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पीएम जन-मन: हितग्राहियों को मिले पक्के घर, कच्चे घर की कठिनाईयों से मिली निजात

भोपाल केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) प्रदेश की तीन विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सभी पात्र परिवारों के पक्के घर तैयार किये जा रहे हैं। ‘सबको पक्का घर’ देने की लक्ष्य पूर्ति ‍के लिये प्रदेश के पीवीटीजी आबादी बहुल 24 जिलों में बड़ी संख्या में पीवीटीजी परिवार सर्वेक्षित किये गये थे। सभी चिन्हित/पात्र परिवारों को पक्के घर बनाकर देने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा दो चरण में कुल एक लाख 87 हजार 138 पीएम आवास मंजूर किये जा चुके हैं। ‘पहले चरण में’ केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 1 लाख 54 हजार पीएम आवासों को मंजूरी दी गई थी। इन मंजूर आवासों में वित्त वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में 1 लाख 44 हजार 200 पक्के घरों का निर्माण कार्य पूरा कर लेना तय किया गया। करीब 288 करोड़ 400 लाख रूपये की लागत से बनने वाले इन पक्के घरों का निर्माण कार्य दिसम्बर 2024 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 36 हजार 720 से अधिक पक्के घर तैयार कर संबंधित पीवीटीजी हितग्राहियों को प्रदाय किये जा चुके हैं। केन्द्र सरकार द्वारा इन पक्के आवासों के निर्माण के लिये पीएम आवास राशि चरणबद्ध रूप से हितग्राहियों के खाते में अंतरित की गई। पहली किश्त में एक लाख 4 हजार 242 हितग्राहियों, दूसरी किश्त में 80 हजार 866 हितग्राहियों एवं तीसरी किश्त 56 हजार 198 हितग्राहियों को निर्माण राशि उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की जा चुकी है। ‘दूसरे चरण में’ इस महाअभियान में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रदेश को 33 हजार 138 अतिरिक्त आवास मंजूर किये गये हैं। केन्द्रीय मंत्रालय द्वारा प्रदेश के 21 जिलों में निवासरत शेष रह गये पीवीटीजी परिवारों को भी पक्के घर की सौगात देने के लिये यह विशेष मंजूरी दी गई है। केन्द्रीय मंत्रालय द्वारा हाल ही में श्योपुर जिले को 7561, शिवपुरी को 5154, उमरिया को 4092, शहडोल 2591, अशोकनगर 2294, गुना 2084, सिंगरौली 1895, डिंडोरी 1532, अनूपपुर 1522, सीधी 1042, मंडला 903, मुरैना 695, विदिशा 448, बालाघाट 401, ग्वालियर 266, छिंदवाड़ा 202, नरसिंहपुर 158, सिवनी 117, दतिया 110, जबलपुर 42 एवं रायसेन जिले को 29 पीएम (पक्के) आवास मंजूर किये गये हैं। इस प्रकार दो चरणों में मध्यप्रदेश को अब तक 1 लाख 87 हजार 138 पीएम आवास की मंजूरी मिल चुकी है। पीवीटीजी परिवारों के ये पक्के घर केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्ययोजना के अनुसार तैयार कराये जा रहे है। इन्हीं नवनिर्मित पक्के घरों में विद्युतिकरण का कार्य केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय के तकनीकी मार्गदर्शन में प्रदेश के ऊर्जा विभाग द्वारा कार्ययोजना के अनुरूप चरणबद्ध रूप से कराया जा रहा है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सभी पीवीटीजी बहुल गांवों तक सम्पर्क/पहुंच रोड का निर्माण भी स्टेप-बाय-स्टेप कराया जा रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहुमुखी फिल्मकार स्व. राज कपूर को किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार एवं पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात फिल्म निर्माता, निर्देशक एवं कलाकार स्व. राज कपूर की सौवीं जयंती पर उन्हें सादर नमन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हिन्दी फिल्म जगत के विकास में फिल्म अभिनेता, निर्माता और निर्देशक के रूप में स्व. कपूर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्व. राजकपूर का मध्यप्रदेश से भी पारिवारिक संबंध रहा है। स्व. राजकपूर को कला और सिनेमा जगत में हमेशा याद किया जाएगा।  

प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रेप-2 के नियम हुए सख्त, अन्य डीजल इंजन बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाई

