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महाकाल मंदिर के गर्भगृह में सिर्फ VIP और नेताओं को प्रवेश हक? मचा बवाल

  उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर फिर बवाल मचा है। सोमवार को भस्म आरती के बाद भाजपा के संगठन प्रभारी महेंद्र सिंह और उनकी धर्मपत्नी ने गर्भगृह में बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना की। इस पर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि प्रोटोकॉल की आड़ में आम लोगों को गर्भगृह में जाने से रोक दिया गया है। पिछले कुछ समय से सिर्फ भाजपा नेताओं को ही महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी गई है।   महाकाल मंदिर प्रशासन का दावा है कि दर्शन व्यवस्था में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है। कुछ ही मिनटों में आम लोग यहां दर्शन कर लेते हैं। हालांकि, सच तो यह है कि आम लोगों को गणेश मंडपम से दर्शन करवाए जाते हैं, जो बाबा महाकाल के गर्भगृह से करीब 80 मीटर दूर है। दूर से ही देखकर आम श्रद्धालु बाबा महाकाल का आशीर्वाद ले लेते हैं। कुछ लोगों को 250 रुपये लेकर अतिशीघ्र दर्शन करवाने की व्यवस्था कार्तिक मंडपम से कराई गई है। अति-विशिष्ट लोगों को भी नंदी हॉल और चांदी द्वार से दर्शन कराया जाता है। इसके बाद भी सोमवार सुबह भाजपा के प्रदेश संगठन प्रभारी महेंद्र सिंह और उनकी धर्मपत्नी ने गर्भग्रह में बाबा महाकाल का पूजन-अर्चन किया। इसके फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद जमकर बवाल मचा है। भाजपा के प्रदेश संगठन प्रभारी को अति-विशिष्ट अतिथि बताकर दर्शन करवाए जाने को लेकर श्रद्धालु ही नहीं उज्जैन के पंडे-पुजारी भी नाराज हैं। उनका कहना है कि बाबा के भक्तों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और सिर्फ भाजपा नेताओं को ही गर्भगृह में प्रवेश दिया जा रहा है। कुछ ही दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी तीन अप्रैल को गर्भगृह में जाकर पूजा-अर्चना की थी। राहुल गांधी को नहीं दिया था प्रवेश पिछले दिनों भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी महाकाल के दरबार पहुंचे थे। तब भी उन्हें गर्भगृह में जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। इसे लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल भी उठाए थे। यह है प्रोटोकॉल बाबा महाकाल के गर्भगृह में सिर्फ पुजारी ही पूजा-अर्चना कर सकते हैं। उनके अलावा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्यपाल, शंकराचार्य, महामंडलेश्वर के साथ ही अन्य विशिष्टजनों को गर्भगृह में जाने की इजाजत दी गई है। हकीकत यह है कि मंदिर में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, सांसद, विधायक बाबा महाकाल के दर्शन करने आते हैं तो उन्हें भी चांदी द्वार से ही पूजन-अर्चन और दर्शन करवाए जा रहे हैं। ऐसे में महेंद्र सिंह के प्रवेश ने कई सवालों को जन्म दे दिया है।   कलेक्टर बोले- मैंने दी थी अनुमति श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने ही भाजपा के प्रदेश संगठन प्रभारी महेंद्र सिंह को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी थी। लेकिन वह इसका आधार नहीं बता सके। दरअसल, महेंद्र सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता होने के साथ ही उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और विधायक हैं। इसके अलावा उनके पास ऐसा कोई पद नहीं है, जो उन्हें प्रोटोकॉल के नेताओं की सूची में लाता है। महेंद्र सिंह और उनकी पत्नी के गर्भगृह में पूजन-अर्चन के फोटो-वीडियो वायरल हो रहे हैं। इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया भी आ रही है। भाजपा व RSS के गुलाम हैं अधिकारीः पंडित त्रिवेदी श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी का आरोप है कि वर्तमान में भाजपा का नेता ही भगवान के पास पहुंच सकता है। प्रोटोकॉल का व्यक्ति भगवान को छू रहा है और मंदिर में मनमर्जी चल रही है। कहने को तो कई जिम्मेदार अधिकारियों पर मंदिर की व्यवस्था का जिम्मा है लेकिन यह अधिकारी भाजपा और RSS की गुलामी कर रहे हैं। इससे धर्म समाप्त हो रहा है। ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं जिससे भगवान आम जनता से दूर हो रहे हैं। सनातन धर्म संस्कृति में भक्तों के साथ यह व्यवहार नहीं होना चाहिए। व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले दिखे संगठन प्रभारी के साथ कुछ दिनों पहले घटिया विधायक सतीश मालवीय ने महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर दर्शन व्यवस्था ठीक करने का अनुरोध किया था। इस बात को 10 दिन भी नहीं हुए और वह खुद महेंद्र सिंह के साथ गर्भगृह में पूजन-अर्चन करते दिखाई दिए। उन्होंने संगठन प्रभारी के साथ नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती की। जब वह गर्भगृह में पूजन-अर्चन कर रहे थे, तब मालवीय बाहर उनका इंतजार करते दिखे। 

इस वजह से गौतम गंभीर के नाम के ऐलान में हो रही है देरी, BCCI और गंभीर के बीच सैलरी पर नहीं बन रही बात!

