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तूफान हेलेन और मिल्टन के कारण अमेरिका में हेल्थ केयर प्रोवाइडर को मेडिकल प्रोडक्ट्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा

सैक्रामेंटो  संयुक्त राज्य अमेरिका में हेल्थ केयर प्रोवाइडर को मेडिकल प्रोडक्ट्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। तूफान हेलेन और मिल्टन ने इंट्रावेनस (आईवी) फ्लुइड्स की सप्लाई चेन को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है। अमेरिका में सबसे बड़े अस्पताल-बेस्ड रिसर्च एंटरप्राइज, मास जनरल ब्रिघम ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह  बुधवार तक गैर-आपातकालीन, वैकल्पिक प्रक्रियाओं को स्थगित कर देगा। इसने कहा कि यह साफ नहीं है कि आईवी फ्लुइड्स की आपूर्ति कब सुधरेगी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स कंपनी प्रीमियर इंक की तरफ से  जारी एक सर्वे के अनुसार, देश भर में 86 फीसदी से अधिक हेल्थ केयर प्रोवाइडर आईवी फ्लुइड्स की कमी का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति तब शुरू हुई जब पिछले महीने के अंत में तूफान हेलेन ने उत्तरी कैरोलिना में बैक्सटर आईवी प्लांट को नुकसान पहुंचाया। इससे देश की 60 फीसदी आईवी सॉल्यूशन सप्लाई निकट भविष्य के लिए ऑफलाइन हो गई। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री जेवियर बेसेरा ने 9 अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवा नेताओं को लिखे पत्र में कहा कि आने वाले हफ्तों में सप्लाई ‘बाधित रह सकती है’ और तूफान मिल्टन ‘पहले से ही कमजोर बाजार’ को और अधिक बाधित कर सकता है। खाद्य और औषधि प्रशासन और बैक्सटर, वैकल्पिक आईवी, डायलिसिस और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट की पहचान कर रहे हैं।    

साय कैबिनेट की 15वीं बैठक 16 को, धान खरीदी और राज्योत्सव समेत कई मुद्दों पर होगी चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 16 अक्टूबर को राज्य कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण एजेंडों और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा, इस दौरान आगामी राज्योत्सव और धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा भी किये जाने की संभावना है। बता दें कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार ने इस साल राज्य में 160 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है और 15 नवंबर से खरीदी शुरू करने का प्रस्ताव है। इन प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना है। इसके साथ ही प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों द्वारा 4% महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ाने की मांग पर विचार और कुछ विभागों में नए पदों की स्वीकृति के प्रस्ताव भी कैबिनेट के समक्ष रखे जा सकते हैं। कैबिनेट बैठक में विधायकों के यात्रा भत्ते में वृद्धि के प्रस्ताव को भी मंजूरी के लिए पेश किया ज सकता है। इसके अलावा, पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को एक साथ कराए जाने पर भी चर्चा हो सकती है। इस संदर्भ में गठित आईएएस ऋचा शर्मा की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिसमें दोनों चुनाव एक साथ कराने की अनुशंसा की गई है। गौरतलब है कि इससे पहले बीते 20 सितंबर को कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसके बाद मंत्रियों की व्यस्तता के कारण इस महीने की शुरुआत में प्रस्तावित बैठक स्थगित हो गई थी।

