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प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका

टीबी मुक्त भारत के लिए मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों की सराहना की  प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें क्षयरोग मुक्त घोषित भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की सराहना की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल शासकीय प्रयासों से ही संभव नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही इसे साकार किया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि इस अभियान में सहयोग दें और टीबी मुक्त मध्यप्रदेश बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्व टीबी दिवस पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि सबकी मेहनत और सेवा भाव से ही मध्यप्रदेश क्षयरोग उन्मूलन की दिशा में इतनी तेज गति से आगे बढ़ा है। निक्षय मित्रों ने अपने स्तर पर आर्थिक और पोषण सहायता प्रदान कर मरीजों को नया जीवन दिया है, जो एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से हम टीबी मुक्त भारत का सपना साकार करेंगे। मध्यप्रदेश में 100 दिवसीय विशेष निक्षय शिविर अभियान के तहत 7 दिसंबर 2024 से 23 जिलों में गहन टीबी खोज और उपचार अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य उच्च टीबी बोझ वाले जिलों में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान, मृत्यु दर में कमी और नए मामलों को रोकना है। इस अभियान के तहत 78 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 21 हजार 430 नए टीबी मरीज चिन्हित (नोटिफाई) किए गए और उनका तुरंत उपचार शुरू कराया गया। डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। इस दौरान 19 हजार से अधिक निक्षय मित्रों ने 25 हजार से अधिक टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान की और 4 लाख से अधिक नागरिकों ने टीबी मुक्त भारत के संकल्प की शपथ ली। प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता के अंतर्गत 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका है। मध्यप्रदेश ने क्षयरोग (टीबी) उन्मूलन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त किया है। वर्ष 2020 में संभावित क्षयरोगी दर 532 प्रति लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 3031 प्रति लाख हो गई, जो रोगियों की शीघ्र पहचान और बेहतर निगरानी का प्रमाण है। वर्ष 2024 में 1 लाख 90 हजार क्षय रोगियों को खोजने के लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 81 हजार 85 (95%) रोगियों की पहचान की गई। प्रदेश में टीबी उपचार की सफलता दर 87% है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। गत 1 नवंबर 2024 से सभी अधिसूचित टीबी मरीजों को उपचार के दौरान एक हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जो पहले 500 रूपये प्रतिमाह थी। इसके अलावा, अधिसूचित जनजातीय क्षेत्रों में सभी खोजे गए टीबी रोगियों को 750 रूपये की एकमुश्त राशि भी प्रदान की जा रही है। प्रदेश की सभी जेलों में भी समय-समय पर आईसीएमआर की हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। बलगम के नमूने लेकर उन्हें सीबीनेट और टूनेट मशीनों द्वारा जांच की जाती है, जिससे जेलों में क्षयरोग के मामलों की शीघ्र पहचान हो रही है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नियमित जाँच और अंगदान को बढ़ावा देने का किया आह्वान