नई दिल्ली दिल्ली सहित एनसीआर में सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) दो, तीन और चार के प्रावधानों को संशोधित किया है। इसके तहत ग्रेप तीन के कुछ प्रावधानों को ग्रेप दो शामिल कर उसे सख्त बनाया गया है। इसके तहत बीएस छह डीजल इंजन, इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को छोड़कर एनसीआर के रास्ते दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले अन्य डीजल इंजन बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पहले यह प्रावधान ग्रेप तीन में शामिल था। लेकिन अब सीएक्यूएम ने इसे ग्रेप दो में शामिल कर दिया है। मौजूदा समय में दिल्ली एनसीआर में ग्रेप दो के प्रावधान लागू हैं। इसलिए ग्रेप दो में शामिल नए प्रावधान भी तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। सीएक्यूएम ने दिल्ली और एनसीआर से संबंधित राज्यों के परिवहन विभाग, पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और संबंधित एजेंसियों को इस पर अमल करने का निर्देश दिया है। सीएक्यूएम के अनुसार सर्दी के मौसम में लंबे समय तक हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रहती है। ग्रेप के प्रावधानों में कुछ अहम संशोधन किए गए इसके मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ग्रेप के प्रावधानों में कुछ अहम संशोधन किए गए हैं और ग्रेप तीन के शुरुआती तीन प्रावधानों को ग्रेप दो में शामिल कर दिया गया है। इसके तहत चिन्हित सड़कों की प्रतिदिन मशीन से सफाई और पानी का छिड़काव करना होगा। इसके लिए मशीनों की कार्य अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। सभी हाट स्पाट व वाहनों के अधिक दबाव वाले सड़कों पर धूल की रोकथाम लिए पानी में रसायन मिलाकर प्रतिदिन छिड़काव करना होगा। ठंड से बचाव के लिए इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराने के निर्देश सार्वजनिक परिवहन की मजबूती के लिए सीएनजी व इलेक्ट्रिक बसें और मेट्रो के फेरे बढ़ाने के साथ-साथ सुबह-शाम व्यस्त और गैर व्यस्त समय के लिए अलग-अलग किराए का प्रावधान करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही सीएक्यूएम ने सभी आरडब्ल्यूए को सुरक्षा कर्मचारियों के अलावा सफाई, बागवानी के कर्मचारियों को भी ठंड से बचाव के लिए इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। ताकि कर्मचारी ठंड से बचाव के लिए लकड़ी, उपले या कूड़ा न जलाएं। ग्रेप तीन में ये प्रतिबंध होंगे लागू     ग्रेप तीन में दिव्यांग लोगों को दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जिले में व्यक्तिगत जरूरत के लिए बीएस तीन पेट्रोल इंजन और बीएस चार डीजल इंजन के हल्के वाहन (कार) का इस्तेमाल की छूट रहेगी।     दिल्ली में माल ढुलाई के लिए बीएस चार के डीजल इंजन वाले एमजीवी (मीडियम गूड्स व्हीकल) पर प्रतिबंध रहेगा। इस प्रतिबंध से सिर्फ आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट रहेगी।     दिल्ली से बाहर पंजीकृत बीएस चार और उससे कम मानक के डीजल इंजन वाहनों को ग्रेप तीन के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश वर्जित रहेगा। पहले ये प्रावधान चौथे चरण में शामिल थे।     ग्रेप तीन में दिल्ली एनसीआर के स्कूल पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई हाइब्रिड मोड में करा सकते हैं। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार आनलाइन या आफलाइन क्लास का विकल्प चयन कर सकते हैं।     ग्रेप चार में स्कूल छठवीं से नौवीं व 11वीं की कक्षा भी हाइब्रिड मोड में चला सकते हैं। ग्रेप तीन में दिल्ली सरकार और एनसीआर से संबंधित राज्य सरकारें सरकारी विभागों व सिविक एजेंसियों के कार्यालय के समय में बदलाव कर सकती हैं।     आने वाले समय में जब भी ग्रेप तीन व चार लागू होंगे तो उसमें शामिल नए प्रावधानों का पालन संबंधित एजेंसियों को सुनिश्चित करना होगा। हवा की गुणवत्ता के आधार पर लगते हैं ग्रेप के प्रावधान     एयर इंडेक्स खराब श्रेणी- 201-300: ग्रेप एक     एयर इंडेक्स बेहद खराब श्रेणी- 301-400: ग्रेप दो     एयर इंडेक्स गंभीर श्रेणी- 401-450: ग्रेप तीन     एयर इंडेक्स खतरनाक श्रेणी-450 से अधिक: ग्रेप चार  

बुंदलेखंड में ठंड का कहर, बर्फ जमना हुई शुरू, मौसम विभाग का अलर्ट

Cold havoc in Bundelkhand, snow started accumulating, weather department alert मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड रीजन के नौगांव में इस समय तेज ठंड पड़ रही है. यहां का पारा 4.1 डिग्री सेल्सियस चला गया है. छतरपुर ! मध्य प्रदेश में इन दिनों ठंड ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है. प्रदेश के ज्यादातर जिलों में पारा गिरा है. जिसके चलते कड़ाके की ठंड पड़ रही है. वहीं बात अगर बुंदेलखंड अंचल की करें तो यहां भी ठंड बहुत बढ़ी है. छतरपुर जिले के नौगांव में सर्दी चरम सीमा पर पहुंच गई है. शनिवार की सुबह तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया. बुंदेलखंड का नौगांव ठंड का केंद्र बना हुआ है. हर दिन ठंड बढ़ रही है. तापमान में भौगोलिक स्थिति का असरछतरपुर जिले के नौगांव और खजुराहो में भौगोलिक स्थिति व ग्रेनाइट पत्थर का बड़ा असर होता है. अंग्रेजों के द्वारा बसाए नौगांव नगर की भौगोलिक स्थिति ही सबसे ज्यादा ठंड व गर्मी की वजह है. इसके साथ ही ग्रेनाइट के पहाड़ों के चलते भी मौसम का असर बढ़ जाता है. इसी तरह खजुराहो में भी भौगोलिक स्थिति व ग्रेनाइट के पहाड़ों के कारण सर्दी और गर्मी का असर आसपास के इलाके से एक से दो डिग्री अधिक बढ़ जाता है. कर्क रेखा के उत्तर में नौगांव विशेष स्थान पर बसा है. जिससे सूर्य की किरणें कम प्रभाव से पहुंचती है. जिससे ज्यादा ठंडा होती है. इसके साथ ही हिमाचल से आने वाली उत्तर पूर्वी हवाएं पहले पहुंचती है, इसलिए ठंड अधिक होती है. वहीं, नौगांव के नीचे चट्टानी मिट्टी की पथरीली परत है, जो जमीन की ऊर्जा विचरण की क्षमता को प्रभावित करती है. नौगांव में लुढ़का पारा, बाइक के ऊपर जमी बर्फजिले में ठंड दिनों-दिन कहर ढहा रही है. मैदानी इलाकों में भी बर्फ जमने लगी है. उमरिया मंदिर रोड निवासी विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि “शनिवार सुबह 5:30 बजे जब वे किसी काम से निकले, तो उनकी बाइक की सीट पर बर्फ की परत जमी हुई थी. उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया, जिसमें सुबह 5:32 का समय और 14 दिसंबर 2024 की तारीख दर्ज है.” नौगांव और इसके आस-पास के क्षेत्रों में ठंड का असर लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में मौसम वैज्ञानिक ने लोगों को सतर्क रहने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है.

अध्ययन में पाया गया कि पैरासिटामोल के कारण वृद्ध लोगों में पाचन तंत्र, हृदय और गुर्दे पर पड़ता दुष्प्रभाव