मुंबई  भारतीय क्रिकेट टीम ने 17 साल बाद टी-20 वर्ल्ड कप जीता। इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय टीम में क्रांतिकारी बदलाव हुए। विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविंद्र जडेजा ने टी-20 फॉर्मेट से संन्यास ले लिया। राहुल द्रविड़ बतौर कोच अपना कार्यकाल खत्म कर गए। अब नए कोच के लिए गौतम गंभीर का नाम लगभग तय है, लेकिन फिर भी अब तक उनके नाम का ऐलान नहीं हुआ है। बाएं हाथ के पूर्व ओपनर को ईडन गार्डन्स में कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए एक विदाई वीडियो शूट करते हुए भी देखा गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि चीजें इतनी स्पष्ट हैं तो बीसीसीआई आखिर उनके नाम का ऐलान क्या नहीं कर रहा? आखिर किस बात का इंतजार किया जा रहा है?द्रविड़ से ज्यादा होगी सैलरी  गौतम गंभीर और बीसीसीआई के बीच अब तक सैलरी पर बात नहीं बन पाई है। वेतन वार्ता अंतिम चरण में हैं। जैसे ही गंभीर की सैलरी तय हो जाएगी, भारतीय क्रिकेट बोर्ड उनके नाम की घोषणा कर देगा। भारतीय क्रिकेट टीम (मेंस) के मुख्य कोच की सैलरी को लेकर बीसीसीआई ने विकल्प खुले रखे हैं। इसके लिए आवेदकों को आमंत्रित करने वाले विज्ञापन में यह उल्लेख किया गया था कि ‘पारिश्रमिक बातचीत योग्य’ है और अनुभव के अनुरूप होगा। गंभीर को पिछले कोच राहुल द्रविड़ की तुलना में ज्यादा वेतन मिलने की उम्मीद है। राहुल द्रविड़ को सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये मिलते थे। भारतीय क्रिकेट में होगा पहला असाइनमेंट यह नेशनल लेवल पर गौतम गंभीर का पहला असाइनमेंट होगा। इससे पहले वह कभी भी किसी टीम के हेड कोच के रूप में नहीं जुड़े हैं। उनका एकमात्र कोचिंग अनुभव आईपीएल में रहा है, जहां वह पिछले साल कोलकाता नाइटराइडर्स में जाने से पहले दो सीजन के लिए लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटॉर थे और दोनों ही बार टीम प्लेऑफ तक पहुंची थी। मगर बतौर कप्तान कोलकाता नाइटराइडर्स को 2012 और 2014 का फाइनल जिताने वाले गंभीर साल 2024 में बतौर मेंटॉर जुड़े और टीम को 10 साल बाद आईपीएल चैंपियन बनाया। फिलहाल लक्ष्मण अंतरिम कोच जिम्बाब्वे में पांच मैच की टी-20 सीरीज खेल रही भारतीय टीम फिलहाल एनसीए प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के मार्गदर्शन में खेल रही है। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने पुष्टि की है कि भारत नए हेड कोच के साथ वाइट बॉल फॉर्मेट सीरीज के लिए श्रीलंका की यात्रा करेगा। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारतीय बोर्ड जल्द ही टीम के सहयोगी स्टाफ के लिए आवेदन मंगवाएगा क्योंकि बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़, गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे और फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल यूएसए और वेस्टइंडीज में टी-20 विश्व कप के बाद समाप्त हो गया था।

नमो भारत ट्रेन का मोदीनगर नॉर्थ स्टेशन से मेरठ साउथ स्टेशन तक संचालन जल्द शुरू होगा, 42 KM का सफर चंद मिनटों में

