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पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को दी श्रद्धांजलि, राजस्थान-केंद्रीय कृषि मंत्री पहुंचे सिरसा-हरियाणा

जयपुर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने सोमवार को हरियाणा के डबवाली, सिरसा स्थित पैतृक गांव चौटाला पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं इनेलो सुप्रीमो स्वर्गीय ओमप्रकाश चौटाला को श्रद्धांजलि अर्पित की। शोकसभा में सम्मिलित होकर केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने शोक संतप्त परिवारजनों एवं समर्थकों से मुलाकात कर उन्हें संबल प्रदान किया। चौटाला का जीवन सेवा और संघर्ष का प्रतीक स्वर्गीय ओमप्रकाश चौटाला के योगदान को याद करते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि स्वर्गीय ओमप्रकाश चौटाला का जीवन किसानों, मजदूरों, गांव और गरीबों के हितों के लिए संघर्ष और सेवा का प्रतीक था। उन्होंने अपने कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी सोच के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए अतुलनीय कार्य किए। उनका योगदान देश और समाज में सदैव स्मरणीय रहेगा। परिजनों से मुलाकात केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने स्व. ओमप्रकाश चौटाला के परिजनों से मुलाकात की और दुःख की इस घड़ी में उनको संबल दिया। उन्होंने स्वर्गीय चौटाला के पुत्रों अजय सिंह, अभय सिंह, तथा पोते पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह से मिलकर संवेदनाएं व्यक्त की। विजिटर बुक में व्यक्त किए विचार केंद्रीय मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने चौटाला परिवार के निवास पर विजिटर बुक में स्वर्गीय ओमप्रकाश चौटाला के योगदान को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने लिखा कि स्वर्गीय चौटाला ने अपने जीवनकाल में जो कार्य किए, वे पीढ़ियों तक लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने रहेंगे।

व्यवस्थित और तय समय पर होगी आठवीं आर्थिक गणना, राजस्थान-जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन

जयपुर। राज्य में आठवीं आर्थिक गणना 2025-26 को व्यवस्थित एवं निर्धारित समयावधि में सम्पादित करने के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। सहायक निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि जिला स्तरीय समन्वय समित के अध्यक्ष जिला कलक्टर होंगे। डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि समिति में जिला पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिलापरिषद, समस्त उपखण्ड अधिकारी, मुख्य आयोजना अधिकारी, एसीपी सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक व प्रारम्भिक, उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, समस्त तहसीलदार, आयुक्त नगर निगम सदस्य होंगे। उन्होंने बताया कि संयुक्त निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी सदस्य सचिव होंगे। यह समिति एक अस्थाई समिति होगी जो आठवीं आर्थिक गणना की समाप्ति तक कार्यरत रहेगी।

मदन राठौड़ का गहलोत पर तंज, राजस्थान-अल्पमत सरकार के सहयोगी विधायकों को खुश करने बनाए थे नए जिले

जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि गहलोत अपनी अल्पमत सरकार को सहयोग करने वाले विधायकों को खुश करने के लिए आनन-फानन में नए जिलों की घोषणा कर दी थी। इतना ही नहीं, गहलोत ने पूर्व सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में समिति तो गठित की, लेकिन नए जिलों की घोषणा के बाद स्वयं रामलुभाया ने आश्चर्य व्यक्त किया था। इसका मतलब साफ है कि गहलोत ने समिति को भी अंधेरे में रखकर विधायकों को खुश करने के लिए जिलों की रेवडियां बांटी थी ताकि उनकी अस्थिर सरकार को सहारा मिल सकें। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा सरकार ने सभी जिलों की समीक्षा करने के बाद भूपपूर्व प्रशासनिक अधिकारी ललित के पंवार की अध्यक्षता में समिति का गठन किया। मंत्रीमंडल की समिति बनाई और इनकी रिपोर्ट के बाद कैबिनेट बैठक में 9 जिलें एवं 3 संभाग समाप्त करने का प्रस्ताव किया है। समिति के साथ भाजपा सरकार ने राजस्थान की भौगोलिक, सांस्कृतिक और जनसंख्या के आधार पर जनता की मांग को देखते हुए 41 जिले और सात संभाग रखने का फैसला किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार ने नए जिले तो घोषित कर दिए, लेकिन उन जिलों को चलाने के लिए ना तो आर्थिक प्रबंधन किया और ना ही उनके कार्यालय संसाधन आदि की व्यवस्था की। गहलोत तो 5 साल तक सरकार बचाने में जुटे रहे। सचिन पायलट के बीच शीत युद्ध जनता के सामने है। गहलोत और पायलट दोनों अपने खेमों के विधायकों को लेकर होटलों में कैम्प चलाते रहे। ऐसे में गहलोत विधायकों को संतुष्ट करने में जुटे रहे और गहलोत सरकार ने बिना गहन चिंतन किये चुनावी आचार संहिता लगने से एक दिन पूर्व अचानक नए जिलों की घोषणा कर दी। गहलोत ने ऐसे भी नए जिले बना दिए जिसकी कभी किसी ने कोई मांग तक नहीं की। क्या था अशोक गहलोत ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई थी जिसको दर्जनों जिलों के प्रतिवेदन प्राप्त हुए। इन्हीं प्रतिवेदनों का परीक्षण कर समिति ने अपनी रिपोर्ट दी,. जिसके आधार पर नए जिले बनाने का निर्णय किया गया। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया, परन्तु प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन उस अनुपात में नहीं हुआ था। राजस्थान से छोटा होने के बाद भी मध्य प्रदेश में 53 जिले हैं। नए जिलों के गठन से पूर्व राजस्थान में हर जिले की औसत आबाादी 35.42 लाख व क्षेत्रफल 12,147 वर्ग किलोमीटर था (हालांकि त्रिपुरा राज्य का क्षेत्रफल 10,492 वर्ग किलोमीटर, गोवा राज्य का क्षेत्रफल 3,702 वर्ग किलोमीटर, दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश का क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किलोमीटर है) जबकि नए जिले बनने के बाद जिलों की औसत आबादी 15.35 लाख व क्षेत्रफल 5268 वर्ग किलोमीटर हो गया था। जिले की आबादी व क्षेत्र कम होने से शासन-प्रशासन की पहुंच बेहतर होती है एवं सुविधाओं व योजनाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित हो पाती है। छोटी प्रशासनिक इकाई होने पर जनता की प्रतिवेदनाओं का निस्तारण भी शीघ्रता से होता है। भाजपा सरकार द्वारा जिन जिलों को छोटा होने का तर्क देकर रद्द किया है वो भी अनुचित है। जिले का आकार वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। हमारे पड़ोसी राज्यों के जिले जैसे गुजरात के डांग (2 लाख 29 हजार), पोरबंदर (5 लाख 85 हजार) एवं नर्बदा (5 लाख 91 हजार), हरियाणा के पंचकुला (5 लाख 59 हजार) एवं चरखी दादरी (लगभग 5 लाख 1 हजार), पंजाब के मलेरकोटला (लगभग 4 लाख 30 हजार), बरनाला(5 लाख 96 हजार) एवं फतेहगढ़ साहिब (6 लाख) जैसे कम आबादी वाले जिले हैं। कम आबादी वाले जिलों में सरकार की प्लानिंग की सफलता भी ज्यादा होती है। छोटे जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति को बहाल रखना भी आसान होता है क्योंकि वहां पुलिस की पहुंच अधिक होती है। परिस्थितियों के आधार पर जिलों की आबादी में भी अंतर होना स्वभाविक है जैसे उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले की आबादी करीब 60 लाख है जबकि चित्रकूट जिले की आबादी 10 लाख है। परन्तु सरकार के लिए प्रशासनिक दृष्टि से छोटे जिले ही बेहतर लगते हैं। सरकार की तरफ से एक तर्क यह दिया जा रहा है कि एक जिले में कम से कम 3 विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए जबकि भाजपा द्वारा 2007 में बनाए गए प्रतापगढ़ मे परिसीमन के बावजूद भी केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं। सरकार द्वारा जहां कम दूरी का तर्क दिया जा रहा है वो भी आश्चर्यजनक है क्योंकि डीग की भरतपुर से दूरी केवल 38 किमी है जिसे रखा गया है परन्तु सांचौर से जालोर की दूरी 135 किमी एवंअनूपगढ़ से गंगानगर की दूरी 125 किमी होने के बावजूद उन जिलों को रद्द कर दिया गया। हमारी सरकार ने केवल जिलों की घोषणा ही नहीं की बल्कि वहां कलेक्टर, एसपी समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति दी एवं हर जिले को संसाधनों के लिए बजट भी दिया। हम भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए इस अदूरदर्शी एवं राजनीतिक प्रतिशोध के कारण लिए गए निर्णय की निंदा करते हैं। “”हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है।    हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई…””     — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) December 28, 2024

