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CJI बीआर गवई ने अदालत की सुनवाई को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से साझा किए जाने पर जताई चिंता

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने अदालत की सुनवाई को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से साझा किए जाने पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने बताया कि भारतीय मीडिया अदालत के निर्णयों की रिपोर्टिंग में काफी सक्रिय है, लेकिन कई बार सुनवाई के दौरान कही गई बातें गलत तरीके से प्रस्तुत की जाती हैं. मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि जब से अदालत की सुनवाई वर्चुअल प्लेटफार्मों पर होने लगी है, तब से इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हुई है. यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि वर्चुअल सुनवाई के कुछ हिस्सों को साझा करने के साथ-साथ गलत दावे भी किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमों की आवश्यकता है. चीफ जस्टिस गवई ने यह भी बताया कि भारत में इस प्रकार की समस्याओं का समाधान करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. उनका मानना है कि इस समय नियम बनाने का यह सबसे उपयुक्त अवसर है. उन्होंने सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया. यह टिप्पणी उन्होंने ब्रिटेन में ‘मेंटेनिंग ज्युडिशियल लेगिटिमेसी ऐंड पब्लिक कॉन्फिडेंस’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की, जिसमें इंग्लैंड और वेल्स की चीफ जस्टिस लेडी सुइ कार भी उपस्थित थीं. भारत की सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस विक्रम नाथ इस कार्यक्रम में उपस्थित थे, जहां सीनियर एडवोकेट गौरव बनर्जी ने मंच का संचालन किया. जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हालांकि इसमें कुछ कमियां हो सकती हैं, फिर भी वे अदालती कार्यवाही के लाइव प्रसारण के समर्थन में हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अदालती सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को रोकने के लिए उठाए गए तर्क, जैसे कि इसके बेजा इस्तेमाल का डर, बहुत ही कमजोर हैं. उनका मानना है कि इसका लाभ केवल न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों या प्रतिवादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के लिए भी फायदेमंद है, जो कानूनी प्रणाली से सीधे जुड़े नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय लिया था कि संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाई का लाइव स्ट्रीमिंग किया जाएगा, जिससे इसका व्यापक लाभ हुआ है. हजारों लोग इन वीडियोज को देख रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर मामले में ऐसा करना संभव नहीं है, क्योंकि यदि कानूनी प्रणाली को इस तरह से पूरी तरह से सार्वजनिक कर दिया गया, तो इससे गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. सीजेआइ ने सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद न्यायाधीशों द्वारा सरकारी पद स्वीकार करने या चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा देने पर गंभीर चिंता व्यक्त की. जस्टिस गवई ने कहा कि ऐसे कदम महत्वपूर्ण नैतिक प्रश्न उठाते हैं और सार्वजनिक निगरानी को आमंत्रित करते हैं. उन्होंने बताया कि किसी न्यायाधीश का राजनीतिक पद के लिए चुनाव लड़ना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा सकता है. यह स्थिति हितों के टकराव या सरकार के पक्ष में खड़े होने के प्रयास के रूप में देखी जा सकती है. सेवानिवृत्ति के बाद की गतिविधियों का समय और स्वरूप न्यायपालिका की ईमानदारी पर जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है, जिससे यह धारणा बन सकती है कि न्यायिक निर्णय भविष्य की सरकारी नियुक्तियों या राजनीतिक भागीदारी से प्रभावित हो सकते हैं. CJI ने कोलेजियम प्रणाली को भी उचित ठहराया सीजेआइ बीआर गवई ने यूके में एक सम्मेलन के दौरान न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर जोर दिया. उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली का समर्थन करते हुए बताया कि 1993 से पहले सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का अंतिम निर्णय कार्यपालिका के हाथ में था. इस दौरान कार्यपालिका ने दो बार सीजेआइ की नियुक्ति में वरिष्ठ न्यायाधीशों को नजरअंदाज किया, जो कि स्थापित परंपरा के खिलाफ था. 1993 और 1998 के निर्णयों में, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं की व्याख्या की और कोलेजियम प्रणाली की स्थापना की. इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य कार्यपालिका के हस्तक्षेप को कम करना और न्यायपालिका की स्वायत्तता को बनाए रखना है. उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि कोलेजियम प्रणाली की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी भी समाधान को न्यायिक स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं लाया जाना चाहिए. न्यायाधीशों को बाहरी दबाव से स्वतंत्र रहना चाहिए. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए अपनाए गए उपायों का उल्लेख किया. इनमें न्यायाधीशों द्वारा स्वेच्छा से संपत्ति की जानकारी देना और यदि कोई न्यायाधीश किसी मामले में वकील के रूप में पहले से शामिल रहा है, तो उसे उस मामले की सुनवाई से अलग होने की परंपरा शामिल है.

भिंड में पत्रकारों की थाने में पिटाई का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को भेजा नोटिस, मांगा जवाब

