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उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य सेवाओं को जनसामान्य के लिए सुलभ, उच्च गुणवत्ता युक्त और व्यापक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुभव, आधुनिक मेडिकल कॉलेजों का सुदृढ़ आधार और समय पर नियुक्ति की प्रक्रिया से प्रदेश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भोपाल स्थित निवास कार्यालय में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न विषयों की गहन समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में वरिष्ठ विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुभव का लाभ उठाने के उद्देश्य से, उन्हें 70 वर्ष की आयु तक संविदा सेवा देने के लिये प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। प्रस्ताव कैबिनेट अनुमोदन के लिए शीघ्र प्रस्तुत किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों की गुणवत्ता में वृद्धि करेंगी साथ ही यह निर्णय चिकित्सकों की कमी की पूर्ति करने में भी सहायक होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा और इंदौर के मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन का विस्तृत प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इसके लिए कॉलेजों का अधोसंरचना विकास , अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था अन्य आवश्यक कार्य भी समय से पूर्ण किए जाएँ। शुक्ल ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि एमपीपीएससी के साथ नियमित संपर्क में रहते हुए सभी आवश्यक औपचारिकताओं को तत्काल प्राथमिकता से पूरा किया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल (ई-एचआरएमएस) की तैयारी पूर्ण कर ली जाए। पोर्टल को उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि कार्मिकों के स्थानांतरण में पारदर्शिता और त्वरित निर्णय से विभागीय कार्य में गति आएगी और सेवाओं में सुधार होगा। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना उपस्थित रहे।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि व्यक्तियों के समूह से समाज बनता है और समाज से देश का निर्माण होता है

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि व्यक्तियों के समूह से समाज बनता है और समाज से देश का निर्माण होता है, लेकिन संस्कार देने का कार्य समाज करता है। विकास को वरदान बनाता है संस्कार। संस्कार से ही सशक्त समाज की रचना होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ड्रीम वर्ल्ड गार्डन एवं रिसोर्ट गोम्मटगिरि इंदौर में आयोजित बागेश्वर कसौधन वैश्य समाज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि भगवान शिव के अवतार है बागेश्वर और ऋषि कश्यप के वंशज है, जिनका संबंध कश्मीर से है। बागेश्वर कसौधन वैश्य समाज देशभर में फैला है और यह शिक्षा, स्वास्थ्य के बेहतरी के साथ सामूहिक विवाह जैसे कार्य भी कर रहा है, जो अनुकरणीय है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर रोजगार के क्षेत्र में केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही है। जिसमें आयुष्मान भारत योजना, लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, स्टार्टअप योजना आदि शामिल है। इन योजनाओं से समाज लाभान्वित हुआ है और उनके जीवन में बदलाव आया। शुक्ल ने कहा कि देश में जितने अधिक रोजगार के अवसर होंगे, भारत उतनी तेजी से आर्थिक महाशक्ति बनेगा। इसमें हर समाज अपनी भूमिका निभायें। शुक्ल ने युवाओं से आहवान किया कि देश को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाये और नशे से दूर रहें। सामाजिक उत्थान के साथ धार्मिक उत्थान की दिशा में भी कार्य करें, जिससे सनातन धर्म और मजबूत हो। शुक्ल ने इंदौर के नागरिकों की स्वच्छता के संस्कार की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश को स्वच्छ बनाने की पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी, लेकिन इसमें इंदौर ने अहम भूमिका निभाई। इंदौर के नागरिक स्वच्छता के प्रति बड़े सजग है। वे चॉकलेट के रैपर से केले के छिलके तक को सड़क पर नहीं फेंकते। इसी वजह से इंदौर शहर पूरे देश में लगातार सातवीं बार स्वच्छता में नम्बर वन बना हुआ है। यह साधारण बात नहीं, बगैर इच्छा शक्ति के यह संभव नहीं है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमारे यहां बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र शास्त्री भी है, जो सनातन धर्म की ध्वजा को पूरे देश में फैला रहे हैं। वे अपनी गृह क्षेत्र में एक विशाल कैंसर अस्पताल बना रहे है, जिसके शिलान्यास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु भी शामिल हुए। इतना बड़ा कार्य बिना इच्छा शक्ति के संभव नहीं। पूर्व विधायक आकाश विजयर्वीय ने भी संबोधित किया। इस मौके पर बागेश्वर कसौधन वैश्य समाज के नवनिर्वाचित अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता सहित देश से आये समाजजन उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दतिया में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा

दतिया उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि अक्टूबर माह तक डॉक्टर्स की नई भर्ती सुनिश्चित कर सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। प्राथमिक, उप-स्वास्थ्य एवं सामुदायिक केंद्रों सहित आरोग्य मंदिरों की अवस्थापना सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु पर्याप्त बजट की व्यवस्था की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दतिया जिले के अपने अल्प प्रवास के दौरान जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेलीमेडिसिन सेवा से जिले के सभी प्राथमिक एवं उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक उन्नत विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं के प्रदाय के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टर गाँव-गाँव में बैठकर मरीजों को परामर्श दे सकेंगे। इससे मरीजों को बार-बार जिला अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं होगी और उनके समय एवं धन की भी बचत होगी। इस अवसर पर कलेक्टर संदीप कुमार माकिन ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को बताया कि जिला अस्पताल में महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पिंक अलार्म जैसी नवीन पहल प्रारंभ की गई है। उन्होंने नव निर्मित दतिया एयरपोर्ट की व्यस्थाओं के संबंध में भी अवगत कराया। माँ पीताम्बरा के दर्शन कर प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने दतिया के अल्प प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध पीताम्बरा शक्तिपीठ पहुंचकर माँ पीताम्बरा के दर्शन किए एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के कल्याण एवं सुख-समृद्धि की कामना की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्राचीन वन खण्डेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक भी किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने माँ पीताम्बरा शक्तिपीठ परिसर में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने केंद्र सरकार की “प्रसाद योजना” के अंतर्गत शक्तिपीठ परिसर के सौंदर्यीकरण हेतु स्वीकृत 44.24 करोड़ रूपए की परियोजना की प्रगति की जानकारी प्राप्त की और किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया। स्थानीय जन-प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का बड़ा ऐलान- प्रदेश के हर जिले में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज, दो इसी साल

दतिया डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला अल्प प्रवास पर दतिया पहुंचे. उन्होंने पीतांबरा पीठ पहुंचकर मां बगलामुखी के दर्शन किए. साथ ही पीठ परिसर में स्थित वनखंडेश्वर महादेव का अभिषेक किया. मीडिया से बातचीत करते हुए डिप्टी सीएम ने नेशनल हेराल्ड मामले में कहा, जब कोई गड़बड़ी घोटाला करता है और पकड़ा जाता है, तो वह ये स्वीकार नहीं करता कि उसने गलत किया है. कांग्रेस के नेता भी ऐसा कर रहे हैं. डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि जिला अस्पताल में आगजनी और अन्य घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी रखी जाएगी. दमोह अस्पताल जैसा मामला सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि कोई गलत काम करने का दुस्साहस न कर सके. सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रकिया चल रही है. इस साल दो जगह मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएंगे. प्रदेश के लिए 12 जगह टेंडर हो चुके हैं, शेष बचे जिलों में भी भविष्य में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे. अस्पतालों में मरीजों को टेली मेडिसिन सुविधा मिले, इसके लिए भी शासन प्रयास कर रहा है. प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज- शुक्ल मीडिया से बातचीत में शुक्ल ने कहा कि जिला अस्पतालों में आगजनी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी। दमोह जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना है। इस वर्ष दो नए मेडिकल कॉलेज शुरू होंगे। 12 स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को टेलीमेडिसिन की सुविधा देने के लिए सरकार प्रयासरत है। राजेंद्र शुक्ल महाकौशल एक्सप्रेस से सुबह लगभग साढ़े 4 बजे दतिया पहुंचे। सुबह 6 बजे पीतांबरा पीठ में दर्शन के बाद वे ग्वालियर के लिए रवाना हो गए। ग्वालियर में उनके स्थानीय कार्यक्रम और मेडिकल कॉलेज में जिला प्रशासन के साथ बैठक का कार्यक्रम है। ‘प्रसाद योजना’ से संवरेगी मां पीतांबरा की नगरी गौरतलब है कि पीतांबरा पीठ अब आध्यात्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है. क्योंकि केंद्र सरकार ने इस दिशा में ‘प्रसाद योजना’ के तहत 44.24 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की है. इस योजना से धार्मिक स्थलों का कायाकल्प होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण होगा. योजना का उद्देश्य भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और पर्यटकों के लिए सुविधाजनक बनाना है.

