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फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का विवाद समाप्त, मेकर्स ने टाइटल बदला, SC ने रखा समुदाय सम्मान का ख्याल

मुंबई  नीरज पांडे की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर कानूनी विवाद खत्म हो गया है. ब्राह्मण समाज और बाकी संगठनों से मिली आलोचनाओं के बाद फिल्ममेकर ने घूसखोर पंडत टाइटल वापस ले लिया है. उनकी इस पहल को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के खिलाफ दाखिला की गई याचिकाओं को बंद कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिल्ममेकर के पॉजिटिव रिस्पॉन्स को देखने के बाद इस विवाद को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए. कोर्ट ने कहा- हम आपके स्टैंड और फिल्म के टाइटल वापस लेने के फैसले की सराहना करते हैं. फिल्ममेकर की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि उनका कभी भी किसी समुदाय को अपमानित और उसे बदनाम करने का इरादा नहीं था.  कोर्ट में हुआ क्या दलीलें? फिल्ममेकर की तरफ से सीनियर वकील एन के कौल ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि हमने टाइटल पूरी तरह वापस ले लिया है. किसी समुदाय को अपमानित करने का कोई इरादा कभी नहीं था. ‘पंडत’ शब्द फिल्म के मेन कैरेक्टर के निकनेम से आया था. जिसमें दिखाया गया कैसे एक बुरा पुलिसवाला अच्छा पुलिस अफसर बनता है. ये क्राइम ड्रामा है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा– हम ‘पंडित्य’ और ‘पंडित’ शब्द समझते हैं. इसे ‘घूसखोर’ से जोड़ने पर गलत मैसेज जाता. एन के कौल– हमने टाइटल वापस ले लिया है. याचिकाकर्ता- टाइटल बदलना चाहिए. उन्होंने नया टाइटल तय नहीं किया है. सुप्रीम कोर्ट- उन्होंने कहा है कि टाइटल बदल रहे हैं. याचिकाकर्ता- मूवी के अंदर पंडित समुदाय को बदनाम करने वाला कोई कंटेंट नहीं होना चाहिए. एन के कौल– क्या आपने फिल्म देखी है? मूवी किसी को ठेस नहीं पहुंचाती, ना अपमानित करती है. याचिकाकर्ता- उन्हें ऐसा ऐलान करना चाहिए कि इस फिल्म में कुछ भी अपमानित करने वाला नहीं होगा. एन के कौल– हमने कहा है कि टाइटल बदल दिया है. जस्टिस नागरत्ना- फिल्म अभी एडिटिंग स्टेज पर है. उन्होंने पॉजिटिवि जवाब दिया है. अब क्या बचा है आगे?? एन के कौल– मैं क्लियर करना चाहता हूं कि टाइटल पूरी तरह वापस ले लिया गया. नया टाइटल अभी फाइनल नहीं हुआ, लेकिन मेरा वादा है कि नया टाइटल पुराने जैसा नहीं होगा. याचिकाकर्ता- कंटेंट का क्या होगा? ट्रेलर में तो इस शब्द का इस्तेमाल होता हुआ दिख रहा है. सुप्रीम कोर्ट- वो टाइटल वापस ले रहे हैं. क्या आपने बिना नाम वाली कोई तस्वीर देखी है? एन के कौल– हमने मूवी का नाम बदल दिया है. फिल्म के खिलाफ कोई याचिका दायर कर रहा है. कहीं FIR हो रही है. इस उत्पीड़न पर रोक लगनी चाहिए. जस्टिस नागरत्ना- डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने हलफनामा दाखिल कर दिया है. वरिष्ठ वकील ने बताया कि टाइटल पूरी तरह वापस लेने के बाद ये मामला खत्म हो गया. हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया जाए. काउंसिल ने बताया कि याचिकाकर्ता की शिकायतों का समाधान हो गया है. मूवी का नया टाइटल पुराने विवादित नाम जैसा बिल्कुल नहीं होगा. बात करें मूवी की तो, इसमें मनोज बाजपेयी, अजय दीक्षित का रोल प्ले रहे हैं. वो एक ऐसा पुलिस अफसर है जो करप्ट है. फिल्म को रितेश शाह ने डायरेक्ट किया है और नीरज पांडे ने लिखा है. मूवी में नुशरत भरुचा, साकिब सलीम, कीकू शारदा अहम रोल में दिखेंगे. 

कलेक्टर की कार्रवाई से हड़कंप, तहसीलदार-नायब तहसीलदार को नोटिस, पटवारी सस्पेंड

सिंगरौली  मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में कलेक्टर गौरव बैनल ने राजस्व विभाग की लापरवाही पर बड़ा और सख्त एक्शन लिया है। औचक निरीक्षण के दौरान उज्जैनी, बड़ोखर और बरगवा तहसीलदार कोर्ट में लंबित प्रकरणों के निराकरण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर एक तहसीलदार और दो प्रभारी नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि एक पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई से पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। औचक निरीक्षण में खुली लापरवाही की पोल कलेक्टर गौरव बैनल देवसर तहसील अंतर्गत उज्जैनी, बड़ोखर और बरगवा तहसीलदार न्यायालय का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान नामांतरण, सीमांकन और बंटवारा जैसे सैकड़ों राजस्व प्रकरण लंबित पाए गए। कई मामलों में महीनों से सुनवाई नहीं होने और फाइलों में पटवारी रिपोर्ट तक संलग्न नहीं होने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई।  राजस्व प्रकरणों के समय पर निराकरण में लापरवाही बरतने पर प्रभारी नायब तहसीलदार बरगवा नागेश्वर पनिका और प्रभारी नायब तहसीलदार बड़ोखर दिनेश कुमार पनिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दोनों अधिकारियों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर आगे और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पटवारी सस्पेंड, कड़ा संदेश राजस्व प्रकरणों में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर हल्का देवरा के पटवारी अजमेर सिंह को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि प्रारंभिक सुनवाई नियमित होनी चाहिए और जिन मामलों में पटवारी रिपोर्ट लंबित है, वहां तुरंत बैठक कर समय-सीमा में रिपोर्ट पेश कराई जाए। लापरवाही जारी रहने पर आगे और निलंबन व विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सिस्टम में सुधार का अल्टीमेटम कलेक्टर ने अधिकारियों को चेताया कि जनता से जुड़े राजस्व मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर प्रकरण की समय-सीमा तय कर नियमित मॉनिटरिंग होगी। आने वाले दिनों में अन्य तहसीलों में भी औचक निरीक्षण किए जाने की संभावना है।

मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाती ‘सेवा एक नई पहल’, अंतिम संस्कार में निभाया नेक कर्तव्य

मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करती ‘सेवा एक नई पहल’ — अंतिम संस्कार में निभाया सामाजिक दायित्व निराश्रित बुजुर्ग मातुश्री के निधन पर संस्था ने खरे परिवार के सहयोग से किया अंतिम संस्कार, समाज में सद्भाव और समानता की नई चेतना का संदेश बिलासपुर  जोरा पारा स्थित सुवाणी सुखाश्रम में निवासरत एक निराश्रित बुजुर्ग मातुश्री के निधन पर सामाजिक संस्था सेवा एक नई पहल ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए अंतिम संस्कार का दायित्व निभाया। इस पुण्य कार्य में शहर के लब्धप्रतिष्ठित खरे परिवार का भी सराहनीय सहयोग रहा। मृतात्मा को मुखाग्नि संस्था की सक्रिय कार्यकर्ता सिमरन तलरेजा ने दी। श्रद्धांजलि सभा में नगर के गणमान्य नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। इस अवसर पर वृन्दावन परिसर व्यवसायी संघ के अध्यक्ष मनोज सरवानी, सुखाश्रम संचालक श्याम तिवारी, सिंधी समाज के युवा समाजसेवी राम हिंदुजा, संस्था के संयोजक माधव मुजुमदार एवं सतराम जेठमलानी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए ‘ऑक्सीजन मैन’ के नाम से प्रसिद्ध समाजसेवी राजेश खरे ने कहा कि वर्तमान परिवेश में जब समाज जाति, वर्ग और आर्थिक विषमताओं से जूझ रहा है, ऐसे समय में सेवा एक नई पहल जैसे संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि निराश्रितों के लिए अंतिम संस्कार जैसे दायित्व को निभाना केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना है। राजेश खरे ने आगे कहा कि इस प्रकार की पहल समाज में सद्भाव, समानता और करुणा की नई जागृति लाएगी तथा टूटते सामाजिक संबंधों को फिर से जोड़ने का कार्य करेगी। उन्होंने संस्था के सदस्यों और सहयोगी परिवारों की खुले मन से सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम के अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया तथा उपस्थित सभी लोगों ने सेवा एक नई पहल के इस मानवीय प्रयास को आगे भी निरंतर जारी रखने का संकल्प।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की मौजूदगी, पीएम शहबाज़ शरीफ़ होंगे ट्रंप के साथ बैठक में शामिल

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन   पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मिशन पर अमेरिका पहुँच चुके हैं। 18 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस दौरे का मुख्य केंद्र वॉशिंगटन में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकें और अमेरिकी नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता है। ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शिरकत : पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष आमंत्रण पर ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की पहली बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका गए हैं। महत्वपूर्ण बैठक : यह बैठक आज यानी गुरुवार, 19 फरवरी को होनी है। पृष्ठभूमि : गौरतलब है कि पिछले महीने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम’ के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में इस शांति बोर्ड का गठन किया गया था। वरिष्ठ मंत्रियों का दल साथ : प्रधानमंत्री अकेले इस दौरे पर नहीं हैं। उनके साथ पाकिस्तान का एक शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है, जिसमें शामिल हैं-उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार। मंत्रिमंडल के अन्य वरिष्ठ मंत्री और उच्चाधिकारी। द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा : ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की बैठक के अलावा, शहबाज़ शरीफ़ अमेरिका की वरिष्ठ लीडरशिप के साथ अलग से भी मुलाकातें करेंगे।एजेंडा : इन बैठकों में मुख्य रूप से पाकिस्तान-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों, सुरक्षा सहयोग और वर्तमान वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।कूटनीतिक महत्व : राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ संबंधों की यह नई दिशा अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

भीड़ प्रबंधन फेल! छत्रपति शिवाजी जयंती पर पुणे में भगदड़, लोगों में डर का माहौल

मुंबई  महाराष्ट्र में शिवाजी उत्सव के दौरान बड़ा हादसा हो गया है। यहां छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाने के लिए जुटी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार सुबह पुणे के शिवनेरी किले में ज्यादा भीड़ होने के कारण कम से कम तीन लोग घायल हुए हैं। घटना तब हुई जब यहां हजारों की तादाद में भीड़ जुटी थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह करीब साढ़े 3 बजे हुई जब मशाल लेकर एक समूह मीना दरवाजा के पास किले से नीचे उतर रहा था। पुणे ग्रामीण के पुलिस सुपरिटेंडेंट संदीप सिंह गिल ने मीडिया को बताया, “भारी भीड़ के बीच एक ग्रुप मशाल लेकर तेजी से किले से नीचे आ रहा था। वहां मौजूद हमारी पुलिस टीम ने उन्हें धीरे चलने की सलाह दी।” लेकिन तभी वहां धक्का मुक्की होने लगी। उन्होंने बताया, “इस बीच, ऊपर से किसी ने एक शख्स को धक्का दिया, जिसके बाद समूह के कुछ लोग नीचे गिर गए। तीन लोगों के पैर में चोटें आईं हैं।” अधिकारी ने कहा कि मौके पर मौजूद पुलिसवालों ने तुरंत घायलों की मदद की और यह सुनिश्चित किया कि लोगों की सुविधाजनक आवाजाही बने रहे। गौरतलब है कि छत्रपति शिवाजी महाराज का 19 फरवरी, 1630 को पुणे जिले के शिवनेरी किले में हुआ था। गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि देने के लिए किले का दौरा करेंगे।