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी रोगों से बचा जा सकता है। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों से किडनी रोगों के प्रति जागरूक रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के प्रमुख कारण हैं। इसके नियंत्रण के लिए समय पर जांच और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं लेकिन अधिक मात्रा में पानी पीने से बचें। अपने आहार में किडनी के लिए अनुकूल फल और सब्जियाँ शामिल करें और भोजन में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मसालों का प्रयोग करें। नियमित रूप से व्यायाम करें और धूम्रपान व शराब के सेवन से बचें। साथ ही, चीनी और नमक के अधिक सेवन से परहेज करें ताकि किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित न हो। वर्तमान वर्ष में अब तक 1 लाख 76 हज़ार से अधिक डायलिसिस सत्र सफलतापूर्वक संपन्न उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सभी नागरिकों को उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार किडनी रोगियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और डायलिसिस सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 67 डायलिसिस इकाइयाँ कार्यरत हैं। इनमें 325 डायलिसिस मशीनों से मरीजों को राहत प्रदान की जा रही है। अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक 5058 मरीजों ने इन सेवाओं का लाभ लिया, और इस अवधि में 1,76,975 डायलिसिस सत्र सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। सभी शासकीय चिकित्सालयों में गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सेवा सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन वीडियो मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे राज्य स्तर से सभी डायलिसिस इकाइयों पर निगरानी रखी जा रही है। रोकथाम और प्रारंभिक पहचान पर जोर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त सभी मरीजों की नियमित सीकेडी जांच सुनिश्चित की जा रही है, ताकि इस बीमारी को प्रारंभिक अवस्था में पहचाना और नियंत्रित किया जा सके। सभी चिकित्सकों को भी इस विषय में जागरूक किया जा रहा है कि वे उच्च जोखिम वाले मरीजों की समय पर पहचान कर उचित मार्गदर्शन दें।उन्होंने नागरिकों से अंगदान को अपनाने की अपील की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार अंग प्रत्यारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं पर कार्य कर रही है, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को नया जीवन मिल सके। किडनी विकारों के कारण और बचाव दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन: दर्द कम करने वाली एनएसएआईडी और एनाल्जेसिक दवाएं अत्यधिक उपयोग से किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बिना चिकित्सक की सलाह के इनका लंबे समय तक सेवन न करें। अधिक नमक का सेवन: ज्यादा नमक या सोडियम युक्त आहार से रक्तचाप बढ़ता है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नमक की जगह जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग करें। प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ: अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड में सोडियम, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा अधिक होती है। इससे किडनी रोग का खतरा 24% तक बढ़ सकता है। इनकी जगह ताजा और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ अपनाएं। कम पानी पीना: शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा न होने से किडनी विषाक्त पदार्थों को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे क्षति का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, खासकर गर्म मौसम में या अधिक शारीरिक गतिविधि करने पर। नींद की कमी: अच्छी नींद संपूर्ण स्वास्थ्य और किडनी के सुचारू कार्य के लिए आवश्यक है। नींद-जागने का चक्र किडनी के कार्य भार को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर में संतुलन बना रहता है। अत्यधिक मांस का सेवन: प्रोटीन जरूरी है, लेकिन अधिक मात्रा में मांस खाने से किडनी पर दबाव बढ़ सकता है। संतुलित आहार का पालन करें और अपनी प्रोटीन आवश्यकताओं को ध्यान में रखें। अत्यधिक चीनी खाना: अधिक चीनी मोटापे को बढ़ाती है, जिससे उच्च रक्तचाप और मधुमेह का खतरा बढ़ता है। ये दोनों किडनी रोग के प्रमुख कारण हैं। धूम्रपान: धूम्रपान न केवल हृदय और फेफड़ों के लिए बल्कि किडनी के लिए भी हानिकारक है। धूम्रपान करने वालों में मूत्र में प्रोटीन बढ़ने की संभावना अधिक होती है, जो किडनी खराबी का संकेत हो सकता है। अत्यधिक शराब सेवन: ज्यादा शराब पीने से किडनी के कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ सकता है और रक्तचाप बढ़ सकता है, जो किडनी रोग का प्रमुख कारण है। निष्क्रिय जीवनशैली: नियमित व्यायाम से वजन, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखा जा सकता है, जिससे किडनी को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है। लंबे समय तक बैठे रहने से बचें और शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।  

जीरो कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र : मंत्री शुक्ला

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की विधानसभा में प्रस्तुत किया गया बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गरीब युवा, अन्नदाता और नारी (जीवायएएन) पर ध्यान के मंत्र पर फोकस के साथ ही धर्म और अध्यात्म की धरोहर को संरक्षित करने वाला है। मंत्री शुक्ला ने बजट में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अटल गृह ज्योति योजना के अंतर्गत 7132 करोड़ रुपए एवं कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत 447 करोड़ रुपए का प्रवाधान किये जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से किसान और आम नागरिक अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनेंगे। परिणामस्वरूप वर्ष 2047 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य की प्राप्ति में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण योगदान कर सकेगा। मंत्री शुक्ला ने कहा कि बजट में श्रीकृष्ण पाथेय योजना के साथ राम पथ गमन योजना के लिए भी समुचित राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सर्व-सुविधायुक्त वैचारिक अध्ययन केंद्र के रूप में गीता भवन बनाए जाने के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्णय का भी स्वागत किया है। मंत्री शुक्ला ने कहा कि इस बजट में फिर एक बार सरकार ने जनता पर बिना कोई कर लगाए बजट राशि को बढ़ाया है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यह बजट आने वाले वर्षों में समृद्ध मध्यप्रदेश के साथ विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।  

