुट चोरी होने का ये मामला ऐसे समय हुआ है, जब देश में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सवालों के घेरे में है। इस साल अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की एक श्रंखला देखी गई है। हालांकि मौजूदा चोरी में अभी तक इस तरह के किसी एंगल की बात पुलिस ने नहीं की है। 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है जेशोरेश्वरी मंदिर पीढ़ियों से मंदिर की देखभाल करने वाले परिवार के सदस्य ज्योति चट्टोपाध्याय ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि यह मुकुट चांदी से बना था और इस पर सोने की परत चढ़ी हुई थी। चोरी हुआ मुकुट भक्तों के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, जेशोरेश्वरी मंदिर को भारत और पड़ोसी देशों में फैली 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।   ऐसा है मंदिर का इतिहास माना जाता है कि सतखीरा के ईश्वरीपुर में स्थित इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अनारी नामक ब्राह्मण ने करवाया था। उन्होंने जशोरेश्वरी पीठ के लिए 100 दरवाजों वाला मंदिर बनवाया था। बाद में 13वीं शताब्दी में लक्ष्मण सेन ने इसका जीर्णोद्धार करवाया और अंततः राजा प्रतापादित्य ने 16वीं शताब्दी में मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने कहा था कि भारत मंदिर में एक बहुउद्देशीय सामुदायिक हॉल का निर्माण कराएगा। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय लोगों के लिए सामाजिक, धार्मिक और शैक्षिक आयोजनों के लिए उपयोगी होगा और साथ ही, यह चक्रवात जैसी आपदाओं के समय सभी के लिए आश्रय का काम भी करेगा।

फॉर्टिफाइड चावल स्‍कीम के लिए 17,082 करोड़ रुपये खर्च करेगी मोदी सरकार

नई दिल्‍ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एनीमिया और पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए 17,082 करोड़ रुपये की लागत वाली एक स्‍कीम को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत फोर्टिफाइड चावल को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, 2019 से 2021 के बीच एनीमिया भारत में एक बड़ी समस्या बनी हुई है। यह बच्चों, महिलाओं और पुरुषों सभी को प्रभावित करता है। आयरन की कमी के अलावा, विटामिन बी12 और फोलिक एसिड जैसी अन्य विटामिन और खनिज की कमी भी बनी रहती है। इससे लोगों के स्वास्थ्य और उत्पादकता पर असर पड़ता है। दुनिया भर में एनीमिया और कुपोषण से निपटने के लिए खाद्य पदार्थों को फोर्टिफाइड किया जाता है। भारत में 65% लोग चावल खाते हैं। ऐसे में पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए चावल एक आदर्श माध्यम है। चावल फोर्टिफिकेशन में FSSAI की ओर से निर्धारित मानकों के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों (आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी 12) से समृद्ध फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) को सामान्य चावल में मिलाया जाता है। इसके अलावा कैबिनेट ने दो और महत्‍वपूर्ण फैसले लिए हैं। इनमें गुजरात में नेशनल मेरिटाइम हेरिटेज कॉम्‍प्‍लेक्‍स का विकास और राजस्थान तथा पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार शामिल हैं। नेशनल मेरिटाइम हेरिटेज कॉम्‍प्‍लेक्‍स के विकास को हरी झंडी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुजरात के लोथल में नेशनल मेरिटाइम हेरिटेज कॉम्‍प्‍लेक्‍स (NMHC) के विकास को मंजूरी दे दी है। यह दो चरणों में पूरा होगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पहले चरण (1A) में 1,238.05 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें प्रमुख बंदरगाह, रक्षा मंत्रालय (भारतीय नौसेना) और संस्कृति मंत्रालय का योगदान होगा। मंत्रिमंडल ने चरण 1B और चरण 2 के लिए भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इनके लिए धन स्वैच्छिक संसाधनों से जुटाया जाएगा। चरण 1B में 266.11 करोड़ रुपये की लागत से लाइट हाउस संग्रहालय का निर्माण शामिल है। इसके लिए धन लाइटहाउस और लाइटशिप महानिदेशालय की ओर से दिया जाएगा। इस परियोजना से 15,000 प्रत्यक्ष और 7,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय समुदायों, पर्यटकों, शोधकर्ताओं, सरकारी निकायों, शिक्षण संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों, पर्यावरण समूहों और व्यवसायों को लाभ होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में 2,280 किमी सड़क का निर्माण इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राजस्थान और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में 2,280 किलोमीटर सड़कों के निर्माण को भी मंजूरी दी है। इसमें 4,406 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित करने के अनुरूप है। इसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देना, यात्रा में सुधार करना और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ बेहतर संपर्क सुनिश्चित करना है। यह पहल इन सीमावर्ती क्षेत्रों को बेहतर सड़कों, दूरसंचार संपर्क, पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सुविधाओं वाले जीवंत गांवों में बदलने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

