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छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को सींच रहे, मजदूर पिता की बेटी रितिका के जज़्बे को मुख्यमंत्री ने सराहा

रायपुर धमतरी की रहने वाली मजदूर पिता की बैडमिंटन प्लेयर बेटी रितिका ध्रुव ने कभी नहीं सोचा था कि उसका अपने खेल के प्रति जुनून एक दिन उसे मुख्यमंत्री से रूबरू करवा देगा। आज जब रितिका को मोबाइल पर वीडियो कॉल में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का स्नेहमयी चेहरा नजर आया तो उसे विश्वास नहीं हुआ कि उसकी बात प्रदेश की मुखिया से हो रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से बात करते हुए उसके बैडमिंटन के हुनर को सराहा और उसका हौसला बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप इसी तरह अपने बैडमिंटन के हुनर को निखारिये। खूब आगे बढ़िये और अपने माता-पिता के साथ पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाइये। हम आपके साथ हैं, आपको बैडमिंटन के लिए जो भी सहायता व सुविधाएं चाहिए उसे हम आपको देंगे। मुख्यमंत्री की ये बात सुनकर रितिका का चेहरा खिल उठा। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से वीडियो-कॉल में बड़ी आत्मीयता से बात की और उसके बैकग्राउंड के विषय में जाना। रितिका ने बताया कि उसके पिता जीवनयापन के लिए मजदूरी का कार्य करते हैं और माता आंगनबाड़ी सहायिका हैं। उसे बचपन से ही बैडमिंटन के खेल में रुचि थी। समय के साथ उसका ये शौक जुनून में बदल गया और वह पूरे तरह से इस खेल के प्रति समर्पित हो गयी। मगर परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बड़े स्तर के टूर्नामेंट के लिए वह अपने टैलेंट को तराश सके। मुख्यमंत्री ने संघर्षों के बावजूद बैडमिंटन में शानदार प्रदर्शन के लिए रितिका की खूब सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय को रितिका ने वीडियो कॉल पर बताया कि उसने बंगलुरू में खेलो-इंडिया यूनवर्सिटी लेवल गेम्स और हाल ही में ओडीसा में नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है। वह आगे नेशनल-इंटरनेशनल स्तर पर खेलना चाहती है और ओलम्पिक में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना चाहती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से कहा कि आपका ओलम्पिक का सपना भी पूरा होगा। मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वे राज्य ओलंपिक संघ के अध्यक्ष भी हैं। आपकी तरह छत्तीसगढ़ की बेटियां जो अपने खेल में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, उन्हें सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री को रितिका ने बताया कि वो अभी बीए अंतिम वर्ष में पढ़ाई भी कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका को खेल के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरे मन से करने प्रोत्साहित किया। उन्होंने बिटिया को खूब आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से बात कर के रितिका के चेहरे पर खुशी की मुस्कान छा गयी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री साय लगातार प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। उनका प्रयास है कि राज्य में खेल का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनने के साथ-साथ यहां के टैलेंट को आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले। इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विगत दिनों छत्तीसगढ़ की पर्वतारोही निशा को किलिमंजारो पर्वत फतह करने कॉल कर पूरी मदद का आश्वासन दिया था। आज जब मुख्यमंत्री ने रितिका के संघर्ष और उसकी बैडमिंटन की प्रतिभा को जाना तो वीडियो कॉल पर बिटिया का हौसला बढ़ाया।

एनसीएल की बड़ी योजना: सिंगरौली में बस्ती का पुनर्वास और 60 करोड़ टन कोयला खनन का लक्ष्य

NCL’s big plan: rehabilitation of settlement in Singrauli and target of mining 60 crore tonnes of coal सिंगरौली  । कोल इंडिया की शाखा एनसीएल एक बड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन (आरएंडआर) परियोजना की योजना बना रही है। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) बी साईराम ने कहा कि इसके तहत मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक बस्ती के निवासियों को स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है, जिसके नीचे 60 करोड़ टन खनन योग्य कोयला है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में मोरवा बस्ती 927 हेक्टेयर में फैली हुई है। यह एक बड़ी परियोजना है, जिसमें नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की मोरवा बस्ती को पूरी तरह स्थानांतरित किया जाएगा। साईराम ने कहा, अच्छी बात यह है कि इस अधिग्रहण में लोग पुनर्वास के लिए तैयार हैं। इसलिए आधी समस्या हल हो गई है, क्योंकि पहला प्रतिरोध लोगों की तरफ से ही आता है। उन्होंने कहा कि अब केवल मुआवजे की दरों और आरएंडआर लाभ को अंतिम रूप देना बाकी है। पिछले छह महीनों से एनसीएल पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर लोगों के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रही है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एनसीएल की मदद कर रहा है और पुनर्वास के पहले चरण का ब्यौरा तैयार किया जाना है। सीएमडी ने कहा, मई से हम मुआवजे का पहला चेक देना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 572.5 हेक्टेयर कृषि भूमि खाली कराई जानी है। सूत्रों के अनुसार कंपनी अभी भी योजना के विवरणों पर काम कर रही है, जिसमें वित्तीय पक्ष भी शामिल हैं। मोरवा बस्ती पुनर्वास और पुनर्स्थापन परियोजना बहुत बड़ी होगी और इस पर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित व्यय होने का अनुमान है। इस परियोजना से 30 हजार परिवार प्रभावित होंगे और इसमें 22 हजार घरों, संरचनाओं का स्थानांतरण शामिल होगा।

युग कवि मुक्ति बोध के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रसंग मुक्तिबोध का आयोजन सम्पन्न