विवाद के माहौल में ब्रजेश पाठक का धर्मसम्मान कार्यक्रम, 101 बटुकों को बुलाकर किया अभिनंदन

लखनऊ प्रयागराज में माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पवित्र स्नान से रोके जाने का मामला चर्चा में रहा. इस दौरान शंकराचार्य के साथ जा रहे बटुकों की शिखा खींचे जाने की कथित घटना को लेकर यूपी सरकार पर सवाल उठ रहे थे. विपक्षी दल हमलावर थे. इसे लेकर यूपी सरकार अब डैमेज कंट्रोल के मोड में नजर आ रही है. हाल ही में यूपी सरकार के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शिखा पकड़ने को बड़ा पाप बताया था. अब ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों को अपने आवास पर बुलाकर उनका सम्मान कर आशीर्वाद लिया है. ब्रजेश पाठक ने गुरुवार की सुबह लखनऊ के अपने सरकारी आवास पर 101 बटुकों को बुलाया. डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने आवास पर बटुकों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया. उन्होंने बटुकों को तिलक लगाया और उनकी शिखा का सम्मान कर उनसे आशीर्वाद लिया. गौरतलब है कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने एक प्रोग्राम में यह कहा था कि शिखा का सम्मान होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि परंपराओं का आदर समाज की जिम्मेदारी है. 101 बटुकों को बुलाकर उनका सम्मान करना सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान का प्रतीक है. बता दें कि प्रयागराज की घटना के बाद सरकार की किरकिरी हो रही थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में यह कहा था कि सभी को मर्यादा में रहना चाहिए. ब्रजेश पाठक ने क्या कहा था यूपी सरकार के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने किसी ब्राह्मण की शिखा छूने को बेहद गंभीर अपराध बताया था. उन्होंने कहा था कि यह सनातन संस्कृति और परंपराओं का अपमान है. ब्रजेश पाठक ने इस तरह की घटना को बड़ा पाप बताते हुए कहा था कि इसमें शामिल लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए.

