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कार में लगी एलईडी हेडलाइट से चौंधियां जाती हैं आंखें, बढ़ रहा हादसे का खतरा

रायपुर राजधानी में बड़ी संख्या में अत्यधिक तीव्रता वाले एलईडी हेडलाइट लगे वाहन दौड़ रहे हैं, जो कई बार हादसों का कारण भी बन रहे हैं। शहर में हर दूसरा व्यक्ति अपने वाहन को हाई बीम पर चलाता है। ऐसे में एलईडी हेडलाइट की तीव्र रोशनी से वाहन चालकों के सामने कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाता है। इससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है। रात के समय में चालकों को किसी दुर्घटना से बचने के लिए विशेष सावधानियां बरतनी होती हैं। इसके बाद भी शहर में कई चालक नियमों के विपरित तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं। बावजूद इसके परिवहन विभाग और यातायात पुलिस इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। वहीं, ज्यादा देर तक तेज रोशनी के संपर्क में रहना आंखों को स्थायी रोग दे सकता है। तीव्र लाइटें बन रहीं हादसों का कारण वाहन को आकर्षक बनाने और अधिक दूरी तक रोशनी फैलाने के लिए वाहन मालिक बाजार से अलग-अलग किस्म की एलईडी और डीआरएल लाइटें लगवा लेते हैं। इनकी तेज रोशनी के कारण सामने से आ रहे वाहन चालकों की आंखें थोड़ी देर के लिए चौंधिया जाती हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। शहर में रात के समय हो रहे हादसों के प्रमुख कारणों में यह भी है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल होने वाले सड़क हादसों में औसतन 43% हादसे शाम छह बजे से रात 12 बजे के बीच होते हैं। इनका मुख्य कारण हाई बीम और रोड लाइट की कमी को माना गया है। शहर में कई स्थानों पर रोड लाइट की समस्या तो है ही, साथ ही हाई बीम पर चलने वाले वाहन इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। 60 वाल्ट से ज्यादा का बल्ब और हाई बीम अवैध नियमों के अनुसार, वाहन की हेडलाइट में 60 वाट से ज्यादा का बल्ब नहीं लगाया जा सकता, चाहें वो एलईडी हो या साधारण। कार निर्माता कंपनिया भी इस सीमा से अधिक बल्ब वाहनों पर नहीं लगाते। जिन वाहनों पर कंपनी की तरफ से डीआरएल लगी आती हैं, सिर्फ वही वैध हैं। यदि कोई अपने वाहन में बाजार से डीआरएल लाइट लगाते हैं, तो वो अवैध है। ऐसे में 10 हजार रुपये तक का चालान बनाया जा सकता है। वहीं यातायात नियमों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में हेडलाइट को हाई बीम पर सेट कर वाहन चालाने की अनुमति नहीं है। एलईडी लाइट का ज्यादा प्रभाव आंखों के लिए खतरा सेवानिवृत एडिशनल एसपी ट्रैफिक बलराम हिरवानी का कहना है कि दोपहिया, चारपहिया वाहनों पर लगी अत्यधिक तीव्रता की एलईडी लाइटें आंखों के लिए हानिकारक हैं। इनसे निकलने वाली तेज रोशनी से आंखों के सामने 30 सेकंड तक के लिए अंधेरा छा जाता है। इतने समय में वाहन चलाते वक्त कोई भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। वहीं, इनकी रोशनी से आंखों में अस्थाई सूक्ष्म अंधापन और मोतियाबिंद होने का भी खतरा रहता है, क्योंकि इनसे निकलने वाली रोशनी अधिकतर चमकीले सफेद रंग की होती हैं जो रेटिना पर बुरा प्रभाव डालती हैं।

म्यांमार में सत्ताधारी जुंटा का मुश्किल दौर जारी, जुंटा अभी भी रखाइन राज्य की राजधानी सित्तवे पर काबिज

नेपीडाॅ  म्यांमार में सत्ताधारी जुंटा का मुश्किल दौर जारी है। अराकान आर्मी नाम का विद्रोही गुट राखिने और चिन राज्यों में जुंटा सेना को लगातार पीछे धकेल रहा है। ये दोनों राज्य भारत की सीमा से सटे हैं। इसी बीच कई पड़ोसी देशों के अधिकारियों ने बैंकॉक में म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत की। क्या है पूरा मामला जानिए खबरों के मुताबिक,अराकान आर्मी ने रखाइन राज्य के अन्ना शहर में सैन्य मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। विद्रोहियों का दावा है कि चिन राज्य में लगभग 200 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। जुंटा अभी भी रखाइन राज्य की राजधानी सित्तवे पर काबिज है,जहां भारत की ओर से निर्मित बंगाल की खाड़ी में एक बंदरगाह है। अगर अराकान आर्मी सित्तवे पर कब्जा करने की कोशिश करती है,तो जुंटा अपनी वायु सेना का इस्तेमाल कर सकता है। सित्तवे सामरिक रूप से जुंटा और भारत दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। चीन की प्राइवेट मिलिट्री कंपनी के जवान कथित तौर पर राखिने के क्याउफ्यु बंदरगाह की रक्षा कर रहे हैं, जिसे चीन ने चीन म्यांमार इकोनॉमिक कॉरिडोर के हिस्से के रूप में बनाया है। बैंकॉक बैठक में भारत, चीन, बांग्लादेश, थाईलैंड के अधिकारियों ने सहमति जताई कि म्यांमार के साथ सीधा जुड़ाव महत्वपूर्ण और जरूरी है। थाईलैंड के विदेश मंत्री मारिस संगिआम्पोंगसा ने यह जानकारी दी। म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे ने सभा को सैन्य सरकार के राजनीतिक रोडमैप के बारे में बताया, जिसमें अगले साल होने वाले चुनाव भी शामिल हैं। अराकान आर्मी का मजबूत होना जुंटा के लिए चुनौती अराकान आर्मी लगातार मजबूत होती जा रही है और जुंटा के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। राखिने और चिन राज्यों में जुंटा के सैन्य ठिकाने लगातार अराकान आर्मी के हाथों में जा रहे हैं। इससे म्यांमार में हालात और बिगड़ने की आशंका है। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि ये दोनों राज्य भारत की सीमा से लगते हैं। सित्तवे बंदरगाह सामरिक रूप से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत द्वारा निर्मित है और बंगाल की खाड़ी में स्थित है। अगर अराकान आर्मी सित्तवे पर कब्जा कर लेती है तो भारत के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। चीन की भूमिका भी यहां अहम है। क्याउफ्यु बंदरगाह चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और वह अपनी प्राइवेट मिलिटरी कंपनी के जरिये इसकी रक्षा कर रहा है।

