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मध्यप्रदेश में पहली बार 1000 ड्रोन के माध्यम से आकर्षक ड्रोन-शो की प्रस्तुति दी गई : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विक्रमोत्सव-2025 विक्रमोत्सव का आयोजन एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को करता है स्थापित: राज्यपाल पटेल उज्जैन में विक्रमादित्य के नाम से स्थापित हो न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश-राजस्थान में टूरिस्ट सर्किट बनाने की आवश्यकता : केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. मेघवाल राज्यपाल पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री डॉ. मेघवाल ने विक्रमोत्सव में प्रदेशव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया मध्यप्रदेश में पहली बार 1000 ड्रोन के माध्यम से आकर्षक ड्रोन-शो की प्रस्तुति दी गई प्रसिद्ध गायिका सुश्रेया घोषाल ने दी में मनमोहक प्रस्तुति सिंहस्थ-गान हुआ लांच उज्जैन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारतीय नववर्ष विक्रम सम्वत् 2082 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ अवसर पर उज्जैन में विक्रमोत्सव के प्रसंग में आयोजित कार्यक्रमों में प्रदेशवासियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी आभार ज्ञापित करता हूँ। जिन्होंने दुनिया की पहली वैदिक घड़ी और भगवान महाकाल के अद्भुत महालोक की सौगतों से महाराजा विक्रमादित्य की उज्जयिनी के गौरव और वैभव की पुनर्स्थापना की है। विक्रमोत्सव का आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं के प्रकटीकरण के लिए हमारी गौरवशाली विरासत और वर्तमान के विकास का उत्सव है। यह दिन हमारे लिए एक नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हमारे पूर्वजों के योगदान को याद करने का अवसर है। राज्यपाल पटेल रविवार को उज्जैन में विक्रमोत्सव अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री डॉ. अर्जुनराम मेघवाल भी मौजूद रहे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि नववर्ष का यह पर्व विविध स्वरूपों में मनाया जाने वाला ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को स्थापित करता है। इसे कहीं ‘गुड़ी पड़वा’ तो कहीं ‘चैती चांद’, कहीं ‘युगादि’ तो कहीं ‘उगादि’ और कहीं ‘नवरोज अगदु’ के अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। इसी के साथ नौ दिन आरोग्य, साधना और कायाकल्प के नवरात्र का भी आरंभ होता है। राज्यपाल ने कहा कि विक्रम सम्वत् वर्ष का प्रवर्तन भारतीय सम्राट विक्रमादित्य के द्वारा विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर, उनके राज्यभिषेक के दिन से होता है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि नव सम्वत्सर की तिथि सृष्टि निर्माण की तिथि है, जिसका निर्धारण संपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ हुआ है। वास्तव मे भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन ऋतु परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को सक्षम बनाने का समय है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि भारतीय नववर्ष प्रकृति के संरक्षण, संवर्धन और निर्माण की प्रेरणा देता है, जिसमें सृष्टि, संस्कृति और समाज का संगम है। ऋतुकाल संधि के इन दिनों में नवचेतना, नवजागृति का संदेश है। इसे मनाने की परंपरा व्यक्ति, परिवार और समाज, तीनों के स्वस्थ जीवन और समृद्धि को ध्यान में रखकर शुरू की गई। यह हम सब प्रदेशवासियों के लिये गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय नववर्ष विक्रम सम्वत् उज्जयिनी से शुरू हुआ है। सम्राट विक्रमादित्य का सारी दुनिया में न्यायप्रियता, ज्ञानशीलता, धैर्य, पराक्रम, पुरुषार्थ, और वीरता जैसी विशेषताओं के लिए स्मरण किया जाता है।  राज्यपाल ने उत्सव में विविध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रमों के साथ सम्राट विक्रमादित्य के समूचे व्यक्तित्व, कृतित्व और विशेषताओं को परिचित कराने के राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई और मंगलकामनाएं दी। उज्जैन में  न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था सम्राट विक्रमादित्य के नाम से प्रारंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन नगरी सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल की नगरी है। उज्जयिनी वह नगरी है जिसमें योगीराज श्रीकृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की तो अनेक राजा महाराजाओं ने अपने न्याय प्रिय शासन से दुनिया को न्याय की ओर मोड़ा। आज का दृश्य देख कर लग रहा है मानो आज सम्राट विक्रमादित्य स्वयं इस नगरी में पधारे हैं। हम सबके लिए यह सौभाग्य की बात है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में श्रीमहाकाल महालोक का निर्माण हुआ और भगवान महाकालेश्वर की नगरी का वैभव और बड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनका शासन काल रामराज्य की याद दिलाता है। हमारी सरकार भी निरंतर जनता की बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। विक्रमादित्य ने अपने पुरुषार्थ से अपनी प्रजा का ध्यान रखा और सदैव प्रजा की रक्षा की। उन्होंने जनता का कर्ज माफ किया। उन्होंने विक्रम संवत का प्रवर्तन करते हुए सनातन परंपरा की पुनर्स्थापना की। सम्राट विक्रमादित्य की न्याय परंपरा का लोहा आज भी माना जाता है। उनकी न्याय प्रियता हजारों साल से जानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. मेघवाल से अनुरोध किया कि भविष्य में उज्जैन में  न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था सम्राट विक्रमादित्य के नाम से प्रारंभ की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव संवत्सर पर सभी लोगों के जीवन में खुशहाली की कामना की और सभी को अपनी ओर से नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी निरंतर विकास के कार्य सरकार द्वारा किए जाएंगे और इस प्रकार के आयोजन हर्षोल्लास के साथ आयोजित किए जाएंगे। उज्जैन में राजा महाराजा काल के जैसी होटल ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज’ होटल का लोकार्पण भी किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्यपाल पटेल की उपस्थिति में विक्रमोत्सव के कार्यक्रम से प्रदेशव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की जा रही है। प्रदेश के सभी जिलों  में प्रभारी मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय कार्यक्रम से जल गंगा संवर्धन अभियान आज से शुरू हो गया है। उज्जैन में 100 से अधिक कुआं, बावड़ी, तालाबों और अन्य जल स्त्रोतों में स्वच्छता, जीर्णोद्धार और नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आज हम सब क्षिप्रा नदी के पावन तट पर विक्रमोत्सव मना रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से सबका अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य के शासन का प्रभाव अफगानिस्तान तक था। वे राजस्थान के बीकानेर से आते हैं। उन्होंने राज्यपाल पटेल के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान और एमपी के द्वारा भविष्य में टूरिस्ट सर्किट बनाए जाने के लिए कार्य योजना बनाई जाएगी। इस टूरिस्ट सर्किट से राजा भर्तहरि और सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल से … Read more

MP में 30 मार्च से शुरु होगा जल गंगा संवर्धन अभियान, बोले CM डॉ. मोहन यादव, अभियान बनेगा जन आंदोलन

