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सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है, मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारीः मुख्यमंत्री

शंकराचार्य की परंपरा मर्यादा से चलती है, मनमर्जी से नहीं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  सीएम ने कहा, कानून सबके लिए समान, मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है, मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारीः मुख्यमंत्री  नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा व व्यवस्था का सम्मान करना चाहिएः सीएम योगी  लखनऊ  विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य विवाद पर पूरी मजबूती से सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सनातन परंपरा की मर्यादाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य का पद भारत की सनातन परंपरा में सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह कोई सामान्य उपाधि नहीं है, जिसे कोई भी व्यक्ति स्वयं ग्रहण कर ले। सपा शासनकाल में हुई वाराणसी की पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रश्न उठाया कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों हुई?  नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा और व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। माघ मेला में मौनी अमावस्या के अवसर पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अवसरों पर कड़ी व्यवस्था लागू करनी होती है। प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित होते हैं और उनका पालन सभी के लिए अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिससे श्रद्धालुओं की जान खतरे में पड़ सकती है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कानून सबके लिए समान है। मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है और मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता। हम मर्यादित लोग हैं, कानून के शासन पर विश्वास करते हैं। कानून के शासन का पालन करना भी जानते हैं, पालन करवाना भी जानते हैं। दोनों चीजों को एक साथ लागू करवाना जानते हैं, लेकिन इसके नाम पर गुमराह करना बंद करिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी, उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिकापुरी। इन चारों पीठों की अपनी-अपनी परंपरा, दायित्व और आध्यात्मिक आधार हैं। इन पीठों से चार वेद जुड़े हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। प्रत्येक वेद का अपना महावाक्य है- “प्रज्ञानं ब्रह्म”, “अहम् ब्रह्मास्मि”, “तत्त्वमसि” और “अयमात्मा ब्रह्म”। ये महावाक्य भारतीय दर्शन की आत्मा हैं और साधना की उच्चतम अवस्था का बोध कराते हैं। मैं ही ब्रह्म हूं, कोई भी साधक जब अपनी साधना की पराकाष्ठा में पहुंचता है तो उसको इस बात की अनुभूति होती है। यही उपनिषदों का उद्घोष भी है।  झूठ को मुद्दा बनाना विपक्ष की प्रवृत्ति मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बार-बार एक ही बात को दोहराकर उसे मुद्दा बनाने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि जो विषय वास्तविक मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर विवाद का रूप दिया गया। सदन में तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि भ्रम फैलाने का प्रयास।

सदन में बवाल पर बोले योगी: राज्यपाल ही नहीं, मां का भी किया गया अपमान

अभिभाषण के दौरान हंगामा राज्यपाल ही नहीं, मां का भी अपमानः योगी बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष के आचरण को बताया सनातन के विपरीत लखनऊ  राज्यपाल माननीय आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान शुक्रवार को हुए हंगामे पर विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल के आचरण से न केवल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख, बल्कि मातृ शक्ति का भी अपमान हुआ। उन्होंने सदन में नेता प्रतिपक्ष के आचरण को सनातन की परंपरा के विपरीत बताया। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि माननीय राज्यपाल यहां पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आई थीं। उनका यह कार्यक्रम अचानक नहीं थोपा गया था, दलीय बैठकों में इसकी चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आप श्रेष्ठ कुल में पैदा हुए, ब्राह्मण हैं, वयोवृद्ध हैं और सदन में वरिष्ठतम सदस्यों में से एक हैं, इसीलिए आपकी बात का बुरा नहीं माना जाता, लेकिन यह आचरण उचित नहीं है। आप अपने वक्तव्य में सनातन की बात कर रहे थे, लेकिन इसके अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन धर्म की परंपरा में मां की उम्र या अपनी उम्र से बड़ी महिला को मां के समान सम्मान देने का विधान है। इस बारे में महर्षि वेदव्यास ने हमें हजारों साल पहले बताया है। वह सनातन धर्म के सबसे बड़े व्याख्याकार हैं। उन्होंने वेदों को लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ी को दिया। उनका कार्यकाल पांच हजार वर्ष पूर्व था, तब भारत में सबसे विकसित सभ्यता थी, तब भारत दुनिया को दिशा दिखा रहा था। महर्षि वेदव्यास जी ने कहा था.. ‘नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया।’ यानी मां के समान कोई छाया नहीं है, मां के समान कोई सहारा नहीं है, मां  के समान कोई रक्षक नहीं और मां के समान कोई प्रिय नहीं है।