नई दिल्ली चिकित्सक की पर्ची के बिना मिलने वाली दवाओं में शामिल पैरासिटामोल 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में आंत, हृदय और गुर्दे से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है। एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है। हल्के से मध्यम बुखार के दौरान आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पैरासिटामोल, अस्थियों से जुड़ी बीमारियों के उपचार के लिए भी चिकित्सक द्वारा परामर्श दी जाने वाली पहली दवा है क्योंकि इसे प्रभावी, अपेक्षाकृत सुरक्षित और सुलभ माना जाता है। हालांकि, दर्द निवारण में पैरासिटामोल की प्रभावशीलता पर कुछ अध्ययनों में सवाल उठाये गए हैं, जबकि अन्य अध्ययनों ने लंबे समय तक इसके उपयोग से पाचन तंत्र संबंधी दुष्प्रभावों, जैसे अल्सर और रक्तस्राव, के बढ़ते जोखिम को रेखांकित किया है। ब्रिटेन के नॉटिंघम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए नवीनतम अध्ययन में पाया गया कि पैरासिटामोल के उपयोग से पेप्टिक अल्सर रक्तस्राव (पाचन तंत्र में अल्सर के कारण रक्तस्राव) के जोखिम में क्रमशः 24 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की वृद्धि होती है और आंत संबंधी रक्तस्राव में कमी आती है। अध्ययन के मुताबिक, पैरासिटामोल के सेवन से गुर्दे के गंभीर रोग का खतरा 19 प्रतिशत, दिल का दौरा पड़ने का खतरा नौ प्रतिशत तथा उच्च रक्तचाप का खतरा सात प्रतिशत बढ़ सकता है। आर्थराइटिस केयर एंड रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, ‘‘यह अध्ययन वृद्ध लोगों में गुर्दा, हृदय और आंत संबंधी दुष्प्रभावों को दर्शाता है।’’ नॉटिंघम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रमुख अनुसंधानकर्ता वेया झांग ने कहा, ‘‘कथित तौर पर सुरक्षित होने की वजह से पैरासिटामोल को अस्थियों से जुड़े रोगों के लिए कई उपचार दिशानिर्देशों में प्राथमिक दवा के रूप में अनुशंसित किया गया है, विशेष रूप से वृद्ध लोगों में, जिनमें दवा से उत्पन्न जटिलताओं का उच्च जोखिम होता है।’’ शोधकर्ताओं ने इन नतीजों पर पहुंचने के लिए 1,80,483 लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिन्हें बार-बार पैरासिटामोल दी गई थी।शोधकर्ताओं ने इसके बाद इन स्वास्थ्य रिपोर्ट की तुलना उसी आयु के 4,02,478 (4.02 लाख) लोगों से की, जिन्हें कभी भी बार-बार पैरासिटामोल नहीं दी गई थी।  

मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर दिखेंगी जल्द सरकारी बसें फर्राटे भरते

Government buses will soon be seen again on the roads of Madhya Pradesh. मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है। दो दशक पहले जहां सड़कों पर राज्य परिवहन निगम की बसें फर्राटे भरती दिखाई देती थी वहीं अब निजी बसों का बोलबाला है। तनाकुलित तथा स्लीपर कोच बसें तक प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रही है। राज्य परिवहन की बसें प्रदेश के विभिन्न शहरों को जोड़ने के अलावा दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रियों को लाती ले जाती थी। भोपाल। राज्य परिवहन निगम की इन बसों में जहां किराया वाजिब था तो वहीं विशिष्ट जनों व पत्रकारों के लिए पास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती थी। राज्य परिवहन निगम के संचालक मंडल में पहले नेताओं को रखा जाता था और अध्यक्ष का पद नौकरशाहों के जिम्में में होता था। एक बार का दिलचस्प वाकया है तब राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष एक नौकरशाह थे किसी पत्रकार ने अनौपचारिक चर्चा में उनसे पूछ लिया कि आपने बसों में यात्रा कब से नहीं की तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया था की आखिरी बस यात्रा 15 साल पहले की थी, इस चर्चा के बाद अध्यक्ष महोदय ने समस्त डिपो प्रबंधकों को यह निर्देश दिया कि वह महीने में दो बार बसों में यात्रा करें और यात्रियों से फीडबैक ले कर व्यवस्था सुचारू करें। इसके साथ ही अध्यक्ष ने स्वयं भी हर महीने बस में सफर करना शुरू कर दिया बाद में राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष पद पर नेताओं को पदस्थ किया जाने लगा और यही से पूरे सिस्टम में दीमक लगना शुरू हो गया। जिन डिपो प्रबंधकों को राज्य परिवहन निगम अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष से अच्छी सेटिंग होती थी वहां मनमानियां करने लगे। दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों में उन्ही ड्राइवर व कंडक्टरों को भेजा जाने लगा जो वापसी पर अच्छी खासी रकम उनको भेंट कर सके क्योंकि राज्य की सीमा पार करने के बाद टिकट चेकिंग का कोई डर नहीं, लोकल सवारियों लो और अपनी जेब गर्म करो वाला सिद्धांत चलता था। दूसरे राज्यों में स्थित राज्य परिवहन निगम के डिपो प्रबंधकों के रोस्टर पर अपने नाते रिश्तेदारों को रख लिया जो केवल वेतन लेते थे काम नहीं करते थे। राज्य परिवहन निगम के एक उपाध्यक्ष ने जब विधानसभा का चुनाव लड़ा तो डिपो प्रबंधकों ने उनके चुनावी खर्च में हिस्सेदारी की, किसी डिपो प्रबंधक ने पोस्टर का खर्च उठाया तो किसी ने विज्ञापनों के लिये भुगतान किया। इस तरह की व्यवस्था ने तथा भ्रष्टाचार ने राज्य परिवहन निगम को खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और आखिरकार 2005 में राज्य परिवहन निगम को बंद करना पड़ा हालांकि इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। राज्य परिवहन निगम बंद होने का फायदा निजी बस मालिकों ने उठाना शुरू किया यह वह समय था जब दिग्विजय सिंह की सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। दिग्गी सरकार घाटा बताती रही और भाजपा सरकार ने राज्य परिवहन निगम पर ही ताला लगा दिया और कुछ कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर बैठा दिया तो कुछ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया। खैर यह तो राज्य परिवहन निगम का हाल हुआ उधर निजी बस ऑपरेटर की मनमानी बढ़ने लगी। बस में क्षमता से अधिक यात्री भरना निर्धारित किराए से ज्यादा वसूलना, सवाल करने पर यात्रियों से बदसलूकी करना, यहां तक की मारपीट की नौबत आना इत्यादि। शहरी इलाकों में तो फिर भी ठीक-ठाक मगर ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ज्यादा खराब हो गए और लोग परेशान हो गए। राज्य परिवहन निगम बंद हो जाने के बाद भी जिन राज्यों से अंतर राज्य समझौता था उनकी बसे एमपी में आती रही। निजी ऑपरेटर इनका भी विरोध करने लगे। बहरहाल अब मोहन यादव की सरकार ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को 19 साल बाद फिर से शुरू करने का संकेत दिया है तदनुसार लोक परिवहन सेवा का प्रारूप तैयार कर कैबिनेट में पेश किया जाएगा फिर उस पर अमल होना शुरू होगा वैसे अभी यह तय नहीं है कि लोक परिवहन का संचालन किस तरह होगा महाराष्ट्र का मॉडल अपनाया जाए या पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर अमल किया जाए यह फैसला भी हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने मऊगंज को दी स्टेडियम, सिविल अस्पताल, देवतालाब मंदिर के विकास की सौगात