भोपाल में दो समुदायों के बीच झड़प-पथराव, लहराई गईं तलवारें… भारी पुलिस बल तैनात

Clash between two communities in Bhopal, stone pelting, swords waved… heavy police force deployed भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। मामला जहांगीराबाद की पुरानी गल्ला मंडी का है। जानकारी के मुताबिक, दो दिन पहले दो लोगों के बीच विवाद हुआ था, जिसमें अब दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों तरफ से पत्थर बरसाए गए। एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें लोग लाठियों और तलवारों के साथ नजर आ रहे हैं। सूचना मिलने पर पुलिस के अधिकारी पहुंचे और हालात काबू में किए। अभी स्थिति सामान्य है और भारी पुलिस बल तैनात है। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर विवाद की जड़ में क्या है। लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। थाना प्रभारी आशीष उपाध्याय ने बताया कि दो दिन पहले दोनों पक्षों के युवकों के बीच मारपीट हुई थी। उसका बदला लेने के लिए मंगलवार सुबह एक पक्ष ने एकजुट होकर दूसरे पक्ष पर हमला कर दिया।

साल 2025 कितने दिन बंद रहेंगे स्‍कूल, ऑफिस और बैंक, कितने मिलेंगे लॉन्‍ग वीकेंड, जानिए

 बैंक यूजर्स के लिए जरूरी खबर है। नए साल में  जनवरी से दिसंबर महीने 40 से 50 दिन बैंक बंद रहने वाले है।इनमें त्यौहार, साप्ताहिक अवकाश और दूसरा चौथा शनिवार शामिल है। बैंक बंद रहने से चेकबुक पासबुक समेत कई बैंकिंग संबंधित काम प्रभावित हो सकते है, हालांकि ऑनलाइन सेवाएं जारी रहेंगी, जिनका आप उपयोग कर सकते है। दरअसल, भारत में बैंक की छुट्टियों में राष्ट्रीय अवकाश (राजपत्रित अवकाश) और सरकारी अवकाश (राज्य और केंद्र दोनों) शामिल हैं।  राज्य सरकार की बैंक छुट्टियां अलग अलग राज्यों में अलग-अलग होती हैं, जबकि केंद्र सरकार की बैंक छुट्टियाँ पूरे देश में एक जैसी रहती हैं।इनके अलावा भारतीय बैंक हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं।इसके अलावा क्षेत्रीय छुट्टियां किसी विशेष राज्य या क्षेत्र से संबंधित होती हैं। एक राज्य में किसी दिन बैंक अवकाश होने का मतलब यह नहीं है कि दूसरे राज्य में भी छुट्टी होगी Bank Holiday : जनवरी से अप्रैल     नए साल का दिन – 1 जनवरी     गुरु गोबिंद सिंह जयंती – 6 जनवरी     स्वामी विवेकानंद जयंती – 12 जनवरी     मकर संक्रांति / पोंगल – 14 जनवरी     मोहम्मद हज़रत अली / लुई-नगाई-नी का जन्मदिन – 14 जनवरी     गणतंत्र दिवस – 26 जनवरी     बसंत पंचमी – 2 फरवरी     गुरु रविदास जयंती – 12 फरवरी     महाशिवरात्रि – 26 फरवरी     होली – 14 मार्च     बैंक खातों का वार्षिक समापन – 1 अप्रैल     बाबू जगजीवन राम जयंती – 5 अप्रैल     महावीर जयंती – 10 अप्रैल     तमिल नव वर्ष – 14 अप्रैल Bank Holiday : मई से अगस्त     गुरु रवींद्रनाथ टैगोर जयंती – 7 मई     बुद्ध पूर्णिमा – 12 मई     ईद-उल-जुहा (बकरीद) – 7 जून     गुरु अर्जुन देव शहीदी दिवस – 10 जून     रथ यात्रा – 27 जून     मुहर्रम – 6 जुलाई     रक्षाबंधन – 9 अगस्त     स्वतंत्रता दिवस – 15 अगस्त     जन्माष्टमी (वैष्णव) – 15 अगस्त     श्रीमंत शंकरदेव तिथि – 25 अगस्त     विनयगर चतुर्थी – 26 अगस्त Bank Holiday : सितंबर से दिसंबर     थिरुवोणम – 5 सितंबर     बैंक खातों का अर्ध-वार्षिक समापन – 1 अक्टूबर     महात्मा गांधी जयंती – 2 अक्टूबर     दशहरा – 2 अक्टूबर     दिवाली – 20 अक्टूबर     गोवर्धन पूजा – 22 अक्टूबर     छठ पूजा – 28 अक्टूबर     गुरु नानक जयंती – 5 नवंबर     क्रिसमस का दिन – 25 दिसंबर  वैकल्पिक या रेस्ट्रिक्टिड अवकाश     नया साल: 1 जनवरी (बुधवार)     गुरु गोबिंद सिंह जयंती: 6 जनवरी (सोमवार)     मकर संक्रांति/माघ बिहू/पोंगल: 14 जनवरी (मंगलवार)     बसंत पंचमी: 2 फरवरी (रविवार)     गुरु रविदास जयंती: 12 फरवरी (बुधवार)     शिवाजी जयंती: 19 फरवरी (बुधवार)     स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती: 23 फरवरी (रविवार)     होलिका दहन: 13 मार्च (गुरुवार)     डोलयात्रा: 14 मार्च (शुक्रवार)     राम नवमी: 16 अप्रैल (रविवार)     जन्माष्टमी (स्मार्त): 16 अगस्त (शुक्रवार)     गणेश चतुर्थी/विनायक चतुर्थी: 27 अगस्त (बुधवार)     ओणम या तिरुओणम: 5 सितंबर (शुक्रवार)     दशहरा (सप्तमी): 29 सितम्बर (सोमवार)     दशहरा (महाष्टमी): 30 सितम्बर (मंगलवार)     दशहरा (महानवमी): 1 अक्टूबर (बुधवार)     महर्षि वाल्मिकी जयंती: 7 अक्टूबर (मंगलवार)     करक चतुर्थी (करवा चौथ): 10 अक्टूबर (शुक्रवार)     नरक चतुर्दशी: 20 अक्टूबर (सोमवार)     गोवर्धन पूजा: 22 अक्टूबर (बुधवार)     भाई दूज: 23 अक्टूबर (गुरुवार)     प्रतिहार षष्ठी या सूर्य षष्ठी (छठ पूजा): 28 अक्टूबर (मंगलवार)     गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस: 24 नवंबर (सोमवार)     क्रिसमस की पूर्व संध्या: 24 दिसंबर (बुधवार) कब-कब मिलेंगे लॉन्‍ग वीकेंड 11 और 12 जनवरी को शनिवार व रविवार की छुट्टी है. 13 जनवरी को अवकाश ले लिया जाए तो 14 को मकर संक्रांति की छुट्टी मिल जाएगी. ऐसे में आप 11 से 14 जनवरी तक लॉन्‍ग वीकेंड पर जा सकते हैं. मार्च में 14 को होली है और 15 व 16 फरवरी को शनिवार व रविवार अवकाश है. इस तरह तीन दिन के लिए लॉन्‍ग ड्राइव पर जाया जा सकता है. इसी तरह 29 और 30 मार्च को शनिवार-रविवार है और 31 मार्च को ईद-उल-फितर की छुट्टी है. यानी तीन छुट्टियां इ‍क्‍ट्ठी हो रही है. अप्रैल में दो लॉन्‍ग वीकेंड मिलेंगे. 12,13,14 अप्रैल और 18 अप्रैल को गुड फ्राइडे और 19-20 अप्रैल को शनिवार और रविवार है. 15 अगस्त में स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के बाद 16 और 17 अगस्त को शनिवार व रविवार की छुट्टी मिल जाएगी. सितंबर में 5 तारीख को ईद ए मिलाद की छुट्टी है तो 6 और 7 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी रहेगी. Bank User इन Online सेवाओं की ले सकते है Help बैंक की छुट्टियों के दौरान कस्टमर्स ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर सकते है, क्योंकि यूपीआई (UPI), मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking), इंटरनेट बैंकिंग (Internet Banking) जैसी डिजिटल सेवाओं (Digital Banking) पर बैंक हॉलीडे का कोई असर नहीं होता है।     NET BANKING: बैंक की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए आप नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें मनी ट्रांसफर ,बिलों का भुगतान और बैलेंस चेक की सुविधा उपलब्ध होती है।     Unified Payments Interface : पैसे ट्रांसफर करने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक सुरक्षित तरीका है आपको केवल UPI ऐप जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm आदि का इस्तेमाल करना होता है।     MOBILE BANKING: स्मार्टफोन पर बैंक की मोबाइल ऐप के जरिए आप कई सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, जैसे फंड ट्रांसफर, मोबाइल रिचार्ज, यूटिलिटी बिल पेमेंट आदि।     ATM USE: पैसे निकालने, बैलेंस चेक करने और मिनी स्टेटमेंट प्राप्त करने के लिए एटीएम हमेशा उपलब्ध रहते हैं। एटीएम में कार्डलेस कैश विदड्रॉल जैसी सुविधाओं का भी उपयोग कर सकते हैं।