स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि, 23 हज़ार 535 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत 2025-26 का बजट सर्वसमावेशी और दूरदर्शी है। यह बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बजट में औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन जैसे सभी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इस वर्ष स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि कर कुल 23 हज़ार 535 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष की तुलना में 2,992 करोड़ रूपये अधिक है। यह स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तृत और सुदृढ़ बनाने में सहयोगी होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सर्व-हितकारी और विकासोन्मुखी बजट के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री (वित्त) जगदीश देवड़ा का आभार व्यक्त किया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास के लिए व्यापक बजटीय आवंटन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं उप मुख्यमंत्री (वित्त) देवड़ा के नेतृत्व में प्रस्तुत यह बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास का एक प्रभावी दस्तावेज है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। सरकार ने संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और अधोसंरचना विकास को भी समान रूप से प्राथमिकता दी है। प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्प और कला-संस्कृति को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाएँ शुरू की जा रही हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया गया है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को भव्यता प्रदान की जा सके। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास के लिए व्यापक बजटीय आवंटन किया गया है। ‘सीएम केयर योजना’ के तहत कैथ लैब और कैंसर उपचार सुविधाओं का किया जा रहा है विस्तार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आयुष्मान भारत योजना के लिए इस वर्ष 2,039 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में 1,000 संजीवनी और 1,059 जननी एम्बुलेंस संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से 22 लाख नागरिकों को आपातकालीन सेवाएँ प्रदान की गई हैं। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 249 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित नागरिकों के लिए ‘सीएम केयर योजना’ के तहत कैथ लैब और कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने व्यापक प्रयास किए हैं। इस वर्ष नीमच, मंदसौर और सिवनी में नए सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्रदेश में 400 एमबीबीएस और 252 पीजी सीटों की वृद्धि की गई है। रीवा जिला चिकित्सालय में 100 बिस्तरों का नया वार्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही, प्रदेश में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की योजना बनाई जा रही है। प्रत्येक विधानसभा में प्रस्तावित खेल स्टेडियमों में पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए बनाए जाएंगे हेलीपैड उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा’ की हर क्षेत्र में सहज उपलब्धता के लिये प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित खेल स्टेडियमों में हेलीपैड बनाए जाएंगे। सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य मानकों में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिये सरकार संकल्पित है। बजटीय प्रावधान और चिकित्सकीय, सहायक चिकित्सकीय अमले के प्रतिबद्ध और समर्पित प्रयासों से हम मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में आदर्श राज्य बनाने में सफल होंगे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में विभागीय विषयों की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विभागीय विषयों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में वेतन संरक्षा (पे-प्रोटेक्शन) के लाभ आवश्यक है जिससे चिकित्सा शिक्षकों का आर्थिक संतुलन प्रभावित न हो और कार्यक्षमता बनी रहे। उन्होंने पे-प्रोटेक्शन के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने नर्सिंग पदों पर भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने पर जोर दिया और कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन की कमी को शीघ्र दूर करना आवश्यक है। उन्होंने मेडिकल इक्विपमेंट की समय पर खरीदी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू प्रदाय के लिये स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, एमडी एमपीपीएचसीएल मयंक अग्रवाल उपस्थित रहे।  

राजीव शुक्ला भगवान राम के पुत्र लव के मंदिर पहुंचे , इस कट्टर इस्लामिक देश में है मौजूद