पीएम मोदी 10-11 अक्तूबर को करेंगे लाओस का दौरा; 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 से 11 अक्टूबर तक लाओस की दो दिवसीय यात्रा करेंगे और इस दौरान वह 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने यह जानकारी दी। लाओस, दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) का वर्तमान अध्यक्ष देश है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि लाओस के अपने समकक्ष सोनेक्से सिफानदोन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 10-11 अक्टूबर को लाओस की राजधानी विएंतियाने का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरान मोदी लाओस की मेजबानी में होने जा रहे 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मंत्रालय के अनुसार, दोनों शिखर सम्मेलनों के दौरान मोदी के द्विपक्षीय बैठकें करने की भी उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत में इस वर्ष ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक दशक पूरा हो रहा है। आसियान के साथ संबंध ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हमारे हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण का केंद्रीय स्तंभ हैं।’’ मंत्रालय ने कहा कि आसियान-भारत शिखर सम्मेलन ‘‘हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी’’ के माध्यम से भारत-आसियान संबंधों की प्रगति की समीक्षा करेगा और सहयोग की खातिर भविष्य की दिशा तय करेगा। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘दक्षिणी एशिया और पूर्वी एशिया के कुछ देशों का मंच पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) क्षेत्र में रणनीतिक विश्वास का माहौल बनाने में योगदान देता है। यह भारत सहित ईएएस में भाग लेने वाले देशों के नेताओं को क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करता है।’’  

राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत को मालदीव में ‘रक्षा प्लेटफॉर्म और संपत्ति’ की तैनाती की अनुमति देने पर सहमति जताई