संस्कृत में हायर एजुकेशन कर बनायें शानदार करियर, पतंजलि यूनिवर्सिटी में कई कोर्स

संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और दर्शन की आधारभूत भाषा है. धार्मिक ग्रंथों से लेकर साहित्य और कला तक, संस्कृत ने भारतीय संस्कृति को आकार दिया है. इसका वैज्ञानिक व्याकरण भाषा विज्ञान में महत्वपूर्ण रहा है. आज भी संस्कृत का उपयोग पूजा, संगीत और चिकित्सा में किया जाता है. कई अंतरराष्ट्रीय संगठन संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रचार के लिए काम कर रहे हैं, जिससे इसे विश्व स्तर पर मान्यता मिल रही है. संस्कृत को पिछले 3,500 वर्षों से पढ़ाया जा रहा है और इसकी विरासत भारत की सच्ची संस्कृति को समृद्ध करते हुए लंबे समय से जारी है. माना जाता है कि सबसे पुरानी इंडो-यूरोपियन भाषाओं में से एक, जिसके लिए पर्याप्त लिखित दस्तावेज मौजूद हैं. संस्कृत तेजी से आम लोगों के बीच एक लोकप्रिय भाषा विकल्प बन रही है. ऐसे में संस्कृत के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वालों और संस्कृत भाषा में हायर एजुकेशन प्राप्त करने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है. अगर आप भी संस्कृत में कोई कोर्स करना चाहते हैं, तो हम आपको पतंजलि यूनिवर्सिटी के द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले संस्कृत भाषा के पाठ्यक्रमों और करियर के विकल्पों के बारे में बताने जा रहे हैं. पतंजलि यूनिवर्सिटी में है संस्कृत विभाग हरिद्वार, उत्तराखंड में स्थित पतंजलि यूनविर्सिटी में संस्कृत विभाग की स्थापना 2009 में की गई थी. ये विभाग विभिन्न पाठ्यक्रम और रिसर्च के अवसर प्रदान करता है. संस्कृत व्याकरण और साहित्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए, विभाग प्राचीन ग्रंथों का विश्लेषण करने और उनको संरक्षित करने के लिए भी काम कर रहा है. यही नहीं, विभाग संस्कृत कम्प्यूटेशनल लैंग्वेज सांइस  जैसे क्षेत्रों में भी शामिल है. विभाग के छात्र और शोधकर्ता लगातार संस्कृत के रहस्यों की खोज कर रहे हैं और ज्ञान के नए रास्ते खोज रहे हैं. इस विभाग के अंतर्गत छात्रों को फीस में 50 प्रतिशत छूट दी जाती है. साथ ही, प्रामाणिकता से अध्ययन करने वाले योग्य छात्रों को नौकरी की गारंटी भी दी जाती है. इसके अलावा, अजीवन ब्रह्मचारियों और संन्यासियों को विशेष 100 प्रतिशत छूट दी जाती है. विद्यार्थी शास्त्र स्मरण के माध्यम से एक लाख रुपये तक की राशि प्राप्त कर सकते हैं. ये हैं पाठ्यक्रम, इतनी है फीस पतंजलि यूनिवर्सिटी में भी लगभग सभी विश्वविद्यालयों की तरह ही बीए, एमए, पीजी डिप्लोमा और पीएचडी प्रोग्राम ऑफर किए जाते हैं. साथ ही, शास्त्री, आचार्य, शिक्षा शास्त्री, शिक्षा आचार्य, संयुक्ताचार्य (एकीकृत), योग विज्ञान शास्त्री, योग विज्ञान, विद्यानिधि (पीएचडी के समकक्ष), ज्योतिष शास्त्र में सर्टिफिकेट / डिप्लोमा इत्यादि कोर्सेस भी उपलब्ध हैं. इन कोर्सेस की अवधि नियमानुसार एक वर्ष से छह वर्ष तक की हो सकती है. वहीं, कोर्सेस की फीस प्रति सेमेस्टर 11,000 रुपये से शुरू होती है. इसके अलावा, एप्लीकेशन फीस, काउंसलिंग फीस, रजिस्ट्रेशन फीस आदि शुल्क भी जोड़े जाते हैं. अधिक जानकारी के लिए पतंजलि यूनिवर्सिटी की अधिकारिक वेबसाइट में जा सकते हैं. संस्कृत में करियर की संभावनाएं यदि आप संस्कृत में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो हाई स्कूल की पढ़ाई से ही संस्कृत विषय का चुनाव करिए. 12वीं पास करने के बाद की उच्च शिक्षा भी संस्कृत विषय में कर सकते हैं. संस्कृत के माध्यम से छात्र शिक्षक बन सकते हैं, अपने डॉक्टरेट को पूरा कर सकते हैं और प्रोफेसर बन सकते हैं और यदि वे चाहते हैं तो अनुवादक, लेखक, कवि और बहुत कुछ बन सकते हैं. इसके अलावा और भी बहुत सारे विकल्प मौज़ूद हैं, जैसे- सलाहकार (संस्कृत प्रूफ़ पढ़ना), संस्कृत शिक्षक, कंटेंट राइटर, संस्कृत अनुवादक आदि.

इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा, “IDF सैनिक हिजबुल्लाह की संपत्तियों को जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह नष्ट कर रहे हैं

यरूशलम इजरायल का कहना है कि वह मिलिट्री ऑपरेशन खत्म होने के बाद हिजबुल्लाह को दक्षिणी लेबनानी सीमा क्षेत्र पर दोबारा कब्जा नहीं करने देगा। इजरायल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने कहा कि इजरायल ‘हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे वाले (दक्षिणी लेबनानी) गांवों की पूरी पहली पंक्ति’ को अपना ‘मिलिट्री टारेगट’ मानता है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, गैलेंट ने कहा कि हिजबुल्लाह आतंकवादियों ने इन गांवों में कई भूमिगत सुरंगों और हथियारों के गोदाम का निर्माण किया है। इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा, “आईडीएफ सैनिक वर्तमान में इन (हिजबुल्लाह) संपत्तियों को जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह नष्ट कर रहे हैं।” उन्होंने चल रहे छापों को ‘शक्तिशाली और प्रभावी’ बताया। गैलेंट ने कहा कि आईडीएफ सैनिकों के वापस चले जाने के बाद भी हम हिजबुल्लाह आतंकवादियों को इन क्षेत्रों में वापस नहीं आने देंगे। इजरायल-लेबनान सीमा पर  भी लड़ाई जारी रही। इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह के लगभग 200 ठिकानों पर हमला किया, जिसमें रॉकेट लांचर, एंटी-टैंक मिसाइल पोजिशन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। सेना ने यह भी बताया कि हिजबुल्लाह लड़ाकों के साथ लड़ाई में 28 सैनिक घायल हुए हैं। आईडीएफ ने दक्षिणी लेबनान के 21 से अधिक गांवों के निवासियों से अवली नदी के उत्तर के इलाके को खाली करने का अल्टीमेटम दिया। इजरायली सैन्य प्रवक्ता अविचाय एड्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘अपनी सुरक्षा के लिए, आपको तुरंत अपने घर छोड़ देने चाहिए। बिना देरी किए खाली कर दें। हिजबुल्लाह के तत्व, सुविधाएं या हथियार क्षेत्र में हैं, जो आपकी जान को जोखिम में डाल रहे हैं।” वहीं हिजबुल्लाह की तरफ से इजरायली ठिकानों पर हमले जारी हैं। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, हिजबुल्लाह ने रविवार शाम तक उत्तरी इजरायल में कम से कम 90 रॉकेट दागे। हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के बिन्यामीना में गोलानी ब्रिगेड के ट्रेनिंग बेस पर ड्रोन अटैक की जिम्मेदारी ली। यह हमला इजरायल में एक दुर्लभ घटना है, जिसके दौरान एक ड्रोन इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली को भेद गया और भारी नुकसान पहुंचाया। हमलें में कम से कम चार इजरायली सैनिक मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हो गए। इजरायल ने अक्टूबर की शुरुआत से लेबनान में ‘सीमित’ जमीनी अभियान शुरू किया, जिसमें दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमले भी तेज कर दिए हैं, जो हिजबुल्लाह का गढ़ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने  बताया कि 8 अक्टूबर, 2023 से लेबनान पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या 2,306 तक पहुंच गई है, जबकि कुल 10,698 लोग घायल हुए हैं।    