बिलासपुर जीवन मूल्यों के प्रयोगधर्मी कवि और नई कविता को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करने वाले युग कवि मुक्ति बोध के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रसंग मुक्तिबोध का आयोजन डीपी चौबे स्मृति ट्रष्ट भवन बिलासपुर के सभागार में सम्पन्न हुआ ।दो दिवसीय (16,17 नवम्बर ) आयोजन के प्रथम दिवस 16 नवम्बर के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव ने की ।मुख्य वक्ता वरिष्ठ,कवि, कथाकार रणेंद्र थे ।आलोचक जयप्रकाश द्वारा मुक्तिबोध की जीवनी पर लिखी कृति एक अधूरी दीर्घ कविता पर आधारित यह आयोजन था । इस वैचारिक आयोजन के वक्ता डॉ कल्याणी वर्मा, नन्द कुमार कंसारी, थे ।बिलासपुर प्रलेसं के अध्यक्ष हबीब खान इस अवसर पर प्रमुखता से उपस्थित थे ।आधार वक्तव्य प्रलेसं सचिव रफीक खान ने दिया ।  इस अवसर पर मुख्य वक्ता रणेंद्र ने विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा मुक्ति बोध संस्कृति के विरुद्ध कभी नही रहे। वे यथास्थितिवाद के खिलाफ थे जो हमें परिवर्तन करने से रोकता है । प्रेमचंद को पढ़कर उनकी मां ने मुक्तिबोध को साहित्य की पहली शिक्षा दी । अध्यक्षता कर रहे प्रखर आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि आज के भयावह दौर में प्रतिरोध की बात करना बड़ी बात है ।मुक्तिबोध की सारी रचना समाज को बेहतरी की ओर ले जाने वाली है उनकी सोच कबीर की सोच थी ।       इस अवसर पर जयप्रकाश ने अपनी कृति में उल्लेखित मुक्तिबोध के संघर्षपूर्ण जीवनी को रेखांकित किया ।कुसुम माधुरी टोप्पो ने मुक्तिबोध की कविताओं का पाठ किया। आरम्भ में संरक्षक राजेश्वर सक्सेना के शुभकामना संदेश को प्रोजेक्टर में प्रसारित किया गया । इप्टा बिलासपुर के अध्यक्ष अरुण दाभड़कर ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला । आयोजन का संचालन छत्तीसगढ़ प्रलेसं के महासचिव परमेश्वर वैष्णव ने किया । आभार प्रदर्शन प्रलेसं बिलासपुर सचिव अशोक शिरोडे करते हुए नथमल शर्मा के शुभकामना संदेश की सूचना दी।  इस आयोजन में सत्यभामा अवस्थी, लोकबाबू ,नरेश अग्रवाल,हबीब खान, आर के सक्सेना,मंगला देवरस,सचिन शर्मा,मधुकर गोरख,मुस्ताक मकवाना,लखन सिंह,कोमल सिंह शारवा,श्याम बिहारी बनाफर,विमल झा,साक्षी शर्मा,प्रमिथियस ठाकुर संकल्प यदु मांझी अनन्त,पोषल वर्मा,विश्वासी एक्का, मृदुला सिंह आशा शर्मा,आदि साहित्यकार उपस्थित थे आयोजन के अंत मे राजकमल नायक के निर्देशन में मुक्तिबोध की कविताओं पर आधारित नाट्य मंचन इप्टा बिलासपुर द्वारा किया गया । वरिष्ठ कवि वेद प्रकाश अग्रवाल, और डॉ आलोक वर्मा की अध्यक्षता में और संजय शाम के संचालन में काव्य पाठ का आयोजन किया गया ।जिसमें छत्तीसगढ़ प्रलेसं की विभिन्न जिला इकाइयों से आये कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया ।

ठेके पर चलती शासकीय प्राथमिक पाठशाला, विभाग की मोन स्वीकृति के चलते सालों से नहीं आए शिक्षक पढ़ाने

 टीकमगढ़ मध्य प्रदेश का टीकमगढ़ जिला  इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रहा है अधिकारियों की साठ गाठ के चलते शिक्षा के अभाव में बच्चों का भविष्य ही चौपट हो रहा है  जहां एक ओर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबके विकास के लिए प्रतिबद्ध नजर आते हैं  वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव प्रदेश को विकास की गति देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं लेकिन शिक्षा के बिना कोई भी प्रदेश विकास नहीं कर सकता है प्रदेश में शिक्षा का स्तर गिरने का कारण ही ऐसे शिक्षक हैं जो सरकार द्वारा मोटी सैलरी तो लेते हैं मगर स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ाना उन्हें गवारा नहीं है जी हां हम बात कर रहे हैं लिधौरा संकुल के कछियाना खिरक मरगुवा  शासकीय प्राथमिक बिद्यालय की जहां पर शासन द्वारा दो शिक्षक नियुक्त हैं मगर अरविंद दांगी नाम के एक शिक्षक ऐसे भी हैं जो आज से नहीं बल्कि कई सालों से विद्यालय ही नहीं आए हैं और उनकी सैलरी तैयार होकर उनके अकाउंट में चली जाती है यह इतने दबंग शिक्षक हैं कि यदि ग्रामीण गार्जियन विद्यालय में आने के लिए फोन लगाते हैं तो बह ग्रामीणों को धमकी तक दे डालते हैं आप विद्यालय की हालत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि दो-दो टीचर होने के बावजूद भी विद्यालय में महीनों प्राइवेट टीचर से बच्चों को पढ़ाया गया मामला मीडिया के संज्ञान में आते ही लिधौरा संकुल प्राचार्य ने ऑडी पर एक टीचर की आनन फानन में नियुक्ति कर दी इस प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे पढ़ते हैं जिनको पानी भी पीने के लिए नसीब नहीं होता है बात यहीं पर समाप्त नहीं होती है बच्चों को बाथरूम के लिए खेतों में जाना पड़ता है यहां पर जो बाथरूम बने हुए हैं उनकी महीना से कोई सफाई नहीं हुई है और जर्जर हालत में हैं

