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अधिक पानी पीना हृदय रोगियों के लिए हो सकता है खतरनाक

दिल फेल होना पर शारीरिक उपचार की जरूरत के अनुसार दिल को पंप नहीं कर पाता है, कारण से रोगी को थकान, सांस लेने में तकलीफ या थकान होना, सांस लेने में तकलीफ, खांसी या घरघराहट, दिल की दृष्टि तेज या उल्टी होना और मिटली जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं। कोरोनरी हृदय रोग, हाइपरटेंशन, मायोकार्डियल इन्फार्क्शन, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, दिल में सूजन या हृदय की तीव्रता की तीव्रता और हृदय को हार्ट फेल का मुख्य कारण माना जाता है। हार्ट फेलियर का इलाज और इलाज आसान हो गया है। एलवीडी (लेफ्ट वेंट्रिकुलर एसिस्टेड) ​​थेरेपी से हार्ट फेलियर का इलाज होता है। लेफ्ट वेंट्रिकुलर एसिस्टेड लिमिटेड एक मेडिकल मेडिकल है, जिसका उपयोग हार्ट फेलियर की खोज के लिए किया जाता है। यह हृदय के बाईं ओर मौजूद वेंट्रिकल से लेकर पूरे शरीर में रक्त पंप करता है। इस थेरेपी ने लाभार्थियों की जीविका की गुणवत्ता और उनके जीवित रहने की संभावनाओं को बढ़ाने का काम किया है। व्युत्पत्ति और लाइफ स्टाइल जरूरी है तो साइंस ने हार्ट फेलियर के पैमाने और कमाई को आसान बना दिया है। लेकिन पोषण और जीवविज्ञान पर ध्यान देने से इसका प्रभाव कम हो सकता है। दिल्ली के शालीमार बाग में स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के तंबाकूजी और सीनियर डॉ. नित्यानंद त्रिपल के अनुसार हार्ट फेलियर के शिष्यों को दर्शन और जीवन शैली का ध्यान रखना चाहिए। कम नमक के घटक में प्रचुर मात्रा में नमक लेने के कारण शरीर में पानी जमा हो सकता है, जिससे सूजन, सांस फूलने जैसे लक्षण पैदा होते हैं। इसलिए हार्ट फेलियर के मरीज को प्रतिदिन 1,500 से 2,000 तक का ऑक्सीजन का सेवन नहीं करना चाहिए। तरल पदार्थ का कम सेवन हार्ट फेलियर के कारण शरीर में पानी जमा हो सकता है। इससे बचने के लिए डॉक्टर हर रोज 1-1.5 लीटर से अधिक तंबाकू का सेवन न करने की सलाह देते हैं। इसमें पानी, साबूदाना, चॉकलेट आदि सभी ड्रिंक शामिल हैं। वैज्ञानिक और वैज्ञानिक साइंटिस्ट दिल के लिए स्वास्थ्यवर्धक है। इसलिए खाने में फल, स्ट्रॉबेरी, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और स्ट्रेंथ फल जैसे नट्स, सीड्स और मछलियों का सेवन करें। इनका कागजात बनाना भी जरूरी है। लाइफ़स्टाइल में वाॅलिंग, कॉमर्स और फ़्लोरिडा एरोबिक्स से हार्ट मसल्स मजबूत होते हैं। पशु चिकित्सक नियंत्रण से दिल पर बैकअप वाला कम होता है। क्रोनिक स्ट्रेस से हार्ट फेलियर के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए ध्यान, प्राणायाम और योग जैसे तकनीशियनों की मदद लें। धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।

हिमाचल प्रदेश में मुस्लिम पक्ष को फिलहाल के लिए राहत, नहीं गिराया जाएगा मंडी में मस्जिद का अवैध ढांचा

 मंडी हिमाचल प्रदेश के मंडी में प्रधान सचिव टीसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) ने अवैध मस्जिद के ढांचे को गिराने और पुरानी स्थिति में बहाल करने के आदेशों पर रोक लगा दी है. इस मामले में अगली सुनवाई प्रधान सचिव टीसीपी के कोर्ट में ही होगी. इस दौरान नगर निगम भी ऑफिस रिकार्ड के साथ अपना पक्ष रखा रखेगा. इस मामले की अगली सुनवाई आने वाली 20 अक्तूबर को होगी. बता दें कि हिंदू संगठनों द्वारा 10 सिंतबर को नगर निगम के बाहर और 13 सिंतबर को शहर में प्रदर्शन किया गया था. इस दौरान शहर के जेल रोड स्थित अवैध मस्जिद को गिराने की मांग उठाई गई थी. इसी दिन निगम कोर्ट ने मस्जिद के ढांचे को अवैध और टीसीपी नियमों के विरुद्ध बताते हुए गिराने का आदेश दिया था. 20 सितंबर को नगर निगम ने इस मस्जिद के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए थे. आयुक्त कोर्ट ने इसके लिए मस्जिद संचालन समिति को एक महीने का समय दिया था. मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है प्रधान सचिव टीसीपी के समक्ष सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अवैध निर्माण की बात को नकारा. मुस्लिम पक्ष के अनुसार 2013 में हुई भारी बारिश के कारण मस्जिद का मुख्य और बड़ा हिस्सा गिर गया था. जिसे अगस्त 2023 को फिर से बनाया गया है. मुस्लिम पक्ष के अनुसार आयुक्त कोर्ट में उनका पक्ष सही तरह से नहीं सुना गया. हिंदू संगठन भी कोर्ट जाने की तैयारी में उधर, इस फैसले के आने के बाद शिकायतकर्ता पक्ष और अन्य हिंदू संगठन अब प्रदेश उच्च न्यायालय जाने की तैयारी में हैं. इस बाबत जल्द ही हिंदू संगठनों की मंडी में एक अहम बैठक होगी.