शरद पूर्णिमा 2024: धन, समृद्धि और सफलता के लिए उपाय और टोटके

शरद पूर्णिमा का दिन बहुत ही खास माना जाता है। सिद्धांत यह है कि इस दिन समुद्र तट के बीच मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इस दिन को मां लक्ष्मी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं। इसलिए इस दिन जो व्यक्ति मन से मां लक्ष्मी की पूजा करता है उसके सभी काम आसानी से पूरे हो जाते हैं। साथ ही उस व्यक्ति को कभी भी धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार शरद पूर्णिमा 16 अक्टूबर, रविवार का दिन है। इस दिन अगर आप सुबह-सुबह कुछ आसान उपाय कर लें तो आपके जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं रहेगी। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा के दिन कौन से पांच उपाय करें। शरद पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल शीघ्र अनादि काल से करें ये उपाय शरद पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल शीघ्र अनादिकाल में माँ लक्ष्मी की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएँ और इसके बाद माँ लक्ष्मी के जप का जाप करें। ऐसा करने से घर में धन धान्य की कोई कमी नहीं होगी साथ ही आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। शरद पूर्णिमा के दिन किसी भी गरीब व्यक्ति को जरूर दान करना चाहिए ये चीजें शरद पूर्णिमा के दिन किसी भी गरीब को ये चीजें जरूर दान करनी चाहिए। आप किसी भी प्रकार के अन्न का दान कर सकते हैं जैसे चावल, आटा आदि। अगर आप चावल का दान करते हैं तो यह काफी बेहतरीन रहेगा। इसके अलावा आप फ्लैट का दान भी कर सकते हैं। साधारण लोगों को कपड़े का दान करने से व्यक्ति को पुण्य मिलता है। शरद पूर्णिमा के दिन इस मंत्र के जाप से दूर होगी आर्थिक ऊर्जा शरद पूर्णिमा के दिन ऊँ ह्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूर-दूरये स्वाहा:। ।। इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को धन की प्राप्ति होती है। इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप अवश्य करें। ​शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को पीले रंग की कौड़ी इस दिन माता लक्ष्मी को पीले रंग की कौड़ी दिखाएं। कौड़ी निर्विकार करने से पहले मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर उनकी पूरी विधि विधान से पूजा करने के बाद ही कौड़ी निर्वाण करें। इसके बाद अगले दिन सुबह इन कौड़ियों को अपने घर की रसोई में किसी लाल रंग के वस्त्र में रखा जाता है। इस उपाय को करने से आपकी जीवनशैली कभी खाली नहीं होगी। शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को पान के पत्ते जरूर पहनने चाहिए। शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा में पान के पत्तों का प्रयोग अवश्य करें। इसके बाद इस पान के पत्ते को लेकर घर परिवार के सभी लोग प्रसाद के रूप में बंट जाते हैं। ऐसा करने से घर में सुख शांति के साथ धन की वर्षा भी होगी। माँ लक्ष्मी भी कभी आपके धन के भंडार से खाली नहीं रहेंगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, दुनियाभर में तेजी से आंखों से संबंधित समस्या मायोपिया के मामले बढ़ते जा रहे हैं

नईदिल्ली साल 2019 के अंत में शुरू हुई कोविड-19 महामारी का असर अब भले ही हल्का हो गया है पर संक्रमण का खतरा वैश्विक स्तर पर अब भी बना हुआ है। वायरस में म्यूटेशन से उत्पन्न होने वाले नए-नए वेरिएंट्स विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाते रहे हैं। इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दुनियाभर में बढ़ती एक नई महामारी को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। विशेषज्ञों ने कहा, हम सभी तकनीक से प्रेरित इस दुनिया में दिनभर किसी ने किसी तरह के स्क्रीन से चिपके रहते हैं। मोबाइल, टेलीविजन हो या लैपटॉप, इनके अधिक उपयोग के कारण हमारा स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है जो एक नई महामारी को जन्म दे सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, दुनियाभर में बहुत तेजी से आंखों से संबंधित समस्या, विशेषतौर पर मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यह बच्चों में सबसे ज्यादा रिपोर्ट की जा रही समस्या है जिसके कारण कम दिखाई देने और समय के साथ अंधेपन का खतरा बढ़ जाता है। अगर समय रहते इसे नियंत्रित करने के लिए प्रयास न किए गए तो अगले एक-दो दशक में वयस्कों की बड़ी आबादी मायोपिया से पीड़ित हो सकती है। ये निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है। मायोपिया के बढ़ते मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बचपन में मायोपिया का निदान होने से जीवन की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। यह प्रवृत्ति चिंताजनक है, यह सिर्फ चश्मे पर निर्भरता की समस्या नहीं है बल्कि इसके कारण ग्लूकोमा और रेटिनल डिटेचमेंट जैसी आंखों की अन्य बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। कुछ अध्ययनों का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक दुनिया की लगभग आधी आबादी मायोपिया से पीड़ित हो सकती है। भारत में, बच्चों में मायोपिया की घटना लगातार बढ़ रही है। कोरोना महामारी ने इसके जोखिमों को और भी बढ़ा दिया है। मायोपिया के कारण मानसिक रोगों का खतरा नेत्र रोग विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर मामलों में मायोपिया का निदान बचपन में ही किया जाता है। ये समस्या सिर्फ आंखों तक ही सीमित नही हैं, इसके कारण मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर होने का खतरा रहता है। मायोपिया के कारण बच्चों की विशिष्ट खेलों और अन्य गतिविधियों में भागीदारी कम हो जाती है। बाहर खेल-कूद में कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है। मायोपिया के शिकार लोगों में भविष्य में स्ट्रेस-एंग्जाइटी और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कई तरह की अन्य विकारों का जोखिम अधिक हो सकता है। बच्चों में मायोपिया की बढ़ती समस्या ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में बच्चों में मायोपिया की बढ़ती समस्या को लेकर अलर्ट किया गया है। 50 देशों में पांच मिलियन (50 लाख) से अधिक बच्चों और किशोरों पर किए गए शोध में पाया गया है कि एशियाई देशों में इसका जोखिम सबसे अधिक देखा जा रहा है। जापान में 85% और दक्षिण कोरिया में 73% बच्चे निकट दृष्टि दोष से ग्रस्त हैं, जबकि चीन और रूस में 40% से अधिक बच्चे इससे प्रभावित हैं। मायोपिया के बारे में जानिए नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) आंखों की गंभीर समस्या है, जिसमें रोगी को अपने निकट की वस्तुएं तो स्पष्ट रूप से देखती हैं, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई पड़ती हैं। इसमें आंख का आकार बदल जाता है। सामान्यतौर पर आंख की सुरक्षात्मक बाहरी परत कॉर्निया के बड़े हो जाने के कारण ऐसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में आंख में प्रवेश करने वाला प्रकाश ठीक से फोकस नहीं कर पाता है। क्यों बढ़ रहे हैं मायोपिया के मामले ‘द लैंसेट डिजिटल हेल्थ जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया था कि स्क्रीन टाइम ने बच्चों और युवाओं में मायोपिया के जोखिम को पहले की तुलना में काफी बढ़ा दिया है। स्मार्ट डिवाइस की स्क्रीन पर बहुत अधिक समय बिताना मायोपिया के खतरे को 30 फीसदी तक बढ़ा देता है। इसके साथ ही कंप्यूटर के अत्यधिक उपयोग के कारण यह जोखिम बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा कोरोना महामारी की नकारात्मक स्थितियों जैसे लोगों को ज्यादा से ज्यादा समय घरों में बीतना, बाहर खेलकूद में कमी और ऑनलाइन क्लासेज के कारण आंखों से संबधित इस रोग के मामले और भी बढ़ गए हैं। 