नई दिल्ली नमो भारत ट्रेन जल्द ही साहिबाबाद से मेरठ तक दौड़ती दिखेगी और इसमें यात्रा के बाद घंटों का सफर चंद मिनटों में पूरा हो जाएगा। नमो भारत ट्रेन का मोदीनगर नॉर्थ स्टेशन से मेरठ साउथ स्टेशन तक संचालन जल्द शुरू किया जाएगा। एनसीआरटीसी प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने सोमवार को मेरठ साउथ स्टेशन से लेकर सराय काले खां स्टेशन दिल्ली तक आरआरटीएस कॉरिडोर के निरीक्षण के दौरान यह बात कही। गोयल ने कहा कि मेरठ साउथ स्टेशन तैयार हो चुका है और जल्द यहां नमो भारत का संचालन शुरू होगा। तैयारियों को परखते हुए पार्किंग का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इसी स्टेशन से मेरठ मेट्रो की शुरुआत होगी, जो मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक मेरठवासियों के जीवन को आरामदायक बनाएगी। इस स्टेशन में तीन प्लैटफॉर्म बनाए गए हैं, जिनमें से दो प्लैटफॉर्म नमो भारत ट्रेनों के लिए और एक प्लैटफॉर्म मेरठ मेट्रो के लिए होगा। नमो भारत में सफर के बाद लोग कुछ ही मिनटों में मेरठ साउथ से गाजियाबाद तक पहुंच सकेंगे। वर्तमान में मोदीनगर नॉर्थ से मेरठ साउथ स्टेशन के बीच नमो भारत ट्रेनों का ट्रायल रन जारी है। इसके बाद उन्होंने मोदीनगर नॉर्थ से साहिबाबाद तक कॉरिडोर का जायजा लिया। स्वच्छता बढ़ाने पर जोर एनसीआरटीसी के एमडी शलभ गोयल ने यात्रियों के साथ यात्री केंद्रित सुविधा और सुरक्षा जैसे पुश बटन, पीएसडी और इनसाइड स्ट्रेचर स्पेस और ट्रेन की तीव्र रफ्तार का अनुभव किया। इसके साथ स्टेशनों की स्वच्छता की सराहना करते हुए अधिकारियों से कहा कि स्वच्छता के स्तर को दिनों दिन बेहतर से बेहतर बनाने के लिए कदम उठाते रहना चाहिए। वर्तमान में साहिबाबाद से मोदीनगर नॉर्थ तक 34 किमी के सेक्शन में 8 स्टेशनों पर नमो भारत ट्रेनों का संचालन जारी है। मोदीनगर नॉर्थ से आगे मेरठ साउथ तक नमो भारत सेवाएं शुरू होने के बाद आरआरटीएस के परिचालित सेक्शन की लंबाई 42 किलोमीटर हो जाएगी।  

जावेद की बिजली गिरने से मौत

उज्जैन नीमच से उज्जैन आकर फर्नीचर का काम करने वाले एक युवक पर तेज बारिश के दौरान बिजली गिर गई। उमस और गर्मी से परेशान होकर युवक बारिश में छत पर नहा रहा था। इस दौरान आकाशीय बिजली की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। जानकारी लगने पर  एक अन्य युवक ने उसे बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसेस मृत घोषित कर दिया। नीलगंगा थाना पुलिस ने बताया कि 20 वर्षीय जावेद पिता सईद खान निवासी कोट मोहल्ला मिस्त्री का काम करता था, जो कुछ महीने पहले ही काम करने उज्जैन आया था। सोमवार की शाम वह इंदौर रोड स्थित अथर्व विहार कॉलोनी में फर्नीचर का काम कर रहा था। जावेद की जान जाने के बाद पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने इंदौर रोड स्थित अथर्व एन्क्लेव कॉलोनी में फर्नीचर का काम करने के लिए आए फरदीन से पूरा घटनाक्रम पूछा तो पता चला कि फरदीन, जावेद और दानिश अथर्व एंक्लेव में एक मकान पर पिछले काफी दिनों से फर्नीचर का काम कर रहे हैं। कल शाम को भी सभी घर पर काम ही कर रहे थे कि तभी अचानक तेज बारिश होने लगी।  उमस और गर्मी से परेशान जावेद और दानिश काम छोड़कर मकान की छत पर नहाने चले गए। नहाते समय अचानक गिरी बिजली की चपेट में आने से जावेद की जान ही चली गई। हादसे से दानिश डर गया और छत पर ही बैठ गया। कुछ देर बाद अन्य कारीगरों के माध्यम से जावेद को जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल लाते समय हो गई थी मौत जिला चिकित्सालय के डॉ कपिल वर्मा ने बताया कि जब जावेद को अस्पताल लाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। जावेद का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के सौंप दिया गया है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही उसकी मौत के कारणों का पता चल पाएगा।

आरोपी गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-बेमेतरा में साधु बनकर गड़ा धन निकालने के बहाने लाखों ठगे