प्रदेश में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा, अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी, लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म का जोर

उज्जैन  इस वर्ष मालवा की माटी में गेहूं की बंपर पैदावार होने की संभावना है। करीब 4.5 लाख हेक्टेयर में बोवनी की जा रही है। चने की बोवनी का रकबा कम बताया जा रहा है। किसान तेजस, पोषक, 322 किस्म के गेहूं का बीज ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों से किसानों को सोयाबीन भाव ठीक नहीं मिल रहे हैं, जबकि गेहूं के भाव काफी अच्छे मिल रहे हैं। यही कारण है कि किसानों का रुझान चने की बनिस्बत गेहूं की बोवनी पर अधिक है। अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी     कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष 4.50 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी की जा रही है। अब तक 50 फीसद बोवनी हो चुकी है। किसान अधिक उत्पादन के किस्म का गेहूं अधिक बो रहे हैं।     व्यापारी अखिलेश जैन के अनुसार, किसानों ने पोषक, तेजस, 322 किस्म का बिजवारा अधिक खरीदा। इस किस्म के गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा बताया जा रहा है।     बीज कंपनी से लेकर व्यापारिक क्षेत्र में यह गेहूं 3300 से 4500 रुपया क्विंटल तक बिक गया। इसके बाद किसानों ने पर्याप्त पानी के चलते लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म को बोया है। इनके भाव भी ऊंचे में 4000 रुपया क्विंटल तक रहे। देशावर में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा इस वर्ष देशावर में गेहूं के बीज की आपूर्ति मालवा क्षेत्र से हो रही है। 322, लोकवन, पूर्णा, पोषक गेहूं के बीजवारे की मांग महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार में काफी चल रही है। इस कारण गेहूं के भाव भी ऊंचे हैं। शरबती की बोवनी नगण्य किसी समय में मालवा की माटी का शरबती की मिठास देश के महानगरों में काफी पसंद की जाती थी। मुंबई में इस गेहूं की कीमत 5 से 8 हजार रुपये क्विंटल तक होती थी, लेकिन जिले के सभी क्षेत्र में पानी पर्याप्त मात्रा में होने से किसानों ने शरबती गेहूं की बोवनी से किनारा कर लिया। बता दें इस किस्म का गेहूं काफी कम पानी की पैदावार है। उत्पादन भी अन्य गेहूं की बनिस्बत कम है। अब अधिक उत्पादन पर किसान ध्यान देता है।

हरियाणा टीईटी परीक्षा फॉर्म में सुधार करने आज अंतिम मौका, इसके बाद विंडो हो जाएगी बंद, परीक्षा 7 और 8 दिसंबर को होगी

नई दिल्ली हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा फॉर्म में सुधार करने का कल आखिरी मौका है। बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हरियाणा की ओर से आज टीईटी करेक्शन विंडो को बंद कर दिया जाएगा। इसलिए, परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट https://bseh.org.in/home पर जाकर आवेदन पत्र में सुधार कर लें। अभ्यर्थी इस बात का ध्यान रखें कि हरियाणा बोर्ड ने यह स्पष्ट किया है कि सुधार करने की अंतिम तिथि बीतने के बाद दूसरा मौका नहीं दिया जाएगा। इसलिए समय पर अपनी गलती को सुधार लें। हरियाणा बोर्ड की ओर से हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसमे टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को एक दिन के लिए बढ़ाया दिया गया था। नई तिथि के मुताबिक, कैंडिडेट्स को 15 नवंबर, 2024 तक का समय दिया गया था, जबकि पहले यह 14 नवंबर, 2024 थी। साथ ही यह जानकारी भी दी गई थी कि 17 नवंबर, 2024 तक करेक्शन विंडो ओपन रहेगी। इसके बाद किसी भी अनुरोध को पर विचार नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों की सहूलियत के लिए नीचे आसान स्टेप्स दिए जा रहे हैं, जिनको फाॅलो करके अभ्यर्थी आसानी से परीक्षा फॉर्म में करेक्शन कर सकते हैं।   सबसे पहले कैंडिडेट्स को बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हरियाणा आधिकारिक वेबसाइट bseh.org.in पर जाना होगा। अब, होम पेज पर उपलब्ध हरियाणा टीईटी सुधार विंडो लिंक पर क्लिक करें। एक नया पेज खुलेगा, जहां उम्मीदवारों को लॉगिन विवरण दर्ज करना होगा। सबमिट पर क्लिक करें और आवेदन पत्र खुल जाएगा। आवेदन पत्र में बदलाव करें और सबमिट पर क्लिक करें। एक बार हो जाने पर, पुष्टिकरण पृष्ठ डाउनलोड करें। आगे की आवश्यकता के लिए इसकी एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।   हरियारणा, एचटीईटी परीक्षा का आयोजन 7 दिसंबर और 8 दिसंबर को किया जाएगा। यह एग्जाम विभिन्न पालियों में कंडक्ट कराया जाएगा। जारी शेड्यूल के मुताबिक 7 दिसंबर 2024 को लेवल-III की परीक्षा शाम 3 बजे से 5.30 बजे तक ली जाएगी। लेवल-I की परीक्षा 8 दिसंबर को दोपहर 3 बजे से 5.30 बजे तक ली जाएगी। इसी तारीख को लेवल-II की परीक्षा सुबह 10 बजे से 12.30 बजे तक कंडक्ट कराई जाएगी।

