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दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने तहव्वुर राणा की अगली कोर्ट पेशी 9 जुलाई को होगी

नई दिल्ली  दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। राणा की अगली कोर्ट पेशी 9 जुलाई को होनी है। इसका अर्थ है कि तहव्वुर राणा को अब 9 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में रहना होगा। शुक्रवार को सुरक्षा कारणों से उसे वर्चुअल मोड के जरिए कोर्ट में पेश किया गया। राणा के वकील ने उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। दलीलों पर गौर करते हुए कोर्ट ने तिहाड़ के अधिकारियों को 9 जून तक मामले पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान राणा ने अपने परिवार से बातचीत करने की इच्छा जताई है। खबरों के अनुसार, मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा ने परिवार से बातचीत के लिए कोर्ट में याचिका भी दायर की थी। राणा की इस अर्जी पर कोर्ट 9 जून को सुनवाई करेगा। जब राणा को एनआईए ने हिरासत में लिया गया तब उसने परिवार से बात करने की इच्छा जताई थी। राणा के वकील की ओर से तर्क दिया गया था कि एक विदेशी नागरिक के तौर पर राणा का यह मौलिक अधिकार है कि वह अपने परिवार से बातचीत करे। राणा का परिवार उसकी भलाई को लेकर चिंतित है। इससे पहले 24 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने राणा की अपने परिवार से बात करने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। एनआईए द्वारा उसकी याचिका का विरोध करने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया था। सुनवाई के दौरान, एनआईए ने तर्क दिया कि अगर राणा को अपने परिवार के सदस्यों से बात करने की अनुमति दी जाती है, तो वह बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर सकता है। ज्ञात हो कि पाकिस्तानी सेना के मेडिकल कोर के पूर्व अधिकारी राणा को हाल ही में 26/11 मुंबई आतंकी हमले में मुकदमा चलाने के लिए अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जिसमें 26 नवंबर, 2008 को 166 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे। 9 मई को विशेष अदालत ने राणा को 6 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। पटियाला कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद राणा को 9 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

भारत में अब अधिकांश सेक्टरों में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति: मंत्री पीयूष गोयल

नई दिल्ली वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में अब 112 देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आ रहा है, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा 89 था। इससे देश की ग्लोबल अपील में वृद्धि की जानकारी मिलती है। राष्ट्रीय राजधानी में स्थित वाणिज्य भवन में इन्वेस्टर राउंडटेबल को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सफलता की कहानी न केवल प्रभावशाली आंकड़ों के बारे में है, बल्कि यह दूरदर्शी सुधारों, नीतिगत स्पष्टता और भारत के आर्थिक भविष्य में वैश्विक समुदाय के भरोसे का भी प्रतिबिंब है। निवेशक-अनुकूल नीति व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अब अधिकांश सेक्टरों में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति है। राउंडटेबल में प्रमुख कंपनियों, औद्योगिक पार्कों और औद्योगिक संघों के पक्षकारों सहित 90 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों के 50 से अधिक औद्योगिक पार्कों का प्रतिनिधित्व किया गया। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि एफडीआई भारत के विकास की आधारशिला है और भारत की क्षमता में वैश्विक विश्वास का एक प्रमुख संकेतक है। उन्होंने देश के भीतर पुनर्निवेश बढ़ाने, औद्योगिक पार्क के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और नए विस्तार के अवसरों का पता लगाने के लिए निवेशकों से विचार और सुझाव आमंत्रित किए। डीपीआईआईटी के सचिव ने विदेशी निवेश को और अधिक बढ़ाने के लिए लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रमुख निवेशकों से अपने परिचालन को बढ़ाने, स्टार्टअप में निवेश करने और भारत की बढ़ती निवेश गति में योगदान देने पर विचार करने का भी आग्रह किया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने सरकार के सक्रिय नीतिगत उपायों और उदार निवेश मानदंडों की सराहना की, जिसने भारत की आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थिति को बढ़ाया है। पक्षकारों ने भूमि एवं श्रम सुधार, कौशल विकास, केंद्र-राज्य नीति समन्वय, विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास में एफडीआई सीमा बढ़ाने और विनिर्माण एवं हरित ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर सुझाव भी साझा किए।

सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया अब और तेज, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत पद