बेमेतरा. नांदघाट थाना क्षेत्र के भोपसरा गांव में गड़ा हुआ धन निकालने के नाम पर 11 लाख 19 हजार 500 रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी साधु की वेशभूषा में पीड़ित के घर पहुंचा था। मामले को लेकर पीड़ित गंगाराम साहू (52) ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपी का नाम विजय कुमार गिरी पिता बचछराज गिरी उम्र 32 निवासी चौगलिया बाजार, दुर्गा चौक (राघवपुरी) सीतापुर, जिला चित्रकूट (यूपी) है। आरोपी दिसंबर 2022 को पहली बार पीड़ित के गांव में साधु की वेशभूषा में आया था। घर में भोजन कर रात्रि विश्राम करने की बात कही। रात में आरोपी ने पीड़ित को उसके घर में गड़ा हुआ धन होने की बात कही। पूजा पाठ कराने के नाम पर 80 हजार रुपये लेकर चला गया। ठीक एक माह बाद आरोपी वापस आया व घर में पूजा शुरू कर दी। इसके बाद एक कमरे में 3-4 फीट खुदाई कर पीतल के गुंडी में सोने जैसे बिस्किट व सिक्के निकालकर दिया। इससे एक बड़ा और हंडा होने की बात कहकर सभी सामान को उसी गड्ढे में बांधकर दबा दिया। इसके बाद से आरोपी ने पीड़ित को ठगना शुरू दिया। बीते एक साल से अलग-अलग किश्त में रुपये लेते जा रहा था। एक बार तो पीड़ित ने मध्य प्रदेश के अमरकंटक में आरोपी को 3.50 लाख रुपये दिए थे। आगे की पूजा कार्यक्रम कराने का धोखा दे रहा था। इसी बीच पीड़ित ने पहले से दबे गड़े धन को निकाला तो पता चला कि सभी आभूषण नकली हैं। ठगी की शिकार होने के बाद पीड़ित ने छह जून 2024 को नांदघाट थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत बाद पुलिस ने 420 के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। पुलिस की टीम को आरोपी के चित्रकूट में रहने के बारे में जानकारी मिली। बेमेतरा से पुलिस की टीम यूपी गई थी। जहां से उसे गिरफ्तार कर लाया गया। आरोपी को जेल भेज दिया है।

10 दिनों में 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किये बाबा बर्फानी के दर्शन

श्रीनगर  29 जून को शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में अब तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। मंगलवार को 5,433 यात्रियों का एक और जत्था घाटी के लिए रवाना हुआ। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि पिछले 10 दिनों में दो लाख से ज्यादा यात्रियों ने अमरनाथ यात्रा की है। आधार शिविर भगवती नगर जम्मू से 5,433 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था रवाना हुआ। 89 वाहनों में 1,971 यात्रियों को लेकर पहला सुरक्षा काफिला मंगलवार की सुबह 3:13 बजे उत्तरी कश्मीर के बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने कहा, 124 वाहनों में 3,462 यात्रियों को लेकर दूसरा सुरक्षा काफिला मंगलवार को सुबह 4:03 बजे दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। मौसम विभाग ने दोनों यात्रा मार्गों पर आंशिक रूप से बादल छाए रहने और दिन में हल्की बारिश की संभावना का अनुमान लगाया है। तीर्थयात्री या तो 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम गुफा मंदिर मार्ग या 14 किलोमीटर लंबे छोटे बालटाल गुफा मंदिर मार्ग से यात्रा करते हैं। पहलगाम मार्ग से जाने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग का उपयोग करने वाले लोग गुफा मंदिर के अंदर दर्शन करने के बाद उसी दिन आधार शिविर में वापस आ जाते हैं। समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा को दुनिया भर के लाखों हिंदू भगवान शिव के घर के रूप में पूजते हैं। इस साल लगभग 300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर, दोनों यात्रा मार्गों, दो आधार शिविरों और गुफा मंदिर पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं, ताकि यात्रा सुचारु और दुर्घटना मुक्त रहे। दोनों मार्गों पर 124 से ज्यादा लंगर स्थापित किए गए हैं। वहीं 7,000 से ज्यादा सेवादार यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए, रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनें चला रही है। दोनों मार्गों पर यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। अमरनाथ यात्रा 19 अगस्त को समाप्त होगी। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

मोदी का पुतिन से मिलना शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए एक विनाशकारी घटना है: जेलेंस्की