विकास कार्यों से क्षेत्र में बदलाव और जनता का बढ़ा विश्वास, राजस्थान-मुख्यमंत्री ने जोधपुर एवं उदयपुर के विधायकों के साथ की बैठक

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन से सर्वांगीण विकास करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकसित राजस्थान के संकल्प को साकार करने के लिए आधारभूत विकास के साथ ही प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य समाज के अन्तिम व्यक्ति को राहत पहुंचाते हुए उत्थान और कल्याण सुनिश्चित करना है। शर्मा रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर जोधपुर एवं उदयपुर संभाग के विधायकों के साथ बजट वर्ष 2024-25 में की गई घोषणाओं के क्रियान्वयन को लेकर आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करें। इसके लिए जिला प्रशासन के साथ निरन्तर बैठक कर विकास कार्यों की प्रगति का फीडबैक भी लेवें। उन्होंने कहा कि इन घोषणाओं को धरातल पर उतारना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने जोधपुर एवं उदयपुर संभाग के विधायकों से बजट घोषणाओं केे विकास कार्यों की वित्तीय स्वीकृति, जमीन आवंटन और प्रगतिरत कार्यों के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विधायकों से कहा कि आमजन के कल्याण एवं क्षेत्र की आवश्यकता के अनुरूप जनहित के विकास कार्यों की सूची बनाकर भेजें ताकि इन्हें आगामी बजट में शामिल किया जा सके। मुख्यमंत्री सद्भावना केन्द्रों का करें प्रभावी संचालन— मुख्यमंत्री ने विधायकगणों को मुख्यमंत्री सद्भावना केन्द्रों के संचालन, अटल ज्ञान केन्द्रों की स्थापना और खेलो इंडिया अभियान की तैयारी के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देंश दिए। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार के कार्यों, योजनाओं, नीतियों व उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए। श्री शर्मा ने कहा कि विधायकों के कार्यों से ही क्षेत्र में बदलाव आता है और जनता का विश्वास कायम होता है। उन्होंने विधायकों के सुझावों का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत निर्माण कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। निवेश प्रस्तावों के उठाएं आवश्यक कदम— श्री शर्मा ने विधायकों से कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के तहत हुए एमओयू को अपने क्षेत्र में धरातल पर उतारने के लिए जिला कलक्टर के साथ निरन्तर बैठक करें। साथ ही, प्रत्येक जिले में पंच गौरव कार्यक्रम के तहत एक जिला-एक उपज, एक जिला-एक प्रजाति, एक जिला-एक उत्पाद, एक जिला-एक पर्यटन स्थल और एक जिला-एक खेल की नियमित मॉनिटरिंग कर इन्हें बढ़ावा देवें। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जारी 10 नवीन नीतियों का भी प्रचार-प्रसार किया जाए। लखपति दीदी योजना के तहत लाभार्थियों से संवाद स्थापित कर निरन्तर कार्यक्रम की समीक्षा करें। इस अवसर पर जोधपुर व उदयपुर संभाग से आने वाले मंत्रिगण एवं विधायकगण उपस्थित रहे।