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में चलाये जा रहे जनकल्याण अभियान में प्रत्येक पात्र हितग्राही को शासन की विकास योजनाओं से लाभांवित किया जायेगा। इसके लिये ग्राम पंचायत एवं नगरीय क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर शिविर लगाकर पात्र नागरिकों को योजनाओं से जोड़ा जायेगा। उन्होंने कहा कि मऊगंज विकास की दौड़ में पीछे छूट गया था। हमारी सरकार ने मऊगंज को जिला बनाया और अब सरकार ही मऊगंज को विकास की सौगाते दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 5041 करोड़ की सीतापुर-हनुमना लिफ्ट इरिगेशन परियोजना का शिलान्यास किया। इस परियोजना से मऊगंज जिले के 400 से अधिक गांवों में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। समारोह में 5175 करोड़ रुपए के 57 निर्माण कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने खटखरी को नगर परिषद बनाने, दो सड़कों के उन्नयन, देवतालाब महाविद्यालय में 5 करोड़ रुपए की लागत से स्टेडियम के निर्माण, हनुमना में सिविल अस्पताल बनाने और देवतालाब शिव मंदिर में 5 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मऊगंज में आयोजित जनकल्याण पर्व समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति में सनातन मूल्यों को समाहित कर शिक्षा को नई दिशा दी है। सनातन मूल्यों का जो विरोध करेगा, देश उसके साथ खड़ा नहीं होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि मऊगंज रीवा और सतना सहित पूरा विंध्य क्षेत्र सादगी, सरलता और सदभाव का क्षेत्र है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के वनवास के 11 वर्ष इसी क्षेत्र के चित्रकूट में बिताये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए हर मांग पूरी की जाएगी। जन कल्याण अभियान में 16,100 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की कार्ययोजना पूरे प्रदेश के लिए बनाई गई है। इनमें से अकेले मऊगंज जिले को 5041 करोड़ रुपए की सौगात मिली है। पूरे क्षेत्र में विकास के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। आज ही बाणसागर बांध के बीच स्थित मनोरम सरसी टापू का लोकार्पण हुआ है। इससे क्षेत्र में पर्यटन को गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश को दो नदी जोड़ों परियोजनाओं के लिए एक लाख 70 हजार करोड़ रुपए की मंजूरी देकर किसानों को बहुत बड़ी सौगात दी है। प्रधानमंत्री मोदी सच्चे अर्थों में आधुनिक भागीरथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 60 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की प्रथम किश्त के रूप में 332 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से जारी किए। मुख्यमंत्री ने पोषण आहार योजना के तहत दो गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण आहार से युक्त अक्षय पात्र भेंट किए। मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री का जनजातीय लोकनृत्य गुदुम बाजा के मधुर स्वरों से स्वागत किया गया। महिलाओं ने पुष्पवर्षा कर अपने लाड़ले मुख्यमंत्री की अगवानी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौ-पूजन कर गौ-माता का सम्मान किया और गौ-संवर्धन का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने मऊगंज जिले के 100 से अधिक गायों की सेवा कर रहे सौखीलाल यादव को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने पुलिस बैण्ड की सराहना की। समारोह में मुख्यमंत्री को धातु निर्मित राधा-कृष्ण की प्रतिमा और डिजिटल गीता भेंट की गई। समारोह में विधायक देवतालाब एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम और विधायक मऊगंज प्रदीप पटेल ने मुख्यमंत्री का स्वागत कर क्षेत्र के विकास से संबंधित अपने सुझाव रखे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, जिले के प्रभारी और पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, विधायक मनगवां नरेन्द्र प्रजापति, विधायक त्योंथर सिद्धार्थ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, कमिश्नर बी.एस. जामोद, आईजी एम.एस. सिकरवार, कलेक्टर अजय श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक सुश्री रसना ठाकुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती सपना त्रिपाठी, जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार डेंगू का स्वरूप बदला हुआ रहा, लिवर पर भी हो सकता है इसका असर

इंदौर इंदौर शहर में बुधवार रात 13 वर्षीय बच्चे की डेंगू से मौत होने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर चिंता में आ गया है, क्योंकि उसके रिकॉर्ड में 20 नवंबर के बाद डेंगू का कोई नया मरीज दर्ज ही नहीं है। डेंगू हर दो-तीन वर्ष में अपना स्वरूप बदल लेता है। इस कारण मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लग जाती है। इंदौर में इस वर्ष अब तक डेंगू के 550 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 327 पुरुष और 223 महिलाएं हैं। वहीं मलेरिया के सात और चिकनगुनिया के 20 मरीज मिल चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार डेंगू का स्वरूप बदला हुआ रहा, क्योंकि बड़ी संख्या में मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी थी। वहीं कई मरीज ऐसे भी थे, जिनमें डेंगू के लक्षण थे लेकिन जांच रिपोर्ट निगेटिव आ रही थी। अचानक से प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं डेंगू में मरीज को लगता है कि वह स्वस्थ हो रहा है, लेकिन अचानक से इसमें प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। इसलिए इसका समय पर उपचार करवाना काफी आवश्यक होता है। डेंगू के कारण प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरते हैं। लिवर पर तेजी से असर होता है। मरीजों की बढ़ती संख्या सिर्फ इंदौर में ही नहीं रही, पूरे प्रदेश में इस वर्ष अधिक संख्या रही है। इसके वैरिएंट की जांच के लिए पुणे स्थित लैब में सैंपल भेजे जाते हैं, लेकिन अभी नहीं भेजे गए हैं। डेंगू के लक्षण वाले मरीजों को वायरल हिमोरेजिक फीवर बता दें कि इंदौर में इस वर्ष सात हजार लोगों में डेंगू के लक्षण नजर आने पर अलाइजा टेस्ट किया गया है। इसमें से लगभग 550 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। बाकी मरीजों में लक्षण होने के बाद भी रिपोर्ट निगेटिव पाई गई। सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के डॉ. अमित अग्रवाल ने दावा किया है कि निगेटिव रिपोर्ट आने वाले मरीजों में से 50 फीसदी में वायरल हिमोरेजिक फीवर पाया गया। इसके सारे लक्षण डेंगू बुखार जैसे ही होते हैं। हालांकि इसमें मरीज को डेंगू की अपेक्षा खतरा बहुत रहता है। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद लोग समझते हैं कि वह बिल्कुल ठीक है, उन्हें विशेषज्ञ की सलाह से उपचार लेना चाहिए। इससे ठीक होने में पांच से आठ दिन तक का समय भी लग जाता है। वायरल हिमोरेजिक फीवर में प्लेटलेट्स धीरे-धीरे कम होती है।