कीव पीएम नरेंद्र मोदी फिलहाल रूस के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और गले लग गए। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस मुलाकात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब रूस के हमले में 40 लोग मारे गए। इस हमले में कैंसर के मरीजों और बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया। दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी के रूस दौरे के वक्त ही यूक्रेन के एक बच्चों के अस्पताल पर हमला हुआ है। हमले के बाद जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ऐसे समय में जब रूस लगातार यूक्रेन पर हमले कर रहा है तब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का वहां जाकर दुनिया के सबसे बड़े अपराधी के साथ गले मिलना बहुत ही दुखद है। यह शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए एक विनाशकारी घटना है।’ दो दिवसीय दौरे पर हैं पीएम मोदी पीएम मोदी रूस में भारत और रूस के बीच होने वाली 22वीं वार्षिक समिट में हिस्सा लेने के लिए रूस पहुंचे हुए हैं। रूस की तरफ से पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम को अपने आवास पर डिनर के लिए बुलाया, जहां पर दोनों नेताओं के बीच में अनौपचारिक बातचीत हुई। पुतिन ने पीएम मोदी को लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के लिए बधाई दी तो वहीं मोदी ने बातचीत के लिए रूस बुलाने पर राष्ट्रपति का धन्यवाद दिया। दो सालों से जारी है रूस यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया था। शुरुआत में दुनिया को लगा कि रूसी सेना के सामने यूक्रेन जल्दी ही घुटने टेक देगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यूक्रेन लगातार रूस से टक्कर लेता रहा। इस युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों ने भी यूक्रेन की काफी मदद की। भारत ने शुरूआत से ही इससे दूरी बनाए रखी और दोनों देशों को डिप्लोमेसी के जरिए विवाद सुलझाने के लिए कहा। 2022 में SCO की बैठक के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि यह “युद्ध का युग नहीं है।” पीएम मोदी की यह बात पश्चिमी देशों को खूब पसंद आई। भारत ने इस दौरान कभी भी रूस की तीखी आलोचना नहीं की। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भी भारत लगातार रूस से अपने व्यापारिक संबंधों को बचाने में कामयाब रहा और पश्चिमी देशों को यह समझाने में कामयाब रहा कि रूस के साथ बेहतर संबंध भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।

बजट पर सरकार को घेरने की बनेगी रणनीति, राजस्थान-कांग्रेस विधायक दल की बैठक आज

जयपुर. राजस्थान का बजट बुधवार को विधानसभा में पेश होगा। इससे पहले आज मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र में सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। खासतौर पर यह बैठक उन फर्स्ट टाइम विधायकों के लिए है, जो सदन में पहली बार बजट की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे। इसके बाद कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नवनिर्वाचित सांसदों का सम्मान भी किया जाएगा। बैठक में पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा और प्रभारी सुखजिंदर रंधावा मौजूद रहेंगे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सरकार को विभिन्न मु्द्दों पर घेरने की रणनीति बनाई जाएगी। इसके साथ ही शेडो कैबिनेट के गठन का भी फैसला किया जाएगा। विधायक दल की बैठक के बाद नवनिर्वाचित विधायकों के लिए एक ट्रेनिंग वर्कशॉप भीआयोजित होगी, जिसमें सीनियर विधायक और एक्सपर्ट पहली बार चुनकर आए विधायकों को सदन के फ्लोर मैनेजमेंट के बारे में टिप्स देंगे। इस बैठक में राजस्थान में इसी साल संभावित उपचुनावों को लेकर भी मंथन होना है। राजस्थान में इस साल झुंझुनू, दौसा, खींवसर, देवली उनियारा और चौरासी विधानसभा में उपचुनाव होने हैं। ये सभी सीटें इंडिया गठबंधन के पास ही थीं। इन दिनों कांग्रेस विधानसभा से लेकर सोशल मीडिया तक पूरी तरह आक्रामक नजर आ रही है। सत्ता में बैठी भाजपा के ज्यादातर विधायक अनुभवहीन होने से कांग्रेस उन पर पूरी तरह हावी होने की तैयारी में है।

ICC प्लेयर ऑफ द मंथः मेंस अवॉर्ड जसप्रीत बुमराह की झोली, वुमेंस अवॉर्ड स्मृति मंधाना के नाम