जनकपुर-अयोध्या के ऐतिहासिक संबंधों का साक्षी बनेगा श्रीराम का तिलकोत्सव

अयोध्या अयोध्या में भगवान श्रीराम का तिलकोत्सव 18 नवंबर सोमवार को रामसेवकपुरम में भव्य आयोजन के साथ सम्पन्न होगा। यह आयोजन प्रभु श्रीराम और जनकपुर के ऐतिहासिक संबंधों को पवित्रता को पुनः जीवंत करने का एक विशेष अवसर का साक्षी बनने जा रहा है। आयोजनकर्ता ने बताया कि सोमवार दोपहर दो बजे विधि विधान पूर्वक प्रारम्भ होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में जनकपुर से आए लगभग 300 से अधिक तिलकहरू (शुभचिंतक) और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं को सजीव करेगा, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करेगा। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। रामसेवक पुरम परिसर को इस विशेष अवसर के लिए भव्य रूप से सजाया गया है। परंपरागत रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जनकपुर से तिलकहरुओं का आगमन 16 नवंबर से ही प्रारंभ हो गया है। उनकी आवभगत और ठहरने की व्यवस्था कारसेवकपुरम, अभयदाता हनुमान आश्रम, विवेक सृष्टि, माता सरस्वती देवी मंदिर और तीर्थ क्षेत्र भवन में की गई है। रामसेवक पुरम के मंच पर 18 वर्षीय युवक को प्रभु श्रीराम के स्वरूप में सज्जित किया जाएगा। श्रीराम स्वरूप को आटे से बने चौक या सिंहासन पर विराजमान किया जाएगा। जनकपुर से आए तिलकहरू परंपरागत वस्तुएं जैसे कांसे के बर्तन, पीली धोती, गमछा, करधनी, हल्दी, चंदन, धान, दूब, पान, इलायची, सुपारी, जनेऊ और चांदी के सिक्के लेकर आएंगे और इन्हें तिलक समारोह के दौरान प्रभु श्रीराम के स्वरूप को भेंट करेंगे। तिलक समारोह में सीता जी के छोटे भाई के रूप में तिलक चढ़ाने की भूमिका जानकी मंदिर, जनकपुर के छोटे महंत रामरोशन दास जी निभाएंगे। वे वेदज्ञ आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच प्रभु श्रीराम के स्वरूप को तिलक अर्पित करेंगे। इस भव्य आयोजन में जनकपुर, मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सतीश कुमार सिंह अपने आधा दर्जन मंत्रियों के साथ उपस्थित रहेंगे। जनकपुर के महापौर मनोज कुमार शाह और नेपाल के अन्य तीन महापौर भी इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बनेंगे। तिलकोत्सव के दौरान अयोध्या की महिलाओं की टोली अवध क्षेत्र के परंपरागत मांगलिक लोकगीत गाएगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। तिलकहरुओं के स्वागत में विशेष भोज का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्वादिष्ट आलू टिक्की, पापड़ी चाट, छोला, चावल, पूड़ी, मिक्स सब्जी, रायता, पापड़ और हलवा जैसे व्यंजन परोसे जाएंगे।

इतिहास में है रूचि तो यह फील्ड होगी आपके लिए सबसे बेस्ट

हाल ही में रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया जिसके बाद एक बार फिर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) सुर्खियों में है। इस फैसले में भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट का अहम रोल रहा। बता दें, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की खोज, वहां से उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाना पुरातत्वविदों का मुख्य काम होता है। इस फील्डे में भी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। अगर आप भी इस फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं तो जानिए इससे जुड़ी डीटेल्स्… क्या होता है पुरातत्वविद का काम? पुरातत्वविद (आर्कियोलॉजिस्ट) का काम इतिहास को खोजना और संरक्षित करना होता है। साथ ही ये विशेषज्ञ ऐतिहासिक वस्तुओं और सभ्यताओं की खोज से लेकर संग्रहालयों के संरक्षण का काम भी करते हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की खोज व संरक्षण, म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज को देखते हुए आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में भी करियर की बहुत संभावनाएं हैं। कोर्स और एलिजबिलिटी आर्कियोलॉजी में ग्रैजुएट, पोस्ट ग्रैजुएट और पीएचडी लेवल के कोर्स होते हैं। 12वीं में हिस्ट्री  (इतिहास) की पढ़ाई करने वाले ग्रैजुएशन में आर्कियोलॉजी पढ़ सकते हैं और इसी में पोस्ट1 ग्रैजुएशन की डिग्री भी हासिल कर सकते हैं। ग्रैजुएशन लेवल पर कई संस्थानों और कॉलेजों में एक साल का पीजी डिप्लोमा होता है। इसके अलावा म्यूजियोलॉजी के रूप में भी कई कोर्स होते हैं जिसके लिए किसी भी बैकग्राउंड के ग्रैजुएट एलिजबिल होते हैं। कहां मिल सकती है जॉब? आर्कियोलॉजी/हेरिटेज मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद आपके लिए शिक्षण, अनुसंधान, उत्खनन और संग्रहालय के क्षेत्र में करियर के कई ऑप्शपन होते हैं। आर्कियोलॉजी का कोर्स करके आप नई दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और राज्यों में स्थित इनके क्षेत्रीय केंद्रों में आर्कियोलॉजिस्ट या असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में जॉब कर सकते हैं। कितनी मिलती है सैलरी यही नहीं, आपके लिए आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम्स, नैशनल और स्टेट लेवल के म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज, कन्ज र्वेशन लैब्स जैसी जगहों पर भी जॉब के ऑप्शेन होते हैं। असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट या ऑर्ट रेस्टोरर को इस फील्ड में 50 हजार रुपये तक सैलरी मिल सकती है। इन जगहों पर मिलती है प्राथमिकता बता दें, आर्कियोलॉजिकल बैकग्राउंड के प्रफेशनल लोगों को फॉरेन मिनिस्ट्रील के हिस्टॉरिकल डिविजन, एजुकेशन मिनिस्ट्रीह, नैशनल आर्काइव्सल ऑफ इंडिया, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च और प्लानिंग कमीशन जैसे डिपार्टमेंट्स के अपॉइंटमेंट्स में प्राथमिकता दी जाती है। यूनेस्को और यूनिसेफ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी काफी बेहतर संभावनाएं होती हैं।  