इस्लामाबाद  बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला पाकिस्तान पहुंचे हैं। उनका यह दौरा पाकिस्तान में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान हुआ है। इस दौरान उन्होंने लाहौर में स्थित भगवान राम के पुत्र लव की समाधि पर भी पहुंचे। राजीव शुक्ला ने उनकी समाधि पर पूरा-अर्चना करते हुए तस्वीर भी पोस्ट की है। इसमें उन्होंने कहा कि भगवान राम के दूसरे पुत्र कुश ने कसूर शहर को बसाया था, जो पाकिस्तान का एक बड़ा शहर है। राजीव शुक्ला ने क्या कहा राजीव शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, लाहौर के प्राचीन क़िले में प्रभु राम के पुत्र लव की प्राचीन समाधि है लाहौर नाम भी उन्ही के नाम से है। वहां प्रार्थना का अवसर मिला। साथ में पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी जो इस समाधि का जीर्णोद्धार करवा रहे हैं । मोहसिन ने मुख्यमंत्री रहते यह काम शुरू करवाया था।” ‘कुश ने बसाया था कसूर शहर’ उन्होंने आगे लिखा, “लाहौर के म्युनिसिपल रिकॉर्ड में दर्ज है कि यह नगर भगवान राम के पुत्र लव के नाम से बसाया गया था और कसूर शहर उनके दूसरे पुत्र कुश के नाम से। पाकिस्तान सरकार भी यह बात मानती है।” कौन हैं राजीव शुक्ला राजीव शुक्ला भारतीय राजनेता, पूर्व पत्रकार और इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व अध्यक्ष हैं। आईपीएल में कथित भ्रष्टाचार और स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद राजीव शुक्ला ने 1 जून 2013 को इसके अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया। 2015 में राजीव शुक्ला को फिर से सर्वसम्मति से बीसीसीआई द्वारा आईपीएल के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। 18 दिसंबर 2020 को उन्हें निर्विरोध बीसीसीआई का उपाध्यक्ष चुना गया था।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के पात्र प्रस्तावों को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत किया जाए

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के पात्र प्रस्तावों को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत किया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल कॉलेज श्योपुर और सिंगरौली को आगामी सत्र में प्रारम्भ करने के लिए निर्माण कार्य सहित समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा संस्थानों के अधोसंरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी, संचालक (प्रोजेक्ट) प्रवीण सिंह अढ़ायच सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। पीएचसी एवं सीएचसी में कार्यरत चिकित्सकों की सुविधा के लिए आवासीय परिसर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य पूर्ण किये जाएँ। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पीएचसी एवं सीएचसी में कार्यरत चिकित्सकों की सुविधा के लिए आवासीय परिसरों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए चिकित्सकों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। इससे चिकित्सकों को बेहतर कार्य वातावरण प्राप्त होगा। ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थान सशक्त होंगे, प्रदेश के हर कोने में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये यह कारगर कदम है।  