मध्य प्रदेश उपचुनाव: 13 नवंबर को 2 विधानसभा सीटों पर मतदान, EC ने किया शेड्यूल जारी

Madhya Pradesh by-election: Voting on 2 assembly seats on November 13, EC released schedule MP Bypoll 2024 Schedule: मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान हो गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार (15 अक्टूबर) को प्रेस कांफ्रेंस कर चुनाव के शेड्यूल की जानकारी विस्तार से दी है. मध्य प्रदेश की बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होंगे और 23 नवंबर को मतगणना के बाद नतीजे सामने आ जाएंगे. मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2024 का शेड्यूलचुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए शेड्यूल के मुताबिक, नोटिफिकेशन जारी करने की तारीख 10 अक्टूबर 2024 होगीनामांकन भरने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर 2024 होगीनामांकन पत्रों की जांच 28 अक्टूबर 2024 को होगीनाम वापस लेने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर तक होगीमतदान की तारीख 13 नवंबर 2024 होगीमतगणना 23 नवंबर 2024 को होगी इन वजहों से खाली हुईं बुधनी और विजयपुर सीटेंसीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट और श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं. बुधनी सीट पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक विधायक रहे. इस बार के लोकसभा चुनाव में विदिशा से सांसद चुने जाने के बाद शिवराज सिंह को केंद्रीय मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली और इसी के साथ बुधनी सीट खाली हो गई. वहीं, विजयपुर विधानसभा सीट रामनिवास रावत के कांग्रेस छोड़ने के बाद से खाली है. रामनिवास रावत अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं. ऐसे में बीजेपी उन्हें ही इस सीट से फिर चुनाव में उतार सकती है. https://www.facebook.com/share/uhUckjZ3M64hNZUq बीजेपी और कांग्रेस की ओर से अभी बुधनी और विजयपुर सीट पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं किया गया है. हालांकि, बीजेपी नेताओं की मांग है कि बुधनी से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह को टिकट दिया जाए. वहीं, विजयपुर सीट से रामनिवास रावत का टिकट लगभग फाइनल माना जा रहा है. वहीं, कांग्रेस में अभी नामों पर विचार मंथन चल रहा है. माना जा रहा है कि एक-दो दिन में दोनों ही पार्टियां प्रत्याशियों की घोषणा कर देंगी. . राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन स्थित प्लेनरी हॉल में दोपहर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) के दौरान उन्होंने यह भी बताया, “महाराष्ट्र में एक चरण में ही चुनाव होगा. 20 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 23 नवंबर, 2024 को मतगणना की जाएगी. झारखंड में दो चरण में मतदान होगा. पहले चरण के तहत 13 नवंबर को तो दूसरे फेज में 20 नवंबर, 2024 को वोट डाले जाएंगे और वोटों की गिनती 23 नवंबर को की जाएगी.” उप-चुनावों का कार्यक्रम कुछ इस तरह रहेगा सीईसी राजीव कुमार ने आगे उप-चुनावों के बारे में भी जानकारी दी और कहा, “उत्तर प्रदेश (यूपी) की 10 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होगा. केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर 13 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और उत्तराखंड में 20 नवंबर को बाई-इलेक्शन होगा.”

कॉमेडियन एक्टर अतुल परचुरे का निधन, लंबे समय से कैंसर से थे पीड़ित

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री से एक शॉकिंग खबर आ रही हैं. दिग्गज मराठी एक्टर-कॉमेडियन अतुल परचुरे का निधन हो गया है. उन्होंने 57 की उम्र में आखिरी सांस ली. मराठी के साथ-साथ हिंदी फिल्मों और टीवी सीरियल्स में काम करने वाले अतुल परचुरे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे. हालांकि कैंसर पर काबू पाने के बाद उन्होंने फिर से जोश के साथ काम करना शुरू किया था और कई मराठी शोज में अपनी भूमिकाओं से दर्शकों के दिलों पर राज किया. लेकिन उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही थी. वो कैंसर के बाद होने वाली शारीरिक समस्याओं और कमजोरी से जूझ रहे थे. खबरों की मानें तो उन्हें फिर से कैंसर की बीमारी ने घेर लिया था. अतुल अपने पीछे मां, पत्नी और बेटी को छोड़ गए हैं. उनके अचानक इस दुनिया को अलविदा कर चले जाने से परिवार गमगीन है और फैंस के बीच मातम छा गया है. मराठी के साथ हिंदी सिनेमा का जाना माना चेहरा अतुल परचुरे के जाने से मराठी के साथ-साथ हिंदी फिल्म और टीवी इंडस्ट्री को भी एक गहरा झटका लगा है. वो कपिल शर्मा के साथ कॉमेडी नाइट्स शो पर भी अपनी कॉमेडी का तड़का लगा चुके हैं. इसके अलावा वो कॉमेडी सर्कस, यम हैं हम, आरके लक्ष्मण की दुनिया जैसे कई हिट सीरियल्स कर चुके हैं. एक्टर ने हाल ही में अपने नए थियेटर प्ले सूर्याची पिल्लई की अनाउंसमेंट की थी. अतुल ने हिंदी सिनेमा में भी कई अहम किरदार निभाए थे. वो शाहरुख खान की बिल्लू, सलमान खान की पार्टनर, और अजय देवगन की ऑल द बेस्ट में भी अपनी कॉमिक टाइमिंग से हर किसी का दिल जीत चुके हैं. इसके अलावा अतुल ने क्योंकि, सलाम-ए-ईश्क, कलयुग, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, और खिचड़ी जैसी कई फिल्में की हैं. महाराष्ट्र सीएम ने जताया शोक महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने एक्टर अतुल परचुरे के निधन पर शोक जताया. सीएम ने मराठी में एक्टर के लिए अपनी फीलिंग्स बयां की और बताया कि वो एक्टिंग के कितने बड़े महारथी थे. सीएम ने लिखा- तेज तर्रार एक्टर की असमय विदाई- ”कभी दर्शकों को हंसा रहे हैं तो कभी भौंहें चढ़ा रहे हैं. हमेशा अंतर्मुखी रहने वाले क्लासिक अभिनेता अतुल परचुरे की असामयिक मृत्यु दुखद है. अतुल परचुरे ने अपने शानदार अभिनय करियर की शुरुआत बच्चों के थिएटर से की थी. उन्होंने नाटक, फिल्म और धारावाहिक तीनों ही क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी. चाहे वो तरूण तुर्क मातरे अरका, नाटीगोटी या पु जैसे नाटक हों. चाहे वो देशपांडे की मौखिक, गीतात्मक कॉमेडी हो, अतुल परचुरे ने अपने जन्मजात गुणों से इसमें गहराई जोड़ दी है. उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में भी बेहतरीन किरदार निभाए हैं. उनके जाने से मराठी ने एक कालजयी अभिनेता खो दिया है. इस नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती. परचुरे के हजारों प्रशंसकों में से एक के रूप में, मैं परिवार का दुख साझा करता हूं. भगवान उन्हें ये दुख सहने की शक्ति दे. राज्य सरकार की ओर से मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. ॐ शांति.” अमिताभ के हाथों मिला सम्मान अतुल परचुरे को हाल ही में मराठी सिनेमा में योगदान के लिए मास्टर दीनानाथ मंगेश्कर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था. खुद सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने उन्हें ये सम्मान दिया था. इसके बाद अतुल ने एक पोस्ट शेयर कर अपनी फीलिंग्स भी बयां की थी. एक्टर ने लिखा था- मंगेशकर परिवार के प्रशंसक के रूप में, ये मान्यता और प्यार पाने का सर्वोच्च रूप है. श्री अमिताभ बच्चन की उपस्थिति में इसे प्राप्त करना एक और सपना है जो कल रात सच होते हुए मैंने देखा. एक शानदार शाम और इस सम्मान के लिए धन्यवाद.  