ईपीएफओ ने देश भर के लाखों सदस्यों को सामाजिक सुरक्षा देने और वित्तीय रूप से सबल बनाने का काम किया: डॉ. मनसुख मांडविया

नई दिल्ली केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने देश भर के लाखों सदस्यों को सामाजिक सुरक्षा देने और वित्तीय रूप से सबल बनाने का काम किया है। राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में अपने मुख्य भाषण में डॉ. मांडविया ने ईपीएफओ की परिवर्तनकारी यात्रा की सराहना की। उन्होंने ईपीएफओ द्वारा अपने सदस्यों के विशाल कोष का प्रबंधन करने को भी सराहा और पूरे देश में सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों को बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। केंद्रीय मंत्री ने मजबूत आईटी प्लेटफॉर्म, शिकायत प्रबंधन के लिए कुशल प्रणाली और सेवा वितरण के सदस्य केंद्रित मॉडल के कार्यान्वयन के महत्व पर भी जोर दिया। डॉ. मांडविया ने ईपीएफओ कर्मचारियों से संगठन के नारे “हम हैं ना” को अपनाने का आग्रह किया और उन्हें लोगों की सेवा करने के उनके कर्तव्य की प्रतिदिन याद दिलाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सच्ची सेवा का पैमाना कर्मचारियों द्वारा जरूरतमंद की समयानुसार मदद होती है। केंद्रीय मंत्री ने सेवाओं की अंतिम छोर तक डिलीवरी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए पेंशन कवरेज बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने ईपीएफओ के अधिकारियों और कर्मचारियों से सदस्यों की सेवा में ईमानदारी, समर्पण, सहानुभूति और व्यावसायिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “संगठन के भीतर निरंतर कौशल वृद्धि और क्षमता निर्माण के प्रयास उभरती चुनौतियों के अनुकूल होने और सेवा वितरण में सुधार के लिए सर्वोपरि हैं।” इस बीच, ईपीएफओ में योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या 202-2023 में 6.85 करोड़ से 7.6 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 7.37 करोड़ हो गई है, जबकि इस अवधि के दौरान संगठन में योगदान देने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 6.6 प्रतिशत बढ़कर 7.66 लाख हो गई है। ईपीएफओ ने पिछले वर्ष के 3,390 करोड़ रुपये के इसी आंकड़े की तुलना में बकाया राशि की वसूली में 55.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी, जो 5,268 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वर्ष की तुलना में निपटाए गए दावों की संख्या में भी 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कार्यकारी समिति ने रिपोर्ट को केंद्रीय बोर्ड द्वारा अपनाने की सिफारिश की।  

आईपीएल 2025 मेगा नीलामी में शामिल होने वाले 574 खिलाड़ियों की सूची की घोषणा की: बीसीसीआई

नई दिल्ली बीसीसीआई ने सऊदी अरब के जेद्दा में 24 और 25 नवंबर को होने वाली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2025 मेगा नीलामी में शामिल होने वाले 574 खिलाड़ियों की सूची की घोषणा की। शॉर्ट-लिस्ट किए गए खिलाड़ियों में से 366 भारतीय और 208 विदेशी खिलाड़ी हैं, जिनमें एसोसिएट देशों के 3 खिलाड़ी शामिल हैं। नीलामी में 318 भारतीय अनकैप्ड खिलाड़ी और 12 अनकैप्ड विदेशी खिलाड़ी शामिल होंगे। 10 फ्रैंचाइजी के रोस्टर में अधिकतम 204 स्लॉट भरे जाने बाकी हैं। विदेशी खिलाड़ियों के लिए 70 स्लॉट उपलब्ध हैं, जबकि 2 करोड़ रुपए उच्चतम आरक्षित मूल्य है, जिसमें 81 खिलाड़ी उच्चतम ब्रैकेट में रहना पसंद करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि टीमों के चयन के लिए सूची में अनुभवी सितारों के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों का भी नाम शामिल किया गया है। आईपीएल 2025 नीलामी में सबसे उम्रदराज खिलाड़ी इस साल की शुरुआत में अपना आखिरी टी20 मैच खेलने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के 10 साल बाद पहली बार आईपीएल नीलामी में शामिल होने वाले इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन आईपीएल 2025 नीलामी में शामिल होने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं। इनका बेस प्राइज 1.25 करोड़ है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पूर्व कप्तान फाफ डु प्लेसिस, इंग्लैंड के जेमी ओवरटन और अफगानिस्तान के ऑलराउंडर मोहम्मद नबी के साथ 40 साल से अधिक उम्र के केवल तीन अन्य क्रिकेटरों ने इस सूची में जगह बनाई है। आईपीएल के अनुभवी सितारे डेविड वार्नर और रविचंद्रन अश्विन इस सूची में अगले स्थान पर हैं, जो 38 साल की उम्र में इस मेगा नीलामी में शामिल हुए हैं। इनमें ओवरटन और नबी का बेस प्राइज 1.5 करोड़ जबकि, डु प्लेसिस, वार्नर और अश्विन का बेस प्राइज  2 करोड़ है। आईपीएल 2025 नीलामी में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी दूसरी ओर बिहार के 13 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी 16 वर्षों में आईपीएल नीलामी सूची में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। हाल ही में इस युवा खिलाड़ी ने तब सुर्खियां बटोरीं जब वह अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए, उन्होंने चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ भारत अंडर-19 के लिए एक युवा टेस्ट में यह उपलब्धि हासिल की। हाल ही में रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करने और 2 शतक लगाने वाले ​​मुंबई के सनसनीखेज खिलाड़ी आयुष म्हात्रे 17 साल की उम्र में आईपीएल 2025 की नीलामी में दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। तमिलनाडु के आंद्रे सिद्धार्थ और दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज क्वेना मफाका शीर्ष 4 में हैं, दोनों की उम्र 18 साल है। इन सबका बेस प्राइज 30 लाख है।