US लाइसेंस मिलने के बाद RIL को बड़ा फायदा, वेनेजुएला के तेल सौदे पर हटेगी रोक

 नई दिल्‍ली अमेरिका ने रिलायंस इंडस्‍ट्रीज को वेनुजुएला में तेल खरीदने के लिए लाइसेंस दे दिया है. अब रिलायंस बिना किसी अनुमति या सैक्‍शन के वेनेजुएला में तेल खरीद सकेगी. रॉयटर्स की रिपोर्ट में सोर्स के हवाले से ये जानकारी दी गई है. वहीं जनवरी में ही रिलायंस ने लाइसेंस के लिए अप्‍लाई किया था और अब लाइसेंस दे दिया गया है.  रिलायंस ने जनवरी में यह लाइसेंस पाने के लिए आवेदन किया था, और इससे पहले कंपनी ने करीब 2 मिलियन बैरल वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदा था, जो कि अप्रैल में डिलीवरी होने की उम्मीद है, ये खरीद व्यापारिक कंपनियों Vitol और Trafigura से हुई थी, जिन्होंने इसी तरह के लाइसेंस प्राप्त किए थे.  महीने की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वाशिंगटन कराकास और वाशिंगटन के बीच 2 अरब डॉलर के तेल आपूर्ति समझौते और देश के तेल उद्योग के लिए एक महत्वाकांक्षी 100 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण योजना को सुविधाजनक बनाने के लिए वेनेजुएला के ऊर्जा उद्योग पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देगा. इस फैसले के बाद अब भारत को तेल बेचने के लिए रिलायंस को लाइसेंस देने की खबर आई है. अमेरिकी लाइसेंस मिलने का मतलब है कि अब रिलायंस इडस्‍ट्रीज वेनेजुएला से भारी मात्रा में तेल बिना रोक-टोक के खरीद सकती है. वेनेजुएला के तेल से रूसी तेल की भरपाई रिलायंस को लाइसेंस देने से वेनेजुएला के तेल निर्यात में तेजी आ सकती है और दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के संचालक के लिए कच्चे तेल की लागत कम हो सकती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वेनेजुएला के तेल खरीदकर रिलायंस रूसी तेल की भरपाई करेगा.  सस्‍ते भाव पर मिल सकता है कच्‍चा तेल RIL को यह लाइसेंस अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के एनर्जी सेक्टर में लगे प्रतिबंधों को ढील देने की कड़ी में मिला है. जो कि वेनेजुएला और अमेरिकी सरकार के बीच एक बड़े तेल सप्लाई डील और ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलेप करने की योजना के तहत है. इससे रिलायंस को सस्ते भाव पर कच्चे तेल मिल सकता है, क्योंकि वेनेजुएला का तेल आमतौर पर ब्रेंट रेफरेंस के मुकाबले डिस्काउंट पर मिलता है. अमेरिका ने हटाया 25% टैरिफ  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक टैरिफ को हटा दिया था और कहा था कि भारत वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा. रिपोर्र्ट्स का दावा है कि रिलायंस समेत भारतीय रिफाइनरियां अप्रैल में डिलीवरी के लिए रूसी तेल की खरीद से बच रही हैं. रिफाइनिंग एवं व्यापार सूत्रों के अनुसार, वे लंबे समय तक ऐसे व्यापार से दूर रहने की उम्मीद कर रही हैं, एक ऐसा कदम जो नई दिल्ली को वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में मदद कर सकता है.