इंदौर के आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिये पर्याप्त संख्या में बनाये जाएंगे अंडरपास और फ्लाय-ओवर मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विकास को नई गति देकर लिखा जाएगा नया अध्याय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में रचा गया विकास का स्वर्णिम इतिहास, मुख्यमंत्री ने एक साथ 222 करोड़ रुपये लागत के 4 फ्लाय-ओवर का किया लोकार्पण इंदौर के आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिये पर्याप्त संख्या में बनाये जाएंगे अंडरपास और फ्लाय-ओवर  मुख्यमंत्री डॉ. यादव संत सेवालाल के नाम पर होगा फूटी कोठी ओवर ब्रिज और चौराहा इंदौर इंदौर में आज स्वर्णिम इतिहास रचा गया। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ही दिन में एक साथ लगभग 222.25 करोड़ रुपये लागत के 4 फ्लाय-ओवर का लोकार्पण किया। यह पहली बार हो रहा है जब इंदौर में एक ही दिन में एक साथ 4 फ्लाय-ओवर का लोकार्पण हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फूटी कोठी (संत सेवालाल चौराहा) सहित भंवरकुंआ, खजराना और लवकुश चौराहे के फ्लाय-ओवर का लोकार्पण किया। चारों फ्लाय-ओवर इंदौर के आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाने में मददगार होंगे। फ्लाय-ओवर के प्रारंभ होने से इंदौर के लाखों नागरिकों को सुगम एवं निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलेगी। फूटी कोठी फ्लाय-ओवर का नाम प्रसिद्ध संत सेवालाल जी महाराज के नाम पर किया गया है। फ्लॉय-ओवर लोकार्पण अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और विधायक और पूर्व मंत्री सुउषा ठाकुर, महेन्द्र हार्डिया, रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, महेन्द्र हार्डिया और मनोज पटेल, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर,जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना मालवीय, पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे, गौरव रणदिवे, चिन्टू वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि विशेष रूप से मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फूटी कोठी (संत सेवालाल चौरहा) में आयोजित फ्लाय-ओवर के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास को नई गति देकर विकास का नया अध्याय लिखा जाएगा। विकास के सभी अवरोधों को हटाकर प्रदेश के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर का चहुँमुखी विकास और सुरक्षित यातायात हमारी प्राथमिकता है। हमारा प्रयास है कि इंदौर के किसी भी चौराहे पर यातायात बाधित न हो और वाहन चालकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने इंदौर की यातायात संबंधी परेशानियों के निराकरण के लिए कहा कि यहाँ जितने भी अंडरपास/ओवर ब्रिज की आवश्यकता होगी, वह सभी बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इंदौर में 400 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज लाइन का कार्य करने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नशे का अवैध कारोबार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नशे के अवैध कारोबार करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मनुष्यों की सोच जहां समाप्त होती है, वहीं से संतों की सोच शुरू होती है। मनुष्यों एवं देवताओं के बीच संत सेतु के रूप में होते हैं। समाज के किसी भी संत के योगदान को भुलाया नहीं जाएगा। उन्होंने प्रदेश में गायों के संरक्षण, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा गौ-शालाओं के संचालन के संबंध में राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि फूटी कोठी चौराहे का नाम संत सेवालाल चौराहा होगा। इंदौर के चौराहों पर आवश्यकतानुसार अंडर-पास और ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। आगामी 3 वर्षों में एक कार्य-योजना बनाकर लगभग 20 से 25 अंडरपास/ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। इंदौर शहर में यातायात सुधार के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने मादक पदार्थों के अवैध कारोबार करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त समाज बनाना हमारा संकल्प है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने लोकार्पित हुए 4 ओवर ब्रिज के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को संत गोपाल चैतन्य महाराज ने भी संबोधित किया। एकलव्य सिंह गौड़ ने आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने इंदौर भ्रमण के दौरान सबसे पहले फूटी कोठी फ्लाय-ओवर का लोकार्पण किया। यह फ्लाय-ओवर 610 मीटर लंबा है। इसकी चौड़ाई 24 मीटर एवं 6 लेन है। इसके निर्माण पर 57.70 करोड़ रूपये लागत आयी है। इसी तरह उन्होंने भवर कुआं के फ्लाय-ओवर का लोकार्पण भी किया। भंवरकुंआ में 625 मीटर लंबे और 24 मीटर चौड़ाई के 6 लेन फ्लाय-ओवर का निर्माण 55.77 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है। इसी तरह लवकुश चौराहा और खजराना चौराहा के फ्लाय-ओवर की एक-एक भुजा का लोकार्पण भी किया गया। खजराना के फ्लाय-ओवर की लागत 41.19 करोड़ और लवकुश चौराहे के फ्लाय-ओवर की लागत 66.88 करोड़ रूपये हैं। उक्त दोनों फ्लाय-ओवर भी 6 लेन हैं। इन दोनों फ्लाय-ओवर की दूसरी भुजाओं का कार्य भी लगभग 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। शेष कार्य भी जल्द ही पूरा हो जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौरी जायके का लिया स्वाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर भ्रमण के दौरान विजय नगर स्थित एक रेस्टॉरेंट पर रूके। यहाँ उन्होंने अपने मंत्री के साथी कैलाश विजयवर्गीय और तुलसीराम सिलावट सहित अन्य जन-प्रतिनिधियों के साथ इंदौरी जायके का स्वाद लिया। उन्होंने रेस्टॉरेंट में पानीपुरी, भजिये और छोले भटूरे भी खाये।  

DU के संविदा कर्मचारियों का मासिक वेतन 45,000 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये

नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) ने संविदा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना को मंजूरी दी है. यह महत्वपूर्ण निर्णय सोमवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई ईसी की 1272वीं बैठक में लिया गया. यह बैठक विश्वविद्यालय के कन्वेंशन हॉल में आयोजित की गई. बैठक की शुरुआत पद्म विभूषण रतन टाटा को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट के मौन से शुरू हुई. प्रो. सिंह ने बताया कि वित्त समिति की सिफारिशों के अनुसार, सभी कानूनी जटिलताओं पर व्यापक चर्चा के बाद ईपीएफ योजना को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने पुष्टि की कि यह योजना अक्टूबर 2024 से लागू की जाएगी. हर साल से 5% वेतन बढ़ेगा   दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता ने बैठक का एजेंडा प्रस्तुत किया, जिसमें 10 अक्टूबर को हुई शैक्षणिक परिषद (एसी) की सिफारिशों पर चर्चा शामिल थी. निर्णयों के बीच, ईसी ने पार्ट-टाइम मेडिकल ऑफिसर्स (जीडीएमओ) के संविदा शुल्क में वृद्धि को मंजूरी दी. अब उनका मासिक वेतन 45,000 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये किया जाएगा, जो अक्टूबर 2024 से लागू होगा. इसके अलावा अप्रैल से हर साल 5% की वार्षिक वृद्धि भी दी जाएगी. रिटायर कर्मचार‍ियों को मिलेगा ये फायदा ईसी ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए वित्त समिति की सिफारिशों के अनुसार एक सैद्धांतिक वेतन वृद्धि को भी मंजूरी दी. इसके अलावा, राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु की स्थिति में पुराने पेंशन योजना के लाभ प्राप्त करने के लिए जारी कार्यालय ज्ञापन को भी अनुमोदित किया गया. आगे, परिषद ने मौरिस नगर पुलिस स्टेशन के लिए दी गई भूमि के पट्टे को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी. एक और प्रमुख निर्णय में, उच्च शिक्षा सचिव को कार्यकारी परिषद का सदस्य बनाने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए एक समिति गठित की गई है, जो अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेगी. एकेडमिक प्राेग्राम्स भी बढ़ाए गए    शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में, ईसी ने रामजस कॉलेज, हंसराज कॉलेज और राम लाल आनंद कॉलेज में पूर्वी एशियाई भाषाओं के पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी, जिसमें कोरियाई, चीनी और जापानी भाषाओं के कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके अलावा, ईसी ने विश्वविद्यालय कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज में मेडिकल प्रयोगशाला विज्ञान (बीएमएलएस) कोर्स और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक और नवजात एनेस्थीसिया में डीएम कोर्स को मंजूरी दी. बैठक के समापन पर, विश्वविद्यालय की 2024-2047 की रणनीतिक योजना और संस्थागत विकास योजना (आईडीपी) के विकास के लिए कुलपति को अधिकृत करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया.  

उभरते हुए वेडिंग और MICE डेस्टिनेशन के रूप में बना रहा पहचान

भोपाल प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रोमांचक और साहसिक अनुभव का संगम “गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट” के तीसरे संस्करण की शुरुआत मंदसौर में हुई। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड, शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मंदसौर में गांधीसागर के बैकवाटर्स किनारे स्थापित गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट रोमांच, मनोरंजन और सांस्कृतिक अनुभवों का एक अद्भुत संगम होने के साथ साथ, उभरता हुआ MICE और वेडिंग डेस्टिनेशन भी है। ऑल वेदर टेंट सिटी में लग्जूरियस स्टे के साथ पर्यटक कई रोमांचक गतिविधियों जैसे हॉट एयर बैलूनिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्कीइंग, कयाकिंग, मोटर बोटिंग का आनंद ले सकेंगे। गांधीसगर फॉरेस्ट रिट्रीट की शुरुआत रंगारंग लोकगीत लोकनृत्य के साथ हुईं। कार्यक्रम के अंत में नयासा म्यूजिक बैंड की परफॉर्मेंस भी हुई। अपने अनोखे और अद्वितीय स्वरूप में गांधी सागर अब वेडिंग और MICE डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बना रहा है। पर्यटकों के लिए प्राकृतिक सौन्दर्य, रोमांचक गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का यह बेमिसाल संयोजन है। इच्छुक पर्यटक 07808780899 पर संपर्क कर बुकिंग संबंधी डिटेल्स जान सकते है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा नए टूरिज्म उत्पाद ऑफबीट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित और प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसमें चंदेरी, गांधी सागर फॉरेस्ट रिट्वीट और हनुवंतिया टेंट सिटी प्रमुख रूप से पर्यटन की अधोसंरचना के विकास के साथ-साथ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल दे रहा है।     

मंत्री तोमर ने उपनगर ग्वालियर के विभिन्न बाजारों व बस्तियों में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया

ऊर्जा मंत्री तोमर ने उपनगर ग्वालियर में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का लिया जायजा मंत्री तोमर ने फावड़ा लेकर राजामंडी क्षेत्र में साफ-सफाई कर आम जनता को दिया स्वच्छता का संदेश मंत्री तोमर ने उपनगर ग्वालियर के विभिन्न बाजारों व बस्तियों में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया ग्वालियर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने उपनगर ग्वालियर के विभिन्न बाजारों व बस्तियों में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी न हो। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय निवासियों से रू-ब-रू होकर उनकी समस्यायें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को निराकरण के निर्देश दिए। साथ ही लोगों से साफ-सफाई के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उपनगर ग्वालियर की राजा मंडी बस्ती से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भ्रमण प्रारंभ किया। इस दौरान उन्हें गंदगी मिलने पर नाराजगी व्यक्त की तथा स्वयं ही फावड़ा मंगा कर नाली की सफाई की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया क्षेत्र में प्रतिदिन साफ-सफाई समय पर हो। कहीं भी कचरा इकठ्ठा नहीं हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही लोगों से कहा कि वे स्वच्छता को लेकर सजग रहें। ऊर्जा मंत्री तोमर ने राजा मंडी से किला गेट, गल्ला मंडी, कोटा वाला मोहल्ला, रामटापुरा, गुदड़ी, किलामेट होते हुए, बाबा कपूर की दरगाह, काशी नरेश की गली, मंगलेश्वर रोड, सुभाष विद्यालय होते हुए घास मंडी चौराहा, गोलंदाज घंटाघर, डोडापुर तिराहा, मिर्जापुर होते हुए शील नगर पहुँचे। इन क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के बाद उन्होंने शीलनगर के हनुमान जी मंदिर पर रात्रि विश्राम भी किया। भ्रमण के दौरान ऊर्जा मंत्री तोमर ने विद्युत, सीवर, साफ सफाई आदि सहित अन्य बुनियादी समस्याओं का निरीक्षण किया। उन्होंने भ्रमण के दौरान एक बुजुर्ग महिला की वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत करने के निर्देश मौके पर मौजूद अधिकारियों को दिए। उन्होंने रमटापुरा एवं गुदड़ी में गंदगी मिलने पर काफी नाराजगी व्यक्त की। भ्रमण के दौरान क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।  