राज्य सुपरवाईजरी बोर्ड की बैठक उप मुख्यमंत्री शुक्ल की अध्यक्षता में संपन्न

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम का महत्व केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक संकल्प भी है, जो लिंगानुपात को संतुलित करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लागू किया गया है। इस अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह अधिनियम उन सभी चिकित्सा प्रक्रियाओं और तकनीकों पर रोक लगाता है, जिनका दुरुपयोग भ्रूण के लिंग निर्धारण और कन्या भ्रूण हत्या के लिए किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम के तहत गठित राज्य सुपरवाईज़री बोर्ड की बैठक में अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम अंतर्गत अनिवार्य फॉर्म- एफ़ अपलोड की स्थिति और प्रावधान अंतर्गत की गयी कार्यवाहियों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिये कि ऐसे क्षेत्र जहाँ लिंगानुपात विपरीत है वहाँ सघन कार्यवाही और नियमित मॉनिटरिंग की जाये। विधायक श्रीमती प्रियंका मीणा, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सुपरवाईजरी बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कानून की सफलता केवल इसके प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन, सख्त निगरानी और जनजागरूकता अभियानों पर भी आधारित है। यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक अल्ट्रासाउंड सेंटर, प्रसव पूर्व निदान सुविधा और चिकित्सा संस्थान कानून के तहत निर्धारित मानकों का पालन करे। कड़े कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ लोगों को नैतिक रूप से जागरूक करना भी आवश्यक है ताकि समाज में यह संदेश स्पष्ट रूप से जाए कि हर बालिका का जीवन मूल्यवान है और उसे समान अवसर मिलना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में लिंग चयन गतिविधियों के प्रतिषेध हेतु “मुखबिर योजना” और पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम के दण्डात्मक प्रावधानों के प्रति जन-जागरूकता के निर्देश दिए। अर्हताधारी चिकित्सकों की पहचान की पुष्टि के लिए आधार ऑथेंटिकेशन की अधिसूचना जारी वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने बताया कि पूर्व बैठक में बोर्ड के निर्णय अनुसार वयोवृद्ध रेडियोलॉजिस्ट / सोनोलॉजिस्ट तथा ऐसे चिकित्सक जिनके द्वारा फिंगर प्रिंट की यूआईडीएआई से पुष्टि के अभाव में फॉर्म-एफ़ का अपलोड संभव नहीं हो रहा है, उनके लिए वैकल्पिक बायोमेट्रिक के तौर पर आईरिस स्कैन का विकल्प पी.सी.पी.एन.डी.टी. पोर्टल पर किया गया है। पी.सी.पी.एन.डी.टी. पोर्टल में ऑनलाइन प्रविष्टियों हेतु अर्हताधारी चिकित्सकों की पहचान पुष्टि के लिए 14 फरवरी 2025 को आधार ऑथेंटिकेशन की अधिसूचना जारी की गई। सोनोलॉजिस्ट की संख्या में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत कुल पंजीकृत संस्थाओं की संख्या 2884 है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नियमित निगरानी कर अब तक कुल 352 कार्यवाहियाँ की गईं, जिनमें पंजीयन निरस्तीकरण और निलंबन की कार्रवाइयाँ शामिल हैं। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत 44 वैधानिक कार्यवाहियाँ की गईं हैं इनमें 5 मामलों में अपंजीकृत केंद्रों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जबकि 2 मामलों में अधिनियम अंतर्गत आवश्यक अभिलेखों (फॉर्म-एफ, एएनसी रजिस्टर, रेफरल स्लिप) का संधारण नहीं किए जाने के कारण वैधानिक कार्यवाही की गई। इसके अतिरिक्त, 2 मामलों में गर्भस्थ भ्रूण के लिंग की जानकारी से संबंधित संवाद करने के उल्लंघन पर कार्रवाई हुई, वहीं 107 मामलों में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक के माध्यम से लिंग चयन हेतु विज्ञापन देने पर कार्रवाई की गई।  

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश परफॉर्मर स्टेट है। उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से हम प्रदेश को स्वास्थ्य मानकों में शीर्ष पर लाने में सफल होंगे। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे प्रदेश के हेल्थ पैरामीटर्स को शीर्ष स्तर पर ले जाने के लिए सतत प्रयास करें। सरकार स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को बेहतरीन इकोसिस्टम और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल में मीडिया समूह द्वारा आयोजित “मेडिकल एक्सीलेंस अवार्ड-2025” कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने चिकित्सा सेवा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉक्टरों, चिकित्सा शिक्षकों और चिकित्सकीय संस्थान संचालकों को सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है और जल्द ही हम वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि विकास का मुख्य लक्ष्य स्वास्थ्य और शिक्षा की उत्कृष्ट व सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जिसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें लगातार कार्य कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत चक्र मिला है, वहीं प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जा रही है जिससे पर्याप्त चिकित्सकीय मैन पावर उपलब्ध हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अच्छे कार्य करने वालों को सम्मानित करने से न केवल उनका हौसला बढ़ता है, बल्कि समाज में अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने चिकित्सा सेवा क्षेत्र मानवता की सेवा का सबसे बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि डॉक्टरों से इलाज में संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहज व्यवहार और आत्मीयता से किया गया इलाज मरीजों को आत्मविश्वास देता है और उपचार को प्रभावी बनाता है।  

चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने पुनरीक्षित वेतनमान तथा एनपीए गणना प्रावधानों के लिये उप मुख्यमंत्री शुक्ल का व्यक्त किया आभार