भिंड भिंड जिले के दो पत्रकारों की कथित पिटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले में भिंड एसपी को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 जून को होगी। मामला भिंड के पत्रकार शशिकांत जाटव और अमरकांत सिंह चौहान से जुड़ा है। दोनों ने चंबल नदी में रेत माफिया के अवैध कारोबार की खबरें प्रकाशित की थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी बात से नाराज होकर भिंड पुलिस ने उन्हें एसपी कार्यालय में बुलाकर मारपीट की और धमकाया। हालांकि, एसपी असित यादव ने इन आरोपों का खंडन किया है। इसके बाद खुद को जान का खतरा बताते हुए दोनों पत्रकार अपना घर छोड़कर दिल्ली आए और सुप्रीम कोर्ट व दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 28 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने अमरकांत सिंह चौहान को सुरक्षा प्रदान की थी। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दो महीने के लिए उन्हें सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि जान का खतरा है तो कोर्ट उनकी रक्षा करेगा, लेकिन पहले तीन पहलुओं पर स्पष्टीकरण देना होगा—(1) दोनों को जान का खतरा कैसे साबित होता है, (2) याचिकाकर्ता मध्यप्रदेश हाईकोर्ट क्यों नहीं गए और (3) पहले से लंबित दिल्ली हाईकोर्ट में मामला क्यों नहीं रखा गया? पत्रकारों की ओर से वकील वारिशा फराजत ने कोर्ट को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की ओर से जारी बयान और 27 मई को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना भिंड एसपी को पक्षकार बनाए उन पर आरोप लगाना अनुचित है। इसके बाद वकील ने माफी मांगते हुए एसपी को पक्षकार बनाने की सहमति दी।  

घर लेना होगा आसान होम लोन की ब्याज दरें 7.75% तक आ सकती हैं!

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा 6 जून को मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा करेंगे. यह फैसला तीन दिनों तक चलने वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद लिया जाएगा. इस साल फरवरी और अप्रैल में RBI ने पहले ही दो बार 25 बेसिस प्वाइंट (bps) की कटौती की है, जिससे रेपो रेट अब 6 प्रतिशत पर आ गया है. आर्थिक जानकारों का मानना है कि जून में RBI एक और 25 बिप्स की कटौती कर सकता है, क्योंकि खुदरा महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है. गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. जब रेपो रेट कम होता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन दे पाते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आती है. जंबो कटौती होगी या कम? मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ज़्यादातर अर्थशास्त्री और बैंकिंग जानकार यह उम्मीद कर रहे हैं कि 6 जून को RBI की मौद्रिक नीति समिति फिर से रेपो रेट में 25 bps की कटौती कर सकती है. वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के इकोनॉमिक रिसर्च डिपार्टमेंट का मानना है कि इस बार 50 bps की “जंबो” कटौती भी हो सकती है. यह अंतर इस बात को दिखाता है कि विशेषज्ञों के बीच इस बात पर अलग-अलग राय है कि अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए मौद्रिक नीति में कितनी नरमी लाई जाए. अगर RBI 6 जून को रेपो रेट घटाता है, तो होम लोन की ब्याज दरें भी घट सकती हैं. फिलहाल UCO बैंक, यूनियन बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंक 7.75% से 7.9% के बीच ब्याज दर पर होम लोन दे रहे हैं. ऐसे में रेपो रेट में कटौती से होम लोन की दरें 7.75% से नीचे आ सकती हैं. हालांकि, फरवरी और अप्रैल में रेपो रेट में जो 25-25 bps की कटौती हुई थी, उसका पूरा फायदा सभी बैंकों ने ग्राहकों को नहीं दिया. कुछ बैंकों ने केवल आंशिक फायदा दिया और अपनी “स्प्रेड” यानी मुनाफे की दर को समायोजित कर लिया. उदाहरण के लिए, Axis Bank और ICICI Bank जैसे निजी बैंकों ने रेपो रेट कटौती का पूरा फायदा नए ग्राहकों को नहीं दिया, बल्कि उन्होंने अपने मार्जिन को समायोजित कर 8.75% ब्याज दर बनाए रखी. दूसरी ओर, Kotak Mahindra Bank और HDFC Bank ने 10-30 bps की कटौती के साथ होम लोन की दरों में थोड़ी राहत दी है. 2019 के बाद बदले थे नियम 1 अक्टूबर 2019 के बाद सभी नए फ्लोटिंग रेट लोन एक बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, जो अधिकतर बैंकों के लिए रेपो रेट है. इसका मतलब यह है कि लोन की ब्याज दर तीन हिस्सों से मिलकर बनती है- रेपो रेट, बैंक का मार्जिन (स्प्रेड), और क्रेडिट रिस्क प्रीमियम, जो आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करता है. BankBazaar.com के अनुसार, 1 करोड़ रुपये के होम लोन (20 साल की अवधि) पर बैंकों की ब्याज दरें 7.75% से 9.35% के बीच हैं. ये दरें व्यक्ति की आय, क्रेडिट स्कोर और अन्य शर्तों पर निर्भर करती हैं. उदाहरण के तौर पर, UCO Bank की दर 7.75 फीसदी से शुरू होती है, जो सबसे कम है और इस बैंक ने रेपो रेट में आई 50 bps की पूरी कटौती का फायदा पुराने और नए ग्राहकों को दिया है. ऐसे लोन पर EMI लगभग 82,095 रुपये आती है. केनरा बैंक की ब्याज दर 7.80 फीसदी से शुरू होती है और EMI लगभग 82,404 रुपये बनती है. बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक और यूनियन बैंक की शुरुआती दर 7.85 फीसदी है, और EMI 82,713 रुपये आती है. इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक की दरें 7.90% से शुरू होती हैं और EMI लगभग ₹83,023 बनती है. बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की दरें 8% से शुरू होती हैं, जहां EMI ₹83,644 तक जाती है.