सिंधू और सेन का फिनलैंड के वांता में हुए आर्कटिक ओपन में प्रदर्शन औसत रहा

ओडेन्से  भारतीय बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधू और लक्ष्य सेन मंगलवार से यहां शुरू हो रहे 850000 डॉलर ईनामी राशि के डेनमार्क ओपन सुपर 750 टूर्नामेंट के जरिये फॉर्म में वापसी की कोशिश करेंगे। दोनों खिलाड़ियों का पिछले सप्ताह फिनलैंड के वांता में हुए आर्कटिक ओपन में प्रदर्शन औसत रहा। पूर्व विश्व चैम्पियन सिंधू पहले ही दौर में बाहर हो गई जबकि 2021 विश्व चैम्पियनशिप कांस्य पदक विजेता सेन दूसरे दौर में हार गए। पेरिस ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहे सेन को चीनी ताइपे के चोउ तियेन चेन ने हराया था। अब यहां उनका सामना पहले दौर में चीन के लू गुआंग झू से होगा जिनसे उनकी पहली ही टक्कर है। दूसरे दौर में वह इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी से टकरा सकते हैं। विश्व चैम्पियन थाईलैंड के कुंलावुत वितिदसर्न से क्वार्टर फाइनल में टक्कर हो सकती है। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधू को अपने प्रदर्शन में काफी सुधार करना होगा जो पहले दौर में कनाडा की मिशेले ली से हार गई थी। नये कोच अनूप श्रीधर और कोरिया के ली ह्यून इल के मार्गदर्शन में वह पहले दौर में चीनी ताइपै की पेइ यू पो से खेलेंगी। दूसरे दौर में उनका चीन की हान युइ से सामना हो सकता है। महिला वर्ग में फॉर्म में चल रही मालविका बंसोड़, आकर्षि कश्यप और उन्नति हुड्डा भी उतरेंगी। चीन ओपन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची बंसोड का सामना पहले दौर में वियतनाम की एंगुयेन टी लिन्ह से होगा जबकि कश्यप की टक्कर थाईलैंड की सुपनिदा केटथोंग से होगी। ओडिशा ओपन 2022 विजेता हुड्डा का सामना अमेरिका की लौरेन लाम से होगा। पुरूष युगल में भारत की कोई टीम नहीं है जबकि महिला युगल में त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद खेलेंगी। दोनों का सामना पांचवीं वरीयता प्राप्त मलेशिया की पीयर्ली तान और टी मुरलीधरन से होगा। स्वेतापर्णा और रितुपर्णा पांडा का सामना चीनी ताइपै की चांग चिंग हुइ और यांग चिंग तुंग से होगा। मिश्रित युगल में बी सुमित रेड्डी और सिक्की रेड्डी का सामना कनाडा के केविन ली और एलियाना झांग से होगा जबकि सतीश करूणाकरण और आद्या वरियाथ की टक्कर इंडोनेशिया के रेहान के और लीसा कुसुमवती से होगी।  

5जी केवल तेज इंटरनेट का मामला नहीं है, बल्कि यह स्मार्ट शहरों, उन्नत बुनियादी ढांचे और स्वायत्त नवाचारों के लिए आधार तैयार कर रहा है : मंत्री सिंधिया