NDA को मिलेगा फायदा? शरद और सिंघवी की सीटें खाली, राज्यसभा चुनाव में नई रणनीति

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्‍यसभा में भी इंडिया अलायंस की ताकत घटने जा रही है. चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान क‍िया है. लेकिन यह महज एक रूटीन चुनाव नहीं है; यह भारतीय राजनीति के उन दिग्गजों की विदाई और नए समीकरणों के उदय की कहानी है, जो संसद के गलियारों में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है. सबसे बड़ी सुगबुगाहट उन कुर्सियों को लेकर है जो खाली होने जा रही हैं. विपक्षी एकता के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और कांग्रेस के संकटमोचक अभिषेक मनु सिंघवी जैसे चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी इन खाली होती कुर्सियों पर अपना ‘कमल’ खिलाकर राज्‍यसभा में अपनी बादशाहत बनाने जा रही है? 10 राज्य और 37 सीटें चुनाव आयोग के मुताबिक, अप्रैल में खाली हो रही 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. ये सीटें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से आती हैं. सीटों का गणित एक नजर में महाराष्ट्र    7    असम    3 पश्चिम बंगाल    6    हरियाणा    2 बिहार    6    छत्तीसगढ़    2 तमिलनाडु    6    हिमाचल प्रदेश    1 ओडिशा    4    स्रोत-    ECI शरद पवार से सिंघवी तक… दिग्गजों की विदाई एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. महाराष्ट्र की बदली हुई राजनीति में, जहां अजित पवार की पार्टी अब एनडीए का हिस्सा हैं, शरद पवार के लिए दोबारा सदन पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. वहीं, कांग्रेस के दिग्गज वकील और रणनीतिकार अभिषेक मनु सिंघवी की सीट भी खाली हो रही है. उनके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-UBT), केटीएस तुलसी (कांग्रेस), और रामनाथ ठाकुर (JDU) जैसे नाम भी रिटायर होने वालों की सूची में हैं. इन दिग्गजों की विदाई विपक्ष के लिए एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक वैक्यूम पैदा कर सकती है. महाराष्ट्र और बिहार: एनडीए के लिए ‘लॉटरी’ का मौका महाराष्ट्र में 7 सीटों पर चुनाव होने हैं. अभी यहां बीजेपी और शरद पवार गुट के पास 2-2 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और रामदास आठवले के पास 1-1 सीट है. लेकिन राज्य विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए यानी बीजेपी, एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार यहां ‘क्लीन स्वीप’ की स्थिति में दिख रहा है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी यहां अपनी सीटों की संख्या में भारी इजाफा करेगी, जिससे शरद पवार और उद्धव ठाकरे के खेमे को बड़ा नुकसान हो सकता है. बिहार में भी 5 सीटों का समीकरण एनडीए के पक्ष में झुकता दिख रहा है. यहां जेडीयू की 2 और आरजेडी की 2 सीटें खाली हो रही हैं. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद अब एनडीए यहां 3 सीटों पर मजबूत पकड़ रखता है, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा: बीजेपी मारेगी सेंध? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के गढ़ में बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है. यहां 6 सीटों पर चुनाव हैं. वर्तमान में TMC के पास 4 सीटें हैं और एक लेफ्ट (सीपीआई-एम) के पास. जिस तरह से बंगाल विधानसभा में वामपंथ का सफाया हुआ है, बीजेपी यहां सीपीआई-एम की सीट छीनकर अपना खाता खोलने और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है. ओडिशा में भी 4 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है. नवीन पटनायक की बीजेडी और बीजेपी के बीच यहां सीटों का बंटवारा विधानसभा की ताकत के आधार पर होगा, जहां बीजेपी अपनी मौजूदा 2 सीटों को बरकरार रखने या बढ़ाने की कोशिश करेगी. NDA vs INDIA… क‍िसके पास क‍ितने नंबर अनुमानों के मुताबिक, 16 मार्च के चुनाव एनडीए के लिए ‘सुपर संडे’ साबित हो सकते हैं. अनुमान है कि एनडीए को इन चुनावों में कम से कम 6 सीटों का फायदा होगा इससे एनडीए का आंकड़ा 21 के करीब पहुंच सकता है. दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को लगभग 4 सीटों का नुकसान होने की संभावना है. कांग्रेस के लिए तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से अच्छी खबरें आ सकती हैं, जहाँ वह अपनी स्थिति में थोड़ा सुधार कर सकती है. बीजेपी कर रही रिकॉर्ड की तैयारी     साल 2026 बीजेपी के लिए राज्यसभा में ऐतिहासिक होने जा रहा है. मार्च के इन 37 सीटों के अलावा, पूरे साल में कुल 71 सदस्य रिटायर होने वाले हैं. अप्रैल में 32 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 9 बीजेपी से हैं. जून में 22 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 12 बीजेपी से हैं. इसी तरह नवंबर के अंत में 11 सदस्य रिटायर होंगे, इनमें से 9 बीजेपी से हैं.     बीजेपी न केवल अपनी सीटें बचा रही है, बल्कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के कमजोर राज्यों से अतिरिक्त सीटें खींच रही है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो बीजेपी अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी.     राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं. साधारण बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 123 सीटों की आवश्यकता होती है. वर्तमान में बीजेपी के पास लगभग 95-98 सदस्य हैं. NDA का आंकड़ा 115 से 118 के आसपास पहुंचता है.इस चुनाव के बाद राज्यसभा में एनडीए 123 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है. बदल जाएगा राज्‍यसभा का मिजाज शरद पवार और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कद्दावर नेताओं की कमी विपक्ष को खलेगी, जबकि बीजेपी के लिए यह अपनी विधायी ताकत को और अधिक धार देने का अवसर है. राज्यसभा में बहुमत मिलने का मतलब है कि सरकार को अब विवादास्पद बिलों को पास कराने के लिए बीजेडी या वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एनडीए की बढ़ती ताकत ने साफ कर दिया है कि ‘उच्च सदन’ की चाबी अब मजबूती से सत्तापक्ष के हाथों में जाने वाली है.  

पोखरण में आसमान में शक्ति प्रदर्शन, राफेल और तेजस ने तैयार किया हैरान कर देने वाला प्लान

जैसलमेर  भारतीय वायुसेना 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण रेंज में अपनी युद्धक क्षमता का ऐतिहासिक प्रदर्शन करने जा रही है। ‘वायुशक्ति-2026’ नामक इस युद्धाभ्यास में वायुसेना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तर्ज पर अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाएगी। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दुश्मन पर त्वरित हमले, रणनीतिक बढ़त और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की स्वदेशी शक्ति का प्रदर्शन करना है। आसमान में दिखेगी ‘बाज’ जैसी पैनी नजर इस बार के अभ्यास में एक नया एयरक्राफ्ट और आधुनिक तकनीक विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे, जो आसमान में बाज की तरह मंडराकर पलक झपकते ही सटीक हमला करने में सक्षम हैं। वायुसेना इस दौरान दिन, शाम और रात के समय कठिन मिशनों को अंजाम देने की अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करेगी। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन और संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी (HADR) में वायुसेना की भूमिका का भी सजीव चित्रण किया जाएगा। बेड़े में शामिल होंगे ये आधुनिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर वायुशक्ति-26 में भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लगभग सभी प्रमुख विमान हिस्सा लेंगे…     लड़ाकू विमान: राफेल, तेजस (स्वदेशी), सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, जगुआर, मिग-29 और हॉक।     परिवहन विमान: C-17 ग्लोबमास्टर, C-130J सुपर हरक्यूलिस और स्वदेशी C-295।     हेलिकॉप्टर: अपाचे (अटैक), चिनूक (हैवी लिफ्ट), प्रचंड (LCH), ध्रुव (ALH MK-IV) और एमआई-17।     अटैक ड्रोन्स: रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (RPA) और लॉइटरिंग मुनिशन्स। स्वदेशी हथियार प्रणालियों का ‘अभेद्य’ प्रदर्शन ‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ के मंत्र के साथ वायुसेना अपनी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन करेगी…     मिसाइल सिस्टम: स्वदेशी ‘आकाश’ और ‘स्पाइडर’ मिसाइल प्रणालियों से सटीक मार का प्रदर्शन।     ड्रोन रोधी तकनीक: काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (CUAS) की टेस्टिंग।     लॉइटरिंग मुनिशन्स: नई तकनीक वाले ‘कामिकेज़’ ड्रोन्स जो लक्ष्य को खोजकर नष्ट करते हैं।  

एआई समिट के लिए भारत पहुंचे ब्राजील के राष्ट्रपति, विदेश राज्य मंत्री ने किया स्वागत