अमेज़न सेल 2024: बेस्ट नेकबैंड ब्लूटूथ इयरफ़ोन पर 80% तक की छूट

Amazon ग्रेट इंडेन फेस्टिवल सेल 2024 से आज हम आपके लिए हैं शानदार नेकबैंड ईयरफोन की शानदार रेंज की जानकारी। ये सभी बेस्ट नेकबैंड ईयरफोन्स अलग-अलग आर्किटेक्चर के साथ आ रहे हैं। इन डिस्प्ले नेकबैंड में हाई साउंड के क्वालिटी के साथ ही डीप बेस भी है, जिससे आपका म्यूजिक और अन्य एंटरटेनमेंट का एक्सपीरियंस भी कई गुना बेहतर हो सकता है। इन नेकबैंड में 60 घंटे तक की प्लेटाइम भी देखी जा सकती है, जिसे आप देर तक इस्तेमाल कर सकते हैं। Amazon की सबसे बड़ी Sale में इन कास्टाल नेकबैंड पर 77% तक की भारी छूट भी मिल रही है। यदि आप बचत वाली इस डील का फ़ायदा उठाना चाहते हैं, तो इस लेख में मिल रही सूची आपके लिए काफी बढ़िया हो सकती है। ये सभी नेकबैंड टॉप नेटवर्क और काफी बेस्ट माने जाते हैं। वनप्लस बुलेट्स Z2 ब्लूटूथ वायरलेस इन ईयर ईयरफोन्स: इस दिलचस्प वाले वनप्लस बुलेट्स Z2 नेकबैंड का डिजाइन एर्गोनोमिक है। इस साल में नेकबैंड की शानदार क्वालिटी साउंड और बॉम्बास्टिक बेस भी काफी दमदार है। यह नेकबैंड 12.4mm के ड्राइवर के साथ आ रहा है। इसमें कुल 30 तक का प्लेटाइम भी है। सिर्फ 10 मिनट तक चार्ज करके आप इस नेकबैंड को 20 घंटे तक इस्तेमाल कर सकते हैं। यह अमैसिलिव रंग संयोजन में भी उपलब्ध है। boAt Rockerz 210 ANC ब्लूटूथ इन ईयर नेकबैंड: यह टॉप डेमोक्रेसी रेटिंग वाला काफी अच्छा boAt Rockerz 210 नेकबैंड है। यह नेकबैंड की खासियत भी सीमलेस है। इसका स्पैटिऑल ऑडियंस और कैमल का 30dB ANC सपोर्ट आपके एंड्रॉइड फ्री कॉलिंग के एक्सपीरियंस को काफी शानदार बना सकता है। यह 13mm ड्राइवर वाला काफी अच्छा नेकबैंड है। इस नेकबैंड में ड्यूल पेअरिंग और फास्ट पेयर का सपोर्ट भी मिल रहा है। इस नेकबैंड की मदद से आप गेमिंग का भी भरपूर मजा ले सकते हैं। रियलमी बड्स वायरलेस 3 नियो इन ईयर ब्लूटूथ नेकबैंड: यह टॉप ब्रांडेड और बेस्ट रियलमी बड्स वायरलेस नेकबैंड है। इस नेकबैंड में मिल रहा 13.4mm का ड्राइवर शानदार साउंड के साथ ही डीपी बेस क्वालिटी भी देता है। यह फास्ट बैकअप भी सपोर्ट करता है, जिससे आप इस नेकबैंड को कम समय में चार्ज करके देर तक इस्तेमाल भी कर सकते हैं। यह नेकबैंड म्यूजिक के साथ-साथ फ्री कॉल्स के लिए भी सुइटेबल माना जाता है। इसमें 45 एमएस की लो लेटेंसी भी दी जा रही है। JBL ट्यून 215BT, क्विक चार्ज के साथ 16 घंटे का प्लेटाइम: धाकड़ साउंड और बेस वाले इस JBL ट्यून 215BT नेकबैंड में आपको 16 घंटे तक का प्लेबैक टाइम मिल रहा है। इस नेकबैंड में मिल रही 12.5mm का ड्राइवर प्रीमियम क्वालिटी वाला है। यह प्योर बेस वाला जनरेटर नेकबैंड है। इस नेकबैंड से आप लगभग सभी सहयोग कंपनी के साथ जुड़ सकते हैं। यह वॉयस मार्केटिंग सपोर्ट के साथ आ रहा है। इसका इन बैलट माइक भी टॉप क्वालिटी वाला है। नॉइज़ एयरवेव प्रो ब्लूटूथ इन ईयर नेकबैंड: यह गैजेट नेकबैंड ईयर फोन आजकल काफी पसंद किया जा रहा है। यह नॉइज़ एयरवेव प्रो मैट ब्लैक कलर और शानदार लुक में आ रहा है। इसकी 40 एमएस लेटेंसी आपकी गेमिंग को भी काफी बेहतर बना सकती है। इसमें 3 हाई क्वालिटी वाले माइक भी दिए गए हैं। बेहतर साउंड के लिए आप इसके 3 ईक्यू मॉड्स को भी बदल सकते हैं। इसके बड्स में मैग्नेट भी दिए गए हैं, जिससे इसे कैरी करना आसान हो जाता है।

मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने लोकार्पण किया

संजीवनी क्लीनिक से घर के नजदीक मिलेगा नि:शुल्क इलाज – ऊर्जा मंत्री तोमर काशी नरेश की गली में किया संजीवनी क्लीनिक का लोकार्पण – ऊर्जा मंत्री तोमर मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने लोकार्पण किया भोपाल काशी नरेश की गली किला गेट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत निर्मित मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का सोमवार को ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संजीवनी क्लीनिक के माध्यम से सब को स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार हर व्यक्ति को उसके घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये कटिबद्ध है। इसी उद्देश्य से संजीवनी क्लीनिक खोले जा रहे हैं। मंत्री तोमर ने कहा कि गरीब एवं जरूरतमंद को घर के नजदीक ही नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ मिले, इसी धारणा से सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वार्ड में संजीवनी क्लीनिक खोले जा रहे हैं, जहां दवाईयों के साथ ही कई प्रकार की स्वास्थ्य जाचों का लाभ निशुल्क मिलेगा। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं क्षेत्रीण गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