भोपाल मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया अब और तेज हो गई है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग ने इसके लिए अधीनस्थ संस्थाओं और विभागों के भर्ती नियमों में संशोधन करते हुए इसे लागू करना शुरू कर दिया है। “मध्य प्रदेश फर्म्स एवं संस्थाएं सेवा भर्ती नियम 1988” में अब सीधी भर्ती के पदों में 27 प्रतिशत पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इसके अलावा अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 20 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रहेगा।   पूर्व में मध्य प्रदेश में ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण मिलता था, जिसे वर्ष 2019 में बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। हालांकि, इस निर्णय की वैधानिकता को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई और इसके क्रियान्वयन पर रोक लग गई थी। कुछ भर्तियों में संशोधित आरक्षण के अनुसार परीक्षा तो हुई, लेकिन परिणाम अटक गए। स्थिति को ध्यान में रखते हुए सितंबर 2021 में “83:13 फॉर्मूला” लागू किया गया था, जिसके तहत 27 प्रतिशत आरक्षण वाले पदों को स्थगित कर बाकी पदों पर नियुक्तियां की गईं। इस फॉर्मूले को भी हाई कोर्ट में चुनौती दी गई और अगस्त 2023 में इस पर भी रोक लगा दी गई। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिससे अब इस पर कोई कानूनी बाधा नहीं बची है। सरकार आरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध आरक्षण की मांग को लेकर मुखर लोकेंद्र गुर्जर का कहना है कि अब सरकार को तत्काल 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पहले ही साफ कर चुके हैं कि सरकार इस आरक्षण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इससे जुड़ी लंबित याचिकाओं पर गंभीर संवाद जारी है। महिलाओं को भी मिलेगा आरक्षण महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं को भी आरक्षित वर्गों के भीतर 35 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। वहीं, एससी-एसटी के लिए आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था यथावत बनी रहेगी। सरकार द्वारा सेवा भर्ती नियमों में किए जा रहे संशोधन से अब स्पष्ट हो गया है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है।

पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ भारत के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आभार व्यक्त किया: एस जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को मध्य एशियाई देशों की ओर से पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने और भारत के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित चौथे भारत-मध्य एशिया संवाद के उद्घाटन सत्र में कहा, “मैं इसकी सराहना करता हूं कि आपके देशों ने भारत के साथ खड़े होकर उस भयावह आतंकी हमले की निंदा की, जो अप्रैल में पहलगाम में हुआ था।” इस संवाद में कजाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मुरात नुर्तलेउ, ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन, तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री राशिद मेरेदोव, किर्गिस्तान के विदेश मंत्री जीनबेक कुलुबाएव और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव ने भाग लिया। जयशंकर ने कहा कि भारत मध्य एशिया के साथ अपनी हजारों साल पुरानी सभ्यतागत और सांस्कृतिक साझेदारी को गहराई से संजोता है। उन्होंने कहा कि व्यापार, विचारों के आदान-प्रदान और लोगों के संपर्क के माध्यम से बने यह संबंध समय के साथ और मजबूत हुए हैं, जो अब साझी आकांक्षाओं और चुनौतियों पर आधारित सहयोग में बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि भारत-मध्य एशिया सहयोग को 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी पांच मध्य एशियाई देशों की यात्रा के बाद “क्वांटम बूस्ट” मिला। जयशंकर ने यह भी बताया कि 2022 में भारत और मध्य एशियाई देशों के समकालीन कूटनीतिक संबंधों के 30 वर्ष पूरे हुए। इस दौरान दोनों पक्षों ने कानूनी और संस्थागत ढांचा तैयार किया, जिसने आपसी सहयोग को नई ऊंचाई दी। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत, मध्य एशियाई देशों का एक विश्वसनीय विकास सहयोगी बना हुआ है। उन्होंने बताया कि व्यापार, आर्थिक और निवेश संबंध पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं। जयशंकर ने आईटीईसी ट्रेनिंग स्लॉट, आईसीसीआर छात्रवृत्ति और ‘हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स’ के तहत भारतीय अनुदानों का जिक्र किया, जो सामाजिक-आर्थिक विकास में सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को हुई भारत-मध्य एशिया बिजनेस काउंसिल मीटिंग के बारे में बताया कि इसमें डिजिटल तकनीक, फिनटेक, इंटर-बैंक संबंधों जैसे क्षेत्रों में अड़चनों को दूर करने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार, निवेश, रक्षा, कृषि प्रसंस्करण, वस्त्र, फार्मा, क्षेत्रीय संपर्क, सुरक्षा, शिक्षा, संस्कृति, और नवाचार तकनीकों में आपसी हितों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बता दें कि भारत-मध्य एशिया संवाद की शुरुआत जनवरी 2019 में समरकंद में हुई थी। दूसरा संवाद अक्टूबर 2020 में वर्चुअली आयोजित हुआ था और तीसरा दिसंबर 2021 में नई दिल्ली में हुआ था।

एक अज्ञात कॉलर ने दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता को जान से मारने की दी धमकी: पुलिस अधिकारी