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का बयान: वंदे मातरम पर रोक नहीं, लेकिन धर्म की स्वतंत्रता जरूरी

भोपाल गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रगान “जन गण मन” के पहले वंदे मातरम् के 6 छंदों का ससम्मान गायन का निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे मध्य प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिए हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश के सभी शिक्षक संस्थानों, मदरसों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 6 छंदों का गायन अनिवार्य होगा। लेकिन सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को बाध्यकारी बनाना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। क्या है मसूद का तर्क? मसूद ने स्पष्ट किया कि उन्हें ‘वंदे मातरम्’ से वैचारिक विरोध नहीं है, बल्कि इसे अनिवार्य करने के तौर-तरीकों पर आपत्ति है। उनका कहना है कि देशभक्ति भावनात्मक विषय है, जिसे आदेश के जरिए लागू नहीं किया जा सकता। यह सीधे तौर पर मजहबी आजादी पर अंकुश है। उन्होंने संविधान के मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आस्था के सम्मान की बात कही। विशेष रूप से उन्होंने आर्टिकल 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अनुच्छेद सभी को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी भी नए कानून या आदेश को संवैधानिक दायरे में परखा जाना जरूरी है। राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज मसूद के बयान के बाद विपक्षी दलों ने इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर निशाना साधा। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने इसे व्यक्तिगत राय बताया, तो कुछ ने संवाद के जरिए समाधान की बात कही। सत्तापक्ष के नेताओं ने मसूद के रुख को “अनावश्यक विवाद” करार दिया है। विधानसभा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बहस मामला तब और तूल पकड़ गया जब यह मुद्दा सार्वजनिक कार्यक्रमों और सरकारी आयोजनों से जुड़ गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में ऐसे मुद्दे अक्सर भावनात्मक बहस को जन्म देते हैं। इससे जनभावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश भी मानी जा रही है। सामाजिक और संवैधानिक विमर्श विशेषज्ञों का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा ऐतिहासिक गीत है, लेकिन इसके गायन को लेकर समय-समय पर कानूनी और सामाजिक बहस होती रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रभावना और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। भोपाल का यह मामला अब प्रदेश की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

3.12 लाख की लागत से बना बालिका शौचालय कुक्षी में, लेकिन पुरुषों के यूरिनल और अधिकारियों की लापरवाही बनी चर्चा का विषय

धार धार जिले के कुक्षी स्थित एक कन्या प्राथमिक विद्यालय में बालिकाओं के लिए बने शौचालय में पुरुषों के यूरिनल लगाए गए हैं। यह निर्माण कार्य वर्ष 2019-20 में 3.12 लाख रुपए की लागत से हुआ था, लेकिन पिछले छह वर्षों से शिक्षा विभाग के अधिकारी इस गंभीर त्रुटि पर कोई ध्यान नहीं दिया।  कुक्षी के सिनेमा चौराहे स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय क्रमांक 1 में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग ने यह शौचालय बनाया था। हैरानी की बात यह है कि शौचालय के प्रवेश द्वार पर ‘बालिका शौचालय’ का बोर्ड लगा है, जबकि अंदर पुरुषों के लिए यूरिनल पार्ट स्थापित किए गए हैं। यह मामला तब सामने आया जब रविवार शाम एक जागरूक नागरिक ने शौचालय के अंदर के वीडियो बनाए। इस निर्माण त्रुटि और छह साल तक किसी भी अधिकारी का ध्यान न जाना, गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। बीआरसी देंगे जवाब कुक्षी के बीईओ राजेश सिन्हा ने बताया कि प्राथमिक शाला क्रमांक 1 और 2 एकीकृत हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य बीआरसी कार्यालय की ओर से चलाए जाते हैं और इस मामले में बीआरसी ही जवाब देंगे। प्राथमिक शाला प्रधान ने नहीं दी जानकारी इस संबंध में कुक्षी के बीआरसी सीताराम डावर ने बताया कि बालिकाओं के लिए शौचालय का निर्माण 2020 में हुआ था, उस दौरान वे बीआरसी नहीं थे। उन्होंने इस निर्माण में निर्माण एजेंसी आरईएस की बड़ी गलती बताई। डावर ने यह भी कहा कि प्राथमिक शाला प्रधान राकेश सोनी द्वारा भी उन्हें इस प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि यह प्राथमिक शाला एकीकृत हो जाने के कारण अब प्राचार्य के अधीन आती है। फिलहाल, स्कूल के पीछे बनाए गए अतिरिक्त कक्ष के पास बालिकाओं के लिए शौचालय बनाया गया है।