Railways ने निकाली बंपर भर्ती, 32 हजार से अधिक पद रिक्त, 23 जनवरी से आवेदन शुरू, जानें पात्रता, वेतन और फीस

 सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। रेलवे भर्ती बोर्ड ने ग्रुप डी लेवल-1 भर्ती की घोषणा कर दी है। इस संबंध में शॉर्ट नोटिस जारी किया गया है। ऑफिशियल पर जल्द ही डिटेल नोटिफिकेशन उपलब्ध हो सकता है। अपडेट्स के लिए उम्मीदवारों को आरआरबी के क्षेत्रीय ऑफिशियल वेबसाइट को विजिट करते रहने की सलाह दी जाती है। शॉर्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक रिक्त पदों की संख्या 32,438 है। उम्मीदवारों की नियुक्ति ट्रैफिक, इंजीनियरिंग, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और एस एंड टी विभागों में की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया प्रक्रिया 23 जनवरी 2025 से शुरू होगी। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 22 फरवरी 2025 रात 12:00 बजे से पहले फॉर्म भर पाएंगे। कौन कर सकता है आवेदन? किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान या बोर्ड से दसवीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। उनके पास एनसीवीटी द्वारा प्राप्त नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट होना चाहिए। निर्धारित आयु सीमा 1 जुलाई 2025 तक न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 36 वर्ष होनी चाहिए। सरकारी नियमों के तहत आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। चयन प्रक्रिया और वेतन उम्मीदवारों का चयन  कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट, फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट, मेडिकल या दस्तावेज सत्यापन के आधार पर होगा। लिखित परीक्षा परीक्षा में जनरल साइंस, मैथमेटिक्स, जनरल इंटेलिजेंस एंड रीजनिंग,  जनरल अवेयरनेस और करंट अफेयर्स से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रश्नों की संख्या 100 और कुल अंक 100 होंगे। परीक्षा की अवधि 90 मिनट होगी। नियुक्ति के बाद 7 सीपीसी पे मैट्रिक्स के लेवल 1  तहत 18000 रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। आवेदन फीस और प्रोसेस पीडबल्यूडी, महिला, ट्रांसजेंडर, एक्स सर्विसमैन, एससी, एसटी, अल्पसंख्यक और ईबीसी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 250 रुपए शुल्क का भुगतान करना होगा। वहीं अन्य उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये है। सबसे पहले आरआरबी के क्षेत्रीय ऑफिशियल  वेबसाइट पर जाएं। होम पेज पर सीईएन 8 /2024 के लिंक पर क्लिक करें।  ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें। उसके बाद आवेदन पत्र को भरें। सारी जानकारी सही-सही दर्ज करें। सही साइज और फॉर्मेट में दस्तावेज, हस्ताक्षर  और फोटोग्राफ अपलोड करें। शुल्क का भुगतान करें और आवेदन पत्र जमा करें। भविष्य के संदर्भ में एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंट आउट निकालकर उम्मीदवार अपने पास रख सकते हैं।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस निकालेगी ‘मैं भी हूं आंबेडकर’ पदयात्रा… शेड्यूल जारी कर बताई पूरी प्लानिंग

Congress will take out ‘Main Bhi Hoon Ambedkar’ padyatra in Madhya Pradesh… Complete planning has been released by releasing the schedule भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर टिप्पणी किए जाने के विरोध में मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस ‘मैं भी हूं आंबेडकर’ पदयात्रा निकालेगी। यह 25 से 29 दिसंबर तक चलेगी। पांच चरणों में होने वाली इस यात्रा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे सहित सभी वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। प्रत्येक जिले में यात्रा के समापन पर जनसभा भी होगी। मैं भी हूं आंबेडकर’ पदयात्रा… क्या है पूरा प्लान कब कहां होगी पदयात्रा