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को जान से मारने की धमकी मिली, जिसके बाद उनकी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। गाजियाबाद पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि गुरुवार रात करीब 11 बजे पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) में एक अज्ञात कॉलर ने यह धमकी दी। धमकी भरा कॉल करने के तुरंत बाद आरोपी ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। गाजियाबाद पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (सिटी) के अनुसार, कॉल के तुरंत बाद फोन बंद हो गया और अब तक चालू नहीं हुआ है। गाजियाबाद पुलिस की इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन सेल ने दिल्ली पुलिस को इस धमकी की सूचना दी। जांच में सामने आया है कि जिस सिम से धमकी दी गई, उसके मालिक की पहचान कर ली गई है और इसमें टेलीकॉम कंपनी की मदद ली गई। धमकी मिलने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सार्वजनिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्रियों को पहले भी हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा है। 2019 में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक ऑटो ड्राइवर ने थप्पड़ मारा था। उसका आरोप था कि केजरीवाल ने चुनावी वादे पूरे नहीं किए। 2016 में छत्रसाल स्टेडियम में एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान केजरीवाल पर एक महिला ने स्याही फेंकी थी। यह महिला पंजाब की एक संस्था से जुड़ी थी और दिल्ली में सीएनजी वाहनों के स्टिकर घोटाले का विरोध कर रही थी। यह हमला उस समय हुआ था जब केजरीवाल ‘ऑड-ईवन’ योजना की सफलता पर जनसभा को संबोधित कर रहे थे। यहां तक कि फरवरी 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले भी एक सुरक्षा संबंधी घटना सामने आई थी, जब केजरीवाल पर सावित्री नगर, मालवीय नगर में पदयात्रा के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने तरल पदार्थ फेंका था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस लाइन उज्जैन में कई कार्यों का किया लोकार्पण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पुलिस लाइन उज्जैन स्थित सेल्फ स्टडी जोन, दिशा लर्निंग सेंटर, पार्क और ओपन जिम का लोकार्पण किया। इस अवसर पर पुलिस बैंड द्वारा मुख्यमंत्री डॉ यादव को सलामी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पार्क में सांकेतिक रूप से एक्सरसाइज कर सभी को नियमित व्यायाम कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा,नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, जनप्रतिनिधि श्री संजय अग्रवाल, श्री रवि सोलंकी आदि उपस्थित रहे।  

किसानों की समस्याओं का समाधान और कृषि योजनाओं की दी जाएगी जानकारी, यूपी में किसानों के लिए चलेगा बड़ा अभियान

लखनऊ किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत पद्धतियों और नवीनतम प्रजातियों की जानकारी देने के लिए चलाए जा रहे विकसित कृषि संकल्प अभियान में नौ दिनों के अंदर 4,959 स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों में 8,39,617 किसान भाग ले चुके हैं। 550 वैज्ञानिकों और विषय वस्तु विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत कृषि विधाओं के बारे में उनको जागरूक किया। अब अभियान में 4.58 लाख मिनी किट वितरण की तैयारी है। इनमें दलहन, तिल, मूंगफली और मिलेट्स जैसी फसलों के मिनी किट शामिल हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।  लोकभवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 मई को किया था। 12 जून तक इसका आयोजन होना है। इसमें कुल 10,125 स्थानों पर वैज्ञानिक-कृषक संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम होने हैं। कार्यक्रमों में किसान और वैज्ञानिकों के बीच संवाद हो रहा है। किसानों की समस्याओं का समाधान और कृषि योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। अभियान में अब तक विभिन्न योजनाओं के लिए 4.10 अरब रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है। इनमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 1.62 अरब रुपये, फूड और न्यूट्रीशन सिक्योरिटी के लिए 1.02 अरब रुपये और कृष्णोन्नति योजना के लिए 1.45 अरब रुपये की राशि शामिल है। इसका उद्देश्य प्रदेश में खरीफ फसलों की समय से बोआई सुनिश्चित करना और किसानों की आमदनी बढ़ाना है। पत्रकार वार्ता में कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख भी उपस्थित रहे।

तल्हा सईद ने कर दिया बड़ा दावा- पाक सरकार कभी भी हाफिज सईद को भारत को सौंपने जैसा कोई कदम नहीं उठाएगी