नई दिल्ली जून 2024 के लिए आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड का ऐलान हो गया है। मेंस आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ का अवॉर्ड टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने जीता है, जबकि वुमेंस आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड इस बार भारतीय स्टार बैटर स्मृति मंधाना के खाते में गया है। जून महीने में आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप खेला गया। 2 से 29 जून के बीच आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2024 खेला गया था और इसलिए मेंस आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड के लिए इस टूर्नामेंट के प्रदर्शन के आधार पर ही तीन नाम नॉमिनेट किए गए थे। जसप्रीत बुमराह के साथ टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा और अफगानिस्तान के सलामी बैटर रहमानुल्लाह गुरबाज को इस अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। बुमराह को आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2024 में प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुना गया था। 30 साल के बुमराह ने टी20 वर्ल्ड कप में 8.26 की औसत से कुल 15 विकेट चटकाए, जिस दौरान उनका इकॉनमी रेट महज 4.17 ही था। बुमराह ने आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ का अवॉर्ड अपने परिवार को डेडिकेट किया है। उन्होंने कहा, ‘जून आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ बनकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। पिछले कुछ दिन हम लोगों के लिए बहुत शानदार रहे हैं। शानदार प्रदर्शन कर टूर्नामेंट जीतना काफी खास अहसास है, इन यादों को मैं हमेशा अपने साथ रखूंगा। इस दौरान कप्तान रोहित शर्मा और रहमानुल्लाह गुरबाज को शानदार प्रदर्शन के लिए मैं बधाई देता हूं। अंत में मैं अपने परिवार, साथी खिलाड़ियों और कोचों को शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।’ वहीं वुमेंस आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड भारत की सलामी बैटर स्मृति मंधाना ने जीता है। मंधाना ने जून में साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में 113, 136 और 90 रनों की पारियां खेलीं। इसके अलावा इकलौते टेस्ट मैच में भी मंधाना ने शतक लगाया। मंधाना ने यह अवॉर्ड जीतने पर खुशी जताई और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आगे भी वह टीम को जीत दिलाने में इस तरह भूमिका अदा करती रहेंगी।  

हरियाणा में BJP ने नियुक्त किया नया प्रदेशाध्यक्ष, इस चेहरे पर खेला दांव

चंडीगढ़  बीजेपी विधायक मोहन लाल बडौली को हरियाणा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। अभी तक प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री नायब सैनी ही संभाल रहे थे। पार्टी ने विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर विधायक मोहन लाल बडौली को हरियाणा में संगठन की कमान सौंपी है। मोहन लाल बडौली सोनीपत जिले की राई विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वे मुख्यमंत्री नायब सैनी के काफी विश्वस्त माने जाते हैं। पार्टी महासचिव अरुण सिंह के अनुसार बडौली की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। बडौली अभी तक हरियाणा बीजेपी के संगठन में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ऐसे में वह प्रदेश महामंत्री से अब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं। मोहन लाल सोनीपत जिले की राई तहसील के बडोली गांव से आते हैं। नायब सैनी की जगह लेंगे बडौली ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के सीएम रहने के बाद राज्य में बीजेपी की कमान पार्टी ने नायब सिंह सैनी को सौंपी थी। इसके बाद वह सीएम बने गए थे। तब से वह सरकार और संगठन दोनों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हरियाणा में इस साल के आखिरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले बडौली की नियुक्ति अहम मानी जा रही है। पिछले दिनों राज्य के दौरे पर गए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगले विधानसभा चुनावों चुनावों में मुख्यमंत्री नायब सैनी को ही सीएम फेस रखने के संकेत दिए थे। लोकसभा चुनावों में बीजेपी को हरियाणा में पांच सीटों पर नुकसान हुआ है। ऐसे में पार्टी से विधानसभा चुनावों के लिए एक्शन मोड में आ चुकी है। मोहन लाल बड़ौली ने 2019 के चुनाव में राई विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी और पहली बार विधायक बने थे। उन्हें  2,663 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन इसके मायने ज्यादा थे। यह इसलिए क्योंकि राई विधानसभा से उन्होंने पहली बार भाजपा को जीत दिलाई थी। मोहन लाल बड़ौली 1989 से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे। माना जाता है कि आरएसएस का भरोसा भी उन्हें हासिल है। मोहन लाल बड़ौली का जन्म 1963 में हरियाणा के सोनीपत जिले की राई तहसील के बड़ौली गांव में हुआ था।   उनके पिता काली राम कौशिक अपने गांव के एक सम्मानित कवि थे और सोनीपत के जांटी के कवि पंडित लखमी चंद के बहुत बड़े प्रशंसक थे। वे एक किसान और व्यवसायी हैं। ब्राह्मण समाज से आने वाले मोहन लाल ने अपने नाम के पीछे गांव की पहचान को जोड़ा है। गौरतलब है कि इस बात की चर्चा थी कि ब्राह्मण समाज के किसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कमान दी जा सकती है। राम विलास शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता का नाम भी इस रेस में चल रहा था। लेकिन भाजपा हाईकमान ने पहली बार के विधायक मोहन लाल बड़ौली पर दांव लगाया।

पश्चिमी देश रूस के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से असंतुष्ट, चीन दोनों के करीबी रिश्तों को खतरे के रूप में नहीं देखता – ग्लोबल टाइम्स