कुंभ मेले में डिजिटल तकनीक के साथ AI का भी इस्तेमाल किया जा रहा

प्रयागराज प्रयागराज में जनवरी 2025 से शुरू हो रहे महाकुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मेला प्रशासन तैयारियों में लगा है. इसी को लेकर उत्तर प्रदेश आपदा प्राधिकरण ने दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित किया. इसमें महाकुंभ में लगे अलग-अलग विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बुलाया गया और उनसे तैयारियों की जानकारी ली गई. इस एक्सरसाइज में बताया गया कि पहले तो बेहतर मैनेजमेंट के जरिए किस तरह से आपदा को रोकना है, लेकिन अगर आपदा की कोई स्थिति आती है तो सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बचाकर किस तरह से हिफाजत करनी है. आपदा से बचने की तैयारी की जा रही है कुंभ को लेकर अलग-अलग विभागों में एक साथ समन्वय बना कर उन्हें ट्रेनिंग देने का काम उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ से किया जा रहा है. प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी खुद ही सरकारी विभागों के साथ वॉलिंटियर्स को ट्रेनिंग देने का काम कर रहे हैं. इसमें गूगल मैप और वीडियो फिल्म के जरिए मेला क्षेत्र की हकीकत से रूबरू के बारे में बताया जा रहा है और आपदा को किस तरह से रोका जा सकता है उसकी तैयारी की जा रही है. प्रयागराज के कुम्भ मेला के लिए उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सभी विभागों को एक साथ बुलाकर टेबलटॉप एक्सरसाइज कराई गई. एक्सरसाइज में महाकुंभ से जुड़े हर विभाग के बड़े अधिकारी शामिल हुए और मेला में सेक्टर वाइज बने अधिकारियों से आपदा से निपटने के लिए उनके द्वारा की जा रही तैयारियों का जायजा लिया गया. टेबलटॉप एक्सरसाइज़ को तीन सत्र में आयोजित किया गया. पहले सत्र में मेला क्षेत्र में पैदल एवं वाहन यातायात, आवश्यक सेवाएं, अन्य व्यवस्थाएं की स्थिति पर चर्चा की गई. दूसरे सत्र में मेला क्षेत्र के बाहर जनपद प्रयागराज की मुख्य सड़कों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैन्ड इत्यादि में भीड़ प्रबंधन पर चर्चा की गई और तीसरे सत्र में मेला क्षेत्र के अंतर्गत अग्निशमन, डूबने और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम की संभावित स्थितियों पर विभागों की योजनाओं और प्रतिक्रियाओं पर चर्चा हुई. दो दिवसीय टेबल टॉप एक्सरसाइज समाप्त प्रयागराज के कुंभ मेला पुलिस लाइन मे टेबल टॉप एक्सरसाइज में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ पुलिस विभाग के साथ-साथ रेलवे,अग्निशमन विभाग के अधिकारी शामिल हुए. आपको बता दें कि कुंभ मेला 2025 के लिए अब तक की इसे सबसे बड़ी एक्सरसाइज माना जा रहा है. दो दिवसीय टेबल टॉप एक्सरसाइज समाप्त हो गई. वहीं अब कुछ दिनों बाद फील्ड पर उतरकर मार्क ड्रिल किया जाएगा. आपदा प्रबंधन विभाग किसी प्रकार से कोई लूप होल नहीं छोड़ना चाहता है. वहीं इसको लेकर बैठकों का दौर जारी है और प्रतिदिन जगह-जगह पर बैठक की जा रही है. जिससे कि अगर कोई आपदा होती है तो उसे फौरन निपटा जा सके. सुरक्षा- व्यवस्था के लिए AI तकनीक का प्रयोग महाकुंभ प्रबंधन के लिए डिजिटल तकनीक का महत्वपूर्ण उपयोग किया गया है. भीड़ प्रबंधन के लिए 2500 कैमरा, डिजिटल कम्यूनिकेशन, चैट बोट, इंटीग्रेटेड कंट्रोल और AI तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है. वहीं अब 24 दिसम्बर को मेला क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों में मॉक एक्सरसाइज़ किया जाएगा.  

महाकुम्भ: विहिप के शिविर में वेद और समरसता सम्मेलन, होंगे कई बड़े कार्यक्रम

अयोध्या  विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने अपने सभी सांगठनिक कार्यक्रम और बैठकें और सम्मेलन प्रयागराज में आयोजित कुंभ में करने का निर्णय लिया है। विहिप महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा की ओर से इस सिलसिले में विस्तृत कार्य योजना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार पूरे कुंभ भर संगठन का वहीं पर जमावड़ा रहेगा। बजरंग लाल बागड़ा की ओर से सितम्बर में ही जारी पत्र के अनुसार 19 जनवरी को मेरठ, लखनऊ, पटना क्षेत्र का मातृशक्ति सम्मेलन, 24 को केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक, अगले दिन 25 को प्रथम बेला में साध्वी सम्मेलन, द्वितीय बेला में संत सम्मेलन होगा। 27 जनवरी को युवा संत सम्मेलन, छह फरवरी को मंत्रियों एवं संगठन मंत्रियों की बैठक, सात से नौ फरवरी तक प्रन्यासी मंडल की बैठक, 10 फरवरी को विमर्श कार्यशाला, 10-11 फरवरी को विभाग मंत्री और संगठन मंत्रियों का अभ्यास वर्ग होगा। 11-12 फरवरी को बजरंग दल की अखिल भारतीय बैठक, 12 फरवरी को विभाग संगठन मंत्री अभ्यास वर्ग, 15-16 फरवरी को धर्म प्रसार अखिल भारतीय बैठक, 15-16-17 फरवरी मातृशक्ति, दुर्गा वाहिनी की अखिल भारतीय बैठक, सत्रह को धर्म प्रसार संत बैठक, 19 फरवरी को गोरक्षा अखिल भारतीय बैठक और बीस फरवरी को गोरक्षा सम्मेलन होगा। विहिप के शिविर में वेद और समरसता सम्मेलन कुंभ मेला 2025 की तैयारी को लेकर विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत की बैठक बुधवार को प्रांत कार्यालय केसर भवन में हुई। प्रांत संगठन मंत्री (पूर्वी उत्तर प्रदेश) गजेन्द्र बताया कि विहिप के शिविर में केंद्रीय बैठक, मार्गदर्शक मंडल की बैठक, संत सम्मेलन, वेद सम्मेलन, महिला सम्मेलन, गौरक्षा सम्मेलन एवं समरसता सम्मेलन का आयोजन 15 जनवरी से 23 फरवरी के बीच होगा। वेद सम्मेलन तक दो दशक बाद और समरसता सम्मेलन पहली बार होगा। प्रमुख स्नानों के अवसर पर संगठन समाज के लिए भंडारे का आयोजन करेगा और शिविर चलाएगा, जिसके लिए व्यवस्था में कार्यकर्ताओं को अनेक जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। केंद्रीय महामंत्री (संगठन) मिलिंद परांडे ने कहा कि महाकुंभ का पर्व हिंदू समाज की आस्था के प्रकटीकरण का पर्व है। इस पर्व में हिंदू समाज अपने जाति-वंश और मत-पंथ को भूलकर सभी संप्रदायों के लोग एक साथ संगम में डुबकी लगाते हैं और पूरे विश्व को समरसता का संदेश देते हैं। मेले में दुनियाभर के लोग प्रयाग की पावन धरती पर आस्था की डुबकी लगाकर आध्यात्मिक शांति के लिए प्रवास करते हैं। इतिहास में यह आयोजन हमेशा ही भव्य और दिव्य रहा है, और समाज के लोग इसमें तन, मन और धन से सहयोग करते आए हैं।    