इस्लामाबाद  लश्कर-ए-तैयबा के सरगना और मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को लेकर उसके बेटे तल्हा सईद ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। एक वायरल वीडियो में तल्हा ने कहा है कि उसके पिता पाकिस्तान सरकार की सुरक्षा में पूरी तरह महफूज़ हैं और भारत की जितनी भी कोशिशें हों, पाकिस्तान उन्हें कभी भी भारत को नहीं सौंपेगा। तल्हा का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि हाफिज सईद को उसके हवाले किया जाए ताकि 26/11 हमलों के पीड़ितों को न्याय मिल सके। पाकिस्तान के रवैये पर उठे सवाल इस वीडियो में तल्हा सईद साफ कहता है कि पाकिस्तान की सरकार और उसकी खुफिया एजेंसियों को अच्छी तरह पता है कि भारत के आरोप पूरी तरह “झूठे और बेबुनियाद” हैं। उसने यह भी कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके पिता के खिलाफ एक फर्जी नैरेटिव खड़ा किया है और पाकिस्तान की एजेंसियां इस सच को जानती हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान सरकार कभी भी हाफिज सईद को भारत को सौंपने जैसा कोई कदम नहीं उठाएगी। तल्हा का यह दावा पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही नीति को ही दोहराता है, जिसे भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अक्सर ‘दोहरा मापदंड’ करार देता है।   संगठन में बढ़ रही है तल्हा की भूमिका वीडियो में तल्हा ने यह भी स्वीकार किया कि अब वह पहले की तुलना में अधिक सक्रिय हो गया है, क्योंकि उसके पिता का स्वास्थ्य अब पहले जैसा नहीं रहा। बीते कुछ महीनों से तल्हा सईद को पाकिस्तानी मीडिया में धार्मिक और राजनीतिक मंचों पर काफी बार देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत है कि लश्कर-ए-तैयबा में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी चल रही है और तल्हा को हाफिज सईद का उत्तराधिकारी बनाने की योजना पर काम हो रहा है।   भारत की कोशिशें और अंतरराष्ट्रीय दबाव भारत वर्ष 2008 के मुंबई हमलों के बाद से ही हाफिज सईद को अपने हवाले करने की मांग करता रहा है। अब तक कई बार भारत ने पाकिस्तान को सबूतों के साथ डोजियर सौंपे हैं, जिनमें सईद की भूमिका स्पष्ट की गई है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने भी हाफिज को वैश्विक आतंकी घोषित किया हुआ है, बावजूद इसके पाकिस्तान ने उस पर कभी भी निर्णायक कार्रवाई नहीं की। तल्हा सईद के इस बयान से भारत-पाक संबंधों में एक बार फिर से तल्खी बढ़ सकती है और भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को घेरने की कोशिश तेज कर सकता है। FATF की नजर और पाकिस्तान की छवि तल्हा के इस बयान से यह भी उजागर होता है कि पाकिस्तान आतंक के मसले पर दोहरी नीति अपनाता है। एक तरफ वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंक के खिलाफ खड़ा होने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर वह आतंकी संगठनों के सरगनाओं को संरक्षण देता है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) जैसी संस्थाएं पहले भी पाकिस्तान को अपनी ग्रे लिस्ट में रख चुकी हैं और ऐसे बयानों के बाद उस पर फिर से कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है।  

मुसलमानों को हम गाय नहीं काटने देंगे, अगर प्रतिबंधित पशु कटेंगे तो मुसलमान भी कटेंगे, दिया विवादित बयान

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री राजेश्वर सिंह ने बकरीद से पहले एक विवादित बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि ”मुसलमानों को हम गाय नहीं काटने देंगे, अगर प्रतिबंधित पशु कटेंगे तो मुसलमान भी कटेंगे और कुशीनगर में खून की धारा बह जाएगी।” उनके इस बयान के बाद यूपी की सियासत गरमा गई है। ‘कोई भी पशु जो प्रतिबंधित है, कटने नहीं देंगे’ बता दें कि 5 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस के मौके पर कुशीनगर जिले में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बोलते हुए मंत्री राजेश्वर सिंह ने कहा कि ”बकरीद आ रही है। हमें महाराज जी के जन्मदिन पर संकल्प लेना है कि कोई भी पशु जो प्रतिबंधित है, उसे कटने नहीं देना है।  गाय माता… और गाय माता की हमें रक्षा करनी है। गाय, बछड़े, ऊंट आदि किसी भी बड़े पशु को हम नहीं कटने देंगे।” ‘खून की धारा बह जाएगी…’ मंत्री राजेश्वर सिंह ने कहा, ”बकरीद पर मुसलमानों को हम गाय नहीं काटने देंगे। अगर प्रतिबंधित पशु कटेंगे तो मुसलमान भी कटेंगे और कुशीनगर में खून की धारा बह जाएगी। किसी भी हालत में प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी नहीं दी जाएगी।”  

अब यात्री कश्मीर से कन्याकुमारी तक ट्रेन से सफर कर सकेंगे, कटड़ा से श्रीनगर तक वंदेभारत दौड़ गई, बुलेट प्रूफ जैकेट