नई दिल्ली ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा पांच दिवसीय भारत दौरे पर बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनका स्वागत विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने किया।विदेश विभाग ने आधिकारिक एक्स पोस्ट में इसकी जानकारी दी। बताया ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा, राजकीय दौरे पर नई दिल्ली आए हैं। उनका विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने स्वागत किया। एमईए ने उनकी यात्रा के दौरान होने वाली अहम बैठक का भी जिक्र किया। आगे लिखा कि इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति लूला इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे और फिर पीएम नरेंद्र मोदी संग द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। 18 से 22 फरवरी तक भारत में रहेंगे लूला डा सिल्वा मंत्रालय ने इस दौरे को दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करने वाला करार दिया है। इस एक्स पोस्ट में आगे लिखा है, “भारत और ब्राजील के बीच करीबी और कई तरह के रिश्ते हैं। ये रिश्ते, जो रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचे हैं, दरअसल, एक समान ग्लोबल विजन, लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी विकास की प्रतिबद्धता में ही निहित हैं। राष्ट्रपति लूला की यात्रा से भारत-ब्राजील साझेदारी को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा 18 से 22 फरवरी तक भारत में रहेंगे। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है। इस बार राष्ट्रपति लूला अपने साथ सैकड़ों कंपनियों के मालिकों और अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल लेकर पहुंचे हैं। भारत पहुंचने के बाद राष्ट्रपति लूला 19 और 20 फरवरी को नई दिल्ली में हो रहे दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। उन्होंने भारत रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे इस समिट में भाग लेंगे और भारत के साथ नए अवसरों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में भारत और ब्राजील के बीच व्यापार 15 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू से भी होगी मुलाकात भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा “दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं का समीक्षा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी दोपहर के भोज का आयोजन करेंगे। दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, जिनमें बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग, बहुपक्षवाद, वैश्विक शासन और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी ब्राजील के राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगी और उनके सम्मान में एक भोज का आयोजन करेंगी। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी ब्राजील के राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे।

एमपी बजट 2026: श्रमिक कल्याण और महिला सुरक्षा के लिए बड़ा प्रावधान, स्टेडियम निर्माण को मिली मंजूरी

भोपाल  प्रदेश सरकार ने बजट 2026 युवाओं और महिलाओं के साथ ही मजदूरों पर फोकस नजर आया है। सीएम युवा शक्ति योजना के तहत प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में सर्वसुलभ स्टेडियम विकसित करने की तैयारी है। ताकि ग्रामीण और शहरी युवाओं को स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाएं मिल सकें। वहीं महिलाओं, श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा के लिए बड़ा सहारा बनकर आया है। इसके साथ ही बजट में जन-धन योजना और बीमा योजनाओं को लेकर जमीनी विस्तार भी दिखा। कल्याण विभाग के लिए 815 करोड़ का बजट कल्याण विभाग के लिए 815 करोड़ का बजट तय किया गया है। सरकार का कहना है कि यह राशि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार में खर्च की जाएगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा में लाड़ली लक्ष्मी योजना का दायरा लगातार बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 52 लाख 29 हजार बालिकाएं इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं। योजना का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वित्त मंत्री देवड़ा ने बताया कि श्रम विभाग के लिए 1335 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इसका मकसद गरीब वर्ग को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना है। ताकि उन्हें बीमा, पेंशन और अन्य सुविधाएं मिल सकें। प्रदेश में बढ़ी है केंद्र सरकार की भागीदारी बढ़ी केंद्र सरकार की योजनाओं में भी प्रदेश की भागीदारी बढ़ी है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत राज्य में अब तक 4 करोड़ 61 लाख से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। जिससे बड़ी आबादी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी है। इसी तरह प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 3 करोड़ 64 लाख का पंजीयन हो चुका है। दुर्घटना की स्थिति में यह योजना बीमा सुरक्षा प्रदान करती है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में अब तक 1 करोड़ 54 लाख से ज्यादा लोग नामांकन करवा चुके हैं। इससे उनके परिवारों को आर्थिक सहायता और सुरक्षा का आधार है। सरकार का दावा है कि यह बजट युवाओं के खेल, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ महिलाओं और श्रमिक वर्ग को सुरक्षा कवच देने की दिशा में अहम कदम है।

राहुल की कोशिशें नाकाम, भूपेन बोरा भाजपा में जाएंगे; घर आकर CM हिमंत से की मुलाकात