Indore में बिल्डिंग गिराने के मामले में भड़के महापौर, जांच के दिए आदेश

इंदौर इंदौर के स्कीम 54 में बसे पी यू फॉर में नगर निगम द्वारा 31 मई को डायनामाइट लगाकर उड़ाए गए भवन को लेकर निगम महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अधिकारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है. महापौर ने पूरी कार्रवाई की जांच करवाने का हवाला दिया है. साथ ही जोन के भवन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए हैं. दरअसल, इंदौर के सी-21 बिजनेस पार्क के पास बने पीयू फॉर स्कीम पर डॉक्टर इजहार मंजूरी का प्लॉट है, जिसे उन्होंने इंदौर विकास प्राधिकरण से खरीदा था. इसे नगर निगम ने अवैध बताकर 30 मई को आगे का हिस्सा तोड़ दिया था. वहीं, अगले दिन चार मंजिला बिल्डिंग में डायनामाइट लगाकर उसे बम से उड़ा दिया था. तत्काल पद से हटा दिया था भवन अधिकारी को इस मामले में डॉक्टर इजहार मंजूरी ने क्षेत्र के भवन द्वारा नोटिस देने के बाद पांच लाख रुपए मांगने के आरोप भी लगाए थे, जिसके बाद निगम आयुक्त शिवम वर्मा ने भवन अधिकारी असित खरे को तत्काल पद से हटा दिया था. अब इस मामले में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. ‘जांच कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच की जाएगी’ महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि जिस तरह से बिल्डिंग को तोड़ा गया है वह जांच का विषय है. एक व्यक्ति आई डी ए की स्कीम से प्लॉट खरीदता है और अनुमति लेकर भवन बनाता है, यदि भवन के निर्माण अवैध तरीके से किया गया था तो बाधक निर्माण हटाना था, लेकिन पूरे मकान को उड़ा दिया गया जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. हमने मकान मालिक से सारे दस्तावेज बुलवाए है, और जांच कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच की जाएगी. वहीं कांग्रेस नेता अमीनुल सूरी का निगम की कार्रवाई व महापौर पर सवाल उठाते हुए कहा कि इंदौर में डॉ. इजहार मुंशी का घर गिराया नहीं गया, सिस्टम ने अपनी रिश्वतखोरी का परचम लहराया है नक्शा पास, केस हाईकोर्ट में, फिर भी ब्लास्ट? क्योंकि ‘रिश्वत’ नहीं दी, इसलिए इजहार मुंशी को कार्रवाई के रूप में अवैध बिल्डिंग बताकर विस्फोट कर बिल्डिंग को धराशाई कर दिया, नैतिकता और भाजपाइयों का वास्तव में एक दूसरे से कोई सरोकार तो नहीं हैं. अमीनुल सूरी ने कहा कि फिर भी मैं महापौर जी से पूछना चाहता हूं. नैतिकता जैसा शब्द उन्होंने सुना है क्या? इंदौर में डॉ. इजहार मुंशी की चार मंज़िला मकान नगर निगम ने ब्लास्ट कर के गिरा दिया. नगर निगम का आरोप है कि मकान नक्शे के विपरीत बनाया गया था, जबकि डॉ. इजहार का कहना है कि नक्शा पास होने के बावजूद नगर निगम के कर्मचारी 10 लाख रुये की रिश्वत मांग रहे थे. कुछ दिन पहले 5 लाख रुपये दिए थे. वह और बाकी बचे पैसे मांग रहे थे. नहीं देने पर घर ब्लास्ट कर उड़ा दिया, जबकि मामला हाई कोर्ट में लंबित है.

प्रजापत नगर में एक मां ने अपनी आठ माह की बच्ची को हौज में डुबोकर मार डाला, पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया

 इंदौर प्रजापत नगर में एक मां ने अपनी आठ माह की बच्ची को हौज में डुबोकर मार डाला। पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में आरोप स्वीकार लिया है। वह सास-ससुर से परेशान थी। उससे झगड़ा करते थे। बच्ची भी उसको नहीं देते थे। फिलहाल पुलिस पूछताछ कर रही है। द्वारकापुरी पुलिस के अनुसार घटना बुधवार सुबह करीब आठ बजे की है। कारखाना में काम करने वाले अविनाश चौहान की बच्ची मायरा के गुम होने से हड़कंप मच गया। रहवासियों की मदद से तलाश शुरू की गई। अविनाश की पत्नी वर्षा हौज पर खड़ी हो गई। लोगों ने हौज में देखने का कहा तो बहाना बनाने लगी। वर्षा ने अविनाश से दूसरी शादी की थी लोगों ने जैसे ही ढक्कन खोला, बच्ची पानी में डूबी हुई थी। वर्षा का पहले पति से तलाक हो चुका है। उसने अविनाश से दूसरी शादी की है। उसकी मनोस्थिति ठीक नहीं है। सास-ससुर इस कारण उसे बच्ची नहीं देते थे। इस पर उसका विवाद होता था। टीआई सुशील पटेल के मुताबिक अभी मर्ग कायम किया है। शव का पोस्टमार्टम करवा लिया है।  