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने और स्वास्थ्य मानकों में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए कृत-संकल्पित है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश ने ऊर्जा, स्वच्छता, कृषि और सिंचाई जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि चिकित्सा शिक्षकों एवं चिकित्सकों के समर्पित प्रयासों से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी यह लक्ष्य हम अवश्य प्राप्त करेंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से भोपाल स्थित निवास कार्यालय पर चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने भेंट कर आभार व्यक्त किया। चिकित्सकीय समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सकीय समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनकी सुविधाओं एवं हितों की रक्षा हेतु आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा कार्मिकों की सेवा संबंधी विषयों और अन्य समस्याओं के समाधान के लिये उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति नियमित रूप से बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण और चिकित्सकीय कार्मिकों के हित संरक्षण से संबंधित विषयों पर चर्चा करेगी और आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करेगी, जिन पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने चिकित्सकीय स्टॉफ को करें प्रेरित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा कुशल चिकित्सकीय मैन पॉवर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे सभी चिकित्सा कार्मिकों को स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा प्रदाय के लिए प्रेरित करें। चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने चिकित्सा महाविद्यालयों एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के शासकीय एवं स्वशासी चिकित्सा शिक्षकों और दंत चिकित्सकों को पुनरीक्षित वेतनमान (सातवें वेतनमान) का वास्तविक लाभ 1 जनवरी 2016 से प्रदान करने तथा एनपीए (नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस) की गणना सातवें वेतनमान के अनुरूप करने के आदेश के लिए उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आभार जताया। इस अवसर पर चिकित्सा महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. गजेंद्र नाथ कौशल, डॉ. रितेश तंवर, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. महेश कुमार खाचरिया, डॉ. शमिख रज़ा, डॉ. आदित्य सक्सेना, डॉ. राहुल रोकड़ें, डॉ. नीरज खरे, डॉ. राजेश टिक्कस, डॉ. अनुराधा चौधरी, डॉ. पुनीत कुमार आचार्य, डॉ. जी. पी. भनारिया, डॉ. विवेक चौकसे सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

वेतन वृद्धि, मातृत्व और पितृत्व अवकाश, सेवा सुरक्षा के प्रावधान नवीन नीति में शामिल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की नवीन संविदा कर्मचारी नीति-2025 का निर्धारण संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए किया गया है। नवीन नीति से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में स्थायित्व आएगा और कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा। इस नीति का लाभ 32 हज़ार संविदा कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रूप से मिलेगा और उनके परिवारों सहित लगभग 1.5 लाख लोग इससे लाभान्वित होंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह निर्णय प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुचारु बनाने में सहायक होगा। उन्होंने समस्त संविदा कर्मचारियों से अपील की है कि सभी समर्पित भाव से सेवा करें, जिससे प्रदेश के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें। एनएचएम की नवीन नीति में संविदा कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। अब कर्मचारियों को हर वर्ष अनुबंध के नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध वार्षिक सेवा आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली लागू की गई है। कर्मचारियों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निवारण के लिए एक अपीलीय अनुक्रम स्थापित किया गया है। संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्ति का अधिकार केवल मिशन संचालक एनएचएम के पास होगा और यह केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के बाद ही किया जा सकेगा। नवीन नीति में वेतन वृद्धि को भी एक सुव्यवस्थित ढांचे में लाया गया है। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर नियमित वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। गर्भवती महिलाओं को नियुक्ति के समय प्रसव के छह सप्ताह बाद (सातवें सप्ताह से) कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे वे मातृत्व के शुरुआती दिनों में समुचित देखभाल प्राप्त कर सकेंगी। इसी तरह, मातृत्व अवकाश और पितृत्व अवकाश के प्रावधान भी संविदा कर्मचारियों के लिए लागू किए गए हैं। आकस्मिक परिस्थितियों में सहायता के लिए अनुकंपा नियुक्ति और एक्स-ग्रेशिया के प्रावधान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारु व्यवस्था के लिए संविदा कर्मचारियों को अंतर-जिला स्थानांतरण की सुविधा प्रदान की गई है। जिला स्वास्थ्य समिति को जिले में स्थानांतरण का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्पष्ट शिकायत निवारण अनुक्रम निर्धारित किया गया है। आकस्मिक परिस्थितियों में परिवार को सहायता प्रदान करने के लिए अनुकंपा नियुक्ति और एक्स-ग्रेशिया सहायता राशि के प्रावधान किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार विशेष अवकाश की सुविधा भी संविदा कर्मचारियों को प्रदान की जाएगी। नवीन नीति में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ जांच चल रही हो, तो उसे 50% वेतन प्रदान किया जाएगा। स्थानांतरण प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। साथ ही, वेतन असमानता की समस्या को दूर करते हुए सभी संविदा कर्मचारियों के लिए वेतन समानता सुनिश्चित की गई है।  