आधार कार्ड अपडेशन के लिए मुफ्त ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने की सुविधा 14 जून 2025 तक बढ़ी

नई दिल्ली आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने लाखों आधार धारकों को राहत दी है। अपडेशन के लिए मुफ्त ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने की सुविधा 14 जून 2025 तक बढ़ा दी है। मुफ्त अपडेट की समय सीमा शुरू में 14 जून, 2024 के लिए निर्धारित की गई थी, फिर 14 दिसंबर, 2024 तक बढ़ाने से पहले इसे बढ़ाकर 14 सितंबर, 2024 कर दिया गया था। एक्स पर प्राधिकरण ने पोस्ट किया है कि UIDAl लाखों आधार संख्या धारकों को लाभान्वित करने के लिए 14 जून 2025 तक मुफ्त ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा का विस्तार करता है। यह मुफ्त सेवा केवल myAadhaar पोर्टल पर उपलब्ध है। यूआईडीएआई लोगों को अपने Aadhaar में दस्तावेजों को अपडेट रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। जो लोग अपने आधार कार्ड की जानकारी बदलने की योजना बना रहे हैं, उनके पास ऐसा करने के लिए 14 जून 2025 तक का समय है। इससे पहले, मुफ्त अपडेट के लिए विंडो 14 दिसंबर को बंद हो गई थी। ऑनलाइन आधार डिटेल्स अपडेट करने के स्टेप्स 1. यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर आधार सेल्फ सर्विसपोर्टल पर जाएं अपने मोबाइल पर भेजे गए अपने आधार नंबर, कैप्चा और ओटीपी का उपयोग करके लॉग इन करें। अब दस्तावेज़ अपडेट वाले मेन्यू पर जाएं और मौजूदा डिटेल्स की समीक्षा करें। 4. ड्रॉप-डाउन सूची से उपयुक्त दस्तावेज के प्रकार का चयन करें और सत्यापन के लिए मूल दस्तावेजो की स्कैन की गई प्रतियां अपलोड करें। 5. सेवा अनुरोध संख्या को नोट करना याद रखें। यह आपके आधार अपडेट अनुरोध की प्रक्रिया के चरण को ट्रैक करने में आपकी सहायता करेगा। क्यों जरूरी है आधार अपडेट करना यदि आपके आधार डेटाबेस में कोई बदलाव शामिल करने की आवश्यकता है, तो आपको बाद में किसी भी परेशानी से बचने के लिए इसे अपडेट करना चाहिए। बच्चों के लिए, आपको यह ध्यान रखना होगा कि यदि आपने अपने बच्चे को आधार के लिए नामांकित किया है , जब वह पांच वर्ष से कम आयु का था, तो आपको कम से कम दो बार बायोमेट्रिक रिकॉर्ड अपडेट करवाना होगा- एक बार 5 वर्ष की आयु पार करने के बाद और दूसरा 15 वर्ष पूरा करने के बाद। बॉयोमीट्रिक जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन या फोटो से जुड़े अपडेट के लिए, व्यक्तियों को आधार नामांकन केंद्र या आधार सेवा केंद्र पर जाना होगा। ऑफ़लाइन अपडेट के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें… फॉर्म डाउनलोड करें: यूआईडीएआई की वेबसाइट से नामांकन/अपडेट फॉर्म डाउनलोड करें। केंद्र पर जमा करें: फॉर्म भरें, आवश्यक दस्तावेज लगाएं और जमा करें। बायोमेट्रिक डेटा प्रदान करें: बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रॉसेस को पूरा करें। रसीद प्राप्त करें: ट्रैकिंग प्रगति को ट्रैक करने के लिए अपने यूआरएन के साथ एक पर्ची प्राप्त करें।

16 और 17 दिसंबर को बारिश, बर्फबारी, कई राज्यों में ठंड का कहर, शीतलहर की चेतावनी

लखनऊ उत्तर भारत में पड़ रही ठंड के बीच मौसम विभाग ने बताया है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से जम्मू कश्मीर, लद्दाख और उसके आसपास के इलाकों में 16 और 17 दिसंबर को बारिश, बर्फबारी होने वाली है। यानी कि मौसम बिगड़ने वाला है। इसके अलावा, आने वाले दिनों में यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में शीतलहर की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, कल साउथईस्ट बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है, जिसकी वजह से दक्षिण में कई राज्यों में बारिश होगी। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो तमिलनाडु में भारी से बहुत भारी बारिश हुई। इसके अलावा, पंजाब, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में शीतलहर देखी गई। इन राज्यों में मूसलाधार बारिश मौसम विभाग ने बताया कि तमिलनाडु में 17 और 18 दिसंबर को भारी से बहुत भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, 14 और फिर 16-19 नवंबर तक भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। वहीं, केरल में 14, 18, 19 दिसंबर को भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, साउथ इंटीरियर कर्नाटक में 17 और 18 दिसंबर को भारी बारिश का अलर्ट है। अंडमान और निकोबार द्वीप में 14 और 15 दिसंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड उत्तर भारत की ठंड की बात करें तो उत्तर पश्चिम भारत के राज्यों में न्यूनतम तापमान 5-10 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है, जबकि सेंट्रल भारत में यह 10-16 डिग्री सेल्सियस के बीच है। ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, वेस्टर्न इंडिया में भी इतना ही तापमान चल रहा है। पिछले 24 घंटे में न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। आज पंजाब के आदमपुर में मैदानी इलाकों में सबसे कम तापमान रिकॉर्ड किया गया जोकि 0.7 डिग्री सेल्सियस था। उत्तर पश्चिम भारत में अगले 24 घंटे में मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। मध्य भारत में अगले तीन दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई बदलाव नहीं होगा और फिर उसके बाद दो दिनों तक दो से तीन डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ जाएगा। यूपी-बिहार में शीतलहर की चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार, पंजाब में 14 दिसंबर, मध्य प्रदेश में 14 और 15 दिसंबर को शीतलहर चलने वाली है। इसके अलावा, जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 14-16 दिसंबर, हिमाचल प्रदेश, विदर्भ, बिहार, झारखंड, तेलंगाना में 14 दिसंबर, पंजाब में 15 दिसंबर, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा में 14 और 15 दिसंबर, पश्चिमी राजस्थान में 14 दिसंबर और 17-20 दिसंबर, पूर्वी राजस्थान में 14-20 दिसंबर, मध्य प्रदेश में 16 दिसंबर को शीतलहर चलने की संभावना है। मध्य प्रदेश में 14 और 25 दिसंबर को कोल्ड डे की वॉर्निंग दी गई।