होली स्पेशल ट्रेनें शुरू: जानें किन स्टेशनों पर रुकेंगी और कितने फेरे करेंगी राजस्थान और MP से बिहार जाने

भोपाल  होली के त्योहार के दौरान एक जगह से दूसरी जगह पर आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हो जाती है। इसी अतिरिक्त यात्री दबाव को देखते हुए रेल प्रशासन ने लोगों को परेशानी से बचाने और उनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए कुछ स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। इस दौरान पश्चिम मध्य रेलवे ने मध्य प्रदेश के रानी कमलापति स्टेशन और राजस्थान के सोगरिया स्टेशन से बिहार के दानापुर के लिए दो विशेष ट्रेन चलाने की जानकारी दी है। ये दोनों ट्रेन अलग-अलग दिनों पर चलेंगी और दोनों दिशाओं में कुल चार फेरे लगाएंगी। इसके अलावा रेल विभाग ने भोपाल से रीवा और रानी कमलापति स्टेशन से रीवा के बीच भी विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इन ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक रहेगा। इन सभी ट्रेनों के चलने के समय और दिन की विस्तृत जानकारी हम आपको इस रिपोर्ट में बता रहे हैं।     गाड़ी संख्या 09821/09822 सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन (2-2 ट्रिप)     गाड़ी संख्या 01667/01668 रानी कमलापति-दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन (2-2 ट्रिप) ट्रेन नंबर 09821 सोगरिया से दानापुर स्पेशल ट्रेन कब चलेगी- 28 फरवरी 2026 (शनिवार) एवं 7 मार्च 2026 (शनिवार) प्रस्थान का समय- सोगरिया से रात 23:10 बजे प्रस्थान करेगी पहुंचने का समय- दूसरे दिन रात्रि 23:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी ट्रेन नंबर 09822 दानापुर से सोगरिया स्पेशल ट्रेन कब चलेगी- 2 मार्च 2026 (सोमवार) एवं 9 मार्च 2026 (सोमवार) प्रस्थान का समय- दानापुर स्टेशन से मध्य रात्रि 1:15 बजे प्रस्थान करेगी पहुंचने का समय- अगले दिन मध्य रात्रि 01:10 बजे सोगरिया स्टेशन पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन दोनों दिशाओं में इन स्टेशनों पर रुकेगी- बारां, सालपुरा, छाबड़ा गुगोर, रुठियाई, गुना, अशोकनगर, महादेवखेड़ी, सागर, दमोह, कटनी, मैहर, सतना, माणिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा स्टेशन होकर दानापुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 01667 रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल ट्रेन (2 फेरे) कब चलेगी- 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) और 2 मार्च 2026 (सोमवार) प्रस्थान का समय- रानी कमलापति से दोपहर 14:25 बजे शुरू होगी पहुंचने का समय- अगले दिन सुबह 08:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी विभिन्न स्टेशनों से निकलने का समय- रानी कमलापति स्टेशन (दोपहर 14:25 बजे प्रस्थान), नर्मदापुरम (15:25 बजे), इटारसी (15:55 बजे), पिपरिया (17:10 बजे), गाडरवारा (17:45 बजे ), नरसिंहपुर (18:25 बजे), जबलपुर (19:40 बजे ), सिहोरा रोड (20:10 बजे), कटनी (20:50 बजे), मैहर (21:40 बजे), सतना (22:15 बजे) से निकलकर मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा होते हुए अगले दिन सुबह 08:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 01668 दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन (2 फेरे) कब चलेगी- 28 फरवरी 2026 (शनिवार) और 3 मार्च 2026 (मंगलवार) प्रस्थान का समय- दानापुर स्टेशन से सुबह 11:15 बजे शुरू होगी पहुंचने का समय- अगले दिन सुबह 08:55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। विभिन्न स्टेशनों से निकलने का समय- दानापुर स्टेशन से 11:15 बजे प्रस्थान कर आरा, बक्सर, PDDU जंक्शन, मिर्जापुर, प्रयागराज छिवकी, मानिकपुर होते हुए सतना पहुंचेगी फिर यहां से रात्रि 01:00 बजे निकलेगी, फिर रात्रि 1.28 बजे मैहर से, रात्रि 2:30 बजे कटनी से, रात्रि 3:13 बजे सिहोरा रोड से, तड़के 4.00 बजे जबलपुर से, सुबह 5:00 बजे नरसिंहपुर से, सुबह 5:30 बजे गाडरवारा से, सुबह 6:00 बजे पिपरिया से, सुबह 7:10 बजे इटारसी से, सुबह 7:48 बजे नर्मदापुरम से निकलकर सुबह 8:55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन दोनों दिशाओं में इन स्टेशनों पर रुकेगी- नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा रोड, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा स्टेशनों पर रुकेगी। स्पेशल ट्रेन के ठहराव एवं समय के बारे में विस्तृत जानकारी www.enquiry.indianrail.gov.in से भी प्राप्त की जा सकती है। रेलयात्री किसी भी कंप्यूटरीकृत आरक्षण केन्द्र या ऑनलाइन IRCTC की वेबसाइट से इन होली स्पेशल ट्रेनों में आरक्षण सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने को किसानों की बढ़ी भागीदारी, मंत्री राजपूत ने साझा किए आंकड़े

