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भारत-पाक रिश्तों पर फिर चर्चा, हैंडशेक को लेकर सलमान अली आगा का बयान चर्चा में

कोलंबो भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच को लेकर तमाम संशय के बादल छंट गए हैं। दोनों देशों के बीच कोलंबो में रविवार को मुकाबला होना है। मैच को लेकर करोड़ों क्रिकेट फैंस रोमांचित हैं। फैंस के मन में एक सवाल है कि क्या भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी मैच के बाद पहले की तरह एक दूसरे के साथ हाथ मिलाएंगे या एशिया कप वाली ‘हाथ नहीं मिलाने’ की नीति ही काम करेगी। शनिवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा से पूछा गया कि क्या मैच के दौरान दोनों देशों के खिलाड़ी एक दूसरे से हाथ मिलाएंगे? इसके जवाब में आगा ने कहा, “यह भारत पर है कि वे सही भावना के साथ खेलना चाहते हैं या नहीं।” उन्होंने कहा, “क्रिकेट को भावना के साथ खेला जाना चाहिए। मेरी निजी राय शायद मायने न रखे, लेकिन क्रिकेट वैसे ही खेला जाना चाहिए जैसा हमेशा से खेला जाता रहा है। यह उन्हें तय करना है कि क्या करना है।” मैच को लेकर पाकिस्तान के कप्तान ने कहा, “भारत के खिलाफ हमारा रिकॉर्ड अच्छा नहीं है, लेकिन हम इतिहास नहीं बदल सकते। हर दिन एक नया दिन होता है।” अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्ते निचले स्तर पर हैं। इसका असर क्रिकेट पर भी पड़ा है। एशिया कप 2025 के दौरान हुए तीन मैचों में भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों के साथ मैच के बाद होने वाला पारंपरिक ‘हैंड शेक’ नहीं किया था। महिला क्रिकेट टीम और जूनियर टीमों ने भी ऐसा ही किया। विमेंस वर्ल्ड कप, अंडर-19 एशिया कप, अंडर-19 विश्व कप और राइजिंग स्टार्स एशिया कप में भी दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे से हाथ नहीं मिलाया था। पाकिस्तान को हराकर एशिया कप का खिताब जीतने वाली भारतीय टीम ने एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से भी इनकार कर दिया था। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड द्वारा टी20 विश्व कप से बाहर होने और उसकी जगह आईसीसी द्वारा स्कॉटलैंड को मौका दिए जाने के बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में भारत के साथ 15 फरवरी वाला मैच खेलने से इनकार कर दिया था। आईसीसी की मध्यस्थता के बाद पाकिस्तान ने अपना फैसला बदला। रविवार को कोलंबो में मैच के अलावा दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच आपसी व्यवहार कैसा रहता है, इस पर भी फैंस की नजरें रहेंगी।

दिल्ली बनाम पंजाब विवाद तेज, विधानसभा ने अफसरों से मांगा जवाब, तय की अंतिम तारीख

नई दिल्ली दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) नेता आतिशी मार्लेना की टिप्पणी से जुड़े मामले में दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार कमेटी ने पंजाब सरकार के अफसरों से अपना जवाब देने को 20 फरवरी तक अंतिम मौका दिया है।   दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) नेता आतिशी मार्लेना की टिप्पणी से जुड़े मामले में दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार कमेटी ने पंजाब सरकार के अफसरों से अपना जवाब देने को 20 फरवरी तक अंतिम मौका दिया है। कमेटी ने शिकायत की कॉपी, एफआईआर और फोरेंसिक रिपोर्ट भी तलब की है। किन-किन अफसरों कों भेजा पत्र दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार कमेटी ने पत्र लिखकर पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और जालंधर के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे विपक्ष की नेता आतिशी से संबंधित कथित टिप्पणियों के मामले में अपना लिखित उत्तर 20 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। पत्र में कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यह तिथि अंतिम अवसर के रूप में मानी जाएगी और इसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। कमेटी ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पंजाब सरकार से इस प्रकरण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मांगे हैं। इनमें शिकायत की कॉपी एवं उसके संलग्नक, जिनके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई, एफआईआर की कमेटी, पंजाब पुलिस के सोशल मीडिया विशेषज्ञ (टेक्निकल सेल) की रिपोर्ट तथा पंजाब की फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट शामिल हैं। जानकारी नहीं देने को अवमानना माना जाएगा कमेटी ने निर्देश दिया है कि सभी जवाब और दस्तावेज निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत किए जाएं, ताकि प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के अनुसार उन पर विचार किया जा सके। समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में इसे विशेषाधिकार हनन एवं अवमानना के रूप में देखा जा सकता है। पंजाब सरकार ने क्या कहा था यह भी उल्लेखनीय है कि 12 फरवरी 2026 को पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), कार्यालय द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 5 फरवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा भेजे गए पत्र से पूर्व इस मामले में कोई डायरेक्ट कम्युनिकेशन प्राप्त नहीं हुआ था। पत्र में यह भी बताया गया है कि डीजीपी पंजाब, पुलिस कमिश्नर जालंधर तथा डायरेक्टर फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, पंजाब की टिप्पणियां दिल्ली के संबंधित कार्यालयों को भेज दी गई हैं। साथ ही, एक विस्तृत और समेकित औपचारिक उत्तर तैयार किया जा रहा है, जिसे सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया है। यह मामला सदन के पटल पर दिए गए वक्तव्यों तथा उसके पश्चात पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के संदर्भ में विशेषाधिकार हनन और अवमानना की शिकायतों से संबंधित है। विशेषाधिकार कमेटी वर्तमान में इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है, जिसमें संबंधित अधिकारियों के आचरण तथा दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा मांगी गई सूचनाओं और पत्राचार के निपटान की प्रक्रिया भी शामिल है।  

प्यार या दिखावा? वैलेंटाइन डे पर सुकेश ने जैकलीन को प्राइवेट जेट देने का किया दावा