उज्जैन ‘जल गंगा संवर्धन’ अभियान का शुभारंभ आगामी 30 मार्च को वर्ष प्रतिपदा के दिन शिप्रा नदी के तट पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम के आयोजन से किया जाएगा। 30 मार्च को अन्य जिलों में भी नदी अथवा जल स्त्रोत के समीप कार्यक्रम का आयोजन कर इस अभियान की शुरुआत की जाएगी। अभियान के व्यापक आगाज हेतु 30 मार्च को प्रत्येक नगरीय निकाय और प्रत्येक ग्राम पंचायत में जन समुदाय की उपस्थिति में जल संरक्षण और संवर्धन के एक कार्य का क्रियान्वयन प्रारंभ किया जाएगा। अभियान की अवधि 30 मार्च से 30 जून होगी। अभियान के अंतर्गत जलाशयों की सफाई, पौधरोपण, छोटी नदियों, तालाबों और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए कार्य किए जाएंगे। इसकी तैयारियों की समीक्षा बैठक प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में कलेक्टर नीरज कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह अभियान के नोडल अधिकारी होंगे। उनकी अध्यक्षता में जिला जल गंगा संवर्धन अभियान समिति द्वारा अभियान की आयोजन, क्रियान्वयन तथा मॉनिटरिंग की जाएगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जयति सिंह तथा सहभागी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। 90 दिन से अधिक समय तक चलेगा अभियान पानी दे, गुरुबाणी दे। जल बिन सब सूना है। जो सबको जीवन दे, वो है जल। जल ही जीवन है। इससे हम आज सुरक्षित हैं, इसी से हमारा कल भी सुरक्षित है। जल बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। जल संरक्षण के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, समाज को भी आगे आना होगा। इसी मंशा के साथ मध्यप्रदेश सरकार ‘जल गंगा संवर्धन’ महाअभियान प्रारंभ करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का महाअभियान गुड़ी पड़वा के दिन 30 मार्च से शुरू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित शिप्रा तट पर वरुण (जल देवता) पूजन और जलाभिषेक के साथ जल गंगा संवर्धन अभियान का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यह प्रदेशव्यापी अभियान ग्रीष्म ऋतु में 30 जून तक 90 दिन से अधिक समय तक लगातार चलेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर दिन एक छोटी-बड़ी जल संरचना को लोकार्पित करेंगे। ‘जल गंगा संवर्धन’ अभियान में होंगे कई महत्वपूर्ण कार्य पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं के पुनर्विकास के कार्य किए जाएंगे। अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा। नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नये खेत-तालाब बनाए जाएंगे। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों और देवालयों में कार्य किए जाएंगे। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा। प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे। नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा। नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रत्येक गांव से 2 से 3 महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे। सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोख पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा। नहरों को मार्क कर विलेज-मेप पर शासकीय नहर के रूप में अंकित किया जाएगा। बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। करीब 40 हजार किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के सफाई कार्य। फ्लशबार की मरम्मत कार्य किए जाएंगे। स्लूस-वैल की सफाई कार्य भी इसी अभियान के दौरान होंगे। सदानीरा फिल्म समारोह, जल सम्मेलन, प्रदेश की जल परंपराओं पर आख्यान, चित्र प्रदर्शनी समेत विभिन्न आयोजन किये जाएंगे।  

मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र में लोकमाता की जन्मस्थली में कार्यक्रम के दिए निर्देश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के समापन कार्यक्रम 29 से 31 मई तक होंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की प्रतीक देवी अहिल्याबाई के सम्मान में महेश्वर में केबिनेट, चित्र प्रदर्शनियां, नाट्य मंचन के बाद अब होगा लाइट एंड साउंड शो मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र में लोकमाता की जन्मस्थली में कार्यक्रम के दिए निर्देश महत्वपूर्ण स्थानों पर प्रारंभ करें महेश्वरी साड़ी बिक्री केन्द्र मंत्रालय में हुई लोकमाता की 300वीं जयंती की आयोजन समिति की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई के कार्यों से नई पीढ़ी को अवगत करवाने के लिए विविध आयोजनों के साथ ही सामान्य ज्ञान स्पर्धा भी आयोजित की जाए। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर गत एक वर्ष में महेश्वर में केबिनेट के आयोजन, बटालियन का नामकरण देवी अहिल्या बाई के नाम पर करने, नाट्य मंचन और चित्र प्रदर्शनी जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी अहिल्या बाई की महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित जन्मस्थली में भी कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये। स्कूली पाठ्यक्रम में लोकमाता के जीवन का विवरण शामिल किया गया है। विद्यालयों में बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण, इंदौर विश्वविद्यालय में देवी अहिल्या शोध पीठ की स्थापना और लोकमाता के अप्रकाशित पत्रों का प्रकाशन भी किया गया है। लोकमाता के जीवन से जुड़े स्थानों महेश्वर, चित्रकूट, ओरछा, इंदौर, जानापाव, उज्जैन, ममलेश्वर, ओंकारेश्वर, गौमुखघाट, अमरकंटक, बड़वानी, मंदसौर, शिवपुरी आदि स्थानों पर लोक गायन, लोक नृत्य और नृत्य नाटिकाएं गत सितम्बर से फरवरी 2025 तक की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार की शाम मंत्रालय में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300 वीं जयंती के आयोजन के लिए गठित समारोह समिति की बैठक में बताया गया कि आगामी 31 मई को लोकमाता पर केन्द्रित स्मारिका का लोकार्पण प्रस्तावित है। इसके साथ ही 29 से 31 मई तक लोकमाता की 300वीं जयंती के वृहद समापन समारोह के अंतर्गत राजधानी भोपाल सहित विभिन्न स्थानों पर तीन दिवसीय कार्यक्रम होंगे। कई राज्यों में हुए थे लोकमाता के जनकल्याण कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के साथ ही लोकमाता के जनकल्याण के कार्य क्षेत्र में महाराष्ट्र, हरियाणा, उड़ीसा, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और अनेक स्थान रहे हैं। महेश्वरी साड़ी को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर बिक्री केन्द्र प्रारंभ किए जाएं। प्रदेश में महेश्वर साड़ी के निर्माण में महिलाओं को हाथकरघा बुनाई, रंगाई और आकल्पन से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया है। लोकमाता के शासनकाल में महेश्वरी साड़ी की वैश्विक पहचान बनी थी। खरगोन जिले में स्थित ऐतिहासिक महेश्वर किले की दीवारों पर निर्मित कलात्मक आकल्पन को महेश्वरी साड़ियों में उकेरा जाता है। लोकमाता के कृतित्व पर फिल्म का निर्माण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर सुशासन, धर्म स्थलों पर सामुदायिक भवनों और धर्मशालाओं के निर्माण और महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कार्य करने वाली प्रशासिका थीं। उनकी 300वीं जयंती पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समिति गठित कर गतिविधियों का कैलेंडर बनाया गया है। इसके अनुसार देवी अहिल्याबाई के जीवन और अवदान से संबंधित अनेक गतिविधियां सम्पन्न हुई हैं। संस्कृति विभाग द्वारा लोकमाता के व्यक्तित्व और कृतित्व पर फिल्म का निर्माण भी किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने लोकमाता के सम्मान में आयोजित कीं बहुआयामी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवस्थलों के प्रबंधन, अन्न क्षेत्रों के संचालन और नर्मदा परिक्रमावासियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाने जैसे कार्य लोकमाता के जन-जन के लिए समर्पित जीवन का प्रतीक हैं। वे वित्त प्रबंधन, स्वदेशी को महत्व, सैन्य रणनीति, नागरिक अनुशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में कार्य करती रहीं। उनके कुशल प्रशासन, समाज सुधार और धार्मिक सहिष्णुता के भाव को मध्यप्रदेश सरकार ने पूरा सम्मान देते हुए बहुआयामी गतिविधियां की हैं। लोकमाता की 300वीं जयंती के उपलक्ष में हुए कार्यक्रम उनके जीवन और भारतीय संस्कृति में दिए गए योगदान को उजागर करते हैं। प्रदेश की महिला उद्यमियों और शिल्पियों को प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समिति के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत सुझावों के अनुरूप लोकमाता के जीवन से जुड़ी विशेषताओं के प्रचार-प्रसार के लिए आगे भी कार्य करेगी। बैठक में प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि देवी अहिल्याबाई द्वारा निर्मित मंदिरों की सूची तैयार की गई है। लोकमाता द्वारा अनेक मंदिरों का जीर्णोद्धार भी कराया गया। ऐसे ज्ञात 118 स्थानों में से 90 स्थानों पर 234 चित्रांकन वॉटर कलर द्वारा तैयार करवाए गए। इस कार्य में देश के लब्ध प्रतिष्ठित चित्रकारों द्वारा योगदान दिया गया। चित्र प्रदर्शनी गत दिसम्बर में बैंगलोर में मध्यप्रदेश दिवस, जनवरी में भोपाल में गीता महोत्सव और लोकरंग के साथ ही जनवरी और फरवरी 2025 में प्रयागराज महाकुंभ में भी संयोजित की गई। आगामी महीनों में लोकमाता से जुड़े स्थानों पर हो रहे आयोजनों में भी यह चित्र प्रदर्शनी जन आकर्षण का केन्द्र रहेगी। विभिन्न आयोजनों में महिला उद्यमियों और शिल्पियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है। महिला स्टार्ट-अप पॉलिसी भी बनाई जा रही है। लोकमाता के जीवन ओर कार्यों पर नृत्य नाट्य और लाइट एंड साउंड शो समिति की बैठक में जानकारी दी गई कि विश्व मांगल्य सभा नागपुर से एक नृत्य नाट्य तैयार करवाया गया जो लोकमाता के जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। इसकी प्रस्तुति प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर प्रारंभ की गई है। विश्व संवाद केन्द्र न्यास, इंदौर ने नर्मदा साहित्य मंथन अहिल्या पर्व के रूप में मनाया। पर्यटन निगम ने महेश्वर किले पर लोकमाता के जीवन पर लाइट और साउंड शो तैयार करवाया गया है। इसे देवी अहिल्याबाई की पुण्यगाथा के नाम से प्रस्तुत किया जाएगा। धर्मपाल शोधपीठ में मोढ़ी लिपि के प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की है। इस प्राचीन लिपि का कई शताब्दियों तक चलन रहा है। मराठी भाषा लिखने के लिए कभी इसी लिपि का इस्तेमाल होता है। लोकमाता के शासनकाल में भी अनेक पुस्तकों का इस लिपि में प्रकाशन हुआ था, जिनके हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद के लिए मराठी साहित्य अकादमी द्वारा विषय-विशेषज्ञों का सहयोग लिया जा रहा है। नर्मदा परिक्रमा पथ पर लोकमाता की मूर्तियों की स्थापना के लिए भी परीक्षण किया जा रहा है।  