कोविड-19 ने बढ़ाई चिंता, इंदौर में फिर मिले कोरोना वायरस से संक्रमित 7 मरीज

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में कोरोना संक्रमण एक बार फिर सिर उठाता नजर आ रहा है। बुधवार को शहर में सात नए कोरोना मरीजों की पुष्टि हुई है। इन मरीजों में से तीन हाल ही में मथुरा, केरल और बद्रीनाथ की यात्रा से लौटे हैं। स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की तलाश शुरू कर दी गई है। सभी संक्रमितों को होम आइसोलेशन में रखा गया है जहां विशेषज्ञों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग सतर्क, लगातार सामने आ रहे नए मरीज शहर में कोरोना के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। रोजाना नए मरीज सामने आ रहे हैं जिससे संक्रमण का खतरा फिर से मंडराने लगा है। बुधवार को जिन सात मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, उनमें से कई हाल ही में विभिन्न राज्यों से यात्रा करके लौटे हैं। संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उन्हें भी आइसोलेट करने की तैयारी की जा रही है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। संक्रमितों में महिलाएं और पुरुष, सभी होम आइसोलेशन में अधिकारियों ने बताया कि मथुरा से लौटी 43 वर्षीय महिला, केरल से लौटी 69 वर्षीय महिला, बद्रीनाथ से लौटी 48 वर्षीय महिला, ओडिशा से लौटे 29 वर्षीय पुरुष और रायपुर से लौटे 36 वर्षीय पुरुष समेत इंदौर के दो पुरुषों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इन सभी को सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत थी, जिसके बाद जांच करवाई गई। सभी मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है और उनके परिजनों को भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इंदौर में अब तक 33 मामले, सीएमएचओ ने दी सतर्कता की सलाह इस वर्ष अब तक इंदौर में कोरोना के कुल 33 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 25 मरीज इंदौर के और आठ अन्य जिलों के हैं। फिलहाल शहर में 17 सक्रिय मरीज हैं जो सभी होम आइसोलेशन में हैं। सीएमएचओ डॉ. बीएस सैत्या ने बताया कि हाल ही में कोरोना के ओमिक्रान वैरिएंट की सब-लाइनिज की पुष्टि हुई है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने और लक्षण दिखने पर संपर्क में न आने की सलाह दी गई है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बुधवार को विशेषज्ञों की बैठक कर छह बेड वाले आईसीयू वार्ड और ऑक्सीजन जैसी चिकित्सा सुविधाओं की समीक्षा की। कोरोना वार्ड में डॉक्टरों और स्टाफ की टीम तैनात रहेगी और मरीजों को समय पर जांच व इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।  

मध्य प्रदेश में मानसून मुहाने पर, 26 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, जानें अपने शहर का हाल

भोपाल मध्य प्रदेश में लगातार  प्री-मानसून की बारिश का दौर जारी है। गुरुवार को भी अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने ग्वालियर, रतलाम समेत कुल 27 जिलों में आंधी-बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इससे पहले बुधवार को भी भोपाल, शाजापुर, उज्जैन, छिंदवाड़ा, राजगढ़, सागर, सतना, धार समेत कई जिलों में बारिश हुई। दमोह में करीब सवा इंच पानी गिरा। मानसून के आने से पहले जून के पहले सप्ताह में प्रदेश में गर्मी का असर रहता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर समेत कई शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। इन शहरों में पारा 40 डिग्री से नीचे ही है। वहीं, यहां बारिश का दौर चल रहा है। अगले 4 दिन भी आंधी-बारिश का अलर्ट है। आज इन जिला में बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, अशोकनगर, विदिशा, सागर, कटनी, उमरिया, डिंडोरी, मंडला, सिवनी, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, रतलाम, मंदसौर और नीमच में आंधी-बारिश का अलर्ट है। यहां पर आंधी की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रह सकती है। भोपाल में 33 डिग्री रहा पारा बारिश की वजह से बुधवार को कई शहरों में दिन के तापमान में गिरावट हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, नौगांव में ही पारा 40 डिग्री तक पहुंचा। बाकी शहरों में इससे नीचे रहा। भोपाल में 33 डिग्री, इंदौर में 32.3 डिग्री, ग्वालियर में 36.4 डिग्री, उज्जैन में 35.4 डिग्री और जबलपुर में 36.7 डिग्री सेल्सियस रहा। इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में तापमान 29.6 डिग्री रहा। इधर, प्रदेश में मानसून की एंट्री 10 जून के बाद ही होने की संभावना है। मौसम विभाग की माने तो अभी मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा है। पिछले कुछ दिन से ये आगे नहीं बढ़ा है। मध्य प्रदेश में अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम 5 जूनः ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, अशोकनगर, विदिशा, सागर, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, रतलाम, मंदसौर और नीमच में आंधी-बारिश का अलर्ट है। 6 जून: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना, भिंड,दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच में तेज आंधी चलने और बारिश होने की संभावना है। आंधी की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रह सकती है। 7 जून: इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह में तेज आंधी के साथ बारिश होने का अलर्ट है। 8 जून: खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में बारिश हो सकती है।

‘ मेरे पास शब्द नहीं हैं…’ बेंगलुरु भगदड़ पर विराट कोहली की पहली प्रतिक्रिया

 बेंगलुरु क्रिकेटर विराट कोहली ने बेंगलुरु भगदड़ पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि वे पूरी तरह टूट चुके हैं और उनके पास कोई शब्द नहीं हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर आरसीबी का एक आधिकारिक बयान भी जारी किया है जिसमें इस हादसे पर दुख जताया गया है। आरसीबी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए हमे बेंगलुरु में भीड़ की वजह से हुए हादसे की जो जानकारी मिली है, वो जान बहुत दुखी हैं। सभी की सुरक्षा ही हमारे के लिए सबसे जरूरी है। जिन भी लोगों ने इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में अपनी जान गंवाई है, हम उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। RCB ने अपने बयान में आगे साफ कहा है कि जैसे ही स्थिति के बारे में पता चला हमने अपने कार्यक्रम में तब्दीली की और स्थानीय प्रशासन ने जैसे निर्देश दिए, उसके मुताबिक आगे बढ़े। हम अपने सभी समर्थकों से अपील करते हैं कि वे सुरक्षित रहें। अब इस प्रतिक्रिया से समझ आता है कि आरसीबी की टीम ने स्थानीय प्रशासन का सहयोग किया था, उन्हें जैसा कहा गया, उन्होंने वैसा ही किया। RCB की विक्ट्री परेड मातम में कैसे बदली अब जानकारी के लिए बता दें कि बेंगलुरु में मची भगदड़ का सबसे बड़ा कारण ओवरक्राउडिंग रहा है। इसके ऊपर क्योंकि पुलिस का जरूरी संदेश समय रहते आम लोगों तक नहीं पहुंचा, उस वजह से भी एक कम्युनिकेशन गैप बना और इतना बड़ा हादसा हो गया। असल में बुधवार को सुबह 11.56 पर ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि कोई विक्ट्री परेड नहीं होगी। अब जिस समय पुलिस ने यह जानकारी दी, कई लोग पहले ही भीड़ लगा चुके थे। चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर तो लोग इकट्ठा होने शुरू हो गए थे। ऐसे में कई को तो जानकारी तक नहीं थी कि विक्ट्री परेड कैंसिल हो चुकी है। अभी के लिए इस हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने मतृकों के परिवार के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। सीएम सिद्धारमैया ने भी इस हादसे पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़ मौके पर पहुंची और उसी वजह से यह दर्दनाक हादसा हुआ।