नई दिल्ली सुकेश चंद्रशेखर ने वैलेंटाइन डे पर जैकलीन फर्नांडीज को एक कस्टमाइज्ड प्राइवेट जेट गिफ्ट किया है। जेल में बंद सुकेश के दावे पर अब तक जैकलीन की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं आया है। वैलेंटाइन डे पर ठग सुकेश चंद्रशेखर ने मंडोली जेल के अंदर से एक्टर जैकलीन फर्नांडीज को एक ‘लव लेटर’ लिखा है। इस बार सुकेश ने जैकलीन को अपने प्यार का इजहार करने के लिए एक तोहफा भी भेजा है। उसने उन्हें एक कस्टमाइज़्ड गल्फस्ट्रीम जेट (हेलीकॉप्टर) तोहफे में दिया है। उस दिन का इंतजार जब… सुकैश ने चिट्ठी की शुरुआत जैकलीन को अपना “वैलेंटाइन” बताते हुए की। उसने लिखा कि यह वैलेंटाइन डे उसके लिए खास है। वह उस दिन का इंतजार कर रहा है जब वे साथ में जिंदगी के बाकी वैलेंटाइन मना सकेंगे। चिट्ठी में उसने जैकलीन के प्रति अपने प्रेम का इजहार करते हुए लिखा- वह उन्हें “दुनिया की सबसे बेहतरीन वैलेंटाइन” मानता है। गल्फस्ट्रीम जैट देने का दावा अपने संदेश में सुकैश ने दावा किया कि उसने जैकलीन के लिए खास तौर पर एक गल्फस्ट्रीम जेट तैयार करवाया है। इस पर बाहर और अंदर दोनों जगह उनके नाम के शुरुआती अक्षर ‘JF’ बने हुए हैं। उसने यह भी कहा कि जेट का रजिस्ट्रेशन नंबर जैकलीन की जन्मतिथि और जन्म के महीने से जुड़ा हुआ है। इस कारण यह तोहफा और भी स्पेशल बन जाता है। सुकेश के दावे पर जैकलीन का नहीं आया रिएक्शन सुकैश के अनुसार, चूंकि जैकलीन अक्सर काम और शूटिंग के सिलसिले में ट्रैवल करती रहती हैं, इसलिए यह जेट उनके आने-जाने में काफी सुविधा प्रदान करेगा। गौरतलब है कि सुकैश चंद्रशेखर फिलहाल जेल में बंद है और पहले भी कई बार जैकलीन के नाम पत्र लिख चुका है। इस नए दावे को लेकर अब तक जैकलीन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जैट को पूरी तरह से कानूनी बना दूंगा लेटर में सुकैश ने यह भी दावा किया कि वह इस जेट को अपने इस साल के इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित करेगा और इस पर लागू सभी गिफ्ट टैक्स अदा करेगा। उसने लिखा कि ऐसा कर वह इस उपहार को “पूरी तरह कानूनी” बना देगा और यह किसी कथित आपराधिक आय से जुड़ा नहीं होगा। अपनी चिट्ठी में उसने जैकलीन को “बोम्मा” कहकर बुलाया है और खुद को दुनिया का “सबसे खुशकिस्मत इंसान” बताया है। 2015 से जेल में बंद है सुकेश आपको बताते चलें कि सुकैश चंद्रशेखर 2015 से जेल में बंद है। उस पर करोड़ों रुपये की ठगी के गंभीर आरोप हैं। ईडी की जांच के दौरान उसका नाम बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस के साथ जुड़ा। सुकैश ने दावा किया है कि वह जैकलीन को डेट कर रहा था। उसके इन दावों के बाद दोनों की कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई थीं। सुकेश के दावों को जैकलीन ने नकारा हालांकि जैकलीन फर्नांडिस ने सुकैश के इन दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सुकैश ने खुद को एक वैध कारोबारी बताकर उन्हें गुमराह किया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सुकैश ने उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की, जिससे वे मानसिक रूप से आहत और परेशान हुईं। मामले की जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

फ्लाइट में बम होने का दावा, पायलट को मिली रहस्यमयी पर्ची से मची हलचल

कोलकाता कोलकाता एयरपोर्ट पर शनिवार को तब हड़कंप मच गया जब पायलट को एक धमकी वाली पर्ची मिली। विमान उड़ान भरने ही वाला था कि पायलट को विमान को बम से उड़ाने की धमकी वाली एक पर्ची मिली और फिर विमान को खाली करा लिया गया। कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो के विमान की उड़ान से ठीक पहले पायलट को एक ऐसी पर्ची मिली जिसके बाद हड़कंप मच गया। तुरंत विमान को खाली करवाया गया। जानकारी के मुताबिक इस पर्ची में विमान को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। विमान को खाली कराए जाने के बाद जांच-पड़ताल की जा रही है। एयरपोर्ट पर भी हाई अलर्ट घोषित किया गया है। इंडिगो का 6E3074 विमान सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हाई अड्डे से शिलॉन्ग के लिए उड़ान भरने वाला था। वहीं बम की धमकी मिलने के बाद इसे आईसोलेशन बे में ले जाया गया। बोर्डिंग के दौरान ही पायलट टॉइलेट में एक पर्ची मिली। इसमें लिखा था कि विमान के अंदर बम है। इसके बाद यात्रियों को तुरंत विमान से उतारा गया। इस बात की जानकारी मिलने के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। चेतावनी के बाद विमान को एक अलग जगह पर ले जाया गया और सभी यात्रियों को उतार दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने विमान की तलाशी शुरू की। हवाई अड्डा के अधिकारियों ने कहा कि यह पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि विमान में नोट किसने रखा। सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद उड़ान पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे अपने गंतव्य के लिए रवाना हुई। गौरतलब है कि इंडिगो के विमान में बम की सूचना की यह पहली घटना नहीं है। जनवरी में ही 222 यात्रियों को ले जा रही इंडिगो की दिल्ली-बागडोगरा उड़ान को उड़ान भरने के बाद बम की धमकी मिली, जिसके बाद उसे लखनऊ में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी, जहाँ तलाशी ली गई। पिछले साल, कोलकाता-मुंबई इंडिगो की उड़ान (6ई-5227) में भी बम की धमकी मिली थी। उस समय एक अनजान व्यक्ति ने हवाई अड्डा पर फ़ोन करके दावा किया था कि उसमें विस्फोटक है। सभी 195 यात्रियों को निकाला गया और विमान की तलाशी ली गई, हालाँकि कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हवाई अड्डा अधिकारियों ने कहा कि इस घटना में भी सुरक्षा मानक का पालन किया गया, और अब तक कोई विस्फोटक नहीं मिला है। एक दिन पहले ही दिल्ली में पांच स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले थे। इन्हें बाद में अफवाह घोषित कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि धमकी भरे ईमेल में उकसाने वाली और आपत्तिजनक सामग्री थी जिसमें दावा किया गया था, “दिल्ली खालिस्तान बन जाएगा और स्कूलों में दोपहर 1.11 बजे बम विस्फोट होगा।” ईमेल में यह भी कहा गया था कि दोपहर 2.11 बजे संसद के अंदर विस्फोट होगा, जिसके बाद विभिन्न एजेंसियों के बीच सतर्कता बढ़ा दी गई और समन्वय स्थापित किया गया।  

दिन में गर्मी, रात में ठंड: इंदौर के लोगों की तबीयत बिगड़ी, एमवाय अस्पताल में पहुंच रहे सैकड़ों मरीज

इंदौर  मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। दिन में तेज धूप और गर्मी बढ़ी जबकि रात में ठंडक के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सीधा असर वायरल फीवर के रूप में सामने आ रहा है। एमवाय अस्पताल में ही एक दिन में करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय मौसम का उतार-चढ़ाव संक्रमण के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। दिन में पसीना और रात में ठंडी हवा चलने से लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो देर रात तक बाहर रहते हैं या ठंड-गर्मी के बीच लापरवाही बरतते हैं। शादियों का सीजन भी बढ़ा रहा खतरा इन दिनों शादी समारोह का सीजन चल रहा है। देर रात तक कार्यक्रमों में शामिल होना, ठंडी चीजें खाना, नींद पूरी न होना और भीड़भाड़ में समय बिताने से भी वायरल संक्रमण फैलने की बड़ी वजह सामने आई है। डाक्टरों के अनुसार कई लोग हल्का बुखार या सर्दी होने के बाद भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो रही है। संक्रमण परिवार के अन्य लोगों तक भी फैल रहा है। गंभीर बीमारियों वाले मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम शुगर, बीपी, कैंसर, ह्दय रोग, लिवर, अस्थमा, गर्भवती महिलाओं और किडनी से संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। वायरल फीवर होने पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की रिकवरी धीमी हो जाती है। कई बार उनकी स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण का असर ज्यादा समय तक बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी वायरल फीवर के मामले बढ़ रहे हैं। तापमान में अचानक बदलाव से उनकी इम्युनिटी जल्दी प्रभावित होती है, जिससे बुखार और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज इस मौसम में हल्के गर्म कपड़े साथ रखना, ठंडी चीजों से परहेज करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, फल-सब्जियां और भरपूर नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। रोजाना वायरल के एक हजार मरीज     वायरल फीवर, शरीर एवं जोड़ों का दर्द, भूख कम होना। इसमें सामान्य मरीज जो जल्दी ठीक हो जाते हैं, लेकिन बीपी, किडनी, कैंसर, ह्दय रोग, शुगर, गर्भवती महिलाओं, अस्थमा मरीजों को इंफेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। ये हाई रिस्क मरीज हैं। शादी समारोह के कारण इन दिनों वायरल फीवर ज्यादा बढ़ रहा है। एमवाय के मेडिसिन विभाग में रोजाना 400, चाचा नेहरू अस्पताल में 400 बच्चे और एमटीएच में 200 गर्भवती महिलाएं वायरल फीवर के इलाज के लिए आ रही हैं। इस तरह करीब एक हजार मरीज रोजाना आ रहे हैं।- डॉ. धर्मेंद्र झंवर, प्रो. मेडिसिन विभाग, एमजीएम मेडिकल कॉलेज  