नई दिल्ली  दूरसंचार क्षेत्र की 5जी तकनीक के कारण 2040 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 450 बिलियन डॉलर यानी करीब 37 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने  यह दावा किया। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार कार्यक्रमों में से एक वैश्विक मानक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “अकेले भारत में, 5जी से 2040 तक अर्थव्यवस्था में 450 बिलियन डॉलर का निवेश होने का अनुमान है।” मंत्री ने जोर देकर कहा कि 5जी केवल तेज इंटरनेट का मामला नहीं है, बल्कि यह स्मार्ट शहरों, उन्नत बुनियादी ढांचे और स्वायत्त नवाचारों के लिए आधार तैयार कर रहा है। सिंधिया ने आगे कहा कि 5जी पहले ही सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुका है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केवल 22 महीनों में 98 प्रतिशत जिलों और 80 प्रतिशत आबादी को इसने कवर कर लिया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की तकनीकी शक्ति क्षमता के साथ वैश्विक मानकों के अनुसार नवाचार में हमारे बदलाव के प्रयासों को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा, “हम स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कृषि व विनिर्माण के क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खोल रहे हैं।” मंत्री ने 5जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी तकनीकों की पूरी क्षमता को अनलॉक करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक मानक यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि ये तकनीकें सीमाओं के पार सामंजस्यपूर्ण ढंग से काम करें। उन्होंने कहा, “संवाद के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। 5जी का चमत्कार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की चमक और इंटरनेट ऑफ थिंग्स की उपयोगिता वैश्विक स्तर पर उद्योगों, समाजों और विनिर्माण प्रक्रियाओं और अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही हैं।” सिंधिया ने एआई और आईओटी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के बढ़ने की स्थिति में गोपनीयता, पूर्वाग्रह और पारदर्शिता से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए नैतिक विचारों और नियामक ढांचे के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचे का आह्वान किया कि भविष्य के नवाचार, जैसे कि आगामी 6G तकनीक, सभी को समान रूप से लाभान्वित करें और मौजूदा डिजिटल विभाजन को गहरा न करें। उन्होंने कहा, “आज हम एक नए तकनीकी युग के मुहाने पर खड़े हैं, मोबाइल नेटवर्क 6जी के दौर में प्रवेश करने वाला है, जहां संचार असीम हो जाएगा, जहां नवाचार की कोई सीमा नहीं होगी और मानवता द्वारा, परस्पर जुड़ाव हमारी साझा वैश्विक नियति की आधारशिला बन जाएगा।” सिंधिया ने वैश्विक समुदाय से भविष्य के तकनीकी परिदृश्य को परिभाषित करने वाले मानकों को स्थापित करने और साझेदारी को बढ़ावा देने में एक साथ काम करने का भी आग्रह किया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रौद्योगिकी का भलाई के लिए इस्तेमाल हो।

दिल्ली में ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग से कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार शहर में पांच जगहों पर ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर खोलने जा रही है। ये सेंटर नॉर्थ, नॉर्थवेस्ट, वेस्ट, साउथ और साउथ-ईस्ट दिल्ली में खुलेंगे। इससे कमर्शियल गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट ऑटोमेटेड तरीके से हो सकेगा। अभी सिर्फ झुलझुली में एक ही ऑटोमेटेड सेंटर है। इससे सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है। बुराड़ी में मैन्युअल टेस्टिंग होती है। नए सेंटर खुलने से लाइट और हैवी कमर्शियल गाड़ियों को फायदा होगा। अब इन गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट ऑटोमेटेड सेंटर पर ही कराना जरूरी कर दिया गया है। सुरक्षा के लिए अहम कदम ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने इन सेंटर्स को चलाने के लिए ऑपरेटर से एप्लीकेशन मांगे हैं। कोई भी व्यक्ति, कंपनी या संस्था इसके लिए आवेदन कर सकती है। एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि ऑटोमेटेड सेंटर से फिटनेस सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए सिस्टम में हेरफेर की आशंका कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए यह एक अहम कदम है क्योंकि सड़कों पर चलने वाले अनफिट वाहन हादसों का एक बड़ा कारण हैं। ज्यादा सख्त और पारदर्शी फिटनेस टेस्टिंग प्रक्रिया लागू करके सरकार सड़कों पर अनफिट वाहनों की संख्या कम करना चाहती है। हाल के दिनों में भारत में अनफिट कमर्शियल वाहनों से होने वाले हादसों में बढ़ोतरी हुई है और वित्तीय वर्ष 2022-23 में हुए 1.9 लाख सड़क हादसों में से लगभग 40% ऐसे वाहनों की वजह से हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि कॉन्सेसनेयर को ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को गाड़ियों के नंबरों के साथ किए गए टेस्ट की संख्या भी बतानी होगी। उन्होंने कहा कि ऑपरेटर को सेंटर पर निरीक्षण के दौरान गाड़ी का 30 सेकंड का वीडियो भी देना होगा। कैसे होगा पूरा काम, हर एक बात जानिए डिपार्टमेंट की ओर से जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) में लिखा है कि प्रत्येक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर परिवहन विभाग, GNCTD द्वारा एक मोटर वाहन निरीक्षक या समान योग्यता वाले सरकारी अधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया जा सकता है, जो पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार होंगे। हाल ही में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की मान्यता, विनियमन और नियंत्रण, ऑटोमेटेड उपकरणों के माध्यम से वाहनों की फिटनेस के परीक्षण और ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रियाओं को अधिसूचित किया है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चयनित आवेदक अनुबंध अवधि के दौरान केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार वाहन फिटनेस परीक्षण करने की निर्दिष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए नागरिक से वाहन निरीक्षण शुल्क वसूल करेगा, एकत्र करेगा और विनियोजित करेगा। अधिकारी ने आगाह किया कि विभाग को गलत सूचना देने या भारत सरकार और समय-समय पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित नीति, नियमों, दिशानिर्देशों में निर्देशों का पालन न करने का कोई भी प्रयास समाप्ति और अनुबंध या लाइसेंस को रद्द करने का आधार हो सकता है। किसी भी एकल आवेदक को अधिकतम दो ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन क्षेत्रों से सम्मानित किया जा सकता है।  

अब प्रदेशभर के अस्पतालों में ऐसी मशीनों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा, जो धूल खा रही