13 साल की बच्ची ने लगाए अपनी मां और उनके दोस्तों ने मेरे साथ गंदा काम करने के आरोप, केस दर्ज

हरिद्वार कहते हैं कि मां और बेटी का रिश्ता सबसे प्यारा और गहरा होता है। लेकिन अगर मां के ऊपर अपनी ही बेटी के यौन शोषण के आरोप लगें तो ये रिश्ता कलंकित हो जाता है। ताजा मामला हरिद्वार से सामने आया है। यहां एक महिला पर अपनी 13 साल की बेटी का यौन शोषण करने का आरोप लगा है। क्या है पूरा मामला? हरिद्वार से मां-बेटी के रिश्ते को कलंकित कर देने वाला मामला सामने आया। यहां एक महिला पर अपनी 13 साल की बेटी का यौन शोषण कराने का आरोप लगा है। पति से विवाद के बाद अलग रह रही महिला अपनी बेटी को अपने बॉयफ्रेंड और उसके दोस्त के सामने परोस रही थी। पीड़ित किशोरी और उसके पिता की शिकायत पर पुलिस ने महिला के खिलाफ पॉक्सो और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। महिला और उसके एक दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस का बयान भी सामने आया है। SSP ने कही ये बात इस मामले में हरिद्वार के SSP प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने कहा, ‘थाना रानीपुर में एक मामला हमारे संज्ञान में आया था, जिसमें एक नाबालिक बच्ची के द्वारा अपनी मां के ऊपर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने तत्काल मामले को संज्ञान में लिया और अभियोग पंजीकृत करके पीड़िता का 164 का बयान और उसका मेडिकल कराया गया। मेडिकल में कही गई बातों की पुष्टि हुई है। प्रथम दृष्टया आरोपों को सही मानते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। पॉक्सो और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। एक आरोपी अभी फरार चल रहा है। जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा। पीड़िता द्वारा अपनी मां और उसके दोस्तों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। सभी लोगों से पूछताछ की गई है। इसमें 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें उसकी मां भी शामिल है। एक फरार चल रहा है।’ हाल ही में 4 साल की बच्ची का शव मिला था मई में बच्चों से जुड़ी इसी तरह की खबर सामने आई थी। हरिद्वार में हर की पैड़ी के पास अगवा हुई चार साल की बच्ची का शव मिला था। इस शव के मिलने से हड़कंप मच गया था। पुलिस ने बताया था कि बच्ची का शव देखने से लग रहा है कि गला घोंटकर हत्या की गई और मारने से पहले उसका रेप किया गया।

सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन में जुडेंगे 7 नए कोच, अगस्त से लागू होगा नया रेक

भोपाल भोपाल रेल मंडल यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए अपनी सेवाओं में निरंतर सुधार कर रहा है। यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए साप्ताहिक ट्रेन 09819-09820 सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन की कोच संरचना को पूरी तरह बदला जा रहा है। यह बदलाव चार अगस्त से लागू किया जाएगा। नई कोच संरचना के साथ पांच अगस्त से अगली सूचना तक चलाई जाएगी। स्लीपर व सामान्य श्रेणी के कोच भी होंगे शामिल वर्तमान में यह ट्रेन गरीब रथ स्पेशल के रूप में केवल 15 एसी तृतीय श्रेणी इकोनोमी कोचों के साथ संचालित हो रही है। लेकिन अब इसे 22 आधुनिक एलएचबी कोचों के साथ चलाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें वातानुकूलित (एसी), स्लीपर व सामान्य श्रेणी के कोच भी शामिल होंगे। इससे सभी वर्गों के यात्रियों को लाभ मिलेगा और अधिक यात्रियों को यात्रा का अवसर मिल सकेगा। ट्रेन में क्या-क्या बढ़ेगा? ऐसे में दो कोच वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी, दो कोच वातानुकूलित तृतीय श्रेणी, सात कोच एसी इकोनोमी, पांच कोच स्लीपर क्लास, चार कोच सामान्य श्रेणी, एक एसएलआरडी दिव्यांगजन और लगेज के लिए विशेष कोच है। यह ट्रेन बारां, रुठियाई, गुना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, मैहर और सतना जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों से होकर गुजरती है, जिससे इन क्षेत्रों के यात्रियों को भी सीधी और बेहतर रेल सेवा मिलेगी। ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक व तेज गति से चलने में सक्षम वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि एलएचबी कोच पारंपरिक डिब्बों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक व तेज गति से चलने में सक्षम होते हैं। इन कोचों में बर्थ की संख्या अधिक होने के कारण वेटिंग लिस्ट की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकेगी।