IAS ट्रांसफर 2026: मोहन का संदेश और मनीष-सिंह वर्णवाल की ताकत, CM की गंभीर नजर

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने शुक्रवार देर रात बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए। इसमें 11 आईएएस अधिकारियों के तबादले हुए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परफॉर्मेंस और 2026 के रोडमैप को ध्यान में रखते हुए ये फैसले लिए। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से प्रमुख सचिव  संदीप सिंह और मंत्री राजेंद्र शुक्ला के बीच तालमेल ठीक नहीं बैठ रहा था, यही वजह है कि संदीप सिंह को ट्रांसफर किया गया। अब स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को दी गई है। संदीप सिंह को वन विभाग को प्रुख सचिव बनाया गया है।   वहीं, जनसंपर्क विभाग के कामकाज से भी मुख्यमंत्री नाखुश थे। यहीं वजह है कि वर्तमान जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना को अब आबकारी आयुक्त बनाया गया है। वहीं, मनीष सिंह को फिर से जनसंपर्क आयुक्त नियुक्त किया गया है और उनके पास परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। वहीं, आबकारी आयुक्त को लंबे समय से बदलने की अटकलें चल रही थी। अब करीब दो साल तक आबकारी आयुक्त रहे अभिजीत अग्रवाल अब प्रबंध संचालक, राज्य सहकारी विपणन संघ बनाया गया है। वहीं, उनकी जगह दीपक सक्सेना को आबकारी आयुक्त बनाया गया है।   वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने 2026 को कृषि वर्ष के रूप में घोषित किया है। इसमें सरकार किसानों की आय बढ़ाने से लेकर उत्पादकता की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। बताया जा रहा है कि कृषि विभाग के डायरेक्टर अजय सिंह के अब तक के कामकाज मुख्यमंत्री की उम्मीदों के अनुसार नहीं रहा। अब उनको हटा कर जबलपुर विद्युत कंपनी में प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी दी गई है।  ट्रांसफर आदेश के अनुसार 2011 बैच के IAS उमाशंकर भार्गव को राजभवन से किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग का संचालक बनाया गया। जिला स्तर पर कई CEO और मुख्य कार्यपालन अधिकारी बदले गए। इनमें भिंड जिला पंचायत के CEO सुनील दुबे को राज्यपाल का उप सचिव बनाया गया।, संघमित्रा गौतम को आलीराजपुर जिला पंचायत CEO, नंदा भलावे कुशरे को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में अपर परियोजना संचालक और कमल सोलंकी को राससेन जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है।  

देश का नाम रोशन: प्रमोद भगत ने जीता पैरा बैडमिंटन का छठा विश्व खिताब

नई दिल्ली 37 वर्षीय भगत ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग के फाइनल में इंडोनेशिया के मोहम्मद अल इमरान को 21-12, 21-18 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनके करियर का लगातार चौथा विश्व चैंपियनशिप एकल स्वर्ण और कुल मिलाकर छठा विश्व खिताब है। एसएल3 वर्ग में वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिनके निचले अंगों में गंभीर विकलांगता होती है। पांच साल की उम्र में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद भगत ने अपने खेल से दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने इससे पहले 2009, 2015, 2019, 2022 और 2024 में भी विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इस जीत के साथ वह विश्व चैंपियनशिप इतिहास में सबसे सफल एकल खिलाड़ी बन गए हैं। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि हाल ही में वे डोपिंग रोधी नियमों के ‘वेयरअबाउट्स’ उल्लंघन के कारण 18 महीने के निलंबन का सामना कर चुके थे, जिसकी वजह से वह 2024 पेरिस पैरालंपिक में हिस्सा नहीं ले पाए थे। लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए एक बार फिर अपना दबदबा साबित किया।  

जीरो पॉवर्टी की दिशा में हुआ वृहद कार्य, 60 लाख गरीबों को आवास दिये गये, 6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर हुए

तुष्टीकरण से संतुष्टीकरण की ओर बढ़ा प्रदेश, निराश्रितों और श्रमिकों के लिए नई योजना की तैयारीः  सीएम योगी  मुख्यमंत्री बोले, सरकार का उद्देश्य हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना  जीरो पॉवर्टी की दिशा में हुआ वृहद कार्य, 60 लाख गरीबों को आवास दिये गये, 6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर हुए लखनऊ  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जीरो पॉवर्टी के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में गरीबों, निराश्रित महिलाओं, श्रमिकों और वंचित वर्गों के लिए चलाई गई योजनाओं ने उत्तर प्रदेश की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर बदली है। सरकार ने तुष्टीकरण की राजनीति से ऊपर उठकर “संतुष्टीकरण” के मॉडल पर कार्य किया है, जिसका उद्देश्य हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि निराश्रित महिलाओं को पेंशन, जरूरतमंदों को जॉब कार्ड और राशन कार्ड, जिनके पास आवास नहीं था उन्हें आवास तथा जिनके पास भूमि का स्वामित्व नहीं था उन्हें आवासीय पट्टा देने की कार्रवाई व्यापक स्तर पर की गई है। उन्होंने कहा कि अब तक 60 लाख गरीब परिवारों को एक-एक आवास उपलब्ध कराया गया है। पूर्ववर्ती योजनाओं पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले गरीबों को इंदिरा आवास योजना के तहत मात्र ₹20,000 दिए जाते थे, जो पर्याप्त नहीं थे और न ही आवास समय पर पूरे हो पाते थे। उस दौरान योजनाओं का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंचता था। इसके विपरीत वर्तमान डबल इंजन सरकार नगरीय क्षेत्रों में ₹2.5 लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹1.20 लाख आवास निर्माण के लिए उपलब्ध करा रही है। इसके अतिरिक्त शौचालय निर्माण के लिए ₹12 से 15 हजार की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। साथ ही मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी के बराबर मानदेय भी लाभार्थी को प्रदान किया जाता है, जिससे घर निर्माण में आर्थिक सहयोग सुनिश्चित हो सके। बहुआयामी गरीबी में आई उल्लेखनीय कमी मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं और समग्र विकास के प्रयासों के परिणामस्वरूप 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने इसे सरकार की परिणाम-आधारित कार्यशैली का प्रमाण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाई कर्मियों और निर्माण श्रमिकों जैसे शेष जरूरतमंद वर्गों के लिए आवास के लिए एक नई योजना लाई जा रही है। इसकी घोषणा आगामी बजट भाषण में की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी सहायता से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास केवल आवास या आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के समन्वित विस्तार के माध्यम से समग्र विकास सुनिश्चित करना है। “हर गरीब को छत, हर निराश्रित को सम्मान और हर जरूरतमंद को अधिकार” इसी भावना के साथ प्रदेश जीरो पॉवर्टी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दोहराया कि यह धन जनता का है और उसका उपयोग जनता के हित में ही किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ बिना भेदभाव हर वर्ग तक पहुंचे और उत्तर प्रदेश गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित करे।