भोपाल मध्य प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में ऐसी सैकड़ों मशीनें हैं, जिनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ये मशीनें कमरों में पड़ी धूल खा रही हैं। कई जगह वजह यह बताई जा रही है कि नया बजट मिलने के कारण नई मशीन खरीद ली गई है और अच्छी-भली मशीन को पुरानी बताकर उसे बंद कर दिया गया। इस स्थिति को देखते हुए अब प्रदेशभर के अस्पतालों में ऐसी मशीनों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। यानी उद्देश्य यह कि जिन अस्पतालों में इनकी जरूरत है, वहां स्थानांतरित किया जाएगा। अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से मांगी मशीनों की जानकारी भोपाल से चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों को पत्र भेजकर अस्पतालों में उपलब्ध तथा काम नहीं आ रहीं सभी मशीनों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि किन मशीनों की कहां आवश्यकता है। छोटे शहरों के अस्पतालों में काम आ सकेंगी ये मशीनें यह जानकारी मिलने के बाद जहां मशीनें बेकार पड़ी हैं, उन्हें वहां भेजा जाएगा, जहां उसकी आवश्यकता है। इससे प्रदेश के बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में धूल खा रही मशीनें छोटे शहरों के अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में काम आ सकेंगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि मशीनों को संचालित करने के लिए जो भी उपकरण लगते हैं, उन्हें पहले से ही खरीद लें ताकि मरीजों को असुविधाओं का सामना न करना पड़े। साथ ही डॉक्टरों के लिए निर्देश हैं कि सीटी स्कैन और एमआरआई के प्रिस्क्रिप्शन स्पष्ट लिखे जाएं। कई अस्पतालों में मशीनों की आवश्यकता मध्य प्रदेश के कई अस्पतालों में मशीनों की आवश्यकता है। खासतौर पर जो नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं, वह कम संसाधनों के बीच संचालित हो रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि कई छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों को महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों की आवश्यकता है। बजट की कमी के कारण ग्रामीण अस्पताल नहीं खरीद पा रहे मशीन बजट की कमी के चलते ग्रामीण अस्पताल इन्हें खरीद नहीं पा रहे हैं। ऐसे में बड़े शहरों के अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में काम नहीं आ रहीं मशीनों को वहां स्थानांतरित किया जाएगा, जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे उन क्षेत्रों के मरीजों को सुविधाएं मिलने लगेंगी। अभी सुविधा के अभाव में कई जांचों के लिए मरीजों को बड़े शहरों में आना पड़ता है।

जलवायु परिवर्तन से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और अवशोषण की उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है : शोध

नई दिल्ली जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली अत्यधिक गर्मी और उमस अमेजन वर्षावन की ग्रीनहाउस गैस मीथेन को सोखने की क्षमता में 70 फीसदी कमी ला सकती है। ब्राजील स्थित साओ पाउलो विश्वविद्यालय के हालिया शोध में यह दावा किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि गर्म जलवायु के कारण दक्षिण अमेरिका के अमेजन वर्षावन के कुछ हिस्सों में अत्यधिक बारिश होने, जबकि कुछ में सूखा पड़ने का अनुमान है, जिससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और अवशोषण की उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। “पृथ्वी के फेफड़े” कहलाने वाले अमेजन वर्षावन का अधिकांश भाग ब्राजील में है, जबकि कुछ हिस्सा पेरू, कोलंबिया, इक्वाडोर और अन्य दक्षिण अमेरिकी देशों में पड़ता है। इन वर्षावनों को हवा में मौजूद ग्रीनहाउस गैसों को सोखने के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। शोधकर्ता ने कहा कि हालांकि, अमेजन वर्षावन का 20 फीसदी हिस्सा साल के लगभग छह महीने बाढ़ग्रस्त रहने के कारण मीथेन का उत्सर्जन करता है, जिससे ग्रीनहाउस गैसों को सोखने की उसकी क्षमता प्रभावित होती है। अध्ययन के नतीजे एक पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं। पूर्व में हुए कुछ अध्ययनों से पता चला है कि वैश्विक स्तर पर आर्द्रभूमि से होने वाले कुल मीथेन उत्सर्जन में अमेजन वर्षावन के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की लगभग 30 फीसदी हिस्सेदारी होती है। प्रमुख शोधकर्ता जूलिया गोंटिजो ने कहा, “भले ही यह पहले भी देखा चुका है कि वायु तापमान और मौसमी बाढ़ जैसे कारक ऐसे क्षेत्रों में मीथेन के प्रवाह पर असर डालने वाले सूक्ष्मजीव समुदायों की आबादी को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन और अनुमानित चरम मौसम परिस्थितियों के संदर्भ में हमें क्या उम्मीद करनी चाहिए?” शोध के लिए शोधकर्ताओं ने अमेजन के दो बाढ़ग्रस्त क्षेत्र और ऊंचाई वाले एक वन क्षेत्र से मिट्टी के नमूने लिए, जो मीथेन को अवशोषित करने के लिए जाने जाते हैं। इन नमूनों को अत्यधिक तापमान (27 डिग्री सेल्सियस और 30 डिग्री सेल्सियस) और तेज उमस के संपर्क में रखा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ऊंचाई वाले वन क्षेत्र से प्राप्त मिट्टी के नमूनों में गर्म और शुष्क परिस्थितियों में मीथेन सोखने की क्षमता में 70 फीसदी की कमी आई, जबकि भारी वर्षा की स्थिति में मीथेन उत्पादन में वृद्धि हुई, क्योंकि मिट्टी अत्यधिक उमस को झेलने में सक्षम नहीं थी। उन्होंने कहा, “ऊंचाई वाले वन क्षेत्र में शुष्क परिस्थितियों में तापमान में वृद्धि के साथ (मीथेन) अवशोषण की क्षमता में औसतन 70 प्रतिशत की कमी देखी गई।” गोंजिटो के मुताबिक, इसका मतलब यह है कि बाढ़ क्षेत्र का माइक्रोबायोम (किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली सूक्ष्म जीवों की आबादी) खुद को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढाल सकता है, लेकिन ऊंचाई वाले वन क्षेत्रों का माइक्रोबायोम इसके प्रभावों के प्रति संवेदनशील है, जिससे भविष्य में अमेजन वर्षावन की ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और अवशोषण की क्षमता प्रभावित हो सकती है।    