माले  मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत को मालदीव में ‘रक्षा प्लेटफॉर्म और संपत्ति’ की तैनाती की अनुमति देने पर सहमति जताई है। मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने भारत से सैनिकों को निकालने को कहा था, अब कुछ ही महीने के बाद उनकी सरकार ने भारत के रेडार को देश में लगाने की मंजूरी दी है। समझौते के तहत भारत मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बल की निगरानी क्षमता को बढ़ाने में भी माले की सहायता करेगा। इसके लिए नई दिल्ली से माले को ‘रेडार सिस्टम और अन्य उपकरण’ दिए जाएंगे। सोमवार को पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू की मुलाकात के बाद, भारत ने मालदीव को आर्थिक संकट और कर्ज चुकौती से उबारने में मदद देने के लिए भी सहमति जताई। मोदी-मुइज्जू में रक्षा सहयोग पर चर्चा दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि भारत मालदीव की क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करेगा ताकि उसके विशाल एक्सक्लूसिव आर्थिक क्षेत्र को समुद्री सुरक्षा के लिए पारंपरिक और गैर-पारंपरिक चुनौतियों से बचाया जा सके। पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने और मुइज्जू ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की है। ‘हम मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बलों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में अपना सहयोग जारी रखेंगे।’ भारत का चीन को संदेश मालदीव में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे चीन को भी भारत ने संदेश दे दिया है। पीएम मोदी ने कहा, ‘हम हाइड्रोग्राफी और आपदा प्रतिक्रिया में अपना सहयोग बढ़ाएंगे।’ दोनों नेताओं की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि नई दिल्ली मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बल की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए ‘रक्षा प्लेटफार्मों और परिसंपत्तियों के प्रावधान’ के साथ-साथ मालदीव सरकार की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अपनी समुद्री और सुरक्षा आवश्यकताओं को आगे बढ़ाने में माले की सहायता करेगी। भारतीय सैनिकों की वापसी का मामला मुइज्जू ने पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव से पहले मालदीव में इंडिया आउट अभियान चलाया था। दरअसल भारत ने मालदीव को डोर्नियर विमान और दो एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर दिए थे। इनके संचालन के लिए भारत ने कुछ सैन्य कर्मियों को तैनात किया था। मुइज्जू ने चुनाव में वादा किया था कि वे भारत से अपने सभी सैन्य कर्मियों को वापस बुलाने को कहेंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने भारत को इस साल 10 मई तक भारत से अपने सभी सैन्य कर्मियों को वापस बुलाने के लिए कहा, जिसके बाद भारत ने नागरिक कर्मियों की तैनाती की थी।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व को हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की जनता ने आशीर्वाद दिया: विष्णुदत्त शर्मा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक विजय और जम्मू-कश्मीर में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए हरियाणा एवं जम्मू-कश्मीर के कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कार्यपद्धति से हरियाणा में तीसरी बार भाजपा की सरकार बन रही है। असल में यह विधानसभा चुनाव कांग्रेस का नहीं, राहुल गांधी के फेल होने का चुनाव था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व को हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की जनता ने अपना आशीर्वाद दिया है। हरियाणा में भाजपा की जीत और जम्मू-कश्मीर में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन ने बता दिया कि जनता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री शर्मा ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं का मुंह मीठा कराने के साथ आतिशबाजी कर जश्न मनाया। जनता विकास को पसंद करती है, भाजपा के विकास कार्यों पर जनता को भरोसा-डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की हरियाणा सरकार ने 10 सालों में बहुत अच्छा कार्य किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कार्यपद्धति का ही परिणाम है कि हरियाणा में तीसरी बार भाजपा की सरकार बन रही है। मैं सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई देता हूं। मैंने खुद भी हरियाणा चुनाव प्रचार में पहुंचा था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि असल में यह चुनाव कांग्रेस का नहीं था, बल्कि राहुल गांधी के फेल होने का था। भाजपा ने विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाया है। हम सब मिलकर विकास की बात करते हैं। जनता भी विकास की बात को ही पसंद करती है और इसलिए हरियाणा में कमल खिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों पर जनता ने भरोसा जताया है। गरीब कल्याण के कार्यों को जनता ने आशीर्वाद दिया है – श्री विष्णुदत्त शर्मा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि आज का दिन भाजपा के लिए ऐतिहासिक दिन है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की कुशल रणनीति और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी के साथ कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत व परिश्रम से यह परिणाम आए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व को जनता ने आशीर्वाद दिया है। भाजपा के बूथ-बूथ के कार्यकर्ताओं ने सजग प्रहरी की तरह कार्य किया, इसी का परिणाम है कि हम हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बना रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की कुशल रणनीति और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी के साथ कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत व परिश्रम से यह परिणाम आए हैं। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी एवं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी का आभार व्यक्त करते हुए मध्यप्रदेश भाजपा के कार्यकर्ताओं की ओर से हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के सभी कार्यकर्ताओं व पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। हरियाणा की जनता ने विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार भाजपा पर विश्वास व्यक्त किया है। हरियाणा के चुनाव परिणाम और जम्मू-कश्मीर में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन से स्पष्ट हो गया कि जनता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के करीब कल्याण के कार्यों को अपना आशीर्वाद दिया है। देश की जनता प्रधानमंत्री जी के साथ है।   प्रदेश कार्यालय में मुंह मीठा कर की गई आतिशबाजी हरियाणा में भाजपा की ऐतिहासिक विजय और जम्मू-कश्मीर में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में आतिशबाजी कर जश्न मनाया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कार्यकर्ताओं का मुंह मीठा कराया। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को पार्टी के शानदार प्रदर्शन पर बधाई दी। इस अवसर पर वरिष्ठ नेता श्री शैलेन्द्र शर्मा, प्रदेश मंत्री श्री रजनीश अग्रवाल, प्रदेश कार्यालय मंत्री डॉ. राघवेन्द्र शर्मा एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री अजय धवले सहित कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