20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

30 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिक अभियान का अवश्य लें लाभ : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जन-प्रतिनिधियों, समाज सेवियों और आमजन से सहभागिता की अपील की : उप मुख्यमंत्री शुक्ल 20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की हो रही है निःशुल्क जांच भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में 20 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक ‘निरोगी काया अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इस महाभियान के तहत प्रदेश में 12 हज़ार से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों, जन आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों में 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की मधुमेह (डायबिटीज), रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और फैटी लिवर जैसी प्रमुख असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की निःशुल्क जांच की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आमजनों, जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन से इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने आसपास के नागरिकों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रेरित करें, अभियान की मॉनिटरिंग करें और जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचाने में सहायता करें। उन्होंने सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपने नजदीकी जन आरोग्य मंदिर, संजीवनी क्लिनिक या स्वास्थ्य केंद्र पर पहुँचकर अपनी निःशुल्क जांच अवश्य करवाएँ। स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएँ रविवार को छोड़कर सप्ताह में 6 दिन उपलब्ध हैं। अतः सभी नागरिकों से अनुरोध है कि अपना और अपने परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएँ और गंभीर बीमारियों से बचाव करें। समय पर जांच से रोगों के जटिल होने से पूर्व ही सहजता से होता है पूर्ण उपचार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को असंक्रामक बीमारियों की रोकथाम और समय पर पहचान के प्रति जागरूक करना है। अक्सर यह देखा गया है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी बीमारियाँ आरंभिक अवस्था में लक्षणहीन होती हैं, जिससे लोग इन्हें पहचान नहीं पाते और समय पर इलाज नहीं हो पाता। यह समस्या खासकर ग्रामीण और सुदूर इलाकों में अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में जब बीमारी बढ़ जाती है, तो मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदेश के हर व्यक्ति तक आवश्यक स्वास्थ्य जांच और उपचार सेवाएँ पहुंचें। अब तक 8 लाख नागरिकों की हो चुकी है निःशुल्क जांच उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निरोगी काया अभियान के तहत अब तक 6 लाख लोगों की मधुमेह और रक्तचाप की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि 2 लाख लोगों की फैटी लिवर की जांच हो चुकी है। यह आँकड़े इस अभियान की सफलता को दर्शाते हैं और इस बात को प्रमाणित करते हैं कि नागरिकों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने संभाग स्तरीय बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिये स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग को समन्वित प्रयास करना होगा। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य कार्यकर्ताएँ व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन करें तथा प्रतिमाह उन्हें चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाय। उप मुख्यमंत्री ने कमिश्नर कार्यालय सभागार रीवा में स्वास्थ्य सूचकांक, एएनसी पंजीयन व संस्थागत प्रसव सहित स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर में सुधार की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला पूरी संवेदनशीलता के साथ घर-घर जाकर गर्भवती माताओं का शत-प्रतिशत पंजीयन करते हुए उन्हें प्रतिमाह व तिमाही में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ दें तथा उनकी जांच कराये ताकि वह महिलाएँ हाई रिस्क में न जा पाये। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क में यदि गर्भवती महिला पहुंचती है तो उसको समय समय पर उपचार दिया जाय। तदुपरांत उसका संस्थागत प्रसव कराकर सुरक्षित किया जाय। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के अनेक कार्य संचालित हैं। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अस्पताल भवनों के निर्माण के साथ ही पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टर्स व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि मैदानी अमला पूरी निष्ठा से कार्य करें तथा जिला एवं विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी गंभीरता से मानीटरिंग करें व क्षेत्र का नियमित भ्रमण करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रतिमाह की 9 एवं 25 तारीख को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की मानीटरिंग की जाएं ताकि इसका अधिक से अधिक आउटपुट निकले। उप मुख्यमंत्री ने अपेक्षा की कि गर्भवती महिलाओं के परिजनों को भी उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिये जागरूक किया जाएं जिससे जच्चा व बच्चा स्वस्थ्य रहे। उप मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से अपेक्षा की कि वह क्षेत्र का भ्रमण कर स्वास्थ्य सुविधाओं की सतत मॉनिटरिंग करें।कमियों को दूर करने के लिये प्रयास करें। उन्होंने रीवा संभाग का व्हाट्सअप ग्रुप बनाकर स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति की नियमित जानकारी शेयर करने के भी निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री ने अपेक्षा की कि रीवा संभाग में समन्वित प्रयासों से शिशु मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में सफलता मिलेगी और इसकी लिये प्रतिमाह रिव्यू बैठक की जायेगी। कमिश्नर रीवा संभाग बीएस जामोद, कलेक्टर सतना डॉ. सतीश कुमार एस, कलेक्टर मऊगंज अजय श्रीवास्तव, कलेक्टर मैहर सुरानी बाटड़, सीईओ जिला पंचायत रीवा एवं सीधी उपस्थित रहे। कलेक्टर सिंगरौली वीसी के माध्यम से बैठक में जुड़े। इस दौरान स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के रीवा संभाग के जिलों के अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रयागराज में संत जनों का प्राप्त किया आशीर्वाद