गुवाहाटी  असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे को लेकर नया ट्विस्ट नजर आ रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने  दावा किया कि 22 फरवरी को भाजपा ज्वॉइन करेंगे। उन्होंने यह भी कहाकि उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता भी भाजपा में आएंगे। बता दें कि सोमवार को भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में शीर्ष नेतृत्व के मनाने पर उन्होंने अपने फैसले पर फिर से विचार करने की बात कहते हुए इस्तीफा वापस ले लिया था। बताया जाता है कि राहुल गांधी ने भी उन्हें मनाया था। लेकिन मंगलवार को उनके भाजपा जॉइन करने की बातें होने लगीं। हिमंत बोले उनके लिए घरवापसी हिमंत ने अपने बयान में कहाकि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पहले ही उनकी जॉइनिंग अप्रूव कर दी है। भाजपा में उनका स्वागत है। उन्होंने कहाकि भूपेन बोरा को वह सभी सम्मान दिया जाएगा, जिसके वह हकदार हैं। भाजपा से जुड़ना उनके लिए घरवापसी जैसा होगा, क्योंकि यह उनके जैसे लोगों की ही पार्टी है, जो अपने पिता की विरासत वाली सियासत नहीं करते हैं। इससे पहले सरमा, गुवाहाटी के घोरमारा इलाके में बोरा के आवास पर गए, जहां उनकी पत्नी और बेटे ने मुख्यमंत्री की आरती की और स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पूर्व में कहा था कि बोरा के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं और वादा किया था कि वह उन्हें विधानसभा चुनाव में सुरक्षित सीट से जीतने में मदद करेंगे। दिन में क्या बोले थे भूपेन बोरा वहीं, आज दिन में कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा कि वह केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पूछे जाने पर मंगलवार रात तक इस बारे में अपना अंतिम निर्णय घोषित करेंगे कि वह इस्तीफा वापस लेंगे या नहीं। बोरा ने आज सुबह पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले वह अपने शुभचिंतकों, करीबी सहयोगियों और लखीमपुर जिले के लोगों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करना चाहेंगे, जहां से वह ताल्लुक रखते हैं। बोरा ने बिना नाम लिए कांग्रेस के कुछ नेताओं पर हमला करते हुए कहा कि वह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) में रहने को तैयार हैं, लेकिन एपीसीसी (आर) में नहीं, जो स्पष्ट रूप से पार्टी के धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन की ओर इशारा था। उन्होंने कहाकि मैंने अपने त्यागपत्र में भी इस बात को स्पष्ट कर दिया है। आरोप भी लगाया था बोरा ने आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके नाम का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया गया। हुसैन के धुबरी लोकसभा सीट से चुने जाने के बाद समागुरी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था। पार्टी का टिकट उनके बेटे तंजील हुसैन को दिया गया था, जो भाजपा के दीप्लू रंजन शर्मा से चुनाव हार गए थे। बोरा ने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनाव में, कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन का विरोध किया था और मैंने इस संबंध में पार्टी आलाकमान को कई बार पत्र लिखा था। चुनावों के बाद, गठबंधन खत्म हो गया और पिछले लोकसभा चुनाव में हुसैन को इसका सबसे बड़ा फायदा हुआ, उन्होंने एआईयूडीएफ नेता बदरुद्दीन अजमल को रिकॉर्ड अंतर से हराकर सीट जीती।

वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट ऐतिहासिक होगा, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताया भरोसा

ऐतिहासिक होगा वर्ष 2026-27 का बजट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उप मुख्यमंत्री  देवड़ा तथा वित्त विभाग की टीम को दी बधाई और शुभकामनाएं मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुआ वंदे मातरम का गान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक से पहले किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मन्त्रि-परिषद की बैठक विधानसभा समिति कक्ष में वंदे मातरम गान के साथ आरंभ हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मन्त्रि-परिषद की बैठक से पहले, विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने वाले वर्ष 2026- 27 के बजट के लिए उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा सहित वित्त विभाग की टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2026- 27 का बजट ऐतिहासिक है। यह बजट सभी को साथ लेकर कदम दर कदम आगे बढ़ते जाने के संकल्प का प्रमाण है। यह बजट प्रदेश में केंद्र सरकार के मूल मंत्र “ज्ञान” के अंतर्गत  गरीब-युवा-अन्नदाता और महिलाओं के कल्याण के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार को समर्पित है।  

‘लिंचिंग करवाना चाहती थीं?’ — रवनीत बिट्टू का प्रियंका गांधी पर दावा, पुराना मामला फिर सुर्खियों में

चंडीगढ़  केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आज कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला है। बिट्टू ने ऐलान किया है कि वह प्रियंका गांधी के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज करवाएंगे। यह शिकायत करीब पांच साल पहले किसान आंदोलन के दौरान घटी उस घटना की जांच के लिए होगी, जब बिट्टू को प्रदर्शनकारी किसानों के बीच भेजा गया था और वहां उन पर ‘जानलेवा हमला’ हुआ था। बिट्टू का दावा: ‘लिंचिंग’ की साजिश थी ‘द ट्रिब्यून’ को दिए एक इंटरव्यू में रवनीत बिट्टू ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें प्रियंका गांधी की मंशा पर कोई संदेह नहीं था, बावजूद इसके कि प्रियंका यह अच्छी तरह जानती थीं कि किसान बिट्टू के प्रति कितने आक्रोशित थे। बिट्टू ने कहा- मैं इस बात की जांच करवाना चाहता हूं कि आखिर मुझे वहां भेजने के पीछे उनकी मंशा क्या थी। क्या वह कोई बड़ी घटना करवाना चाहती थीं? उस दिन कुछ भी हो सकता था। प्रियंका गांधी की ओर से यह एक हताशा भरा प्रयास था ताकि किसानों के बीच भाजपा विरोधी भावनाओं को और भड़काया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि वह और विधायक कुलबीर जीरा उस दिन किसानों की भीड़ द्वारा लगभग ‘लिंच’ कर दिए गए होते। उन्हें अब आशंका है कि उन्हें नुकसान पहुंचाने का एक पूर्व-नियोजित ‘प्लान और डिजाइन’ तैयार किया गया था, ताकि इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदला जा सके। राहुल गांधी के ‘गद्दार’ वाले बयान पर पलटवार बिट्टू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उन्हें गद्दार कहे जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस तरह की हल्की बातें करके अपने पद की गरिमा गिराई है। बिट्टू ने सवाल किया कि कांग्रेस में कई ऐसे नेता और सांसद हैं जो दूसरी पार्टियों से आए हैं। तो क्या राहुल गांधी का मतलब है कि उनके साथ मौजूद ऐसे सभी नेता गद्दार हैं? कांग्रेस का पलटवार: ‘आकाओं को खुश करने की कोशिश’ पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने बिट्टू के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बिट्टू द्वारा प्रियंका गांधी को इस विवाद में घसीटना केवल सुर्खियां बटोरने की एक हताश कोशिश है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- सालों बाद बिट्टू की याददाश्त अचानक वापस आ गई है, ठीक उसी वक्त जब उनके राजनीतिक आकाओं ने उन पर शिकंजा कसा है। पंजाब की राजनीति का यह ‘फुस हो चुका कारतूस’ अब सबसे ज्यादा शोर मचा रहा है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बिट्टू के आरोपों को बचकानी हरकत बताया। उन्होंने कहा- यह कहना कि प्रियंका गांधी ने उन्हें जबरदस्ती विरोध प्रदर्शन स्थल पर भेजा, हास्यास्पद है। बिट्टू को अपने नए आकाओं की ‘गुड बुक्स’ में रहने के लिए क्या-क्या करना पड़ रहा है, यह देखकर दुख होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से पूछे तीखे सवाल, CJI ने BJP CM पर हेट स्पीच विवाद पर दी नसीहत