दिल्ली LG ने पुलिस को दिए अवैध प्रवासियों की पहचान के आदेश, एक महीने तक स्पेशल ड्राइव चलाने के निर्देश

 नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर अब जल्द ही कोई बड़ा ऐक्शन हो सकता है। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वी.के. सक्सेना ने दिल्ली पुलिस को राजधानी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने को कहा है। एलजी ने इसके लिए पुलिस को एक महीने तक स्पेशल ड्राइव चलाने का भी निर्देश दिया है। जानकारी के अनुसार, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली में अवैध अप्रवासियों की संख्या में इजाफा होने की खबरों का संज्ञान लेकर पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और उनकी पहचान के लिए एक महीने तक अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। एलजी ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए कि वे राजधानी में अवैध प्रवासियों की पहचान कर केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर उन पर कार्रवाई करें। एलजी ऑफिस द्वारा दिल्ली के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, एमसीडी कमिश्नर और एनडीएमसी अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि ऐसी खबरें हैं कि अवैध अप्रवासियों के पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड आदि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार करने और हेरफेर करने की प्रक्रिया अपनाने के प्रयास चल रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दिल्ली में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) पर राजधानी में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं। ‘आप’ ने भाजपा पर बोला हमला अवैध प्रवासियों पर उपराज्यपाल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली की ‘आप’ सरकार ने कहा, “भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए अवैध प्रवासियों के मुद्दे का इस्तेमाल करती है। इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि अवैध प्रवासी हमारे देश में कैसे प्रवेश कर रहे हैं। इसके लिए सीधे तौर पर अमित शाह और केंद्रीय गृह मंत्रालय जिम्मेदार हैं।” ‘आप’ ने एक बयान में कहा, “यदि अवैध अप्रवासी हैं, तो कितने हैं? यह एक बड़ी विफलता है तथा ऐसे लोगों पर कार्रवाई ना करना, इसे और अधिक स्पष्ट रूप से उजागर करता है।” ‘आप’ ने कहा, “एक तरफ भाजपा अवैध प्रवासियों को नागरिकता दे रही है और दूसरी तरफ जांच का दिखावा कर रही है। भाजपा को यह पाखंड बंद करना चाहिए और अपनी गंदी राजनीति खत्म करनी चाहिए।” एलजी के पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि दिल्ली में अवैध प्रवासियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। पत्र में कहा गया है, “ऐसे लोगों द्वारा सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों और पार्कों पर अतिक्रमण भी बढ़ा है। ऐसी खबरें हैं कि उनके पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, चुनाव पहचान पत्र आदि बनाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और धोखाधड़ी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।” सक्सेना ने कहा, “यदि अवैध प्रवासियों को चुनाव पहचान पत्र जारी किया जाता है तो इससे उन्हें लोकतंत्र का सबसे शक्तिशाली अधिकार अर्थात हमारे देश में वोट देने का अधिकार प्राप्त होगा। अवैध प्रवासियों को ऐसे अधिकार देना किसी भी भारतीय नागरिक द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस तरह के कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं।” सत्यापन में अतिरिक्त सतर्कता बरतें उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव संभागीय आयुक्तों के माध्यम से जिलाधिकारियों को पहचान दस्तावेजों के लिए आवेदन करने वाले लोगों के सत्यापन में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी करें। पत्र में कहा गया है कि पुलिस कमिश्नर क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों को विशेष रूप से सड़क किनारे तथा खाली सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बसे लोगों का निरीक्षण करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दें। सक्सेना ने कहा कि दिल्ली पुलिस अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एक महीने तक स्पेशल अभियान चलाएगी और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करके आगे की कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राजधानी में कहीं भी सार्वजनिक स्थानों पर अनाधिकृत कब्जा न हो।

भारत को अपने विकास के मॉडल बनाने की जरूरत है जो वैश्विक उदाहरण बन सकें : मोहन भागवत