बीजिंग पीएम मोदी के रूस दौरे पर पड़ोसी चीन का बयान सामने आया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की इस रूस यात्रा को पश्चिमी देश  आशंका के साथ देख रहे हैं। वह यह उम्मीद कर रहे हैं कि चीन के साथ रूस के बढ़ते संबंध संभावित रूप से भारत और रूस के संबंधों में तनाव पैदा कर सकते हैं। इससे नई दिल्ली को लेकर पश्चिम का नजरिया उजागर हो रहा है। कुछ अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने इस संबंध में दावा किया है कि मोदी की रूस यात्रा यह सुनिश्चित करने के लिए है कि रूस अब चीन के और करीब न जा पाए। रूस- भारत के करीबी रिश्तों को खतरे की तरह नहीं देखता चीन ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि पश्चिम भारत के रूस के साथ गहरे होते संबंधों से अधिक चिंतित है, जबकि चीन, भारत और रूस के करीबी संबंधों को खतरे के रूप में नहीं देखता है, जबकि पश्चिमी देश रूस के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से असंतुष्ट हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर चीन को अमेरिका और पश्चिम से दबाव और आलोचना का सामना करना पड़ा है तो उसके विपरीत भारत को रूस की निंदा न करने या प्रतिबंध न लगाने को लेकर कम आलोचना का सामना करना पड़ा। इसकी बजाय भारत ने रूस से संबंध बनाए रखे और रूस से तेल खरीदकर उसे यूरोपीय देशों को बेचकर खूब लाभ कमाया है। दबाव के बाद भी रूस आए पीएम मोदी टाइम्स ने लिखा कि पश्चिमी दबाव के बावजूद भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल को शुरू करने के बाद पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा के लिए रूस गए। विश्लेषकों के अनुसार, उनके इस कदम का उद्देश्य न केवल रूस के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना है, बल्कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के दबाव से निपटने में भारत की ताकत को भी बढ़ाना है। भारत की विदेश नीति तारीफ के योग्य टाइम्स ने लिखा कि वर्तमान में पश्चिमी देश भारत, चीन और रूस के बीच कलह करवाने का प्रयास कर रहा है। पश्चिम और रूस दोनों के साथ भारत के संबंध एक जटिल अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को दर्शाते हैं, जो इस कठिन वैश्विक माहौल में संतुलन तलाश करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके साथ-साथ में अपने हितों को भी साधने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम उम्मीद कर रहा था कि भारत उनके साथ गठबंधन करके रूस के खिलाफ खड़ा है लेकिन ऐसा नहीं है, इसके लिए पश्चिम ने भारत पर दबाव बनाने की भी कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। भारत की विदेश नीति किसी भी पक्ष में पूरी तरह न झुककर अपने हितों को साधने की है। यह दोनों तरफ संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है।  

अदालत ने कहा समलैंगिक विवाह मामले में याचिकाओं पर खुले मंच पर सुनवाई नहीं होगी

नई दिल्ली  समलैंगिक विवाह को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, अदालत ने पिछले वर्ष इस मामले में सुनवाई की थी। अदालत ने उस दौरान समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था। अब अदालत का कहना है कि इस मामले में याचिकाओं पर खुले मंच पर सुनवाई नहीं होगी। अलग चैंबर में होगी मामले की सुनवाई इससे पहले मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षा में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 17 अक्तूबर को समलैंगिक विवाह को कानूनी तौर पर वैधता देने से इनकार कर दिया था। पांच न्यायाधीशों की पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति हिमा कोहली, न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी शामिल थे। शीर्ष अदालत में 10 जुलाई को एक अलग चैंबर में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार करने वाले फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी। ‘विधायी मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती अदालत’ वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी और एनके कौल ने अदालत में इस मामले पर जोर डालते हुए अनुरोध किया था कि मुख्य न्यायाधीश को खुले मंच पर याचिकाओं की समीक्षा करनी चाहिए। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में संविधान पीठ द्वारा समीक्षा की जाएगी और इसे चैंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। पीठ ने कहा कि समलैंगिकों के पास वैधानिक प्रावधानों के तहत विवाह करने का हक है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की अनुमति सिर्फ कानून के जरिए ही दी जा सकती है और कोर्ट द्वारा विधायी मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। मामले से जुड़ी 21 याचिकाओं पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने समलैंगिक मामलों से जुड़ी 21 याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने समलैंगिक विवाह को विशेष विवाह अधिनियम में शामिल करने से इनकार किया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसे मामलों में कानून में बदलाव लाना, संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। प्रधान न्यायाधीश ने केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि समलैंगिक समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया जाए।  

श्रीलंका दौरे पर रोहित-कोहली को मिल सकता है आराम, केएल राहुल के हाथ होगी टीम की कमान