20 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कराया पंजीयन : मंत्री  राजपूत भोपाल  रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक 20 हजार 98 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। किसान 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन अवश्य करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 4084, उज्जैन में 9524, ग्वालियर में 476, चम्बल में 123, जबलपुर में 788, नर्मदापुरम में 900, भोपाल में 3602, रीवा में 68, शहडोल में 83 और सागर में 450 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री  राजपूत ने बताया है कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

कचरा प्रबंधन पर लापरवाही भारी: सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को दिखाई सख्ती

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 के हिसाब से वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं करते। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने भोपाल नगर निगम द्वारा दायर उन अपीलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिनमें राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरणीय मुआवजे को चुनौती दी गई थी। ग्रीन ट्रिब्युनल ने अपने 31 जुलाई 2023 और 11 अगस्त 2023 के विवादित आदेशों के माध्यम से, नगर निकाय को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपए और 121 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा देने का निर्देश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नगरपालिका अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाली विकसित हो रही वैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कहा कि नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2000 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जिसे अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला है, हालांकि जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में मौजूद कमियों पर चिंता व्यक्त की। आदेश में कहा गया है, “अदालत का मानना है कि जमीनी स्तर पर कई कारकों के कारण वैधानिक तंत्र वांछित परिणाम नहीं दे रहा है।” नए नियमों की शुरुआत को “स्वागत योग्य कदम” बताते हुए शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि जब तक समय पर प्रारंभिक कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक नए नियमों की मात्र अधिसूचना पर्याप्त नहीं होगी। पीठ ने टिप्पणी की, “नए नियमों की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रभावी तिथि से पहले आवश्यक कार्य पूरा कर लें, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं ला पाएंगे।” पीठ ने पक्षकारों के वकीलों की बातों को विस्‍तार से सुनने के बाद अपीलकर्ता निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही के दायरे को व्यापक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसमें निर्देश दिया गया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश के शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मध्य प्रदेश के आवास और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, “अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह संशोधन करे और सुनवाई के अगले दिन या उससे पहले संशोधित कारण शीर्षक प्रस्तुत करे।” अपीलकर्ता के वकील को भारत संघ के केंद्रीय एजेंसी अनुभाग को अपील की प्रतियां सौंपने की अनुमति भी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।”