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। सालों का सपना आज पूरा हुआ। कटड़ा से श्रीनगर तक वंदेभारत दौड़ गई। अब यात्री कश्मीर से कन्याकुमारी तक ट्रेन से सफर कर सकेंगे। लेकिन लोगों को वंदे भारत में सफर के दौरान सुरक्षा की भी चिंता सता रही होगी। लेकिन इसके लिए आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। वंदे भारत को अभेद किले की तरह सुरक्षित किया गया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कमांडो CORAS को उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लाइन पर वंदे भारत ट्रेनों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। उद्घाटन के दौरान कमांडो ट्रेन में मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि ट्रेन यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर वंदे भारत ट्रेन में 15 कमांडो और एक पर्यवेक्षक मौजूद होंगे। इन इकाइयों को कश्मीर घाटी के बडगाम क्षेत्र तथा रियासी जिले के कटड़ा में तैनात होंगी। 7 जून से करें ट्रेन में सफर उच्च जोखिम वाले सुरक्षा अभियानों, खासकर नक्सली उग्रवाद जैसे खतरों वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के बाद यह पहली बार है जब कोरस को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया है। उद्घाटन के बाद यात्री अब 7 जून से वंदे भारत ट्रेन में सफर का आनंद ले सकेंगे। आईआरसीटीसी के जरिए टिकट बुक कर सकेंगे। सप्ताह में छह दिन चलेगी ट्रेन रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनें सप्ताह में छह दिन चलेंगी, जबकि मंगलवार को रखरखाव के लिए आरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ट्रेनें श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा और श्रीनगर के बीच चलेंगी, क्योंकि जम्मूतवी स्टेशन वर्तमान में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास के अधीन है। ये ट्रेनें न केवल तेज हैं, बल्कि कश्मीर की चुनौतीपूर्ण जलवायु के लिए भी तैयार की गई हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में कटरा और श्रीनगर के बीच वंदे भारत ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाई।

डोनाल्ड ट्रंप ढाई महीने में क्यों लिया यू-टर्न?, PAK को आतंकी पनाहगाह कहा फिर अचानक उसी पर हुए मेरबान

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए नया यात्रा प्रतिबंध लगाया है, जो 19 देशों पर लागू होते हैं। जिन देशों पर ये बैन लगाए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देश शामिल हैं। इनमें 12 देश ऐसे हैं, जिसके नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इनमें अफगानिस्तान, म्यांमा, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरीट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन शामिल हैं। इसके अलावा सात अन्य देशों से आने वाले नागरिकों पर भी आंशिक पाबंदियां लगाई गई हैं। इनमें बुरुंडी, क्यूबा, ​​लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला शामिल हैं। इस अपडेटेड लिस्ट में देशों को शामिल करते हुए तर्क दिया गया है कि इनसे अमेरिका को सुरक्षा खतरा है लेकिन पाकिस्तान पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पिछले ढाई महीने में यू-टर्न लेते हुए अलग रुख दिखाया है। मार्च तक पाकिस्तान को भी इस लिस्ट में शामिल किए जाने की चर्चा चल रही थी लेकिन अब जब लिस्ट सामने आई है तो उससे पाकिस्तान का नाम गायब है। दिलचस्प यह भी है कि पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी रुख में यह नरमी तब आई है, जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सबसे खराब और तनावपूर्ण दौर में हैं। बड़ी बात यह है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवादी नेटवर्क को पनाह देने का आरोप लगाया जाता रहा है, बावजूद इसके यात्रा प्रतिबंध वाले देशों की लिस्ट से पाकिस्तान का नाम गायब है। पाकिस्तान को इस लिस्ट से बाहर रखने का यह हालिया फैसला डोनाल्ड ट्रम्प के पिछले राष्ट्रपति के कार्यकाल (2017 से 2021 तक) के दौरान उनके कार्यों और बयानों के बिल्कुल विपरीत है, जब उन्होंने इस्लामाबाद द्वारा आतंकवाद के कथित समर्थन पर काफी सख्त रुख अपनाया था। ट्रंप के रुख में अचानक बदलाव क्यों? रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ट्रंप प्रशासन के एक आंतरिक ज्ञापन ने पुष्टि की थी कि सुरक्षा खतरों के रूप में पाकिस्तान को भी यात्रा प्रतिबंध वाली संशोधित सूची में शामिल करने पर विचार किया गया था लेकिन अब जब अंतिम सूची जारी की गई, तो उससे पाकिस्तान का नाम हटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अचानक यह बदलाव तब किया गया है, जब पाकिस्तान और ट्रम्प परिवार से जुड़ी व्यापारिक संस्थाओं के बीच व्यावसायिक और राजनीतिक संबंध गहरे हो रहे हैं। ध्यान देने वाली बात है कि ये वही डोनाल्ड ट्रंप हैं, जिन्होंने 2018 में कहा था कि अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन को छिपाने में पाकिस्तान की मिलीभगत थी। उन्होंने तब कहा था, “पाकिस्तान में सैन्य अकादमी के ठीक बगल में रहने के कारण, पाकिस्तान में हर कोई जानता था कि लादेन वहीं है।” ट्रंप ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान आतंकवादियों का पनाहगाह है और इस वजह से अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता में 300 मिलियन डॉलर की कटौती की थी। इसके बाद अमेरिका ने 2019 में कई पाकिस्तानी अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों पर वीजा बैन भी लगाया था। ट्रंप परिवार से क्या कनेक्शन? दरअसल, पाकिस्तान के प्रति ट्रंप की नरमी का यह रुख इसलिए सामने आया है क्योंकि पाकिस्तान और वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) के बीच क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अप्रैल में एक समझौता हुआ है। WLF संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक फिनटेक फर्म है और कथित तौर पर WLF ट्रम्प परिवार के सदस्यों से जुड़ा हुआ है, जिसमें एरिक ट्रम्प, डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर और जेरेड कुशनर शामिल हैं। ये लोग सामूहिक रूप से WLF के स्वामित्व में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। अप्रैल में हस्ताक्षरित इस समझौते में पाकिस्तान में ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना और राष्ट्रीय संपत्तियों को टोकन करना शामिल है। अप्रैल में जब इस्लामाबाद में WLF का प्रतिनिधिमंडल यह समझौता करने पहुंचा तो उसमें ट्रंप के पुराने मित्र और मध्य-पूर्व में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बेटे जैचरी विटकॉफ भी शामिल थे। पाक सेना प्रमुख, पीएम और मंत्रियों ने बिछाए थे पलक पवाड़े पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने खुद आगे बढ़कर WLF प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था। बाद में इस प्रतिनिधिमंडल से खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उप प्रधानमंत्री इशाक डार और रक्षा और सूचना मंत्रियों सहित शरीफ सरकार की बड़ी हस्तियों ने भी मुलाकात की थी। तभी से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि इन हस्तियों की बैठकों में मौजूदगी से साफ है कि यह कोई साधारण वाणिज्यिक समझौता नहीं था। अब ट्रंप ने पाकिस्तान को उस लिस्ट से बाहर कर उस गठजोड़ का खुलासा खुद कर दिया है।  