साल में तीसरी बार होगा Nursing exam, अब सत्र 2022-2023 के छात्रों को मौका

जबलपुर नर्सिंग के पिछड़े सत्र को पटरी पर लाने के लिए मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय इस वर्ष तीसरी बार संबंधित संकाय की मुख्य परीक्षा कराएगा। सत्र 2020-21 और 2021-22 के बाद अब सत्र 2022-23 की परीक्षा होगी। ये सभी परीक्षाएं नर्सिंग प्रथम वर्ष की हैं। नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े की जांच एवं कार्यवाही में यह परीक्षाएं अटकी हुई थीं। सत्र 2022-23 की परीक्षा वर्षांत तक आयोजित की जाएगी। इसके लिए विश्वविद्यालय ने तैयारियां आरंभ कर दी है। संबंधित सत्र के नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए शीघ्र ही नामांकन प्रक्रिया होगी। नामांकन प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन कंपनी को व्यवस्था सुनिश्चित करने निर्देशित किया जा चुका है। संबंधित सत्र में स्नातक और स्नातकोत्तर नर्सिंग पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में 25 हजार विद्यार्थी हैं। इसी सप्ताह खुलेगा पोर्टल मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने सत्र 2022-23 में प्रवेशित छात्रों के लिए इस वर्ष अगस्त माह में नामांकन प्रक्रिया करने की योजना बनाई थी। तभी सत्र 2021-22 की नामांकन प्रक्रिया भी संचालित थी। इस वर्ष की तीन परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थी सत्र     विद्यार्थी     विद्यार्थी 2020-21     मई     30 हजार 2021-22     सितंबर     10 हजार 2022-23     दिसंबर     25 हजार दो सत्र की प्रक्रिया एक साथ होने के कारण समस्या हो सकती थी। सुचारु नामांकन के लिए तब प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। सत्र 2021-22 की परीक्षा गत माह हो चुकी है। इससे सत्र 2022-23 के नामांकन की बाधा दूर हो गई है। संबंधित सत्र के नामांकन के लिए इसी सप्ताह पोर्टल खोलने की तैयारी है। करीब 45 हजार आंसर शीट्स का मूल्यांकन मध्य प्रदेश में नर्सिंग की अब तक तीन परीक्षा हो चुकी हैं। इसके पहले 2019-2020 के थर्ड ईयर की रुकी हुई परीक्षा मई महीने में हुई थी। इधर मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय एमएससी, पीबीएससी और बीएससी परीक्षाओं के मूल्यांकन में जुट गया है। इन परीक्षाओं की करीब 45 हजार आंसर शीट्स का मूल्यांकन किया जाना है। मूल्यांकन कार्य कराया जा रहा है     नर्सिंग की आयोजित परीक्षाओं के परिणाम शीघ्र घोषित करने के प्रयास है। अभी मूल्यांकन कार्य कराया जा रहा है। सत्र 2022-23 की परीक्षा की योजना पर भी कार्य कर रहे है। – डॉ. सचिन कुचिया, परीक्षा नियंत्रक, मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय  

20 अक्टूबर करवा चौथ 80 साल बाद गजकेसरी योग में मानेगा

 हिंदू धर्म में करवा चौथ का विशेष महत्व है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत को कठोर व्रत में से एक माना जाता है, क्योंकि इसे निर्जला रखा जाता है। रात को चंद्रमा देखने के बाद ही व्रत खोलते हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर को रखा जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल करवा चौथ पर काफी दुर्लभ योग बन रहे हैं, जिससे कई राशियों की किस्मत चमक सकती है। बता दें कि अबकी बार करवा चौथ के दिन गजकेसरी, महालक्ष्मी के साथ शश, समसप्तक, बुधादित्य, जैसे राजयोगों का निर्माण हो रहा है। ऐसे में कुछ राशि के जातकों की किस्मत चमक सकती है। आइए जानते हैं करवा चौथ पर बन रहे शुभ योगों से किन राशियों की चमक सकती है किस्मत… ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अबकी बार सूर्य और बुध दोनों ही ग्रह शुक्र की राशि तुला में है। ऐसे में बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही शुक्र के वृश्चिक राशि में आने वह गुरु के साथ मिलकर समसप्तक योग का निर्माण कर रहे हैं। इसके अलावा शनि अपनी राशि कुंभ में रहकर शश राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। इसके अलावा चंद्रमा वृषभ राशि में गुरु के साथ युति करके गजकेसरी और मिथुन राशि में मंगल के साथ युति करके गजकेसरी राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। वृषभ राशि (Vrishabha Zodiac) इस राशि के जातकों के लिए करवा चौथ का दिन काफी खास जाने वाला है। इस राशि के जातकों को हर क्षेत्र में सफलता के साथ-साथ धन लाभ हो सकता है। लंबे समय से रुके काम पूरे होने के साथ-साथ परिवार के साथ खुशनुमा वक्त बीतेगा। इस राशि के जातकों के ऊपर बुध, शुक्र, शनि के साथ-साथ मंगल ग्रह की विशेष कृपा हो सकती है। ऐसे में इस राशि के जातकों द्वारा किए गए कामों की सराहना हो सकती है। वाहन, संपत्ति आदि खरीदने की चाह पूरी हो सकती है। स्वास्थ्य अच्छा रहने वाला है। संतान की ओर से भी कोई खुशखबरी मिल सकती है। कन्या राशि (Kanya Zodiac) कन्या राशि के जातकों के लिए करवा चौथ का दिन लाभकारी सि्द्ध हो सकता है। इस राशि के जातकों हर क्षेत्र में सफलता हासिल हो सकती है। लंबे समय से चली रही पैसों की तंगी से निजात मिल सकता है। संतान की ओर से भी कोई खुशखबरी मिल सकती है। इसके साथ ही आपकी भी थोड़ी सी टेंशन कम होगी। वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहेगी। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। इसके साथ ही अविवाहितों को शादी का प्रस्ताव आ सकता है। सरकारी नौकरी पाने के भी चांसेस तेजी से बन रहे हैं। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। स्वास्थ्य ही अच्छा रहने वाला है। तुला राशि (Tula Zodiac) इस राशि के जातकों के लिए भी करवा चौथ काफी खुशियां लेकर आने वाला है। एकाग्रता में बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही बौद्धिक क्षमता अच्छे होने के कारण आप कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं। भविष्य के लिए लिया गया ये निर्णय आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। छात्रों के लिए भी ये अवधि लाभकारी सिद्ध हो सकती है। पढ़ाई में मन लगेगा। परिवार के साथ अच्छा वक्त बीतेगा। जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती है। कार्यस्थल पर वरिष्ठों और सहकर्मियों का साथ मिलेगा, जिससे आप अपने लक्ष्य को पाने में सफल हो सकते हैं।