इंदौर की है प्रदेश में एक विशिष्ट पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर प्रदेश में विकास, उन्नति, प्रगति, व्यापार- व्यवसाय, कला, साहित्य और संस्कृति के लिए एक विशेष पहचान रखता हैं। इंदौर से मध्यप्रदेश की पहचान है जो हमारे लिए गर्व और आनंद की बात हैं। इंदौर जो करता है सबसे अलग करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दशहरे के मौके पर इंदौर को आज 4 फ्लाय-ओवर की बड़ी सौगात मिली हैं। यातायात की समस्या को हल करते हुए इंदौर को प्रायोरिटी पर लिया गया है। इंदौर में ट्रैफिक समस्या को देखते हुए फ्लाय-ओवर की श्रृंखला बनी है, जो निरंतर जारी रहेगी। विकास के नए पैमाने पर इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर काम किया जा रहा है, जिसके परिणाम जल्द आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यात्रियों की समस्या को देखते हुए लोकार्पण करने का नया तरीका निकाला हैं। पहले ब्रिज बनने के बाद लोकार्पण करते थे, हमने थोड़ा बदलाव किया हैं। जनता की समस्या को देखते हुए अभी जितना ब्रिज बना है उतना ही शुरू कर रहे हैं। इससे लोगों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि विकास निरंतर जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को इन्दौर प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए यह बात कही।  

मुख्यमंत्री ने कहा- राज्य सरकार द्वारा 17-18 अक्टूबर 2024 को भोपाल में खनन कॉन्क्लेव आयोजित की जा रही है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए राज्य सरकार द्वारा 17-18 अक्टूबर 2024 को भोपाल में खनन कॉन्क्लेव आयोजित की जा रही है। यह महत्वपूर्ण आयोजन राज्य में खनन, तेल, गैस और खनिज आधारित उद्योगों की व्यापक संभावनाओं को प्रदर्शित करेगा, जो विकास की रीढ़ के रूप में कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है और देश के खनन क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह देश का एकमात्र राज्य है जो हीरे का उत्पादन करता है साथ ही मैंगनीज और तांबा अयस्क के उत्पादन में भी अग्रणी है, जो विभिन्न औद्योगिक उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा राज्य रॉक-फॉस्फेट उत्पादन में दूसरे, सीमेंट उद्योग के लिए आवश्यक चूना पत्थर उत्पादन में तीसरे और कोयला उत्पादन में चौथे स्थान पर है। कोल-गैस के उत्पादन में भी राज्य दूसरे स्थान पर है, जो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और स्थिरता की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश सरकार राज्य को खनन और खनिज-आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने के लिये की पहल कर रही है। इससे राज्य में आर्थिक संमृद्धि और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सभी हितधारकों, उद्योगपतियों और खनन क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया है। इनकी रहेगी विशेष उपस्थिति खनन कॉन्क्लेव में केंद्रीय खनन मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी, केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री एस.सी. दुबे और सचिव केन्द्रीय खान मंत्रालय श्री वी.एल. कांता राव शामिल होंगे, जो राज्य में खनन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिये केन्द्र सरकार की ओर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराऐंगे इस कार्यक्रम में 600 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। इसमें एन.सी.एल, एच.सी.एल, एन.एम.डी.सी., ओ.एन.जी.सी., और जी.ए.आई.एल जैसी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि और अन्य राज्यों के उद्योगपति शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि कॉन्क्लेव खनिज कंपनियों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाएगा, जिससे सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। इस आयोजन का उद्देश्य मध्यप्रदेश के समृद्ध खनिज संसाधनों को प्रदर्शित करना है, जिससे राज्य में निवेश को आकर्षित किया जा सके। इसमें कोयला, चूना पत्थर, तेल और गैस, सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही खनन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग की भूमिका पर भी जोर दिया जाएगा। इस आयोजन में डिजिटल परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें खनन कार्यों में ऑटोमेशन के साथ एआई और मशीन लर्निंग के उपयोग पर चर्चा होगी। कोल गैस (CBM) जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया जाएगा। सीमेंट, ऊर्जा, और खनिज-आधारित उद्योगों से संबंधित मुद्दों पर गहन चर्चा के लिए एक राउंड टेबल मीटिंग भी होंगी। कॉन्क्लेव में कई संस्थानों के साथ एमओयू भी होंगे, जो राज्य के खनन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए निवेश प्रस्तावों को औपचारिक रूप देंगे।

चीन की चाल का खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ, पैंगोंग झील किनारे बस्ती को आकार दिया जा रहा