एफटीए बना भारत की आर्थिक रणनीति का नया आधार, संरचनात्मक बदलाव के संकेत: पीयूष गोयल

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत के हाल में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) खासकर अमेरिका के साथ हुआ अंतरिम व्यापार समझौता, देश के दुनिया के साथ व्यापार करने के तरीके में संरचनात्मक बदलाव को दिखाते हैं। राष्ट्रीय राजधानी में ‘ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट (जीबीएस) 2026’ में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में किसानों के हितों की पूरी तरीके से रक्षा की है। उन्होंने संबोधन में कहा कि जब हम अमेरिका के साथ ट्रेड डील के लिए बातचीत कर रहे थे, उसमें हम एक चीज को लेकर बिल्कुल स्पष्ट थे कि हमें अपने किसानों के हितों की रक्षा करनी है। गोयल ने कहा, “जिन क्षेत्रों में हमारे देश में उत्पादन सबसे अधिक है और हमारा देश आत्मनिर्भर है, उन क्षेत्रों को इस डील से बाहर रखा गया है।” उन्होंने आगे कहा,”हमने किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की है, संभवतः स्थानीय कृषि उत्पादों के 95 प्रतिशत से अधिक हिस्से की।” गोयल ने आगे कहा कि वे लंबे समय से इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत का कपड़ा क्षेत्र विकास क्यों नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से भी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे थे। अब, कपड़ा क्षेत्र यूरोप के लिए बिना किसी शुल्क के खुला है और संयुक्त राज्य अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, इसलिए हम बाकी दुनिया से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” उन्होंने पहले कहा था कि भारत को अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत वस्त्र निर्यात पर वही लाभ मिलेंगे जो बांग्लादेश को अपने समझौते के माध्यम से मिले थे। वस्त्र निर्यातकों को बांग्लादेश के समान व्यवहार का आश्वासन दिया गया था। इस कार्यक्रम में गोयल ने इस बात पर भी जोर दिया कि एफटीए एक स्पष्ट ढांचे पर आधारित होते हैं, जिसमें विश्वास, पारदर्शिता और समयबद्ध निश्चितता शामिल है।” केंद्रीय मंत्री ने भारत-ईएफटीए समझौते का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे नई दिल्ली व्यापार साझेदारी के स्वरूप को फिर से परिभाषित कर रही है। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) में आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।” आगे कहा, “आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और आने वाले वर्षों में यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी।”

मानवीय आधार पर ऐतिहासिक आदेश: 13 साल की रेप पीड़िता को 28 हफ्ते में भी गर्भपात की अनुमति

भोपाल Madhya Pradesh High Court ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की 28 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी है।   अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की शारीरिक व मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने माना कि इतनी कम उम्र में गर्भावस्था जारी रखना नाबालिग के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गर्भ जारी रहने से बच्ची पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके बाद अदालत ने मानवीय आधार पर गर्भ समापन की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय राज्य में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