‘रसायन रहित बागवानी ही कारगर, प्राकृतिक उद्यानिकी को बढ़ाएं: राज्यपाल’, राजस्थान-अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ की संगोष्ठी

जयपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कृषि उद्यानिकी के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिए जाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को देश में रसायन रहित कृषि के लिए वातावरण निर्माण किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से रोग बढ़ रहे, धरती की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो रही है। उन्होंने उद्यानिकी फसलों की संरक्षित खेती के लिए कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने पानी बचाकर उसके निर्माण के लिए भी देशभर में कार्य करने का आह्वान किया।राज्यपाल श्री बागडे रविवार को अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ द्वारा “उद्यानिकी फसलों के संरक्षण”  विषयक आयोजित 16 वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कम पानी से होने वाली फसलों, फल, फसलों को प्राकृतिक प्रकोप से बचाने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए जाने पर भी जोर दिया।  उन्होंने सभी कृषि विश्वविद्यालयों में  सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए भी आवश्यक रूप से कार्य करने की आवश्यकता जताई।राज्यपाल ने प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन द्वारा 2008 में प्रस्तुत कृषि सुधारों की बनी समिति के सुझावों पर चर्चा करते हुए कहा कि लाभकारी कृषि के लिए केंद्र सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कृषि उद्यानिकी के प्राचीन ज्ञान के आलोक में कृषि की नवीन तकनीक से खेती को लाभकारी किए जाने पर जोर दिया। श्री बागडे ने कहा कि हमारे यहां धीरे धीरे जंगल कम होता जा रहा है। पहले अनाज जब नहीं होता था और खेती की पैदावार नहीं थी तब उद्यानिकी फसलों पर ही मनुष्य निर्भर था। पर धीरे धीरे इस दिशा में ध्यान नहीं देने के कारण जंगलों में बहुत सी उद्यानिकी फसलें लोप हो गई। उन्होंने स्थान विशेष की जलवायु के अनुरूप उद्यानिकी फसलों के अधिकाधिक उत्पादन के लिए कार्य किए जाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने आरंभ में विश्वविद्यालय के अंतर्गत सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी फॉर टिश्यू कल्चर का शिलान्यास किया। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत गेहूं और अन्य नवीन कृषि उत्पाद प्रौद्योगिकी का भी शुभारंभ किया।  वहीं उन्होंने माइक्रोस्कोप से फसलों में सूक्ष्म कीट परीक्षण भी किया और विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का लोकार्पण किया। आरंभ में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलराज सिंह ने संरक्षित खेती के साथ राष्ट्रीय सिंपोजियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर पद्मश्री डा. बी. एस. ढिल्लो, अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष और बागवानी विश्वविद्यालय,  उत्तराखंड के  कुलपति प्रो. परविंदर कौशल, अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ के कार्यकारी सचिव प्रो. दिनेश कुमार ने भी विचार रखे। सभी का आभार डा. एन. के. गुप्ता ने जताया।

‘प्रदेश का सर्वांगीण विकास राज्य सरकार का एकमात्र ध्येय’, राजस्थान-मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ली कोटा संभाग के विधायकों की बैठक

जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश का सर्वांगीण विकास और प्रदेशवासियों का कल्याण ही राज्य सरकार का एकमात्र ध्येय है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस ध्येय की पूर्ति में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के विधायक की अहम भूमिका है इसलिए एक जनप्रतिनिधि के रूप में विधायकों को समर्पण भाव के साथ जनहित के कार्यों के लिए तत्पर रहना चाहिए। शर्मा शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर कोटा संभाग के विधायकों के साथ पिछले बजट की घोषणाओं के क्रियान्वयन और आगामी बजट की तैयारियों से संबंधित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक विधायक को उसके विधानसभा क्षेत्र की जनता बहुत आकांक्षाओं और उम्मीदों के साथ चुनकर भेजती है, ऐसे में जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह जनता के भरोसे पर खरा उतरे। मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रत्येक विधायक से उनके विधानसभा क्षेत्र से संबंधित बजट घोषणाओं के कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले बजट में राज्य के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को ढेरों सौगातें दी हैं और यह आवश्यक है कि आगामी बजट से पूर्व पिछले बजट में की गई घोषणाओं का धरातल पर उतरना सुनिश्चित हो। श्री शर्मा ने कहा कि विधायकगण अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते हुए बजट घोषणाओं से जुड़े कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विधायकों के साथ समन्वय बनाकर आधारभूत विकास के कार्यों में वित्तीय स्वीकृति से लेकर जमीन आवंटन, डीपीआर तैयार होने और निर्माण कार्य प्रारंभ होने तक प्रत्येक चरण पर समयबद्ध रूप से कार्यों की क्रियान्विति सुनिश्चित करे। आगामी बजट के लिए जनहित से जुड़े कार्यों की सूची बनाकर भेजें मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने दूरगामी सोच के साथ पिछला बजट प्रस्तुत किया था, जिसकी हर तरफ सराहना हुई। उन्होंने कहा कि आगामी बजट को भी राज्य की जनता के लिए सार्थक और समावेशी बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में जनहित से जुड़े कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर सूची बनाकर भेजें, ताकि उन कार्यों को आगामी बजट में शामिल किया जा सके। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर, ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री हीरालाल नागर, विधायक श्री प्रताप सिंह सिंघवी, श्री संदीप शर्मा, श्री कालूराम, श्री कंवरलाल, श्री राधेश्याम बैरवा, श्री ललित मीणा, श्रीमती कल्पना देवी, श्री गोविंद प्रसाद, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) श्री शिखर अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।

‘सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करेंगे’, राजस्थान-नेता प्रतिपक्ष जूली ने नौ जिले खत्म करने पर सरकार को घेरा