बुंदेलखंड के 4 जिलों में अरहर की खेती का बना नया रिकॉर्ड, किसानों ने चमकाई किस्मत, GI टैग से खुलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार का रास्ता

चित्रकूट  बुंदेलखंड क्षेत्र में पैदा होने वाली अरहर की दाल को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने वाली है। इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी, जिससे उनकी आय में दोगुनी बढ़ोतरी होगी। 4 जिलों में अरहर की खेती का बना नया रिकॉर्ड बुंदेलखंड में चित्रकूटधाम मंडल के चार जिले- हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट- अरहर की दाल की पैदावार के लिए एक बड़ा केंद्र बन चुके हैं। यहां हर साल खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है। इस साल इन चार जिलों में कुल 68,453 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर की खेती की गई है, जो एक नया रिकॉर्ड है। इसमें हमीरपुर में 19,150 हेक्टेयर, महोबा में 4,376 हेक्टेयर,बांदा में 24,795 हेक्टेयर और चित्रकूट में 20,132 हेक्टेयर अरहर की खेती की गई है। कोरोना काल के बाद किसानों ने चमकाई किस्मत कोरोना महामारी के बाद से क्षेत्र के किसानों ने अरहर की खेती पर ध्यान केंद्रित किया और बेहतर उत्पादन के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की। पिछले कुछ वर्षों में इन जिलों में खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2021 में जहां कुल 52,888 हेक्टेयर में अरहर की खेती हुई थी> वहीं इस साल यह आंकड़ा 68,453 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। GI टैग से खुलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार का रास्ता उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि बुंदेलखंड की अरहर दाल को जीआई टैग दिलाने के लिए उच्च स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के तहत जीपीएस तकनीक से खेती का सर्वे भी कराया जाएगा। जीआई टैग मिलने के बाद अरहर की दाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और किसानों को दाल बेचने पर बेहतर दाम मिलेंगे। हजारों किसानों की बदलेगी किस्मत हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जिलों में 19,000 से अधिक किसान अरहर की खेती करते हैं। जीआई टैग मिलने के बाद न केवल इन किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हो सकेगा।

रातापानी टाइगर रिजर्व का प्रबंधन खुश, केवल बाघों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन भेड़िए दिखना भी अभ्यारण के लिए अच्छे संकेत

भोपाल मध्य प्रदेश का रातापानी टाइगर रिजर्व अब एक और जानवर के लिए फेमस होने वाला है. क्योंकि यहां आपको बाघों के अलावा भेड़िए भी देखने को मिलेंगे. क्योंकि अब तक यहां पहुंचे अलग-अलग पर्यटकों को भेड़िए भी दिखे थे, जिन्हें पर्यटकों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया. इस बात से  रातापानी टाइगर रिजर्व का प्रबंधन भी खुश नजर आ रहा है, क्योंकि अब तक यहां केवल बाघों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन भेड़िए दिखना भी अभ्यारण के लिए अच्छे संकेत हैं. बताया जा रहा है कि अब तक यहां पर कुल सात वुल्फ देखने को मिले हैं. मध्य प्रदेश में है सबसे ज्यादा वुल्फ दरअसल, भारत के सबसे ज्यादा वुल्फ यानि भेड़िये मध्य प्रदेश में ही पाए जाते हैं. साल 2022 में भेड़ियों की गिनती हुई थी, जिसमें पूरे देश में 3170 वुल्फ पाए गए थे, इसमें मध्य प्रदेश 772 भेड़ियों के साथ पहले स्थान पर आया था. जबकि दूसरे नंबर पर राजस्थान था. तीसरे पर गुजरात, चौथे पर महाराष्ट्र और पांचवें पर छत्तीसगढ़ शामिल था. यानि भेड़ियों का सेंटर यही इलाका था. क्योंकि इन सभी राज्यों की सीमा भी मध्य प्रदेश से लगती है. मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा भेड़िए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पन्ना टाइगर रिजर्व में दिखे थे. लेकिन अब इसमें रातापानी टाइगर रिजर्व का नाम भी जुड़ गया है, जानकरों का मानना है कि वुल्फ माइग्रेट होकर रातापानी पहुंचे हैं. 10 किलोमीटर तक जाती है आवाज वन्य प्राणी विशेषज्ञों के मुताबिक भेड़ियां ऐसा जानवर होता है, जिसकी आवाज 10 किलोमीटर तक भी सुनाई देती है. रातापानी टाइगर रिजर्व में भेड़ियों का मिलना इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह टाइगर रिजर्व की जैव विविधता के लिए अच्छा संकेत है. क्योंकि वुल्फ की संख्या तब तेजी से बढ़ती है जब उनके लिए उस इलाके में पर्याप्त मात्रा में भोजन हो, ये केवलल मांस खाता लेकिन भेड़ियां इंसानों को देखकर तुरंत ही भागता है. ये झुंड में शिकार करते हैं और अपने शिकार के लिए एक बार में 200 किलोमीटर तक चल सकते हैं. इनकी औसत आयु 17 साल तक होती है. रातापानी अभ्यारण में जंगल सफारी शुरू हो चुकी है रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद यहां पर जंगल सफारी शुरू हो चुकी है, सीएम मोहन यादव ने ही जंगल सफारी की शुरुआत की थी. जिसके बाद से लगातार यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है. राजधानी भोपाल के पास होने से यहां लोग खूब घूमने आ रहे हैं. 

30 मिनटों में इंदौर एयरपोर्ट से सीधा पहुंचेंगे महाकाल के दरबार, मोहन सरकार ने बनाया ये प्लान