पहलगाम आतंकी हमला कश्मीरियों की आय रोकने की पाक की साजिश थी, दंगे भड़काना था उद्देश्य: पीएम मोदी

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज समेत कई अन्य प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। कटरा में पीएम मोदी ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला कश्मीरियों की आय रोकने की पाकिस्तान की साजिश थी, लेकिन भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा। जम्मू-कश्मीर के युवा इस लड़ाई में एकजुट हैं। मोदी ने कहा कि पहलगाम की घटना इंसानियत और कश्मीरियत पर हमला थी, इसका उद्देश्य भारत में दंगे भड़काना था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री का जम्मू-कश्मीर का यह पहला दौरा है। 22 अप्रैल को हुए हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। कटरा में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मानवता, पर्यटन, कश्मीरियों की ‘रोजी-रोटी’ के खिलाफ है और इसलिए उसने पहलगाम में पर्यटकों पर हमला किया। पीएम मोदी ने कहा, ”माता वैष्णो देवी के आशीर्वाद से आज वादी-ए-कश्मीर, भारत के रेल नेटवर्क से जुड़ गई है। चिनाब ब्रिज, दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। ये ब्रिज, एफिल टॉवर से भी ऊंचा है। अब लोग चिनाब ब्रिज के जरिए कश्मीर देखने तो जाएंगे ही, साथ ही ये ब्रिज भी अपने आप में एक आकर्षक टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनेगा। ये हमारी सरकार का सौभाग्य है कि इस प्रोजेक्ट ने हमारे कार्यकाल में गति पकड़ी और हमने इसे पूरा करके दिखाया। रास्ते में आने जाने की मुश्किलें, मौसम की परेशानी, लगातार पहाड़ों से गिरते पत्थर… ये प्रोजेक्ट पूरा करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारी सरकार ने चुनौती को ही चुनौती देने का रास्ता चुना है।” उन्होंने आगे कहा कि उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लाइन परियोजनाएं, ये सिर्फ नाम नहीं हैं, ये जम्मू कश्मीर के नए सामर्थ्य की पहचान हैं। भारत के नए सामर्थ्य का जयघोष है। थोड़ी देर पहले मुझे चिनाब ब्रिज और अंजी ब्रिज का लोकार्पण करने का अवसर मिला है। आज ही दो नई वंदे भारत ट्रेनें जम्मू कश्मीर को मिली है। जम्मू में नए मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हुआ है। 46,000 करोड़ रुपये की ये परियोजनाएं जम्मू और कश्मीर के विकास को नई गति देंगे। आज का ये कार्यक्रम भारत की एकता और भारत की इच्छाशक्ति का विराट उत्सव है।” उन्होंने कहा कि चिनाब, अंजी पुल जम्मू-कश्मीर के लिए समृद्धि के प्रवेश द्वार के रूप में काम करेंगे। ‘ऑपरेशन सिंदूर सुनते ही पाक को याद आएगी शर्मनाक हार’ उन्होंने कहा कि सरकार ने पाकिस्तान की गोलाबारी में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए मकानों के मालिकों को दो-दो लाख रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए मकानों के स्वामियों को एक-एक लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि देने का फैसला किया है। जम्मू-कश्मीर में विकास का जो वातावरण बना था, वह पहलगाम के हमले से रुकने वाला नहीं। पाकिस्तान की साजिश के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के लोग उठ खड़े हुए हैं और उन्होंने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब भी पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर का नाम सुनेगा, उसे अपनी शर्मनाक हार याद आ जाएगी।  