अलवर। राजस्थान सरकार ने शनिवार को 9 नए जिलों को समाप्त कर दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे लेकर सरकार पर हमला बोला। जूली ने कहा कि इसी वर्ष अगस्त में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में 5 नए छोटे जिलों की घोषणा की थी। जबकि, राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है, वहां भाजपा की सरकार ने 9 जिलों को समाप्त कर दिया। यह फैसला निंदनीय और जनविरोधी है। कांग्रेस पार्टी इस निर्णय का कड़ा विरोध करती है और आने वाले दिनों में सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करेगी। समिति की रिपोर्ट पर बनाए गए थे जिले टीकाराम जूली ने बताया कि जिलों के गठन का आधार कोई राजनीतिक नहीं, बल्कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को बनाई गई समिति की रिपोर्ट थी। इस समिति को दर्जनों जिलों से प्रतिवेदन प्राप्त हुए थे। इन्हीं प्रतिवेदनों का परीक्षण कर समिति ने अपनी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर नए जिलों के गठन का निर्णय किया गया। राजस्थान में नए जिलों की आवश्यकता जूली ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि राजस्थान में नए जिलों की आवश्यकता नहीं है। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया, लेकिन प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन उस अनुपात में नहीं हुआ। राजस्थान से छोटा होने के बावजूद मध्य प्रदेश में 53 जिले हैं। नए जिलों के गठन के बाद राजस्थान में प्रत्येक जिले की औसत आबादी 15.35 लाख और क्षेत्रफल 5268 वर्ग किलोमीटर हो गया था। इसके विपरीत, जिलों के गठन से पहले औसत आबादी 35.42 लाख और क्षेत्रफल 12,147 वर्ग किलोमीटर था। छोटी प्रशासनिक इकाइयों से शासन-प्रशासन की पहुंच बेहतर होती है और सुविधाओं एवं योजनाओं की डिलीवरी प्रभावी रूप से सुनिश्चित की जा सकती है। भाजपा का निर्णय गलत नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार द्वारा जिलों को छोटा होने का तर्क देकर समाप्त करने को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि गुजरात, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में कई ऐसे जिले हैं जिनकी आबादी राजस्थान के प्रस्तावित जिलों से भी कम है। जैसे, गुजरात के डांग जिले की आबादी मात्र 2.25 लाख है, जबकि हरियाणा के पंचकुला और पंजाब के मलेरकोटला की आबादी भी 5-6 लाख के आसपास है। जूली ने भाजपा के 2007 के प्रतापगढ़ जिले के निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन के बावजूद भी वहां केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं। यह तर्क कि एक जिले में तीन से अधिक विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए, पूरी तरह से निराधार है। दूरी का तर्क भी विरोधाभासी नेता प्रतिपक्ष ने जिलों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समिति के अध्यक्ष पूर्व आईएएस अधिकारी ललित के पंवार लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में इस निर्णय में राजनीतिक दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा दी गई दूरी का तर्क भी विरोधाभासी है। डीग, जो भरतपुर से केवल 38 किलोमीटर दूर है, उसे जिला बनाए रखा है, लेकिन सांचौर, जो जालोर से 135 किलोमीटर दूर है, और अनूपगढ़, जो गंगानगर से 125 किलोमीटर दूर है, उन्हें समाप्त कर दिया गया। निर्माण के लिए बजट भी दिया था जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने न केवल नए जिलों की घोषणा की थी, बल्कि वहां कलेक्टर, एसपी समेत जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति की थी और नए कार्यालयों के निर्माण के लिए बजट भी दिया था। भाजपा सरकार के इस अदूरदर्शी फैसले से जनता में आक्रोश और निराशा का माहौल है। जनता से अपील की है कि वह भाजपा सरकार की गलत नीतियों का जवाब वोट के माध्यम से दे।

‘संविधान हमारे लिए गाइडिंग लाइट’, राजस्थान-मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सुनी प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’

जयपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 117वें संस्करण में देशवासियों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सीएमआर पर मंत्रिपरिषद के सदस्य, सांसद एवं विधायकगण के साथ प्रधानमंत्री के सम्बोधन को सुना। मोदी ने कहा कि 2025 में 26 जनवरी को संविधान लागू होने के 75 साल पूरे हो रहे हैं। ये हमारे लिए गर्व की बात हैं। संविधान हमारे लिए गाइडिंग लाइट है, हमारा मार्गदर्शक है। संविधान की वजह से ही आज मैं आपसे बात कर पा रहा हूं। उन्होंने कहा कि इस साल 26 नवंबर को संविधान दिवस से एक साल तक चलने वाली कई एक्टीविटिज शुरू हुई हैं। देश के नागरिकों को संविधान की विरासत से जोड़ने के लिए constitution75.com नाम से एक खास वेबसाइट भी बनाई गई है। इसमें आप संविधान की प्रस्तावना पढ़कर अपना वीडियो अपलोड  कर सकते हैं। हर क्षेत्र, हर वर्ग का हो रहा विकास – मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा— मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ में उद्बोधन सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणादायी होते हैं। उनको सुनकर नवीन ऊर्जा का संचार होता है। देश निरन्तर उपलब्धियां हासिल कर रहा है, उसको जानकर हमें गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के पथ पर तेजी से अग्रसर है। स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, वाणिज्य, रक्षा, तकनीक एवं सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति अर्जित की है। श्री शर्मा ने कहा कि श्री मोदी के विजन से विकास का इंजन दोगुनी रफ्तार से दौड़ रहा है, जिससे युवा, महिला, किसान एवं गरीब का उत्थान एवं कल्याण सुनिश्चित हो रहा है। अनेकता में एकता का संदेश देता है महाकुंभ- प्रधानमंत्री ने कहा कि जनवरी की 13 तारीख से प्रयागराज में महाकुंभ शुरू होने जा रहा है। महाकुंभ की विशेषता केवल इसकी विशालता में ही नहीं है बल्कि इसकी विविधता में भी है। इस आयोजन में करोड़ों लोग एक साथ एकत्रित होते हैं। लाखों संत, सैकड़ों संप्रदाय, अनेकों अखाड़े, हर कोई इस आयोजन का हिस्सा बनता है। कहीं कोई भेदभाव नहीं दिखता है, कोई बड़ा और छोटा नहीं होता है। अनेकता में एकता का ऐसा दृश्य विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने आमजन से आग्रह किया कि जब वे कुंभ में शामिल हों, तो एकता के इस संकल्प को अपने साथ लेकर वापस आयें। श्री मोदी ने बताया कि इस बार प्रयागराज में देश और दुनिया के श्रद्धालु डिजिटल महाकुंभ के भी साक्षी बनेंगे। मलेरिया, कैंसर के विरूद्ध लड़ाई में भारत की बड़ी उपलब्धियां- श्री मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की दो उपलब्धियां आज विश्व का ध्यान आकर्षित कर रही है। पहली उपलब्धि है मलेरिया से लड़ाई में। उन्होंने कहा कि 4 हजार से अधिक वर्षों तक मानवता के लिए मलेरिया बहुत बड़ी स्वास्थ्य चुनौती रहा है। देशवासियों ने इस चुनौती का दृढ़ता से सामना किया है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत मंे 2015 से 2023 के बीच मलेरिया के मामलों और मौतों में 80 प्रतिशत की कमी आई है। यह सफलता जन-जन की भागीदारी से प्राप्त हो सकी है। उन्होंने कहा कि हमारी दृढ़शक्ति का दूसरा उदाहरण कैंसर के विरूद्ध लड़ाई है। जनजागृति एवं आयुष्मान भारत योजना से कैंसर के विरूद्ध लड़ाई में अपेक्षित सफलता मिली है। आयुष्मान भारत योजना ने पैसे की परेशानी को काफी हद तक कम किया है और लगभग 90 प्रतिशत मरीज समय पर कैंसर का इलाज शुरू करवा पा रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि कैंसर के मुकाबले के लिए एक ही मंत्र है-अवेयरनेस, एक्शन और एश्योरेंस। छोटी शुरूआत से ही बड़े परिवर्तन संभव- प्रधानमंत्री ने उड़ीसा के कालाहाड़ी का जिक्र करते हुए यहां के किसानों द्वारा स्थापित किए गए एफपीओ (किसान उत्पाद संघ) की सफलता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कम पानी और कम संसाधन होने के बावजूद यहां गोलाकुण्डा ब्लॉक में दस किसान एफपीओ की स्थापना कर ‘सब्जी क्रांति’ लाए। आज इससे 200 किसान जुड़े हुए हैं, जिसमें से 45 महिलाएं हैं। इसका टर्नओवर डेढ़ करोड़ से ज्यादा हो गया है। उन्होंने एफपीओ को प्रोत्साहन देने का आग्रह करते हुए कहा कि छोटी शुरूआत से ही बड़े परिवर्तन संभव है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की सांस्कृतिक विरासत, फिल्म एवं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की क्षमता, फिल्मी जगत की कई हस्तियों के योगदान और बस्तर ओलम्पिक पर भी विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।

गौशालाओं और डेयरियों के गौवंशों का शीतकालीन एवं सामान्य स्वास्थ्य प्रबंधन करें, राजस्थान-गोपालन सचिव डॉ. समित शर्मा ने दिए निर्देश

जयपुर। प्रदेश की गौशालाओं और डेयरियों में संधारित गौवंश के शीतकालीन स्वास्थ्य एवं सामान्य प्रबंधन के लिए गोपालन विभाग ने एडवायजरी जारी की है। पशुपालन, गोपालन और डेयरी सचिव डॉ समित शर्मा ने दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा है कि राजस्थान के शुष्क मरूस्थलीय, मैदानी तथा पठारी क्षेत्रों में अत्यधिक ठंडे तापमान, कम आर्द्रता और सीमित वनस्पति के कारण कठोर सर्दी पड़ती है। इस अवधि के दौरान गौवंश के उचित वैज्ञानिक प्रबंधन से उनके स्वास्थ्य, उत्पादकता और अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इसलिए तीक्ष्ण सर्दी, पाला एवं शीत लहर की स्थिति को देखते हुए गोपालन विभाग गौवंश के लिए शीत ऋतु में प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश जारी करता है। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी है कि वे सर्दी के मौसम में अपने पशुओं का विशेष ध्यान रखें। उन्हें ठंड से बचाने के लिए शेड में रखकर उन्हें चारों तरफ से कंबल या जूट के बोरों से ढकें। गौ आश्रयों को गर्म रखने के लिए सूखी घास, पुआल या अन्य तापरोधी सामग्री का इस्तेमाल करें। उन्होंने बूढ़े, कमजोर एवं छोटे बछड़ों का विशेष ध्यान रखने की सलाह देते हुए कहा कि शीत ऋतु इनके लिए विशेष रूप से कठिन होती है। इसलिए नवजात बछड़ों को दूध पर्याप्त मात्रा में पिलाया जाना चाहिए और उन्हें गर्म रखने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। डॉ. शर्मा ने कहा कि गौवंश के शरीर को गरम बनाए रखने में मददगार सांद्र आहार  जैसे चापड़, खल, बांटा, गुड़ आदि ऊर्जा युक्त पशु आहार खिलाना चाहिए। निर्जलीकरण को रोकने के लिए ताजा एवं गुनगुना पानी पिलाना चाहिए और उचित मात्रा में आवश्यकतानुसार पूरक आहार भी खिलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमार गौवंश के लिए अलग बाड़े की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि स्वस्थ गौवंश को संक्रमण से बचाया जा सके। उन्होंने बीमारियों से रोकथाम के लिए गौवंश को उचित उपचार एवं टीकाकरण की भी सलाह दी। डॉ शर्मा ने कहा कि गौवंश के स्वास्थ्य की नियमित रूप से निगरानी के लिए पशु आहार, स्वास्थ्य और उत्पादकता का सटीक संधारण किया जाना चाहिए। शासन सचिव ने विभाग के जिला अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे गोष्ठियों, चौपाल, सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जैसे विभिन्न माध्यमों से गौशाला संचालकों और गोपालकों को नियमित रूप से जागरूक करते रहें।