चीन-भारत रिश्तों की कहानी: नेहरू का फैसला और तिब्बत पर CDS चौहान की बड़ी बात

बीजिंग चीफ और डिफेंस स्टॉप जनरल अनिल चौहान ने भारत और चीन के बीच हुए पंचशील समझौते को लेकर अपनी राय रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1954 में किए गए इस समझौते के तहत भारत ने आधिकारिक रूप से तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में स्वीकार कर लिया था। सीडीएस ने कहा कि इस समझौते के बाद भारत को लगा कि उत्तरी सीमा के विवाद का निपटारा हो गया है, लेकिन चीन ने इसे केवल एक व्यापारिक समझौता माना। देहरादून में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस अनिल चौहान ने उस समय की परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी चीन का रुख यही था कि यह समझौता केवल व्यापारिक रास्तों के लिए है, इसका सीमा से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद से ही एलएसी आज तक संवेदनशील बनी हुई है। गौरतलब है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और तत्तकालीन चीनी प्रीमीयर झोउ एनलाई के बीच में पंचशील समझौता हुआ था। इसके पांच सिद्धांत थे, जो शांति पूर्ण सहअस्तित्व पर आधारित थे। सीडीएस ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “ब्रिटिश चले गए, उन्हें एक दिन जाना ही था। वह अपने पीछे छोड़ गए यह सीमाएं, अब भारत को तय करना था कि हमारी सीमा कहां है? नेहरू शायद जानते थे कि पूर्व में हमारे पास मैकमोहन जैसी व्यवस्था है, इसके अलावा लद्दाख के कुछ क्षेत्र पर भी हमारा दावा है, लेकिन यहां इन पहाड़ों और दर्रों के बीच में स्तिथि स्पष्ट नहीं थी, इसलिए शायद उन्होंने पंचशील सिद्धांत का रास्ता चुना। तिब्बत हथियाने के बाद क्षेत्र में शांति चाहता था चीन 1950 के दशक का चीन आज के जितना मजबूत नहीं था। लगातार युद्धों के वजह से उसकी हालत भी कमजोर थी। हालांकि इसके बाद भी उसने तिब्बत को हथिया लिया, लेकिन इसके आगे आने की उसकी हिम्मत नहीं थी। ऐसे में वह भी शांति चाहता था। सीडीएस चौहान ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा, “चीनियों के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण था, क्योंकि उन्होंने हाल ही में तिब्बत को ‘मुक्त’ किया था। वे ल्हासा और शिनजियांग तक पहुंच चुके थे। यह क्षेत्र उनकी पहुंच से काफी दूर थे। ऐसे में यहाँ स्थिरता बनाए रखना मुश्किल था, ऐसे में वह भी यहां पर शांति चाहते थे।” सीडीएस चौहान ने बताया कि स्वतंत्र भारत भी चीन के रूप में एक मजबूत दोस्त को देख रहा था, और उसके साथ मजबूत संबंध चाहता था। ऐसे में यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बन गया।

सेवा तीर्थ से PM मोदी के 4 बड़े फैसले: महिलाओं, युवाओं को मिला खास तोहफा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए पीएमओ परिसर सेवातीर्थ में महिलाओं, युवाओं और संवेदनशील नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए पीएमओ परिसर सेवातीर्थ में महिलाओं, युवाओं और संवेदनशील नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने नए पीएमओ परिसर सेवातीर्थ में पीएम राहत योजना, लखपति दीदी की संख्या बढ़ाकर छह करोड़ करने के लक्ष्य से संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि अवसंरचना निधि दोगुनी बढ़ाकर दो लाख करोड़ रुपए करने से संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर किए। एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने नए पीएमओ परिसर सेवातीर्थ में सेवा की भावना को दर्शाने वाले निर्णयों से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित हैं। सेवा तीर्थ परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है। केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि नई इमारतें भारत की प्रशासनिक शासन संरचना को दर्शाती हैं।  

अयोध्या कचहरी में बम की सूचना से अफरा-तफरी, जांच में जुटी पुलिस

अयोध्या   राम नगरी अयोध्या में कचहरी को बम से उड़ाए जाने की धमकी से शुक्रवार की दोपहर हड़कंप मच गया। आनन-फानन में दोपहर पौने एक बजे सूचना पर मौके पर बड़ी संख्या में फोर्स पहुंच गई। कचहरी को खाली कर कर सर्च अभियान चलाया जा रहा है। बमरोधी दस्ते, स्नेफर डॉग्स के साथ सर्च अभियान में शामिल है।वरिष्ठ अफसर ने मौके पर पहुंचकर सभी अदालतों एवं अधिवक्ताओं के के बस्ते को खाली करा लिया।लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल किसी तरह की कोई अप्रिय सूचना नहीं मिली है। एक फोटो स्टेट की दुकान के पास लावारिस झोले को भी चेक किया गया।  