प्रदेश की नदियां, सरोवर और अन्य जल स्त्रोत हमारे जीवन के आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के जल संसाधनों का संरक्षण और पुनर्निमाण आवश्यक है। प्रदेश की नदियां, सरोवर और अन्य जल स्त्रोत हमारे जीवन के आधार हैं। इनके संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रभावी प्रबंधन के लिए सरकार और समाज दोनों सजग रहें, यह आवश्यक है। इस उद्देश्य से प्रदेश में तीन माह अवधि का जल गंगा संवर्धन अभियान प्रारंभ हो रहा है। प्रदेश में 30 मार्च से 30 जून तक राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जाएगा। इसे सफल बनाने के लिए अधिकतम प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार की शाम मंत्रालय से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अभियान के संबंध में कलेक्टर्स को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान को सफ़ल बनाने के लिए कलेक्टर्स और अन्य अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिला स्तर पर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सभी जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ें। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सभी की सहभागिता जल स्रोतों की सफाई और रखरखाव के कार्यों के अच्छे परिणाम दिलवाने में सहायक होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान में जिला प्रशासन का अमला और विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी मिलकर कार्य करें। उल्लेखनीय है कि अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, नगरीय विकास एवं आवास, उद्यानिकी, कृषि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्योग, पर्यावरण, स्कूल शिक्षा, संस्कृति, जनसंपर्क, राजस्व, वन विभागों के साथ ही जन अभियान परिषद को प्रमुख सहभागी विभाग बनाया गया है। अभियान की स्थानीय रणनीति के अनुसार जिलों में अन्य विभागों का सहयोग कलेक्टर स्तर पर लिया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन से जुड़े स्थान, विशेष रूप से नर्मदा के किनारे स्थित धार्मिक स्थानों में स्वच्छता और नदियों के घाटों की सफाई का कार्य किया जाए। छोटी नदियों और अन्य जल संरचनाओं के सौन्दर्यीकरण और स्वच्छता के कार्य निरंतर किए जाएं। प्रमुख धार्मिक केन्द्रों एवं ग्रामों में स्थित मंदिरों के परिसर में भी श्रृद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा जाए। पर्व-त्यौहारों के लिए करें आवश्यक तैयारियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी पर्व त्यौहार पर कानून व्यवस्था की स्थिति सुधर बनाए रखने के निर्देश प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां 30 मार्च को गुड़ी पड़वा, चेटीचंड और वर्ष प्रतिपदा के कार्यक्रम होंगे वहीं चैत्र नवरात्र भी प्रारंभ हो रहे हैं। इसके साथ ही 31 मार्च को ईद भी है। इन सभी पर्व-त्यौहारों के दृष्टिगत जिलों में प्रशासनिक अमला सजग और सक्रिय रहे। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि यदि विद्यार्थियों की कोई परीक्षा नजदीक है तो उस दृष्टि से ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निर्धारित मानकों के अनुसार प्रयोग हो। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विक्रम संवत 2082 के शुभारंभ पर होने वाली गतिविधियों पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रम संवत, वैदिक गणित काल गणना की प्राचीन भारतीय पद्धति पर भी चर्चा की।  