नई दिल्ली  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)प्रमुख मोहन भागवत  गुरुग्राम पहुंचे थे। यहां वह ‘विविभा-2024:विकसित भारत के लिए विजन’ के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। भागवत ने कहा कि विकास के लिए शिक्षा अनिवार्य लेकिन वह भारत-केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने विकास के मॉडल बनाने की जरूरत है जो वैश्विक उदाहरण बन सकें। भारत-केंद्रित हो- मोहन भागवत संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है,लेकिन यह शिक्षा भारत-केंद्रित होनी चाहिए। हमें दुनिया भर से अच्छे विचार लेने चाहिए, लेकिन कभी भी अंधाधुंध अनुयायी नहीं बनना चाहिए। भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित शोध के लिए शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। “भारतीय शिक्षण मंडल- युवा आयाम” की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी जैसे विशिष्ट वक्ताओं ने देश भर के विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ विकसित भारत को प्राप्त करने के बारे में अपने विचार साझा किए। एस सोमनाथ ने विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा में अगले 25 वर्षों के महत्व पर प्रकाश डाला। ’16वीं शताब्दी तक भारत हर क्षेत्र में आगे था’ मोहन भागवत ने कहा कि पहली शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी तक भारत हर क्षेत्र में आगे था। हमने बहुत पहले ही बहुत कुछ खोज लिया था। हम बस रुक गए और इसी कारण हमारा पतन शुरू हुआ। उन्होंने खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में पिछले 10,000 सालों से खेती हो रही है, लेकिन जमीन,पानी,हवा के प्रदूषित होने की समस्या कभी नहीं थी। लेकिन जब बाहर से खेती आई, तो 500-600 सालों में ही ये चीजें होने लगीं। भागवत ने कहा, ‘कहीं न कहीं भारत की दृष्टि में कमी थी, जिसके कारण विकास भी एकतरफा हुआ। भारत में विकास समग्र रूप से होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि आजकल बहस इस बात पर होती है कि विकास किया जाए या पर्यावरण की रक्षा,जैसे हमें एक को चुनना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में,यह एक या दूसरे को चुनने के बारे में नहीं है,बल्कि दोनों को एक साथ लेकर चलने के बारे में है। भागवत ने आगे कहा कि सिर्फ चार प्रतिशत लोग 80 प्रतिशत संसाधनों पर नियंत्रण करना चाहते हैं। इस तरह का विकास लोगों पर लाठी का इस्तेमाल करके धकेला गया है। भागवत ने कहा कि जो लोग तकनीकी विकास को आगे बढ़ाते हैं,तो आप देख सकते हैं कि वे आबादी का सिर्फ 4 प्रतिशत हैं,लेकिन उन्हें 80 प्रतिशत संसाधनों की जरूरत है और उन संसाधनों को प्राप्त करने के लिए वे कई लोगों पर लाठी का इस्तेमाल करना चाहते हैं।उन्होंने कहा कि इस तरह के विकास के लिए लोगों को वास्तव में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और जुनून के साथ काम करना पड़ता है,लेकिन उन प्रयासों का फल बहुतों को नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि जुनून को फिर से जगाने के लिए लाठी का इस्तेमाल उनके ही लोगों पर करना चाहिए,ऐसी स्थितियां हर जगह देखने को मिलती हैं।

कोई SC, ST, OBC नहीं सब हिंदू एक है, सब भारतीय एक है : रामभद्राचार्य

 जयपुर जयपुर में कथा कहने आए जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि सरकारों को जाति के आधार पर आरक्षण ख़त्म कर आर्थिक आधार पर देना चाहिए और ये जल्दी होनेवाला है. उन्होंने कहा कि हमने सवर्ण समाज में जन्म लेकर पाप नहीं किया है. रामभद्राचार्य यहीं नहीं रूके, उन्होंने आगे कहा, ‘शत प्रतिशत नंबर लाकर सवर्ण का बच्चा जूता सीए और चार प्रतिशत लाकर एससी का बच्चा नौकरी पाए. इसको समाप्त करना हीं होगा और ये होगा. कोई SC, ST, OBC नहीं सब हिंदू एक है, सब भारतीय एक है. आर्थिक आधार पर आरक्षण कर दो. तब यह जाति वाला गृह युद्ध अपने आप समाप्त हो जाएगा.’ राजस्थान के सीएम को लेकर किया चौंकाने वाला दावा उन्होंने आगे कहा, ‘ब्राह्मण मुख से निकला है, क्षत्रिय भुजा से वैश्य जंघा से और शूद्र चरण से. चरण पर सिर झुकता है तो वो अपवित्र कैसे हो गया. हिंदुओं में कोई छूआछूत नहीं है. 80 परसेंट देश में हिंदू करना होगा फिर सारी समस्या ख़त्म हो जाएगी.’ रामभद्राचार्य ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने कहा, ‘जानते हैं जब मुख्यमंत्री की चर्चा चल रही थी कि राजस्थान का सीएम कौन बनेगा तो मैंने उपर बात की और कहा कि राजस्थान का मुख्यमंत्री ब्राह्मण को बनाओ. सभी ने कहा कि कैसे होगा? वसुंधरा जी कैसा मानेंगी? तब हमने कहा कि उन्हीं के मुंह से कहलवाओ और इस तरह से मेरे समझ से राजस्थान को पहला ब्राह्मण मुख्यमंत्री मिला.’ इस मौक़े पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ मज़बूत करने की भी अपील की.