दिल्ली-एनसीआर में कोल्ड वेव का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा, तेज हवाओं ने ठंड का एहसास बढ़ाया

नोएडा दिल्ली-एनसीआर में लगातार चल रही तेज हवाओं ने ठंड का एहसास को बढ़ा दिया है। कोल्ड वेव का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में लोगों को घने कोहरे का सामना करना पड़ेगा। इस दौरान पारे में और भी ज्यादा गिरावट दर्ज की जाएगी। मौसम विभाग के मुताबिक, 14 दिसंबर को अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान 8 दर्ज किया गया है। वहीं 15 दिसंबर को अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री रहने की संभावना है। 16 दिसंबर से न्यूनतम तापमान में और गिरावट दर्ज होने की उम्मीद है और घना कोहरा छाया रह सकता है। 16 दिसंबर को अधिकतम तापमान 23, न्यूनतम तापमान 6 डिग्री रहने की संभावना है। मौसम विभाग की मानें तो 16 दिसंबर के बाद से एनसीआर के लोगों को लगातार कोहरे का सामना करना पड़ेगा। इस दौरान पारे में भी लगातार गिरावट दर्ज की जाएगी। गौरतलब है कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते इस बार पहाड़ों पर जमकर बर्फबारी हो रही है। इसका असर एनसीआर में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। जिन पहाड़ों पर बीते कई सालों से बर्फबारी नहीं हुई थी, वहां पर वादियां बर्फ से पटी पड़ी हैं। इस कारण दिल्ली-एनसीआर में कोल्ड वेव की दस्तक हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक, बीते दिनों न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। दिल्ली का न्यूनतम तापमान आगे और भी गिरने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फ से ढकी पहाड़ियों से आ रही ठंडी हवाओं और साफ आसमान के कारण तापमान में गिरावट आई है। लगातार बढ़ती ठंड के साथ-साथ दिल्ली समेत पूरे एनसीआर का मौसम भी साफ बना हुआ है, जिसकी वजह से पारे में ज्यादा गिरावट दर्ज की जा रही है।  