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने  12 ‘प्रतिष्ठित’ व्यक्तियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका कथित हेट स्पीच के लिए केवल भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निशाना बना रही है, जबकि अन्य दलों के नेताओं को छोड़ दिया गया है। मामला क्या है? याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक नैतिकता के उल्लंघन को रोकने के लिए संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों और नौकरशाहों के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ से कहा कि देश का माहौल जहरीला हो गया है और केवल सुप्रीम कोर्ट ही इसे सुधार सकता है। हालांकि, पीठ ने तुरंत यह इशारा किया कि याचिका में समस्या को उजागर करते समय चुनिंदा रूप से केवल कुछ व्यक्तियों का नाम लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां अदालत ने याचिका के एकतरफा होने पर सवाल उठाए और कहा- यह याचिका निश्चित रूप से कुछ व्यक्तियों को निशाना बना रही है, जबकि उन अन्य लोगों को छोड़ दिया गया है जो नियमित रूप से ऐसे हेट स्पीच देते हैं। याचिकाकर्ताओं को यह आभास नहीं देना चाहिए कि वे केवल कुछ व्यक्तियों को टारगेट कर रहे हैं। CJI ने कहा कि एक निष्पक्ष और तटस्थ याचिका के साथ आएं। यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। अंततः, सभी पक्षों की ओर से बोलने में संयम होना चाहिए। हम यह कहना चाहेंगे कि सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को संवैधानिक नैतिकता का ध्यान रखना चाहिए और अपने भाषणों में संयम बरतना चाहिए। कोई भी दिशानिर्देश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। पीठ ने कहा कि कई राजनीतिक दल अपनी सांप्रदायिक विचारधारा के आधार पर बेशर्मी से भाषण देते हैं और खुलेआम नफरत फैलाते हैं। कोर्ट ने सिब्बल से कहा- आपने दूसरे पक्ष का एक भी उदाहरण पेश नहीं किया है। याचिका में किनका नाम था? याचिकाकर्ताओं में रूप रेखा वर्मा, मोहम्मद अदीब, हर्ष मंदर, नजीब जंग, जॉन दयाल और अशोक कुमार शर्मा शामिल थे। उन्होंने अपनी याचिका में कथित हेट स्पीच के लिए कई भाजपा नेताओं का नाम लिया था:     हिमंत बिस्वा सरमा (असम के मुख्यमंत्री)     योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री)     देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री)     पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड के मुख्यमंत्री)     अनंत कुमार हेगड़े (पूर्व केंद्रीय मंत्री)     गिरिराज सिंह (केंद्रीय मंत्री)     इसके अलावा कुछ नौकरशाहों की टिप्पणियों का भी जिक्र था। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘राजनीतिक दलों के नेताओं को भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। अदालतें आदेश पारित कर सकती हैं, लेकिन इसका असली समाधान राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक संस्थानों द्वारा संवैधानिक मूल्यों और नैतिकता के प्रति वफादार रहने में ही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भाषण की उत्पत्ति विचार प्रक्रिया से होती है। क्या अदालत के आदेश से किसी व्यक्ति की विचार प्रक्रिया को बदला या प्रतिबंधित किया जा सकता है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या होगा?’ जस्टिस बागची: उन्होंने सिब्बल से कहा कि यह बहुत ही अस्पष्ट याचिका है। इसे एक लोकलुभावन कवायद बनाने के बजाय, इसे एक रचनात्मक संवैधानिक प्रयास होने दें। राजनीति का शोर-शराबा जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने का आधार नहीं होना चाहिए। जब कपिल सिब्बल ने कहा कि वह याचिका से व्यक्तियों के सभी संदर्भ हटा देंगे, तो पीठ ने जवाब दिया कि आवश्यक संशोधन किए जाने के बाद ही वह जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। सिब्बल ने याचिका में संशोधन के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। याचिकाकर्ताओं की दो मुख्य मांगे हैं:     यह घोषणा की जाए कि संवैधानिक पदों या सार्वजनिक कार्यालयों में बैठे लोगों के सार्वजनिक भाषण संवैधानिक नैतिकता के अधीन होने चाहिए और वे दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें।     संवैधानिक पदधारियों और नौकरशाहों के सार्वजनिक भाषण को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि बिना पूर्व प्रतिबंध या सेंसरशिप के संवैधानिक नैतिकता का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

स्वदेशी AI Sarvam ने दावेदारी की, इंटरनेट बिना भी करेगा काम और ग्लोबल AI को चुनौती