उमर अब्दुल्ला ने कहा- वहीं मेरा डिमोशन हो गया है, मैं एक राज्य का सीएम था और आज केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं

जम्मू पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कटरा में वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन कटरा से श्रीनगर तक जाएगी और पहली बार कश्मीर घाटी शेष भारत से ट्रेन के माध्य से जुड़ सकेगी। वंदे भारत को हरी झंडी दिखाने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल का दौरा किया और वहां तिरंगा फहराया। कटरा से श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस उधमपुर, श्रीनगर और बारामूल रेल लिंक का हिस्सा है। इस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा उमर अब्दुल्ला, एलजी मनोज सिन्हा और रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव मौजूद रहे। इस दौरान उमर अब्दुल्ला ने एक अहम सवाल उठा दिया और कहा कि मेरा तो डिमोशन हो गया है। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि बीते 11 सालों में जम्मू-कश्मीर के लिए जो भी रेल प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं, उन सभी की शुरुआत के मौके पर मैं पीएम मोदी के साथ उपस्थित रहा हूं। उन्होंने कहा कि पहला कार्यक्रम अनंतनाग रेलवे स्टेशन के उद्घाटन का था। फिर दूसरा कार्यक्रम बनिहाल टनल के उद्घाटन का हुआ। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुझे याद है कि 2014 में कटरा रेलवे स्टेशन के उद्घाटन के दौरान भी मैं था। आज मंच पर बैठे सभी 4 लोग उस दिन भी थे। तब मनोज सिन्हा रेल राज्य मंत्री हुआ करते थे। अब उनका प्रमोशन जम्मू-कश्मीर के एलजी के पद पर हो गया है। वहीं मेरा डिमोशन हो गया है। मैं एक राज्य का सीएम था और आज केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं। इस दौरान उन्होंने इशारों में ही पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग उठा दी। उन्होंने कहा कि चीजें जल्दी ही सामान्य होंगी। ऐसी मुझे उम्मीद है कि पीएम नरेंद्र मोदी जल्दी ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह हमारे लिए ऐतिहासिक दिन है और इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के विकास में एक और मील का पत्थर जुड़ गया है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह विकास इसीलिए संभव हो पाया है क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी खुद सक्रिय रहे हैं और कश्मीर के विकास की पल-पल की अपडेट लेते रहे हैं। इस मौके पर उमर अब्दुल्ला ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। अब्दुल्ला ने कहा कि यदि वाजपेयी जी को यदि याद नहीं किया तो यह भी अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने ही कश्मीर के लिए ट्रेन को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना बताया था।  

रेलमार्ग से कैसे जुड़ा जम्मू-कश्मीर, आजादी से पहले का सपना, जाने महाराजा हरि सिंह से क्या कनेक्शन

कटरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को देश को एक ऐतिहासिक सौगात दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाला रेलमार्ग राष्ट्र को समर्पित किया। वैसे तो जम्मू -कश्मीर को रेलमार्ग से जोड़ने का सपना तो महाराजा हरि सिंह ने आजादी से पहले देखा था। उन्होंने अंग्रेजों के सहयोग से जम्मू-कश्मीर तक नैरो गेज टॉय ट्रेन चलाने के लिए सर्वेक्षण कराए थे। लेकिन दुरुह भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस पर आगे बढ़ना संभव नहीं हो पाया। बाद में इस सपने पर साल 1983 में काम शुरू हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जम्मू से ऊधमपुर तक 53 किलोमीटर के रेलमार्ग की आधारशिला रखी थी। उस लाइन पर 1800 करोड़ रुपए की लागत आई थी और 22 साल बाद 2005 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्घाटन किया था। अटल सरकार में मिली प्रोजेक्ट को रफ्तार फिर साल 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने कश्मीर घाटी को रेलवे लिंक से जोड़ने के फैसले पर मुहर लगाई थी। 2008-09 में ऊधमपुर श्रीनगर बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) पर काम शुरू हुआ। यह दिसंबर 2024 में पूरा हुआ और जनवरी में रेल संरक्षा आयुक्त ने संगलदान कटरा के करीब 67 किलोमीटर के आखिरी खंड को प्रमाणपत्र प्रदान किया। इस प्रकार से 272 किलोमीटर की जम्मू-कश्मीर रेल लिंक परियोजना का काम पूरा करने में चार दशक से अधिक समय लग गया। इस उद्घाटन के साथ शनिवार सात जून से इन दोनों वंदे भारत ट्रेनों की वाणिज्य की यात्राएं शुरू हो जाएंगी। हर मौसम में होगी आसानी श्रीनगर और श्री वैष्णो देवी कटरा के बीच का सभी शुल्कों सहित किराया चेयर कार श्रेणी में 715 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास में 1320 रुपए निर्धारित किया गया है। इन दोनों ट्रेनों के चलने से देश के विभिन्न हिस्सों से कटरा पहुंचने वाले पर्यटकों और रेलयात्रियों को कश्मीर पहुंचने में आसानी होगी। उनकी सात घंटे की सड़क मार्ग की यात्रा अब तीन घंटे में पूरी होगी। हर मौसम जम्मू से श्रीनगर और बारामूला तक की यात्रा कुछ घंटे में पूरी हो सकेगी। अभी तक कश्मीर की वादियों में बारामुला से संगलदान के बीच ही लोकल ट्रेनों का परिचालन हो रहा था। कटरा से संगलदान के बीच रेल निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब कटरा और श्रीनगर के बीच शनिवार से नियमित रूप से ट्रेन परिचालन शुरू हो रहा है। विकास में आए तेजी पर्यटकों, व्यापारियों, स्थानीय निवासियों, छात्रों आदि के साथ-साथ माल की कम समय में आवाजाही का सस्ता एवं सुविधाजनक माध्यम उपलब्ध हो गया है। इसी के साथ तीन ओर से शत्रुओं के घिरे दोनों केन्द्रशासित प्रदेशों में सैनिकों की आवाजाही के साथ रक्षा रसद का तीव्र, सुरक्षित एवं सतत प​रिवहन सुनिश्चित हो गया है। जम्मू के अलग रेलमंडल बन जाने से इन विकास परियोजनाओं में और तेजी आएगी।  