इंदौर अगर आप महाकाल के भक्त हैं तो यह आपके लिए अच्छी खबर है. दरअसल, मध्य प्रदेश की मोहन सरकार इंदौर-उज्जैन के बीच नया फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे बनाने जा रही है. इसके बन जाने से इंदौर एयरपोर्ट से महाकाल मंदिर आप मात्र 30 मिनट में पहुंच जाएंगे. इंदौर के एयरपोर्ट से यह फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे सीधे महाकाल मंदिर तक जाएगी. सबसे खास बात है कि इस रूट पर कोई भी क्रॉसिंग नहीं होगी और न ही कोई यू टर्न होगा. बता दें कि इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन को कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. उज्जैन स्थित चिंतामन गणेश मंदिर से इंदौर एयरपोर्ट तक की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है. इसको दो हिस्से में बनाया जाएगा. इसमें उज्जैन सिंहस्थ बाइपास को टू लेन से 4 लेन बनाया जाना है.  20 किमी की इस सड़क के निर्माण की लागत 701 करोड़ होगी. वहीं, उज्जैन-इंदौर के बीच 48 किमी का फोर लेन ग्रीन फील्ड रोड बनेगा. इस सड़क की लागत 1370 करोड़ होगी. इस सड़क को प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है. कैबिनेट से मिली मंजूरी : बता दें कि इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन को कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। उज्जैन स्थित चिंतामन गणेश मंदिर से इंदौर एयरपोर्ट तक की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। इसको दो हिस्से में बनाया जाएगा। इसमें उज्जैन सिंहस्थ बाइपास को टू लेन से 4 लेन बनाया जाना है। 20 किमी की इस सड़क के निर्माण की लागत 701 करोड़ होगी। वहीं, उज्जैन-इंदौर के बीच 48 किमी का फोर लेन ग्रीन फील्ड रोड बनेगा। इस सड़क की लागत 1370 करोड़ होगी। इस सड़क को प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानाकारी के मुताबिक, सीएम मोहन यादव ने इसको लेकर निर्देश दे दिया है, संबंधित अधिकारियों को इस परियोजना पर तेजी से काम करने के लिए निर्देशित किया गया है, जिससे जल्द से जल्द निर्माण प्रक्रिया प्रारंभ हो सके। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नए साल 2025 में टेंडर प्रकिया पूरी हो जाएगी। इसी के साथ निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। क्या फायदा होगा : इंदौर-उज्जैन के बीच नया फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे बन जाने से यात्री इंदौर एयरपोर्ट से सिंहस्थ बायपास फोरलेन सड़क मार्ग से चलकर आधे घंटे में सीधे महाकाल मंदिर पहुंच जाएंगे। इस सड़क को पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से भी जोड़े जाने की योजना है। ऐसे में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने से क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी मददगार साबित होगी। रोजगार के अवसर बढ़ेगे : इस फोरलेन के निर्माण से जुड़े आसपास के गांवों में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, होटल, गोदाम और पेट्रोल पंप के लिए जमीन पहले से ही रिजर्व की जा रही है। इससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर बढ़ेगे। यही नहीं इंदौर-उज्जैन के बीच फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे के अलावा उज्जैन-जावरा के बीच ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोलल्ड हाईवे का भी निर्माण होने वाला है। इसके बनने से उज्जैन से दिल्ली या मुंबई का सफर आसान हो जाएगा। बताया जा रहा है कि मोहन सरकार ये सारी तैयारियां सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर कर रही है। मोहन सरकार की कोशिश 2027 तक इन्हें पूरा करने की है। जानिए क्या-क्या होगा फायदा इंदौर-उज्जैन के बीच नया फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे बन जाने से यात्री इंदौर एयरपोर्ट से सिंहस्थ बायपास फोरलेन सड़क मार्ग से चलकर आधे घंटे में सीधे महाकाल मंदिर पहुंच जाएंगे. इस सड़क को पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से भी जोड़े जाने की योजना है. ऐसे में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने से क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी मददगार साबित होगी. वहीं, इस फोरलेन के निर्माण से जुड़े आसपास के गांवों में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, होटल, गोदाम और पेट्रोल पंप के लिए जमीन पहले से ही रिजर्व की जा रही है. इससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर बढ़ेगे. यही नहीं इंदौर-उज्जैन के बीच फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे के अलावा  उज्जैन-जावरा के बीच ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोलल्ड हाईवे का भी निर्माण होने वाला है. इसके बनने से उज्जैन से दिल्ली या मुंबई का सफर आसान हो जाएगा. बताया जा रहा है कि मोहन सरकार ये सारी तैयारियां सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर कर रही है.  मोहन सरकार की कोशिश 2027 तक इन्हें पूरा करने की है.

प्रदेश में आने वाले दिनों में तेज हवाएं चलेंगी और ओले गिरने की भी संभावना

भोपाल मध्य प्रदेश में जारी कड़ाके की ठंड के बीच आने वाले कुछ दिनों में मौसम और बिगड़ सकता है। मौसम विभाग ने अगले दो तीन दिन में राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान कुछ जगहों पर ओले गिरने की भी आशंका है। स्थानीय मौसम केंद्र के अनुसार, देश के उत्तरी अंचल में बर्फबारी के चलते राजधानी भोपाल समेत संपूर्ण अंचल में एक बार न्यूनतम तापमान में फिर से गिरावट दर्ज की जाएगी। न्यूनतम तापमान अनेक हिस्सों में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। न्यूनतम तापमान में गिरावट से पिछले तीन चार दिनों से मामूली राहत महसूस की जा रही थी, लेकिन अब आने वाले दिनों में यह गिरकर फिर से 5 से 6 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में न्यूनतम तापमान अनेक हिस्सों एक डिग्री से लेकर 5 डिग्री तक दर्ज किया जा रहा था, लेकिन इसमें वृद्धि हुई और यह 7 से लेकर 13 डिग्री तक पहुंच गया। तेज हवाएं चलेंगी और ओले गिरने की भी संभावना मौसम केंद्र के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिमी हवाएं अरब सागर से नमी लेकर भी आएंगी। इस वजह से अगले दो तीन दिनों में अनेक हिस्सों में बारिश होगी और कहीं-कहीं पर ओलावृष्टि की आशंका भी जताई गई है। इसके साथ ही सुबह कोहरा छाया रहेगा। तापमान में भी गिरावट आएगी। आज राजधानी भोपाल और आसपास के हिस्सों में सुबह कोहरा दिखाई दिया और सर्द हवाओं का असर भी महसूस किया गया। भोपाल में न्यूनतम तापमान 10़ 2 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान ग्वालियर में 9.3 डिग्री रहा। सबसे कम न्यूनतम तापमान नौगांव में 6.2 डिग्री रहा। इसके अलावा पर्वतीय स्थल पचमढ़ी में यह 7.9 डिग्री रहा। फिलहाल, मध्य प्रदेश में तापमान गिरता चला जा रहा है, जिसके चलते इंदौर में ठंड बढ़ रही है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के कारण मौसम ठंडा हो चुका है, जहां लोग इस ठंड के मौसम से निजात पाने के लिए तरह-तरह की कवायद करते नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग की ओर से जताई गई संभावना पर यदि नजर डालें तो प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है, जिसमें मुख्य तौर पर ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल, इंदौर खंडवा और धार जैसे जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई जा रही है। वहीं एक बार फिर हल्की बारिश होती है तो ठंड बढ़ने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। फिलहाल, तापमान काफी कम होता चला जा रहा है, जिसके चलते ठंड बढ़ रही है, वहीं अब यदि एक बार फिर मावठा गिरता है तो तापमान में कमी दर्ज की जाएगी, और सर्द हवाओं की रफ्तार बढ़ेगी। मालवा-निमाड़ में ठंड की दस्तक ठंड के लिए अलग पहचान रखने वाले मालवा निमाड़ अंचल में भी अब गुलाबी ठंड की दस्तक हो चुकी है, जहां ठंड की दस्तक होने के बाद अब तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले दिनों में इसी तरह से तापमान में गिरावट दर्ज होने का सिलसिला जारी रहेगा, जहां इसी तरह से लगातार तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। उधर, प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में भी इसी तरह की स्थिति नजर आ रही है, जहां ठंड की दस्तक के साथ ही ठंड लगातार बढ़ रही है। क्या होता है मावठा? मध्य प्रदेश में ठंड के बीच जब बारिश होती है तो उसे मावठा या मावठे की बारिश कहा जाता है। सामान्य तौर पर मावठा ठंड के समय गिरता है, जहां दिसंबर और जनवरी में मावठे की बारिश होती है। मावठे की बारिश के बाद मध्य प्रदेश में ठंड बढ़ जाती है, जहां तापमान लगातार कम होता चला जाता है। मध्य प्रदेश के मालवांचल में मावठा शब्द बेहद लोकप्रिय है, जहां इसे ठंड में हो रही बारिश के लिए उपयोग किया जाता है। मध्यप्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है, जहां मध्यप्रदेश में भी तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो ठंड के मौसम में एक बार फिर मावठा गिरेगा, जिसके बाद ठंड बढ़ने की संभावना जताई जा रही है,  