देश में जनगणना 1 मार्च, 2027 से होगी शुरू, हर घर पहुंचकर जाति भी पूछी जाएगी

नई दिल्ली देश में जनगणना 1 मार्च, 2027 से शुरू होगी। इस बार जनगणना में जाति का कॉलम भी होगा। हर घर पहुंचकर जनगणना में जुटे कर्मचारी सभी की जाति भी पूछेंगे। हालांकि, बर्फबारी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना अगले साल अक्टूबर में ही शुरू हो जाएगी। इनमें लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल है। बाकी राज्यों में एक मार्च, 2027 से इसकी शुरुआत होगी। ‘एनडीटीवी’ ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार इस बार दो चरणों में जनगणना करवा रही है। इसमें सवालों की लंबी लिस्ट शामिल होगी, जिसमें जाति और उप-जातियों पर भी सवाल शामिल होंगे। 30 अप्रैल को मोदी सरकार ने कैबिनेट बैठक में जाति जनगणना करवाने का फैसला लिया था। सरकार ने बताया था कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारा सामाजिक ताना-बाना राजनीतिक दबाव में न आए, यह निर्णय लिया गया है कि जाति गणना को एक अलग सर्वेक्षण के रूप में आयोजित करने के बजाय मुख्य जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए। देश में आमतौर पर हर दस साल में जनगणना होती रही है। आखिरी बार साल 2011 में जनगणना करवाई गई थी। इसके बाद 2021 में कोरोना महामारी की वजह से जनगणना को टाल दिया गया था। विपक्ष लगातार जाति जनगणना करवाने की मांग करता रहा है। कैबिनेट में मुहर लगने के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया था। साल 1872 में पहली बार जनगणना की देश में शुरुआत हुई थी। इसका मकसद सामाजिक तानेबाने को समझना था। हालांकि, शुरुआत में तो जाति से जुड़े सवाल जनगणना में शामिल थे, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया। पिछली बार 2011 में हुई जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे, जिसमें रोजगार, मातृभाषा के साथ-साथ अन्य सामान्य सवाल शामिल थे। 16 साल बाद हो रही जनगणना में इस बार जाति का फिर से सवाल पूछा जाएगा।  

एम्स भोपाल और पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन मिलकर प्रदेश का सबसे बड़ा हर्बल गार्डन बनाने जा रहे