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के लिए फाइनल हो गए 4BHK वाले 2 बंगले, ‘चमकाने’ पर खर्च होंगे 47 लाख रुपये

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के लिए आखिर बंगले की तलाश पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री बनने के करीब साढ़े तीन महीने बाद राज निवास मार्ग पर रेखा गुप्ता के लिए दो बंगले फाइनल किए गए हैं। बताया बंगले 4 BHK वाले हैं इन बंगलों की पहले मरम्मत और रंग-रोगन का काम भी किया जाएगा। गुप्ता पहले ही उस बंगले को ना कह चुकी थीं,जिसमें मुख्यमंत्री के तौर पर अरविंद केजरीवाल रहा करते थे। भाजपा इसे शीशमहल कहकर पुकारती थी। रेखा गुप्ता के नाम सिविल लाइंस में राज निवास मार्ग पर दो बंगले 1/8 और 2/8 आवंटित किए गए हैं। 4 एकड़ में फैले इन बंगलों में से एक का इस्तेमाल रेखा गुप्ता सरकारी आवास और दूसरे का कैंप ऑफिस के रूप में करेंगी। रेखा गुप्ता अभी तक शालीमार बाग स्थित अपने निजी आवास में ही रह रही थीं। सीएम रेखा गुप्ता ने इनके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के लिए लंबे समय से एक ऐसे बंगले की तलाश की जा रही थी जिसकी दूरी सचिवालय, आईटीओ और केंद्रीय सरकार के दफ्तरों से नजदीक हो। इससे पहले सामाजिक कल्याण मंत्री रवि इंद्रारज सिंह को राज निवास मार्ग पर बंगला नंबर 3/8 मिला था। सीएम का आवास उपराज्यपाल विनय सक्सेना के बंगले के नजदीक होगा। दिल्ली सरकार के पास राज निवास मार्ग पर कुछ बंगले हैं जो आमतौर पर मंत्रियों को दिए जाते हैं। इनमें 4 बेडरूम, फ्रंट लॉन, लिविंग और ड्रॉइंग एयरिया और स्टाफ क्वॉर्टर शामिल हैं। यहां रवि इंद्रराज सिंह और डिप्टी स्पीकर बिष्ट सीएम के पड़ोसी होंगे। रेखा गुप्ता के पहले सीएम रहीं आतिशी एबी-17 मथुरा रोड स्थित बंगले में रहती थीं। वहीं, अरविंद केजरीवाल सिविल लाइंस में 6 फ्लैगस्टाफ रोड स्थित बंगले में रहते थे। भाजपा का आरोप है कि केजरीवाल ने गलत तरीके से इस बंगले में सुख सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए। अब यह बंगला जांच के दायरे में है। रेखा गुप्ता ने पहले ही कह दिया था कि वह इस बंगले में नहीं रहना चाहेंगी, बल्कि इसे म्यूजियम बनाने समेत कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। मरम्मत पर खर्च होंगे 47 लाख रुपये पीटीआई ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि आंवटन पत्र पीडब्ल्यूडी को दिया जा चुका है और इसके बाद बंगलों की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है। उन्होंने पीटीआई को बताया, ‘हम इसमें कुछ मरम्मत और रेनोवेशन का काम कर रहे हैं, जिसके बाद मुख्यमंत्री शिफ्ट होंगी।’ सीएम के लिए कैंप ऑफिस बनाने को पीडब्ल्यूडी ने टेंडर निकाला है। अधिकारी ने बताया कि बंगले की मरम्मत पर करीब 47 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है और 60 दिन में काम पूरा होगा।  

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