नए साल में डिफेंस में बढ़ेगी भारत की ताकत, वायु सेना को तेजस मार्क-1ए फाइटर एयरक्राफ्ट भी मिलेगा

नई दिल्ली  नया साल स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री के लिए नई उम्मीदें भी लेकर आएगा। डिफेंस सेक्टर में लगातार आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ने की कोशिश जारी है और आर्म्ड फोर्सेस की जरूरतों पूरी करने के लिए स्वदेशी इंडस्ट्री से कई कॉन्ट्रैक्ट भी साइन हुए हैं। जहां नए साल में भी टेक्नॉलजी ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस रहेगा वहीं LAC पर चीन के साथ गतिरोध पूरी तरह खत्म करने की चुनौती भी होगी। लंबे इंतज़ार के बाद अपाचे आएगा भारतीय सेना को इस साल अटैक हेलिकॉप्टर ‘अपाचे’ मिलने की उम्मीद है। अमेरिका से आर्मी के लिए 6 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की डील हुई थी और पहला अपाचे फरवरी 2024 में मिलना था। लेकिन इंतजार काफी लंबा हो गया। यूपी के अमेठी के फैक्ट्री में बन रही एके-203 असॉल्ट राइफल भी इस साल से आर्मी को मिलना शुरू होने की उम्मीद है। आर्मी को 100 से ज्यादा मैकेनाइज्ड इंफ्रेंट्री वीइकल मिलेंगे, 155 एमएम कैलिबर की अडवांस टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) का कॉन्ट्रैक्ट नए साल में साइन हो सकता है। इसके साथ ही टोड गन सिस्टम, पिनाका एक्सटेंडेट रेंज रॉकेट का भी कॉन्ट्रैक्ट साइन होने की उम्मीद है। आर्मी को नए साल में पिनाका की नई रेजिमेंट भी मिल सकती है। शॉर्ट रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल आकाश के नए वर्जन का पहला प्रोटोटाइप मार्च तक मिलने की उम्मीद है। तेजस-मार्क1ए का इंतजार होगा खत्म एयरफोर्स को इस साल तेजस मार्क-1ए मिलने शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें पहले ही काफी देरी हो गई है। एयरफोर्स के पास 42 फाइटर स्क्वॉड्रन होनी चाहिए। लेकिन इस वक्त एयरफोर्स के पास फाइटर एयरक्राफ्ट की 31 स्क्वॉड्रन हैं। मिग-21 बाइसन की दो स्क्वॉड्रन हैं। 2025 में मिग-21 बाइसन की ये दोनों स्क्वॉड्रन फेज आउट हो जाएगी। यह चुनौती है कि कैसे घटती स्क्वॉड्रन में दोनों मोर्चों के लिए खुद को तैयार रखना है। एयरफोर्स को इस साल एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 की बाकी दो यूनिट मिलने की भी उम्मीद है। इस साल एयरफोर्स को अपने फाइटर जेट के लिए ईस्टर्न लद्दाख में न्योमा एयरफील्ड भी मिल जाएगा। मिलेगी तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन नेवी में इस साल तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन कमिशन होने की उम्मीद है। तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन SSBN अरिधमान के अभी समंदर में ट्रायल चल रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि 2025 में ये नेवी में कमिशन होकर स्ट्रैटजिक फोर्सेस कमांड का हिस्सा बन जाएगी। भारत के पास अभी दो न्यूक्लियर सबमरीन (SSBN) ऑपरेशनल हैं। नेवी को 2025 में प्रोजेक्ट-15बी का चौथा और आखिरी डिस्ट्रॉयर- ‘सूरत’ भी मिल जाएगा। साथ ही कलवरी क्लास की एक और सबमरीन ‘वागशीर’ मिलेगी। नीलगिरी क्लास का पहला गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘नीलगिरी’ साल 2025 में नेवी को मिलेगा। इंडियन ओशन रीजन में जिस तरह चीन अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, उस चुनौती से नए साल में भी नेवी को निपटना होगा।

भारतवंशी के कायल हुए ट्रंप, श्रीराम कृष्णन को मिली बड़ी जिम्मेदारी?