यूपी बजट विश्लेषण: पारदर्शी नीतियां और आशावादी दृष्टिकोण का संदेश

उत्तर प्रदेश के बजट पर विशेषज्ञों की राय  ——————————————— स्पष्ट नीतियों से सकारात्मक सोच योगी सरकार ने प्रदेश के विकास को लेकर अपनी समग्र दृष्टि पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं को एकीकृत रूप से देखें तो सरकार का मंतव्य भी सामने आ जाएगा। पहला तो राज्य सरकार की ओर से पहली बार प्रस्तुत किया गया आर्थिक सर्वेक्षण, दूसरा सदन में रख गए बजट के बिंदु और तीसरा राज्यपाल के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से की गई चर्चा। इन तीनों का ही सार यह है कि प्रदेश सरकार के एजेंडे में लोक लुभावन बजट नहीं, प्रदेश को अब क्षमता वृद्धि की राह पर ले जाना है और इसीलिए दीर्घकालिक सोच को प्रधानता दी गई है। चूंकि यूपी की अर्थव्यवस्था मजबूत है इसलिए पूंजीगत व्यय पर अधिक जोर दिया जाना अब स्वाभाविक है और अच्छी बात यह है कि इसके लिए नीतियां बिलकुल स्पष्ट हैं। राज्य की आर्थिक स्थिरता ने ही निवेशकों को आकर्षित किया है। इसमें उस बुनियादी ढांचे का विशेष स्थान है, जो सहज साधन के रूप में विकसित हुआ। एक्सप्रेसवे का नेटवर्क, नए हवाई अड्डे, लाजिस्टिक पार्क और औद्योगिक कारिडोर की वजह से निवेशक आने वाले दिनों में और आकर्षित होंगे। मेरी दृष्टि में यह बजट सकारात्मक सोच वाला है जिसमें विकास का एक बड़ा आधार दिखाई देता है।  डा. शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ बिजनेस स्टेबिलिटी को बढ़ावा आर्थिक सर्वेक्षण और 2026-27 के बजट दोनों को देखें तो यह स्पष्ट है कि सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास दर को स्थिर बनाए रखना चाहती है। यह दृष्टिकोण इस बात का परिचायक है कि सामाजिक क्षेत्र को भी उत्पादकता से जोड़ा जा रहा है। पूंजीगत व्यय पर स्पष्ट फोकस की सोच भी स्पष्ट है कि संरचनात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ा जाए। यह एक तरह से संदेश है कि सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर का अपना एजेंडा बरकरार रखा है जिससे आगे चलकर प्रदेश में स्थायी विकास होता दिखाई देगा। सड़क, एक्सप्रेस-वे, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक कॉरिडोर, सिंचाई और ऊर्जा पर बड़े आवंटन यह दर्शाते हैं कि सरकार निजी निवेश को लेकर आधारभूत ढांचा मजबूत करना चाहती है। इससे राज्य में आर्थिक स्थिरता आएगी और निवेशक ऐसा ही माहौल चाहते हैं। आधारभूत ढांचा मजबूत होने से औद्योगिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। फियरलेस गवर्नेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस स्टेबिलिटी को बढ़ावा देती हैं। मेरे विचार में यूपी सरकार ने एक ऐसा बजट प्रस्तुत किया है, जिसमें राज्य की आर्थिक स्थिरता के साथ ही निवेश संकेतकों को लेकर भी सकारात्मक संदेश उभरता है।  इस बात का प्रयास दिखाई देता है कि वेलफेयर की आधारशिला पर क्षमता निर्माण और पूंजी निवेश की इमारत खड़ी की जाए।  प्रो. मेनका सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय   उत्तर प्रदेश का 2026-2027 का बजट सकारात्मक संदेशों से भरा हुआ है। यह साफ करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लोक लुभावन राजनीति के बजाय प्रदेश की लॉन्ग टर्म आर्थिक मजबूती पर काम कर रही है। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत है इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत निवेश पर स्पष्ट फोकस। प्रदेश की जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना और 13.4 प्रतिशत की वृद्धि दर दिखाती है कि विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर उतर रहा है। प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये तक पहुंचना और आगे 1,20,000 रुपये का अनुमान इस दिशा को और मजबूत करता है। लगभग 06 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना और बेरोजगारी दर का 2.24 प्रतिशत तक आना यह बताता है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर स्थित हर व्यक्ति तक पहुंच रहा है। साथ ही, 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का क्रियान्वयन यह संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब निवेश आधारित, स्थिर और भविष्य उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। प्रो. हिमांशु, अर्थ शास्त्री, जेएनयू मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है। यूपी का बजट 2026-27 यह स्पष्ट करता है कि योगी सरकार तात्कालिक लाभ से आगे बढ़कर प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है। 9,12,696.35 करोड़ रुपये के इस बजट में 19.5 प्रतिशत पूंजीगत व्यय रखा जाना इस बात का संकेत है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थायी विकास सरकार के एजेंडे के केंद्र में हैं। राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत की सीमा में रखना और ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 23.1 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य यह दर्शाता है कि आर्थिक अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का इसे चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत से नीचे लाने का संकल्प भविष्य की आर्थिक मजबूती तो सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्धता का संकेत है। शिक्षा, चिकित्सा और कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्रों में संतुलित आवंटन यह दिखाता है कि विकास केवल ढांचागत ही नहीं, बल्कि समावेशी भी है। यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब मजबूत, स्थिर और दीर्घकालिक विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। प्रो. शिरीष मिश्र, केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी

कोलार में अड़ीबाजी का आरोपी आखिरकार हिरासत में, पांच हजार रुपए का इनाम था घोषित

कोलार में अड़ीबाजी के मामले में फरार आरोपी गिरफ्तार, घोषित किया गया था पांच हजार का इनाम भोपाल कोलार पुलिस ने मारपीट और अड़ीबाजी के मामले में तीन महीने से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।  जानकारी के अनुसार फरियादी दौलत सिंह धाकड़ (22) पिछले साल नवंबर महीने में सुबह करीब चार बजे अपने एक दोस्त को छोडऩे के लिए प्रियंका नगर कोलार रोड गया था। वापस लौटते समय वंश मेहरा और उसके दो साथियों ने रोक लिया और पूछने लगे कि यहां क्यों आए थे। दौलत ने बताया कि वह अपने दोस्त को छोडऩे आया था। इसके बाद उन्होंने शराब पीने के लिए पांच सौ रुपये की मांग की। दौलत ने जब उन्हें रुपये देने से मना किया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुए उसके साथ बेल्ट से मारपीट कर दी। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मारपीट और अड़ीबाजी का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी वंश मेहरा को उसी समय गिरफ्तार कर लिया था, जबकि दो आरोपी भाग निकले थे। आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसके बाद से एक विशेष टीम आरोपियों की तलाश में लगाई गई थी। शुक्रवार को पुलिस ने फरार आरोपी राज पथरोड़ निवासी प्रियंका नगर और शैलेंद्र सेन निवासी गरीब नगर कोलार रोड को गिरफ्तार कर लिया है।  पत्थर से हमला कर मोबाइल लूटने वाले शातिर बदमाश गिरफ्तार,आधी रात को गणेश मंदिर बस स्टाप पर हुई वारदात  पुलिस ने चंद घंटों के भीतर 2 आरोपियों को दबोचा  भोपाल। हबीबगंज इलाके में एक युवक पर पत्थर से हमला कर मोबाइल फोन लूटने वाले 2 शातिर बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना आधी रात को गणेश मंदिर बस स्टॉप पर उस वक्त हुई, जब फरियादी बाइक से उतरकर पैदल अपने घर लौट थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने इलाके में लगे करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के बाद आरोपियों को दबोच लिया। जानकारी के अनुसार अशोक कुमार तिवारी (41) ई-2 अरेरा कॉलोनी में रहते हैं। गुरुवार की रात वह अपने दोस्त और होटल मालिक अखंड मिश्रा के साथ उनकी बाइक पर बैठकर ग्यारह मील मिसरोद से अपने घर लौट रहे थे। रात करीब बारह बजे अंखड ने उन्हें गणेश मंदिर बस स्टॉप पर उतारा और अपने घर से लिए निकल गए।बाइक से उतरने के बाद अशोक कुमार पैदल-पैदल अपने घर के लिए जाने लगे। इसी दौरान दो लड़के उनके पास पहुंचे और बगैर किसी बात के गाली-गलौज करने लगे। अशोक उनकी बातों को अनसुना करते हुए आगे बढ़े, तभी एक युवक ने झपट्टा मारकर उनके हाथ से मोबाइल फोन छीनने लगा।अशोक ने जब इसका विरोद किया तो उसके साथी ने पत्थर उठाकर उनके सिर पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई। उसके बाद दोनों बदमाश मोबाइल फोन छीनकर भाग निकले। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मारपीट और लूटपाट का मामला दर्ज किया था।सीसीटीवी कैमरों से मिला सुराग मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की तलाश में पुलिस की एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम ने इलाके में लगे करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और बदमाशों की पहचान के प्रयास किए। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि रात को समय मोबाइल लूटने वाले दो संदेही गणेश मंदिर के पास देखा गया है। सूचना के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें दबोच लिया। पूछताछ करने पर दोनों ने अपने नाम गोलू सनी एंथोनी (33) निवासी मद्रासी कालोनी टीटी नगर और राज विशेष उर्फ बिट्टू (24) निवासी रोहित नगर बावडिय़ा कला शाहपुरा बताया। आरोपी गोलू के खिलाफ टीटी नगर में आठ और राज के खिलाफ मिसरोद थाने में तीन अपराध पहले से दर्ज हैं।  पैसों की चाहत के चलते दिया वारदात को अंजाम  पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि दोनों रात के समय तफरी करने के लिए निकले थे। इसी दौरान उनके मन में पैसे कमाने की लालसा हुई तो उन्होंने पैदल जा रहे व्यक्ति के साथ मारपीट कर मोबाइल फोन लूट लिया। वारदात को बाद बदमाशों ने लूटा गया मोबाइल रेलवे पटरी के पास लोहे के पाइप के अंदर छिपा दिया और उसके बाद अपने घर चले गए। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। इनकी रही सराहनीय भूमिका लूटपाट की घटना का खुलासा और आरोपियों को गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी संजय चौकसे, एसआई अजय दुबे, अखिलेश त्रिपाठी, शिवभानु सिंह, हेड कांस्टेबल राघवेन्द्र भास्कर, राजकुमार साहू, आरक्षक रामनरेश किरार, कंचन यादव, राकेश भारद्वाज, अरविन्द यादव, नीमेश लोट, अभिषेक मालवीय, पुष्पेन्द्र भदौरिया और शिवशंकर की सराहनीय भूमिका रही है।

इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण से यूपी आज वैश्विक निवेशकों का आकर्षक गंतव्य

प्रदेश अब ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का मॉडल, यही नए यूपी की पहचानः योगी सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी हैः सीएम इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण से यूपी आज वैश्विक निवेशकों का आकर्षक गंतव्य     लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि उत्तर प्रदेश अब ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का मॉडल है, यही नए यूपी की पहचान है। प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर की प्रगति बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिटें संचालित हो रही हैं। इन यूनिटों में 3 करोड़ 11 लाख से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र ही प्रदेश में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करने वाला सेक्टर है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार के दौरान यह क्षेत्र लगभग मृतप्राय हो चुका था। उस समय सरकार के पास न कोई स्पष्ट विजन था, न ही टेक्नोलॉजी की समझ और न ही मजबूत इच्छाशक्ति। उद्यमियों को सरकारी सहयोग के बजाय इंस्पेक्टर राज का सामना करना पड़ता था। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड या अन्य विभागों के अधिकारी अक्सर उन्हें परेशान करते थे।  योगी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने इन समस्याओं को जड़ से समाप्त कर दिया। उद्यमियों को 1000 दिनों तक किसी भी एमएसएमई यूनिट स्थापित करने के लिए कोई एनओसी की आवश्यकता नहीं है। इस छूट नीति के परिणामस्वरूप आज प्रदेश में 96 लाख यूनिटें सक्रिय हैं और करोड़ों लोग रोजगार पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का जीता-जागता उदाहरण बताया, जिसने उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित कर दिया है। नागरिकों को सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज रूल ऑफ लॉ ही सुरक्षा और विकास की सबसे बड़ी गारंटी है। हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के भविष्य के साथ किसी को भी छेड़छाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। सीएम ने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था के कारण ही आज प्रदेश में उत्कृष्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे का जाल बिछ चुका है, एयर कनेक्टिविटी में तेजी आई है।  उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल का उद्घाटन करेंगे। पहले मेरठ से दिल्ली जाने में 3-4 घंटे लगते थे, लेकिन अब 12 लेन हाईवे और रैपिड रेल से यह दूरी मात्र 45 मिनट में तय हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पूर्व सरकारें दूरी बढ़ाने में माहिर थीं, न केवल भौगोलिक दूरी, बल्कि जाति-जाति और भाई-भाई के बीच खाई को चौड़ा करने का काम भी किया गया। पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर उन्होंने कहा कि असीम संभावनाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश पहले निवेश से वंचित रहता था। आज फियरलेस गवर्नेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस इसकी नई पहचान है। सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी है। सुरक्षा का माहौल, शासन में स्थिरता और विकास में गति, ये तीनों आज उत्तर प्रदेश की ताकत हैं। प्रदेश पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी लागू हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसे प्लेटफॉर्म निवेशकों को सुगम, पारदर्शी और विश्वसनीय वातावरण प्रदान कर रहे हैं। पहले ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में यूपी 14वें स्थान पर था, लेकिन आज यह टॉप अचीवर राज्यों में शामिल है। उत्तर प्रदेश ने सभी व्यापार सुधार मानकों को 100% लागू कर देश का पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया। डीरिग्युलेशन में नंबर-वन और 23 प्रमुख सुधारों को पूर्ण रूप से लागू किया गया। डिक्रिमिनलाइजेशन के तहत 13 राज्य कानूनों और 99% आपराधिक प्रावधानों को हटाया गया। इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट मुख्यमंत्री ने बताया कि 1947 से 2017 तक प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने थे, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में यह संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण के कारण यूपी आज वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य है। एमओयू अब कागजी नहीं, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग, उत्पादन और रोजगार सृजन तक ठोस परिणाम दे रहे हैं। पिछले साढ़े आठ वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, जिससे 60 लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। पहले यूपी के युवा अन्य राज्यों में पलायन करते थे, लेकिन अब प्रदेश में ही अवसर उपलब्ध हैं। बजट में ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट जोन’ योजना प्रस्तावित है, जो हर जिले में स्किल डेवलपमेंट से रोजगार तक की गारंटी देगी।  उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग में शोषण रोकने के लिए विशेष कॉर्पोरेशन गठित किया गया है। इससे युवाओं को 16-20 हजार रुपये का मानदेय मिलेगा। कंपनियों को केवल सेवा शुल्क दिया जाएगा। शोषण करने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। आज उत्तर प्रदेश एमएसएमई और स्टार्टअप का प्रमुख हब है। यह वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश के 65% मोबाइल और 55-60% इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट यहीं बन रहे हैं। उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट का शिलान्यास प्रधानमंत्री जल्द करेंगे। 1962 से देश इस दिशा में प्रयासरत था, अब यूपी इसका केंद्र बनेगा।