तानसेन शताब्दी विशेष : एक शताब्दी से अक्षुण्ण परम्पराओं से सज रहा एक समारोह

भोपाल भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनादि परम्परा के श्रेष्ठ कला मनीषी तानसेन को श्रद्धांजलि एवं स्वरांजलि देने के लिये ग्वालियर में मनाये जाने वाले तानसेन समारोह ने सौ वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है। इस समारोह की सबसे बड़ी खूबी सर्वधर्म समभाव और इससे जुड़ी अक्षुण्ण परम्पराएं हैं। भारतीय संस्कृति में रची बसी गंगा-जमुनी तहजीब के सजीव दर्शन तानसेन समारोह में होते हैं। मुस्लिम समुदाय से बावस्ता देश के ख्यातिनाम संगीत साधक जब इस समारोह में भगवान कृष्ण व राम तथा नृत्य के देवता भगवान शिव की वंदना राग-रागिनियों में सजाकर प्रस्तुत करते हैं, तो साम्प्रदायिक सदभाव की सरिता बह उठती है। तानसेन समारोह का प्रारंभ शहनाई वादन से होता है। इसके बाद ढ़ोली बुआ महाराज की हरिकथा और फिर मीलाद शरीफ का गायन। सुर सम्राट तानसेन और प्रसिद्ध सूफी संत मोहम्मद गौस की मजार पर चादर पोशी भी होती है। ढ़ोली बुआ महाराज अपनी संगीतमयी हरिकथा के माध्यम से कहते हैं कि धर्म का मार्ग कोई भी हो, सभी ईश्वर तक ही पहुंचे हैं। उपनिषद् का भी मंत्र है “एकं सद् विप्र: बहुधा वदन्ति”। रियासतकाल में फरवरी 1924 में ग्वालियर में “उर्स तानसेन” के रूप में शुरू हुए इस समारोह का आगाज हरिकथा व मौलूद (मीलाद शरीफ) के साथ ही हुआ था। तब से अब तक उसी परम्परा के साथ तानसेन समारोह का आगाज होता आया है। इतनी सुदीर्घ परम्परा के उदाहरण बिरले ही हैं। तानसेन समारोह में नए आयाम तो जुड़े, पर पुरानी परम्पराएं अक्षुण्ण रही हैं। अब यह समारोह विश्व संगीत समागम का रूप ले चुका है। साथ ही समारोह की पूर्व संध्या पर उपशास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम “गमक” का आयोजन भी होता है। इस साल शताब्दी समारोह होने से पूर्व रंग के रूप में मध्यप्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों में भी संगीत सभाएं आयोजित की गईं। हर जाति, धर्म व सम्प्रदाय से ताल्लुक रखने वाले श्रेष्ठ व मूर्धन्य संगीत कला साधकों ने कभी न कभी इस आयोजन में अपनी प्रस्तुति दी है। शास्त्रीय गायक सुश्री असगरी बेगम, पं. भीमसेन जोशी व डागर बंधुओं से लेकर मशहूर शहनाई नवाज उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ, सरोद वादक अमजद अली खाँ, संतूर वादक पं. शिवकुमार शर्मा, मोहनवीणा वादक पं. विश्वमोहन भट्ट जैसे मूर्धन्य संगीत कलाकार इस समारोह में गान महर्षि तानसेन को स्वरांजलि देने आ चुके हैं। वर्ष 1989 में तानसेन समारोह में शिरकत करने आये भारत रत्न पंडित रविशंकर ने कहा था ‘”यहां एक जादू सा होता है, जिसमें प्रस्तुति देते समय एक सुखद रोमांच की अनुभूति होती है'”। एक बार मशहूर पखावज वादक पागलदास भी तानसेन के उर्स के मौके पर श्रद्धांजलि देने आये, लेकिन रेडियो के ग्रेडेड आर्टिस्ट नहीं होने के कारण समारोह में भाग नहीं ले सके। उन्होंने तानसेन की मजार पर ही बैठ कर पखावज का ऐसा अद्भुत वादन किया कि संगीत रसिक मुख्य समारोह से उठकर उनके समक्ष जा कर बैठ गये। “तानसेन संगीत समारोह” की यह भी खूबी रही है कि पहले राज्याश्रय एवं स्वाधीनता के बाद लोकतांत्रिक सरकार के प्रश्रय में आयोजित होने के बावजूद इस समारोह में सियासत के रंग कभी दिखाई नहीं दिये। यह समारोह तो सदैव भारतीय संगीत के विविध रंगों का साक्ष्य बना है। आधुनिक युग में शैक्षिक परिदृश्य से जहां गुरू शिष्य परम्परा लगभग ओझल हो गई है। भारतीय लोकाचार में समाहित इस महान परम्परा को संगीत कला के क्षेत्र में आज भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। तानसेन समारोह में भी भारत की इस विशिष्ट परम्परा के सजीव दर्शन होते हैं। संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर के लिए कहावत प्रसिद्ध है कि यहां बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुढ़कते है, तो ताल में। इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढकर एक संगीत प्रतिभायें संगीत संसार को दी हैं और संगीत सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपरि हैं। लगभग 505 वर्ष पूर्व ग्वालियर जिले के बेहट गांव की माटी में मकरंद पाण्डे के घर जन्मा ‘”तन्ना मिसर'” उर्फ तनसुख अपने गुरू स्वामी हरिदास के ममतामयी अनुशासन में एक हीरे सा परिष्कार पाकर धन्य हो गया। तानसेन की आभा से तत्कालीन नरेश व सम्राट भी विस्मित थे और उनसे अपने दरबार की शोभा बढ़ाने के लिये निवेदन करते थे। गान महर्षि तानसेन की प्रतिभा से बादशाह अकबर भी स्तम्भित हुए बिना न रह सके। बादशाह की जिज्ञासा यह भी थी कि यदि तानसेन इतने श्रेष्ठ हैं तो उनके गुरू स्वामी हरिदास कैसे होंगे। यही जिज्ञासा बादशाह अकबर को वेश बदलकर बृन्दावन की कुंज-गलियों में खींच लाई थी। वैज्ञानिक शोधों में संगीत के प्रभाव से पशु, पक्षी, वनस्पति, फसलों आदि पर भी असर प्रमाणित हुआ है। तानसेन के समकालीन और अकबर के नवरत्नों में से एक अब्दुल रहीम खानखाना द्वारा रचित इस दोहे में कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि “विधिना यह जिय जानि के शेषहि दिये न कान। धरा मेरू सब डोलि हैं, सुनि तानसेन की तान”। कुछ इतिहासकारों का मत है कि यह कालजयी दोहा सूरदास ने अपने मित्र तानसेन के सम्मान में रचा था। बहरहाल, यह दोहा किसी की भी रचना हो, पर इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह दोहा गान मनीषी तानसेन के उच्चकोटि के गायन को चरितार्थ करता है। आरंभ में तानसेन जब संगीत का ककहरा सीख रहे थे, तब ग्वालियर पर कलाप्रिय राजा मानसिंह तोमर का शासन था। तानसेन की संगीत शिक्षा भी इसी वातावरण में हुई। राजा मानसिंह तोमर की मृत्यु होने और विक्रमाजीत से ग्वालियर का राज्याधिकार छिन जाने के कारण यहां के संगीतज्ञों की मंडली बिखरने लगी। तब तानसेन भी वृंदावन चले गये और वहां उन्होनें स्वामी हरिदास जी एवं गोविन्द स्वामी से संगीत की उच्च शिक्षा प्राप्त की। संगीत शिक्षा में पारंगत होने के उपरांत वे शेरशाह सूरी के पुत्र दौलत खां के आश्रय में रहे। इसके पश्चात बांधवगढ़ (रीवा) के राजा रामचन्द्र की राजसभा में सम्मानजनक स्थान पर सुशोभित हुए। मुगल सम्राट अकबर ने तानसेन के गायन की प्रशंसा सुनकर उन्हें अपने दरबार में बुला लिया और अपने नवरत्नों में स्थान दिया। तानसेन प्रथम संगीत मनीषी थे, जिन्होंने राग मल्हार में कोमल गांधार और निषाद के दोनों रूपों का बखूबी प्रयोग किया। तानसेन को मियां की टोड़ी के आविष्कार का भी श्रेय है। कंठ संगीत में तानसेन अद्वितीय थे। अबुल फजल ने “आईन-ए-अकबरी” में तानसेन के बारे … Read more

कांग्रेस ने किया विभिन्न समस्याओं को लेकर विधानसभा का घेराव करने का ऐलान, एकजुटता दिखाने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव में विजयपुर में मिली जीत के बाद से कांग्रेस उत्साहित है और उसने विभिन्न समस्याओं को लेकर विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है। इस घेराव के जरिए पार्टी अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है। राज्य का विधानसभा सत्र 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है और इस सत्र के गहमागहमी वाले रहने के आसार हैं। कांग्रेस जहां विधानसभा के भीतर सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी में है तो वही सड़क पर भी उतरने का ऐलान किया जाता है। पार्टी 16 दिसंबर को विधानसभा का घेराव करने जा रही है। यह घेराव राज्य में बढ़ती मादक पदार्थ की तस्करी, जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग पर बढ़ते अत्याचार के अलावा महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाते हुए है। पार्टी के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद राज्य की सियासत में कांग्रेस की ओर से संभवत यह पहला अवसर है जब तमाम बड़े नेता कई दिनों से इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाले बयान जारी करने के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो भी जारी कर रहे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सहित अन्य नेता वीडियो जारी कर कार्यकर्ताओं से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। नेताओं द्वारा जारी किए गए बयानों में कहा गया है कि राज्य में मादक तस्करी लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार और राज्य की सरकार को इन मामलों का पता ही नहीं होता जबकि गुजरात की पुलिस यहां आकर दबिश देकर तस्करी का खुलासा करती है। वही एक जनजाति वर्ग के विधायक को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया जाता है क्योंकि वह चिकित्सक के खिलाफ आवाज उठाता है। इतना ही नहीं महिलाओं और बालिकाओं के शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। ज्ञात हो कि अभी हाल ही में दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए। विजयपुर में कांग्रेस जीती तो बुधनी में भाजपा को जीत मिली। बुधनी में पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा का अंतर कम हुआ। इन नतीजों से कांग्रेस खासी उत्साहित है। वैसे तो कांग्रेस में खुले तौर पर गुटबाजी नजर आती है और गुटबाजी किसी से छुपी भी नहीं है। इस बार पार्टी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि तमाम नेता इस घेराव प्रदर्शन को सफल बनाने की अपील करने के साथ सरकार पर हमला बोल रहे हैं।  

दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद : रिपोर्ट

नईदिल्ली भारत में इंडस्ट्रियल गतिविधियों में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में तेजी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह उपभोग में इजाफा और निर्यात में वृद्धि होना एवं महंगाई में कमी आना है। यह जानकारी क्रिसिल द्वारा जारी रिपोर्ट में दी गई।   इस साल हो सकता है ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार रिपोर्ट में कहा गया कि अब तक अधिक महंगाई दर, बढ़ी हुई ब्याज दरों ने क्रेडिट वृद्धि दर को कम किया है। साथ ही इससे उपभोग रिकवरी भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा रिपोर्ट में आगे कहा गया कि खाद्य महंगाई में कमी के संकेत मिले हैं। इसके कारण उपभोग बढ़ने की उम्मीद है और इस साल कृषि उत्पादन अच्छा होने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिल सकता है। दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरों के कारण शहरी अर्थव्यवस्था को कर्ज वृद्धि से मिलने वाले समर्थन में कमी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से कम व्यय का सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि पर मध्यम प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद है, लेकिन पिछले वित्त वर्ष की तुलना में विकास दर धीमी रहने की संभावना है। निवेश की गति को बनाए रखने के लिए निजी निवेश में पुनरुद्धार काफी महत्वपूर्ण होगा।  महंगाई दर में गिरावट देखने को मिल सकती है रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल वैश्विक व्यापार बढ़ने की उम्मीद है और इससे निर्यात वृद्धि को सहारा मिलेगा। हालांकि, वैश्विक अस्थिरताओं के कारण आपूर्ति श्रृंखला में दबाव का जोखिम बना हुआ है। निर्यात अगले साल अमेरिका-चीन टैरिफ वार की संभावना से उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं से प्रभावित होने की संभावना है। क्रिसिल के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरों और राजकोषीय समेकन से वित्त वर्ष 25 में जीडीपी विकास दर 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो कि पिछले वित्त वर्ष में 8.2 प्रतिशत था।  खाद्य तेल की कीमतों पर नजर रखने की जरूरत रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई कि आने वाले हफ्तों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी आएगी। दिसंबर में जब खरीफ की फसल बाजार में आती है तो सब्जियों की कीमतें कम हो जाती हैं। पिछले साल का उच्च आधार भी महंगाई को कम करने में मदद करेगा। हालांकि, खाद्य तेल की कीमतों के दबाव पर नजर रखनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आने के कारण आने वाले महीनों में महंगाई दर में गिरावट देखने को मिल सकती है। हमें उम्मीद है इस वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रह सकती है।  

देश में कैंसर के मामलों में वृद्धि मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरणीय कारकों और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण देखी जा रही: रिपोर्ट

मुंबई भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट मार्केट (कैंसर डायग्नोस्टिक टेस्ट मार्केट) 2033 तक लगभग 2 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने की उम्मीद है। आई डेटा और एनालिटिक्स कंपनी ग्लोबलडेटा की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कैंसर के मामलों में वृद्धि मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरणीय कारकों और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण देखी जा रही है। देश में कैंसर एक सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा बड़ा बोझ है दरअसल भारत में कैंसर एक सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा बड़ा बोझ है, जिससे एडवांस ऑन्कोलॉजी निदान और उपचार सेवाओं की मांग बढ़ रही है। हर साल 1 मिलियन से अधिक नए मामलों का निदान किया जाता है और हर साल लगभग 9,00,000 मौतें दर्ज की जाती हैं। रिसर्च से पता चलता है कि 2024 में, भारत एशिया-प्रशांत (एपीएसी) ऑन्कोलॉजी टेस्ट मार्केट का 3 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होगा। लेकिन, इनोवेटिव समाधान विकसित करने और कटिंग-एज रिसर्च का समर्थन करने के प्रयासों में तेजी लाकर, देश अपनी आबादी और वैश्विक समुदायों दोनों की स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं को तेजी से संबोधित करने की आकांक्षा रखता है। भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट में कई चुनौतियां ग्लोबलडाटा में चिकित्सा उपकरण विश्लेषक श्रेया जैन ने कहा, “भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट को पहुंच, सामर्थ्य और तकनीकी अपनाने से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञता के कारण, एआई-असिस्टेड निदान जैसी नई अप्रोच को अपनाना और इंटीग्रेट करना, सटीक चिकित्सा, थैरेपी को लेकर समस्या बनी हुई है।” कैलिब्रेटेड जीनोमिक टेस्ट, जोखिम के स्तर में सुधार कर सकते हैं जैन ने कहा, “भारतीय जनरेशन के अलग-अलग ग्रुप के लिए कैलिब्रेटेड जीनोमिक टेस्ट जैसे अनुकूलित निदान प्रारंभिक पहचान सटीकता को बढ़ा सकते हैं और जोखिम के स्तर में सुधार कर सकते हैं। इसी के साथ यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ट्रीटमेंट भारतीय मरीजों के यूनिक जेनेटिक प्रोफाइल से जुड़ा हो। यह न केवल भारत में जीवित रहने की दर में सुधार करने में मदद करता है, बल्कि कैंसर बायोलॉजी की वैश्विक समझ में भी योगदान देता है।” राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम और आयुष्मान भारत योजना मार्केट रिसर्च फर्म ‘रिसर्चएंडमार्केट्सडॉटकॉम’ की एक हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में कैंसर डायग्नोस्टिक टेस्ट मार्केट का भविष्य प्रवेश की इच्छुक कंपनियों के लिए आशाजनक बना हुआ है। यह सकारात्मक दृष्टिकोण राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम और आयुष्मान भारत योजना जैसी सरकारी पहल की वजह से बना हुआ है, जो कैंसर की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और उपचार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

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