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने महाकुंभ मेला क्षेत्र प्रयागराज में संतजनों से सौजन्य भेंट की और शुभाशीष प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कार्ष्णि आश्रम (रमणरेती धाम) में कार्ष्णिपीठाधीश्वर गुरुशरणानंद जी महाराज एवं श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने शिविर में विभिन्न संतों का सान्निध्य भी प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि जी महाराज एवं स्वामी राघवाचार्य जी से भेंट कर उनका शुभाशीष प्राप्त किया।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के बसामन मामा गौवन्य विहार अभ्यारण्य में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया

रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के बसामन मामा गौवन्य विहार अभ्यारण्य में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री ने गाय को गुड़ चना खिलाकर गौसेवा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य विहार में बिजली की निर्बाध आपूर्ति की व्यवस्था करें। नये विद्युत सबस्टेशन के निर्माण तक बसामन मामा मंदिर के पास के फीडर से कनेक्शन करायें। गौशाला से जुड़ी 17 एकड़ जमीन पर दो गौशाला शेड का इस तरह निर्माण करें की बाउन्ड्रीबाल बनाने की आवश्यकता न रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बसामन मामा गौवन्य विहार के निर्माण कार्यों की वृहद समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नाले में दो स्टापडैम सह रपटा निर्माण का स्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिये। स्टापडैमों के निर्माण से गौशाला में पानी की व्यवस्था के साथ चारागाह विकास की भी सुविधा मिलेगी। उन्होंने माइक्रो सिंचाई परियोजना से पूर्वा तालाब तथा क्षेत्र के अन्य तालाबों में पानी भरने की व्यवस्था करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। उप मुख्यमंत्री ने पानी पीने के लिए हौज तथा चारा चारागाह की बाउन्ड्रीबाल का निर्माण तत्काल शुरू कराने के लिये कहा। कार्यपालन यंत्री पीएचई दोनों सम्पवेल में 7 दिवस में पानी भरने की व्यवस्था करें। उप मुख्यमंत्री ने बैठक में वनमंडलाधिकारी को गायों के चरने के वन क्षेत्र में पानी की व्यवस्था करने तथा विभागीय प्लांटेशन में गौशाला की खाद के उपयोग के निर्देश दिए। बैठक में उप संचालक पशु पालन डॉ. राजेश मिश्रा ने बसामन मामा गौ-अभ्यारण्य के कार्यों की जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री ने गौशाला में प्रस्तावित राधा कृष्ण गौ मंदिर के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया एवं निर्माण कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रात: गौअभ्यारण्य का भ्रमण किया तथा नवजात बछड़े को गोद में उठाकर दुलार किया। पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी, स्थानीय जन प्रतिनिधिगण तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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