संवैधानिक पद पर प्रधानमंत्री Modi के 23 साल हुए पूरे अमित शाह ने दी बधाई

भोपाल संवैधानिक पद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 23 साल पूरे होने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और  CM मोहन यादव व उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें बधाई दी। सीएम योगी ने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में बिना थके, बिना रुके, बिना डिगे आपकी 23 वर्षों की लोक साधना में आस्था, अस्मिता, आधुनिकता, अंत्योदय और अर्थव्यवस्था को संरक्षण और संवर्धन मिलने के साथ ही हर स्तर पर वंचित को वरीयता प्राप्त हुई है। मां भारती को परम वैभव तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करते 23 वर्षों की यशस्वी यात्रा के लिए प्रधानमंत्री को हार्दिक बधाई। बता दें कि नरेंद्र मोदी 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। वह 13 साल तक गुजरात के सीएम रहे। साल 2014 में लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। इसी साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में तीसरी बार चुनाव जीतकर नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत’ के स्वप्नदृष्टा, 140 करोड़ देश वासियों की सुख, शांति और समृद्धि के लिए अविराम साधनारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां भारती की सेवा और लोक-कल्याण को समर्पित गौरवशाली 23 वर्ष आज पूर्ण हो गए हैं। मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के रूप में बिना थके, बिना रुके, बिना डिगे आपकी 23 वर्षों की लोक साधना में आस्था, अस्मिता, आधुनिकता, अंत्योदय और अर्थव्यवस्था को संरक्षण और संवर्धन मिलने के साथ ही हर स्तर पर वंचित को वरीयता प्राप्त हुई है। उनकी प्रत्येक नीति और हर योजना ने वंचितों और गरीबों के समग्र उत्थान को नए आयाम प्रदान किए हैं।” उन्होंने आगे लिखा,”स्वामी समर्थ रामदास की ‘उपभोग शून्य स्वामी’ की संकल्पना और चाणक्य नीति सूत्र के ‘राजा प्रथमोसेवक’ की परिभाषा को साकार कर रहे प्रधानमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में ‘नया भारत’ आज वैश्विक महाशक्ति बनने के मार्ग पर सतत अग्रसर है। वे सच्चे अर्थों में आधुनिक भारत में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के वास्तुकार हैं। उनका जीवन लोकतंत्र की जीवंत पाठशाला है। सेवा, सुशासन और सुरक्षा को समर्पित प्रधानमंत्री जी के प्रेरणादायक 23 वर्ष हर जनप्रतिनिधि के लिए उत्कृष्ट मार्गदर्शक और पाथेय हैं। मां भारती को परम वैभव तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करते 23 वर्षों की यशस्वी यात्रा के लिए प्रधानमंत्री जी को हार्दिक बधाई।” सीएम धामी ने एक्स पोस्ट पर लिखा, ”आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में 23 वर्षों की यात्रा पूरी हुई है। इस समयावधि के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में उनके दृष्टिकोण और प्रधानमंत्री के रूप में जन कल्याणकारी निर्णयों से करोड़ों देशवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। आपके सशक्त नेतृत्व में हमने न केवल आर्थिक विकास के नए आयाम देखे हैं अपितु सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में राष्ट्र ने नए सोपान गढ़े हैं। मुझे विश्वास है कि आपके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हमारा देश ‘विकसित राष्ट्र’ की संकल्पना को अवश्य साकार करेगा।”    

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