उज्जैन बायपास रेलवे लाइन को स्वीकृति, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेल मंत्री को कहा धन्यवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन बायपास रेलवे लाइन परियोजना की स्वीकृति के लिए रेल मंत्री  वैष्णव का माना आभार नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किमी लंबी बायपास रेलवे लाइन से निर्बाध रेल आवागमन होगा सुनिश्चित उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेल मंत्रालय द्वारा उज्जैन बायपास लाइन को स्वीकृति प्रदान करने के लिए रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का आभार माना है। कुल 8.60 किमी की नईखेड़ी-चिंतामन गणेश रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली इस लाइन के प्रारंभ होने से उज्जैन के समीप वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा। इससे उज्जैन से ट्रेनों को वापस मोड़ने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और ट्रेनों में विलंब नहीं होगा। यह व्यवस्था ‘सिंहस्थ-2028’ के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाएगी। उल्लेखनीय है कि भारतीय रेल द्वारा 189.04 करोड़ रुपये की इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।  

प्रेम-व्यापार: महिला अधिकारी ने 1.5 करोड़ में प्रेमी को पत्नी से अलग कराया, जुदाई की कहानी सुर्खियों में

भोपाल  भोपाल के कुटुंब न्यायालय में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जुदाई’ की यादें ताजा कर दीं। भोपाल के एक परिवार में शांति बहाली के लिए रिश्तों का बाकायदा वित्तीय समझौता किया है। एक महिला ने अपनी गृहस्थी में जहर घोल रही ‘सौतन’ से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति और कैश लेकर अपने पति को हमेशा के लिए उसके नाम कर दिया। शहर के न्यायिक गलियारों में इस ‘महंगे तलाक’ की चर्चा हर तरफ है। सरकारी विभाग में हैं कार्यरत मामला केंद्रीय सरकारी विभाग का है। यहां तैनात एक 42 वर्षीय अधिकारी का प्रेम प्रसंग अपनी ही सहकर्मी के साथ शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि प्रेमिका की उम्र 54 वर्ष है, जो अधिकारी से उम्र में 12 साल बड़ी है। इस प्रेम के परवान चढ़ते ही अधिकारी ने अपने घर, पत्नी और दो मासूम बेटियों की अनदेखी शुरू कर दी। घर में आए दिन होने वाले विवादों ने वातावरण को बोझिल बना दिया था। बेटियों पर पड़ रहा था असर माता-पिता के बीच हर दिन होने वाली ‘महाभारत’ का सबसे बुरा असर 16 और 12 साल की दो बेटियों पर पड़ रहा था। मानसिक अवसाद से जूझ रही बड़ी बेटी ने हिम्मत दिखाई और मामले को कुटुंब न्यायालय तक ले गई। काउंसलिंग सत्र के दौरान पति ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वह अपनी पत्नी के साथ खुश नहीं है और उसे अपनी सहकर्मी (प्रेमिका) के साथ ही मानसिक शांति मिलती है। जब रिश्ता जुड़ना नामुमकिन है, तो पत्नी ने एक व्यावहारिक रास्ता चुना। मान ली यह शर्त उसने मांग रखी कि बेटियों के भविष्य और गुजर-बसर के लिए उसे एक शानदार डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद दिए जाएं। हैरत की बात यह रही कि पति की प्रेमिका ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह शर्त मान ली। प्रेमिका का तर्क था कि वह अपने साथी के परिवार को बेसहारा नहीं देखना चाहती, इसलिए वह अपनी जीवन भर की जमापूंजी इस सौदे में लगाने को तैयार है। पारिवारिक मामलों के काउंसलर्स का मानना है कि जहां भावनाएं खत्म हो जाएं, वहां जबरन साथ रहने से बेहतर सम्मानजनक विदाई होती है। यह निर्णय भले ही समाज को अजीब लगे, लेकिन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा के नजरिए से यह एक तार्किक कदम है। जब रिश्ता केवल बोझ बन जाए तो शांति के लिए अलग होना ही अच्छा है।

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