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये प्रतिबद्ध

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि टेली-मेडिसिन सेवा दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं के प्रदाय का सशक्त माध्यम है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में टेली-मेडिसिन सेवा का शुभारंभ किया। इस सेवा से रीवा और सीधी जिलों के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों का परामर्श प्राप्त होगा। इस सेवा के तहत अब संजय गांधी अस्पताल, रीवा के मेडिसिन, शिशु रोग (पेडियाट्रिक्स) तथा स्त्री रोग (गायनी) विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक, दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को फोन या अन्य संचार माध्यमों से जरूरी परामर्श देंगे। इससे उन मरीजों को तुरंत लाभ मिलेगा जिन्हें विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता होती है। अब ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को विशेषज्ञ सेवाओं के लिए ज़िला मुख्यालय आने की आवश्यकता विशेष परिस्थितियों में ही पड़ेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह सेवा न सिर्फ मरीजों की यात्रा की आवश्यकता को कम करेगी, बल्कि समय, धन और संसाधनों की भी बचत करेगी। साथ ही, इससे प्राथमिक स्तर पर कार्यरत चिकित्सकों को विशेषज्ञों की मदद से त्वरित एवं सटीक निर्णय लेने में सुविधा होगी। इससे मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान व इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि टेली-मेडीसिन सेवा का प्रभावी उपयोग “सशक्त व स्वस्थ मध्यप्रदेश” के विजन को धरातल पर उतारने में सहयोगी होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेली-मेडिसिन कक्ष की व्यस्थाओं का अवलोकन किया एवं विधिवत संचालन के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वे अगले सप्ताह प्रदान की जा रही सेवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा करेंगे। डीन मेडिकल कॉलेज रीवा डॉ. सुनील अग्रवाल सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पतंजलि संस्थान द्वारा विंध्य क्षेत्र में किए जा रहे निवेश एवं औद्योगिक परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हाल ही में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव, रीवा के माध्यम से विंध्य क्षेत्र में निवेश के अपार अवसर खुले हैं। जो विंध्य के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। पतंजलि समूह जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की भागीदारी से इस क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति की मजबूत आधारशिला रखी जा सकती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से अमहिया, रीवा स्थित निज निवास पर पतंजलि योगपीठ के संस्थापक सचिव आचार्य बालकृष्ण ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर पतंजलि संस्थान द्वारा विंध्य क्षेत्र में किए जा रहे निवेश एवं संभावित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। क्षेत्रीय विकास, स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग तथा युवाओं को रोजगार से जोड़ने के विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधनों और जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर विंध्य के निर्माण की दिशा में सार्थक चर्चा हुई।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा प्रदेश के हर क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में ग्वालियर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण योजना की गहन समीक्षा की उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जल संसाधन मंत्री एवं ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जय आरोग्य अस्पताल, ग्वालियर में सीटीवीएस (कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग के आवश्यक पदों की स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार करने और अस्पताल भवन के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों को शीघ्रता एवं प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में ग्वालियर क्षेत्र के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के अधोसंरचना विकास, मैन पॉवर, उपकरण उपलब्धता की विस्तारपूर्वक समीक्षा कर आवश्यक व्यवस्थाओं के उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार समस्त अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य है कि नागरिकों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बाहर न जाना पड़े। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना विकास, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और चिकित्सकीय स्टॉफ की पर्याप्त नियुक्ति सुनिश्चित की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत सांवेर विधानसभा क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, तथा संचालक नीरज कुमार सिंह उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य अमले को तैयारियों के लिए जारी किये निर्देश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राज्य में बढ़ती गर्मी और लू की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकाल के समय में सभी नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं। समस्त स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक तैयारियों के लिए निर्देशित कर दिया गया है। उन्होंने अपील की है कि सभी नागरिक सावधानियों का अवश्य पालन करें। प्रबंध संचालक, एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षकों को गर्मी के दृष्टिगत स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक तैयारियों और जागरूकता के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गर्मी के मौसम में भारत सरकार द्वारा हीट रिलेटेड इलनेस से बचाव के लिए दिशा-निर्देश को जिला व स्वास्थ्य