समाधान ऑनलाइन में लंबित समस्याओं का हुआ समाधान

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था की जाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाधान ऑनलाइन में आए विभिन्न प्रकरणों में लापरवाही बरतने वाले 20 अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए समाधान ऑनलाइन में लंबित समस्याओं का हुआ समाधान 20 शासकीय सेवकों के विरूद्ध निलंबन और नोटिस जारी करने की कार्रवाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाधान ऑनलाइन में आए विभिन्न प्रकरणों में लापरवाही बरतने वाले 20 अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही पेयजल प्रदाय में अव्यवस्था के दोषी ठेकेदार को अर्थदंड से दंडित किया गया। शुक्रवार को समाधान ऑनलाइन में सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरणों में से ऐसे प्रकरणों का समाधान किया गया जिनका लंबे समय से समाधान लंबित था। मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी समाधान ऑनलाइन में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा कलेक्टर्स और अन्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। समाधान ऑनलाइन में शुक्रवार को पेयजल व्यवस्था से संबंधित 3 प्रकरणों में दोषी व्यक्तियों को दंडित करने का निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस भी जिले से नागरिकों के लिए पेयजल की व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें प्राप्त होंगी वहां संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध सख्त कदम उठाए जाएंगे। पेयजल समस्या से संबंधित एक प्रकरण में सीहोर जिले के भंवर सिंह पटेल ने ग्राम पंचायत बरखेड़ी में पानी न पहुंच पाने की शिकायत की थी। इस प्रकरण में अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला ने बताया कि ठेकेदार फर्म मेसर्स विश्वा पर 37 हजार 469 की शास्ति अधिरोपित की गई है। नल जल योजना के क्रियान्वयन में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर कर घरेलू नल कनेक्शनों में जलापूर्ति प्रारंभ करवा दी गई है। इसी तरह मऊगंज के शिकायतकर्ता सुनील कुमार साहू की शिकायत पर डेढ़ वर्ष से पाइप लाइन के टूट जाने से जल प्रदाय में आ रही दिक्कत को दूर कर दिया गया है। इस मामले में भी संबंधित ठेकेदार केएनके कंपनी को तत्काल कार्य करवाने के निर्देश दिए गए। इस प्रकरण में परियोजना इकाई में पदस्थ फील्ड इंजीनियर की सेवाएं समाप्त की गई है। शिकायत का निराकरण समय पर न करने के लिए उत्तरदायी मुख्य नगर पालिका अधिकारी मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कार्पोरेशन के उपयंत्री, परियोजना प्रबंधक और सहायक परियोजना प्रबंधक को नोटिस जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी जिलों में नल-जल योजना के क्रियान्वयन में विलंब करने वालों के विरूद्ध सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छिंदवाड़ा जिले की श्रीमती दुर्गाबाई विश्वकर्मा द्वारा कूप निर्माण के लिए समय पर कार्रवाई न करने के मामले में जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और सहायक यंत्री की दो-दो वेतनवृद्धि रोकने संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी किए गया है। साथ ही गंभीर लापरवाही के दोषी ग्राम रोजगार सहायक को सेवा समाप्ति के लिए नोटिस जारी किया गया। इस प्रकरण में सचिव ग्राम पंचायत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। शिकायतकर्ता को कूप निर्माण के लिए 72 हजार 372 रूपए का भुगतान करवा दिया गया है। विवाह योजना, छात्रवृत्ति, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्राकृतिक आपदा पर मुआवजा राशि के प्रकरण भी हुए हल समाधान ऑनलाइन में खंडवा जिले के दिनेश कलमे ने नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना में राशि मिलने में हुई देर की शिकायत की थी। समाधान ऑनलाइन में यह मामले आने के बाद गत 21 मार्च को कलमे दंपति को एक लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो गया है। इस प्रकरण में लापरवाही बरतने पर सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक, जिला कोषालय अधिकारी और नि:शक्त कल्याण शाखा के प्रभारी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही सामाजिक सुरक्षा अधिकारी जनपद पंचायत खालवा को भी कारण बताओ नोटिस दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगरौली जिले की सुमोनिका द्वारा छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान समय पर न किए जाने की शिकायत पर अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इस प्रकरण में पोर्टल संचालन करने वाले अधिकारियों को भविष्य में गंभीरतापूर्वक कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही यह चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की शिकायत नहीं आना चाहिए वरना सख्त कार्रवाई होगी। इस प्रकरण में शिकायतकर्ता को छात्रवृत्ति की राशि 22 हजार 748 रूपए का भुगतान पोर्टल के माध्यम से कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विदिशा के रोहित रैकवार द्वारा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में की गई शिकायत का पर समाधान किया गया। आवेदक को दस हजार रूपए की राशि प्रदान कर दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में योजना के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश इस योजना में देश में अग्रणी है। इस नाते योजना के क्रियान्वयन की श्रेष्ठ स्थिति को बनाए रखने के लिए प्रत्येक आवेदक का प्रकरण यथासमय स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा जिले के घनानंद द्विवेदी के आवेदन पर 20 हजार रूपए की राशि प्रदान करने के निर्देश दिए। इस प्रकरण में आकाशीय बिजली गिरने से आवेदक द्वारा पशुधन की हानि के फलस्वरूप मुआवजा राशि का आवेदन लगभग सात महीने पहले किया गया था। इस प्रकरण में विलंब के लिए नायब नाजिर को निलंबित कर दिया गया है, साथ ही लापरवाही के दोषी तहसीलदार को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।         रमेश जाटव को मकान की किस्त, राकेश रिछारिया को आयुष्मान योजना की राशि और आशाराम लोधी को गौ-संवर्धन योजना में मिला लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर के रमेश जाटव की आवास योजना की राशि न मिलने के संबंध में कलेक्टर ग्वालियर को परीक्षण कर दोषी कर्मचारियों को दंडित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर द्वारा सीएम हेल्पलाइन में गलत जानकारी दर्ज करने के दोषी सीएमओ को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। आवेदक जाटव को आवास योजना की तीसरी किस्त की राशि का भुगतान हो गया है। इसी तरह छतरपुर के राकेश कुमार रिछारिया को समाधान ऑनलाइन के माध्यम से आयुष्मान भारत योजना में 26 हजार 747 रूपए की राशि का भुगतान हो गया है। आवेदक ने 5 माह पूर्व उपचार करवाया था लेकिन अस्पताल द्वारा अनुबंध का उल्लघंन कर … Read more