भोपाल भोपाल AIIMS और पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट के बीच  एक महत्वपूर्ण समझौता (MOU) पर हस्ताक्षर हुए. इस समझौते का उद्देश्य आयुर्वेद, चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है. दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से फैटी लीवर डिजीज और एलर्जी जैसी बीमारियों पर क्लिनिकल रिसर्च करेंगी. पतंजलि की ओर से अनुराग वार्ष्णेय और एम्स की ओर से प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने संयुक्त रूप से बताया, यह एक सकारात्मक पहल है, जो भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है. रिसर्च ईएमसीआर के मानकों के अनुरूप होगी. सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत एक इंडीपेंडेंट मॉनिटरिंग बॉडी बनाई जाएगी. रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों का बीमा कराया जाएगा. सभी नैतिक मानकों का पालन होगा. अब भोपाल के एम्स अस्पताल में सिर्फ एलोपैथी का इलाज ही नहीं, बल्कि हमारी पुरानी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का खजाना भी मिलेगा। एम्स भोपाल और बाबा रामदेव की पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन मिलकर प्रदेश का सबसे बड़ा हर्बल गार्डन बनाने जा रहे हैं। एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि यह हर्बल गार्डन कोई साधारण बगीचा नहीं होगा। इसमें सिर्फ मध्य प्रदेश के ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों और पूरे देश में मिलने वाले उन खास औषधीय पौधों को लगाया जाएगा जो शायद आपने पहले कभी न देखे हों। एम्स का मानना है कि इन पौधों में कई बीमारियों को ठीक करने की ताकत है, जिनके बारे में हम भूलते जा रहे हैं। मध्य प्रदेश की ‘रिच ट्राइबल मेडिसिन’ ढूंढ़कर निकालेंगे डॉ. सिंह के अनुसार प्रदेश में कई ऐसे इलाके हैं जहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहते हैं। ये समुदाय सदियों से जंगलों और प्रकृति के करीब रहे हैं। इन समुदायों के पास पेड़-पौधों, जड़ों, पत्तियों और छालों से बीमारियों का इलाज करने का बहुत पुराना और गहरा ज्ञान होता है। यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से चलता रहता है। इसे ‘समृद्ध’ इसलिए कहा गया है क्योंकि इस ज्ञान में कई ऐसी जड़ी-बूटियां और उनके इस्तेमाल के तरीके शामिल हैं जिनके बारे में आधुनिक विज्ञान अभी भी पूरी तरह नहीं जानता। एम्स और पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन की टीमें ऐसे ट्राइबल वैद्य, हकीम या बुजुर्गों से मिलेंगे, जो इस पारंपरिक ज्ञान को जानते हैं। उनकी मदद से पौधों की पहचान करेंगे। जो जड़ी-बूटियां खोजी जाएंगी, उन पर एम्स में वैज्ञानिक रिसर्च की जाएगी। इससे पता चलेगा कि वे कितनी असरदार हैं, उनमें कौन से रासायनिक तत्व हैं। अगर ये पारंपरिक औषधियां वैज्ञानिक रूप से प्रभावी साबित होती हैं, तो उनसे नई, सस्ती और असरदार दवाएं बनाई जा सकेंगी। इससे आम लोगों को कम खर्च में बेहतर इलाज मिल पाएगा। ये गठबंधन चिंताजनक… हालांकि, इस समझौते को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने पतंजलि की विश्वसनीयता और उसके उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए MOU की आलोचना की है. कांग्रेस प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा, सुप्रीम कोर्ट पहले ही पतंजलि के भ्रामक विज्ञापनों पर सख्त टिप्पणी कर चुका है और कंपनी अदालत में तीन बार माफी मांग चुकी है. ऐसे में उसके साथ सरकारी चिकित्सा संस्थान का गठबंधन चिंताजनक है. देना होगा पूरा मुआवजा.. कांग्रेस का यह भी कहना है कि जिन मरीजों पर यह ट्रायल किया जाएगा, उनकी सुरक्षा की गारंटी एम्स और पतंजलि दोनों को देनी चाहिए. पार्टी ने आशंका जताई कि कहीं गरीब मजदूरों और आम लोगों पर परीक्षण कर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो. साथ ही यह मांग भी उठाई कि यदि किसी मरीज को नुकसान होता है तो उसका पूरा मुआवजा पतंजलि और एम्स मिलकर दें. तीन चरणों में बनेगा यह गार्डन:     पहला चरण: आसानी से उगने वाले पौधे: शुरुआत में उन औषधीय पौधों को लगाया जाएगा जिन्हें उगाने के लिए किसी खास इंतजाम (जैसे एसी या खास मिट्टी) की जरूरत नहीं होती। ये पौधे भोपाल के मौसम में आसानी से उग सकेंगे।     दूसरा चरण: मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों की खोज: यह चरण सबसे ज्यादा दिलचस्प होगा। एम्स की टीम मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में जाएगी, जहां आज भी लोग इलाज के लिए अपनी पुरानी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हैं। इन छुपी हुई औषधियों को तलाशा जाएगा, उनकी पहचान की जाएगी और फिर उन्हें एम्स के हर्बल गार्डन में लगाया जाएगा ताकि उन पर रिसर्च की जा सके। यह हमारी अपनी पारंपरिक दवाओं को दोबारा सामने लाने का एक बड़ा प्रयास होगा।     तीसरा चरण: पहाड़ और देश-विदेश के खास पौधे: आखिरी चरण में उत्तराखंड में मिलने वाले कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण औषधीय पौधों को लगाया जाएगा। इसके साथ ही, देश भर से कुछ ‘एग्जॉटिक’ यानी दुर्लभ और खास जड़ी-बूटियों को भी लाया जाएगा। चूंकि इन पौधों को भोपाल के मौसम में जिंदा रखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए इन्हें खास ‘आर्टिफिशियल सेटअप’ (नकली वातावरण) में रखा जाएगा। जिससे वो बिना समस्या के पनप सकें। पुराने ज्ञान को नए विज्ञान से जोड़ना इस पूरे प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ एक सुंदर बगीचा बनाना नहीं है। यह न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत भी आता है, जिसमें कहा गया है कि मेडिकल की पढ़ाई में हर तरह के इलाज (जैसे एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी) को जोड़कर देखा जाना चाहिए। यानी, मरीजों को सिर्फ एक तरह का इलाज नहीं, बल्कि सबसे बेहतर, सस्ता और असरदार इलाज मिले। चाहे वह किसी भी चिकित्सा पद्धति से क्यों न हो। इसे मॉडर्न साइंस में ‘इंटिग्रेटेड मेडिसिन’ नाम दिया गया है। इलाज के साथ-साथ अब होगी रिसर्च भी यह हर्बल गार्डन बनने से दो बड़े फायदे होंगे। पहला, अस्पताल में ही आयुष विभाग के मरीजों के इलाज के लिए औषधीय जड़ी-बूटियां उपलब्ध हो सकेंगी। दूसरा, एम्स में मेडिकल के छात्र इन पौधों पर गहराई से रिसर्च कर सकेंगे। डॉ. सिंह ने बताया कि अभी तक छात्र सिर्फ किताबों में ही इन पौधों के बारे में पढ़ते थे, लेकिन अब वे इन्हें अपनी आंखों से देख सकेंगे, छू सकेंगे और इनके गुणों को समझ सकेंगे। इनपर जांच भी कर सकेंगे। पांच खास हिस्सों में बंटेगा गार्डन:     ह्यूमन हेल्थ हर्बल गार्डन: इसमें वे पौधे होंगे जो सीधे इंसानों की बीमारियों के इलाज में काम आते हैं।     रसायन वन: यह रिसर्च के लिए होगा, जहां पौधों के रासायनिक गुणों का अध्ययन किया जाएगा।     दुर्लभ एवं लुप्तप्राय … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज एक पेड़ माँ के नाम अभियान का शुभारंभ करेंगे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विश्व पर्यावरण दिवस आज कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागृह भोपाल में इस वर्ष के “एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एकीकृत पर्यावरण प्रबंधन पोर्टल लांच करेंगे। साथ ही पीएचडी छात्रवृत्ति एवं मध्यप्रदेश वार्षिक पर्यावरण पुरस्कार का वितरण भी करेंगे। विश्व पर्यावरण दिवस “प्लास्टिक प्रदूषण उन्मूलन’’ विषय पर आधारित होगा। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार विशेष अतिथि रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण द्वारा तैयार प्रदेश के वेटलैण्ड एटलस का विमोचन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इकाइयों और संस्थानों को “मध्यप्रदेश वार्षिक पर्यावरण’’ पुरस्कार का वितरण भी करेंगे। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री नवनीत मोहन कोठारी, एप्को के कार्यपालिक संचालक श्री श्रीमन शुक्ला, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री अच्युतानंद मिश्रा, पर्यावरणविद्, इकाइयों, संस्थानों के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