नवगठित जिलों एवं संभागों का पुनर्निर्धारण समान पात्रता परीक्षा स्कोर 3 वर्ष तक वैध, राजस्थान-मंत्रिमण्डल की बैठक में लिए महत्वपूर्ण निर्णय

जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में कर्मचारी कल्याण के साथ-साथ युवाओं के हित, प्रदेश में सुशासन और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसले किए गए। संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने पत्रकार वार्ता में बताया कि कैबिनेट ने पिछली सरकार के समय में गठित जिलों और संभागों का पुनः निर्धारण किया है, जिसके बाद अब प्रदेश में कुल 7 संभाग और 41 जिले होंगे। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी वर्ष में प्रदेश में 17 नवीन जिले एवं 3 नवीन संभाग बनाने का निर्णय लिया था, जिसके क्रम में राजस्व विभाग द्वारा दिनांक 5 अगस्त 2023 को अधिसूचना जारी कर जिलों व संभागों का सृजन किया गया था। तीन नए जिलों की घोषणा विधानसभा चुनाव-2023 की आचार संहिता से एक दिन पहले की गई, जिनकी अधिसूचना भी जारी नहीं हो सकी थी। पूर्ववर्ती सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए किया गठन श्री पटेल ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने नवीन जिलों एवं संभागों का गठन पूरी तरह से राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया। इसमें वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, प्रशासनिक आवश्यकता, कानून व्यवस्था, सांस्कृतिक सामंजस्य आदि किसी भी महत्वपूर्ण बिन्दु को ध्यान में नहीं रखा गया। नए जिलों के लिए पिछली सरकार ने कार्यालयों में न तो आवश्यक पद सृजित किए और न ही कार्यालय भवन बनवाए। बजट एवं अन्य सुविधायें भी उपलब्ध नहीं कराई गई। पुनर्निर्धारण बाद भी 8 नए जिले रहेंगे यथावत उन्होंने कहा कि गत सरकार के इस अविवेकपूर्ण निर्णय की समीक्षा करने हेतु राज्य सरकार द्वारा एक मंत्रिमण्डलीय उप-समिति और इसके सहयोग के लिए सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. ललित के. पंवार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। विशेषज्ञ समिति द्वारा नवगठित जिलों एवं संभागों के पुनर्निर्धारण के संबंध में तैयार की गई रिपोर्ट एवं सिफारिशें मंत्रिमण्डलीय उप-समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई। समिति द्वारा प्रस्तुत सिफारिशों पर विचार करते हुए नए सृजित जिलों में से 9 जिलों अनूपगढ़, दूदू, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, केकड़ी, नीम का थाना, सांचौर व शाहपुरा तथा नवसृजित 3 संभागों बांसवाड़ा, पाली, सीकर को नहीं रखने का निर्णय मंत्रिमण्डल द्वारा लिया गया है। आचार संहिता से ठीक पहले घोषित 3 नए जिलों मालपुरा, सुजानगढ़ और कुचामन सिटी को भी निरस्त करने का निर्णय राज्य मंत्रिमण्डल ने लिया है। जिला परिषदों, ग्राम पंचायतों का होगा पुनर्गठन संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि मंत्रिमण्डल के इस निर्णय के बाद अब राजस्थान में कुल 7 संभाग एवं 41 जिले हो जाएंगे। यथावत रखे गए 8 नए जिलों फलौदी, बालोतरा, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन और सलूम्बर में प्रशासनिक ढांचा तैयार करने के लिए राज्य सरकार सभी जरूरी वित्तीय संसाधन एवं अन्य सुविधाएं मुहैया कराएगी। इससे इन नए जिलों में रहने वाले आमजन को इन जिलों के गठन का लाभ वास्तविक रूप में मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि अब जिला परिषदों, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों का भी पुनर्गठन किया जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री सुमित गोदारा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 के नियम 14 की अनुसूची-1 में संशोधन, राजस्थान अधीनस्थ एवं लिपिक वर्गीय सेवा (समान पात्रता परीक्षा) नियम, 2022 में सीईटी स्कोर की वैधता 3 वर्ष करने, पशुधन सहायक को पदोन्नति का तीसरा अवसर उपलब्ध करवाने एवं इस संवर्ग के पदनामों में परिवर्तन के लिए सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। एमएसीपी पर परिनिंदा के दण्ड का प्रभाव समाप्त श्री गोदारा ने बताया कि कार्मिकों के हित को ध्यान में रखते हुए मिनिमम एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एमएसीपी) के तहत देय वित्तीय उन्नयन में राजस्थान सिविल सेवा (सी.सी.ए.) नियम, 1958 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्यवाहियों में अधिरोपित परिनिंदा के दण्ड के प्रभाव को समाप्त करने का अनुमोदन किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में परिनिन्दा से दण्डित कार्मिक को 9, 18 एवं 27 वर्ष की नियमित सेवा पर देय वित्तीय उन्नयन का लाभ एमएसीपी की निर्धारित तिथि के एक वर्ष बाद मिल पाता है। उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमण्डल ने कार्मिकों को होने वाले आर्थिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए परिनिंदा के दण्ड के एमएएसपी पर प्रभाव को समाप्त करने के लिए राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 के नियम 14 की अनुसूची-1 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। इससे पहले राज्य सरकार द्वारा सीसीए नियमों के अंतर्गत अनुशासनिक कार्यवाहियों में अधिरोपित परिनिंदा के दण्ड का पदोन्नति पर प्रभाव भी समाप्त किया जा चुका है। अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, सीईटी स्कोर की वैधता 3 वर्ष तक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा कि राजस्थान अधीनस्थ एवं लिपिक वर्गीय सेवा (समान पात्रता परीक्षा) नियम, 2022 में सीईटी स्कोर की वैधता अब 1 वर्ष के बजाय 3 वर्ष के लिए रहेगी। इसके लिए नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि सीईटी स्कोर की वैधता एक वर्ष होने के कारण हर साल होने वाली अगली सीईटी परीक्षा में अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ती चली जा रही थी। अत्यधिक संख्या में आवेदन आने पर बोर्ड को वित्तीय भार और कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसलिए सीईटी स्कोर की वैधता अवधि 3 वर्ष करने का निर्णय लिया गया है, जिससे अभ्यर्थियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। गोदारा ने बताया कि राजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 2001 के अंतर्गत आने वाले छात्रावास अधीक्षक (पुरुष) ग्रेड-2 एवं छात्रावास अधीक्षक (महिला) ग्रेड-2 को समान पात्रता परीक्षा की अनुसूची-1 (स्नातक स्तर) में शामिल किया जा रहा है। इस संशोधन के फलस्वरूप जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के पद सीईटी में शामिल किए जा सकेंगे, जिससे परीक्षार्थियों को अधिक पदों पर चयन का अवसर प्राप्त होगा। पशुधन सहायक के पदनामों में परिवर्तन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने बताया कि राजस्थान पशुपालन अधीनस्थ सेवा नियम, 1977 के तकनीकी संवर्ग में पशुधन सहायक को पदोन्नति का तीसरा अवसर उपलब्ध करवाने और इस संवर्ग के पदनामों में परिवर्तन के लिए सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन के अनुसार तीसरी पदोन्नति का अवसर देने के लिए मुख्य पशुधन प्रसार अधिकारी का नवीन पद सृजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पशुधन सहायक का पदनाम अब पशुधन निरीक्षक, पशुचिकित्सा सहायक … Read more