बीजिंग भारत और चीन सीमा पर तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए हैं। हालांकि इस बातचीत का बहुत थोड़ा फायदा होता नजर आ रहा है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर कई बिंदु ऐसे हैं, जहां अब भी भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं। इसमें पूर्वी लद्दाख में स्थित पैंगोंग त्सो झील दोनों देशों के बीच तनाव का एक महत्वपूर्ण स्थल है। अब पता चला है कि चीन इन दिनों भारत से बातचीत की आड़ में पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट के पास बड़े पैमाने पर एक बस्ती का निर्माण कर रहा है। चीन की इस चाल का खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है, जिसमें बस्ती को आकार लेते देखा जा सकता है। पैंगोंग झील के उत्तर में बन रही बस्ती  हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट के पास एक बड़ी चीनी बस्ती का निर्माण चल रहा है। यह बस्ती भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच 2020 के गतिरोध बिंदुओं में से एक से लगभग 38 किलोमीटर पूर्व में स्थित है, हालांकि यह भारत के क्षेत्रीय दावों से बाहर है। दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झील पैंगोंग त्सो भारत, चीन प्रशासित तिब्बत और उनके बीच विवादित सीमा पर फैली हुई है। 17 हेक्टेयर के क्षेत्र में हो रहा निर्माण कार्य रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा 9 अक्टूबर को कैप्चर की गई सैटेलाइट तस्वीरों में लगभग 17 हेक्टेयर क्षेत्र में तेजी से निर्माण कार्य दिखाया गया है। 4,347 मीटर की ऊंचाई पर येमागौ रोड के पास स्थित यह स्थल निर्माण और मिट्टी हटाने वाली मशीनरी से भरा हुआ है। तक्षशिला संस्थान में जियो पॉलिटिकल रिसर्च प्रोग्राम के प्रोफेसर और प्रमुख वाई निथ्यानंदम के अनुसार, “आवासीय संरचनाओं और बड़ी प्रशासनिक इमारतों सहित 100 से अधिक इमारतें बनाई जा रही हैं। खुली जगहें और समतल भूमि पार्कों या खेल सुविधाओं के लिए संभावित भविष्य के उपयोग का सुझाव देती हैं।” हेलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड का भी किया गया निर्माण उन्होंने दक्षिण-पूर्व कोने में 150 मीटर लंबी आयताकार पट्टी की ओर भी इशारा किया, यह अनुमान लगाते हुए कि इसे हेलीकॉप्टर संचालन के लिए तैयार किया जा सकता है। ओपन-सोर्स सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि झील की ओर ढलान वाली नदी के किनारे अप्रैल 2024 की शुरुआत में निर्माण शुरू हुआ था। सैन्य सूत्रों के अनुसार, यह बस्ती संभवतः प्रशासनिक और परिचालन क्षेत्रों के बीच अंतर करते हुए दो भागों में विभाजित प्रतीत होती है। एक से दो मंजिला इमारतें बनाई जा रहीं संरचनाओं के छाया विश्लेषण से पता चलता है कि इस बस्ती में एक और दो मंजिला इमारतों का मिश्रण है, पास में छोटी झोपड़ियां हैं, जिनमें से प्रत्येक में छह से आठ लोग रह सकते हैं। दो बड़ी संरचनाएं प्रशासन और भंडारण सुविधाओं के रूप में काम कर सकती हैं। सीधी रेखाओं के बजाय अर्धचंद्राकार लाइनों में डिजाइन किया गया लेआउट लंबी दूरी के हमलों के प्रति असुरक्षा को कम करने के इरादे का सुझाव देता है। ऊंची चोटियों के पीछे बस्ती बना रहा चीन ऊंची चोटियों के पीछे बस्ती का स्थान इसके रणनीतिक लाभ को और बढ़ाता है, जिससे आस-पास के क्षेत्रों से दृश्यता सीमित हो जाती है। निथ्यानंदम ने कहा, “आस-पास की ऊंची चोटियां भूमि-आधारित निगरानी उपकरणों से साइट को अस्पष्ट करती हैं।” सैन्य सूत्रों का अनुमान है कि यदि सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है, तो बस्ती “एड-हॉक फॉरवर्ड बेस” के रूप में कार्य कर सकती है, जिससे चीनी सेना के लिए प्रतिक्रिया समय कम हो सकता है।

मोह रूपी मूर्च्छा से भागें नहीं, उसे साधें

कभी-कभी लोग कहते हैं, साधु-संन्यासी बहुत कष्ट सहते हैं। मैं इससे उल्टा सोचता हूं। साधुओं के लिए कष्ट कम हैं। गृहस्थ के लिए कष्टों का अंबार-सा लगा हुआ है। वह मूर्च्छा से घिरा हुआ है, इसलिए उसे ये कष्ट, कष्ट जैसे प्रतीत नहीं होते। मूर्च्छा दुख का कारण है। मूर्च्छा जागरण का अभाव है। आदमी सोता है, इसीलिए दुख होता है। सोना बहुत आवश्यक भी है और सोना एक समस्या भी है। सोते समय श्वास की गति बढ़ जाती है। वह छोटा हो जाता है। छोटा श्वास आयु को कम करता है। जो अधिक समय सोता है, वह अल्प आयुष्क होता है। परिमित समय तक सोता है तो आदमी ठीक-ठीक जी लेता है। हर प्रवृत्ति के साथ समस्या जुड़ी हुई होती है। सोना जरूरी है तो सोना खतरनाक भी है। दस-बारह घंटा सोना अल्पायु होना है। जो आदमी लंबा जीना चाहता है, उसे सोने की सीमा कम करनी चाहिए। जो मूर्च्छित है, वह सोया हुआ है। सामाजिक स्तर पर मूर्च्छा भी जरूरी मानी गई है। यदि मूर्च्छा नहीं होती है तो बच्चे का लालन-पालन नहीं हो सकता। कोई संबंध ही नहीं होता। कोई किसी चीज की सुरक्षा नहीं कर पाता। मूर्च्छा है इसीलिए प्रवृत्ति का यह चक्र चल रहा है। मूर्च्छा नहीं होती तो सोने को कौन इकट्ठा करता? मूर्च्छा नहीं होती तो हीरों-पन्नों को कौन संजोकर रखता? जैसे पत्थर ठोकर में पड़े रहते हैं, वैसे ही वे भी पड़े रहते। तो फिर वस्तु का यथार्थ मूल्यांकन नहीं होता। कहां पत्थर और कहां हीरा! किंतु मूर्च्छा सबको अपने-अपने स्थान पर टिकाए हुए है। फकीर के पास एक सम्राट आया। फकीर जानता था। सम्राट जब जाने लगा, तब फकीर ने पांच-दस कंकड़ सम्राट को देते हुए कहा, ‘मेरे ये कंकड़ ले जाओ। जब तुम मरकर अगले लोक में जाओगे, तब मैं वहां तुमसे मिलूंगा। तब मेरे ये कंकड़ मुझे दे देना।’ सम्राट हंसकर बोला, ‘बड़े भोले हो तुम! क्या कोई व्यक्ति मरकर भी अपने साथ कुछ ले जा सकता है? यह असंभव है।’ फकीर बोला, ‘तुम सच कह रहे हो?’ सम्राट बोला, ‘यह सच है। सब जानते हैं।’ फकीर ने कहा, ‘तो फिर प्रजा का शोषण कर तुम इतना वैभव क्यों एकत्रित कर रहे हो? मैं तो समझता था, और कोई ले जाए या नहीं, तुम तो अवश्य ही सारा वैभव साथ ले जाओगे। यदि नहीं ले जा सकते तो फिर इतनी मूर्खता क्यों कर रहे हो?’ सम्राट की आंख खुल गई। मूर्च्छा के कारण ही संचय किया जाता है। कभी-कभी मैं सोचता हूं, मूर्च्छा नहीं होती तो समाज और परिवार कैसे चलता? माता बच्चे के पालन-पोषण में इतना कष्ट सहती है। क्यों? मूर्च्छा है इसीलिए। पशु-पक्षियों की माताएं भी बच्चों के लिए, अपनी संतान के लिए क्या नहीं सहतीं? मूर्च्छा के कारण सारा कष्ट सह लिया जाता है। इस दृष्टि से सामाजिक प्राणी के लिए यह नहीं कहा जा सकता कि मूर्च्छा सर्वथा हेय है। वह छोड़ भी नहीं सकता। जो कुछ एक-दूसरे के लिए होता है या किया जाता है, वह सारा मूर्च्छा और मोह के कारण ही हो रहा है। मोह नहीं होता तो कौन पढ़ाता बच्चों को? कौन उन्हें तैयार करता? कौन उन्हें व्यवसाय सिखाता? फिर तो सब अकेले होते। सब विरागी या विरक्त होते। अकेला आदमी विरागी बनकर जीवनयापन कर सकता है, पर समाज वैसा नहीं कर सकता। संसार ऐसा बन नहीं सकता। यदि संसार ऐसा होता है तो वह फिर संसार नहीं, व्यक्ति होगा। आदमी अनगिन कष्टों को सहता हुआ भी जी रहा है। इसका मुख्य कारण है— मूर्च्छा। कभी-कभी लोग कहते हैं, साधु-संन्यासी बहुत कष्ट सहते हैं। मैं इससे उल्टा सोचता हूं। साधुओं के लिए कष्ट कम हैं। गृहस्थ के लिए कष्टों का अंबार-सा लगा हुआ है। वह मूर्च्छा से घिरा हुआ है, इसलिए उसे ये कष्ट, कष्ट जैसे प्रतीत नहीं होते। मूर्च्छा एक आवरण है। ऐसा आवरण कि जिसमें सारे कष्ट ढक जाते हैं। पति ने पत्नी को या पत्नी ने पति को तलाक दे दिया। पति चल बसा। पत्नी रह गई। पत्नी मर गई। पति रह गया। दोनों मर गए। छोटे-छोटे बच्चे रह गए। ये सारी कितनी कठिन परिस्थितियां हैं? दिल दहलानेवाली स्थितियां हैं। इन स्थितियों में भी आदमी सुख मानकर जीता ही चला जा रहा है। एक छोटे बच्चे से भी पूछा जाए कि तुम्हारे माता-पिता मर गए। तुम असहाय हो। क्या साधु बनोगे? वह तत्काल सिर हिलाकर कहेगा, साधु तो नहीं बनूंगा। इसका कारण है मूर्च्छा। उसे लगता ही नहीं कि वह असहाय है। एक मूर्च्छा हजारों कष्टों को शांत कर देती है, उनका निवारण कर देती है। यदि ऐसा नहीं होता तो इस दुखमय, कष्टमय और दारुण संसार में आदमी कभी जी नहीं पाता। उसको जीवित रखनेवाली वस्तु है मूर्च्छा। यह सबको जिला रही है। सब प्राणी इसकी बदौलत जी रहे हैं। बड़ा भाई— छोटे भाई को, पिता— पुत्र को तैयार करता है। आगे चलकर छोटा भाई, बड़े भाई को दर-दर का भिखारी बना देता है। पुत्र, पिता को घर से निकाल देता है। ऐसी स्थितियां होती हैं। इसे हम देखते हैं। पर बड़ा भाई, छोटे भाई को तैयार करता है और पिता, पुत्र को योग्य बनाता है। इन सबके पीछे मूर्च्छा काम करती है। इसलिए सामाजिक और पारिवारिक वातावरण को सजीव रखने के लिए मूर्च्छा की अनिवार्यता स्वीकार करनी होगी। सामाजिक व्यक्ति मूर्च्छा को सर्वथा छोड़ दे, यह असंभव बात है। किंतु मूर्च्छा के चक्रव्यूह को तोड़ना जरूरी है। या कहें कि इस मूर्च्छा रूपी मोह को साधना जरूरी है, ताकि आप इसके गुलाम न बनें। यह मूर्च्छा तमस और राजस का प्रतीक न बने, बल्कि सत्व का आधार लेकर सात्विक बनें। हमें यह ध्यान रखना है कि जब तक इस मूर्च्छा का चक्रव्यूह चलता रहेगा, तब तक दुखों का अंत नहीं होगा। उसकी एक सीमा हो। वह अनंत न बने, यह अपेक्षित है। मूर्च्छा केवल समाज को चलानेवाली कड़ी के रूप में स्वीकृत हो तो इतना अनर्थ नहीं होता। पर आज उसे अनंत आकाश प्राप्त है। यह अहितकर है। ध्यान का पुष्ट परिणाम है मूर्च्छा के चक्र का टूटना।