NHAI 152KM लम्बे फोरलेन पर 215 करोड़ की लागत से 14 अंडरब्रिज तैयार कर रहा, हदसों से मिलेगी मुक्ति

सागर.  राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के सालों पुराने चिन्हित ब्लैक स्पॉट को समाप्त करने अंडरब्रिज का निर्माण कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 152 किलोमीटर लंबाई के फोरलेन पर 215 करोड़ रुपए की लागत से 14 अंडरब्रिज तैयार कर रहा है। इसकी शुरूआत देवरी की ओर से की गई थी, जिसमें से 4 अंडरब्रिज का काम पूरा भी कर लिया गया है, वहीं बाकी के 10 अंडरब्रिज निर्माणाधीन है। कुछ समय पहले ही सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आने वाले बम्हौरी चौराहे पर भी अंडरब्रिज का निर्माण शुरू हो गया है। इन अंडरब्रिज के तैयार होने के बाद इस नेशनल हाइवे सफर सुगम होगा तो वहीं हादसों में 70 से 80 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।  दरअसल कश्मीर से कन्याकुमारी को जोडऩे वाले (उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर) देश के इस सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 का 152 किलोमीटर लंबा हिस्सा सागर जिले की सीमा में आता है, जो मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश बॉर्डर पर स्थित मालथौन के पास से शुरू होकर देवरी के आगे नरसिंहपुर जिले की सीमा में आने वाले तीतरपानी टोल प्लाजा तक लगता है। – भारी वाहन भी निकल सकेंगे नेशनल लाइवे पर तैयार किए जा रहे इन अंडरब्रिज का आकार 12 वाया 5.5 मीटर रखा गया है, इसमें 12 मीटर की चौड़ाई होगी तो ऊंचाई 5.5 मीटर रहेगी, जिसमें से भारी व बड़े वाहन भी आसानी से निकल सकेंगे। फोरलेन के इन सभी 14 अंडरब्रिज को 6 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। – सागर से देवरी के बीच 10 अंडरब्रिज बनेंगे सागर से देवरी की ओर बम्हौरी चौराहा, समनापुर तिराहा, सुरखी स्टार्टिंग बायपास व सुरखी ऐंडिंग बायपास, गौरझामर-केसली चौराहा, गौरझामर एंडिंग बायपास, देवरी स्टार्टिंग बायपास, देवरी-दमोह मार्ग, देवरी एंडिंग बायपास व महाराजपुर में अंडरब्रिज तैयार किए जा रहे हैं। – सागर से मालथौन के बीच 4 अंडरब्रिज सागर से मालथौन की ओर बाछलोन, मोठी गांव के पास, झीकनी गांव और बरोदियाकलां में अंडरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। – फैक्ट फाइल 152 किमी लंबा हाइवे जिले की सीमा में 14 ब्लैक स्पॉट पर बन रहे अंडरब्रिज 4 अंडरब्रिज बनकर हो चुके तैयार 215 करोड़ रुपए है प्रोजेक्ट की लागत 12 मीटर चौड़ा, 5.5 मीटर होगी ऊंचाई 6 मार्च 2026 तक पूरा करना है काम – सफर सुगम व सुरक्षित होगा जिले से निकले फोरलेन के ब्लैक स्पॉट समाप्त करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे स्थानों को चिन्हित कर 14 अंडरब्रिज तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें 4 का काम पूरा हो गया है, शेष प्रगतिरत हैं। मार्च 2026 तक काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्य पूर्ण होने के बाद फोरलेन का सफर सुगम व सुरक्षित होगा। संदीप जीआर, कलेक्टर

शुभ संयोग में गंगा दशहरा पूजन व स्नान किया जाएगा, कैसे करें मां गंगा की पूजा, जानें विधि व उपाय

नई दिल्ली  इस साल गुरुवार के दिन शुभ संयोग में गंगा दशहरा पूजन व स्नान किया जाएगा। जब-जब पुण्य और मोक्ष की बात होती है, मां गंगा का नाम सबसे पहले लिया जाता है। गंगा दशहरा पर भक्त देवी गंगा की पूजा व गंगा स्नान करते हैं। रवि योग और हस्त नक्षत्र के योग में स्नान और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। तैतिल और गर करण जैसे शुभ संयोग भी इस दिन को और पावन बना रहे हैं। गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान और दान-पुण्य करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा में पवित्र स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल सकती है। इस दिन अगर आप भी घर पर स्नान या पूजन करना चाह रहे हैं तो जानें पूजन की सम्पूर्ण विधि- गंगा दशहरा के दिन घर पर कैसे करें मां गंगा की पूजा, जानें विधि: प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। पूजा घर, मंदिर या पूजा स्थल पंडाल को गंगा जल से शुद्ध कर करें। पूजा की चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाकर उस पर मां गंगा की तस्वीर स्थापित करें। जलाभिषेक करें। मां गंगा की मूर्ति को चंदन का तिलक लगाकर अक्षत, फल और फूल अर्पित करें। देवी गंगा को मिष्ठान, मिश्री, दही, हलवा, पंचामृत या खीर का भोग लगाएं। मां गंगा का ध्यान करते हुए ॐ नमः शिवाय’, ‘ॐ गंगे नमः’ अथवा ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति’ आदि मंत्रों का जाप करें। भगवान शिव व विष्णु जी की भी पूजा करें। पूरी श्रद्धा के साथ गंगा मैया की आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें। दान: इस दिन तिल, तुलसी, घी, कपड़े, पंखा, जल का घड़ा और अनाज आदि का दान करें। उपाय- सुख, समृद्धि व शांति के लिए गंगा चालीसा व गंगा स्त्रोत का पाठ करें। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  

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