सड़क सुरक्षा अभियान में जनवरी में होगा वाहनों का सघन निरीक्षण, राजस्थान-परिवहन एवं सड़क सुरक्षा सचिव ने दिए निर्देश

जयपुर। प्रदेश में नव वर्ष की शुरुआत के साथ पूरी जनवरी सड़क सुरक्षा माह मनाया जाएगा और इस माह के दौरान वाहनों का सघन निरीक्षण भी किया जाएगा। सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले एवं मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियमों की पालना नहीं करने वाले वाहनों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परिवहन विभाग द्वारा विशेष पहल कर सड़क सुरक्षा अभियान को जन-जन का अभियान बनाया जाएगा। शासन सचिव एवं परिवहन आयुक्त श्रीमती शुचि त्यागी ने शनिवार को परिवहन भवन में प्रदेश के सभी प्रादेशिक परिवहन अधिकारियों एवं अन्य उच्चाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर जनवरी माह में चलाए जाने वाले सड़क सुरक्षा अभियान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए चलाए जाएं विशेष अभियान – बैठक में परिवहन आयुक्त ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा  ने सड़क सुरक्षा के संबंध मे बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए थे। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन हम सभी की जिम्मेदारी है और यातायात नियमों की पालना के साथ नियमों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा के लिए 6E एजुकेशन, इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, इमरजेंसी केयर, इवेल्यूएशन, एन्गेजमेंट आधारित रणनीति के तहत कार्यवाही प्रारंभ की जाए। उन्होंने कहा कि जनवरी से सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं तथा इसके अन्तर्गत स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही, जनसाधारण को ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने का प्रयास जाए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा अभियान को जन-जन का अभियान बनाते हुए सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी भी दी जाए। साथ ही, जनसाधारण को ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। वाहनों का किया जाएगा सघन निरीक्षण श्रीमती त्यागी ने कहा कि सड़क सुरक्षा माह के दौरान वाहनों का सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियमों की पालना सुनिश्चित न करने वाले वाहनों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी प्रादेशिक परिवहन अधिकारियों को वाहनों के दस्तावेजों की जांच के भी निर्देश दिए।‌ उन्होंने ओवरलोडिंग, ओवरहैंगिंग, ओवरक्राउडिंग आदि के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र जांच सहित सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बैरिकेडिंग, साइन बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, सहित तमाम प्रबंध सुनिश्चित किया जाए जिससे दुर्घटनाओं की रोकथाम की जा सके। अनाधिकृत पार्किंग, सड़कों पर अनाधिकृत कट पर तुरंत कार्रवाई की जाए ताकि दुर्घटना की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने जिला प्रशासन से भी इस संबंध में विशेष अभियान चलाए जाने का आव्हान किया। त्यागी ने कहा कि यातायात नियमों की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। बैठक में अपर परिवहन आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव श्रीमती रेणु खंडेलवाल, अपर परिवहन आयुक्त सड़क सुरक्षा श्रीमती निधि सिंह, मुख्यालय के उच्चाधिकारी उपस्थित थे। साथ ही पूरे प्रदेश के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।

मूंग का खरीद लक्ष्य और अवधि बढ़ाएं, राजस्थान-मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय कृषि मंत्री को लिखा पत्र

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के किसानों के हित में मूंग के खरीद लक्ष्य को बढ़ाने सहित खरीद अवधि को भी 5 फरवरी तक बढ़ाने के संबंध में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर अनुरोध किया है। शर्मा ने राज्य में असमय हुई वर्षा एवं भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मूंग खरीद के लिए गुणवत्ता मापदण्डों में शिथिलता प्रदान करने के लिए भी केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री को पत्र लिखा है। इससे अधिकाधिक किसानों से मूंग की खरीद सुनिश्चित होने के साथ ही उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी।

कैबिनेट में परीक्षा समिति की सिफारिश पर विचार, राजस्थान-एसआई भर्ती पर आज फैसला संभव