राजभवन में कर्मयोगी बने कार्यशाला का हुआ शुभारम्भ

कर्मयोगी भाव, भावनाओं के साथ प्रतिबद्ध प्रयास समय की जरूरत : राज्यपाल पटेल प्रदेश राष्ट्र नीति के संकल्प पथ पर प्रतिबद्धता के साथ बढ़ रहा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजभवन में “कर्मयोगी बने” कार्यशाला का हुआ शुभारम्भ भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश इतिहास के ऐसे पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां से साफ दिख रहा है कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी। कर्मयोगी भाव, भावनाओं के साथ विकसित भारत के लिए प्रतिबद्ध प्रयास समय की जरूरत है। कर्मयोग दैनिक जीवन में उच्चतर उद्देश्य के लिए आगे बढ़ने का वह रास्ता है जो व्यक्तिगत उन्नति के साथ समाज सुधार और सेवा का प्रभावी साधन है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश राष्ट्र नीति के संकल्प पथ पर प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। हमारी विभिन्न भाषाए, बोलियां, मनोभाव और मूकभाव सभी संस्कृति के वह आभूषण है, जिन पर हमें गर्व है। प्रदेश में अन्य भाषाओं तमिल, तेलुगू आदि पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के लिए राष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल करते हुए कमेटी बनाई जाएगी। यह बातें राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज राजभवन के सांदीपनि सभागार में आयोजित कार्यशाला के शुभारंभ कार्यक्रम में कही। कार्यशाला का आयोजन राजभवन मध्यप्रदेश द्वारा उच्च शिक्षा विभाग, निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग और यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के सहयोग से किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता और अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने छिंदवाड़ा के पारंपरिक बुनकरों द्वारा तैयार उत्तरीय परिधान और पुष्प-गुच्छ से स्वागत किया। कार्यशाला में उप कुलपति जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रोफेसर शांतिधुलीपुड़ी पंडित, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष भरत शरण सिंह, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल, आयुक्त उच्च शिक्षा निशांत बरबड़े भी मंचासीन थे। कर्मयोगी कार्य संस्कृति को बनायें सशक्त राज्यपाल पटेल ने कहा कि आज हमारे देश ने ज्ञान, विज्ञान, अर्थव्यवस्था सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है। दुनिया में भारत की नई पहचान और साख बनी है। हमारा देश ऐसे मोड़ पर है, जहां से एकजुट और एकमत प्रयासों से राष्ट्र विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि 4-5 दशक पूर्व आज के विकसित राष्ट्रों में भी ऐसे ही मोड़ आए थे। नागरिकों के कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित प्रयासों से राष्ट्र का स्वरूप बदल दिया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि विकसित भारत निर्माण के लिए कर्मयोगी, भावी पीढ़ी का निर्माण शिक्षकों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में कर्मयोगी बनने के लिए काम की प्रकृति चाहें जो भी हो, व्यक्तिगत लाभ की इच्छा, परिणाम, सफलता और असफलता किसी की भी चिंता किए बिना लगातार कार्य करना होगा। राज्यपाल पटेल ने कहा कि कर्मयोग पथ के अभ्यासी को शुरु-शुरु में परिणामों की चिंता, समाज की अपेक्षाएं, मान्यताएं और दैनिक जीवन की व्यस्तताओं में समय की कमी आदि की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ये सभी चुनौतियां सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ समय प्रबंधन और कर्तव्य पालन, ध्यान, साधना तथा चिंतन के नियमित आध्यात्मिक अभ्यास से दूर हो जाती है। राज्यपाल पटेल ने शिक्षा के तीर्थ स्थलों के प्रमुखों अपेक्षा की है कि वे कर्मयोग के सिद्धांतों पर शिक्षण, शोध कार्य के साथ ही विश्वविद्यालय के भीतर और बाहर स्वैच्छिक सेवा गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित करें। व्यक्तिगत-व्यावसायिक जीवन में स्थिर भाव से कार्य की संस्कृति के द्वारा शैक्षणिक समुदाय के भीतर करुणा, सहानुभूति और पारस्परिक सहयोग को मजबूत बनायें। कर्मयोग के अभ्यास के लिए प्रेरक वातावरण निर्माण के कार्य करे। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि कार्य शाला का चिंतन कर्मयोग के वैचारिक, व्यवहारिक आयामों को प्रकाशित करेंगे। निःस्वार्थ कर्तव्य पालक कर्म योगियों के निर्माण का मंच बनेगा। कार्य शाला कर्मवाद के पुर्नजागरण की पहल: डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कर्मयोगी कार्य शाला का आयोजन अद्भुत है। कार्यक्रम का भाव और भावना अभूतपूर्व है। सौभाग्य की बात है कि 5 हजार वर्ष पूर्व प्रदेश की धरती से शिक्षित कर्मयोगी के कर्मवाद का पुनर्जागरण प्रदेश से ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर्मयोगी ऋषि परंपरा का अक्षरक्ष: प्रतिरूप है। प्रधानमंत्री जी के मनोभावों के आधार पर सुशासन के दृष्टिगत होने वाले सभी सुशासन के प्रयोगों को अंतिम कड़ी तक पहुँचाने का प्रयास मिशन कर्मयोगी है। निष्काम भाव, अहंकार से मुक्त बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के लिए निरंतर कार्य करना ही कर्मयोग है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की विशालता अद्भुत है, जो अतिरंजित बातों को भी सुन लेती है। सही, अच्छी बातों को सद्भावना के साथ लेकर आगे चलती है। इसी लिए आज दुनिया भारतीय दर्शन से प्रेरणा प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति का दायरा असीमित है, जिसमें सारे ब्रह्मांड के कल्याण का चिंतन है। भारत के तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसे ज्ञान के केंद्र सम्पूर्ण मानवता के लिए कार्य करते थे। भारत ने कभी दूसरे देशों पर आक्रमण नहीं किया। कर्मयोग का चिंतन लक्ष्य पूर्ति के लिए निरंतर कार्य करना : मंत्री परमार उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि कर्मयोगी बने कार्य शाला दूरगामी पहल है। कार्य शाला का चिंतन शिक्षा जगत में आमूल चूल परिवर्तन का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि कर्मयोग का चिंतन लक्ष्य पूर्ति के लिए निरंतर कार्य करते रहना है। समय और परंपराओं का अनुपालन मात्र राष्ट्र जीवन के लिए पर्याप्त नहीं है। राष्ट्र की आवश्यकता लक्ष्य पूर्ति के लिए निरंतर कार्य करते रहना है। कर्मयोग का चिंतन इसी अवधारणा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर्तव्यों का सर्वश्रेष्ठ पालन आवश्यक है। नियमों के चिंतन से भूमिका की चिंता की ओर जाए : बाला सुब्रह्मण्यम मानव संसाधन क्षमता निर्माण आयोग, मिशन कर्मयोगी के सदस्य प्रोफेसर बाला सुब्रह्मण्यम ने कहा कि न्यू इंडिया के लिए टीम इंडिया जरूरी है। टीम इंडिया के लिए कर्मचारियों को कर्मयोगी बनाना होगा। जरूरी है कि कर्मचारी विकसित भारत के भविष्य के लिए तैयार रहे। इसके लिए जीवन की सीख के द्वारा उनकी क्षमता को बढ़ाना होगा। क्षमता वृद्धि के लिए नियमों के चिंतन से भूमिका की चिंता की ओर जाना होगा। इसके लिए विकास का संकल्प, … Read more

प्यासे खेत को जब पानी मिलेगा तो सोने के समान होगी खेती : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अलीराजपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पाणिग्रहण संस्कार, 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण है।  अलीराजपुर में 1369 नव दम्पतियों को मुख्मयंत्री कन्या विवाह योजना में 7 करोड़ 52 लाख रूपये की राशि कन्यादान के रूप में दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी वर (दूल्हों) से कहा कि हम बेटियों के रूप में अपने घर की रौनक आपको सौंप रहे हैं, इनका ख्याल रखना अब आपका दायित्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को अलीराजपुर में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल होकर वर-वधू को आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अलीराजपुर के कलेक्टर को निर्देशित किया कि 220 केवी ग्रिड, ककराना घाट एवं कन्या खेल परिसर का प्रपोजल भेजे, जिससे अविलंब स्वीकृत किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प वर्षा कर सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल नव-दंपत्तियों के परिजन का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अलीराजपुर की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। उन्होंने कहा कि नर्मदा मैया के किनारे बांध बनाने से अलीराजपुर क्षेत्र में सिंचित भूमि का रकबा बढ़ा है और आर्थिक समृद्धि आई है। आर्थिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिसम्बर 2024 में अलीराजपुर जिले को मिली लगभग 2000 करोड़ रुपए की सोंडवा उद्वहन परियोजना से 169 गाँवों को सिंचाई के लिए जल प्राप्त होगा। प्यासे खेत को जब पानी मिलेगा तो सोने के समान फसल प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। सरकार सभी कृषकों का गेहूं खरीदेगी। उन्होंने कहा कि गेहूं के लिए 175 रुपए प्रति क्विंटल बोनस के रूप में दिया जा रहा है। साथ ही दूध की खरीदी पर भी 5 रुपए प्रति लीटर बोनस दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य प्रदेश का दुग्ध उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है, जिससे कृषकों को आय का नया साधन मिले। विकास को समावेशी बनाने के लिए जिला विकास समिति का होगा गठन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल्द ही जिला विकास समिति का गठन किया जाएगा। इससे जिले के गणमान्य नागरिक, व्यवसायियों के सुझावों को प्राप्त कर जिले की समावेशी विकास की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जाएगा। हीरा परिष्कृत करने में जिले के हुनरमंद नागरिकों को रोजगार के अवसर मिले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अलीराजपुर जिला उद्योग विभाग के माध्यम गुजरात की जगह अलीराजपुर में हीरा परिष्कृत करने का कार्य किया जाएगा। इससे अलीराजपुर के हुनरमंद नागरिक जिले में ही रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ही एकमात्र राज्य है जहां खदान से हीरा प्राप्त होता है। प्रयास किए जा रहे है अलीराजपुर में ही हीरा परिष्कृत करने का कार्य हो। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योग के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पक्के घर बनाने, फलिया-फलिया (मजरे-टोले) तक पानी एवं बिजली पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है, प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक बहनों को मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना से 1250 रुपए प्रतिमाह खातों में अंतरित किए जा रहे हैं। किसान सम्मान निधि के माध्यम से कृषकों की सहायता की जा रही है। नए उद्योग स्थापित किया जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भव्य स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम स्थल पर ढोल मांदल की थाप पर उत्साह पूर्ण ढंग से जनजातीय नृत्य के द्वारा नृतक दलों ने पुष्प वर्षा के बीच भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया। मंत्री नागर सिंह चौहान एवं सांसद श्रीमती अनिता नागर सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुष्प-गुच्छ, मुख्यमंत्री डॉ. यादव की हस्त निर्मित तस्वीर एवं जनजातीय संस्कृति को परिलक्षित करती हुई पेंटिंग, तीर कमान एवं जैकेट भेंट कर स्वागत किया। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजरी बाई खरत, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुनिता इंदर सिंह चौहान, संतोष मकू परवाल सहित 1369 नव दंपत्तियों के साथ पधारे परिजन एवं बडी संख्या में आमजन उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री ने 11 जोड़ो को प्रतीकात्मक रूप से कन्यादान राशि के चेक किये भेंट