ग्वालियर नगर निगम अपने इस कदम से होगा 01 करोड़ 33 लाख रुपए का फायदा, जाने क्या है मामला

ग्वालियर मध्यप्रदेश में डीजल और पेट्रोल (Petrol-Diesel) पर भारी टैक्स लगता है, इससे ईंधन के दाम पड़ोसी राज्य की तुलना में बढ़े हुए हैं. महंगे पेट्रोल-डीजल की खरीदी की मार राज्य के नागरिक पहले ही परेशान थे लेकिन अब राज्य सरकार और उससे जुड़े संस्थान भी इससे चिंतित हो रहे हैं. अब वे भी पड़ेसी राज्य यूपी (UP) से सस्ता डीजल व पेट्रोल खरीदने की तैयारी में हैं. सरकार से अनुदान लेने वाली ग्वालियर नगर निगम (Nagar Nigam Gwalior) ने अब यूपी से डीजल-पेट्रोल खरीदने का फैसला लिया है. साल भर में होगी इतने की बचत MP में पेट्रोल-डीजल पर अधिक वैट (VAT) और अन्य टैक्स के चलते निगम ने UP के झांसी शहर से डीजल खरीदने का निर्णय लिया है, जिससे निगम को सालाना  लगभग 01 करोड़ 33 लाख रुपए का फायदा होगा, इस के लिए बाकायदा परिषद से प्रस्ताव पास भी हो चुका है. ऐसे में पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने एक बार फिर से प्रदेश सरकार से MP में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने की मांग की है. क्या कहते हैं आंकड़े?     MP के ग्वालियर में डीजल 91.80 रु./लीटर है. इस पर VAT 19%, अतिरिक्त VAT 1.50 रु/ली. और सेस 11% लगता है.     UP के झांसी में डीजल 87.49 रु./लीटर है. वहां पर वैट 17.08% लगता है. इसके अलावा अन्य कोई टैक्स नहीं लिया जाता है.     UP से डीजल खरीदने के लिए निगम परिषद में आए प्रस्ताव को सभापति मनोज तोमर ने मंजूरी दे दी है.     ग्वालियर नगर निगम में अधिकारियों के वाहन सहित छोटे-बड़े लगभग 770 वाहन हैं. जबकि एक सैकड़ा वाहन और आने वाले हैं.  डीजल खपत (3 लाख लीटर) होती है. एक टैंकर में 12 हजार लीटर डीजल होता है.     UP-झांसी से डीजल खरीदने पर नगर निगम को 1 लीटर डीजल पर 3 रुपये 70 पैसे की बचत होगी, यानी एक महीने में 11लाख 10 हज़ार और एक साल में 1करोड़ 33 लाख रुपए का फायदा होगा. एमपी में बॉर्डर पर मौजूद पंप संचालक भी हैं परेशान मध्यप्रदेश में डीजल-पेट्रोल पर ज्यादा वैट होने और अन्य टैक्स लगने से यहां  इसकी कीमतें बहुत ज्यादा हैं. यूपी के सीमावर्ती जिले भिंड, मुरैना, दतिया, रीवा, सतना, सीधी और ग्वालियर के पेट्रोल पम्प मालिक यह आरोप लगाते रहे हैं कि इस दाम के चलते सीमावर्ती इलाकों के पम्प बदहाली में हैं. लोग इटावा, आगरा और झांसी से माल खरीद लाते हैं क्योंकि दोनों प्रदेशों की दरों में भारी अंतर है. ग्वालियर नगर निगम के UP से डीजल खरीदने के निर्णय के बाद अब ग्वालियर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि MP के बॉर्डर पर संचालित पेट्रोल पंपों की स्थिति खराब है, अधिकतर बंद होने के कगार पर हैं ऐसे में MP में पेट्रोल डीजल पर वैट कम किया जाए. नगर निगम अधिकारी का क्या कहना है? नगर  निगम कमिश्नर अमन वैष्णव ने खुद एमआईसी के माध्यम से इसका प्रस्ताव परिषद में ये प्रस्ताव लेकर आए थे. प्रस्ताव में UP के झांसी से डीजल खरीदने की बात कही गई है, जिसे सभापति मनोज तोमर ने सर्वसम्मति से पास कर दिया.  

मंत्री केदार कश्यप ने नारायणपुर के वासियों को दी करोड़ों की सौगते

नारायणपुर, राज्य सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कौशल विकास, सहकारिता और संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने नारायणपुर के एक दिवसीय भ्रमण के दौरान 2 करोड़ 12 लाख रूपये का लोकार्पण एवं 65 करोड़ 5 लाख रूपये का भूमिपूजन कर जिले वासियों को सौगत दिया। उन्होंने राहत शिविर भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ 50 लाख रूपये, शबरी एम्पोरियम का नवनीकरण कार्य हेतु 24 लाख 52 हजार रूपये, कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय 100 सीटर हेतु 37 लाख 70 हजार रूपये से निर्मित भवनों का लोकापर्ण किया। उन्होंने कस्तुरमेटा से इकपाड़ सड़क निर्माण हेतु 2 करोड़ 19 लाख 94 हजार रूपये, कस्तुरमेटा कुतुल रोड से तोके सड़क निर्माण हेतु 10 करोड़ 32 लाख 38 हजार रूपये, सोनपुर मसपुर रोड से तुमेरादि सड़क निर्माण हेतु 14 करोड़ 58 लाख 98 हजार रूपये, सोनपुर से ऐहनार सड़क निर्माण हेतु 4 करोड़ 32 लाख 60 हजार रूपये, कड़ेमेटा से कोडोली सड़क निर्माण हेतु 18 करोड़ 78 लाख 64 हजार रूपये और कस्तुरमेटा से मकसोली सड़क निर्माण हेतु 18 करोड़ 67 लाख 41 हजार रूपये से निर्माण हेतु भूमिपूजन किया गया। इस अवसर पर इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक रूपसाय सलाम, जिला पंचायत सदस्य प्रताप मण्डावी, पार्षद जैकी कश्यप, सरपंच कानागांव मगंड़ूराम नुरेटी, बृजमोहन देवांगन, नरेंद्र मेश्राम, प्रीतेश जैन, नारायण मरकाम, रीता मण्डल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत वासु जैन, अपर कलेक्टर बीरेंद्र बहादुर पंचभाई, एसडीएम अभयजीत मण्डावी, सहायक आयुक्त राजेंद्र सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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