धार्मिक स्थल सर्वसमाज की आत्मनिर्भरता का आधारः योगी

दुर्योधन की प्रतिमा लगाने की वकालत, बाबर की कब्र में सजदा का समर्थन, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करते हैं सपा नेताः मुख्यमंत्री सदन में बोले योगी- सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता  दुनिया में जब भी मर्यादा पर चर्चा होगी तो अयोध्या, शाश्वत चेतना पर चर्चा होगी तो काशी, भक्ति पर मथुरा और समरसता पर होगी प्रयागराज की चर्चाः मुख्यमंत्री   धार्मिक स्थल सर्वसमाज की आत्मनिर्भरता का आधारः योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में समाजवादी पार्टी के नेताओं को जमकर आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि सपा के नेता दुर्योधन की प्रतिमा लगाने की वकालत करते हैं। वे बाबर की कब्र में सजदा का समर्थन, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करते हैं। सीएम ने संसद में कांग्रेस व सपा के सांसदों की बातों का जिक्र किया और कहा कि हिंदुस्तान का खाएंगे, लेकिन वंदे मातरम नहीं गाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा में कोई वंदे मातरम का कोई अपमान नहीं कर सकता। कांग्रेस व सपा को वंदे मातरम का विरोध करने वालों को डंके की चोट पर कान पकड़ कर, धक्का देकर बाहर करना चाहिए। राष्ट्रगीत का विरोध करने वाले को हिंदुस्तान की धऱा पर रहने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।  लोकमाता की चर्चा करने का अधिकार समाजवादी पार्टी को नहीं  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम में लोकमाता की भव्य प्रतिमा लगवाई। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने लोकमाता की 300वीं जयंती पर औरैया गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का नामकरण उनके नाम पर किया। लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के नाम पर बने मणिकर्णिका व श्मशान घाट के पुनरुद्धार कार्यक्रम को बढ़ाया जाता है तो सपा व कांग्रेस विरोध करती हैं। लोकमाता को अपमानित करती हैं। सपा को लोकमाता की चर्चा करने का अधिकार नहीं है। सपा लोकमाता के नाम पर गुमराह कर रही है। सपाइयों को डालनी चाहिए सच बोलने और स्वीकारने की आदत  सीएम योगी ने सदन में राजू पाल व उमेश पाल का नाम लेकर कहा कि उनकी हत्या हुई। सपा इनके हत्यारों और माफिया को गले का हार बनाकर चलती थी। आज अनावश्यक रूप से मुद्दा बनाकर सपा समाज में विद्वेष फैलाना चाहती है। सीएम ने सपाइयों से कहा कि सच बोलने-स्वीकारने की आदत डालनी चाहिए। सपा राष्ट्रद्रोहियों का महिमा मंडन, राष्ट्र नायकों का अपमान और गाजी मेले का समर्थन करती है। उन्होंने सपाइयों से कहा कि गाजी के पाप का बदला कैसे लिया जाना चाहिए, यह महाराज सुहेलदेव के शौर्य से सीखिए। हमारी सरकार ने बहराइच में महाराज सुहेलदेव का विराट स्मारक और आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनवाया।  तुष्टिकरण की पराकाष्ठा की गई  सीएम योगी ने सपा नेताओं पर कटाक्ष किया कि वे माफिया की कब्र पर फातिहा पढ़ने जाते हैं, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन धाम के विकास का विरोध करते हैं। सपा शासन में तुष्टिकरण की पराकाष्ठा की गई। सपा ने कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी पर्व को थाने-जेल में मनाने और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोक दिया था। दीपोत्सव का विरोध किया। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में एफिडेविट दिया कि श्रीराम-श्रीकृष्ण मिथक थे। सपा रामभक्तों पर गोलियां चलवाती है। मंदिर निर्माण को रोकने के लिए कोर्ट में वकील खड़ा करती है। सीएम ने सपाइयों को चेताते हुए कहा कि सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता है। आज अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन गया है। पुनर्जागरण के इस मॉडल में विरासत भी है और विकास भी।  भारत की आस्था की आत्मा है यूपी सीएम योगी ने कहा कि आस्था का पुनर्जागरण उत्तर प्रदेश से प्रारंभ हुआ है। यूपी भारत की आस्था की आत्मा है। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शुकतीर्थ केवल आस्था के ही नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना के भी केंद्र हैं। जब भी दुनिया में मर्यादा की चर्चा होगी तो अयोध्या, शाश्वत चेतना की चर्चा होगी तो काशी, भक्ति में मथुरा और समरसता में प्रयागराज की चर्चा होगी। यह चारों उत्तर प्रदेश में हैं। यूपी फिर से पुनर्जागरण का केंद्र बिंदु बना है। सीएम ने कहा कि गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने की दिशा में हम मजबूती से बढ़े हैं। प्रयाग, काशी, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, चित्रकूट, शुकतीर्थ, संभल, बरेली, नैमिषारण्य समेत बौद्ध, जैन, सिख व पौराणिक-ऐतिहासिक महत्व से जुड़े तीर्थस्थलों को आस्था और राष्ट्रीय चेतना के साथ जोड़ने का कार्य किया गया है। जिसका परिणाम है कि वहां करोड़ों श्रद्धालु आते हैं और आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर के जाते हैं।  आत्मगौरव के महापर्व बन गए हैं दीपोत्सव, देव दीपावली व रंगोत्सव सीएम योगी ने प्रयागराज महाकुम्भ की चर्चा करते हुए काशी समेत अन्य स्थलों का जिक्र किया। बोले कि मंदिर का पुजारी ब्राह्मण होगा, लेकिन वहां फूल बेचने वाले, नाव या टैक्सी चलाने वाले व्यक्ति सर्वसमाज से होते हैं। धार्मिक स्थल इन सबकी आत्मनिर्भरता का आधार बना हुआ है। डबल इंजन सरकार उसे पुनर्जीवित कर रही है। दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव केवल आयोजन नहीं, बल्कि आत्मगौरव के महापर्व बन गए हैं। सीएम ने अपने मन की पीड़ा व्यक्त करते हुए सदन को बताया कि 2017 में जब हमारी सरकार ने पहले दीपोत्सव और देवदीपावली-रंगोत्सव के आयोजन के बारे में सोचा तो आशंका हुई कि क्या होगा और कैसे होगा, लेकिन हमें सफलता मिली। आज करोड़ों लोग उस आस्था से फिजिकली व वर्चुअली जुड़कर आस्था को सम्मान देते हैं, लेकिन इस ताकत को पहले कभी समझने का प्रयास नहीं किया गया। आस्था को सम्मान देने का परिणाम है कि यूपी की जीडीपी बढ़ी है। यूपी ने लंबी छलांग लगाई है। सुरक्षा के साथ ही यूपी के प्रति धारणा भी बदली है।  तमिलनाडु के श्रद्धालुओं ने सोशल मीडिया पर लिखकर की यूपी की प्रशंसा  सीएम योगी ने सदन में एक वाकया भी सुनाया। महाकुम्भ के दौरान तमिलनाडु से भी कुछ श्रद्धालु आए थे। चित्रकूट में एक गांव के पास उनकी बस खराब हो गई। वे हिंदी और स्थानीय लोग तमिल नहीं जानते थे। तमिलनाडु वाले भटक रहे थे, अंधेरा होने को था। गांव वालों को पता चला तो वे वहां पहुंचे। इशारों में उन्हें तमिलनाडु वालों की परेशानी पता चली। फिर गांव के लोग इन अतिथियों को साथ लेकर गांव आए। गांव के एक परिवार में शादी … Read more

सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला: सीएम

अब उपद्रव नहीं उत्तर प्रदेश है उत्सव का प्रदेशः मुख्यमंत्री 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पले गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चला रहे थेः योगी आदित्यनाथ   सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला: सीएम   अब उत्तर प्रदेश में भय का वातावरण नहीं, अब लोगों के मन में आस्था हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ,  राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष पर कई गंभीर सवाल भी खड़े किए। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में गुंडे व माफिया सत्ता के संरक्षण में पल रहे थे। नेता प्रतिपक्ष ने स्वयं ऐसे कुछ नाम लिए हैं, जबकि कई नाम लेने में वह संकोच कर गए। हमारी सरकार ने पहले दिन जीरो टॉलरेंस की नीति की बात कही थी और सरकार आज भी अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत ही चल रही है। अपराध कोई भी करेगा तो कानून उसको अपनी गिरफ्त में लेगा। 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पले गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चला रहे थे। गुंडा टैक्स, अवैध वसूली, वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया की प्रवृत्ति को आगे बढ़ा रहे थे। कानून चंद हाथों की जागीर बन चुका था। कर्फ्यू और दंगा आम बात थी। पर्व और त्योहार आस्था के नहीं, आशंका के पर्याय बन गए थे। पुलिस का मनोबल टूटा हुआ था। न बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी ही सुरक्षित था। प्रदेश की छवि अराजकता और अस्थिरता का पर्याय थी और आज उपद्रव नहीं, उत्सव प्रदेश है उत्तर प्रदेश।  यूपी अब फियर जोन से फेथ जोन बना  मुख्यमंत्री ने कहा कि रिकॉर्ड पुलिस भर्तियां, महिला सशक्तिकरण की एक नई पारी, मॉडर्न पुलिसिंग, सुदृढ़ साइबर एवं फॉरेंसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर आज उत्तर प्रदेश की पहचान हैं। साइबर क्राइम हो, त्वरित और आपातकालीन सेवाएं हों, अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस, आज रूल ऑफ लॉ यूपी के अंदर देखने को मिलता है। सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला है। अब भय का वातावरण नहीं है, अब लोगों के मन में आस्था है। हर जनपद में उत्तर प्रदेश का वासी जाता है, बिना भय के जाता है। कर्फ्यू कल्चर की जगह जीरो टॉलरेंस कल्चर ने ली है। अब दंगों की जगह फेस्टिव और टेंपल इकोनॉमी ग्रो कर रही है। कोई सोचता था अयोध्या में करोड़ों लोग आएंगे? प्रयागराज में 2013 के कुंभ में कुल 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे और इस बार माघ मेला में ही 21 करोड़ श्रद्धालु आए हैं। ये है परिवर्तन। ये माघ मेला कल्पवासियों का होता था, लेकिन इस माघ मेले में बना रिकॉर्ड लोगों के विश्वास का प्रतीक है। अब यहां न कर्फ्यू है न दंगा है, यूपी में सब चंगा है।  आज उत्तर प्रदेश में मॉडर्न पुलिसिंग पर जोर  मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में महिलाओं को सुरक्षा है, व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण है। इन आठ वर्षों में 2,19,000 से अधिक पुलिस की भर्ती हुई हैं। इसमें 20 फीसदी महिलाओं को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया गया है। पुलिस की ट्रेनिंग क्षमता को कई गुना बढ़ाया गया है। पुलिस भर्ती में हर जनपद के नौजवानों को अवसर मिला है, बिना भेदभाव। पुलिस अवस्थापना सुविधाओं में अभूतपूर्व विकास किया गया। पहले पुलिस के नौजवान खपरैल के बैरक में रहते थे। आज जिलों में आप जाएंगे तो हाई राइज बिल्डिंग पुलिस की अवस्थापना सुविधा के लिए होगी। मॉडर्न पुलिसिंग की बात आती है तो सात पुलिस कमिश्नरेट स्थापित किए गए, जिनके लिए आपकी सरकार कभी निर्णय ही नहीं ले पाई। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को हम लोगों ने प्रदेश के अंदर लागू किया। आज तीन नए कानून लागू हो चुके हैं और लखनऊ में स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई। डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज प्रारंभ हो चुके हैं।  हर जनपद में साइबर क्रॉइम थाना स्थापित  मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले साइबर क्राइम के केवल दो थाने थे, आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने हैं। इसके अलावा राज्य के हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क भी है। अब तक हजारों करोड़ रुपये, जो साइबर अपराधियों द्वारा ऐंठे जाते थे, उनको वापस कराने और बचाने में भी इस तंत्र ने योगदान दिया है। तीन नए कानून लागू होने के बाद हर उस अपराध में, जिसमें सात वर्ष से अधिक की सजा है,  उसमें फॉरेंसिक एविडेंस आवश्यक है। पहले यूपी के अंदर दो या तीन लैब्स काम करती थीं, आज हम लोगों ने 12 ए-ग्रेड की लैब बनाई हैं और छह निर्माणाधीन हैं। हर जनपद में दो-दो फॉरेंसिक वैन उपलब्ध करवाई गई हैं, ताकि एविडेंस प्राप्त हो, अपराधी को सजा दी जा सके। ये एक नई दिशा में किए गए प्रयास हैं। दंगाइयों का काल है पीएसी, हमारी सरकार ने किया पुनर्जीवित  मुख्यमंत्री ने सेफ सिटी का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई हो या गुजरात या फिर यूपी, सभी जगह भाजपा ही सुरक्षा दे सकती है। उत्तर प्रदेश में सेफ सिटी के लक्ष्य को 17 नगर निगम समेत गौतम बुद्ध नगर जनपद में हम लोगों ने लागू किया है। हर जिला मुख्यालय में सीसीटीवी कैमरे की कवरेज, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से उसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स का गठन भी उत्तर प्रदेश में हुआ है। इसके साथ ही पीएसी की 34 कंपनियों को पुनर्गठित करके उसको जीवित किया है, क्योंकि ये दंगाइयों की काल है। दंगा समर्थक कोई भी पार्टी पीएसी का समर्थन नहीं करती। समाजवादी पार्टी के कालखंड में इसे एक प्रकार से समाप्त करने की साजिश की गई थी। अब उसका पुनर्गठन करने के साथ ही तीन कंपनी महिला पीएसी का गठन किया जा चुका है और साथ ही तीन और कंपनियां हम बनाने जा रहे हैं। जिन तीन महिला पीएसी कंपनियों का गठन किया गया है, वो वीरांगना उदा देवी के नाम पर लखनऊ में,  वीरांगना झलकारी देवी के नाम पर गोरखपुर में और वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर बदायूं में गठित हो चुकी हैं। तीन नई वाहिनियों का गठन हम लोग करने जा रहे हैं।

ओडीओपी से ई-केसीसी तक, यूपी का ग्रामीण उत्थान बना राष्ट्रीय मिसाल: विधानसभा में सीएम योगी