झाबुआ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि झाबुआ में एक साथ लगभग दो हजार जोड़ों के सामूहिक विवाह में शामिल होने का आनंद अदभुत और अविस्मरणीय है। उन्होंने नव-विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए सभी के मंगलमय और सुखद दांपत्य जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनुष्य जीवन के 16 संस्कारों में से पाणिग्रहण संस्कार गृहस्थ जीवन में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण संस्कार है। इसमें 7 फेरों से 7 वचनों को पूरा कर सात जन्मों तक बंधन में बंधते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह/निकाह सम्मेलन में शामिल जोड़ों को विवाह और निकाह की बधाई देते हुए सभी के जीवन में खुशियों की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव झाबुआ में सामुहिक विवाह समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में 11 जोड़ों को प्रतीकात्मक रूप से 49-49 हजार की राशि के चेक भी प्रदान किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ जिले के निवासियों को सौगात देते हुए कहा कि राणापुर क्षेत्र में पेयजल एवं सिंचाई की समस्या के निराकरण के लिए भांडाखेड़ा बैराज, नागन खेड़ी, गलती, छायण, झालरवा, बुदाशाला और कल्लीपुरा में बैराज बनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से संबद्ध झाबुआ में मेडिकल कॉलेज भी बनाया जायेगा। झाबुआ के विकास के लिये सभी कार्य किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में सभी वर्गों का विकास समाहित है। किसी भी वर्ग को विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहने दिया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुरूप सबका साथ लेकर सबका विकास किया जायेगा, जिसमें सबके प्रयास और सबका विश्वास शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के सशक्तिकरण के लिये राशि प्रदान की जा रही है। किसानों का गेहूँ 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से उपार्जित किया जा रहा है। धान उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 4 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिये जा रहे हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को स्कूटी और लेपटॉप प्रदाय किये जा रहे हैं। लाड़ली बहनों को प्रतिमाह मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की राशि प्रदान की जा रही है। प्रदेश में बेटियों को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। प्रभारी मंत्री एवं कैबिनेट मंत्री जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग डॉ. कुँवर विजय शाह ने कहा कि झाबुआ में आयोजित लगभग 2000 जोड़ों के सामूहिक विवाह में सम्मिलित होकर मन आनंदित हो गया हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया ने कहा कि जिले के लिए सौभाग्य है कि इतना विशाल विवाह समारोह आयोजित हुआ और जिसमें स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आकर बहनों को आशीर्वाद प्रदान किया। पारंपरिक रूप से स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्री सुभूरिया ने जनजातीय परम्परा के अनुरूप जनजातीय जैकेट “झूलड़ी” पहनाकर, साफा बांधकर एवं तीर कमान भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्यापूजन किया। प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। महिला एवं बाल विकास विभाग कुपोषण मुक्त झाबुआ के तहत मोटी आई कैम्पैन, मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन गलसन माला, गुड्डा गुड्डी, तीर कमान, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग के अंतर्गत जिले में उत्पादित टमाटर एवं टमाटर से बने उत्पाद जैसे टमाटर पाउडर, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग अन्न फसल एवं जैविक उत्पाद, नगर पालिका परिषद झाबुआ द्वारा वेस्ट टु वेल्थ प्रोजेक्ट अंतर्गत तैयार किये गये डस्टबिन एवं गमले प्रदर्शित किये गये। सम्मेलन में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, सांसद श्रीमती अनिता चौहान, संभागायुक्त इंदौर दीपक सिंह, आईजी अनुराग, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना, पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ल एवं अन्य जनप्रतिनिधियों उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के श्रमिकों को संबल प्रदान करने मुख्यमंत्री जन कल्याण योजना संचालित की जा रही

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के श्रमिकों को संबल प्रदान करने मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना संचालित की जा रही है। शुक्रवार 28 मार्च को संबल योजना में 23 हजार 162 श्रमिक परिवारों को 505 करोड़ रूपये की अनुग्रह राशि उनके खातों में अंतरित की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय से हितग्राहियों के खातों में यह राशि अंतरित करेंगे। श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर मंत्री एवं स्थानीय जन प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। योजना में अनुग्रह सहायता योजना अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं। स्थायी अपंगता पर 2 लाख रूपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रूपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये दिये जाते हैं, साथ ही श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिये सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है। इससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। संबल योजना में श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है। प्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामयम योजना में पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, अब उन्हें भी 5 लाख रूपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार ने योजना प्रारंभ 1 अप्रैल 2018 से अब तक 1 करोड़ 74 लाख श्रमिकों का संबल योजना के अंतर्गत पंजीयन किया है। श्रमिकों के पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। श्रम विभाग योजनांतर्गत वर्तमान तक 06 लाख 58 हजार से अधिक प्रकरणों में राशि रूपये 5 हजार 927 करोड़ से अधिक के हितलाभ दिये जा चुके है।  

केन्द्रीय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल के मुख्यातिथ्य में होंगे विक्रमोत्सव के अंर्तगत चैत्र प्रतिपदा पर आयोजित विशेष कार्यक्रम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आगामी 30 मार्च को चैत्र प्रतिपदा एवं गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर उज्जैन में विक्रमोत्सव के अंतर्गत आयोजित विशेष कार्यक्रम केन्द्रीय कानून एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल के मुख्य आतिथ्य में होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विक्रमोत्सव के विशेष कार्यक्रम सहित इसी दिन उज्जैन में आयोजित अन्य सभी कार्यक्रमों में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर एवं अन्य आमंत्रित अतिथिगण भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि 30 मार्च को उज्जैन में विक्रमोत्सव के अंतर्गत चैत्र प्रतिपदा पर विशेष कार्यक्रम सहित महाराजवाड़ा हेरिटेज होटल उज्जैन का उद्घाटन एवं श्रीमहाकाल महालोक में लाइट एंड साउंड शो का शुभारंभ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इन सभी कार्यक्रमों में केन्द्रीय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।  