16 करोड़ रुपये की लागत से ओंकारेश्वर में वॉटर टूरिज्म बढ़ाने की योजना, राजस्व में होगी वृद्धि

खंडवा टूरिज्म के लिहाज से बड़ी खबर है. मध्य प्रदेश टूरिज्म डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (MPTDC) बोट क्लबों सहित वॉटर टूरिज्म की उन सभी जगहों को विकसित कर रहा है, जहां टूरिस्ट को आकर्षित किया जा सकता है. इसी सिलसिले में कॉर्पोरेशन ने ओंकारेश्वर में वॉटर टूरिज्म बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसमें मिनी क्रूज, पैरासिलिंग और मैकेनिकल बोट चलाने की योजना बनाई जा रही है. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 16 करोड़ रुपये है. अधिकारी बताते हैं कि सरकार को वित्तीय वर्ष 2023-24 में बोट क्लब से 6 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है. इनके दोबारा बनने से राजस्व में वृद्धि हो सकती है. मध्य प्रदेश टूरिज्म डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (MPTDC) के अधिकारियों ने बताया कि हमने प्रदेश की कई जगहों पर नए बोट क्लबों की स्थापना के साथ-साथ पहले से स्थापित जगहों को और खूबसूरत बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. ताकि, टूरिस्ट को प्रदेश के टूरिज्म स्पॉट पर और ज्यादा सुविधाएं मिल सकें. हमने नए वॉटर टूरिज्म के नए केंद्रों को स्थापित करने का भी प्रस्ताव दिया है. गौरतलब है कि, ओंकारेश्वर में पहले से ही छोटा सा बोट क्लब है. इसमें चार स्पीड बोट चलाई जाती हैं. इन्हें एक साल पहले यहां लाया गया था. अब इसे और विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है. यह है पूरा प्रस्ताव अधिकारी बताते हैं कि ओंकारेश्वर में हमने पैरासेलिंग बोट चलाने का प्रस्ताव दिया है. इससे एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए नया केंद्र होगा. भोपाल से प्रकाशित अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि टूरिस्ट को यहां तक लाने के लिए कई सुविधाओं और गतिविधियों की योजना बनाई जा रही है. हम यह भी कोशिश कर रहे हैं कि डीजल की जगह इलेक्ट्रिकल-सोलर ऊर्जा की इस्तेमाल किया जाए. दूसरे डैम भी होंगे विकसित इसके अलावा कॉर्पोरेशन गंभीर डैम और सरसी बोट को भी विकसित किया जाएगा. उज्जैन के गंभीर डैम में भी मिनी क्रूज, इलैक्ट्रिक बोट और शिकारा चलाया जाएगा. इंदौर क्षेत्र में ओंकारेश्वर, सैलानी, गांधी सागर और चोरल में टूरिज्म एक्टिविटी होती हैं. प्रदेश में फिलहाल 15 बोट क्लब संचालित हैं.

जबलपुर केंद्रीय जेल में हाथ धुलाई दिवस के मौके पर स्वच्छता के प्रति जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

Awareness program towards cleanliness completed on the occasion of Hand Washing Day in Jabalpur Central Jail जितेन्द्र श्रीवास्तव (विशेष संवाददाता) जबलपुर ! नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल जबलपुर में 15 अक्टूबर 2024 को अंतर्राष्ट्रीय हाथ धुलाई दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन जेल अधीक्षक श्री अखिलेश तोमर जी के मार्गदर्शन में किया गया। पूर्वी खंड के सभाकक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में बंदियों ने “अंतर्राष्ट्रीय हाथ धुलाई दिवस” के महत्व को समझाते हुए अस्वच्छ हाथों से होने वाले विभिन्न रोगों के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। कार्यक्रम के दौरान बंदियों ने स्वरचित निबंध, लेख, कविता और लघु नाटिका प्रस्तुत की। इसके साथ ही, 101 बंदियों ने सही तरीके से हाथ धोकर “हाथों को स्वच्छ रखने” का संदेश भी दिया। कार्यक्रम का संयोजन एवं मंच संचालन कल्याण अधिकारी श्रीमती सरिता घारू द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि, “रोजमर्रा के जीवन में जाने-अनजाने हमारे हाथ कई वस्तुओं एवं व्यक्तियों के संपर्क में आते हैं, जिससे वे अदृश्य रोगाणुओं से ग्रसित हो जाते हैं। इसलिए, विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव हेतु समय-समय पर सही तरीके से हाथ धोना अत्यंत आवश्यक है।” इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री अखिलेश तोमर, उप जेल अधीक्षक श्री मदन कमलेश, सहायक जेल अधीक्षक श्री प्रशांत चौहान, और अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम ने सभी उपस्थित लोगों को हाथ धोने के महत्व के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह आयोजन न केवल बंदियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास था, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी दी।

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