आईएमएफ के अनुसार कृषि और कपड़ा क्षेत्रों ने पाकिस्तान के विकास की संभावनाओं को दशकों से अवरुद्ध कर रखा है

कराची  आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान की मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं। बीते कुछ समय से विदेशी कर्जे पर निर्भर पाकिस्तान के कृषि और कपड़ा क्षेत्र पर आईएमएफ ने कड़ी टिप्पणी की है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान से कहा है कि वह इन क्षेत्रों को तरजीह देना और कर में छूट देना बंद करे। आईएमएफ के अनुसार इन क्षेत्रों ने देश के विकास की संभावनाओं को दशकों से अवरुद्ध कर रखा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी स्टॉफ रिपोर्ट में पाकिस्तान की संघर्षरत अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के कारणों पर चर्चा की है। रिपोर्ट में पाकिस्तान की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति का जिम्मेदार कृषि और कपड़ा क्षेत्र को ठहराया गया है। आईएमएफ के अनुसार ये क्षेत्र देश के राजस्व में पर्याप्त योगदान नहीं दे रहे। ये क्षेत्र सरकारी पैसे का एक बड़ा हिस्सा मदद के दौर पर लेने के बावजूद अकुशल और अप्रतिस्पर्धी बने हुए हैं। हाल ही में वैश्विक ऋणदाता से सात अरब डॉलर की मदद (ईएफएफ) हसिल करने वाले पाकिस्तान को आईएमएफ ने कहा है कि उसे अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए 75 साल से जारी आर्थिक प्रथाओं को बदलना होगा। आईएमएफ ने 10 अक्तूबर को जारी रिपोर्ट में कहा कि अपने जैसे दूसरे देशों की तुलना में पाकिस्तान काफी पिछड़ा है। इससे यहां के लोगों का जीवनस्तर प्रभावित हुआ है और 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गरीबी रेखा के नीचे पहुंच गई है। आईएमएफ के अनुसार पाकिस्तान निर्यात के लिए चीजें बनाने में असफल रहा। ज्ञान आधारित निर्यात भी कम बना हुआ है, क्योंकि यह क्षेत्र भी नवाचार (इनोवेशन) करने में विफल रहा। साल 2022 में पाकिस्तान आर्थिक जटिलता सूचकांक में 85वें नंबर पर रहा, इस इंडेक्स में पाकिस्तान वर्ष 2000 में भी इसी स्थान पर था।  

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