जयपुर। राजस्थान पुलिस में एसआई भर्ती परीक्षा 2021 में नकल प्रकरण को लेकर राज्य सरकार आज फैसला कर सकती है। सूत्रों के अनुसार शनिवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में परीक्षा को लेकर बनी मंत्रिमंडलीय समिति की सिफारिश पर विचार होगा। इसमें तय होगा कि परीक्षा रद्द होगी या नहीं। इस भर्ती में भी पेपर लीक और नकल के आरोपों को लेकर एसओजी 50 से अधिक गिरफ्तारियां कर चुकी हैं, जिनमें प्रशिक्षणाधीन उप निरीक्षक भी शामिल हैं। राजस्थान में राजस्व अधिकारी (आरओ) एवं अधिशासी अधिकारी (ईओ)-2022 भर्ती परीक्षा में नकल और पेपरलीक प्रकरण में एसओजी ने शुक्रवार को दो कोर्ट कर्मचारियों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एसओजी के एडीजी वीके सिंह ने बताया कि इस मामले में नागौर के कुचेरा निवासी दीपक प्रजापत (26), रामप्रकाश जाट (26) और लूणकरणसर निवासी विकेश कुमार मान (28) को गिरफ्तार किया गया है। रामप्रकाश अभी उदयपुर की पोक्सो कोर्ट और विकेश जालोर की डीजे कोर्ट में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं। ब्लूटूथ से नकल कर परीक्षा पास करने का आरोप अभियुक्त दीपक पर आरोप है कि उसने परीक्षा में ब्लूटूथ से नकल कर परीक्षा पास की। रामप्रकाश और विकेश ने नकल में काम आई सिम उपलब्ध कराई। बता दें राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से 14 मई 2023 को हुई इस परीक्षा में 1.96 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। अंतिम परिणाम जारी होने से पहले ही एसओजी ने इसी साल 19 अक्टूबर को परीक्षा में नकल और पेपरलीक का खुलासा कर दिया था। अब तक 23 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार यह भर्ती रद्द कर दुबारा कराने का निर्णय कर चुकी है।

नहीं होंगे कार्यक्रम, राजस्थान-पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर 7 दिन का राजकीय शोक

जयपुर। राज्य सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर प्रदेश में सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। स्वर्गीय मनमोहन सिंह के सम्मान में राज्य में 26 दिसंबर, 2024 से 1 जनवरी 2025 तक सात दिन के राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे तथा आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन गुरुवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हो गया। भारत सरकार द्वारा स्व. डॉ. मनमोहन सिंह को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। अंतिम संस्कार के दिन सभी राजनयिक मिशनों एवं विदेशों में भी उच्चायोगों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे।

खतरों और रोकथाम के संभावित तरीकों की बढ़ेगी जागरूकता, राजस्थान-सरकार ने डीपफेक से बचाव की जारी की एडवाइजरी

जयपुर. राजस्थान सरकार ने डीपफेक- खतरों और जवाबी उपायों पर एक एडवाइजरी जारी की है, जिसका फोकस जमीनी स्तर पर आम जनता के बीच प्रभावी साइबर स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। एडवाइजरी के अनुसार पहचाने गए लक्षित दर्शकों या संभावित लाभार्थियों में व्यक्ति और संगठन दोनों शामिल हैं। यह एडवाइजरी “साइबर सुरक्षा: उभरती चुनौतियाँ” थीम के तहत मुख्य सचिवों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान साइबर सुरक्षा उपायों या कार्रवाई योग्य बिंदुओं के अनुरूप जारी की गई थी। एडवाइजरी में डीपफेक तकनीक को वीडियो, छवियों और यहां तक ​​कि ऑडियो में हेरफेर करने में एआई के अनुप्रयोग के रूप में समझाया गया है। डीपफेक तकनीक से जुड़े प्रमुख जोखिम गलत सूचना का प्रसार, धोखाधड़ी या घोटाले और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना हैं। एडवाइजरी में डीपफेक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों अनुप्रयोगों की पहचान की गई है। जबकि फिल्मों में विशेष प्रभाव उत्पन्न करने और आकर्षक या इंटरैक्टिव शैक्षिक सामग्री के रूप में सकारात्मक अनुप्रयोग देखे जा सकते हैं, इसके कई नकारात्मक उपयोग भी हैं। प्रतिरूपण के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी का जोखिम है, जनता की राय में हेरफेर करने के लिए गलत सूचना, साथ ही गैर-सहमति वाली स्पष्ट सामग्री के माध्यम से भावनात्मक और वित्तीय जबरन वसूली। डीपफेक तकनीक के बारे में निवारक उपाय संबंधित सलाह में कुछ निवारक कदमों पर भी प्रकाश डाला गया है, जिनका उल्लेख डीपफेक तकनीक और इसके नकारात्मक अनुप्रयोगों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए व्यक्तियों और संगठनों दोनों द्वारा किया जा सकता है। व्यक्तियों और संगठनों को सलाह दी जाती है कि वे हर जानकारी के लिए क्रॉस-रेफ़रेंसिंग करें और व्यक्तिगत जानकारी के मामले में अत्यधिक सावधानी बरतें। मल्टी-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन या MFA, मज़बूत गोपनीयता सेटिंग्स, सत्यापन प्रोटोकॉल और लगातार सुरक्षा ऑडिट जैसे कुछ उपाय आम जनता को डीपफेक तकनीक के दुष्प्रभावों से निपटने में सहायता कर सकते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर, आम जनता को डिजिटल स्पेस में कोई भी जानकारी साझा करते समय सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। संबंधित जानकारी के स्रोत की प्रामाणिकता का आकलन करने की सलाह दी जाती है। संगठनों के लिए विशिष्ट उपाय संबंधित सलाह में संगठनों के लिए विशेष रूप से कुछ निवारक उपाय भी दिए गए हैं। बड़ी मात्रा में कंपनी और ग्राहक डेटा से निपटने वाले संगठनों के लिए, डेटा के सुरक्षित उपयोग, भंडारण और हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन या MFA का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। संगठनों को संचार के एन्क्रिप्टेड तरीकों के उपयोग के साथ-साथ नियमित अंतराल पर सुरक्षा ऑडिट करने की भी सलाह दी जाती है। सलाह में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में संकट प्रबंधन योजना तैयार करने का भी सुझाव दिया गया है। आगे की सहायता और जानकारी के लिए, सलाह आम जनता के संदर्भ के लिए उपलब्ध है।

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