संबल योजना: 28 मार्च को सीएम मोहन यादव जारी करेंगे श्रमिक परिवारों के खातों में 505 करोड़ रूपये, मिलेगा लाभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 28 मार्च को मंत्रालय में संबल योजना में अनुग्रह सहायता के 23 हजार 162 प्रकरणों में 505 करोड़ रुपये सिंगल क्लिक से हितग्राहियों के खातों में अंतरित करेंगे। कार्यक्रम में श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर मंत्री एवं स्थानीय जन प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। योजना में अनुग्रह सहायता योजना अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं। स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रुपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। संबल योजना में महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रुपये दिए जाते हैं, साथ ही श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालयीन शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिए संपूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। गिग वर्कर्स भी योजना में शामिल नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारंभ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है। इससे वे केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। जन्म से मृत्यु तक आर्थिक सहायता संबल योजना में श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है। प्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामयम योजना में पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, अब उन्हें भी 5 लाख रुपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार ने योजना प्रारंभ होने के बाद 1 अप्रैल 2018 से अब तक 1 करोड़ 74 लाख श्रमिकों का संबल योजना के अंतर्गत पंजीयन किया है। श्रमिकों के पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। श्रम विभाग योजनांतर्गत वर्तमान तक 06 लाख 58 हजार से अधिक प्रकरणों में 5 हजार 927 करोड़ रुपये से अधिक के हितलाभ दिए जा चुके हैं। जानिए क्या है संबल योजना     मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। योजना में अनुग्रह सहायता योजना अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं।     स्थायी अपंगता पर 2 लाख रूपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रूपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं।     संबल योजना में महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये दिये जाते हैं, साथ ही श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिये सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।     नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं।     संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है। इससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं।संबल योजना में श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है।     प्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामयम योजना में पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, अब उन्हें भी 5 लाख रूपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण स्कीम अंतर्गत 2.16 करोड़ अंतरित सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण स्कीम के तहत राज्य अधिवक्ता परिषद् जबलपुर के बैंक खाते में 2 करोड़ 16 लाख रूपये अंतरित कर दिये गये है। राशि वित्त वर्ष 2024-25 के लिये अंतरित की गई है। इस स्कीम के तहत 12 हजार रूपये के मान से प्रत्येक नवीन अधिवक्ता को सहायता राशि प्रदान की जाती है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान :पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभागों की अभियान में होगी सहभागिता

प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश में बनेगा जन आंदोलन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 मार्च से होगा प्रारंभ होकर 30 जून तक चलेगा “जल गंगा संवर्धन अभियान” पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभागों की अभियान में होगी सहभागिता पानीदार प्रदेश बनने की ओर बढ़ता देश का हृदय प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के क्षिप्रा तट से करेंगे प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत अभियान में तैयार किए जाएंगे 1 लाख जलदूत मुख्यमंत्री हर दिन एक जल संरचना का लोकार्पण करेंगे तीन माह लगातार चलेगा अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का “जल गंगा संवर्धन” महा अभियान गुड़ी पड़वा के दिन 30 मार्च से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित क्षिप्रा तट पर वरुण (जल देवता) पूजन और जलाभिषेक के साथ “जल गंगा संवर्धन अभियान” का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यह प्रदेशव्यापी अभियान ग्रीष्म ऋतु में 30 जून तक 90 दिन से अधिक समय तक लगातार चलेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर दिन एक छोटी-बड़ी जल संरचना को लोकार्पित करेंगे। उन्होंने कहा है कि जल संरक्षण के इस अभियान से प्रदेश में भूजल स्तर में सुधार आएगा। पानी की बूंद-बूंद बचाएं, तभी हमारी सांसें बचेंगी। मध्यप्रदेश सरकार जन, जल, जंगल, जमीन और वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बना है। राज्य सरकार भी ‘खेत का पानी खेत में-गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। पानी दे, गुरुबाणी दे। जल बिन सब सूना है। जो सबको जीवन दे, वो है जल। जल ही जीवन है। इससे हम आज सुरक्षित है, इसी से हमारा कल भी सुरक्षित है। जल बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। जल संरक्षण के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, समाज को भी आगे आना होगा। इसी मंशा से मध्यप्रदेश सरकार जल गंगा जल संवर्धन महा अभियान प्रारंभ करने जा रही है। हमारी धरा के कुल जल का केवल एक छोटा हिस्सा ही पीने योग्य स्वच्छ जल के रूप में उपलब्ध है। पृथ्वी के कुल जल का लगभग 97 प्रतिशत महासागरों में खारा जल है, जो पीने योग्य नहीं है। शेष 3 प्रतिशत मीठा जल है, लेकिन इसमें से भी अधिकांश हिमखंडों और बर्फ की चोटियों में जमा है। सिर्फ 0.5 प्रतिशत से भी कम पानी झीलों, नदियों और भूजल के रूप में उपलब्ध है, जिसे हम उपयोग कर सकते हैं। पृथ्वी पर स्वच्छ और पीने योग्य पानी की मात्रा बहुत ही सीमित है और इसे संरक्षित करना बेहद ज़रूरी है। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार ने जल बचाने के लिए कदम बढ़ाये हैं। जल बचाने लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान”, प्रदेश में जल संकट को खत्म करने और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेशव्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग एवं प्राधिकरण साथ मिलकर जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के कार्य करेंगे। अभियान की थीम ‘जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण’ रखी गई है। नागरिकों के सहयोग से जल संरक्षण अभियान बनेगा जन-आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संचय की विभिन्न गतिविधियां संचालित करने जैसे – पौध-रोपण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम चलाने, स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने, ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनाएं। “जल गंगा संवर्धन अभियान” में होंगे कई महत्वपूर्ण कार्य     पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं के पुनर्विकास के कार्य किये जायेंगे।     अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।     नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे।     लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे।     ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे।     पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा।     प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे।     नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा।     नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी।     ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।     प्रत्येक गांव से 2 से 3 महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे।     सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोख पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।     नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे।     नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा।     नहरों को मार्क … Read more

मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में वर्चुअल भागीदारी

स्पेस पॉलिसी के निर्माण और प्रदेश में इसरो के केंद्र के लिए होंगे प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कर रहा नेतृत्व मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में वर्चुअल भागीदारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति के अनेक रहस्य सुलझाने की क्षमता विज्ञान में हैं। आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से अनेक क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। फार्मिंग से लेकर फायनेंस तक मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मेडिसिन तक और एजुकेशन से लेकर कम्यूनिकेशन तक प्रत्येक क्षेत्र का स्वरूप परिवर्तित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गत एक दशक में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तीव्र प्रगति की है। राष्ट्र में एक नई ऊर्जा और शक्ति का संचार हुआ है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की विजनरी नीति का ही परिणाम है कि भारत डिफेंस और अन्तरिक्ष के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारत इस क्षेत्र में गलोबल लीडर बन रहा है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा शीघ्र ही स्पेस पॉलिसी बनाई जाएगी। प्रदेश में इसरो के केंद्र की शुरूआत के लिए भी मंथन प्रारंभ किया गया है। हाल ही में जीआईएस के दौरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर केंद्रित 4 नीतियों को लागू करने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को उज्जैन में हो रहे राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन/ विज्ञान उत्सव और चालीसवें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन का समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअल रूप से शुभारंभ करते हुए यह बात कही। यह सम्मेलन कालिदास अकादमी परिसर उज्जैन में हो रहा है। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गौतम टेटवाल भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए। मध्यप्रदेश को बनाएंगे टेक्नालॉजी और इनोवेशन हब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग बढ़ाया जाएगा। प्रदेश को टेक्नालॉजी और इनोवेशन हब बनाया जाएगा। हाल ही में इसरो ने स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट अर्थात स्पैडेक्स सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग करते हुए इतिहास रच दिया है। इसके लिए इसरो की टीम बधाई की पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैज्ञानिक समाज और विज्ञान प्रौद्योगिकी से जुड़े संस्थानों के सहयोग से मध्यप्रदेश में इसरो की तरह एक केंद्र के विकास पर भी विचार किया जाएगा। वर्तमान में दक्षिण भारत ही ऐसी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। उत्तर और मध्य भारत में इस तरह के केंद्र का अभाव है। प्रदेश में चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में भी विज्ञान का प्रयोग बढ़ रहा है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग हो रहा है। मध्यप्रदेश में ड्रोन के माध्यम से राजस्व के क्षेत्र में भी नक्शे बनाने की शुरूआत की गई है। रायसेन से राष्ट्रीय स्तर पर शहरी बस्तियों के भूमि सर्वेक्षण का पायलेट प्रोजेक्ट शुरू हुआ। प्रदेश के अन्य शहरों में भी जमीन,भूखण्ड और बस्तियों का डिजिटल नक्शा बनाने की पहल हुई है। इससे संपत्ति के स्वामित्व के रिकार्ड्स रखना आसान होगा। अनेक क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग कार्यों को आसान बना रहा है। उज्जैन है काल गणना का केंद्र, चार नई नीतियों के माध्यम से विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति भी विज्ञान आधारित है। हम अनेक शुभ कार्य नवग्रह पूजन से प्रारंभ करते हैं। विक्रम संवत 2082 आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के काल से लेकर अब तक उज्जैन के इतिहास,कला, संस्कृति और अध्यात्म के साथ ही विज्ञान के केंद्र होने का उल्लेख करते हुए कहा कि हम सभी उज्जैन को काल गणना के केंद्र के रूप में जानते हैं। इस संबंध में भी निरंतर अनुसंधान हो रहा है। हम नूतन का स्वागत करते हुए पुरातन परम्पराओं को भी साथ रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा वैज्ञानिक सम्मेलन और राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन की थीम “विकास की बात विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार एक साथ”प्रासंगिक है। प्राचीन भारतीय विज्ञान परम्परा पर आधारित विभिन्न सत्रों का आयोजन सराहनीय है, जिसमें लगभग 300 शोधार्थी और युवा वैज्ञानिक 17 विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रौद्योगिकी और नवाचार आज की आवश्यकता है। हाल ही में सम्पन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आईटी विभाग के माध्यम से 4 महत्वपूर्ण नीतियां मध्यप्रदेश ड्रोन सवंर्धन और उद्योग नीति-2025, मध्यप्रदेश एनीमेशन, विजुअल एफैक्टस, गैमिंग कामिक्स और विस्तारित रियलिटी (एवीजीसी- एक्सआर) नीति-2025, मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर नीति-2025 और मध्यप्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी)नीति-2025 घोषित की गई हैं। वैज्ञानिक सम्मेलन में स्पेस पॉलिसी बनाने का सुझाव आया है। इस नाते मध्यप्रदेश की स्पेस पॉलिसी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन के सभी प्रतिभागियों को भागीदारी के लिए बधाई दी। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र हैदराबाद के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिस तरह देश डिफेंस प्रोडक्शन, स्पेस और बॉयो टेक्नालॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, मध्यप्रदेश भी इन क्षेत्रों में प्रयासरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेस पॉलिसी-2023 लाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऐसे चंद मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं जो इस क्षेत्र में नवाचार के लिए उत्साहित हैं। युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के लिए शीघ्र ही मेपकास्ट के सहयोग से अनुबंध किया जाएगा। कृषि बीमा योजना जैसे कार्य स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से हो रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि प्रदेश में इस तरह के वैज्ञानिक सम्मेलन अन्य स्थानों पर भी किए जाएंगे। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु राकेश सिंघई, विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक और मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव विवेकानंद पई,भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के एमेरिट्स वैज्ञानिक सुधीर मिश्रा और महानिदेशक, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल प्रो. गोवर्धन दास, निदेशक नेशनल इनोवेशन फाउन्डेशन डॉ. अरविन्द रानाडे, प्रमुख सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग, प्रोफेसर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर प्रो. मनीष जैन भी सम्मेलन में शामिल हुए। समत्म भवन से मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल और अपर मुख्य सचिव सूचना प्रौद्योगिकी संजय दुबे भी सम्मेलन के इस सत्र में उपस्थित हुए।  

एमपी सरकार नया टैक्स नहीं लगाएगी। जनता की आय बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे: सीएम यादव

भोपाल  एमपी सरकार नया टैक्स नहीं लगाएगी। जनता की आय बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने यह बात एक निजी कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, सरकार अपने संसाधनों का हर संभव अधिक से अधिक उपयोग करेगी और जनता को सरकारी योजनाओं के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा, ताकि वे सरकार के जरिए स्वयं की आय बढ़ा सके। सरकार इस काम में जो मदद कर सकती है, वे सभी मदद पहुंचाई जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि जीआइएस की सफलता को लेकर सीएम का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि भोपाल की प्राकृतिक संपदा और इसके पुरा-इतिहास के संवर्धन में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। भोपाल को एक सुंदर मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाएंगे। भोजपुर मंदिर रोड पर ‘भोज द्वार’ और इंदौर-उज्जैन मार्ग पर विक्रमादित्य के सुशासन के प्रतीक स्वरूप ‘विक्रम द्वार’ बनाए जाएंगे। भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि हम विरासत से विकास की ओर बढ़ रहे हैं। अगले 5 साल में हम प्रदेश का सालाना बजट दोगुना कर देंगे। कोई नया टैक्स नहीं लगाएंगे बल्कि नागरिकों की आय बढ़ाकर अपने बजट को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस में विश्व से उद्योगपति भोपाल आए। भोपाल आकर उन सभी को आनंद आ गया, क्योंकि यहां की झीलें, तालाब और यहां की संस्कृति जीवंत हैं, यही हमारी पूंजी है। उन्होंने कहा कि भोपाल देश का एकमात्र राजधानी क्षेत्र है जहाँ मानव और बाघों के सह-अस्तित्व का अनोखा और अद्वितीय उदाहरण विद्यमान है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद गौतम के पात्र उत्तराधिकारी को शासकीय सेवा में लेने के निर्देश पुलिस महानिदेशक को दिए

मऊगंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर मऊगंज जिले के गौतम परिवार को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के अंतर्गत एक करोड़ रूपये की राशि का चेक प्रदान किया। भारतीय स्टेट बैंक की पुलिस सेलरी पैकेज योजना में पुलिसकर्मियों को दी जाने वाली पूरक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा सुविधा के अनुसार परिवार को यह राशि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद गौतम के पात्र उत्तराधिकारी को शासकीय सेवा में लेने के निर्देश पुलिस महानिदेशक को दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि कर्तव्य निवर्हन के दौरान अपने प्राणों को उत्सर्ग करने वाले पुलिस उपनिरीक्षक रामचरण गौतम की पत्नी श्रीमती पुष्पा को चेक प्रदान करते हुए कहा कि राज्य शासन ने स्व. गौतम को शहीद का दर्जा देते हुए उनके आश्रितों को एक करोड़ रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की है। ग्राम गडरा जिला मऊगंज में कर्तव्य निर्वहन करते हुए इस माह पुलिस उप निरीक्षक रामचरण गौतम शहीद हुए। स्व. गौतम के परिवार को बीमा की अनुदान राशि का चेक सौंपे जाने के अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सीजीएम एसबीआई म.प्र./छ.ग चंद्रशेखर शर्मा, महाप्रबंधक अजिताभ पाराशर, महाप्रबंधक कुन्दन ज्योति, महाप्रबंधक मनोज कुमार सहित भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. गौतम की धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा और इस अवसर पर उपस्थित स्व. गौतम के पुत्र धीरेन्द्र और भतीजे सतीश से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधि का जो विधान था वह हुआ लेकिन राज्य शासन द्वारा स्व. रामचरण गौतम के परिवार को पूरा सहयोग दिया जाएगा।  

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