 मुंबई रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने पिछले ही महीने टी20 वर्ल्ड कप 2024 खिताब जीतकर इतिहास रचा है. चैम्पियन बनने के बाद रोहित, विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह समेत वर्ल्ड कप स्क्वॉड में शामिल 12 खिलाड़ी आराम कर रहे हैं. जबकि शुभमन गिल की कप्तानी में युवाओं की टीम जिम्बाब्वे दौरे पर है. यहां दोनों टीमें 5 मैचों की टी20 सीरीज खेल रही हैं. इसके बाद भारतीय टीम को श्रीलंका दौरे पर जाना है, जहां 3 वनडे और 3 ही टी20 मैचों की सीरीज खेली जाएगी. रोहित-कोहली को मिल सकता है आराम भारतीय टीम का श्रीलंका दौरा 27 जुलाई से शुरू होगा और आखिरी मैच 7 अगस्त को खेला जाएगा. हालांकि इसका शेड्यूल अब तक जारी नहीं किया गया है. मगर इससे पहले भारतीय टीम से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है. कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को इस सीरीज से आराम दिया जा सकता है. बता दें कि टी20 वर्ल्ड कप चैम्पियन बनने के बाद रोहित-कोहली और रवींद्र जडेजा ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया. श्रीलंका दौरे पर ये हो सकते हैं कप्तान जबकि रोहित वनडे में कप्तानी करते नजर आएंगे. हालांकि श्रीलंका दौरे पर उनके आराम करने के बाद नया कप्तान तलाशना होगा. ऐसे में सेलेक्शन कमेटी वनडे के साथ टी20 सीरीज के लिए हार्दिक पंड्या या केएल राहुल को कमान सौंप सकती है. टी20 में पंड्या की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. वनडे में केएल राहुल को कप्तानी सौंपी जा सकती है. सितंबर से जनवरी के बीच 10 टेस्ट खेलना है बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, ‘वनडे में यह दोनों प्लेयर (कोहली-रोहित) पहली पसंद हैं. चैम्पियंस ट्रॉफी से पहले इंग्लैंड के खिलाफ 3 वनडे की सीरीज उनके प्रैक्टिस के लिए काफी है. यह दोनों प्लेयर अगले कुछ समय में टेस्ट मैचों को ज्यादा तवज्जो देंगे. वैसे भारतीय टीम सितंबर से जनवरी के बीच 10 टेस्ट खेलेगा.’ बता दें कि भारतीय टीम को बांग्लादेश के खिलाफ 2 और न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 टेस्ट खेलने हैं. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी. जबकि चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 फरवरी-मार्च में पाकिस्तान की मेजबानी में होगी. यह वनडे फॉर्मेट में होगी. ऐसे में चैम्पियंस ट्रॉफी से पहले भारतीय टीम को सिर्फ 6 वनडे मैच (3 श्रीलंका और 3 इंग्लैंड के खिलाफ) ही खेलने हैं.

ग्रामीणों ने बचाई काले हिरण की जान, कुत्ते कर रहे थे शिकार

दमोह दमोह जिले के देहात थाना क्षेत्र के भौरांसा गांव में ग्रामीणों ने काले हिरण को कुत्तों के हमले से बचा लिया। उसे वन विभाग को सौंप दिया। हिरण घायल हो गया है। उसका डॉक्टर इलाज कर रेह हैं। मामला सोमवार रात का है। सोमवार रात काला हिरण जंगल से निकलकर भौरांसा गांव के पास पहुंच गया था। वहां घूम रहे आवारा कुत्तों ने हिरण को देख लिया। उसे खदेड़ना शुरू कर दिया। उसका शिकार करने की कोशिश की। गांव के लोगों ने जब काले हिरण के पीछे कुत्तों का झुंड देखा तो उन्होंने पहले आवारा कुत्तों को वहां से भगाया। उसके बाद हिरण को पकड़ लिया। इस दौरान काला हिरण घायल हो गया था। इस कारण ठीक से भाग नहीं पा रहा था। ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग को इसकी सूचना दे दी। बाद में वन विभाग के कर्मचारी हिरण को साथ लेकर गए और इलाज करने के बाद मंगलवार सुबह जंगल में छोड़ दिया। दमोह जिले में चारों तरफ जंगल है, जहां बड़ी संख्या में जंगली जानवर हैं। खास तौर पर हिरण की संख्या काफी अधिक है। बारिश के मौसम में खेतों में खाने-पीने के चक्कर में हिरन के झुंड गांव तक पहुंच जाते हैं। यदि कोई भटक जाए तो वह गांव में घुस जाता है। कुछ दिन पहले ही कलेक्टर ने भी खेतों में हिरणों के झुंड को देखकर अपने मोबाइल में उनके फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किए थे। काला हिरण विलुप्त प्रजाति का हिरण है। इस वजह से उसका संरक्षण भी किया जाता है।

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