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है, उन्होंने बताया कि भारतीय मूल के अमेरिकी एंटरप्रेन्योर और लेखक श्रीराम कृष्णन Artificial Intelligence (AI) को लेकर बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है. साथ ही वह अमेरिकी लीडरशिप में भी अहम भूमिका अदा करेंगे.   श्रीराम कृष्णन AI को लेकर सीनियम व्हाइट हाउस पॉलिसी एडवाइजर की कमान संभालेंगे. श्रीराम कृष्णन पहले भी कई बड़ी कंपनियों की टीम में अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. इसमें Microsoft, Twitter, Yahoo!, Facebook और Snap आदि के नाम शामिल हैं. ट्रंप ने बताया है कि वह David Sacks के साथ काम करेंगे, जो White House AI & Crypto Czar होंगे. अमेरिकी लीडरशिप पर भी देना होगा ध्यान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, श्रीराम कृष्णन को इस जिम्मेदारी के साथ अमेरिकी लीडरशिप में लगातार ध्यान लगाएंगे. साथ ही AI पॉलिसी को आकार देने और उसे लागू करने में भी मदद करेंगे. श्रीराम ने माइक्रोसॉफ्ट में अपना करियर Windows Azure के संस्थापक सदस्य के रूप में शुरू किया. नियुक्ति पर श्रीराम कृष्णन ने खुशी जाहिर की श्रीराम कृष्णन ने इस नियुक्ति पर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा, मैं अपने देश की सेवा करने और डेविड के साथ मिलकर काम करते हुए AI में लगातार अमेरिकी लीडरशिप को शामिल करने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं. भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय ने स्वागत किया बताते चलें कि कृष्णन की नियुक्ति का भारतीय अमेरिकी समुदाय ने स्वागत किया. इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा कि श्रीराम कृष्णन को हार्दिक बधाई देते हैं और खुशी है कि उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के साइंस और टेक्नोलॉजी पॉलिसी ऑफिस में वरिष्ठ नीति सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है. कौन हैं श्रीराम कृष्णन? श्रीराम कृष्णन का जन्म चेन्नई में हुआ था। उन्होंने तमिलनाडु के कांचीपुरम के कट्टनकुलथुर में एसआरएम इंजीनियरिंग कॉलेज से सूचना प्रौद्योगिकी में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। वह 21 साल की उम्र में 2005 में अमेरिका चले गए। उनके पिता बीमा में काम करते थे। जबकि उनकी मां एक गृहिणी थीं। कृष्णन इससे पहले ‘माइक्रोसॉफ्ट’, ‘ट्विटर (अब X)’, ‘याहू’, ‘फेसबुक’ और ‘स्नैप’ में ‘प्रोडक्ट टीमों’ का नेतृत्व कर चुके हैं। वह डेविड ओ. साक्स के साथ काम करेंगे। ट्रंप ने डेविड को ‘व्हाइट हाउस एआई एंड क्रिप्टो जार’ नामित किया है। कृष्णन ने तमिलनाडु कट्टनकुलथुर में एसआरएम वल्लियमई इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई की। उन्होंने अपना करियर माइक्रोसॉफ्ट से शुरू किया, जहां उन्होंने Windows Azure के विकास में योगदान दिया। इसके एपीआई और सेवाओं पर काम किया। वह प्रोग्रामिंग विंडोज एज्योर फॉर ओ’रेली (Programming Windows Azure for O’Reilly) नामक पुस्तक के लेखक हैं। कृष्णन 2013 में फेसबुक से जुड़े, जहां उन्होंने कंपनी के मोबाइल ऐप डाउनलोड विज्ञापन व्यवसाय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने स्नैप में भी काम किया। कृष्णन ने 2019 तक ट्विटर (अब X) में काम किया, जहां उन्होंने प्लेटफॉर्म के पुनर्गठन पर एलॉन मस्क के साथ सहयोग किया। कृष्णन ने 2022 में अधिग्रहण के बाद ट्विटर (अब एक्स) को नया रूप देने के लिए मस्क के साथ काम किया। वह 2021 में आंद्रेसेन होरोविट्ज (a16z) में एक सामान्य भागीदार बन गए। बाद में 2023 में उन्होंने लंदन में फर्म के पहले अंतरराष्ट्रीय कार्यालय का नेतृत्व किया। उद्यमी OpenAI’s के ChatGPT और बड़े इंटरनेट प्लेटफॉर्म जैसे AI-संचालित मॉडल के बीच चुनौतियों को हल करने के लिए टेक्नोलॉजी का लाभ उठाने के भी हिमायती रहे हैं। उन्हें 2021 में पॉडकास्ट ‘द आरती एंड श्रीराम शो’ के होस्ट के रूप में भी पहचान मिली। कृष्णन अपनी पत्नी आरती राममूर्ति के साथ इस पर काम करते हैं।    

रसोईघर में सब्जियों के साथ जहर न आ जाए, हरी-भरी सब्जियां भी नहीं हैं सुरक्षित, कृषि वैज्ञानिको ने चेताया

Poison should not come with vegetables in the kitchen, even green vegetables are not safe, agricultural scientists warned. भोपाल ! ठंड बढ़ते ही हरी साग-सब्जियां बाजार में नजर आने लगती हैं. दावा किया जाता है कि इन हरी सब्जियों को खाना काफी लाभदायक होता है क्योंकि इनमें अनेक विटामिन और पोषक तत्वों की भरमार होती है, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो हरी सब्जियों पर आंख बंद करके भरोसा करना खतरनाक हो सकता है. दरअसल, इन सब्जियों को कीड़ों से बचाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने को लेकर रासायनिक कीटनाशक व दवाइयां का इस्तेमाल किया जाता है, जिनके ज्यादा उपयोग से ये सब्जियां जहरीली हो जाती हैं. सब्जियों से हो सकता है कैंसर वर्तमान समय में अधिक उत्पादन और जल्द कीटनाशकों से उपचार के लिए अधिकांश किसान रासायनिक सिस्टमिक कीटनाशक दवाइयां का उपयोग करते हैं. लेकिन यह दवाइयां इतनी खतरनाक होती हैं कि इनका प्रभाव सब्जियों से कभी समाप्त नहीं होता. ये अगर इंसानों के शरीर में प्रवेश कर जाएं तो खतरनाक बीमारियां का कारण बन जाती हैं. शुरुआती स्तर पर इनसे शुगर, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां होती है लेकिन खतरनाक केमिकल्स के प्रभाव से कैंसर तक हो सकता है. नहीं खत्म होता केमिकल्स का असर कृषि वैज्ञानिक विजय कुमार पराड़कर ने बताया, ” आज के वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है पर अभी भी अधिकांश किसान रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कर खेती करते हैं. परंतु जब वे खेतों में कीटनाशक का उपयोग करते हैं तो उन कीटनाशक दवाइयां पर लिखे निर्देशों को कई बार अनदेखा कर देते हैं. उनमें साफ लिखा हुआ होता है कि जब सब्जियों का पौधा फूल या प्राथमिक स्थिति में होता है, तब उसका उपयोग नियमित मात्रा में करना चाहिए और सब्जी तोड़ने या बाजार में भेजने के लगभग 10 या 7 दिन पूर्व इनका छिड़काव पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए, लेकिन कुछ ऐसे सिस्टमिक रासायनिक कीटनाशक होते हैं जिनका असर खत्म ही नहीं होता.” प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा रासायनिक कीटनाशकों व उत्पाद दवाओं के इस्तेमाल से की जाने वाली खेती की जगह अब प्राकृतिक खेती को जोर दिया जाने लगा है. ऐसी खेती से पैदा हुई सब्जियां, फसलें और फल काफी सुरक्षित माने जाते हैं. प्राकृतिक खेती के लिए लोगों में जागरूकता भी आ रही है, जिसमें पुराने जमाने में इस्तेमाल किए जाने वाले प्राकृति संसाधन व कीटनाशक जैसे गोमूत्र, कड़वी नीम,राख आदि का उपयोग किया जाता है. इससे फसलों को बीमरियों से बचाने के साथ इंसानों को भी भयानक बीमारियों से बचाया जा सकता है.

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