संस्थानों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के लिए कहा है। साथ ही जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इन पर चर्चा कर संबंधित विभाग प्रमुखों को भी अवगत कराने के निर्देश दिए गये हैं। उन्होंने जनसामान्य को जागरूक करने और सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में रोगियों को एचआरआई से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, आईएचआईपी पोर्टल पर प्रतिदिन एचआरआई मामलों की रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है। इससे अधिक तापमान से होने वाली बीमारियों व अवांक्षित घटनाओं को रोका जा सकेगा। क्या करें हाइड्रेटेड रहना है जरूरी गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना आम समस्या है। इससे गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। नागरिक दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे। यात्रा करते समय पानी अवश्य साथ रखें। ओआरएस, नींबू पानी, लस्सी, छाछ, फलों के रस (थोड़ा नमक मिलाकर) जैसे घरेलू पेय का सेवन लाभकारी होता है। तरबूज, खरबूजा, संतरा, अंगूर, अनानास, खीरा जैसी मौसमी फल-सब्ज़ियों का सेवन शरीर में तरलता बनाए रखने में सहायक होता है। शरीर को ढँककर रखें धूप में निकलते समय शरीर को पूरी तरह ढँकना बेहद जरूरी है। हल्के रंग के, सूती और ढीले कपड़े पहनें ताकि गर्मी से राहत मिल सके। सिर को टोपी, छतरी, गमछा या पारंपरिक उपायों से ढकना चाहिए। नंगे पांव धूप में जाना भी हानिकारक हो सकता है, इसलिए चप्पल या जूते पहनना अनिवार्य है। घर को ठंडा और सुरक्षित बनाएँ जहाँ तक हो सके, दोपहर के समय घर के अंदर या छांव में रहें। घर में ठंडी हवा का संचार बना रहे, इसके लिए दिन में खिड़कियां और पर्दे बंद रखें और रात में उन्हें खोल दें। बाहर जाना जरूरी हो, तो सुबह या शाम के ठंडे समय में ही जाएं। गर्मी के समय बाहरी गतिविधियों को सीमित करना आवश्यक है। घर में ठंडक बनाए रखने के लिए पर्दे, शटर या सनशेड का उपयोग करें। दिन में निचली मंजिल पर रहना ज्यादा सुरक्षित होता है। शरीर को ठंडा रखने के लिए पंखा, ठंडा पानी, गीले कपड़े, या 20°C के पानी में पैरों को डुबोना सहायक होता है। विशेष ध्यान देने योग्य संवेदनशील वर्ग छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मानसिक या शारीरिक बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति और बाहर कार्य करने वाले लोग अधिक संवेदनशील होते हैं। इन लोगों को अतिरिक्त सुरक्षा और देखरेख की आवश्यकता होती है। ठंडे प्रदेश से गर्म प्रदेश में आने वाले लोगों को अपने शरीर को नई जलवायु के अनुसार ढालने के लिए समय देना चाहिए। मौसम की जानकारी रखें रेडियो, टीवी, समाचार पत्रों या भारत मौसम विज्ञान विभाग की वेबसाइट (https://mausam.imd.gov.in) से मौसम की ताज़ा जानकारी लेते रहें। मौसम की पूर्व चेतावनियों को गंभीरता से लें और उसी अनुसार अपने कार्यक्रम बनाएं। बचाव के लिए ये गलतियां न करें दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बाहर न निकलें। इस समय गर्मी अपने चरम पर होती है। भारी कामकाज या शारीरिक मेहनत भी टालें। नंगे पांव बाहर न निकलें। गर्मी में खाना पकाते समय रसोई में वेंटिलेशन रखें। शराब, चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, या अधिक मीठे पेयों से बचें, ये शरीर से तरलता कम करते हैं। बासी और भारी प्रोटीन युक्त भोजन न करें। किसी भी परिस्थिति में बच्चों या पालतू जानवरों को बंद वाहन में न छोड़ें। श्रमिकों और नियोक्ताओं के लिए विशेष निर्देश काम की जगह पर ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य है और हर 20 मिनट में पानी पीने की सलाह दी जाए। काम को सुबह-शाम के समय शेड्यूल करें। छांव की व्यवस्था करें और कार्य के बीच पर्याप्त आराम दें। नए श्रमिकों के लिए कार्य का समय धीरे-धीरे बढ़ाएं ताकि वे मौसम के अनुसार ढल सकें। श्रमिकों को गर्मी से संबंधित लक्षणों की पहचान और प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दें। ‘बडी सिस्टम’ अपनाएं और प्रशिक्षित फर्स्ट एड कर्मियों की व्यवस्था करें। गर्भवती या बीमार श्रमिकों के लिए डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है। भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में सावधानी खेलों या धार्मिक आयोजनों जैसे भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में अत्यधिक गर्मी और पसीने के कारण हीट रिले़टेड इलनेस (एचआरआई) की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे आयोजनों में पर्याप्त पानी, छांव और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य है। उपस्थित लोगों को लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए। गर्मी से होने वाली बीमारियां और लक्षण अत्यधिक गर्मी से शरीर का तापमान ऊपर जा सकता है, जिससे हीट स्ट्रेस, हीट रैश, हाथ-पांव सूजना, मांसपेशियों की ऐंठन, चक्कर आना, हीट एक्सहॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे दिल, फेफड़े, किडनी जैसी पुरानी बीमारियां भी बढ़ सकती हैं। लक्षणों में चक्कर, बेहोशी, उल्टी, सिरदर्द, बहुत ज्यादा प्यास, गाढ़ा पेशाब, तेज़ सांस और दिल की धड़कन शामिल हैं। मांसपेशियों की ऐंठन होने पर तुरंत ठंडे स्थान पर आराम करें और ओआरएस पिएं। एक घंटे से अधिक ऐंठन रहने पर डॉक्टर से परामर्श लें। हीट स्ट्रोक: जानलेवा स्थिति हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें शरीर का तापमान 40°C से ऊपर हो सकता है और व्यक्ति बेहोश, भ्रमित या चिड़चिड़ा हो सकता है। त्वचा लाल, गर्म और सूखी हो जाती है। बच्चों में संकेत: दूध न पीना, चिड़चिड़ापन, पेशाब कम होना, आंखों का धंसना, सुस्ती या झटका आना, शरीर से खून आना आदि। तुरंत क्या करें 108 या 102 पर कॉल करें। व्यक्ति को ठंडी जगह ले … Read more