विधानसभा में सीएम योगी (भाग-9) कांग्रेस और सपा ने किया किसानों को कर्जदाता बनाने का महापाप: सीएम योगी 13 से 36 लाख करोड़ तक पहुँची यूपी की अर्थव्यवस्था, बिना नया टैक्स लगाए विकास की रफ्तार तेज: मुख्यमंत्री ओडीओपी से ई-केसीसी तक, यूपी का ग्रामीण उत्थान बना राष्ट्रीय मिसाल: विधानसभा में सीएम योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि औपनिवेशिक काल ने जिस किसान को उत्पादक से उपभोक्ता बनाया, उसी किसान को बाद की कांग्रेस और सपा सरकारों ने कर्जदाता बना देने का पाप किया। उन्होंने कहा कि जिस कारीगर में उद्यमी बसता था, उसे निराश-हताश कर पलायन के लिए मजबूर कर दिया गया। जो व्यापारी उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश को जोड़ने वाला सेतु था, उसे भय और अव्यवस्था में धकेल दिया गया। परिणामस्वरूप प्रदेश में हताशा-निराशा, किसानों की दुर्दशा और एमएसएमई की बंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में राज्य ने इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। स्पष्ट कृषि नीति ने परिस्थितियाँ पलट दी हैं। पहले लागत अधिक और उत्पादन कम था, बिचौलियों का वर्चस्व था। आज लागत कम, उत्पादन अधिक और उपज का पूरा लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में उत्तर प्रदेश ने अन्नदाता को फिर से केंद्र में स्थापित किया है और कृषि-अर्थव्यवस्था को दोहरी गति से आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब नई ऊँचाइयों पर पहुँच चुकी है, जहाँ कभी प्रदेश की जीएसडीपी 13 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं आज यह 36 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुँच गई है। देश की कुल जीडीपी में उत्तर प्रदेश का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। फिस्कल डेफिसिट को 3 प्रतिशत से नीचे लाने में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है और यह टैक्स चोरी तथा रेवेन्यू लीकेज पर प्रभावी नियंत्रण का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में बिना कोई नया टैक्स लगाए प्रदेश के विकास को गति दी गई है। नेता प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत किसानों और कारीगरों की सृजनशीलता के बल पर खड़ा हुआ देश है। ग्राम स्वराज की यह परंपरा सदैव हमारी पहचान रही है। औपनिवेशिक काल ने हमारे उत्पादक किसानों को उपभोक्ता बनने पर विवश किया और बाद में पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें कर्ज में डुबो दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने अन्नदाता को कर्जदाता बनाने का पाप किया, जबकि कारीगरों और उद्यमियों को हताशा-निराशा के अंधकार में धकेल दिया। उस समय प्रदेश में पलायन, बेरोज़गारी और एमएसएमई के पतन का माहौल था, निवेशकों की धारणा पूरी तरह नकारात्मक थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में किसानों के हित में किए गए कार्य अभूतपूर्व हैं। स्पष्ट कृषि नीति के परिणामस्वरूप अन्नदाता को कम लागत में अधिक उत्पादन का लाभ मिला है। बिचौलियों को हटाकर डीबीटी के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उत्पादों में गुणवत्ता सुधार पर विशेष बल दिया गया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में प्रथम है, दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और गन्ना उत्पादन में भी दोगुनी क्षमता पर पहुँच चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 16 लाख निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जो प्रति गोवंश 1500 रुपये प्रति माह की सहायता प्रदान कर रहा है। आज देश के कुल गन्ना उत्पादन का 55 प्रतिशत उत्तर प्रदेश से आता है। 2000 से 2017 तक मात्र 2.14 हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ था, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में 3 लाख 05 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान सीधे किसानों के खातों में भेजा गया है—यानी आधे समय में 90,000 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त राशि किसानों को प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आज 122 चीनी मिलें संचालित हैं और किसान को 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा रहा है। एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर हो गया है, जिसमें भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। आज चीनी मिलें घाटे का क्षेत्र नहीं, बल्कि लाभकारी उद्योग बन चुकी हैं। छाता और बागपत की चीनी मिलों को इंटीग्रेटेड परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य में 89 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं। एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स के माध्यम से किसानों की उपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है। कृषि वैल्यू चेन, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर व्यापक कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हर खेत को पानी’ के संकल्प के तहत नहरों, पाइपलाइन और माइक्रो इरिगेशन के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रदेश की 31 बड़ी सिंचाई परियोजनाएँ पूरी की जा चुकी हैं। निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई गई है और डीजलचालित नलकूपों के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय और लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क का निर्माण प्रदेश के कृषि विकास को नई दिशा देगा। ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया को सरल बनाकर पाँच मिनट में पूरा किए जाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। एक जिला–एक उत्पाद योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओपी ने कारीगरों, शिल्पकारों और किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर लोकल-टू-ग्लोबल की अवधारणा को साकार कर रहा है, जिसका सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को मिल रहा है। सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ओडीओपी के कारण आज इसकी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मांग अत्यधिक बढ़ी है। प्रदेश के 77 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिससे उनके लिए वैश्विक बाजार में प्रमाणन की आवश्यकता समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस वर्ष एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना शुरू की … Read more

उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है – सीएम योगी आदित्यनाथ

विरासत और विकास के साथ उत्तर प्रदेश का आगे बढ़ना आधुनिक रामराज्य की अनुभूति हैं – मुख्यमंत्री   एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष केवल जनता को गुमराह कर रहा है, प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है – मुख्यमंत्री   उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है – सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज राज्यपाल के अभिभाषण पर व्यक्तव्य देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन सत्यापन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे विरोध पर आपत्ति जताई और कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तथा भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 7 के माध्यम से यदि किसी नाम पर आपत्ति दर्ज की जाती है तो निर्वाचन आयोग उसका सत्यापन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष समाज को माता के नाम, शंकराचार्य के नाम और एसआईआर के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है, जबकि सरकार का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है। यदि संबंधित व्यक्ति स्वयं उपस्थित होकर यह प्रमाणित करता है कि वह जीवित है और आपत्ति गलत है, तो वह आपत्ति तत्काल निरस्त कर दी जाती है। मुख्यमंत्री ने प्रश्न उठाया कि विपक्ष पारदर्शी व्यवस्था का समर्थन क्यों नहीं कर रहा है।  मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एब्सेंट, शिफ्टिंग और डेथ (एएसडी) श्रेणी में कुल 2 करोड़ 88 लाख से अधिक नाम ऐसे हैं जो सत्यापन में सामने नहीं आए या जिनके संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त नहीं हुई। इनमें 46 लाख 23 हजार मृतकों के नाम शामिल हैं। लगभग 1 करोड़ 39 लाख लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, लेकिन उनके नाम सूची में बने हुए थे। 25 लाख 47 हजार डुप्लिकेट प्रविष्टियां पाई गई हैं, जबकि लगभग 80 लाख नाम एब्सेंट श्रेणी में हैं। अन्य नाम विभिन्न श्रेणियों में आते हैं। उन्होंने सरकार की बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाओं का उल्लेख करते हुए माघ मेला की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 के कुंभ में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे, जबकि वर्तमान माघ मेला में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने इसे बेहतर सरकार के प्रति जनता के विश्वास का प्रमाण कहा। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का स्पष्ट विवरण था। यदि विपक्ष ने उसे ध्यानपूर्वक सुना होता तो ऐसे प्रश्न नहीं उठते। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित है, अपराधियों में भय है, गरीबों को सम्मान मिल रहा है, किसान सशक्त हो रहे हैं, महिलाओं में सुरक्षा की भावना है और युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। गांवों तक बिजली पहुंच चुकी है और प्रदेश में विकास की नई चेतना दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने इसे आधुनिक रामराज्य की अनुभूति बताते हुए कहा कि प्रदेश में विरासत और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। सरकार जन कल्याण, रोजगार सृजन, निवेश विस्तार और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से राज्य को सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2029-30 तक उत्तर प्रदेश को देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और हमारी सरकार उसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने सदन के सभी सदस्यों, अध्यक्ष और चर्चा में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

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