 नई दिल्ली  India AI Impact Summit के दौरान Sarvam AI का नाम तेजी से सामने आया है. वजह है कंपनी का नया प्लेटफॉर्म Sarvam Edge. इसे ऑन-डिवाइस AI के तौर पर पेश किया गया है. आसान शब्दों में कहें तो यह AI आपके मोबाइल और लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के भी चल सकता है. मतलब हर सवाल या कमांड के लिए डेटा क्लाउड पर भेजने की जरूरत नहीं होगी. प्रोसेसिंग डिवाइस के अंदर ही होगी. यह आइडिया नया नहीं है, लेकिन भारत जैसे देश में यह काफी प्रैक्टिकल हो सकता है. यहां हर जगह तेज और स्टेबल इंटरनेट नहीं मिलता. ऐसे में ऑफलाइन या लो-इंटरनेट पर चलने वाला AI ज्यादा काम का साबित हो सकता है. Sarvam Edge क्या करता है और किसके लिए बना है Sarvam Edge का फोकस रोजमर्रा के बेसिक AI कामों पर है. जैसे वॉइस को टेक्स्ट में बदलना. टेक्स्ट को दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करना. और कुछ लिमिटेड AI असिस्टेंट टास्क. कंपनी भारतीय भाषाओं पर ज्यादा काम कर रही है. इसलिए इसका इस्तेमाल उन यूजर्स के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है जो हिंदी या दूसरी लोकल लैंग्वेज में काम करते हैं. ऑन-डिवाइस होने का एक फायदा प्राइवेसी से जुड़ा है. यूजर का डेटा बाहर सर्वर पर नहीं जाता. सब कुछ फोन या लैपटॉप में ही प्रोसेस होता है. हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है. अगर डिवाइस पुराना है या कमजोर हार्डवेयर है तो परफॉर्मेंस और बैटरी पर असर पड़ सकता है. ChatGPT से तुलना, दोनों का अप्रोच अलग है ChatGPT क्लाउड पर चलने वाला बड़ा AI मॉडल है. यह इंटरनेट के जरिए काम करता है. इसकी ताकत यह है कि यह काफी जटिल सवालों को हैंडल कर सकता है. लॉन्ग कन्वर्सेशन कर सकता है. और कई टॉपिक्स पर डीप जवाब देता है. Sarvam Edge का अप्रोच अलग है. यह छोटे और हल्के मॉडल पर काम करता है. इसका मकसद हर तरह का जनरल AI बनना नहीं है. बल्कि कुछ खास टास्क को लोकल लेवल पर आसान बनाना है. जहां इंटरनेट नहीं है या स्लो है, वहां यह ज्यादा काम का हो सकता है. सीधी भाषा में कहें तो ChatGPT ज्यादा पावरफुल है, लेकिन Sarvam Edge ज्यादा प्रैक्टिकल कंडीशन को टारगेट करता है. दोनों का यूज-केस अलग है. Google Gemini से तुलना, स्केल और टारगेट में फर्क Google Gemini भी क्लाउड बेस्ड AI सिस्टम है. यह बड़े डेटा सेंटर पर चलता है. Gemini का फोकस मल्टीमॉडल AI पर है. यानी टेक्स्ट, इमेज और दूसरी चीजों को एक साथ समझना. यह हाई-एंड यूजर्स और कंपनियों के लिए ज्यादा डिजाइन किया गया है. Sarvam Edge यहां भी अलग रास्ता लेता है. इसका स्केल छोटा है. लेकिन टारगेट ज्यादा ग्राउंड लेवल यूजर हैं. खासकर वे लोग जो लोकल लैंग्वेज में काम करते हैं. और जिनके पास हर समय तेज इंटरनेट नहीं होता. इसलिए Gemini और Sarvam Edge को सीधा कंपटीटर कहना सही नहीं होगा. दोनों अलग जरूरतों को पूरा करते हैं. भारत के AI इकोसिस्टम में Sarvam की जगह भारत सरकार IndiaAI Mission के जरिए लोकल AI को बढ़ावा देने की बात कर रही है. Sarvam AI जैसे स्टार्टअप इसी इकोसिस्टम का हिस्सा हैं. इनका फोकस भारत के यूज-केस पर है. खासकर भाषा और एक्सेस से जुड़े मुद्दों पर. फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि Sarvam Edge भारत का ChatGPT बन गया है. अभी यह एक शुरुआती स्टेज का प्रोडक्ट है. असली तस्वीर तब साफ होगी जब ज्यादा लोग इसे अपने फोन और लैपटॉप पर इस्तेमाल करेंगे. और देखा जाएगा कि रियल लाइफ में यह कितना स्टेबल और काम का है. Sarvam AI का दावा, Gemini और ChatGPT से बेहतर कहां और क्यों Sarvam AI की टीम यह कह रही है कि उनके कुछ मॉडल भारत से जुड़े टास्क में Gemini और ChatGPT से बेहतर रिजल्ट दे रहे हैं. यह दावा जनरल AI पर नहीं है. कंपनी खास टास्क की बात कर रही है. जैसे इंडियन लैंग्वेज टेक्स्ट पढ़ना. पुराने डॉक्युमेंट समझना. और OCR जैसे काम. Sarvam का कहना है कि इन केस में उनके मॉडल ज्यादा सही आउटपुट दे रहे हैं. खासकर तब जब इनपुट में हिंदी, दूसरी लोकल भाषाएं या हिंग्लिश हो. यह दावा कहां तक सही है और इसकी लिमिट क्या है यह समझना जरूरी है कि यह तुलना हर तरह के AI काम पर लागू नहीं होती. Sarvam के दावे कुछ लिमिटेड बेंचमार्क और उनके अपने टेस्ट पर बेस्ड हैं. यह नहीं कहा जा सकता कि Sarvam हर मामले में Gemini या ChatGPT से बेहतर है. जनरल सवाल-जवाब, लॉन्ग चैट या बड़े नॉलेज टास्क में ग्लोबल मॉडल अब भी ज्यादा आगे हैं. Sarvam का स्ट्रॉन्ग पॉइंट लोकल यूज-केस है. खासकर इंडियन लैंग्वेज और लोकल कंटेंट से जुड़े काम.

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