यह भारत का महानिर्माण काल है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, संस्था और संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में वैश्विक क्षितिज पर उभर रहा है। यह भारत का महानिर्माण काल है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, संस्था और संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल सफल रिट्रीट भोपाल में एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ऑल इंडिया काउंसिल मीट-2025 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने एसोसिएशन के सभी प्रतिनिधियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं एवं श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों प्रतिनिधियों को सम्मानित किया अब हम दुश्मन को घर में घुसकर जवाब देते है उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को आशा और संभावनाओं की दृष्टि से देख रही है। भारत वह राष्ट्र है जो विश्व में शांति स्थापित करने की सामर्थ्य रखता है। आज का भारत अपने निर्णय अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं, बल्कि वैश्विक हित में लेता है। हमारी सेनाएं पूरी मजबूती के साथ खड़ी हैं। अब वह समय नहीं जब हम ज़मीन पर विजय के बाद टेबल पर हार जायें, अब हम दुश्मन को घर में घुसकर जवाब देते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि भारतीय सेना के साथ जुड़कर कार्य करना गौरव और राष्ट्रसेवा का अवसर है। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। सैन्य क्षेत्र में उत्पादों की गुणवत्ता, अनुशासन और प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और एसोसिएशन इन सभी मानकों पर खरा उतर रहा है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। भविष्य में हथियार भी भारतीय होंगे उन्हें चलाने वाले भी स्वदेशी होंगे। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य भारतीय सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर भारत माता की सेवा कर रहे हैं, यह अत्यंत गर्व की बात है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के 80 जिलों से आए एसोसिएशन के पदाधिकारी, बिल्डर्स, सैन्य क्षेत्र से जुड़े अधिकारी एवं प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते हैं। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास होना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के तृतीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अपने ज्ञान का प्रयोग समाज के उत्थान में करें। केवल व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, समाज और देश के विकास में भी भागीदारी आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बड़े पद पर पहुँचने के बाद ही असली कार्य प्रारंभ होता है। अपने योगदान से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे राष्ट्र के तीव्र विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अधोसंरचना, आर्थिक समृद्धि, और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प को दोहराया और कहा कि ‘स्किल, स्केल और स्पीड’ के तीन स्तंभों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि “धरती से दौलत निकालनी होगी”- इस विचारधारा को मूर्त रूप देते हुए ‘नदी जोड़ो परियोजना’ के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नव युग की शुरुआत हो रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज युवाओं के पास विकास के बहुत अवसर हैं। इन अवसरों का लाभ उठायें। उन्होंने युवाओं से आहवान किया कि वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहें और अपनी ऊर्जा का सदुपयोग स्वयं, समाज, देश और विश्व के कल्याण के लिये करें। उन्होंने कहा कि समाज युवाओं की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और युवाओं को इस भरोसे पर खरा उतरना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की दीक्षांत समारोह स्मारिका तथा “कंप्यूटर एक परिचय” पुस्तक के 41वें संस्करण का विमोचन भी किया। समारोह में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, कुलगुरु डॉ. आर.पी. दुबे, इसरो के वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक राधाकांत पाढ़ी सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।  

MP के रीवा शहर में बनेगा कैंसर अस्पताल, अब मरीजों को नहीं जाना होगा भोपाल

रीवा मध्य प्रदेश को जल्द ही एक और कैंसर अस्पताल की सौगात मिलने वाली है, इस बात की जानकारी डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने दी है. उन्होंने बताया कि कैंसर अस्पताल के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं, एक से डेढ़ साल के बीच ही अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा, वहीं अस्पताल के लिए मशीनों के एडवांस में ऑर्डर भी दे दिए गए हैं. यह कैंसर अस्पताल में विंध्य अंचल में खुलेगा ऐसे में अब यहां के मरीजों को भोपाल या इंदौर जाने की जरुरत नहीं होगी, क्योंकि उन्हें उनके ही घर में कैंसर का इलाज मिलना शुरू हो जाएगा.  कैंसर एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। यह जिसे भी हो जाए उसके परिवार को तबाह करके रख देती है। समय पर यदि इसका इलाज ना मिले, तो यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा कर उसकी जान ले सकती है। कैंसर का नाम सुनते ही लोगों की हक्की-बक्की गुम हो जाती है। कैंसर का इलाज काफी महंगा भी है, लेकिन कुछ ऐसे भी संस्थान है, जहां फ्री में या फिर बहुत ही कम पैसे में इसका इलाज कराया जाता है। जो लोग कैंसर से पीड़ित हो जाते हैं, उन्हें जीवन भर डॉक्टर की निगरानी में रहना पड़ता है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के रीवावासियों के लिए खुशखबरी है। बता दें कि जिले में कैंसर अस्पताल बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि आने वाले 1 से डेढ़ साल में यहां कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। स्थानीय लोगों को फायदा मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, यहां निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल के लिए मशीनों के एडवांस आर्डर भी दे दिए गए हैं। जिसकी जानकारी खुद मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दी है। उन्होंने बताया कि काफी लंबे समय से इस प्रोजेक्ट पर विचार किया जा रहा था, जिसे ध्यान में रखते हुए इस अस्पताल को बनाने का निर्णय लिया गया। जिसमें पहले 200 बेड की व्यवस्था की जाएगी। इस अस्पताल के बनने से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी। मिलेगा बेहतर इलाज रीवा के लोगों को इलाज के लिए टाटा मेमोरियल या फिर भोपाल एम्स जाना पड़ता था, लेकिन रीवा में ही कैंसर अस्पताल बनने के बाद उनकी यह परेशानी दूर हो जाएगी। यहां उन्हें बेहतर इलाज मिल पाएगा। करोड़ों की लागत से बन रहे इस अस्पताल में मरीज को बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। कैंसर की अस्पताल में 20 से 25 करोड़ की लागत की कई मशीन लगाई जाएगी। जिसकी मदद से पहले स्टेज में ही कैंसर का पता लगाया जाएगा। साथ ही इसका इलाज भी शुरू कर दिया जाएगा। एक से डेढ़ साल में बनेगा अस्पताल के बनने से रीवा के लोगों को अब इलाज के टाटा मेमोरियल और भोपाल एम्स नहीं जाना पड़ेगा। रीवा में ही उन्हें बेहतर इलाज हो पाएगा, अगले एक से डेढ़ साल में कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। करोड़ों रुपयाें की मशीनों से होगा इलाज बता दें कि, कैंसर के इलाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण मशीनों की जरूरत होती है। जिनमें लीनियर एक्सीलरेटर, कोबाल्ट मशीन, पेट स्कैन समेत ब्रेकीथेरेपी मशीन भी शामिल है। अकेले लीनियर एक्सीलरेटर मशीन की कीमत 50 से 60 करोड़ रुपए की है।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा को विकसित बनाने के साथ जल समृद्ध बनाना

रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा को विकसित बनाने के साथ जल समृद्ध बनाना है। वर्षा के जल को संरक्षित करने तथा प्राचीन जल स्त्रोतों में सुधार कार्य कर जल संरक्षण व संवर्धन के कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे हैं ताकि आने वाले समय में पानी की कमी न हो। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्राम पंचायत सगरा में केन्द्रीय जल शक्ति विभाग के सहयोग से बोर के माध्यम से संग्रहित होने वाले भूजल को जमीन के भीतर संचयित किये जाने के कार्य का शुभारंभ किया। ग्राम पंचायत सगरा में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार के जल शक्ति विभाग के सहयोग से रीवा जिले में 100 बोरवेल के माध्यम से संग्रहित होने वाले जल को जमीन के अंदर संचित किये जाने का कार्य प्रारंभ हो रहा है। इसके अतिरिक्त जल गंगा अभियान में जल संरक्षण व संवर्धन के कार्य आगामी 3 माह तक नियमित रूप से संचालित होंगे। यह प्रयास है कि वर्षा का जल बर्बाद न हो। जमीन के अंदर इसका संचयन हो तथा जल स्त्रोत भी पानीदार रहे ताकि जिले का भूजल स्तर कम न हो। उन्होंने जल संरक्षण कार्य में आमजनों की सहभागिता की भी अपेक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल द्वारा जहां एक ओर हर घर को शुद्ध पानी पहुंचाने का कार्य हो रहा है वहीं दूसरी ओर जल संचयन, संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जमीन के अंदर के पानी का दोहन न होकर इसका पोषण हो यह इस योजना का लक्ष्य है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि जल गंगा अभियान अन्तर्गत जिले के तालाब निर्माण के साथ ही मनरेगा से पानी बचाने की संरचनाओं को पूर्ण किये जाने के कार्य कराये जायेंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर ने जल संचयन कार्य में गुजरात के दल को प्रशासन के पूर्ण सहयोग की बात कही। इससे पूर्व गुजरात के जल संचयन दल प्रभारी अमित सिंह ने बताया कि रीवा जिले में 100 बोर कर संग्रहित पानी को चेम्बर बनाकर भूमि के अंदर संचयित किया जायेगा। इस कार्य का शुभारंभ सगरा से किया गया है। सरपंच श्रीमती सावित्री राजेश पाल, सीईओ जनपद संजय सिंह, समाजसेवी राजेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन व ग्राम पंचायतों के सरपंच उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बेसिक्स आफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स विषय पर कार्यशाला का किया शुभारंभ

मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बेसिक्स आफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स विषय पर कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक है। गभर्वती महिला की समय-समय पर जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श देकर एवं उनके परिजनों को जागरूक कर मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में गायनी विभाग के तत्वाधान में “बेसिक्स ऑफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीयन हो। उसकी समय-समय पर जांच की जाकर चिकित्सकीय परामर्श दिया जाय और यह प्रयास हों कि वह क्रिटिकल अवस्था में पहुंचे ही नहीं। चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएँ देकर एवं ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य कार्यकर्ता व स्टाफ अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए गर्भवती महिला का ध्यान रखें और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने का समन्वित प्रयास करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि हुई है। चिकित्सकों के पदों की पूर्ति की गई है। मेडिकल कालेज खोले गये हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केन्द्रों को सुविधायुक्त बनाया जा रहा है इससे वहां जिला अस्पताल जैसी सभी सुविधाएँ मुहैया रहें। उन्होंने चिकित्सकों व स्वास्थ्य विभाग के अमले को इस चुनौती का सामना करते हुए संकल्प के साथ कार्य करने की अपेक्षा की जिससे प्रदेश मातृ मृत्यु व शिशु मृत्यु दर कम कर पाने में सफल हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कार्यशाला में विचार विमर्श व प्राप्त सुझावों का नीचे स्तर तक लाभ मिलेगा और यह कार्यशाला सार्थक सिद्ध होगी। उन्होंने कार्यशाला में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ व बीएमओ की उपस्थिति की बात कही। कार्यशाला में मिशन डायरेक्टर एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने भोपाल से वीडियो कांफ्रेंसिग से सम्मिलित हुई। डायरेक्टर एनएचएम एमसीएच (रेगुलेशन एण्ड पॉलिशी) डॉ. अरूणा कुमार ने मातृ मृत्यु दर का संभागवार प्रस्तुतीकरण देते हुए उसे कम करने के विषय में जानकारी दी। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरूण श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि कार्यशाला से चिकित्सक सीख लेकर समर्पित भाव से कार्य करें तो हम प्रदेश में मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर को कम कर सकेंगे। उन्होंने शोध व अकादमिक स्तर को सशक्त बनाने की भी बात कही। संचालक श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को उप मुख्यमंत्री शुक्ल के प्रयासों से पर्याप्त बजट प्राप्त हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि हो रही है। रीवा भी उक्त स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रदेश में पीछे नहीं है। डॉ. बीनू कुशवाहा, डीन मेडिकल कालेज डॉ. सुनील अग्रवाल, अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा सहित प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालय के गायनी विभाग के चिकित्सक, मेडिकल कालेज के चिकित्सक तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आने वाला समय भारत का है। हम फिर से सोने की चिड़िया बनने की राह पर हैं और इस सपने को पूरा करने के लिए अच्छा स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, सबसे पहला सुख निरोगी काया है। विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ भारत आवश्यक है। इसके लिए नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना होगा, स्वस्थ जीवन शैली अपनानी होगी और नियमित जाँच करवानी होगी, ताकि रोगों का समय पर निदान हो सके और प्रसार को रोका जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ज्ञान विज्ञान भवन, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल में भोजपाल मित्र परिषद द्वारा आयोजित कैंसर जाँच एवं जागरूकता शिविर का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिये सतत प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि शासकीय प्रयासों के साथ निजी सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्ष 2003 में प्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 17 हो चुके हैं। आगामी 2 वर्षों में 8 नवीन शासकीय मेडिकल कॉलेज खोले जाने की योजना है। इसके अलावा, 12 जिलों में पीपीपी मोड से मेडिकल कॉलेज स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘राइट टू हेल्थ’ के साथ ‘राइट टू स्क्रीनिंग’ भी ज़रूरी उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भोजपाल मित्र परिषद द्वारा कैंसर जागरूकता एवं जाँच शिविर की पहल की सराहना करते हुए कहा कि कैंसर की सही समय पर जाँच निदान को सरल बनाती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ‘राइट-टू-हेल्थ’ के साथ ‘राइट-टू-स्क्रीनिंग’ भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरे देश में 30 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों की जाँच के लिए 20 फरवरी से 31 मार्च तक निःशुल्क निरोगी काया अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें बीपी, सुगर, फैटी लीवर और कैंसर की जाँच की जा रही है। उन्होंने उपस्थित युवाओं और प्रबुद्ध जनों से आह्वान किया कि इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इससे अधिक से अधिक नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। निरोगी काया अभियान में की जा रही है निःशुल्क जाँच उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के तहत असंचारी रोगों की स्क्रीनिंग के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों पर जाँच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। रोगों की पहचान होने पर त्वरित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सिविल अस्पतालों अथवा जिला चिकित्सालयों में उपचार प्रारंभ किया जा रहा है। नए मरीजों की पहचान के लिए आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा की जा रही है। प्राप्त जानकारी के आधार पर असंचारी रोग स्क्रीनिंग एवं पंजीयन का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए विभिन्न बीमारियों के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी भी दी जा रही है। हर संभागीय मुख्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रयास उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कैंसर के इलाज के लिए शीघ्र ही प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों में ‘सेंटर-ऑफ-एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में अत्याधुनिक उपकरण जैसे ब्रेकी थेरेपी, पेट स्कैन, लीनियर एक्सीलरेटर आदि की सुविधा होगी तथा पर्याप्त मैनपॉवर की भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क और सजग रहना भी आवश्यक है, ताकि जीवनशैली में सुधार कर स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दिया जा सके। आयुर्वेद स्वस्थ जीवन शैली का प्रशस्त करता है मार्ग सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण और उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि आयुर्वेद स्वस्थ जीवन शैली का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने योग और प्राणायाम को जीवन में अपनाने पर बल दिया। आरोग्य भारती के अशोक वाष्णेय ने संतुलित आहार, स्वस्थ दिनचर्या और सकारात्मक सोच को स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन का मूल बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र और मौसम के अनुरूप भोजन करना और नियमित व्यायाम को जीवनशैली में शामिल करना आवश्यक है। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, हरिओम जटिया, पीपल्स ग्रुप के डायरेक्टर रोहित पंडित, डॉ. अनिकेश गोयनका, भोजपाल मित्र परिषद के आशीष पांडेय, आशीष जनक सहित अन्य पदाधिकारी, चिकित्सक और चिकित्सा छात्र उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री ने खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता प्रबंधन की समीक्षा में दिये निर्देश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा “मन की बात” में देशवासियों को उचित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संतुलित और स्वच्छ भोजन नागरिकों के स्वास्थ्य का आधार है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य संस्थानों को सही खाद्य पदार्थों का उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिये की जा रही कार्यवाहियों और गतिविधियों की वृहद समीक्षा की। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, आयुक्त फूड सेफ्टी संदीप यादव, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश कुमार मौर्य, संयुक्त नियंत्रक श्रीमती माया अवस्थी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। हर ज़िले में हेल्दी और हाईजीनिक फ़ूड स्ट्रीट बनायें उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि प्रदेश में एक महीने का विशेष जन जागरूकता अभियान चलाया जाये। जिसमें सभी जिलों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच हो साथ ही अच्छी प्रैक्टिस की जानकारी भी दी जाये। एक माह बाद खाद्य गुणवत्ता में सुधार के प्रभाव की समीक्षा कर आगामी कार्य योजना का निर्धारण किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा संबंधी बेहतर तरीकों के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने का प्रयास किया जाए ताकि वे अपने क्षेत्रों में जन-जागरूकता का प्रसार कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हर ज़िले में हेल्दी और हाईजेनिक फ़ूड स्ट्रीट प्रमाणन के प्रयास किए जायें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “ईट राइट इंडिया अभियान” को गति देगा और नागरिकों को सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश को आगे ले जाएगा। उन्होंने कहा कि हेल्दी और हाइजीनिक फूड की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 3 नवीन संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का किया जा रहा है निर्माण खाद्य पदार्थों की जाँच में तेज़ी लाने के लिये 3 नई संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का निर्माण इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में किया जा रहा है। इंदौर और जबलपुर में मशीनें स्थापित कर मानव संसाधन उपलब्ध कराकर परीक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। ग्वालियर में 60% सिविल कार्य पूरा हो चुका है। भोपाल में हाइटेक माइक्रो बॉयोलॉजी प्रयोगशाला का 80% निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। संयुक्त नियंत्रक श्रीमती अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 अंतर्गत प्रदेश में 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2024 तक 10,670 लीगल नमूने और 31,387 सर्विलेंस नमूने लिए गए, जिनमें से 30,692 नमूनों का विश्लेषण किया गया। इनमें 1,663 नमूने असुरक्षित, अवमानक या मिथ्या छाप पाए गए। विभाग ने 1,729 प्रकरण दायर किए और 2,015 प्रकरणों का निपटारा किया, जिनमें से 2,000 प्रकरणों में दोष सिद्धि हुई। इस अवधि में 24,485 लाइसेंस और 1,46,258 रजिस्ट्रेशन जारी किए गए। लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन से ₹12.47 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि ₹9.02 करोड़ का अर्थदंड अधिरोपित कर ₹2.98 करोड़ की वसूली की गई। 13 हज़ार से अधिक खाद्य कारोबारियों को किया जा चुका है प्रशिक्षित खाद्य पदार्थों में मिलावट के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु 270 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 13,588 खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित किया गया है। चलित खाद्य प्रयोगशाला के माध्यम से 563 जनजागरूकता कार्यक्रमों में 15,185 नागरिकों को प्रशिक्षण दिया गया। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल निर्माताओं को भारत सरकार के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। ‘ईट राइट’ गतिविधि के तहत 10 ईट राइट कैंपस, 9 ईट राइट स्कूल, 3 क्लीन वेजिटेबल मार्केट, 4 सेफ भोग प्लेस, 188 हाईजीन रेटिंग और 2 ईट राइट स्टेशनों को प्रमाणित किया गया है। अवमानक असुरक्षित खाद्य पदार्थों के नियंत्रण के वैधानिक प्रावधान संयुक्त नियंत्रक श्रीमती अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। अवमानक खाद्य (सब स्टैंडर्ड) वह होता है जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता, लेकिन इससे मानव स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता। मिथ्या छाप खाद्य (मिस ब्रांड) वह खाद्य पदार्थ है, जिसके संबंध में आवश्यक जानकारी या गुण-दोष लेवल पर सही तरीके से अंकित नहीं किए गए हों। वहीं, असुरक्षित खाद्य (अनसेफ) ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनकी प्रकृति, गुणवत्ता या सामग्री मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। अधिनियम के तहत दो प्रकार के प्रकरण अभियोजित किए जाते हैं। सिविल प्रकरण (धारा 51 से 58 एवं 61, 63) में अवमानक या मिथ्या छाप से संबंधित अपराध या नियमों का उल्लंघन होने पर मामले न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। आपराधिक प्रकरण (धारा 59, 60, 62, 64, 65) में असुरक्षित खाद्य या बिना लाइसेंस व्यापार से जुड़े मामले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होते हैं, जिनमें अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।  

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